भूमिका
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम ले कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद त है वी र रीडिंग फ्रॉम द कॉस्मस द मैक्रो कजम ज्ञान योग के ऊपर में जो सीरीज है उसमें से यह प्रवचन लिया गया है और इसमें स्वामी जी कहते हैं कि किस तरह से जीवन चक्रा का है एक वर्तुल में घूमता है सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकिल चलती ही रहती है और इस साइकिल इसका डिस्कवरी भारत में हुआ था और विदेश में एक सीधी लाइन में जीवन चलता है इस तरह का उनका एक आईडिया था साथ में स्वामी जी कहते हैं कि शुरुआत की स्थिति और अंत की स्थिति सूक्ष्म में से स्थूल प्रकट होता और स्थूल फिर सूक्ष्म में क्षय हो जाता है सूक्ष्म में विलीन हो जाता है या सूक्ष्म में विनाश हो जाता है तो सूक्ष्म से स्थूल की सृष्टि स्थूल का फिर से सूक्ष्म में विनाश यह है हमारा विश्व ब्रह्मांड इस साइकिल के ऊपर चलता है साथ में ही स्वामी जी ने कहा था कि यह समझाने के बाद में स्वामी जी ने कहा इन संस्कृत दिस इज कॉल्ड अ कल्प और अ साइकल यह सृष्टि स्थिति और प्रलय का एक चक्र जो है इसको कल्प कहते हैं या तो फिर साइकल कहते हैं स्वामी जी कहते हैं नेक्स्ट कम्स
शून्य में सृष्टि नहीं हो सकती. स्थूल और सूक्ष्म की चक्राकार गति
अ वेरी इंपोर्टेंट क्वेश्चन स्पेशली फॉर मॉडर्न टाइम्स इसके बाद में आधुनिक विश्व में जो हम लोग रह रहे हैं हमारे लिए एक बड़ा ही इंपोर्टेंट प्रश्न उपस्थित होता है वी सी दैट द फाइनर फॉर्म्स डेवलप स्लोली एंड स्लोली एंड ग्रेज बिकम ग्रोसर एंड ग्रोसर धीरे-धीरे सूक्ष्म में से स्थूल का जन्म उत्पत्ति सृष्टि हो यह हम लोग देखते हैं वी हैव सीन दैट द कॉज इ द सेम एस द इफेक्ट जो स्थूल स्वरूप है वह सूक्ष्म स्वरूप के जैसा ही है एंड द इफेक्ट इज ओनली द कॉज इन अनदर फॉर्म इफेक्ट यानी कि स्थूल स्वरूप जिस सूक्ष्म स्वरूप में से प्र गटा है उसी का एक रूपांतरण मात्र है देयर फॉर दिस होल यूनिवर्स कैन नॉट बी प्रोड्यूस आउट ऑफ नथिंग इसका अर्थ है शून्य में से सृष्टि की रचना नहीं हो सकती नथिंग कम्स विदाउट अ कोज सूक्ष्म स्वरूप जो अंडरलाइन रहने से किसी स्थूल स्वरूप की रचना ही नहीं हो सकती बीज नहीं है तो वटवृक्ष हो ही नहीं सकता एंड द कॉज इ द इफेक्ट इन अनदर फॉर्म कोज अर्थात की स्थूल स्वरूप इफेक्ट अर्थात की सूक्ष्म स्वरूप का एक दूसरा हिस्सा है एक दूसरा स्वरूप है आउट ऑफ व्हाट हैज दिस यूनिवर्स बीन प्रोड्यूस देन तो स्वामी जी पूछते हैं कि यह विश्व ब्रह्मांड की सृष्टि किसमें से हुई है फ्रॉम अ प्रोसीडिंग फाइन यूनिवर्स किसमें से हुई है एक सूक्ष्म यूनिवर्स सूक्ष्म ब्रह्मांड था उसमें से यह स्थूल ब्रह्मांड की सृष्टि हुई है आउट ऑफ व्ट सस बीन मेड आउट ऑफ व्ट हैज मैन बीन प्रोड्यूस मनुष्य का जन्म किसम से हुआ है आउट ऑफ द सीड बीज में से हुआ है द होल ऑफ द ट्री वास देयर इन द सीड जो वटवृक्ष था वो उस छोटे से बीज में उपस्थित था इट कम्स आउट एंड बिकम मेनिफेस्ट इस बीज में से वृक्ष है वह प्रकट होता है वह उसमें से बाहर निकलता है सो द होल ऑफ दिस यूनिवर्स हैज बीन क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर में वर्तमान थी उसमें से ही स्थूल स्वरूप प्रकट हुआ है आज
आधुनिक बायोलॉजी की दृष्टि से DNA और genetics
बायोलॉजी में इस कांसेप्ट को हम कहेंगे डीएनए जब पुरुष मां और पिताजी दोनों के डीएनए का आधा-आधा हिस्सा इकट्ठा होता है और जब बच्चे में परिणत होता है या तो फिर क्रोमोजोम पेयर्स कहते हैं यदि टेक्निकल लैंग्वेज यूज करेंगे तो तो उस क्रोमोसोमल पेर में से जो डीएनए बनता है उस डीएनए में से ब बच्चे का जन्म होता है तो बच्चा सूक्ष्म रूप से यह डीएनए में उपस्थित था ही था बस डीएनए का परिणत स्वरूप यह बच्चा है डीएनए में ना कि कितना 3 बिलियन यानी कि 300 करोड़ पेर होती है ए सटी ए ऐसा करके वो जो डीएनए के वो जो कंसीट एलिमेंट्स होते हैं वो पेर बनाते हैं वह सीढ़ी की तरह आपने डीएनए जदी देखा होगा तो किस तरह से वह एक सीढ़ी होती है फिर सीढ़ी को ट्विस्ट करते हैं सीढ़ी को थोड़ा सा घुमाते हैं तब डीएनए का आकार प्रकट होता है तो इस डीएनए में से पूरा बच्चे का जन्म होता है अभी बच्चा जब जन्म लेता है कोई मनुष्य होता है तो उसके बाल सुनहरे है गोल्डन हेयर है जैसे कि यूरोप में होते हैं ना कि वाइट हेयर है जो कि कभी स्कैंडिनेवियन कंट्रीज में होते हैं ना कि काले हैं वो वो डीएनए में लिखा होता है उसकी आंखों का कलर ब्लू है ना कि ब्राउन है ना कि ब्लैक है ना कि ग्रीन है वो भी डीएनए में होता है उसका इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी कितना होगा उसका ब्रेन का साइज कितना होगा वो भी डीएनए में है यदि जेनेटिक डिफेक्ट है तो बच्चे में बचपन से ही कोई जेनेटिक डिसीज होगा कि नहीं होगा वो भी डीएनए में लिखा होता है यदि माताजी और पिताजी को हार्ट डिसीज का संभाव ना होता है या तो फिर हार्ट डिसीज होता है तो वह बच्चे ने बच्चे में डीएनए के भीतर में हार्ट डिफेक्ट प्रकट होता है और बचपन से ही उसके भीतर में यह हार्ट का प्रॉब्लम दिखता है तो कोई भी बच्चा उसका उसका हाइट कितना होगा उसका मस्कुलर बोन मास कितना होगा उसके चमड़ी का कलर क्या होगा स्किन कलर क्या होगा काला होगा ना कि हमारी तरह ब्राउन होगा ना कि यूरोपियन की तरह सफेद होगा यह सब कुछ हमारा लिवर हमारा किडनी यह सब कुछ हमारा डीएनए डिटरमाइंड करता है और आजकल यह क्रिस्पर बोलकर के एक टेक्नोलॉजी आई है तो उसमें क्या होता है जब डीएनए जब बच्चे के भीतर में प्रवेश होता है मतलब जो डीएनए मां के गर्भ में जो प्रवेश होता है उसको आप एडिट कर सकते हैं कोई मां कहती है कोई पेरेंट्स कहते है कि मुझे इस तरह का लड़का चाहिए जो कि गोरा हो उसके बाल जो है वह एकदम काले हो उसकी आंखें ब्लू हो उसका ब्रेन डेवलपमेंट बड़ा ही अच्छा हो बड़ा ही इंटेलिजेंट हो और बड़ा ही दिखने में सुंदर हो और मुझे लड़का चाहिए लड़की नहीं चाहिए ऐसा करके मैं अपने बच्चे को यदि डिजाइन करना चाहूं तो यह क्रिस्पर टेक्नोलॉजी के द्वारा जीन को एडिट करके आपको जिस तरह का बच्चा चाहिए उस तरह के ब बच्चे को आप जन्म दे सकते हैं टेक्नोलॉजी यहां तक डेवलप हो चुकी है किंतु जो अंडरलाइन आइडिया है व स्वामी जी के समय में शायद इतना क्लियर नहीं था वह मेंडले ने जब वह एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया तब कहीं हमको यह पता चलना शुरू हुआ कि किस तरह से जींस जो है पेरेंट्स में से बच्चे में जाते हैं तो
स्वामी विवेकानन्द की आधुनिक विज्ञान की समझ
किंतु स्वामी जी के समय यह इवोल्यूशन का आईडिया या तो फिर यह जेनेटिक ट्रांस माइग्रेशन यह सब आईडियाज शायद इतने क्लियर नहीं थे किंतु स्वामी जी का जो कांसेप्ट है वह अपनी वेदांत और हिंदू शास्त्र की उसके ऊपर में वह आधारित है बोलकर के स्वामी जी मॉडर्न साइंस में से कितना फटफट करके एसेंस ग्रस्प कर लेते हैं आज का मॉडर्न साइंस जद हम पढ़ने को जाएंगे तो आपको बहुत सारा कुछ ऑप्शंस देगा साइंटिस्ट भी कंफर्म नहीं है कि जैसे कि यह लोग कहते हैं कि ये जो ब्रह्मांड है उसमें से 4 पर 4 या 5 प्र जो मैटर और एनर्जी है उसको हम देख सकते हैं बाकी का 90 टू 95 पर ब्रह्मांड है वह डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का बना हुआ है सोच लीजिए 45 परसेंटेज तो क्या हुआ कुछ नहीं हुआ अभी आज से 30 40 साल पहले साइंटिस्ट सोचते थे कि यह रिलेटिविटी और यह ग्रेविटी दोनों की थिरी के माध्यम उन्होंने ब्रह्मांड को समझ लिया है अभी ब्रह्मांड में समझने के लिए और कुछ बचा नहीं है ज्यादा किंतु उसी के बाद में ही एक ऐसी डिस्कवरी होती है जो विजिबल मैटर और विजिबल एनर्जी है ये सिर्फ 4 से 5 पर हिस्सा है ब्रह्मांड का बाकी का 90 टू 95 पर डार्क एनर्जी डार्क मैटर जो क्या है किसी को नहीं पता किंतु हां इसके बारे में थिरी है कोई कहता है न्यूट्रिनोज है कोई कहता है कि यह ब्लैक होल है कोई क्या कहता है कोई कुछ कहता है तो किंतु यदि जिसको आज के समय में हमारे हिंदू शास्त्र के बहुत ही अच्छा स्टडी हो तो वह जो डिफरेंट डिफरेंट थिरी जो होती है उसमें सही वाली कौन सी है फट करके वो इंटूटिव समझ लेगा क्यों क्योंकि वेदांतिका नो मर्स को धीरे-धीरे करके वेदांत की ओर बढ़ना ही बढ़ना है तो स्वामी जी जिस तरह से उस समय में वर्तमान बहुत सारी थिरी में से असली थिरी या तो राइट साइंस क्या है वह जिस तरह से पकड़ लेते थे इससे हमको समझ में आता है कि हमारे हिंदू शास्त्र का स्टडी और अनुभूति सिर्फ स्टडी नहीं यह सब चीजों में अनुभूति भी चाहिए तो यह दोनों स्वामी जी का कितना
आधुनिक बायोलॉजी की दृष्टि से DNA और genetics
स्ट्रांग था तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि जिस तरह से एक डीएनए और तो शब्द आज का है हम लोग यूज कर रहे हैं कि डीएनए में से बच्चा प्रकट होता है बच्चा फिर जब अपने बच्चे को जन्म देता है तो उसके भीतर में से डीएनए उस बच्चे में जाता है उसके उसका जो लड़का होने वाला है उसमें तो यह डीएनए में से मनुष्य का बनना और मनुष्य फिर अपने डीएनए को दूसरे डीएनए को जन्म देना तो यह साइकिल चलती रहेगी किंतु समझना है कि बच्चे का जो कोई भी कैरेक्टरिस्टिक है सब कुछ उस डीएनए में वर्तमान है यह एक दूसरा कांसेप्ट जो अपने हिंदू शास्त्र में है जो कि मॉडर्न साइंस इसको एक्सेप्ट करता है तो बच्चे के जितने भी कैरेक्टरिस्टिक है डीएनए में है तो यही लॉजिक लगा कर के यह विश्व ब्रह्मांड यूनिवर्स कॉस्मो इसके भीतर में जो कुछ भी देखे उसका डीएनए व सूक्ष्म रूप रूप से वर्तमान था और उसी डीएनए में से ये कॉस्मिक डीएनए में से यह कॉस्मोजर हुआ है जैसे कि बच्चे के पिताजी और माताजी के डीएनए में से बच्चे का जन्म होता है तो ऐसे कॉस्मिक डीएनए में से ये कॉस्मोजर होता है कॉस्मोजर पेड़ या तो फिर पक्षी ये सब का जो स्वरूप है उनकी जो कैरेक्टरिस्टिक है वो उनके डीएनए में वर्तमान होना ही चाहिए जो डीएनए में है वही वह बच्चे में आएगा जो उसमें नहीं है वह बच्चे में नहीं आएगा
कहानी - हाथों की रेखा को बदलने की ताकत
इसके रिलेटेड एक सुंदर कहानी भी है मैं भूल गया किनकी है भगत सिंह की है कि किसकी है वो किसी ने कहा कि आपके वो जो उनका हाथ देख कर के कहा कि आपके हाथ में पढ़ाई या तो किसी और किसी चीज का यह रेखा ही नहीं है ज्योतिष शास्त्र की गणना करके उन्होंने कहा किसी ज्योतिषी ने इस लड़के को जो कि बाद में बड़ा ही प्रख्यात हुआ मैं उसका नाम भूल गया और ज्योतिष ने उसको क्या कहा था वह भी भूल गया क्या कि आपकी हाथ में पढ़ाई की रेखा नहीं है ना कि ऐसा कुछ कहा तो यह बच्चे ने क्या किया एक यंग मैन ने एक चाकू लिया और अपने हाथ में वो वो बोला कि कहां पे उसकी रेखा होनी चाहिए तो ज्योतिष्य ने कहा यहां पे वो रेखा होनी चाहिए तो चाकू लेकर के अपने हाथ में उसने रेखा बना दी तो ये भी एक हमको याद रखना है जब हम इस तरह से कुछ पढ़ते हैं कि डीएनए में से ही हमारी बुद्धि हमारी शक्ति हमारा सौंदर्य या जो कुछ भी हम जिसको कि चाहते हैं वो डीएमएन डीएनए में से ही प्रकट होता है यदि हम ऐसा सुनते हैं तो यह भी साथ में ख्याल रखना है कि मनुष्य का जीवन मनुष्य का डेस्टिनी यह मनुष्य के ही हाथ में है अदर वाइज गरीब बच्चों गरीब पिताजी के लड़का वह कभी भी अमीर नहीं होगा उसके पिताजी का डीएनए गरीब है तो बच्चे का डीएनए भी गरीब रहेगा कि किंतु हम तो देखते हैं कि होता है कई बार पूरा उल्टा होता है आजकल खास करके कि यह व को रिक्शा चला रहा है ना कि यह क्या है उसका लड़का मेहनत करके बोर्ड की एग्जाम में वह रैंक लेकर के आ जाता है ऐसा आजकल हम देखते हैं तो हमेशा ख्याल रखना है कि फिजिकल कैरेक्टरिस्टिक है वह डीएनए डिटरमाइंड करता है किंतु अपना माइंड जो है अपना माइंड अपने हाथ में है मैं कल ही मैं किसी के साथ बात कर रहा था तो हम एक लड़के को पहचानता हूं मैं वो लड़के को कोई फिजिकल डिफॉर्मिंग है कोई फिजिकल प्रॉब्लम है उसके साथ में बचपन से ही है वो जेनेटिक डिफेक्ट है तो उसका हाइट भी बड़ा कम है और दिखने में भी थोड़ा सा कुरूप जैसा दिखता है तो वो फिजिकल डिफेक्ट जेनेटिक डिफेक्ट होने से अब क्या कर लेगा लड़का वो तो उसी के साथ में जन्म लिया है तो वो इस तरह से उसका जन्म हुआ हम लोग सोचेंगे कि अरे यह लड़का तो बड़ा होकर के कुछ हो ही नहीं पाएगा यह क्या करेगा बेचारा हम लोग इतने स्वस्थ सबल है फिर भी हमको जीवन में कुछ पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है तो यह लड़का बेचारा क्या कर लेगा व जेनेटिक डिफेक्ट के साथ में इसका जन्म हुआ है किंतु कल मुझे उसका न्यूज मिला मैंने उसको मैंने किसी को पूछा कि अरे वह लड़का जिसको कि मैं बचपन में पहचानता था और उसकी तो हम बड़ी हंसी मजाक उड़ाते करते थे बच्चे लोग क्या होते हैं ना क्रूअल होते हैं वो उनको पता नहीं चल कि इस तरह से बोलने से दूसरों को कष्ट हो सकता है व हम बड़े होकर के यह सब चीजें समझते हैं किंतु बच्चे होते हैं तब शायद इतना यह क्लियर नहीं होता है तो उसके मुंह पर तो हम कभी कुछ नहीं बोलते थे किंतु पीछे पीछे से हम लोग हंसी मजाक करते थे क अरे अरे देखो यह कैसा है तो मैंने कल किसी को पूछा कि अरे वह लड़का क्या कर रहा है तो मुझे उत्तर क्या मिला पता है अरे वो लड़का उसने कुछ डीफार्म वगैरह कुछ करके मने एम फार्म मने मास्टर्स डिग्री उसके पास में है और अभी वह आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का बहुत बड़ा फार्म चला रहा है और लखपति बन गया है उसके पास में कितनी ही गाड़ियां है कितने ही उसके अंडर में व कितने ही लोग काम करते हैं जड़ी बूटियों का फार्म है और आजकल तो जड़ी बूटियों का जमाना है वो आयुष वगैरह गवर्नमेंट के क्या-क्या प्रोजेक्ट है ये अश्वगंधा वगैरह जो सब जड़ी बूटियों को अभी गवर्नमेंट खुद अभी प्रमोट कर रहा है तो उसका फार्म उसकी जो प्रोडक्ट्स है जड़ी बूटियां इतनी चलती है इतनी चलती है कि उसके पास में थोड़ा सा भी टाइम नहीं और कितना धनपति बन गया है मैंने कहा अरे ये ऐसा लड़का ऐसा हो गया मतलब सोच करके देखिए कि जेनेटिक डिफेक्ट के बावजूद उसने जीवन में जो संघर्ष किया और जो सक्सेस प्राप्त की वो कितनी ग्रेट है मैंने सही में दूसरों के लिए सीखने की मैं खुद मुझे नहीं लगता कि मेरे साथ में यदि इस तरह का एक क्रूर मजाक ईश्वर ने किया होता कि बचपन के साथ जन्म के साथ में ही ऐसा कोई डिफेक्ट दे दिया कि लोग मेरी मजाक उड़ाएंगे और फिर मैं जीवन में ज्यादा कुछ प्राप्त भी नहीं कर पाऊंगा तो मेरे साथ में यदि ऐसा पहले से ही ठसा के रख देते कि अरे तुम कुरूप हो तुम्हारा तो कुछ भविष्य नहीं है तो मैं तो निराश होकर के बैठ जाऊंगा और कुछ कर भी नहीं पाऊंगा बड़े होकर के किंतु यह लड़के ने मास्टर्स डिग्री ले ली और आज इतना बड़ा फार्म चला रहा है कि इतना सक्सेसफुल है तो देखिए कि एक है विल पावर जो कि अपने हाथ में है और एक है अपना डीएनए जो कि अपने हाथ में नहीं है तो यह जब सब पढ़ते हैं तो उसका वो जो बाकी का जो है सिमिलर आईडिया उसको भी क्लियर करके रखना है कि डीएनए कितना भी डिफेक्टिव हो विल पावर इज ऑलवेज अंडर अवर कंट्रोल हम विल पावर से कुछ भी इस जीवन में प्राप्त कर सकते हैं
Involution to evolution, ईश्वर में से सृष्टि और सृष्टि में से ईश्वर
तो आगे स्वामी जी कहते हैं नाउ वी फाइंड दैट द फाइन फॉर्म स्लोली कम आउट एंड बिकम ग्रोसर एंड ग्रोसर अंटच्ड एंड व्हेन दे रीच देर लिमिट दे गो बैक फर्द एंड फर्द बिकमिंग फाइनर एंड फाइनर अगेन तो यह पूरा एनालिसिस करके हम यह कंक्लूजन निकाल सकते हैं यह सूक्ष्म स्वरूप या तो डीएनए उसमें से स्थूल स्वरूप की सट होती है मनुष्य हो वटवृक्ष हो ना कि विश्व ब्रह्मांड हो धीरे-धीरे डेवलप करके उसका स्थूल स्वरूप बढ़ता ही जाता है बढ़ता ही जाता है एक समय तक बढ़ता है वो फुल मैच्योरिटी पूर्ण यवन प्राप्त करता है फिर वहां से उसका क्षय होना शुरू होता है किंतु क्षय होने के साथ में ही वह अपने नए डीएनए को जन्म देगा एक नए सूक्ष्म स्वरूप को जन्म देगा और मनुष्य का जिस तरह से होता है उसका शरीर का मृत्यु हो जाएगा किंतु विश्व ब्रह्मांड के साथ में होता है कि वह सूक्ष्म स्वरूप में विलीन हो जाएगा तो सूक्ष्म स्वरूप डीएनए में से स्थूल स्वरूप स्थूल स्वरूप अपनी मैच्योरिटी के अनुसार डेवलप होगा और अपना समय समाप्त होने के बाद में क्षय होना बुढ़ापे की ओर जाना शुरू हो जाएगा और सूक्ष्म स्वरूप में मिलिन हो जाएगा विलीन हो जाएगा दिस कमिंग आउट ऑफ द फाइन एंड बिकमिंग ग्रोस सिंपली चेंजिंग द अरेंजमेंट्स ऑफ हि पार्ट्स एज इट वेर इज व्ट इन मॉडर्न टाइम्स कॉल्ड इवोल्यूशन सूक्ष्म में स्थूल का स्थूल की सूक्ष्म में से परिणति इसको आज के मॉडर्न युग में इवोल्यूशन कहते हैं सूक्ष्म का स्वरूप परिवर्तन किया और स्थूल प्रकट हुआ यह हो गया इवोल्यूशन दिस इज वेरी ट्रू परफेक्टली ट्रू वी सी इट इन अवर लाइव्स यह आईडिया सही है हमने अपने आसपास के जीवन में इसको ऑब्जर्व भी किया है इसको परिलक्षित भी किया है नो रेशनल मैन कैन पॉसिबली कोरल विद दिस इवोल्यूशनिस्ट जिस भीतर जिस मनुष्य के भीतर में थोड़ी सी भी सोचने की बुद्धि है विचारने की बुद्धि है वह यह आजकल के इवोल्यूशन समझाने वाले वैज्ञानिकों के साथ में कभी भी झगड़ा नहीं करेगा हमेशा उसके साथ में एग्रीमेंट में रहेगा बट वी हैव टू लर्न वन थिंग मोर किंतु स्वामी जी कहते हैं इवोल्यूशन जो लोग सिखाते हैं आज की मॉडर्न थिरी ऑफ इवोल्यूशन है उसमें हमको एक और स्टेप आगे बढ़ कर के और कुछ सोचना है क्या वी हैव टू गो वन स्टेप फर्द एंड व्ट इज ट हमको एक स्टेप इवोल्यूशन की थिरी से और आगे जाना है और वह एक स्टेप क्या है दैट एवरी इवोल्यूशन इज प्रेसीडेड बाय एन इवोल्यूशन प्रत्येक इवोल्यूशन है उसके आगे में एक इवोल्यूशन हुआ था इवोल्यूशन क्या है जैसे इवोल्यूशन है सूक्ष्म में से स्थूल में जाना डीएनए में से बच्चे का जन्म होना तो इवोल्यूशन रिवर्स है बच्चे से डीएनए बनना स्थूल से सूक्ष्म होना विश्व ब्रह्मांड का अपने बीज रूप में वापस चले जाना तो पहले तो स्थूल में से सूक्ष्म होता है बच्चे में से डीएनए प्र एक मनुष्य में से उसका डीएनए प्रकट होता है यह हो गया इवोल्यूशन फिर इस डीएनए में से बच्चा प्रकट होता है यह हो गया इवोल्यूशन द सीड इज द फादर ऑफ द ट्री बट अनदर ट्री हैज इट सेल्फ अनदर ट्री व इट सेल्फ द फादर ऑफ द सीड बीज वटवृक्ष का पिताजी है बीज वटवृक्ष के पिता है किंतु बीज का पिता बीज का फादर एक दूसरा वटवृक्ष है द सीड इज द फाइन फम आउट ऑफ चच द बिग ट्री कम्स एंड अनदर बिग ट्री वास द फम वि इ द च इज इवॉल्वड इन ट सीड बीच में से स्थूल वृक्ष बनता है किंतु बीच के भीतर में एक स्थूल वृक्ष सूक्ष्म रूप से ऑलरेडी वर्तमान है इवोल्यूशन होकर के बीज बना है इवोल्यूशन होकर के बीज में से पेड़ बनता है द होल ऑफ दिस यूनिवर्स वाज प्रेजेंट इन द कॉस्मिक फाइन यूनिवर्स यह पूरा विश्व ब्रह्मांड जिस जिस सूक्ष्म रूप में से विश्व ब्रह्मांड प्रकट हुआ है उसके भीतर में सूक्ष्म रूप से वर्तमान था आज का मॉडर्न साइंस क्या कहता है यदि बिग बैंग थिरी कहा जाए कि एक प्रचंड विस्फोट हुआ जिसमें से टाइम स्पेस मैटर और एनर्जी स्टार्ट हुए तो यह बिग बैंग किसमें से हुआ तो आज का मॉडर्न साइंस इसका प्रोबेबिलिस्टिक आंसर दे सकता है कोई कंफर्म आंसर नहीं है कहता है कि क्वांटम स्टेट में से क्वांटम फ्लक्ट एशन में से ये बिग बैंग हुआ है अभी क्वांटम फ्लक्ट एशन और उसके पीछे का मैथमेटिक्स क्या है यह तो वही लोग समझे किंतु स्वामी जी का कहना है कि इससे पहले एक विश्व ब्रह्मांड होगा वह बिग क्रंच यानी कि बहुत बड़े धमाके के भीतर में उसका विनाश हो चुका होगा और उसका डीएनए व रहा होगा उस डीएनए में से नया ब्रह्मांड प्रकट हुआ द लिटल सेल व्च बिकम आफ्टर वर्ड्स द मैन वास सिंपली द इवॉल्वड मैन एंड बिकम वल्ड एज मैन जो लिटल एक छोटा सा एक सेल सेल अर्थात की वो सेल का हिंदी में भूल गया किंतु सेल का स्टडी हम सभी ने किया ही है स्कूल में वो जिस तरह से कोई भी एक सेल होता है ब्रेन सेल होता है ना कि हार्ट का सेल होता है ना कि स्किन का कोई सेल होता है तो वह सेल अर्थात कि सबसे छोटे से छोटा बायोलॉजिकल यूनिट किंतु आज हमको पता है कि सबसे छोटे से छोटा बायोलॉजिकल यूनिट तोच डीएनए होना चाहिए कोश यस बिल्कुल ठीक कहा कोश तो कोश का स्टडी तो हम सभी ने किया ही है तो स्वामी जी कहते हैं कोश में से बच्चा हुआ बच्चा कोश में समाहित हो जाएगा किंतु आज मोर एक्युरेटली कहेंगे डीएनए में से बच्चा प्रकट हुआ और बच्चा डीएनए में चला जाएगा तो डीएनए में से बच्चे का बनना इवोल्यूशन है मनुष्य में से डीएनए बनना इवोल्यूशन है इफ सस इ क्लियर वी हैव नो कोरल विद द इवोल्यूशनिस्ट यदि यह ठीक है तो हमको अर्थात वेदांती को इवोल्यूशनिस्ट के साथ में जो इवोल्यूशन की थिरी सिखाते हैं इसके उनके साथ में हमारा कोई झगड़ा नहीं फोर वी सी दैट इफ दे एडमिट दिस स्टेप इंस्टेड ऑफ दे डिस्ट्रॉयिंग रिलीजन दे विल बी द ग्रेटेस्ट सपोर्टर्स ऑफ इट देखिए यह जो एक सेंटेंस है इसके भीतर में स्वामी जी बहुत कुछ कह देते हैं स्वामी जी कहते हैं कि इवोल्यूशन अर्थात कि सूक्ष्म रूप से ब्रह्मांड सूक्ष्म रूप में से स्थूल ब्रह्मांड का सृष्टि हुआ एक कोश एक सेल उसमें से बच्चा प्रकट हुआ तो यह क्रिएशनिस्ट जो क्रिश्चियन लोग कहते थे कि एक भगवान ने ईश्वर ने एक साथ में पूरी सृष्टि की रचना कर दी यह मछली है ना कि बंदर है ना कि पशु है ना कि पक्षी है ना कि पेड़ पौधे है ना कि ये ब्रह्मांड है तारे है यह ग्रह है पृथ्वी है यह सब कुछ की रचना ईश्वर ने एक जादुई लकड़ी घुमा कर के की है एक ही साथ में हुई है और इवोल्यूशन कहता है कि यह ब्रह्मांड जो है सूक्ष्म रूप में से धीरे-धीरे करके प्रकट हुआ है तो यह इवोल्यूशन की थरी हमको स्वीकार्य है स्वामी जी कहते हैं हम हमारा इवोल्यूशनिस्ट के साथ में कोई झगड़ा नहीं यदि वो एक बात हमारी स्वीकार कर ले क्या कि ये सूक्ष्म स्वरूप जिसमें से ब्रह्मांड प्रकट हुआ यह डीएनए जिसमें से यह बच्चा प्रकट हुआ है वो खुद इवोल्यूशन जो हुआ है इसके भीतर में पीछे में इवोल्यूशन है एक पुराना ब्रह्मांड था पिछले कल्प में पिछली साइकल में जो कि विनाश होकर के उसका डीएनए बना और इस कल्प में इस डीएनए में से सृष्टि का पुनः प्रारंभ हुआ ठाकुर कहते हैं ना कि सृष्टि का अंत होने से मां वो जैसे वो जैसे गिन्नी एकटा एटा थाके तार भीतर व क्या वो वो सब चीजें वो रखती है मैं एजेक्ट सब शब्द भूल गया ठाकुर कहते हैं कि वो एक कोई एक हाउसवाइफ है एक गृहिणी है उसका एक छोटा सा डिब्बा होता है उसके भीतर में वह सब चीजें रखती है तो इसी तरह सृष्टि का जब पिछली सृष्टि का अंत होता है तो मां आध्या शक्ति जगदंबा सृष्टि के बीज जो है वो बन कलेक्ट करके अपने पास में रखती है फिर उसी बीज में से नए ब्रह्मांड का प्रारंभ करती है यह बात कथामृत में ठाकुर कहते हैं अभी हमको लगेगा देखिए स्वामी जी ने मॉडर्न साइंस हिंदू शास्त्र पढ़ कर के ये इवोल्यूशनिस्ट और क्रिएशनिस्ट इन दोनों का झगड़ा वहां पे कैथोलिक कंट्रीज में क्रिश्चियन कंट्रीज में चलता रहता है हमेशा ये लोग बोलते हैं इवोल्यूशनिस्ट बोलेंगे कि बंदर में से मनुष्य बना है और ये लोग कहेंगे अरे भाई ऐसा कभी हो सकता है बंदर में से मनुष्य बनेगा बंदर की रचना भगवान ने अलग की है मनुष्य की रचना भगवान ने अलग की है स्वामी जी कहते हैं हमको इवोल्यूशन के अगेंस्ट में कोई झगड़ा नहीं है यदि इवोल्यूशनिस्ट एक बात स्वीकार कर ले कि एक मनुष्य के भीतर में से यदि बंदर बना है और इस बंदर में से दूसरा मनुष्य बनेगा तो पहले इवोल्यूशन होता है फिर इवोल्यूशन होता है यदि यह बात वे लोग स्वीकार कर दे तो हमको इवोल्यूशन के साथ में कोई झगड़ा नहीं अभी इसके एक्चुअली स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं कि यदि ईश्वर में से सृष्ट की रचना हुई तो सृष्टि धीरे-धीरे डेवलप करके पहले पशु हुए फिर पहले तो मछली हुई मछली में से जलचर और स्थल चर गुजराती में हम पढ़ते थे तो इस तरह के शब्द आते थे जलचर यानी कि पानी में तैरने वाले पशु और स्थल चर अर्थात कि जमीन पर चलने वाले पशु तो पहले पानी में चलने वाले पशु हुए फिर जमीन पर चलने वाले पशु उसमें से पंखी हुए फिर उसमें से मेमल जिसको कहते हैं पहले रेप्टाइल हुए उसमें से मैमल्स हुए फिर मैमल्स में से यह बंदर हुए और बंदर में से आखिर में मनुष्य हुआ तो यह इवोल्यूशन की थोरी है और इस थरी के सामने क्रिश्चन लोगों का बहुत बड़ा झगड़ा है किस तरह से बंदर में से मनुष्य हो सकता है मनुष्य तो डिवाइन नेचर है उसका क्या बंदर में से कभी मनुष्य हो सकता है बंदर में से कोई डिवाइन एक दिव्य सत्ता वाला कोई चीज प्रकट हो सकता है किस तरह का पागलपन है तो स्वामी जी कहते हैं पहले तुम रिवर्स एक्सेप्ट कर लेते हो ईश्वर में से सृष्टि की शुरुआत हुई ईश्वर में से ही पहले यह जल में तैरने वाले पशु हुए फिर उसमें से जमीन पर चलने वाले सब हुए उसमें से बंदर हुआ फिर उसमें से मनुष्य हुआ यह यदि तुम स्वीकार कर लेते हो कि ईश्वर में से सृष्टि की रचना हुई तो हम यह मान लेंगे कि बंदर में से मनुष्य बना है हम लोग इवोल्यूशन स्वीकार करने को तैयार है जब आप लोग इवोल्यूशन स्वीकार करेंगे इवोल्यूशन क बंदर में से मनुष्य हुआ है तो इवोल्यूशन कहेगा कि ईश्वर में से ही सृष्टि की रचना हुई एक दिव्य सत्ता पहले से ही सूक्ष्म रूप से वर्तमान थी जिसमें से यह स्थूल विश्व ब्रह्मांड दिखाई दे रहा है तो यह मॉडर्न साइंस और वेदांत इन दोनों का संगम इन दोनों का मिलन स्वामी जी ने इस तरह से यहां पर किया है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु