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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः तो यह जो किताब है श्री राम कृष्ण देव जैसा हमने उन्हें देखा इसमें से हम राजा महाराज के जो ठाकुर के बारे में कुछ संस्मरण है उसका पाठ कर रहे हैं तो अभी तक हमने देखा कि किस तरह से बहुत की युवावस्था में यह जो ठाकुर के सन्यासी शिष्य है जिन्होंने बाद में सन्यास ग्रहण किया वे लोग ठाकुर के पास आए और ठाकुर ने किस तरह से उनके शरीर मन और आत्मन और मन का गठन किया किस तरह से उनको आध्यात्मिकता के रास्ते पर आगे ले गए सो फार वी हैव सीन दिस रेमसंस ऑफ स्वामी ब्रह्मानंद हु वास द मानस पुत्र ऑफ श्री राम कृष्ण हाउ श्री राम कृष्ण ट्रेन हिज यंग डिसाइल्स स्पेशली दिस बॉय हु वेर टू टेक सन्यास इन लेटर लाइफ तो हम आगे पढ़ते हैं राजा महाराज अपने रेमसंस में कहते हैं उनके साथ रहते समय अर्थात ठाकुर के साथ रहते समय उनके साथ रहते समय में सर्वदा ईश्वर का स्मरण और ध्यान कर था वेन आई वास लिविंग वि श्री रामकृष्णा आई यूज टू कंटीन्यू मेडिटेटर इष्ट देवता राजा महाराज इष्ट देवता वास ऑफ कोर्स काली वास देर एंड राजा महाराज इष्ट देवता वास कृष्णा सो सी दिस इ द जब हम एक ईश्वर ज्ञान जिनको मिल गया है आत्म ज्ञान जिन्होंने प्राप्त कर लिया है ऐसे गुरु के साथ में जब हम रहते हैं तो उनके मन का जो प्रभाव है वह हमारे पर आता है यहां पर हम अकेले रहते रहते कितना ही जब ध्यान करें ऐसा हमको बीच-बीच में लगता है कि अरे मैं जब ध्यान कर रहा हूं किंतु बीच-बीच में जो है मेरा मन जो है वो अपनी एक धारा जो है उसकी अपना जो उद्देश्य है उससे भटक जाता है और और कहीं पर चला जाता है ऐ सा कभी-कभी हमको लगता है किंतु सिद्ध महापुरुष गुरु के सानिध्य में रहने से आपका मन हमेशा ही एक ही धारा जैसे वह जो तेल जो है तैल धारा वत ध्यान के बारे में हमारे योगशास्त्र में कहा गया है तेल धरावत यानी एक पात्र में से दूसरे पात्र में आप जब तेल डालते हैं तो कैसी एक लाइन में वह धारा बहती है तो इसी तरह तैल धारा वत निवाद निष्कपट शब्द यूज किया गया है ध्यान के बारे में निवाद और निष्क एक ऐसी अग्नि शिखा जो कि पवन में बिल्कुल भी डोलती जुलती नहीं है एकदम स्थिर वह रहती है य स्थिर शिखा की तरह हमारा मन ईश्वर में लगा रहता है सिद्ध गुरु के साथ में रहने का यह परिणाम इसीलिए हमारे वैदिक संस्कृति में गुरुकुल का यह महत्व हुआ करता था बचपन से ही बच्चे जो है एक ऐसे गुरु के पास में रहेंगे जिन्होंने अपने जीवन में कोई ना कोई बड़ी उपलब्धि की है आध्यात्मिक जगत में वह बाकी सब चीजें तो सीखेंगे गणित सीखेंगे विज्ञान सीखेंगे ज्योतिष सीखेंगे धनुर्वेद भी सीखेंगे द्रोणाचार्य के जो शिष्य थे उनको वह धनुर्वेद भी सिखाया करते थे अस्त्र शस्त्र भी सिखाया करते थे किंतु वह सिर्फ द्रोणाचार्य या वशिष्ठ या यह सब जो गुरु है जो सांदीपनी जो कृष्ण के गुरु थे इन लोगों का महत्व यह नहीं था कि वह जो धनुर्वेद या तो आयुर्वेद या तो ज्योतिष या तो गणित यह सब में महारथ उनकी थी उसमें तो थी ही किंतु साथ साथ में सबसे बड़ा उनका जो एरिया ऑफ एक्सपर्टाइज्ड का जो पूरा निचोड़ है वोह तो वही है कि हमारे यह जो शरीर मन और मन प्राण बुद्धि अहंकार ये सबके भीतर में आत्मन है और जो कुछ भी हम इस जगत में करते हैं जितने भी विज्ञान हो जितना भी साइंस टेक्नोलॉजी सिविलाइजेशन हो सबका अर्थ तो एक ही है कि हमको यह ईश्वर दर्शन प्राप्त करना है तो यह जो गुरुकुल होता था वो ईश्वर दर्शन का उसका अल्टीमेट एम था इसके लिए वो बने थे अभी देखिए कि आज क्या होता है आजकल होता है कि हम लोग स्कूल में जो जाते हैं और यह जो सांसारिक विद्या है भी सीखते हैं यह जो मटेरियल साइंस है यह सब हम सीखते हैं किंतु हमको हमारा चाहे शब्दों में ऐसा नहीं बोला जाता किंतु यह जो पूरा एक इंप्रेशन है वह एक ऐसा खड़ा होता है कि जीवन का उद्देश्य ही है यह जिस तरह से पैसा कमाना यह घर संसार करना यह जॉब करना या कोई बिजनेस करना ऐसा करके एक इस तरह के एक जगत में रहना जो कि हमारी जो भौतिक जरूरियत है यह भौतिक हमारी नेसेसिटीज है उसको कंप्लीट करें इस तरह का एक हमारा ब्रेन वश हो जाता है पहले से ही और जब हम बड़े होते हैं और जब हम सोचते हैं कि अरे नहीं ईश्वर दर्शन के लिए मुझे प्रयत्न करना चाहिए बचपन में तो सुना था कि ईश्वर है अभी मुझे डाउट है कि सही में ईश्वर है कि नहीं चलो कुछ प्रयत्न करके देखूं किंतु जब हम वो सब करने को जाते हैं इस बड़ी उम्र में तब क्या होता है कि जो सीखने की उम्र है वो बीत चली है और बड़े होकर के अभी 10 चीजें लेकर के रहते हैं कितना ही टेंशन है सर पर 10 काम है यहां पे उस सबके बीच में थोड़ा-थोड़ा करके हमको यह सब कुछ करना है तो ज्यादा होता नहीं है हम फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं अरे यह तो सब बेकार की बातें हैं कहां में यह सब टाइम वेस्ट करने को गया था थोड़ा बहुत दिखावा कर लेते हैं संसार में रहना है तो ईश्वर मुझे भगवान के ऊपर में श्रद्धा है ऐसा कुछ दिखावा करना पड़ता है थोड़ा बहुत कर लेते हैं चलो उ से निपट लो किंतु यदि बचपन से ही हम गुरुकुल में रहते हैं इस तरह के सिद्ध गुरु के पास रहते हैं और हमको बचपन से ही लगता कि अरे यह जो हमारा समग्र जीवन है जब हम बड़े होंगे घर संसार करें या सन्यास ले कोई भी रास्ते पर जाए धर्म अर्थ काम मोक्ष यह जो पुरुषार्थ जो हमारे सामने है कोई भी पुरुषार्थ का हम अवलंबन करें हमारे जीवन का एम अल्टीमेटली वही होना चाहिए या तो कोई आत्म दर्शन की अनुभूति हो या तो ईश्वर का साक्षात्कार हो इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में अगले जन्म में नहीं तो इसके भी अगले जन्म में हिंदू धर्म कहता है कि जब तक हमको ईश्वर साक्षात्कार नहीं होता तब तक हमको शरीर धारण करते ही रहना होगा अच्छे बुरे कर्मों का बंधन हमको जड़ता लगेगा ही हमको बांधता रहेगा और हमको यह कर्म के बंधन को काटते ही रहना होगा ये अनंत काल तक चलता रहेगा और यह जैसे क्रिश्चियनिटी में है कि एक समय ऐसा आता है कि आपने अपोकेलिप्स और एंड ऑफ द वर्ल्ड और जजमेंट डे ऐसे सब उनको सब कांसेप्ट है कि एक समय आएगा कि जगत का विनाश हो जाएगा हम लोग सब जितने भी मृत्यु जितने भी आदमी थे पहले से लेकर के आज तक जिंदा मृत वो सब उठ करर के भगवान के पास जाएंगे हमारे कर्मों के अनुसार हमको स्वर्ग या नरक देंगे और वहीं पर हमारा जीवन खत्म हो जाएगा किंतु हिंदू धर्म में सृष्टि का संहार नहीं है हिंदू धर्म कहता है कि यह जो सृष्टि है अनंत काल तक चलेगी उससे मुक्ति तभी होगी जब हमको आत्मज्ञान मिलेगा दिस इज द ब्यूटी ऑफ लिविंग विद द गुरु हु हैज रियलाइफ अवर वेरी चाइल्डहुड वी विल थिंक दैट रियलाइफ अवर लाइफ एंड इफ नॉट इन दिस ए देन एटलीस्ट इन द नेक्स्ट बर्थ और पर हैप्स इन द नेक्स्ट बर्थ वी विल रिलाइज कोट अनलाइक क्रिश्चियनिटी और इस्लाम वेयर इट इज सेड दैट वन डे वर्ल्ड विड एंड देयर विल बी अपोकेलिप्स देर विल बी अ जजमेंट डे एंड एवरी मैन वमन चाइल्ड हु हैज एवर लीव्ड फ्रॉम द बिगिनिंग ऑफ द वर्ल्ड टू द एंड ऑफ द वर्ल्ड वेदर अलाइव और डेड दे विल गो टू गॉड एंड गॉड विल जज अस अकॉर्डिंग टू अवर गुड और बैड कर्मा एंड ही विल असाइन अस आइर हेल और हेवन बेस्ड ऑन अवर कर्मा बट हिंदुइज्म डजन थिंक लाइक दिस अकॉर्डिंग टू हिंदुइज्म दिस सृष्टि द वर्ल्ड इज इटरनल एंड ओनली वे ऑफ गेटिंग रिड ऑफ दिस वर्ल्ड ओनली वे ऑफ ब्रेकिंग दिस साइकल ऑफ जन्म मृत्यु जरा व्याधि इज अटन साक्षात्कार अदर वाइज वी विल ऑलवेज बी टेकिंग बर्थ अगेन एंड अगेन एंड गो ऑन सफरिंग दिस संसार एंडलेसली ओके आगे राजा महाराज क्या कहते हैं हमेशा मुझे परम आनंद मिलता रहता था ठाकुर के साथ में जब रहते थे हमेशा मुझे परम आनंद मिलता रहते था व्हेन आई वाज लिविंग विद श्री राम कृष्णा आई वाज लिविंग इन अ डिवाइन एक्सी इसलिए तो एक ब्रह्म वेत्ता एवं समर्थ गुरु की जरूरत होती है दैट इज वई वी नीड अ गुरु हु इज रियलाइक्स दोनों को एक दूसरे की परीक्षा कर लेनी चाहिए बिफोर यू टेक इनिशिएटिव गुरु यू शुड टेस्ट हिम फॉर ए लॉन्ग टाइम टू सी वेदर ही एक्चुअली इज व्हाट ही इज सेइंग बहुत बार तो ऐसा होता है ना कि वह आजकल तो खास करके यह कोचिंग क्लास का यह सब ऐड आता रहता है न्यूज़पेपर में और यह जो सब प्राइवेट ट्यूशंस और कॉलेजेस और स्कूल है ऐसे सब एकदम फ्लेशी ऐड देते रहते हैं बहुत अच्छे पिक्चर्स होंगे और हमको लगता है कि अरे इतना अच्छा उनका ऐड है तो चलो हम वहां पर जाते हैं और कुछ समय के बाद पता चलता है अरे नहीं टीचर का कुछ ठिकाना है नहीं सिलेबस का टाइम पर कंप्लीट होता है नहीं वहां पर लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉपर है तो इस तरह से हम डिसएप्वाइंट हो कभी-कभी हमको स्कूल या कोचिंग क्लास छोड़ देना पड़ता है अभी इसीलिए ये पहले के जमाने में भी ऐसे लोग हमेशा से रहते हैं जो धूर्त होते हैं वो सब समय रहते हैं समझ सोचिए कि आज लोग धूर्त है पहले नहीं थे इसीलिए यह पहले से ही परंपरा चली आई है यदि किसी को गुरु करना है तो उसके साथ में कुछ दिनों तक रह करके हम उसका प्रॉपर्ली देखें ठाकुर के बारे में एक बहुत अच्छी कहानी है सबको पता है अ इन प्र नव डेज वी सी दैट हाउ कोचिंग क्लासेस एंड स्कूल्स मिस ट्रीट देयर स्टूडेंट्स सम टाइम्स दे गिव फ्लेशी एडवरटाइज एंड दे टेल अस दैट वी हैव गट वेरी गुड टीचर्स वी हैव गट वेरी गुड इंफ्रास्ट्रक्चर यू शुड कम एंड जॉइन अस बट व्हेन अवर बो और अवर गर्ल गोज देयर इन दैट कोचिंग क्लास और इन दैट प्राइवेट स्कूल सून वी रिलाइज दैट नादर द टीचर्स आर क्वालिफाइड नॉर द सिलेबस कंप्लीट ऑन टाइम देन वी बिकम डिसपे सो दैट इज वई राजा महाराज सेज हियर दैट बिफोर यू एक्सेप्ट समवन एज अ गुरु इवन दिस इज ट्रू इवन इन स्पिरिचुअल लाइफ बिफोर यू एक्सेप्ट समवन एज ए गुरु यू शुड टेस्ट हिम सो दिस टाइप ऑफ पीपल हु डिसीव अदर्स आर हियर टुडे एंड दे वेर देर आल्सो इन द वैदिक एज सो दिस टाइप ऑफ पीपल आर ऑलवेज प्रेजेंट ठाकुर की एक बहुत अच्छी कहानी है हम सबको शायद पता ही होगा मैंने पहले भी कही है योगेन महाराज स्वामी योगानंद तो वह बचपन बहुत कम उम्र में ठाकुर के पास आया करते थे क्योंकि उनका घर ठाकुर के वो जो दक्षिणेश्वर के बगल में ही है तो एक दिन वह ठाकुर के साथ में रात के उनके कमरे में सोए हुए थे अधी रात को शायद उनको प्यास लगी या कुछ भी है उनकी नींद खुल गई और उन्होंने देखा कि ठाकुर अपने बिछाने पर सोए हुए नहीं है ठाकुर ज्यादातर सोते नहीं थे वो बैठ कर के जब ध्यान करते थे मे समाधि में मगना ये हो जाते थे डूब जाते थे तो वो बैठे भी नहीं है सोए भी नहीं है तो ठाकुर गए कहां सडली उनके मन में एक बहुत ही विचित्र संदेह उत्पन्न हुआ उन्होंने सोचा कि अरे देखो ठाकुर तो कहते हैं कि तुमको काम कांचन का त्याग करना चाहिए अभ ये हमको ऐसा दिन में तो ऐसा बोलते हैं तो रात को क्या अपनी बीवी के साथ में सोने को गए होंगे मां शारदा का जो नबत में जो मां रहती थी वो नबत पास में ही है जिन्होंने दक्षिणेश्वर में विजिट किया है दक्षिणेश्वर दर्शन किए हैं उनको शायद पता होगा ठाकुर के कमरे के बगल में ही थोड़ी ही कुछ दूरी पर मां रहती थी नबत में तो उनको यह संदेह हुआ तो ये संदेह की वजह से व बड़े व्यस्त हो गए और खड़े होकर के त के सामने जाकर खड़े हो गए और उन्होंने सोचा ठाकुर जदी नबत से बाहर आएंगे तो मैं उनको पकडू और पूछूंगा कि अरे दिन में तो आप बोलते ब्रह्मचर्य का पालन करना रात को आप अपनी बीवी के साथ में सोते हैं ये तो ठीक नहीं है मन वचन एक करना वो तो आप ही बताते हैं तो आपने य हमारे साथ में यह झूठ क्यों बोल रहा है तो ऐसा करके खड़े थे थोड़ी देर के बाद में देखा ठाकुर झाऊ तला से वापस आ रहे है अभी उस समय तो वो लेटरन टॉयलेट हमारे रूम में वो जो अटैच बाथरूम वगैरह नहीं था तो वो बाहर में जाना पड़ता था सोच के लिए तो झाऊ तला बोल के जगह है वहां पर सब सोच के लिए जाते थे तो ठाकुर वहां से वापस आ रहे हैं तो उनको बड़ा ही शोभ हुआ बड़ा ही पश्चाताप हुआ कि अरे इतने पवित्र ठाकुर है उन परे मैंने संदेह किया तो ऐसा सोच के वो खड़े र कुछ बोले नहीं मुंह से किंतु ठाकुर समझ गए कि हां इसके मन में संदेह हुआ था इसके लिए वो नबत के सामने खड़ा है तो ठाकुर ने उनको कहा बंगाली में कहा बेश बेश साधु के दिने देख भी और रात्र देख भी तब साधु रूपर भरोसा करवी ने खूब अच्छा बहुत अच्छा साधु को दिन में देखना है और रात को देखना है तब साधु पर विश्वास करना है तो यह पूरे वैदिक समय सेय चला आ रहा है कि ठग और धुता सब जगह है और इसके भीतर में भी कुछ ऐसे सन्यासी इस तरह के गुरु होते हैं जिनका हृदय सोने का बना होता है पूर्ण पवित्र होते हैं तो का टेस्ट करने के बाद में उनको गुरु बनाना है सो देयर इज वेरी नाइस स्टोरी इन कथामृता वेयर योगेन महाराज ही वाज वन ऑफ द मोनेस्ट्री डिसाइल ऑफ श्री राम कृष्णा ही वाज वंस लिविंग विद ठाकुर एंड सडन ही वेक अप इन द नाइट एंड सो दैट ठाकुर वाज नॉट आइर नॉट स्लीपिंग इन हिज बेड और वाज नॉट मेडिटेटिंग सो ही थॉट वेयर ठाकुर जज गोन ठाकुर यूज टू टेल अस दैट वी शुड रिनाउंस अ सेक्स एंड मनी बोथ कंपलीटली वी शुड फॉलो परफेक्ट ब्रह्मचर्य देन व्हाई ही मस्ट हैव गोन टू स्टे विथ हिज वाइफ मदर शारदा वाज लिविंग इन नबत जस्ट नियर बाय सो ही वेंट एंड स्टैड इन फ्रंट ऑफ नबत अ प्लेस वेयर मदर वाज लिविंग एंड ही थॉट दैट द मोमेंट ठाकुर कम्स आउट आई विल कैच हिम बट आफ्टर ए वाइल ही सो दैट ठाकुर वाज रिटर्निंग फ्रॉम सम प्लेस ए च इ कॉल्ड जाताला एंड ए एट ट टाइम देर वेर नो अटच बाथरूम वी हैड टू गो टू लेटरन आउटसाइड सो इन तला पीपल यूज टू गो फॉर बाथरूम सो ही वाज रिटर्निंग फ्रॉम देयर एंड ही बिकम योगेन महाराज बिकम वेरी यू नो फि विथ पश्चाताप फि विथ सेडनेस एंड ही थट ट हाउ कम आई डाउट सच ठाकुर ही सो होली एंड प्योर ठाकुर रिलाइज व्हाट ही इज थिंकिंग एंड ही सेड वेरी गुड वेरी गुड सी द मोंक इन द डे एंड सी द मोक इन द नाइट एंड देन ट्रस्ट द मोंक सो सी ट वी हैव टू टेस्ट अवर गुरु एंड फॉर ए लॉन्ग टाइम एंड देन एक्सेप्ट मम एस ए गुरु सो दिस वाज ट्रू इन द वेदिक एज एंड दिस इज ट्रू इवन नाउ अभी राजा महाराज आगे कहते हैं अन्यथा बाद में चलकर पछताना हो सकता है यह कोई अस्थाई संबंध नहीं है यदि हमने शुरू में यदि किसी गुरु को यदि उनका प्रॉपर टेस्ट करके किसी के ऊपर में बहुत ही इजीली श्रद्धा भक्ति करके उन पर हमने विश्वास करना शुरू कर दिया बाद में हमको पता चला कि यह तो दुराचार कर रहे हैं तो हमारे मन में बहुत गलानी होगी इफ इनिशियली वी ट्रस्ट सम वन एज ए टीचर और एज ए गुरु एंड देन रियलाइफ दैट ही इज डूइंग सम अन एथिकल हिज एक्शंस आर अन एथिकल हिज बिहेवियर इज इम्मोरल देन वी हैव टू सफर अ लॉट आहा दक्षिणेश्वर में ठाकुर के साथ हम लोग कितने आनंद पूर्वक रहते थे हाउ इन सच अ ग्रेट जॉय वी यूज टू लिव इन दक्षिणेश्वर विद ठाकुर कभी-कभी हम उनके हास परिहास और वाघ विद्वता से हंसते हंसते लोटपोट हो जाया करते थे ठाकुर यूज टू जोक सो मच ही यूज टू डू मिमिक्री एंड टेल ह्यूमरस टेल्स ट दिस यंग बॉयज वुड लाफ रोल ऑन द फ्लोर लाफ सो मच दे विल रोल ऑन द फ्लोर ठाकुर खुद एक बार कहते हैं कि मैं सिर्फ इन लोगों को वो जो है कि वेजिटेरियन खाना ही नहीं देता हूं बीच-बीच में मछली का झोल भी दे देता हूं तो तभी तो व मेरे पास आकर के रहेंगे तो माने क्या है कि देखिए यह जो यंग बच्चे हैं जो कि ठीक है कि उनके हृदय में आध्यात्मिकता का एक स्पार्क जो है एक जो अग्नि की जो शिखा है वह जागृत हो चुके है किंतु देखो कि पूरा जीवन आध्यात्मिकता को लेकर रहना धर्म को लेकर रहना मोक्ष के मार्ग पर चलना इतना इजी भी नहीं है जैसे संसार में क्या होता है कि आप लोगों के माता-पिता है भाई बहन है बीवी बच्चे हैं तो सब चीजों को लेकर हंसी मजाक कुछ होता रहता है हमारे जीवन में कुछ आनंद परिहास रहता है तो हमको बीच-बीच में वो डाइवर्ट कर देता है क्यक क्या है कि कभी-कभी क्या होता है कि हम इतने डिप्रेसो जाते हैं स्पिरिचुअल लाइफ में कि अरे कुछ प्रोग्रेस नहीं हो रहा है अरे यह नहीं हो रहा है तो इस तरह से डिप्रेशन से बचने के लिए बेस्ट है कि इस तरह का कुछ हास परिहास हो हंसी मजाक हो अपने कुछ मित्र हो तो फैमिली में तो यह सब इजली मिल जाता है यहां पे साधु हो गए हैं ठाकुर के पास रहे हैं तो पूरा जीवन यदि गंभीर अवस्था में चला जाएगा अरे सब समय में जब ध्यान ही कर रहा हूं या तो फिर मैं गलानी अनुभूत कर रहा हूं कि अरे मेरा जब ध्यान ठीक नहीं हो रहा है तो क्या होगा कि हम लोग डिप्रेशन में चले जाएंगे इसलिए ठाकुर बीच-बीच में हंसी मजाक भी करते थे और इस तरह की बातें करते थे कि जो लड़के जो है वो हंसते हंसते फर्श पे लट जाते लेट जाते थे व्हाट हैपेंस इन स्पिरिचुअल लाइफ दैट इफ वी स्पेंड अवर एंटायस प्रॉपर्ली एंड देन गोइंग इन टू डिप्रेशन देन दिस बिकम वेरी डेंजरस दैट इज व्हाई ठाकुर यूज टू मेक अ डू सम मिमिक्री ऑफ सम पीपल ही यूज टू टेल सम ह्यूमरस टेल्स सो दैट देयर इज यू नो फन फन एंड जॉय एवरी वेर अराउंड दिस इज इजी इन द लाइफ ऑफ अ हाउसहोल्डर बिकॉज यू हैव योर फैमिली योर हस्बैंड वाइफ चिल्ड्रन एंड यूय चिल्ड्रन फ्रेंड दे कम टू होम एंड देयर इज लाफ एंड फेस्टिवल्स एंड एवरीथिंग सो एवरी वंस इन अ वाइल यू फॉरगेट योर स्पिरिचुअल वरीज बट इन मोनेस्ट्री गो इफ वी थिंक अबाउट मेडिटेटिंग ऑल द टाइम आवर लाइफ विल बिकम वेरी डिप्रेसिंग एंड सम टाइम्स व आल्सो सम ऑफ द पीपल कमिट सुसाइड सो दैट इज व्हाई इट इज नेसेसरी टू हैव फन एंड ह्यूमर इन स्पिरिचुअल लाइफ सो दिस ठाकुर यूज टू गिव बाय टेलिंग ऑल दिस फनी टेल्स राजा महाराज आगे कहते हैं इस समय ध्यान के द्वारा जो अनुभूति नहीं प्राप्त कर सकते उसे उस समय बिना प्रयत्न स्वतः ही प्राप्त कर लेते थे इस समय यानी कि यह तो ठाकुर के देहांत महासमाधि के बाद की बात है ये ठ राजा महाराज जो है अपने ये जो युवा शिष्य है उनको यह सब बातें बता रहे हैं तो कह रहे हैं कि देखो बेलूरमठ में हम रह रहे हैं और बेलूरमठ में हम जब ध्यान भी बहुत करते हैं किंतु कोई भी आध्यात्मिक अनुभूति सहजता से लभ नहीं होती तो यह आज की बात है जब हम लोग ठाकुर के साथ में रहते थे तो बातों बातों में इस तरह की अनुभूति इस तरह के दर्श होते रहते थे कि जैसे हमारा मन आनंद से भर जाता था राजा महाराज सेज ट एट दिस टाइम राजा महाराज इ सेइंग ऑल दिस थिंग इन बेलर मट इन फ्रंट ऑफ हिज यंग मंग डिसाइल्स सो ही सेज दैट इवन इफ यू आर डूइंग लॉट ऑफ मेडिटेशन टुडे इट इज नॉट इजी फॉर यू टू हैव एनी स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस बट ड्यूरिंग द डेज वी यूज टू लिव वि श्री रामकृष्णा इन दक्षिणेश्वर वी यूज टू हैव मेनी स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस एंड विजनस इजली सो दिस इज द बेनिफिट ऑफ लिविंग विथ रियलाइफ मुद्रा से ही वे समझ जाते और मेरे वक्ष स्थल पर हाथ फेरते हुए मन को ठीक कर देते जद इफ सम टाइम्स आई बिकम इवन अ लिटिल डिप्रेसेंट मी एंड जस्ट बाय हिज टच यज टू ट्रांसमिट हिस स्पिरिचुअलिटी एंड फील अगेन माय हार्ट विथ जॉय एंड हैप्पीनेस देखिए यह सिद्ध गुरु क्या कर सकते हैं सिर्फ अपने स्पर्श से ईश्वर दर्शन की अनुभूति गुरु अपने शिष्य को प्रदान कर सकता है आज हमको इस तरह की अनुभूति प्राप्त करने के लिए सालों सालों भर सुबह को 4 बजे 5 बजे उठकर के मंगलारती में मंदिर में जाना होगा ठंड के दिन है वो ब्लैंकेट पेट में से खड़े होने की इच्छा नहीं हो रही है फिर भी जोर करके खड़े होना होगा बोलना होगा अरे नहीं मंदिर में तो जाना ही पड़ेगा वरना कैसे चलेगा साधु हुए हैं चलेगा इस तो नहीं चलेगा मंदिर में जाएंगे बैठेंगे घंटा एक घंटा बैठेंगे रूम में आएंगे थक भी गए होंगे दिन भर काम भी करना है कभी-कभी डिप्रेसिव नहीं होता सालों साल चला जाता है उस समय ऐसा होता था कि मन में थोड़ी सी भी उदासीनता आ जाती थी ठाकुर टच कर देते थे और फिर से हम उनका मन आनंद से भर जाता था एज इट हैपेंस टुडे दैट आफ्टर बिकमिंग ए मंक वी हैव टू गेट अप एट 4 ओ क्लॉक 5 ओ क्लॉक इन द मॉर्निंग इवन देर कोल्ड डेज इवन इट इज अ विंटर इट इज सो डिफिकल्ट टू लीव द बेड एंड कम आउट ऑफ अवर ब्लैंकेट एंड गो टू टेंपल एंड वी हैव टू से अरे वी हैव बिकम मंग सो वी विल हैव टू डू दिस अदर वाइज व्हाट विल हैपन टू मी एन वी विल गो टू टेंपल एंड सीट देयर एंड मेडिटेटर आफ्टर वन वर और वन एंड हाफ आर वी आर टायर्ड एंड इन स्पाइट ऑफ दैट वी हैव टू वर्क होल डे बिकॉज वी हैव इंपोर्टेंट ड्यूटीज असाइन टू अस इन स्पाइट ऑफ डूइंग ऑल दिस सिंगल स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस टेक्स यर्स टू गेन सो दिस इज द डिफरेंस बिटवीन टुडे एंड ट टाइम वन दे यूज टू लिव वि श्री राम कृष्णा और उनके साथ में मैं कितना स्वच्छंद था एक बहुत अच्छी कहानी वो बताते हैं एक दिन अर्ध वृत्ताकार पश्चिमी बरामदे में मैं उनके शरीर में तेल मालिश कर रहा था कुछ कारण से मैंने क्रोधित कुछ कारण से मैं उनसे क्रोधित हो गया यानी राजा महाराज ठाकुर से क्रोधित हो गए मैंने तेल की शीशी फेंक दी और फिर कभी वापस ना आने का का इरादा करके भाग चला यदु मल्लिक के बगीचे तक जाने के बाद मैं और आगे चलने में असमर्थ हो गया मैं बैठ गया इसी बीच उन्होंने मुझे वापस बुलाने के लिए रामलाल को भेज दिया था रामलाल ठाकुर के भतीजे थे और काली मंदिर के पुजारी थे मेरे लौटने पर उन्होंने कहा देखो क्या तुम जा सकते थे मैंने वहां एक सीमा रेखा खींच दी थी देखिए ठाकुर के शिष्यों के साथ में ऐसा बार-बार होता है कि कहीं जाने को बोल रहे है कि अरे यहां पर बहुत अभी मैं थक गया हूं डिप्रेसो गया हूं चलो मैं चल जाता हूं गुस्सा हो गया हूं किसी बात से किंतु ठाकुर जो है उनको खींच करके ले आते हैं और देखो यहां पे राजा महाराज और ठाकुर का कितना मधुर एक संबंध है राजा महाराज गुस्सा भी हो जाया करते थे हम तो कभी ऐसा सोच भी नहीं सकते कि हमारे गुरु के साथ में गुस्सा होना अरे हम उनको तो कितना रिस्पेक्ट देते हैं साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हैं उनको पूरे ईश्वर की तरह पूजन करते हैं किंतु यहां जो है राजा महाराज गुस्सा भी हो गए तेल का शिशी भी फेंक दिया और उठ कर के चले भी गए तो ये गुरु शिष्य का इस तरह से एक मधुर संबंध है जो कि एक पिता पुत्र या मां और उसके पुत्र के बीच में होता है और हम चाहे भले अपने गुरु को इतना सम्मान दे हमारे मन में हमारे जो इष्ट देवता है उनके बारे में तो हमको ऐसा ही सोचना है कि वह हमारे माता-पिता जैसे ही है और मैं जिस तरह का भी बिहेवियर करूंगा वो मुझे हमें हमेशा अपनी पना में आश्रय देंगे सो दिस इज अ वेरी फनी स्टोरी वन डे व्हाट हैपन दैट राजा महाराज वास मसाजिंग ठाकुर विथ अ बोटल ऑफ विथ ऑयल सडली ही बिकम वेरी एंग्री ड्यू टू समथिंग ही थ्रो द ल बोटल ऑफ ऑयल अवे एंड ही स्टूड अप एंड स्टार्ट गोइंग आउटसाइड ऑफ द दक्षिणेश्वर ही सेड दैट आई एम एंग्री विथ एवरीथिंग हियर आई एम लीविंग एंड आई एम नॉट रिटर्निंग सो ही वेंट सम डिस्टेंस एंड सडन ही थॉट दैट अट्रैक्शन ऑफ ठाकुर इज सो पावरफुल दैट ही कैन नॉट गो फर्द सो ही सेट डाउन आफ्टर अ वाइल ठाकुर सेंड रामलाल ही वाज ठाकुर्स नेफ्यू एंड ही वाज अ पुजारी ही वाज अ प्रीस्ट इन द टेंपल सो रामलाल केम एंड टूक राजा महाराज बैक टू ठाकुर एंड ठाकुर सेड सी आई हैव क्रिएटेडॉक्युमेंट्सफ्रैगमेंट सो दिस इज द बंड बिटवीन फादर एंड हिस सन नॉट जस्ट बिटवीन अ गुरु एंड शिष्य अ शिष्य अ डिपल गिव सच ग्रेट रिस्पेक्ट टू हिज गुरु बट द रिलेशन बिटवीन अ गड एंड डिवटी इज ट ऑफ फादर और ए मदर विथ हिज और हर सन एंड वी कैन वी कैन बी असर्ड वी आर वेरी श्यर दैट हाउ एवर बेडली वी बिहेव द गॉड विल ऑलवेज प्रोटेक्ट अस सो यह बहुत अच्छी कहानी और इस कहानी के साथ में आज का क्लास यहीं पर समाप्त करते हैं कल मिलेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु