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योग: चित्त-वृत्ति निरोधः || Make the heart like an ocean... || 6 Dec 2024

Preface

ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः हम लोग जैसे जैसे वेदांत पढ़ते जाते हैं जैसे जैसे रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में हम गहराई में जाते जाते हैं वैसे ही हम लोगों का एक अंड अंडरस्टैंडिंग है कि स्पिरिचुअल लाइफ क्या है यह आत्मन क्या है यह साधना क्या है यह सब जो मेजर क्वेश्चन है इन सबके ऊपर में अपना एक इंडिपेंडेंट अंडरस्टैंडिंग बनता जाता है हम सभी का जितने भी लोग हैं जो कि लंबे समय से आध्यात्मिक मार्ग के पथिक है उन सभी का अपना एक यूनिक अंडरस्टैंडिंग बनता है अभी यूनिक अंडरस्टैंडिंग का अर्थ यह नहीं कि अपनी जो फाउंडेशन टेक्स्ट है यह जो अपने मूलभूत शास्त्र है जैसे कि प्रस्थान त्रय है ना कि राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य इससे अलग जाकर के हम कुछ सोचेंगे किंतु बात ऐसी है कि चाहे रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य हो ना कि चाहे प्रस्थान त्रय हो उपनिषद ब्रह्म सूत्र और श्रीमद् भगवत गीता यह एक महासागर है और हम इस महासागर को तभी उसको एक प्रॉपर अंडरस्टैंडिंग हम डेवलप कर पाएंगे जबकि अपने पास में एक बेसिक थिरी हो एक बेसिक मॉडल हो कि हां इस आईडिया के अनुसार सब कुछ यहां पर एक्सप्लेन हो सकता है यहां पर सब कुछ समझा जा सकता है तो हम सभी लोग अपना एक इंडिविजुअल अंडरस्टैंडिंग एक कस्टमाइज्ड वेदांत ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम डेवलप करते जाते हैं तो मेरा भी जो एक अंडरस्टैंडिंग है कि व्हाट इज वेदांत व्हाट इज अद्वैत वेदांत इन स्पेसिफिक व्हाट इज राम कृष्ण विवेकानंद आइडिया ऑफ स्पिरिचुअलिटी तो मैं इसको जिस तरह से देखता हूं मेरा जो अंडरस्टैंडिंग है इट इज समथिंग लाइक दिस देखिए कि एक तो है बाह्य

Subject (my body) + Object (the world) = Karma

जगत जिसको कि हम मटेरियल वर्ल्ड कहेंगे और यह मटेरियल वर्ल्ड को समझने के लिए हमारे पास में मटेरियल साइंस है या तो फिर नेचुरल साइंस है अच्छा अभी ये मटेरियल वर्ल्ड के साथ में जो हम इंटरेक्ट करते हैं इस देह के माध्यम से यह देह पंचमहाभूत का बना हुआ है और इसमें पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रियां है और एक है मन बुद्धि चित्त और अहंकार मॉडर्न लैंग्वेज में यदि कहे तो यह जो पूरा वर्ल्ड है वो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन इस तरह के पार्टिकल और फिर और भी हजार सब सब एटॉमिक पार्टिकल है इन सबका बना हुआ है जैसे कि अपना शरीर भी इनका बना हुआ है शरीर का इतना ही है कि बायोलॉजिकल सेल्स है और इस सेल के भीतर में प्राण है तो यह हो गया एक बेसिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ मटेरियल वर्ल्ड इस देह के माध्यम से मैं इस मटेरियल वर्ल्ड के साथ में इंटरेक्ट करता हूं जिसको कि हम कर्म कहेंगे मैं जैसे कि मैं खाना पका हूं जैसे कि मैं बर्तन मांजता हूं जैसे कि मैं झाड़ू लगाता हूं जैसे कि मैं कपड़े धोता हूं ना कि चाहे मैं स्कूल में जाकर के पढ़ाई करता हूं पेन से लिखता हूं कंप्यूटर से टाइप करता हूं बाजार में जाकर के परचेसिंग करता हूं स्कूटर चलाता हूं कार चलाता हूं जो कुछ भी मैं करता हूं इस देह के माध्यम से इस जगत के साथ में मेरा इंटरेक्शन हो रहा है और इस इंटरेक्शन को हम लोग कहेंगे कर्मा और देखिए कि अ कर्मा के साथ-साथ में ही हमारा मन भी जुड़ा हुआ है जैसे कि अभी मैं रास्ते से स्कूटर लेकर के जा रहा हूं इमीडिएट देखा कि एक कार है वहां सामने से आ रही है तो मैंने अपने स्कूटर की डायरेक्शन थोड़ा सा चेंज करके कार को बायपास करके मैं निकल गया मैंने अपनी आंखों से देखा कि कार आ रही है मन से सोचा कि यदि मैं सीधा चलाता जाऊंगा तो कार के साथ में टकरा जाऊंगा मन ने अपनी जो अनुभव है पुराने अनुभव उसके भीतर में जो मेमोरीज पड़ी है जो डिसीजन मेकिंग पावर है सेल्फ प्रिजर्वेशन कैपेसिटी है इन सबको कंबाइन करके आदेश दिया इन दोनों हाथों को और पैरों को कि हां यह जो कार आती है इसको बाईपास करके चले जाइए अदर वाइज एक्सीडेंट हो जाएगा तो यह जो पूरा डे डे आफ्टर डे दिन प्रतिदिन प्रत्येक घंटा प्रत्येक सेकंड प्रत्येक घड़ी हमारे भीतर में यह यह तीनों जो एक्शन है इनपुट प्रोसेस आउटपुट अर्थात कि मैं चाहे कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय के माध्यम से विश्व को देखता हूं और फिर मन में इसको प्रोसेस करता हूं मैं क्या देख रहा हूं और इसके अनुसार मन का जो फिर प्रोसेस होकर के एक जो फाइनल कंक्लूजन आता है यह कंक्लूजन मैं अपने शरीर को वापस भेजता हूं आउटपुट और यह शरीर उसके अनुसार कर्म करता है यानी कि कर्म इनपुट प्रोसेस आउटपुट और कर्म यह कर्म की यह पूरी साइकल है कर्म करते-करते मुझे बहुत कुछ जानने को मिलता है देखने को मिलता है सुनने को मिलता है उसको मैं अपने मन के द्वारा प्रोसेस करता हूं और फिर प्रोसेस किया हुआ जो डिसीजन में मेकिंग है जो मैं निर्णय लेता हूं कुछ ना कुछ कुछ संकल्प लेता हूं वह सब मैं अपने शरीर को वापस भेजता हूं और उसके अनुसार मेरा शरीर इस जगत के साथ में इंटरेक्ट करेगा भविष्य का एक पूरा रास्ता बनाएगा हमारे माइंड में एक पूरा रहता है आज सुबह को उठे तो पूरा दिन भर क्या करना है या तो फिर अपनी कैरियर के साथ में क्या करना है अपने भविष्य के बारे में क्या करना है यदि स्टूडेंट है तो वे लोग सोचते हैं कि यह जो एग्जामिनेशन आ रहा है उसको पास करके फिर मुझे और कौन सी एग्जाम देनी है यदि आप जॉब करते हैं तो इसके बाद का स्टेज क्या है प्रमोशन क्या होना चाहिए फैमिली लाइफ में बच्चों के भविष्य के लिए क्या सेविंग होना चाहिए यह जो फ्यूचर ओरिएंटेड थिंकिंग है वह सब मन में होता है मन यह सब एक आउटपुट डिसाइड करता है एक निर्णय लेता है कि हां मुझे मेरे भविष्य के साथ में ऐसा करना है इस तरह के खतरे हैं इस तरह के चैलेंज हैं और आई हैव टू ओवरकम दिस डेंजर्स एंड दिस चैलेंज तो ऐसा करके मेरे शरीर को कमांड मिलता है मेरा शरीर उसके अनुसार कार्य करता है तो यह जो पूरा चक्र है मटेरियल वर्ल्ड में चलता है किंतु देखिए कि यह जो

Reflected world in our consciousness

मटेरियल वर्ल्ड है इसका एक रिफ्लेक्शन तो अपने माइंड में आता है क्योंकि तभी तो हम अपना जो माइंड है अपना जो मन बुद्धि चित्त अहंकार जिसको कि हम अंतःकरण कहते हैं यह अंतःकरण तभी तो इसके साथ में इंटरेक्ट कर पाएगा अपना मन जो है वो किसी आइडियाज के साथ में एक रिप्रेजेंटेशन के साथ में इंटरेक्ट करता है नहीं कि डायरेक्टली वर्ल्ड के साथ में इंटरेक्ट करता जैसे कि यह पेन है पेन को उठा कर के मुझे एक पत्र लिखना है अभी मैं एक सीनियर साधु को पत्र लिखूंगा बड़ा ही विनम्रता पूर्वक लिखूंगा यदि मेरा मित्र है उसको पत्र लिखूंगा तो वह थोड़ा सा इंफॉर्मेशन होगा यदि मैं अपना जो जूनियर है उसको पत्र लिखूंगा तो मैं उसको कोई उ कोई ना कोई उपदेश उसमें डाल दूंगा अभी देखिए कि मेरे हाथ को यह नहीं पता कि यह सीनियर को लिख रहा हूं कि जूनियर को लिख रहा हूं मुझे उपदेश देना है ना कि मुझे उनकी उनको एक प्रश्न करना है सीनियर है तो प्रश्न करना है बड़ा ही विनम्रता पूर्वक तो मेरे हाथ को यह सब नहीं पता हाथ सिर्फ पेन से लिखने का कार्य करता है मेरे मन को पता है किंतु मेरा मन जो है वह पेन के साथ में डायरेक्ट कार्य नहीं करता मेरे मन के भीतर में पेन का एक रिफ्लेक्शन है मेरे मन के भीतर में यह जो सीनियर साधु हो ना कि यह मेरा मित्र हो ना कि ये मेरे से जूनियर कोई हो इन सबका एक रिफ्लेक्शन मेरे माइंड में है एक मॉडल एक तैयार होता है मेरे माइंड के भीतर में इस जगत का और जो मेरा मन बुद्धि चित्त अह अकार है वह इस मॉडल के साथ में काम करते हैं बहुत बार देखिए कि हमारा व्यवहार

Why we succeed or fail in this world

और बाह्य जो वास्तविकता है इन दोनों के बीच में कभी-कभी मिसमैच हो जाता है क्यों मिसमैच होता है क्योंकि हम सिचुएशन को प्रॉपर्ली रीड नहीं कर पाते हम लोग समझ नहीं पाते कि एक्चुअली क्या हो रहा है क्यों ऐसा होता है क्यों क्योंकि अपना ये जो मेंटल मॉडल जो है अपने माइंड में कॉन्शसनेस में हमने यह जो वर्ल्ड का जो मॉडल क्रिएट किया है वह एक्यूरेट नहीं है कभी-कभी किसी के साथ में हमारी बहुत अच्छी मित्रता हो जाती है किसी-किसी के साथ में ऐसा होता है कि दुश्मना वट भी हो जाती है तो ऐसा क्यों होता है क्योंकि जो जिसके साथ में मित्रता होती है उसका जो साइकोलॉजी है वह एक्युरेटली मेरे माइंड में रिफ्लेक्ट होता है उसका जो मॉडल है वो एक परफेक्ट रूप में मेरे माइंड में रिफ्लेक्ट होता है मुझे पता है कि यह इसका क्या अ लाइक्स है क्या डिसलाइक्स है इसको कौन सी बात करने से इसको पसंद आएगा कौन सी बात करने से इसको पसंद नहीं आएगा तो ऑलवेज मैं इस मेंटल मॉडल के साथ में इंटरेक्ट करके फिर अल्टीमेटली मैं जो रियल पर्सन है उसके साथ में बात करता हूं और किसी के साथ में अन बनाव क्यों हो जाता है किसी के साथ में रिलेशनशिप क्यों टूट जाता है क्योंकि वो जो सामने वाला व्यक्ति है उसका साइकोलॉजी हमको ठीक-ठीक समझ में नहीं आता हम लोग सही आदमी मतलब रियल पर्सन के साथ में भले ही चाहे बात कर रहे हो हम जो डिसीजन मेकिंग करते हैं वह अपने माइंड में जो एक मॉडल खड़ा हुआ है उसके साथ में डिसीजन मेकिंग करते हैं अभी देखिए कि किस तरह से यह कंफ्लेक्स के साथ में एक बार मैं मेरे एक मित्र के साथ में बात कर रहा था तो अभी क्या है कि यह मित्र मेरे से ऐसी अपेक्षा रख रहा था कि वह जब भी कोई कोई मेजर एक इवेंट होती है ना दुर्गा पूजा है या कोई भी ओकेज होता है तो मैं उसको कोई एक गुड विश पठा हं भेजूं कि हां भाई चलो विजया का प्रणाम न कि वगैरह वगैरह जिससे क्या है कि वह दोनों के भीतर में एक रेगुलर कम्युनिकेशन बनता रहता है जबकि मेरा ऐसा था कि इस तरह से कोई एक आर्टिफिशियल मैसेज भेजने की बजाय मेरे माइंड में कोई विचार आता है अच्छा तो मैं उसके साथ में शेयर करूंगा और वो एप्रिशिया अभी देखिए कि कंफ्लेक्स यह एक्सपेक्टेशन था कि कोई भी त्यौहार होता है मैं उसको गुड विश भेजूं और मेरा ऐसा था कि इस तरह से आर्टिफिशियल कुछ नहीं भेज कर के जब भी कोई मैं अच्छा मेरे माइंड में विचार आया को कोई अच्छा आर्टिकल मुझे मिला वोह मैं उसके साथ शेयर करूं यह जो कंफ्लेक्स अंडरस्टैंडिंग ऑफ माय फ्रेंड उसके साथ में धीरे-धीरे करके मेरा एक रिश्ता जो है वो टूट गया वह सोचता है कि मैं बड़ा घमंडी हूं मैं उसके के साथ में बात नहीं करना चाहता और मैं सोचता हूं कि इस तरह से रेगुलर मैसेज भेजने से क्या लाभ है ये जस्ट एक मैं एग्जांपल दिया कि किस तरह से जो रियल वर्ल्ड है अपने माइंड में रिफ्लेक्ट होता है आजकल हम इस माइंड में

conscious model or virtual reality

जो रिफ्लेक्ट होता है आजकल की लैंग्वेज में कंप्यूटर की लैंग्वेज में इसको कहेंगे वर्चुअल रियालिटी अभी जैसे वर्चुअल रियलिटी में क्या होता है जैसे कि खास करके यह जो गेम्स होती है कंप्यूटर गेम या तो फिर यह वीडियो गेम जो भी को नाम दे उसमें क्या होता है एक पूरा वर्ल्ड खड़ा किया जाता है इस वर्ल्ड के साथ में फिर आप इंटरेक्ट कर सकते हैं जैसे कि आप शूटिंग कर सकते हैं जैसे कि आप गाड़ी चला सकते हैं कार चला सकते हैं बहुत कुछ कर सकते हैं यह 3डी मॉडल जो है वर्चुअल वर्ल्ड वह आपके साथ में गेम कंट्रोलर के माध्यम से इंटरेक्ट करता है वी आर नॉट डीलिंग विथ रियल वर्ल्ड वी आर डीलिंग विथ अ वर्चुअल वर्ल्ड तो यह जो हम अपने माइंड में जो इंटर करते हैं एक्चुअली सही सही में देखें तो हम लोग यह रियल वर्ल्ड के साथ में नहीं हमेशा इसका जो रिफ्लेक्शन अपने माइंड में है अपनी जो अंडरस्टैंडिंग है इस जगत की उसी के साथ में डील करते हैं उसी के साथ में हम व्यवहार करते हैं यदि हमारा अंडरस्टैंडिंग अच्छा है कि हां कि कोई भी एक व्यक्ति इस तरह से बिहेव करेगा इस सिचुएशन में यदि मैं हूं तो मैं मेरे साथ में इस तरह से होगा जैसे कि मैं स्टूडेंट हूं ठीक से स्टडी नहीं कर रहा हूं तो मेरे मार्क्स जो है परीक्षा का रिजल्ट है अच्छा नहीं आएगा और उसके बाद में जब मैं भविष्य में अपनी करियर को बनाने को जाऊंगा हमेशा मैं यह अपने एकेडमिक परफॉर्मेंस की वजह से मेरे प्रोग्रेस में प्रमोशन में एक लिमिट आ जाएगी बहुत बार लोग जीवन में फेल होते हैं ना पढ़ाई लिखाई ठीक से नहीं कर पाए बिजनेस करने को गए उसमें भी फेल हो गए जॉब कर र हैं तो प्रमोशन नहीं मिल रहा है क्यों ऐसा होता है क्योंकि वह फेल हो जाते हैं कि जगत को रीड करने में कि मुझे क्या करना चाहिए जिससे कि मैं जगत में सक्सेसफुल हूं कुछ-कुछ लोगों का नेचर होता

reading the situation

है ना लोग प्रशंसा करने का जो जॉब करते हैं उसमें से कोई कोई लोगों को पता है कि मैं चाहे जितना भी हार्ड वर्क कर लू मुझे यहां पर सिर्फ हार्ड वर्क से ज्यादा मेहनत से प्रमोशन नहीं मिलने वाला यह जो मेरा बॉस है उसकी ये ये वीकनेस है मेंटल वीकनेस उसको मैं यदि थोड़ा सा टच करूं यदि उसकी उसको प्रशंसा बहुत अच्छी लगती है तो मैं उसकी प्रशंसा करूं उसको एक तरह का इनसिक्योरिटी फीलिंग होता है तो मैं उसको इनकरेज करूं सब समय सब किसी-किसी को ऐसा होता है कि तुम मेरा पर्सनल काम कर दो ऑफिस का काम छोड़ दो तो मैं उनका पर्सनल काम कर दूं तो मुझे क्या है कि मैं बॉस की फेवर में आ जाऊंगा और मुझे प्रमोशन मिल जाएगा यह भी एक रेडिंग है दिस इज आल्सो एन एक्यूरेट रीडिंग ऑफ द सिचुएशन और जो लोग बड़े सिद्धांत वादी होते हैं कभी-कभी कि नहीं मैं अपने सिद्धांत के साथ में मैं जो सत्य वचन पालन करना ये वो वगैरह जो मैंने जो प्रिंसिपल्स है उसके साथ में मैं कंप्रोमाइज नहीं करूंगा तो वे लोग पीछे रह जाते हैं क्यों बात यह नहीं है कि उनके सिद्धांत गलत है उनकी जो प्रिंस उनके जो प्रिंसिपल है वो गलत है दे हैव नॉट बीन एबल टू रीड द सिचुएशन प्रॉपर्ली परिस्थिति को समझने में वे लोग असफल रहे हैं उनके बॉस का नेचर ऐसा है तो ऐसा करके ही प्रमोशन मिलेगा अदर वाइज नहीं मिलेगा अभी यह कहना मेरा उद्देश्य नहीं है कि आप प्रिंसिपल्स को छोड़ कर के जागतिक जो परिस्थिति है उसी के साथ में चले जस्ट एक ये अंडरस्टैंडिंग है कि अपना माइंड है इट ऑलवेज रिएक्ट्स टू द मेंटल मॉडल्स नॉट टू द रियल वर्ल्ड इट सेल्फ जो देखता है सुनता है कंपेयर करता है अपनी मेमोरी में क्या पड़ा हुआ है उसके अनुसार यह सिद्धांत लेता है निर्णय लेता है और उसके अनुसार यह मेरा शरीर कार्य करता है तो देखिए कि यह हो गया जगत का एक अंडरस्टैंडिंग नाउ वयर द वेदांत बिगिंस स्पिरिचुअल लाइफ कहां से स्टार्ट होता है स्पिरिचुअल लाइफ कहता है कि हां बाहर का जगत का रिफ्लेक्शन अपने माइंड में है और बाहर के जगत के साथ में हमको इंटरेक्ट करना है उसके साथ में रहना है बट आई हैव अ हायर वैल्यू अ हायर रीजन फॉर बीइंग क्योंकि मेरा मन भी तो ये मेंटल इमेज के साथ में इंटरेक्ट करता है तो जगत में जैसे कि मैं अपने हाथों से पेन से लिख रहा हूं अर्थात पेन है एक बाहर की वस्तु मेरा हाथ है मेरा सब्जेक्ट एंड ऑब्जेक्ट लिखने की क्रिया है इंटरेक्शन या तो कर्म तो वैसे ही यह जो मेंटल रिफ्लेक्शन है मेरे माइंड के भीतर में उसके साथ में मैं इंटरेक्ट कर रहा हूं मैं किसी एक व्यक्ति के बारे में सोच रहा हूं उसका नेचर ऐसा है तो मुझे उसके साथ में इस तरह से बिहेव करना होगा मैं किसी एक सिचुएशन को रीड कर रहा हूं कि मैं इस तरह की पर स्थिति में हूं मैं इस तरह से यदि बिहेव करूंगा तो यह परिस्थिति में मैं सक्सेस होऊंगा या तो मैं फेल होऊंगा मैं एक किताब लिख रहा हूं तो मेरा यह विषय वस्तु है लिखने का उसके बारे में मुझे कहां-कहां पर रिसर्च करना होगा कौन सा एक्सपर्ट ओपिनियन लेना होगा वगैरह वगैरह मैं जद एक वीडियो गेम डेवलप कर रहा हूं फॉर एग्जांपल तो कौन-कौन सा आइडियाज मार्केट में ज्यादा चलता है जिसको कहते हैं मार्केट रिसर्च वो करना होगा फिर मार्केट रिसर्च करने के बाद में मेरे पास में बेस्ट एक्सपर्टाइज्ड वर्किंग ऑन दैट वीडियो गेम तो यह बाहर के जगत के साथ में मैं जो इंटरेक्ट कर रहा हूं माइंड के भीतर में यह वर्चुअल रियलिटी के साथ में मैं इंटरेक्ट कर रहा हूं वहां पे भी यह तीन डिवीजन हो जाते हैं एक तो है ऑब्जेक्ट व्हिच इज दी रिफ्लेक्शन ऑफ एक्सटर्नल वर्ल्ड बाहर के जगत का जो एक प्रतिबिंब है मेरे मन के भीतर में में वो मेंटल ऑब्जेक्ट है मेरी जो प्योर अवेयरनेस है वो है सब्जेक्ट और यह प्योर अवेयरनेस इस मेंटल ऑब्जेक्ट के साथ में जगत के साथ में यह करती है डीलिंग करती है इंटरेक्शन करती है वो हो गया कर्मा जैसे कि दक्षिणामूर्ति स्तोत्र है विश्वम दर्पण दृश्य मानम नगरी तुल्य जगत क्या है दर्पण में जैसे कि एक नगरी दिखती है इस तरह से हमारे मन में इसका प्रतिबिंब होता है जैसे कि दर्पण अर्थात कि मिरर मिरर को आप चारों ओर घुमाइए बाहर में जो कुछ भी है सब मिरर के भीतर में आपको रिफ्लेक्ट होता हुआ दिखेगा मिरर को आप यह दर्पण है उसको आप पेड़ के सामने रख दीजिए दर्पण के भीतर में पेड़ दिखाई देगा या तो फिर कहेंगे पेड़ का एक रिफ्लेक्शन दिखाई देगा जब दर्पण के सामने आप एक चाहे कंप्यूटर रख दीजिए तो कंप्यूटर का रिफ्लेक्शन दर्पण में दिखाई देगा अब ये जो रिफ्लेक्शन है वो रियल कंप्यूटर है दे आर डिफरेंट तो यह दक्षिणामूर्ति स्तोत्र कहता है शंकराचार्य द्वारा रचित कि यह जो जगत है यह जगत है हमारे जिस तरह से दर्पण के ऊपर में प्रतिबिंबित वैसे ही हमारे मन में इस जगत का एक प्रतिबिंब खड़ा होता है हम इस प्रतिबिंब के साथ में डील करते हैं फिर

Jnana and Karma cannot stay together

शंकराचार्य क्या कहते हैं देखिए यह जो शंकराचार्य का एक लाइन में यदि कहा जाए कि अद्वैत वेदांत का क्या सिद्धांत है वह वो है कि कर्म और ज्ञान यह दोनों साथ में कभी नहीं रह सकते और क्यों वह ऐसा कहते हैं हम लोग इस बात को लेकर के स्वामी जी के साथ में शंकराचार्य का कंफ्लेक्स इतना कंफ्यूज हो जाते हैं कि हम लोग कहते हैं कि स्वामी जी ने कुछ अलग कहा है शंकराचार्य ने कुछ अलग कहा है बिल्कुल नहीं देखिए कि यह कर्म शंकराचार्य की दृष्टि से क्या है वो हम जो अपनी प्योर अवेयरनेस ये मेंटल रिफ्लेक्शन के साथ में जगत का यह जो वर्चुअल थडी मॉडल अपने मन में कॉन्शसनेस में हमने बनाया है उसके साथ में जब इंटरेक्ट करेगा तो कर्म खड़ा होता है मानसिक कर्म कॉन्शसनेस के भीतर में ही यह कर्म होता है जिस दिन यह कर्म कट गया सब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट का विच्छेदन हो गया सब्जेक्ट अर्थात कि मेरी प्योर अवेयरनेस जगत के इस रिफ्लेक्शन के साथ में काम करना ही बंद कर दिया उस दिन में और अवेयरनेस में स्थित हो जाऊंगा किंतु ऐसा नहीं है कि मेरा शरीर कर्म करना बंद कर देगा शरीर कर्म करता रहेगा व्ट डज इट मैटर अभी देखिए कि अभी यह पूरी सिचुएशन

Once I stop mental karma, I perceive the world as subject

को फिर से रिपीट करते हैं मैं अपने मित्र के साथ में बात कर रहा हूं मुझे पता नहीं कि मित्र का क्या ओपिनियन है मैं अपने मन के भीतर में मित्र के साथ मित्र का यह ओपिनियन है बोलकर के मैंने एक मेंटल मॉडल खड़ा किया है और उसके साथ में मैं काम कर रहा हूं अभी मान लीजिए कि मैं अपने मेंटल मॉडल के साथ में कनेक्शन कट कर देता हूं तो क्या होगा यह बाह्य जगत में मित्र तो वैसा ही रहेगा मेरे मन में किसी भी तरह का वार्तालाप नहीं हो रहा मित्र के साथ में किसी भी तरह का इंटरेक्शन नहीं हो रहा मेरा माइंड जो है वह प्योर अवेयरनेस में स्थित है जैसे ही ऐसा होगा यह प्योर अवेयरनेस इमीडिएट टर्न्स टुवर्ड्स द सुपरकॉन्शसनेस जोकि जहां पे पूरा जगत जो है उसका जो सेल्फ है दैट इज वहां पे रिफ्लेक्टेड है देखिए कि जगत को हम दो तरीके से पर्सीव कर सकते हैं वी कैन पर्सीव द वर्ल्ड एज एन ऑब्जेक्ट एंड वी कैन पर्सीव द वर्ल्ड एज ए सब्जेक्ट इट सेल्फ अर्थात कि मेरी कॉन्शसनेस इतनी फैल गई कि जगत को पूरा अपनी कॉन्शसनेस में अपनी अवेयरनेस में वह आवृत कर लेगी दिस इज द ट्रू अद्वैत वेदांत अद्वैत वेदांत क्या कहता है कि जगत में एक के अलावा दूसरा कुछ नहीं है कर्म और ज्ञान दोनों साथ में नहीं जा सकते हैं तो कर्म को काटा जैसे ही अपने माइंड को अपनी अवेयरनेस का जगत का जो रिफ्लेक्शन है उसके साथ में इंटरेक्शन हो रहा है उसको जैसे ही काटा मैं अपनी अवेयरनेस में स्थित हो गया और जैसे ही स्थित हुआ वैसे ही अवेयरनेस एक्सपें होना शुरू होगी और विद इन दिस अवेयरनेस एंटायस मोस विल बी कवर्ड इट माय अवेयरनेस विल एनवेलप एंटायस मोस क्योंकि अल्टीमेटली इस अवेयरनेस के अलावा और कुछ है ही नहीं यानी कि देखिए कि देयर आर टू

my awareness expands to envelope the world: How Thakur could read minds

स्टेप्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग वर्ल्ड पहले तो है कि यह जो मेरे माइंड में वर्ल्ड का जो रिफ्लेक्शन है जो 3डी मॉडल हाइपर डायमेंशन मॉडल मैंने अपने माइंड में खड़ा किया है इस जगत का उससे तो नाता तोड़ ही दो किंतु सेकंड स्टेज यह आएगा कि यह जो मटेरियल वर्ल्ड है उसको मैं जिस तरह से इंटरेक्ट कर रहा हूं या तो समझ रहा हूं एज एन ऑब्जेक्ट वो भी टूट जाएगा आई विल डील विद दिस वर्ल्ड एज अ सब्जेक्ट इट सेल्फ अभी क्या होगा अभी यदि मैं अपने मित्र को एक ऑब्जेक्ट के रूप में देखता हूं तो मेरे मन में हमेशा यह संदेह संशय बना रहेगा कि मेरा मित्र एक्चुअली मेरे से क्या चाहता है क्योंकि उसके मन में क्या है किसको पता किंतु व्हेन माय अवेयरनेस एक्सपेंड्स आई विल बी एबल टू कनेक्ट विद हिम ऑन अ हायर लेवल ऑन ए हायर कॉन्शसनेस लेव फिर उसके मन की जो गति है उसके मन का जो भाव है उसके मन के जो विचार है उसको मैं डायरेक्ट एक्सेस कर पाऊंगा ठाकुर के पास जो लोग आते थे ठाकुर उनके मन की बात समझ लेते थे क्यों क्योंकि ठाकुर उनको एज एन ऑब्जेक्ट नहीं देखते थे ठाकुर उनको अपना ही एक अंग के रूप में ही देखते थे अपना ही एक एक्सटेंशन के रूप में देखते थे इस हाथ में दर्द हो रहा है तो मुझे कोई डॉक्टर से समझने की जरूरत नहीं है कि इसमें दर्द हो रहा है हां डॉक्टर मुझे यह बताएगा कि दर्द क्यों हो रहा है और क्या ट्रीटमेंट होना चाहिए किंतु दर्द जो हो रहा है वो तो मैं डायरेक्टली समझ पा रहा हूं क्योंकि यह हाथ है इट्स अ पार्ट ऑफ माय ओन बॉडी ये मेरा ही एक अंग है मेरा ही एक हिस्सा है अलग से कुछ नहीं है हां दूसरों के हाथ में दर्द हो रहा है तो मैं नहीं समझ पाऊंगा क्यों क्योंकि वो दूसरे का हाथ है वो मेरा हाथ नहीं है इमीडिएट मेरा मित्र क्या सोच रहा है जब तक मैं उसको एज एन ऑब्जेक्ट ट्रीट करता हूं जब तक मैं अपने से बाहर में अलग कुछ है तब तक मैं उसके मन का भाव जो है मैं कल्पना और सब एक एक तरह का गेस वर्क करके ही चलाऊंगा कि हां वह ऐसा चाहता है उसकी बातों से मुझे ऐसा लगता है उसका यह प्रेफरेंस है ऐसा उसकी बातों से मुझे लग रहा है बट द मोमेंट आई कनेक्ट विद हिम एज अ सब्जेक्ट एज माय ओन एक्सपेंशन व मेरे ही मन का एक हि है तब उसके मन का भाव मेरे मन में पर एकदम स्पष्ट हो जाएगा समझ में आ जाएगा कि वह क्या कहना चाहता है क्यों इस तरह से बिहेव कर रहा है उसके जन्म जन्मांतर के कर्म मास्टर महाशय को ठाकुर कहते हैं कि तुमको तो पता है तो तुम्हारे जन्म जन्मांतर की बातें तुम कौन हो कहां से आए हो कहां जाने वाले हो सब कुछ पता है मुझे तो मास्टर महाशय कहते हैं कि हां मैं समझ पा रहा हूं मुझे पता है कि आपको मेरे बारे में सब कुछ पता है किस तरह से दिस इ पॉसिबल मास्टर महाशय के कर्म मास्टर महाशय के हैं ठाकुर के कर्म ठाकुर के हैं आप कहेंगे कि चलो ठाकुर अवतार है तो कोई जादू चमत्कार करके मास्टर महाशय के मन की बात समझ लेंगे बट देयर इज नो मैजिक इवॉल्वड इ अ प्योर वेदांत इफ देयर इज ओनली वन देयर आर नो डिफरेंट डिफरेंट सब्जेक्ट्स देन यू कैन डायरेक्टली एक्सेस एवरीथिंग अबाउट मास्टर महाशय अपने खुद के बारे में तो सही ही सही कि मेरे भूतकाल के जितने भी जन्म है पूर्व जन्म की जितनी भी कहानियां है जितने भी कर्म है जितना जो कुछ भी है वो सब तो मैं एक्सेस कर ही पा रहा हूं साथ-साथ में दूसरों के पूर्व जन्म वर्तमान जन्म और भविष्य उसको भी मैं डायरेक्टली एक्सेस कर पाऊंगा क्योंकि एक इस जगत में एक के अलावा और नहीं है एकम एव अद्वितीय एक के अलावा और कुछ भी नहीं है एक ही है अद्वितीय ही है एक मेवा द्वितीयं तो यह हो गया कि मेरी दृष्टि से वेदांत को किस तरह से इंटरप्रेट करेंगे हम लोग बहुत बार ये

Reconciliation between Swami Vivekananda's Karma Yoga and Shankaracharya's Jnana Yoga

कंफ्यूजन करते हैं कि मैं जैसे-जैसे वेदांत में आगे बढ़ता जाऊंगा मुझे कर्मा के साथ में नाता तोड़ देना है नहीं बिल्कुल नहीं बात ऐसा है कि मेरा जो माइंड है इट विल गो मोर एंड मोर सब्जेक्टिव सब्जेक्टिविटी की ओर जाता ही जाएगा मेरा कॉन्शसनेस है धीरे-धीरे करके एक्सपें होता ही जाएगा पूरे अपनी सब्जेक्टिविटी में प्योर अवेयरनेस के भीतर में पूरे जगत को व्यापत कर ही लेगा तो साथ-साथ में यह मटेरियल रियलिटी भी तो है जब स्वामी जी अद्वैत समझाते थे तो उनका एक ये था फॉलोवर था हम अमेरिकन को तो शिष्य नहीं कहेंगे डिसाइल नहीं कहेंगे वे लोग अपने को स्वामी जी के फॉलोवर या तो स्वामी जी के फ्रेंड्स करके पुकारते थे पहचानते थे तो ठीक है स्वामी जी का एक फॉलोवर था एक बूढ़ा डॉक्टर वो बड़ा ही मतलब उसका फनी नेचर था और बड़ी फनी कमेंट करता रहता था बीच-बीच में तो वो स्वामी जी को कहता है व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन मी एंड दिस कैबेज यह जो कोबी है और मेरे में क्या डिफरेंस है जदी आप कहते सब कुछ जदी ब्रह्म है स्वामी जी का खुद का वो ठाकुर का वो मजाक करके कहते हैं ना हजरा के साथ में बैठे स्वामी जी दक्षिणेश्वर काली मंदिर में और हाजरा को कहते हैं कि घटी भी ब्रह्म है बाटी भी ब्रह्म है तो अभी ठाकुर के पास में तो वह पावर था कि नरेंद्र को स्पर्श किया सही सही में अनुभव होने लगा कि घटी ही मतलब मैं ही हूं जो कि सब कुछ चीजों में विस्तृत हुआ हूं यदि वो रास्ते से जा रहे हैं घोड़ा गाड़ी आ रही है ऐसा नहीं है कि मैं अपने को बचाओ मैं भी वही हूं घोड़ा गाड़ी भी वही है दोनों में एक्सीडेंट हुआ मृत्यु भी मेरा ही होगा जन्म भी मैं ही हूं मैं ही दूंगा मने एवरीथिंग इ यदि वन है तो वई शुड आई प्रिजर्व माइसेल्फ इस सेल्फ प्रिजर्वेशन की बात ही चली जाएगी अपने माइंड में से तो ठाकुर के पास में तो वो पावर था कि स्वामी जी को स्पर्श करके ब्रह्मज्ञान दिलवा दे ठाकुर के पास में पावर भी था और नरेंद्र के पास में एलिजिबिलिटी भी थी किंतु यह जो बुढ़ा डॉक्टर है ना ही उसकी ऐसी कोई एलिजिबिलिटी है कि वो स्वामी जी उसको स्पर्श करके सम जाद कि वो कैबेज है और उनमें क्या डिफरेंस है तो किंतु स्वामी जी के पास में यह वाणी का प्रवाह था मने वाणी की शक्ति थी तो इमीडिएट स्वामी जी कहते हैं स्टिक ए नाइफ इन टू योर लेग एंड यू विल फाइंड आउट व्हाट इज द डिफरेंस अपने पैर में चाकू मारो अभी पता चल जाएगा कि ये कोबी और तुम्हारे पैर में क्या डिफरेंस है सो दैट रियलिटी जो है

objective reality on physical level, subjective reality on consious level

ऑब्जेक्टिव रियलिटी इट विल ऑलवेज रिमन और हमको इसके साथ में कर्म करना ही है किंतु साथ-साथ में भी यह भी ख्याल रखना है कि मटेरियल वर्ल्ड और यह कॉन्शियस वर्ल्ड ये दोनों डिफरेंट है बहुत बार हम लोग यह कॉन्शियस नेस जो है अपनी इसको एक सेपरेट ऑब्जेक्ट है मटेरियल वर्ल्ड से यह समझ ही नहीं पाते होता क्या है बाहर के जगत में जो कोई घटना होती है किसी का मृत्यु हुआ तो उसके शौक में हम बिल्कुल ही यह हो गए भीतर से मायूस हो गए यदि मुझे प्रमोशन मिला तो इतना हंसी खुशी हुआ इतना आनंद आया कि उसका घमंड मेरे सर पर सवार हो गया और जिसको प्रम नहीं मिला या तो फिर दूसरे लोग हैं उनको मैंने डांटना शुरू कर दिया उनके साथ में मिसबिहेव करना शुरू कर दिया तो यह बाहर की खुशी या बाहर का गम सीधा अपने सर पर सवार हो जाता है और हम उसी के अनुसार बिहेव करना शुरू करते हैं इसके साथ में प्रॉब्लम यह है कि बाहर में जैसे ही परिस्थिति चेंज होगी वैसे ही अपना माइंड अप है तो डाउन हो जाएगा डाउन है तो अप हो जाएगा हमको समझ में नहीं आ रहा है कि बाहर की परिस्थिति जैसे-जैसे चेंज होती है और प्रॉब्लम यह है कि बाहर की तो परिस्थिति चेंज होगी लोगों का बिहेवियर हमारे साथ में है जो सिचुएशन में हम रह रहे हैं यह परिवर्तन ही तो संसार का नियम है आज मैं बहुत अच्छी सिचुएशन में हूं आई हैव ए वेरी गुड फैमिली लाइफ आई हैव ए वेरी गुड बिजनेस या तो जॉब करियर आई हैव गुड हेल्थ किंतु यह फैमिली है ना कि कैरियर है ना कि हेल्थ है ना कि इवन फिर ये नेशनल लाइफ है ऐसा तो नहीं है कि मैंने अपना एक अच्छा सा घर बना दिया और बाहर में जो हो रहा है वह पता नहीं यह तो मैं देख रहा था मैं जब स्क में जाता था उस समय हमारे शहर में बहुत बार रायोट होते थे तो ये जैसे ही रायोट हुआ स्कूल बंद हो गया हम अपने घर में बैठ गए डर के मारे बाहर नहीं निकलना है एक बार ऐसा था कि हमारे शहर में रायोट हो रहा है मुझे वो वो स्टोन है ना पथरी उसका एकदम पेन चालू हुआ अभी रात की बात है बाहर में रायोट हो रहा है अभी मैंने सोचा और जो स्टोन का जो किडनी स्टोन जिसको कहते हैं उसका जो पेन है ना बड़ा ही भयानक पेन है जिसको हुआ है उसको समझ में आएगा अभी रात को मुझे यह पेन हो रहा है और बाहर में चल रहे हैं रायोट मैंने सोचा कि जदी मैं मेरे पापा को कहूंगा वो बेचारे टेंशन में आ जाएंगे कि ये अभी कहां बाहर जाएंगे जान का खतरा है तो मैंने सोचा किसी को बताते नहीं है यह रात निकाल देते हैं कैसे भी करके फिर सुबह को देखा जाएगा उस रात को मुझे इतना पेन हुआ था इतना पेन हुआ था किंतु कैसे भी करके मैंने रात निकाल दी ठाकुर की कृपा से फिर दूसरे दिन सुबह को बताया तो वो कर्फ्यू जो हुआ था शहर में तो कर्फ्यू में एक घंटा ऐसा कुछ वो रिलीफ देते थे तो उसी समय जाकर के डॉक्टर के पास जाकर के दवाई लेकर आ गए तो देखिए ऐसा नहीं है कि मैंने मैंने अपना सब कुछ ठीक करके रखा कैरियर है फैमिली है हेल्थ है किंतु बाहर के जगत का फिर इसके ऊपर में आक्रमण नहीं होगा यानी कि यह परिवर्तन संसार का नियम है और यह जो अन पलेजर प्राइज जिसको हम कहते हैं हमेशा नेक्स्ट वह कॉर्नर के ऊपर में हमको एंबुश करने के लिए वो खड़ी है सो देयर ऑलवेज विल बी समथिंग चैलेंजिंग समथिंग सरप्राइज समथिंग अनप्लेज्ड फॉर अस और उसके साथ में मेरा मन भी यदि झोला खाना शुरू कर दे तो फिर तो मेरी मानसिक अवस्था क्या होगी सो ऑलवेज रिमेंबर टू डिसोसिएट अवर कॉन्शसनेस फ्रॉम द वेगस ऑफ एक्सटर्नल वर्ल्ड बाहर के जगत में जो परिवर्तन हो रहा है जो नेक्स्ट अनप्लेज्ड में मेरा कॉन्शसनेस इज सो फोर्टिफाइंग कि उसकी असर भीतर में नहीं होगी जब मेरा

Make the world our own

कॉन्शसनेस स्ट्रांग रहेगा वैसे ही वह एक्सपें होना शुरू होगा भूत भविष्य वर्तमान इसका एक डीपर इनसाइट मेरे सामने ओपन होना शुरू होगा उसके बाद में क्या होगा कि आई विल हैव अ डीप अंडरस्टैंडिंग ऑफ व्हाट इज हैपनिंग इन दिस वर्ल्ड इनसाइड में क्या हो रहा है वह तो है ही है बाहर के जगत को भी तो मैं एज ए सब्जेक्ट देख रहा हूं क्या सिचुएशन को रीड करना किसी पर्सन को रीड करना किसी इवेंट को रीड करना मैं वो मेरी अंडरस्टैंडिंग इतनी पावरफुल हो जाएगी कि आई विल बी एबल टू डील विथ इट इन अ मच बेटर वे ये जितने भी आध्यात्मिक होते हैं हमको लगता है क्या ये लोग बिल्कुल ही मैंने अदर वर्ल्डली है एब्सेंट माइंडेड है ये लोगों को पता ही नहीं जगत में क्या करना है कैसे करना है किंतु ठाकुर को देखिए मां को जब शिक्षा देनी थी तो ठाकुर ने कौन से दोनों टॉपिक सिलेक्ट किए एक तो लोक व्यवहार दूसरा है आध्यात्मिकता अर्थात कि यह जगत को आपको तज नहीं देना है जगत को आपको कट नहीं कर देना है कट ऑफ नहीं कर देना है बट टू कन्वर्ट इट फ्रॉम ऑब्जेक्ट टू सब्जेक्ट म जिसको आप एक्सटर्नल जो समझते हैं कंसीडर इट पार्ट ऑफ योर ओन देन योर अंडरस्टैंडिंग योर इनसाइट विल डिपेन अबाउट दिस एक्सटर्नल वर्ल्ड एंड मने ये इनसाइट डेवलप करना या यह सब तो छोटी-मोटी चीजें हैं चलो जगत में रहना इससे आसान हो जाता है किंतु द मोर वी गो टुवर्ड्स द स्पिरिचुअल एनलाइन मेंट यह जो आध्यात्मिकता के एक के बाद एक शिखर हम सर करते जाएंगे तब क्या होगा कि हम इसकी जो समिट है एवरेस्ट या तो फिर कहो कि माउंट कैलाश वहां तक जब पहुंचेंगे पता चलेगा कि सिर्फ सब्जेक्ट ही है द ऑब्जेक्ट हैज डिसअपीयर्ड ये जो हम जिसको अपने से बाहर में जो कुछ गिनते हैं उसका इंडिपेंडेंट कोई अस्तित्व नहीं है दे आर पार्ट ऑफ माय ओन सेल्फ इसके बाद में अभी जैसे ठाकुर का और नरेद का वार्तालाप हो

the world is a stage: Thakur & Naren's discussion

रहा है वो गिरीश घोष के वहां पर गए हैं थिएटर देख रहे हैं तो फिर नरेद कहता है कि यह पूरा जगत जो है वह थिएटर है द होल वर्ल्ड इज स्टेज वो शेक्सपियर का जो फेमस कोटेशन है तो ठाकुर इमीडिएट कहते हैं हां हां किंतु कोथा विद्या र खेला कोथा है अविद्या र खेला अर्थात कि हां जगत यह आप कह सकते हैं कि रंग मंच है किंतु कहां पर विद्या का खेल चल रहा है कहीं पर अविद्या का खेल चल रहा है तो नरेंद्र भी तो कम नहीं था वो कहता है सबाही विद्या खेला ना जो कुछ भी है सब विद्या का खेल है तो ठाकुर इमीडिएट एग्री होते हैं हां हां बिल्कुल ठीक कहा किंतु वो कब निर्विकल्प समाधि के बाद में पहले तो अविद्या के संसार से मुक्ति प्राप्त करो उस के बाद में निर्विकल्प समाधि प्राप्त होगी फिर जब आप संसार में वापस आएंगे तो पता चलेगा कि जो दुष्चिंता है उसके भीतर में भी वही ब्रह्मण है जो सत चरित्र व्यक्ति है उसके भीतर में भी वही ब्रह्मण है जो राक्षस है ना कि जो देवता है सभी वही ब्रह्म ज्योति से ही उनके भीतर में प्राणों की रक्षा होती है तो वो किंतु कब जब निर्विकल्प समाधि के बाद में तो देखिए ये जो वेस्टर्न फिलोसोफी के ऊपर में ये इंडियन अंडरस्टैंडिंग कितनी पावरफुल है आप यह तो कह दिए कहने के लिए कि जगत पूरा रंग मंच है हम लोग यहां पर अपना अभिनय करने के लिए आए हैं ये ऐसा कहने से हमारा एक थोड़ा सा डिस एसोसिएशन होगा किंतु देर इज अ सटल अंडर इनसाइट इनटू दिस आइडिया कि जब तक अविद्या का राज्य है तब तक हमको उससे मुक्त होना होगा यदि हम अविद्या से मुक्त नहीं होंगे तब तक हम कोई एक आध्यात्मिक शिखर पर सवार नहीं हो पाएंगे आध्यात्मिक विजय नहीं प्राप्त कर पाएंगे और जब तक आध्यात्मिक विजय प्राप्त नहीं होती है तब तक इस जगत को हम सही सही इसको समझ नहीं पाएंगे जगत के साथ में हम एकाकार नहीं हो पाएंगे सो यह पूरा चक्र है जर्नी है कि

Life cycle of spiritual enlightenment

क्या कहेंगे लाइफ साइकल कि पहले तो यह ऑब्जेक्टिव वर्ल्ड है हमको इस ऑब्जेक्टिव वर्ल्ड से मेरा कॉन्शियस वर्ल्ड जो है इट इज अ डिफरेंट ये मेरा सब्जेक्टिव वर्ल्ड जो है इट इज डिफरेंट यह समझना है कि मटेरियल रियलिटी और यह कॉन्शियस उसका जो रिफ्लेक्शन विश्वम दर्पण दृश्य मानम नगरी तुल्य ये दर्पण के भीतर में जो प्रतीयूष में अर्थात कि बाहर का कार्य तो वैसा चलता ही रहेगा मटेरियल वर्ल्ड में कॉन्शियस वर्ल्ड में मुझे डिसोसिएट होना है फ्रॉम द रिफ्लेक्शन ऑफ दिस एक्सटर्नल वर्ल्ड एंड मेरी अवेयरनेस जैसे ही मेरी अवेयरनेस इस कॉन्शियस रिफ्लेक्शन से सेपरेट हुई वैसे ही वह एक्सपें होना शुरू होगी और इस ऑब्जेक्टिव वर्ल्ड को पूरा सब्जेक्टिव बना कर के रख देगी सो दिस इज द लाइफ साइकल अभी क्या है कि देखिए हम लोग जैसे मैंने

We all develope our own Vedanta

स्टार्टिंग में कहा कि हम सभी लोग अपनी अपनी एक-एक अंडरस्टैंडिंग डेवलप करते हैं इस अंडरस्टैंडिंग को जैसे-जैसे हम डेवलप कर पाएंगे टेकन फ्रॉम अवर ओन लिटरेचर ऐसा नहीं है कि नया कुछ हम लोग कर रहे हैं अभी जैसे वो एक आयन है तो उसने वो विज्ञान वाद बोल कर के किया है हिज ओन अंडरस्टैंडिंग ऑफ व्हाट ठाकुर सेज राइट द हम लोग भी जितने भी लोग हैं हम सभी लोग अपना एक इंडिविजुअल अंडरस्टैंडिंग डेवलप करते हैं और इस मॉडल के माध्यम से हम बाकी सब कुछ इंटरप्रेट करते हैं मेरे माइंड में अभी एक इंटेलेक्चुअल मॉडल तैयार हो गया अभी इस मॉडल के माध्यम से मैं ठाकुर की जितनी भी बातें पढ़ूंगा स्वामी जी को पढ़ूंगा शास्त्र पढ़ूंगा तो इसी के अनुसार मैं उसको इंटरप्रेट करता जाऊंगा कि हां ये कहना क्या चाहते हैं यदि हमारे पास में ऐसा एक इंटेलेक्चुअल मॉडल तैयार नहीं है हम डायरेक्ट कुछ पढ़ना शुरू करते हैं प्रॉब्लम क्या होता है कि इतने कंफ्लेक्स आइडियाज हमको दिखते हैं अपेरेंटली कंफ्लेक्स से दिखता है कंफ्लेक्स हो जाते हैं कि फिर हम उसमें डिटेल में जा नहीं पाते और हार करके छोड़ देते हैं कहते हैं अरे इसमें ज्यादा कुछ है नहीं छोड़ो इसको अभी इस या तो फिर कहेंगे इस जन्म में होने वाला नहीं है नेक्स्ट जन्म में इसको समझ लेंगे किंतु वंस वी अवर इंटेलेक्चुअल मॉडल इज रेडी एवरीथिंग वी रीड एवरीथिंग वी लिस हियर एवरीथिंग वी कम टू नो अबाउट वी कैन इजली इंटरप्रेट इट अभी क्या है कि मेरा यह जो आर्टिकुलेशन है धीरे-धीरे करके डेवलप होगा यह मॉडल मैं कुछ समय से डेवलप कर रहा हूं आर्टिकुलेट इतना प्रॉपर्ली शायद ना भी हो किंतु जैसे-जैसे मैं इसके ऊपर मैं रिफ्लेक्ट करता जाऊंगा इसको मैं ज्यादा से ज्यादा एक्सपें करता जाऊंगा उसको मोर आर्टिकुलेट करूंगा उसको मोर मैं कंप्रिहेंसिव बनाऊंगा एक के बाद एक शास्त्र को इसके साथ में जोड़ कर के उसको मैं इंटरप्रेट करने का प्रयास करूंगा वि इज अ लंग प्रोसेस बट एटलीस्ट ट माय मेंटल मॉडल इज रेडी इंटेलेक्चुअल मॉडल इज रेडी कि इसके अनुसार मुझे सब कुछ इंटरप्रेट करना है तो मैंने सोचा कि थोड़ा इसको भी शेयर कर लू अभी कल ऑलरेडी आर्टिफिशियल कॉन्शसनेस के बारे में बात कर रहे थे तो मैंने सोचा आजकल आज वंतिंतलो ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु इसको ना जैसे हम कहते हैं एंपैथी कि

Q: किसी परिस्थिति को दूसरों के नज़रिए से देखना सीखें। इससे संघर्ष के समाधान में मदद मिलेगी।

दूसरों के पॉइंट ऑफ व्यू से जगत को देखना अभी अभी जैसे देखिए एक सिंपल चीज है दो भाई बहन है अभी एक मिठाई आपने माने दे दी बोला शेयर करो तो अभी क्या होगा जो जो बड़ा है जिसमें ज्यादा ताकत है वोह बोलेगा मैं ज्यादा मिठाई लूंगा इसको कम दूंगा मेरे भाई को या मेरी बहन को तो अभी क्या है कि वह अपनी सेल्फिश बस से सोच रहा है एंपैथी होगी तो हमको लगेगा कि मैं ज्यादा ले रहा हूं तो उसको दुख होगा वो देखेगा कि मुझे कम दिया उसने ज्यादा दिया सो आई विल बी एबल टू अंडरस्टैंड हिज और हर पेन दिस इज कॉल्ड एंपैथी जो लोग क्रिमिनल होते हैं इन लोगों में एंपैथी नहीं होती वो एक मेंटल डिसीज जैसा है उन लोगों का कि किसी को हम करते हैं तो समझ नहीं पाते कि इसको पेन हो रहा है इसको पीड़ा हो रही है लो किसी-किसी को आनंद आता है दूसरे को दुख पहुंचाने में कष्ट पहुंचाने में तो दिस इज अ सॉर्ट ऑफ मेंटल डिसीज कि आपके भीतर में एंपैथी नहीं है दूसरों का पेन आप समझ नहीं पाते और जितने ग्रेट लोग होते हैं ना वो चाहे ग्रेट अभिनेता हो कि चाहे ग्रेट बिजनेसमैन हो चाहे ग्रेट पॉलिटिशियन हो इनकी एंपैथी है ना बड़ी स्ट्रांग डेवलप होती है भले चाहे उसका यूज वो पॉजिटिव वे में करे कि नेगेटिव वे में करे सामने वाला मैं जो करता हूं उससे कैसे रिएक्ट करेगा वो बड़ा ही इजली ये लोग समझ पाते हैं फिर वो उसको पेन देना है मुझे उसको पीड़ा मने उसको मुझे दुखी करना है तो मैं जानबूझ के ऐसा करूंगा जिससे कि उसको ज्यादा से ज्यादा दुख हो किसी को मुझे मतलब आनंद देना है तो मैं इस तरह से बिहेव करूंगा कि ही विल बी एबल टू एंजॉय द लाइफ राइट बट ये कनेक्शन बड़ा उनका पक्का होता है ये लोग जो एंपैथी जिनमें होती है दे बिकम वेरी सक्सेसफुल सोशली इन एवरी फील्ड जो मतदाता

Q: लोगों के मन की बात समझने में राजनेता हमसे बेहतर हैं

का मन का क्या भाव है वो अभी ट्रंप ट्रंप क्यों जीतता है बार-बार उसको पता है कि लोगों को क्या चाहिए तो वही बात करता है एथिक्स को मारो गोली लोगों को यह चाहिए मैं उनको यह दूंगा ये जो अभिनेता होते हैं ना अभिनेता का सबसे स्ट्रांग ये एबिलिटी होता है जिस पात्र में अपने को डालेगा ऐसा हो जाएगा ये गिरीश घोष है ना उसके सीरीज ऑफ पिक्चर्स है वो तो अभिनेता था तो नाट्य का था तो हस्य रस तो एकदम जोर से हंस रहा है फिर ये करुण रस तो चेहरा एकदम करुण हो गया है वीर रस तो वीर रस वाला चेहरा ऐसा सीरीज ऑफ पिक्चर्स उसने खींचे है और प्रत्येक चेहरे पे देखेंगे ना वो लगेगा अरे ये तो वीरता से भरा हुआ है अरे ये तो करुणा से भरा हुआ अरे ये तो दुखी है एक्चुअली ही हैज डिस एसोसिएटेड हिमसेल्फ एंड फिर वो जो पात्र का अभ नहीं करता है वो पात्र के अनुसार अपने को ढल देता है सो मने अगेन एज यू सेड कि इसका स्पिरिचुअल डेवलपमेंट के रूप में आप ले कि ना ले बट इज अ वेरी गुड लाइफ स्किल नर्तकी की

Q: ठाकुर कितने प्रभावी ढंग से अभिनय करते थे

एक्टिंग करते थे देखिए मेरा जो सोचना है

Q: हमें सभी को उच्चतम अद्वैत की शिक्षा नहीं देनी चाहिए। इससे कुछ लोगों को हानि हो सकती है।

मैं कहता हूं कि यह जो साइंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी है ना उसको बचपन से ही स्कूल में ही सिखाना शुरू कर देना चाहिए जिससे कि क्या होगा बाय द टाइम दे आर एडल्ट बाय द टाइम दे आर ग्रेजुएट दे विल हैव अ वेरी गुड अंडरस्टैंडिंग ऑफ व्हाट इज द वर्ल्ड व्हाट इज द रियल नेचर ऑफ द वर्ल्ड फिर वो उसका इस मतलब अप्लाई करे ना करे अपनी फ्यूचर लाइफ में देर अंडरस्टैंडिंग विल बी वेरी क्लियर एंड दे विल बी मच मोर मैच्योर पर्सन आल्सो आज जगत में जितने भी दुख है ना उसका एक ही कारण है कि लोगों में एंपैथी नहीं है भारत में देखिए भारत में क्या पैसा नहीं है आज जो टॉप 5 पर टॉप % कहते हैं वे लोगों के पास में इतना रुपया है कि पूरे भारत को बिठा कर के खिलाना चाहे तो खिला सकते हैं इन स्पाइट ऑफ दैट आज प्रॉब्लम क्या है कि 50 60 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से नीचे जी रहे हैं मैं अब बाहर में जाके देखिए लोग फुट पाट पे रहते हैं वो भूखे नंगे रहते हैं कुछ भी बीमार हो जाए तो ट्रीटमेंट के लिए रुपया नहीं है और महानगर की यह बात है आप ट्राइबल एरियाज में रूरल एरियाज में जाकर के देख लीजिए लोगों की जो परिस्थिति है इट इज सो पेनफुल अभी ऐसा नहीं है कि भारत में इन लोगों का इलाज नहीं है प्रॉब्लम इज दैट कि जो लोग धनी है सुपर रिच है वो लोग एक ही चीज चाहते हैं कि मैं लेट मी मैक्सिमाइज माय प्रॉफिट मोर एंड मोर कैपिटल ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्ट करते जाओ और ज्यादा प्रोडक्शन करते जाओ अभी व्हाट इज द एम ऑफ दैट प्रोडक्शन तो है कि मुझे आत्म संतुष्टि मिलती है मेरा ईगो पोषण होता है वगैरह वगैरह बट इन द अदर हैंड देखिए तो ये लोगों की क्या परिस्थिति है राइट सो ये एंपैथी का नहीं होना इस जगत का सबसे बड़ा प्रॉब्लम है यदि एंपैथी फैले तो बहुत सारे इश्यूज सॉल्व हो जाएंगे इन दैट केस हम ऐसा कहना कि जद मैं इसको कुछ सिखा दूंगा व्हिच विल बी हार्मफुल टू हिम ये कंसीडरेशन है ना वो माने उसका इतना वेटेज नहीं होता माने आप एक काम कीजिए मैं एक काम कर रहा हूं यह काम करने से करोड़ों को फायदा है हो सकता है 1015 लोगों को नुकसान है इन ट केस आई हैव टू बहुजन हिताय बहुजन सुखाय ज्यादा से ज्यादा लोगों को मेजोरिटी को जो बेनिफिट हो रहा है वह काम मुझे करना है सो दैट इज व्हाट आई बिलीव कि टीच पीपल स्पिरिचुअलिटी एटलीस्ट लेट देम लर्न द प्रैक्टिकल एस्पेक्ट ऑफ स्पिरिचुअलिटी व्हिच इज एंपैथी व्हिच इज कंपेज स्वामी जी अमेरिका धनी के घर में रह रहे हैं किंतु वह इतना सुंदर बेड सजा के दिया है उसके ऊपर नहीं सो के जमीन पर सो कर के रो रहे हैं मेरे पास में इतनी लग्जरी है मेरे भाई बांधव के पास में क्या है स्वामी जी चाहते तो हावर्ड यूनिवर्सिटी में उनको संस्कृत के प्रोफेसर की पोस्ट मिलती थी पूरा लाइफ सेट करके बैठ जाते है किंतु ऐसा नहीं करके भारत आए कितना कष्ट किया रामकृष्ण संघ की स्थापना की राइट आखिर में उनको 39 की एज में उनको प्राण त्यागना पड़ा स्वामी जी कहते क्या है पता है व जब भारत में आए ना तब से उनका हेल्थ बिगड़ा है सेकंड टाइम जब फर्स्ट टाइम जब अमेरिका से लौटे थे डायबिटीज उनका तब से स्टार्ट हुआ क्योंकि यूरोप की और अमेरिका में हेल्दी सब होता है ना पानी है खाना है वगैरह और यहां पर तो एकदम रफ है सब कुछ तो वह जो उनका हेल्थ जो डिटेट है ना स्टार्ट हुआ अस्थमा और डायबिटीज जो उनको लग गया व फिर उसने उनका जीवन ले लिया तो स्वामी जी कोड़े सेट हिमसेल्फ वेरी इजली एंड यट ही केम बैक सो ये जो प्रैक्टिकल स्पेक्ट जो है स्पिरिचुअलिटी का लेट देम टीच इट टू एवरी वन ऑफ फिर यदि किसी को नुकसान होता है नहीं होता है आई थिंक वी आर रेडी टू टेक दैट मच रिस्क देखिए यदि हम साधना करते हैं तो

Q: माँ सारदा ने कहा था: हमें अपने कर्मों के परिणाम भुगतने पड़ते हैं, लेकिन जप कर्म की तीव्रता को कम करता है। अब, क्या जप वास्तविक दुख को कम करता है या सिर्फ दुख के प्रति हमारी प्रतिक्रिया को।

हमारे साथ वह होगा जो कि हमारे आध्यात्मिक जीवन के लिए अच्छा है मान लीजिए कि मुझे रोग होने वाला था तो रोग होने से फिर मैं तो साधना में विक्षेप होगा तो रोग का जो इंटेंसिटी है कम हो गया मान लीजिए मुझे वेल्थ मिलना ने वाला था बहुत सारा पैसा मिलने वाला था तो पैसों का दो रिएक्शन हो सकता है या तो मेरा घमंड बढ़ जाता या तो फिर मैं उदार हृदय होकर के मुक्त हस्त से उसको दान करता तो मेरा रिएक्शन क्या होना चाहिए क्या होगा उसके बेस पर यह इसका रिफ्लेक्शन होता है अभी जैसे कि मथुर बाबू है मथुर बाबू उनकी पत्नी जब बीमार हो गई तो ठाकुर के पास रोते-रोते गए अभी काली मंदिर तो मथुर बाबू का नहीं है वो तो राणी राजमणि की पुत्री का है और यदि उस की पुत्री का देहांत हुआ अपनी पत्नी का देहांत हुआ तो उसके मंदिर के ऊपर में से उनका कंट्रोल चला जाएगा ठाकुर को क्या कहते हैं कैसे भी करके मेरी पत्नी की बीमारी ठीक कर दीजिए बात मुझे इस बात का गम नहीं कि मंदिर चला जाएगा मेरे कंट्रोल में से आपकी सेवा मैं नहीं कर पाऊंगा तो ठाकुर ने उसकी बात मान ली तो उसको वेल्थ दिया अभी ऐसा कभी-कभी होता है कि यदि वेल्थ किसी के सबी स्वामी जी है स्वामी जी सक्सेसफुल हो सकते थे जीवन में किंतु ठाकुर ने क्या कहा फिर क्या होगा कि वोह केशव सैन की तरह एक दलपति टल हो कर के रह जाएगा तो वेल्थ का क्या इफेक्ट आपकी आध्यात्मिक जर्नी पर होना था उसके बेस पर ये होता है मथुर बाबू को काली मंदिर का आधिपत्य दे दिया और नरेंद्र को रास्ते पर लाकर के खड़ा कर दिया जो कि राइट सो व्हाट इज गुड फॉर अस वो होगा दूसरा कि देखिए जैसे कि आपने कहा कि दो तरह के तीर है एक तो हमको फिजिकली इफेक्ट करते हैं दूसरा कि अपना जो रिएक्शन है उसके प्रति वो होता है अभी जैसे कि ठाकुर वो उदाहरण देते हैं एक औरत है झाड़ू लगा रही है किसी ने आकर के कहा वो व्यक्ति का मृत्यु हो गया तो अभी जो व्यक्ति उसके साथ में रिलेटेड नहीं होगा तो वो झाड़ू लगाते लगाते बोलेगी अरे तो बहुत बुरा हुआ वो तो अच्छा आदमी था बेचारा मर गया क्या करें तो जैसे ईश्वर की इच्छा बोल कर के वो झाड़ू लगाती रहेगी किंतु यदि जिसका मृत्यु हुआ है वो उस औरत का यदि आत्मीय होता तो झाड़ू छूट जाता वो जमीन पर बैठ जाती और रोना शुरू कर देती राइट सो दोनों केस में मृत्यु हुआ है बट उसका रिएक्शन इज डिफरेंट नाउ यहां पर हमको यह देखना है कि देखिए एट द एंड जद वेदांतिका लगेगा तो माने पेर का मने पेर टूटना है तो पेर टूटेगा माने पेर टूटने की बजाय लिटरली मुझे सिर्फ कांटा लगा या तो फिर मेरा रिएक्शन कांटा लगने जैसा आया नहीं कि पेर टूटने जैसा राइट पेर टूटा तो उसके दो रिएक्शन आते हैं पेर टूटा वो वाला रिएक्शन आएगा या तो फिर नहीं काटा ही लगा है वो वाला रिएक्शन आएगा राइट सो दैट इज अ गुड क्वेश्चन कि एक्चुअल पेर टूटता है और कांटा लगता है वो फिजिकल वर्ल्ड में होता है कि वो रिएक्शन में होता है तो यहां पे वेदांत क्या कहता है एट द एंड ऑफ द डे एवरीथिंग इज सब्जेक्टिव राइट हमारा ये जो जर्नी है ऑब्जेक्टिव से सब्जेक्टिव की ओर जाता है तो हम किस लेवल प पहुंचे हैं यदि हम ऑब्जेक्टिव लेवल पे है तो ऑब्जेक्टिव लेवल पे पैर नहीं टूट के कांटा लगेगा और यदि हम सब्जेक्टिव लेवल पे है तो सब्जेक्टिव लेवल पे अपना रिएक्शन है वो कांटा लगा है इतना ही आएगा एट दैट पॉइंट डंट मैटर कि बाहर में क्या हो रहा है तो यह ईश्वर हमारे साथ में वही करेंगे व्हिच इज गुड फॉर अस हम किस लेवल प है हमारी क्या आवश्यकता है तो यहां पर कोई आप एब्सलूट नियम नहीं बना पाएंगे कि हां ऐसा ही सभी केस में होगा इंडिविजुअल आपकी जर्नी कौन से मुकाम तक पहुंची है आपके लिए फ्यूचर में क्या अच्छा है ऑल दिस कंसीडरेशन टेक्स प्लेस एंड देन सम डिसीजन कम्स