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Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी ब्रह्मानन्द कथित : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 16 Nov 2022

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स्वामी ब्रह्मानंद के श्री राम कृष्णा देव के ऊपर में रिमेंशंस इसका हम पाठ कर रहे हैं राजा महाराज कहते हैं चेहरा देखकर ही ठाकुर किसी व्यक्ति के भीतर का सब कुछ देख सकते द मानो जैसे वे कांच के आर-पार देख रहे हो किसी आगंतुक के आते तक देखते हैं और सब कुछ समझ लेते द तब वे उसे व्यक्ति के प्रश्नों का उत्तर देते द वुड बी एबल तू रीड ही संस्कार एंड ऑल डी एकम्यूलेटेड मेमोरीज गोइंग ऑन इनसाइड दिस पर्सन एंड अकॉर्डिंग्ली ही विल रिप्लाई तू दिस क्वेश्चन देखकर के ठाकुर एकदम दर गए और ठाकुर ने कहा की इसके सर पर तमस के बदल इतने गाने मंडरा रहे हैं की मैं इसके साथ में बात नहीं करना चाहता ऐसा करके वह अपने रूम में जाकर के छुप गए है और किसी को बोला की जाओ उसके साथ बात करो प्रसाद देकर के उसको विदाई कर दो तो मुझे लगा की ठाकुर को ऐसे सब चीजों से डरने की क्या जरूरत है वो तो योग अवतार है tamasidi किसी में भी तो उनका ये कर्तव्य नहीं है की वो उसको मदद करके उसके तमस को कम करके उसका शत्रुओं में बढ़ोतरी करने का कम करें किंतु जिसमें तमाशा होता है वह कोई उपदेश नहीं चाह करके यदि किसी मंदिर में जाता है किसी साधु संत के पास जाता है तो ऐसा नहीं है की वह अपने कुछ प्राप्त करना चाहता है वहां से ऐसा नहीं है की हान वो कुछ दो प्रश्न करेगा और उसका समाधान मांगेगा वह ऐसा उपदेश देना शुरू कर देगा यहां पर यह गलत हो रहा है यहां पर यह ठीक नहीं हो रहा है हम आपको यदि कुछ यह हेल्प चाहिए तो मैं करने वो अपना एक अधिकार बैठना चाहते हैं वहां पर यह तामसिक लोगों के साथ में ऐसा होता है ठाकुर ने उसके मैन में यह बात देख ली थी और इसीलिए ठाकुर उसको मिलना नहीं चाहते द बहुत बार हमको ठाकुर का बिहेवियर देखकर के ठाकुर क्यों इस तरह से करते हैं वो देखकर के आश्चर्य होता है किंतु फिर हमको ये सब बढ़कर के हमको समझना चाहिए की ठाकुर सिर्फ किसी का चेहरा या सिर्फ उसकी बातें नहीं सुनते कोई आकर के बोलेगा अरे मुझे ये हेल्प चाहिए अरे मेरे जीवन में यह समस्या है तो ठाकुर जी दी उसको ठीक से उत्तर नहीं देते या थोड़ी देर बिठाकर के रावण कर देते हैं तो उसका अर्थ यह है की उसे व्यक्ति के मैन में उन्होंने देखा है की वह सही-सही वह मदद नहीं चाहता है या तो अपने मैन की भ्रंश निकलने के लिए आया है या तो फिर ऐसा हम कर दिखाने के लिए आया है की हान मतलब आपको जितना आता है उससे ज्यादा तो मुझे आता है तो चलो मैं आपको प्रश्न पूछ कर के अपने ज्ञान का दिखावा करने की शुरुआत करता हूं मैंने खुद ऐसे लोगों को मिला हूं कुछ समय पहले लड़का आया था मैं बैठा था कम कर रहा था तो आकर के उसने ऐसा प्रश्न पूछना शुरू किया अच्छा यह रामकृष्ण कौन है स्वामी जी कौन है मैंने थोड़ा-थोड़ा बताना शुरू किया की ये वगेरा तो फिर थोड़ी देर के बाद में उसने किताब निकल बोला ये मेरे गुरु देव है और ये आपके ठाकुर से भी उनका ज्ञान अच्छा है आप उसको पढ़िए ठीक है तुम किताब रख के जाओ मेरे पास में समय होगा तो मैं पढ़ूंगा तो वो आया था इसलिए नहीं की वो ठाकुर या माया स्वामी जी के बारे में कुछ जानना चाहता था उसको अपना प्रचार करना था किंतु वो जाकर के सीधा बोलना शुरू कर देगा की आप हमारी किताबें पढ़ी है या तो हमारी संस्था में जोड़ी तो मैं उसका वो उसको वहीं से उसको भाग देता है उसको सामने बैठकें चाय वगैरा नहीं पिलाता तो यह मुझे तो इतना टाइम लगा आधा एक घंटा लगा उसको समझने में की उसके माइंड में क्या है ठाकुर यह सब चीज पहले ही देख लेते द उसके मैन में क्या है उसका भाव और उसको देखकर के उसके अनुसार आचरण करते द कभी कोई जेनुइन साधक ए गया जैसे की यह पूर्ण है या तो नारायण है यह छोटे-छोटे दो लड़के ठाकुर बिल्कुल शरीर जाने का समय था उसे समय आए द जो ठाकुर के गले में कैंसर है बोल भी नहीं का रहे हैं खा भी नहीं का रहे हैं फिर भी उन दोनों को पास में बिठाकर के घंटे घंटे बार तक बातें करते द और मास्टर महाशय उनके टीचर द तमाशा को बोलते द अरे आज वो पूर्ण नहीं है उसको बुला करके ले आओ और फिर ऐसी मजा भी होती थी की गिरीश घोष बोलता है की अरे ये तो चाय धर्म मास्टर केले धर्म मास्टर माने मास्टर महाशय क्या करते द कथामृत के लेखक की उनकी स्कूल में जो अच्छे-अच्छे संस्कार वाले लड़के पढ़ते द अभी ठाकुर के साथ में रहे हैं ठाकुर के कुछ गुण उनके भीतर में ए गए हैं तो उनकी स्कूल में अच्छे-अच्छे संस्कार वाले लड़कों को पकड़ के वह ठाकुर के पास ले आते द अभी कोई जड़ी बाद में यदि सन्यासी भी हो जाए तो फिर दोस्तों छोकरा ने किडनैप करीना ले जाए एवं मास्टर जो है वो मास्टर महाशय का मजाक भी करते द और ठाकुर नाराज भी हो जाते द अरे सबके सामने ऐसा मत बोलो हम वैसे ही मास्टर महाशय बदनाम होना शुरू हो गया है की वो लड़कों को पकड़ कर के ठाकुर के पास ले जाता है एक बात है की विज्ञान आनंद जी विज्ञान आनंद जी की बहन वो दक्षिणेश्वर में आई है वहां तो गंगा का किनारा है वो वगैरा वो कपड़े धोने के लिए वगैरा वो औरत है वहां के आसपास की इकट्ठा होती थी तो ठाकुर ने सुना एक दिन वो एक दूसरे को साथ बात कर रहे हैं क्या रे उसे जो परमहंस से दक्षिणेश्वर के वो कोलकाता के 10000 लड़कों का सर खराब करके रख दिया है यानी की उनको संसार की ओर से आध्यात्मिकता की ओर उन्होंने एक नया रास्ता दिखाया है तो उनका संस्कार इस तरह का है तो उनको इस तरह से उन्होंने डायरेक्ट किया रूप से हम देखते हैं की अरे यह आदमी इतना बुरा है फिर भी ठाकुर उसको इतना क्यों उसको मतलब मैन सम्मान देते उसके साथ में इतना बात करते हैं तो जैसे गिरीश घोष काली पढ़ो घोष है वो नाटक कंपनी के मैनेजर द और जितना भी कुकर्म कहा जाए उसे समय जो चलता था वो सब में वो शामिल भी द फिर भी उनके मैन में एक जुनून ज्ञान पिपासा थी तो उसे gyanpipasak की वजह से वह ठाकुर के पास आए द और ठाकुर ने उनके भीतर की यह बात समझी और उनके लिए अपने उपदेश का दरवाजा संपूर्ण रूप से खोल दिया यहां तक की जब ठाकुर ने अपने युवा शिष्यों को सन्यास देने के लिए गेरुआ कपड़ा मंगाया था यह यह जो सन्यासी का कपड़ा है तो उन्होंने एक कपड़ा गिरीश खुश के लिए रख दिया था सोच के देखिए गिरीश को सस्टेन वहां पे नहीं द वर्ण ठाकुर अपने हाथ से उसको यह कपड़ा देते हैं तो सोच के देखिए की कहां से उसने शुरुआत की कहां नाटक कंपनी का मैनेजर कहा वो कुकर्म करेगा और कहां आखिर में यह स्वामी विवेकानंद यह राजा महाराज जिस सिद्ध महापुरुष अवतार के अंश जो की अवतार के साथ में जन्म अंतर लीला करने के लिए अवतरित होते हैं तो उनके साथ में उसको गेरुआ प्राप्त हो वह उसका कितना बड़ा समझा गया है किंतु यह सब कब हुआ की यदि दृष्टि से ठाकुर देखते हैं की अरे यह तो थिएटर कंपनी का मलिक है यानी की यह संस्कार अच्छा नहीं है मैं उसके साथ में बात करके अपना समय नष्ट नहीं करना चाहता हूं ऐसा यदि ठाकुर ने सोच लिया होता तो आगे कुछ हुआ नहीं होता और हमको आज जो प्रेरणा मिलती है बहुत सारे ऐसे लोग हैं मुझे कहते हैं कभी कभी वो बात होती है किसी के साथ तो मुझे कहते हैं अरे महाराज वो गिरीश khushkhab हो गया तो हमारा क्यों नहीं होगा माने देखिए स्वामी विवेकानंद यह राजा हमारा ये महापुरुष महाराज ये बाबू राम महाराज ये लोग तो सिद्ध द ही द जन्म-जन्मांतर से ठाकुर के पास आते ही द तो उन्होंने सन्यास ग्रहण किया nirvikal का समाधि प्राप्त की अत्यंत उच्च आध्यात्मिक स्थिति पर वे लोग स्थापित हुए तो उसमें कौन सी बड़ी हास्य की बात है उसमें उन लोगों में तो ईश्वर का अंश था ही था किंतु गिरीश घोष के जीवन का परिवर्तन करके उसके संस्कारों को संपूर्ण रूप से नए ढांचे में उनको दल करके ठाकुर ने पुनर्गठन किया वही तो ए का असली सामर्थ्य है वही तो अवतार की असली शक्ति है गिरीश घोष ने एक बार ठाकुर बोल रहे द की जिस पार्टी में लहसुन रखा गया है उसे बाल्टी को आप कितना ही धो दो लहसुन का जो बदबू है वो जाने वाला नहीं है यानी एक बार जिसका चरित्र मालिन हो गया एक बार जिसने ये सांसारिक भूख में उसका आशीर्वाद ले लिया है तो वो कितना ही चाहे करें इस जन्म में वो ईश्वर से ज्यादा निकट नहीं जा पाएगा वो कहना चाहते द की जैसे ये जो नरेंद्र वगैरा जो युवा लड़के जो आते हैं वो शुद्ध पुष्प है बिल्कुल सुबह में थोड़े हुए ताजा पुष्प है जिनको की जिनको भी कोई भी मालीनता स्पर्श नहीं हुई है और जिनको के ठाकुर को आप अर्पित कर सकते हैं ईश्वर के श्री चरणों में उनको आप वो ऑफर कर सकते हैं किंतु यह लोग जो संसारी लोग हैं खास करके गिरीश घोष वगैरा जिनका चरित्र ऑलरेडी मालिन हो चुका है उनके लिए यह यात्रा मतलब एक आम आदमी से लेकर के ईश्वर के सच्चे भक्त होने की यात्रा है वो इतनी आसान नहीं है या तो शायद असंभव है तो गिरीश खुश जब ये बात सुने तो उनका मैन बड़ा खिन्न हो गया और जब बाकी सब लोग चले गए तो बैठे रहे तो ठाकुर ने बोला की अरे क्या हुआ क्यों बैठे हो अभी तो बोला की हम लोग गिरीश घोष ठाकुर को बोलता है और महाशय यह बाती की गंद कभी भी नहीं जाएगी क्या माने जिसमें लहसुन रखा है उसके वो कितना ही दो दो तो उसकी बदबू कभी नहीं जाएगी तो ठाकुर ने क्या उत्तर दिया की बाती को आग में जलाने से बदबू चली जाएगी यानी की इतनी इंटेंस तपस्या यदि आप करेंगे तो आपके चरित्र की जितनी भी मालीनता है वो दूर हो जाएगी यहां पर बाती को आग में जलाने का दो अर्थ होता है यदि आप ज्ञान मार्ग से देखते हैं तो ऐसा अर्थ होगा की आपको तपस्या करनी है और भक्ति अर्थ से देखेंगे तो ऐसा अर्थ होगा की ठाकुर जैसे अवतारी पुरुष का उनको आशीर्वाद प्राप्त हो जिससे की उनकी मालीनता दूर हो जाए तो वो संभव है किंतु अपने मैन में बहुत ही दीप एक व्याकुलता होनी चाहिए एक घन एक ईश्वर प्राप्ति की एक mumukshak तो होना चाहिए तभी ये चीज होगी यदि हम मंदिर में जाते हैं किसी साधु संत से मिलते हैं और यह दिखाना चाहते हैं की इससे तो मेरा नॉलेज ज्यादा है या तो इससे मेरा संस्कार अच्छा है तो आपको ज्यादा कुछ मिलने वाला नहीं है मैं एक देवोटी है मैं उनको पहचानता हूं कितने बजे उठाता है तो मैंने कहा की वह मंगल आरती के समय उठाता हूं मंगल आरती का टाइम 5:00 बजे का है तो मुझे बोलता है मैं तो 4:30 बजे उठ जाता हूं फिर एक दिन बोला मैं 4:00 बजे उठ जाता हूं तो मैंने कहा हम दोनों के बीच अभी मैंने उसको मुंह पर नहीं तो मैंने सोचा की हम दोनों के बीच में कंपटीशन थोड़ी ना है आप यदि 4:00 बजे उठ सकते हैं 3:00 बजे उठ सकते हैं तो बहुत अच्छा है आप उठिए ठाकुर के आप उतना और मैजिक जाएंगे संसारी होकर के भी आप इतना सब कर का रहे हैं और मैं साधु होकर के भी नहीं कर का रहा हूं तो आपकी सिद्धि है उसमें अब हम दोनों में कंपटीशन करने की क्या बात है तो आपके क्या लेकर के साधु संत है या तो ठाकुर है की ये मंदिर है आप अपने मैन का क्या भाव लेकर के जाते हैं वो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है ऐसा मत सोचिए की प्रेम मंदिर में जाकर के प्रणाम कर दिया और मुंह से बोल दिया की हान ठाकुर मुझे अपने आध्यात्मिक जीवन में आप मुझे आशीर्वाद दीजिए की मैं अच्छे से प्रगति कर सकूं तो ऐसा नहीं है मैन का क्या भाव है और आपके शब्द क्या है यह दोनों में यदि डिफर होता है वह मतलब कोई विरोधाभास होता है तो ठाकुर आपके मैन का भाव देखेंगे नहीं की आपके शब्द स्वामी विवेकानंद के केस में बिल्कुल उल्टा हुआ वो जाकर के ठाकुर को दुनिया भर के प्रश्न करते द वह पूछते द की ठाकुर पर बोल दिया की मैं पैसों को हाथ नहीं लगा सकता हूं तो स्वामी जी ने क्या किया वो जहां पे बैठे द बिस्तर के नीचे एक पैसा रख दिया सिक्का और ठाकुर जब बैठना शुरू की है तो एकदम चमक करके खड़े हो गए फिर देखा की बिस्तर के नीचे में उनको टेस्ट करने के लिए नरेंद्र एक बेसिक का रख दिया है तो देखिए नरेंद्र मुंह से तो ठाकुर का इतना विरोध करते द किंतु ठाकुर उनके मैन की बात समझते द समझते द की एक जुनून साधक है उसमें जेनुइन है तो मुंह से हम क्या बोलते हैं उसकी बजाय हृदय से हम क्या बोलते हैं उसका बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंस है और हम लोग तो जो है आजकल वो हृदय की बात नहीं सन पाते नहीं समझ पाते किंतु ठाकुर के पास जब आप जाएंगे तो आपको हृदय की जो बात होगी वही वो सुनेंगे सो हेयर राजा महाराज गोइंग ऑन इन हिज हार्ड रिगार्डिंग दिस देर आर तू टाइप्स ऑफ इंसीडेंट्स सी फाइंड इन ठाकुर स्लाइड देयर आर ठोस टाइप ऑफ देवोतीस हु वुड कम तू ठाकुर एंड प्रोफेसर आस्क फॉर हिज ब्लेसिंग्स और आस्क फॉर हिज एडवाइस बट देयर विल बी डिफरेंट टाइप ऑफ मोटिवेशन इन देयर हार्ट फॉर एग्जांपल वैन दे ठाकुर वो शीटेड एंड हिज शो डेट वैन वेल्थी पर्सन कैन तू मीत हिम बट ठाकुर आई वांट तू गिव यू दिस मच मणि आगे अन डोनेशन बट ठाकुर शो डेट इन हिज हार्ड देयर इस अन डार्कनेस ऑफ तमस एंड ठाकुर बिकम frightend सैम हो एंड ही वेट इनसाइड हिज रूम एंड आस्क समवन डेट प्लीज गिव डी पर्सन सैम प्रसाद एंड रिटेन हिम फ्रॉम वेयर ही इस कम एंड से डेट आई एम नॉट हर सो इट विल नॉट बी पॉसिबल तू मीत मी सो ठाकुर सो व्हाट इस गोइंग ऑन इन दिस हार्ड एंड ओनली अपोजिट एंड सी से तू एग्जांपल वैन इस नरेंद्र नाथ स्वामी विवेकानंद एंड गिरीश घोष मैनेजर ऑफ अन थिएटर कंपनी टाइम सो व्हेन ही कम तू ठाकुर ही हेड ही न्यू डेट ठाकुर वुड नो मी बाय रेपुटेशन एंड हिज नॉट गोइंग तू गिव मी मच टाइम और एक्स्ट्रा सो ही बिहेव एक्जेक्टली ही उसे तू बी हेविंग थिएटर कीबोर्ड इंसल्ट अपुर ही वुड गिव्स सैम अन आउटलाइन दिस सजेशन एक्स्ट्रा बट ठाकुर शो डेट हिज हार्ट इस ऑफ गोल्ड ही हज बिन किंग फॉर गोद हिज बिन किंग फॉर ए लाइट ऑफ कोड इन हिज लाइफ विद genuineers विच सर पासेस अन्य वैन एल्स इन हिज कंपनी सो ठाकुर एक्सेप्टेड हिम होल हार्टडली एंड इट कम तू पास डेट ही व्हेन ठाकुर गावे गेरुआ क्लॉथ तू ही दिस यंग डिसीप्लस लाइक योगानंद जी लाइक तू महाराज ठाकुर जर्नी डेट ही इस क्रॉस फ्रॉम बीइंग debochar तू गुरु भाई ऑफ सैम ऑफ डी पूरेस्ट सोल डट हिज अराइव्ड इन दिस आगे ऑन arthmemli स्वामी विवेकानंद स्वामी ब्राह्मणी इन हिज डेली लाइफ समथिंग विद स्वामी जी स्वामी विवेकानंद इसे ही वाज नॉन एड दे टाइम नरेन ही वाज डी स्टूडेंट ऑफ अन कॉलेज एंड हिज तू टेस्ट ठाकुर एंड हिज तू थ्रो सम आउटलैंड इस सजेशन एंड वैन दे ठाकुर से डेट आई कनॉट टच कॉइन आई कनॉट टच मणि सो नरेंद्र नाथ डेट ही पुट अन कॉइन बिन इन डी मैट्रिक्स अपॉन वेस्ट तू सीट सो वेंट आपको कम तू सीट एंड सुद्दनली ही इस प्रोडक्ट तेरे इस अन कॉइन देर सो ये रिलाइज डेट नरेन हज बिन टेस्टिंग हिम ऑफ नरेन मेकिंग फैन ऑफ ठाकुर सैम टाइम्स फैन ऑफ समाधि नरेंद्र सिंह बिकॉज यू हैव सैम डेविस ऑफ माइंड योर माइंड इसे वीक डेट इस वही यू आर सेइंग दिस hellusion सो नरेन यूज्ड तू सी ऑल सॉर्ट ऑफ थिंग्स बाय हिज शब्द बाय हिज माउथ बट ठकू न्यू दें इन हिज हार्ड ही इसे डी अवतार ऑफ शिवा ही इस डी लाइट ऑफ शिवा इन ठाकुर मैटर्स इन माय आउटर लाइफ आई मेबी थिएटर मैनेजर इन माय आउटर लाइट पर हिप्स आई एम ए मॉम एक बहुत अच्छी कहानी है ना दो मित्र ठाकुर ने ही कहा है तो एक ऐसी जगह पे कहां जहां पर नाच गण चल रहा है और एक मित्र गया जहां पर मंदिर में वो भागवत कथा हो रही है अभी हुआ क्या जो भागवत कथा सन रहा है वह अपने मैन में सोच रहा है की अरे मैं कैसा मूर्ख हूं मैं यहां पर भागवत कथा सन रहा हूं और मेरा जो मित्र है वो कैसा माने चालक है वो कितना वो उसमें बुद्धिमान है जो बढ़िया मजे से nachdaan देख रहा है और मैं ही मूर्ख हूं और ये जो मित्र है वो नाच गण देख रहा था वो सोच रहा है की अरे मैं इतना धाम और पापी हूं मैं ये सब जो सब खराब चीज देख रहा हूं और मेरा जो मित्र है वो कितना शुद्ध पवित्र है वो भागवत कथा सन रहा है तो जब वो मृत्यु के बाद में वो जो यमराज जाते हैं तो जो मित्र भागवत कथा सन रहा था उसको नर्क में ले गए और जो जो मित्र जो नाच गण देख रहा था उसको स्वर्ग में ले गए बात यह नहीं है की वो क्या कर रहे द बात ही की वो उनके हृदय में क्या चल रहा था सो देर इसे वेरी नाइस स्टोरी ऑफ ठाकुर तू फ्रेंड्स वैन वैन तू लिसेन तू सैम होली मैन सेइंग समथिंग अबाउट भागवत सिंगिंग इन डांसिंग गोइंग ऑन डी हु वास्ता लिसनिंग तू भागवत कथा हिस्से ही थिंग्स इन है हार्ट इन है माइंड डेट हो क्लेवर माय फ्रेंड हिज डी ही इस लिसनिंग तू सिंगिंग एंड डांसिंग एंड आई एम जस्ट स्टुपिड पर्सन आई एम लिसनिंग तू दिस भागवत कथा ऑन दी आदर हैंड डी पर्सन फ्रेंड हु वाज लिसनिंग तू डी सिंगिंग एंड डांसिंग हिज थिंकिंग डेट हो होली एंड पूरे माय फ्रेंड इस लिसनिंग तू भागवत कथा एंड हो बेड एंड हो सच इस सिंफुल पर्सन आईएम डेट आई एम सेइंग दिस सिंगिंग एंड डांसिंग नौ व्हेन दिस तू फ्रेंड डिड एंड यमराज कम ही तू डी पर्सन इन तू भागवत कथा तू नर्क एंड डी पर्सन हु वास्ता सिंगिंग वाचिंग दिस सिंगिंग एंड डांसिंग यमराज तुक हिम तू स्वर्ग सो व्हाट इस गोइंग ऑन इन योर हार्ट था मैटर्स मच मोर दें व्हाट सी आर इन अवर आउटर लाइफ राजा महाराजा कहते हैं महान संत लोग भी प्राय अहंकार को नहीं छोड़ पाते हैं वाराणसी के स्वामी भास्करानंद ने अपना चित्रा मुझे दिखाते हुए कहा था देखो मेरे चित्रा बिकते किंतु ठाकुर देखो ठाकुर कैसे हैं जब केशव चंद्र सेन ने अपने पत्र में ठाकुर के बारे में लिखा तो ठाकुर ने पुनः उनको ऐसा करने से माना कर दिया पत्र यानी की अखबार पत्र और शायद हम सबको पता है जो की ठाकुर का जीवन पढ़ते हैं की यही अखबार पत्र पढ़कर के ठाकुर के बहुत सारे शिष्य ठाकुर के पास आए द तो यह भी एक क्या कहे की ईश्वर की मायाजाल है या की ईश्वर का एक कटाक्ष है की ठाकुर प्रसिद्धि नहीं चाहते द किंतु थोड़ी सी प्रसिद्धि उनको जो मिली केशव चंद्र सेन के माध्यम से वह प्रसिद्ध ठाकुर के पास में बहुत सारे जेनुइन वो जो भक्त है उनको लेकर आई अभी अन विजय कृष्ण गोस्वामी की एक बात है वो विजय कृष्ण गोस्वामी वो बहुत ही अच्छा विद्वान पंडित द वैष्णव वैष्णव द और साधक भी द और ठाकुर के प्रिया भक्त भी द एक दिन उन्होंने सोचा की यदि कोलकाता के पास में ही इतने बड़े महापुरुष रह रहे हैं तो मैन लीजिए की हिमालय है या आरसीबी दुर्गम जगह है जहां पे लोक नजर से दूर माने महापुरुष लोगों को तो ये सब छाती वगैरा नहीं चाहिए तो ठाकुर तो कोलकाता के पास रह रहे हैं और समाचार पत्र में उनका नाम भी हरा है तो शायद हो सकता है की ठाकुर के मैन में थोड़ा बहुत यह नाम एंड फेम की इच्छा हो उनके मैन में शायद ऐसी इच्छा हो की मेरा नाम जो है समाचार पत्र में आए ऐसी इच्छा हो की मैं कोलकाता के पास रहूं जिससे की कलकत्ता की ये धनी लोग जो है मुझे मिलने के लिए आए अभी उनके मैन में ऐसी इच्छा भी है फिर भी कितने महापुरुष है तो मैं जब हिमालय में जाऊंगा ना की ऐसा नर्मदा के किनारे जहां पर जंगल है वहां पे मैं जाऊंगा तो मुझे इससे भी महान कितने साधु मिलेंगे माने जिसके मैन में ये लोक प्रसिद्धि एक उसका एक लेश मात्रा भी नहीं है तो वो तो ठाकुर से कितने महान होंगे तो वो ऐसा बहुत कुछ घूमकर के आए और फिर जो हुआ ये जो घटना जो बरता उसका वर्णन तथा मृत में है विजय कृष्ण गोस्वामी ठाकुर को कहते हैं की मैंने कितने ही गिरी 15 यानी पहाड़ जंगल वगैरा घूम के देखा सोचा था की कोलकाता के पास में ही इतने बड़ी महाशक्ति का अवतरण हुआ है तो पहाड़ जंगल में तो और भी कितनी महाशक्ति मुझे मिलेगी किंतु कहीं पे भी आपके सुदर्श महापुरुष मुझे नहीं मिला मैं पूरा जगत जल करके घूम के थक गया हूं अभी आपके श्री चरणों में मेरा होगा तो देखिए प्रसिद्धि की इच्छा नहीं थी यह किंतु है की यह जो सब हम वर्तमान जीवन में जीरा है अभी रामकृष्ण मिशन को ही ले लीजिए मैं जब पहली बार रामकृष्ण मिशन में आया मैं जैन साधुओं को बड़ा मतलब मैं खुद जैन हूं और मेरे घर में जैन धर्म का प्रभाव है और मैं जैन साधुओं को पहचानता हूं दिगंबर संप्रदाय के जो वस्त्र तक नहीं पहनते पूरे दिगंबर रहते हैं और खाना इस तरह से अपने हाथ में जितना आता है खड़े-खड़े खाएंगे और एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए वो पैदल जाएंगे वो गाड़ी में भी कभी नहीं बैठेंगे तो ऐसा सब में बचपन में देखा था और सबसे पहली बार मैं रामकृष्ण मिशन में आया लिंबड़ी में गया था तो देखा बिल्कुल पहला मेरा परिचय रामकृष्ण मिशन के साथ हूं उनके साथ वहां के बड़े महाराज एक पुलिस गाड़ी में से ए करके उतारे और फिर मेरे साथ बात कर रहा है तो मेरा मैन में एक ऐसा एक अजीब एक भाव आया मैंने कहा अरे ये साधु है ना की क्या है पुलिस में घूमते हैं और यह बाहर में जाते हैं उसे समय यह रिलीफ चल रहा था 2001 का अर्थक्वेक के समय की बात कर रहा हूं मैं ऐसे वालंटियर आश्रम में आया था सबसे पहला मेरा आश्रम प्रवेश ठीक है किंतु उनके जीवन में यह जो जलाली है यह वैभव है यह सब क्या है ये सब की क्या जरूरत है अब बाहर जाकर कम करिए किंतु आपका पर्सनल जीवन तो एकदम शुद्ध पवित्र और एकदम माने सामान्य स्टार का होना चाहिए तो देखिए उसे समय मेरे मैन में यह भाव था किंतु आज इतने सालों के बाद जब मैं खुद साद हूं तब मुझे पता है की रामकृष्ण मिशन के साधुओं का जीवन में अपनी बात नहीं कर रहा हूं किंतु मैं यह जो जैसे की अपने भूतेषु नानजी महाराज है या तो atmasanand जी महाराज है या तो रंगनाथन जी महाराज है जिनको की बारे में मैंने पढ़ा है मतलब ठाकुरमार स्वामी जी और यह डायरेक्ट disappo के बात की बात है वे लोग तो ईश्वरी अंश द उनके बारे में तो कुछ भी कुछ नहीं बात की जेनरेशन थी या तो फिर ये स्मरण जी है अभी हमारे जो प्रेसिडेंट महाराज है उन लोगों का जीवन नजदीक से देखा है क्योंकि मैं बेलूर मठ में काफी समय रहा हूं और मैंने देखा है की उनके जीवन में जो तपस्या है वो आपको चाहे की वो कितने सारे वैभव से घिरे हुए हैं किंतु उनके व्यक्तिगत जीवन में जो तपस्या त्याग है ये जो धन वैभव उनको स्पर्श तक नहीं करता जैसे की ये जो कमल है कमल को पानी में रखा है पानी में रह रहा है किंतु पानी जो है उसको स्पर्श नहीं कर रहा है इस तरह से उनका जीवन शुद्ध पवित्र है धन वैभव विलास यह ख्याति वगैरा मत में जाएंगे हमारे प्रेसिडेंट महाराज इतना मैन सम्मान मिलता है यह जो ग्रुप पूर्णिमा का दिन होता है कितने हजारों लोग की भीड़ हो जाती है महाराज का दर्शन करने के लिए दीक्षा देने के लिए कहीं पे जाते हैं तो उनको भगवान की तरह ठाकुर के अंश की तरह उनको पूजा जाता है जैसे की ठाकुर के वो रिप्रेजेंटेटिव हो उसे तरह से उनको सम्मान मिलता है तो यह सलमान यह ख्याति उनको स्पार नहीं करती यह चीज मैंने अपनी नजरों से देखा है तो यह जैसे ठाकुर ने आगे कहा ना की हम किस परिस्थिति में रह रहे हैं और हमारा हृदय कैसा है ये दोनों में पार्थ के होता है और हृदय देखकर के जितना हो सके मैं इतना नहीं कर पता हूं हम तो आजकल सभी लोग क्या होता है की शब्द देखकर के ही या तो आसपास में हम किस तरह की परिस्थिति में रह रहे हैं उसको देखकर के ही किसी को जज करते हैं किंतु ठाकुर की यह बात सुनकर के हमको एक प्रयत्न अवश्य करना है की कौन मुंह से क्या बोल रहा है किस परिस्थिति में जी रहा है उससे ज्यादा उसके हृदय में क्या है उसको देखने का एक प्रयत्न करें सो हर राजा हमारा समवन इसे लिविंग इन अन्य टाइप ऑफ कंडीशन डू नॉट बिलीव था इस व्हाट डिफरेंस एग्जांपल ठाकुर हते सेड तू दिस केशव चंद्र सेन डेट प्लीज डू नॉट राइट अबाउट मी इन योर न्यूज़पेपर बट इंस्पीते ऑफ थ्रेड अबाउट हिम समथिंग इन कथामृत सी सी दिस पैसे डेट वाट गिरीश कोष रिटेन अबाउट ठाकुर एंड देयर इस वेरी स्ट्रेंज मतलब इस व्हाट लीला ऑफ गोद डेट जस्ट बाय रीडिंग ऑल दिस न्यूज़पेपर रिपोर्ट्स में ऑफ डी देवोतीस होव जेनुइन इन डी डिवोशन तू ठाकुर इट कैन तू मेक ठाकुर एंड देयर इस अन वेरी नाइस इंसीडेंट रिगार्डिंग दिस वैन विजय कृष्ण गोस्वामी ही वाज अन ग्रेट devoteyo ठाकुर ही कैंप तू ठाकुर वैन दे एंड है आगे दिस इंसीडेंट इस देयर इन कथम् रोट यू कैन रीड अबाउट इट विजय कृष्ण गोस्वामी टेल्स तू ठाकुर इंसीडेंट दिस एपिसोड सो विजय कृष्ण गोस्वामी थिंग्स इन है माइंड डी ठाकुर इसे लिविंग नियर तू दक्षिणेश्वर एंड हिज नाम इस बीइंग प्रिंटेड इन डी न्यूज़पेपर डेट मिंस ही हेड सैम लिटिल धीरे फॉर नाम एंड फेम फॉर सैम सॉर्ट ऑफ फेम अमोंग डी पीपल ऑफ कोलकाता सो डेट विल बी पीपल मेक कम तू मेक हिम ओर हिम समथिंग अबाउट डी जनरल पापुलेशन सो इंस्पीते ऑफ हेविंग दिस स्मॉल डिजायर फॉर नाम एंड फेम ही सच ए ग्रेट महापुरुष व्हाट फूड हैपन आईएफ आई गो इन सैम इंटीरियर फॉरेस्ट एंड माउंटेन एंड इफ आई सर्च फॉर महापुरुष द हु हेड अब्सोल्युटली नो डेसर्ट फॉर नाम ऑफ फेम दें दे विल बी हो में टाइम्स ग्रेटर दैन ठाकुर सो ही एक्चुअली वेट तू ट्रेवल अराउंड माउंटेंस एंड फॉरेस्ट एंड ही रिटर्न तू ठाकुर एंड टेल्स हिम डेट आई वेंट एवरीव्हेयर आई थॉट सो नियर तू कोलकाता हो में टाइम्स ग्रेटर पावर आई विल फाइंड एवरीथिंग एंड नौ आई हैव रिलाइज डेट यू आर डी ग्रेटेस्ट वाटेवर रेसिडिंग नियर कोलकाता ह्यूज नाम इसे कमिंग इन न्यूज़पेपर हु सो में पीपल नो अबाउट हिम इन कोलकाता हिज डी ग्रेटेस्ट पावर डेट हस आउटर रॉन एंड इट इसे अराइव इन दिस वर्ल्ड इट दिस टाइम सो विद दिस इंसीडेंट सी एंड ओवर क्लास टुडे विल मीत टुमारो ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्ण जय राम कृष्ण