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ओम स्थापक धर्मस्य सर्वधर्म अवतार राम कृष्णाय नम तो हमने देखा की देखि की किस तरह से स्वामी जी सबसे पहले तो कहते हैं अभी तक का जो आर्गुमेंट है उसका सिर्फ एक में आउटलाइन रिवाइज कर देता हूं स्वामी जी ने सबसे पहले यह कहने से प्रारंभ किया किय जो नेचुरल ब्यूटी है भारतवर्ष की ये हिमालय है गंगा है फिर हमारे सुनहरे खेत है वो हरियाली से भरे हुए हमारे देशवासियों का जो स्वभाव है तो यह देख कर के यह सबके बीच में रह कर के हमारा मन ऑटोमेटिक वैश चीजों से वापस आता है रिवर्स होता है इंट्रोवर्ट होता है जिसको कि योग की भाषा में प्रत्याहार कहते हैं और अपना मन एक उच्च स्थिति पर विराज कर कर के प्रश्न करता है तो स्वामी जी जो प्रश्न करते हैं वह कहते हैं ना सदा सिन्नो सदा सात दानि नास दजो न परो ये नासदीय सक्त है नासदीय सक्त में यह कहा गया है कि हम लोग प्रश्न करते हैं जब ऋषि मुनि जब सृष्टि के बारे में सोचते हैं जब ऋषि मुनि लोग सोचते हैं कि मनुष्य का सही स्वरूप क्या है हम कहां से आए हैं कहां जाने वाले हैं मृत्यु के बाद क्या होने वाला है यह सब हायर थिंकिंग ये जब हम करने की शुरुआत करते हैं तो तब यह प्रश्न होता है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पहले प्रलय में सत भी नहीं था असत भी नहीं था स्वर्ग भी नहीं था मृत्यु लोक भी नहीं था पाताल लोक भी नहीं था अंतरिक्ष भी नहीं था उससे परे जो कुछ है वह भी नहीं था आवरण वाला करने वाला तत्व कहां था और किसके संरक्षण में था किसको पता यह सृष्टि सृष्टि का प्रारंभ सृष्टि का अंत सृष्टि का स्वरूप क्या है किसको पता तो यह हायर थिंकिंग जब अपने ऋषि मुनि करने की शुरुआत करते हैं उसमें से यह आत्म तत्व या तो फिर ब्रह्म तत्व की उत्पत्ति होती है इसके बाद में स्वामी जी हमको स्टेप बाय स्टेप आर्गुमेंट बाय आर्गुमेंट हमको आत्म तत्व की ओर ले आते हैं और जैसे कि पहले के युग में उस समय की लॉजिक या तो उस समय की न्याय वगैरह को देख कर के जो आर्गुमेंट की जाती थी तो स्वामी जी का जो आज का अप्रोच है कि मॉडर्न साइंस के कुछ कुछ आइडियाज को पकड़ करके द मोस्ट रेडिकल एलिमेंट्स मॉडर्न साइंस के सबसे ज्यादा रेडिकल जो एलिमेंट्स है उसको पकड़ करके स्वामी जी हमारे सामने सब आर्गुमेंट ट करते हैं तो उसमें से स्वामी जी ने दो आइडियाज को सिलेक्ट किए कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी थर्मोडायनेमिक्स का जो रूल है कि इस यूनिवर्स में जो कोई एनर्जी है ना ही वह कम होती है ना ही वह कहीं हवा में से प्रकट होती है जितनी जैसे कि आप कार का इंजन ले लीजिए उसमें आप एक लीटर पेट्रोल डालेंगे और आपकी कार की कैपेसिटी माइलेज है 1 लीटर पे 20 किलोमीटर तो 20 किलोमीटर ही आपकी गाड़ी चलेगी क्योंकि 1 लीटर का कन्वर्जन आपका इंजन 20 किलोमीटर में करता है और उससे ज्यादा कभी भी यह आपको माइलेज नहीं देगा क्योंकि आपके इंटरनल कंबन इंजन की कन्वर्जन कैपेसिटी इतनी ही है तो यह एनर्जी एक फॉर्म में से दूसरे फॉर्म में पेट्रोल का कन्वर्जन गति और हीट और टेंपरेचर इसमें होता है क्योंकि इंजन गर्म होता है तो टेंपरेचर के रूप में ये एनर्जी निकल जाती है और स्पीड के गाड़ी जो चलती है वो उसके रूप में तो ये वेलोसिटी एंड टेंपरेचर ये दोनों के रूप में डायनामि जम एंड टेंपरेचर दोनों के रूप में ये पेट्रोल कन्वर्ट होता है तो यदि ये थर्मोडायनेमिक्स का रूल लिया जाए तो उससे हमको पता चलता है कि ये पूरा जो अपना इवोल्यूशनरी चैन है दूसरा कांसेप्ट स्वामी जी इवोल्यूशन का लेते हैं स्वामी जी कहते हैं कि क्रिश्चियन थियोलॉजी कहता है कि ये इवोल्यूशन गलत है हम लोग कहते हैं कि इवोल्यूशन गलत नहीं है आप साथ-साथ में इवोल्यूशन के और एक कांसेप्ट ऐड कर दीजिए इवोल्यूशन तो ये इवोल्यूशन और कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी दोनों बेसिक आइडियाज को लेकर के स्वामी जी हमारे सामने एक प्रपोजिशन रखते हैं कहते हैं कि आज हमको भगवान राम कृष्ण भगवान राम जीसस बुद्ध इस तरह के जो महापुरुष स्वामी जी स्वयं जो हमको दिख रहे हैं तो वो क्या बंदर में से प्रकट हुए ये तो संभव ही नहीं है तो स्वामी जी कहते हैं कि आप पूरे पीछे में चले जाइए सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट मम तो वो सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट सम है उसमें डीएनए उसकी उसके भीतर में ब्लूप्रिंट के रूप में ये भगवान राम भगवान राम कृष्ण थे करके ही उसमें से ये आए अदर वाइज तो कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी का नियम गलत हो जाएगा अदर वाइज तो आप कहेंगे कि भगवान राम कृष्ण की हवा में से प्रकट हुए सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में से प्रोटोप्लास्मिक आने वाले हैं तो भगवान राम कृष्ण सृष्टि के प्रारंभ में थे उन्होंने अपना सार तत्व सृष्टि का जो बीज है उसमें प्रया फिर वही सार तत्व का धीरे धीरे इवोल्यूशन होते होते भगवान राम कृष्ण प्रकट हुए हैं तो ये दो आइडियाज की कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी और इवोल्यूशन इन दोनों के बेस इन दोनों को ऊपर में स्वामी जी ने यह अपना आर्गुमेंट स्थापित किया है कि यह जो पूरा विश्व ब्रह्मांड है उसका जो नियंत्र है उसका जो अधिपति है वो भगवान ईश्वर स्वयं है और इसीलिए स्वामी जी जो एकदम स्टार्टिंग स्टेटमेंट जो आखिर में देते हैं कि वी सी दैट इंटेलिजेंस मस्ट बी द लॉर्ड ऑफ क्रिएशन ऐसा शुरू में ही नहीं कह दिया कि ईश्वर ने इस सृष्टि की रचना की है वरना तो फिर ऐसा हो जाएगा कि अरे ये तो बड़ा ही कॉमन कांसेप्ट है भगवान ने सृष्टि की रचना की ो कौन सी बड़ी बात है किंतु इसके अगेंस्ट में तो आज का पूरा मॉडर्न साइंस खड़ा है और साइंस रिलीजन का कंफ्लेक्स आपको एक मैकेनिज्म बताता है आप जद ये कहते हैं कि भगवान ने सृष्टि की रचना कैसे की तो जादुई छड़ी उन्होंने घुमा दी और भगवान के जो मंत्र पाठ कर दिया जो भी कुछ कर दिया तो उसमें से एक के बाद एक पशु पक्षी मनुष्य वगैरह वगैरह अलग-अलग करके सब लोग प्रकट हुए और तो अभी मॉडर्न साइंस जब ये कहता है कि नहीं करोड़ों साल की इवोल्यूशन की ये प्रोसेस है और ये उसके साथ-साथ में ही ये थर्मोडायनेमिक्स के जो लॉज है एंट्रोपिक जर्वेदस्ती हैं कि मॉडर्न साइंस की ही थिरी इस को लेते हैं जिस थिरी ने भगवान के नेसेसिटी को ही भगवान की उपस्थिति को ही निगेटिव की जरूरत कहां पे है हमने तो देखा कि आर्कियोलॉजिकल एक्सक वेशन करके कि ये जो मिसिंग लिंक एक के बाद एक बिटवीन वन स्पेसस आफ्टर अनदर हमको मिल रही है ये बंदर है ये मनुष्य है और उसके बीच में ये जो बंदर में से मनुष्य का जो इवोल्यूशन हुआ है हमारा ह्यूमन स्कल तो देखिए कि एवरी स्टेप हमारे पास में वो स्कल मौजूद है बंदर का जो ये स्केलेटन है वो इस तरह का है उसके बाद में इवोल्यूशन एक स्टेप हुआ तो उसके बाद में इस तरह का स्केलेटन हमको मिला इस तरह का आपको स्कल मिला उसके बाद में इवोल्यूशन होकर दूसरा स्कल मिला व तो पूरा इवोल्यूशनरी चैन हमको दिखाएंगे ऐसा नहीं हुआ कि वो फट करके ऐसा जादुई छड़ी घुमाया तो बंदर भी आ गया मनुष्य भी आ गया ऐसा तो नहीं हमको तो इवोल्यूशनरी लिंक मिल रही है तो इसके बारे में आपको भगवान ने क्या उसमें बड़ा काम कर दिया ये म्यूटेशन होता है ज अभी जीनस भी खोज लिए डीएनए भी खोज लिया जेनेटिक म्यूटेशन भी खोज लिया ये हमको पता है कि जिस तरह की परिस्थिति में जिस तरह के क्लाइमेट एटमॉस्फियर में हम रहते हैं उसकी हमारे शरीर पे असर होती ही होती है तो यह मैमल्स का जो डेवलपमेंट हुआ ये समुंद्र में हम थे तो यदि हम स्थल पे चलने की शुरुआत की जमीन पे चलने की शुरुआत की तो उसके लिए हमारे हाथ और पैर डेवलप हो गए यदि हम सवाना या तो फिर बड़े प्लेन में रहते हैं तो हमको खड़े होकर के चलना है सीधे होकर के चलना है जो अफ्रीका ईस्ट अफ्रीका जिसको कहा जाता है कि वहां पे फाइनल इवोल्यूशन हुआ वो जो होमो इरेक्टस में से होमोसेपियंस का तो वो फाइनल इवोल्यूशनरी स्टेप जो लिया गया तो जब तक बंदर थे या तो फिर बंदर में से इवोल्व हो कर के होमो स्पेसस में हम प्रवेश कर रहे थे तब भी तो हम लोग थोड़ा झुक कर के ही चलते थे हमारे पेर थोड़े से तो बेंट थे ही थे किंतु वो पूरे सवाना में अभी हमको घूमना है वहां पे पेड़ वगैरह तो है ही है किंतु बड़े-बड़े प्लेन मैदान है जिसमें कि आपको शिकार करना है ये बेल के पीछे दौड़ करके आपको आपको शिकार करना है तो यह सब करने के लिए आपको सीधा शरीर चाहिए तो वहां पर हमारा इवोल्यूशन हुआ कि अभी हम अपने दोनों पैरों प सीधे खड़े हो सकते हैं यह तो अभी एस्टेब्लिश हो गया है कि आपका एनवायरमेंट और जेनेटिक म्यूटेशन आपको एक के बाद एक हायर ये देता है और अभी आप सोचेंगे कि अरे ये तो करोड़ों साल पहले हुआ और इसका प्रूफ क्या है कि ये आप कह रहे हैं कि जने म्यूटेशन की वजह से हुआ क्योंकि इवोल्यूशन इज अ वेरी स्लो प्रोसेस आपको करोड़ों करोड़ों साल लगेंगे कि आपके शरीर में कोई फर्क आना आपके शरीर में विजिबल चेंजेज आना शुरू होगा तो हम लोग कहेंगे कि अरे ये तो फिर भी तो स्पेक्युलेटिव जितनी मिसिंग लिंग है बीच में वो भी उसी में से प्रकट हुई हालांकि वो सरवाइव नहीं कर पाए और वो चले गए वो अलग बात है किंतु ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि उसमें से हम लोग आए हैं आप तो ऐसा कह सकते हैं सबका एक साथ में ही जन्म हुआ है ऐसा भी तो आप कह सकते हैं कहां हमको इवोल्यूशन की प्रोसेस नजर से नहीं दिखाई देती ये तो करोड़ों करोड़ों साल की प्रोसेस है आपका बहुत सारा इनफर से है बहुत सारा आपको अनुमान करके कह रहे हैं हमको प्रूफ दिखाइए इवोल्यूशन तो फट करके तो होने वाला नहीं है तो किंतु देखिए कि आज के युग में यह सब हमको नजरों से दिखने को आता है जैसे कि मैंने एक स्टडी पढ़ा था वो जो फंगस होती है पेड़ को लगी रहती है उसका कलर ग्रीन है क्योंकि वो शिकारी है उससे बचना है तो जंगल जदी ग्रीन है लीले कलर का तो फिर वो फंगस का कलर भी ग्रीन होगा जिससे कि वो उसमें वो मिक्स हो जाए जिसको कैमफ्लेज कहते हैं इंग्लिश में अभी किंतु जंगल में आग लग गई तो जंगल का कलर पूरा एश के कलर का हो राख के कलर का हो गया ग्रे हो गया तो विथ इन अ फ्यू डेज कुछ दिनों में फंगस ने अपना कलर चेंज करके ग्रीन में से ग्रे कलर कर दिया तो ये सब अभी जब हम ऑब्जर्व करना शुरू कर रहे है तो यह सब हमको दिखता है जब एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में जाते हैं तो हमारी ग्रेविटी है उस ग्रेविटी में चलने के लिए पृथ्वी की ग्रेविटी पर चलने के लिए आपकी बोन डेंसिटी यानी कि हमारा हमारी हड्डियों का जो ताकत है वो कुछ होना चाहिए वरना हम पृथ्वी की ग्रेविटी पर चल नहीं पाएंगे किंतु स्पेस में जैसे कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हमारे एस्ट्रोनॉट मान लीजिए महीना दो महीना रहते हैं तो क्या होगा कि वहां पर माइक्रो ग्रेविटी है जीरो ग्रेविटी नहीं कहते आजकल उसको माइक्रो ग्रेविटी कहते हैं तो माइक्रो ग्रेविटी में यदि रहते हैं तो आपके जो हड्डियां है उसको तो इतना लोड नहीं लेना है आपको शरीर को चलाने के लिए तो इंटेंटली बोन डिके शुरू हो जाता है हड्डियों में से ताकत जो है वो कम होनी कमजोर होना शुरू हो जाती है तो जद एस्ट्रोनॉट पृथ्वी प आएगा तो फिर से तो माइक्रो ग्रेविटी में से पृथ्वी की ग्रेविटी पे आ गया तो उसके शरीर में जो हड्डियों के ऊपर में जो प्रेशर आता है वो इतना भयानक होता है उसको इतना पेन होता है और वो इसलिए वो क्या है कि स्पेस में रहते हैं तो रेगुलर एक वेरी डिसिप्लिन एंड वेरी रिगर अस रेजिम ऑफ एक्सरसाइज उसको करनी पड़ती है रेगुलर एक्सरसाइज करनी पड़ती है जैसे कि बोन डेंसिटी मेंटेन रहे और मेडिसिन वगैरह लेनी पड़ती है जैसे कि पृथ्वी प जब वापस आए तो उसकी बन डेंसिटी उतनी की उतनी बनी रहे वरना तो अभी मान लीजिए कि पृथ्वी पर कोई थर्मोन्यूक्लियर एक्सप्लोजन हुआ ना कि हमारे में ऐसा वो जो आज वो वो मार्स रॉकेट स्टार शिप उस लच हुआ वो इलोन मस्क कहता है कि वी विल बिकम मल्टी प्लेनेटरी सिविलाइजेशन तो मार्स की जो ग्रेविटी है वो पृथ्वी की ग्रेविटी से आई थिंक कम है न सि हैना कि कितनी है जो भी है तो वहां पर जब ह्यूमैनिटी डेवलप होगी तो उनका बोन स्ट्रक्चर उनका फिजिकल स्ट्रक्चर वो पूरा डिफरेंट होगा तो ये अभी तो हम लोग नजरों से देख रहे हैं फिजिकल इवोल्यूशन कैसे होता है तो आज आप साइंस को पूरे पूरा आउट नहीं कर सकते आप ये नहीं कह सकते कि भगवान ने पूरी सृष्टि की रचना की और यह जादू चमत्कार से सब चलता है आपको यह साइंटिफिक लॉजिक जो है उसको उसको यू विल हैव टू टेक इट इनटू अकाउंट इफ यू वांट टू एक्सप्लेन रिलीजन इफ यू वांट टू एक्सप्लेन स्पिरिचुअलिटी तो स्वामी जी ने साइंस की ही थिरी को लेकर के वेदांतिका जैसे महापुरुषों हमारे सामने आज अवती ण हो रहे हैं हमने नजर से देखा है इनको तो ऐसा तो नहीं होगा कभी कि यह महापुरुष कहीं हवा में से चले आए उनके के पीछे इतनी ही हायर शक्ति विराजमान होगी और यह हायर शक्ति क्यों होगी क्योंकि थर्मोडायनेमिक्स का जो कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी है या तो फिर ये डीएनए वाला थिरी है कि डीएनए में जो आपका ब्लूप्रिंट पड़ा है जो जेनेटिक स्ट्रक्चर है बीच में से उसी तरह का वृक्ष प्रकट होगा ऐसा नहीं होगा कि वट वृक्ष के बीच में से आम प्रकट हो और आम के बीच में से कहीं वो ये ऑरेंज प्रकट हो ऐसा तो होने वाला नहीं है आम के बीच में से आम ही प्रकट होगा क्योंकि उस का जेनेटिक स्ट्रक्चर इस तरह का है तो ये मॉडर्न साइंस को लेकर के स्वामी जी ने वेदांत गड वेदांत के ईश्वर को समझाया आखिर में जो उन्होंने स्टेटमेंट दिया कि द इंटेलिजेंस दैट बिगिनिंग मस्ट बी द लॉर्ड ऑफ क्रिएशन तो यहां तक हम लोग पहुंचे हैं अभी मैं थोड़ा आगे पढ़ता हूं आज सुबह को मैं स्वामी जी के लंडन लेक्चर के बारे में पढ़ रहा था इंडिया आने से पहले स्वामी जी लंदन में थे करते थे वो जो मिस वाल्लो है अमेरिका में फिर ये गुडविन है ये सबको कहा करते थे कि अभी तुम लोग वेदांत प्रचार करना शुरू करो तो ऐसा एक दिन डिस्कस हो रहा था तो गुडविन को बोलते हैं कि देखो भारत में हम लोग जाएंगे तुम भी मेरे साथ में आना इंडिया में देखना कि वहां प ठाकुर की तिथि पूजा जब होती है 5 हज लोग इकट्ठा होंगे और इन सबके सामने में तुमको वेदांत के ऊपर मैं प्रवचन देने को बोलूंगा तो अभी क्या है कि ये विदेशी लोग है भारत की जो जनसंख्या की जो क्या है वो उनको कभी-कभी समझ में नहीं आता वो उनको लगता है कि जद 100 200 300 लोग इकट्ठा हो गए तो बहुत बड़ी भीड़ हो गई ये अपने वो नरेंद्र मोदी स्टेडियम में लाख डेढ़ लाख लोग देख कर के ये लोगों को लगता है कि इतने सारे कहां से आ गए तो भारत में छोटा सा भी वो होता है तो आपका लाख दो लाख तो ऐसे ही इकट्ठा हो जाते है तो यहां पे स्वामी जी कह रहे हैं कि 500 लोग ठाकुर की तिथि पूजा में आएंगे इन सब के सामने तुम वेदांत का प्रवचन दोगे तो तो वो गुडविन सोचता है कि क्या ये सब बातें कर रहे हैं स्वामी जी तो गुडविन क्या है वो मिसेस बल को लेटर लिखता है वो उसम लेटर में लिखता है कि स्वामी जी टॉक्स ल दिस नॉनसेंस डू यू नो वई बिकॉज ही डिस्पेंस सो सो मच सेंस ट एस ए एंटीडोट ही हैज टू टॉक नॉनसेंस वनस इन अ वाइल माने स्वामी जी इतनी अच्छी अच्छी बातें करते हैं कि उसको बैलेंस करने के लिए बीच-बीच में उनको थोड़ी बेतू की बातें बोलनी पड़ती है इसलिए वो कह रहे हैं कि दक्षिणेश्वर में लोग इकठा होंगे और 5 हज लोगों के सामने तुम वेदांत पर लेक्चर देना कहा से ऐसा होने वाला है तो यह जो स्वामी जी टॉक सो मच सेंस वेदांत के लेक्चर में इतनी सारी अच्छी अच्छी बातें कर रहे है तो उसके सामने उनको ऐ थोड़ी बेत की बातें भी करनी पड़ती है हालाकि हमको पता है गुडविन को भी पता है कि य तोय तो मजाक में कह रहा था और आज हमको पता है जैसे दक्षिणेश्वर में या तो फिर पतरू के दिन प या तो फिर कुमारी पूजा के दिन पे बेलूर मठ में जब वो पूजा होती है तो 500 तो कहां लाख दो लाख 3 लाख 5 लाख लोग इकट्ठा हो जाते हैं मैं पहली बार बेलूर मठ में मैंने जॉइन किया था पीपीटीसी तो हमको बोला गया कि कल पतरू दिवस है हम लोग सब काशीपुर गार्डन हाउस जाएंगे जहां पर ठाकुर की समाधि हुई और जहां पर ठक ठाकुर ने वो तो मादर चैतन्य हो वो वो सबको आशीर्वाद दिया था तो अर्ली मॉर्निंग एक एकम अर्ली मॉर्निंग 4:00 बजे मंगलारती होती है उसके बाद में नौका से सामने ही है गंगा के किना गंगा क्रॉस करके ही वो काशीपुर गार्डन है तो वहां पे हम लोग हमको जाना है तो नौका क्रॉस करके गए वहां पे और नौका वहां पे किनारे प रख दी और पैदल हम लोग जा रहे हैं ज्यादा दूर नहीं है और सुबह का 4:30 का समय होगा 4:00 बजे की मंगलारती के बाद निकले थे तो तो हम लोग जा रहे हैं रास्ते में मैंने देखा कि लाइन लगी है वो इतनी लंबी लाइन लगी है और सभी लोग तो खड़े नहीं हो पाएंगे इस लाइन में तो कोई कोई लोग तो ऐसा वो बिस्तर लगा के लाइन में सोए भी है तो मैं सोच रहा हूं कि होगा कुछ पता नहीं इंडिया में तो ऐसी कोई लाइन लगना बहुत बड़ी बात नहीं है तो हम चलते ही जा रहे हैं चलते ही जा रहे हैं वो लाइन भी चलती ही जा रही है आखिर में जाकर के देखा कि काशीपुर अपना मठ है वहां उसके गेट तक ये लाइन है तब मुझे लगा कि अरे ये लोग क्या ऐसा क्यों कर र है तो फिर वो मेरे साथ में जो महाराज थे वो कहा वो जब दरवाजा खुलेगा तब सबको प्रवेश मिलेगा और इतनी भीड़ रहती है दिन भर कि लोग पूरी रात एक लाइन में खड़े रह कर के वो अपेक्षा करते हैं कि जैसे गेट खुलता है हम लोग पहले दर्शन करेंगे उस समय वो 18960 लोग आएंगे आज जो है स्वामी जी का सेंस और नॉनसेंस अच्छी बातें और बेतुकी बातें दोनों जो बोथ है कम ट्रू ये वेदांत देखिए कि मैं विश्वरूप महाराज का लेक्चर सुन रहा था अभी कुछ दिनों पहले सर्वप्रिया अंद जी तो वो बता रहे थे कि ये ब्रायन ग्रीन है वो एक बहुत पॉपुलर साइंस राइटर है तो उसने एक किताब लिखी है अनटिल एंड ऑफ टाइम यानी कि ये विश्व ब्रह्मांड का अंत जब आएगा कॉस्मो उस का तो किस तरह से आएगा तो उसकी जो सब थरी वगैरह है तो हावर्ड साइंस सेंटर में हावर्ड साइंस सेंटर सेंटर माने कि तो बहुत बड़ी जगह हो गई माने वेरी प्रेस्टीजियस प्लेस और वहां पर सर्वप्रिया अंद जी कहते हैं कि मुझे भी आई हैड अ गुड फॉर्चून कि वो जो बुक लच सेरिमनी होता है ना तो बुक लच के समय ये जो देते हैं प्रवचन ब्रायन ग्रीन इ वेरी पॉपुलर मने वो बहुत अच्छा वो वक्ता भी है वो लेखक भी है तो वो उसकी स्पीच सुनने के लिए सर्वप्रिया अंद जी को वो मौका मिला था तो हावर्ड सायं सेंटर में वो भी थे 700 800 लोग बैठे थे तो अभी मुझे यह बात नहीं पता था व महाराज जी बता र है किय ब्रायन ग्रीन का बड़ा भाई है इकोन में साधु तो मने ही फैमिलियर विद दिस ब्रायन ग्रीन को पता है यह वेदांत कांसेप्ट वगैरा क्या है तो अभी उसने ब्रायन ग्रीन ने देखा की ऑडियंस में महाराज जी बैठे गेरवा पहन करके तो ल तो फैमिलियर है ये तो इन कान में तो उनके बड़े भाई है यानी सन्यास गरवा वेदांत उपनिषद जनरल फैमिलियरिटी है तो उन्होंने महाराज जी के साथ में थोड़ी देर बात की तो सर्वप्रिया अंद जी उनको पूछते हैं कि आपका क्या कहना है यह जो उपनिषद में आत्मन ब्रह्मण ईश्वर विश्व ब्रह्मांड ये सब चीजों के बारे में जो कहा गया है स्वामी जी जो साइंस की दृष्टि से वेदांत को समझाने का प्रयत्न करते हैं सो व्ट इज योर ओपिनियन आपका क्या मत है तो ब्रायन ग्रीन क्या कहता है कि देखिए कि उपनिषद एंड वेदास आर पोएटिक इकोस ऑफ मॉडर्न साइंस अर्थात ये एक कवित्वम शैली में आधुनिक विज्ञान को एक समझाने का प्रयास किया गया है अभी ये कहना कि वेद में आधुनिक विज्ञान को समझाया गया है उसका एक कवित्वम शब्दों में ट इट सेल्फ इज एन एक्सेप्टेंस के आधुनिक विज्ञान के जो आइडियाज है उसका स्ट्रीड फॉर्म उसका कहेंगे कि उसका सार एक तरह से वेद और उपनिषदों में उपलब्ध था अदर वाइज तो ये जैसे क्रिश्चियन थियोलॉजी के साथ में एकदम कंप्लीट एक कट ऑफ हो गया मॉडर्न साइंस ये क्रिश्चियन थियोलॉजी कहता है कि 4000 साल पहले विश्व की शुरुआत हुई तो 4000 साल पहले तो मनुष्य सभ्यता प्रारंभ हो चुकी थी मनुष्य का जो होमो इरेक्टस में से होमो सेपियंस इवोल्यूशन इट सेल्फ वाज 20 30 लाख साल पहले हुआ है 50 हज न की ऐसा कुछ साल पहले हुआ है मैं एक भूल गया तो जो भी है वो साल से तो बहुत बड़ा है वो पीरियड है तो ये जो इवोल्यूशन है और मॉडर्न थिरी और ये क्रिश्चन थियोलॉजी ये दोनों में इतना बड़ा गैप है कि वो कभी फुलफिल नहीं होने वाला है किंतु वेदांत जो है इट हैज पोएटिक इकोज ऑफ मॉडर्न साइंस मैथमेटिक्स की लैंग्वेज में तो यह सब नहीं बात कर पाएंगे किंतु पोएटिक लैंग्वेज में कवित्वम भाषा में आधुनिक साइंस का वो वहां पे वो इको माने एक तरह से परछाई वहां पर दिखती है तो जो भी है तो स्वामी जी कहते हैं कि हमको अभी एक समझ में आ रहा है कि स्वामी जी सीधा सीधी कहते कि ये जो हमारे भी ईश्वर है तो क्रिश्चन लोग कहेंगे हमारे भी ईश्वर है तुम्हारे भी ईश्वर है क्या डिफरेंस है तो डिफरेंस बहुत बड़ा है क्रिश्चियनिटी के जिस तरह से ईश्वर वाद ईश्वर की कल्पना की गई है वह आधुनिक साइंस के साथ में मैच नहीं होती जबकि भारत में ईश्वर की जो कल्पना की गई है वो आधुनिक विज्ञान ज्ञान के साथ में लोक स्टेप में चलती है पॉइंट टू पॉइंट मैच हो जाती है तो ये जद स्वामी जी पहले से ही कह देते कि हां ईश्वर ने सृष्टि की रचना की तो फिर वो जो सुनने वाले है उनका जो वेस्टर्न ऑडियंस उनमें से दो डिवीजन हो जाते हैं एक लोग कहते हैं कि एक एक वन ग्रुप ऐसा कहता कि अरे तो हमारे भी भगवान है हमारे भी भगवान ने सृष्टि की रचना की तुम नया क्या कह रहे हो दूसरा ग्रुप कहता कि अरे मॉडर्न साइंस ने तो भगवान की जो नेसेसिटी है ईश्वर की उसी को नेगेट कर दिया है उसी को निकाल दिया है तो फिर हमको क्रिश्चन गोड की भी जरूरत नहीं है और वेदांत ईश्वर की भी जरूरत नहीं है रखो अपने पास तो ऐसा ना हो जाए इसलिए पहले स्वामी जी ने साइंस समझाया और उसके बाद में बताया कि वेदांतिका जाएगा फिर वहां से तो सृष्टि की रचना होगी ही उसके बाद में वेदांत प्रारंभ हो होगा ही होगा सर्व प्रियानंदनसेक्स यू फॉर अवर अंडरस्टैंडिंग मने जहां तक बाक्य विश्व का प्रश्न है हम आपकी ओर देखते हैं हमारी समझ को बढ़ाने के लिए किंतु जहां से कॉन्शसनेस स्टार्ट होती है जहां से इनर वर्ल्ड स्टार्ट होता है बुद्धिज्म हैज अ लॉट टू ऑफर बुद्धिज्म को बहुत कुछ देने का है बुद्धिज्म के पास में बहुत सारा ज्ञान है जो कि आज की कॉन्शसनेस स्टडी में वो कंट्रीब्यूट कर सकता है तो यहां प बुद्धिज्म ले लीजिए वेदांत ले लीजिए जो भी ले लीजिए बाह्य विश्व ब्रह्मांड है बाह्य संसार है इसको हमको नो डाउट साइंस की दृष्टि से ही समझना होगा किंतु ये जो आंतरिक विश्व है यह हमारी कॉन्शसनेस है हमारी चेतना है वो चेतना को समझने के लिए कॉन्शसनेस को समझने के लिए साइकोलॉजी को समझने के लिए मनुष्य की ये यात्रा है जन्म जन्मांतर की ईश्वर की ओर जाने की यात्रा इसको समझने के लिए वेदांत की ही जरूरत पड़ेगी और सबसे बड़ा है कि ये मटेरियल साइंस या तो फिजिक्स और इनर साइंस या तो वेदांत इन दोनों में कोई कॉन्फ्लेट नहीं है बोथ कक लोक स्टेप्स बोथ लोक एंड इन हैंड दोनों हाथ में हाथ रख कर के चलते हैं तो यह स्वामी जी का अभी तक का हुआ अभी मैं थोड़ा आगे पढ़ता हूं कि स्वामी जी क्या कहते हैं व्हाट इज द मोस्ट वव नोशन ट मैन है ऑफ दिस यूनिवर्स यह जो विश्व ब्रह्मांड है इसकी समझ मनुष्य की जो है उसमें हाईएस्ट आईडिया क्या है इट इज इंटेलिजेंस द एडजस्टमेंट ऑफ पार्ट टू पार्ट द डिस्प्ले ऑफ इंटेलिजेंस ऑफ व्हिच द एंट डिजाइन थिरी वाज एन अटेम्प्ट एट एक्सप्रेशन ये यदि मुझे ठंडी लगेगी तो मैं स्वेटर पहनू मैं रोज सुबह को वॉकिंग करता हूं आज से मैंने स्वेटर पहन के वॉकिंग करने की शुरुआत की क्योंकि मुझे पता है कि जद ठंडी नहीं भी लगेगी क्योंकि कि तो सोच के रखना पड़ेगा कि यदि चेस्ट में जद ठंडी हवा चली गई और कफ वगैरह हो गया तो फिर एक नई मुसीबत खड़ी होगी बेटर है प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर पहले से ही स्वेटर पहन लो तो ये मेरी अकल मेरे में थी बोल कर के मैंने स्वेटर पहन लिया तो दिस इज इंटेलिजेंस तो ये जो पूरा विश्व ब्रह्मांड है वहां पे मनुष्य को आने की जरूरत पड़ेगी तो मनुष्य के लिए इस तरह की पृथ्वी चाहिए पृथ्वी पे पानी चाहिए पानी और हवा चाहिए ऑक्सीजन चाहिए हाइड्रोजन इस तरह का वो केमिकल कंपोजीशन चाहिए वगैरह वगैरह जो भी कुछ चाहिए अन्न आहार की जरूरत पड़ेगी उसके लिए आहार किस तरह से वो सब वो सोच समझ करके जो विश्व ब्रह्मांड की उत्पत्ति होती है दैट इज द हाईएस्ट आइडिया ऑफ कॉस्मो एक इंटेलिजेंस है एक कॉस्मिक इंटेलिजेंस है जो कि इस विश्व ब्रह्मांड को चलाती है द बिगिनिंग वाज देर फॉर इंटेलिजेंस अर्थात कि इसका हम इस इसके ऊपर से हम इस कंक्लूजन प आ सकते हैं कि विश्व ब्रह्मांड की शुरुआत इंटेलिजेंस से ही हुई है एक हायर कॉन्शसनेस से ही हुई है एट द बिगिनिंग दैट इंटेलिजेंस बिकम इव एंड इन द एंड ट इंटेलिजेंस गेट्स इल्ड शुरू में वो इंटेलिजेंस जो था एक बीज स्वरूप में अपने को वो इवॉल्व करता है एक बीज स्वरूप में अपने सार तत्व बन कर के वो प्रवेश करता है फिर वही बीज स्वरूप इवोल्यूशन होकर के धीरे-धीरे भगवान राम कृष्ण में परिणत होता है द सम टोटल ऑफ द इंटेलिजेंस डिस्प्ले इन द यूनिवर्स मस्ट देर फोर बी द इवॉल्वड यूनिवर्सल इंटेलिजेंस अनफोल्डिंग इट सेल्फ ये जो सम टोटल ऑफ इंटेलिजेंस है टोटल इंटेलिजेंस इस विश्व ब्रह्मांड में कितनी है तो आज हमको जो इंटेलिजेंस दिख रही है या तो फिर आज जो हमको दिव्यता का प्रकाश दिख रहा है वही दिव्यता का प्रकाश बीज बन के सृष्टि के प्रारंभ में होगा कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी ऐसा नहीं होगा कि वो जो बीज था ब्रह्मांड का उसमें वो जड़ था और जड़ में से आज यह दिव्य चैतन्य प्रकट हुआ है संभव ही नहीं था दिव्य चैतन्य बीच के रूप में सार तत्व बनके प्रवेश हुआ बीच में और वही बीज धीरे धीरे इवोल्व हो कर के आज भगवान कृष्ण चैतन्य के रूप में हमारे सामने प्रकट हुआ है दिस यूनिवर्सल इंटेलिजेंस इज व्ट वी कॉल गॉड यह जो यूनिवर्सल इंटेलिजेंस जो सृष्टि के प्रारंभ में थी जिसने यह बीज में प्रवेश किया इसको हम ईश्वर कहते हैं कॉल इट बाय एनी अदर नेम आप इसको कोई भी नाम से पुकार सकते हैं आत्मन ब्रह्मण निर्वाण क पुरुष व्हाट एवर फादर इन हेवन व्हाट एवर आप कोई भी नाम से उसको पुकार है इट इज एब्सलूट सर्टेन दैट इन द बिगिनिंग देर इज ट इनफा कॉस्मिक इंटेलिजेंस यह बिल्कुल निश्चित है यह बिल्कुल आपको प्रूव हो गया है कि सृष्टि के प्रारंभ में व कॉस्मिक इंटेलिजेंस वैश्विक चेतन वैश्विक चेतना विराजमान थी वैश्विक चेतना उपस्थित थी दिस कॉस्मिक इंटेलिजेंस गेट्स इवॉल्वड एंड मेनिफेस्ट इवोल्व इट सेल्फ अंट्स द परफेक्ट मैन द क्राइस्ट मैन द बुद्धा मैन यह कॉस्मिक इंटेलिजेंस वैश्विक चेतना वैश्विक दिव्य चैतन्य धीरे धीरे इवोल्व होकर के बुद्ध में भगवान बुद्ध में भगवान क्राइस्ट में जीसस क्राइस्ट में भगवान राम कृष्ण में वो परिणत होता है इवोल्व होता है उत्क्रांति होती है उसकी देन इट गोज बैक टू इट्स ओन सोर्स और स्कप बाद में क्या होगा यही विश्व ब्रह्मांड फिर से एक बीज में चला जाएगा क्योंकि यह तो कल्प है ना स्वामी जी ने इससे पहले एक कल्प का हमको विचार बताया था साइक्लिकल यूनिवर्स सृष्टि स्थिति प्रलय ये एक साइकल जो है वो चलती ही रहेगी इसको साइकल को स्वामी जी ने कहा ये कल्प है तो कल्प के बाद कल्प चलते ही रहेंगे सृष्टि की रचना होगी वो उसका विकास होगा फिर प्रलय होगा और प्रलय में यह सृष्ट बीज रूप में चली जाएगी अर्थात ये दिव्य चैतन्य है वो बीज के रूप में था उत्क्रांति होकर के इवोल्यूशन होकर के भगवान राम कृष्ण में प्रकट हुआ और वही आज का विश्व ब्रह्मांड उसकी जब प्रलय होगा तो यह दिव्य चैतन्य एक नए बीज के रूप में अपने को परिणत करेगा फिर उसी बीज में से फिर से नए विश्व ब्रह्मांड की शुरुआत होगी तो ये सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकल चलती ही रहेगी ट इज वई ऑल द स्क्रिप्चर से इसीलिए सभी शास्त्र कहते हैं इन हिम व लिव एंड मूव एंड हैव अवर बीइंग ईश्वर के भीतर में या तो दिव्य चैतन्य के भीतर में हम स्थित है हम चालित है और हम रहते हैं इसका क्या सोर्स है मैं खोज के बताऊंगा बाद में कौन से यह श्लोक में से स्वामी जीय कहते हैं आगे कहते हैं स्वामी जी ट इ वाई ल द स्क्रिप्चर प्रीच ट व फम गड एंड गो बैक टू गड इसीलिए सभी शास्त्र कहते हैं कि हम ईश्वर में से प्रकट हुए हैं और आखिर में ईश्वर में ही समाहित हो जाएंगे डू नॉट बी फ्राइटें बाय थियोलॉजिकल टर्म्स देखि स्वामी जी ने इतना सब कुछ बड़ी बड़ी व हमको फिलोसोफी बता दी फिर आखिर में क्या कहते हैं यह जो बड़े बड़े फिलोसॉफिकल शब्द है इससे आप डरिए मत इफ टम्स फाइटन यू यू आर नॉट फिट टू बी फिलोसोफर यह बड़े बड़े शब्दों से यदि आप डर जाते हैं तो आप फिलोसोफर या तो दार्शनिक होने के लायक नहीं है इफ टर्म्स फ्राइटनर्स फर्स दिस कॉस्मिक इंटेलिजेंस इज व्ट थियोलोजियंस कॉल गॉड ये वैश्विक दिव्य चैतन्य है इसी को दार्शनिक लोग ईश्वर कहते हैं देखिए इतना सब कुछ बताने के बाद में आखिर में स्वामी जी कहते हैं कि ये जो बड़े-बड़े शब्द है या बड़े-बड़े आइडियाज इसको डरिए मत डरेंगे तो आप दार्शनिक होने के लिए लायक नहीं है हम लोग बोलेंगे कभी कभी हमारे मन में आएगा अच्छा दार्शनिक होने की क्या जरूरत है भक्त होने से भी तो हो जाएगा किंतु देखिए कि जो लोग मेरा अभी कुछ दिनों पहले एक डिवटी के साथ बात हो रहा था तो उन्होंने कहा कि हा हमको भक्ति योग समझ में आता है जन कर्म योग भी अच्छे से समझ में आता है किंतु ये जो ज्ञान योग है उसके आइडियाज उसके विचार थोड़ा सा हमको डिफिकल्ट लगते है तो मैंने कहा कि देखिए य ये ठाकुर के पास आने पूरा ग्रेजुएशन आपको कंप्लीट करना पड़ेगा ग्रेजुएशन में एक के बाद एक टॉपिक होता है ना वो वहां पर फेल हो जाएंगे तो एटीकेट आ जाएगी आपको फिर से वो सब्जेक्ट कंप्लीट करना ही है तो वैसे ही ठाकुर के पास आएंगे तो कर्म ज्ञान भक्ति और ज्ञान ये सिलेबस आपको कंप्लीट करना ही है नहीं वरना वो एटीकेटी आएगी आपको फिर से वापस आना पड़ेगा जब तक आप इसको कंप्लीट नहीं करेंगे तो वैसे ही ये ज्ञान योग कभी कभी डिफिकल्ट लगता है किंतु मेरी दृष्टि से यदि हम इसमें थोड़ा सा समय दे थोड़ा सा हम एकाग्रता हम ला तो समझने में कोई इतना डिफिकल्ट नहीं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं अ कर दिए पछ बात करिए ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा पस्तु