मङ्गलाचरण
ओम स्थापकायच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन उसका एक स्लाइड शो हम देख रहे थे यह है स्लाइड नंबर 12
Empathy: सहानुभूति: इंसानियत की असली पहचान
स्वामी जी कहते हैं थ्री थिंग्स आर नेसेसरी फॉर ग्रेट अचीवमेंट्स। फील फ्रॉम द हार्ट। डू यू फील दैट मिलियंस एंड मिलियंस ऑफ द डिसेंडेंट्स ऑफ गॉड्स एंड सेजेस हैव बिकम नेक्स्ट डोर नेबर्स टू ब्रूट्स? डज़ इट मेक यू रेस्टलेस? डज़ इट मेक यू स्लीपलेस? हैज़ इट मेड यू ऑलमोस्ट मेड? देखिए यह जो ह्यूमन माइंड है जिस तरह से कार्य करता है उसमें एक बहुत ही इंपॉर्टेंट फैक्टर है वो है एंपैथी। एंपैथी का अर्थ क्या है? सिंपैथी एक चीज है। एंपैथी एक अलग चीज है। एंपैथी का अर्थ है कि मैं जिनके कांटेक्ट में आता हूं, उनके मन के भीतर में क्या चल रहा है, वह समझने की क्षमता। अभी इसका अर्थ टेलीपथी या ऐसा कुछ नहीं नथिंग मिस्टीरियस यूजुअली हम जिनके साथ रहते हैं जिनके साथ में वार्तालाप करते हैं उनके मन की स्थिति हम समझ पाते हैं। क्या वो दुखी है ना कि क्या वो जॉयफुल है। क्या वह डिप्रेस्ड है ना कि वह एंथूजियास्टिक है। वो जिस तरह से बात करते हैं वह उसमें सिंसियरिटी है ना कि उसमें हाइपोक्रेसी है। वो क्या स्ट्रेट फॉरवर्ड बात करते हैं ना कि घुमा घुमा करके बात करते हैं। यह दूसरों के मन को समझना यह ह्यूमन जो है कोई भी एक व्यक्ति उसके लिए यह बहुत ही सहज है। यूजुअली हम सब में यह होता है। इसीलिए देखेंगे कि कोई भी एक हेल्दी कम्युनिटी जो होता है। कम्युनिटी का अर्थ यदि हम मनुष्यों का समूह करें तो जैसे कि एक फैमिली एक कम्युनिटी है। मेरा वर्क प्लेस जो है वो एक कम्युनिटी है। ये जो आश्रम है जहां पे हम साधु लोग रहते हैं ये एक कम्युनिटी है। तो आप यदि और यह तो परमानेंट ये ये जो कम्युनिटीज जो है वो लॉन्ग टर्म कम्युनिटीज है कि आपको फैमिली के साथ में लंबा समय रहना ही है। आप अपनी गली में या जिस अपार्टमेंट में रहते हैं तो आपके पड़ोसियों के साथ में आपको लंबा समय रहना ही है। माने सालों सालों तक आपको उनका संग करना है। तो ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम उनका जो माइंड सेटअप जो है उनका यह जो किस तरह का यह लाइफ है उनकी चॉइससेस क्या है? उनके लाइक्स एंड डिसलाइक्स क्या है? वह यूजुअली किस तरह से बिहेव करते हैं? यह सब तो आप समझ ही जाएंगे। व्हिच इज़ वेरी नॉर्मल। किंतु जो कि एक टेंपरेरी सिचुएशन होती है। जैसे कि आप मान लीजिए कि आप रास्ते से जा रहे हैं। आप चौराहे पर खड़े रहे और एकाएक रेड लाइट हुआ वो ट्रैफिक लाइट और वहां पर आप खड़े रह गए। तो अभी आप देखिए कि जहां पर आप खड़े हैं तो आपके साथ में एटलीस्ट 2025 और भी व्हीकल खड़े हैं। तो उन लोगों के मन में क्या चल रहा है। एक नजर डाल के ही आप समझ जाएंगे। इस अर्थ में कि वह किस मूड में है। तो देखिए कि यह दूसरों का मन समझने की, दूसरों की भावना समझने की, दूसरों के सेंटीमेंट एंड इमोशंस समझने की कैपेसिटी मनुष्य के मन में होती ही है। और इस कैपेसिटी को कहते हैं एंपैथी। अभी मान लीजिए किसी के भीतर में एंपैथी नहीं है तो इसको क्या कहेंगे? इसको कहेंगे सोशियोपथ इस अर्थ में कि वह दूसरों का मन नहीं समझ पाता है। यह जितने भी क्रिमिनल्स होते हैं, यह जितने भी सीरियल किलर्स होते हैं, जितने भी टॉर्चरर्स होते हैं, यह जो लोग कि भयानक दुष्कृत कर सकते हैं। यह लोग इस तरह से सोशियोपाथ है। इन लोगों के भीतर में एमैथी नहीं है। यदि किसी का मर्डर भी कर रहे हैं, किसी पर अत्याचार भी कर रहे हैं तो उनका जो दुख है, उनका जो कष्ट है, उनका सफरिंग है वो उनको टच नहीं करता। वे लोग पत्थर की तरह है कि जो चाहे अत्याचार करें। सामने का सामने वाले का कष्ट जो है उनको स्पर्श नहीं करता। कोई कोई बाय बर्थ ऐसा कोई मेंटल डिफेक्ट होने की वजह से सोशियोपथ हो जाता है। किसी किसी के साथ में ऐसा होता है कि उसके जीवन में जैसे हम मूवीज में देखते हैं बायोग्राफीस में पढ़ते हैं कि वो जब बच्चा था तब उसको इतना कष्ट मिला कि फिर धीरे-धीरे करके उसका जो मन है जड़ जैसा राक्षस जैसा होता गया और फिर जब वह दूसरों को कष्ट देता है तो उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। किंतु यह जो सोशियोपैथ होते हैं जिन लोगों के भीतर में एमैथी नहीं होती है उन लोगों की संख्या अल्प है। थोड़ी सी ही है ईश्वर की कृपा से। ज्यादातर इस पृथ्वी पर लोग हैं उन सबके भीतर में एमैथी रहती है। इस अर्थ में कि आज मैं जिस तरह से बिहेव कर रहा हूं, जिस तरह से वार्तालाप कर रहा हूं, जिस तरह से मैं कर्म कर रहा हूं, इसका दूसरों के ऊपर में क्या असर होता है? दूसरों के मन की क्या परिस्थिति होती है वह वे लोग समझ लेते हैं। अभी यह एंपैथी जो है व्हिच इज एब्सोलटली बेसिक मिनिमम ऑफ ह्यूमन बिहेवियर। पशुओं के भीतर में भी एंपैथी होती ही है। हमने उदाहरण तो काफी देखे ही है। जैसे कुत्ते का स्वामी जी का एक कुत्ता था
स्वामी विवेकानंद के वफ़ादार कुत्ते 'बाघा' की अद्भुत कथा
बाघा। तो उस समय बाली म्युनिसिपालिटी में केस चल रहा था। मठ के ऊपर में टैक्स बिाना है। तो राजा महाराज है उसमें खास करके वह वहां पर कोर्ट में जाते थे और वह जो जुबानी वगैरह जो देना होता है ना विटनेस के स्टैंड में खड़े रह के वो जो सामने वाला वकील है उसके प्रश्नों का उत्तर देना वगैरह राजा महाराज किया करते थे। तो एक दिन हुआ ऐसा कि एक विटनेस माने जुबानी देने का समय आया है। इस तरह से साक्ष्य देना जिसको कहते हैं यह समय आया है। राजा महाराज है। पहले तो उनको वो विटनेस स्टैंड में खड़ा किया गया। वो जो गवर्नमेंट का जो वकील था लॉयर एटर्नी उसने राजा महाराज को ग्रिल किया कि क्यों नहीं बेलूर मठ पर टैक्स बिठाया जाए। ये वो करके तो राजा महाराज तो एकदम धीर गंभीर रूप से सब प्रश्नों का उत्तर दिया। उसके बाद में सानियाल महाशय ठाकुर के एक डिसाइपल है गृहस्थ डिसाइपल। वो बीच-बीच में कभी गेरुआ भी पहनते थे, कभी गेरुआ निकाल भी देते थे। थोड़ा सा मरकी हिस्ट्री है उनका। तो जो भी है म ही इज़ अ वेरी डिवोटेड पर्सन। किंतु जब उनको खड़ा किया गया विटनेस स्टैंड में और वह जो गवर्नमेंट एटर्नी उनको ग्रिल करता है तो अभी यह सानियाल महाशय पता नहीं कमजोर वैसे ही गेरवा पहनता पहना है गेरवा निकाल दिया है यानी मन जो है वो कमजोर है वीक माइंड है उनका तो अभी जैसे ही गवर्नमेंट एटर्नी ने उनको ग्रिल करना शुरू किया और सब सभी चीजों में वो हां हां बोलते गए तो माने यह तो बड़ा डेंजरस है कि हम जब अपोजिशन वाला एटर्नी आपको प्रश्न करता है और उसके अह अनुकूल आप उत्तर देते हैं तो आपका केस तो वीक हो ही जाएगा। तो अपने जो लॉयर थे राजा महाराज वगैरह जो साक्ष्य देकर के बैठे थे बाद में तो वे लोग सब चिंतित हो गए कि अभी क्या होगा तो यह तो पागल की तरह हां हां सभी चीजों में बोलता ही जाता है मठ पे यदि टैक्स आन पड़ा तो हमेशा के लिए यह एक फाइनेंशियल बर्डन बन करके रह जाएगा तो यह सब सोच ही रहे थे एकाएक देखिए ठाकुर की कृपा कैसी कि सानियाल महाशय बेहोश हो गए और जैसे ही बेहोश हो गए तो वैसे ही मठ का जो एटर्नी है उसने खड़े होकर कह दिया जज को कि महाशय देखिए यह तो बेहोश हो गया है। इसका अर्थ है कि उसका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। वह मेंटली फिट नहीं है। वह विटनेस के रूप में खड़े होने के लिए। तो जज ने भी देखिए आश्चर्य की बात है कि अपने एटर्नी की बात सुन ली और सानियाल महाशय ने जो कुछ भी बोला था सब कोर्ट के रिकॉर्ड में से माइनस करने को बोल दिया तो यह तो हम लोग बच गए किंतु उसके बाद में किंतु जज ने वहां का जो डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट होता है उसको ऑर्डर किया कि बेलूर मठ जाकर के एक बार इंस्पेक्शन करके आओ कि वहां पर क्या चल रहा है कि वह मठ है ना कि बाबू लोगों के एशो आराम का एक गार्डन हाउस तो यहां पे ये डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट है वो मठ इंस्पेक्ट करने के लिए आया एक अर्ली मॉर्निंग को बिना किसी को इनफॉर्म किए सरप्राइज इंस्पेक्शन जो होता है ना तो सरप्राइज इंस्पेक्शन के लिए आ गया। अभी था ऐसा कि मठ का मठ तो इतना बड़ा है तो गेट कहां पे है वह खोज नहीं पा रहा है। तो उसी मीनवाइल स्वामी जी का यह जो कुत्ता बाघा उसने इनको देख लिया। अभी इसके भीतर में क्या होगा कुत्ते का माइंड किसको पता नहीं तो वह सीधा वो अभी जो कुत्ते का जो इशारे करने का उसका जो कम्युनिकेट करने का जो तरीका होता है उस तरीके से उसने यह डीएम को कहा कि आइए मेरे पीछे और वह ले गया उनको गाइड करके सीधा जहां पे यह जो साधु निवास है स्वामी जी वगैरह रहते हैं सीधा वहां पे ले गया और जैसे ही यह डीएम आए वहां वहां पे तो स्वामी जी स्वयं उस समय मठ में ही थे। तो उन्होंने डीएम के साथ में बात करना शुरू कर दिया। तो किंतु डीएम ने रिपोर्ट में लिखा बाद में कि वन डॉग शोड मी द वे टू दी मठ। दैट मींस दिस इज ए मठ नॉट ए ऑर्डिनरी प्लेस। माने यदि कुत्ता भी आपको वहां पर सहाय करने को आता है तो यह मठ में ही हो सकता है और कहीं नहीं हो सकता। तो देखिए ये जो एमैथी जो है दैट इज नॉट लिमिटेड टू इवन ह्यूमंस। यह कुत्ते हैं वगैरह जो प्राणी हैं उनके भीतर में भी यह एंपैथी होती है। जिस व्यक्ति के
अंधराष्ट्रवाद jingoism का परिणाम: कभी न खत्म होने वाली शत्रुता
भीतर में एंपैथी नहीं है या तो फिर जो अपनी एंपैथी को सप्रेस कर सकता है उस तरह का व्यक्ति जो है सोशियोपथ हो सकता है। उसके भीतर में क्रिमिनल टेंडेंसीज प्रकट हो सकती है। ज्यादातर हम सभी लोग यदि मैं जिस फैमिली में रहता हूं सबके साथ में अप टू एन एक्सटेंड अच्छा व्यवहार करने का प्रयास करेंगे। फिर सामने वाला सतत बुरा व्यवहार करें तो फिर नाराज होकर के हम उसके साथ में दुश्मनावट कर ले। दैट इज अनदर मैटर। किंतु यूजुअली जो है हम लोग सह हृदय व्यवहार करना शुरू करेंगे। यह जो जिंगोइज्म जिसको कहते हैं ना जिंगोइज्म का अर्थ क्या है? ये जो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर, सेकंड वर्ल्ड वॉर ये जो स्टार्ट हुआ था यूरोप में उस समय ये नेशनलिस्टिक फरवर जो है सभी गवर्नमेंट ने अपने सिटीजंस में डालने का प्रयास किया था। अभी यह जैसे कि फ्रांस है और जर्मनी है दोनों का युद्ध होने वाला है। तो दोनों को जर्मन जर्मनी को भी और फ्रांस को भी अपने सिटीजंस को सोल्जर बनाना होगा। तो अभी वहां पे तो ड्राफ्ट सिस्टम था। इस अर्थ में कि जो मेल मिलिट्री एज जो मेल है उन सबको कंपलसरी आर्मी में नौकरी करना है। किंतु क्या है कि सिर्फ आर्मी में रिक्रूट करने से तो नहीं चलेगा। उनको तो मर्डर करने का फाइट करने का जुनून उसमें प्रकट करना है। तो जुनून कहां से प्रकट होगा? तो ये नेशनलिस्टिक फरवर जो है उसको बढ़ा करके म सब समय अभी फ्रांस की गवर्नमेंट या फ्रांस की ये जो मिलिट्री अथॉरिटी है वे लोग सब समय जर्मनी ने फ्रांस के साथ में ऐसा किया जर्मनी ने फ्रांस के साथ में ऐसा किया बोलकर के सब समय सोल्जर्स को उत्तेजित करते रहेंगे बोलकर के सोल्जर्स जो है यूजुअली जो कि एक एंपैथिक पर्सन है एन इंडिविजुअल सोल्जर जो कि सामने कोई आदमी आ जाए तो कोई चाकू लेके बेओनेट लेकर के ना तलवार लेके उसको मारने को नहीं जाएगा। यही एक ऑर्डिनरी खेत का किसान यही एक ऑर्डिनरी स्टूडेंट यही एक ऑर्डिनरी फैक्ट्री वर्कर उसको आपने यूनिफार्म पहना करके आर्मी में बिठा दिया। तो फिर यह जिंगोइज्म ये ओवर्ट नेशनलिज्म जो है उसको एक नाम दिया गया जिंगोइज्म। जिंगोइज्म का अर्थ यह है कि दूसरे लोग दूसरे देश के जो सैनिक हैं दूसरे देश के ये लोग हैं हमारे देश पे आक्रमण करते हैं। हमारा हमारे पे अत्याचार करते हैं। हमारा शोषण करते हैं। इसलिए हमारे देश को यूनाइट होकर के फाइट करने की जरूरत है। हमारी जो ग्लोरी है नेशनल ग्लोरी उसको सर्वश्रेष्ठ उसको प्रूव करना है। उसको हमारी विजय पताका पूरे विश्व में फैलनी चाहिए। ये जो एक नेशनलिस्टिक फरवर जो कि ये लोग कहते हैं जिंगोइज्म नेशनलिज्म होना कुछ गलत नहीं है। किंतु बियों्ड वन पॉइंट नेशनलिज्म चला जाए जब आप नेशनलिज्म के नाम पे माने अनंत हत्याकांड करने को तैयार हो जाए। छोटा-मोटा युद्ध होता है। इधर-उधर फाइट हुआ दो देश के सोल्जर्स के बीच में वह तो मामला खत्म हो गया। किंतु फिर दूसरों दो दूसरों के देश पर आक्रमण करके उनके गांवगांव में जाकर के यह जो सिविलियन है इनोसेंट सिविलियंस जो इनोसेंट स्त्री हैं बच्चे हैं बूढ़े लोग हैं उनकी हत्या करना वो फिर यह जंगली माने बार्बेरिज्म की कैटेगरी में आता है और यह बार्बेरिज्म तभी प्रारंभ होता है जब सोल्जर्स के भीतर में यह जिंगोइज्म होता है। खास करके यह जर्मनी में आप देखिए हिटलर ने इस तरह का जिंगोइज़्म यह जर्मनी के भीतर में डाल दिया था कि यह जर्मन सोल्जर वैसे तो काफी डिसिप्लिन है किंतु अब जैसे सोवियत यूनियन पे जर्मनी ने अटैक किया वहां से जो बारबेरिटी जो उन्होंने की है सोवियत सिटीजंस के ऊपर में जितने भी गांव में गए गांव के सभी स्त्री बच्चे बूढ़ों को इकट्ठा करके शूट कर दिया और पूरे गांव के गांव पांव जलाने लगे। ये ठीक है। सोवियत यूनियन के साथ में यदि आपकी दुश्मनी है तो आप सोवियत सोल्जर को मारिए। वहां पे स्त्री और बूढ़े और बच्चों को मारने की क्या जरूरत है? तो दैट इज कॉल्ड जिंगोइज्म। यह झिंगोइज्म आपका एक जो एक नॉर्मल एंपैथी है उसको कंप्लीटली परवर्ट कर देता है। इसीलिए यह जो डिक्टेटरशिप होती है ना जैसे कि अपने पड़ोस में ही है तो वे लोग क्या करेंगे कि सब समय यह मेरा शत्रु देश है और शत्रु देश हमारे पे इस तरह से चीटिंग करता है। हमारे साथ में इस तरह से दुर्व्यवहार करता है। वो सतत एक वो अपने सिटीजंस को फीड करते रहेंगे। यानी कि क्या होगा? एक आम आदमी उसका एक नॉर्मल एंपैथी जो है इस सबके प्रति एक तरह से समान सहृदयता से वर्तन करना ये लोगों को सतत ये झिंगोइज्म का ड्रिप जो है वो फीड करते रहना है और जिंगोइज्म में आकर के वो दूसरे जो दुश्मन देश है उसको गाली देना शुरू करें। फिर अपना देश यदि कोई भी कुकर्म करता है उस देश के विरुद्ध में तो नागरिक सभी में कहते हैं नागरिक कहेंगे सब कि अच्छा ही किया वे लोग उसी के लायक थे तो क्या है [गला साफ़ करने की आवाज़] यह जो मनुष्य के भीतर में एक नॉर्मल एंपैथी होती है इस एंपैथी को परवर्ट कर करके इस एंपैथी को करप्ट कर करके जितने भी क्रिमिनल्स हैं जितने भी डिक्टेटर्स हैं जितने भी यह सेल्फिश गवर्नमेंट्स हैं वे लोग अपना कार्य साधित करती है। यहां पे स्वामी जी का कहना है कि आपके भीतर में जो एंपैथी है उसको आप परवर्ट मत कीजिए। उसको आप करप्ट मत कीजिए। उसको आप डिपन कीजिए। बहुत सारे डिक्टेटर जो होते हैं ना उनको यह एंपैथी से बड़ा डर लगता है। मैं कभी-कभी मैं कुछ-कुछ आर्टिकल पढ़ता हूं कि एक देश जो कि उस देश का अब जैसे कुछ-कुछ इंडियन लोग पाकिस्तान में जाकर के देखते हैं कि अरे पाकिस्तान को जो हम टेररिस्ट कंट्री कहते थे तो वहां के नागरिक तो हमारे साथ में अच्छा व्यवहार करते हैं। वह कोई हमको पत्थर नहीं मारते। हमको गाली नहीं देते। वो तो काफी फ्रेंडली है। यह किस तरह से है? और फिर पाकिस्तान वाले जब इंडिया आएंगे तो इंडिया एक हिंदू राक्षस जो कि मुसलमानों पर सब समय अत्याचार करता है। माइनॉरिटी का शोषण करता है। ये जो एक वहां की गवर्नमेंट ने उसके देश में डाल दिया है। वे लोग जब इंडिया आएंगे हमारा एक जो लिबरल एटीट्यूड देखेंगे। माइनॉरिटीज को जो प्रोटेक्शन है, हिंदू धर्म का जो एक एक सहानुभूति पूर्वक बिहेवियर है, कितने सारे ट्रैवलर्स जो भारत में आए हैं, उन्होंने कहा है कि एक ही स्ट्रीट है। वहां पे मंदिर भी है, मस्जिद भी है, गुरुद्वारा भी है, चर्च भी है। इस तरह का मिरेकल हमने और कहीं पे नहीं देखा। तो यह जो एक लिबरल हेवन भारत में जो खड़ा हुआ है तो पाकिस्तान वाले आकर के देखकर के आश्चर्यचकित हो जाते थे। वो तो कहते हैं कि हम तो सोचते थे इंडिया सिर्फ हिंदुओं का देश है और हिंदू लोग हैं। सभी माइनॉरिटी पे अत्याचार करते हैं। तो यहां पे तो हमको ऐसा कुछ दिखता नहीं है। तो क्या है कि ये गवर्नमेंट जो है ये जिंगोइस्टिक प्रोपेगेंडा चलाती रहती है। और ये जो फैक्ट्स जो है फैक्ट्स को सप्रेस करती रहती है। जिससे कि क्या होगा? हमारा जो एक नॉर्मल एंपेथिक बिहेवियर है वो सप्रेस हो जाए। वो परवर्ट हो जाए। वह करप्ट हो जाए। स्वामी जी का कहना है कि देखिए यह जो एमैथी है इसको आप करप्ट मत होने दीजिए। एक इस तरह के देश में रहना जहां की गवर्नमेंट आपको सतत उकसाती रहती हो कि हम दुश्मनों से घिरे हैं और हमको दुश्मनों पे अटैक करना है। यह हमारा दुश्मन है। वह हमारा दुश्मन है। देखिए यह दुश्मन खड़ा करना। दैट इज द सीक्रेट ऑफ मेनी कंट्रीज। यह अब जैसे पाकिस्तान है। पाकिस्तान का अस्तित्व इसीलिए है क्योंकि वह भारत का अस्तित्व है। मान लीजिए कि कल कहीं जाकर के पृथ्वी पर से भारत देश अदृश्य हो जाए। तो आप देख लीजिएगा विदिन 24 आवर्स पाकिस्तान के चार पांच टुकड़े हो जाएंगे। क्यों? क्योंकि वो जो देश है उसके भीतर में यूनिटी इसीलिए है क्योंकि इंडिया के प्रति उनको दुश्मनावट है। उनके मन के भीतर में खड़ी कर दी गई है। जिस क्षण इंडिया चला गया जिस क्षण इंडिया के प्रति दुश्मनावट चली गई साथ में ही पाकिस्तान एज ए कंट्री अदृश्य हो जाएगा उसके टुकड़े हो जाएंगे। अमेरिका के बारे में काफी हिस्टोरियंस कहते हैं कि अमेरिका को प्रोग्रेस करने के लिए एक एनिमी चाहिए। एक दुश्मन चाहिए। पहले तो यह नजी जर्मनी था और यह फिर यह फासिस्ट जापान था। उसके बाद में यह सोवियत यूनियन आया। अभी चाइना है। तो एक स्ट्रांग एनिमी अमेरिका को हमेशा चाहिए जिसकी वजह से वहां की गवर्नमेंट और वहां के नागरिक जो है एक फोकस्ड होकर के वो लोग एक्शन ले सकते हैं। यदि एनिमी नहीं होगा तो अमेरिकन लोग आपस में ही झगड़ा करना शुरू कर देंगे। और देखिए हमने देखा भी सही कि सोवियत यूनियन के डिसइीग्रेशन के बाद में और चाइना का जो राइज हुआ है आजकल का इसमें ऑलमोस्ट 10 टू 20 इयर्स थे ऑलमोस्ट ये आप 200 से स्टार्ट करके 2015 चाइना का राइज नजर के सामने दिखने लगा ऑलमोस्ट 15 इयर्स का यह जो पीरियड है अमेरिका वाज़ अ सोल सुपर पावर एकमात्र महासत्ता था पूरी पृथ्वी पे और एकमात्र महा महासक्ता होकर के उस वो क्या से क्या नहीं कर सकता था। पूरे विश्व में वह कितना अच्छा कार्य कर सकता था। अफ्रीका में भयानक पॉवर्टी है तो वहां पर जाकर कुछ हेल्प कर सकता था। एशिया में इतना सब प्रॉब्लम्स है वहां पर जाकर हेल्प कर सकता था। तो वो सब नहीं करके वो आपस आपस में ही झगड़ना शुरू कर दिए और फिर यह ट्रंप जैसे पागल को इ करके भेजा एट द एंड ऑफ दिस एंटायर सिंगल सुपर पावर के पीरियड में कोई एक पागल ऑटोक्रेट जो है जब देश अटैक अंडर अटैक होता है दुश्मन जब देश पे अटैक करते हैं तो फिर देशवासियों को पता नहीं चलता किसको इ करें तो फिर हिटलर जैसे पागल को इ कर देते हैं तो वो एक चीज है अमेरिका ने ट्रंप ट्रंप को इ कब किया है? जबकि वह एक सोल सुपर पावर है। एकमात्र महासत्ता है। और कोई देश नहीं था पूरे विश्व में। भारत की तो बात ही भूल जाइए। किंतु ये जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, ये चाइना कोई एक भी रशिया एक भी देश ऐसा नहीं कि अमेरिकन अथॉरिटी को माने सीरियसली चैलेंज कर पाए। थोड़ा बहुत इधर-उधर पिन प्रिक कर पाएंगे। किंतु ओवरऑल चैलेंज आप नहीं कर पाएंगे। उस समय अमेरिका आपस के ये डेमोक्रेट ये डेमोक्रेटिक पार्टी और ये रिपब्लिकन और सिर्फ पार्टी नहीं लोगों के भीतर में भी ऐसा सब मनोमालिन्य खड़ा हुआ कि आखिर में ट्रंप जैसा पागल पीस टाइम में प्रेसिडेंट बना था। पहली बार जब बना था। सेकंड टाइम में भी पीस टाइम में ही बना है। तो देखिए कि बड़े-बड़े देश जो होते हैं तथाकथित सिविलाइज कंट्रीज होते हैं उनको एमैथी को परवरर्ट करके रहना पड़ता है। जो यदि एमैथी को खुला दौर मिल गया, एमैथी को यदि खुला रास्ता मिल गया तो क्या है? वह दूसरों को दुश्मन के रूप में नहीं देखेगा। सतत एक मिलिट्री बिल्ड अप करने की जरूरत है। एक फाइटर प्लेन लेंगे तो उसके सामने आपको 1 लाख स्कूल बन सकता है। इतना तो एक-एक फाइटर प्लेन का कॉस्ट होता है। तो 1 लाख स्कूल नहीं बना करके एक फाइटर प्लेन लेंगे। एक फाइटर प्लेन से संतोष नहीं होता है। तो 10 फाइटर प्लेन चाहिए। 20 फाइटर प्लेन चाहिए। लेटेस्ट जनरेशन चाहिए। स्टिल चाहिए। यह मॉडिफिकेशन चाहिए। यह फीचर चाहिए। यहां पर यह स्कूल में फैसिलिटी नहीं है। मॉडर्नाइजेशन करने की जो आवश्यकता है। प्रत्येक क्लासरूम में कंप्यूटर है। डिजिटल इक्विपमेंट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है। टीचर्स की सैलरी अपग्रेड करनी है। टीचर्स का नॉलेज अपग्रेड करना है। स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर है। रोड है। पानी है। यह जुडिशियल सिस्टम है। यह पुलिस सिस्टम है। कम्युनिटी इंफ्रास्ट्रक्चर है। कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर है। वो सब छोड़कर के आर्मी के भीतर में आप पैसे डालते ही जाइए, डालते ही जाइए। और यह सब कब संभव है? जबकि एक आम नागरिक है, एक सामान्य सिटीजन है। उसकी ये जो एंपैथी है वो आपने करप्ट कर दी है। वो सब समय सोचता है कि यह मेरे दुश्मन है और दुश्मनों पे हमको अत्याचार हम उस पे हमको हमला करना ही है। और देखिए यह म्यूचुअल है। बहुत बार ऐसा होता है ना हम आम नागरिकों को समझ में नहीं आता किंतु गवर्नमेंट गवर्नमेंट के भीतर में एक तरह का म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग होता है कि आप हमको गाली दीजिए हम आपको गाली देंगे। आप भी अपना मिलिट्री को डेवलप कीजिए। हम भी मिलिट्री को डेवलप करते हैं। आप भी करप्शन कीजिए। उसमें हम भी करते हैं। सो दिस इज़ अ वेरी डेंजरस सिचुएशन। स्वामी विवेकानंद
सहानुभूति और शक्ति: न शत्रु के सामने झुकना, न उसके दुःख पर प्रसन्न होना
एनविज़ंस अ डिफरेंट टाइप ऑफ वर्ल्ड। आप क्यों किसी के प्रति दुश्मनावट रख के एक देश की रचना करें? आप क्यों नहीं एक ऐसा देश बनाएं कि जहां पर यह एंपैथी है वह प्रॉब्लम नहीं है। बहुत सारी गवर्नमेंट के लिए सिटीजंस की एंपैथी है वह प्रॉब्लम है। सामने वाले का दर्द नहीं देखा जाता है। तो उनको सब समय सामने वाले को एक राक्षस के रूप में प्रोजेक्ट करना है। जब राक्षस के रूप में प्रोजेक्ट करेंगे तो फिर उसका कष्ट देखकर के हमको आनंद होगा। इसको कहते हैं स्केडन फ्रॉयड। दूसरों का कष्ट देख कर के हमको आनंद होना। खास करके अपने अह शत्रुओं का कष्ट देखकर के हमको आनंद होना। तो ये एक परिस्थिति बहुत सारी गवर्नमेंट अपने सिटीजंस के भीतर में खड़ा करना चाहती है। तो यह ऐसी परिस्थिति आ जाए कि हम अपनी एंपैथी को करप्ट कर दें। हम दूसरों का कष्ट देखकर के हमको आनंद हो। इसमें फिर क्या है कि इस तरह का देश जो है धीरे-धीरे करके मटेरियलिज्म है और फिर धीरे-धीरे करके यह जो नास्तिक है उसके रास्ते पे चलता जाएगा। नास्तिकवाद शब्द नहीं यूज़ करूंगा क्योंकि इस तरह के कंट्रीज कभी-कभी फनेटिकली रिलीजन होते हैं। फेनेटिसिज्म इज़ अ प्रॉपर वर्ड। यह जो फनेटिसिज्म, मटेरियलिज्म एंड फनेटिसिज्म इस रास्ते पे इस तरह के कंट्री जाते ही जाते हैं। और इसके इनफ एग्जांपल है ईरान को ही देखिए कि वहां पे सिटीजंस के भीतर में हमेशा ये अमेरिका के प्रति दूसरे कुछ देशों के प्रति इतना विद्वेष डाल दिया गया है। इतना विद्वेष डाल दिया गया है कि ये लोगों ने एक जो एक नॉर्मल थिंकिंग की कैपेसिटी थी वो नॉर्मल थिंकिंग की कैपेसिटी को ही जैसे कि करप्ट कर दी है। तो देखिए कि भारत एक ऐसा देश है फॉरर्चूनेटली आप देखिए कि हमारी गवर्नमेंट जो है वो एक तरह की जिंगोस्टिक गवर्नमेंट नहीं है। नेशनलिस्टिक गवर्नमेंट है। देश की सीमाओं की रक्षा करनी है। टेररिस्ट अटैक होते हैं तो मुंहतोड़ जवाब देना है। भारत का धर्मशास्त्र जो है श्रीमद्भगवत गीता लिखा ही गया है युद्ध के मैदान पे ये जो एमैथी माने एक एमथी को करप्ट करेंगे आप तो वहां के सिटीजन जो है जिंगोस्टिक हो जाएंगे मारो दुश्मनों को और दुश्मनों को कष्ट होता है तो हमको बड़ा आनंद होता है तो ये एक डायरेक्शन में चला जाता है और यह जो एमैथी जो है वो कभी-कभी हमारे कैरेक्टर को कमजोर कर देती है जैसे कि अर्जुन का उदाहरण है जब अर्जुन ने देखा कि उसी के रिलेटिव्स है युद्ध के मैदान पर कुरुक्षेत्र में नजर के सामने खड़े हैं और अर्जुन कहता है कि नहीं मैं उनके साथ में युद्ध नहीं करूंगा तो भगवान कृष्ण कहते हैं कि अरे तुम यह कैसी बात कर रहे हो जो अधर्म का आश्रय लेता है उसको दंड देना यह धर्म का माने यह जो क्षत्रिय का धर्म है तुम अपना धर्म छोड़कर के यदि भाग जाओगे जंगल में सन्यासी हो जाओगे आध्यात्मिक रास्ते पर चलोगे ना ही तुमको मिलेगा यह मन की शांति ना ही तुमको मिलेगा मन की शांति तो नहीं ही मिलेगी तुम क्षत्रिय हो और युद्ध मैदान से भाग गए हो बोलकर के लोग तुमको धिक्कार देंगे कि किस तरह का क्षत्रिय है यह किस तरह का यह कायर है तो दो तरह से एमैथी को आपको देखना है। बहुत सारी गवर्नमेंट अपने नागरिकों की एंपैथी को करप्ट कर देना चाहती है। उन लोगों के लिए अपने नागरिकों की एंपैथी एक तरह का प्रॉब्लम है। एक तरह का कर्स है। एंपैथी की वजह से ही यदि आप बार-बार मिलिट्री में इन्वेस्टमेंट करेंगे, मिलिट्री को नए-नए इक्विपमेंट ला के देंगे तो लोग प्रश्न करेंगे कि भाई इतनी भी क्या जरूरत है? जितनी आवश्यकता है उतना है अपने पास में। अभी एक्सेसिव खर्च करने की क्या जरूरत है? तो वह एक है। दूसरा है कि एंपैथी जो है अपने कैरेक्टर को कहीं कमजोर ना बना दे। जब एक धर्म के नाम पर जो युद्ध करना है जो बहुत सारे जो लिबरल होते हैं ना भारत पे टेररिस्ट अटैक भी होता है तो वे लोग कहते हैं नहीं दुश्मन देश पे अटैक नहीं करना है। वो तो कुछ बच्चे ही है जो कि मिस क्या कहेंगे उनको मिसगाइडेड कुछ बच्चे ही है जिन्होंने यह सब किया है। उसकी वजह से दुश्मन कंट्री को पनिश करने की जरूरत नहीं। तो इस तरह के मिसगाइडेड लिबरल भी होते हैं जो कि अर्जुन के साथ में हो चुका था एक बार। सो मध्यमपथा क्या है कि धर्म का आश्रय लेकर के आपको एमैथी को नरिश करना है। नर्चर करना है। जहां पे आवश्यकता हो शत्रु को दंड देने की वो आपको दंड दे देना है। भगवान कृष्ण ने स्वयं किया है। भगवान राम ने स्वयं लंका पे आक्रमण करके रावण का वध किया था। तो शत्रुओं की हत्या करना, युद्ध करना धर्म के लिए गलत बिल्कुल नहीं है। जो अपने धर्म शास्त्र में ही यह तो है। एट द सेम टाइम ये जिंगोइज्म है ये जो स्कडन फ्रॉयड ये जो मेन जर्मन शब्द है एक स्केडन फ्रॉइड। दुश्मनों का कष्ट देख के हमको आनंद होना। तो इसको कहते हैं स्कडन फ्रॉयड। तो यह स्केडन फ्रॉइड डेवलप कर देना। एमैथी की वजह उसको कष्ट मिल रहा है। मुझे बड़ा आनंद मिल रहा है। वहां पर फ्लड आ गया। वहां पर इतने लोग बेघर हो गए। वाह बहुत अच्छा हुआ। वहां की इकोनमी डाउन हो रही है। वाह वे लोग उसी के लायक थे। वहां के सिटीजंस इस तरह से सफर कर रहे हैं। हां, तो बहुत अच्छा हुआ। वहां पे अभी स्कूल बंद हो गया है। गवर्नमेंट शटडाउन हो गई है। बिकॉज़ ऑफ दिस वॉर और यह जो चल रहा है उसकी वजह से तो बहुत अच्छा हुआ। वे लोग उसी के लायक थे। ये स्केडन फ्रॉइड में हम ना चले जाए कि दूसरों का कष्ट देखकर के हमको आनंद हो और यहां पर हमारा कैरेक्टर कहीं वीक ना हो जाए कि हां जहां पर धर्म युद्ध करना है। जहां पे दुष्ट लोगों को पनिश करना है, दंड देना है वहां पर हम लोग जो है वो हाथों में चूड़ियां पहन कर बैठे रहे। अभी ये शब्द पुराना है। मैं जब स्कूल में था तब हम लोग आपस में कभी-कभी ये कहते थे हाथों में चूड़ियां पहन रखी है क्या? आज के युग में किंतु ऐसा भी कहना उचित नहीं है। स्त्रियों का आप साहस देखेंगे। बहुत सारी स्त्रियां जो होती है वो अपनी एयरफोर्स में पायलट है। सरप्राइजिंगली वन बिट ऑफ स्टैटिस्टिक्स आपको सरप्राइज करेगा कि यह जो कमर्शियल एयरलाइंस की पायलट होती है स्त्रियां तो लार्जेस्ट परसेंटेज इंडिया में है। जैसे कि मान लीजिए टोटल कमर्शियल पायलॉट से लाइसेंस कमर्शियल पायलट उसमें जो नंबर ऑफ वुमेन जो है अह लार्जेस्ट परसेंटेज भारत में है। आई थिंक 11% ने समथिंग कि इतनी परसेंटेज पायलट है वह लेडीज है। जबकि दूसरे देशों में इतना हाई परसेंटेज नहीं है। यहां तक कि यूरोप में भी नहीं यहां तक कि अमेरिका में भी नहीं। तो भारत में देखिए अभी जस्ट रिसेंटली न्यूज़ पढ़ा यह जो टॉपर एक आदमी है लेबरर है। उसकी लड़की अभी वह बोर्ड में टॉपर हो के आई है। तो अभी ऐसा भी कहना कि तुम कमजोर हो। तो इसका अर्थ है तुमने हाथों में चूड़ियां पहनी है। ये भी गलत है। देखिए स्त्रियों के भीतर में भी कितना साहस है। कितना पेट्रियोटिज्म है। कितना ये हार्ड वर्क करने की कैपेसिटी है। सो ये जो दो ट्रैप है एक तो कमजोर हो जाना। हमारा एमैथी जो है हमको कहीं कमजोर ना बना दे। एक चीज है और दूसरा है कि एमैथी करप्ट हो के हमारे भीतर में स्केडन फ्रॉयड ना ला दे कि दुश्मनों का कष्ट देखकर के हमको आनंद होता है। स्वामी जी कहते हैं कि देखिए एमैथी को प्रॉपर्ली डेवलप कीजिए। प्रॉपर्ली चैनलाइज कीजिए। जहां पे कि मिलियंस एंड मिलियंस ऑफ द डिसेंडेंट्स ऑफ गॉड्स एंड सेजेस हैव बिकम नेक्स्ट डोर नेबर्स टू द ब्रूट्स। यहां पे ये भारतीय ऋषि मुनियों की ये संतान संतति गण लाखों लाखों नर नारी ये स्त्री पुरुष वृद्ध आबाल वृद्ध वनीता जब इस कहानी का प्रारंभ होता है कभी-कभी ट्रेडिशनली तो क्या कहते हैं आबाल वृद्ध वनीता बाल वृद्ध और वनिता अर्थात स्त्री ये सभी लोग राज्य के ये सभी लोग ऐसा करते थे माने इस तरह से वह कहानी का प्रारंभ होता तो यहां पर भी देखिए कि यह जो ऋषि मुनियों की संतान संतति गण है स्त्री पुरुष वृद्ध बच्चे सब ये इन लोगों की जो परिस्थिति स्वामी जी के समय में थी और आज भी है बहुत बार हम लोग सोचते हैं कि हमको इस तरह कल ही हमारी जैसे बात हो रही थी कि यह रामकृष्ण मिशन प्रारंभ में तो रिलीफ एक्टिविटीज करता था और फिर इसके बाद में हमने स्कूल्स ओपन किए हैं, हॉस्पिटल चलाए हैं। किंतु आजकल इतना सारा यह सब करने की जरूरत नहीं है क्योंकि गवर्नमेंट के ही प्रोजेक्ट इतने सारे चल रहे हैं। गवर्नमेंट की ही एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम है या तो फिर आजकल तो एकदम नया स्टार्ट हुआ है। इलेक्शन के आगे आपको सीधा ₹10,000 जैसे बिहार में हुआ मतलब और 10,000, 5,000, 20,000 वो जो भी है आपको सीधा आपके बैंक अकाउंट में डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर के रूप में कर देंगे। तो व्हिच इज गुड एक्चुअली ऐसा होना चाहिए और किंतु यह एक बात है दिस डज नॉट टेक अवे फ्रॉम द फैक्ट माने गवर्नमेंट उनको सहाय कर रही है प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर जो गांव-गांव चालू हुए हैं गवर्नमेंट स्कूल जो चल रही है इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके प्रति एंपैथी जो है हमारी वो कहीं कम हो जाए। बहुत बार ये खास करके ये किसान आंदोलन के समय मैंने किसी किसी को सुना था कि अरे इन लोगों के पास में तो इतना सब सब्सिडी आता है। सभी किसान जो है वो एसयूवी लेकर के घूमते हैं तो क्या उनको भी इतना बिना मतलब का आंदोलन कर रहा है। व्हिच इज अ फैक्ट मे बी आई डू नॉट नो। किंतु डज़ नॉट टेक अवे फ्रॉम दैट फैक्ट कि किसान इन जनरल पुअर है। किसान इन जनरल वो एक तरह का अनसर्टेनिटी का सामना करता है। आज जैसे ही बारिश हुई नहीं हुई इसके ऊपर में बहुत कुछ डिपेंड है। वो जो मॉडर्न इरीगेशन सिस्टम कहीं सभी फार्म में तो लगी नहीं हुई है। तो क्या है कि एक एक्टिव एंपैथी हमारा होना चाहिए। जितना हो सके लोगों को सहाय करनी चाहिए। तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं
दूसरों के दुःख को हृदय से महसूस करें और उसके व्यावहारिक समाधान खोजें
कि यह तो सबसे माने यदि हमको ग्रेट होना है, मनुष्य को ग्रेट होना है, देश को ग्रेट होना है तो तीन सिचुएशन, तीन कंडीशन स्वामी जी हमारे सामने रखते हैं। कहते हैं सर्वप्रथम तो फील फ्रॉम द हार्ट। यह जो एमैथी ईश्वर ने हमको दी है दूसरों का मन का भाव समझने की। क्या वह कष्ट में है ना कि क्या वह खुश है? क्या वह दुखी है ना कि वह क्या है? एंथूजियास्टिक है। किस तरह की उसके मन की परिस्थिति है? ये जो एमैथी को एक्टिवली डेवलप कीजिए। सामने वाले के मन की परिस्थिति को समझिए। एंड देन फिल इट। फिल इट इन द डेप्थ ऑफ आवर हार्ट। फिल इट इन द एव्री सेल ऑफ आवर बॉडी। फिल इट डाउन टू द वेरी बोनस ऑफ आवर ह्यूमन एकिस्टेंस फिल इट एंड देन यू कैन से दैट यस यह जो इट डस इट मेक यू स्लीपलेस डस इट मेक यू रेस्टलेस स्वामी जी का वही फेमस घटना कि अमेरिका गए हैं वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन में लेक्चर देने के बाद में वर्ल्ड फेमस हो गए हैं। एक बड़े धनी के घर में रह रहे हैं। सोने के लिए बड़ा ही सुंदर कंफर्टेबल बेड है। किंतु उसके ऊपर नहीं सो करके स्वामी जी फर्श के ऊपर में लेटे हुए हैं और रो रहे हैं। अपने देश बांधवों के लिए सोच रहे हैं कि मैं इतना लग्जरी में जी रहा हूं। वहां पर मेरे करोड़ों-करोड़ों भाई हैं, बहनाएं हैं। जिन लोगों को खाने के लिए दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं है। तो यह जो प्रचंड एक भीतर में से एंपैथी प्रकट होती है। उनके प्रति सहानुभूति और करुणा प्रकट होती है। वो हमको चाहिए। एम्पैथी अल्टीमेटली कन्वर्ट्स इनटू कंपैशन। एक्टिव कंपैशन। यह एंपैथी यदि नहीं रहेगा मनुष्य कंपैजन फील कभी नहीं कर पाएगा। फिर वह करुणा का राज्य प्रारंभ हो जाता है। एमैथी है सर्वप्रथम सामने वाले के मन को समझने की स्किल या तो फिर आर्ट या तो फिर कला और उसके फाउंडेशन के ऊपर में खड़ा होता है यह कंपैशन या तो फिर करुणा। तो ये एमैथी और कंपैजन। इस दोनों को हमको एक्टिवली डेवलप करना है। जिससे कि क्या होगा कि वह हमारे स्पिरिचुअल लाइफ का फाउंडेशन हो। हमारे नेशनल रिजुनेशन का फाउंडेशन हो। एज अ ह्यूमन बीइंग स्वामी जी कहते हैं ना कि मां हम मानुष करो। मां तुम मुझे मनुष्य बनाओ। हम लोग सोचेंगे अरे मनुष्य तो है ही है। उसमें और क्या मनुष्य होना? किंतु नहीं यह जो भीतर में से जो मदानगी प्रकट करनी है आहार निद्रा भय मैथुन यह तो कोई पशु के भीतर में भी है। व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन मी एंड द एनिमल इवन जो बाघा जो था स्वामी जी का वो कुत्ता उसके भीतर में भी इतना अंडरस्टैंडिंग था कि वो किस तरह से वो डीएम को वो कहां पर ले जाना है। तो, सीट जब तक हम मनुष्यत्व प्राप्त नहीं करेंगे, मर्दानगी प्राप्त नहीं करेंगे, एक तरह का एक स्ट्रांग फाउंडेशन साइकोलॉजिकल नहीं क्रिएट करेंगे। ना ही हम आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ पाएंगे ज्यादा ना ही हमारा नेशनल रिजुनेशन होगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो स्वामी जी कहते हैं फील फ्रॉम द हार्ट। उसके बाद में है सेकंड सिचुएशन। जैसे ये स्वामी जी ने कहा ना थ्री थिंग्स आर नेसेसरी फॉर ग्रेट अचीवमेंट। ये ग्रेट अचीवमेंट इन द फील्ड ऑफ स्पिरिचुअलिटी आल्सो एंड द फील्ड ऑफ नेशनल रिजुनेशन आल्सो। तो प्रथम तो है फिल फ्रॉम द हार्ट। एंड सेकंड है फाइंड अ प्रैक्टिकल सॉल्यूशन। हैव यू फाउंड एनी वे आउट एनी प्रैक्टिकल सॉल्यूशन? सम हेल्प इंस्टेड ऑफ कंडेमिनेशन? सम स्वीट वर्ड्स टू श मिरीज। एमैथी के बाद में यदि कंपैजन प्रारंभ होता है तो फिर इस कंपैजन को हमको प्रैक्टिकल करने की भी जरूरत है। वही प्रैक्टिकल वेदांत। प्रैक्टिकल वेदांत का यह अर्थ नहीं कि वेदांत को प्रैक्टिकल बनाना है। वेदांत इज प्रैक्टिकल। हमको वेदांत को प्रैक्टिकली अप्लाई करना है। [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे टेक्नोलॉजी है। जैसे यह मोटर बाइक मेंटेनेंस करने का बुकलेट है। तो मोटर बाइक को मेंटेन करना है। उसकी ब्रेक रिपेयर करनी है, टायर चेंज करना है। वो तो एकदम प्रैक्टिकल है। किंतु जब तक वो बुकलेट के भीतर में रहेगा। और आजकल तो यह ट्रेनिंग वीडियो जो आते हैं ना हाउ टू वीडियोस, हाउ टू डू वीडियोस। तो जब तक वो वीडियो के भीतर में है तब तक वो थ्यरी है। जब मैं वीडियो को देख देख कर के उसको मैं प्रैक्टिकली उसको कार्य नहीं करूंगा तब तक वो प्रैक्टिकल नहीं होगा। यानी कि प्रैक्टिकल वेदांत का यह अर्थ नहीं कि वेदांत को प्रैक्टिकल करना है। वेदांत इज प्रैक्टिकल। हमको वेदांत को प्रैक्टिकली अप्लाई करना है। सो दैट इज़ दैट कि हमने एमैथी डेवलप की है। उसके ऊपर में कंपैजन का पूरा एक महल खड़ा किया है। एमैथी रूपी फाउंडेशन के ऊपर में कंपैजन रूपी महल खड़ा किया है। अभी इस महल के भीतर में लोगों को आमंत्रण तो देना होगा। खाली महल पड़ा है तो उसका क्या अर्थ है? सो क्या कोई प्रैक्टिकल सॉल्यूशन हमने खोज निकाला है लोगों को सहाय करने के लिए? यदि आप यहां पर स्वामी जी सी व्हाट ही सेस कि यदि दो अच्छे शब्द भी सहानुभूति के दो शब्द भी आप यदि किसी को कह देते हैं उससे भी सामने वाले को कितना संतोष होता है और थर्ड हैव द विल टू सरमाउंट ऑब्सकल्स क्या हमारे पास में वो प्रचंड संकल्प शक्ति प्रचंड आत्मश्रद्धा है कि जो कि इस जगत की जितने भी जो हमारे रास्ते में बाधा उत्पन्न करने वाले शक्तियां है उसके सामने खड़ी हो। स्वामी जी का वही वो अखंडानंद जी को स्वप्न जो आया था ना स्वामी जी एक बलिष्ठ मुस्लिम का देह धारण करके मुस्लिम फकीर का देह धारण करके रास्ते से जा रहे हैं। तो अखंडानंद जी ने पूछा स्वामी जी को। अरे मुस्लिम फकीर का भेष क्यों धारण किया है? तो स्वामी जी ने दो चीज कही। सर्वप्रथम तो इस्लाम में जो उदारता है, जो इक्वलिटी है सबके प्रति वो हमको चाहिए। इस्लामिक बॉडी वेदांतिक ब्रेन इसका दो अर्थ है। वेदांतिक ब्रेन तो समझ में आता है। इस्लामिक बॉडी का स्वामी जी दो अर्थ करते हैं। एक तो फिजिकल स्ट्रेंथ चाहिए। तभी तो यह वेदांत को धारण करने की क्षमता होगी। वेदांत को धारण करने के लिए तपस्या जो करनी है उसकी क्षमता होगी। वो तो एक बात कहते हैं। दूसरी बात कहते हैं कि देखिए भारत में माने हिंदू धर्म में जिस तरह से उच्च जाति नीच जाति वगैरह तथाकथित यह सब जो डिवीजन पड़े हैं इस्लाम में वो नहीं है। सबके लिए इक्वलिटी है। अभी उस समय होगी आज की परिस्थिति पूरी डिफरेंट है। हमको तो पता है। किंतु एनीवे लेट अस टेक स्वामी जीसस वर्ड्स ऑन इट्स फेस वैल्यू। तो वो तो एक बात हो गई। साथ में ही फिर देखा कि साथ में चार शिष्य स्वामी जी के साथ में चल रहे हैं। तो फिर अखंडानंद जी ने पूछा कौन है यह चार शिष्य? तो स्वामी जी ने कहा तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान वगैरह जो चार नाम उन्होंने दिए वो वही ये जो आज का ईरान, इराक और अफगानिस्तान है, सेंट्रल एशिया है वहीं के चार नाम स्वामी जी ने दिए। तो अखंडानंद जी पूछते हैं कि इन लोगों को चेला करके हमको क्या मिलने वाला है? तो स्वामी जी ने कहा देखो तुम अपना इतिहास खोल करके देखो यह सब भी भारतीय हित है। फिर बाद में इन लोगों का मत परिवर्तन हो गया है। बोल के अभी ये लोग सेपरेट हो गए हैं। भारत देश जो था वो हमारा इतिहास आर्य प्रजा का इतिहास यह वही ईरान से लेकर के तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान वहां से लेकर के यहां तक बर्मा है। साउथ ईस्ट एशिया है। वहां तक प्रसारित है। मैं वहां पर जाकर के इन लोगों के भीतर में कार्य कर रहा हूं जिससे कि वे लोग फिर से हमारे साथ में जुड़े किंतु एक ऐसी शक्ति है वो क्रमागत इस तरह का प्रयास करती है जैसे कि ये यूनियन फिर से ना खड़ा हो तो इस शक्ति के सामने संघर्ष करना है। ये लास्ट सेंटेंस मेरा है। किंतु देखिए कि ये जो है कि इतना भयानक ऑबस्टेकल हमारे सामने अभी देखिए जो भी आज का मॉडर्न जिओपॉलिटिक्स समझता है जो लोग भी ये अफगानिस्तान ईरान इराक वगैरह का सेंट्रल एशिया का पॉलिटिक्स समझते हैं वे लोग हमको इस ईजीली विश्वास नहीं होगा कि कभी ये देश भी एक दिन हमारे साथ में इकट्ठा होंगे। खास करके ये बीच में पाकिस्तान आ गया। उस समय तो वो भारत का ही हिस्सा था। किंतु अभी वो सेपरेट हो गया है। यहां पर बांग्लादेश है। तो ये लोग भारत के साथ में फिर से इकट्ठा हो। विलिंगली इकट्ठा हो, वंटियरली इकट्ठा हो। यह बात में तो हमको कोई दम नहीं दिखता है। किंतु फिर दिस इज स्वामी जी। इतनी भयानक उनके सामने महाप्रचंड माने विरोध या तो फिर यह ऑपोजिंग फोर्सेस है जो कि इन सब कंट्रीज को भारत से अलग कर देना चाहती है तो उस फोर्सेस के सामने फाइट करना कितना जबरदस्त विल पावर चाहिए। सो, दैट इज़ व्हाट स्वामी जी सेज़। हैव द विल टू सरमाउंट ऑब्सकल्स। इफ द होल वर्ल्ड स्टैंड्स अगेंस्ट यू स्वर्ड इन हैंड, वुड यू स्टिल डेयर टू डू, व्हाट यू थिंक इज़ राइट? हैव यू गॉट दैट स्टिडस्टनेस? इफ यू हैव दिस थ्री थिंग्स, ईच वन ऑफ़ यू विल डू वर्क मिरेकल्स। यदि पूरा जगत आपके सामने तलवार हाथ में लेकर खड़ा हो जाए तब भी क्या आपके भीतर में वो साहस है जो साहस के माध्यम से आप अपना कार्य करना चाहते हैं कर सकते हैं। यदि वह है तो फिर यह जो तीन है फील फ्रॉम द हार्ट फाइंड ए प्रैक्टिकल सॉल्यूशन एंड हैव द विल टू सरमाउंट ऑब्सकल्स ये तीन इकट्ठा होकर के ईच वन ऑफ यू आप सभी के सभी मिरेकुलस कार्य कर सकते हैं। सो यह स्लाइड [गला साफ़ करने की आवाज़] अभी इसके बाद में बाद हमारा क्लास होगा सुबह का क्लास होगा मंडे को और आज शाम मेडिटेशन का क्लास है जो लोग मेडिटेशन का क्लास अटेंड करेंगे सबको सूचना कि वीडियो ऑन रखना है श्रीमद्भगवत गीता अपने हाथ में ले बैठना है और जैसेजैसे 12th चैप्टर श्रीमद्भगवत गीता का हम चेंट करेंगे। सो दिस आर सिंपल इंस्ट्रक्शंस। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु।
एक भक्त: आप सहानुभूति की बात तो कर रहे हैं, लेकिन देखिए—जहाँ-जहाँ ये शरणार्थी refugees गए हैं, वहाँ उन्होंने अपराध और आतंकवाद भी फैलाया है।
देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं कि कॉन्ट्रक्शन इज डेथ, एक्सपेंशन इज लाइफ। राइट? अभी आजकल क्या है? यह कैथोलिक रिलीजन भी एक कॉन्ट्रक्शन के फेज में है। खास करके यूरोप के भीतर में बिकॉज़ ऑफ दिस लिबरल ट्रैपिंग्स। और हम हिंदू ना कभी मिशनरी थे ही नहीं। इस अर्थ में कि ये मिशनरी लोग आते हैं बीच-बीच में जैसे स्वामी जी। किंतु फिर सम हाउ अपना ट्रेडिशन ना हमको फिर से वही भूतकाल की ओर खींच करके जाता है। जहां पे कि वी हैव टू बी प्यरेस्ट ऑफ प्योर इन ऑर्डर टू बी अ हिंदू। और बाय बर्थ ही हिंदू हो सकते हैं। हम लोग कन्वर्ट नहीं कर सकते। एक्सपैंड नहीं कर सकते। प्रोलाइट प्रो प्रोजेलाइटेशन नहीं कर सकते। सो दिस वर्ल्ड व्यू जो है हमको चेंज करना है। लेट अस गो बैक टू दैट प्रिस्टाइन डेज ऑफ ओरिजिंस ऑफ रिलीजन कि जबकि हम लोग एक्टिवली अपने धर्म का प्रचार करते थे। लोगों को कन्वर्ट करते थे अपने धर्म के भीतर में। सो दैट इज द सॉल्यूशन कि हमको तो जनसंख्या बढ़ानी है। यदि आप कहेंगे कि रेफ्यूजीस यहां पे आ रहे हैं। यू आर राइट। यूरोप में एक नया कांसेप्ट स्टार्ट हुआ है। सुसाइडल एंपैथी। सुसाइडल एमैथी का क्या अर्थ है? अभी जस्ट एक रिसेंट न्यूज़ रिपोर्ट पढ़ा कि जर्मनी का एक जज है। उसने क्या किया? 12 माइग्रेंट एक लड़की पर रेप किया और उसको जब कोर्ट में लाया गया तो उनको छोड़ दिया। क्यों? क्योंकि दे डीड दिस बिकॉज़ ऑफ दिस इमीग्रेशन फ्रस्ट्रेशन। तो उनको रिहा कर दिया। ये तो कोई बात हुई क्या? सो इसको कहते हैं सुसाइडल एंपैथी। राइट? व्हिच इज वेरी वेल अंडरस्टुड कि जो क्राइम करते हैं उनको आप छोड़ देंगे जो कि सोसाइटी में एसिमिलेट नहीं होते हैं जो कि इवेंचुअली टेररिज्म करते हैं उन लोगों को उन लोगों के ऊपर में आप लीनियंस ही दिखाएंगे व्हिच इज़ सुसाइडल। सो दैट इज़ एक्सेप्टेबल। बट दिस इमीग्रेशन इज़ कनेक्टेड विद दिस एक्सपेंशन ऑफ़ आवर आइडियाज एंड आइडियोलॉजीज़। लेट अस एक्टिवली प्रोज़ेलिटाइज़ एक्टिवली प्रीच आवर आइडियाज़ टू एवरीवन। सो दैट नंबर ऑफ आवर एररेंट्स कैन इंक्रीस। यह जो शिवज्ञान जीव सेवा बहुत बार हम यह जो कहते हैं कि भारत में जरूरत नहीं है किंतु बहुत बहुत सारे देशों में जरूरत है। मेनी ऑफ देम आर माइग्रेंट्स इन इंडिया। सो क्यों नहीं हम इनको कन्वर्ट करें। क्यों नहीं हम इनके पास में ठाकुर मां स्वामी जी की बात ले जाएं और फिर यह टेस्ट रखें कि दे हैव टू सम हाउ एक्सेप्ट आवर आइडियाज इन ऑर्डर टू गेन द सिटीजनशिप ऑफ आवर कंट्री। तो दिस वे क्या होगा कि देश ना फिर से एक्सपंड होना स्टार्ट हो जाएगा। यह जो देखिए भारत में हम लोग हमेशा ये कंप्लेन करते रहे हैं कि ये मुस्लिम जब इंडिपेंडेंस हुआ तो इंडिया में 10 ना 12% मुस्लिम थे। अभी वो 20% नहीं 25% हो गए हैं। पाकिस्तान और बंगाल खास करके पाकिस्तान में 10 12% हिंदू थे वो आज मुश्किल से 1% हो गए हैं। सो व्हाई वुड वी कंप्लेन के इस्लाम एक्सपैंड कर रहा है। व्हाई कैन नॉट वी एक्सपैंड आवर ओन हिंदूइज़्म? ये रॉ मटेरियल कहां से आएगा? तो यहां से ही तो सब जगह से आता है। लेट अस एक्टिवली प्रोजेटाइज एक्टिवली स्प्रेड आवर रिलीजन। दैट इज़ आवर नेक्स्ट गोल। अह तो तभी क्या होगा कि यह धर्म के भीतर में जान आएगी। देखिए स्वामी जी का एक बहुत ही पावरफुल स्टेटमेंट अह अखंडानंद जी कहते हैं कि मुगल रक्त छिलो आत्मार सुरा माने मुगल रक्त है इट्स अ वाइन ऑफ दी आत्मन इट्स अ म इट्स अ फ्रेश ब्लड फॉर दी आत्मन। नाउ स्वामी जी जैसे स्वामी जी इस तरह की बात करते हैं। सो वी हैव टू अंडरस्टैंड कि एक्सपंड आवर आउटरीच। जो भी आए सबको वेलकम करके किंतु सिर्फ वेलकम नहीं करना जैसे यूरोप कर रहा है उनका ये जो जो भी उनकी ये जो अंधश्रद्धाएं हैं जो भी उनका ये जो प्रीवियस सब एलिजियंस है एज इट इज उनको नहीं बिठा के ले आना है। ये गलती बुद्धिज्म ने की है। स्वामी जी ने कहा कि जितने भी ये प्रजातियां जिसको कि बुद्धिज्म ने जोर जबरदस्ती अपने भीतर में प्रवेश करवा दिया वो अपने साथ में दुनिया भर की सुपरस्टिशन लेकर के आई और इस सुपरस्टिशन ने बुद्धिज्म को करप्ट कर दिया भीतर से। सो दैट मिस्टेक हमको नहीं करनी। ना ही यूरोप की मिस्टेक म ये यूरोप और बुद्धिज्म की सेम मिस्टेक है कि लिबरल हो के सबको समा तो लिया अपने भीतर में किंतु उनकी ये जो बिलीफ सिस्टम है उसको वो लोग कन्वर्ट नहीं कर पाए। दिस इज़ व्हाट वी शुड डू। उनको वेलकम करो बट एट द सेम टाइम उनको कन्वर्ट करो। दैट शुड बी आवर नेक्स्ट मिशन
एक भक्त: धर्मांतरण तो हमारा उद्देश्य कभी नहीं रहा।
ना बट ये ये सब तो हमने अपने ऊपर में सुपरइंपोज किया है ना। व्हाई वुड वी से दैट कि कन्वर्जन अपना एजेंडा नहीं है। ये सब तो पागलपन इस्लाम तो ऐसा नहीं कहता है। क्रिश्चियनिटी तो ऐसा नहीं कहता है कि कन्वर्जन हमारा एजेंडा नहीं है। व्हाई शुड वी से दैट?
एक भक्त: conversion कराने के लिए हमारे पास तो कोई institutions भी नहीं है।
ना तो वी शुड दिस इज व्हाट रामकृष्ण मिशन इज राइट [हंसी] लिटरली इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर इन ऑर्डर टू स्प्रेड द प्रोपेगेट विवेकानंद रामकृष्ण वेदांता अमेरिका में यदि जाकर के वो विजयध्वज फैला के आए उस समय के सो हम भारत में क्यों नहीं कर सकते यह बात देखिए हिंदू धर्म के साथ में ऑलवेज प्रॉब्लम ऑफ इमेजिन ेशन एक स्वामी जी जैसा कोई एक बड़ा आ जाता है। फिर हम लोगों का जो हार्ट है ना जोर करके हमको फिर से वही ऑर्थोडॉक्सी की ओर खींच के ले जाता है। वो वैष्णवाइट ऑर्थोडॉक्सी ये शंकराइट ऑर्थोडॉक्सी की बस हमको इस छोटे से कोने में बैठे रहना है। किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना है। जगत के साथ में इंगेजमेंट नहीं करना है। बस यह कृष्ण का नाम लेते रहो या तो फिर यह स्मरण मनन निधि्यासन करते रहो। जगत का जो होना है सो होगा। दिस सॉर्ट ऑफ अदर वर्ल्डलीनेस जो हमारी हिंदू लोगों की है और फिर जो लोग म इवन देखिए अनफॉर्चूनेटली अभी आजकल ऐसा हो गया है ना आप स्वामी जी का नाम लेंगे ना तो फिर लोग आपको ऐसा कहेंगे अरे ये क्या फालतू का टाइम वेस्ट कर रहा है पहले उपनिषद को पढ़ो फिर स्वामी जी को समझोगे ऐसा एक्टिवली एडवाइस देते हैं आजकल लोग हमको स्वामी जी को पढ़ना इट्स अ सॉर्ट ऑफ अ स्टिग्मा अपॉन यू कि स्वामी जी को पढ़ रहा है अरे यह कुछ गड़बड़ कर बैठेगा स्वामी जी को नहीं समझ करके बिना वेदांत समझे स्वामी जी को पढ़ रहा
We must expand in space
देखिए मैं तो क्या कहता हूं पता है मेरा विज़न तो इतना ब्रॉड है इन फ्यूचर स्वामी जी कहते हैं एक्सपेंशन इज लाइफ कॉन्ट्रक्शन इज डेड वी हैव टू एक्सपेंड अभी यूरोप ने कैसे एक्सपेंशन किया उस समय तो ये अफ्रीका या तो फिर अमेरिका खास करके नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका वे थे कि म वहां पे इतने कमजोर सिविलाइजेशन थी कि वहां पे जाकर के आप अपना एक सिविलाइजेशन का झंडा गाड़ते हैं। सो दैट पॉसिबिलिटी वाज़ देयर। अभी आजकल पृथ्वी पे ऐसा कोई जमीन नहीं है कि वहां पे जाके आप एक्सपैंड कर पाए। देन स्पेस इज़ द नेक्स्ट फ्रंटियर। एक्सपैंड इंटू स्पेस। स्पेस में आप कम्युनिटीज़ क्रिएट कीजिए, फॉर्म कीजिए, कंस्ट्रक्ट कीजिए। स्पेस में आप एक्सपैंड कीजिए। क्यों? तो हम यह सोचे कि भारत के भीतर में अभी ये रिसोर्सेज लिमिटेड है। किसी को वेलकम नहीं करना है। हम जो आपस में कुछ लोग हैं हम ही लोग यहां पे बैठ के खाएंगे पिएंगे। इससे क्या होगा? जैसे जापान में हो रहा है। जापान में ऐसा स्ट्रिक्ट रूल है कि जो जापान इज़ ए बर्थ राइट सिटीजनशिप है। इजीली आपको वहां पे सिटीजनशिप नहीं मिलेगा। तो क्या है कि एक स्ट्रेटिफिकेशन हो जाता है। मेंटल स्ट्रेटिफिकेशन। हम मैं तो कहता हूं कि वेलकम ईच एंड एवरीवन। दैट इज़ स्टेप वन। सेकंड के कन्वर्ट देम विद इन दिस रामकृष्ण विवेकानंद वेदांता सिस्टम एंड थर्ड स्टेप इज़ एक्सपंड इंटू द स्पेस। यह भारत जो है जैसे कि एक असेंबली लाइन की तरह हो जाए। एक ओर से रॉ मटेरियल आता है। फिर उसके ऊपर में प्रोसेसिंग हो के प्रॉपर सिटीजन के रूप में हम उनको डेवलप करते हैं। देन सेंड दिस सिटीजंस इनटू द स्पेस सो दैट वी कैन फॉर्म स्पेस कम्युनिटीज। अभी पृथ्वी को छोड़कर के हमको स्पेस के बारे में सोचना होगा। वो कहते हैं ना कि टू कीप ऑल द एग्स इन वन बास्केट। एक ही बास्केट के भीतर में सब अंडों को रखना। अब ये बास्केट गिरा तो सब अंडे टूट गए। अभी तक हमारे पास में वो कैपेसिटी नहीं थी कि हम पृथ्वी को छोड़ के और कुछ सोचे। किंतु आज तो हमारे पास में वह प्रॉपर अंडरस्टैंडिंग एंड टेक्नोलॉजी दोनों है। अंडरस्टैंडिंग यह है कि पृथ्वी एक तो छोटा सा एक कण रजक कण मात्र है। कुछ भी डिजास्टर हो सकता है। पृथ्वी टॉक्सिक हो सकती है। पूरा-पूरा स्पीशीज डिस्ट्रॉय हो सकता है। सो व्हाई शुड वी कीप आवरसेल्फ व्नरेबल बाय एसोसिएटिंग ओनली विद अर्थ? स्पेस में क्यों नहीं एक्सपैंड करेंगे? हम एक प्लान बी जिसको कहते हैं वो क्यों नहीं डेवलप करेंगे? एंड इन जनरल एक्सपेंशन और एक्सप्लोरेशन इज़ द हार्ट ऑफ़ ह्यूमैनिटी। एडवेंचर इज़ द हार्ट ऑफ़ ह्यूमन स्पसेस। हम क्यों एक दायरे में अपने को बंद करके बैठ जाए। अब आपको स्पेस में एक्सपेंशन करना है। यू नीड इममेंस मैन पावर। एडवेंचरस इमेंस मैन पावर आपको चाहिए। सोच लीजिए आज भारत की पपुलेशन 150 करोड़ की है। 50 करोड़ आप भेज दीजिए स्पेस में। आप बनाइए लाख2 लाख कॉलोनीज़ आप डेवलप कीजिए और स्पेसशिपिप बनाइए और पूरे मैंने स्पेस का साइज इतना विराट है और हमारी संख्या तो सिर्फ इतनी है वी नीड मेनी मेनी मोर ह्यूमंस इफ एट ऑल वी वांट टू हैव सम इंपैक्ट ऑन स्पेस और ऐसा कहीं ना हो गया कि दूसरे ग्रह के ऊपर में जीवन है। दूसरे ग्रह के ऊपर में एलियंस रहते हैं। हम पे अटैक करें। एट दैट टाइम वी नीड एक्सट्रीमली पावरफुल टेक्नोलॉजी एज वेल एज मेन पावर टू काउंटर दैट। आज हमारा पूरा थिंकिंग है। यूरोप का भी सेम थिंकिंग है। भारत का भी सेम थिंकिंग है। इतिहास में चलो। भूतकाल में चलो। कोई एक प्रिस्टाइन एक सत्य युग था। उसकी ओर चलो। ठाकुर मां स्वामी जी ने आकर के यह पूरा तोड़ दिया है। गो फॉरवर्ड इनू द फ्यूचर। गो इनू द स्पेस, एक्सपंड इनू द स्पेस एंड स्टार्ट ए न्यू फज़ ऑफ इवोल्यूशन। ये जो हमारा शरीर है दो हाथ दो पैर एक सर पृथ्वी पे चलने के लिए कार्य करने के लिए बना है। इफ यू गो इनटू द स्पेस यह स्ट्रक्चर जो है किसी काम का नहीं देन बॉडी इटसेल्फ विल इवॉल्व आवर इंटेलेक्ट आवर ब्रेन इटसेल्फ विल इवॉल्व एंड व्हाट बेटर फाउंडेशन फॉर न्यू स्टेप ऑफ इवोल्यूशन देन वेदांता देखिए बहुत सारे लोग बोलते हैं एआई इज़ अ थ्रेट मैं तो कहता हूं एआई इज़ अ ग्रेट अपॉर्चुनिटी इफ यू वांट टू एक्सपैंड इंटू स्पेस नथिंग इज़ बेटर कंपेनियन देन एआई राइट फ्यूज योर ब्रेन विथ एआई ब्रिंग इन वेदांत इंटू द मिक्स देन यू सी कि हम क्या से क्या नहीं कर सकते। ईच वन ऑफ यू कैन डू मिरेकुलस वर्क। स्वामी जी ने कहा है।
Advancements in AI
प्रॉब्लम सबसे बड़ा है यह आपका कंप्यूट और दूसरा है इलेक्ट्रिसिटी। यह जो बॉटल नेक है अभी आजकल के अभी एल्गोरिदम इज़ नॉट ए बॉटल नेक। राइट? अभी आप कंप्यूट फेंकते जाइए। इलेक्ट्रिसिटी फेंकते जाइए। सी दैट ये क्लाउड मिथोस वो जो एक नया एक ये हो गया था लीक हो गया था कहते हैं कि इट हैज़ एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी कैपेबिलिटीज ये ये एंथ्रोपिक जब भी कोई भी एक नया रिलीज करता है पूरा बिलियन डॉलर का इंडस्ट्री टूट जाता है उसका मार्केट टूट जाता है ये एस एसएएस सास जो इंडस्ट्री है सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस उसका मार्केट टूट गया ये जो ये जो जो कोर्ट बेस लीगल जो सॉफ्टवेयर है। उसका मार्केट तोड़ दिया। माने विथ ईच न्यू रिलीज़ वो पूरा-पूरा बिलियन बिलियन डॉलर मार्केट तोड़ दे रहा है। राइट? एंड दिस इज़ जस्ट अ बिगनिंग। 22 में तो यह रिलीज़ हुआ है। दिस इज़ बेयरली फोर फाइव इयर्स है। तो 40-50 साल में क्या से क्या नहीं हो जाएगा।
एक भक्त: How can we use AI in spreading Sri Ramakrishna’s teachings?
देखिए पर्सनल लेवल पर तो अपना नोटबुक एलएम है कि पर्सनल स्टडी के लिए बेस्ट टूल। मैं तो कंटीन्यूअस उसका यूज करता हूं कि स्टडी के लिए, रिसर्च के लिए, ब्रेन स्टॉर्मिंग के लिए। सो नथिंग इज बेटर। अब जैसे देखिए कुछ-कुछ टॉपिक है जो कि मैं कभी भी टच नहीं करने वाला। म टच करने से ही मुझे डर लगता था। अभी ये शक्ति साधना का इतिहास। मेरे पास में कल्चर से पब्लिश हुआ। भारत में शक्ति साधना का इतिहास। बंगाली में दो बड़े-बड़े वॉल्यूम है। मैंने ट्रेनिंग सेंटर में परचेस करके रखे थे। सोचा था कि उसको मैं एक दिन आएगा स्टडी करूंगा। किंतु वो एक दिन अभी तक नहीं आया। ट्रेनिंग सेंटर मेरा समाप्त हुआ 2012 में 2010 में। दिस इज 2026। वो दोनों वॉल्यूम वैसे के वैसे पड़े। किंतु अभी एआई है। सो अभी एआई को मैं कंटीन्यूअस क्वेश्चन करता हूं। अच्छा बताओ मुझे शक्ति साधना का आउटलाइन बताओ। दैट इज वन थिंग। उसके बाद में पीरियड में उसको डिवाइड कर दो। पीरियड में डिवाइड कर दिया। फिर मुझे बता अभी अभी क्या है? टाइम अपने पास में होता है 510 मिनट 510 मिनट बीच-बीच में से चोरी करना है। किताब के साथ में क्या है? हम उसको तभी हाथ में लेंगे जबकि मुझे लगता है कि एटलीस्ट वन ऑवर टू आवर मेरे पास में है। अदरवाइज इतना बड़ा किताब खोल के बैठने का कोई मीनिंग नहीं है। किंतु एआई गिव्स अस दैट कैपेबिलिटी कि वह 5 मिनट है मेरे पास में। चलो मोबाइल निकाल करके मैं उसको इंटेरोगेट करता हूं। सो 5 मिनट, 10 मिनट, 5 मिनट, 10 मिनट जिसमें हम सब्सटेंशियल रिसर्च कर सकते हैं। सो पर्सनल डेवलपमेंट के लिए इट इज़ वे बेटर देन एनीथिंग एल्स सो फार। एंड यदि सोसाइटी में यदि आपको इंप्लीमेंट करना है तो आई मीन यूज़ केसेस कैन बी मेनी। जस्ट एक यूज़ केस है कि आजकल जैसे खान एकेडमी है तो खान एकेडमी पॉपुलर कैसे हुआ कि बहुत सारे स्टूडेंट है अपने टीचर को क्वेश्चन करने से डरते हैं। तो खान एकेडमी का सलमान खान उसका ओरिजिनल आईडिया क्या था कि वो छोटे-छोटे ट्रेनिंग वीडियो बनाता है कैलकुलस के फिर ट्रिगोनोमेट्री के और फिर वीडियो दे देता है। बच्चे लोग टीचर को प्रश्न करने से डरेंगे। किंतु ये वीडियो बार-बार देखेंगे और देख के वो सीखेंगे। राइट? दिस इज अ ओल्ड टेक्नोलॉजी। नाउ यू हैव गॉट एआई। एआई इन द क्लासरूम। यदि मुझे कुछ भी सीखना है, स्टूडेंट को कुछ भी सीखना है, टीचर यदि कोऑर्डिनेट करता है एआई एज अ लर्निंग टूल, देन परफेक्ट लर्निंग टूल हो सकता है। इतने सुंदर एनिमेटेड वीडियो बना सकता है टू मेक साइंस लर्निंग इजी। व्हाट इज द स्ट्रक्चर ऑफ़ एन एटम? तो इमीडिएटली वो आपका वो ऑन द फ्लाई वो वीडियो बना दिया। वो फटाफट करके स्टूडेंट के स्किल लेवल के अनुसार वो स्टेप बाय स्टेप उसको गाइड कर सकता है। मैं एआई कैन बी द बेस्ट टीचर दैट कैन बी अभी ओपन एआई का भी ये एआई इन द क्लासरूम प्रोजेक्ट है जितनी भी मेजर ये और खान एकडमी का भी यह एआई अभी यूज़ कर रहा है सभी जगह पे दैट हैज़ मेड लर्निंग सो इज़ियर। सो इन एव्री सिस्ट म दिस इज़ वन यूज़ केस। देयर कैन बी मेनी यूज़ केसेस।
AI will help us expand in space. it will help us better prepare ourselves against possible alien invasion.
ना अभी क्या है देखिए अभी तो एलएलएम डेवलप हो रहा है दैट इज अ कोर टेक्नोलॉजी बाद में ये एप्स डेवलप होगा इसके ऊपर में नाउ अभी जो आजकल की जो लर्निंग ऐप है वो ऑलरेडी अच्छा काम कर रही है बट ऐड एज अ प्लगइन एलएलएम देन वो कितना अच्छा काम करेगी है ना अब अब जैसे नोटबुक एलएम है दैट इज़ अ स्पेसिफिक ऐप बिल्ड अपॉन एआई फॉर अ स्पेसिफिक पर्पस कि आपका वो टेक्स्ट बुक स्टडी स्टडी कैसे करना है? सो इस तरह के तो कितने यूज़ केसेस हो सकते हैं। बेस्ड अपॉन बेसिक एलएलएम यू कैन डेवलप एन ऐप व्हिच कैन हेल्प यू इन पर्टिकुलर सिचुएशन। एंड वी शुड बी एंथूजियास्टिक अबाउट इट। देखिए ये जितने भी कंट्रीज जो कॉन्ट्रैक्ट हो रहे हैं ना उनको एआई का डर लगता है। उसने ओरेकल में 12,000 लोगों को फायर कर दिया, यह कर दिया। ओके? सी ट्रांजिशन होता है तो देयर विल बी सम पेन। बट लुक एट इन सच अ वे दैट वी आर गोइंग टू एक्सपैंड इंटू द स्पेस। नाउ द अमाउंट ऑफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर, अमाउंट ऑफ़ मैन पावर, अमाउंट ऑफ़ रो इंटेलिजेंस दैट दैट विल टेक। इमेजिन के एलियंस आ जाते हैं अपने पे अटैक करने के लिए। दे विल नॉट फाइंड अर्थ डिफेंस। राइट? दे विल फाइंड अर्थ यूनाइटेड एंड स्ट्रेंथ विद दिस एग्जोटिक टेक्नोलॉजीस। राइट? एग्जोटिक टेक्नोलॉजी उनके पास में भी होगी। वी आल्सो नीड दैट टाइप ऑफ़ एग्जोटिक टेक्नोलॉजी दैट कैन टेक अस अक्रॉस द स्टार्स। आज ये स्टार ट्रैवल है ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है। क्योंकि सबसे नजदीक का स्टार है अल्फा सेंटोरी हमारे से फोर लाइट इयर्स दूर है। उसका अर्थ है कि लाइट को वहां पे जाते 4 साल लगते हैं। लाइट का स्पीड है 3 लाख कि.मी. पर सेकंड। तो अभी 1 कि.मी. में आप गिन लीजिए। आजकल का ऐसा कोई टेक्नोलॉजी नहीं कि आपको लेस देन 30 40 इयर्स वहां पे ले जाए। सो दीज़ आर ऑल एक्सट्रीमली न्यू फ्रंटियर्स। हम जो साइंस फिक्शन जो मैं बचपन में देखता था इट हैज़ एक्स एक्सप्लड माय माइंड कि यह सब भी होता है। एक छोटा सा गली के भीतर में एक छोटा सा मकान में मैं रहता था। बट माय इमेजिनेशन कैन सोर इंटू दिस एंटायर गैलेक्सी एंटायर स्पेस। देयर इज़ नो लिमिटेशन ऑफ़ ऑन इमेजिनेशन।
Ecolution passes through diversity and extinction. extinction is essential for development of new species
किंतु देखिए इवोल्यूशन कैसे कार्य करता है? इवोल्यूशन एंड एक्सटिंशन ये दोनों साथ में चलते हैं। एक्सटिंशन इज व्हाट कि अभी एक समय था डायनासोर का राज था। उल्कापात हुआ मटर स्ट्राइक हुआ। डायनासोर का खात्मा हो गया। अभी ये मैमल्स का राज स्टार्ट हुआ। राइट? सो जो एक्सटिंशन है इज़ अ एसेंशियल पार्ट ऑफ इवोल्यूशन। सो दैट हैज़ बीन ऑलवेज द केस कि डिस्ट्रक्शन तो होगा ही होगा तभी तो नया कुछ क्रिएट होगा। नॉट इनवोल्यूशन दैट इज सेपरेट कांसेप्ट। इनवोल्यूशन का अर्थ है स्वामी जी जिस तरह से वर्ड यूज करते हैं एक पेड़ है। पेड़ बीज के भीतर में इनवॉल्व होता है। यानी कि उसका डीएनए वो माइक्रोस्कोपिक लेवल पे वो कंसंट्रेट होता है। फिर बीज जो है बीज इवॉल्व होता है पेड़ के रूप में। फिर पेड इनवॉल्व होता है बीच के भीतर में। दैट इज़ दैट। दिस इज़ इवोल्यूशन एंड एक्सटिंशन। कि अह पहले तो ड डायवर्सिटी एंड एक्सटिंशन इफ आई मे बेटर वर्ड इवोल डायवर्सिटी का टाइम है। बहुत सारी स्पीशीज जन्म लेगी और फिर एक्सटिंशन होगा तो उसमें फिटेस्ट विल सर्वाइव। सी जैसे वो वो ब्राह्म भक्त कहता था ना कि वह ईश्वर के लिए तो लीला है। यहां पर हमारी जान जा रही है। सो [हंसी] रिसीविंग एंड पे होने से हमको दुख होगा ही होगा। बट [हंसी] वो माया ब्रह्म वो सब आप बोल तो रहे हैं। सब बड़े-बड़े कांसेप्ट यहां पे अपनी जान जा रही है। उसका क्या [हंसी] ना ठाकुर कहते हैं कि भवे देखो तुम ही क्या? तो सोच के देखो तुम कौन हो। तुम्हारे भीतर में तो वही ईश्वर है। ईश्वर ही सफर कर रहा है। सो ओके। थ्योरिटिकली आंसर बड़ा अच्छा लगता है। बट दैट डजंट टेक अवे आवर सफरिंग ना। मैं ईश्वर हूं जान के मुझे क्या लाभ हुआ? यदि मेरा पेट का दर्द वैसे का वैसा ही है। [हंसी] एंड एंड दैट शुड इंसेंटिवाइज अस। माने मोटिवेशन पावर इफ एट ऑल हमको चाहिए इवॉल्व होने के लिए। व्हाई क्यों नहीं मैं अपने को अपग्रेड करूं? क्यों नहीं मैं कंटीन्यूअसली रीलर्न करता रहूं। है ना? आजकल रिसेंटली मैंने एक एक सर्वे पढ़ा इंडियन अ एंप्लॉयमेंट सर्वे है। तो कहते हैं कि इंडियंस आर दी मोस्ट एडवांस इन अडॉप्टिंग न्यू टेक्नोलॉजीस। म इंडिया में डिसरप्शन भी सबसे ज्यादा हुआ है। एट द सेम टाइम जितने भी एंप्लाइजज़ का सर्वे किया ऑलमोस्ट 80 टू 89% कहते हैं कि वी आर एक्टिवली अपग्रेडिंग आवर नॉलेज व्हिच इज़ हाईएस्ट इन द वर्ल्ड। ना बट दिस इज़ अ जनरल सर्वे। यह जो सर्वे है दैट इज़ अ जनरल सर्वे। माने वो जो सैंपल जिस तरह से सेलेक्ट करते हैं ना फ्रॉम एव्री वर्क ऑफ लाइफ। सो जनरल सर्वे में यह आया है। ओम