Swami Vivekananda
ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णायते नमः सो वी वेर रीडिंग अबाउट स्वामी विवेकानंद कोटेशंस स्वामी विवेकानंद टीचिंग्स एंड लेट अस सी व्हाट ही सेस यस्टरडे वी ऑलरेडी नो दैट अ वेरी नाइस कोटेशन ऑफ स्वामी जी ओबे द स्क्रिप्चर्स अंटिल यू आर स्ट्रांग इनफ टू डू विदाउट देम देन गो बियड देम बुक्स आर नॉट एन एंड ऑल वेरिफिकेशन इज द ओनली प्रूफ ऑफ रिलीजियस ट्रुथ नाउ एज़ वी सॉ यस्टरडे दैट दैट हाउ हिंदूइज़्म इज द ओनली रिलीजन इन द वर्ल्ड व्हिच डेयर्स टू से और रेदर लेट मी से दैट हिंदूइज़्म इज अ पार्ट ऑफ दिस आर्यन स्कूल ऑफ रिलीजियंस व्हिच डेयर टू से दैट द होलीएस्ट बुक्स ऑफ देयर रिलीजन वेदर इट बी जैनिज्म और मे इट बी बुद्धिज्म और मे इट बी हिंदूइज़्म और इवन सिखिज़्म। आई डोंट आई एम नॉट दैट श्योर अबाउट सिखिज्म बिकॉज़ आई हैव नेवर स्टडीड इट बट अबाउट जैनिज्म बुद्धिज्म एंड हिंदूज़्म आई एम वेरी श्योर दैट दिस आर दी थ्री ओनली रिलीजन व्हिच से दैट इवन दैट होलीएस्ट बुक ऑफ देयर रिलीजन इवन द ग्रेटेस्ट सेंट दैट दे रिलीजन हैव प्रोड्यूस दे आर नॉट इनफ और दे आर नॉट एन एंड इन इटसेल्फ द स्पिरिचुअल लाइफ दैट हाईएस्ट गोल ऑफ स्पिरिचुअल लाइफ ले बिय्ड देयर बुक्स, होली बुक्स एंड सेंट्स एंड दिस ऑब्जरवेशंस, दिस सोशल फेस्टिवल्स एंड सोशल कन्वेंशंस एटसेट्रा दीज़ आर नॉट एन एंड इन इटसेल्फ दे सिंपली गाइड आवर वे। फॉर एग्जांपल व्हेन वी रीड श्रीमद्भगवत गीता और इफ वी मे रीड स्वामी विवेकानंदास कंप्लीट वर्क्स और इफ वी मे रीड दिस कथामृत देन जस्ट बाय रीडिंग इन इटसेल्फ इज नॉट इनफ वी हैव आल्सो टू प्रैक्टिस बट हियर देयर इज़ आल्सो वन काउंटर पॉइंट दैट प्रभु महाराज स्वामी वीरेश्वरानंद जी एड वंस सेड दैट इफ यू रीड कथामृत फॉर 12 इयर्स यू यू यू आर श्योर टू अटेन मुक्ति सो देयर आर सी इन आवर हिंदूइज़्म दिस इज दैट्स ग्रेट यू कैन से दिस ग्रेट फीचर ऑफ आवर रिलीजन दैट देयर आर सो मेनी स्कूल्स एंड ब्रांचेस एंड वेज़ ऑफ थिंकिंग वी आल्सो नो दैट ठाकुरस टीचिंग दैट अमेल वाज़ सच अह ही यूज्ड टू क्रिटिसाइज एंड अब्यूज भगवान विष्णु ऑल द टाइम बट देन वन डे एट द एट हिज़ डेथ बेड ही सिंपली टूक द नेम ऑफ हिज़ सन व्हिच वाज़ नारायण एंड ही अटेंड मुक्ति। सो सी दीज़ आर वेरियस फीचर्स इन स्कूल्स एंड आइडियाज़ लोकेटेड विद इन दिस ग्रेट ओशन दैट इज़ हिंदूइज़्म। बट एनी ब्रांच टेक एनी ब्रांच टेक एनी आइडिया ऑल ऑफ़ देम ऑलवेज एम्फासाइज़ टू फंडामेंटल फैक्ट्स ऑफ़ रिलीजन। वन इज़ सत्य, अनदर इज़ ब्रह्मचर्य। ठाकुर सेज़ दैट सत्य एंड ब्रह्मचर्य फॉर्म टू ऑफ़ द स्ट्रांगेस्ट पिलर्स ऑफ़ हिंदूइज़्म। नाउ इट इज नॉट पॉसिबल और इट इज नॉट इवन नेसेसरी दैट द डे यू स्टार्ट योर स्पिरिचुअल साधना यू मस्ट बी 100% परफेक्ट इन सत्य एंड ब्रह्मचर्य। दीज़ आर दी अल्टीमेट गोल्स दैट विल टेक यू बियड दिस नॉर्मल प्लेन ऑफ़ कॉन्शियसनेस एंड इट विल एस्टैब्लिश अस ऑन दी सुपर कॉन्शियस प्लेन। बट वी हैव टू वी विल स्टार्ट वी कैन स्टार्ट फ्रॉम व्हाट वी हैव अ लिटिल तपस्या हियर अ लिटिल ट्रुथफुलनेस हियर अ लिटिल ऑनेस्टी हियर अ लिटिल इंटीग्रिटी देयर वेयरवर व्हिच एवर वी ब्रांच ऑफ दिस सोसाइटी इन व्हिच वी आर सपोज़ वी आर आइदर अह सोल्जर सपोज़ समवन इज़ अ डिप्लोमेट समवन इज़ अ टीचर अनदर पर्सन इज़ अ मॉक समवन इज़ अ गवर्नमेंट ऑफिसर समवन इज़ अ फार्मर अनदर पर्सन इज़ अ हाउसवाइफ। व्हाटएवर मे आवर स्टेशन बी इन दिस लाइफ, व्हाटएवर आवर प्लेस इट मे बी इन दिस सोसाइटी वी कैन स्टार्ट प्रैक्टिसिंग दिस टू फंडामेंटल आइडियाज राइट नाउ। इट नॉट नेसेसरी दैट वी विल बी अ 100% परफेक्ट। अह इम्मीडिएटली। ओर इवन परहेप्स इन दिस बर्थ। इट विल टेक इट माइट टेक बर्थ आफ्टर बर्थ आफ्टर बर्थ ऑफ़ हार्ड वर्क टू अटेन सम काइंड ऑफ़ परफेक्शन इन ट्रुथफुलनेस एंड ब्रह्मचर्य बट वंस वी अटेन दैट देन ओनली दिस स्पिरिचुअल गेट्स विल ओपन फॉर अस स्वामी ब्रह्मानंद जी राजा महाराज द मानस पुत्र ऑफ़ श्री रामकृष्ण एंड द फर्स्ट प्रेसिडेंट ऑफ़ रामकृष्ण ऑर्डर सेड समथिंग वेरी अह ही वंस मेड अ वेरी स्टार्टलिंग स्टेटमेंट दैट ट्रू रिलीजन बिगिंस आफ्टर समाधि। नाउ वी मे एक्चुअली वंडर दैट इफ़ अ स्पिरिचुअल साधक और अ स्पिरिचुअल एस्पांट ही इज़ डूइंग तपस्या हिज़ एंटायर लाइफ ही इज़ स्पेंडिंग डज़ आफ्टर डज़ मंथ्स आफ्टर मंथ्स इयर्स आफ्टर इयर्स इन अह यू नो डूइंग मेडिटेशन डूइंग जपम ध्यानम परफॉर्मिंग सम पर्टिकुलर वर्शिप प्रेसिंग और प्रेयंग टू अ ड्यूटी हिज़ इष्ट देवता देन हाउ इट कैन बी पॉसिबल दैट इफ ही अटेंडस समाधि एट द एंड ऑफ सच एन लॉन्ग आडुअस जर्नी हाउ कैन समाधि बी एक्चुअली अ बिगिनिंग ऑफ़ स्पिरिचुअल लाइफ बट देन व्हेन वी थिंक समथिंग लाइक दिस देन वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट श्री रामकृष्ण एंड हिज मोनेस्टिक डिसाइपल्स हैड गॉन फार फर्दर अहेड ऑन दिस पाथ ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी एंड दे हैड सीन सो मेनी वंडरफुल विज़ंस दैट विज़ंस दैट देयर इष्ट देवता हैड शोन देम एंड आल्सो दैट विज़न दैट दिस व्हिच आर प्रोड्यूस बाय देयर इनेट स्पिरिचुअल नेचर, इनेट आत्मन और ब्रह्मन दैट रिसाइड्स इन देयर हार्ट। सो देयर विज़ंस हैड टोल्ड देम। इट इज़ नॉट दैट दे आर सेइंग दिस बाय जस्ट रीडिंग सम बुक और लिसनिंग टू समवन एल्स। दीज़ आर देयर ओन सेल्फ एक्सपीरियंसेस। एंड देयर एक्सपीरियंस टोल्ड देम दैट एट द एंड ऑफ़ दैट स्पिरिचुअल जर्नी वंस दे अटेन समाधि मे इट बी सविकल्प समाधि। मे इट बी निर्विकल्प समाधि। बट एट द एंड ऑफ अटेनिंग समाधि द ट्रू स्पिरिचुअल लाइफ विल स्टार्ट। नाउ वी नो दैट देयर आर कंट्राडिक्शंस हियर इन दिस स्टेटमेंट वी कैन अंडरस्टैंड दैट अकॉर्डिंग टू वेदांता इट इज़ सेड दैट एट द इफ वी स्टे इन निर्विकल्प समाधि से फॉर एग्जांपल 21 डेज देन दिस डेथ इज़ इनएविटेबल। सो व्हाट हैपेंड नॉट जस्ट डेथ आई मीन डेथ ऑफ द बॉडी बट द सोल इटसेल्फ विल अटेन इमोर्टल अह सोल विल मर्ज इटसेल्फ आवर जीव अह विल मर्ज इटसेल्फ इंटू दी ग्रेटर ब्रह्म सी व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट वेदांता आई हैव टू चूज़ माय वर्ड्स वेरी केयरफुली बिकॉज़ वेदांता वेदांतिक फिलॉसोफी इज़ अ वेरी वेल लेड वेरी वेल एस्टैब्लिश्ड ब्रांच ऑफ थिंकिंग ब्रांच ऑफ़ आइडियाज दिस आइडियाज आर वेरी सिस्टमेटिकली एनालिटिकली लेड आउट बिफोर अस एंड वी कैन नॉट डिविएट फ्रॉम देयर व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट वेदांता दैट इज़ व्हाई आई एम चूजिंग माय वर्ड्स केयरफुली एंड आल्सो मॉडिफाइंग देम व्हाट हैप्स इन समाधि दैट द जीवा व्हिच इज़ माय मन बुद्धि चित्त एंड अहंकार दिस फोर कंस्टीट्यूट अंतःकरण माय बॉडी देयर इज़ अ बहकरण व्हिच इज़ माय माय बॉडी माय हैंड्स माय लेग्स माय फेस एटसेटरा दिस इज़ बहीकरण दैट इज दी आउटर ऑर्गन देयर इज अंतःकरण दैट इज माय मन बुद्धि चित्त एंड अहंकार दैट इज़ माय इंटेलेक्ट माय डिसीजन मेकिंग कैपेसिटी माय मेमोरीज माय एटीट्यूड माय एपटीट्यूड माय कैरेक्टर माय द ऑल दिस बैलेंस ऑफ़ कर्मा दैट आई हैव गैदर्ड एट द एंड ऑफ़ सो मेनी बर्थ्स दिस इज़ अंतःकरण और रेदर लेट मी से इंटरनल ऑर्गन इनर ऑर्गन एंड बिय्ड दिस बहकरण एंड अंतःकरण दैट इज दी आत्मन और वी मे से ब्रह्म मन नाउ व्हेन वी से दैट व्हाट डाइस एंड व्हाट टेक्स न्यू बर्थ इट इज़ नॉट दैट आत्मन डाइस एंड आत्मन टेक्स रिब्थ बिकॉज़ आत्मन नेवर देयर इज़ ओनली वन आत्मन फर्स्ट ऑफ़ ऑल इट नेवर टेक्स बर्थ इट नेवर डाइस इट नेवर म्यूटेट्स इट ऑलवेज रिमेंस दी सेम थ्रू आउट इट्स एकज़िस्टेंस। आत्मन डज़ंट इवन हैव एकज़िस्टेंस। सी व्हाट हैपेंस व्हेन वी आर अप्लाइंग नॉर्मल कांसेप्ट्स व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट आत्मन और ब्रह्मन बट व्हाट हैपेंस माय अंतःकरण माय दिस कलेक्शन ऑफ़ माय मेमोरीज एंड माय एपटीट्यूड्स माय स्किल्स माय माय नॉलेज माय विज़डम ऑल ऑफ़ दैट दे एव्री एंड ऑफ़ दिस बर्थ देयर इज़ अ बैलेंस ऑफ कर्मा एंड व्हेन आई टेक रिब्थ व्हाट हैपेंस माय अंतःकरण शेड्स दिस बहिकरण दैट इज़ आउटर ऑर्गन आउटर बॉडी एंड टेक्स अ न्यू बॉडी। दिस अंतःकरण रिमेन सेम बट आवर मेमोरीज़ एंड एटसेट्रा आर पुश् इंटू द बैकग्राउंड इंटू दी सबकॉन्शियस। ऑन दिस कॉन्शियस प्लेन वी आर बेसिकली रिमाइंडेड वी ओनली रिमेंबर आवर प्रेजेंट बर्थ। एंड इवन आवर प्रेजेंट बर्थ वी रिमेंबर वेरी फ्यू थिंग्स। देयर आर सो मेनी इवेंट्स वेयर इन माय चाइल्डहुड। आई नेवर आई डू नॉट रिमेंबर एनीमोर। आई 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लास्ट वॉच ऑफ द नाइट व्हाट हैपेंड ऑल द इवेंट्स ऑफ ह प्रीवियस बर्थ आर दे स्टार्टेड पासिंग बिफोर ह आईज एज इफ अ मूवी इज प्लेइंग एंड व्हनेवर एन इवेंट विल पास ऑल द कर्मा दैट दैट इवेंट हैड जनरेटेड मे इट बी गुड कर्मा मे इट बी बैड कर्मा दोज़ कर्माज़ वेर कट ऑफ एंड लिविंग नथिंग बिहाइंड बट दैट इटरनल इमोर्टल ब्लीस ऑफ निर्वाणा सो वी कैन सी दैट हाउ हियर स्वामी जी सेस दैट ओबे द स्क्रिप्चर अन अंटिल यू आर स्ट्रांग इनफ टू डू विदाउट देम देन गो बियड देम। दिस इज़ दिस एंटायर जर्नी व्हिच इज़ लेड आउट इन आवर स्क्रिप्चर्स दैट वी हैव टू एक्चुअली फॉलो नॉट वी हैव टू जस्ट नियर बी सेटिस्फाइड बाय लिसनिंग टू व्हाट दी स्क्रिप्चर्स से। ओके। नाउ स्वामी जी सेज़ बुक्स आर नॉट एन एंड ऑल वेरिफिकेशन इज़ द ओनली प्रूफ़ ऑफ रिलीजियस ट्रुथ। नाउ व्हाई दिस बुक्स आर रिटन व्हाई वी इवन रीड देम बिकॉज़ व्हेन वी स्टार्ट प्रैक्टिसिंग वेरी स्ट्रेंज थिंग्स मे हैपन वी नो दैट हाउ अह अह इन ठाकुरस लाइफ वी रीड ऑल दिस स्ट्रेंज इंसिडेंट वन डे वी सो जस्ट अ फ्यू डेज़ एगो दैट व्हेन ठाकुर वाज़ प्रैक्टिसिंग ऑल दिस साधना सडनली ब्लड स्टार्टेड फ्लोइंग टुवर्ड्स हिस ब्रेन देयर वाज़ अनदर रीज़न फॉर दैट अह ठाकुर हैड टोल्ड ठाकुर हैड डेयर टू से टेल हिज एल्डर ब्रदर अ कजिन हलधारी दैट हलधारी आई नो दैट यू आर डूइंग सम स्ट्रेंज तांत्रिक साधनास एंड यू शुड डू दैट बिकॉज़ पीपल आर टॉकिंग बिहाइंड योर बैक। नाउ व्हाई एवरीवन वाज़ टॉकिंग बिहाइंड हलधारीस बैक एंड नॉट ऑन हिज एट हिज ओन फेस बिकॉज़ हलदारी वाज़ वाकस सिद्ध व्हाटएवर ही वुड से इट विल कम ट्रू। सो ठाकुर डेयर्ड देन हलधारी बिकम वेरी एंग्री एंड इन अ फ्लैश ऑफ रेज ही टोल्ड ठाकुर श्री रामकृष्णा दैट इनस्पाइट ऑफ बीइंग यंगर देन मी यू डेयर टू टेल मी यू डेयर टू क्रिटिसाइज माय वेज़ ऑफ साधना आई कर्स यू दैट ब्लड विल फ्लो आउट ऑफ योर माउथ व्हेन ही सेड दिस इट एक्चुअली हैपेंड दैट आफ्टर अ फ्यू डेज़ इन इवनिंग टाइम आफ्टर आरती ठाकुर वाज सीटेड इन हिज़ रूम सडनली ब्लड स्टार्टेड फ्लोइंग आउट ऑफ हिस माउथ माउथ एंड एवरीवन बिकम वेरी फ्राइटन व्हाट वी कैन डू व्हाट टू बी डन देन वन मक वन साधु महात्मा ही वाज़ लिविंग इन पंचवटी एट दैट टाइम इन दक्षिणेश्वर काली टेंपल ही केम एंड सेड दैट इट इज़ गुड दैट दिस ब्लड हैज़ फ्लोड आउट ऑफ योर माउथ बिकॉज़ योर कुंडलिनी यू वेर प्रैक्टिसिंग दिस योगिक साधनास एंड यू वेर अबाउट टू अटेन दिस जड़ समाधि इन जड़ समाधि ओनली बॉडी रिमेंस बट अ पर्सन डाइस एक्चुअली ही अटेंस महासमाधि। सो यू वेर अबाउट टू डाई बाय दिस जड़ समाधि। बट व्हेन दिस ब्लड हैज़ फ्लोट आउट ऑफ योर माउथ। दैट मींस दिस कुंडलिनी विल नॉट राइज़ टू योर सहस्त्रार चक्र एट द टॉप ऑफ योर हेड एनीमोर। सो सी दिस इज़ रिटन इन आवर स्क्रिप्चर इन कथामृता। नाउ व्हनेवर इट ए मे हैपन दैट ब्लड कम्स आउट ऑफ आवर माउथ देन वी कैन आल्सो टेक कंसोलेशन दैट दिस हैज़ आल्सो हैपेंड विद ठाकुर। वी हैव टू अंडरस्टैंड दिस डिफरेंस बिटवीन ठाकुर एंड अस दैट ठाकुर वास डूइंग इंटेंस साधना व्हाइल वी मे यू बी ए हाउसहोल्डर और मे यू बी अ मक आवर द क्वांटम ऑफ साधना द अमाउंट ऑफ साधना दैट वी डू इज़ नथिंग कंपेयर टू ठाकुर सो वी बेटर कंसल्ट डॉक्टर एनी टाइम दिस सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स हैप्स बट सी दिस आर द कंसोलेशंस वन डे आई बिकम वेरी इल आई हैड फीवर एंड आई आल्सो थॉट दैट आई आई रीड इन युगनायक दैट स्वामी विवेकानंद आल्सो हैड फीवर। सो नथिंग टू बी वरिड अबाउट स्वामी विवेकानंद आल्सो हैड द सेम वी मे से दिस प्रॉब्लम्स दैट आई एम फेसिंग एटलीस्ट वी कैन टेक कंसोलेशन दैट वी मे नॉट बी एबल टू डू एस मच साधना एस स्वामी जी बट वी कैन टेक कंसोलेशन दैट वी हैव गॉट द सेम डिसीज इट स्वामी जी हैज़ गॉट स्वामी जी को पता है ना
श्रीरामकृष्ण कथामृत : चतुर्थ दर्शन
छोटी उम्र में ही डायबिटीज हो गया था ब्लड प्रेशर था अस्थमा था तो फिर हमको एटलीस्ट ये सोच करके मतलब सुकून महसूस करना है कि चलो स्वामी जी के जितनी साधना हमने नहीं की तो एटलीस्ट स्वामी जी को जितने जितने रोग हुए थे वो मुझे हो रहे हैं। अभी अभी नहीं होंगे तो उम्र चलते चलते तो होंगे ही। तो फिर एटलीस्ट ये तो है कि हम लोग कहीं तो एक रास्ते पर जा रहे हैं और कुछ हो ना हो। तो एक बात है कि जब ठाकुर मां स्वामी जी की शरण में आ गए हैं तो हमेशा याद रखना है कि इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में। ठाकुर कहते हैं ना कि जब बच्चा अपने पिताजी का हाथ पकड़ कर के चलता है तो यह डर रहता है कि वो उसका हाथ वो उसकी जो ग्रिप है वो छूट जाएगी और वो गिर पड़ेगा। किंतु जब पिताजी बच्चे का हाथ पकड़ लेते हैं तो पिताजी की ग्रिप तो बड़ी स्ट्रांग होती है। वो बच्चे का हाथ छूटेगा नहीं। बच्चा गिरेगा नहीं। और हमारे केस में तो यहां तक है ठाकुर हमारे कान पकड़ करके चल रहा है। इसलिए हमारे इधर-उधर जाने की कोई संभावना ही नहीं है। जब तक हम जो है ईश्वर का दर्शन ना प्राप्त कर ले या तो फिर डिपेंड्स अपॉन आवर फिलॉसोफी यदि हम आत्म दर्शन ना प्राप्त कर ले। अच्छा अभी श्री रामकृष्ण कथामृत देखते हैं कि कल हमने देखा ठाकुर की वो जो एक बड़ा कलरफुल एग्जांपल्स कलरफुल उपमा वगैरह देते हैं ना तो यहां पे उन्होंने कहा है कि नरेंद्र किस तरह का लड़का है दो तरह के लड़के होते हैं जैसे वो किसान जब बाजार में बेल खरीदने के लिए जाता है तो ठाकुर ने क्या कहा कि दो तरह के बेल होते हैं जिसकी पूंछ के नीचे हाथ रखने से एक बेल जो है वह लेट जाता है और दूसरा बेल जो है वह छड़ांग करके वह उछल पड़ता है क्योंकि उसमें बड़ा तेज ताकतवर बेल होता है। तो माने जब हल जोतना होता है तो यह जो ताकतवर जिसमें स्फूर्ति हो जिसमें शक्ति हो वो बेल जो है वो लंबे समय तक और ज्यादा वो खेत जोत सकता है और जो कमजोर बेल है वो ज्यादा नहीं जोत पाएगा। तो ये उनके टेस्टिंग के तरीके रहते हैं। तो ठाकुर ने भी स्वामी जी को बहुत टेस्ट किया था। वो हमको पता है कि सर्वप्रथम बार स्वामी जी जब ठाकुर के पास आए तो वो पहली मुलाकात ना कि दूसरी तीसरी मुलाकात में ठाकुर ने उनको स्पर्श कर दिया। तो जैसे ही स्पर्श किया कि देखा कि जैसे पूरा ब्रह्मांड जो है पूरा विश्व जो है वो एकाकार हो रहा है और स्वामी जी अपने पुराने-पुराने जन्मों की याद जो है वह ताजी करने लगे। माने उनको मन में सब आने लगा कि वो कौन है, क्या है, क्यों जमीन पर पृथ्वी पर आए हैं। ठाकुर ने उसी समय उनको पूछा था कि जब स्वामी जी उस समय समाधि अवस्था में थे, उस समय ठाकुर ने पूछा था उनको कि तुम कौन हो? यहां पर क्यों आए हो? और जब स्वामी जी ने जब उनको उत्तर देने की शुरुआत की तब ठाकुर जो है निश्चिंत हो गए कि हां मैंने जिस में मुझे जो आध्यात्मिक दर्शन हुआ था कि सप्तर्शी ऋषि ऋषि जो है वो नभो मंडल में कहीं पर विराजमान है वहां पे एक छोटा सा बच्चा वो हंसता खेलता उसका फूल गुलाबी चेहरा सुंदर चेहरा वो बच्चा जाकर के एक ऋषि के हाथ पकड़ लेता है और खींच करके बोलता है कि आपको भी पृथ्वी पर आना होगा तब ऋषि ने एक आंख खोल करके धीरे से उसके सामने हंसा| अर्थात कि उन्होंने अनुमति दी। तो वही ऋषि जो है इस नरेंद्र के शरीर में उनका काम करने के लिए ठाकुर का जो मिशन है उसको आगे बढ़ाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं। तो ठाकुर ने भी उनकी परीक्षा की और नरेंद्र ने भी ठाकुर की परीक्षा कर ली थी। यहां पर दोनों ने एक दूसरे की परीक्षा की थी। अभी मास्टर महाशय आगे लिखते हैं। संध्या हुई। श्री रामकृष्ण ईश्वर चिंतन करने लगे। उन्होंने मास्टर से कहा, तुम जाकर के नरेंद्र से बातचीत करो और फिर मुझे बताना कि यह कैसा लड़का है। आरती हो चुकी। मास्टर ने बड़ी देर में नरेंद्र को चांदनी के पश्चिम की तरह पाया। ठाकुर इस तरह से अपने भक्तों को लड़ा देते थे। है सिर्फ यह नहीं कि वो तुम जाकर के देखो कि वो क्या कर रहा है कैसे है यह भी मुझे आकर के बताओ उसकी माइंडसेट कैसा है वो किस तरह से सोच रहा है अर्थात देखिए बात यह नहीं है कि ठाकुर जो है वो नरेंद्र के बारे में जानना चाहते थे ठाकुर इसके पीछे जो गुढार्थ जो है ठाकुर यह जानना चाहते हैं कि मास्टर महाशय का नरेंद्र के बारे में क्या असेसमेंट है नरन कौन है क्या है वो तो ठाकुर ने इंडिपेंडेंटली वेरीफाई कर दिया है मास्टर महाशय कौन होते हैं ठाकुर को बताने वाले किंतु किंतु मास्टर महाशय नरेंद्र को किस तरह से देखते हैं वो बताता है कि मास्टर महाशय की क्या औकात है। मास्टर महाशय का कहां तक वो इंटेलेक्चुअल विज़डम है। सोफिस्टिकेशन है। वो क्या वो जो जैसे राख जो होती है राख से छिपा हुआ जो अंगारा होता है आगुन होता है। जब हम मंदिर में होम करते हैं या तो जहां पे भी आप लकड़ी से आगुन जलाएंगे। देखिएगा थोड़ी देर के बाद में आगुन के ऊपर में राख डक जाती है। उसके बाद में आप जो है राख को हटा देंगे तो फिर से वो आगुन चमक लगेगा। तो ये जो समय था नरेंद्र का वो साधना करने का तपस्या करने का विद्यार्थी जीवन था वो। वो जो उसको उस समय वो जो उनकी जो इनेट टैलेंट थी जो बाद में अमेरिका जाकर के वो प्रकाशित होने वाली थी वो अभी छुपी हुई थी। तो क्या मास्टर महाशय वो कैपेसिटी है कि वो जो राग से ढके हुए जो आगुन के अंगारे जो है स्वामी जी उसको उनको वो पहचान पाए कि नहीं ये जानने के लिए मास्टर महाशय ने नरेंद्र के पास उनको भेजा क्योंकि देखिए वो ठाकुर जो है पहले से ही ये सब वो प्लान कर रहे थे। वो ब्रह्म समाज के किसी ने बड़ा एक अच्छा बात कहा था कि परमहंस महाशय का सेंस ऑफ फैकल्टी ऑफ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। माने ये ब्रह्मो समाज जी के पास से कितना ये आइरोनिक लगता है। कितना ये हास्यास्पद लगता है। आज 200 साल के बाद में उस समय क्या था कि ठाकुर के पास जो लड़के वो सब आते थे शिष्य जो सब आते थे गृहस्थ हो ना कि ये जो त्यागी लड़के हो वो आकर के हंसते थे खेलते थे उनकी बातें सुनते थे बस वो घर चले जाते थे और आखिर आखिर में जो है वो काशीपुर में उनके साथ में इकट्ठा हुए थे किंतु ब्राह्म समाज जो है उस समय वो एकदम सिस्टमैटिक ऑर्गेनाइजेशन था। यह चर्च वगैरह किस तरह से वो सिस्टमैटिकली वो ऑर्गेनाइज हुए हैं। तो उनकी मेंबरशिप फी थी। मेंबरशिप रजिस्टर था। वो अटेंडेंस मेंटेन किया करते थे। नियमित रूप से वो जो टाइम टेबल उनका था कि यह प्रार्थना का समय है मॉर्निंग प्रेयर, इवनिंग प्रेयर। फिर वहां जो महघोत्सव वगैरह जो उत्सव का एक कैलेंडर रहता था वो सब कुछ आज रामकृष्ण मिशन में जो है उसके बहुत सारी मतलब फीचर्स जो है उस समय ब्रह्म समाज में थे और उन लोगों को बड़ा गर्व था कि हम लोग जो है एक मॉडर्न ऑर्गेनाइजेशन है। जबकि ये जो लड़के वो सब वो जो पुरुष महिलाएं ठाकुर के पास आते हैं वो हंसी मजाक करके चले जाते हैं। उनका से फैकल्टी ऑफ़ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। ऐसा ये लोग बोलते थे आपस में। अभी 200 साल के बाद में हमको यह पता है कि रामकृष्ण मिशन इज वन ऑफ द मोस्ट प्रीमियम ऑर्गेनाइजेशन प्रीमियर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ दिस वर्ल्ड और ब्राह्म समाज के बारे में आज ज्यादातर लोग जो जानते हैं वो इसीलिए जानते हैं कि रामकृष्ण मिशन की किताबों में उनके बारे में लिखा है। ये रामकृष्ण मिशन जो कि पर वन ऑफ द बेस्ट ऑर्गेनाइजेशन इन द वर्ल्ड हमारी किताब में लिखा है कि वे लोग बोला करते थे कि ठाकुर की फैकल्टी ऑफ़ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। तो ये दिस आरनी मतलब यह हास्यास्पद एक मतलब हंसी मजाक की एक बात है और यह भी मतलब हम जब कथामृत को ठीक-ठीक से यह सब वो जो जिसको माइंड साइट बोलते हैं ना इंग्लिश में जो पूरा लिटरेचर पढ़कर के एक हमारा एक एपटीट्यूड डेवलप होता है। एक एक एक हमको एक समझ आ जाता है कि किस तरह से हमारा जो पूरा मूवमेंट है वो डेवलप हुआ है। उसके बाद में जब आप कथामृत फिर से पढ़ते हैं तो प्रत्येक छोटे-छोटे कार्य में ठाकुर के हमको यह पता चलने लगता है कि कैसे यह जो एक के बाद एक जो थ्रेड्स है वो डेवलप हो रहे हैं। कैसे ये जो एक के बाद एक थ्रीड्स जो है दे इंटरवोक टुगेदर टू क्रिएट दिस ग्रेट फैब्रिक ऑफ रामकृष्ण मूवमेंट इन दिस वर्ल्ड। तो अभी से ठाकुर जो है वो टेस्ट कर रहे हैं। एक को दूसरे के साथ में डिबेट में लगा दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले पढ़ा ना कि वो उसके साथ में अधर्सन के साथ में वो नरेंद्र को नरेंद्र डिबेट कर रहा था वो नरेंद्र जीत गया। तो वो भिड़ाने वाले भी ठाकुर ही होंगे। यहां पे भले नहीं चाहे लिखा है। किंतु बाद बात बाद में जितने भी इस तरह के इंसिडेंट आते हैं देखेंगे कि वो ठाकुर ही कहते हैं। वो मास्टर महाशय को बोलेंगे कि नरेंद्र के साथ तर्क करो। नरेंद्र को बोलेंगे वो गिरीश घोष के साथ तर्क करो। ये जो अधसेन है उसको बोलेंगे नरेंद्र के साथ तर्क करो। तो सबको जाकर के नरेंद्र से भिड़ा देते थे। देखते थे कि नरेंद्र जो है किस तरह से वो जो इतने सीनियर लोग हैं, इतने इंटेलेक्चुअल लोग हैं। इतने वाइस लोग हैं उस समय के समाज में मास्टर महाशय एमए थे, विद्यासागर के स्कूल में टीचर थे। अदर सेंट डिपटी था, डिपुटी मैजिस्ट्रेट था। ये जो गिरीश घोष था वैसे वो कोई एकेडेमिक पर्सन नहीं था। किंतु जिसको वर्ल्डली विज़डम कहा जाता है। एक इंसाइट कही जाती है। वो बहुत ही बखूबी उसमें थी और उसने जगत देखा था। मतलब ये मास्टर महाशय थोड़े एकेडेमिक टाइप के थे और वो जो अधर्स हैं वो थोड़ा सा वो क्या है कि वो गवर्नमेंट ऑफिसर था तो ये लोग थोड़े ऊपर के लेवल पर रहते हैं किंतु ये जो समाज की जो अंडरबेली जो होती है सोसाइटी की ये जो समाज की जो दूषण होते हैं ये जो बिकॉज़ के गिरीश घोष वो थिएटर कर रहा था वो थिएटर का मैनेजर था उसको ये जो दूषण जो है समाज के बहुत अच्छे से समझ में आते थे। तो किस तरह से नरेंद्र को मतलब एक इस तरह से मतलब नरेंद्र को माने क्या कहेंगे कि नरेंद्र को इस तरह से वो आइदर प्रवोक करते थे कि नरेंद्र जो है वो एकदम हिल जाता था। इसलिए देखिएगा कि बाद में एक बार जब नरेंद्र और गिरीश घोष की डिबेट हुई है तो गिरीश घोष सबको ऐसा कहता घूमता है कि मैं जीत गया। मैं जो है नरेंद्र को डिबेट में हरा दिया। तो किसी ने जाकर के ठाकुर को कहा कि देखिए ठाकुर कि नरेंद्र आप कहते थे कि इतना इंटेलेक्चुअल है सबके साथ में डिबेट में जीत जाता है किंतु गिरीश घोष ने जो है नरेंद्र को डिबेट में हरा दिया है। तो ठाकुर क्या कहते हैं कि अरे देखो यह बात नहीं है कि नरेंद्र ने हार मान ली है। नरेंद्र आकर के क्या कहता है कि गिरीश घोष का अभी यह जो पर्टिकुलर पॉइंट था वह था भागवत में जो कहा गया है कृष्णस्तु भगवान स्वयं अर्थात भगवान कृष्ण जो है वो स्वयं भगवान है और जो अवतार जो है वो दूसरे अवतार वो अवतार ही है वो भगवान स्वयं नहीं है और यदि वो मतलब कृष्ण होने का दावा करते हैं या तो सही सही अवतार होने का दावा करते हैं तो वो भगवान ही हो जाएंगे ईश्वर ही हो जाएंगे अवतार और ईश्वर में कोई भेद नहीं है भले ही चाहे हम कहेंगे कहेंगे ठाकुर पृथ्वी पे है और मां काली जो है उनकी इष्ट देवी या तो फिर भगवान विष्णु जो है वह कहीं पर स्वर्ग में रह रहे हैं वैुंठ में रह रहे हैं कहीं पर रह रहे हैं किंतु वो भक्ति की दृष्टि से अब ये जो है कि वेदांत की दृष्टि से कहा जाएगा कि जो ब्राह्मण ही सब कुछ हुआ है वो मां काली हो मां सरस्वती हो भगवान विष्णु हो भगवान शिव हो कुछ भी हो या तो फिर ये जो एक के बाद एक जो अवतार है सब कुछ एक ही ब्राह्मण के विभिन्न वो रेज ऑफ लाइट है विभिन्न रूप से प्रकाश है। किंतु वो वेदांत की दृष्टि से हुआ। यहां जो गिरीश कोष है भक्ति की दृष्टि से ही ईश्वर और अवतार को एक रूप प्रूव करने का प्रयत्न कर रहा है। तो नरेंद्र कहता है कि आइदर भक्ति की दृष्टि से जाओ तो ईश्वर और अवतार दो अलग-अलग रियलिटीज है। और यदि वेदांत की दृष्टि से जाओ तो एक ही ब्राह्मण है। अब वेदा भक्ति की दृष्टि से कैसे ईश्वर और अवतार को मिला दिया। तो ये डिबेट का पॉइंट था। तो आखिर में नरेंद्र कहता है किसी ने बोला कि गिरीश घोष जीत गए। तो ठाकुर ने कहा कि अरे नहीं नरेंद्र ने मुझे कहा कि गिरीश का विश्वास जो है कि ठाकुर ईश्वर स्वयं है तो इतना दृढ़ विश्वास है कि फिर नरेंद्र ने जो है वो उसके अगेंस्ट में आर्गुममेंट करना उचित नहीं समझा। किसी के विश्वास पे क्यों जाकर के आघात करें? तो इस तरह से देखिए कि गिरीश घोष बिकॉज़ नॉट बीइंग एन एकेडमिक और इंटेलेक्चुअल और वाइस पर्सन जैसे कि मास्टर महाशय या तो फिर अदर से थे बीइंग ए वर्ल्डली वाइस पर्सन वो नरेंद्र को प्रवोक भी कर सकता था और नरेंद्र को ठंडा भी कर सकता था और एक म बहुत अच्छा इंसिडेंट है स्वामी जी जब अमेरिका से वापस आए वो पूरा विश्व जय करके उनके राजा महाराजा उनके भक्त है जब स्वामी जी किसी शहर में जाते हैं तो उनका रथ जो है रथ रथ में से वो जो घोड़े हटा के राजा लोग उनका रथ खींचते हैं उतना उनका सम्मान है। देश विदेश से कितने मतलब नामी ख्यातनाम पंडित या तो डिप्लोमेट लोग उनको मिलने के लिए आते हैं। उस समय स्वामी जी जो है बेलूर मठ में जो शरद चंद्र चक्रवर्ती उनका शिष्य उसका क्लास ले रहे थे। वेद के बारे में वेद का कुछ आइडियाज उनको समझा रहे थे। वेद के ऊपर में क्लास ले था। इस समय गिरीश घोष आया। देखा नरेंद्र बड़ा ही हाईाई बातें कर रहा है। बड़ा हवा में उड़ रहा है। थोड़ा सा पंचर करते हैं। उसको थोड़ा पृथ्वी पर ले आते हैं। तो ऐसा सोच कर के गिरीश घोष ने बोलना शुरू किया कि नरेंद्र तुम ये सब ऐसी वेदांत की बातें करते हो कि समग्र जगत जो है वही एक ही ब्रह्म का विभिन्न रूप से प्रकाशमय है। सारा जगत जो है वो स्पिरिचुअल रियलिटी है। जो यह जो वर्ल्डली रियलिटी तुम जो कहते हो संसार के जो यह कष्ट वगैरह यह तो सिर्फ माया है। उसका कोई रियल एग्जिस्टेंस नहीं है। तो ठीक है। मैं यह बात समझता हूं कि तुम यह सब क्यों अपने लड़कों को सिखाते हो। किंतु तुम भी मूर्ख हो। तुम्हारे लड़के भी मूर्ख है। गिरीश गो एकदम मुंह पे बोल देने वाले किसी की परवाह नहीं करते थे। तो अभी ये मेरे शब्द है। गिरीश ने ऐसा किताब में एटलीस्ट नहीं लिखा है। मुंह पे क्या बोलते हैं पता नहीं। किंतु गिरीश का पर्सनालिटी देख के मैं थोड़ा सा फिल इन द ब्लैंक्स कर रहा हूं कि कि ये सब मूर्ख जैसी बातें करने की बजाय तुम देखो कि समाज की भी क्या परिस्थिति है। ये जो गरीब घर की लड़कियां हैं उनको अपने पिताजी जो भी शायद उनका देहांत हो गया है। वो बूढ़ी मां है। छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका लालनपालन करने के लिए इस लड़कियों को क्या-क्या मतलब कितना कठिन समय से कितनी मतलब भयावह परिस्थिति में से उनको गुजरना पड़ता है। यह जो गरीब है, ये जो विधवा है, यह जो ऑर्फन बच्चे हैं जिनके माता और पिता दोनों माताजी पिता दोनों का देहांत हो गया है, जो कि सड़क पर रहते हैं ना ही खाने को मिलता है। भिक्षा करके जीवन निर्वाह करते हैं। ठंडी बारिश जो भी होता है उसमें वे लोग जो है उनके पास में पहनने को कपड़े भी नहीं होते। सड़क पर ही जिएंगे। सड़क पर ही वे लोग उनका जन्म हुआ। सड़क पर ही जिए। सड़क पर ही उनका मृत्यु हो गया। तो ये जो ऑर्फंस ये विडोस ये प्रॉस्टिट्यूट इनके बारे में तुमको क्या कहना है? तो जैसे ही गिरीश घोष ने ऐसा कहा स्वामी जी तो उदार हृदय थे। वो तो सिर्फ पंडित नहीं थे। तो उनका हृदय जो है उदार हृदय इतना संकुचित हुआ। इतना कष्ट हुआ कि उनकी आंखों में से आंसू आने लगे। वो रोने लगे और वो जो है कमरा छोड़कर के दौड़ के चले गए। वो पता नहीं जाकर के ठाकुर को प्रार्थना किए होंगे जो भी है कि सबके कष्ट का लाघव हो। और इसीलिए हम देखते हैं कि देखिए वो 100 साल में ही भारत कहां से कहां आ गया है। 1800 अभी 2023 है तो 1923 में हम देखेंगे कि वो कहां वो गुलाम भारत था 1923 में और आज कहां वो विश्व गुरु जी20 का प्रेसिडेंट है हम मोदी तो क्या से क्या नहीं कर रहा है अभी। तो देखिए कि 100 साल में ही स्वामी जी के ठाकुर महास्वामी जी के आशीर्वाद से हम कितने ऊपर आ गए हैं। ये जो रिडक्शन इन पॉवर्टी है जो 500 मिलियन यानी कि 50 करोड़ के आसपास जो गरीब थे वो 1960 में 70ज में तो गवर्नमेंट और बाकी सब नॉन एनजीओ और रामकृष्ण मिशन वगैरह की जो सोशल एक्टिविटीज है उसकी वजह से जो नंबर ऑफ एब्सोल्यूट पीपल लिविंग बिलो एब्सोल्यूट पॉवर्टी लाइन वो मुश्किल से 10-12 करोड़ के आसपास आ गई है। तो रिडक्शन इन पॉवर्टी ये जो सोशल वेलफेयर स्कीम्स वगैरह कितना डेवलप हुआ है। हमको याद रखना है कि यह सब चीजें भले चाहे आज हम करते हो हम आज मैं सभी कोई बात कर रहा हूं। उसके पीछे आशीर्वाद जो है वो जो उस दिन स्वामी जी ने प्रार्थना की होगी गिरीश की बात सुनकर के ठाकुर को उसी प्रार्थना का ये सब परिणाम हम आज देख रहे हैं। तो ये जो डिबेट भी ठाकुर जब करवाते थे इन लोगों के बीच में तो ये देखते थे। बात यह नहीं कि नरेंद्र के बारे में वह जानना चाहता है किंतु वो जानना चाहते हैं कि नरेंद्र के साथ में जो डिबेट करने वाले जो डिवोटी है वो गिरीश घोष हो मात्र मास्टर महाशय उनकी क्या मेंटालिटी है उनका क्या स्टेटस है स्पिरिचुअल जर्नी में वो कहां तक आगे बढ़े हुए हैं अच्छा तो आज यहीं तक दो तीन लाइन हुई पढ़ाई और ज्यादा नहीं हो पाई एनीवे कल फिर से मिलेंगे ओम शांति शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणस्तु