Swami Vivekananda
टीचिंग्स ऑफ स्वामी विवेकानंद शेयरिंग मी स्क्रीन अच्छा बी थैंकफूल पर जो फूड आईटी इसे ब्राह्मण दिस यूनिवर्सल एनर्जी इस ट्रांसमिटेड इन अवर इंडिविजुअल एनर्जी और हेल्प्स इन जो डेट वे तू यू नो डेट व्हेन इन रामकृष्ण मठ वेरिएबल यू आर इन अवर सेंटर वेन्यू वी टेक फूड व्हेनेवर वे टेक प्रसाद वे ऑफर आईटी तू गॉड सेइंग डी श्लोक विद डी फेमस श्लोक ऑफ गीता जब ब्रह्मांड परम महाविधि था मेंस था वॅटीवर फूड डेट आई ईट आई ऑफर आईटी तू डी ब्रह्मांड वॅटीवर डी न्यूरिशमेंट आई रिसीव डेट अलसो आई ऑफर तू डी ब्रह्मांड सो दिस फूड इस ब्राह्मण इस एन एसेंशियल पार्ट ऑफ अवर हिंदू टीचिंग्स आ श्री रामकृष्ण सर डी कोली ते अंगत व्हाट दस आईटी मीन डेट फॉक्स ऑफ ओवर एनर्जी और रदर लेट मी से डेट आ फूड बीकमस एन वेरी एसेंशियल पार्ट ऑफ अवर मेकअप प्रीवियसली आईटी उसे तू हैपन व्हेन वे रीड डी पोस्टीरियर्टीज ऑफ बुद्ध और अन्य अदर अवतारस वे सी डेट हो टेरिफिक ऑस्ट्रेलिया रूट और फ्रूट्स नो व्हाट आर डी रूट डेट इस स्कॉयर्ड और पोटैटो और फ्रूट्स अरे एप्पल और बनाना समथिंग लाइक दिस तू एट सो दिस पोस्टेड उसे तू देवर एबल तू डू और एवं टुडे वे सी सम जैन मेंस डूइंग परियूषण उपवास नो पर्यूषण फास्टिंग डेट यू हैव तू डू पर में डेज 10 डेज और मोर कंटीन्यूअस सो दिस एबिलिटी तू फास्ट पर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम इसे गेटिंग लेस इन ली इन दिस आगे वही इसे आईटी सो बिकॉज़ ओवर बॉडीज आर मेड ऑफ फूड नोट ऑफ हायर आइडिया सपोज ओवर बॉडीज आर और रदर ओवर मन आर फॉक्स मोर ऑन हायर इतिहास आईएफ वे वेयर आर यू नो लेवल्स ऑफ कॉन्शसनेस देवर इस सबकॉन्शसनेस देवर इस नॉर्मल कॉन्शसनेस और देवर इस सुपरकॉन्शसनेस बट देवर इस एन एंटीरे स्पेक्ट्रम ऑफ कॉन्शसनेस आईटी डिपेंड्स आईटी वेयर वे आर वेदर वे आर ऑन डी ओवर दिस तो डायल 10 तू इयर्स लोअर लेवल ऑफ कॉन्शसनेस और वेदर आईटी इस सेंटर ऑन नॉर्मल कॉन्शसनेस और वेदर ओवर डायोड 10 टुवर्ड्स दी हायर कंसंट्रेशन में सपोज आईएफ वे आर गोइंग हायर इन हायर ऑन ओवर क्लाइंबिंग डी स्टेप्स ऑफ कॉन्शसनेस दें वे बिल फाइंड डेट इन वेद वेरी सेड देवर आर फाइव पोस्टर्स ओवर बॉडीज आर मेड ऑफ फाइव क्वेश्चंस सो जो दिस कस दे मेक ओवर बॉडी सो लिस्ट ऑफ डेम इस दी अन्नामे पोश अन्नामे कोश इस ओवर फिजिकल बॉडी सो वन ओवर कॉन्शसनेस लिस्ट मोर टुवर्ड्स दिस लोअर और बेसिक लेवल्स ऑफ कॉन्शसनेस वे आर मोर अवेयर ऑफ डी बॉडी वे आर मोर अवेयर ऑफ नीड्स और डिजायर्स ऑफ डी बॉडी और व्हेन अवर कॉन्शसनेस टेंस मोर तू आनंदमय और विज्ञानमय पोशाक अवर कॉन्शसनेस तू डेरिव इट्स प्लेजर फ्रॉम हायर थिंग्स नो स्वामी विवेकानंद जय फ्रॉम मेडिटेशन बट एनिमल्स डेरिव देयर जय फ्रॉम फूड सो फ्रॉम वेयर वे डू डेरिव अवर जय आईएफ वे आर मोर स्पिरिचुअल इंक्लिन दें आई बिल फाइंड डी रीडिंग बुक्स ऑफ ठाकुरमार स्वामी जी और रामायण भागवत डेन स्पेंडिंग मी इवनिंग्स और डेज होलीडेज इट्स एत्र विथ फ्रेंड्स ट्रैवलिंग अराउंड आई फाइंड डेट कमिंग तू आश्रम टॉकिंग तू डी मांस इट्स मोर तू मी लिंकिंग दिस शोस डेट यू आर स्लोली और स्टडी ग्रैजुएटिंग टुवर्ड्स दिस स्पिरिचुअल लाइफ रिसेंट वे हैव डिस्कशन विद सम ऑफ मी फ्रेंड्स दत व्हाट इसे डी मेजरमेंट ऑफ अवर स्पिरिचुअल प्रोग्रेस केन वे से डेट कैन वे एक्चुअली मेजर समवन सेज डेट डी वे आई रेगुलरली एन अंडरगो फिजिकल चेकअप और फाइंड आउट डी आई हैव दिस इस डी लाइव शुगर लेवल दिस इस मी ब्लू प्रेशर लेवल दिस इस मी कोलेस्ट्रॉल लेवल सो इस देवर विथ आई कैन मेजर डेट हो मैच स्पिरिचुअल दिस इस डी लेवल ऑफ मी शत्रुध दिस इस डी लेवल ऑफ मी रजिस्टर दिस इस डी लेवल ऑफ मी तमस इस पॉसिबल दिस इस एंटायरली पॉसिबल आईएफ वे नो हो तू लुक और वेयर तू लुक वेयर तू लुक इनसाइड ओवर मन फ्रॉम वेयर तू बी डेरिव ओवर प्लेजर डेट इस ओवर मेजरमेंट ऑफ स्पिरिचुअल सक्सेस यदि
स्वामी विवेकानन्द
कुछ समय पहले किसी के साथ हम हमारा डिस्कशन चल रहा था एक व्हाट्सएप ग्रुप में की किसी ने प्रश्न किया की इस तरह से हम लोग हमारा ब्लू प्रेशर है शुगर है या तो कोलेस्ट्रॉल है वो सब मेजर करते हैं की वो रेगुलर चेकअप जैसे होता है तो हमको पता चला है की मेरा फिजिकल हेल्थ किस तरह का है और यदि कोलेस्ट्रॉल लिया तो ब्लू प्रेशर बाढ़ जाता है तो मुझे नमक है या तो तेल है या तो फिर शुगर है वो मुझे कम कर देना पड़ेगा इस तरह से रेगुलर चेकअप करने से मैं अपना जो डायट है अपना एक्सरसाइज है अपना लाइफ स्टाइल है उसको मैं रेगुलेट कर सकता हूं सो क्या ऐसा पॉसिबल है की स्पिरिचुअल लाइफ में ऐसा कोई मेजरमेंट हो की जिसकी यदि मुझे पता चले रेगुलर चेकअप करके की मेरा सत्व कम हो रहा है की राजस बाढ़ रहा है ना की तमस कम हो रहा है की बाढ़ रहा है यदि मुझे पता चले तो उसके अनुसार जो है मैं अपनी साधना मेरी लाइफ स्टाइल मेरी चिंतन प्रणाली में क्या पढ़ना हूं क्या सोचता हूं किसके साथ बात करता हूं यह सब मैं रेगुलेट कर पौन क्या इस तरह से है तो ऑफ कोर्स है तो हमारा एकमात्र वह जो मतलब वैसे तो बहुत सारे मेजरमेंट है किंतु एक बहुत ही इंपॉर्टेंट मेजरमेंट है की मुझे किस चीज में से आनंद मिल रहा है यदि मैं सोचता हूं की मुझे मेरा मां जो है मैं भले ही यहां पे ऑफिस में बैठकें कम कर रहा हूं मेरा मां पड़ा है किचन में आज भंडारा होने वाला है या तो फिर आज मैं जो है अपने फ्रेंड्स के साथ में पार्टी में जान वाला हूं वहां पे बहुत अच्छी चीज खाएंगे यदि यही बात मेरे मां में चलती है तो खाना जो है वो मुझे आनंद देता है इससे भी आगे है चाय बनाना किंतु चाय में क्या है इतना आनंद नहीं है चाहे इससे भी और भी बहुत बढ़िया बढ़िया चीज है जो की अभी यहां पे अवेलेबल नहीं है और इससे भी आगे है मतलब और यदि सूक्ष्म आनंद होता है तो ऐसा होता है की चलो दो-तीन मित्र बैठ करके गैप लगाते हैं इससे भी आगे का आनंद है यदि और यदि सूक्ष्म आनंद या तो फिर कहे की और ज्यादा स्पिरिचुअल आनंद यदि होगा हमारा तो आश्रम में या तो तीर्थ यात्रा पर जाना या तो फिर किसी साधु संत का संघ करना या तो फिर जो है अच्छी किताबें पढ़ना या तो फिर इस तरह के प्रवचन सुना धार्मिक प्रवचन आजकल तो युटुब पे कितने अच्छे-अच्छे वो स्पीशीज और लेक्चरर्स अवेलेबल है सर्वप्रियानंद जी के हैं बलभद्रानंद जी के है बोस्टन के जो हमारे त्यागनंद जी महाराज हैं वो भी बहुत अच्छा बोलते हैं हालांकि बहुत कम लोगों को पता है उनके बड़े में शायद इंडिया में किंतु वह भी बहुत अच्छा बोलते ही इस एन वेरी स्कॉलरली मॉम और वेदांत का बहुत अच्छे से उन्होंने स्टडी किया है और स्क्रिप्चर्स के ऊपर में उनकी सीरीज है वो बोस्टन वेदांत सोसाइटी उसकी युटुब चैनल पे है वो स्क्रिप्चर्स के सीरीज है सही में सुनने लायक है क्योंकि ही इसे एन वेरी स्कॉलरली मॉम तो क्या है शास्त्र में से प्रमाण दे दे करके वो बात करते हैं तो इस तरह से बहुत ही सुंदर में आश्चर्य की बात कहूं की 2015 में मेरा सन्यास हुआ उसके बाद में मेरे और हम दो सन्यास साधु ने ठीक किया की हम लोग वहां पर कनखल में जाएंगे हरिद्वार में हरिद्वार में एक साधना सदन करके एक आश्रम है अभी ये लोग क्या करते हैं की आपको हमने डिस्कस किया था की जैसे की ये जो प्रस्थान ट्रे है या जो है वो हमारी भारतीय संस्कृति का भाई हिंदू धर्म का सबसे प्रमाणिक ग्रंथ है प्रस्थानता है कौन-कौन से हैं तो जो 10 उपनिषद है फिर ब्रह्मास्त्र है और भागवत गीता है ये तीन जो ग्रंथ है उपनिषद ब्रह्मास्त्र और गीता इसको हमारे हिंदू धर्म का फाउंडेशन माना जाता है हिंदू धर्म के भित्ति या तो नव मनी जाति है तो हमने वहां पर साधना सदन में क्या होता है की आ साल में एक बार मार्च महीने में मार्च फरवरी मार्च में 40 दिन का ज्ञान 17 राहत है इस ज्ञान 17 में वो सबसे अच्छे से अच्छे संस्कृत और शास्त्र के जो दोनों एक्सपर्ट सन्यासी जो है वैसे गृहस्ट नहीं सन्यासी टीचर वाराणसी में हरिद्वार में ये सब जगह पे बहुत अच्छे-अच्छे सन्यासी टीचर आपको मिल जाएंगे सन्यासी गुरु मिल जाएंगे जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन जो है इस तरह से शास्त्र का अध्ययन और शास्त्र के अनुसार जीवन ढलना की कोशिश में उन्होंने लगाया है ये साधना करता है तो ये ज्ञान 17 साधना सदन में जो 40 दिन का होता है दिन में पांच क्लास पांच प्रत्येक क्लास जो है एक-एक घंटे का अर्थात की 5 घंटा जो है वो क्लास होगा सुबह को 3 घंटा फिर दोपहर को 12:00 से 2 जो है विश्राम और दो से कर जो है फिर से क्लास तो इस तरह से पांच क्लास डेली होते हैं ज्ञान 17 में 40 दिन और यह जो पूरा ब्रह्म सूत्र गीता और उपनिषद संपूर्ण रूप से वह प्रत्येक श्लोक आपको समझाएंगे सुनने से अच्छे होता है किंतु यह सही सही में वे लोग ऐसा करते हैं हालांकि आपको यदि शास्त्र का बैकग्राउंड नॉलेज है जैसे हम लोगों ने ट्रेनिंग सेंटर में पढ़ा है शास्त्र पड़े हैं और वैसे भी हमारे अपनी खुद की मेहनत से जो शास्त्र पढ़े तो इससे क्या होता है की हम लोगों का शास्त्र का एक बैकग्राउंड नॉलेज हो जाता है तो अभी कभी-कभी रिवाइज करना है की चलो आपके प्रस्थानक रायन को संपूर्ण रूप से रिवाइज करें तो उसे समय यदि हम इस तरह से ज्ञान 17 में जाएंगे तो 40 दिन में संपूर्ण रूप से आपके प्रस्तावना तारे रिवाइज हो जाएगा पूरा और वो जो सन्यासी जो एक्सप्लेन भी करेंगे प्रत्यक्ष लोक को लेकर के अभी श्लोक प्रत्येक इतने सारे श्लोक कर करने गीता के ही 700 श्लोक हैं तो इतना सब कुछ कर करना है 40 दिन में तो श्लोक की जो एक्सप्लेन होती है वो तो बहुत कम कम रखती पड़ेगी ज्यादा एक्सप्लेन रखेंगे तो फिर तो 40 दिन में सिलेबस कंप्लीट नहीं होगा किंतु अंडरस्टैंडिंग है सब्जेक्ट मटर की वो इतनी दीप है की वह जैसे एक क्लियर उसके ऊपर में दो ही मिनट या तीन ही मिनट आपको उसका अर्थ समझाया किंतु दो-तीन मिनट में आपको इतना वो आपका अंडरस्टैंडिंग एक्सपेंड हो जाएगा इतना दीप हो जाएगा जैसे लगेगा की आपने जैसे और कोई टीचर होता तो आपको दो-तीन घंटे उसको समझने में जाते हैं तो ऐसे सन्यासी टीचर है जो वहां पे वो ये ज्ञान सत्तार कंडक्ट करता है तो देखिए इस तरह से जो हम लोग जो ज्ञान 17 में गए थे तीन तीन साधु लोग मिलकर के गए थे तो मैंने तो सोचा की वहां पे इस तरह का जो इतना हार्ड कर शास्त्र पढ़ते हैं और सब क्लास संस्कृत में हिंदी नहीं इंग्लिश नहीं कुछ नहीं सब संस्कृत में ही श्लोक बोलेंगे संस्कृत में ही उसके एक्सप्लेन होगी फिर दूसरा श्लोक तो फिर उसकी एक्सप्लेन तीसरा श्लोक उसकी एक्सप्लेनेशन एक-एक घंटे के तीन क्लास कंटीन्यूअस अटेंड करना सुबह को 8 9 10 बजे तक और फिर थोड़ा रेस्ट और फिर वो थोड़ा बहुत सन्यासियों के साथ में डिस्कशन वगैरा तो यह अटेंड कर पाएगा जो की हमारे जैसे वो बहुत अच्छी रेसर रामकृष्ण मिशन है बहुत ही अच्छा वो मॉनेस्टिक ऑर्गेनाइजेशन है तो वैसे बहुत ही अच्छे ऑर्गेनाइजेशन से जो साधु लोग आए होंगे वही तो ये सब क्लास का अटेंड कर रहे होंगे ना ऐसा ही मैं सोच के गया था वो मैंने जाके क्या देखा साधु जो थे वो 10-15 थे उससे ज्यादा नहीं थे किंतु 50 से 60 ग्रह स्थल लोग बैठे थे उसमें से बहुत सारे तो गुजराती थे अभी इन लोगों को देखिए वो 50 60 उनकी उम्र हो चुकी है बैठने में तकलीफ हो शक्ति है वह अर्थराइटिस वगैरा तो होता ही है किंतु फिर भी चुप क्लास विदाउट ब्रेक उन्होंने अटेंड किया और 40 दिन 5 घंटा 6 घंटा 7 घंटा फिर बाद में आरती होगी फिर वो महाराज के साथ में वह जो सन्यासी टीचर थे उनके साथ में थोड़ा बहुत डिस्कशन तो ये 6 से 7 घंटा बैठे रहना 40 दिन तक ये बृहस्थ लोक करते थे तो यह देख करके पता चला है देखिए की ये लोग देख ही रहे हैं की पैसे वाले लोग हैं दिखते ही हैं की वो सु संस्कृत फैमिली से आए हैं दिखता ही है की वो लोग हाली कल्चरड आपके साथ में बात करेंगे ना आप भी इंप्रेस हो जाएंगे भाई इतना अच्छा इनका संस्कार है शास्त्र के बड़े में एक गृहस्ट हो करके इतना सब जानते हैं और प्रस्थान एक ऐसा ग्रंथ है की जो की बहुत ही डिफिकल्ट है समझना के लिए अभी भागवत है या तो वाल्मीकि रामायण है जो की जनरली चला है तो यह भागवत के बड़े में बहुत अच्छा हमारा अंडरस्टैंडिंग राहत है कृष्णा लीला जो है वृंदावन लीला जो है कृष्णा के उपदेश जो है हमको बहुत अच्छे से पता है वाल्मीकि रामायण का भी बहुत पार्ट होता है इसको भी हम लोग समझते हैं रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर जो की हमारे देवोटी है उनको रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर भी बहुत अच्छे से समझ में आता है किंतु प्रस्थान प्रयोग को समझना बहुत ही डिफिकल्ट है और यह भी संस्कृत में क्लास होते थे तो यह बृहस्थ लोग यह संस्कृत क्लास इतने 40 दिन तक एक साथ में वो बैठ करके अटेंड किया और उनके साथ में बात करके पता चलेगा की उनका अंडरस्टैंडिंग कितना अच्छा है सिर्फ ऐसा नहीं है की वो दिखाने के लिए बैठे हैं वो सही सही वो लोग समझ रहे हैं तो देखिए ये है मेजरमेंट की आपके पास में पैसा है आपके पास में अपॉर्चुनिटी है आप भोग कर सकते हैं किंतु फिर भी आपका जो प्लेजर है आपका वो जो आनंद है वो ये सब आध्यात्मिक चीजों से आता है जब इस तरह से आपका यह जो डायल जो है वो गाड़ी चलते हैं तो जीरो से लेकर के कैसे वो आपका स्पीडोमीटर में वो डायल दिखता है और जैसे जैसे गाड़ी स्पीड पकड़ी जाएगी वैसे-वैसे वो जीरो से 10 20-20 40 किलोमीटर पर ओवर और 50 किलोमीटर पर ओवर इस तरह से वो डायल बढ़ता जाएगा तो वैसे ही हमारा आध्यात्मिक जीवन है जैसे जैसे उसका वो स्पीड पकड़ता जाएगा वैसे-वैसे ये जो डायल है उन रोग की लेवल पर है हमारा यह जो खाने में हमारा आनंद है या तो शारीरिक क्रियो में आनंद है या तो फिर इंद्रिय जनत भोग है उसमें हमारा आनंद है और वो जो 100 या 120 कितना होता है आजकल तो हाईएस्ट स्पीड कितना होता है गाड़ी का 11300 और 40 या 200 इतना कुछ तो वो 200 पे है वो जो हाईएस्ट है वो जो आपकी स्पीड होती है गाड़ी की वहां पे होता है आपका प्लेजर डेरिवेद फ्रॉम स्पिरिचुअल एक्टिविटीज जब ध्यान करके जो आनंद मिलता है इस तरह से 40 दिन ज्ञान 17 अटेंड किया डेली पांच घंटा क्लास संस्कृत में वो भी और वो भी इतना डिफिकल्ट सब्जेक्ट आप बिना किसी दिन एक भी दिन छुट्टी लिए बिना एक भी क्लास में छुट्टी लिए बिना मेरा ऐसा था की मुझे गीता नहीं पढ़ना था क्योंकि गीता मुझे समझ में आता है मुझे पढ़ना था खासकर के दो-तीन सब्जेक्ट हैं उसमें एक दिव्या चैतन्य महाराज करके एक फीचर्स है तो वो महाराष्ट्र स्वामी जी का जो अंडरस्टैंडिंग था ब्रह्मपुत्र का इतना जबरदस्त था तो मैंने ठीक करके रखा था की दिव्या चैतन्य महाराज का वह ब्रह्मास्त्र का क्लास लूंगा अटेंड करूंगा और फिर वहां पे वो जो विश्वमातानंद जी थे वो जो साधना सदन के अध्यक्ष महाराज तो उनके क्लास अटेंड करूंगा ऐसे दो-तीन मैंने वो टीचर को ठीक करके रखा था सभी क्लास अटेंड नहीं करूंगा तो क्या होता था की वो साधना सदन के तो पास में ही गंगा है और गंगा के किनारे बहुत ही इतना विराट गंगा का किनारा है वहां पे ऐसा लगेगा आप समुद्र के किनारे बैठे हैं इतना बड़ा वो मतलब रेती का यह है बीच जैसा और बहुत ही उसका चौड़ा है उसकी साइज तो वहां पे बैठ करके आपको लगेगा जैसे की आपका मां जो है अपने से ही वो उद्धव गति वो चला जा रहा है और क्या होता था की वहां यहां पे वो क्लास से क्लास अटेंड करके आया हूं यहां पे वो चाय की दुकान है वहां से चाय का एक ग्लास ले लिया कब और फिर वो गंगा के किनारे जाकर के बैठ गए और चाय पी रहा हूं और थोड़ा बहुत चिंतन माना चल रहा है मां में की हां वो दिव्या चैतन्य महाराज जी ने इसके बड़े में क्यों ऐसा कहा ये मैंने तो इस तरह से इस पर्टिकुलर श्लोक के बड़े में नहीं सोचा था अच्छा ये जड़ी उन्होंने ऐसा कहा तो मुझे थोड़ा सा और रिसर्च करना पड़ेगा वो मैं वो अभी हमारे संस्कृत के एक्सपर्ट सन्यासी रामकृष्ण मिशन में भी है और दो-तीन साधु हैं ऐसे जिनको की मैं ऐसा कोई प्रश्न होने से पूछता हूं तो मैं सोच के रखना था की उनको जाकर के मैं यह प्रश्न करूंगा की क्या यह बात सही है हां हम लोग डबल चेक करना हमारा कम है मतलब हमारा धर्म ही है की यदि कोई कुछ कहता है तो उसको डबल चेक करो ना जल्दी कोई एकदम आश्चर्यजनक बात होती है तो और मुझे तो यह सब बहुत अच्छा लगता है कांट्रडिक्शन खोजना तो मैं ये सब सोचता था तो मुझे इतना आनंद आता था गंगा के किनारे फिर वो पता चला वो घड़ी में वो टाइम सेट करके रखा है चलो अभी वो विश्वात्मा जी का क्लास है चलो ये फिर डिस्पोजेबल हो वहां पे फेक दिया वो वहां पे वो डस्टबिन में वो चाय वाले के पास में फिर वो क्लास में आए विश्वमातानंद जी का क्लास अटेंड किया किंतु जब मैं सतत था तो देखा था की यह बृहस्थ लोग एक बिना खड़े हुए बिना छुट्टी लिए बिना बाथरूम ब्रेक के एक के बाद एक क्लास अटेंड करते ही जाते हैं तो मुझे भी थोड़ा शर्म ए गया मैंने कहा अरे ये ग्रास लोग बैठे हैं यहां पे एक के बाद एक क्लास अटेंड कर रहे हैं और मेरी कैपेसिटी ने इतना क्लास अटेंड करना की मुझे एक क्लास अटेंड करने के बाद में वो लंबा छुट्टी चाहिए वो चाय पीना है और थोड़ा चिंतन मनन करना है मैं ऐसे कंटीन्यूअस क्लास अटेंड नहीं कर सकता हूं भले ही चाहे कितने ही अच्छे हो तुम मुझे भी थोड़ा सा शर्म ए गया मैंने कहा अरे मैं साधु हूं इतने मारा सन्यास और होना अर्थात की 10 साल के बाद में सन्यास होता है यहां पे 9 साल के बाद में तो 9 साल मुझे सन्यासी के रूप में हूं और पहले भी मैं इस तरह से तो चिंतन करता था तो मेरे से अच्छा तो यह ग्रास लोग बैठ लेते हैं भाई तो देखिए की आप साधु है या गृहस्ट है कहां पर रहते हैं वह सब चीज मैंने नहीं करता मैं देखना ये है की आप आपका जो आनंद है वो किस चीज से आता है मैं चाय पीने से आता है ना की वह क्लास अटेंड करने से आता है तो यह जो जी चीज से आपका आनंद आएगा विद्यार्थी इस योर मेजरमेंट ऑफ स्पिरिचुअल सक्सेस इन योर लाइफ डेट इसे योर मेजरमेंट ऑफ स्पिरिचुअल डेवलपमेंट स्पिरिचुअल जर्नी इन योर लाइफ की मैं कितना आगे गया हूं कितना पीछे हूं और कितना जाना है ये सब देख कर के हमको पता चला है यहां यहां पे यहां पे ऐसे कोई देवोते आते हैं सालों से यहां पे ए रहे हैं आपको लगेगा की इतने दोनों से आते हैं और इतना देवोटेड है इतना कम करते हैं इतना अच्छा वो वॉलिंटियर जो भी कम होता है सबसे पहले आके खड़े हो जाते हैं मंदिर में भी वो अटेंड करते हैं किंतु कभी-कभी इन लोगों का अहंकार इतना होता है एक देवोटी ने आकर के मुझे बोल दिया की आपका जन्म हुआ था उससे पहले से मैं यहां पे ए रहा हूं तो मैंने कहा अच्छी बात है भाई तू मेरे जन्म से पहले ए रहे हो तो बेनिफिट तो आप ही को है वो उसमें मुझे क्या है तो ऐसा मतलब आश्रम में भी आकर के ऐसे लोग हैं की अहंकार दिखाई हैं और कोई कोई ऐसी ड्यूटी होते हैं हमको पता भी चला है वह मंदिर में ठाकुर को प्रणाम किया ठाकुर के पास में जब ध्यान करके वो चले गए साधुओं के साथ में बात भी नहीं किया या तो फिर वो कुछ लाइब्रेरी में जाकर के वो अपना वो पढ़ रहा है तो हम लोग बाकी जो एक होता है की बाहर में क्या दिखता है इससे भी ज्यादा वो जो सबसे बड़ा मेजरमेंट है वो ये है की आपका आनंद की चीज से ए रहा है और अकेले में बैठना चिंतन मनन करना ठाकुर के बड़े में सोचना शास्त्र ग्रंथ पाठ करना यात्रा वगैरा करना मंदिर में जाना ये सब जब ध्यान करना ये सब चीजों में यदि हमारा आनंद बढ़ता जाता है तो सोचना है की हमारा स्पिरिचुअल डेवलपमेंट अच्छे से अच्छे से हो रहा है तो अभी ये जो है की स्वामी जी यहां पे क्या कहते हैं जो अन्य का जो आनंद है अन्य का आनंद हमको नहीं लेना है हमको क्या करना है बी थैंकफूल पर जो फूड आईटी इसे ब्राह्मण एनर्जी इस ट्रांसमिटेड इन अवर इंडिविजुअल एनर्जी और हेल्प्स इन जो डी ट्विटर डेट मिंस थिंक को फूड इस ब्राह्मण नोट इसे एन फूड सब्जेक्ट्स समथिंग वे लाइक थिंक ऑफ फूड इस ब्रह्मांड और व्हेन वे टेक आईटी स ब्राह्मण डी सो एनर्जी ऑफ दिस फूड बिल ट्रांसफॉर्म नोट ओनली इन डी विटामिन और मिनरल्स और प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट बट अलसो इन तू गुड थॉट्स और गुड डेट्स आईएफ डी फूड वे टेक टेमसिक आईटी बिल ओनली नरेश और बॉडी बट आईटी बिल स्टार ओवर मन बट डी फूड डेट वे आर टेकिंग इस सात्विक आईटी बिल नोट ओनली नरेश ओवर बॉडी आईटी बिल अलसो नरेश ओवर मन जल्दी सात्विक अन- यदि तामसिक आहार लेते हैं तो शरीर को जो है वो हो सकता है की पोशाक तत्व मिले हमारे शरीर को सफल बनाएं किंतु हो सकता है की हमारे मां में इस तरह के वो विदेश वाले को विचार वो खड़ा करेगा की जिससे हम लोग परेशान हो जाएंगे और किंतु यदि हमारा जो अन्ना है वो सात्विक होता है तो नो आईटी इस हमारा शरीर को ही वो पोषण तत्व देगा इतना ही नहीं मां को भी जो है शुद्ध करेगा जो विचार जो है उसकी भी शुद्ध होगी आज यही तक रखते हैं कल फिर से मिलते हैं हर ही ओम तत्सत श्री राम कृष्णा