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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 10 Mar 2025

प्रार्थना

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन स्वामी जी ने भारत में जो भाषण दिए थे जिसका कंपाइलेशन इंग्लिश में एक किताब है उसमें है लेक्चर फ्रॉम कोलं टू अल्मोड़ा उसमें से मद्रास में उस समय के मद्रास में आज का चेन्नई उसमें उन्होंने यह प्रवचन दिया था जिसमें कि अमेरिका से वापस आने के बाद में स्वामी जी अपने कार्य की भविष्य की रूपरेखा हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं तो इस प्रवचन के कुछ पॉइंट्स हमने ऑलरेडी देख लिए हैं आज जिस पॉइंट के बारे में डिस्कशन करेंगे वह एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट पॉइंट है इस पॉइंट में जाने से पहले अर्थात की लेक्चर का टाइटल है माय प्लान ऑफ कैंपेन अर्थात कि स्वामी जी भारत में क्या करना चाहते हैं भारत का जो उस समय की जो अवगत थी अधोगति थी उसको किस तरह से इस सोए हुए विराट मानव को हमारी भारत माता को फिर से किस तरह से इस विराट मानव को इस जगत में अपना जो प्रमुख स्थान है उसके ऊपर में किस तरह से स्थापित कर सके तो स्वामी जी का जो प्लान था तो प्लान देने से पहले तो एक थियर लोगों के सामने प्रस्तुत करनी होती है जब भी आप कोई भी प्रैक्टिकल सजेस्ट करेंगे कि हां मैं चाहता हूं कि मुझे यह कार्य करना है तो यह कार्य करने के पीछे मेरा कंटेक्सचर्स क्या है इसका बैकग्राउंड क्या है इस की थिरी क्या है इसका क्या हिस्टोरिकल बैक ड्रॉप है वह सब एक बार डिस्कस करने के बाद में आखिर में लोगों के सामने इसका एक सॉल्यूशन रखा जाता है इसका एक प्रैक्टिकल विधान रखा जाता है तो आज का

मनुष्य सभ्यता, इतिहास, लोकतंत्र, और संस्कृति के बारे में स्वामी विवेकानन्द

जो पॉइंट है मैंने आपके साथ में जो वर्ड फाइल शेयर की है उसमें से जो दूसरी थीम का तीसरा पॉइंट उस पॉइंट का नाम है हाउ टू बेटर इंडिया एजुकेट पीपल तो इस पॉइंट के भीतर में स्वामी जी हमको वह दोनों हमारे सामने दोनों एस्पेक्ट अपने कार्य के प्रस्तुत करते हैं ऑन वन हैंड स्वामी जी गिव्स अस द थियोरेटिकल बैक ड्रॉप ऑफ हिज विजन एंड ऑन द अदर हैंड ही गिव्स अस द प्रैक्टिकल एप्लीकेशन कि किस तरह से इस थिरी के साथ में इस तरह का प्रैक्टिकल एप्लीकेशन चलेगा तो पहले तो हम यह थिरी डिस्कस कर लेते हैं कि स्वामी जी ने जो सोल्यूशन प्रपोज किया है वह किस बेसिस पर किया है किस हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग पर किया है यदि आप मनुष्य समाज के साथ में कार्य कर रहे हैं तो सबसे पहले तो मनुष्य समाज को समझने की हमें कैपेसिटी होनी चाहिए यदि मैं मनुष्य को ही नहीं समझूंगा यदि मैं मनुष्य समाज को ही नहीं समझूंगा तो फिर मनुष्य समाज में सिविलाइजेशन में अपना यह जो सोसाइटी है उसको मैं बेटर करने का इसको इंप्रूव करने का इसको एडवांस करने का कोई भी सजेशन कैसे दे सकता हूं तो यहां पर स्वामी जी का जो एक्सीलेंट हिस्टोरिकल सिविलाइजेशनल कल्चरल सोसाइटल अंडरस्टैंडिंग है ह्यूमन साइकोलॉजी है वह एकदम स्पष्ट तरीके से हमारे सामने आता है इफ यू आर अ स्टूडेंट ऑफ हिस्ट्री इफ यू आर ए स्टूडेंट ऑफ ह्यूमन सिविलाइजेशन देन यू विल सी दैट हाउ एक्यूरेट स्वामी जीज इनसाइट इज इन द वर्किंग्स ऑफ ह्यूमन माइंड एंड ह्यूमन नेचर यदि हम इतिहास के विद्यार्थी है यदि हम मनुष्य सभ्यता को समझने का प्रयास करते हैं मनुष्य सभ्यता का अध्ययन करते हैं स्टडी करते हैं तो स्वामी जी की यह मनुष्य ह्यूमन सिविलाइजेशन की अंडरस्टैंडिंग और इनसाइट हमारे सामने एक बिल्कुल नया रास्ता खोल कर के रखेगी मैं खुद स्वामी जी के पास में हिस्ट्री के माध्यम से ही आया हूं मैं जब मेरे पूर्वा श्रम में पहली बार मैंने देखा कि यह गरीब बच्चे जो मैदान में खुले मैदान में जी रहे हैं उनके सर के ऊपर में ना ही झोपड़ी है खाने के लिए ना ही पर्याप्त खाना है पहनने के लिए ना ही पर्याप्त वस्त्र है तो मैंने उनके लिए कुछ ना कुछ सेवा कार्य चालू किया उनको जाकर के मैं थोड़ा बहुत पढ़ाई लिखाई सिखाता था तो फिर उसके वहां से जो मैंने स्टार्ट करके फिर जो नेक्स्ट क्वेश्चन मेरे माइंड में आया था कि व्हाट इज द रूट कॉज ऑफ पॉवर्टी आप 1015 गरीब बच्चों को थोड़ा बहुत सिखा देंगे किंतु दिस इज नॉट गोइंग टू चेंज द ओवरऑल सिचुएशन ऑफ इंडिया भारत में ऐसे करोड़ों गरीब है मैं अकेला कितने गरीब बच्चों को सिखाता रहूंगा तो इसका कोई क्या बेटर सॉल्यूशन है तो यह सॉल्यूशन मुझे हिस्ट्री की ओर ले गया और हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग आखिर में मुझे स्वामी जी की जो इंसाइट है की इनसाइट कुछ-कुछ वहां तक ले गई तो यह वेरी यह जो पैसेज है यहां पर स्वामी जी की जो अंडरस्टैंडिंग है इट इज वेरी इंपॉर्टेंट इन अंडरस्टैंडिंग स्वामी जी ओन माइंड स्वामी जी के खुद को समझने के लिए स्वामी जी की विचार स को समझने के लिए तो यह इंपॉर्टेंट है ही है किंतु साथ-साथ में ही मेरा जो एक इंटेलेक्चुअल इवोल्यूशन हुआ उसमें भी दिस इज दिस फॉर्म्स की पार्ट

tribal history, beginning of civilization

तो हम शुरू करते हैं सबसे पहले कुछ थियोरेटिकल बैकग्राउंड बिल्ड अप कर देते हैं कि ह्यूमन सिविलाइजेशन इवॉल्व कैसे होती है ह्यूमन सोसाइटी कार्य किस तरह से करती है तो देखिए कि हमारा एक ट्राइबल एसिस्टेंसिया हजारों साल पहले हमारे जो पुरखे थे हमारे जो पूर्वज थे वह हंटर गैदरर्स थे एक जंगल में से दूसरे जंगल एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ एक वन में से दूसरे वन एक मैदान में से दूसरे मैदान में वह विचरण किया करते थे पशुओं का वध करके पशुओं का आहार करते थे और कहीं-कहीं पे पेड़ के ऊपर में निकले हुए यह जो फूल फल वगैरह है यह जड़ी बूटियां वगैरह है उसका सेवन किया करते थे तो वह एक हंटर गैदरर ट्राइबल एसिस्टेंसिया करता था उस ट्राइब का नेता तो उसका कार्य क्या है एक्चुअली लीडर का कि कौन सा ट्राइब कहां से कहां जाएगा आज कहां से अभी शिकार किस तरह से करना है स्ट्रेटेजी बनानी पड़ेगी तो शिकार कर करने के लिए वह तो इतना आसान नहीं है थोड़ा सा प्लान करना पड़ेगा थोड़ा वह यंग जो लड़के हैं अपनी ट्राइब के उनको एजुकेट करना पड़ेगा तो वह जो ट्राइबल लीडर है या तो जो हंट लीडर है वह सबको गाइड करता था थोड़ा बहुत ट्रेनिंग दिया करता था और फिर ट्राइब के भीतर में जो भी डिस्प्यूट होते हैं उसका वह सॉल्यूशन लाया करता था तो एक ट्राइबल लीडर का एक बड़ा ही इंपोर्टेंट रोल था ट्राइब को मैनेज करने में दूसरा ही इंपॉर्टेंट रोल था एक वाइज मैन या तो एक मेडिसिन मैन होता है इसका क्या कार्य है कि जो अपने पुरखों का जो लर्निंग है वह लर्निंग को पहले तो आत्मसात करना सीखना उसको अप्लाई करना और फिर नेक्स्ट जनरेशन में उसको पास ऑन करना तो किस तरह का लर्निंग अभी मान लीजिए शिकार करते-करते किसी शेर ने आकर के उसको काट दिया तो फिर अभी शेर का जो है वो जो उसने यदि काटा है किसी को तो फिर तो वह तो बड़ा ही लहलहा हो जाएगा जख्मी हो जाएगा तो किस तरह से उसको ट्रीट किया जाए यह जो हंटिंग एक्सीडेंट जितने भी होते हैं उसको किस तरह से ट्रीट करें फिर यह जो बच्चा होने वाला है तो फिर वह बच्चा होने में जो प्रेगनेंसी वगैरह में किस तरह से स्त्रियों को सहाय करें उसके बाद में बीमारी आ जाती है तो उसको किस तरह से ट्रीट करें उसके बाद में जो फलो फिलोसॉफिकल क्वेश्चन है कि ट्राइबल एसिस्टेंसिया अथॉरिटी ईश्वर या भगवान या तो गॉड है कि नहीं तो यह जो मेडिसिन मैन होते थे वाइज मैन होते थे उनका यह सब रोल हुआ करता था कि वह तो थोड़ा बहुत मेडिसिन जानेंगे थोड़ा बहुत एस्ट्रोनॉमी जानेंगे थोड़ा बहुत ट्राइबल विजडम उन लोगों में होगा तो यह जो दो-तीन लोग होते थे वे लोग मिलकर के ट्राइब को चलाते थे थे इन लोगों के पास में डिस्प्यूट रेजोल्यूशन की अथॉरिटी होती थी अभी जैसे धीरे-धीरे करके हमारा ट्राइबल

cities and kings

एजिस्ट हैंस हम सेटल डाउन होते गए गांव में सेटल हुए शहरों में सेटल हुए तो वैसे ही धीरे-धीरे करके स्पेशलाइजेशन भी बढ़ा अभी सभी लोगों को शिकार करने की जरूरत नहीं है कोई लोग कपड़े बुने गे कोई लोग हथियार बनाएंगे कोई लोग डॉक्टर का काम करेंगे कोई लोग यह काम करेंगे कोई लोग परिचर्या करेंगे कोई लोग खेती करेंगे तो कोई लोग है शिकार करेंगे तो यह स्पेशलाइजेशन जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे ही राजा का जो वहां पे एक नया पोजीशन खड़ा हुआ जो ट्राइबल लीडर था वह यहां पर राजा था या तो कहेंगे किंग था अभी राजा का जो अथॉरिटी है उसके सामने सब समय लोग कोई ना कोई क्वेश्चन करना ना शुरू करें कि अच्छा यह राजा कौन है वह होता कौन है हमारे डिस्प्यूट में रेजोल्यूशन लाने वाला यदि दो पड़ोसियों में झगड़ा हो गया तो राजा क्यों कहेगा कि यह आदमी सही है यह आदमी गलत है यदि जमीन को लेकर के कोई झगड़ा है तो राजा क्यों कहेगा कि यह इसकी जमीन है यह उसकी जमीन है ऐसा क्यों नहीं होगा कि जिसके पास में ज्यादा शक्ति है वह कमजोर लोगों को मार करके उसकी जमीन हथिया ले ऐसा क्यों नहीं होगा तो एक्चुअली क्या है कि यदि सोसाइटी को लंबे समय तक चलना है तो यह माइट इज राइट यानी कि जिसके पास में ज्यादा शक्ति है दो नेबर है पड़ोसी है उसमें एक पड़ोसी बड़ा शक्तिशाली है एक दुर्बल है या तो फिर एक विधवा है तो शक्तिशाली व्यक्ति विधवा का जो मकान है उसको हड़प ले ऐसा करने से फिर क्या है कि सिविलाइजेशन ही टूट जाएगा यह राज्य जो चल रहा है राज्य टूट जाएगा इसलिए राजा का हमेशा यह कार्य होता है कि कोई ना कोई नियम बनाए और इसी नियम के अनुसार राज्य का संचालन करें तो अभी जैसे जमीन का डिस्प्यूट है कि यह जमीन किसकी है तो बात यह नहीं है कि एक व्यक्ति शक्तिशाली है तो वह कमजोर को मार करके उसकी जमीन हत्या लेगा प्रश्न है कि नियम क्या कहता है किसके पूर्वज की जमीन थी किसके पिताजी ने वहां पर काम किया लो क्या कहता है राज्य का उसके अनुसार राजा ठीक करेगा कि जमीन किस किसके हिस्से में जाएगी तो वह जो है कि धीरे-धीरे करके रूल ऑफ लॉ कहते हैं जिसको नियम के अनुसार राज्य को चलना है वरना तो यह राज्य टिक नहीं पाएगा तो यह सब धीरे-धीरे करके जो सिविलाइजेशन बढ़ती गई उसमें देखिए कि यह जो राजा का जो कार्य है वह इतना ही इंपॉर्टेंट होता गया किंतु देखिए कि जैसे-जैसे सिविलाइजेशन का एडवांसमेंट हुआ खास करके यूरोप में तो हमने देखा कि यह प्रिंटिंग प्रेस है फिर यह कम्युनिकेशन के माध्यम से जैसे कि टेलीग्राम है जैसे कि न्यूज़ पेपर है जैसे कि किताबों का छपना है जैसे कि यह ट्रैवल यह रोड वगैरह बनना शुरू हुआ इससे ट्रैवल इतना आसान होता गया कि यह कम्युनिकेशन नॉलेज इंफॉर्मेशन चारों ओर फैलता गया पहले के जमाने में ऐसा था कि कम्युनिकेशन आसान नहीं था यह यात्रा करने नी आसान नहीं थी एक गांव की इंफॉर्मेशन दूसरे गांव नहीं जाती थी बस राजा ही अपने गुप्तचर को भेज कर के सब इंफॉर्मेशन इकट्ठा किया करते थे वरना मेरे पड़ोसी गांव में क्या हो रहा है मुझे ही नहीं पता होता था मैं पड़ोस वाले गांव में रहता हूं फिर भी क्यों क्योंकि यात्रा कठिन है बीच में जंगल है पशुओं का डर है लुटेरों का डर है फिर वह कम्युनिकेशन आजकल की तरह मोबाइल वगैरह तो थे नहीं कि फटफट करके न्यूज़ वहां से यहां आ जाए तो लोगों के भीतर में अपने आसपास में क्या हो रहा है उसके बारे में अज्ञान था किंतु राजा को यह सब इंफॉर्मेशन होती थी अपने गुप्तचर को भेज कर के अपनी सेना को भेज कर के वो खबर इकट्ठा करता था अभी जिसके पास में नॉलेज है उसके पास में पावर भी है तो राजा के पास में एक समय था कि एब्सलूट पावर था यहां तक कि ये किंग रूल्स बाय डिवाइन राइट ऐसा कहा जाता था कि ईश्वरीय आदेश से राजा राज करता है जितने भी पुराने पुरानी सिविलाइजेशन में देखिए वह भारत में हो कि चाइना में हो ना कि यूरोप में हो हमेशा कहा जाता है कि जो राजा राज सिंहासन के ऊपर में बैठा है उसके पास में कोई ना कोई ईश्वरीय मेंडेट है डिवाइन मेंडेट है ईश्वरीय आदेश है और सबको राजा की आज्ञा का पालन करना ही पड़ेगा अदर वाइज यह सोसाइटी चलेगा ही नहीं यदि आप राजा की आज्ञा का उल्लंघन करना शुरू करें तो समाज में इतनी भयानक अराजकता फैल जाएगी इतना बड़ा क्योस फैल जाएगा इतना बड़ा डिस्टरबेंस फैल जाएगा कि शत्रु आकर के इजली हमला करके हमको जीत लेंगे तो यह धर्म यह डिवाइन मेंडेट राजा का पावर यह एक अथॉरिटी मिलाकर के एक ऐसा खड़ा हुआ अथॉरिटी कि जो कि राज्य में शांति स्थापित कर सकता है आप थोड़ी क्षण के लिए भी आप इसका आप घर में देखिए घर में यदि मान लीजिए कि मां और पिताजी के तीन-चार लड़के हैं बच्चे हैं उनके संतान है तो थोड़ी जभी यदि मां पिताजी थोड़ा समय यदि बाहर में जाएंगे घर में चार-पांच लड़कों को अकेला छोड़ देंगे थोड़ी ही देर में इनमें झगड़ा होना कुछ ना कुछ विवाद होना शुरू हो जाएगा एक बच्चा बोल बोलेगा यह मेरा खिलौना है तो दूसरा बच्चा बोलेगा नहीं यह मेरा खिलौना है और बच्चों में देखिए ऐसा है कि चार बच्चे हैं चार बच्चों को आपने चार खिलौने दिए तो वो नहीं उस बच्चों का नेचर ही ऐसा होता है कि मेरे भाई के पास में मेरे मित्र के पास में कौन सा खिलौना है मुझे वही वाला चाहिए मुझे अपना वाला नहीं चाहिए तो थोड़ी ही देर में चारों भाई बहन में झगड़ा होना शुरू हो जाएगा और फिर क्या होगा जो सबसे बड़ा है वह दूसरों को मार करके उनका खिलौना छीन लेगा तो इसीलिए मां पिताजी का प्रेजेंस चाहिए सब समय कि बच्चों को डिसिप्लिन करें अपने लड़कों को अपनी लड़कियों को स्कूल में जाइए स्कूल में देखिए टीचर थोड़ी देर के लिए क्लास में से चले जाते हैं तो कितना हल्लागुल्ला चालू हो जाता है कोई मारामारी करेगा कोई इधर से उधर दौड़ा दौड़ी करेगा कोई झगड़ा करेगा कोई बातें करेगा ये हल्लागुल्ला चालू हो जाएगा और जैसे ही टीचर आते हैं सब शांत हो जाएगा यानी कि यदि आपको कहीं पर भी डिसिप्लिन मेंटेन करना है कहीं पर भी आपको थोड़ा बहुत डेवलपमेंट करना है तो एक अथॉरिटी फिगर चाहिए ही चाहिए यदि यह अथॉरिटी नहीं है चाहे वह मां पिताजी की अथॉरिटी हो भाई-बहनों के बीच में यदि वह टीचर की अथॉरिटी हो एक क्लास में यदि आप अपने गांव में शहर में रहते हैं तो यह पुलिस वाले हैं या तो फिर यह पॉलिटिशियन है उन सब की अथॉरिटी हो कोई भी अथॉरिटी हो वह चाहिए ही चाहिए वरना तो थोड़ी ही समय के बाद में वहां पर ऐसा एक अराजकता एक ऐसा केस फैलना शुरू हो जाएगा कि वह गांव वह सोसाइटी वह समाज पूरा गड्ढे में जाकर के गिरेगा तो यह अथॉरिटी का कार्य है कि नियमों का पालन करवाना यदि अभी जैसे देखिए कि रुपए पैसे की लेनदेन है आज आपने कोई कांट्रैक्ट किया कि मैं आपको 5050 देता हूं 1 किलो मुझे टमाटर दीजिए इसके सामने 1 किलो की 5 किलो 50 में जितने आते हो अभी वह सामने वाला दुकान वाला उसने आपके 50 ले लिए और फिर कहा कि मैं आपको 1 किलो नहीं दूंगा जो कि 50 में आते हैं मैं आपको आधा किलो दूंगा तो हम तो नाराज हो जाएंगे कहेंगे कि अरे तुमने कहा कि 50 में 1 किलो मिलेगा अभी तुम आधा किलो दे रहे हो तो फिर अभी व यदि नहीं मानता है दुकान वाला तो आप क्या कर लेंगे ज्यादा से ज्यादा क्या उसके साथ में झगड़ा करने को जाएंगे मारामारी करने को जाएंगे ना कि किसी पुलिस वाले को जाकर के कंप्लेन करेंगे कि यह मेरे साथ में अन्याय हो रहा है देखिए कि यदि अथॉरिटी है किसी भी सोसाइटी में किसी भी शहर में तो वह अथॉरिटी के भय की वजह से सभी लोग अपना कार्य करेंगे तो यदि वह वह कहते हैं ना मृत्यु के भय से यह सूर्य चंद्र अपना गति चालू रखते हैं अ यमा धावतो चंद्र ऐसा कुछ है एनीवेज तो तो हमेशा एक अथॉरिटी का भय अथॉरिटी का डर होता है तो दुष्ट लोग हैं जो कि संयम में रहते हैं जो कि समाज है वह ठीक-ठाक चलता रहता है जो लोग कमजोर है जो लोग निर्बल है वे लोग आसानी से जी सकते हैं बिना किसी खतरे के जी सकते हैं तो यह अथॉरिटी हो गया अभी स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि भारत के साथ में सबसे बड़ी दुर्ग घटना क्या हुई है यूरोप में क्या हुआ पहले तो यह देख लेते हैं यूरोप में भी राजा थे किंतु जैसे-जैसे यह इंफॉर्मेशन मॉडर्न साइंस का फैला हु होता गया लोगों के भीतर में जागृति आती गई लोग कहते हैं कि अच्छा राजा तो अपना कार्य कर रहा है वैसे कि नियम कानून की रक्षा करने का किंतु साथ-साथ में वह लोगों का शोषण भी कर रहा है लोगों का शोषण करके अपनी अपनी जाह जलाली अपनी लग्जरी बढ़ा रहा है जो कि यूरोप में खास करके होना शुरू हो गया था राजा जब तक ठीक-ठीक कार्य करता है तब तक तो ठीक है किंतु राजा यदि उसका मति बिगड़ता है उसका बुद्धि बिगड़ता है तो वह पूरे राज्य को खत्म कर देगा यानी यह दूसरा एक खतरा है जब तक अभी देखिए दो खतरे हैं मनुष्य समाज के सामने यदि राजा या तो कोई अथॉरिटी फिगर नहीं होती है तो वहां के जितने भी सिटीजन है आपस में झगड़ा करके मर जाएंगे और जद राजा जद अन्याय करता है तो वह राजा के अन्याय से समाज खत्म हो जाएगा तो आदर्श उपाय क्या है समाज को टिकने के लिए पहले तो एक अथॉरिटी हो राजा हो किंग हो और दूसरा कि वह ऑनेस्ट हो अपना कार्य वह ठीक-ठाक करता रहे यदि राजा अपना कार्य ठीक नहीं करता है ऐशो आराम में डूब जाता है भोग विलास में डूब जाता है राज्य की खबर नहीं लेता है राज्य में क्या अन्याय हो रहा है इसके प्रति उसका कोई नजर नहीं है या तो फिर वह खुद बाहर जाकर के अन्याय करना शुरू करता है वह जद जिसका धन उसको अच्छा लगा उसका धन छीन लिया जिसकी जमीन अच्छी लगी उसकी जमीन छीन ली जिसकी स्त्री अच्छी लगी उस स्त्री को छीन लिया यदि राजा यह सब करना शुरू करेगा तो समाज फिर भी डूब जाएगा यानी कि दो भयानक खतरे हैं किसी भी मनुष्य समाज के सामने राजा का नहीं होना और राजा का अहित करर राजा होना या तो फिर वह करप्ट राजा होना यह दो खतरे हैं और समाज का भला किसमें है कि एक ऑनेस्ट राजा हो जो कि सब तरह के नियमों का पालन करके प्रजा का पालन पोषण करें वहां पर रूल ऑफ लॉ वह बनाए रखे इसी लिए भारत में यह राम राज्य की कल्पना है भगवान राम किस तरह के राजा थे कि अपने शहर में अपने राज्य में जितने भी गरीब लोग हैं उन सबका उन सबको न्याय उन सबको एक तरह से भोजन आहार समय पर मिलता था जो लोग कमजोर हैं यदि दुष्ट लोग उनका शोषण करना चाहते हैं तो कमजोर लोगों को न्याय मिलेगा यदि बाहर से कोई आकर के आक्रमण करेगा तो राजा उनकी रक्षा करेगा यह जो सब राज्य चलाने के बेसिक नियम थे या तो जो कि फंडामेंटल नियम है वह सबका पालन जहां पर होता है तो उसको हम आजकल राम राज्य कहते हैं पहले भी कहते थे तो अभी

modern democratic movements

देखिए कि यूरोप में क्या होना शुरू हुआ यूरोप में जैसे-जैसे प्रजा में जागृति आती गई उन्होंने देखना शुरू किया कि कोई कोई राजा इतने भयानक करप्ट है कि यदि हम राजा को हटा करके सत्ता अपने खुद के हाथ में नहीं हथिया लेंगे तो हमारा देश संपूर्ण रूप से विनाश हो जाएगा तो उस समय कुछ-कुछ थियोरेटिशियन है उन लोगों ने इस तरह से लिखना शुरू किया कि हमने तो अभी तक राजाशाही को ही देखा है किंतु क्या डेमोक्रेसी भी हो सकती है क्या कि डेमोक्रेसी में क्या हो कि प्रजा के पास में शक्ति हो प्रजा अपने रिप्रेजेंटेटिव इलेक्ट करें और यह इलेक्टेड रिप्रेजेंट टिव है वह प्रजा की सहमति से प्रजा का मत लेकर के राज्य शासन चलाए गवर्नेंस चलाए क्या ऐसा हो सकता है तो उसके पीछे का जो फिलोसॉफिकल फाउंडेशन है वह डालना शुरू हुआ और धीरे-धीरे करके राजाओं को हटा करके कहां अभी फ्रांस है ब्रिटन है इन दोनों देश में उन्होंने अपने राजा का कत्ल कर दिया वध कर दिया और किसी तरह का एक रिप्रेजेंटेटिव सिस्ट टम इंप्लीमेंट किया अमेरिका में भी देखिए कि ब्रिटेन का राज्य था तो अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ में युद्ध करके ब्रिटिश को भगा दिया और एक रिप्रेजेंटेटिव सिस्टम को डेमोक्रेसी को इंस्टॉल किया अभी यह जो ट्रांजीशन है कि

citizens have to be educated in democracy

राजाशाही में से डेमोक्रेसी उस दोनों में एक फंडामेंटल डिफरेंस क्या है देखिए कि जहां तक राजाशाही है जहां तक एक डिक्टेटर है जो कि अपनी खुद की ईश्वरीय सत्ता मेरे पास में है राज्य करने की और आप सबको मेरी बात सुननी ही होगी वरना तो फिर मैं आपको दंड दूंगा इस तरह से यदि किसके पास में डिक्टेटोरियल पावर है तो वहां पे क्या है कि यदि राजा के पास में विद्या है तो चल जाएगा क्योंकि राजा को पता होना चाहिए कि राज्य शासन करने का धर्म क्या है राजा को पता होना चाहिए कि रूल्स एंड रेगुलेशंस क्या है राजा को पता होना चाहिए कि अपने पुरखों का जो यह विजडम है पुरखों का जो नॉलेज है उसको किस तरह से इंप्लीमेंट करना यानी यदि राजा सिर्फ एक पढ़ा लिखा हो तो काम चल जाएगा राज्य बड़ा सुंदर रूप से चलेगा किंतु रिप्रेजेंटेटिव डेमोक्रेसी में क्या होता है कि प्रजा को पढ़ाई लिखाई करने की आवश्यकता है क्योंकि यदि प्रजा पढ़ी लिखी नहीं होगी लोग एजुकेटेड नहीं होंगे तो वो किस तरह के निकम में रिप्रेजेंटेटिव को चुनेंगे ये रिप्रेजेंटेटिव जो कि इले लड़ते हैं हमको पता है कि लोगों के भोल पन का फायदा उठा कर के किस तरह से उनके वोट छीन लेते हैं वो लोग किस तरह से लोगों को भ्रमित करते हैं किस तरह से लोगों को भड़का हैं किस तरह से लोगों को मिसगाइड करके उनके वोट ले लेते हैं तो मुझे कोई मिसगाइड करके एक क्रिमिनल व्यक्ति एक धूर्त व्यक्ति एक ठग मेरा वोट ना ले ले इसके लिए मुझे बड़ा ही एजुकेटेड होना आवश्यक है यदि मैं एजुकेटेड नहीं हूं तो मैं किसी रिस्पांसिबल पर्सन को वोट नहीं दूंगा वरना तो जैसे बहुत सारी डेमोक्रेसी की यह कहानी है कि शराब की एक बोतल दे दो और उसका वोट ले लो तो फिर यह शराब की बोतल बांध करके वोट लेना यह चालू ना हो जाए तो फिर एक सही सही एक रिस्पांसिबल व्यक्ति एक विद्वान व्यक्ति एक बुद्धिशाली व्यक्ति एक जस्ट पर्सन वो हमारा रिप्रेजेंटेटिव बनक के पार्लिमेंट में जाए इसके लिए मुझे एजुकेटेड होना आवश्यक है तो देखिए कि किस तरह से यह ट्रांजिशन हुआ है राजाशाही में से डेमोक्रेसी की ओर राजाशाही में यदि राजा ऑनेस्ट है यदि राजा पढ़ा लिखा है यदि राजा के पास में सब नॉलेज है हिस्ट्री का जियोग्राफी का लॉ का नियम कानून का तो वह काम चल जाएगा किंतु मॉडर्न डेमोक्रेसी में रिप्रेजेंटेटिव डेमोक्रेसी में प्रजा को एजुकेटेड होना चाहिए यदि प्रजा एजुकेटेड नहीं है तो वही ठग लोग प्रजा का वोट ले लेंगे तो यह ट्रांजीशन है एजुकेशन फॉर द किंग टू द एजुकेशन फॉर द पीपल राजा के पास में शिक्षण हो वहां से लेकर के प्रजा के पास में शिक्षण हो यह ट्रांजीशन आज के आधुनिक युग में हुआ है उस समय सिर्फ राजा अकेला पढ़ा लिखा होगा पूरी प्रजा अनपढ़ होगी तो भी काम चल जाएगा क्योंकि डिसीजन मेकिंग राजा को करना है प्रजा का कोई इनपुट नहीं है प्रजा का कोई उसमें सलाह मशवरा नहीं है प्रजा का उसमें कोई रोल नहीं है आज किंतु प्रजा अभी हमारे रिप्रेजेंटेटिव उनको कोई भी लॉ बनाना है तो उनको इसके लिए कंसेंसस खड़ा करना पड़ेगा लोगों का मत खड़ा करना पड़ेगा आजकल देखिए कि इलेक्शन लड़े जाते हैं किसी चुनावी मुद्दे को लेकर के किसी एजेंडा को लेकर के कि हम यदि इलेक्ट होकर के आएंगे तो इकोनॉमी में इस इस तरह से हम सुधार करेंगे यदि हम इलेक्ट होकर के आएंगे तो इस तरह के लॉस पास करेंगे यदि हम इलेक्ट होक के आएंगे तो इसके साथ में युद्ध करेंगे व्हाट एवर व्हाट एवर प्रॉमिस आप करें आजकल के प्रॉमिस और आजकल के जो चल रहा है इलेक्टोरल डेमोक्रेसी वह तो आप सबको पता ही है बहुत ज्यादा डिटेल में जाने की जरूरत नहीं है प्रश्न बहुत सारे लोग यह करते हैं कि यह जो इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव है वो झूठ मुठ का प्रॉमिस करके इलेक्ट हो कर के आ जाते हैं यानी कि डेमोक्रेसी खतरे में है नहीं डेमोक्रेसी इसके लिए खतरे में कभी नहीं आती कि कोई झूठा प्रॉमिस करके इलेक्ट हो कर के आ जाता है डेमोक्रेसी तो तब खतरे में आएगी कि जब लोगों की बिना मर्जी के उनका वोट छीन लिया जाएगा यदि मैं जानबूझ कर के आंख खोल कर के किसी ठग को किसी मिथ्या वादी को कोई झूठ बोलने वाले को वोट देता हूं तो वो तो मेरा चॉइस है डेमोक्रेसी मुझे यह राइट देती है कि मैं किसी ठक को भी चुनूं किसी क्रिमिनल को भी चुनू किसी वो झूठे मक्कार आदमी को भी चुनू किसी करप्ट व्यक्ति को भी चुनू या तो फिर किसी बहुत अच्छे व्यक्ति को चुनू ट राइट मुझे मेरे पास में है सिटीजन के रूप में यह डेमोक्रेसी है फिर आप ऐसा डेमोक्रेसी लाने के बाद में यह नहीं कह सकते कि यह जो प्रजा ही अनपढ़ है इसके लिए उन्होंने धूर्त लोगों को चुना है तो तो फिर डेमोक्रेसी कोई अर्थ की नहीं नहीं आजकल बहुत सारे जो ये लोग हैं ना ऐसा कहना शुरू कर दिए हैं कि डेमोक्रेसी काम नहीं कर रही क्योंकि लोग मूर्ख है लोगों को पटा करके यह धूर्त लोग अपना वोट ले लेते हैं इसके लिए बेटर है कि फिलहाल कुछ समय के लिए डेमोक्रेसी को बंद करो फिर से कोई इनलाइटेंड डिक्टेटरशिप लेक आओ यह जो पुराना आईडिया है राम राज्य का कि ऐसा राज्य एक ऐसा राजा लेकर आओ जो कि बड़ा ही ऑनेस्ट हो बड़ा ही स्ट्रांग हो बड़ा ही फेयर हो अपने डीलिंग्स में इसीलिए आजकल यह फिर डिक्टेटरशिप ज्यादा चलती है रशिया में देखिए चाइना में देखिए और भी बहुत सारी जगह पर अभी आजकल डिक्टेटरशिप का बड़ा गुणगान गाया जा रहा है क्यों क्योंकि लोग तो मूर्ख है किसी भी धूर्त को चुन कर के ले आएंगे इसकी वजह कोई फिलोसोफर किंग यह एक कांसेप्ट अमेरिका वेस्टर्न यूरोप में था ये फिलोसोफर किंग कौन है तो वो एक तर इस तरह का राजा जिसके पास में फिलोसोफी भी है और राज्य चलाने की प्रैक्टिकल सेंस भी है बहुत बार ऐसा होता है कि जो फिलोसोफर है उसको समझ में नहीं आता कि एक्चुअल राज्य कैसे चलाया जाए और जो एक्चुअल राज्य चलाने की जो डे टू डे इंप्लीमेंटेशन करने की एग्जीक्यूटिव स्किल जिसमें है उसको यह समझ में नहीं आता कि फिलोसॉफिकल बैकग्राउंड क्या है राज्य शासन के पीछे का हिस्टोरिकल एक बैक ड्रॉप क्या है उसको वह समझ में नहीं आता किंतु एक आदर्श राजा ऐसा हो जो कि हो फिलोसोफर किंग उसके पास में फिलोसोफी की भी शक्ति हो और उसके पास में एग्जीक्यूटिव एबिलिटी भी हो यह फिलोसॉफिकल विद्वता और एग्जीक्यूटिव एबिलिटीज यह दोनों यदि किसी में हो जाता है तो वह सर्वश्रेष्ठ रूरल रूलर वो प्रूव हो साबित होगा तो यह यूरोपियन आइडिया है अपने यहां पर राम राज्य है कि भगवान राम की तरह धार्मिक भी हो और साथ में राज्य शासन करने की क्षमता भी हो और यदि रावण जैसा कोई दुष्ट व्यक्ति के साथ में झगड़ा हो जाए तो उसकी पिटाई करके उसको थोड़ा बहुत अकल देने की भी क्षमता हो तो यह हो गया राम राज्य की कल्पना अपने यहां पे और वहां पे है यह फिलोसोफर किंग की कल्पना तो ये जितने भी थियोरेटिकल आप सॉल्यूशन लाएंगे वह सब लोग कहेंगे कि झूठ मुठ का डेमोक्रेसी आपने लोगों के सामने रख दिया है यह डेमोक्रेसी में जितने भी लोग इलेक्ट होकर के आते हैं उसमें से आधे करप्ट होते हैं आधे मूर्ख होते हैं आधे नासमझ होते हैं कोई काम की नहीं है डेमोक्रेसी जिस राज जिस देश में डेमोक्रेसी है देखेंगे कि कुछ चंद देश ही उसमें से इकोनॉमिकल पॉलिटिकल मिलिटरी प्रोग्रेस कर पाते हैं अदर वाइज ज्यादातर डेमोक्रेसी डिस्फंक्शनल होती है चलो हम फिर से डिक्टेटरशिप की ओर चले जाएं यह आजकल का विचार है यानी कि देखिए कि किस तरह से ये हिस्टोरिकल इवोल्यूशन हुआ है एक तो था राजाशाही जबकि एक ऑनेस्ट राजा राज्य करता था फिर इस राजाओं में जैसे-जैसे करप्शन आना शुरू हुआ इस करप्ट राजाओं ने प्रजा का शोषण करना शुरू किया खास करके यूरोप में एक जो प्रजा ने इकट्ठा होकर के राजा का वत कर दिया और फिर प्रजा ने राज शासन छीन लिया अपने इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव के माध्यम से उन्होंने राज्य करना शुरू किया और यह जो दो सबसे इंपॉर्टेंट जगह पर हुआ है वह है ब्रिटन और फ्रांस फ्रांस में फ्रेंच रेवोल्यूशन और ब्रिटेन में देखिए कि क्रोमवेल का रेवोल्यूशन जिसने कि उस समय के राजा का सर काट दिया था तो और फिर बाद में अमेरिकन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस कि उन्होंने देखा कि यह कॉलोनियल पावर आकर के हम पर राज्य कर रहा है कॉलोनियल पावर को हटाओ रिप्रेजेंटेटिव इले इलेक्टिव डेमोक्रेसी यहां पर इंप्लीमेंट करो तो फ्रांस ब्रिटेन और अमेरिका यह तीन आज के सबसे बड़े उदाहरण है कि प्रजा ने राजा के हाथ में से शासन छीन लिया हो और अपने इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव के माध्यम से शासन कर रहा

Democracy in India, asia and africa

हो किंतु फिर यही डेमोक्रेसी बाकी सब देश में जैसे-जैसे फैलना शुरू हुआ जहां पर कोई भी डेमोक्रेसी का यह नहीं था जैसे देखिए ब्रिटेन फ्रांस और अमेरिका तीनों में क्या है कि पिछले दो 200 300 400 सालों से एक बड़ा ही स्ट्रांग फिलोसॉफिकल मूवमेंट चलता आ रहा है कि गवर्नेंस कैसे की जाए लोगों के प्रजा में क्या-क्या गुण होने चाहिए जिससे कि यह डेमोक्रेसी है या तो रूल बाय पीपल है फॉर द पीपल टू द पीपल बाय द पीपल यह जो जो

that government of the people, by the people, for the people, shall not perish from the earth. - Abraham Lincoln (Gettysburg Address)

अब्राहम लिंकन का है कि वह किस तरह से इंप्लीमेंट किया जाए तो लोगों को तो एजुकेट होना होगा यदि प्रजा एजुकेटेड नहीं है तो किस तरह से वे लोग एजुकेटेड रिस्पांसिबल रिप्रेजेंटेटिव को चुनेंगे तो वह इन वेस्टर्न यूरोप और अमेरिका दोनों में यह ग्राउंड अप फिलोस डेमोक्रेसी आया है कि हां पहले प्रजा धीरे-धीरे करके मॉडर्न मींस ऑफ कम्युनिकेशन है मॉडर्न मींस ऑफ प्रिंटिंग है यह न्यूज़पेपर है वगैरह वगैरह से प्रजा बड़ी ही जागृत हो गई फिर इस जागृत प्रजा ने ग्रास रूट से यह डेमोक्रेसी प्रारंभ की है किंतु देखिए कि 1945 के बाद में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में यह डेमोक्रेसी बहुत सारे देश में ऊपर से डाली गई टॉप डाउन डाली गई जैसे वेस्टर्न यूरोप और अमेरिका में ग्राउंड अप फिलोसोफी स्टार्ट हुई है ग्रास रूट मूवमेंट से यह डेमोक्रेसी स्टार्ट हुई है तो यह एशिया के काफी देशों में अफ्रीका में यह टॉप डाउन फिलो डेमोक्रेसी स्टार्ट हुई है भारत में ही देखिए जवाहरलाल नेहरू है महात्मा गांधी है इवन सरदार पटेल है जो कि कांग्रेस के फर्स्ट अ लेवल के जो नेता थे वह सभी यूरोपियन डेमोक्रेसी से प्रभावित थे तो उन्होंने सोचा कि एक बार ब्रिटिश भारत में से जाते हैं तो भारत में किस तरह से राज्य होना चाहिए जो पहले की तरह एक सम्राट था एक एक राजा था और राजाशाही फिर से वापस लानी है कि यूरोप की तरह डेमोक्रेसी लानी है तो उन्होंने ठीक किया कि यूरोप की तरह डेमोक्रेसी लाई जाए भारत में डेमोक्रेसी लाई गई किंतु जो डेमोक्रेसी का जो फंडामेंटल जो सिद्धांत था कि लोगों को एजुकेटेड होना चाहिए वरना तो अनएजुकेटेड अनपढ़ लोगों को मूर्ख बना कर के ठग लोग इलेक्ट हो जाएंगे इसके सामने आप कुछ नहीं कर सकते पूरा डेमोक्रेसी करप्ट हो जाएगा पूरा गवर्नेंस करप्ट हो जाएगा तो वो हमने भविष्य के लिए रख दिया कि पहले तो ऊपर से डेमोक्रेसी डाल दो बाद में फिर धीरे-धीरे करके यह ग्राउंड लेवल पे एजुकेशन फैले का तो यह भारत में तो चलिए कि हमारी आध्यात्मिक परंपरा ठाकुर स्वामी जी का आगमन और हजारों सालों से पहले भी तो भारत में डेमोक्रेसी देखिए कि यह जो पंचायत प्रथा है वह ग्राम लेवल पे डेमोक्रेसी तो हमेशा से थी तो भारत में तो यह डेमोक्रेसी फिर भी कैच कर गई किंतु ज्यादातर एशिया और अफ्रीका के कंट्रीज में देखिए कि जहां पे ऊपर से डेमोक्रेसी डाली गई है किंतु वो डेमोक्रेसी आइर कंप्लीट करप्ट निकली है या तो फिर आर्मी ने वह शासन अपने हाथ में ले लिया है ना ना ही कोई ना कोई डिक्टेटर ने व शासन अपने हाथ में ले लिया अपने पड़ोसी देशों को ही देखिए देखिए कि आर्मी किस तरह से रूल करती है डेमोक्रेसी नाम की है सुप्रीम कोर्ट नाम की है यह आपकी पार्लियामेंट सिर्फ नाम की है प्राइम मिनिस्टर नाम का बैठा हुआ है असली पावर तो जो आर्मी जनरल होते हैं आर्मी का जो कमांडर होता है उनके हाथ में है तो ज्यादातर जगह पे डेमोक्रेसी फेल हुई भारत में सक्सेसफुल इसीलिए हुई क्योंकि हमारी यह आध्यात्मिक धरोहर है बोलकर के तो यहां पे स्वामी जी यह जो क्रुशल पॉइंट है उसके ऊपर में वह प्रकाश डालते हैं स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि वह राजाशाही का एक समय था जबकि एक फिलोसोफर किंग कि एक राम राज्य चलता था राजा के पास में दोनों चीजें थी एग्जीक्यूटिव पावर भी था और विजडम भी था जिसकी वजह से वह राज्य करता था किंतु वह समय तो बीत गया आज का समय है डेमोक्रेसी का किंतु यदि आपको डेमो डेमोक्रेसी ठीक-ठीक चलानी है तो आपको प्रजा में कंसेंसस खड़ा करना पड़ेगा प्रजा ही यदि बटी हुई है तो वह तो किस तरह से वह राज्य चलेगा प्रजा में तो कंसेंसस यानी कि एक मत होना चाहिए प्रजा सभी लोगों को इकट्ठा होक के बोलना है कि यहां पर इसको सभी के लिए राइट है स्त्रियों के लिए भी राइट है जो गु पद दलित है उनके लिए भी राइट्स है जो लोग कमजोर है उनके लिए भी राइट्स है नाथ जात यह धन संपत्ति वैभव यह आपका कौन सी जाति में बर्थ हुआ है किसका किसके वहां पर जन्म हुआ है वह सब कुछ नहीं चलेगा इक्वल अपॉर्चुनिटी फॉर ऑल ऐसा होना चाहिए इक्वल राइट्स फॉर ऑल एंड ऑफकोर्स इक्वल रिस्पांसिबिलिटी फॉर ऑल तो यह तीन तो होना ही चाहिए इक्वल अपॉर्चुनिटी इक्वल राइट्स एंड इक्वल रिस्पांसिबिलिटीज ये जो कॉमन कोड होना चाहिए कॉमन नियम होने चाहिए जिसकी वजह से पूरा देश चले तो ये कंसेंसस जो है एकमत वह कब खड़ी होगी जब कि प्रजा पढ़ी लिखी होगी जब तक प्रजा पढ़ी लिखी नहीं है एजुकेशन नहीं है तब तक डेमोक्रेसी कार्य नहीं करेगा तो यह आज का जो मॉडर्न प्रॉब्लम है आज का ज्यादातर देशों में देखिए कि कुछ-कुछ पिछले 510 साल में डेमोक्रेसी डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग चल रहा है अर्थात कि जहां-जहां पर डेमोक्रेसी अब तक चल रही थी वहां वहां पे वहां के इलेक्टेड लीडर्स में इतना भयानक करप्शन दिख रहा है कि लोग अपने से ग्राउंड लेवल से बोलना शुरू करते हैं कि अरे आर्मी को दे दीजिए किसी डिक्टेटर को बिठा दीजिए किसी राजा को ले आइए यह करप्ट लोग तो देश को खत्म कर देंगे इस तरह की बातें आजकल बहुत सारी जगह पे चलती है तो यहां पे हम फिर से वही ना चले जाए पुरानी प्रथा में कि आज तो एक अच्छा डिक्टेटर आया किंतु कल कोई पागल आ जाएगा तो सबको खत्म कर देगा बेटर है कि प्रजा को एजुकेट करो जैसे-जैसे प्रजा एजुकेट होगी वैसे-वैसे वे लोग एजुकेटेड रिप्रेजेंटेटिव को इलेक्ट करेंगे अदर वाइज तो फिर वही दोनों ओर से प्रॉब्लम आप यदि अनएजुकेटेड लोग हैं वह यदि किसी राजा को भी बिठा देंगे तो राजा करप्ट निकलेगा और यदि किसी को वोट भी देते हैं मूर्ख आदमी किसी धुत व्यक्ति को धुत व्यक्ति को तो वह धुत व्यक्ति भी करप्ट निकलेगा तो यह प्रॉब्लम यह नहीं है कि आपको राजाशाही में जाना है ना कि डेमोक्रेसी में जाना है प्रॉब्लम है कि प्रजा को एजुकेटेड होना है अपने राइट्स एंड रिस्पांसिबिलिटीज के बारे में जागृत होना है पता होना चाहिए कि कहां पे क्या हो रहा है क्या हिस्ट्री है क्या जियोग्राफी है क्या पॉलिटिकल सिचुएशन है इकोनॉमी कैसे काम करती है आजकल लोगों को हजार हजार रुप दे दो फिर आपको ना ही इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है ना ही आपको कोई एंटरप्रेन्योरशिप चालू करनी है ना ही इनोवेशन एंड डिस्कवरी करनी है बस लोगों को पैसा दो लोगों का ट वोट ले लो यह जो ट्रांजैक्शनल अप्रोच है यह सब सब धीरे-धीरे करके कम हो प्रजा अपने जो इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव है प्राइम मिनिस्टर है चीफ मिनिस्टर है उनको कहे कि आप यहां पे इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्ट करवाइए हमको इस तरह से यह पैसा नहीं चाहिए कि सबको हजार हजार रुप देके हमारा वोट ले लो ऐसा नहीं इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कीजिए मैन्युफैक्चरिंग लेके आइए इनोवेशन एंड डिस्कवरीज लेके आइए साइंस एंड टेक्नोलॉजी का प्रचार कीजिए तब कहीं जाकर के हमारा देश आगे बढ़ेगा यह डिमांड जबी प्रजा के भीतर में होगी सिटीजन के भीतर में होगी तभी तो वह देश आगे बढ़ेगा वरना तो फिर दोनों तरीके से गड्ढे में गिरा यदि डिक्टेटरशिप को लेकर आए फिर से आज के युग में तो डिक्टेटर करप्ट निकलेंगे देखिए अब पड़ोसी देशों की वही हालत है पहले तो डेमोक्रेसी करप्ट निकली उसके बाद में जो आर्मी के हाथ में राज्य आया तो आर्मी भी करप्ट निकली आर्मी यानी कि वह जो कमांडर होते हैं आर्मी के वे लोग तो जो मूर्ख होते हैं जो लोग अनपढ़ होते हैं उनके लूटन उनको लूटने वालों की कोई कमी नहीं है तो स्वामी जी कहते हैं कि व्हाट इज द सॉल्यूशन सॉल्यूशन है कि लोगों को एजुकेट करना जब लोग एजुकेट होंगे तब लोगों के भीतर में एक कंसेंसस प्रकट होगा एकमत प्रकट होगी उनके भीतर में अपनी राइट्स एंड रिस्पांसिबिलिटीज के लिए अवेयरनेस आना शुरू होगी और फिर इसी अवेयरनेस के साथ में वे लोग डिसीजन करेंगे कि मुझे किसको इलेक्ट करना है और फिर बात सिर्फ यह नहीं है किसको इलेक्ट करना है मैं खुद यदि इलेक्शन में खड़ा रहना चाहूं तो फिर मेरे पास में तो वो एक होना चाहिए एक इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी होनी चाहिए कि किस तरह से लोगों के साथ में जाकर के बात करनी है किस तरह से मुझे अपना जो एरिया है यदि इस इस शहर में मैं इलेक्शन लड़ रहा हूं मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का या तो फिर मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव असेंबली का एमएलए या तो एमपी तो मेरा जो मत है मेरे यह जो मतदार है उनके उन लोगों के भीतर में मुझे किस तरह से कंसेंसस खड़ा करना है है उन लोगों के भीतर में मुझे किस तरह से अपनी पॉलिसीज रखनी है कि जद मैं इस शहर में एज ए एमएलए इलेक्ट होकर के आऊंगा तो यहां पर रास्ते में जो गड्ढे गिर गए हैं वगैरह है उसको मैं ठीक कर दूंगा पानी की बिजली की समस्या है उसमें आपको सहाय करूंगा हॉस्पिटल नहीं ठीक से चल र हैं तो वह जाकर के एडमिनिस्ट्रेशन ठीक करूंगा स्कूलों में यदि करप्शन है टीचर बड़े बहुत सारी स्कूल होती है कि बहुत ज्यादा पैसा तो ले लेगी किंतु ठीक-ठीक पढ़ाए गी नहीं तो स्कूलों में में जो प्रॉब्लम है उसको मैं ठीक करूंगा बिजली पानी की समस्या है उसको ठीक करूंगा यह मैं अपनी पॉलिसी उनके सामने रखूं उनके पास में से एक कंसेंसस खड़ा करवाऊं जिससे कि वे लोग मुझे मत दे उसके लिए भी तो मुझे एक इंटेलेक्चुअल चाहिए एबिलिटी तो व ग्राउंड लेवल से किस तरह से लीडर खड़े हो ग्राउंड लेवल प किस तरह से जनता में मतदार में अवेयरनेस आए उसके लिए सबसे फंडामेंटल जो आवश्यकता है ट इज एजुकेशन एजुकेशन एजुकेशन तो यह एक छोटा सा पॉइंट है किंतु विदन दिस स्मॉल पॉइंट स्वामी जी ने पूरे हिस्ट्री को ठीक करके उनका सॉल्यूशन हमारे सामने रख दिया है फिर से यदि इस पॉइंट को हम एक समरा इज करें तो स्वामी जी कहते हैं कि पहले के राजा थे जिनके पास में राज्य था और राजा कभी अच्छा भी होता था राजा कभी बुरा भी होता था तो बुरे राजाओं उसको तंग आ करके हमने डेमोक्रेसी लाए किंतु डेमोक्रेसी में भी देखिए कि वेस्टर्न क यूरोप में और अमेरिका में डेमोक्रेसी सक्सेसफुल है क्योंकि वहां की प्रजा एजुकेटेड है वहां के लोगों को प्रजा को आप इजली मूर्ख नहीं बना सकते तो इसलिए वे लोग इनलाइटें रिप्रेजेंटेटिव को इलेक्ट करते हैं किंतु एशिया में अफ्रीका में जोर जबरदस्ती करके जद आप डेमोक्रेसी डालेंगे स्वामी जी के समय में तो नहीं थी बाद बाद में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में जो कॉलोनियल जो राज्य थे वहां पे फ्रीडम मिला तो फिर सब जगह पे डेमोक्रेसी गई तो किंतु स्वामी जी ने देखिए कि 50 साल 100 साल भविष्य में देख कर के हमको यह सोल्यूशन बताया है कहते हैं कि यदि जोर जबरदस्ती आप डेमोक्रेसी लाएंगे किंतु प्रजा अनपढ़ है तो वह डेमोक्रेसी करप्शन में जाएगी और फिर वहां पर फिर से यह डिक्टेटरशिप लागू हो जाएगी सो व्हाट इज द

Solution is education

सॉल्यूशन सॉल्यूशन इज टू क्रिएट एन ऑर्गेनाइजेशन दिस ऑर्गेनाइजेशन एजुकेट्स पीपल तो ऑर्गेनाइजेशन क्या है तो वह है रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मिशन का मिशन क्या है रिलीफ एक्टिविटी है हॉस्पिटल है सब कुछ है किंतु फंडामेंटल मिशन है टू एजुकेट पीपल एजुकेशन एजुकेशन एजुकेशन जब यह लोगों के भीतर में एजुकेशन जाएगा लोग जागृत होंगे लोग जैसे ही जागृत होंगे अपने राइट्स और रिस्पांसिबिलिटीज के बारे में अवेयर हो जाएंगे और फिर वह सेल्फ गवर्नेंस जिसको कहते हैं सेल्फ गवर्नेंस अच्छे से उस देश में चलेगा सो दिस इज स्वामी जी एंटायस एंड प्रैक्टिकल सोल्यूशन ऑफ इंडियास प्रॉब्लम अभी एक्चुअली स्वामी जी क्या कहते हैं उनकी जो टेक्स्ट है उसको अभी हम कल से पढ़ना शुरू करेंगे आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु

प्रश्न: आज अमेरिका इतना शिक्षित और समृद्ध है फिर भी उनके लोकतंत्र में इतनी समस्याएं क्यों हैं?

यहां पे क्या है एक्चुअली देखिए कि फिर स्वामी जी का जो फिर सेकंड एक था स्टेज कि एजुकेशन सिर्फ तो अकेला तो नहीं है स्पिरिचुअलिटी भी है तो रामकृष्ण मिशन की स्थापना जो हुई है वह तो एक्चुअली डुअल उद्देश्य से हुई है आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च तो इस पॉइंट में स्वामी जी जगत हिताय च की बात करते हैं इस अर्थ में कि हमको एजुकेशन स्प्रेड करना है किंतु साथ-साथ में ही लोगों में ये अवेयरनेस भी तो होनी चाहिए कि आत्मानम मोक्षार्थम इज अल्टीमेट एम ऑफ ह्यूमन लाइफ यदि हम इस मटेरियल वर्ल्ड को ही अल्टीमेट एम समझना शुरू करेंगे कहेंगे कि यह गवर्न गुड गवर्नेंस यदि जीवन का उद्देश्य गुड गवर्नेंस है तो फिर होगा क्या कि हम इतने घोर मटेरियल िक हो जाएंगे कि अभी अमेरिका की परिस्थिति देखिए कि भारत में अपना पर एनम जीडीपी पर पर हेड जीडीपी कितना है कि 000 ल न कि इतना है हम 150

United States GDP per capita is nearly $87,000. India's average is around $2,500

करोड़ लोग ए एन एवरेज एक साल में $3000 में जी लेते हैं और बहुत सारे लोग संतुष्ट भी है अमेरिका की पर एनम पर हेड जीडीपी $80000 है ऑन एवरेज एक सिंगल अमेरिकन $80000 एक साल में कमाता है एवरेज इनकम है यह और फिर भी वे लोग संतुष्ट नहीं है क्यों क्योंकि उनका लाइफ इस हद तक मटेरियल िक है कि $80000 और कि किसी रेयरली किसी छोटे-छोटे देशों की होगी इतनी बड़ी इनकम ज्यादातर देखिए कि 0000 ल ना 0000 यहां तक आकर के जितने इंडस्ट्रियल कंट्रीज है उनकी रुक जाती है पर एनम पर हेड जीडीपी भारत की तो मुश्किल से 3000 ना की इतनी है तो संतोष जो है वह संतोष कब आता है कि जब हम समझते हैं कि जीवन का उद्देश्य सिर्फ गुड गवर्नेंस नहीं है देयर इज समथिंग बियोंड दिस एंड दैट इज आत्मन और ईश्वर तो दैट इज अ सेकंड स्टेज इन स्वामीजी इंप्लीमेंटेशन रामकृष्ण मिशन की जो स्थापना हुई वो दोनों उद्देश्य से हुई है तो एक एजुकेशन स्प्रेड करना है फिर एक आत्मज्ञान का संधान भी करना है जब आत्मज्ञान आएगा तब लोगों में देखिए कि धीरे-धीरे करके जो पागल की तरह पॉलिटिक्स लेकर के घूमे हैं पॉकेट में $80000 डलर पर एनम आ रहा है ऑन एवरेज सभी अमेरिकन के पॉकेट में फिर भी उनको संतोष नहीं है तो वहां से धीरे-धीरे दूर होकर के फिर ईश्वर की ओर बढ़ेंगे सो दैट इज द सेकंड स्टेज सेकंड फेज ऑफ स्वामी जी आइडिया प्ला कैंपेन आप अमेरिका का डिफेंस बजट देखिए नेक्स्ट फाइव कंट्रीज से ज्यादा है

In 2024, the United States' defense budget of approximately $916 billion exceeded the combined defense spending of the next several highest-spending countries, including China at roughly $296 billion, Russia at approximately $109 billion, and India at approximately $83.6 billion

नेक्स्ट फाइव कंट्रीज का रशिया चाइना इंडिया सऊदी अरेबिया जापान इस सबसे कंबाइन टोटल है उससे ज्यादा अमेरिका का डिफेंस पेंडिंग है और फिर कहते हैं हम लोग कमजोर है व्हाट इज दिस यह थोड़ा बहुत इंडिया का मेंटालिटी है ना आजकल पाकिस्तान से डरते हैं कहां पाकिस्तान कहां हम ना सिविलाइजेशन में

प्रश्न: आज अमेरिका देखिए कैसे क्या सब हो रहा है.

क्या है फेजस ते हैं तो एक एक आवश्यकता थी कि हमको एजुकेटेड होने की इसके बाद में एक आवश्यकता थी कि गुड गवर्नेंस प्राप्त करने की और फिर उसके बाद में आवश्यकता होती है स्पिरिचुअल होने की यह भारत में जो वैदिक एज देखेंगे ना तो सभी स्टेज आपको दिखाई देंगे ट्राइबल दिखाई देगा फिर व सिटी स्टेट दिखाई देंगे फिर राज्य किंगडम दिखाई देगा उसके बाद में स्पिरिचुअलिटी दिखाई देगी और फिर वहां से पता नहीं वो स्पिरिचुअल हिमालय में से इस तरह के गड्ढे में गिरे कि फिर से पूरी साइकिल को हमको स्टार्ट करना पड़ा तो खैर जो भी है अभी यह तो जन्म मृत्यु जरा व्याधि यह तो देश काल के अ तो मतलब क्या है कि इस सोसाइटी का नियम है तो इस विश्व का नियम है तो जो भी है किंतु अभी जो आज इन 21 सेंचुरी हम लोग खड़े हैं जहां पे हम लोग उस मटेरियल प्रोस्पेरिटी के पिनेकल प पहुंच गए हैं अभी जद हम अमेरिका है या यूरोप है वे लोग एक स्पिरिचुअल टर्न नहीं लेंगे ना तो व भयानक गड्ढे में गिरेंगे व स्वामी जी ने खुद ने उस समय प्रिडिक्ट किया था कि यूरोप

Europe is on the edge of a volcano. Unless the fires are extinguished by a flood of spirituality, it will blow up. - Swami Vivekananda in 1895

इ सीटेड न यह जो पूरा गोला बारूद का एक बड़ा गड्डा एक है ढग पहाड़ उसके ऊपर में यूरोप बैठा हुआ है और यदि यह लोग केयर नहीं करेंगे तो बड़ा विस्फोट होगा तो हुआ सेकंड वर्ल्ड वॉर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर यह न्यूक्लियर वेपंस ये जो न्यूक्लियर बॉम फेंके गए जापान के ऊपर में तो ये मटेरियल ज्म और गुड गवर्नेंस के पीछे आंख बंद करके दौड़ेंगे तो अल्टीमेटली इट विल एंड इन अ वॉर तो भारत में भी अभी वी हैव टू बी अलर्ट लर्न फ्रॉम देम कि सिर्फ गुड गवर्नेंस सिर्फ मटेरियल प्रोस्पेरिटी दैट इज नॉट इनफ वी नीड एन एडेड डायमेंशन ऑफ स्पिरिचुअलिटी और इसीलिए देखिए कि स्वामी जी ने भारत में जो कर्मयोग का प्रचार ज्यादा किया लोगों की सेवा का और अमेरिका में जाकर के उन्होंने ज्ञान योग है राज योग है भक्ति योग है उसका प्रचार ज्यादा किया क्योंकि वह लोग ऑलरेडी वो प्रोस्पेरिटी के पिनेकल पर बैठे हुए हैं नाउ दे आर रेडी फॉर वेदांत जबकि इंडिया में अभी भी मटेरियल प्रोस्पेरिटी नहीं है उनको जद आप योग वेदांत सिखाने को जाएंगे तो वे लोग नहीं सीखेंगे बेटर है कि पहले उनको थोड़ा बहुत प्रोस्पेरिटी दी जाए बाद में वे लोग योग वेदांत की ओर जाएंगे एक्चुअली देखिए कि आज के युग में

प्रश्न: स्वामीजी कहते हैं कि शूद्र-राज आएगा। इसका क्या अर्थ है?

हम सभी शुद्र हैं क्योंकि ग्राउंड अप हम सभी लोग आए हैं हमारे पास में ना ही कोई हमारा फैमिली कोई रघुवंशी सूर्यवंशी है ना ही हमारे पास में धन दौलत है वाणिज्य की शक्ति है ऐसा तो कुछ है नहीं हम पूरी हम अभी सभी लोग कहेंगे कि शुद्र से ही खड़े हुए हैं तो शुद्र का राज्य दैट इज ग्राउंड लेवल डेमोक्रेसी ग्रासरूट लेवल डेमोक्रेसी ना स्वामी जी ने कहा ना कि

प्रश्न: देशभक्ति बढ़ाने के लिए हमें अपने दुश्मन देशों से नफरत करना सिखाया जाता है। लेकिन क्लाइमेट चेंज आदि जैसे वैश्विक मुद्दों को सभी देशों के बीच समन्वय से ही हल किया जा सकता है। इस लिए देशभक्ति को वैश्विक कल्याण के साथ कैसे जोड़ा जाए?

देखिए कि कंसेंसस कल हम पढ़ेंगे स्वामी जी का एक्चुअल सेंटेंस पढ़ेंगे मैं आपका माइक ऑफ कर दे रहा हूं इको हो रहा है स्वामी जी जैसे कल हमको कहेंगे कि कंसेंसस चाहिए यदि गुड गवर्नेंस माने आपको यदि प्रॉपर डेमोक्रेसी वर्क होनी है तो गुड गवर्नेंस के लिए कौन से चाहिए यदि कंसेंसस नहीं है तो वह माने देखिए कि यदि आपको प्राइम मिनिस्टर के पास में इतने एमपी नहीं होंगे तो फिर वह अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाएगा कोलिशन गवर्नमेंट आएगी कोलिशन गवर्नमेंट किसी काम की नहीं हमने बहुत एक्सपेरिमेंट करके देख लिया किसी एक पार्टी की मेजॉरिटी होती है तो ठीक-ठीक कार्य होता है तो मेजॉरिटी के लिए कंसेंसस चाहिए अब यह कंसेंसस कैसे खड़ा करेंगे ऐसा तो नहीं है कि आप कहेंगे गुड गवर्नेंस इज अ कंसेंसस अनफॉर्चूनेटली आप कहेंगे कि कि गुड गवर्नेंस इसके बेस पे लोग वोट नहीं देते हैं आपको यदि वोट चाहिए कंसेंसस खड़ा करना है एक जन वोट बैंक खड़ी करनी है आज की लैंग्वेज में वोट बैंक यदि वोट बैंक खड़ी करनी है तो आपको एक दुश्मन दिखाना होगा पाकिस्तान की यूनिटी का राज क्या है वो है भारत यदि भारत चला जाए तो दूसरे ही दिन पाकिस्तान 10 टुकड़ों में बट जाएगा पाकिस्तान का जो पूरा यूनिटी है वोट बैंक है कंसेंसस है इट इज बेस्ड ऑन ट्रेड फॉर इंडिया तो यह जो ट्रेड एक एनिमी खड़ा करना पड़ेगा एनिमी के प्रति धिक्कार खड़ा करना पड़ेगा तब कहीं जाकर के इंटरनल कोहेजिया जाएगा दिस इज एन अनफॉर्चूनेटली डेमोक्रेसी और इसीलिए यह जो सेकंड वर्ल्ड वॉर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर इसके पीछे में जो स्ट्रांग नेशनलिज्म था जापान जर्मनी में था ब्रिटेन में था फ्रांस में था जापान में था इटली में था वो कहां से आया इतना स्ट्रांग नेशनलिज्म खड़ा करो कि तभी नेशन अंदर से प्रोग्रेस करे बिकॉज कि भीतर में आपका यून यटी हो गया है किंतु साथ में ही बाहर में दुश्मन चाहिए बाहर में दुश्मन नहीं है तो हम भीतर में यूनिटी नहीं ला पाएंगे भारत की पॉपुलेशन 150 करोड़ की है अभी 150 करोड़ लोगों को आपको एक डायरेक्शन में ले जाना पड़ेगा तो ऐसा कौन सा इशू है आप यदि मैं कहता हूं कि मैं आपको गुड गवर्नेंस दूंगा तो ऐसे 1 लाख लोग खड़े होकर कहेंगे हम आपको गुड गवर्नेंस देंगे आप कहां से सिलेक्ट करने को जाएंगे किंतु मैं कहूंगा यह आपका दुश्मन है उस दुश्मन की पिटाई करेंगे इसके लिए मुझे वोट दो तो बहुत बहुत सारे लोग खड़े हो जाएंगे सो दिस इज एन अनफॉर्चूनेटली कारण है वह है भारत जैसे ही आपको पता होगा कि जब इंडिपेंडेंस के बाद में दो पाकिस्तान हुए थे ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान तो किंतु बंगालियों का क्या है कि वह भारत के साथ में और भी थोड़ा सा उस समय आज की बात नहीं कर रहा हूं एक जो कल्चरल एफिनिटी था भारत के साथ में खास करके बंगोली लैंग्वेज को लेकर के तो भारत दुश्मन है यह बात उनको ठीक नहीं लग रही थी तो बोलकर के यह बांग्लादेश आज के उस समय के पाकिस्तान से सेपरेट हो गया तो वैसे ही अभी आज यदि भारत के साथ में दुश्मनी नहीं है ऐसा पाकिस्तानियों को पता चले तो 10 डिवीजन और हो जाएंगे ओवर नाइट हो जाएंगे सो दैट इज एन अनफॉर्चूनेटली बात है कि आप दुश्मन बना कर के यूनिटी लाते हैं व्हाई ऐसा करते हैं क्यों ऐसा करते हैं क्योंकि यह प्रजा के भीतर में अभी भी यह जो काम क्रोध मद लोभ मोह वगैरह है उसके लिए तो यानी कि आपको सिर्फ एजुकेशन नहीं देना है लोगों को आपको स्पिरिचुअलिटी भी देनी है जिसकी वजह से मैं एक दुश्मन है मेरे सामने दुश्मन के सामने यूनाइट होना है तभी मैं टिक पाऊंगा बोलक के मैं वोटिंग ना करूं जो कि आजकल अनफॉर्चूनेटली ली बहुत सारी जगह पर होता है देखिए सब कंसेंसस गेम है जो पॉलिटिशियन

प्रश्न: विश्व लिबरल वेलुस (liberal values) के अनुसार चल रहा था, लेकिन अब सब कुछ बदल रहा है।

होते हैं उनको चाहिए कि मैं किस तरह से मैं वोट बैंक खड़ी करूं यदि मैं आपको अच्छा प्रॉमिस करके कि मैं आपको एजुकेट करूंगा आपको अच्छा डिस्पेंसरी बना दूंगा अच्छी स्कूल बना दूंगा इस बात पर यदि मुझे वोट नहीं मिलते हैं तो फिर मैं दुश्मन भई खड़ा करके करूंगा कि हिंदू आपका वद करना चाहते हैं हिंदुओं को कहूंगा मुसलमान आपके पीछे में लगे हैं और यदि हिंदू मुसलमान नहीं तो यह पाकिस्तान है यह है वह है कोई ना कोई डर दिखाओ डर दिखा कर के वोट बैंक खड़ा करो तो यह मने देखिए कि स्वामी जी ने कितना परफेक्टली कहा है एजुकेशन इज द सोल्यूशन और इन दिस केस सिर्फ मटेरियल एजुकेशन नहीं बट आल्सो स्पिरिचुअल एजुकेशन दैट इज द सोल्यूशन कि आप डर बता कर के मेरा वोट नहीं ले पाएंगे ना देखिए एस्पिरेशन होनी चाहिए कोई

प्रश्न: आध्यात्मिकता में हमें संतोष की आवश्यकता है। अमेरिकियों की औसत आय 80 हजार डॉलर है। उनका कार्बन फुटप्रिंट सबसे अधिक है। फिर भी उन्हें लगता है कि उनका अभी भी शोषण हो रहा है।

ऐसा नहीं कहता कि गरीब का गरीब रहो एक्चुअली धर्म के साथ में यह जो सब नेगेटिव कोनोटेशन क्यों जुड़े हैं लोग कहते हैं कि रिलीजन सेलिब्रेट्स पॉवर्टी ऐसा नहीं है नॉट लाइक दैट कि यू हैव टू रिमन पुअर इन ऑर्डर टू बी रिलीजियस हम कहते हैं कि बी एस्पिरेशनल यदि आपको सिंगापुर होना है और यदि देखिए प्रॉब्लम यह है कि आज की करंट जो थिंकिंग प्रोसेस है उसके अनुसार आप रिसोर्स कंज्यूम करके यदि आप एडवांस होंगे तो अमेरिका का जो कार्बन फुटप्रिंट है वो आज के एक एवरेज इंडियन से एवरेज अमेरिकन का कार्बन फुटप्रिंट 10 से 20 गुना ज्यादा है आज एक एवरेज इंडियन का अपना कार्बन फुटप्रिंट 10 से 20 गुना हो जाए तो जो पोल्यूशन खड़ा होगा वो पूरे विश्व को खत्म कर देगा तो बट देन ब्रिंग अ टेक्नोलॉजिकल सॉल्यूशन आप कार्बन को प्रोसेस कीजिए या तो फिर से स्पेस में एक्सपेंड कीजिए स्पेस कॉलोनिस्ट डेवलप कीजिए देयर इज नो डर्ट ऑफ रिसोर्सेस इन द कॉस्मस पृथ्वी लिमिटेड है यह विश्व ब्रह्मांड लिमिटेड नहीं है आप करोड़ों करोड़ों करोड़ों माने आपकी पॉपुलेशन आज जितनी है उसकी एक करोड़ गुना हो जाए तो भी यह विश्व ब्रह्मांड आपको यह कॉस्मो आपको इनफ रिसोर्सेस देगा आज हमारा जो कार्बन फुटप्रिंट है उससे करोड़ गुना ज्यादा हो जाए अगेन यू हैव इनफ रिसोर्सेस इन दिस कॉस्मस दैट यू कैन लिव वेरी हैप्पी देयर इज नो प्रॉब्लम सो फाइंड अ टेक्नोलॉजिकल सॉल्यूशन कोई ऐसा नहीं कहता कि यू हैव टू रिमन पुअर यू हैव टू रिमन इन पोल्यूटेड यू हैव टू रिमन इन अ करप्टेड प्लेस नथिंग लाइक दैट बट बी स्पिरिचुअल अभी जैसे राजा जनक है अभी सुखदेव राजा जनक के पास में ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के लिए गए अभी उनके पिताजी तो व्यास थे आश्रम में रहते थे ऋषि मुनियों का यह कार्बन यह जो एनवायरमेंट फ्रेंडली उनका लाइफ स्टाइल था फिर भी वह राजा जनक के पास गए राजा जनक का कार्बन फुटप्रिंट उनके व्यास से मुझे लगता है 100 गुना ज्यादा होगा तो फिर भी वह शुकदेव उनके पास में गए क्यों क्योंकि ब्रह्मज्ञान किसी का प्रॉपर्टी नहीं है कि मैं गरीब हूं मैं ऋषि हूं मैं वन में रहता हूं एनवायरमेंट फ्रेंडली हूं तो ही मैं स्पिरिचुअल हो सकता हूं स्वामी जी खुद अमेरिका क्यों गए दिस वेरी गुड कितने लेयर्स है यहां पे यदि अमेरिका होपलेस होता स्वामी जी वहां पर जाते ही नहीं सो और ऐसा नहीं है कि देखिए कि एक एक एक ऐसा कहते हैं ना ट्रांजैक्शनल आईडिया नहीं लगाना है कि स्वामी जी गए तो पैसा लेने को गए पैसा लाने के बाद में हमने अपना उद्धार कर लिया ऐसा ट्रांजैक्शनल आरोप स्वामी जी पर नहीं लगाना चाहिए क्योंकि स्वामी जी के भीतर में कंपेज था ही जननली फेल्ड देयर प्लाइट सो वो धनी है कि गरीब है अमेरिका में 80000 उसका पर पर एनम पर कैपिटा उसका इनकम है कि हमारा यह 3000 का है कि इवन पाकिस्तानी का हमार 1500 ड डॉलर है मुश्किल से सो कंपेज इज इक्वल फॉर ऑल स्वामी जी का यदि आज होते हिज कंपेज वुड हैव बीन इक्वल फॉर ऑल तो सबको स्पिरिचुअलिटी चाहिए बी एस्पिरेशनल इन योर आउटलुक यू फाइंड अ टेक्नोलॉजिकल सोल्यूशन और यदि टेक्नोलॉजी एडवांस करनी है साइंटिफिक एडवांसमेंट करना है देन अगेन यू नीड स्पिरिचुअलिटी ये आइंस्टाइन है न्यूटन है जो कि टॉप लेवल के साइंटिस्ट है जिन्होंने अपनी सिविलाइजेशन को एनरिच किया दे वेर डिपलीट और स्पिरिचुअल मेडिटेशन है कंसंट्रेशन है इट गिव्स यू दैट पावर टू इनोवेट जो कि और कहीं से नहीं आएगा सो स्पिरिचुअलिटी सोल्यूशन टू एवरी क्वेश्चंस ओनली थिंग यू हैव टू इंप्लीमेंट इट करेक्टली