Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द 24 sep 2024

Transcript

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः तो हम लोग राजयोग का पाठ कर रहे थे हमने देखा कल तीन मेजर टॉपिक हमने कल तक कवर किए थे और आकाश और प्राण यह स्वामी जी किस तरह से समझाते हैं उसके बाद में सुपर पावर्स क्या होते हैं वह स्वामी जी ने समझाया और उसके बाद में था अति चेतन या तो सुपरकॉन्शियस लेवल ऑफ माइंड जहां पर जाकर के हम लोग समाधि में विराजित होते हैं तो यह तीन मेजर टॉपिक स्वामी जी ने कल हमको समझाए अभी आज हम थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं स्वामी जी के राजयोग में राजयोग पुस्तक का तृतीय चैप्टर है चैप्टर का नाम है प्राण अभी स्वामी जी क्या कहते हैं यह जो टॉपिक है इसका नाम मैंने दिया है अद्वैत यह सब मेरे खुद के दिए हुए नाम है स्वामी जी ने नहीं किंतु मैंने देखा कि जिस तरह से स्वामी जी इस टॉपिक को डेवलप करते हैं तो उस हिसाब से मुझे यह नाम ठीक लगा तो अभी यह जो एक पूरा पैराग्राफ आपको दिख रहा है स्क्रीन के ऊपर में ये एक थोड़ा सा टेक्निकल डिस्कशन है इसको हम देख लेते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं इन दिस यूनिवर्स देयर इज वन कंटीन्यूअस सब्सटेंस ऑन एव्री प्लेन ऑफ एक्जिस्टेंस यहां पे इस जगत में जितने भी लोक है उस सभी लोक में सिर्फ एक ही जीवन है एक ही पदार्थ है जो कि विभिन्न चीजों को बनाते हैं तो जैसे कि आकाश है कल हम ने देखा कि किस तरह से सृष्टि के प्रारंभ के बाद में आकाश ही सब कुछ बना है आकाश अपने से बड़ा सूक्ष्म होता है उसको आप नहीं आंखों से देख सकते हैं ही हाथों से स्पर्श कर सकते हैं किंतु फिर भी यही सूक्ष्म आकाश परिवर्तित होकर के ये स्थूल जगत बना है तो जितने भी लोग है यह फिजिकल प्लेन कहो ना कि ये मेंटल प्लेन कहो मानसिक जगत कहो ना कि यह पदार्थ का जगत कहो शारीरिक जगत कहो इन सभी के भीतर में एक ही पदार्थ है जो कि ये विभिन्न स्वरूप धारण करता है फिजिकली दिस यूनिवर्स इज वन देयर इज नो डिफरेंस बिटवीन द सन एंड यू पदार्थ की दृष्टि से यह जगत एक ही है सूरज और मनुष्य देह हमारे बीच में कोई भी फर्क नहीं है आप प्रश्न करेंगे कि अरे सूरज इतना बड़ा है जिसके सामने पृथ्वी एक छोटी सी एक तीन के की माफिक दिखती है उसमें हम तो उससे भी छोटे तो हम में और सूरज में कहां पर सिमिलरिटी है तो सिमिलरिटी है कि अभी जैसे देखिए एक उदाहरण है ईंट का यही तो ईंट है जिसको कि आप एक कुटिया बनाते हैं और वही ईंट से तो अब जैसे कि अभी इंडिया का नया पार्लियामेंट बिल्डिंग बना उसका उद्घाटन हुआ था तो वही ईंट है जो कि एक गरीब की भी बनाती है और एक बहुत बड़ा एक महल भी बनाती है तो आप ईंट को किस तरह से सजाते हैं उसके ऊपर में डिपेंड करता है कि किस तरह का स्ट्रक्चर बनेगा किंतु इन दोनों के पीछे में ईंट तो एक ही है तो वैसे ही यह इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन यह जो फिजिकल जो एटमिक स्ट्रक्चर है वह तो सभी के भीतर में एक ही है वह आप एक तरह से सजाएंगे तो मनुष्य का देह बनेगा दूसरी तरह से सजाएंगे तो पशु पंखी ब तीसरी जि तरह सजाएंगे तो सूरज चांद सितारे बनेंगे द साइंटिस्ट विल टेल यू इट इज ओनली अ फिक्शन टू से द कंट्री एक वैज्ञानिक कहेगा कि आप जद यह कहेंगे कि सूरज मनुष्य से बिल्कुल भिन्न है तो यह गलत होगा क्योंकि यह बात सिर्फ अपना योग और वेदांत ही नहीं कह रहा मॉडर्न साइंस भी इसके ऊपर में एग्री होता है देयर इज नो रियल डिफरेंस बट बिटवीन द टेबल एंड मी द टेबल इज वन पॉइंट इन द मास ऑफ मैटर एंड आई अनदर पॉइंट यह जो टेबल है और यह मैं हूं स्वामी जी अपनी ओर इशारा करके कहते हैं हम दोनों में कोई फर्क नहीं है यह पदार्थ की एक तरह की रचना से टेबल बना है दूसरी तरह की रचना से मैं बना हूं ईच फॉर्म रिप्रेजेंट्स एज इट वेर वन वल पल इन द ऑफ व्हिच नॉट वन इज कांस्टेंट यह पदार्थ का महा समुद्र है उसमें जितने भी नाम रूप आपको दिखते हैं मनुष्य शरीर दिखेगा ना कि यह आश्रम का मंदिर दिखेगा न कि यह दक्षिणेश्वर का मंदिर दिखेगा ना कि यह कितने भी पेड़ पौधे जो कुछ भी दिखेंगे यह अनंत पदार्थ के समुद्र में हम लोग एक छोटे-छोटे एक वल पूल मात्र है एक वल पुल सतत गोल-गोल घूमता रहता है सतत अपनी जगह बदलता रहता है लगता तो है डायनेमिक किंतु बना है वही तो समुंदर के पानी का ही वही समुंदर का पानी ही गोल-गोल घूम करके यह वल पूल की रचना करता है टर्निंग अराउंड ए जस्ट एज इन अ रशिंग स्ट्रीम देयर मे बी मिलियंस एंड मिलियंस ऑफ वपल्स द वाटर इन ईच ऑफ व्हिच इज डिफरेंट एवरी मोमेंट टर्निंग राउंड एंड राउंड फॉर ए फ्यू सेकंड्स एंड देन पासिंग आउट रिप्लेस बाय अ फ्रेश क्वांटिटी सो द होल यूनिवर्स इज वन कांस्टेंटली चेंजिंग मास ऑफ मैटर इन व्हिच ऑल फॉर्म्स ऑफ एसिस्टेंसिया कि पानी के भीतर में जो चक्रा वात बनता है वो वो आपको दिखता तो है कि एक जगह प खड़ा है या तो फिर आसपास में घूम रहा है किंतु देखेंगे पानी सतत आ रहा है उसके भीतर में से और सतत जा रहा है यह लपल शायद एक दिखेगा इंडिविजुअल किंतु लपल बनाने वाला जो पानी है सतत चेंज होता रहता है सतत सर्कुलेट होता रहता है एक कोने में से प्रवेश करेगा गोलगोल घूमेगा और दूसरे कॉर्नर में से निकल जाएगा तो वह लपल का पानी जैसे सतत बदलता रह है तो वैसे ही यह जो अपना यूनिवर्स है उसमें जो अभी जैसे कि मेरा देह है देखिए कि मेरे देह के भीतर में कंटीन्यूअस जो कोष होते हैं जीव कोष वो कंटीन्यूअस उसका जन्म भी होता है मृत्यु भी होता है पेड़ को देखिए पेड़ के नए-नए पत्ते आते ही जाते हैं और फिर पुराने पत्ते वो झर करके पेड़ के ऊपर में से वो अपने सुख करके पेड़ के ऊपर में से गिर जाते हैं पेड़ सतत बढ़ता रहता है कभी-कभी एक ब्रांच टूट जाएगी तो दूसरी ब्रांच खड़ी होगी यानी कि पेड़ के भीतर के जो एटम्स है मॉलिक्यूल जो है न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन वो भी कंटीन्यूअस नहीं रहते एक जाएगा तो दूसरा आएगा तो वैसे ही मनुष्य के देह के भीतर में भी ऐसा है हमारे बाल देखिए हमारे नाखून देखिए बढ़ते हैं हम उनको काटते हैं अपनी स्किन के ऊपर में जितने भी सेल है वह सब प्रतिदिन कितने ही उसको व मर जाते हैं और नए सेल उसमें प्रकट होते हैं यह पानी देखिए पत्थर देखिए मिट्टी देखिए खेत देखिए खेत में जो पाक होता है वह देखिए सतत उसमें बढ़ोतरी होती रहती है यह जीवन जो है जन्म मृत्यु जरा व्याधि का चक्र यह सतत चलता रहता है और यह पुराना मैटर जो है उसका मृत्यु होगा तो नया मैटर जो है उसका जन्म होगा यह बात सिर्फ मनुष्य के लिए ही नहीं पूरे विश्व के लिए यह बात सही है तो यह परिवर्तन है जगत का नियम किंतु ये परिवर्तन के पीछे में जो पदार्थ है पदार्थ तो एक ही है पदार्थ वो नए-नए पदार्थ आते जाते हैं पुराने पदार्थ का मृत्यु होता है किंतु पदार्थ का स्वरूप तो वही है तो वह स्वामी जी कहते हैं कि चाहे हमको यह जितना भी चेंजेज दिखे डाइवर्सिटी दिखे जितने भी यह परिवर्तन दिखे परिवर्तन के पीछे में एक यूनिटी है एक ही पदार्थ है सूर्य में जब विस्फोट होता है तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के ऊपर में आकर के हमको टकराती है अभी वह पेड़ को भी टकराए गी यह जो यह होता है फोटोसिंथेसिस इसकी मदद से पेड़ यह पोषण पाता है सूर्य के प्रकाश से पेड़ को पोषण मिलेगा तो पेड़ फल और सब्जी बनाएंगे उस फल सब्जी या धान को हम खाएंगे यानी वही सूरज की गर्मी वही सूरज की किरणें पेड़ और उसके माध्यम से हमारे भीतर में प्रवेश करती है हमको हष्ट पृष्ट बनाती है यानी कि यह जो जितने भी पदार्थ है सतत आते रहते हैं जाते रहते हैं सतत विश्व में परिवर्तन होता रहता है किंतु जो यूनिटी है वह बनी रहती है ये जो परिवर्तन के पीछे में एकता यह थीम यहां पे अ मास ऑफ मैटर एंटर्स इनटू वन लपल से अ ह्यूमन बॉडी स्टेज देयर फॉर ए पीरियड बिकम चेंज्ड एंड गोज आउट इनटू अनदर से एन एनिमल बॉडी दिस टाइम फ्रॉम व्हिच अगेन आफ्टर अ फ्यू इयर्स इट एंटर्स इनटू अनदर वल पल कॉल्ड अ लंप ऑफ मिनरल एक पदार्थ जो है एटम एक जो एटम कुछ कुछ एटम जो है वह मान लीजिए कि एक मनुष्य के देह के भीतर में प्रवेश करते हैं उसके बाद में वहां से परिवर्तन आकर के वह बाहर निकल कर के मान लीजिए एक किसी पशु के भीतर में प्रवेश करते हैं व पशु में से भी बाहर आकर के मान लीजिए कुछ समय के बाद में यह मिनरल जो है जो जमीन के भीतर में पाया जाता है उसके भीतर में प्रवेश करेंगे तो वही पदार्थ है कि विभिन्न विभिन्न चीजों में प्रवेश करता है बस वह चेंज होता है उसका स्ट्रक्चर तो वही स्ट्रक्चर अभी जैसे कि गाय है गाय आहार करती है पेड़ पत्ते खाती है तो अभी जब पत्ते जो एक स्वरूप में गाय के भीतर में प्रवेश करते हैं और गोबर के माध्यम से दूसरे स्वरूप में गाय से बाहर आते हैं वही गोबर है जो कि मिट्टी में जाएगा मिट्टी में वह फ व मिट्टी को फर्टिलाइज करेगा उसमें से नए पेड़ पौधे खड़े होंगे फिर दूसरी गाय है जो कि उस पेड़ पौध को खाएगी अभी यही गाय हमको दूध देती है वही दूध फिर हम पीते हैं और फिर हम भी उसको मल मूत्र के द्वारा उसका त्याग करते हैं यानी कि देखिए कि एटम जो है इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन वो अपना स्वरूप बदलते हैं उसका स्ट्रक्चर चेंज होता है एक स्ट्रक्चर है पेड़ पौधे का तो दूसरा स्ट्रक्चर है गोबर और दूध का तो इस तरह से तीसरा स्ट्रक्चर वही फिर गाय अपने बच्चे को जन्म देगी तो एक नई गाय का जन्म होगा तो यह अपना स्वरूप एटम जो है अपना स्ट्रक्चर अपना जो अरेंजमेंट है वह बदलता है मान लीजिए कि एक ईंट में से अपने पास में मान लीजिए 1 लाख ईंट है उस ईंटों में से हमने एक बड़ा सा महल बनाया अभी मान लीजिए कि अभी ऐसा समय आया कि महल को तोड़ दो और वही ईंटों से 1015 एक कुटिया बना दो यहां पे तो महल को ड़ तोड़ दिया उसमें से ईंट ले और उसी ईंटों में से पूरा एक कॉलोनी बना दिया गरीब लोगों के लिए रहने के लिए अभी ईंट तो वही है उसका स्वरूप मात्र परिवर्तन हुआ है वह महल के स्वरूप में अरेंज की गई थी अभी वह कुटिया के स्वरूप में अरेंज की गई है तो यही कुछ पदार्थ है जो कि घूमते रहते हैं विश्व में एक के बाद एक अरेंजमेंट बदलता रहता है नाम रूप बदलता रहता है किंतु उसके पीछे का सब्सटेंस जो है सब्सटेंस वही का वही रहता है इट इज अ कांस्टेंट चेंज नॉट वन बॉडी इज कांस्टेंट यह सतत परिवर्तनशील जगत है जगत में एक भी व्यक्ति एक भी एलिमेंट स्थिर नहीं रहता बिना परिवर्तन के नहीं रहता किंतु पीछे के पदार्थ जो है वह सेम रहते हैं देयर इज नो सच थिंग एज माय बॉडी और योर बॉडी एक्सेप्ट इन वर्ड्स मेरा शरीर आपका शरीर ऐसा विभिन्न कुछ नहीं है यह सब शब्द मात्र है अभी मान लीजिए कि एक गाय ने पेड़ पौधे खा कर के गोबर किया फिर गोबर से यह जमीन पुष्ट हुई उसमें से नया पेड़ खड़ा हुआ दूसरी गाय ने उसको खाया फिर उसने गोबर किया फिर उस फर्टिलाइजर में से तीसरा अभी मान लीजिए यह अभी कौन सी गाय के भीतर में कौन सा पदार्थ ओरिजनली था कौन से एटम कौन से मॉलिक्यूल एक पहली वाली गाय में थे दूसरी वाली गाय में थे हम नहीं बता पाएंगे वही पदार्थ वही एटम आज इस गाय के भीतर में है तो कल दूसरी गाय के भीतर में रहेंगे तो परसों दिन तीसरी गाय के भीतर में तो कोई भी गाय ऐसा नहीं कह पाएंगी कि मैंने जिस एटम से जन्म धारण किया है मेरे जन्म के समय में यह इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन मेरे शरीर में थे तो आज तक भी वही है और किसी के इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन मेरे शरीर में नहीं प्रवेश किए तो ऐसा तो कभी होने ही नहीं वाला है ऑफ द वन ह्यूज मास ऑफ मैटर वन पॉइंट इज कॉल्ड अ मून अनदर अ सन अनदर अ मेन अनदर द अर्थ अनदर अ प्लांट अनदर अ मिनरल यह जो एटम प्रोटॉन न्यूट्रॉन का यह जो विराट एक बैंक जो है एक विराट स्टोरेज जो है उसमें एक जगह पर एक पॉइंट में जाएंगे तो यही अरेंज होकर के मनुष्य को बनाती है द दूसरे पॉइंट पे जाएंगे तो वह चांद को बनाती है तीसरी जगह पे जाएंगे तो यही एटम्स सूर्य को बनाते हैं तीसरी जगह पे यही एटम्स पृथ्वी को बनाते हैं फिर यही एटम पौधे को बनाते हैं और यह जो जमीन में से जो मिनरल मिलते हैं उन्हीं को भी बनाते हैं यानी कि साइंस में यह यूनिटी बड़ी ही परफेक्टली एस्टेब्लिश हो चुकी है यह जगत के जो बिल्डिंग ब्लॉक्स जो है इस विश्व ब्रह्मांड की जो ईंट है जिसमें से यह पूरे विश्व ब्रह्मांड का निर्माण हुआ है विश्वकर्मा ने जो किया है इस ब्रह्मांड का निर्माण विश्वकर्मा के पास में एक ही टाइप का ईंट है ऐसा नहीं है कि गरीब की कुटिया वो व एक तरह की ईंट से बनाएगा तो वो अमीर का महल दूसरे तरह की ईंट से बनाएगा एक तरह के एटम इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मनुष्य बनाएगा तो दूसरे तरह के इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन से वह गाय बनाएगा ऐसा नहीं है बिल्डिंग ब्लॉक्स कहो ना कि ईंट कहो ना कि एटम कहो ना कि ये सब एटमिक पार्टिकल कहो वो एक ही है बस उसी का विभिन्न विभिन्न तरह का अरेंजमेंट हमको यह विभिन्न तरह के पदार्थों के रूप में दिखता है नॉट वन इज कांस्टेंट बट एवरीथिंग इज चेंजिंग मैटर इंटरनली कंसर्टिना रेटिंग सतत किंतु यह पदार्थ एक ही है किंतु यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि का प्रवाह तो सतत ही चलता रहेगा जो आज मेरे शरीर में एटम है इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन कल मेरा मृत्यु हुआ यदि मुझे जला दिया गया या तो फिर मुझे यदि जमीन में गाड़ दिया गया तो यही तो फिर वह विघटित होकर के या तो फिर एसी से राख के भीतर में परिवर्तित होंगे और वही राख आसपास में गिरेगी और जमीन के भीतर में मिल जाएगी जमीन में भीतर में जाकर के वह या तो फिर किसी मिनरल का स्वरूप धारण करेगी या तो मिट्टी फिर वह बह कर के पानी में चली जाएगी तो पानी में जाकर के मिल जाएगी यानी कि मेरा जो देह है मेरी मृत्यु के बाद में विघटित होकर के और कोई स्वरूप धारण करेगा तो यह सतत यह जो प्रवाह है जन्म मृत्यु जरा व्याधि का ये घटन विघटन का वह प्रवाह चलता ही रहता है और यह जो एटम्स जो है एक स्वरूप में से दूसरे स्वरूप में सतत परिवर्तित होते ही रहते हैं सो इट इज विद द माइंड अभी मान लीजिए कि पदार्थ जितने भी है शारीरिक भौतिक पदार्थ इसके बारे में तो हमने बात की किंतु मन क्या है मन के जो विचार है वह क्या है मन के विचार तो कोई एटम एटम से नहीं बने इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन से नहीं बने हैं मन के विचार तो मानसिक जगत में रहते हैं यह जो जिस तरह से एक शारीरिक जगत है तो वैसे ही मन के विचारों का एक मानसिक जगत है तो मानसिक जगत में क्या है मैं कभी मैं खुश होता हूं तो कभी मैं दुखी होता हूं कभी मैं हंसता हूं तो कभी मैं रोता हूं कभी मैं किसी के साथ में मित्रता करता हूं तो कभी मैं किसी के साथ में दुश्मना वट करता हूं कभी मैं पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देता हूं तो कभी मैं अपने मित्रों के साथ में घूमने फिरने के लिए जाता हूं कभी मैं किसी के बारे में अच्छा विचार कर रहा हूं तो कभी मैं किसी के बारे में बुरा विचार कर रहा हूं यह जो मेरे विचार है मेरी इमोशंस है मेरी फीलिंग्लेस प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के रूप में हमको शारीरिक जत में दिखते हैं भौतिक जगत में दिखते हैं तो वही पदार्थ इथर का स्वरूप धारण करते हैं मन के भीतर में सो इट इज विद द माइंड मैटर इज रिप्रेजेंटेड बाय दी ईथर व्हेन द एक्शन ऑफ प्राणा इज मोस्ट सटल दिस वेरी ईथर इन द फाइनर स्टेट ऑफ वाइब्रेशन विल रिप्रेजेंट द माइंड एंड देयर इट विल बी स्टिल वन अनब्रोकन मास स्वामी जी यहां पे ईथर नाम के एक पदार्थ के बारे में बताते हैं यह 19वीं सदी में ईथर के बारे में ऐसा कहा जाता था कि यह पूरा जो ब्रह्मांड है उ वो इथर का ओशन है जैसे कि यह जमीन पर हम पृथ्वी पे एक समुंदर देखते हैं तो समुंदर के भीतर में जैसे कैसे एक के बाद एक नौका तैरती रहती है तो उस समय के वैज्ञानिक सोचते थे कि यह जो चांद जो आकाश में खड़ा है यह पृथ्वी भी ये चांद के पृथ्वी भी आकाश में खड़ी है और यह चांद पृथ्वी की ओर चारों ओर घूम रहा है तो यह गिर क्यों नहीं जाते चारों ओर अवकाश है पृथ्वी पर तो हम देखते हैं कि यदि आपने हवा में एक चीज को खड़ा रखा अपने हाथ से फिर उसको जैसे ही आपने छोड़ दिया फटाक करके जमीन पर गिर जाएगी तो आकाश में ऐसा क्यों नहीं होता यह पृथ्वी पृथ्वी है चांद है सितार हवा में तेर से कैसे रहते हैं आकाश में तो उन्होंने अनुमान किया कि जैसे पृथ्वी पर पानी का समुंदर है तो वैसे ही अवकाश में ब्रह्मांड में इथर रूपी एक समुद्र है इस इथर रूपी समुद्र में सब कुछ तैरता रहता है और यह जो तो अभी स्वामी जी उसी इथर के बारे में यहां पर बात करते हैं अभी बात ऐसी है कि आज के समय में आज के मॉडर्न फिजिक्स में इथर का जो कांसेप्ट है उसको हमने त्याग कर दिया है आज हम कहते हैं कि यह जो विश्व ब्रह्मांड है वह स्पेस टाइम रूपी डायमेंशन के भीतर में रह रहा है और इस स्पेस टाइम जो है इसके भीतर में ही यह सब कुछ एक दूसरे से अ एक दूसरे के आसपास में रह रहे हैं अभी जैसे देखिए कि ग्रेविटी है तो ग्रेविटी कैसे कम्युनिकेट होती है तो स्पेस टाइम वाइब्रेशंस के थ्रू ये अपने जैसे चांद की ग्रेविटी पृथ्वी पे असर करती है चांद जब हमको पता है कि जिस दिन रात को पूर्णिमा है फूल मून है उस दिन समुंदर में भरती आती है क्यों क्योंकि चांद की जो ग्रेविटी है गुरुत्वाकर्षण है चांद का वो पानी को खींचता है तो पानी को खींचता है तो पानी समुंदर थोड़ा सा ऊपर आता है और इसीलिए यह भरती आती रहती है पूर्णिमा की रात को तो यह ग्रेविटेशन है या तो गुरुत्वाकर्षण है यह स्पेस टाइम ग्रीड जो है उसके भीतर में ट्रेवल करती है यह आज का कांसेप्ट है तो स्वामी जी 19वीं सदी में यह सब बातें कर रहे थे इसके लिए स्वामी जी ने ईथर शब्द का प्रयोग किया है हमको ईथर को कोई साइंटिफिक रूप में नहीं लेना है स्वामी जी के ही एक कांसेप्ट के रूप में लेना है तो स्वामी जी कहते हैं कि मानसिक जगत में ये जितने भी विचार है वो विचार इथर के माध्यम से वो एक दूसरे के साथ में कम्युनिकेट होते हैं जब यह प्राण है वो प्राण उसका वाइब्रेशन बहुत ही सूक्ष्म हो जाता है तो वह इथर में परिणत होता है प्राण का जो वाइब्रेशन है वह यदि ग्रोस होता है तो भौतिक पदार्थ के रूप में वह परिणत होता है और यही प्राण जो है हमारे विचारों के रूप में भी हम परिवर्तित होते हैं विल रिप्रेजेंट माइंड एंड देयर इट विल स्टिल बी वन अनब्रोकन मास हम लोग मान लीजिए कि इथर शब्द का प्रयोग न करें प्राण को ही पकड़े रखें तो देखेंगे कि आकाश और प्राण जिस जि तरह से भौतिक शरीर को बनाते हैं वैसे ही यही आकाश यही प्राण जो है हमारे मन को हमारे मन के विचारों को बनाता है समटाइम सर्टेन ड्रग्स हैव द पावर टू टेक अस वाइल एज यट इन द सेंसेस टू दैट कंडीशन कोईकोई ड्रग्स होती है जैसे कि यह हेरोइन है चरस है गांजा है ये अल्कोहल है यह सब पीने से इसका सेवन करने से हमारा मन के भीतर में एक तरह की विकृति खड़ी होती है कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि समाधि की भी स्थिति प्राप्त हो गई हो यह जो तंत्र तंत्र विद्या में कारण वारी का पान करना यह इसीलिए यह सब इसका इतना प्रचलन है कि आप जब ध्यान करके अपने मन को कहां पर वह आध्यात्मिक ऊंचाई पर ले जाएंगे थोड़ा सा डिफिकल्ट होता है तो थोड़ा सा कारणवा पान कर दे थोड़ा सा गांजा खा ले थोड़ा सा चरस खा ले तो क्या होगा कि यह जो धुम्रपान कर कर ले तो ऑटोमेटिक मन जो है सूक्ष्म होकर के धीरे-धीरे करके अपनी जगत की ये जितनी भी चिंताएं हैं उससे तो मुक्त हो जाएगा तो तक कहीं जाकर के मैं थोड़ा सा जब ध्यान आसानी से कर पाऊंगा जब भी जब ध्यान करने को बैठते हैं तो प्रॉब्लम यही होता है कि बाकी सब चीजों का आकर्षण इतना स्ट्रांग होता है पूरा जगत हमको अपनी आध्यात्मिक साधना से विचित करने के लिए बैठा है जैसे ही आंख बंद करूंगा दुनिया भर का कचरा मेरे सर के भीतर में आकर के खड़ा हो जाएगा उसको काउंटर करना है तो वो काउंटर करते करते ही तो मेरी सब एनर्जी व्यष्टि करने वाला हूं तो ये जो सब पदार्थ है उसका सेवन इसलिए किया जाता है कि थोड़ा सा कारण वारी कारण वारी अर्थात की शराब पान य तंत्र साधना में उसको कारण वारी कहते हैं तो सोम रस है जैसे कि देवता लोग सोम रस पान किया करते थे जैसे कि धुम्रपान है यह सब करने से यह गांजा है यह गांजा का सेवन करने से क्या होता है मन जो है थोड़ा सा मुक्त हो जाता है यह सब बाहर की चिंता से तो फिर यह मुक्त मन को लेकर के हम ऑटोमेटिक धीरे-धीरे करके उसको कंसंट्रेट कर सकते हैं उसको सब्लाइम कर सकते हैं ओनली प्रॉब्लम यह है कि यह सब जो सेवन जो है उसकी बैड हैबिट कभी-कभी पड़ जाती है जैसे कि ठाकुर ने कहा था कि वह अचलानंद है एक तांत्रिक उसी को मैंने सिर्फ देखा कि कारण वारी पान करके वोह स्थिर बैठक करके जप करता है बाकी उसके साथ में जितने भी तंत्र साधक थे वे लोग जैसे ही शराब पान किया उसके बाद में स्वंद आचरण करना शुरू कर दिया तो यह यह सब जो पदार्थ होते हैं यह सबका डेंजर यह सब वही है मेनी ऑफ यू मे रिमेंबर द सेलिब्रेटेड एक्सपीरियंस ऑफ सर हफ्री देवी व्हेन द लाफिंग गेस ओवर पावर्ड हिम हाउ ड्यूरिंग द लेक्चर ही रिमेंडा स्टूपफाइड एंड आफ्टर दैट ही सेड दैट द होल यूनिवर्स वाज मेड अप ऑफ आइडियाज आप सभी लोगों ने हफ्री देवी के बारे में सुना होगा लाफिंग गेस बोलकर के वह एक आता है उसका जैसे ही सेवन किया वैसे ही उनका मन एक सूक्ष्म राज्य में अवस्थित हो गया और उन्होंने देखा कि यह पूरा जगत विचारों का बना हुआ है आइडियाज का बना हुआ है फॉर द टाइम इसलिए वो नरेण कभी कभी ठाकुर को कहता था ना कि ये आपके मन का है यह जो आपके दर्शन है क्योंकि यह मेडिकल साइंस में इस तरह की बहुत सारी घटनाएं वो वर्णित है कि या तो किसी पदार्थ का सेवन करने से आपके मन में यह सब तरह की विकृतियां उत्पन्न होती है तो इसीलिए नरेण ये सब क्या करता था फॉर द टाइम बीइंग एज इट वेर द ग्रोस वाइब्रेशंस हेड सीस्ड एंड ओनली द सटल वाइब्रेशंस विच ही कॉल्ड आइडियाज वेर प्रेजेंट टू हिम जैसे ये हफ्री डेवी ने लाफिंग गेस को उसका यह किया अपनी उसका ग्रहण किया तो वैसे ही क्या देखा उसने यह जो भौतिक जगत है वह अदृश्य हो गया उसको एक मानसिक जगत दिखने लगा ही कुड ओनली सी द सटल वाइब्रेशन अराउंड हिम व अपने आसपास में सूक्ष्म वाइब्रेशन ही देख पा रहे थे एवरीथिंग हेड बिकम थॉट द होल यूनिवर्स वाज एन ओशन ऑफ थॉट ही एंड एवरीवन एल्स हैड बिकम लिटिल थॉट वपल्स यह पूरा जगत जो है अपने सूक्ष्म स्वरूप में इनको दिखाई देने लगा था मनुष्य है तो मनुष्य की जगह मनुष्य के जो विचार है देखिए कि हमारे भीतर में तो विभिन्न तरह के विचार होते हैं तो यह विचार जो है धीरे-धीरे करके अपना कैरेक्टर का रूप धारण करते हैं यदि हम अच्छे विचार करेंगे तो अपना सात्विक कैरेक्टर होगा सब समय अपने विचार कार्यरत ंगे तो अपना एक राजसिक कैरेक्टर होगा और यदि सब समय नेगेटिव विचार करते रहेंगे तो अपना तामसिक कैरेक्टर हो जाएगा तो यह जो हफ्री डेवी है कुछ क्षण के लिए लोगों का यह जो सूक्ष्म स्वरूप है यह तामसिक है ना कि यह राजसिक है ना कि यह सात्विक है ऐसा सब देखने का उन्होंने शरू कर दिया होगा अभी मैं यह अनुमान करके कह रहा हूं क्योंकि स्वामी जी तो यहां पर सिर्फ इतना ही लिखते हैं कि उनको मनुष्य की जगह मनुष्य का आईडिया दिखने लगा था तो अभी मनुष्य का आईडिया या तो मनुष्य के विचार क्या है अल्टीमेटली ऐसा तो पॉसिबल नहीं है कि मैं जो सोच रहा हूं वह आप देख पाए माइंड रीडिंग जिसको कहते हैं माइंड रीडिंग जैसा कुछ होता नहीं है किंतु एटलीस्ट कैरेक्टर रीडिंग तो संभव है आजकल कोई भी एक पॉलिटिशियन होता है पॉलिटिशियन लोगों को क्या है ना बहुत सारे लोगों के साथ में डील करना होता है तो यह पॉलिटिशियन लोगों को दूसरों का कैरेक्टर समझ लेने में ज्यादा देरी नहीं लगती यह किस तरह का आदमी है इसको आप डरा धमका करके काम कर सकते हैं ना कि फिर इसकी आप प्रशंसा करके आप इसका काम निकाल सकते हैं इसके पास से ना कि क्या है किस तरह का इसका कैरेक्टर है किसी-किसी का वीक कैरेक्टर है तो उसके पास में काम निकालने के लिए उसको धमक दे दो वो आदमी चुपचाप आपका काम कर देगा किसी किसी का स्ट्रांग कैरेक्टर है तो वो धमक से नहीं मानेगा किंतु उसका भीतर में वो लोभ लालसा भी है तो उसकी थोड़ी सी प्रशंसा कर दो तो प्रशंसा से वो फूल करके वो गर्वित हो कर के आपका काम कर देगा किसी किसी का कैरेक्टर भी स्ट्रांग है और वो लोभ में भी नहीं पड़ता है तो फिर उसको देखना थोड़ा सा मुश्किल है कि इस तरह के आदमी से कैसे काम करवाए तो पॉलिटिशियन लोगों के पास में यह कैरेक्टर समझने की बड़ी ही जबरदस्त क्षमता होती है जो जितने ही बड़े पावरफुल या तो फिर यह प्रोमिन पॉलिटिशियन होते हैं उनकी यह मनुष्य के स्वभाव को परख लेने की क्षमता उतनी ही स्ट्रांग होती है तो यहां पे मुझे लगता है कि कुछ क्षण के लिए हफ्री डेवी ने लोगों का चरित्र कैसा है वो देखने का उनको मौका मिला होगा दस इवन इन द यूनिवर्स ऑफ थॉट वी फाइंड यूनिटी इस तरह से हम जो विचारों का यह जो जगत है उसके भीतर में भी हमको ऐक्य दिख रहा है ऐक्य दिखता है एंड एट लास्ट व्हेन वी गेट अच्छा यह जो विचारों का जगत में ऐक्य दिखना यह जैसे हमने देखा ना कि भौतिक जगत में हमको यूनिटी दिखती है तो भौतिक जगत में यूनिफाइड क्या है तो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन इसके बाद में भी बहुत सारे पार्टिकल्स है एटॉमिक सब एटॉमिक पार्टिकल्स है किंतु साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि ये जितने भी सब एटॉमिक पार्टिकल्स भी है वे लोग फिर क्वार्क के बने हैं ना कि फिर ये स्ट्रिंग के बने हैं यानी जो बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक जो है जगत में वो तो एक ही कुचित एक ही तरह का होता है और फिर ये मैटर भी तो एनर्जी में कन्वर्टिबल है वो e इक्वल m स स् यानी कि भौतिक जगत में तो यूनिटी बड़ा ही स्पष्ट रूप से हमने एस्टेब्लिश कर दी है मानसिक जगत में यूनिटी को कैसे एस्टेब्लिश करें तो देखेंगे कि सभी का जो स्वभाव है ना यह सत्व रजस और तमस इन्हीं के माध्यम से सभी का कैरेक्टर बनता है कोई भी ऐसा नहीं होगा यह सत्वर रजस और तमस के अलावा और कोई हां उसके परे एक है अवस्था जिसको हम तुरीय अवस्था कहते हैं किंतु यह तुर्य अवस्था को भी चल ले लीजिए तो यह एक यूनिटी हो हो गया मानसिक जगत में यह स्व सत्व रजस तमस और तुर्य अवस्था या तो फिर यह त्रिगुणा तीत अवस्था यह जो चार अवस्थाएं हैं उन्हीं इसी चार अवस्थाओं से चार गुणों से सभी का कैरेक्टर सभी का मन बना हुआ है तो जैसे ही यह इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन से पूरा जगत बना है तो वैसे ही यह सत्व रजस और तमस से पूरे सभी के मन बने हैं तो शरीर भी एक ही तरह के पदार्थ से सभी के बने हैं और यह मन भी जो है सभी के एक ही तरह के गुण से बने हैं तो अपने मन में गुणों की यूनिटी है गुणों का ऐक्य है और शारीरिक जगत में भौतिक जगत में पदार्थ का ऐक्य है तो स्वामी जी कहते हैं इवन इन द यूनिवर्स ऑफ थॉट वी फाइंड यूनिटी एंड एट लास्ट व्हेन वी गेट टू द सेल्फ वी नो दैट सेल्फ कैन ओनली बी वन और जब भौतिक जगत में हमने यूनिटी देख ली ऐक्य देख लिया समझ लिया जितनी भी मैटर है वह एनर्जी में कन्वर्ट होती है और एनर्जी का तो एक ही स्वरूप है फिर जितने भी मन है वह सत्व रजस और तमस से ही बने हैं या तो फिर गुणात अवस्था गुणात अवस्था में जाएंगे तो फिर मन और शरीर से परे हो जाएंगे तो वोह एक अलग बात हो गई किंतु जब तक साधारण प्लेन के ऊपर में है साधारण लोक में हम जी रहे हैं तो सत्वर रजस और तमस का ही ही तो हमारा अंतःकरण गठित हुआ है तो यह मन और शरीर भौतिक जगत और मानसिक जगत इन दोनों में तो हमने ऐक्य देख लिया अभी इन दोनों के परे जाते हैं शरीर और मन के तो आती है आत्मन हमारे भीतर में और आत्मन का ऐक्य तो हमने ऑलरेडी ज्ञान योग में देख ही लिया है तो देखिए कि जो मनुष्य का देह है मनुष्य का जो अस्तित्व है कितने स्तर के ऊपर में है सर्वप्रथम है भौतिक स्तर जो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन में यूनिटी है जिसकी वह सब कुछ इन तीनों का बना है फिर है मानसिक स्तर जो कि सत्व रजस और तमस रूपी तीन गुणों का बना है और फिर है यह अपनी आत्मन आत्मन भी एक ही है यानी तीनों स्तर के ऊपर में देखेंगे आपको यूनिटी या तो फिर ऐक्य दिखाई देता है ब द वाइब्रेशंस ऑफ मैटर इन इट्स ग्रोथ एंड सटल एस्पेक्ट्स बियोंड मोशन देयर इज बट वन यह जो भौतिक जितने भी वाइब्रेशन है पदार्थ के व सूक्ष्म स्वरूप में हो तो यह गुणों के रूप में दिखते हैं स्थूल स्वरूप में हो तो एटॉमिक पार्टिकल के रूप में दिखते हैं किंतु यदि ये उसका जो वाइब्रेशन है वह रुक जाए तो फिर वही आत्मन के भीतर में सब कुछ विलीन हो जाता है इवन इन मेनिफेस्टेड मोशन देयर इज ओनली यूनिटी यह जो वाइब्रेशन है या गति गतिमान जो जगत है उसके भीतर में भी यूनिटी है और गतिमान के परे जो जगत है उसके भीतर में भी यूनिटी है दिस फैक्ट्स कैन नो मोर बी डिनाइड यह जो सब तथ्य है उसको आप कभी भी नकार नहीं सकते मॉडर्न फिजिक्स आल्सो हैज डेमोंस्ट्रेटेड दैट द सम टोटल ऑफ द एन र्जी इन द यूनिवर्स इज द सेम थ्रू आउट इस आधुनिक विज्ञान ने यह प्रूव कर दिया है कि इस विश्व ब्रह्मांड में जितना भी पदार्थ है जितनी भी एनर्जी है वह समान रहती है कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी जो लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स है थर्मोडायनेमिक्स का यह नियम है मान लीजिए कि आप एक कार के भीतर में पेट्रोल डालते हैं तो आपने जितना पेट्रोल डाला होगा उतना ही यह कार चलेगी यानी कि ये जो केमिकल एनर्जी है वो कन्वर्ट होकर के वो मोशन में प्रकट होगी कार की चलन शक्ति में वह प्रकट होगी वो कन्वर्ट होगी मान लीजिए कि मैं आज एक गिलास दूध पीता हूं तो एक गिलास दूध पीने से मेरे शरीर में जो एनर्जी प्रकट होगी मेरे शरीर को जो पोषण मिलेगा वह एक गिलास दूध जितना ही मिलेगा वो आधे गिलास दूध जितना भी नहीं मिलेगा 10 ग्लास दूध जितना भी नहीं मिलेगा एक गिलास दूध मैंने पिया है तो एक गिलास दूध का पोषक ही मुझे मिलेगा तो दूध जो है वह पोषण में परिवर्तित होता है ट्रांसफॉर्म होता है तो यह जो एनर्जी है यह जगत में पदार्थ जितने भी है एक स्वरूप में से दूसरे स्वरूप में ट्रांसफॉर्म होते हैं किंतु उनका जो यह यह है टोटल उनका वेट वो वेट सेम ही रहता है तो यह जो थर्मोडायनेमिक्स का नियम है स्वामी जी यहां पर आ करके अप्लाई करते हैं इट हैज आल्सो बीन प्रूव्ड दैट दिस सम टोटल ऑफ एनर्जी एक्सिस्ट इन टू फॉर्म्स यह ऐसा भी प्रूव हो चुका है कि यह जितनी भी एनर्जी है इस ब्रह्मांड में वो दो स्वरूप में उसका अस्तित्व है इट बिकम पोटेंशियल टोन डाउन एंड कामड एंड नेक्स्ट इट कम्स आउट ऑफ मेनिफेस्टेड एज ऑल दिस वेरियस फोर्सेस ये दो स्वरूप कौन से हैं जब प्रलय होता है तो पूरा विश्व ब्रह्मांड की जितनी भी एनर्जी है व सूक्ष्म स्वरूप में वो एकत्रित होती है एकत्रित होती है और जब यह सृष्टि स्थिति प्रलय की नई साइकिल जब प्रारंभ होती है नए सिरे से सृष्टि होती है तो यही सूक्ष्म स्वरूप एनर्जी धीरे-धीरे करके स्थूल स्वरूप धारण करती है तो ऐसा नहीं है कि पिछला जो ब्रह्मांड था उसका वेट मान लीजिए हम लोग एक उदाहरण के रूप में लेते हैं 1000 टन उसका वेट था पहले ब्रह्मांड का फिर जब प्रलय हुआ दूसरा ब्रह्मांड जब प्रकट हुआ तो उसका 2000 टन वेट है तो पहले ब्रह्मांड का था 1000 टन दूसरे ब्रह्मांड का है 2000 टन तो 1000 टन एक्स्ट्रा कहां से आया पहले ब्रह्मांड का यदि 1000 टन होगा तो दूसरे ब्रह्मांड का भी इतना ही होगा यह पहले वाले ब्रह्मांड के भीतर में जितने एटम्स थे जितनी एनर्जी थी वही सूक्ष्म स्वरूप में गई प्रलय के समय में सूक्ष्म स्वरूप धारण किया और नई सृष्टि होने के समय में वही पदार्थ और वही की एनर्जी स्थूल स्वरूप धारण करते हैं तो मान लीजिए कि उदाहरण के रूप में कि एक गाय है गाय का जैसे कि एक मनुष्य है मनुष्य का देहांत हुआ तो मान लीजिए मुझे जलाया गया मेरी राख में से यह राख मिट्टी में पड़ी मिट्टी को पोषण मिलकर के एक पौधा खड़ा हुआ पौधे का आहार करके एक मां ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया तो दूसरा जो बच्चा होगा उसका वेट मेरा वेट है उतना ही होना चाहिए जस्ट एक स्थूल उदाहरण के रूप में कह रहा हूं क्योंकि जो पदार्थ है इस जगत में वह तो सेम ही है पदार्थ कहीं वो परिवर्तित नहीं होते वह कम ज्यादा नहीं होते हैं तो यहां पर स्वामी जी सृष्टि स्थिति प्रलय की बात करते हैं प्रथम ब्रह्मांड में जितना भी मैटर है एनर्जी है द्वितीय ब्रह्मांड में प्रलय के बाद में द्वितीय ब्रह्मांड की सृष्टि होती है उसमें उतने ही पदार्थ है उतनी ही एनर्जी है अगेन इट गोज बैक टू द सेम क्वाइट स्टेट एंड अगेन इट मेनिफेस्ट दज इट गोज ऑन इवॉल्विंग एंड इवॉल्विंग थ्रू टर्नितिन की साइकल चलती ही रहेगी यह जो पदार्थ और एनर्जी जितने है पहले ब्रह्मांड में वो स्थूल रूप में है प्रलय के समय सूक्ष्म रूप में चले गए द्वितीय ब्रह्मांड में फिर से स्थूल रूप में आ गए फिर से प्रलय हुआ फिर से चले गए सूक्ष्म रूप में अनंत चक्र ये चल रहा सृष्टि स्थिति प्रलय का और उसके भीतर में यह जो पदार्थ है पदार्थ का वेट एनर्जी का मास वो इतना ही रहेगा पहले वाले ब्रह्मांड में जितना था उतना ही 1000 नंबर वाले ब्रह्मांड में भी उतना रहेगा 2000 वाले ब्रह्मांड में भी उतना रहेगा जितने भी ब्रह्मांड बनेंगे सेम वो मैटर और एनर्जी बने रहेंगे द कंट्रोल ऑफ दिस प्राणा एज बिफोर स्टेटेड इज व्ट इज कॉल्ड प्राणा याम यह जो प्राण है अभी यह जो हमने इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन की जो बातें की स्वामी जी योग की भाषा में उसको आकाश और प्राण कहते हैं और यही प्राण का नियमन ही प्राणायाम है मान लीजिए कि यह विश्व ब्रह्मांड जिस चीज का बना है प्राण का और आकाश का इसी प्राण के ऊपर में यदि हमारा संयम आ जाए नियमन आ जाए कंट्रोल आ जाए तो यह जो सृष्टि स्थिति प्रलय की जो साइकल है उसको भी तो हम नियंत्रित कर सकते हैं हम ठीक कर सकते हैं कि कब प्रलय होगा हम ठीक कर सकते हैं कि कब सृष्टि होगी कैसी सृष्टि होगी सृष्टि में जो यह जो स्ट्रक्चर होगा आकाश और प्राण का कैसा होगा कौन गरीब होगा कौन अमीर होगा कौन धनवान होगा यह सब कुछ हम ठीक कर सकते हैं ऐसी ईश्वरीय शक्ति हमारे में आ जाएगी यदि हम प्राण को समझे और प्राणायाम को सीखे तो यह टॉपिक जो है अद्वैत व यहां पर समाप्त होता है कल फिर दूसरा टॉपिक स्टार्ट करेंगे मेथड ऑफ प्राणायाम पहले तो स्वामी जी ने हमको इतना सब कुछ कह दिया कि यह प्राणायाम क्या है किस तरह से प्राण क्या है प्राण का स्वरूप क्या है किंतु फिर यह प्राणायाम खुद कैसे करें प्राण को नियमन कैसे करें वो मेथड हमको स्वामी जी कल बताएंगे तो फिर आज यहीं तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम त श्री राम कृष्ण पर मस्तु