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Swami Vivekananda's Kali the Mother ·

Kali the Mother: Readings from Swami Vivekananda's Poem 17 oct 2024

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः यहां पर अभी अप टू 17 आज से आज तक वह सीवियर स्टोम एलर्ट डिक्लेयर कर दिया है और रात को ऐसी बिजली चमक रही थी ऐसी जोर जोर से कि आधी रात को मेरी नींद खुल गई तो तो आज से हम पोयम स्टार्ट करते हैं कि फिलोसोफी डिस्कस करना इजी है पोयम डिस्कस करना बहुत ही डिफिकल्ट क्योंकि एक यहां पर दो चीज है मेरा एक साधु के साथ में बात हो रही थी बहुत पहले मैं जब बेलूर मठ में था उस समय तो मैंने उनको कहा कि आप तो व वेदांत अच्छा पढ़े हैं उपनिषद वगैरह तो मैंने उनको कहा कि आपका तो अच्छा स्टडी है उपनिषद का तो यदि हो सके तो मुझे थोड़ा-थोड़ा बताते रहिएगा तो वो मुझे क्या कहते पता है कि तुम किस तरह से पढ़ते हो उपनिषद को मैंने कहा कि ट्रांसलेशन ही पढ़ते हैं ऑफकोर्स ओरिजिनल संस्कृत किसको आता है यहां पर तो व कहते है कि देखो तुम ओरिजिनल संस्कृत जो है ना वैसे तो हम भारतीयों को संस्कृत थोड़ा बहुत तो समझ में आता ही है क्योंकि संस्कृत के बेस पर ही हमारी बाकी सब लैंग्वेजेस बनी हुई है तो ओरिजिनल संस्कृत में श्लोक जो कि पद में श्लोक तो पद में लिखे गए हैं पोएटिक मिटर में लिखे गए हैं उसका चैटिंग करो माने उपनिषद समझने के लिए उसकी फिलोसोफी तो अच्छी बात है शंकराचार्य की टीका और भाष्य भी है उपनिषद के ऊपर में फिर शंकराचार्य के भाष्य के ऊपर में फिर कितनी टिकाए लिखी गई है कितनी स्कूल्स ऑफ वेदांत डेवलप हुई है वो सब स्टडी करो दैट इज वन थिंग किंतु पोएटिक ब्यूटी ऑफ उपनिषद उपनिषद की एक जो कविता मय सौंदर्य जो है उपनिषदों का कविता मय सौंदर्य उसका भी आनंद लेना सीखो जस्ट जैसे कि कठोपनिषद है कितना कवित्वम उपनिषद है छंदों बद्ध करके कितना सुंदर रूप से उसके श्लोकों की रचना की गई है तो चैटिंग करो चैटिंग का भी एक आनंद है क्योंकि यह सब जो डीप फिलोसोफी भी है उसको सिर्फ फिलोसॉफिकल डिस्कशन करके ही अपने माइंड में नहीं जाएगा उसके लिए ना सबकॉन्शियस लेवल से या तो सुपरकॉन्शियस लेवल से इसको समझना पड़ेगा और इसीलिए यह जो बड़े-बड़े जो ऋषि मुनि थे हमारे इतने विद्वान उन्होंने छंदों बद्ध उपनिषद की इसीलिए रचना की कि हम चैटिंग करते जाए करते जाए और अपने सबकॉन्शियस में वह परकलेट होता जाए धीरे-धीरे ओवर लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम उसकी जो कवित्वम सौंदर्य जो है धीरे-धीरे करके हमारे मन को मोहित करता जाए और फिर एक समय ऐसा आएगा कि यह छंद अपने आप उसका जो गहन गुड अर्थ है ऑटोमेटिक अपने मन के सामने वो प्रकाशित होना शुरू हो जाएगा उसको समझने के लिए टीका और भाष्य की जद सहाय ले तो उसमें गलत कुछ नहीं है क्योंकि नेचुरली किस कांटेक्ट में यह सब उपनिषद लिखे गए थे किस परिप्रेक्ष्य में इसको हमको समझना है वह तो भाष्य का को पढ़ेंगे तो अच्छे से समझ में आएगा किंतु उपनिषद की जो ब्यूटी है इट स्टैंड्स ऑन इट्स ओन आपको भाष्य का की सहाय लेकर के ही उसको समझना है ऐसा कोई जरूरत नहीं है क्योंकि ऋषि मुनियों ने बहुत ही सोच समझ कर के समाधि में स्थित होकर के यह सब छंदों की रचना की है तो यहां पर भी ऐसा है काली के बारे में हम कितना ही फिलोसॉफिकल डिस्कशन कर ले अल्टीमेटली देखिए कि जो पोयम है यह पोएट्री जो है जिस छंद में स्वामी जी ने इसकी रचना की है उसका अपना एक सौंदर्य है अपना एक गुडा अथ है अपनी क्षुद्र बुद्धि से हम जो इसका अर्थ समझते हैं उससे कहीं गहन इसके अर्थ है किंतु यह सब अर्थ क्या है पता है काले समय यह सब धीरे-धीरे करके अपने सामने प्रकट होना शुरू होंगे हम कुछ ही दिनों में या कुछ ही क्लास में इसका संपूर्ण अर्थ नहीं समझ पाएंगे देयर आर सो मेनी लेयर्स लेयर्स आफ्टर लेयर्स आफ्टर लेयर्स के जितना भी हम इसके भीतर में जाते जाए उतना ही हमको नए-नए मीनिंग्स उसके मिलने शुरू हो जाएंगे सो पोयम इसको हम सिर्फ पढ़ते ही हैं थोड़ा बहुत अर्थ समझने का प्रयास करेंगे किंतु यह बात है जैसे कि मैंने कल परसों ना आपको एक ली द मदर पोयम किसी ने चैट की है टॉम ओल्टर बोलकर के एक है तो उसने यह पोयम चैट की है और बड़ा ही सुंदर म्यूजिक की भी रचना की गई है मुझे तो पता नहीं था मैंने दो-तीन साल पहले मुझे पता चला मैं जब ये सब थोड़ा सा सर्च कर रहा था उस समय तब से लेकर के ना मैं इसको बार-बार सुनता हूं जिस तरह से इसका चैटिंग हुआ है वह भी बहुत सुंदर है और जिस तरह से संगीत बद्ध किया गया है जिसने भी संगीत की रचना की है वह भी बहुत ही सुंदर दर है तो उसको सुनेंगे और यदि मुख स्त करके इसको बीच-बीच में चैट करेंगे चैटिंग करेंगे तो हमको उसके जो गुढ़ अर्थ है धीरे-धीरे करके समझ में आना शुरू होंगे तो स्वामी जी लिखते हैं और इसका परिप्रेक्ष्य क्या है पता है ना कि खीर भवानी में गए थे खीर भवानी में जाकर के और उस समय एक्चुअली ऐसा था कि निवेदिता और स्वामी जी यह दोनों मुख्य पात्र है जो स्वामी जी की जो काश्मीर सफर थी उस समय के निवेदिता के मन में बहुत ही ध्वंस रही थी कि यहां पर आकर के भारत में आकर के उसका जो कार्य है वह कैसे निपटाए गी यदि स्वामी जी को या तो फिर स्वामी जी के कार्य को अपना जीवन समर्पित किया है तो भारतीय समाज ही तो उस निवेदिता को स्वीकार नहीं कर रहा है यह ब्राह्मण अब्राह्मण उच्च वर्ण नीच वर्ण यह सब जो जो सब चल रहा था वहां के एक चरनी चलता है ना सोसाइटी में एक तो एक पुरानी प्रथा को लेकर के भारतीय समाज आगे बढ़ रहा है फिर यह ऊपर से ब्रिटिश साम्राज्य का जो एक शौक हमको लगा एक पूरे अपने मन प्राण हृदय को झंझर करके रखने वाली जो घटनाएं कुछ हो रही थी उस समय ये फेमिन हो रहे थे 1857 का जो फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस था भारत का वो हुआ फिर यह उसके बाद में भी भविष्य में बहुत कुछ होने वाला था फर्स्ट वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर तो यह सब जर्निंग भारतीय समाज में चल रहा था निवेदिता के मन में संदेह संशय प्रश्न बहुत सारे थे स्वामी जी के साथ में जब अमरनाथ यात्रा करने के लिए गई थी तो बहुत सारा उसके मन में जो उद्वेग था स्वामी जी को भी इस उद्वेग ने अफेक्ट किया था जब स्वामी जी ने एक समय ऐसा सोचा कि मैं सबसे दूर चला जाता हूं अकेले रहूंगा कुछ समय के लिए अकेले भ्रमण करूंगा और फिर जब स्वामी जी भ्रमण करके आए भी थे तो निवेदिता ने लिखा है कि उनके चेहरे पर अपार शांति हमको दृष्टिगोचर हो रही थी जैसे कि उनके हृदय में से शांति का समुद्र प्रकाशित होकर के सबके ऊपर में वो छा जा रहा था तो स्वामी जी के भीतर में वो ट्रांसफॉर्मेशन आया था तो ये खीर भवानी की कहानी है जहां पर स्वामी जी गए थे मां का भग्न मंदिर देखा स्वामी जी ने मां को कहा कि मैं यदि यहां पर रहता तो आपका मंदिर कभी भी भग्न नहीं होने देता लुटेरों का डके तों का मैं डट कर के मुकाबला करता तो मां खीर भवानी ने आकर के स्वप्न उनको दर्शन देकर के कहा बादशाह के का रखा करवे बेटा कौन किसकी रक्षा करेगा मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी ना कि तुम मेरी रक्षा करोगे मेरी इच्छा के अनुसार ही मंदिर का निर्माण हुआ था और मेरी ही इच्छा से मंदिर भग्न भी हुए हैं यह तो ऐसी बात हो गई कि मां के मंदिर का निर्माण करने की या तो फिर मां के मंदिर के बचाव करने की वो मथुर बाबू जब वो राधाकांत के मंदिर में गहने चोरी हो गए थे जवाहर रात तो फिर वह ठाकुर को उन्होने भगवान को कहते हैं कि आप कैसे भगवान है आपके खुद के गहनों की रक्षा नहीं कर पाए तब ठाकुर ने क्या कहा था कि अरे यह तुम्हारी कैसी हीन बुद्धि वाली बात है जो कि तीनों लोगों के मालिक है लक्ष्मी स्वयं जिनकी पद सेवा करती है उनके लिए तुम्हारे गहने पत्थर के बराबर है उसको तुम्हारा तुम्हारे लिए ही उसका इंपॉर्टेंस है ये तीनों लोगों के स्वामी के लिए इसका कोई भी इंपॉर्टेंस कुछ भी नहीं है तो वैसे ही यहां पर जद वही एनालॉजी या तो फिर वही उपमा यहां पर भी उपस्प्रिंग के मने इशारों पर चलता है उनके लिए एक तो क्या करोड़ मंदिर खड़े हो जाएंगे उनकी इशारे पर और जब वह नेगलेक्ट करेगी या तो फिर वह जब कहेगी तो ऐसे करोड़ मंदिर ध्वंस भी हो जाएंगे उसका इंपोर्टेंस सिफ अपने लिए है तो उस समय इस घटना के बाद में स्वामी जी ने इस पोयम की रचना की थी स्वामी जी क्या लिखते हैं द स्टार्स आर ब्लोटेड आउट द क्लाउड्स आर कवरिंग क्लाउड्स इट इज डार्कनेस वाइब्रेंट सोनेंट तारे जैसे कि छिप गए हैं बादलों प बादल एक के ऊपर एक घने बाद ल मंडरा रहे हैं और इस भयावह घनघोर अंधेरे में व जीवंत घनघोर अंधेरा चारों ओर छा गया है यहां पर मैंने वह हिंदी भी इसका ट्रांसलेशन कलेक्ट किया है इंग्लिश के साथ में किंतु जो हिंदी में जिस तरह से किया है मुझे वह इतना अच्छा नहीं लगा किंतु फिर भी मैं एक बार पढ़ लेता हूं हिंदी ट्रांसलेशन क्या कहता है छिप गए तारे गगन के बादलों पर चढ़े बादल कांप कर गहरा अंधेरा तो यहां पर सर्वप्रथम तो स्वामी जी प्रलय का वह वर्णन प्रारंभ करते हैं यहां पर देखिए जद जैसे कि हमने मैक्रो कजम माइक्रो कजम और बाकी भी स्वामी जी के कुछ वार्तालाप में देखा कि जब हम समाधि की ओर जाते हैं तो क्या होता है दो तरह के लय है दो तरह के प्रलय है एक तो कॉस्मिक लेवल पे दूसरा है इंडिविजुअल लेवल पर कॉस्मिक लेवल पर यदि देखे तो साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि एक बिग बैंग था फिर ये एक बिग क्रंच होगा बिग बैंग में जगत की सृष्टि हुई और बिग क्रंच में जगत का विनाश होगा तो ये मॉडर्न साइंस है हम लोग कहते हैं कि सृष्टि स्थिति प्रलय का यह चक्र अनंत रूप से चलता ही रहेगा और जब प्रलय होगा तब धीरे-धीरे करके एक के बाद एक जितने भी ग्रह है सितारे हैं तारे हैं एक के बाद एक उसमें विस्फोट होगा एक महा भयानक एक अग्नि प्रकट होगा जिसमें कि सब स्वाहा हो जाएगा सब कुछ दहन हो जाएगा तो यह जो कॉस्मिक लेवल पे जो प्रलय है हमारे इंडिविजुअल लेवल पे प्रलय क्या है तो है समाधि जैसे कि स्वामी जी कहते हैं कि जब सृष्टि का प्रारंभ होता है तो क्या होता है सबसे पहले तो अनाहत नाद सुनाई देता है अनाहत ध्वनि सुनाई देता है उसके बाद में से ओमकार प्रकट होता है ओमकार में से शब्द प्रकट होते हैं शब्दों में से पदार्थ प्रकट होते हैं जैसे गाय शब्द है तो गाय रूपी प्राणी प्रकट हुआ आम शब्द है तो आम रूपी फल प्रकट हुआ मनुष्य शब्द है तो मनुष्य रूपी हम प्रकट हुए तो शब्दों में से पदार्थ रूपी सृष्टि की रचना होती है तो अनुलोम और विलोम जब प्रलय होगा यानी कि हम समाधि की ओर जाना शुरू करेंगे तो यही साइकल रिवर्स में जाती जाएंगी जितने भी पदार्थ है पशु पक्षी प्राणी मनुष्य सब कोई अपने शब्द स्वरूप में फिर से विलीन हो जाएगा जितने भी शब्द है ओमकार में विलीन हो जाएंगे ओमकार अनाहत नाद में और अनाहत नाद फिर ब्रह्मण के भीतर में विलीन हो जाएगा तो यह जो विलीन होने की प्रक्रिया है उसका एक यह पोएटिक एक बड़ा ही सुंदर एक आकर है आकलन है कि जद प्रलय होगा चाहे इंडिविजुअल लेवल पे हो ना कि कॉस्मिक लेवल पे उस समय किस तरह का दृश्य खड़ा होता होगा और यह जो दृश्य स्वामी जी खड़ा कर रहे हैं इसका एक बड़ा एक हमारे लिए प्रैक्टिकल तात्पर्य क्या है पता है यदि हम मान ले कि हम जब ध्यान करते-करते इस प्रलय की कल्पना करते हैं तो माने सोच हम लोग इमेजिन कर सकते हैं कि अल्टीमेटली मुझे इस जगत के साथ में बांध कर के क्या रखता है मेरे लिए इस सृष्टि का क्या अर्थ है जगत के साथ में मेरा क्या रिलेशन है तो मेरे इंद्रिय के सुख भोग ही तो इसके साथ में तमस और रजस रूपी जितने भी रिलेशन है वो चाहे मुझे अपने काम की चिंता हो अपने कार्य की में जो भी मेरा जॉब है ना कि बिजनेस है उसकी चिंता हो ना कि रिलेशनशिप है मेरी उसके साथ में वो मेरे सर पर बैठे हुए हो या तो फिर ऐसे हजार चीजें हैं जब हम ध्यान करने को बैठते हैं तो आकर के हमारे मन को ग्रसित कर लेती है उस समय यह प्रलय की कल्पना करनी है जितने भी रिलेटिव्स है जितना भी कार्य है जितनी भी चिंताएं हैं जितने भी रिग्रेट्स है जितनी भी एंबिशन से सब कोई जैसे कि सब कुछ जैसे कि इस प्रलय रूपी महा होमा अग्नि के भीतर में हम आहत कर दे रहे हैं हमारा जो व्यक्तिगत जगत है व्यक्ति इस विश्व के साथ में मेरा जो नाता है वह सब कुछ एक मृत्यु रूपा इस काली के चरणों में हम अर्पित कर कर दे रहे हैं तो यह महाप्रलय की यह कल्पना वो हम ध्यान के समय कर सकते हैं बहुत बार देखिए कि तांत्रिक साधक होते हैं ये शब साधना क्यों करते हैं स्मशान में जाकर के साधना क्यों करते हैं क्यों क्योंकि जब तक जीवन है तब तक आशा है और जब तक आशा है तब तक यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि का चक्र चलता ही रहेगा चलता ही रहेगा हम अपने मन को यह सब चीजों से बिल्कुल भी हटा नहीं पाएंगे किसी ना किसी स्वरूप में यह सब चीजें आकर के अपने सर पर मंडराती ही रहेगी इसके लिए मृत्यु की कल्पना क्यों प्रलय की कल्पना क्यों क्योंकि हम उस चीज के साथ में अपना संपर्क विच्छेद कर सके ठाकुर कहते थे कि जब वह ध्यान करने को बैठते थे तब देखते थे कि एक त्रिशूलधारी सन्यासी उनके सामने बैठा है गैरिक परहित गरुवा परहित सन्यासी त्रिशूल लेकर के उनके के सामने बैठता था और ज वो कहता था धमकी देता था ठाकुर को यदि तुम्हारा मन इधर-उधर भटका तो याद रखना कि ये त्रिशूल तुम्हारे सीने में मार दूंगा देखिए कि ठाकुर को भी ये जरूरत पड़ती थी धमकी की ना हम लोग इमेजिन करके देख लीजिए हम लोग ध्यान करने को बैठते हैं तो हजार चीजों में मन चलता है किंतु हम लोग ऐसा तो सोच कर के अपने मन को खुश रखते होंगे कि चलो एटलीस्ट ठाकुर तो थे अवतार वरिष्ठ आया कि वो जब ध्यान करते थे ध्यान करने को बैठते थे अपने मन को जब आदेश देते थे कि यह जो भैरव की मूर्ति है पत्थर की उसी की तरह स्थिर होकर के ध्यान करना है और सही में जब ध्यान करने को बैठे उनके अंग प्रत्यंग जैसे कि कोई ताला लगा देता है दरवाजे को वैसे ही अंग प्रत्यंग को ताला ल लग जाता था खट खट करके आवाज होती थी पैरों से चालू होकर के कमर से हाथ गर्दन पूरे शरीर को जैसे ताला लग जाता था और ध्यान समाप्त नहीं होता था उसका कोई कंक्लूजन जब तक नहीं आता था तब तक वह ताला खुलना वह शरीर को अपने को खड़ा होना असंभव हो जाता था तो यह सब वर्णन पढ़ कर के हमको लगता है कि चलो एटलीस्ट कोई तो है कि जो कि एकदम मैंने मन स्थिर रख के ध्यान कर सकता है किंतु देखिए कि ठाकुर जसे ठाकुर को भी इस तरह से सन्यासी को आकर के धमकी देनी पड़ती थी कि थोड़ा भी विक्षेप प्रकट हुआ मन में तो याद रखना कि यह त्रिशूल मार दूंगा तुमको तो ये मृत्यु भय या यह प्रलय की कल्पना या तो प्रलय की आ आराधना अपने मन को संसार से संपूर्ण रूप से समेट करके ईश्वर के पाद पद्म में एकीकृत कर देना इस ईश्वर के साथ में एकीकृत हो जाना एकी भूत हो जाना इसके लिए यह सहाय करता है द स्टार्स आर ब्लोटेड आउट जितने भी सितारे हैं गगन में सब अदृश्य हो गए हैं क्यों बिकॉज द क्लाउड्स आर कवरिंग क्लाउड्स घनघोर बादल एक के ऊपर में एक मंडरा रहे हैं इट इज डार्कनेस वाइब्रेंट सोनेंट यह भयावह घनघोर अंधेरा जीवंत अंधेरा देखिए यह वाइब्रेंट शब्द यहां पर यूज किया है स्वामी जी ने घन अंधेरा सिर्फ घनघोर अंधेरा नहीं है यह जीवंत अंधेरा है इसके भीतर में जीवन छुपा हुआ है किंतु यह कौन सा जीवन यह अपना सांसारिक जीवन नहीं इंद्रिय ग्रस्त जीवन नहीं इंद्रियों के परे का जो जीवन है जीवन तत्व जो है जो कि आत्म तत्व है आत्म तत्व से पूरा आवत हुआ यह घनघोर अंधेरा है यह ठाकुर एक बार कहते हैं कि अंधेरी रात में ध्यान करना यह तंत्र का मत है तांत्रिक लोग इस तरह से ध्यान करते हैं तो इस तरह से घनघोर अंधेरे में ध्यान करना यह अंधेरा आत्म तत्व का प्रतीक है इन द रोरिग वर्लिंग विंड आर द सोल्स ऑफ अ मिलियन लुनेटिक्स इस भयावह तेज तूफान के भीतर में लाखों पागलों की आत्माएं मंडरा रही है जस्ट लूज फ्रॉम द प्रिजन हाउस रंचिंग ट्रीज बाय द रूट्स स्वीपिंग ऑल फ्रॉम द पाथ अभी जेल खाने में से छुटी हुई है रास्ते में जितने भी पेड़ पौधे जमीन जोने मकान जो कुछ भी आया सबको तहस नहस कर दे रही है पेड़ों को अपनी जड़ मूल से उखाड़ करके फेंक रही है रास्ते में जो कुछ भी आया उन सबका सफाया कर दे रही है देखिए कि यह जो वर्णन है यह स्वामी जी ने 18985 साल के बाद में ही हिरोशिमा और नागासाकी के ऊपर में जो न्यूक्लियर बम फेंका जाता है उसका जो वर्णन जिन लोगों ने किया है उसके साथ में यह हूबहू मिल जाता है यदि प्रलय हो प्रलय पृथ्वी पर किस तरह का प्रलय होगा पूरी पृथ्वी ध्वंस हो जाएगी किस तरह से पूरा विश्व ब्रह्मांड कैसे ध्वंस हो जाएगा यह तो हमको आज कल्पना ही करनी है किंतु न्यूक्लियर एक्सप्लोजन एक ऐसा चीज है कि यदि उसके रास्ते में आप खड़े हैं तो मोमेंट जो व्यक्ति खड़ा है उसको तो समझ में आएगा कि प्रलय किसको कहते हैं पूरा आकाश जमीन सब कुछ नष्ट तहस वहस हो जाएगा यह जो स्टोम फ्रंट जिसको कहते हैं ना सबसे पहले तो वह मशरूम क्लाउड दिखाई देगा मशरूम क्लाउड आकाश में व ऊपर उठेगा और धीरे-धीरे करके पूरे मने जो व्यक्ति खड़ा है उसके लिए तो पूरा जगत ही जैसे कि ढक देगा और उसके बाद में वो स्टोम फ्रंट उसको दिखाई देगा स्टोम फ्रंट अर्थात कि एक्सप्लोजन के बाद में जो उसका जो विस्फोट फैलता है धीरे-धीरे करके वो विस्फोट देखेंगे कि उसके रास्ते में जो कुछ भी आता है मैंने कुछ-कुछ वीडियोस देखे हैं यह लोग साइंटिस्ट लोग हैं यह लोग क्या है कि लोगों को डराने के लिए ऐसे कुछ वीडियो बनाए हैं कि किस तरह से न्यूक्लियर एक्सप्लोजन होगा तो आपको क्या दिखाई देगा क्योंकि क्या है ना कि बहुत बार यह नेशनलिज्म का जो नशा अपने सर पे उठ जाता है तो हम लोग बोलना शुरू कर देते हैं अरे उसके ऊपर में एक न्यूक्लियर बम फेंक दो किंतु यदि सही सही में न्यूक्लियर वॉर होगा तो यह मनुष्य सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी जैसे कि आइंस्टाइन को किसी ने पूछा था कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में तो इतने भयानक वेपंस सब शस्त्र आ युद्ध सब हमने देखे डेवलप हुए थर्ड वर्ल्ड वॉर में क्या होगा तो आइंस्टाइन क्या कहता है कि थर्ड वर्ल्ड वॉर में किस तरह के शस्त्र व्यवहारिक होने डेवलप होंगे पता नहीं किंतु फोर्थ वर्ल्ड वॉर है चतुर्थ विश्वयुद्ध पत्थरों से और लाठियों से लड़ा जाएगा क्यों क्योंकि थर्ड वर्ल्ड वॉर में जो न्यूक्लियर एक्सप्लोजन जो विनाश होगा हमारी सभ्यता 10000 साल पीछे चली जाएगी यदि हम जीवित रहे तो तो यह जो न्यूक्लियर एक्सप्लोजन के जो कुछ-कुछ वीडियोस मैंने देखे हैं मैंने हृदय को दहला देने वाले वीडियोस है आकाश की हाइट का एक स्टोम फ्रंट दौड़ा चला आ रहा है रास्ते में जितने भी म मकान है स्काई स्क्रैपर्स है जहाज है मनुष्य है सबको वह जैसे कि अग्नि के भीतर में आहत करता हुआ तो जैसे वह न्यूक्लियर एक्सप्लोजन का वर्णन या तो फिर विजुअल हमको दिखता है उसी को स्वामी जी ने 50 साल पहले प्रलय की कल्पना में इस तरह से चित्रांक किया था इन द रोरिग वर्लिंग विंड भयानक रूप से गरजते हुए ये चक्रवात के भीतर में आर्द सोल्स ऑफ ए मिलियन लुनेटिक्स लाखों पागलों की आत्माएं इस चक्रवात के साथ में धसी आ रही है जस्ट लूज फ्रॉम द प्रिजन हाउस अभी वह जेल से छुटी हुई रंचिंग ट्रीज बाय द रूट स्वीपिंग ऑल फ्रॉम द पाथ पेड़ों को जड़ों से उखाड़ हुई रास्ते में जो कुछ भी आया उन सबका या सफाया करती हुई देखिए कि यह वर्णन जैसे कि लूज जस्ट लूज फ्रॉम द प्रिजन हाउस ये दक्ष यज्ञ विनाश का जो चित्र हमारे पुराणों में अंकित किया गया है कि जब भगवान शिव को पता चला कि सती का मृत्यु हुआ है और उनका क्रोध जो पनप पड़ा तो उन्होंने यह वीरभद्र और रुद्र काली को आवाहन किया और वह शिव के जितने भी भूत प्रेत पिशाच पलित है सबको लेकर के यज्ञ के ऊपर में आक्रमण करने के लिए गए तो वो जो भूत और पि और इन सब की जो मने चीख होगी चिल्लाहट होगी वह देख कर के वहां के लोगों के मन में किस तरह का भय प्रकट हुआ होगा जब भगवान राम ने सेतु बंद सेतु बनाया और फिर वानरों और न सबके साथ में जब लंका पर आक्रमण किया तो वानरों की सेना जो चली आ रही है चिकती चिल्लाती राक्षसों की तरह मने राक्षस खैर इसके पास में राक्षस की सेना थी रावण के पास में किंतु राक्षसी सेना के भी हृदय दहला दे इस तरह का भयावह चित्र यह भगवान राम की वानर सेना ने श्री लंका के ऊपर में खड़ा किया होगा तो यह जो भयावह मृत्यु दूत हमारे सामने धस करके आ रहे हैं तो हमारी वासनाओं को खा जाने के लिए हमारी इस जगत के साथ में जो कोई भी नाते हैं रिश्ते हैं अपनी एंबिशन से जो कुछ भी है उसको भक्षण कर देने के लिए उसका सफाया कर देने के लिए जैसे कि जेल में से छूटे हुए पागलों की तरह यह प्रेतात्मा एं हमारी ओर धसी आ रही है और हम क्या देखते हैं कि रास्ते में जितने भी पेड़-पौधे हैं जो भी है उस सबका विनाश करती हुई और जैसे ही हमारे पे आक्रमण करेगी तो हमारा क्या विनाश कर लेगी हमारे भीतर में जो वासना एं हैं जड़ मूल सहित निकाल कर के फेंक देगी हमारे भीतर में जो कुछ भी अंकट बंकट है जो कुछ भी है उस सबका यह सफा कर देगी इसका हिंदी में एक बार पढ़ता हूं गरजते तूफान में शत लक्ष पागल प्राण छूटे जल्द कारागार से द्रुम जड़ समेत उखाड़ कर हर बला पथ की साफ करके द सी हैज जॉइन द फ्रे ने समुंदर ने भी जैसे कि इस महा तूफान में अपना योगदान किया है एंड स्वस अप माउंटेन वेव्स और यह पहाड़ की तरफ गह विराट काय तरंगे हमारी ओर फेंक रहा है टू रीच द पीची स्काई यह पहाड़ समी तरंगे जैसे कि घनघोर आकाश के साथ में मिलन के लिए उत्सुक वो हवा में उछल रही है और हमारी ओर धस रही है द फ्लेश ऑफ लरिंग लाइट रिवर्स ऑन एवरी साइड अ थाउज थाउज शेड्स ऑफ डेथ बिक्र मम एंड ब्लेक और जब इस भयावह तूफान के भीतर में बिजली गरजती है तो चारों ओ जैसे कि मृत्यु के हजार हजार चेहरे हमारे सामने पल भर के लिए उजागर कर देते हैं प्रकाशित कर देते हैं यह जो तूफान भयावह तूफान जो हमारी ओर धस आ रहा है यह जो समुंदर की लहरें विराट लहरें हमारे भीतर में रहते जितने भी वासना कामना है उसका सफाया करने के लिए उसका संहार करने के लिए धसी आ रही है इस तूफान के भीतर में जब भी बिजली की चमक होगी जब भी बिजली चमकेगी उसी समय हमको क्या दिखेगा जितनी भी बार बिजली चमकती है अंधेरे में यह जो लाखों पागल इस तूफान के भीतर में प्रेत भूत पिशाच पलित राक्षस महाकाली स्वयं उनके जो चेहरे हैं मृत्यु रूपी चेहरे थाउज थाउज शेड्स ऑफ डेथ बि ग्राइम इन ब्लैक घनघोर काले भयावह चेहरे इस बिजली के प्रकाश में क्षण भर के लिए हमारे सामने प्रकाशित हो जाते हैं स्कैटरिंग प्लेगस एंड सोरोज डांसिंग मेड विथ जॉय कम मधर कम चारों ओर जैसे कि भयावह बीमारी प्लेग को फैलाती हुई पागल की तरह नाचती हुई मां तुम आओ तुम आओ मां काली को यदि हम एक सौम्य मूर्ति के रूप में जनरली हम देवताओं को किस तरह से कल्पना करके देखते हैं कि देवता यदि प्रकट हो गए तो जमीन जैसे कि धन धान्य से परिपूर्ण हो जाएगी मनुष्य के हृदय में आनंद और विश्वास से भर जाएंगे यह पृथ्वी जैसे की धरा स्वर्ग सम हो जाएगी पृथ्वी पर ही जैसे कि स्वर्ग प्रकट हुआ है ऐसा हमको लगेगा जद ईश्वर प्रकट होते हैं किंतु यह मृत्यु रूपा काली जब प्रकट होगी तब क्या होगी चारों ओर प्लेग रूपी महामारी बटोर हुई पागल की तरह हंसती हंसती नाचती हुई मां स्वयं मृत्यु रूपा काली प्रकट होगी और हम उनको आवाहन देंगे कम मधर कम आओ मां आओ फॉर टेरर इज ई नेम डेथ इज इन दाई ब्रेथ क्योंकि कि मृत्यु तुम्हारा नाम है भय तुम्हारा नाम है और मृत्यु तुम्हारी सांसों सांस में बसी हुई है एंड एव्री शेकिंग स्टेप डिस्ट्रॉयज अ वर्ल्ड फॉरएवर और जितने भी नृत्य करते तुम्हारे कदम है एक एक जगत का विनाश करते रहे हैं धाव टाइम ओ समय ओ महाकाल द ओल्ड डिस्ट्रॉयर ओ महाकाली महा काल तुम सर्व संहार मई हो कम मधर कम हु डर्स मजरी लव आओ मां आओ जो मिजी को आवाहन करता है जो दुख दर्द कष्ट को प्रेम करता है क्यों क्योंकि जितना ही हम इस दुख दर्द कष्ट के भीतर में रहेंगे उतना ही जैसे कि हमारी यह जन्मो जन्म की वासना है वो विच्छेद होती जाएगी एंड हग द फॉर्म ऑफ डेथ और मृत्यु के रूप को जो आलिंगन करता है मृत्यु को आलिंगन कौन करेगा जिसने यह समाज के ऊपर में से जिसका मोह भंग हो गया है जीवन जीने की तृष्णा बुद्धिज्म में तृष्णा शब्द व्यवहार होता है ये तृष्णा या तो फिर पाली में कहेंगे तन्हा यह तन्हा या तृष्णा क्या है कि जीवन जीने की प्यास सब समय मुझे इस जीवन के साथ में जुड़ी हुई यह चीजें हैं वह सब समय इस की पिपासा मुझे लगी हुई है तो यह पिपासा छिपाने की यह जो प्यास है उसको कहते हैं तृष्णा तो हम जो कि जिन्होंने इस तृष्णा से मुक्ति पा ली है वह मृत्यु को आलिंगन करने के लिए तैयार बैठे हैं एंड हग द फॉर्म ऑफ डेथ डांस इन डिस्ट्रक्शन डांस टू हिम द मदर कम्स मां किसके पास में आती है हु डर्स मजरी लव जो कि भ वह कष्ट को वर्ण कर लेता है एंड हग द फॉर्म ऑफ डेथ और मृत्यु को आलिंगन करता है डांस इन डिस्ट्रक्शन डांस मा कालिका जो तांडव नृत्य है उसके साथ में कदम से कदम मिलाकर के तांडव नृत्य जो करता है टू हिम द मदर कम्स जिसने मृत्यु को वर्ण किया है जिसने यह तांडव नृत्य में सहकार दे रहा है उसके पास में यह मां का आती है और उसकी जन्मो जन्म की प्यास छुपा करके अमृत पान करवा करके यह प्यास छुपा देती है हमारे भीतर में जो प्यास है इंद्रियों के जितने भी सुख है जितने भी भोग है अब जितने ही हम उसका पान करते रहेंगे यह प्यास कभी बुझेगी नहीं न जातु काम कामा न उपभोग न श्यतीज भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि काम का भोग करके काम का समन नहीं होने वाला है यह तो ऐसा हो गया कि आपको अग्नि को बुझाना है और अग्नि को बुझाने के लिए आप उसके भीतर में घी डालते हैं अग्नि के भीतर में घी डालेंगे तो अग्नि बुझे नहीं वो और ज्यादा प्रज्वलित हो जा जाएगा तो काम का उपशम काम की पिपासा से काम का पान करके नहीं होने वाला है वो अमृत का पान करके ही काम का विनाश होने वाला है काम रूपी प्यास वो शांत होने वाली है तो जो इस महा भयानक कष्ट को वर्ण कर लेता है मृत्यु के साथ में तांडव नृत्य करता है मृत्यु को आलिंगन करता है उसी के पास में यह मां काली प्रकट होती है तो यह थी पूरी पोयम और देखिए कि इतनी छोटी सी पोयम में स्वामी जी ने कितने सुंदर रूप से यह महा भयानक प्रलय का वर्णन किया है कि हम जब ध्यान करें तो इस प्र के बारे में सोचे प्रलय की कल्पना करें और मान ले कि मृत्यु अभी हमारी नजर के सामने आई आकर के ही खड़ा है और मृत्यु का मने मृत्यु रूपा काली का हमारे पर आशीर्वाद आएगा ही आएगा यदि हम इस मृत्यु को वर्ण कर लेते हैं तो आज बड़ा ही एक इंटेंस डिस्कशन हुआ आज यहीं पर करते हैं समाप्त और आगे का कल देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु बुते पहरे बुते पहरे देखो ठाकुर कहते हैं ना कि कांटे से कांटा निकालना है अर्थात कि मृत्यु से मृत्यु भई का संहार करना है एक्चुअली देखिए मृत्यु भय कहां से आता है पहले तो यह एनालिसिस करना है मनुष्य को भय किस चीज है एक्चुअली हमको मृत्यु का भय नहीं है हमको बिछड़ने का भय है हमको वियोग का भय है कि ये जितने भी प्रिय पात्र है यह जितने भी प्रिय चीजें हैं यह जितने भी प्रिय आशाएं हैं हमारी ये आशाओं से आशाओं को यदि हम त्याग करेंगे तो हमारे मन में डर खड़ा होता है मैंने बहुत सारे लोगों के मुंह से मैंने यह सुना है कि साधु नहीं बनना चाहते यहां पर बहुत सारे डिवोटा आते हैं ना तो आके कहते हैं महाराज हम भी साधु हो जाते किंतु और यह ब्रह्मचर्य पालन करना त्याग करना कौन सी बड़ी बात है किंतु हमारे मां-बाप को छोड़ नहीं पाए इसलिए हम लोग साधु नहीं बने एक्चुअली देखिए कि साधु होना इसका अर्थ ही है मृत्यु को वर्ण करना और मृत्यु के भीतर का रहस्य क्या है डर क्यों लगता है जो प्रिय पात्र है प्रिय संसार है प्रिय संसार की जो हमारी आशाएं है वो नहीं छूटती वो छोड़ने का डर लगता है जिस क्षण ये आशा पाश जब छूट जाएगा आशा पाश से मुक्त हो जाएंगे उसी क्षण मृत्यु हमको जैसे कि अपना प्रिय लगने लगेगा तो इसलिए यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि मृत्यु को समझो और मृत्यु का भय मृत्यु से ही काट दो देखिए जैसे आपने पहले कहा कि मनुष्य सबसे पहले तो अपने को ही अ अपने को ही सबसे ज्यादा चाहता है इस शरीर को ही तो एक्चुअली शरीर को या अपने को नहीं चाहता अपने भीतर का जो छोटा क्षुद्र अहम है उसको चाहता है दो अहम है तो एक विराट अहम है जो कि आत्म स्वरूप है और यह छोटा अहम है तो छोटे अहम को हम चाहते हैं इस छोटे अहम से मुक्ति पानी है दूसरा कि यह जो पूरा कल्पना है या कल्पना ही नहीं वास्तविकता है कल हमने देखा ना कि प्लेग है महामारी है इसके रूप में मृत्यु आता है इसकी कल्पना क्यों है तो यह सिर्फ कल्पना ही नहीं है कल जैसे हमने देखा था कि शरत महाराज और राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंद स्वामी शारदानंद दोनों ने ही इस मृत्यु को या तो फिर महामारी को एक विकृत विकट चेहरे के रूप वाली एक स्त्री के रूप में देखा था तो माहाकाली यह मृत्यु को बटोर हुई वह सही में आती है और जब इसकी कल्पना करेंगे इसकी आराधना करेंगे तो यह जगत के ऊपर में से अपना मोह कम होगा जैसे कि वह नारद मुनि की वो कहानी है कि वह नारद मुनि ने वो भगवान के साथ में जा रहे थे बात-बात में पूछ लिया कि यह माया क्या है तो भगवान ने कहा कि एक काम करो मुझे प्यास लगी है तुम इस गांव में जाकर के मेरे लिए पानी लेकर आओ एक गिलास तो नारद मुनि गए गांव में एक गिलास पानी मांग रहे हैं एक लड़की ने आकर के पानी दिया तो उस लड़की के मोह में पड़ गए उसके साथ में विवाह किया विवाह के बाद में संतान उत्पत्ति हुई उसके बाद में वहां पे भयानक जल और वृष्टि और यह पूरा ये फ्लड आ गया तो फ्लड में बच्चे भी बह गए और पत्नी भी बह गई अपने अकेले रोते रहते हैं बैठ कर के तो उस समय भगवान आकर के कहते हैं कि अरे नारद तुमको तो मैंने पानी लेने के लिए भेजा था पानी कहां है तो उनको पता चला कि देखिए क्षण भर में सृष्टि स्थिति प्रलय सब कुछ हो गया उन्होंने शादी भी कर ली बच्चों को भी प्रकट किया संसार कर रहे हैं फिर ये बारिश और यह तूफान आया बच्चे परिवार सब बह गए और फिर से ईश्वर के पास में आ गए तो जब तक जगत का विनाश नहीं होगा तब तक यह मने जगत का विनाश होगा यह भी तो हमको पता होना चाहिए कि जगत के ऊपर में कितनी ही हमारी आसक्ति हो अपने अहम का विनाश और जगत का विनाश दोनों अवश्य भावी है आज नहीं ना कल होना ही है त्याग या तो फिर अमृत त्व ही इसके परे एकमात्र रियलिटी है किंतु यह अन्य लोग तो है नहीं ना आत्मन तो एक ही है आत्मन का ही विभिन्न जब कोई भी महामारी होता है न्यूक्लियर एक्सप्लोजन होता है तो सभी का मृत्यु होगा माने जो साधक है जो कि साधक नहीं है तो यहां पर ऐसी बात है कि देखिए कि ऐसा बार-बार होता रहेगा इतिहास में तभी तो हमारे मन में यह बात दृढ़ होगी कि आज नहीं ना कल महामारी या तो यह विनाश सहित मृत्यु आने ही वाला है जो कि स्मार्ट है जिन लोगों में थोड़ी सी भी अकल है पहले से ही अपने जीवन का गठन इस तरह के करते हैं कि जब महामारी आए तब वह तैयार रहे जैसे कि ठाकुर की उपमा है ना कि काच की बोतल में कविराज मकर ध्वज तैयार करते हैं फिर मकर ध्वज तैयार हो जाने के बाद में बोतल को रखा तो भी क्या बोतल को तोड़ा तो भी क्या तो वैसे ही अपने मन के भीतर में अमृत तत्व रूपी आत्म साक्षात्कार हम तैयार रखें उसके बाद में महामारी आई तो भी क्या ना आई तो भी क्या हम पहले से ही तैयार होकर के बैठे हैं