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ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद वॉल्यूम टू पेज नंबर 211 कॉस्मो द मैक्रो कजम जो स्वामी जी का जो लेक्चर है ज्ञान योग के ऊपर में अभी तक स्वामी जी ने हमको स्टेप बाय स्टेप मॉडर्न साइंस का सहारा लेकर के यह बताया कि किस तरह से इस विश्व ब्रह्मांड को हम समझ सकते हैं और अभी यहां पे यदि जो लोग क्रिश्चियन थियोलॉजी और वेस्टर्न साइंटिफिक फिलोसॉफिकल डेवलपमेंट समझते हैं उनको पता चलेगा कि जिन थिरी को एंटागनिस्टिक माना जाता था धर्म के विरुद्ध में माना जाता था वह है इवोल्यूशन और यह जो मॉडर्न साइंस उस उसका ये जो लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी थर्मोडायनेमिक्स का फर्स्ट प्रिंसिपल इन दोनों की सहाय से इन दोनों को स्वामी जी ने वेदांत के साथ जोड़ा और हमको एक यह जो इन दोनों का क्या कहेंगे कॉमिनेशन की हार्मोनाइजेशन कहो ऐसा एक स्वामी जी ने दिया है अभी इस तरह के हार्मोनाइजेशन के ऊपर में हमको एक प्रश्न यह हो सकता है जैसे कि मॉडर्न साइंस कहता है कि सब कुछ एमपिर कल होना चाहिए जब तक आप प्रयोग करके इसको सिद्ध नहीं करेंगे या तो फिर मैथमेटिकल इक्वेशन के द्वारा यदि आपकी थिरी को प्रूव नहीं करेंगे तब तक वह फिलोसोफी ही रहेगी तब तक वह स्पेक्युलेटिंग सोसाइटी वाले बोलते रहते थे कि वह महात्मा है तिबेट और वे लोग आकर के हमको दर्शन देते हैं और वह जो उनके दर्शन के अनुसार हम लोग कार्य करते हैं बोलकर के थियोलॉजिकल स थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने बहुत सारे फॉलोअर्स बना दिए थे किंतु हुआ क्या कि यह थ थियोसोफिकल सोसाइटी का अमेरिका में जो उनका इंचार्ज था उनका जो हेड था मिस्टर जज यह जज ने क्या किया वही तिबेट महात्माओं का नाम करके उसने सोसाइटी के पैसे अपने पॉकेट में डाल दिए अब जब लोगों को पता चला तो लोग सोचने लगे कि अरे यह महात्मा यदि सही तो वो किस तरह से लोगों को इस तरह का भ्रष्टाचार या तो फिर इस तरह का गलत काम करने को प्रेरित करेंगे या तो फिर उनको अलाउ करेंगे यह तो संभव ही नहीं है यदि आपके तिबेट के महात्मा सूक्ष्म रूप से आकर के आपको दर्शन देंगे वो गलत बात थोड़ी ना कहेंगे हम लोग जद ऐसा कहेंगे कि मुझे ठाकुर ने दर्शन दिया और ठाकुर ने कहा चोरी करो तो माने या तो हम झूठ बोल रहे हैं या तो ठाकुर ने कभी दर्शन दिया ही नहीं है वो ठाकुर ने जो बात कही ना कि इस तरह से कोई उटपटांग बातें कर रहा था तो ठाकुर बोलते हैं कि कोई इस तरह से कह रहा है जैसे कि मेरे अश्व साला में बहुत सारी गाय है ना कि गौशाला में बहुत सारे घोड़े हैं व क्या बोला था व दो में से एक बोला था जो भी है बहुत सारे घोड़े हैं वहां पर मेरे गौशाला में तो कैसे घोड़े हो सकते उसके पास घोड़े वगैरह कुछ नहीं है तो और किने कहा कि ना ही घोड़े है ना ही गाय है कुछ भी नहीं है उसके पास तो इस तरह की बेत की बातें जो करेगा तो वो उसमें हम सच कैसे मान ले राइट तो अभी यह थियोसोफिकल सोसाइटी वाले ऐसी बड़ी-बड़ी बातें तो कर रहे हैं किंतु भीतर में पूरा भ्रष्टाचार है तो जो लोग इस तरह से साइंस रिलीजन या तो कोई भी नया थिंकिंग चलाना चाहते हैं तो प्रश्न होता है कि क्या ये फिलोसोफी है य स्पेक्युलेटिव कर सकते हैं जिसको कि आप मैथमेटिक्स की मदद से इसके इक्वेशन सॉल्व कर सकते हैं और फिर उसी साइंटिफिक प्रिंसिपल के ऊपर में आप कोई टेक्नोलॉजी खड़ी कर सकते हैं जैसे सॉलिड स्टेट फिजिक्स है आप कहा जाएगा कि ये सॉलिड स्टेट फिजिक्स अर्थात कि ये वो एक सिलिकॉन वेफर है उसमें इतने सारे इलेक्ट्रॉन इधर से उधर दौड़ रहे हैं तो ये आप बोलेंगे अरे ये जो तिबेट एन महात्मा आकर के सूक्ष्म स्वरूप से बोलते हैं और वो सिलिकॉन वेफर में इलेक्ट्रॉन दौड़ रहे हैं दोनों में डिफरेंस क्या है बताओ दोनों तो स्पेक्युलेटिंग हैं कि हम लोग तो कन्वींस है आप नहीं कन्वींस हो रहे तो एटलीस्ट उन लोगों ने इस सिलिकॉन वेफर पे कंप्यूटर मोबाइल ये इतना सब कुछ बना दिया जिसको कि हम प्रतिदिन इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसका तो एप्लीकेशन है यदि कोई साइंटिफिक प्रिंसिपल है वो तो हवाहवा में नहीं होता है तो यदि उसका एप्लीकेशन है डे टू डे एप्लीकेशन है वाइड स्प्रेड एप्लीकेशन है जहां पे भी चाहो आप जिस लेबोरेटरी में आप सेम कंडीशन खड़ी करेंगे तो सेम एक्सपेरिमेंट करके उसको आप सेम रिजल्ट मिलेगा दैट मींस इट्स अ साइंस इट्स अ लॉ ऑफ नेचर वो कोई हमारे दिमाग की कल्पना नहीं है हमारा स्पेक्युलेटिव है या कार्ल मार्क्स है या तो फिर इवन इकोनॉमिक्स है इवन ये बहुत सारी थिंकिंग सिस्टम है व वेस्ट यह बाइबल में जैसे कहा गया है कि एक नोहा नोहा बोल कर के एक था उसने एक बहुत बड़ी एक नौका बनाई उसको फ्लड आने वाला था उसको पता था कि नौका बनानी है उस नौका के भीतर में उसने बहुत सारे पशु पक्षी प्राणी वगैरह इकट्ठा कर दिए तो फिर वह बच गए जब फ्लड चला गया तो जो नौका में जो बचे थे उससे उसने सृष्टि की फिर से रचना की तो यह सब तो आधर लेजेंड्स है या तो फिर दंत कथाएं हैं या तो फिर कहानियां है इसका क्या प्रूफ क्या है कि यह सही में हुआ था कि नहीं हुआ था तो ऑन वन हेड साइंट प्रिंसिपल है ऑन द अदर हैंड है स्पेक्युलेटिंग कथाएं लेजेंड्स लोर्स जो भी आपका है अभी प्रश्न यह होता है हमारे सामने कि यदि यह थियोसोफिकल सोसाइटी वाले महात्मा का नाम करके लोगों को ठग रहे हैं या तो लोगों को मूर्ख बना रहे हैं अभी स्वामी जी का शायद ऑफकोर्स स्वामी जी का यह उद्देश्य नहीं है कि किसी को मूर्ख बनाया जाए किंतु फिर वह महात्मा और यह जो सब स्वामी जी कह रहे हैं उसमें क्या डिफरेंस है आप कैसे कहेंगे कि ये साइंस है और यह स्पेक्युलेटिव का प्रारंभ सृष्टि के प्रारंभ के समय ईश्वर ने अपने को बीज स्वरूप में ढाला फिर उस बीज स्वरूप में से सृष्टि की रचना हुई ये जब स्टेटमेंट देते हैं तो उसके पीछे आपके पास में प्रूफ क्या है क्या ये सिर्फ है तो चलो थोड़ा साइंस उसमें मिक्स कर दिया जाए जैसे छोटे बच्चा यदि कोई दवाई जैसे दवाई है ना दवाई कोई खाता नहीं है वो टेबलेट होती है उसको शुगर कोट कर देते हैं उसके ऊपर में व शक्कर चीनी का आवरण लगा देते हैं तो दवा टेबलेट देखेंगे कि उसका जो ऊपर का आवरण है शुगर कोटेड आवरण उसको आप थोड़ा सा निकाल देंगे उसके बाद में वोह जो टेबलेट है आपकी जिवा के ऊपर में रखेंगे बड़ा ही बेकार उसका टेस्ट लगेगा बड़ा ही बिटर उसका टेस्ट लगेगा तो इस तरह का टेस्ट तो कोई टेबलेट गि नहीं तो उसके ऊपर में वह मेडिकल कंपनी वाले क्या करते हैं कि टेबलेट के ऊपर में शुगर का एक कोटिंग लगा देते हैं जैसे कि आपकी जिवा पे लगे रखेंगे तो आपको मीठा लगे तो फिर आपको तो फिर गिल ही जाना है कोई एक क्षण के लिए दो क्षण के लिए ही आपकी जिवा पे रहेगा तो क्या स्वामी जी वेदांत को इस तरह से शुगर कोट कर रहे हैं कि जिस तरह से आज का आधुनिक मनुष्य इस बात को एक्सेप्ट कर ले कि ना ना साइंस भी तो इसके साथ में जुड़ा हुआ है और साइंस प तो अपने को विश्वास है साइंस पर विश्वास नहीं होता तो तो ये हमारा ये ऑनलाइन मीटिंग जो है वो भी नहीं हो पाता राइट ये तो साइंस और टेक्नोलॉजी के बेनिफिट तो हमारे जीवन में इतने गहरे चले गए हैं कि इसके बिना हम आज का आधुनिक जीवन अनुमान भी नहीं कर सकते देखिए ना कि आज भारत की पॉपुलेशन 150 करोड़ है यदि इतनी बड़ी जनसंख्या को खिलाने के लिए जो हाइब्रिड या तो फिर बेटर क्वालिटी ये जो सीड वगैरह जद नहीं डेवलप होता ये ग्रीन रेवोल्यूशन है ये वाइट रेवोल्यूशन है ये सब यदि नहीं आता तो इतनी बड़ी जनसंख्या को हम खिला भी नहीं पाते तो ये मेडिसिन है मेडिकल साइंस है उसके बेनिफिट आज देखिए कल ऐसा होता था कि पोलियो की मदद पोलियो की वजह से कितने लोग अपंग हो जाते थे कितने लोगों का जीवन एकदम नर्क जैसा बन जाता था मैं एक डिवोटा को पहचानता हूं उनको इस तरह से पैर में थोड़ा सा प्रॉब्लम है तो वो बेचारे इस तरह से चलते हैं तो देख कर के हमको थोड़ा दया आती है कि अरे इनके साथ में बचपन से ही ऐसा हो गया आज है कि पोलियो के टीकाकरण से ऑलमोस्ट पोलियो इरेडिकेट हो गया है भारत में वो पाकिस्तान में मैंने देखा अभी पढ़ रहा था कि उन लोगों को बड़ा ही यह डर लगता है कि इस तरह के टीका लेंगे पोलियो का तो क्या होगा तो उन लोगों के वहां अभी यदि मेरे मैंने जहां तक पढ़ा है पूरे विश्व में अभी सिर्फ पाकिस्तान में ही पोलियो बचा है बाकी सब जगह से वह निकल गया है तो यदि विज्ञान पर भरोसा नहीं होगा तो उन लोगों के जैसा होगा पोलियो का टीका नहीं लेंगे और आपके बच्चे बचपन से ही ऐसे वो मने डिफेक्टिव वो जन्म लेंगे या तो बचपन में ही उनके साथ में इस तरह की डिफेक्ट होगी किंतु जो हमने साइंस पे विश्वास किया यह जो कोरोना का यह सब चल रहा था उस समय में पढ रहा था कि कोरोना की वैक्सीन के ऊपर में सबसे ज्यादा ट्रस्ट किसको है इवन अमेरिकन लोगों को जितना ट्रस्ट है कि हां ये वैक्सीन वैक्सीनेशन करने से वैक्सीन लेने से कोरोना चला जाएगा ये अमेरिकन लोगों से वैक्सीन के ऊपर में ज्यादा ट्रस्ट हम इंडियन लोगों का है इंडिया में जितना मास वैक्सीनेशन हुआ है इतना तो अमेरिका में भी नहीं हुआ पर कैपिटा जितने लोगों इस उसका परिणाम यह आया कि पर कैपिटा जितने लोगों का डेथ हुआ है वो अमेरिका में ज्यादा हुआ है हमारी वजह से तो देखिए कि साइंस के ऊपर में हमारा भरोसा आज भारत का सबसे ज्यादा है इवन अमेरिका से ज्यादा है अमेरिका में कंस्पिरेशन थिरी हमेशा चलती रहती है कि नहीं यह लोग यह वैक्सीन के नाम पर हमको क्या कर देंगे पता नहीं यह वैक्सीन हम लेंगे तो फिर क्या-क्या नहीं हो जाएगा वो व बहुत कुछ वहां पर चलता रहता है जबकि इंडिया में है कि मां अपने बच्चे को बचपन से ही वो वैक्सीनेशन करवाती है तो देखिए कि साइंस के ऊपर में आज के लोगों का भरोसा है बोलकर के आज का समाज जो है वह इतना डेवलप हुआ है आज भारत का जीडीपी ऑलमोस्ट सिक्स परसेंटेज से के आसपास बढ़ रहा है वी आर द ये जो बड़ी-बड़ी इकोनॉमी है उसमें सबसे ज्यादा जो फास्ट इकोनॉमिकल ग्रोथ हो रहा है वह भारत में ही है क्यों तो बहुत सारे लोग बोलते हैं कि भारत में जो आईआईटी है आईआईएस है तो इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस या तो इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यह है हमारे सही सही भारत को आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा हेल्प जिसने की है जो हमारा मेन पावर जिसकी वजह से डेवलप हुआ है तो यह इंडस्ट्रियल और साइंस की स्कूल की वजह से वह आज हम इतना आगे हैं इसकी वजह से ही हमारा हमारे इंजीनियर्स हमारे साइंटिस्ट विश्व के सबसे बड़े कॉरपोरेशन सबसे बड़ी लेबोरेटरीज में जाकर के बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं तो यह सब हम लोग अपनी नजरों से देखते हैं तो इसके बाद में यह प्रश्न होगा कि स्वामी जी जब इस तरह के क्लेम करते हैं कि विश्व के आरंभ में ईश्वर थे और ईश्वर में से सृष्टि की रचना हुई तो नेचुरली हमको होगा कि यह जो स्वामी जी का क्लेम है वह क्या शुगर कोटिंग है क्या वह हमको भ्रमित कर रहे हैं या तो फिर स्वामी जी ने मान लिया है कि हां मैंने ऐसा मैं ऐसा मानता हूं और इसलिए मैं आपको कह रहा हूं या तो फिर जैसे हमको पता है खास करके इस लेक्चर के बारे में मैक्रो कजम और माइक्रो कजम के बारे में स्वामी जी जहां लवड़ा जा रहे थे काकड़ी घाट प को विजन हुआ था और इस विजन के आधार पर उन्होंने जो नोट्स बनाई थी उस नोट्स से ये लेक्चर बने हैं तो स्वामी जी का विजन है अभी प्रश्न है कि विजन भी तो सब्जेक्टिव हो सकता है विजन क्या सभी का तो सही नहीं मब सिमिलर विजन नहीं होगा विजन क्या ऑब्जेक्टिव है ना कि सब्जेक्टिव है वो भी हम कैसे कहेंगे माने कि यह एक पूरा एक ऐसा एक इशू है जिसके ऊपर में हम बहुत सारा कुछ सोच सकते हैं भारत का आज का आधुनिक भारत भविष्य का भारत हम किस आधार पर गढ़ें क्या हम इस तरह से और यह जो देखिए स्वामी जी इस तरह से एक प्रारंभ कर रहे हैं कि मैं साइंस और रिलीजन का एक हार्मोनाइजेशन करने का प्रयत्न करूंगा अभी क्या स्वामी जी डेलिबरेशन सोच कर के ऐसा कर रहे हैं या तो फिर उनके विजन की वजह से उन्होंने ही वास कंपेना मैंने यह मुझे यह दर्शन हुआ है और दर्शन सही है इसलिए वह ऐसा कह रहे हैं यह प्रश्न जो है इंपोर्टेंट इसलिए है क्योंकि स्वामी जी के बाद में बहुत सारे लोगों ने इस तरह से साइंस और रिलीजन को कंबाइन करने का हार्मोनाइज करने का प्रयत्न किया है खास करके यह वेस्टर्न कंट्रीज में कुछ-कुछ लोगों ने ऐसा कहा ऐसा सोचने की शुरुआत की कि मॉडर्न फिजिक्स जो है उसका टेओ इज्म या तो फिर बुद्धिज्म या तो जहन बुद्धिज्म इसके साथ में बड़ा अच्छा मेल हो रहा है तो क्यों नहीं हम बुद्धिज्म या तो टेओ इजम के जो आइडियाज है है उसके आधार पर हम साइंस को देखना शुरू करें अभी जब तक आप वेदांत या तो बुद्धिज्म या तो जहन या तो फिर टेओ इसको आप फिजिक्स की दृष्टि से देखते हैं तब तक सब कुछ ठीक है अल्टीमेटली यदि धर्म की आध्यात्मिकता की प्रैक्टिस करनी होगी तो हमको आध्यात्मिकता में दिखाए हुए जो रास्ते हैं कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग उन्हीं का सहारा लेना है साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट करके ना कि हमको कोई समाधि वगैरह तो प्राप्त नहीं होने वाली है तो जहां तक कर्म जो साधना का प्रश्न है वह तो हम स्पिरिचुअल साधना ही करनी है यह समझना है सिर्फ साइंस की दृष्टि से अभी मान लो कभी एक समय ऐसा आए हम रिवर्स करना शुरू कर दे अच्छा वेदांत में ऐसा लिखा है इसका अर्थ है कि ये आपकी फिजिक्स की थिरी गलत है क्योंकि वेदांत के सामने मैच नहीं हो रही ये जहन बुद्धिज्म में ऐसा कहा गया है तो इसका ये पार्टिकुलर कॉस्मोलॉजिकल थिरी के सा साथ में कोई मेल नहीं बैठ रहा अर्थात की कॉस्मोलॉजिकल थरी गलत हो गी यदि ऐसा स्टार्ट हुआ ये रिवर्स प्रवाह तो तो हम वही डार्क एजेस में चले जाएंगे अंधकार युग में कि जब धर्म विज्ञान के गले में एक पत्थर की तरह बंद करके पड़ा था और 1000 साल तक हमारा साइंटिफिक डेवलपमेंट रुक गया ऐसा जद रिवर्स प्रवाह शुरू होगा तो क्या होगा आज स्वामी जी हमको यह इवोल्यूशन और लॉ ऑफ र् वेशन ऑफ एनर्जी की मदद से हमको स्पिरिचुअल वेदांत के कुछ कुछ आइडिया समझाते हैं कल कहीं जाकर के कुछ लोगों ने रिवर्स करने की शुरुआत की बोले कि अरे स्वामी जी ही तो कहते हैं कि फिजिक्स और वेदांत को मैच करना है तो वेदांत में तो ऐसा नहीं कहा गया तो वेदांत में ऐसा कोई पार्टिकुलर नहीं है तो फिजिक्स में भी यह गलत है जेनेटिक्स में यह गलत है क्योंकि वेदांत के साथ मैच नहीं हो रहा है यह सॉलिड स्टेट फिजिक्स या तो क्वांटम डायने में क्योंकि यह जहन बुद्धिज्म के साथ में मैच नहीं हो रहा है तो यह एक रिवर्स प्रवाह जद चालू होगा तो हम तो वही डार्क एजेस में वापस चले जाएंगे जिस डार्क एजेस में से बड़ी ही मुश्किल से हम निकले हैं तो यह प्रश्न कि हम स्वामी जी की बात को कहां तक स्वीकार करें रामकृष्ण मिशन हम लोग है इस भारत के हम लोग एक क्या कहेंगे वी आर रिपोजिटरी ये वो पता है ना वो एक रिपोजिटरी है रिपोजिटरी का अर्थ है कि एक कलेक्शन एक जैसे कि साइंटिस्ट लोगों ने क्या सोचा कि यदि बहुत बड़ा अकाल आ जाए या को फिर इकोलॉजिकल डिजास्टर हो जाए तो विश्व में जितने भी धान है धान की अलग-अलग किस्म है उनको कहीं पे कहीं पर प्रिजर्व करके रखना चाहिए तो इससे क्या होगा सभी तरह की स्ट्रेंथ सभी तरह की वरायटी अन्न की वो प्रिजर्व रहेगी तो उन्होंने नॉर्थ पोल प पृथ्वी के नॉर्थ पोल पर एक रिपोजिटरी बनाई है जैसे हम पैसे बैंक में रखते हैं तो वैसे वह अन्न की अन्न की बैंक है वहां पर सब तरह के चावल की वैरायटी ये गेहूं की वैरायटी ये वो मिलेट की वरायटी सब तरह की वैरायटी वहां पर रहती है तो ये वैराइटीज रखना एक बैंक में ऐसा क्यों किया गया क्योंकि इट इज अ रिपोजिटरी जो कि कोई डिजास्टर हो जाए तो उस रिपोजिटरी में से फिर से वह गेहूं की वैरायटी है वो अन्न चाल चावल की वैरायटी हम निकाल करके फिर से उसका हम क्रॉप ले सकते हैं उसका हम फिर से ये उसका फार्मिंग कर सकते हैं तो रामकृष्ण मिशन है यह भारत देश की विश्व की रिपोजिटरी विश्व के जो सर्वश्रेष्ठ आइडियाज जो होंगे विश्व के जो सर्वश्रेष्ठ विचार जो होंगे वो रामकृष्ण मिशन में प्रिजर्व है यदि रामकृष्ण मिशन वी आर द रिपोजिटरी ऑफ ऑल द ग्रेट थॉट्स ऑफ द वर्ल्ड यदि विश्व में कोई डिजास्टर आ जाए कोई न्यूक्लियर वर हो जाए ना कि कोई इकोलॉजिकल डिजास्टर आ जाए ना कि कुछ भी हो जाए तो रामकृष्ण मिशन में ठाकुर महा स्वामी जी के विचार जो बीज स्वरूप रखे गए हैं उसमें से सृष्टि की रचना सृष्टि का प्रारंभ फिर से हो सकता है तो हमको तो सर्वश्रेष्ठ विचारों को प्रिजर्व करके रखना है जिससे कि एक बेटर सिविलाइजेशन की शुरुआत हो जैसे कि ऐसा होता है ना कि दो युग के बीच में युग संधि होती है जो युग संधि के समय जैसे कलयुग समाप्त हुआ और फिर से कृत युग यानी कि फिर से यह गोल्डन एज या तो फिर सत्य युग की फिर से शुरुआत हुई तो यह कलयुग का अंत और यह सत्य युग की शुरुआत इस दोनों के बीच में बड़ा ही एक पीरियड रहे पीरियड ऑफ डिजास्टर एज ऑफ केस तो यह एज ऑफ केस है उसमें रामकृष्ण मिशन इस आइडियाज को प्रिजर्व करके रखता है यह साइ हिस्टोरियंस की थिरी है कि जब भी कोई एक सिविलाइजेशन का डि यह होता है डिसइंटीग्रेशन होता है सिविलाइजेशन का विनाश होता है और दूसरी सिविलाइजेशन जब स्टार्ट होती है तो इन दो सिविलाइजेशन के बीच में रिलीजियस इंस्टिट्यूशन आइडियाज को करके रखते थे रखते हैं जैसे कि आपने देखा कि ये रोमन एंपायर का विनाश हुआ रोमन एंपायर डिस इंटीग्रेट होने की शुरुआत हुई और यह रेनेसा का प्रारंभ हुआ तो रोमन एंपायर पश्चिम में ऑलमोस्ट फिफ्थ सेंचुरी के आसपास में उसका विनाश ऑलमोस्ट हो चुका था और रेनेसा रिफॉर्मेशन ऑलमोस्ट 15th सेंचुरी में प्रारंभ हुआ तो रोमन एंपायर जब तक था ये ग्रीक किंगडम जब तक थे तब तक बहुत ही सुंदर रूप से यह यूरोप में साइंस टेक्नोलॉजी फिलोसोफी इन सब का डेवलपमेंट हुआ और रेनेसा के बाद में फिर से वो थ्रेड जो है उसको पिक अप कर दिया गया किंतु यह जो बीच का 1000 साल का जो डार्क एजेस है उस समय यह लर्निंग ये आइडियाज यह फिलोसोफी यह साइंस इसको प्रिजर्व किसने किया तो चर्च ने किया हम लोग चर्च को गाली देते हैं हम कहते हैं कि हां चर्च ने साइंस को डेवलप नहीं होने दिया किंतु साथ-साथ में यह भी हमको स्वीकार करना होगा जो डार्क एजेस थे 1000 साल लंबे उस समय चर्च ने ही यह लर्निंग और फिलोसोफी को जीवित रखा था यह जो मक्स थे उनके साधु वो कहीं अंधकार भरी कोई मोनेस्ट्री में बैठे होंगे और एक के बाद एक मैनु स्क्रिप्ट को अपने हाथों से लिख कर के कॉपी करते रहते थे हां फिर उन्होंने उस प्लेटो है ना कि एरिस्टोटल है उसकी फिलोसोफी प अपने विचार बिठा दिए उसी एरिस्टोटल की फिलोसोफी पर उन्होंने चर्च की बाइबल की थिरी फिलोसोफी थियोलॉजी बना दी वो एक बात है किंतु एटलीस्ट एरिस्टोटल प्लेटो सोक्रेट इन सबको जीवित भी तो इन्होंने ही रखा यदि चर्च नहीं रहता तो ये इन लोगों की आइडियाज इन लोगों की थिरी इन लोगों के विचार कहां वो शून्य में मिले विलीन हो जाते हैं तो इसके लिए यह चर्च या तो रिलीजियस इंस्टिट्यूशन होते हैं जबकि एक सिविलाइजेशन का विनाश होता है और दूसरी सिविलाइजेशन का प्रारंभ होता है तब यह रिलीजियस इंस्टिट्यूशन इस अंधकार युग में बेस्ट आइडियाज को प्रिजर्व करके रखते हैं तो रामकृष्ण मिशन भी इस तरह की एक रिपोजिटरी है जब भी इकोलॉजिकल किसी भी तरह का डिजास्टर होगा या तो फिर यह नए भारत का तो गठन हो रहा है बहुत सारे लोग हमारे पास आकर के हायर आइडियाज प्राप्त करने का एक प्रयत्न करते हैं ये मैं रिसेंटली देख रहा था कि एक बड़ा ही फेमस इकोनॉमिस्ट है कौशिक बसु ना कि ऐसा कुछ उसका नाम है तो सर्वप्रिया नंद जी के साथ में न्यूयॉर्क में जाकर के वो डिस्कस कर रहा है अभी कौशिक बसु आई थिंक वही उसका नाम है मुझे एगजैक्टली याद नहीं आ रहा है जो भी है वही है ना हां तो वो इज अ वेरी वेल नोन इकोनॉमिस्ट तो यदि मान लीजिए कि वह सर्वप्रिया नंद जी के साथ में वेदांत डिस्कस करता है तो उसको कितने पॉजिटिव आइडियाज मिलते होंगे आजकल कोई इकोनॉमिस्ट होते हैं ना वो भारत की निंदा ही करते हैं वो एक रघुराम रघुराम राजन करके एक है वो जब भी मुंह खोलेगा वह भारत की निंदा के अलावा और कुछ नहीं निकलेगा उसके मुंह से तो एटलीस्ट भाई जो लोग अपने क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं इकोनॉमिक्स के क्षेत्र में कि राजनीति के क्षेत्र में कि कोई भी क्षेत्र हो कला विज्ञान जो भी क्षेत्र है उन लोगों को ये पैट्रियोटिज्म है एक उदात्त विचार है वो यदि हमारे जो इस तरह के सर्वश्रेष्ठ साधु है उनके साथ में डिस्कस करके उनको तो वो विचार मिलते हैं तो वह अपने-अपने क्षेत्र में वो परिपट्स इन द वर्ल्ड एंड ऑफ कोर्स ठाकुर माइंड स्वामी जी तो हम लोगों को यदि सर्वश्रेष्ठ विचारों को प्रिजर्व करना है तो हम लोग किस तरह से इस तरह की एक सुपरस्टिशन को हमारे बीच में जगह दे दे कि इस तरह से एक मिस इंटरप्रिटेशन होने की संभाव ना हो आज स्वामी जी ने कह दिया कि फिजिक्स के इस नियम के आधार पर हमारा वेदांत का यह नियम उसके साथ में मैच होता है उसके साथ में उसकी सिमिलरिटीज है ये इसी बात को उल्टा करके यदि कोई किसी ने कल कह दिया कि वेदांत का यह नियम के अनुसार फिजिक्स का यह लॉ मैच नहीं होता तो लॉ ऑफ नेचर गलत है वेदांत सही है क्योंकि वेदांत तो अल्टीमेट तो अल्टीमेट क्वेश्चंस वेदांत ही वो डिस्कस करता है इसका अर्थ है कि यह मॉडर्न साइंस को छोड़ दो ये मॉडर्न टेक्नोलॉजीज को छोड़ दो य इस तरह का एक उल्टा इंटरप्रिटेशन यदि शुरू हो ट विल बी वेरी डेंजरस फॉर सिविलाइजेशन तो ऐसा ना हो इसके लिए हमको जो स्वामी जी कह रहे हैं उसको उसके रियल स्पिरिट में लेना होगा स्वामी जी सिर्फ स्पेक्युलेटिंग हैं ना कि वोह एक लोमड़ी की कहानी नहीं कि वो उसको वो फल चाहिए वो पेड़ के ऊपर में है बहुत सारे जंप लगाती है वो फल उसके हाथ में नहीं आता तो फिर वो क्या कह के चली जाती है वो फल खट्टा है इसलिए मुझे खाना नहीं है माने प्रयत्न किया और फल हाथ में नहीं आया तो इसने उसने ऐसा कह दिया ये पंचतंत्र की कहानियां बोध कथाएं हम बच्चों को यह बोध कथाएं सिखाते हैं जिसमें कोई कहानी रहेगी उसमें से एक अच्छा उपदेश होगा बच्चे को बोलेंगे कि तुम ये मत करो वो मत करो तो नहीं सुनेगा किंतु बध कहा कथाओं के माध्यम से उसके सर में यह बैठ जाएगा तो क्या स्वामी जी इस तरह से बध कथा विज्ञान को लेकर के हमको समझा रहे हैं वेदांत ना कि जैसे ठाकुर करते हैं ठाकुर की इतनी सारी उपमा एं हैं तो उस उपमा के माध्यम से ठाकुर हमको आध्यात्मिकता धर्म वो सिखाते हैं तो स्वामी जी यहां पर साइंस को किस अर्थ में यूज करते हैं बध कथा के रूप में जिससे कि हम शुगर कोट करके वेदांत हमको समझा सके ना कि सिर्फ वह एक स्पेक्युलेटिव इट एक्चुअली इज वो एक्चुअली साइंस है जैसे लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स है लॉ ऑफ डायनेमिक्स है न्यूटन का यह लॉ ऑफ रिलेटिविटी है लॉ ऑफ क्वांटम डायनेमिक्स है यह सॉलिड साइंस है सॉलिड विज्ञान है जिसके ऊपर में आप पूरे नई टेक्नोलॉजी डेवलप कर सकते हैं तो क्या स्वामी जी जो कह रहे हैं इज इट सॉलिड साइंस और इज इट अ मियर स्पेक्युलेटिंग दिस एज अ साइंस रदर देन कोई बध कथा है कि हां इसकी उपमा देकर के इसको समझाओ और उपमा एक देशी होती है शेर की तरह दहाड़ता है इसका अर्थ नहीं कि इसके दो इसके चार हाथ पैर है एक पूंछ है ऐसा नहीं वो सिर्फ उसकी ड़ शेर की तरह उसकी आवाज शेर की तरह तो इस तरह से उपमा नहीं दे रहे स्वामी जी जो कह रहे इट इ एक्चुअल साइंस अभी हम हमको प्रश्न होगा कि जद वह एक्चुअल साइंस है तो उसका एक एंपर कल एविडेंस तो होना चाहिए साइंस साइंटिस्ट लोग किसी भी साइंटिफिक थरी को एक्सेप्ट कब करेंगे जबकि आदर वह लेबोरेटरी में प्रूव हो या तो फिर उसका एक मैथमेटिकल प्रूफ हो तभी तो वे लोग उसको एक्सेप्ट करेंगे तो अभी मेरा जो मेरा जो रीडिंग कहता है और स्वामी जी को भी जो मैंने कहते सुना है यह सबको भी आप प्रूव कर सकते हैं साइंटिफिक थिरी सब्जेक्टिव नहीं होती वो ऑब्जेक्टिव होती है अर्थात कि जो कोई भी उसका प्रयोग करें वो एक ही रिजल्ट आएगा यदि एक थरी का एक प्रयोग जदी हुआ यदि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिला दिया जाए तो h2 अर्थात पानी बनेगा वो प्रयोग आपने यदि चाइना में भी किया तो वही वही पानी बनेगा इंडिया में किया तो वही पानी बनेगा अमेरिका में किया तो वही पानी बनेगा यदि क्रिश्चियन एक्सपेरिमेंट करता है तो भी सेम रिजल्ट आएगा एक मुस्लिम एक्सपेरिमेंट करता है तो सेम रिजल्ट आएगा हिंदू करेगा तो भी सेम आएगा हमारे देश काल पात्र के ऊपर में उसका जो यह है आउटकम वह डिपेंड नहीं है वह ऑब्जेक्टिव है व उसका एक्सपेरिमेंट का रिजल्ट अपने से जो इंडिपेंडेंटली आना है वह आएगा तो यह साइंस की थिरी है तो मेरा जो मानना है स्वामी जी का भी जो राजयोग में जो कहना है कि यह सब थिरी और उसके जो आउटकम है यदि आप इस इस तरह की साधना करेंगे स्टेप बाय स्टेप तो आपको भी वही दर्शन होगा जो कि स्वामी जी को काकड़ी घाट में हुआ है डजन मैटर कि आप बुद्धिस्ट है ना कि क्रिश्चन है ना कि जैन है ना कि वैष्णव है ना कि शाक्त है ना कि महावीर की पूजा करते हैं कि मां काली की पूजा करते हैं डंट मैटर आपका औचित्य आपका जन्म के साथ में आपके जन्म के साथ में आप कहां रहते हैं इसके साथ में आपकी स्किन का कलर क्या है इसके साथ में आप कौन सी भाषा में बात करते हैं उसके साथ में इस सब चीजों का कोई लेना देना नहीं है आप स्टेप बाय स्टेप राजयोग साइंस है राजयोग में बताई स्टेप के अनुसार आप साधना कीजिए आपको भी एगजैक्टली उसी टाइप के दर्शन होना प्रारंभ होंगे जिस तरह के ठाकुर और स्वामी जी को होते थे यह दावा स्वामी जी राजयोग में करते हैं और मैं इसको स्वीकार करता हूं कि स्वामी जी का यह जो कहना है कि सृष्टि के प्रारंभ में ईश्वर थे ईश्वर में से सृष्टि के प्रारंभ हुआ और यह सृष्टि ईश्वर में समाहित हो जाएगी यह सिर्फ स्पेक्युलेटिंग में बताई हुई साधना का स्टेप बाय स्टेप हम इसको फॉलो करें इसको प्रैक्टिकल करें तो यह साइंस है नहीं कि स्पेक्युलेटिव चीज हमको इस लेक्चर में से ख्याल में रखना है यदि हम लोग इस तरह से सोचना शुरू करेंगे कि अरे हम लोग बहुत सारे लोगों को बहुत कुछ बोलते हुए सुनते हैं यह खास करके बंगोल में तंत्र का बड़ा प्रभाव है व काली किताब ना कि लाल किताब क्या कुछ है उसको मैंने एक बार पढ़ने का ट्राई किया था ऐसा कुछ करोगे तो आपके दुश्मन के साथ में ऐसा हो जाएगा उसके साथ में ऐसा कोई विधि करोगे तो आपको यह मिल जाएगा तो यह सब स्पेक्युलेटिव बाय स्टेप उसको फॉलो करेंगे तो आपको रिजल्ट शायद मिलेगा पता नहीं किंतु मुझे मुझे यह सब ठीक नहीं लग रहा है मुझे नहीं लग रहा है कि इसके भीतर में कोई सार होगा यह जो मेरा व्यक्तिगत जो ओपिनियन है तो जो भी है किंतु स्वामी जी के बारे में मैं ये गारंटी से कह सकता हूं खात्री पूर्वक कह सकता हूं हम सबको कोई नाना कोई अनुभव होता ही है जब हम रामकृष्ण मिशन में आते हैं या तो कहीं पर भी हम सीरियसली साधना करने की शुरुआत करते हैं हम सबको कोई ना कोई अनुभूति होती ही है उस अनुभूति की वजह से ही हम लोग इतना लंबे समय तक यहां पर टिके रहते हैं अदर वाइज इतना सिंसेरिटी इतना डिवोशन लंबे टाइम तक मेंटेन करना वह संभव नहीं होता मन क्या है वह विक्षिप्त होने की शुरुआत हो जाती है नए-नए सेंसेशन नया-नया एक्साइटमेंट खोजने का वह शुरू कर देता है तो एक जगह पर हम टिके हैं ठाकुर महा स्वामी जी के प्रति श्रद्धा भक्ति बरकरार है जीवन के अंत तक रहेगी उसका अर्थ है कि कोई ना कोई अनुभूति हम सबको हुई है तो उस अनुभूति के आधार पर मैं कह सकता हूं कि स्वामी जी का जो विजन है वह किसी को भी प्राप्त हो सकता है यदि वो स्टेप्स फॉलो करें और यह साइंस है सिर्फ ये वो तिबेट महात्मा की तरह ये स्पेक्युलेटिंग क्लूजनर है अभी एक आखिरी पैराग्राफ ही बचा है जिसको कि हम कल कंप्लीट करेंगे आज ही त ओम शांति शांति शांति हरि ओ राम