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Sri Ramakrishna Teachings ·

श्री रामकृष्ण की दृष्टि से वेदांत | 3 World Models | 17 Jan 2024

Invocation

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कल हम वर्ल्ड मॉडल्स के बारे में बात कर रहे थे उसको मैंने थो थोड़ा सा और उसको यह किया है अ क्या कहेंगे कि मॉडिफाई किया है उसके ऊपर में और थोड़ा सा चिंतन किया है कल हमने जिस तरह से सोचा था इसके ऊपर में और थोड़ा सा मॉडिफिकेशन वर्ल्ड मॉडल को हम बेसिकली तीन कैटेगरी में बांट दे सकते हैं एक तो है मटेरियल वर्ल्ड मॉडल दूसरा है

Outline

स्पिरिचुअल और तीसरा है सुपर स्पिरिचुअल तो वर्ल्ड मॉडल्स कैटेगरी हो गई और फिर व्यक्तिगत यदि देखा जाए कि जो व्यक्ति उसको फॉलो करता है उसकी कैपेसिटी के अनुसार तीन लेवल है हमको पता है कि किसी भी व्यक्ति में तीन तरह के गुण होते हैं तामसिक गुण होता है राजसिक गुण होता है और सात्विक गुण होता है तमस अर्थात की उसका मन बहुत ही निम्न लेवल पर रहता है ज्यादातर अपना खुद का स्वार्थ ही सोचेगा और ज्यादातर वह अपने खुद के स्वार्थ के पूर्ति करने के लिए ही वह व्यस्त रहेगा यह हो गया तमस दूसरा है कि रजस रजस जिनमें होता है वे लोग एक्टिव तो बड़े होते हैं किंतु थोड़ा बहुत स्वार्थ थोड़ा बहुत तो क्या स्वार्थ तो होता ही है किंतु साथ में एक्टिव भी बहुत होते हैं यह डिफरेंस बिटवीन तमस और रजस ये एक बड़ा डिफरेंस है व से तो दोनों को स्वार्थी ही कहा जाएगा किंतु तामसिक लोग जो होते हैं वह इन एक्टिव होते हैं आलस्य फिर निद्रा प्रमाद इन सब चीजों में वह ज्यादा डूबे होते हैं जबकि राजसिक व्यक्ति भले ही चाहे स्वार्थी हो किंतु बड़ा ही एक्टिव होता है और सात्विक है कि वह लार्ज हार्टेड होता है उसके भीतर में लोगों के प्रति दया और करुणा होती है और सिर्फ अपना स्वार्थ नहीं सोच कर के वह एक लार्जर एम अपने जीवन में वह हासिल करना चाहता है तो यह तीन लोगों के बीच में यह बड़ा तफावत है तामसिक व्यक्ति स्वार्थी होता है किंतु साथ-साथ में आलसी भी बहुत होता है राजसिक व्यक्ति स्वार्थी होता है किंतु साथ-साथ में एक्टिव होता है और सात्विक व्यक्ति एक्टिव तो होता ही है किंतु साथ में उस उसका जो स्वार्थ है सिर्फ अपने देह तक सीमित नहीं रहता उसका जो मन है उसका जो हार्ट है उसका जो आउटलुक है वह बड़ा ही लार्ज होता है बड़ा ही उसका व्याप बड़ा होता है तो इस तरह से तीन तरह के गुण वाले लोग हमको इस जगत में मिल जाएंगे अभी देखिए कि व्यक्ति तामसिक हो राजसिक हो ना कि सात्विक हो उसका एक वर्ल्ड व्यू रहता है वह क्या सोचता है अपने जीवन के बारे में वह क्या सोचता है इस जगत के बारे में और उसके वर्ल्ड व्यू के अनुसार वह अपना लाइफ किस तरह से लीड करता है तो वर्ल्ड व्यू

Materialistic World Model

में सर्वप्रथम वर्ल्ड व्यू है मटेरियल वर्ल्ड व्यू यानी कि यह जगत ही है यह जगत ही सत्य है और बाकी सब चीजें यदि वह चर्च में भी जाता है यदि वह मंदिर में भी जाता है वह बाहर से सभी तरह के धार्मिक क्रिया कलाप करता हुआ दिखाई भी देगा तो भीतर में उसको एक बहुत बड़ा संदेह रहता है कि यह जो मैं कर रहा हूं इसका कोई सही सही में तात्पर्य है ना कि बस इस समाज में रहना है तो कन्फर्म चाहिए सब लोग इस तरह से धार्मिक क्रियाएं करते हैं तो मैं भी करता हूं इट्स अ पार्ट ऑफ सोशल रिचुअल इससे ज्यादा इसको कुछ सोचना नहीं है तो इस तरह से कोई कोई लोग आउटरा इट नास्तिक होते हैं और ज्यादातर लोग हिडन स्केप्टिक होते हैं हिडन नास्तिक होते हैं मन से मुंह से तो बोलते सब कुछ है किंतु अपने जीवन को परिवर्तित नहीं कर पाते तो यह मटेरियल वर्ल्ड व्यू जिन लोगों का होता है उन लोगों के जीवन में आप एक चीज देखिए कि वे लोग किस तरह से अपना जीवन जिएंगे जो तामसिक है और उसका मटेरियल वर्ल्ड व्यू है तो वह अपनी इंद्रियों के भोगों को चरितार्थ करने के लिए शायद क्रिमिनल एक्टिविटी में भी वह डूब जाए ऐसा पूरे पूरा संभव है क्योंकि अच्छे सही तरीके से पैसा कमाना उससे संभव नहीं होता है आलस है और हमेशा शॉर्टकट खोजता रहता है तो आलस भी है शॉर्टकट भी खोजना है और इंद्रियों के भोग भी भोगने हैं तो यह सब मिलाकर के क्रिमिनल एक्टिविटीज उसको लगता है कि यह शॉर्टकट है इसको अपना करके हम कैसे भी करके जी लेंगे हालांकि उसको बाद में बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है किंतु यदि इतनी अकल उसमें होती तो वह तामसिक किस काम का तो वह इस तरह के लोग ज्यादातर तामसिक और भोग परायण लोग मटेरियल तामसिक और भोग परायण यह सब कैरेक्टरिस्टिक जिनमें होती है उसमें क्रिमिनल टेंडेंसी देखने में आती है अभी यदि थोड़ा सा आगे जाकर के देखें कि तो भोग परायण तो है ही है स्वार्थी है ही है किंतु साथ में हाईली एक्टिव है तो ऐसे लोग फिर क्या करेंगे कि उनको लगता है कि मेरी करियर डेवलप करनी है मुझे प्रमोशन चाहिए मुझे अपना बिजनेस बढ़ाना है तो चलो उसके लिए हार्ड वर्क किया जाए यह हार्ड वर्क करके यह लोग अपने भोगों को चरितार्थ करते हैं और जो लोग सात्विक है वे लोग सिर्फ अपना स्वार्थ नहीं देखेंगे आउटलुक मटेरियल िक है वोह लोग सोचते हैं भले ही चाहे मुंह से कुछ भी बोलते हो भगवान ईश्वर के बारे में किंतु हृदय में दृढ़ धारणा नहीं हुई है फॉर ऑल इंटेंट एंड परपज फॉर ऑल प्रैक्टिकल पर्पसस दिस पीपल आर मटेरियल किंतु सात्विक टेंडेंसी है तो इससे होता क्या है कि वे लोग अपने जीवन में कोई महत कार्य करने को आगे आएंगे जैसे कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर का उदाहरण हमने कथामृत में ही देखा किंतु साथ-साथ में ही इस तरह के बहुत सारे उदाहरण हमको अपने समाज में अपनी सोसाइटी में देखने को मिलेंगे जैसे कि अल्बर्ट आइंस्टाइन है उसका जीवन सिर्फ इस अपनी खुद की कैरियर वह पेटेंट ऑफिस में क्लार्क था तो अपने बॉस की चमचागिरी करके ना भी कैसे भी करके और एक प्रमोशन ले लिया जाए अपने फैमिली को लेकर के आराम से रहा जाए इस तरह से वह नहीं सोच सता था ही स्टार्टेड थिंकिंग समथिंग हायर देन हिमसेल्फ कि प्रकाश की किरण की गति के साथ में ही हम उड़ते हैं तो क्या हमको प्रकाश की किरण स्थिर दिखाई देगी उत्तर मिला नहीं यह बहुत बड़ा एक ब्रेक थ्रू है एक ह्यूमन सिविलाइजेशन में जो कि आइंस्टाइन लाया तो देखिए कि आउटलुक मटेरियल िक है ईश्वर है कि नहीं उसके बारे में संदेह है किंतु हृदय उसका बड़ा विशाल है और ऐसे लोग जो होते हैं हमेशा उन लोगों के कार्यकलाप मनुष्य सभ्यता को हमेशा बेनिफिशियल रहते हैं कैसे भी करके वह हमारे लिए कुछ ना कुछ अच्छा करके जाएंगे आजकल का जो यह मॉडर्न वर्ल्ड है वह ज्यादातर ऐसे लोगों के कंधे पर ही बना हुआ है यह चाहे आज इलेक्ट्रिसिटी है यह इंडस्ट्रियल इजेशन है यह साइंस एंड टेक्नोलॉजी है ये जितने भी गैजेट्स है यह जितने भी लोग हैं ऐसा नहीं है कि वे लोग कोई अच्छा कार्य करना चाहते थे दे हैड द नोबिलिटी ऑफ हार्ट और पैसा आए तो मोस्ट वेलकम है कौन कहेगा कि मुझे बिना पैसे लिए कार्य करना है भले मैं अपने सभी भोग है उसको भी मैं पूरा करूंगा सब कुछ करूंगा किंतु साथ-साथ में ही वे लोग इतना उच्च कक्षा पर जाकर के सोचते हैं कि उनके कार्य का जो आउटकम है वह सभी को सहाय करता है यह आज का मॉडर्न जो गवर्नेंस सिस्टम जिसको हम कहते हैं आज का जो मॉडर्न डेमोक्रेसी है यह सब कुछ यह जो वेस्टर्न फिलोसोफर वेस्टर्न साइंटिस्ट इन लोगों ने जो सोचा है उसमें से बहुत हंश तक हम लोगों ने ग्रहण किया है तो यह मॉडर्न सोसाइटी की जितनी भी एडवांसमेंट हमको दिखती है वे लोग सात्विक हृदय के और मटेरियल आउटलुक वाले होते हैं कैसे भी करके जगत में मुझे कुछ अच्छा करके जाना है अभी यह इस इस कैटेगरी में जैसे बिल गेट्स भी आ जाएगा वह कहता है कि आई वांट टू पुट अ डेस्कटॉप अपॉन एवरी डेस्क मुझे सभी टेबल के ऊपर में एक पीसी रखना है अभी यह उसको करोड़ों करोड़ों रुपया मिला तो सही साथ-साथ में ही देखिए कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी आज इतनी इजली लोगों के पास में अवेलेबल है कि इवन भारत में भी गांव-गांव शहर शहर आपको यह कंप्यूटर वगैरह देखने को मिल जाएंगे वह पहले तो इतने कॉस्टली होते थे फिर यह तो उसको मिनि मिनिएचराइजेशन और यह इनोवेशंस ब्रेक थ्रू करके ऐसा छोटा हुआ इसके बाद में यदि स्टीव जॉब्स को देखेंगे कि ये टेक्नोलॉजी को इजी बना करके यूजर फ्रेंडली बना करके सबके पास में पहुंचा नहीं है तो यह जो ग्राफिकल यूजर इंटरफेस है वह उसी हालांकि वह जेरोक्स बोल करके और एक कंपनी है उन लोगों ने उसको डेवलप किया था किंतु उसका प्रचार प्रसार तो स्टीव जॉब्स नहीं किया तो इस तरह से यह लोगों का विजन जो होता है बड़ा लार्ज होता है वह सिर्फ अपने भोग संपूर्ण हो जाए आज मुझे सुबह को बहुत अच्छा खाना मिल जाए मेरा बहुत अच्छा फैमिली लाइफ हो जाए बहुत अच्छा व बाकी सब चीजें मुझे मिल जाए इसी के ऊपर में यह लोग नहीं सोचते दे गो हायर एंड थिंक समथिंग नोबल किंतु आउटलुक है मटेरियल यानी कि इस जगत में उनका जो कुछ भी प्राप्त किया हुआ है दूसरे जगत में उनके साथ में बहुत कम ही साथ में जाएगा क्योंकि यदि आप लो का कल्याण भी करते हैं लोगों के लिए बहुत अच्छा कार्य भी करते हैं भीतर में एक घमंड रहेगा भीतर में यह इको रहेगा कि हां मैं यह लोगों के लिए सब कुछ कर रहा हूं तो आध्यात्मिक जीवन में यदि आपको सफलता प्राप्त करनी है या तो आध्यात्मिक जीवन में विकास करना है तो यह अहंकार को तो आपको धीरे-धीरे करके निर्मूल करते रहना पड़ेगा अभी यह स्टीव जॉब्स के बारे में ही हम इतनी सारी कहानियां सुनते हैं उसका जो बायोग्राफर है वाल्टर आइजक्स उसने उसकी जो बायोग्राफी लिखी है स्टीव जॉब्स बोल करर के व लिखता है कि उसका नेचर इतना बेकार था सब समय लोगों को डांटते रहता था उसके जो कलीग्स होते थे उसके ये जो एंप्लॉयज होते थे उनको डांटे उनका इंसल्ट करेगा उनको नौकरी से भगा देगा यदि वह ठीक से काम नहीं करते तो थोड़ा सा भी एक सह हृदय ता उसमें नहीं था किंतु फिर भी आज उनको लोग इसलिए रिस्पेक्ट करते हैं कि यह जो इनोवेशन एंड डेवलपमेंट है टेक्नोलॉजिकल वर्ल्ड में उसमें उसका जबरदस्त कंट्रीब्यूशन है बोलकर के उसका इतना रिस्पेक्ट है किंतु एज अ ह्यूमन बीइंग ही वाज द वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट वो लोगों का इंसल्ट करना लोगों का अपमान करना लोगों को लोगों के साथ करना यह सब उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी इजली वह कर देता था तो अभी ये आइंस्टाइन वगैरह थोड़ा सा हायर लेवल पर जाएंगे प्योर साइंस पे उन्होंने कंट्रीब्यूशन किया और एज ए ह्यूमन बीइंग आइंस्टाइन वाज द मोस्ट वंडरफुल पर्सन उसके साथ में काम करना इट्स अ ट्रीट ऑफ लाइफ टाइम उसके जो बायोग्राफर है उसके जो कलीग्स है सभी लोग इस बात की साक्षी देते हैं किंतु फिर भी देखिए कि आइंस्टाइन कहां पर पीछे रह जाता है कि वह ईश्वर है यह बात को संपूर्ण रूप से आत्मसात करना जीवन को उसके अनुसार टर्न करना कामिनी कांचन के प्रति अपनी वासनाओं को धीरे-धीरे करके समेटना अपने अहंकार को शरणागति की ओर ले जाना यह जो साधना कही जाती है आध्यात्मिक साधना इस तरह का उसने कुछ नहीं किया था ही वाज अ वेरी गुड फिलोसोफर वेरी गुड अंडरस्टैंडिंग अबाउट द हायर पावर वह कहता है कि ईश्वर के बारे में कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ कुछ वो ओपिनियन देता रहता है वो आउटरा इट नास्तिक नहीं था किंतु फिर भी वो मुंह से बोलने से तो होगा नहीं जीवन परिवर्तन करना पड़ेगा जीवन की बाय लाइफ आई मीन के स्वभाव को परिवर्तित करना पड़ेगा तभी हम सही सही आस्तिक हुए तो यह हो गया कि मटेरियल आउटलुक या मटेरियल वर्ल्ड व्यू जिन लोगों का है उन लोगों के बारे में सत्व रजस तमस बोलकर के तीन के कैटेगरी अभी देखिए कि

spiritual world model

स्पिरिचुअल आउटलुक जिन लोगों का है या तो स्पिरिचुअलिटी में जो लोग विश्वास करते हैं स्पिरिचुअल वर्ल्ड मॉडल को जिन्होंने अपनाया है उन लोगों में सबसे पहले तो उनको अपने हृदय को परिवर्तित करना पड़ेगा अपनी ये ये जो साधना जिसको कहते हैं लोभ काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर यह जो षड रिपु है उनसे अपने मन को धीरे धीरे वापस लेना होगा अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश जो यह पंच क्लेश है उससे धीरे-धीरे वापस आना होगा और जिसको कि यम नियम कहते हैं तप शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर परिधान फिर यह तपस्या ब्रह्मचर्य यह जो जितना कुछ भी है वह सबको अपने जीवन में अपनाना पड़ेगा यह जैसे-जैसे हम अपनाते जाएंगे वैसे-वैसे ही देखिए कि आप आध्यात्मिक जीवन में ज्यादा से ज्यादा प्रगति करते जाएंगे तो आध्यात्मिक जीवन जो बोलते हैं लिप सर्विस देते हैं और जो सही सही आध्यात्मिक है इन दोनों में सबसे बड़ा फर्क क्या है सबसे बड़ा फर्क यह है कि जो लोग सही सही आस्तिक है सही सही ईश्वर या आफ्टर लाइफ या तो आत्मन डिपेंडिंग अपॉन योर फिलोसोफी आप विश्वास करते हैं दे आर विलिंग टू ट्रांसफॉर्म देयर लाइफ यदि आप जीवन को परिवर्तित नहीं करते हैं तब तक आप हिडन नास्तिक ही बने रहेंगे मुंह से आप कितना ही कुछ कर लीजिए किंतु मन जब तक क्रोध ये काम ये अहंकार घमंड इस सब चीजों में पड़ा हुआ है तो किसी तरह का आस्तिक बुद्धि उसमें अभी तक नहीं आया है वो पशु वत ही है एक तरह से जदी देखा जाए तो तो यह मटेरियल आउटलुक और स्पिरिचुअल आउटलुक इन दोनों में यह फंडामेंटल डिफरेंस है अभी स्पिरिचुअलिटी में भी देखिए कि जिन लोगों की तामसिक प्रकृति है वह उस तरह से फिर राजसिक प्रकृति और सात्विक प्रकृति तीन तरह की जो प्रकृति यां है वह किस तरह से बिहेव करते हैं तो ठाकुर ने ही हमको बताया है कि तीन तरह के भक्त भ होते हैं तीन तरह की भक्ति होती है जो सात्विक भक्त होते हैं उनका सब कुछ छुपा हुआ रहता है उन्होंने अपने अहंकार को इस तरह से निर्वित कर दिया है कि वह साधना भी करते हैं तो हमको पता नहीं चलता यह मने वने और कोण जैसे ठाकुर कहते हैं मन में साधना करेंगे वन में जाकर साधना करेंगे अपने घर के एक कोने में बैठकर साधना करेंगे यदि वह मच्छरदानी लगाई हुई है तो लोग सोचेंगे कि यह सो गया है मच्छरदानी लगा कर के किंतु नहीं ठाकुर कहते हैं कि वह उसके भीतर में बैठे-बैठे जप कर रहा है जिससे कि किसी को पता ना चले तो यह अपना अहंकार नहीं दिखाना लोगों से यह प्रेस्टीज नहीं बटोर कि हां मैं बहुत बड़ा साधक हूं आप मुझे रिस्पेक्ट कीजिए यह संपूर्ण रूप से शुद्ध भक्त है सात्त्विक भक्त है और जद यहां पर मैं उस तरह की डिस्टिंक्शन नहीं कर रहा कि कौन ध्व में विश्वास कर ता है कौन विशिष्ट द्वैत में कौन अद्वैत में यदि शुद्ध भक्ति और शुद्ध ज्ञान ठाकुर खुद कहते हैं यह दोनों आपको एक ही डेस्टिनेशन की ओर ले जाएंगे शुद्ध भक्ति से यदि जगन माता का दर्शन होता है शुद्ध ज्ञान से जदी आत्म साक्षात्कार होता है तो वह एक ही डेस्टिनेशन तक आप पहुंचे तो यह शुद्ध भक्ति शुद्ध ज्ञान और यह निर्मल अहंकार अपने अहंकार को आपने निर्मल कर दिया है अपने चरित्र को आपने निर्मल कर दिया है तो यह हो गया सात्विक स्पिरिचुअल पर्सन फिर

Spiritual + Rajasik

राजसिक होते हैं अभी क्या है कि उन लोगों को दिखावा करने की एक हैबिट होती है यह भीतर में से जो अहंकार है वह तो इजली तो निर्वित होने वाला नहीं है तो फिर यह लोग किसी भी तरह का दिखावा करेंगे वोह पीतांबरी पहनेंगे गले में माला लगाएंगे सर के ऊपर तिलक लगाएंगे 10 लोग को बोलते घूमेंगे कि हां मैंने उस मंदिर में यह दान किया है कोई भी फंक्शन वगैरह होता है इन लोगों को देखेंगे कि सबसे पहले माइक पकड़ करके स्टेज पर उठ गए हैं सब सबको पता चलना चाहिए कि मैं कितना इंपॉर्टेंट हूं यहां पर तो यह जो अपना इंपॉर्टेंस प्रदर्शित करते हैं इन लोगों को हम राजसिक कहेंगे साधक अभी देखिए कि आप कहेंगे यहां पर

Materialistic Sattvik vs spiritual Rajasik

प्रश्न हो सकता है कि जो मटेरियल इसिक सात्विक व्यक्ति है और यह जो स्प चुअल राजसिक व्यक्ति है इन दोनों में से कौन बड़ा वह मटेरियल है किंतु वह तो सात्विक है वह तो लार्ज हार्टेड है वो लोगों के कल्याण के लिए कर रहा है उने आइंस्टाइन ने जो किया है उसके सामने पूरा रामकृष्ण मिशन का कंट्रीब्यूशन कितना होगा वर्ल्ड में इन फिजिकल वर्ल्ड आई डू नॉट नो क्योंकि कुछ-कुछ फंडामेंटल थिरी का इंपॉर्टेंस इतना होता है कि पूरी ह्यूमन सिविलाइजेशन को वो ऊपर उठा के ले आती है तो कंपेयर टू दैट हम लोगों में से सभी का कितना होगा कंट्रीब्यूशन यह प्रश्न होता है और यदि प्योर वर्ल्डली दृष्टि से देखा जाए तो यह सात्विक किंतु मैटेरियलिस्टिक है हिस कंट्रीब्यूशन माइट बी मच मोर देन यह जो राजसिक है सा स्पिरिचुअल है किंतु राजसिक है किंतु यह वर्ल्ड व्यू हमने यह भौतिक जगत की दृष्टि से हो गया आध्यात्मिक जगत की दृष्टि से देखे तो सात्विक व्यक्ति मटेरियल होने की वजह से अपने अहंकार को वह धीरे-धीरे करके सब्लाइम करने का प्रयास नहीं करेगा यहां पर वह राजसिक भी है व स्पिरिचुअल है राजसिक है उसको पता तो है कि नहीं इस तरह से बिहेव करने से नहीं चलेगा मुझे धीरे-धीरे करके आध्यात्मिक जगत में अपने अहंकार को उसको बलि प्रदत्त करना होगा श्री जगन माता के चरणों में डेस्टिनेशन क्लियर है आईडियाज क्लियर है जीवन को ट्रांसफॉर्म करने की शुरुआत हो गई है वही है कि वह मंद अधिकार है मध्यम अधिकारी है वह जर्नी करने करते बड़ा लंबा टाइम लगता है तो वह एक बात है यहां पर और

Spiritual + Tamasik

फिर यह तामसिक साधक के बारे में ठाकुर ने ही कहा है कि बड़ा ही उन लोगों के भीतर में यह होता है विश्वास होता है जैसे डकेट लोग जब डके करने के लिए जाते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते हैं मारो काटो वगैरह जिससे कि वह जो डिफेंडर्स होते हैं वह चौकीदार वगैरह डर के मारे भाग जाए और ज्यादा लड़ शेड ना हो और यदि मारामारी करने को आ भी जाए डिफेंड करने को तो ऐसे डरे हुए हो कि जिससे कि उनका साहस कम पड़ जाए और उनका इजली वध हो सके तो ये जो फायरी फेथ एक प्रचंड विश्वास कि हां मैं जो कर रहा हूं सही कर रहा हूं ईश्वर के ऊपर में है ही मेरा विश्वास भले ही चाहे वो कामुक हो भले ही चाहे वह भोग वासना में भी डूबा हुआ हो भले ही चाहे वह कितनी ही निम्न कक्षा की थिरी उसकी होगी फिलोसोफी उसकी होगी किंतु यह फैद होगा उसके भीतर में अपने ऑर्डर में यदि इसका उदाहरण दे तो फिर वह है गिरीश घोष तो इस तरह से एक तामसिक भक्त राजसिक भक्त और सात्विक भक्त नहीं करके मैं कहूंगा साधक यानी कि भक्ति ज्ञान कर्म ध्यान जो कोई भी योग वह फॉलो करता है योगी या साधक इनके भीतर में तीन कैटेगरी होती है यह हो गया स्पिरिचुअल आउटलुक और फिर अगेन वह प्रश्न एक हो सकता

Materialist Sattvik vs Spiritual

है कि जिन लोगों का एक लार्जर आउटलुक होता है मटेरियल पर्सन जैसे कि अल्बर्ट आइंस्टाइन जैसे कि आइजक न्यूटन जैसे कि महात्मा गांधी या तो फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर उन्होंने समाज के लिए बहुत कुछ लार्ज स्केल पे किया है आज की जो टेक सीईओ टेक कंपनी के सीईओ है उन्होंने यह जो ई अभी ये जो मेडिकल साइंस है फॉर एग्जांपल सबसे इजस्ट एग्जांपल है कि यह जो डॉक्टर्स है फिर यह जो सर्जन है यह मेडिकल साइंस में जो इनोवेशन लाते हैं उनकी इनोवेशन से इतने सारे लोगों को हेल्प होता है कैंसर रिसर्च है यह लोग कर रहे हैं कैंसर की नई-नई ड्रग्स डेवलप कर रहे हैं और इससे कितने लोगों को जो सफरिंग होता है वह सहज हो जाएगा ठाकुर के समय में यदि कैंसर रिसर्च होता अब यह जैसे कि डॉक्टर महेंद्र लाल सरकार का ही उदाहरण लेते हैं ठाकुर इतने स्पिरिचुअल थे किंतु जब गले का रोग हुआ तो वह जो नास्तिक डॉक्टर सरकार थे उनको बुला कर के उनके पास में ट्रीटमेंट करवानी पड़ी तो यह हमेशा एक प्रश्न होगा कि हम स्पिरिचुअल है किंतु जगत का कल्याण हम लोग जितना कर रहे हैं और वह जो स्पिरिचुअल नहीं है अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं किंतु जगत का जबरदस्त कल्याण कर रहे हैं तो इन दोनों में से बड़ा कौन तो सहज उत्तर है कि जगत की दृष्टि से जो ज्यादा कल्याण करता है वह बड़ा है जैसे कि ठाकुर और डॉक्टर सरकार एक बहुत ही एक क्रूड टाइप का मैथमेटिक्स यहां पे यूज किया जाए ठाकुर ने कितने जीनों कितने लोगों का जीवन अपने रहते-रहते परिवर्तित किया होगा मुझे नहीं लगता कि यह संख्या 500 से ज्यादा होगी जबकि डॉक्टर सरकार ने अपने रहते-रहते कितने पेशेंट्स को ट्रीट किया होगा मुझे लगता है 500 तो वह एक एक साल में ट्रीट कर देते होंगे आजकल के डॉक्टरों की वह ऑफिस में आप जाएंगे डिस्पेंसरी में तो 50 लोग तो वैसे ही डेली बैठे हुए होते हैं तो एस सच यदि आप लोगों को हेल्प करने की दृष्टि से देखेंगे लगेगा कि डॉक्टर सरकार ज्यादा लोगों को हेल्प किए हैं रदर देन ठाकुर तो किंतु यह भौतिक दृष्टि से हो गया आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो आध्यात्मिक लोग वो जो कार्य करते हैं उसकी जो रिपल इफेक्ट होती है दैट गोज फार ब व्ट इज विजिबल और इस तरह से लोगों के संस्कारों को परिवर्तित करती है कि जिसको बेनिफिट हो रहा है वह समझ भी नहीं पा रहा है कि मैं उस सब चीजों से उपकृत हो रहा हूं तो यह एक डिस्टिंक्शन अभी तीसरा

Super-spiritual World Model

वर्ल्ड व्यू है कि सुपर स्पिरिचुअल जहां तक स्पिरिचुअलिटी प्योर स्पिरिचुअलिटी का प्रश्न है यहां पर हम देखेंगे कि ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या जगत का त्याग करके ईश्वर प्राप्ति करनी है यानी कि इस जगत के बारे में जो भी हो हमको इतना कुछ सोचना नहीं है हालांकि यह भी एक बहुत सिंपल बात है कि इस कैटेगरी के जितने भी साधु संत महात्मा आप देखेंगे मीराबाई है न कि नरसिंह मेहता है न कि यह नारायण स्वामी है न कि यह फिर यह गजानन बाबा है ना कि ये अपने भारत में संत साधु महात्माओं की कोई कमी नहीं नहीं है तो यह लोग प्योर स्पिरिचुअल सात्विक लाइफ जब लीड करके जाते हैं तो उनके रहते-रहते ही उनके जीवन मात्र से ही कितने लोगों को बेनिफिट होता है यहां पे यदि हम यह सोचे कि ठाकुर ने स्पेसिफिकली कहा है कि पहले तो नेती नेती करके ईश्वर प्राप्ति कर लो ट्रेडिशनल जो अपने मन अहंकार को संयमित करके संपूर्ण रूप से ईश्वर को शरणागत होने वाली साधना है उसको कर लो उसके बाद में जद ईश्वर साक्षात्कार होगा या तो फिर निर्विकल्प समाधि प्राप्त होगी वहीं पर हमको पता चलेगा कि जिस चीज का ईश्वर बने हुए हैं या तो फिर ईश्वर ही सर्व भूतों में विराजमान है सर्वम लवम इदम ब्रह्म सर्वम खलु इदम ब्रह्मा या तो फिर आप यदि निर्विकल्प या तो फिर अधत में विश्वास करते हैं तो देखेंगे जो कुछ भी है सब कुछ ब्रह्मण का बना हुआ है तो धत ना कि अद्वैत इन दोनों दृष्टि से सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त करने से पता चलेगा कि जो ईश्वर जिसकी हम आराधना सिर्फ एक मूर्ति के भीतर में या तो फिर निराकार अपने हृदय में कर रहे थे वही ईश्वर वही ब्राह्मण पूरे जगत में है अभी मुझे धीरे-धीरे करके ठाकुर कहते हैं इती इति करके सीढ़ी वही सीढ़ी से नीचे आना है और उसके बाद में हम जो कुछ भी करेंगे सब कुछ जगत के कल्याण के लिए हो होगा ठाकुर का खुद का उदाहरण है जब साधन भजन करते थे तब लोगों से दूर रहते थे किंतु जब सिद्धि प्राप्त हो गई वही वह कुठी वाड़ी जहां पर यह मथुर बाबू वगैरह रहा करते थे दक्षिणेश्वर काली मंदिर में आने के समय उसी कुठी वाड़ी की छत पर उठकर के वह चिल्ला चिल्ला करके पुकारते थे भक्त लोग तोरा कोथा आशीष आय तुम लोग कहां पर हो आओ और ठाकुर ने जब आह्वान दिया ठाकुर ने जब पुकारा हम सब लोग दक्षिणेश्वर में आकर के उनके श्री चरणों के सामने आए उपस्थित हुए तो ठाकुर ने बुलाया है बोल कर के आए हैं व बिन बुलाए मेहमान तरी के तो नहीं आ गए हैं हम लोग तो यह जो ठाकुर का वर्ल्ड व्यू है कि पहले तो कैसे भी करके ट्रेडिशनल साधना करके आप ईश्वर प्राप्ति कर लीजिए फिर देखिए कि वही ईश्वर से यह जगत बना हुआ है और यदि आप इस जगत का कल्याण अब करते हैं ट ट मींस कि उसी ईश्वर की ही आराधना कंटिन्यू रखते हैं वही ब्रह्म साधना ही ब्रह्म स्थित ही ब्रह्म में स्थिति ही आप कंटिन्यू रखते हैं दैट इज द सुपर स्पिरिचुअल मॉडल ऑफ श्री रामकृष्ण वर्ल्ड मॉडल अभी यहां पर एक

Spiritual Sattvik vs Super-Spiritual Sattvik

प्रश्न हो सकता है कि यह जो प्योर स्पिरिचुअल मॉडल है और यह जो सुपर स्पिरिचुअल मॉडल है ठाकुर का यह सात्विक जो अधिकारी होते हैं उन इन दोनों मॉडल में डिफरेंस क्या है आपात तः देखेंगे तो आपको कोई डि डिफरेंस नहीं लगेगा आप बोलते हैं कि ठाकुर तो कहते हैं नेती नेती करके पहले ईश्वर को प्राप्त कर लो उसके बाद में ईश्वर ही आपको बता देगा क्या करना है तो क्या आपको एक स्पेसिफिकली सेपरेट मॉडल क्रिएट करने की जरूरत है कि हां यह सुपर स्पिरिचुअल मॉडल है वरना जो ट्रेडिशनल स्पिरिचुअल मॉडल में जो सात्विक अधिकारी होते हैं जैसे कि मीराबाई जैसे कि नरसिंह मेहता बिकॉज आई बिलोंग टू नॉर्थ इंडिया यह नाम मेरे मन में बार-बार आ रहा है डजन मीन के और किसी क्षेत्र में और साधु नहीं है संत नहीं है जस्ट बिकॉज आई एम फैमिलियर विद देम तो यह जो संत थे क्या इन लोगों का जीवन थोड़ा सा भी कम था बिकॉज कि दे प्रीच प्योर स्पिरिचुअलिटी जैसे कि हरि महाराज का ही उदाहरण कि हरि महाराज ने जब स्वामी जी को कहा कि मैं तुम्हारी तरह वह प्रवचन वगैरह नहीं दे पाऊंगा तो स्वामी जी ने क्या कहा कि जस्ट लीड लाइफ जस्ट एक साधु जीवन जी लो उसी से लोगों का कल्याण होगा उसी तुम्हारा साधु जीवन ही सबसे बड़ी हॉस्पिटल सबसे बड़ी स्कूल बन जाएगा भवोक दूर हो जाएगा लोग जो तुम्हारे पास में आएंगे लोगों का अज्ञान दूर हो जाएगा हजार यूनिवर्सिटी के हजार डिप्लोमा आपको जो ज्ञान नहीं दे पाएंगे वह ज्ञान संत महापुरुष के साथ में रहकर मिलेगा तो यहां पर क्या डिफरेंस है आपात तः दोनों बिल्कुल एक ही जैसे लगते हैं कि पहले तो कैसे भी करके इंद्रिय संयम करके ईश्वर प्राप्ति कर लो बाद में जो होना है ईश्वर ही बता दे देगा बाद में आप यदि कॉन्शियसली लोगों के कल्याण के बारे में कार्य नहीं भी करेंगे सिर्फ एक होली पवित्र लाइफ लीड करेंगे उसी से बहुत सारे लोग उपकृत होंगे तो आपात अः डिफरेंस नहीं लगता है डिफरेंस कब दिखेगा जब हम थोड़े से निम्न अधिकारी के पास में आएंगे स्वामी जी का वर्ड व्यू है वर्ल्ड मॉडल है उसको जब देखेंगे तब हमको रियल डिफरेंस पता चलेगा अभी देखिए स्वामी जी ने

Super-spiritual + Rajasik, tamasik

भारत का भ्रमण करके देखा कि ठाकुर जो उपदेश देते थे वह तो उच्च अधिकारी के लिए है संपूर्ण सात्विक अधिकारी जो होगा कि जो अपने जीवन को संपूर्ण रूप से वह बलिदान दे देगा 24 घंटा जिसके मन के भीतर में ईश्वर के अलावा और कोई भाव नहीं है ऐसे लोगों के लिए है कि पहले तो नेती नेती करके जगत त्याग करके कामना वासनाओं को बलिदान देके उसको होमा अग्नि में अर्पित करके कैसे भी करके ईश्वर प्राप्त करो बाद में जो कुछ भी करना है जगत कल्याण करते रहना इस बात में प्रॉब्लम यही है कि 99 पर लोग मध्यम या निम्न अधिकारी है राजसिक या तामसिक है % मुश्किल से एक सात्विक अधिकारी आपको मिलेगा जो कि ठाकुर की आज्ञा का सही सही पालन कर पाएगा सब छोड़ कर के संपूर्ण रूप से आध्यात्मिक हो जाएगा दिन दिन के यदि आठ घंटा यदि सोने में अपना दैनिक कार्यकलाप में लगता है खाने में शौच में स्नान वगैरह में तो बाकी के 16 घंटा वह सतत तपस्या करता रहेगा और ऐसा करने के बाद ईश्वर प्राप्ति करेगा किंतु ऐसे % लोग है इस जगत में बाकी 99 पर का क्या तो इसके लिए स्वामी जी का जो सोल्यूशन था ठाकुर की थिरी को ही लेकर के ठाकुर की थिरी के जो दो फेज है कि नेती नेती का जो फेज का एसेंशियल इंग्रेडिएंट्स का है जगत कल्याण भले चाहे आप कॉन्शियसली करते हो ना कि सबकॉन्शियसली करते हो जगत का कल्याण यह दो फेज स्वामी जी ने लिए और इसको उन्होंने आत्मनों मोक्षार्थम जगत हिताय च उनकी यह जो थिरी है उसको उन्होंने तामसिक और राजसिक साधकों के लिए यह फार्मूला उन्होंने तैयार की यदि अभी देखिए कि जो हमारा प्रश्न था कि ठाकुर की जो थिरी है पहले नेती नेती बाद में इति इति और जो अपनी ट्रेडिशनल थिरी है सात्विक साधकों के लिए प्योर साधना शुद्ध भक्ति शुद्ध ज्ञान इन दोनों में डिफरेंस क्या है डिफरेंस यह है कि यदि आपको वह अपनी ट्रेडिशनल थिरी के अनुसार राजसिक और तामसिक साधकों के लिए कोई फार्मूला बनानी है तो तो वो फार्मूला इतनी असरकारक नहीं होगी यह स्पिरिचुअल टेबल में ही आप देखिए सात्विक जो साधक है उसके लिए तो कोई प्रश्न नहीं है वो कैसे भी करके तेर जाएगा किंतु जो राजसिक साधक है या तामसिक साधक है उसके लिए जो एकदम एक फायरी फेथ जो एक चाहिए या तो फिर भले ही चाहे दिखावा करता रहे उसको कैसे भी करके आध्यात्मिक जगत में बना रहे यह क्या है कि उसका आउटलुक उसका इंपैक्ट उसका कंट्री ब्यूशन उसकी खुद की साधना यह सब चीजों में काफी लिमिट आ जाती है इस प्योर स्पिरिचुअलिटी के रास्ते में तामसिक और राजसिक साधकों के लिए इतना बेटर ऑप्शंस नहीं है इसीलिए सुपर स्पिरिचुअल मॉडल जो है वहां पर जो सात्विक है उनके लिए तो बेस्ट ऑप्शन अवेलेबल है ही है किंतु साथ-साथ में ही जो तामसिक और राजसिक है उनके लिए भी बेस्ट ऑप्शन अवेलेबल है कि आप साधना भी करते रहिए साथ-साथ में आपकी जो यह जगत है जगत उसी ईश्वर का बना है उसी ब्रह्मण का बना है यह एक्सेप्ट करके उनके कल्याण के लिए भी लग जाइए शुद्ध साधना करने से जो तमस उपस्थित होगा शुद्ध साधना आप ट्रेडिशनल साधना दिन का एक घंटा आधा घंटे से ज्यादा नहीं कर पाएंगे जो मंद अधिकारी है जो तामसिक है जो राजसिक है तो फिर दिन के वो ठ न 10 घंटा करेगा क्या वो जटला करके लोगों की निंदा करके ना कि ऐसा ही गड़बड़ करके बिताए बेटर है कि वह समय वह जगत कल्याण के लिए लगाए निस्वार्थ सेवा में लगाए जिससे कि यह जगत का भी कल्याण हो उसको भी पुण्य प्राप्त हो और जब वह साधना करें तो उसका मन शांत हो निर्मल मन से वह साधना कर पाए तो अच्छा अभी यहां पर एक

Materialist Sattvik vs. Superspiritual Rajasik

दूसरा भी प्रश्न होता है जैसे हम कंपेयर करते हैं देखिए कि जो मटेरियल िक आउटलुक है और जो सात्विक है उन लोगों का जो कंट्रीब्यूशन है और यह जो स्वामी जी का जो थिरी है आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च इन लोगों का जो कंट्रीब्यूशन है किसका कंट्रीब्यूशन बेटर रहेगा तो अगेन आप देखिए कि आइंस्टाइन है या तो न्यूटन है या तो आज के जो मॉडर्न इनोवेट यह जो इंडस्ट्रियलिस्ट एंटरप्रेन्योर यह लोग जो है जिनका कि लार्ज स्के कंट्रीब्यूशन है कंपेयर टू दैट यह स्वामी जी की फिलोसोफी पर काम करने वाले लोगों का कंट्रीब्यूशन कितना होगा तो अगेन दुनियादारी की दृष्टि से भौतिक दृष्टिकोण से आपको कम ही दिखेगा किंतु अगेन यहां पर हमको यह देखना है कि सुपर स्पिरिचुअल का अर्थ है कि आपको सिर्फ भौतिक दृष्टि से नहीं देखना है आपके जीवन को स्पिरिचुअल दृष्टि से भी देखना है आपने इस जगत में जो भी कंट्रीब्यूशन किया उस कंट्रीब्यूशन में आप कहां तक गए वह तो एक मेजरमेंट है ही है प्रश्न ही नहीं है किंतु साथ-साथ में क्योंकि हम जगत नहीं है बोलकर के उड़ा नहीं देते हैं जगत मिथ्या है ऐसा सुपर स्पिरिचुअल मॉडल नहीं कहता है सुपर स्पिरिचुअल मॉडल कहता है कि जगत है वही है कि वह ईश्वर का ही दूसरा स्वरूप है ब्रह्मण का ही एक स्वरूप है ब्रह्मण की ही किरण का यह जगत है जगत को उड़ा नहीं देना है मटेरियल िक आउटलुक है वह आध्यात्मिकता को उड़ा देता है लिप सर्विस देता होगा किंतु सिंसियर कन्विसिटी जो बाउंड्री है वो आर्टिफिशियल बाउंड्री है इस बाउंड्री को डू नॉट एक्सेप्ट यह समझो कि आत्मन और ईश्वर का ही सब कुछ बना हुआ है यानी कि मैं जगत कल्याण के लिए जो कुछ करता हूं यदि निस्वार्थ होकर के करूंगा उसका एक रियल इंपैक्ट मेरी आध्यात्मिक जर्नी में होने वाला है तो दिस इज द डिफरेंस बिटवीन अ सात्विक मटेरियल िक पर्सन एंड सुपर स्पिरिचुअल राजसिक पर्सन राजसिक सुपर स्पिरिचुअल पर्सन है उसका कंट्रीब्यूशन भौतिक दृष्टि से शायद थोड़ा सा कम हो दिखे किंतु ओवरऑल यदि देखा जाए कंपाउंड इंटरेस्ट कि स्पिरिचुअल वर्ल्ड और मटेरियल वर्ल्ड दोनों को कंबाइन करके देखा जाए तो उसका कंट्रीब्यूशन विल बी ग्रेटर देन एनी वन ऑन दैट साइड मटेरियल इसिक साइड

Conclusion

तो ये जो मैं कुछ सोच रहा था ये सब आइडियाज को तो ये थोड़ा सा एक्सपें किया है मैंने मां का रोल क्या होगा यह मैं सोच रहा था वो थोड़ा सा और करना पड़ेगा एक्सपर्ट कि जो भी है आज तक मैंने इतना सोचा है तो भविष्य में और भी थोड़ा सा मैं डेवलप करता रहूंगा आपके साथ शेयर करूंगा तो आज यही तक अभी नेक्स्ट क्लास होगा अपना मंडे को ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु अहंकार निर्मूल करने के लिए देखिए

प्रश्न: अपने अहंकार से कैसे छुटकारा पाएं?

ये जो अपनी जो चार योग है स्वामी जी के द्वारा कथित कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग और साथ में यह सेवा योग कि जितना हो सके लोगों को हेल्प करें तो इसको करने से ही वह हो जाएगा क्योंकि देखिए कि आध्यात्मिक जीवन में जितनी भी बाधाएं हैं वो एक ना सीरियस बाधाएं किसको कहेंगे एक तो है अहंकार दूसरा है कि इंद्रिय के प्रति अपना आकर्षण तो ये दोनों बाधाओं को दूर करने के लिए चार योग रचित किए गए हैं यह जो चार योग है बहुत बार हमको लगता है कि साधना करने से हम ईश्वर के पास जाएंगे वो नहीं ये ये अपना थिंकिंग गलत है ईश्वर तो अपने हृदय में ही है प्रश्न है कि ऊपर में एक अज्ञान का आवरण लगा है अहंकार और वासना रूपी आवरण लगा है जैसे ही इस आवरण को हटा देंगे जो ईश्वर ऑलरेडी अपने हृदय में है जो आत्मन आत्मन ऑलरेडी अपना स्वभाव है व स्वयं प्रकाशित हो जाएगा यानी कि जितनी भी साध आप देखेंगे कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान और इसके भीतर में भी प्रचूर वैविध्य अपने हिंदू धर्म में है व सभी साधना हों का एक ही उद्देश्य है अहंकार और वासनाओं का निर्मूली कारण करना जैसे ही वह हो जाएगा वैसे ही भीतर का आत्मन शेर की तरह दहाड़ उठेगा सबका अपना अपना एक यूनिक

प्रश्न: एक साधक को मटेरिअलिस्ट + तामसिक से सुपर-स्पिरिचुअल + सात्विक तक की यात्रा कैसे करनी चाहिए?

कैरेक्टरिस्टिक है सबका अपना यूनिक जर्नी है अभी जैसे देखिए मैं तो कहता हूं कि आप मटेरियल भी है और तमस से सत्व में भी चले गए तो कोई बहुत बुरी बात नहीं है य लीड ए गुड लाइफ कंट्रीब्यूट समथिंग गुड टू द सोसाइटी नेक्स्ट जन्म में आप जो है वह धीरे-धीरे करके जैसे स्वामी जी ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर के बारे में कहा था जब वराह नगर मठ की बात है मास्टर महाशय वराह नगर मठ में आते हैं एक दिन दर्शन करने के लिए और उनकी और नरेण की बातें होती है तो मास्टर महाशय नरेण को कहते हैं यह बात याद करके उस दिन तो नरेद नहीं था कि जब ठाकुर विद्यासागर को मिलने के लिए गए थे तब मास्टर महाशय नरेद को कहते हैं कि देखिए कि ठाकुर का कहना था कि उसको पता नहीं है कि हृदय में सोना पड़ा हुआ है इसलिए बाहर का इतना सब काम कर रहा है तो नरेंद्र ने इमीडिएट काउंटर किया अभी प्रश्न है कि मास्टर महाशय ने तो ठाकुर के खुद के मुंह से सुना है इसलिए बोल रहे हैं कि इसको पता नहीं कि हृदय में सोना है किंतु नरेंद्र ने तो ठाकुर का संपूर्ण उपदेश आत्मसात किया था और बोल रहा है कि यदि उसको यह पता नहीं एक बात तो उसको बाकी की 10 बात कैसे पता है यानी कि लोगों का कल्याण करना यह बात उसको कैसे पता है 99 पर लोगों को देखेंगे खुद ही के वो स्वार्थ के उसमें पड़े हुए हैं तो जो आदमी निस्वार्थ हुआ है वह कितना बड़ा स्टेप है उसके जीवन में यदि उसको यह नहीं पता ईश्वर नहीं है तो कैसे वह निस्वार्थ हो गया या नरेंद्र का काउंटर है तो देखिए कि मास्टर महाशय ठाकुर की बातों को एक-एक बात लेकर के लिटरल इंट करते हैं जबकि नर समस्त कथामृत ठाकुर का उपदेश लेकर के ओवरऑल एक हमको देता है यानी कि निस्वार्थ इज ऑलवेज फार हायर देन स्वार्थ तो आप जद मटेरियल भी है और निस्वार्थ है यू आर फार ग्रेटर देन आप स्पिरिचुअल है और तामसिक है या तो स्वार्थी है सो ट वी हैव टू अंडरस्टैंड देख जो देखिए कि अपना लाइफ जो

प्रश्न: हम गृहस्थों को अपने जीवन में चार योगों को मिलाकर किस प्रकार की जीवनशैली अपनानी चाहिए?

है ना जो हस्त है उनके साथ में सबसे बड़ा प्रॉब्लम क्या है कि वह अपने खुद के लिए ही नहीं पूरे फैमिली के लिए रिस्पांसिबल है यदि मां है तो बच्चों का स्कूल बच्चों के लिए खाना बनाना हस्बैंड के लिए जो कुछ करना सबके लिए उसका रिस्पांसिबिलिटी है हस्बैंड के लिए भी बच्चों का पत्नी का फैमिली का सोशल रिस्पांसिबिलिटी सब कुछ होता है तो आप लोगों को ना यह सब चीजों के लेकर के ही रहना है आप लोग अपने जीवन को बहुत ज्यादा मॉडिफाई नहीं कर पाएंगे 10 15 मिनट 202 मिनट आधा एक घंटा जद अपने लिए टाइम निकाल ले और बैठ कर के स्वाध्याय करें वगैरह करें तो बहुत अच्छा है किंतु बहुत सारे लोगों से इतना भी नहीं होता तब करना क्या है जैसे कि ठाकुर ने मास्टर महाशय को कहा था कि ईश्वर के साथ में कोई भी एक भाव लेकर के आपको रिलेशन बनाना है तो अभी मास्टर महाशय ने कहा कि क्या मैं अपनी मां को ही क्या मां के रूप में यानी कि जगत जननी के रूप में देख सकता हूं तो ठाकुर ने कहा हां यह बिल्कुल सही है बिल्कुल सत्य है फिर और एक महिला भक्त ठाकुर के पास आई थी तो ठाकुर ने उसको कहा कि भगवान को गोपाल के रूप में पूजो तो फिर यह महिला कहती है कि उसका एक भांजा उसका खुद का तो लड़का नहीं है किंतु उसका एक नेफ्यू या नेफ्यू है उसको वह पालन लालन पालन कर रही है क्या मैं उसके भीतर में बाल गोपाल का दर्शन करूं उसको मैं जैसे कि बाल गपाल को ही खाना खिलाती हूं स्नान करवाती हूं ऐसा करो तो ठाकुर ने कहा हां ठीक है यह भी कर सकते हो यानी कि फिर यह जो जगत अपने आसपास में है ना उसी को डिविज कर देना है उसी को एक दिव्यता उसके भीतर में ले आनी है वाइफ है तो अपने पति के प्रति उसका जो कर्तव्य है बच्चों के प्रति जो कर्तव्य है उसके सास ससुर के प्रति जो कर्तव्य है समाज के प्रति जो कर्तव्य है उसी को व दिव्य स्वरूप दे दे तो उसी से वो उसकी साधना भी हो जाएगी क्योंकि वह ऐसा नहीं कह पाएगी कि मैं अपने को बच्चे को छोड़ कर के पति को छोड़ कर के सास ससुर को छोड़ कर के रिस्पांसिबिलिटीज को छोड़ कर के मैं किसी रिट्रीट में जाऊंगी वहां पर रहूंगी यह नहीं हो पाएगा सो वी हैव टू अंडरस्टैंड अवर लिमिटेशंस एंड विदन दिस लिमिटेशन हम जिस चीज के साथ में हमारा व्यवहार है उसको दिव्य बना देना है तो इससे अपना जीवन बहुत ही झड़प से आध्यात्मिकता की ओर गति करेगा आपकी बात सही है किंतु साथ-साथ में

प्रश्न: हम सेवा तो करते हैं लेकिन हमारी कुछ अपेक्षाएं भी होती हैं। इन अपेक्षाओं से कैसे छुटकारा पाया जाए?

ही क्या देखिए कि अन एक्सपे अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टशंस नहीं रखना है अपने से आप आपकी बात तो छोड़ ही दीजिए हम मैं अपनी ही बात करूं कि अब मैं रांची में इतना सारा मैंने काम किया अभी मैं रांची जाऊंगा तो कोई मुझे पहचाने का नहीं क्योंकि पूरा सिस्टम वहां पर चेंज हो गया है जो वॉलंटस थे जो वर्कर्स थे जो गांव वाले थे वो दे हैव ऑल मूव्ड ऑन दूसरी दूसरी जगह पर इधर-उधर बिखर गए तो अभी क्या आईडियली स्पीकिंग मैं राची जी के गांव वालों के पास में से कुछ भी एक्सपेक्ट नहीं करना है प्रैक्टिकली स्पीकिंग ऐसा नहीं होता है आप एक्सपेक्टेशन करेंगे ही करें दैट इज ह्यूमन नेचर हम तो देवता नहीं है मनुष्य है साधना क्यों कर रहा है परफेक्शन नहीं इसलिए साधना कर रहा है सो डू नॉट हैव एनी अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन और साथ-साथ में साधना करते जाना है दैट इज द बेस्ट क्योंकि ऐसा एक्सपेक्ट हम हम कहेंगे कि आई वांट टू बी अ परफेक्ट पर्सन तो क्या है ना यह जो रिग्रेट है ना और भी ज्यादा बढ जाएगा कि मैं मां होकर के अपने बच्चे का जो भी उसको लालन पालन करना है कर रही हूं किंतु मेरा बच्चा बड़ा होकर के मुझे इतना सिमिलर रिस्पेक्ट नहीं देगा उससे जो रिग्रेट होगा उससे कहीं ज्यादा रिग्रेट होगा कि यह मां जद यह कहेगी कि मुझे बिना एक्सपेक्टेशन के उसको हेल्प करना है और फिर यह एक्सपेक्टेशन रखती है तो क्यों मैं रख रही हूं आई एम नॉट परफेक्ट दैट रिग्रेट विल बी इवन ग्रेटर व जो स्पिरिचुअल रिग्रेट जिसको कहते हैं कि इन एडिक्स हमको हम कहते हैं कि मैं परफेक्ट नहीं हूं अरे मेरे में क्या कमी है दैट विल बी इवन डेंजरस

प्रश्न: आपने जिन मॉडलों का वर्णन किया है उनमें स्वार्थ कहाँ आता है और निःस्वार्थता कहाँ आती है?

सो हां क्लियर ये जो सत्वर रजस तमस है वो उसी में आप देखिए कि जो तामसिक है वो भयानक सेल्फिश है राजसिक है वोह सेल्फिश है किंतु हाईली एक्टिव है और जो सात्विक है वह सेल्फलेस है या तो फिर कहेंगे देखिए यह लोग अपने को सेल्फलेस नहीं करके ऐसा कहेंगे कि वी हैव ए ब्रॉडर आउटलुक टू द फ्यूचर अभी यह जो आजकल का जो एआई इनोवेट है सेम ओल्ट मैन है या वगैरा है वह सुबह उठकर के यह नहीं देखते कि मेरा नेटवर्थ कितना है मेरा स्टॉक ऑप्शंस कितना है यह लोग सोचते हैं कि आई वांट टू क्रिएट सुपर इंटेलिजेंस सुपर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो ट्रेडिशनल स्पीकिंग वे लोग सेल्फलेस नहीं है किंतु मैं कहूंगा कि उनका आउटलुक इतना ब्रॉड है कि फॉर ऑल इंटेंट एंड पर्पस दे आर सेल्फलेस तो यह दिस कट्स अक्रॉस एंटायस जो सात्विक है वह मटेरियल भी है स्पिरिचुअल भी है सुपर स्पिरिचुअल भी है ही इज सेल्फलेस नहीं आप जो कह रहे हैं ना वह

प्रश्न: मटेरिअलिस्ट अपने योगदान को सांसारिक दृष्टि से मापता है। सुपर-स्पिरिचुअल अपनी सफलता को इस बात से मापता है कि उसने अपने अहंकार और काम-कांचन की इच्छा को कितना कम किया है।

स्पिरिचुअल के बारे में कह रहे हैं कि मैं लोगों का कल्याण करता हूं लोगों पर दया करता हूं दया इज अ वे ऑफ साधना किंतु फिर अल्टीमेट मेजरमेंट है कि मेरा चरित्र कितना शुद्ध होता है दिस इज अ स्पिरिचुअल थिंकिंग सुपर स्पिरिचुअल थिंकिंग है कि काउंट बोथ ठाकुर कहते हैं ना कि वोह जो बेल का जो फल होता है तो बेल के फल को आप कैसे देखेंगे बाहर वाला जो शेल है उसको निकाल कर के भीतर का जो मावा या तो गर्भ है जो खाने लायक है क्या वही जगत है नहीं बाहर का शेल भीतर का वह जो यह जो है फूड यह दोनों मिलाकर के जगत है यानी कि जद मटेरियल इसिक यह सोचेगा कि मैंने बाहर के जगत में क्या इंपैक्ट की स्पिरिचुअल यह सोचेगा कि मेरे चरित्र पर क्या असर हुआ तो सुपर स्पिरिचुअल सोचेगा दोनों को लेकर के सोच कि यह जो मैं बाहर का कार्य कर रहा हूं उससे मेरे भीतर में दोनों में क्या असर हो रहा है आई वांट टू हैव दिस कंबाइंड इंपैक्ट यह जो स्वामी जी बार-बार कहते हैं कि यह मुक्ति भक्ति को छोड़ कर के सिर्फ जगत के कल्याण के लिए लग जाओ इसके पीछे का यही एक थिरी है स्वामी जी हमको मटेरियल िक होने को नहीं कहते लाइक सेम ओल्ट मैन या तो फिर य स्टीव जॉब्स क्योंकि यदि सुपरफिशियली देखा जाए तो स्वामी जी ने जो कहा कि सब छोड़ कर के जगत का कल्याण करो सेम ऑल्टमैन इज डूइंग मच बेटर देन वी आर डूइंग किंतु यह जो इस बात के पीछे स्वामी जी का जो आशय है भीतर के जो मैट्रिक्स को जितना इंपॉर्टेंस दे रहे हो इनर डेवलपमेंट को इतना ही इंपॉर्टेंस एक्सटर्नल डेवलपमेंट को दो दोनों को इक्वल ट्रीट करो क्योंकि ईश्वर सिर्फ अपने हृदय में नहीं है ईश्वर ही यह जीव जगत बने हुए हैं दे यह जो है ना स्पिरिचुअल सुपर स्पिरिचुअल का डिफरेंस खोजना मटेरियल इसिक और स्पिरिचुअल का डिफरेंस तो बड़ा इजीली समझ में आता है कि यह कहते हैं जगत ही है यह लोग कहते हैं ईश्वर ही है किंतु यह जो सुपर स्पिरिचुअल कि जगत और ईश्वर एक ही है डोंट फाइंड ए डिफरेंस बिटवीन देम हम लोगों को अभी भी इतना क्लियर नहीं हुआ है हम लोग इन स्पाइट ऑफ बीइंग विदन राम कृष्ण सिस्टम मेजरमेंट तो वही रखते कि इतना कार्य किया तो इससे मेरे भीतर में क्या चेंज हुआ डोंट थिंक लाइक दिस ये तो फिर ट्रेडिशनल स्पिरिचुअलिटी हो गया आप जो बाहर का कार्य कर रहे हैं उसका व आप उसको आप इंसल्ट मत कीजिए आप खुद कर रहे हैं आप खुद उसको जद नेगलेक्ट करते हैं डोंट डू लाइक दिस दिस इज नॉट राम कृष्ण वे नहीं नहीं क्योंकि वह

प्रश्न: यदि मैं अच्छी सेवा कर रहा हूँ, तो मुझे जप-ध्यान, स्वाध्याय के बारे में ज्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है?

शिव अपने हृदय में भी है और शिव य जगत भी बने हुए हैं आप कहां पर डिस्टिंक्शन आपने खुद ने वो जो नामदेव का जो उदाहरण दिया था शिवलिंग पर पैर रखे सोए हुए हैं बोला यहां से पैर हटा के वहां पर कर दो तो क्या वहां पर शिवलिंग नहीं है क्या देखिए अपने ऑर्डर में हम गिरीश घोष

प्रश्न: कौन बेहतर है - स्पिरिचुअल राजसिक या स्पिरिचुअल तामसिक?

को स्वामी जी से बहुत ज्यादा निम्न कक्षा पर नहीं गिनते हैं एक्चुअली ठाकुर खुद गिरीश और स्वामी जी के बीच में झगड़ा लगा देते थे जैसे दोनों आर्गुमेंट करो और सबको सीखने को मिले और गिरीश का स्वामी जी के प्रति जो रिस्पेक्ट था किसी ने कहा गिरीश को कि स्वामी जी यह सब अनाचार सब कर रहे हैं तो गिरीश ने कहा यदि मैं नरेद्र को कुछ गलत कार्य करते हुए देखूंगा तो मैं अपनी आंखें उठाकर फेंक दूंगा मेरी आंखें गलत देख सकती है नरेंद गलत नहीं कार्य कर सकता हां वो कालीप की वाइफ का उदाहरण फेमस

प्रश्न: गिरीश घोष की तरह कालीपद घोष भी थे

उदाहरण है कि जब काली पदो ठाकुर के पास आया पहली बार तो ठाकुर ने कहा कि देखो 12 साल अपनी पत्नी को त्रास देकर के आखिर में अभी वह यहां पर आया है तो उसकी वाइफ ने जो पहली 12 साल पहले ठाकुर के पास आई थी ठाकुर ने मां के पास भेजा था मां ने फिर से ठाकुर के पास भेजा तीन-चार बार ऐसा हुआ फिर मां को दया आई और मां ने उसको बिल्व पत्र दिया वो नाम लिख कर के कहा कि इस तरह से इस हमेशा भगवान को ऑफर करते रहना तो उसकी वाइफ की तपस्या से आखिर में उसको यह अकल आई कि ना ठाकुर के प्रति भक्ति और श्रद्धा सो ट इज हिज ट्रांसफॉर्मेशन किंतु देखिए गिरीश का ट्रांसफॉर्मेशन गिरीश की खुद की श्रद्धा से आया जबकि काली पदों का ट्रांसफॉर्मेशन बिकॉज ऑफ हिज वाइफ वो आया बाद में काली पदों का देखिए उसका तो यह काली पदों का वो भैरव भाव था ही वह जो नटी विनोदिनी को वह साहिब के वो ब्रिटिशर के कपड़े पहना करके ठाकुर के पास ले गया था निरंजन महाराज की आंखों में धुल झोक करके वह सब तो यही है उसके उसको किसी किताब में या कहीं पर मिले

प्रश्न: जिस तरह से ठाकुर स्पिरिचुअल तामसिक के प्रचंड विश्वास का वर्णन करते हैं, ऐसा लगता है कि वे स्पिरिचुअल राजसिक से पहले ईश्वर को प्राप्त कर लेंगे

तो फोटो लेकर अपने ग्रुप में कीजिए शेयर मैं भी देखता हूं कि क्या है और यह जो आपने कहा ना कि जद स्पिरिचुअल तामसिक है ही कैन बी ग्रेटर देन स्पिरिचुअल राजसिक या सात्विक एक्चुअली यहां पर क्या है ना कि आपको तमस में से रजस और सत्व में तो आना ही पड़ेगा यह जर्नी को आप बाईपास नहीं कर सकते सकते हैं तो ऐसा है कि आपकी फेथ की इंटेंसिटी कितनी है बोलकर के आपकी जर्नी शायद थोड़ी शॉर्ट हो जाए किंतु वह सत्वर रजस में तो जाना ही पड़ेगा दैट विल ऑलवेज रिमन अभी सात्विक है तो फिर जैसे ठाकुर कहते डीमे तेताला माने वह सब कुछ करते हैं किंतु इतना यह इंटेंसिटी नहीं है तो सात्विक होने पर भी इंटेंसिटी नहीं होने से इतना स्पीड आपका नहीं होगा सो इंटेंसिटी इज आल्सो इंपोर्टेंट और बहुत ज्यादा तामसिक लोग तो ऐसे ही होते हैं किय विश्वास है सब कुछ किंतु धीरे-धीरे मतलब तमस उन लोगों में ऐसा गहरा है कि फिर वो इंटेंसिटी उनकी भी नहीं होती तो आप सात्विक हो तामसिक हो कि राजसिक हो इंटेंसिटी का फेर तो रहेगा ही वह एक दूसरा फैक्टर है ट वी हैव टू टेक इनटू अकाउंट अदर देन यर नेचर अदर देन यर आउटलुक द थर्ड फैक्टर इज इंटेंसिटी कि आपकी इंटेंसिटी कितनी है व्याकुलता मुमुक्षु तोव वो कितना है वो भी एक फैक्टर है यह जो एनालिसिस हम करते हैं इसका फायदा क्या है ना ये जो डिफरेंस फिलोसोफी है ना वह हमारा एकदम क्लियर हो जाता है हमारे मन के भीतर में से कंफ्यूजन चला जाएगा यह सब चीजों से शायद हमको य कोई सोचेगा कि अरे आध्यात्मिक जीवन में क्या फायदा हो रहा है माइट बी कि साधना में कोई बेनिफिट ना हो साधना तो हमको जो गुरु महाराज से मंत्र लेने के समय जो कहा गया कि दिन में 108 1008 जप करना है वह तो करना ही है इसमें ना ही कुछ बेनिफिट होता है ना ही ना जानने से कोई नुकसान है किंतु अपना एक इंटेलेक्चुअल क्लेरिटी आ जाता है कि भाई मैं जो रहा हूं उसमें मुझे कोई कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए क्योंकि संदेह एक ऐसा चीज है ना सब समय मेरे मन में यदि संदेह रहेगा मैं ठीक कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं तो फिर वह अपना ही य इंटेंसिटी को वह खा

प्रश्न: सरकार की अच्छी योजनाएं करोड़ों लोगों तक पहुंचती हैं। रामकृष्ण मिशन कभी भी इतने लोगों की मदद करने की उम्मीद नहीं कर सकता।

जाएगा बिल्कुल ठीक क्योंकि देखिए कि खास करके जो लोग इस तरह से लोगों को हेल्प करने के बारे में सोचते हैं ना उन लोगों के मन में यह संदेह तो आएगा ही आएगा और मैं खुद इस संदेह का शिकार रांची में हो गया था मेरे मन में हमेशा यह चलता था कि यह जो जिस गवर्नमेंट ऑफिसर आईएएस ऑफिसर या तो फिर यह नाबार्ड के जो मैनेजर्स है उनको लेकर के मैं जो गांव में जाता हूं तो वे लोग जो हेल्प कर पाएंगे उससे सोवा भग का भी मैं नहीं कर पाऊंगा क्योंकि उनके पास जो रिसोर्सेस है रामकृष्णा मिशन कल्पना नहीं कर सकता नाबार्ड का क्या बजट होगा हजारों करोड़ों में बजट होगा लाखों करोड़ों में होगा गवर्नमेंट का बजट लाखों लाखों करोड़ों में है गांव वाले इंस्टिंक्टिवली यह चीज को समझते हैं जब मैं अकेला जाऊंगा मुझे काफी रिस्पेक्ट देंगे किंतु जब मेरे साथ में कोई बैंक ऑफिसर आईएएस ऑफिसर होगा वो मुझे साइड पर रख के सीधा उसी के साथ बात करेंगे दे नो कि किसके पास में कितना माल है सो यह डाउट आएगा हमारे मन में यदि मैं प्योर स्पिरिचुअल हूं और मैं सोचता हूं कि ईश्वर ही सब कुछ है यह जगत तो मिथ्या है और सिर्फ यह एक स्पिरिचुअल एक्सरसाइज मैं कर रहा हूं तो यह प्रश्न नहीं आता कि वोह आईएएस ऑफिसर कितना ही बड़ा हो अल्टीमेटली तो श्वर के पास मुझे पहले जाना है तो उस समय यह कंफ्यूजन नहीं आता किंतु जब आप यह सुपर स्पिरिचुअल है यानी ठाकुर की भावधारानी प्रश्न आता ही है और उस समय यह अपने मन को सही डायरेक्शन में लेके जाना दैट बिकम अ बिट डिफिकल्ट कभी-कभी भाव के प्रवाह में आकर के हम लोग बहुत सारा काम चालू कर देंगे फिर पता चलेगा कि अरे यह तो बर्डन बढ़ जाता है अपना कैपेसिटी नहीं है फिर हम काम करने के लिए शॉर्टकट खोजते हैं इधर से कुछ गड़बड़ करके करवा दो इधर से कुछ करवा दो राइट अभी जैसे प्रोजेक्ट सैंक्शन करना है गवर्नमेंट ऑफिस में जाएंगे आपको कुछ ना कुछ तो कहीं ना कहीं कुछ खिलाना ही पड़ेगा हाउ विल यू डील विद दैट हमारे एक साधु के बारे में मैंने सुना है वो जो मध है होता है ना अपने मध का वो कॉटेज इंडस्ट्री हम चलाते थे हनी बी कीपिंग का तो बी कीपिंग वो बहुत मतलब शुद्ध मध वहां पर तैयार होता था उसके वो दो-तीन डिब्बे लेकर के जाते थे और सबको एक-एक डिब्बा देते थे और पैसा तो दे नहीं सकते दैट इज नॉट अ वे ऑफ राम कृष्ण मिशन तो ऐसा करके यानी यू नो आप कहां पे कॉर्नर कटिंग करना शुरू कर देते हैं यू डू नॉट नो दैट इज ये सुपर स्पिरिचुअल में ये रहेगा ही रहेगा ये ओवरऑल जो ये है ना इसके ऊपर

प्रश्न: भविष्य में इन मॉडलों पर अधिक विस्तार से चर्चा करेंगे?

में मैं सोचते सोचते एलेबोरेट करता ही रहूंगा क्योंकि आई वांट टू हैव माय ओन आइडिया क्लियर देखिए यह सब चीजों के बारे में मैं इतना सीरियस नहीं था किंतु जब से वो मेरे साथ आयन के साथ में ये सब मेरा डिबेट होता था ना उसके बाद में मैं काफी सीरियस हो गया मैंने सोचा कि मेरा खुद का एक वर्ल्ड व्यू होना चाहिए वी ऑल नीड टू हैव अवर ओन वर्ल्ड व्यू माने नॉट स्पिरिचुअल सुपर स्पिरिचुअल उस सेंस में किंतु हाउ डू वी अप्रोच राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर हाउ डू वी सी द स्पिरिचुअल फिलोसोफी हाउ डू वी सी अवर वर्ल्ड एक जो जिसको वर्ल्ड मॉडल कहते हैं वो हम सब अपना अपना एक तैयार करते हैं कोई कॉन्शियसली करता है कोई काफी डिटेल में करता है कोई सबकॉन्शियसली कर लेता है अपना काम निकाल देता है सो उस समय मैंने भी सोच सोचा था कि आई नीड टू हैव समथिंग ऑफ माय ओन सो ट इज वई मैं यह सब कर रहा हूं आई विल गो ऑन लेबोरेटरी मा का रोल क्या है वो एक देखना पड़ेगा ट इज