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discussion with a friend 13 Jan 2024

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आपने तो क्या हिंदी में ए किया है ना क्या किया है बीए बी ी में अरेप हिंदी और गुजरात अच्छा गुजराती मेन विषय अच्छा एक्चुअली कितने सब्जेक्ट ले सकता है मेनय दो होते आगे जाकर अच्छा हा और फर्स्ट सेकंड तक सब मिक्स में फिर आपको आइडिया आ जाएगा कि इसमें थोड़ा मेरा ज्यादा रुचि है तो फिर आप उसमें से एक पिक अप करके फिर वो जनरल जैसे होता है ना आठवी तक हम सब पढ़ते सब नल फिर एक हम पिक एक्चुअली मुझे तो इंग्लिश में ज्यादा इंटरेस्ट था इंग्लिश मैं पढ़ता था लाइब्रेरी में जाकर सब गुजराती पेपर्स पहले पढ़ लिया फिर इंग्लिश तो मुझ समझ में आ जाता था इसलिए मेरा इंग्लिश मैं तो ऐसे वो स्कूल में पढ़ा इंग्लिश मीडियम है फिर भी बेटर है मेरा इंग्लिश क्योंकि मैं वो सब पढ़ता रहता टा लेकिन हमारे सामने एक प्रोफेसर रहते थे हिंदी लिटरेचर वहां महिला कोले बोते नहीं नहीं वो तो जो इंग्लिश मीडियम में पढ़ा है उनके लिए है और तुम तो ऐसे गवर्नमेंट स्कूल में पढे आगे जाकर वो होगा तो मैं थोड़ा वो अंडर व डर हो बोलते एम में तुम जाओगे तुम्हे प्रोफेसर बनना है तो आगे जाकर तो ज्यादा वो हार्ड हो जाएगा तो तुम नहीं वो कर सकते आ क्योंकि इंग्लिश मीडियम वाले के लिए ही है गुजराती मीडियम में और इंग्लिश में क तुम हिंदी ठीक है तुमरे लिए तो मैं थोड़ा मन बना लिया वो मेरा एक वो रह गया है इंग्लिश बहुत रुचि आता है मुझे अच्छा लगता है फिर तो पढ़ा ना मैं समझ जाता हूं कोई कोई ऐसे वर्ड होते है लेकिन फिर वो होता है ना सेंटेंस से हम समझ जाते हैं कि ये कहना चाहते है इंग्लिश में ज्यादा मेरा रुचि था लेकिन अब क्या होता है कोई गाइडेंस देने वाला आज के कल के बच्चों को लिए तो इतना सब अवेलेबल है तब तो उतना को घर में भी इतना मेरे फादर तो सोशल कर तो उतना उनको भी ठीक है पढ रहा है वो अपनी दुनिया में थे और दूसरे भाई इतने बड़े नहीं थे तो मैं क कोई तो सामने प्रोफेसर उनके घर जाते थे तो तो अपने विषय का ही वो करेगा पार तो बोलते नहीं नहीं हिंदी में करो फिर मनु भंडारी उनको उनको पढ़ा हिंदी में भी बहुत अच्छा लेक्चर जो है साहित्य हिंदी में और अभी हिंदी में फिर पहले नोवल जो थी वो ऐसे ही सब ये कहानिया रोच फिर धीरे धीरे हिंदी साहित्य में मैं जब पढ़ रहा था तब आया उसम साइकोलॉजी एटर हु तो ऐसी नोवल लिखी जाती थी बच्चों के लिए जिसमें साइकोलॉजी कलपुरा विश्लेषण मनो विश्लेषण होता था मानवीय जीवन का बचपन का उसमें एक मनो भंडारी की थी आपका बंटी बहुत अच्छी नल वो आई थिंक सभी पेरेंट्स को पढ़ना चाहिए कि वो बच्चा जैसा आप अभी बता रहे थे ना कि टीचर्स या पेरेंट्स या कोई भी एल्डर हो जो बच्चे का उनके लिए यह बहुत जरूरी है कि वो उनके अंदर जो हिडन है प्रतिपा उनको पहचाने उसको मिसगाइड नहीं करे कि नहीं तो मैं यही बनना है वो बेचारा चाहता है कि मैं एक अच्छा आर्टिस्ट बनू कोई नहीं होता कि अच्छा सिंगर बनू लेकिन घर में सभी बैकग्राउंड डॉक्टर है सब तो वो बोलता है कि नहीं नहीं पेरेंट्स या सब एक वो प्रेशर होता है नहीं नहीं हमारी पीटी में सब तुम्हारे दादाजी डॉक्टर थे यह डॉक्टर थे लेकिन कुदरत नहीं चाहती ना नकल हो सबका वो तो बोलता नहीं नहीं पापा मुझे इंटरेस्ट है गिटार र्ट में सिंगिंग में तो वो नहीं नहीं नहीं वो साइड में तुम करना ऐसे बाय प्रोफेशन हम नहीं ले सकते उनको उसम क्या मिलेगा तो हम सभी चीज को पैसे से मापते तोलते तो थोड़ा वो रहता है ना तो वो फिर बन जाता है डॉक्टर लेकिन अंदर जो एक जॉब सेटिस्फेक्शन या जो एंजॉय अपना काम एंजॉय नहीं करेंगे आप तो अच्छा रिजल्ट नेचरली नहीं आएगा किंतु इसके लिए ना फिर ये इकोनॉमी भी इतना एडवांस होना चाहिए मान लीजिए कि मैं अपने टैलेंट के अनुसार और कुछ करना चाहता हूं जैसे मान लीजिए मैं क्रिकेटर होना चाहता हूं या तो आर्टिस्ट होना चाहता हूं या तो फिर मैं इनोवेट होना चाहता हूं या तो फिर मैं फंडामेंटल रिसर्च करना चाहता हूं तो यह सब चीजों के लिए फिर इंडिया की इकोनॉमी अभी इतनी एडवांस नहीं हुई कि यह सब कैरियर पाथ को प्रॉपर्ली सपोर्ट कर पाए अभी देखो कि देखिए कि जितने भी अ उसका ये नोबेल प्राइज विनर्स है जिन लोगों ने फंडामेंटल रिसर्च करके नोबेल प्राइज प्राप्त किया है इंडियन वेर सभी लोग अभी विदेश की कोई लेबोरेटरी में काम करके उनको यह नोबेल प्राइज मिला है इंडिया में व कैरियर पाथ जिसको कहेंगे या तो फिर एक सिस्टम कहेंगे जोक यह सब डिफरेंट अल्टरनेट कैरियर्स को इनकरेज करें ऐसा अभी तक नहीं है यह सुंदर जद भारत में होता तो बजाज स्कूटर घुमाता वहा जाकर अभी इतना मल्टीनेशनल का वो सीईओ हो गया इंडिया में जो नेपोटिज्म मिलना चाहिए रदर देन य नेपोटिज्म उसमें क्यों लोग इतना इमीग्रेट होना चाहते हैं क्योंकि यहां पर वो सेम टैलेंट है यहां पर कोई स्कोप नहीं वहां पर फटाफट करके स्कोप मिल जाता है वो भी एक बात है कि वहां की पॉपुलेशन हमारे से बहुत कम है ट इज वन फैक्टर किंतु इवन बियोंड इवन बियोंड ट वो जो एक वर्क प्लेस एथिक्स जो होता है ना टैलेंट है तो टैलेंट को प्रमोट करो रदर देन की कौन आपकी चमचागिरी करता है मेरिट पर हा वो एक वहां पर है बोलक के लोग वहां पर जाना चाहते हैं यहां पर आप कोई भी डॉक्टर वगैरह में कोई दिक्कत नहीं कि अल्टरनेट कैरियर पाथ सिलेक्ट करने से रेसलिंग है जैसे मान लीजिए ना कि फिर यह शूटिंग है ना कि एथलेटिक्स जिसको कहते हैं वह सब चीजों में फिर आपका प्रॉपर करियर बन पाएगा कि नहीं ऐसा कोई गारंटी नहीं है आपको इच्छा है कि मां बाप को तो चिंता होगी फील करते और एक फिर बच्चा भीता एक कंफर्ट जोन में कि चलो बाय हो भी रखेंगे सौक के तौर पर लेकिन जो हमारा जहा से फाइनेंशियल हमारा जो चलेगा वो एक अलग लेकिन उन उसम बैलेंस जो नहीं कर पाते वो फिर को लाइफ थ व उनका डिफिकल्ट होता जाता है और दूसरे साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम क्योंकि वो फिर डिप्रेशन में चले जाते क्योंकि उनका जो करना है उनको जिसमें पैसा मिल रहा है उसमें मजा नहीं आ रहा है और जिसमें मजा आ रहा है उसमें पैसा नहीं मिल रहा है तो यह एक स्ट्रगल वो मैं देखता हूं आज के युवाओ में भी है कि वो और वो कहीं ना कहीं आप जैसे बोल रहे वो अंदर वो भी जान कि पेरेंट्स जो बोल रहे हैं कहीं ना कहीं वो भी ठीक है आफ्टर ल वो भी ठीक ही है कि चलो मार्केट उनका है नहीं और या फिर आपको कोई एक्स्ट्राऑर्डिनरी ऐसा कुछ अलग करके लेकिन उनका जो रुचि अभिरु उनका जो एटीट्यूड या जो भी आप कहिए वो पूरा उसी दिशा में है ये तो बिल्कुल उनके अपोजिट है लेकिन फिर वो जो स्ट्रगल वो रहता है तो उसमें ये स्पिरिचुअल जो है स्पिरिचुअलिटी वो कहां तक उसम हेल्प कर सकती है स्वामी जी जब भारत में घूमते थे ना तो बड़े हताश हो गए थे अरे ये इतनी बेकार परिस्थिति है हमारे देश की आत्म श्रद्धा जैसा कुछ है ही नहीं फिर ये जब जहाज में मुसाफर कर रहे थे तो देखा कि ये जितने भी वो खलासी नाविक वगैरह है बहुत सारे इंडियन है तो उन लोगों में वो अपने देश में घूमते हुए जो हताशा निराशा एक आत्म श्रद्धा का अभाव जो उनको दिखा था वो बिल्कुल उल्टा दिखा उन खलासी लोगों में जो जहाज में जाकर के काम करते हैं तो स्वामी जी बड़े खुश हो गए बोले कि जो सही मेनली नेस है ना इंडियन लोगों में वो मैंने इन लोगों में देखी वो देख कर के मुझे आशा बंदी मेरे देशवासियों पर कि हां यह भी पॉसिबल है कि आप इस तरह का एक काम करें जो कि ट्रूली डेंजरस है ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश लोग क्यों इतना विश्व पर विजय पा सके क्योंकि लोगों में करेज है और यह जो इंडियन या तो कोई भी गुलाम प्रजा है उनमें करेज नहीं है जब वह सही सही में युद्ध होता है तो ये लोग डर के भाग जाता है तो करेज की वजह से वे लोग जीतते हैं ऐसा हमको बार-बार सिखाया जाता था इंडिया में रहकर तो स्वामी जी कहते हैं मैं जब जहाज यात्रा में जाता हूं तो देखता हूं कि जब तूफान वगैरह आता है तो ये जो अंग्रेज खलासी लोग शराब पीके वो नशे में मत हो जाते है डर को मैनेज करना है फियर को मैनेज करना है इसलिए वोह शराब पीते हैं जबकि यह इंडियन खलासी जो है वह वेजिटेरियन खाना खाते हैं शराब बराब नहीं पीते हैं और मने फुल विथ फुल कॉन्शसनेस ये स्टोम होता है ना कि तूफान आता है उसका सामना करता है तो स्वामी जी कहते है कि इन लोगों को देख कर के मुझे आशा बदी अपने देश बांधव में फिर से कि हां नहीं सही सही मेनली नेस जिनको कते हैं वो कार्य यह लोग कर पा कर सकते हैं तो मने क्या है कि उस सिचुएशन में आपको जाना पड़ेगा माने जब तक हम डर के मारे रहेंगे कि डर ही सबसे बड़ा डर है माने सबसे बड़ा डर किस चीज का हो सकता है राक्षस का हो सकता है ना कि बुत का हो सकता है ना कि मृत्यु का डर ही सबसे बड़ा डर है मने ये जो एक अनडिफाइंड एक अनसर्टेनटीज जो नजर के सामने आता है ना मैं यहां से वहां जाऊंगा तो फिर मेरा क्या होगा वोह जो अनसर्टेनटीज है म अनसर्टेन का डर ही सबसे घातक है हमारे लिए एक बार मन बना लिया कि जाएंगे जो भी होना होगा अपने सीने पर झेल लेंगे अपनी बाहो से मुकाबला करेंगे वी विल मेक अवर ओन डेस्टिनी ये जो कॉन्फिडेंस और करेज आ गया देन यू कैन अंपलिंग इन दिस वर्ल्ड इसलिए स्वामी जी जब सेकंड टाइम अमेरिका माय न्यू गोस्पेल इ मेनस मर्दानगी है मेरा नया संदेश आप राज योग भी करिए कर्म योग भी करिए भक्ति योग भी करिए ज्ञान योग भी करिए किंतु वो जैसे महापुरुष महाराज कहते हैं ना गुरु कृष्ण वैष्णव तीन दया होलो एक दया बने जीव छारे ार गलो माने गुरु कृष्ण और वैष्णव तीन की दया हुई किंतु एक की दया ना हुई तो पूरा सत्यानाश हो गया वो एकन तो वो मन तो ऐसे ही य चार योग आप जद करते रहिए किंतु मेलीस नहीं है करेज नहीं है आत्म श्रद्धा नहीं है तो किसी भी तरह का योग कोई काम नहीं करने वाला मेलीस ट इज द फाउंडेशन साधना एक बार निडरता आ गई तो फिरने अनसर्टेन से डरना क्यों भाई यह जो नर्मदा परिक्रमा ये जो अपनी यात्राए जो होती थी ना पहले के समय में क्यों ऐसे दुर्गम स्थानों पर रखा करते थे ये दुर्गम स्थान में यात्रा करना आजकल तो बड़ा सहज है वैसे आप ट्रेन में या प्लेन में बैठ जाइए फिर पहाड़ वगैरह चढ़ना है तो रोक पे है वरना हेलीकॉप्टर है यदि पैसा ज्यादा है तो तो यह सब हो गया है किंतु पहले तो आपको पैदल चल कर के जो चार घम की यात्रा करनी है तो अनसर्टेनटीज अखंडानंद जी वो गुजरात में जा रहे ना वो सौराष्ट्र में प्रवण करते करते तो डाकुओ ने हमला कर दिया तो उनके साथ में वो जो था एक यात्री वो तो सब लेकर के घूम रहा था खाना बनाने के लिए आटा चावल वो टव वगैरह सब था उसके पास में तो इतना डरने लगा बेचारा तो आप इस तरह से आप यात्रा करेंगे तो डर कितने है रास्ते में जीवित आएंगे कि भी नहीं आएंगे कोई जंगली पशु खा लेगा बीमार हो जाएंगे जंगल में से जा रहे हैं तो भोजन मिले कि नहीं मिलेगा कुछ भी हो सकता है एक अनसर्टेनटीज प्रोड्यूस करता है उसी को तो तीर्थ यात्रा कहते हैं एक अनसर्टेनटीज नहीं आएगी आजकल हमारा जीवन इतना सिक्योर है माने यह पैराडॉक्स है मैं जितना अपना इंश्योरेंस बनाता हूं जितना मैं बैंक बैलेंस बढ़ाता हूं मेडिकल इंश्योरेंस लेता हूं इतना मेरे जीवन में डिग्निटी आती है जिससे क्या होगा कि मैं बाद में बूढ़ा हो जा ने के बाद में किसी पर डिपेंड ना रहूं बीमार हो जाने से किसी के सामने हाथ ना फैलाना पड़े ये डिग्निटी आपको देता है पंक बैलेंस सर्टेनटीज वन में किंतु वही फिर शरणागति ले लेता है आपसे ये जो हम आश्रम में रहते हैं बड़े आश्रमों में तो उसका आप देखिए कि वरा नगर मठ और आज के जीवन में सबसे बड़ा फर्क क्या है वहां प अनसर्टेनटीज है आपका रूटीन एकदम बंधा हुआ है आज जो मेरा रूटीन है आज से 50 साल के बाद में भी वही होने वाला है एटलीस्ट मुझे जो बेसिक आवश्यकता है उसकी कमी नहीं होने वाली तो मां ने यह जो कहा था ठाकुर को मां जब वहां पर गई थी वो बोध गया देखा कि बुद्धिस्ट साधु लोग बड़े बड़े मठ में रह रहे हैं तो माने ठाकुर को प्रार्थना की कि तुम्हारे लड़के तुम्हारे संतान इस तरह से धूप में घूम रहे हैं भिक्षा करते करते तो उनके सर के ऊपर में छाव देने के लिए कोई जगह तुम करो ऐसा मान्य ठाकुर को प्रार्थना की थी तो वो जो एक बेसिक सस्टेन के लिए जो चाहिए वह एक चीज हो गया स्पिरिचुअल लाइफ में और फिर बहुत ही ज्यादा सेफ्टी और सिक्योरिटी हो गया फिर आप क्या होगा कि कर्म में ही इतने डूब जाएंगे कि फिर वह शरणागति का भाव ही चला जाएगा ये देर इ समथिंग टू थिंक अबाउट सभी के जीवन में जितना सेफ्टी सिक्योरिटी बढ़ेगा उतना शरणागति चला जाएगा वो बात बिल्कुल सही है आपकी क्योंकि मेरी लाइफ में मैं कई बार देखा है ना कि जब कोई आधार नहीं रहा य थोड़ा थोड़ा व सपोर्ट होता है तब हम उतना व्याकुलता नहीं आती अंदर से कई बार है ना वो ऑप्शन हमारे पास होते है ना तब तक वो व्याकुलता नहीं आती और जब वो ऑप्शन सब कोई सहारा नहीं रहा आप सीधा गिरना ही गिरना है तब अंदर से एक जो अंतर प्रार्थना अंदर से एक जो आवाज आती है वो मुझे लगता है य ठाकुर जो बोले कि आप रो के पाव से तो वो डायरेक्ट जैसे सुन लेते भगवान तो इसके लिए जब आप वो कुछ नहीं होगा तब अंदर से वो व्याकुलता कि अब बचाओ कोई मेरे पास सहारा नहीं तभी जैसे वोह द्रौपदी का वो चरण माता उसके बा कोई ऑप्शन नहीं रहा अभी वो एक ही सार आरहा तो तब अंदर से एक वो एक अलग ही जैसे हम बोलने के लिए बोलते हैं बैंक बैलेंस भी रखेंगे सिक्योरिटी सब है और बोलते भगवान का है हमारा तो भगवान ही सब कुछ है वो बाला अलग हो गए लेकिन एक्चुअली कुछ नहीं अब क्या होगा क्यक मैं मेरे साथ एक बार ऐसा राज मैं एक बार यहां गया था सापुर करके एक जगह है तो मैं क्या ऐसा ट्रेवलिंग में ज्यादा पैसे नहीं रखता कि वो है डेबिट कार्ड है तो अभी तो कहीं भी अवेलेबल होता है एटीएम तो वहां से उठा लूंगा और ज्यादा पैसे नहीं क्योंकि फंक्शन था उधर रात को उधर सोना होता है तो वो सब तो वहां फिर आया तो जैसे रेलवे स्टेशन पर तो मैं देखा तो मेरे पास र थे पॉकेट में और मैं मैं कहा चलो एटीएम है रेलवे स्टेशन में तो पैसे थोड़ा विड्रॉ कर लेता हूं तो मैं देखा तो एटीएम गायब मेरा डेबिट का अब मैं वो अनजानी जगह मैं कहा चलो मैं सुरेंद्र नगर तक पहुंचाता वो न सारंगपुर से सुरेंद्र नगर फिदा बथ तो सुरेंद्र नगर तक का किराया था मेरे पास तो मैं वहां तक पहुंच गया फिर सुरेंद्र नगर रेलवे स्टेशन में बैठा और तब तो मेरी जो बीमारी थी उससे बाहर निकला था और इस दर्शन करने के लिए गया था तो फिर मुझे इतना गुस्सा आया एक भक्त का गुस्सा होता है ना भगवान पर मैं कहा यार मैं तो अच्छे काम के लिए यहां आया था और ठाकुर आपने अभी मैं आप आज आपकी परीक्षा लेता हूं अब मैं यही बैठूंगा कुछ नहीं करूंगा अब देखता हूं क्या होता है भूख भी इतना लगा था रप तो वो रेलवे में टिकट का चला गया मेरा तो मैं बैठा र बैठा र शाम हो गई मैं दोपहर को उधर आ गया था सनपुर से सुरेंद्र फिर मैं इतना गुस्सा ठाकुर पर इतना गुस्सा आया बहुत गुस्सा गुस्सा गुस्सा मैं अब कुछ राहा ही नहीं या कोई रिलेटिव नहीं है किसे फोन करूं क्या कुछ नहीं और कुछ हो तो भी नहीं करना है बस मैं बैठा हूं आज आप मैं देखता हूं क्या करूंगा आप करेंगे क्या आज मैं आपकी परीक्षा करता हूं ठाकुर तो फिर मैं तो बैठा रहा फिर बहुत बैटा बहुत बेटा फिर थोड़ा वो होता है ना कला टेल है तो फिर मैं लते टेल व में सुरेंद्र नगर तो हमारा कोई रिलेटिव नहीं देखते कैसा सिटी है तो थोड़ा मैं दूर टल के थोड़ा दूर गया रे फिर मुझे मैंने कहा एक तो भूख लगी है ज्यादा दूर जाऊंगा तो और ज्यादा वीकनेस आ जाएगी तो मैं ऐसे टर्न करके वापस आ रहा था तो मैं ऐसे थला लगाया था और वापस आ रहा था तो सडन एक भाई वो मुझे तो बोलते लिफ्ट चाहिए उनको लगा थेला है तो रेलवे स्टेशन जाना होगा तो मैं वापस जाहा है तो फि मि कहा जाना है आपको अब मैं क्या बताऊ जाना तो मैं उनको लैंग्वेज से लगा थोड़ा बरोड़ा के तो आप कबाद से तो बोलते मैं भी बरोड़ा से सुरेंद्रनगर में मेरे ससुर रहते हैं यहां भी धंधा सेटप करना है इसलिए आया हूं मैं बरोड़ा से कहा हमारा राम कृष्ण मिशन उधर है ना मैं भी रहा हो एक साथ आप रामकृष्ण विशन में तो मैं तो वहां जाता हूं वहां एक सोलंकी भाई है वो भाई है वो महाराज है सबका वो तो मेरा थोड़ा वो तो तो बोलते अभी तो आपका कौन सा ट्रेन होगा ये वो फिरने कहा हां है ट्रेन अभी जाएंगे तो पता चलेगा मैं भी उनको अनजाने आदमी से उतना में क्या ज्यादा वो तो बोलते नहीं नहीं अब आपने रामकृष्ण मिशन का व नाम लिया मैं वहा लाइब्रेरी में जाता था पने वैसे वो स्वामीनारायण पंथ में भक्त थे तो फिर बोले नहीं नहीं आज आपको मेरे वाइफ भी खुश होगी कि एक भक्त हमारे घर आए नहीं नहीं आप हमारे घर ही चलिए फिर मैं आपको छोड़ दूंगा तो मैं उधर गया तो ठीक है चलिए तो उन्होंने रास्ते में से गुलाब जामू लिया ठाकुर को पसंद है ये तो गुलाब जामू या वरस कुला तो फिर वहां तो जैसे मैं एंटर हुआ उनके घर में और मैं जब ठाकुर से वो झगड़ा कर रहा था ना मैंने कहा बस आज मैं आपकी परीक्षा कर रहा हूं कोई आकर र मैं एक्चुअली वो नक्की कता अमाउंट भी कोई रप कर दे तब मैं मान के वरना यह सब कुछ आज आपकी इतना वो जैसे वो गुस्सा होता है ना पुत्र अपने पिताजी तो फिर उनके जैसे ही अंदर ये फोटो उठा तो मैं कहा कुछ तो जादू किया है फिर उन्होंने बोलते आप थोड़ी देर बैठ फिर उन्होंने स्नान किया फिर प्रसाद ठाकुर को फिर बोले आपने ये खाई है फिर चाय पानी है व आपको नहीं नहीं भोजन तो मैं रास्ते में किया था मैं ऐसा बोला तो फिर उनकी वाइफ से भी थोड़ा बात किया बरोड़ा की सब बातें कर रहे थे कि वहां मैं जाता था लाइब्रेरियन फिर वो बोलते उनको बोला उनकी वाइफ को कि मैं इनको छोड़ के ता हूं तो फिर और जैसे ही वो स्कूटर उन्होंने रखा वो रेलवे स्टेशन के अंदर बोलते नहीं नहीं आप रुक मैं आता हूं अभी तो मैं कहा कुछ काम होगा ग हो तो टिकट लेकर आए और मेरे हाथ में दिया और बोलते एक मिनट एक मिनट ये रखे आपको बोलते आपका चेहरा पता नहीं मुझे ऐसा लगा कि आप कुछ कुछ दुख चिंता तो मेरे आथ में आसू आ गए तो मैं तो बोलते अरे क्या हुआ और मैं नहीं नहीं नहीं मेरा किसी से झगड़ा चल रहा था तो ऐसे जब कुछ कुछ बिल्कुल अंधेरा है तब मैं देखा कि और वो फोटो भी उधर कि मैं बैठा हूं इधर तो तब मुझे ऐसा लगा कि और इससे दो न और भी तब के एक ऐसे ही तो आप जब आपका कोई सहारा नहीं आप छोड़ के तब वोह तो अपना जो भी है लेकिन व्याकुलता चाहिए इसलिए वो ठाकुर ने जो व्याकुलता की बात की क्योंकि व्याकुलता से मैं देखा अंदर भाव आता है वो कोरा कोरा नहीं रहता रुखा रुखा एक भाव अंदर आता है तो ये व्याकुलता बहुत जरूरी है तो कंफर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए ये क्या बोलते आध्यात्मिक जीवन इस तरह से हम उसका हम हेल्प उसकी मिल स भी हम और एक सरा व तो हमें लगता है कि नहीं है स्ट्रगल तो आपको जो करना है आपको करना ही है लेकिन एक वो बैकिंग रहता तो वो तो मैं बढ़िया स्टोरी जोत में लिख दीजिए एकत लिखने लायक तो ऐसा मैं जनरली बताता नहीं हूं लेकिन एक दो महाराज ल महाराज को बताया फ दूसरी बार वो हुआ वो तो अलग पूरा स्टोरी है वो तो मैं इस ज लिखा था तो मैं देखा है व्याकुलता लता और रो रो करके अभी कोई कोई स कोई ऑप्शन ही नहीं रहा अब आप जो भी करे तो मैं इतना गुस्सा फिर मुझे इतना गिल्टी फील हुआ कि ठाकुर स में झगड़ा फल महाराज की एक दो बार तो बोलते मैं देखा है तुम ठाकुर की बहुत परीक्षा लेते हो तेश ऐसा मत करो उन्हे इतने करुणा भाव से बोले महाराज के मैं नहीं भी कभी नहीं बोलते ये बंद करो व इतने करुणा भाव से बोले ना कि जैसे उनको कोई बुलवा रहा होसे ये बंद करो इ तुम हर बार किसी ना किसी चक्कर में फस जाते हो और फिर ठाकुर को तुम बहुत यह बंद कर दो र की परीक्षा लेना भी बंद कर तो मैंने कहा बोलते उससे आध्यात्मिक कोई नुकसान होगा मेरा या जो भी है पता नहीं जब तक जीवन है तब तक परीक्षा है परीक्षा ठकुर की भी परीक्षा है स्वामी जी ने तो आखत परीक्षा व ठाकुर कैंसर से सोए हुए तब स्वामी जी बोलते हैं अभी जद बोले की मैं अवतार हूं तब मान तब ठाकुर ने इटली कहा जय राम जय कृष्णा श्री राम कृष्ण तोसा सं महाराज फिर भीरा मान संशय होना कोई बुरी बात नहीं है और परीक्षा करना भी कोई बुरी बात नहीं जिनके हाथों में हमने अपना पूरा जीवन सौपा है जिनके शरणागत हुए है उनको हम परीक्षा कर का अधिकार हमको नहीं होगा तो किसको होगा पराए लोगों की थोड़ी ना परीक्षा करेंगे अपने वालो की तो परीक्षा कर और वो अधिकार आप ही है मेरे लिए अब कोई है ही नहीं मेरे तो ऐसे इंसिडेंट लाइफ में होते हैं तब देखा है वो परमानेंट नहीं रहता वो थोड़ी देर वो ठाकुर ने फिर वो बाद में संशय आ जाता है कि वो तो जैसे हम गुजराती में बोलते है ना के डाल का गिरना और वो का का बैठना वो तो ऐसे हुआ होगा नय बो तो बाई एक्सीडेंट हुआ होगा ऐसा हो सकता है वो भाई तो का लेकिन जो है ये है वो है ये फिर भी हमारा मन ऐसा हो वो संशय वादी तो वो संशय बाद में पैदा करता है फिर बाद में कुछ ऐसी घटनाए होती है तो फिर थोड़ा फ तो वो सस्टेन करना वो मुश्किल हो जा लेकिन ये है वो ठाकुर की बात बिल्कुल सही व्याकुलता चाहिए ऐसे तो मैं कितनी बार ऐसे ही प्रार्थना करता हूं कुछ अंदर से खुश हू कुछ उतना प्रॉब्लम नहीं है लाइफ में सब ठीक चल रहा है तो ठाकुर तो उतना वो भाव नहीं आता असर नहीं होता यह तो जैसे बालक अंदर से वो आ आत्र भाव जिसे बोलते हैद पूरा निचोड़ ले जैसे ठाकुर बोलते ना मैं पंचवटी में जाकर जैसे तोलिया पूरा नाने के बार वो करते है ना सेसे पूरा वो हमारा हदय मन पूरा निचोड़ जाता है तो वो डेफिनेटली वो व्याकुलता वाली प्रार्थना थे बोलते है ना कि कीड़ी के पैरों में जा हुआ जो जांजर है नुपर है उसकी आवाज सुन सकते ठाकुर कहता है ना कि बच्चा एक बड़ा बच्चा एक छोटा बच्चा है छोटा बच्चा बा बा करते म करके बुलाता है बड़ा बच्चा है व पिताजी पिताजी करके बुलाता है तो ऐसा तो नहीं कि पिताजी सोचते हैं कि जो उनका नाम ठीक से नहीं ले पा रहा वो उनको प्रेम अधिक नहीं कर रहा कम प्रेम कर रहा है ऐसा तो नहीं है उसका डेवलपमेंट फेस किस तरह है उसके अनुसार वो पुकारता है और ठाकुर के लाइफ में हम दे देखते सभी जो जो आए थे भक्त गण इन सबका अलग अलग व क्वालिटी का कोई पापी तापी सभी को वो जहां है वहां से उसको आगे उठाना कि ऐसा नहीं कि तुम ये हो तुम्हारे लिए न एंट्री जो जहां प है वहा से उसको थोड़ा गुड है तो उसको बेटर बनाना बेटर है उसको बेस्ट बनाना जैसे गिरीश कोष आशय उनका जीवन तो कितना वो एकदम पूरा वो था फ वहां से टाकुर ने उठा उठा कर य तो ये एक बहुत बड़ी क्वालिटी जो टीचर्स में होनी चाहिए गुरु में होनी चाहिए आजकल हम देखते हैं बड़ी-बड़ी स्कूलों में बच्चे जो अच्छे अच्छे मार्क्स लाते हैं जो टैलेंटेड है उनको आगे आगे करते और जो बिचारे स्वामी जी कहते है ना कि ब्राह्मण के लड़के को जद एक टीचर चाहिए तो शूद्र के लड़के को 10 टीचर चाहिए उसका थोड़ा कम होगा लेवल लेकिन उसको भी उठाना है आगे व जहां भी है उससे तो उसको डिस्क नहीं करना कि तुमने ये उसमें भी कुछ अच्छा है वो निकाल कर मैं जब टीचिंग तो कम पढ़ाया है तो किया शुरुआत में हमारे क्या सेशन लेने जाना होता है इंटर्नशिप इंटर्नशिप तो मैं कोई कोई स्कूलो में जाता मा तो क्या स्कूलो में नहीं बैठते वो गवर्नमेंट ऐसी लोर स्कूलो तो मैं व देखा व तो बच्चे जो आते उनका बैकग्राउंड भी ऐसा होता है तो वो लोग ऐसे जिस बैकग्राउंड से आएंगे नेचरली ऐसे बिहेव करेंगे तो मोस्ट ऑफ लड़के ऐसे मारद वाले कुछ कुछ कुछ अच्छे पढ़ने ख तो मैं उनको देखता था कि उसम वो लीडरशिप वाली क्वालिटी थी एकदम निर्भय क्योंकि वो सब देखा होता है ऐसे रफ एंड टफ लाइफ वाले और जो अच्छे घर के लड़के होते वोह थोड़ा क्या सिक्योरिटी में रहते तो उसना वो सहम स कर और वो मारद वाले और वो तो क्या उसका रफ एंड टफ लाइफ घर में सब देखते सा तो बच्चे उससे डरते थे मैं कहा तुम यह क्वालिटी है तो मैं भी जब प्रिंसिपल या कोई बुलाते या बाहर जाओ क्लास की तो तुम्हें पूरे क्लास को कंट्रोल करना है तो इतने अच्छी तरह से महाराज वो कंट्रोल करते थे कि मैं पिन ड्रॉप साइलेंट मैं आकर देखता था अरे जैसे क्लास में कोई बच्चे नहीं है हम टीचर्स होते वो भी इतने शांत नहीं कर देखि सर सब चुप है मैंने वेरी गुड तो धीरे धीरे धीरे आज मैं देखा था स्कूल में पढ़ने लिखने में नहीं है ऐसे थोड़े आवारा टाइप के टीचर्स भी उसके पर ज्यादा ध्यान नहीं देते कि उनको लाइटली लेते हैं और ये तो हैसा लेकिन उसको थोड़ा सम्मान दे जो ठाकुर ने किया गिरीश को कि तो जैसा भी है पापी तापी नहीं नहीं उससे भी उसको आगे प्रेम प्रेम भाव से वो अंदर तो समझता ही है थोड़ा गिल्टी बा तो होता ही है कि मैं भी थोड़ा न लोगों से वो ह तो मैं धीरे धीरे उनको नहीं नहीं तुमय क्लिटी है तुम ऐसे ऐसे तो फिर वो पढ़ने में भी मुझे दिखाने के लिए मैं जब भी जाता था सर ये कर दिया तो ऐसे ऐसे उसको एक रिस्पेक्ट हमारे पर तो रि को मेंटेन करने के लिए वो फिर अच्छा बनने का वो अंदर सबके अंदर वो तो होता ही वो अच्छा बनने का जो गुण है वो आगे आगे आगे बढ़ता जा तो ये ठाकुर का एक बहुत बड़ा गु है वो एक अच्छे टीचर थे गुरु थे वो जो भी जहा भी है उसको तू तो ऐसा है ऐसा है ऐ और नहीं गिराए उसको जहां है वहां से इसको वो करेंगे प्रॉपर एजुकेशन का अर्थ यही है ना जो टैलेंटेड है उसको अपनी टैलेंट निकालने के लिए एक्सप्रेस करने के लिए और बेटर अपॉर्चुनिटी मिलना चाहिए और जो थोड़े से कमजोर है उनको कॉन्फिडेंस दिलाने के लिए सेपरेट एक कोचिंग की व्यवस्था होनी चाहिए यदि आप यह सोचेंगे कि मैं सिर्फ टैलेंटेड लोगों प फोकस करूंगा प्रॉब्लम क्या होगा जोक टैलेंटेड नहीं है ये लोग इतना एक बड़ा एक लेबर पुल बनाएंगे जो कि फिर कुछ मतलब कर नहीं पाएंगे अपने जीवन में माने ये जो कंटीन्यूअस जो अन एंप्लॉयमेंट चलता है आजकल इंडिया का ग्रोथ कैसा है आजकल की ग्रोथ विदाउट एंप्लॉयमेंट मने मैन्युफैक्चरिंग भी ववन बढ़ रहा है किंतु एंप्लॉयमेंट फिगर्स नहीं आपको इतना प्रॉपर दिखाई दे रहा य सही गलत स्टेटिस्टिक्स क्या है पता नहीं किंतु फिर भी हम लोग खुद देखते हैं अपने क्लासेस में वगैरह में इतने सारे लड़के लोग पढ़ते हैं आधे लड़को को तो क्या चल रहा है वो समझ में नहीं आता प्रॉपर एजुकेशन तो इसी को बोलेंगे कि जो जहां पर है उसके एक्चुअली जो टीचर टू स्टूडेंट रेशो है ना वो बड़ा इंपोर्टेंट है जो अच्छी अच्छी स्कूल होती है तो न टू 20 का वो होना चाहिए रेशियो न टू 15 न टू 20 तभी टीचर सबके ऊपर में इंडिविजुअल अटेंशन दे पाएंगे कि एक टीचर है और 15 20 स्टूडेंट है अपने मैं खुद जब पढ़ता था तो एक टीचर के सामने वो 60 70 लड़के क्लास में बैठे हैं तो किसका नाम भी आधे लोगों का नाम भी नहीं पता टीचर को होता है कि वो कौन बैठा है सामने वो बेचारा आ कर के जो कुछ करना है कोड पर करके चले जाएंगे और राधे लड़के को समझ में नहीं आएगा तो कौन प्रश्न करेगा आपका क्लास होता है 35 40 मिनट्स का इसमें आप 60 70 बच्चों को पढ़ाते हैं तो हाउ कैन यू गिव देम इंडिविजुअल फोकस व्यक्तिगत रूप से वो नहीं दिया उनके गुण अवगुण वो जानने का टाइम ही नहीं रहता ये इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट यानी कि दो तरह से होता है एक तो फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट होता है फिर इस तरह से इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट भी होता है यदि आप फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर है एयरपोर्ट है सीपोर्ट्स है फिर यह टेलीकम्युनिकेशंस है रोड्स है यह सबको आप जितना डेवलप करेंगे उतना ही आपको इंस्टीट्यूशंस को डेवलप करना तभी कोई भी सिविलाइजेशन का दो फाउंडेशन है स्टेट का नेशन का इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंस्टिट्यूशन एंड कांस्टिट्यूशन ऑफर्स किंतु यह इंस्टिट्यूशन डेवलपमेंट जो है ना वही तो एक एक प्रॉपर एक बनाता है सिस्टम एक जिसको कहेंगे कि एक मेटल फ्रेमवर्क क्रिएट करता है जो कि पूरे सिविलाइजेशन को सोसाइटी को टिका के रखता है फैक्ट्री से माल वहां से आएगा फैक्ट्री में मेन पावर अपना रामकृष्णा संघ का जो मेन यह है कि मेन मेकिंग यदि हम लोग अभी देखिए कि अपना खुद का एजुकेशन इनिशिएटिव हम लोग जितना इनोवेशन करना चाहते हैं मुझे पता नहीं कितना हम कर पा रहे हैं कि नहीं एक एजुकेशन फीड में कंटीन्यूअस हम लोगों का कुछ ना कुछ इनोवेशन कुछ ना कुछ कंट्रीब्यूशन होना चाहिए क्योंकि हम लोगों को देखिए बहुत सारे लोग ऐसा सोचते हैं यदि कोई भी रिलीफ एक्टिविटी करते हैं कोई भी डिजास्टर होता है या कोई भी सर्विस एक्टिविटी है हम लोग सोचते हैं कि अरे सोसाइटी में इतनी सारी नीड है डिमांड है उसके सामने हम कितना दे पा रहे हैं जैसे कि अपनी डिस्पेंसरी में अभी हज पेशेंट ऑलमोस्ट हो जाते हैं महाराज के साथ बात हो रहा था मेरा डॉक्टर महाराज के साथ तो 1000 पेशेंट ऑलमोस्ट हो जाते हैं किंतु एक्चुअली देखा जाए तो डिमांड तो बहुत ज्यादा है मेडिकल सर्विसेस की उसके सामने तो हम पूरा एक सागर में गागर की तरह छोटा सा एक हम लोग कंट्रीब्यूशन कर पाते हैं कि तो उस दृष्टि से नहीं देख करके इस दृष्टि से यदि देखे तो हाउ टू मेक अवर सर्विसेस बेटर सो ट वी कैन प्रोवाइड फ्रेमवर्क व कैन प्रोवाइड अ रोल मॉडल ी कैन प्रोवाइड केस स्टडी ट अदर पीपल वर्किंग इन द सेम फीड अपनी हॉस्पिटल इतनी अच्छी चलनी चाहिए कि बाकी लोग जो हॉस्पिटल चलाते यहां पर आ कर के देख कर के सीखे बेस्ट प्रैक्टिसेस नई नई इनोवेशन यहां से हो रही है मॉडल तो सिमिलरली य एजुकेशन भी अपना इस तरह से होना चाहिए कि यू आर ऑलवेज प्रोड्यूस समथिंग न्यू एंड न्यू के किस तरह से आप बच्चों के ऊपर में बच्चों मतलब खास करके जो टैलेंटेड लड़के हैं उनको लेकर के उनको सिखाना तो बड़ा आसान है किंतु जिनका पढ़ाई में इतना अभिरुचि नहीं है या तो फिर जिनको कहेंगे कि ग्रहण करने में थोड़ा सा समय जाता है उन लोगों को जद आप ठीक से सिखा पाए देन ट विल बी योर अचीवमेंट ट वी आर रियल अचीवमेंट कि हमने नई नई इनोवेशन की है इस फि में नए नए कुछ एक्सपेरिमेंट्स किए है नए आइडिया इंट्रोड्यूस किए है यह जो हमको यह जो कंटीन्यूअस इनोवेशन करना है यह हमको करते रहना पड़ेगा अदर वाइज क्या होगा कि फिर एक बाकी सब संस्थाओं के साथ में और अपना एक यूनिकनेक्ट एज ऑफ न्यू थिंकिंग वी शुड बी बेशक की खास करके एजुकेशन में स्वामी जी कहते हैं कि एजुकेशन एजुकेशन एजुकेशन दिस इज द ट्रू नीड ऑफ इंडिया आजकल हम सोचते हैं क्या अरे इतने सारे स्कूल वगैरह हो गए हैं हम लोगों का क्या काम है किंतु वी हैव टू एक्सेल इन द फेथ वहां पर अपना एक नया एक चमत्कार करके दिखाना है तभी तो व हम लोग कहेंगे ना कि हम तो अवतार के पार्षद है अवतार के फॉलोवर्स है प प्रदर्शन ब उन लोग उसम से अलग अपना वो ले सके कुछ गाइडेंस वैसे तो संस्था सब चल रही है और महाराज स्वामी जी के मन में भी य मिशन या तो बोलते ऐसे दरमिक संप्रदाय और संस्था तो ऑलरेडी इतने है तो मैं एक और उसम ऐड करके क्या फायदा तो मैं क्या अलग यूनिकनेक्ट कि वह सबको यह एक क्या बोलते हैं मसाल चया एक अलग दिशा निर्देश करें ठाकुर ने कहा था एक बार कि यदि नरेंद्र मेरे पास नहीं आता ना तो केशव सेन की तरह एक दलपति बन के रह [हंसी] जाता वो माने क्या है कि स्वामी जी के भीतर में ऑलरेडी ये लीडरशिप की क्वालिटी थी ही ठाकुर ने उनको एक यूनिक डायरेक्शन दिया अदर वाइज जैसा स्वामी जी ने कहा ठीक ही है कि इतनी सारी संस्थाएं हैं उसमें हम एक हो कर के रह जाते हैं हमारा यूनिकनेक्ट देखिए यदि हम रिलीजियस ऑर्गेनाइजेशन है तो बहुत सारे रिलीजियस ऑर्गेनाइजेशन यदि हम सर्विस ओरिएंटेड ऑर्गेनाइजेशन है तो लाखों एनजीओ पड़े हैं इस जगत में जिनके पास में करोड़ों करोड़ों का फंडिंग है हम तो सोच भी नहीं सकते उनके जितना खर्चा करने का उनके जितना फैसिलिटी डेवलप करने का हमने पास में जो यूनिकनेक्ट में किस तरह से लगाए यह हमको सोचना है क्योंकि अ देखिए कि हमने सिर्फ एक डिस्पेंसरी चला रहे हैं या सिर्फ एक एजुकेशन इंस्टिट्यूट चला रहे हैं या कि सिर्फ एक पब्लिकेशन डिपार्टमेंट कोई भी हमारी सर्विस एक्टिविटी है उसकी यूनिकनेक्ट है हॉस्पिटल है या तो फिर और कोई एजुकेशन इंस्टिट्यूट है उससे यदि हम लोग अपने को डिफर नहीं कर पाएंगे अपना एक यूनिक पोजीशन उनसे डेवलप नहीं कर पाएंगे तो फिर यह क्या हुआ पता है कि इस तरह के जैसा हो गया कि अपने घर में हीरा माण जवाहरात पड़े हैं और उसको भूल करके हम लोग रास्ते में दर बदर भीख मागते घूम रहे है कि अरे भैया आपको दे दो खाना यह दे दो माने दूसरों के पास से ये सब आइडिया क्यों लेना और दूसरा क्या है कि कई कई बार हम सोचते हैं कि जैसे ये लोग कोई अच्छे अच्छे स्कलर होते हैं ना चकि स्वामी जी प पीएचडी करता है कोई कोई करता है तो सोचते हैं कि चलो यह लोग हम हमारे लिए कोई आइडियाज डेवलप कर देंगे किंतु यह बात है कि बाहर वाला कोई भी मने गृहस्थ या तो संसारी कितना ही वो उनका थिंकिंग एडवांस क्यों ना हो कितना ही इंटेलिजेंट क्यों ना हो एक सन्यासी जितना ठाकुर म स्वामी जी के आईडियाज को ग्रहण करके उसका एक एप्लीकेशन खोज सकता है इतना और कोई नहीं कर पाएगा क्योंकि ये सिर्फ आइडियाज नहीं है आइडियाज मिक्स्ड विथ लाइफ हम तोय लाइफ एंड आइडिया यह दोनों जिनके पास में होगा वही लोग इस तीनों के आधार पर कोई यूनिक सर्विस एक्टिविटी खोज पाएगा यदि हम यह नहीं कर पाएंगे तो फिर क्या होगा कि हम लोग एक मीडियो क्रेसी की रेस में चले जाएंगे इतने मीडियो करर ऑर्गेनाइजेशन है वी विल रिमेक पार्ट ऑफ ट हमको जो एक ब्रेक आउट होना है वो ब्रेक आउट शायद हम नहीं हो पाएंगे एक यूनिकनेक्ट अवतार जब भी आते हैं तो उनके फॉलोअर्स की संख्या दिन प्रतिदिन मने प्रचंड रूप से बढ़ती जाती है मैंने आज क्रिश्चियनिटी के फॉलोअर्स देखिए ना कि बुद्धिज्म के फॉलोअर्स देखिए 70 करोड़ 80 करोड़ न बिलियन 1.2 बिलियन ऐसे ऐसे होते 120 करोड़ ऐसे वर्ल्ड रिलीजन जो होता है इनके इतने फॉलोअर्स होते हैं तो हम इस तरह से फॉलोवर्स की रेस में हमको नहीं जाना वो तो ठाकुर की इच्छा के ऊपर है किंतु जो बहुत सारी बाकी जो इस लेवल पर जो कार्य कर रहे उसमें से तो हमको अपना एक यूनिकनेक्ट नहीं हो पाएंगे जी एक चार दीवारी में जद बंद गए तो बंद गए फिर उससे बाहर नहीं निकल पाएंगे कभी-कभी क्या होता है ना सक्सेस बिकम इट्स ओन ग्रेट स् ए हम लोग इतने सक्सेसफुल है कि जो कर रहे उसम संतुष्ट है अभ इससे ज्यादा और कुछ करने की जरूरत नहीं लोग कहते हैं कि डोंट रोप द बोट ऐसा लोग कभी-कभी कहते हैं कि नौका को बहुत ज्यादा हिलाओ मत नौका बहुत सुंदर तरीके से चल रही है बहुत ज्यादा हिलाओ ग तो हम गिर जाएंगे पानी में डूब जाएंगे नोगा को ज्यादा हिलाओ मत ऐसा व जब बहुत ज्यादा सक्सेस और स्टेबिलिटी आ जाती है तब य शरत महाराज ने 1926 कन्वेंशन में यह बात कही थी कि जब भी आप कोई न ऑर्गेनाइजेशन स्टार्ट करेंगे तब सबसे पहला तो आपका लोग आपको उपेक्षा करेंगे क्योंकि वो ऐसा तो हजारों लोग चालू करते रहते है हजारों चीजें चलती रहती है कौन इसके ऊपर ध्यान देता है कुछ समय के बाद में लोगों को लगेगा कि नहीं ये लोग तो डर के मारे ना कि निष्फल से मारे बंद नहीं कर दे रहे तो वे लोग आपकी निंदा करना शुरू करेंगे आपका विरोध करना शुरू करेंगे क्रिट हां फिर उसके बाद में एक समय आएगा अरे निंदा से भी कुछ नहीं हो रहा है तो फिर धीरे-धीरे करके आपका एक्सेप्टेंस होगा और फिर एक समय आएगा कि लोग आपको फिर एक्चुअली प्रेज करना शुरू करेंगे तो ये जो प्रशंसा प्राप्त होती है सक्सेस प्राप्त होती है ट इज द ग्रेटेस्ट डेंजर इन लाइफ ऑफ ऑर्गेनाइजेशन तो यह तो एक बात है कि लोगों की प्रशंसा प्राप्त होने से खतरा क्यों आता है क्योंकि हमारा अहंकार घमंड बढ़ जाता है हम लोग सोचते हैं कि अरे अभी में बहुत सक्सेसफुल हो गया हूं तो अभी आध्यात्मिक साधना में तो घमंड जो है बड़ा ही डेंजरस है व्यक्तिगत रूप में में भी यही व्यक्तिगत रूप से भी संस्था हो किंतु इससे भी बड़ा फिर डेंजर क्या आता है कि एक सक्सेस रूपी स्टेबिलिटी जब आता है ना तो फिर हम नए आइडियाज को प्राप्त करना बंद कर देते नए आइडियाज को इंप्लीमेंट करना बंद कर देते हैं कि अभी वी आर सो सक्सेसफुल कि अभी कोई भी एक्सपेरिमेंट नहीं करना है कहीं पर भी कुछ भी नया नहीं करना है जो चलता है वो चलने दो ठाकुर की कृपा से सब कुछ आज ठीक ठाक चल रहा है सो दिस इज इवन ग्रेटर डेंजर लोग आपकी प्रशंसा करें वो तो ठीक है आपका कमेंट बढ़ेगा किंतु वो तो इंडिविजुअल लेवल पर होगा इंस्टीट्यूशनल लेवल प स्टेग्रिड लोग ठाकुमा स्वामी जी का उपदेश प्राप्त करने के लिए ग्रहण करने के लिए राह देख कर के बैठे हुए हैं यदि हम यह उपदेश नहीं देंगे तो और कोई दे देगा ठाकुर महा स्वामी जी का नाम पर और कोई कुछ उल्टा पुल्टा चलाना शुरू कर देगा च इ इवन मोर डेंजरस मिस हो हा क्योंकि आप तो इंटरप्रिटेशन कौन करेगा ठाकुर महा स्वामी जी का हम लोग तो ठीक ठीक से इंटरप्रेट करेंगे आज बहुत सारे लोग बोलते हैं ठाकुर की निंदा करते हैं क्यारे उन्होंने अपनी पत्नी को छोड़ दिया ऐसा बोलने वाले लोग है तो ये तो तो भयानक मिस इंटरप्रिटेशन है ठकुर और मां का जो संबंध था दिव्य एक अवतार और एक शक्ति अवतार और थाने दहि का शक्ति अग्नि की जो दहि का शक्ति है वो मां है ये जो उनका दिव्य संबंध जो है वो तो हम लोग इसको प्रॉपर्ली समझ पाएंगे जो साधना करेगा ये उल्टी पुल्टी बातें ठाकुर महा स्वामी जी के नाम प फैलाना और कोई शुरू करेगा और क्या है कि लोगों को तो ऐसा जब अवतार आते तो पावर तो होता है फिर वो फैलता है उनका नाम या ठीक तरीके से करे के गलत तरीके से करे वो तो फैलने तो वाला है क्योंकि समय है तो यदि हम प्रॉपर तरीके से यह प्रचार नहीं करेंगे तो इंप्रोपर तरीके से और कोई कुछ स्टार्ट कर देगा बेटर इ लवेज के वी शुड बी ऑन द फ्रंट लाइन ऑफ इनोवेशन रदर देन के हम एक सेटिस्फाई होकर के बैठ जाए कंटेंट होकर के कि हां भाई हम बहुत खुश है अभी और कुछ नया करने की जरूरत नहीं है डोंट रोप द बोट नौका को हिलाओ मत वरना जद डूबेंगे तो पूरा इतने सालों की मेहनत इतने स स साल संघ को हुए 187 में जो स्थापना की थी स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन की सो वो पूरी 125 इयर्स 125 साल तो 125 साल की साधना पूरी डूब जाएगी पानी में सो कोई नया कुछ मत करो ऐसा एक सोच सकते हैं सोचने में गलत भी नहीं है क्योंकि आप 10 एक्सपेरिमेंट करेंगे तो एक सक्सेस होगा पा फेल भी होंगे डेंजर तो बट इफ व डोंट डट देन देर इ लवे डेंजर ऑफ स्टने स्टने न वर्स देन फेलर फिर आपके हाथ से य पूरा चला जाएगा करंट र स्वामी जी करट नहीं वाला आपके हाथ से निकल जाएगा और जिनके पास आइडिया से और वो एक्चुअल व वर्ड को जो जी रहे है दोन में बाहर के है वह सब आइडिया उनके पास भी है लेकिन वो आइडियाज को जो एक्चुअल वर्ड्स को लिविंग देर वर्ड्स व तो सन्यासी ही है तो वो ज्यादा बेटर हर हॉस्पिटल हो या पब्लिकेशन तो उन में स्वामी जी मां और ठाकुर के जो विचार है उनको किस तरह से इंप्लीमेंट कर सकते है वो इनोवेशन सिस्टम में इनोवेशन कंटीन्यूअस होनी चाहिए जो इंचार्ज स्वामी जी है उनके माइंड में ये हमेशा एक चलना चाहिए कि हाउ कैन आई मेक दिस एक्टिविटी बेटर मोर इफेक्टिव एंड मोर ओरिएंटेड टुवर्ड्स ठाकुर म स्वामी जी बहुत बार हम ऐसा होता है ना कि इंडस्ट्रीज की जो प्रैक्टिसेस है हम लोग अपना लेते हैं क्योंकि स्टैंडर्डाइज प्रैक्टिसेस ऑलरेडी अवेलेबल है यदि आप स्कूल चलानी है तो एक पार्टिकुलर सिलेबस है उसको उठा लो ये पार्टिकुलर टीचर लोग इसी तरह से ट्रेन हुए हैं जो बाकी स्कूलों में चलता है बाकी इंस्टिट्यूशन में चलता है उसी को थोड़ा बहुत फॉलो कर लो ऐसा एक पाथ ऑफ लिस्ट रेजिस्टेंस होता है कि सबसे सरल तरीका क्या है वो करने का कि जो सब लोग करते हैं हम लोग करें सेसे फेलियर का डर नहीं रहेगा किंतु फ देर इ पाथ ऑफ ग्रेटर रेजिस्टेंस कि ऐसा कुछ करे जो कि मोर ओरिएंटेड टुवर्ड्स द बेसिक टी चिंग ऑ ठाकुर मा स्वामी जी तो वो इनोवेशन तो जो एक्चुअल ग्रास रूट पर कार्य कर रहा है वही कर पाएगा ऐसा पॉसिबल नहीं है कि कोई फिलोसोफर अपनी अपने बलो मट में कोई फिलोसोफर स्वामी जी बैठे हैं वो ऐसा वो सोच के समझ करके र कंप्लीट व य पर रखा है और यहां पर वो स्कूल सिस्टम का वो प्लान कर रहे है ऐसा वो नहीं होने वाला है कोई आवरी टावर में बैठ कर के इस तरह की इनोवेशन नई नई जो चेंस जो है ज जो आइडिया व कोई आइवरी टावर में बैठ करके नहीं हो कोई हवा में बैठ के नहीं होता वो तो हमारे जितने सन्यासी है उन सबको एंपावर करना होगा कि आप लोग डे टू डे एक्टिविटी में हाउ टू इंप्लीमेंट सस आइडिया हाउ टू ब्रिंग न्यू इनोवेशन तो ट द ग्रेटर वे ऑफ बेटर वे ऑफ डूइंग थिंग्स ददर देन कीय टॉप डाउन आए यह बॉटम अप होना चाहिए चेंस और इनोवेशन ददर देन की टॉप डाउन क्योंकि वो टॉप डाउन में क्या होता है कि जैसे एक एग्जांपल किय गदाधर का प्रोजेक्ट जो चालू हुआ था तो उसमें ऐसा था कि वहां पर बेलू मट से बोला गया 100 बच्चों का यूनिट बनाना है उसके बाद में बहुत गरीब बच्चे 100 बच्चों का यूनिट बनाना उनको दूध पिलाना फ बिस्किट देना व जो पौष्टिक आहार देना प्रॉब्लम ये है मैं जब जिस सेंटर में था वहां पर हम लोग यह कर रहे थे प्रॉब्लम है कि इतनी बड़ी संख्या में गरीब बच्चे पार्टिकुलर एज ग्रुप में मिलते ही नहीं थे आपको कोई कहां बहुत गरीब बच्चे चाहिए ना तो कोई कहां पे झोपड़ पट्टी में रह रहा है तो माइग्रेंट जो वर्कर्स होते हैं ना उनके लड़के इस तरह के होते हैं तो वो माइग्रेंट लोग तो कब आते हैं जब कहां पे कंस्ट्रक्शन साइट हो रहा है तो वहां पे ये लोग काम करने के लिए जाएंगे तो वो कंस्ट्रक्शन साइट वहां पे है तो वहां प कुछ बच्चे मिलेंगे वहां पे कंस्ट्रक्शन साइट है तो वहां कुछ बच्चे मिलेंगे वहां पे फार्म लेब से तो वहां कुछ बच्चे मिलेंगे 10 15 10 15 बच्चे मिलेंगे तो आपको तो यदि और ये बच्चों को तो आप एक जगह पर कलेक्ट भी नहीं करने वाले संभव ही नहीं है तो फिर माने क्या है कि वो जो 100 बच्चों का यूनिट वो कांसेप्ट यहां पर काम नहीं करता 10 15 10 15 बच्चे यहां पे है 10 15 वहां प है तो फिर 100 बच्चों को लेने के लिए हमने स्कूल में कार्य चालू कर दिया गवर्नमेंट स्कूल में अभी गवर्नमेंट स्कूल में ऑलरेडी उनको मध्यान भोजन वगैरह मिलता है ऑलरेडी गवर्नमेंट स्कूल में इतना सब कुछ मिलता है बच्चों को तो वहां प गदाधर एक स्ट्राइक चलाना ये तो कोई मने ये नहीं हुआ मने लॉजिकल नहीं हुआ हमको तो वहां जाना चाहिए जो कि सबसे ज्यादा वो ये है जरूरतमंद है तो सबसे ज्यादा जरूरतमंद को और क्या है कि इंडिया के जितनी भी लोकेलिटीज है सबकी इस तरह से अपनी अपनी एक लोकल सिचुएशन तो उस लोकल सिचुएशन को समझ करके आपको यह प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट करना है टॉप डाउन प्रोजेक्ट का वही प्रॉब्लम है आपने एक एक नेपुल हाई आइडियलिज्म बहुत हाई है मुझे यह करना है किंतु ग्राउंड पर आने से वो आइडियल कैसे प्रैक्टिकली वो सब है तो दिस इ द थिंग ऑर्गेनाइजेशन जब बड़ा हो जाता है तो प्रॉब्लम क्या होता है कि आप टॉक में बैठ कर के जो सोचते हैं ऐसा ग्राउंड में एक्चुअली ऐसा हो वो होना संभव नहीं है आपको जो भी इनोवेशन है ग्राउंड अप होनी चाहिए सबको सभी सन्यास जो है जितने भी वॉलंटस है डेडिकेटेड सबको इनकरेज करना चाहिए ब्रिंग सम सॉर्ट ऑफ बेटरमेंट इन योर वर्क ये जो इनकरेज करना है ना ट इज वेरी इंपोर्टेंट आप देखिए कि आध्यात्मिक लोगों को आत्म श्रद्धा देते हैं कि हां तुम साधना करो ठाकुर का तु तुम ठाकुर के संतान हो तो तुम ठाकुर के संतान होने के हो तो बोलकर के तुम्हारे मन में पाप डर यह सब कैसे होगा मैं ठाकुर का संतान मेरे में आत्म श्रद्धा है आत्मशक्ति है ऐसा सोचो ऐसा मत सोचो कि मैं मैं पापी हूं मैं मैं इतना मैंने इतनी सारी गलतियां कर दी है मेरा क्या होगा आत्म श्रद्धा रखो कि ठाकुर के संतान हो अमृतस से पुत्र अमृत के पुत्र हो ये जो स्वामी जी अमेरिका जाकर के बारबार बोलते हैं कि लोग को मैं जब बोलता हूं कि तुम सिनर्स नहीं हो तुम अमृत यू आर द सस ऑफ सनस एंड डॉटर्स ऑफ मोर्टालिटी चिल्ड्रन ऑफ इम्मोर्टालिटी तो ये लोग बड़े ही आश्चर्य चकित हो जाते अरे इस तरह का भी कोई धर्म है तो आध्यात्मिक जीवन में जिस तरह से उनको ट्रेन करते हो आत्म श्रद्धा के लिए वही ये जो अपना ये जो सर्विस एक्टिविटी है उसमें भी इस तरह से फ्रीडम और इनिशिएटिव लेने का इनकरेजमेंट होना चाहिए कि हाउ यू कैन ऑलवेज कीप ऑन मेकिंग योर वर्क बेटर एंड बेटर र तभी क्या होगा कि जैसे खास करके एजुकेशन के फीड में मैं मुझे ऐसा ज्यादा लगता है कि हमारी इनोवेशन कंटीन्यूअस होनी चाहिए मुझे ऐसा कभी-कभी लगता है कि हम लोगों का यह जो नए आइडियाज सोच करके उसको इंप्लीमेंट करना यह थोड़ा सा स्टैग्नेशन जैसा आ गया है मैं गलत हो सकता हूं ये तो सब क्या होता है कि हमारा परसेप्शन लिमिटेड इंफॉर्मेशन के ऊपर में होता है ना बहुत सारी इंफॉर्मेशन है जोक अपने पास में नहीं है तो ज्यादा इंफॉर्मेशन आने से हमारा एटीट्यूड या हमारे आइडिया चेंज हो सकते है या तो जो इंप्रेशन है वो चेंज हो सकती है किंतु जो लिमिटेड इंफॉर्मेशन है लिमिटेड इंफॉर्मेशन से जो लिमिटेड इंप्रेशन अपने माइंड में आती है वो ये है कि हम क्यों नहीं जो क्योंकि देखिए कि एजुकेशन के बारे में खास करके ठाकुर जिस तरह से दक्षिणेश्वर में ये लड़के लोग उनके पास में आते थे ये तो सब स्टूडेंट एज के ही थे तो उनको किस तरह से ठाकुर ने इंडिविजुअली अटेंशन देकर के उसका जो ये है हां उसके अनुसार उसको उसका जीवन गठन किया ये नरेंद्र को अलग से बुला करके बोलते थे ज्ञान मार्ग का अधिकारी है बाकी जो भक्ति मार्ग के अधिकारी है तो उनको उस रास्ते पर ठाकुर ने ट्रेन किया तोय य जो कैपेसिटी थी ठाकुर की एज ए टीचर कि जो जिस रास्ते का अधिकारी है उसको उस रास्ते पर जाने के लिए इनकरेज करे गाइड करें और जो जहां पर अभी इवन भक्ति के रास्ते में राजा महाराज इतने आगे बढ़ गए थे जो कि बाकी डायरेक्ट डिसाइल से शायद थोड़ा आगे थे मानस पुत्र थे ठाकुर के तो वो जहां पर थे तो वहां से उनको थोड़ा आगे ले गए राजा महाराज का ऐसा था मन में थोड़ा सा एक ये आ गया था कि ठाकुर के पास में दूसरे लड़के जाते हैं तो ठाकुर उनको क्यों इतना वेलकम करते हैं तो थोड़ा सा मन में एक ये आ गया था वो रि होते कि मैं उनका ज्यादा नजदीक हूं मानस पुत्र थे ये तो फिर ठाकुर ने उनको भेज दिया था वो अपने से ही चले गए थे वृंदावन फिर जब वापस आए तब यह सब ठीक हो गया स्वीकृति आ गई थी ठाकुर तो सबके लिए आए तो वो ये क्या है कि सब कौन कहां पर अटका हुआ है वो जद उसको पता चले टीचर को अभी आजकल क्या है खास करके ये स्पिरिचुअल बात अलग है किंतु ये जो खास कर के जो मटेरियल साइंस है ये नेचुरल साइंस है उसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैन प्रू ग्रेट टीचर माने मान लीजिए कि आपके पास में यदि इतना ट्रेन मेन पावर ना हो तो एआई कैन वर्क एज ए टीचर एआई कैन वर्क एज अ गाइड कि आप आपका डाटा कंटीन्यूअस आप वो एग्जाम लेता रहेगा और आपका कहां पर कहां तक पहुंचा है उसके अनुसार कहां से कैसे आगे ले जाना है मने ये तो ये भी तो एक बात है ना कि यदि आप न टू 20 का रेशो रखेंगे स्टूडेंट टीचर तो इतने सारे ट्रें टीचर कहां से आएंगे वो भी तो एक प्रश्न हो जाता है फिर खर्चा का भी एक बात है तो एआई कैन बी ट्रेंड टू टेक अप सो मेनी रूटीन वर्क प्रॉपर असेसमेंट टेस्टिंग क्वेश्चन आंसर आजक क्वेश्चन आंसर बड़ा इजली होता है ई के साथ में और नट नेसेसरी की टाइप करके करें आप डिस्कशन भी कर सकते हैं वर्बल डिस्कशन कर सकते हैं के साथ में तो ये सब टेक्नोलॉजी का यूज करके वो पर्टिकुलर ट्रेनिंग के लिए बेस्ट टीचर को खोज के बेस्ट वीडियोस बनाना ये सब आप बहुत सारी इनोवेशन कर सकते हैं नहीं आजकल महाराज ऑलरेडी आ गया मैं अभी एक स्टूडेंट है वो कांटेक्ट में है तो मैं वो कभी-कभी बात करती है मेरे साथ के सर ये प्रॉब्लम है तो मैं उनको पूछता अपने टीचर से तुम पूछोगे तो बोलते नहीं नहीं मैं उनसे नहीं पूछ उनसे तो मैं चट जीपीटी से पूछते वो अच्छा आंसर दे देता वो जीपीटी से मैं पूछ लेती हूं वो मुझे ये तो वो मुझे ये अमेरिका में एक सलमान खान है उसने खान अकेडमी स्टार्ट किया है एक्चुअली क्या था वो एक ये था माने इन्वेस्टर जिसको बोलते है हेज फंड मैनेजर हेज फंड यानी क्या होता है बहुत सारे लोगों का पेंशन वगैरह फंड जमा होता है ना उसको स्टॉक मार्केट में कैसे इन्वेस्ट करना जैसे कि ज्यादा वो इंटरेस्ट मिला उसको एज फंड कहते हैं जज फंड मैनेजर्स कहते हैं अ तो मैंने मैथमेटिक्स में बहुत ही उसका एक्सपर्ज था और ये ए फ मैनेजर या उस प्रचंड उनका जबरदस्त सैलरी होता है बड़े धनी लोग हो जाते है बड़े कम उम्र में बड़े कम समय में तो हेज फन मैनेजर होना माने बड़ा क्या कहेंगे टैलेंट एंड फर्च लक दोनों होना चाहिए तो दोनों था उसके पास फिर उसको क्या है उसकी एक एक दो भतीजी और नेफ्यू मने बच्चे थे कजीन मने भतीजी वगैरह तो उनको मैथमेटिक्स सिखाता था तो एक बार ऐसा हुआ कि कहीं प उसको बिजी था कुछ समय के लिए तो उसने क्या किया वो जो सिखा रहा था ना उसका वीडियो बना कर के उसको भेज दिया मैं अभी पीज हूं कुछ दिन तो ये वीडियो देख लेना फिर जब वीडियो इस तरह से छोटा छोटा बना करके भेजता है फिर एक बार पूछा अपनी वो पति जीी को कि अच्छा तुमको वीडियो म ठीक ठीक समझ में आ रहा है तो तो वो क्या उत्तर देती है पता है कि अंकल आपके साथ में बात करते करते मैं जितना सीख ह उससे ज्यादा मैं वीडियो देख कर के सीखते तो वो तो आश्चर्य चकित अरे भाई क्या मेरा नेचर इतना खराब है क्या तोत ये नहीं है क्या पर्सनल इंटरेक्शन करने से वीडियो बे प्रेफर करते हैं क्या होता है संकोच होता है ना आपके तो सीनियर है वो उम्र में और व आप बारबार उनको प्रश्न करेंगे दो चीज संकोच भी होता है एक शर्म भी होती है कि इतनी बार पूछने से भी मुझे समझ में नहीं आ रहा तो मेरे बारे में किस तरह का एक इंप्रेशन डालेंगे उनके मन में किंतु वीडियो होता है जितनी भी बार आप बैक एंड फोर्थ करके फॉरवर्ड बैकवर्ड करके देख सकते हो फिर वो कोई नहीं रको डिस्ट कर है ना तो इस जब इसने देखा तो इसने क्या किया वो हेज फंड का नौकरी छोड़ दिया और उसका जो थोड़ा सेविंग था उसमें से उसने वीडियो बनाना शुरू किया और खान एकेडमी उसका नाम दिया आज इतना बड़ा हो गया हैने इतना सक्सेसफुल भी हो गया है तो क्या है कि फिर उसने अभी एक एआई डेवलप किया है स्टूडेंट्स के अभी वीडियो भी है और एआई भी है तो क्या है कि टेक्नोलॉजी आर देर कि जिसको की हम कंटीन्यूअस मतलब इंप्लीमेंट कर सकते हैं अभी एक्चुअली ये सब तो हमको करना चाहिए था मैं ये खास करके एजुकेशन फीड में सब डेवलपमेंट देखता हूं ना तो मुझे लगता है कि हमको तो ये सब करना चाहिए था वी शुड बी ऑ द कटिंग एज ददर देन अच्छा चलो अभी अभी कटिंग एज प नहीं भी है हमारा और भी बहुत सारा प्रीऑक्यूपेशन रहता है तो किंतु एटलीस्ट जो डेवलपमेंट हो रहा है उसको हमको इटली अडॉप्ट कर लेना चाहिए तभी तो हमारा एक यूनिकनेक्ट डीपीटी ऐसा कुछ बनाया है आप वो है एक्चुअली क्या है वो कंप्लीट वर्स को उसके ऊपर में व एक्चुअली क्या होता है चैट जीपीडी जो होता है ना उसमें आप बहुत सारा डाटा डाल दीजिए तो डेटा का वो रिप्लाई करेगा तो कंप्लीट वर्क्स वगैरह अपना लिटरेचर डाला हुआ है उसमें आप पूछेंगे स्वामी जी कौन से जहाज में बैठ कर के अमेरिका गए तो फट करके वो गोलकोंडा ऐसा कोई उत्तर दे देगा आपको ऐसा नहीं है कि हमने कोई नया डेवलप किया है चट जीपीटी का एपीआई बोलते हो उसको उसी को हमने उठा करके अपने डाटा पर ट्रेन किया सिस्टम उन्ही का है जैसे कंप्यूटर हम लोग बाजार में से ले आए और फिर अपना टाइपिंग करते हैं वैसा नहीं है कि कंप्यूटर हमने बनाया टाइपिंग ही हम अपने से करते सुना वो हमारा बताया जीपीटी विवेक तो वो हमारा पूरा है वो वही से उठाया और हमने अपने डाटा पर उसको ट्रेन किया होना चाहिए एकली ये एडप है एडॉप्शन है टेक्नोलॉजी का फटाफट करके हमने उठा लिया टेक्नोलॉजी को किंतु इस तरह से इनकरेजमेंट है व सभी फीड में होना चाहिए सब लोगों को मिलना चाहिए अपॉर्चुनिटी ज त सम उनके भी ब स्थान है ना जैसे यह बच्चे आजकल यह सब ए आई या जो उपयोग करेेंगे लेकिन वो जो ह्यूमन टच वो उसमें मिसिंग होगा ना दोनों को मिक्स करना है ना ऐसा कौन कह देता है कि मनुष्य टीचर ह्यूमन टीचर नहीं चाहिए दोनों को तो मिक्स करना है ना प्रॉब्लम क्या है जितना ट्रेन मेन पावर होना चाहिए एजुकेशन फ्री में इतना नहीं सैलरी आप कितना लोगों को देंगे टीचर का सैलरी आप 15 20 हज मिनिमम नहीं रखेंगे तो टीचर को भी पढ़ाने का इतना उत्साह नहीं आता है तो वो एक फैक्टर है फिर इतना सैलरी देकर के आप कितने टीचर को रखेंगे कितना ट्रेन मिलेगा दिस आर द फैक्टर्स मिले तो बहुत अच्छा है किंतु प्रैक्टिकल देखेंगे तो नहीं होता है इतना बहुत सारे टीचर एक बार उत्साह में शुरू भी करते हैं तो मिडल ए आते आते फिर वो सब उनका ठंडा हो जाता है रूटीन में आ जाता है फिर वो पढ़ाने का उतना उत्साह नहीं रहता फिर ऐसा क्या वो ठाकुर कहता है ना कि 12 साल टीचर होने से पत्थर जैसा बन जाता तो ये टेक्नोलॉजी क्या है सर्ट ऑफ ए एडन वो आपको हेल्प करता है कि आपका वो जहां जहां प भी आपकी शॉर्ट कमिंग से वो फुलफिल करता है माने ऐसा नहीं है कि ह्यूमन टीचर को रिप्लेस कर देगा ई कि वो उसको शर्ट कमिंग को वो फुलफिल करता है और ठाकुर नेता अपनी लीला में सबसे ज्यादा टीचर्स का उ बोलते यूज किया लेकिन मास्टर माही सब बोलते लड़का बगाने वाले मास्टर सब उनको लगता था कि अधिकारी है कुछ उम प भाव है तो वो ले आता था के पास ले आते थ लेरा मास्टर लड़को को पकड़ने वाले टीचर वो शरत मारा दूसरे एक दो वो उनके स्टूडेंट थे ये जो एक बार प्रेमानंद जी एक बार क्या हुआ ठाकुर के पास में मास्टर महाशय किसी लड़के को लेकर आए हैं नारायण नकी कौन था नारायण नकी पलट लड़के को लेके आए तो गिरीश घोष वगैरह बैठे है तो वो बोल रहा है कि लोग लोग उनको बोलते हैं कि लड़कों को पटा करके यहां पर मास्टर ऐसा कुछ नके बारे में बोलते ठाकुर नाराज हो ग अरे भाई तुम शांत रहो लरे उनका नाम बदनाम हो रहा है ऊपर में से तुम ऐसी [हंसी] बात लास्ट पूण पूर्ण ठाकुर ने ठाकुर ने कहा था पूर्ण जो एकदम उच्च साधक की कक्षा का जो जो लड़के आते थे उन पूर्ण अखर थाने और फिर बा ठाकुर के पास तो बहुत सारे लोग आए थे कि सर्वोच्च कक्षा के जो साधक जैसे बाबूराम महाराज थे जैसे लाटू महाराज थे उन लेवल के साधकों में पूर्णा ने सन्यास नहीं लिया था श्वर छोटे रेण कर के छोटा नारे अच्छा लड़का था उ ऐसा कुछ नहीं अच्छा लड़का था साधक व कैसे उनको परीक्षा स्वामी जी कई बार ऐसा करते थे कि स्वामी जी आए तो उनको उपेक्षा ही करते थे नेगलेक्ट टोटल वो बैठे और कुछ पूछे तो ऐसे बाहर चले जाएंगे उनसे सामने देखेंगे भी नहीं तो लेकिन उन्होने देखा कि नारायण के बहे में कोई चेंज नहीं है उनको पता भी नहीं है कि ये ऐसा नोटिस भी नहीं किया उना ज्यादा फिर बुलाया ठाकुर ने उनको पूछा कि मैं तुम्हारे सामने भी नहीं देखता मैं नेगलेक्ट करता हूं टॉपिक क्यों आता है तो बोते मैं इसलिए थोड़ी आता हूं ऐसा कुछ पूरा क्या था हमारा मैं भूल गया सेंट मैं आपके पास में आता हूं क्योंकि मैं आपको आमी आपना के भालोबासी आपको आपके प्रति मेरी श्रद्धा है बोलके मैं आता हूं तो बोलते यहां आता है तो मेरी पास मानता क्यों नहीं बोलते यहां आता हूं उसका मतलब ये थे आपके सब बात मानू तो कितना अपना एक स्वतंत्र और तापुर भी उनको पूरा फ्रीडम देते थे और उसको अच्छा लगता था प्रश्न और पूछे और आपने जो ये बात बताई कि सबको अलग अलग से ट्रेन करते थे तो स्वामी जी को एक अष्टावक्र स अष्टावक्र संगीत हा वो पढ़ने के लिए दि स्वामी जी बोलते हैं कि अरे इसमें जो जो सब लिखा हुआ है अवत वेदांत के बारे में मैं ही ब्रह्मण हूं मैं ही ईश्वर हूं ये तो बड़ा डेंजरस है तो ठाकुर ने कहा तुम अपने लिए मत पढ़ो मेरे लिए पढ़ो तुम पढो मेरे लिए ऐसे ऐसे करके उनको ग्रेट टीचर उस हिसाब से देखे तो एक गुरु भाव वाला जो उनका वो है कैसे ट्रेन करना है को वो आज के टीचर्स का कुछ से सीख सकते हैं से किसी को डिस्क नहीं करना है व जहा भी है और सबका अलग अलग टैलेंट होता है उस टैलेंट को पहचान कर उनको उस उस टैलेंट को उनको एक आईना उसके सामने रखना है कि देख तुम्हारे में टलेट है तो इसमें तुम वर्क आउट करो उसमें आगे बढ़ो तो वो अलग अलग सबको करके वर्गीकरण सबका और उसमें देखना यही एक टीचर का सही यही है सब में टैलेंट है लेकिन उनको पहचानना एक शिक्षक का यही धर्म है उनको पहचाना और उसको पहचान करवाना इनकरेज करवाना और उसको पार्टिकुलर रास्ते पर आगे बढ़ के लिए हे वही सब लता मंगेशकर नहीं बन सकते और सब सचन नलकर भी नहीं बन सकते जहां तक जाए