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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द 21 Nov 2024 | Raja Yoga | Swami Vivekananda

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कल हमने प्राणायाम के बारे में देखा तो फिर एक प्रश्न आया है कि यदि हम प्राणायाम करते भी है तो भी हमार रोगों का उपशम क्यों नहीं होता है यहां पर थिरी में तो स्वामी जी कहते हैं कि प्राणायाम का अभ्यास करने से हम अपने शरीर में जो प्राण का इंबैलेंस है उसको ठीक कर दे सकते हैं और यह प्राण का एक्चुअली स्वामी जी की जो थिरी है कि शरीर में रोग प्रवेश कब करता है और क्यों करता है तो प्राण का जब बैलेंस जब गड़बड़ हो जाता है प्राण का बैलेंस इंबैलेंस हो जाता है तब हमको हमारे शरीर में रो प्रवेश करता है तो प्रश्न है कि यदि ऐसे काफी लोग है कि जो कि बचपन से ही प्राणायाम का अभ्यास करते रहते हैं तो प्राणायाम का अभ्यास करने के बाद में भी आज जब हम उम्र हमारी बढ़ गई है और शरीर के भीतर में इतने सारे रोगों का प्रवेश हो चुका है तो हम इसका मुकाबला क्यों नहीं कर पाते तो एक्चुअली इसका उत्तर ऐसा है कि देखिए कि प्राणायाम का अभ्यास बहुत ही छोटी उम्र से करना होता है और सिद्ध गुरु के पास में करना होता है तभी हम प्राणायाम के गभीर में प्रवेश कर पाएंगे अभी मैं सुबह को थोड़ा बहुत पूरक रेचक कुंभक ध्यान वगैरह कर लेता हूं क्या मैं यह डिटेक्ट कर पाता हूं कि मेरे कौन से अंग में प्राण का बैलेंस बढ़ गया है या कम हो गया है जैसे कल हमने देखा था कि योगी है जो कि नित्य नियमित प्राणायाम करता है वह डिटेक्ट कर सकता है अपने शरीर में कि हार्ट है अपना मान लीजिए या तो अपने लंग्स है वहां पर प्राण बढ़ गया है या प्राण कम हो गया है उसका लेवल जो एक नॉर्मल लेवल होना चाहिए प्राण का प्रत्येक अंग में तो प्रत्येक अंग में प्राण का लेवल बड़ा है कि कम हुआ है यह हम डिटेक्ट कर सकते हैं यदि हम नियमित प्राणायाम करें और प्राणायाम रूपी साइंस में बहुत गहराई से प्रवेश करें तो किंतु ज्यादा लोग जो प्राणायाम करते हैं उनमें से मैं भी एक हूं मैंने भी जैसे मैंने कहा था कि छोटी उम्र में ही यह योगासन प्राणायाम करना वगैरह सीखा था और बहुत ही अच्छे गुरु के पास में मैंने सीखा था किंतु मैंने फिर भी कभी यह महसूस नहीं किया कि मैं यह डिटेक्ट कर सकता हूं कि मेरे शरीर में प्राण फैला हुआ है कौन से अंग में प्राण ज्यादा है या कम है यह कभी डिटेक्ट नहीं कर पाया तो जब तक डिटेक्ट ही नहीं होगा तब तक मैं किस तरह से प्राण को आदेश करूंगा कि हार्ट में जो नॉर्मल लेवल से प्राण कम हो गया है तो थोड़ा बढ़ जाए तो इस तरह से यानी कि प्राणायाम हम लोग जो आजकल करते हैं उसमें तो पहले तो हमको सिखाने वाले सिद्ध गुरुओं का अभाव है और दूसरी बात है यदि सिद्ध गुरु भी मिल जाता है तो उस तरह के सिद्ध चेलों का मिलना मुश्किल है जो कि फिर अपना पूरा जीवन इसको डेडिकेट कर पाए वहां दक्षिणेश्वर में ठाकुर जैसे गुरु बैठे थे उनके पास में शिक्षा लेने को कितने लोग आए आते तो वैसे बहुत थे किंतु ठाकुर की शिक्षा में उत्तीर्ण कितने लोग हो पाए ये ठाकुर श्री रामकृष्ण यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कितने लोग कर पाए तो वही 16 डायरेक्ट डिसाइल उन्हीं का नाम हमको मिलता है कि जिन्होंने मास्टर्स या तो पीएचडी या डॉक्टरेट की हो रामकृष्ण यूनिवर्सिटी में उससे तो बाकी गृहस्थ भक्त थे उनको हम नॉर्मल ग्रेजुएट कह पाएंगे किंतु डॉक्टरेट तो यही यह 16 डायरेक्ट डिसाइल्स ने ही की थी अर्थात कि यह सब साइंस में बड़ा ही गहराई से प्रवेश करने के बाद में सालों के साल बिताने के बाद में कुछ रिजल्ट मिलता है तो यह एक प्राणायाम के ऊपर में प्राणायाम की प्रैक्टिस के ऊपर में यह एक बैरियर जैसा है किंतु इससे हमको हार नहीं मान लेनी है हमको हमेशा प्रयास करते रहना है प्रयत्न करते रहना है जनरेशन आफ्टर जनरेशन हम प्रयास करते जाएंगे तब एक ऐसी जनरेशन आएगी कि जो कि नया ग्राउ ग्राउंड ब्रेकिंग डिस्कवरी ग्राउंड ब्रेकिंग इनोवेशन वे लोग करेंगे यह जो ग्रीक साइंस का रेनेसा हुआ 14th 15th सेंचुरी यूरोप में तो पहले-पहले तो उन लोगों का समय इसी में बीत गया कि 2000 साल पहले ना कि 1000 साल पहले यह एरिस्टोटल क्या कहता था यह सक्रेस क्या कहता था अभी यह 14वीं सदी से 14th सेंचुरी से यह अभ्यास करते आ रहे हैं तो आज आफ्टर 500 इयर्स 600 इयर्स देखिए कि हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खोज निकाला है हम लोग चांद के ऊपर में रॉकेट भेजते हैं हम जेनेटिक एक्सपेरिमेंट्स कर सकते हैं जेनेटिक इंजीनियरिंग क्वांटम डायनेमिक्स रिलेटिविटी यह आज कहीं 500 600 सालों के बाद में यह स्टार्ट हुआ है तो हमारी भी यह वेद की जो लुप्त विद्या एं है उसका अभ्यास हम आज से ही फिर से करना शुरू कर दे तो 500 600 साल के बाद में शायद ऐसा होगा कि वह आने वाली जनरेशन है वह वैदिक विद्याओं में इतनी पारंगत हो जाएगी इतनी एक्सपर्ट हो जाएगी कि फिर वह जो चाहे इस तरह के उसको डेवलप कर सकेंगे उसको अप्लाई कर पाएंगे तो यह तो था उस प्रश्न का उत्तर अच्छा अभी आज से एक नया टॉपिक प्रारंभ करते हैं एक्चुअली मैंने ऐसा सोचा था कि यह फिलोसॉफिकल थोड़ा ज्यादा हो जाता है तो मैं थोड़ा सा शुरू में थोड़ी सी स्मृति कथाएं कह के बाद में आज के टॉपिक का प्रारंभ करूंगा किंतु आज का टॉपिक थोड़ा सा लंबा है और थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड है तो हम उसकी शुरुआत उसी से कर देते हैं यदि बाद में समय रहेगा तो थोड़ा सा स्वामी जी की कुछ स्मृति कथाएं देखेंगे अच्छा तो आज का टॉपिक का नाम है इवोल्यूशन ऑन द फास्ट ट्रैक यह नाम मैंने दिया है किंतु अभी जो मैं पढ़ूंगा वह पूरा स्वामी जी का ही टेक्स्ट है तो स्वामी जी क्या कहते हैं इन एन ओशन देयर आर ह्यूज वेव्स एक समुंद्र में देखेंगे बड़ी-बड़ी तरंगे बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही है लाइक माउंटेंस जैसे कि पहाड़ पहाड़ सम तरंगे एक समुंदर में उठ रही है देन देयर आर स्मॉलर वेव्स एंड स्टिल स्मॉलर न टू लिटल बबल्स समुंदर में एक तो पहाड़ जैसी तरंगे दिखेगी उसके बाद में छोटी-छोटी तरंगे दिखेंगी फिर उससे भी छोटी तरंगे और फिर वोह जो बबल्स होते हैं व जो पानी धीरे जैसे तरंग आई तो फेन जिसको बोलते हैं तो यह जो फैन है पानी के ऊपर का समुंदर के पानी के ऊपर का छोटे-छोटे बबल्स तो यह बबल्स से लेकर के उससे बड़ी तरंगे और फिर पहाड़ जैसी तरंगे यह सब समुंदर के ऊपर में हमको दिखता है बट बैक ऑफ ऑल दिस इज द इनफाइकिल हो ना कि छोटी तरंग हो समुंदर का फैन हो ना कि सिर्फ बबल हो इन सबके पीछे तो वही एक ही समुंदर है ऐसा नहीं है कि बड़ी लहरें जो है वह पानी से नहीं और किसी चीज से बनी है फॉर एग्जांपल मिथेन से बनी है ना कि हाइड्रोजन से बनी है ऐसा नहीं है बड़ी तरंगे भी समुंदर के पानी से बनी है छोटी तरंगे भी समुंदर के पानी से बनी है और यदि यह बबल्स कहे जाए तो बबल्स भी छोटे-छोटे बबल्स जो होते हैं वह भी वही पानी की तरंगों से ही बने हैं द बबल इज कनेक्टेड विद द इंफाइटिंग यह छोटा सा जो बबल है वह एक ओर तो समुंदर से मिला हुआ है दूसरी ओ और वह बड़ी तरंग से पहाड़ जैसी बड़ी तरंग के साथ में मिला हुआ है सो वन मे बी अ जाइगर मैन एंड अनदर अ लिटल बबल बट ईच इज कनेक्टेड विद दैट इनफाइनों बर्थ राइट ऑफ एवरी एनिमल दैट एक्सिस्ट तो एक और हो सकते हैं कोई एक महापुरुष संत प्रोफेट और अवतार और दूसरी और हो सकता है पानी के ऊपर में छोटा सा एक बबल किंतु यह भगवान श्री राम कृष्ण हो ना कि एक छोटी सी ये स्क्विरल जिसको कहते हैं ना वो भगवान राम के सेतु में छोटा-छोटा पत्थर रखती थी उसने अपना अपना एक हिस्सा देना था राम सेतु में जिसको कहते हैं स्क्विरल तो यह स्क्विरल हो ना कि ये भगवान राम हो जिनके लिए सेतु बनाया गया था इन दोनों के पीछे में वही अनंत शक्ति कार्यरत है इनफाइनों के साथ में जुड़ा हुआ है यह दोनों वही अनंत शक्ति के ही विभिन्न मेनिफेस्टेशन है व्हिच इज द कॉमन बर्थ राइट ऑफ एवरी एनिमल दैट एसिस्ट जितने भी यह मनुष्य जितने भी पशु पक्षी ग्रह चांद सितारे पेड़ पौधे इस विश्व में जो कुछ भी है जो जिस किसी चीज का भी अस्तित्व है इन सबके पीछे में वही अनंत समुंदर रूपी शक्ति है और यही अनंत समुंदर हमारा एक बर्थ राइट है वह जो तिलक ने कहा था ना गिव फ्रीडम इज अवर बर्थ राइट तो इस तरह से यह हमारा बर्थ राइट है जन्म से ही हम इस वारसे के साथ में जन्म से ही हम इस ट्रेजर ट्रो के साथ में हम लोग पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं वरवर देयर इज लाइफ द स्टोर हाउस ऑफ इनफाइनों है उस सभी जीवन के पीछे में यह अनंत शक्ति कार्यरत है स्टार्टिंग इज सम फंगस सम वेरी माइनर माइक्रोस्कोपिक बबल एंड ऑल द टाइम ड्राइंग फ्रॉम दैट इंफाइटिंग स्लोली एंड स्टेडी अंट्स ऑफ टाइम इ बिकम अ प्लांट देन एन एनिमल देन मैन अल्टीमेटली गॉड एक छोटा सा फंगस कहो ना कि कहेंगे कि अ छोटा सा पेड़ या छोटा सा पौधा वहां से जद आप स्टार्ट करें फंगस यानी आपने कभी देखा होगा कोई खाने की चीज कुछ लंबे दिनों तक पड़ी रहती है तो देखेंगे कि ऊपर में सफेद फंगस जैसा उसके ऊपर में आ जाता है तो वह फंगस से स्टार्ट कर के न कि आज की मॉडर्न लैंग्वेज में कहे यह बैक्टीरिया और वायरस से स्टार्ट करके यह महापुरुष जो है भगवान कृष्ण या भगवान राम वहां तक के देखिए कि अच्छा यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि यह जो फंगस है जो छोटे से छोटा वह जो एक अस्तित्व में उसका जीवन है वह इस इनफाइनों है और धीरे-धीरे करके उसका इवोल्यूशन होता है उत्क्रांति होती है वह अपना फॉर्म अपना जो आकार है अपना जो रूप है वह धीरे-धीरे परिवर्तित करते-करते समय के अनुसार वह प्लांट अर्थात कि पौधे में परिवर्तित होता है फंगस होता है छोटा सा पौधा होता है बड़ा सा और बायोलॉजिकली ज्यादा एडवांस होता है और फिर यही समुंदर ते यह पौधा है वह प्राणी में तब्दील होता है उत्क्रांति होती है उसका इवोल्यूशन होता है फिर यही प्राणी मनुष्य में परिणत होता है और यही मनुष्य आखिर में देवता में परिणत होता है तो यह जो पूरी इवोल्यूशन की चैन है इवोल्यूशन की साइकिल है यह छोटे से छोटा बैक्टीरिया धीरे-धीरे करके इवोल्व होते-होते एक पौधे में परिणत होता है पौधा इवोल्व होते-होते पशु में परिणत होता है जैसे कि यह घोड़ा है ना कि हाथी है ना कि बंदर है ना कि एप है और जैसे कि यह डार्विन की इवोल्यूशन की थिरी कहती है ए ही उत्क्रांति प्राप्त करके इवॉल्व होकर के आखिर में होमोसेपियंस जो मनुष्य प्रजाति का जो टेक्निकल नेम है वह है होमोसेपियंस सो होमोसेपियंस अर्थात कि मनुष्य में परिणत हुआ है तो यह प्रश्न होगा कि उत्क्रांति की यह जो साइकल है वह कैसे चलती है है ऐसा तो क्या है इस बैक्टीरिया में कि वह धीरे-धीरे इवॉल्व होता है ऐसा क्यों नहीं कि बैक्टीरिया बैक्टीरिया ही रह गया और यह जो पशु है पशु ही रह गया जैसे कि यह जो क्रिश्चियन क्रिश्चियनिटी में कहा जाता है वे लोग जब यह इवोल्यूशन की यह जो थिरी सर्वप्रथम उसको डेवलप होना शुरू हुआ था जितने भी क्रिश्चियन लोग थे फंडामेंटलिस्ट इन लोगों ने यूरोप में इसका विरोध करना शुरू किया था क्यों क्योंकि उनकी थिरी के अनुसार भगवान ने एक बार वह जादुई छड़ी घुमाई और इस जगत में जितने भी पशु पक्षी है एक साथ में उनको प्रकट कर दिया पौधा है तो पौधे के रूप में ही प्रकट हुआ है बंदर है तो बंदर के रूप में ही प्रकट हुआ है वह हमेशा तक कयामत तक अपोकेलिप्स तक वह बंदर ही बना रहेगा बंदर में से ना ही वह मनुष्य बनेगा या तो फिर ना ही वह पेड़-पौधे में वापस चला जाएगा बंदर का बंदर ही रहेगा और मनुष्य भी इसी तरह से प्रकट हुआ मनुष्य बंदर में से कैसे प्रकट हो सकता है जैसे जीसस क्राइस्ट खुद मनुष्य है वोह क्या बंदर में से प्रकट हुए हैं ऐसा तो हो ही नहीं सकता तो इसको लेकर के यह उत्क्रांति वाद के अगेंस्ट में यूरोप में काफी उस समय विरोध हुआ था प्रोटेस्ट हुआ था आज भी अमेरिका में देखिए सरप्राइजिंगली आपको पता चलेगा थोड़ा सा नेट पर सर्च करके देखेंगे स्कूल में इवोल्यूशन पढ़ाया जाए कि नहीं इसको लेकर के अभी भी कंट्रोवर्सी है बहुत सारे कंजरवेटिव कहते हैं कि इवोल्यूशन की थिरी गलत है क्योंकि वह सीधा आपके जो बाइबल में जो लिखा गया है उसके ऊपर में उसका विरोधाभास प्रकट होता है बाइबल में तो ऐसा लिखा गया है कि भगवान ने एक साथ में ही संपूर्ण सृष्टि की रचना कर दी है और सृष्टि की रचना के बाद गॉड मेड द वर्ल्ड इन हिज ओन इमेज भगवान ने इस जगत को अपने जैसा ही बनाने का प्रया प्रयास किया है यह जगत है ईश्वर का ही रिफ्लेक्शन है तो यदि ऐसा होगा तो इस जगत में परिवर्तन कैसे हो सकता है मनुष्य कभी बंदर था बंदर कभी मनुष्य हो सकता है ऐसा हो ही नहीं सकता यह तो बड़ा ही विचित्र बात है तो वहां पर इस तरह का कंजरवेटिज्म या तो इस तरह का प्रोटेस्ट अभी भी चल रहा है हिंदू शास्त्र में देखिए कि हम लोग इवोल्यूशन को किस तरह से दर्शाते हैं हम लोग कहते हैं कि कर्म के अनुसार जीव विभिन्न योनि यां धारण करता है जैसे कि सत्कर्म करते रहे तो फिर हम उच्च से उच्चतर योनि धारण करते जाएंगे देह धारण करते जाएंगे जैसे कि अभी सर्वप्रथम हमारा जन्म जैसे कि मान लीजिए कि एक पशु के देह में हुआ जैसे कि हाथी के देह में यदि कोई अच्छे सत्कर्म किए तो उससे भी उच्च देह प्राप्त होगा जैसे कि मनुष्य का मनुष्य के देह में भी यदि सत्कर्म किए तो भगवान देवताओं का देह प्राप्त होगा स्वर्ग में जाकर के हम आनंद करेंगे तो यह और यदि हमने पाप करना शुरू किया तो फिर यह अवनति भी होती रहेगी जो कि यह जो रिग्रेशन जो है इवोल्यूशन और ये काउंटर इवोल्यूशन यदि हम एप जो है बंदर जो है वो यदि मनुष्य हो सकता है तो मनुष्य भी ऐसा डिवॉल्व होकर के काउंटर रिवर्स इवोल्यूशन होकर के बंदर हो सकता है यदि परिस्थितियां इस तरह की हुई तो तो इस बात को लेकर के इवन मॉडर्न इवोल्यूशनिस्ट है उन लोगों में थोड़ा सा मतभेद था अभी तो यह बात स्वीकृत है कि जिस तरह से इवोल्यूशन होता है इस तरह से डिवोशन भी होता है किंतु अपने शास्त्रों में उसी समय कह दिया गया था कि यदि पाप कर्म करना शुरू करें तो फिर से वही रिवर्स एक के बाद एक योनि में जाते जाएंगे देवताओं के देह में जद पाप किए तो मनुष्य योनि प्राप्त होगी मनुष्य योनि में पाप किए तो फिर वही बंदर में चले जाएंगे फिर चूहे में चले जाएंगे फिर पेड़ पौधे हो जाएंगे यह जो डॉक्टर सरकार के बारे में यह जो सब भक्त लोग मजाक करके कहते थे ना ठाकुर ने कहा डॉक्टर सरकार को कि ये जो तुम मेरे ऊपर में इतना संदेह कर रहे हो मेरे ऊपर में इतना डाउट कर रहे हो तो यह लोग कहते हैं कोई कोई भक्त कि नेक्स्ट आपका जन्म होगा सीधे पत्थर से आपको शुरुआत करनी पड़ेगी ईट पाट केल यह जो ईंट और पत्थर से आपको फिर से शुरुआत करनी पड़ेगी याद रखना तो डॉक्टर सरकार भी हंसते-हंसते कहते हैं कि मान लीजिए कि नेक्स्ट जन्म में आपके ऊपर में संदेह करके आपके साथ में आर्गुमेंट करके यदि मेरा नेक्स्ट जन्म वही पत्थर से शुरू होता है और जन्म जन्मांतर के बाद में मान लीजिए मैं फिर से मनुष्य होता हूं तो फिर भी मैं इसी तरह की आर्गुमेंट करता रहूंगा और फिर से मुझे पत्थर से ही शुरू करना पड़ेगा तो इस तरह की हंसी मजाक ये लोग किया करते थे तो हिंदू धर्म में इवोल्यूशन को इस तरह से बताया जाता है यहां पर स्वामी जी का जो इवोल्यूशन का कांसेप्ट है वो एगजैक्टली हिंदू धर्म से थोड़ा सा डिफर होता है जो ट्रेडिशनल एक्सप्लेनेशन है और यह जो अपनी क्रिश्चन एक्सप्लेनेशन तो छोड़ ही दीजिए वह तो किसी काम की है ही नहीं कि एक साथ में ही पूरी सृष्टि का सर्जन हुआ यह तो डिस्कार्डेड हाइपोथेसिस है किंतु यह जो तीसरी एक्सप्लेनेशन है कि हां काल क्रम से उ क्रांति वाद की अनुसार उसको फॉलो करके एक के बाद उच्च से उच्चतर योनि ये तो फिर ये इवोल्यूशन होता रहता है इसके साथ में भी स्वामी जी की ये थिरी है उसके उस साथ में थोड़ा सा डिफरेंस है किस तरह से देखते हैं देखिए कि यदि सत्कर्म करते रहेंगे जैसे पर जन्मवा है अपनी जो हिंदू धर्म की थिरी है कि इस जन्म के बाद में अगले जन्म में या तो मेरी अवनति होगी या तो मेरी उन्नति होगी इस जन्म में जो कर्म करता हूं उसके अनुसार मेरा अगला जन्म होगा जबकि यह मॉडर्न वेस्टर्न इवोल्यूशनिस्म क्या कहता है साइंस ऑफ इवोल्यूशन क्या कहता है कि एडेप्टेबिलिटी के ऊपर में सब कुछ है सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट यदि जैसे कि मान लीजिए कि एक एक्सपेरिमेंट करके एक्सपेरिमेंट क्या अपनी नजरों से साइंटिस्ट लोगों ने ये ऑब्जर्व किया है एक फॉरेस्ट है यूरोप में तो उसमें यह जो यह होती है ना फंगस या तो फिर यह जो फंगस कहिए इस एक तरह का तो वो पेड़ जो होते हैं पेड़ के ऊपर में लगी रहती है अभी उस दिन पहले तो फंगस को क्या है कि अपने जो प्रिडेटर है उसको खाने वाले पशु उससे अपनी रक्षा करनी है तो वो कैसे करेगी जो पेड़ का जो कलर है उस पेड़ के कलर के अनुसार अपना कलर बदल देगी पेड़ का यदि ग्रीन कलर है तो उसका कलर ग्रीन हो जाएगा जिससे कि जो प्रिडेटर है उसको पहचान ना पाए इसको कैमफ्लेज कहते हैं बहुत बार आप देखेंगे जैसे कि बटरफ्लाई है तो बटरफ्लाई इस तरह से बैठा रहता है आपको ऐसा ही लगेगा जैसे एक पत्ता पड़ा है पेड़ का तो पेड़ के पत्ते की तरह ही उसका शेप है जैसे कि आपको कोई डिफरेंस ही नहीं लगेगा वो फिर उड़ना शुरू करेगा तो पता चलेगा अरे ये तो पेड़ का पत्ता नहीं ये तो बटरफ्लाई है तो ये कैमफ्लेज ये जितने भी पशु है वो किसी ना किसी तरह का कैमफ्लेज इस्तेमाल करते हैं किसी ना किसी तरह का नेचुरल स्वरूप वो धारण करते हैं जिससे कि की जो शिकारी है उससे वह बच पाए तो यह जो फंगस या लील जिस जो भी कहे पेड़ के ऊपर में ग्रीन कलर का था अभी कुछ समय के बाद में उस पेड़ व जंगल था वहां पे आग लग गई तो आग लगने से क्या हुआ पेड़ जब जलते हैं तो अी ग्रीनरी तो चली जाएगी उनका कलर बदल करके राख के जैसा कलर हो गया अभी फंगस का कलर है ग्रीन और पेड़ का कलर ग्रीन की बजाय पूरा एशन कलर या तो ब्राउन कलर हो जाएगा तो फंगस तो एकदम वो शिकारी की नजर में आ जाएगी तो कुछ ही दिनों में य फंगस ने भी अपना कलर चेंज कर दिया यानी देखिए कि यह इवोल्यूशन अपनी नजरों के सामने इस तरह से साइंटिस्ट लोगों ने ऑब्जर्व किया है कि जिस परिस्थिति में आपको सर्वाइवल की जरूरत पड़ती है उसके अनुसार आपको जो एडेप्टेबिलिटी है वह चाहे कैमफ्लेज हो ना कि चाहे वह खून का अपने रक्त का टेंपरेचर ब्लड टेंपरेचर देखिए कि जब डाइनो सर थे तो डायनोसोर का ठंडा खून था उनका जो रक्त था ब्लड उसका टेंपरेचर वह शरीर के टेंपरेचर के जितना ही बाहर का जो टेंपरेचर जैसे बढ़ता है कम होता है उनके ब्लड का टेंपरेचर भी कम होगा बढ़ेगा बाहर के टेंपरेचर के अनुसार किंतु जब उल्कापात हुआ यानी कि मेटराइड स्ट्राइक हुई पृथ्वी पे और पूरा क्लाइमेट चेंज हुआ और यह जो डायनोसोर बेसिकली रेप्टाइल क्लास के हैं रेप्टाइल स्पीशीज के तो रेप्टाइल स्पीशीज इसका एक्सटिंक्शन हो गया और फिर यह मेमल हम लोग मेमल स्पीशीज के हैं मेमल अर्थात कि स्तनधारी जीव हम लोग बच्चे को जन्म देते हैं रेप्टाइल जो है बच्चे को अंडा देते हैं अंडे में से बच्चे का जन्म होता है तो जो मैमल्स होते हैं हमारा ब्लड टेंपरेचर एक ही टेंपरेचर मेंटेन करता है बाहर में यदि ठंडी भी पड़े कि बाहर में गर्मी हो अपने ब्लड का टेंपरेचर एक समान मेंटेन होता है होमियोस्टैसिस जिसको कहते हैं तो इसकी बदल इसकी वजह से बाहर में क्लाइमेट चेंज यदि होता है तो अप टू एन एक्सटेंट हम उसको मेंटेन कर पाएंगे यदि बहुत ठंडी गिरती है जैसे हम अंटार्कटिका जाएंगे तो भी हम बच जाएंगे यदि हम सहारा डेजर्ट में जाएंगे तो भी अपना ब्लड टेंपरेचर अपने बॉडी को एडजस्ट कर लेगा अर्थात कि और यह जो डायनोसोर या रेप्टाइल होते थे जैसे कि जिसका जन्म ट्रॉपिक में हुआ है अर्थात कि गर्म क्लाइमेट में ह्यूमिड क्लाइमेट में वो ह्यूमिड क्ला क्लाइमेट में ही जीवित रहेगा उसको वहां से उठा कर के आर्कटिक में ले जाइए ठंडी जगह में उसका मृत्यु हो जाएगा वह क्लाइमेट चेंज सहन नहीं कर पाएगा तो मनुष्य इस तरह से इवोल्व हुआ है एडेप्टेबिलिटी जो हमारी है वह इस तरह से है कि हम क्लाइमेट चेंज को हम सहन कर सकते हैं यह तो एक उदाहरण हुआ टेक्निकल उदाहरण किंतु साथ-साथ में ही देखिए कि दूसरे दो बड़े फैक्टर इवोल्यूशन में काम करते हैं एक है कंपटीशन दूसरा है कोऑपरेशन कोऑपरेशन तो कंपटीशन में क्या होता है यदि ये नेचर डिस्कवरी अपने नेचरल ये जो डॉक्यूमेंट्री आपने देखी होगी यह नेशनल जियोग्राफिक चैनल पे या डिस्कवरी चैनल पे तो आपने देखा होगा ये किस तरह से शेर है या साप है ये लोग शिकार कैसे करते हैं शेर शिकार शिकार करेगा तो एकदम छुप कर के रहेगा सामने यह जो भेड़ या बकरियां जो है वो पानी पीने के लिए जब आएगी जो तालाब है या नदी है वहां पर वह छुप कर के रहेगा क्योंकि वह उनको उनके पीछे दौड़ेगा तो वे लोग हाथ से चली जाएगी किंतु उसको पता है कि पानी पीने के लिए तो सब आने वाले हैं तो जैसे ही भेड़ बकरी या ऐसा कुछ भी पानी पीने के लिए आया वह शेर जंप लगाएगा और उसको पकड़ लेगा वह जो ठाकुर की फेमस कहानी है इसी तरह से एक शेरनी वह जंप लगा रही थी उसने बच्चे को प्रसव किया और उसका मृत्यु हो गया बच्चा फिर यह भेड़ बकरियों के साथ में बड़ा हो रहा है और अपने को भी भेड़ बकरी मान रहा है किंतु दूसरे शेर ने उसको पकड़ करके उसका चेहरा पानी के भीतर में दिखाया कहा कि देखो तुम्हारा चेहरा भी मेरे जैसा है फिर उसको खाने के लिए मांस का टुकड़ा दिया जब वह खाने लगा तब उसको शेर को पता चला कि वह भेड़ बकरी नहीं है वह तो खुद शेर है तो यह जो कंपटीशन है नेचर में यह बड़ा भयानक है भेड़ बकरी के सामने शेर की हमेशा विजय होगी तो यह इवोल्यूशन के लिए आपको क्या चाहिए पहले तो यह बॉडी का जो स्ट्रक्चर है होमियोस्टैसिस ये ये सब चाहिए रेप्टाइल से ज्यादा मेमल का जीवित रहने का चांस ज्यादा है दूसरा कि आपके भीतर में स्पीड चाहिए आपके भीतर में स्ट्रेंथ चाहिए आपके भीतर में शिकार करने की कनिंग यानी कि एक चालाकी चाहिए पता है शेर को कि ये भेड़ बकरियां इसके पीछे में दौड़ेंगे तो उससे भी ज्यादा स्पीड से दौड़ के भाग जाएगी किंतु पानी पीने के लिए तो सब लोग आने वाले हैं तो वहीं जलाशय या नदी के किनारे छुप कर के बैठे रहो तो ये कनिंग चाहिए शिकार करने के लिए ऐ सब बहुत कुछ है तो यह सब कंपटीशन के गुण हम में जितने जितने बढ़ते जाएंगे उतना हमारा इवोल्यूशन होता जाएगा यह एक थिरी है मॉडर्न साइंस या तो मॉडर्न इवोल्यूशन इस थिरी को ज्यादा स्वीकार करता है कंपटीशन या तो सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट या तो फिर कहेंगे और ज्यादा कुछ टेक्निकल टर्म एडेप्टेबिलिटी तो यह उनका व्यू है अभी हमारा व्यू क्या है स्वामी जी का व्यू क्या है जो कि यह जो अपना पुनर्जन्म का जो सिद्धांत है उससे जो जिस तरह से थोड़ा सा डिफर होता है स्वामी जी कहते हैं सत्कर्म करने से हम लोगों का इवोल्यूशन होगा मनुष्य का इवोल्यूशन देवता में होगा तो देखिए यहां पर दो थिरिंजल स्वामी जी ने कर दिया है अपने हिंदू धर्म का उत्क्रांति वाद पुनर्जन्म के आधार पर है किंतु हिंदू धर्म यह भी कहता है कि पुनर्जन्म आपका प्राप्त होगा आपके कर्म के अनुसार कर्म अच्छे रहेंगे तो देवता में से मनुष्य में से देवता होंगे और देवता होकर के पाप किए तो फिर वही पत्थर ईट पत्थर से शुरू करना पड़ेगा ये हिंदू व्यू हो गया यहां का ये सत्कर्म और दुष्कर्म वाला पार्ट स्वामी जी ने ले लिया और वेस्टर्न जो साइंस है उसका कहना है कि स्पीशीज वाइज इवोल्यूशन होता है ये जो रेप्टाइल स्पीशीज थी उसमें से ये मैमल्स हुए मैमल्स में से एप हुए एप में से ये होमोसेपियंस हुए ये स्पेसस इवोल्यूशन यहां पे पुनर्जन्म वाद है हिंदू धर्म में वेस्टर्न साइंस में स्पेसस वाइज इवोल्यूशन होता है तो यह स्पीस वाइज इवोल्यूशन में से यह ले लिया स्वामी जी ने मॉडर्न साइंस और हिंदू धर्म में से स्वामी जी ने ले लिया यह सत कर्म का सिद्धांत और इन दोनों को इकट्ठा करके स्वामी जी का जो सिद्धांत है कि सबके भीतर में डिविटो चाहे वायरस हो ना कि चाहे बैक्टीरिया हो कि एक कोशी जीव हो ना कि जलचर जलचर अर्थात कि पानी में तैरने वाले जीव ना कि स्थल चर अर्थात कि पृथ्वी पर जमीन पर रहने वाले जीव ये सबके भीतर में वही डिविश्री सस का इवोल्यूशन होता जाएगा इस थिरी के अनुसार देखिए कि इवन पशु और पक्षी के भीतर में भी यह पोट ल है छोटा सा तो छोटा सा थोड़ा सा तो थोड़ा सा डिविली को मेनिफेस्ट करने का और मान लीजिए कि आज से कितने 30 40 लाख साल पहले बंदर का कोई एक ग्रुप होगा जिन्होंने डिवी निटी को मेनिफेस्ट किया होगा तो यह ग्रुप अपने बाकी जो बंदर के ग्रुप थे उसको पीछे छोड़ कर के धीरे-धीरे करके मनुष्य में आदिम मनुष्य में इवोल्व होना शुरू हुआ जो आदिम मनुष्य है टेक्निकल लैंग्वेज में इसको कहते हैं होमो इरेक्टस अर्थात कि सीधा चलने वाला एक प्राणी तो यह होमो इरेक्टस ए में से होमो इरेक्टस हुआ फिर होमो इरेक्टस की भी एक बहुत सारी ग्रुप्स होंगे ट्राइब्स होंगी उसमें से एक ट्राइब या तो एक ग्रुप ने और ज्यादा मेनी डिविली मेनिफेस्ट की होगी तो यह ट्राइब का इवोल्यूशन होमोसेपियंस में हुआ होमोसेपियंस अर्थात कि हम एनाटॉमिकली करेक्ट मॉडर्न ह्यू तो यह होमो इरेक्टस में होमोसेपियंस जो हुआ वो हुआ बिकॉज की डिविल वे लोग कर पाए और हमें भी आज देखिए कि हम एक एक सामान्य एक आम आदमी भी है दूसरी ओर कहा जाए कि किसी भी क्षेत्र में एक सर्वोच्च आसन पर बैठे हुए जैसे कि विज्ञान के क्षेत्र में देखें तो अल्बर्ट आइंस्टाइन या तो फिर आइजक न्यूटन है कला के क्षेत्र में देखें तो लता मंगेशकर है यदि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में देखे तो अपना सचिन तेंडुलकर है यदि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में देखें तो स्वामी विवेकानंद है चैतन्य महाप्रभु है प्रत्येक क्षेत्र में जो लोगों ने महारत हासिल की है इस तरह के लोग हैं आज यदि मैं क्रिकेट खेलता हूं या गाना गाता हूं क्या मैं अपने को लता मंगेशकर जैसा ना कि यह सचिन तेंडुलकर जैसा महारथ मुझे प्राप्त होगी नहीं होगी क्योंकि उस उस लेवल पर जाने के लिए जो टोटल डेडिकेशन चाहिए जो टोटल आपको अपने जीवन को मन प्राण शरीर को लगा देना है वो कैपेसिटी मेरे में नहीं है मेरा क्षेत्र है आध्यात्मिकता चलिए मान लीजिए किंतु मुझे आध्यात्मिक क्षेत्र में गौरांग महाप्रभु जैसा एक लेवल प्राप्त करना है वो होगा नहीं होगा क्योंकि मेरी एक लिमिटेशन है किंतु गौरांग महाप्रभु की या तो स्वामी विवेकानंद की या तो फिर यह साउथ में जैसे कि अलवर नाम के संत जो सब थे उन उन लोगों की वो क्षमता थी कि अपने-अपने क्षेत्र में वो महारत हासिल करें सो दिस मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविले वल पे गए अर्थात कि मनुष्य भी देवता हो सकता है यदि डिविटो फेस्टेन हो तो यह है स्वामी विवेकानंद का उत्क्रांति वाद अभी देखिए मैं फिर से यदि एक आउटलाइन दे दूं तो उत्क्रांति वाद के चार नियम या तो फिर चार थिरी अपने पास में आई एक तो है कि ट्रेडिशनल क्रिश्चियन थिरी वह कहती है कि भगवान ने एक साथ में सृष्टि की रचना की अभी यह ट्रेडिशनल थिरी जो है वह यूरोप के ही उत्क्रांति वाद ने उसको छोड़ दिया है उत्क्रांति वाद ने उसको गलत साबित कर दिया है तो दूसरी थिरी है यूरोप का आधुनिक उत्क्रांति वाद जो कहता है कि स्पीशीज वाइ स्पीशीज इवोल्यूशन होता है सिंगल सेल्यूलर स्पीशरिकॉग्निशन स्पीशीज उसमें से फिर यह रेप्टाइल्स उसमें से मैमल्स मैमल्स में से एप और एप में से होमोसेपियंस तो ये स्पेसस वाइज इवोल्यूशन का थिरी है तीसरा थिरी है अपने हिंदू धर्म का हिंदू धर्म का थिरी कहता है कि यदि इस जन्म में हम सत्कर्म करेंगे तो अगला जन्म उच्च योनि का प्राप्त होगा और यदि अगले जन्म में हमने पाप कर्म किए तो फिर नीच योनि में हमारा जन्म होगा और फिर अल्टीमेटली स्वामी जी का सिद्धांत है स्वामी जी का सिद्धांत इस कर्म की थिरी को ट्रेडिशनल हिंदू थिरी जो कि मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविली है उसको स्वीकार करता है ऑन वन हैंड ऑन दी अदर हैंड यह जो मॉडर्न यूरोपियन थिरी है स्पेसस वाइज इवोल्यूशन इसको भी स्वीकार करता है और यदि इसके ऊपर में स्वामी जी के आइडियाज को और ज्यादा फर्द एक्सप्लोर करना है तो हमने ऑलरेडी किए हुए हैं वहां पर डीएनए और सब डिस्कशन आ गया है अपना ज्ञान योग यह जो कॉस्मो माइक्रो कजम और कॉस्मो मैक्रो कजम वह जो लेक्चर सीरीज था उसमें स्वामी जी इस थिरी में काफी डिटेल डिस्कशन करते हैं और हमने उस समय किया था तो यहां पर जो स्वामी जी जितना बताते हैं उसका मैंने थोड़ा सा विस्तार करने का प्रयास किया है अच्छा अभी थोड़ा सा और आगे देखते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं वेर एवर देर इ लाइफ द स्टोर हाउस ऑफ इनफाइनों जहां पे भी जीवन है उसके पीछे अनंत शक्ति का महा समुद्र है समुंदर है अच्छा यह अनंत समुंदर क्या है वो आत्मन या तो ब्राह्मण या तो फिर उसको और थोड़ा सा टेक्निकल कहेंगे तो प्राण देखिए स्वामी जी उसको किस तरह से डिफाइन करते हैं स्टार्टिंग एज सम फंगस सम वेरी माइन्यूट माइक्रोस्कोपिक बबल एंड ऑल द टाइम ड्रॉइंग फ्रॉम दैट इनफाइनों स्लोली एंड स्टेडी अंट्स ऑफ टाइम इट बिकम अ प्लांट देन एन एनिमल देन अल्टीमेट गॉड एक अमीबा है ना कि एक कोषी जीव है अनंत शक्ति का यह समुंदर है उसमें से शक्ति प्राप्त करता हुआ अनंत शक्ति का समुंदर यह ज्ञान योग में इसको स्वामी जी ने आत्मन करके पुकारा था यहां पर शायद कहेंगे प्राण जो भी कहे स्वामी जी वह अनंत शक्ति के समुंदर में से ही इवोल्यूशन होकर के एक कोशी जीव में से बहु कोशी जीव उसमें से पेड़-पौधे उसमें से मनुष्य और आखिर में देवता की तरह हमारी देवता की ओर अपनी उत्क्रांति होती है दिस इज अटेंड थ्रू मिलियंस ऑफ योंस बट व्हाट इज टाइम ये इवोल्यूशन की जो साइकल है इवोल्यूशन का चक्र है उसको धीरे-धीरे करके चलते चलते करोड़ों साल लग जाते हैं मिलियंस ऑफ इनस बट वट इज टाइम किंतु समय क्या है एक कोशी जीव में से बहु कोशी जीव होते-होते कितने 30 40 50 60 करोड़ लगे होंगे ये डायनोसोर आज से 65 करोड़ साल पहले डायनोसोर्स थे और उसके बाद में आज उसमें से मनुष्य आया है तो करोड़ों करोड़ों साल की इवोल्यूशन की साइकिल है सर्वप्रथम जो जीवन है पृथ्वी पर कहा जाता है है कि 1 बिलियन इयर्स अगो वो प्रारंभ हुआ था अर्थात कि 100 करोड़ साल पहले पृथ्वी का लाइफ है मॉडर्न कॉस्मोलॉजी कहता है कि पृथ्वी 400 करोड़ साल पहले ऑलमोस्ट 4 बिलियन इयर्स अगो पृथ्वी का फॉर्मेशन हुआ था और यह 300 करोड़ साल तक यानी कि 3 बिलियन इयर्स तक यह पृथ्वी वैसे धीरे-धीरे करके वो ठंडी होती गई पहले तो चारों ओर अग्नि का तूफान लावा विस्फोट होता है अर्थक्वेक होता है आकाश में से मेटराइड गिर रही है बड़ा ही भयानक था वह पृथ्वी उस समय का पहले 300 करोड़ साल का किंतु फिर जैसे जैसे पृथ्वी शांत होती गई रमणीय होती गई जीवन को धारण करने के योग्य होती गई तो फिर आज से 100 करोड़ साल पहले सर्वप्रथम जीवन प्रारंभ हुआ तो 100 करोड़ साल से आज की यात्रा है कि एक कोशी जीव में से आज हम मनुष्य तक पहुंचे हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि इवोल्यूशन को वैसे लंब समय लगता है मिलियंस ऑफ इयंस लगते हैं बट व्हाट इज टाइम किंतु समय क्या है आखिर में एन इंक्रीज ऑफ स्पीड एन इंक्रीज ऑफ स्ट्रगल इज एबल टू ब्रीज द गल्फ ऑफ टाइम जद समय उत्क्रांति की स्पीड उत्क्रांति की यह गति है उसको हम बढ़ा दे तो फिर यह जो स्ट्रगल है सर्वाइवल की ना कि यह जो मेनिफेस्टेशन की जो स्ट्रगल है मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविली यह समय के इस जो बड़ी एक गैप है यह गल्फ ऑफ टाइम है उसको वह पार कर जाएगी आपको यदि मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविली वो आज से मान लीजिए 3040 लाख साल पहले ये होमो इरेक्टस थे आदि मनुष्य उसमें से किसी एक छोटे से ग्रुप में डिविजी करके मेनिफेस्ट होना शुरू हुआ होगा इसका अर्थ क्या है डिविटो के भीतर में क्रोध होता है दूसरों को हानि पहुंचा करके अपने को बेनिफिट ले लेना है यह जो सब नेगेटिव टेंडेंसीज है वो धीरे-धीरे कम होकर के पॉजिटिव टेंडेंसीज का डेवलप होना दिस इज बेसिकली यह मेनिफेस्टेशन ऑफ डिवी निटी ऐसा नहीं है कि डिविटो ध्यान में बैठ गया ओमकार चैटिंग करते-करते उसने समाधि प्राप्त कर दी की भी होगी शायद वी डू नॉट नो बट इन जनरल यदि कहा जाए तो वो इस तरह से है कि पॉजिटिव टेंडेंसी बढ़ती रहती है नेगेटिव टेंडेंसी कम होती रहती है तो यह जो कोऑपरेशन की भावना यह कंपैशन है करुणा है दूसरों के प्रति मित्रता है दूसरों को मदद पहुंचाने की हेल्प करने की एक जो टेंडेंसी है दूसरों के साथ में फ्रेंडशिप करने की एक टेंडेंसी है यह जो पॉजिटिव टेंडेंसी उन लोगों में बढ़ती गई और धीरे एक जनरेशन में जैसे कि पिताजी में आज कंपेज है करुणा है दया है मैत्री है मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा इन चार को योग शास्त्र में चित्त प्रसाद कहा जाता है मैत्री अर्थात कि अपने जो समवशरण या तो अपने जितने ही शक्तिशाली लोग हैं अपने पियर्स जिनको कहते हैं उनके साथ में मित्रता रखना मैत्री करुणा अर्थात कि जो अपने से छोटे हैं या तो कमजोर है उनके प्रति दया भाव रखना उसको कहते हैं करुणा मुदिता अर्थात कि जो अपने से बड़े हैं या तो ज्यादा शक्तिशाली है उनके प्रति एक रिस्पेक्ट भाव रखना और उपेक्षा अर्थात कि जो हमारे शत्रु है जो हमारी हानि करने के लिए वह चाहते हैं तो उनके प्रति एक उपेक्षा का भाव रखना तो यह मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा इन चारों को कहा जाता है चित्त प्रसाद योगशास्त्र में तो यह चित्त प्रसाद जैसे-जैसे बढ़ता गया अदर वाइज क्या होता है बहुत नेगेटिव टेंडेंसी होती है कि कैसे भी करके दूसरों के पास में यह जो गोधन है यानी कि जो गाय है उसको चुरा ले उसका जो खेत है उसमें आग लगा दे क्योंकि उसके पास में बहुत ज्यादा अच्छी मने उसकी खेती हो रही है जेलस होती है दूसरों के प्रति तो नेगेटिव टेंडेंसी कम होके पॉजिटिव टेंडेंसी बढ़ती गई अभी एक होमो इरेक्टस में ऐसा हुआ तो उसके बच्चे में धीरे-धीरे करके देखेंगे वही टेंडेंसी और ज्यादा बढ़ती है उनके बच्चों में देखेंगे और ज्यादा बढ़ती है तो एक करोड़ों साल लाखों साल के बाद में फिर होमो सेपियंस के रूप में ये लोग इवोल्व हुए तो यह तो लाखों करोड़ों साल की बात है कि धीरे-धीरे करके मैं पॉजिटिव टेंडेंसी बढ़ाता जाऊंगा तो कहीं जाकर के मेरा इवोल्यूशन होगा किंतु स्वामी जी के व्हाट इज टाइम समय क्या है यदि आप चाहे तो यह मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविली है उसको इतना स्पीड अप कर सकते हैं कि आप अपने खुद के जीवन में इस इवोल्यूशन को देख देख सकते हैं अदर वाइज किसने देखा है कि ए में से होमो इरेक्टस हुआ है होमो इरेक्टस में से होमोसेपियंस हुआ है किसने यह देखा है हमारे पास में आर्कियोलॉजिकल एविडेंस है नजर के सामने क्या इवोल्यूशन दिखता है यह फंगस का उदाहरण दिया जैसे य नजर के सामने इवोल्यूशन हुआ किंतु फंगस है या तो फिर कोई भी एक कोशी जीव है उसमें इवोल्यूशन दिखता है उससे तो कोई मनुष्य को तो फर्क नहीं पड़ता आज क्या हमने किसी नजर के सामने मनुष्य को देवता होते हुए देखा है एक्चुअली स्वामी जी कहते हैं देखा है भगवान श्री राम कृष्ण देव उसका उदाहरण है उसके बाद में स्वामी जी ठाकुर के बारे में बताएंगे तो स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि इंक्रीज ऑफ स्पीड ये इंक्रीज ऑफ स्पीड ऑफ द मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविज ऑफ स्ट्रगल इज एबल टू ब्रीज द गल्फ ऑफ टाइम यह करोड़ों साल की इवोल्यूशन की यात्रा है उसको बड़े ही शॉर्ट टाइम में यह निपटा सकता है दैट व्च नेचुरली टेंस टेक्स अ लॉन्ग टाइम टू अंपलिंग बी शर्टन बाय द इंटेंसिटी ऑफ दी एक्शन जो स्वाभाविक रूप से जो क्रिया करने में लंबा समय लगता है उसको आप यदि ज्यादा मेहनत करें तो उसको आप टूक समय में ही कम समय में ही उसको आप समाप्त कर सकते हैं सेज द योगी योगी ऐसा कहता है अ मैन में गो ऑन स्लोली ड्राइंग इन हिज एनर्जी फ्रॉम द इंफाइटिंग द यूनिवर्स एंड परहे पस ही विल रिक्वायर 100000 इयर्स टू बिकम ए देव ऐसा हो सकता है कि एक मनुष्य जिस आत्मन रूपी जो एनर्जी का स्टोर हाउस है यह प्राण रूपी एनर्जी का यह स्टोर हाउस है अनंत समुंदर है उसमें से शक्ति खींचता जाए खींचता जाए और लाखों साल की यात्रा के बाद में आध्यात्मिक यात्रा के बाद में देवता बने एंड देन पर हैप्स 500000 इयर्स टू बिकम स्टिल हायर और फिर 5 लाख साल लगेंगे कि देवता से भी उच्च स्पेशिसस का इवोल्यूशन हो एंड पर हैप्स फाइव मिलियंस ऑफ ईयर्स टू बिकम परफेक्ट और हो सकता है कि 50 लाख साल लगे परफेक्ट होने में प्रश्न होगा कि देवता से उच्च रूप क्या है उच्च स्पेसस क्या है और उससे भी फिर परफेक्शन होने में क्या चाहिए परफेक्शन अर्थात कि आत्मज्ञान आत्मज्ञान या तो फिर ब्रह्मज्ञान यही अपने शास्त्र में अल्टीमेट मनुष्य जीवन का उद्देश्य बताया गया है देवता होने के बाद में भी नॉट नेसेसरी कि हमको आत्मज्ञान प्राप्त हो तो आत्मज्ञान को प्राप्त करने के लिए हो सकता है कि 50 लाख साल का समय हमको लगे गिवन रैपिड ग्रोथ किंतु यदि हम एकदम स्पीड से एकदम झड़प से यदि हम मेनिफेस्टेशन करते हैं डिविल बीले संड समय जो है वह कम हो जाएगा साधना में अपनी इंटेंसिटी बढ़ाते जाएंगे तो यह परफेक्शन की ओर हमारी यात्रा है टूक समय में समाप्त हो जाएगी आज आप ट्रेन में बैठ कर के यहां से बेलूर मठ जाते हैं तो हो सकता है कि 24 घंटे या उससे ज्यादा समय लगे किंतु प्लेन में बैठ के जाएंगे तो एक घंटे में पहुंच जाएंगे यहां से विशाखापट्टनम से कोलकाता तो यह प्लेन में बैठ कर के हम उत्क्रांति या तो इवोल्यूशन कर सकते हैं ट्रेन में बैठ कर के भी कर कर सकते हैं साइकिल पर बैठ के भी कर सकते हैं पैदल भी जा सकते हैं अपनी आध्यात्मिक यात्रा की गति कितनी है अपनी साधना की इंटेंसिटी कितनी है उसके ऊपर डिपेंड करता है कि हम किस लेवल के इवोल्यूशन को कितने समय तक पहुंचेंगे व्हाई इज इट नॉट पॉसिबल विद सफिशिएंट एफर्ट टू रीच दिस वेरी परफेक्शन इन सिक्स मंथ्स और सिक्स इयर्स क्या यह संभव नहीं है कि प्रचंड शक्ति लगा कर के साधना करें तो 6 महीने या 6 साल में परफेक्शन को प्राप्त कर ले देयर इज नो लिमिट रीजन शोज थट इस तरह की कोई भी लिमिट नहीं है जो कहता हो कि आप इतने समय में इतना अंतर पार करेंगे ऐसा कोई नियम नहीं है वह कहेगा कि ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करने के लिए आपको 100 जन्म है आपको लगाने पड़ेंगे या 1000 जन्म लगाने पड़ेंगे एक ही जन्म में एक ही बार बैठ कर के साधना करके 6 साल या इवन छ महीने में भी आप ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर सकते हैं इफ एन इंजन विथ अ सर्टेन अमाउंट ऑफ कोल रंस टू माइल्स एन ववर इट विल रन द डिस्टेंस इन लेस टाइम विथ अ ग्रेटर सप्लाई ऑफ कोल यदि एक इंजन के भीतर में हम एक एक परिमाण कोयला डाले और वह इंजन जितना दूर चलेगा तो यदि और ज्यादा कोयला डाल दे तो यह इंजन और ज्यादा दूर तक जाएगा और स्पीडली जाएगा जैसे कि आजकल की लैंग्वेज में कहे कि एक गाड़ी के भीतर में आप 10 किमी पर आवर की स्पीड से चलाते हैं और जितना डिस्टेंस क्रॉस होगा यदि आप उसको 50 किमी पर आवर की स्पीड से चलाते हैं तो पांच गुना डिस्टेंस एक ही समय में समाप्त कर लेगा तो ये स्पीड कितना चलता है उसका डिपेंड करता है गाड़ी का इंजन कितना स्ट्रांग है तो गाड़ी अभी ये लाते हैं उससे 5च 10 गुना डिस्टेंस हो सकता है आप काट ले सिमिलरली व्हाई शल नॉट द सोल बाय इंटेंसिफाइंग इट्स एक्शंस अटन परफेक्शन इन दिस वेरी लाइफ तो यह जो उदाहरण दिया कि किलोमीटर पर आवर यह जदिया गति बढ़ाते जाएंगे कार की उतना ही कम समय में लंबा डिस्टेंस आप क्रॉस करेंगे कार के लिए यदि यह सही है तो अपनी आत्मन के लिए अपने साधक जीवन के लिए साधन भजन के लिए यह बात सही क्यों ना हो ऑल बीइंग्स विल एट लास्ट अटेंड टू दैट गोल वी नो जितने भी पशु पक्षी प्राणी जितने भी जीवंत यह पदार्थ है वह सब परफेक्शन को प्राप्त करेंगे इस बात में हमको कोई संदेह नहीं कोई संशय नहीं हम सबको यह बात पता है बट हु केर्स टू वेट ऑल दिस मिलियंस ऑफ यंस किंतु किसको राह देखनी है करोड़ों साल यात्रा करते रहे करोड़ों साल जब ध्यान साधन भजन करते रहे करोड़ों साल प्राणायाम करते रहे आसन करते रहे कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग राज योग बार-बार जन्म लेकर के बार-बार राम कृष्ण संघ के साथ में सन्यासी या गृहस्थ किसी भी तरह ही युक्त होकर के साधना करते रहे क्यों हम यह करोड़ों साल तक करें यदि कर सकते हैं तो एक ही जन्म में यह पूरा मामला क्यों ना निपटा ले व्हाई नॉट रिच इट इमीडिएट एक ही साथ में तत्काल यदि क्यों नहीं हम अपने गंतव्य स्थान तक ना पहुंच जाए इन दिस बॉडी इवन इन दिस ह्यूमन फॉर्म इसी देह में इसी में क्यों नहीं हम इमीडिएट ब्रह्मज्ञान प्राप्त ना कर ले व्हाई शल आई नॉट गेट दैट इनफाइनों नहीं प्राप्त हो सकता है द आइडियल ऑफ द योगी द होल साइंस ऑफ योगा इज डायरेक्टेड टू द एंड ऑफ टीचिंग देम हाउ टीचिंग मेन हाउ बाय इंटेंसिफाइंग द पावर ऑफ असिमिलेशन टू शर्टन द टाइम फॉर रिचिंग परफेक्शन जो पूरा योग का विज्ञान है वो योगी का जो आदर्श है वो हमको ये एक बात सिखाने में लगता है कि किस तरह से द पावर ऑफ एसमिस अर्थात कि ये जो मेनिफेस्टेशन ऑफ डिविता इंटेंसिफाई किया जाए ज्यादा से ज्यादा उसको सक्षम किया जाए अपनी जो साधना है स्ट्रेंथ किया जाए अपनी साधना को और यह जो परफेक्शन को पहुंचने का समय है उसको कम से कम किया जाए इंस्टेड ऑफ स्लोली एडवांसिंग फ्रॉम पॉइंट टू पॉइंट एंड वेटिंग अंट्स हैज बिकम परफेक्ट एक स्टेप से लेकर के दूसरे स्टेप तक धीरे-धीरे करके जाना और जब पूरी मनुष्य प्रजाति परफेक्शन को प्राप्त कर लेती है तब तक रहा देखना अभी देखिए कि यह ह्यूमन स्पीशीज इवॉल्व होकर के देवता तक तो जाएगी ही देवता में से फिर यह ब्रह्मज्ञान की ओर जाएगी ही तो करोड़ों करोड़ों साल लग जाएंगे तो सबके साथ में मैं करोड़ों करोड़ों साल रा देखूं ऐसा मैं क्यों करूं क्यों नहीं इसी देह में इसी क्षण में इस तरह से साधन भजन में लग जाऊं कि परफेक्शन मुझे प्राप्त हो जाए ऑल द ग्रेट प्रोफेट सेंटस एंड सियर्स ऑफ द वर्ल्ड इस जगत के जितने भी महान यह प्रोफेट्स हो सेंट्स हो ना कि ये दृष्टा हो व्हाट डिड दे डू उन्होंने क्या किया इन वन स् पान ऑफ लाइफ दे लिव द होल लाइफ ऑफ ह्यूमैनिटी एक ही जीवन में उन्होंने मनुष्य सभ्यता की आध्यात्मिक यात्रा पार कर दी है अभी जिस तरह से हम साइकिल प बैठ कर के यहां से कोलकाता जाएंगे कोलकाता जाएंगे तो अब जितना समय लगेगा 5 साल 4 साल जितना भी लगे और प्लेन में बैठ कर के जाएंगे एक ही घंटे में यहां से कलकाता पहुंच जाएंगे तो वो जो जर्नी है तो यह संत महापुरुषों की जर्नी है प्लेन में बैठ कर के उन्होंने यहां से कोलकात्ता गए हैं अपने गंतव्य स्थान तक गए हैं मनुष्य को करोड़ों जन्म लग जाता है परफेक्शन को प्राप्त करने के लिए संत महापुरुष एक ही जीवन में गंतव्य स्थान प्राप्त करते हैं अर्थात कि पूरी सभ्यता की यह जो आध्यात्मिक यात्रा है करोड़ों साल की वह एक ही जीवन में एक ही लाइफ स्पान में वह समाप्त कर लेते हैं ट्रावे द होल लेंथ ऑफ टाइम दैट इट टेक्स ऑर्डिनरी ह्यूमैनिटी टू कम टू परफेक्शन एक ही जीवन में पूरी मनुष्य सभ्यता को परफेक्ट होने में जितने करोड़ों साल लगे एक ही जीवन में 3040 साल के भीतर में ही पूरी जर्नी यह लोग समाप्त कर लेते हैं इन वन लाइफ दे परफेक्ट देम सेल्व एक ही जीवन में वह संपूर्णता प्राप्त करते हैं दे हैव नो थॉट फॉर एनीथिंग एल्स और किसी काम के लिए और किसी डिस्ट्रक्शन उनके सामने नहीं है पढ़ाई करने के लिए बैठे हैं बीच-बीच में 5-10 मिनट हुए चलो मोबाइल खोल कर के देख लेते हैं क्या नया नोटिफिकेशन आया है ध्यान करने के लिए जब ध्यान करने के लिए बैठे हैं और नजर चलती रहती है आसपास में कौन क्या कर रहा है तो यह जो महापुरुष संत होते हैं उनके सामने किसी तरह के डिस्ट्रक्शंस नहीं थे बस एक ही गोल है कि परफेक्शन इसी जन्म में प्राप्त करना है इन वन लाइफ दे परफेक्ट देम सेल्व एक ही जीवन में उन्होंने ब्रह्मज्ञान पूर्णता प्राप्त की है दे हैव नो थॉट फॉर एनीथिंग एल्स और किसी चीज के लिए उनके पास में समय नहीं है और किसी चीज के लिए उनके पास में एनर्जी नहीं है नेवर लीव अ मोमेंट फॉर एनी अदर आइडिया और किसी चीज के लिए एक किसी डिस्ट्रक्शन के लिए एक क्षण भी व्यय ना करें नेवर लीव अ मोमेंट फॉर एनी अदर आइडिया एंड दस द वे इज शॉर्ट एन फॉर देम और ऐसा करके यह यात्रा उनकी कम हो जाती है अर्जुन को जब पूछा गया कि तुमको क्या दिखता है तो उसने क्या उत्तर दिया पंखी की आंख दिखती है और कुछ नहीं दिखता क्यों नहीं पेड़ दिखता है नहीं पौधे दिखते हैं नहीं कौन से फल इस पेड़ के ऊपर में आ रहे हैं दूसरे कितने पंखी बैठे हैं कुछ नहीं दिखता सिर्फ पंखी की आंख ही दिखती है दे दिस इज व्हाट इज मीट बाय कंसंट्रेशन यह इसका अर्थ मने यह है कंसंट्रेशन की डेफिनेशन कंसंट्रेशन बोलेंगे क्या है कंसंट्रेशन तो 10 चीजों को अपने जीवन में लेके रहना वह 10 चीजों का त्याग करके सिर्फ एक ही चीज के लिए मन प्राण देह समर्पित करना यह हो गया कंसंट्रेशन कंसंट्रेशन से हम लोग सोचते हैं कि मैं एक जगह पर बैठ जाऊंगा आंख बंद कर के ध्यान करूंगा किंतु सिर्फ इतना नहीं जीवन की प्रत्येक क्षण इस डिविल देनी है ब्रह्मज्ञान मुझे प्राप्त करना ही है इस तरह का दृढ़ संकल्प मन में चाहिए और बाकी सब मन में से निकाल देना है यह सही सही कंसंट्रेशन है बहुत बार लोग बोलते हैं कि मैं दिन में 10 बार 10 मिनट सुबह को बैठता हूं 10 मिनट शाम को बैठता हूं फिर भी मेरे मन को शांति नहीं हो रही तो यह 24 घंटे में से 20 मिनट आप इस तरह से बैठे बाकी आपके जो 23 घंटे और 40 मिनट है दुनिया भर के डिस्ट्रेक्शन आपके जीवन में लगे रहते हैं तो कैसे वह 20 मिनट आपको हेल्प करने वाला है 2424 घंटे जो है एक ही देह के भीतर में लगा दीजिए देखिए कि इस जन्म में अमर और अनंत शांति मिलती है कि नहीं मिलती इंटेंसिफाइंग द पावर ऑफ असिमिलेशन दस शॉर्ट निंग द टाइम द पावर ऑफ एसमिल इसका क्या अर्थ करेंगे थोड़ा सा देखना पड़ेगा स्वामी जी एसमिल से क्या कहना चाहते हैं मेरा जो गेस है वह है सिंपल साधन भजन की यह शक्ति है इसको जितना बढ़ाए उतना ही हम कम समय में ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर सकते हैं राज योग इज द साइंस व्च टीचस अस हाउ टू गेन द पावर ऑफ कंस और राजयोग व विज्ञान है जो कि हमको कंसंट्रेशन अर्थात की मन की एकाग्रता बढ़ाने में किस तरह से बढ़ाई जाए यह हमको सिखाता है तो यह टॉपिक आज का हुआ यहां पर स अभी मिलेंगे कल फिर से ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु देखिए यह कॉमन कंप्लेन है कि जब हम कोई किसी भी तरह की आध्यात्मिक साधना करते हैं चाहे कोई किताब पढ़ेंगे धर्मिक किताब ना कि साधु संग करेंगे ना कि प्रवचन अटेंड करेंगे मंदिर में जाएंगे उत्सव में पार्टिसिपेट करेंगे उस समय अपना मन एकदम शांत हो जाता है स्थिर हो जाता है ईश्वर के ऊपर में एकदम एकाग्र हो जाता है किंतु जैसे ही मंदिर है या आश्रम है या साधु संग है उसको बंद करके समाप्त करके छोड़ कर के जैसे ही संसार में वापस ते हैं तो जितने भी वह सब समस्याएं हैं फिर से आकर के सर पर सवार हो जाती है वो ठाकुर का है ना कि गंगा स्नान करने के लिए गए तो जितने भी पाप थे वहां पेड़ के ऊपर में बैठ गए और जैसे ही गंगा स्नान करके बाहर आए तो सब अपने फिर सर पर आकर के फिर से सवार हो गए तो जब तक गंगा स्नान करते हैं तब तक पापों से मुक्ति होती है जैसे ही बाहर आए फिर से पाप आ गए सर के ऊपर में तो इसका क्या उत्तर है तो उत्तर इतना सही नहीं मतलब इतना सहज नहीं है देखिए त्याग और वैराग्य की महिमा इसीलिए गाई गई है इसीलिए कहा गया है कि यदि जीवन में आध्यात्मिकता को आध्यात्मिकता से जीवन को भरपूर कर देना है तो त्याग और वैराग्य चाहिए ही चाहिए इस संसार से अलग जाकर के आपको साधना करनी होगी किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको सन्यास ले लेना है जो ट्रेडिशनल सिस्टम थी कि पहले 25 साल ब्रह्मचर्य श्रम उसमें आप त्याग तपस्या साधना विद्याभ्यासम मन को इतना स्ट्रांग बना ले कि बाद में जब आप गृहस्थाश्रम में प्रवेश करते हैं तो आपका मन ऑलरेडी ट्रेन होता है यह सब चीजों के सामने जूझने के लिए अभी अपना प्रॉब्लम यह है इस तरह के एजुकेशन सिस्टम से आते हैं कि जब मन विकसित हो रहा है उस समय जो जब ध्यान साधन भजन साधना सीख लेनी थी वह सीखी नहीं बड़े होकर के अभी सीख रहे हैं यह तो ऐसा हो गया ना कि एडल्ट एजुकेशन के क्लासेस चलते हैं जो लोग बचपन में ना सीख पाए व अंक वगैरह उ लोगों को बड़े होकर के उनको सिखाते हैं किंतु बड़े होकर के पढ़ाई लिखाई करने में दिक्कत यही है कि अपनी जो सीखने की स्पीड है बहुत ही स्लो हो जाएगी तो अभी हम लोगों के साथ में यह समस्या है ब्रह्मचर्य श्रम में ही विद्याभ्यासम ही जो सीख लेना था नहीं सीखा मेडिटेशन नहीं सीखा अभी इस उम्र में कर रहे हैं तो सॉल्यूशन यही है कि जैसे ठाकुर कहते हैं कि सभी को ना बीच-बीच में रिट्रीट में चले जाना है और रिट्रीट में जाकर के अपने मन को शांत करके साधन भजन का अच्छे से अभ्यास करके फिर से संसार में आकर के कार्य करना है कुछ दिनों के बाद देखेंगे फिर से वही सब समस्या होनी शुरू हो जाएगी किंतु फिर से आपको एक बार समय देख कर के रिट्रीट में चले जाना है तो इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है व जैसे ही आप संसार का कार्य करेंगे तो वह तो सब संसार की समस्याएं तो आएगी ही आएगी मैंने आप लोगों की तो जो बात है हम लोगों के साथ में भी अभी यह क्लास समाप्त करके मैं ऑफिस में जाऊंगा तो अभी यह यह हमारी यह रैली होने वाली है व यूथ डे के ऊपर में ना कि फिर अभी सुहितानंद जी आने वाले हैं तो दीक्षा होने वाली है यह सब तो आ ही जाएगा फिर यह सब क्लास राजयोग सब भूल जाऊंगा वही सब चलता रहेगा मन के भीतर में सो देयर इज नो इजी सोल्यूशन कि जब तक ब्रह्म ज्ञान प्राप्त ना हो जाए तब तक हम कर्म करते रहेंगे जब तक तब तक तो यह कर्म के साथ में जुड़ी हुई समस्या आती रहेगी सॉल्यूशन वही है नित्य सत्संग और नियमित रूप से रिट्रीट में जाकर के जगत को भूल करके साधन भजन में डूब जाना वन मोर थ लाक फैमिली मेंस फशन विल बी डिफरेंट ए इवन ी वाट टू गो टू रिट्रीट और बटन और समथिंग लाइक दन अगेन वी हैव टू टेक केयर ऑफ द चिल्ड्रन टू टेक देम न टू टेक केर वई आर यू गोइंग देर ल दिस काइंड ऑफ क्वेश्च आई डोंट नो हाउ टू सच कांड ऑफ थि बट स्टिल आईम समिंग वनडे न आई गे टाइम और न इट पॉसिबल इट टली डिफिकल्ट बिकव फम ू टेक केर फेस्टिवल टा लाक सब फम ए समथ इ गो ए इक ने आई ड नोक इ ब ट वव और स प्र स एक्सन सेम प्रॉब्लम ब् नप नहीं यह जो आपने कहा बिल्कुल ठीक कहा कि स्त्रियों के लिए ज्यादा तकलीफ दायक ही है हम पुरुष लोग तो सुबह को जो लोग घर में रहते हैं गृहस्थ आश्रम में सुबह से घर से निकल जाएंगे जॉब वगैरह करेंगे और फिर रात को वापस आएंगे खाना खाके टीवी देख के सो जाएंगे तो आई एग्री विथ यू कि बट अभी इसका सलूशन भी तो आपी को निकालना है इसका एक एक इस तरह से देख सकते हैं कि जितने भी कर्म है हमारे कर्मों का भार वो धीरे-धीरे करके वर्क आउट हो रहा है किंतु ऐसा कहने से कंसोलेशन तो मिलने वाला नहीं है यू विल हैव टू फाइंड सम वे आउट और क्या वे होगा वह तो आप ही को ठीक करना है देर इज नो इजी आंसर टू दिस य जयराम बाटी में एक बार एक महाराज थे वह सन्यासी महाराज व मां को कहते हैं मां चलो कोलकाता चलते हैं कलकाता में काम है मने कुछ भी होगा कुछ किसी कारण सर चलो कल पता चलते हैं तो मां ने पहले तो उसके मुंह पर तो कुछ उत्तर नहीं दिया बाद में वह बाकी सबको कह रही है रा होलो नेटो सन्नासी उठ बोलले उठ मेंे बस बोल में बस मेंे आमा के तो सब दिख देखे नजर रखे चलते होए अर्थात कि ये लोग जो है साधु लोग वो है नंगे सन्यासी उनको मने अर्थात कि उनके पास कुछ नहीं है उ किसी भी तरह की चिंता नहीं है किसी भी तरह का टेंशन नहीं है उनको कहेंगे उठो तो उठ जाएंगे बैठो तो बैठ जाएंगे किंतु मुझे यहां से कलकत्ता जाना अर्थात कि ये रा माकू नलिनी यह पागली मामी य सबको देख कर के सबकी व्यवस्था करके मुझे निकलना है मेरे से तो फट करके यहां से कलकत्ता जयराम बाटी से कोलकाता या कोलकाता से जयराम बाटी नहीं जाया जाएगा तो यू आर राइट के स्त्रियों की जो रिस्पांसिबिलिटी होती है विचार यूनिक और इसका सोल्यूशन आप ही को सोचना होगा इसका उत्तर मेरे लिए तो मतलब मैं तो सोच भी नहीं पा रहा हूं कि किस तरह का रिस्पांसिबिलिटी किस तरह की क्राइसिस किस तरह की चैलेंज आप फेस करते हैं देखिए हमने इजी वे आउट सिलेक्ट कर लिया है हम लोग साधु हो गए हैं यानी कि साधु होने के बाद में रिस्पांसिबिलिटी होती है किंतु गृहस्थाश्रम में जो रिस्पांसिबिलिटी उसका तो % भी यह नहीं है वी हैव सिलेक्टेड एंड इजी वे आउट अभी आप लोग सोचिए कि व्हाट यू आर गोइंग टू डू अबाउट योर सिचुएशन देखिए रेगुलेरिटी जो है वह सबसे बड़ा फैक्टर है आप जितने रेगुलर रहते हैं मान लीजिए दिन में एक बार भी जद स्मरण मनन सत्संग हुआ सो ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम इट विल सर्टेनली शो इफेक्ट इन योर लाइफ य समय आपको देना पड़ेगा देर इज नो अदर वे समय का कोई उपाय नहीं स्वामी जी ने कहा यू कैन शॉर्ट एन द टाइम किंतु वो टाइम शॉर्ट कब होगा जब इंटेंस साधना करेंगे तो साधना की स्पीड कम हो जाएगी तो तो समय लगेगा ही दैट टाइम यू विल हैव टू गिव देखिए ये ये जो स्वामी जी ने गाड़ी का उदाहरण दिया ना कि आप 50 किलोमीटर पर आवर की गति से जा रहा तो आपको एक किलोमीटर क्रॉस करने मने 50 किलोमीटर क्रॉस करने में एक घंटा लगेगा और यदि 25 किलोमीटर पर आवर की गति से जा रहे हैं तो 50 किलोमीटर क्रॉस करने में दो घंटे लगेंगे तो आप क्रॉस तो करना ही है आपको बस है कि एक घंटे में करेंगे कि दो घंटे में करेंगे हम साधन भजन की अपनी इंटेंसिटी कितनी है उसके ऊपर डिपेंड करता है कि हमको गंतव्य स्थान पहुंचने में कितना समय लगता है देखो यह जो ईश्वर की पूजा हम यदि करते हैं इस तरह से किसी भी तरह का नैवेद्य ऑफर करके फल पुष्प धूप दीप वगैरा देकर के यदि हमारी उसमें आस्था है यदि हमने उसको साधना के रूप में स्वीकार किया है तो उसको कंटिन्यू करना चाहिए क्योंकि जैसे हिंदू धर्म का सबसे बड़ा यही है कि साधना के लाखों प्रकार है आपकी पर्सनालिटी के अनुसार आपकी आवश्यकता के अनुसार आपकी क्वालिफिकेशन के अनुसार साधनाएं है तो जो साधना हमने एक बार साधना के रूप में सिलेक्ट कर दी है तो निष्ठा पूर्वक अनुष्ठान करने से गंतव्य स्थान तक पहुंचेंगे ही पहुंचेंगे वही है कि इंटेंसिटी ज्यादा है या कम है उसके अनुसार ज्यादा कम समय लगेगा किंतु पहुंचना तो है ही यदि आप ठाकुर को फल मिष्टी ऑफर करते हैं तो करते जाइए व निष्ठा के सहित करते जाइए अवश्य मन को शांति मिलेगी अभी जैसे न्याय में एक न्याय है काक ताली न्याय यानी कि पेड़ के ऊपर में बैठा और पेड़ की ब्रांच टूट गई जिस ब्रांच के ऊपर में कौवा बैठा था तो यह कौवे के वेट से टूटी ना कि वह भीतर से वह सड़ गई थी उसको टूटना ही था अभी वह कौन बताएगा तो यह सब इस तरह से है कि आज मैंने सुबह को ईश्वर का नाम स्मरण नहीं किया और फिर दिन के दौरान ऐसी कोई घटना हुई कि जो कि मुझे व्यथा पहुंचा सकती है तो इन दोनों के बीच में को रिलेशन है कि नहीं वोह तो अभी ठाकुर के अलावा और कोई नहीं बता पाएगा अपनी ओर से हम को प्रतिदिन हो सकता है साधन भजन थोड़ा बहुत भी स्मरण मनन करके दिन की शुरुआत करनी है जिससे कि यदि आघात भी पहुंचे तो उसको सफर करने का एक स्टेमिना अपने में आ जाए को रिलेशन है कि नहीं बताना मुश्किल है सही में और जो लोग कर्म के सिद्धांत को पहचानते हैं वह कहते हैं ना भगवान गीता में कहते हैं गहना कर्मणो गति ही यह कर्म की जो गति है किस वजह से क्या कार्य होता है पूर्वा पर क्या संबंध है उसको समझने में ऋषि मुनि भी कभी-कभी यह हो जाते हैं कंफ्यूज हो जाते हैं तो हम आम आदमी तो कैसे समझाएंगे किंतु हमको अपनी ओर से तैयारी पक्की रखनी है यदि और कुछ ना हो पाए तो भगवान को प्रणाम करके घर से बाहर निकलना है इतना तो हमको करना है देखिए यहां पर मैं एक बात बताऊं यदि हम इंटेंसिटी के बारे में इतना ना सोचे और थोड़ा सा पेशेंस के बारे में सोचे क्योंकि ना इंटेंसिटी बढ़ाना इवन हरा हम लोगों का भी लिमिट है स ले लिया है जगत छोड़ दिया है फिर भी आपको पता है अपने मिशन में कितना कार्य काम होता है फिर काम नहीं होगा तो फिर तमस तो एक बेसिक कंपोनेंट है ना अपनी पर्सनालिटी का कि हम बैठे हैं अभी फ्री बैठे हैं तो क्या हम जब ध्यान करेंगे नहीं करेंगे कोई किताब खोलकर पढ़ेंगे फोन पर किसी के साथ गप लगाएंगे इधर-उधर घूमने को जाएंगे क्या उल्टा पुल्टा विचार करेंगे व तमस और रजस भी तो एक लिमिटेशन है अपने सोचने से काम बंद कर दिया तो मैं साधन भजन करूंगा ऐसा भी नहीं है तो इंटेंस हम कितनी बढ़ाए देर इज ऑलवेज अ लिमिट तो फिर इंटेंसिटी तो हम इच्छा अनुसार नहीं बढ़ा सकते सो अलोंग विथ इट डेवलप पेशेंस पेशेंस चाहिए कि धीरे-धीरे करके इस रास्ते पर जाना है जो लोग पेशेंस खो देते हैं ना वे लोग फिर इस पूरे चीज को ही छोड़ देते हैं कुछ दिन सत्संग में आए फिर पता चला कुछ लाभ नहीं हो रहा है छोड़ो इसको बेटर है कि यह टाइम में न्यूज़ पेपर पढ़कर सुबह का टाइम निकलता हूं तो दैट इज डेंजर मने धीरे-धीरे चल व बात से कोई गम नहीं है व एक दिन तो गंतव्य स्थान को पहुंचना ही है बट हैव पेशेंस एंड कंटिन्यू डूइंग ट रदर देन की लोस पेशेंस और मामले को पूरा छोड़ दे कि छोड़ो सत्संग छोड़ो जब ध्यान जब नेक्स्ट जन्म में किया जाएगा इस जन्म में वैसे ही नहीं मिलने वाला है तो भाई आनंद कर ले ऋणम कृत्वा गतम पवे जैसा कहते ऋण कर कर के घी खा लेते हैं नेक्स्ट जन्म में ऋण को चुका देंगे इंटेंसिटी नहीं तो पेशंस पेशंस को धीरे-धीरे कल्ट वेट कीजिए व पहुंचना तो है ही हमको उसमें कोई डाउट ही नहीं है खास करके श्री राम कृष्ण के चरण में आ गए हैं तो कोई प्रश्न ही नहीं है कि राम कृष्ण लोक में जाना ही है बस ठाकुर कहते हैं ना किसी को दिन में दिन में खाना मिल जाता है सुबह सुबह को किसी किसी को रात तक इंतजार करना पड़ता है खाना सबको मिलने वाला है यह मां ने कहा है मां ने कहा है कि मृत्यु के समय ठाकुर सबको हाथ पकड़ कर के वैकुंठ लोक में या तो फिर श्री राम कृष्ण लोक में ले जाएंगे किंतु फिर यदि आप साधन भजन नहीं करेंगे तो जीवन तो कष्ट में जाने वाला है यानी मुक्ति निश्चित है किंतु जीवन में कष्ट होगा और जीवन का कष्ट दूर करना है तो साधन भजन करना है यह तो वह वाली बात हो गई ना वह रामचंद्र दत्त सबको कहते घूमते थे कि ठाकुर ने हमको स्पर्श करके चैतन्य हो आशीर्वाद दे दिया है पहली जनवरी कल्पतरु दिन को और यह नर क्या सब पागल गपन कर रहा है मठ चालू कर रहा है लड़कों को घर से निकाल कर के साधु बना रहा क्या नाटक है तो यह जो फंडामेंटल क्वेश्चन अपने संघ के स्थापना के साथ में जुड़ा हुआ है कि ठाकुर के आशीर्वाद मिल गए तो फिर साधन भजन किस लिए तो राजा महाराज क्या उत्तर देते हैं किसी ने पूछा ठाकुर ने आपको सब कुछ दे दिया है फिर यह सब क्यों तो उन्होंने क्या कहा निजर कोरेने वर्जन यह सब कुछ अपना कर लेने के लिए तो यह मतलब और मां जैसे कहती है जीवन में यदि शांति चाहिए तो साधन जजन करना ही होगा माने पेशेंस इज द की देखिए दो चीजें या तो इंपेशेंस है या तो पेशेंस है यदि इंपेशेंस है तो मैं इंटेंसिटी बढ़ाऊ मुझे छ महीने में ही स्वामी जी ने कहा ना 6 साल या 6 महीने में मुक्ति हो जाएगी ऐसा कोई नियम नहीं कि आपको 12 साल 15 साल 1215 जन्म लगे ऐसा कोई नियम नहीं आपकी इंपेशेंस कितना है आपकी मुमुक्षु तोव कितना है इंटेंसिटी कितनी उसके ऊपर में तो यदि इंपेशेंस नहीं है तो पेशेंस कल्ट वेट कीजिए ये आधर और आपको कैसे भी करके करना है यदि 10 10 किलोमीटर पर आवर की स्पीड से गाड़ी चलाते हैं तो भी पहुंचेंगे 100 किमी पर आवर की स्पीड से गाड़ी चलाते हैं तो भी पहुंचेंगे उसमें टाइम कम लगेगा इसमें ज्यादा लगेगा उतना ही है किंतु यह ना करें कि गाड़ी रोक करके बाहर निकल कर के बैठ जाए रास्ते के किनारे कि 10 किलोमीटर की स्पीड से कुछ होने वाला नहीं तो छोड़ो अभी पूरे मामले को ही ये ना करें दैट इज द की देखिए बढ़ाना है तो स्वामी जी ने खुद ने जो कहा कि डिस्ट्रक्शन नहीं होने चाहिए जिसका जीवन साधन भजन को समर्पित है तो फिर साधन भजन के अलावा एक क्षण भी उसके पास में और किसी विचार के लिए समय नहीं है किंतु फिर यह सबके लिए संभव नहीं या इमीडिएट संभव नहीं जैसे अपने शास्त्र में गृहस्थाश्रम के बाद में वानप्रस्थाश्रम है वान प्रस्सन के बाद में संन्यास आश्रम है धीरे-धीरे करके रिस्पांसिबिलिटीज कम करते जाइए और एक समय आएगा रिस्पांसिबिलिटी को छोड़ दीजिए सो दैट इज द ओनली सॉल्यूशन कि आपको डिस्ट्रक्शन को हटाना होगा यदि इंटेंसिटी बढ़ानी है तो और विल पावर तो है ही है अल्टीमेटली यू नीड स्ट्रांग विल पावर इन ऑर्डर टू कंटिन्यू फास्टर एंड फास्टर मैं जब पहली बार यहां पे आया था ना मैं जब पहली बार यहां पे आया था मुझे थोड़ा सा डिसएप्वाइंटमेंट ऐसा हुआ था कि यहां पर कोई इजी या क्विक उत्तर नहीं है जैसे मैं यह बुद्धिस्ट साधुओं को बड़ा पढ़ रहता था तो उसमें बहुत मेथड्स ऑफ मेडिटेशन दिया है कि यह मेडिटेशन ऑन नेचर कि आपकी यह जो मठ है उसके बाहर में किसी रांडे में बैठ जाइए रांडे में और यह पंखी का यह जो आवाज है कलरव है उसके ऊपर ध्यान केंद्रित कीजिए यह पास में से झरना बह रहा है तो उसके ऊपर में मन को क्या ऐसी कितनी मेथड यहां पर आकर देखा ऐसा मेथड ऑफ मेडिटेशन जैसा कुछ नहीं हैट वन पॉइंट ऑफ डिसपिटर मी किंतु देखा कि देखिए कि आप हजार मेथड ऑफ मेडिटेशन फॉलो कर ले अल्टीमेटली त्याग और वैराग्य ट इज द फाउंडेशन ऑफ स्पिरिचुअल लाइफ त्याग वैराग्य ऑन वन हैंड एंड ऑन द अदर हैंड विल पावर दिस आर द ओनली फाउंडेशन ऑफ मेडिटेशन किंतु एक्चुअली मेरा व्यू इसमें क्या है पता है जैसे कि समाधि टक संपत्ति है न कि यह महापुरु महापुरुष संश्रय तो ठीक है ये जो समाधि टक संपत्ति वगैरह जो है ना वो नहीं होकर के डेस्टिनेशन ज्यादा है ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य साधन ए मुश्किल है ब्रह्मचर्य डेस्टिनेशन है क्या आप जीवन भर धीरे-धीरे जब ध्यान करते जाइए ऑटोमेटिक आपका मन जो है य कामना वासना से विमुक्त होता जाएगा आप जोर करके मन को खींचें ना तो एक दिन ऐसा विस्फोट होगा कि सब जैसे कि पानी में बह जाएगा सो ट इज माय पॉइंट ऑफ व्यू देखिए यह ट्रबल सिर्फ हमारे लिए वैराग्य का उ पन करती नहीं है स्वामी जी जैसे स्वामी जी यह ठाकुर काशीपुर में किसी ने कहा कि स्वामी जी के पिताजी का मृत्यु हो गया अभी वह नौकरी खोजता घूम रहा है तो ठाकुर थोड़ी मजाक करके कहते हैं कि विपद के संपद ज्ञान करवे बोले छलो तो स जनर कम अर्थात कि विपद विपद अर्थात की ट्रबल उसको संपद ज्ञान करेगा संपद अर्थात की अपॉर्चुनिटी यह चैलेंज को अपॉर्चुनिटी के रूप में देखूंगा ऐसा वो बोल रहा था तो नरेंद्र तो बोलने में बड़ा माहिर था तो ऐसा बोलता रहता था जब भी चैलेंज आएगी तो उ अपॉर्चुनिटी के रूप में लूंगा तो ठाकुर कहते हैं विपद के संपद गन करवे बोले लो तो से जना मजाक करके कि ऐसा बोल रहा था देखो सही सही में चैलेंज आ गया अभी करो त इसका अपॉर्चुनिटी स्वामी जी को भी सेम चैलेंज के रास्ते से उनको वैराग्य हुआ था