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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम तो ज्ञान योग ऑफ स्वामी विवेकानंद कॉस्मस माइक्रो कजम इसमें से हम पाठ कर रहे थे कल हमने देखा कि किस तरह से पहले तो स्वामी जी ने बता दिया कि सनातन प्रश्न क्या है और उसका सनातन उत्तर हमेशा के लिए दे दिया गया है वही बात है कि सभी युग में वह सनातन उत्तर को उस युग के कल्चर के अनुसार उस युग की नीड्स एंड नेसेसिटीज के अनुसार रिफ्रेश री इलस्ट्रेट किया जाता है इसके बाद में अभी स्वामी जी एक्चुअल डिटेल्स में जाने की शुरुआत करते हैं उन्होंने सबसे पहले हमको कहा कि किस तरह से अपनी इंद्रिया कार्य करती है अपनी आंख प्रकाश के किरणों को ग्रहण करती है अपने कान विज साउंड साउंड के जो रेज है वेव्स है ऑडिटरी वेव्स जिसको कहते हैं ऑडिटरी वेव्स को हमारे कान ग्रहण करते हैं इसके बाद में यह प्रकाश के किरण या तो फिर यह आवाज की किरण हमारे ब्रेन तक जाती है ब्रेन में जो न्यूरल नेटवर्क होता है हमारा जो सॉफ्टवेयर यदि कहेंगे जिसको वो इस हार्डवेयर के जो सिग्नल है उसको प्रोसेस करता है और इसको इंटरप्रेट करता है यदि प्रकाश की किरण मेरी आंख में जा रही है तो उससे तो कुछ होने वाला नहीं ब्रेन मुझे बताएगा कि हां मैं क्या देख रहा हूं मैं किताब देख रहा हूं ना कि मैं किसी मनुष्य को देख रहा हूं ना कि मैं अपने ही हाथ को देख रहा हूं यह इंटरप्रिटेशन मेरा ब्रेन करेगा किंतु ब्रेन के पीछे भी एक माइंड है एक कॉन्शसनेस है जिसको कि हम अपना अहम कहते हैं अहम घमंड के रूप में यहां पर नहीं इस्तेमाल होता अहम अर्थात कि मेरा व्यक्तित्व तो इसके पीछे ब्रेन के पीछे भी मेरी कॉन्शसनेस है जो कि कॉन्शसनेस या तो फिर माइंड इस किरणों को फिर उसको अल्टीमेटली इसका उपभोक्ता कौन है जैसे कि आप ऑफिस में काम करते हैं यहां पर इतने सारे वर्कर से से ऑफिस में काम करते हैं कोई टाइपिंग करता है कोई प्रूफ रीडिंग करता है कोई किताब लिखता है कोई क्या करता है कोई अकाउंट देखता है किंतु वो जो लड़का अकाउंट देखता है या जो कोई टाइपिंग करता है उसको तो कोई टाइपिंग करना है इसलिए नहीं कर करता वो करता है मेरे लिए करता है यदि मैं यहां पर देखने वाला ना हूं कि टाइपिंग हो रहा है कि नहीं अकाउंट लिखा जा रहा है कि नहीं तो अकाउंट ना टाइपिंग ना प्रूफ रीडिंग वो सबका कोई मीनिंग ही नहीं है क्योंकि इसके पीछे मैं हूं इसका उपभोक्ता कहो ना कि इसका अल्टीमेट फाइनल बेनिफिशियरी कहो ना कि इसका अल्टीमेट मोटिव पावर कहो मैं हूं बोलकर के यह सब कार्य का कोई अर्थ है वरना यह लोग अपना स्टाफ अपने वॉलंटस के मेरा कुछ लेना देना ना हो तो वो कार्य का कोई अर्थ नहीं रहेगा अर्थ विहीन कार्य हो जाएगा मैं सभी कार्यों का अर्थ हूं मैं बताता हूं मेरा म में मोटिव पावर हूं मेरे कहने से मेरे लिए यह सब कार्य होता है ऑफकोर्स मेरे पीछे ठाकुर है मेरे पीछे एक्चुअल रीडर्स है रीडर्स के लिए मैं कर रहा हूं दैट इज अनदर मैटर किंतु बाकी जो कार्य है वो मेरे कहने से इसको अर्थ प्राप्ति होती है तो वैसे ही मैं किसको देख रहा हूं क्या सुन रहा हूं इसके पीछे मेरा माइंड मेरी कॉन्शसनेस मेरा प्रेजेंस ना हो तो वो देखना और सुनना व्यर्थ हो जाएगा यहां तक कल हमने देखा अभी स्वामी जी आगे क्या कहते हैं फर्स्ट द एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट देन द ऑर्गन टू विच दिस एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट विल कैरी द सेंसेशन एंड लास्टली द ऑर्गन इट सेल्फ मस्ट बी जॉइन टू द माइंड सबसे पहले तो एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट अर्थात की आंख या कान उसके बाद में द ऑर्गन टू दिस एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट विल कैरी द सेंसेशन अर्थात की ब्रेन एंड लास्टली द ऑर्गन इट सेल्फ मस्ट बी जॉइन टू द माइंड आंख आंख का दृश्य और दृश्य को इंटरप्रेट करने वाला ब्रेन यह सब कुछ माइंड के साथ में जुड़ा होगा तभी माइंड उसको ग्रहण करेगा व्हेन द माइंड इज नॉट जॉइन टू द ऑर्गन द ऑर्गन एंड द ईयर मे टेक द इंप्रेशन एंड यट शल नॉट बी कॉन्शियस ऑफ इट आंख जो देख रही है कान जो सुन रहा है उसके पीछे मन नहीं है तो आंख का देखना कानों का सुनना व्यर्थ है द माइंड टू इज ओनली द कैरियर अभी स्वामी जी इससे भी एक स्टेप आगे जाते हैं स्वामी जी कहते हैं कॉन्शसनेस या तो माइंड यह भी एक कैरियर मात्र है जैसे आंख जो हमारी एक्चुअल आंख है जो प्रकाश के किरणों को ग्रहण करती है जो लेंस होता है वह सिर्फ एक कैरियर ही है माइंड उसको देखता है स्वामी जी कहते हैं माइंड इट सेल्फ इ जस्ट ए कैरियर मन भी एक कैरियर मात्र है इट हैज टू कैरी द सेंसेशन स्टिल फॉरवर्ड एंड प्रेजेंट इट टू द इंटेलेक्ट यह मन जो है वह भी इसको सिर्फ आगे ही ले जाएगा और इंटेलेक्ट अर्थात की बुद्धि को देगा यह मन बुद्धि चित्त और अहंकार यह वेदांत की जो अंतःकरण की जो परिकल्पना है उसके बारे में स्वामी जी अभी बात करते हैं कि मन भी जो है ग्रहण करने से होने वाला नहीं है मन को इसको बुद्धि तक पहुंचाना होगा यह जो सिग्नल है द इंटेलेक्ट इज द डिटरमाइंड डिसाइड्स अपॉन व्ट इज ब्रोट टू स्टिल दिस इज नॉट सफिशिएंट देखिए बुद्धि जो है वह ठीक करेगा कि इसके सामने जो प्रेजेंट हुआ है दृश्य या तो श्राव्य इसका क्या करना है जैसे कि मैं आंखों से देखता हूं कि मेरे सामने शेर आ गया मेरा ब्रेन जो है वह इंटरप्रेट करता है कि हां इसको शेर कहते हैं टाइगर कहते हैं और टाइगर मनुष्य को खाता है अभी मन जो है मन पता है कि टाइगर क्या है शेर क्या है उस उसका क्या उसकी कैरेक्टरिस्टिक क्या है वगैरह मन को सब पता है किंतु बुद्धि जो है वह ठीक करती है कि अरे शेर आ गया तो यहां से दौड़ो यहां से भागो वरना वह हमको खा जाएगा यानी कि सिर्फ मन से भी देखने से नहीं होगा देखिए मनुष्य के भीतर में फाइट और फ्लाइट इंस्टिंक्ट इसको कहते हैं यदि इसको बहुत बड़ा खतरा आ गया तो मनुष्य एकदम इंस्टिंक्टिवली वह सोचेगा नहीं वोह फाइट करेगा या तो उसके साथ में लड़ेगा झगड़े या तो फिर भाग जाएगा यदि बहुत बड़ा खतरा है तो भाग जाएगा और खतरा यदि फाइट करने योग्य है या तो फिर भागने का कोई मौका नहीं है तो वो फाइट करेगा ये सब डिसीजन मेकिंग इंस्टिंक्टिव लेवल प होता है किंतु ये बुद्धि का भी ये बुद्धि के भीतर में यह सब एल्गोरिथम रहता है तो बुद्धि जो है एक्चुअली इंटरप्रेट करता है कि जो देखा है इसके ऊपर में एक्शन क्या लेनी है वरना मन को पता है कि हां ये शेर है जैसे पता है ना वो एक पर्टिकुलर टाइप का एक डिसीज है ब्रेन डिसीज है उसमें क्या होता है कि अपथेटिक जि बन जाता है मनुष्य अपथेटिक अर्थात कि जद वह रास्ते से जा रहा है वो सामने से एक कार आ गया तो हमारे सामने ऐसा होगा सडन कार आ गया तो इंस्टिंक्टिवली हम वहां से जंप लगा कर के दौड़ जाएंगे अपने को बचाने का प्रयत्न करेंगे किंतु जो मनुष्य अपथेटिक हो जाता है यह पार्टिकुलर डिसीज उसके सामने सडन कार भी आ गई तो वो अपने अपने को बच जाने का प्रयास नहीं करेगा तो यह सब चीजों मलब इस तरह के मेंटल डिसीज को देख कर के पता चलता है कि यह अंदर के कनेक्शन कितने कॉम्प्लिकेटेड है और कितने पावरफुल है ऑफकोर्स स्वामी जी का जो दूसरा अनुभव था स्वामी जी को ब्रह्मण की अनुभूति हुई थी वो सामने से घोड़ा गाड़ी आ रही है वह अपने को बचाने का प्रयास नहीं करते थे वो तो क्या होता है कि बुद्धि भ्रष्ट नहीं हो गई किंतु बुद्धि को सुपर सड कर दिया है आत्मज्ञान ने इसलिए वोह स्वामी जी अपने को सर्वाइवल टिंट जो है उस उनके भीतर में से चली गई थी कितना खा रहे हैं वोह भी नहीं पता वह सर पटक रहे हैं वोह रेलिंग के ऊपर में फिर भी कोई सेंसेशन नहीं तो यह दो तरह से होता है किसी किसी की बुद्धि जब भ्रष्ट हो जाएगी तो वो डिटरमाइंड नहीं कर पाएगा कि उसके साथ में क्या हो रहा है और उसको किस तरह से रिएक्ट करना है या तो फिर आप ब्रह्मज्ञान में चले जाएंगे तो बुद्धि सुपर सड हो जाएगी वो उसका कर्त उसका जो कार्य है वो कार्य आत्मन ग्रहण कर क्योंकि वह आत्मन में स्थित है द इंटेलेक्ट मस्ट के अच्छा स्वामी जी बाद में कहते हैं स्टिल दिस इज नॉट सफिशिएंट इवन बुद्धि के पास में भी जो आता है यह भी इनफ नहीं है इसके बाद में क्या है द इंटेलेक्ट मस्ट कैरी इट फॉरवर्ड एंड प्रेजेंट द होल थिंग बिफोर द रूलर इन द बॉडी द ह्यूमन सोल द किंग ऑन द थ्रोन स्वामी जी ऐसे पोएटिक शब्द यूज करते हैं इंटेलेक्ट अर्थात की बुद्धि बुद्धि के पास में भी आने से इनफ नहीं है बुद्धि को राजा के पास ले जाना होगा हमारे भीतर में सिंहासन के ऊपर में एक राजा बैठा है द किंग अपॉन द थ्रोन भीतर में एक सिंहासन है सिंहासन के ऊपर में एक राजा विराजमान है इसके पास में बुद्धि लेकर के जाएगा और फिर बिफोर हिम दिस इज प्रेजेंटेड एंड देन फ्रॉम हिम कम्स द ऑर्डर व्हाट टू डू और व्हाट नॉट टू डू जैसे कि देखिए मैं यहां पर डिटरमाइंड फैकल फैक्टर हूं कि जो कुछ भी हो रहा है इसको मैं अर्थ प्रदान करता हूं किंतु मैं जो करता हूं वह तो हमारे ऑर्डर का जो मोटो है आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च सब कुछ पूरे ऑर्डर में जितनी भी एक्टिविटी हो रही है वह यह मोटो अर्थात कि हमारा गाइडिंग प्रिंसिपल इसको डिटरमाइंड करता है कि एक्चुअली जितने भी हजारों डिपार्टमेंट है यह हजारों साधु लाखों वालंटियर जो कार्य कर रहे हैं वह सब पूरा कार्य एक डायरेक्शन में जाए इसी को तो ऑर्डर कहते हैं स्वामी जी कहते हैं ना कि मैं विदेश में जाकर के आई फॉल इन लव फॉल इन लव विथ व्ट विथ ऑर्गेनाइजेशन हमारी एनर्जी इतनी सारी चारों ओर बिखरी पड़ी थी स्वामी जी कहते हैं यह सन्यासी लोग गांव-गांव जाते हैं उपदेश देते हैं वगैरह तो अच्छी बात है किंतु यदि उनका एक ऑर्डर बनाया जाए और फिर वह गांव-गांव जाकर के शिक्षा दे एक प्री डिटरमाइंड फैशन तो भारत की कितनी उन्नति होगी भारत में स्पिरिचुअल एनर्जी है किंतु यह एनर्जी फोकस नहीं है हमको वो ये मैग्नीफाइंग ग्लास का एक्सपेरिमेंट हम सभी लोगों ने किया ही होगा जब हम स्कूल में पढ़ते थे आप सूरज का प्रकाश देखेंगे हमारे पर गिरता है ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ता किंतु जब मैग्नीफाइंग ग्लास उसके ऊपर में सूरज का प्रकाश रखेंगे और नीचे में वो कुछ रखेंगे जैसे कि कागज या वगैरह तो वो जल जाएगा एक्चुअली जल जाएगा सूरज के प्रकाश को फोकस करता है तो ये फोकसिंग प्रिंसिपल या तो फिर यह गाइडिंग प्रिंसिपल ये अपने ऑर्डर में है उसके अनुसार हम सभी लोग कार्य करते हैं तो वैसे ही मनुष्य के जीवन का जो उद्देश्य है वो उद्देश्य क्या है यह सब ये जो किंग अपऑन द थ्रोन ये जो राजा बैठा है सिंहासन के ऊपर में वो डिटरमाइंड करता है बिफोर हिम दिस इज प्रेजेंटेड एंड देन फ्रॉम हिम कम्स द ऑर्डर व्हाट टू डू और व्हाट नॉट टू डू एंड द ऑर्डर गोज डाउन इन द सेम सीक्वेंस टू द इंटेलेक्ट टू द माइंड टू द ऑर्गन एंड द ऑर्गन कन्वे इट टू द इंस्ट्रूमेंट्स एंड द परसेप्शन इज कंप्लीट राजा के पास से बुद्धि के पास में ऑर्डर आता है बुद्धि मन को ऑर्डर करती है ऑर्डर इंद्रियों के जो यह न्यूरल नेटवर्क है ब्रेन के भीतर में उसको व जाकर के बोलता है यह मशीन लेवल व इसको क्या है इंटर कंपाइलर वो जो कंप्यूटर जिन लोगों को पता है उन लोग इस तरह से होता है इनपुट और आउटपुट के बीच में यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट होता है तो यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है अपने ब्रेन का न्यूरल नेटवर्क तो इसके पास जाता है फिर यह नेटवर्क जो है वो इंटर्न या तो फिर यह आंद्रिय है या तो फिर कर्मेंद्रिय है अपने हाथ पैर वगैरह यह कर्मेंद्रियों के पास से जो कुछ भी एक्शन लेना है वह यह इस तरह से ब्रेन य डायरेक्ट करेगा और यह सब या तो फिर ज्ञानेंद्रिय या तो फिर कर्मेंद्रियां वो अपना अपना कार्य करेगी किंतु ज्ञानेंद्रिय कहो ना कि कर्मेंद्रिय कहो ना कि अपना ब्रेन कहो कि ब्रेन के पीछे का माइंड या तो फिर माइंड के पीछे इंटेलेक्ट अर्थात की बुद्धि ये सब अल्टीमेटली इंस्ट्रूमेंट्स है जैसे कि ये अपने ऑर्डर में जैसे है एक प्रेसिडेंट महाराज है फिर जनरल सेक्रेटरी महाराज है जनरल सेक्रेटरी महाराज के अंडर में इतने सारे हेड्स ऑफ द सेंटर्स है हेड्स ऑफ द सेंटर के अंडर में डिपार्टमेंट इंचार्ज है फिर डिपार्टमेंट इंचार्ज के अंदर में ये लोग रहेंगे वॉलंटरीज रहेंगे इस तरह से ये जो पूरा ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर मल्टीनेशनल कंपनी में आप देखेंगे कितना सुपर फाइन ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर होता है तो वैसे ही अपने ब्रेन के भीतर में हमारे भीतर का यह ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर कि सबसे ऊपर में है किंग द रूलर अपने सिंहासन पर बैठा हुआ राजा राजा बुद्धि को ऑर्डर करता है बुद्धि को यदि हम प्रधानमंत्री गिन लेंगे तो प्रधानमंत्री जो है आखिर में अपने मन को बोलेगा वह जो डिपार्टमेंट इंचार्ज यदि कहा जाए इस तरह से और फिर मन ब्रेन को बोलेगा अर्थात कि वह कम्युनि सेंटर जहां पर सब सिग्नल्स इकट्ठा होते हैं कहां पर व डाउन वर्ड सिग्नल है अपवर्ड सिग्नल है किसको किस तरह से मैसेज भेजना है वह जो कलेक्शन वो पूरा वो सिस्टम पूरा कम्युनिकेशन सेंटर आईटी सेंटर जिसको कहेंगे आज की लैंग्वेज में वह अपना ब्रेन है फिर ब्रेन अल्टीमेटली जाकर के कर्मेंद्रिय ज्ञानेंद्रिय उनको ऑर्डर देगा फिर वह एक्चुअल कर्म जो है वो होगा तो दिस इज द ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर ऑफ अस इनसाइड अस द इंस्ट्रूमेंट्स आर इन द एक्सटर्नल बॉडी द ग्रॉस बॉडी ऑफ मैन बट द माइंड एंड द इंटेलेक्ट आर नॉट यह कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय हमारे पंचमहाभूत रूपी शरीर का भाग है किंतु मन और बुद्धि इसका भाग नहीं है दे आर इन व्ट इज कॉल्ड इन हिंदू फलो फिलोसोफी द फाइनर बॉडी एंड व्ट इन क्रिश्चियन थियोलॉजी यू रीड ऑफ इज द स्पिरिचुअल बॉडी ऑफ मैन पंचमहाभूत का बना हुआ बहीण यदि वेदांत की भाषा में कहा जाए तो बही हीक बाह्य करण अर्थात कि यह पंच महाभूत का शरीर मटेरियल बॉडी इसके भाग है यह पंच ज्ञानेंद्रिय और पंच कर्मेंद्रिय किंतु यह जो बुद्धि और मन इसको स्वामी जी कहते हैं कि हिंदू फिलोसोफी में फाइनर बॉडी कहते हैं और क्रिश्चियन थियोलॉजी में इसको स्पिरिचुअल बॉडी कहते हैं और वेदांत में कहेंगे तो अंतःकरण सूक्ष्म शरीर फाइनर बॉडी का यदि प्रॉपर ट्रांसलेशन होगा सूक्ष्म शरीर यह स्थूल शरीर है और सूक्ष्म शरीर है देखिए यह शब्द जो है हिंदुइज्म में ऐसा है कि आप कोई एक पार्टिकुलर स्कूल को पकड़ कि इसमें किस तरह से शब्दों को यूज किया गया है तो अब जैसे कि वेदांत की अब सांख्य फिलोसोफी है उसमें एक तरह की पार्टिकुलर टाइप की टर्मिनोलॉजी यूज की गई है वेदांत में एक डिफरेंट थोड़ी सी डिफरेंट टाइप की टर्मिनोलॉजी यूज की गई है बहुत सारी सिस्टम में फिर इस तरह से उनके खुद के खुद के शब्द होते हैं किंतु सभी लोग इस बात पर एग्री करते हैं कि स्थूल शरीर है एक सूक्ष्म शरीर है फिर सूक्ष्म शरीर को आप कितने ही पार्ट में उसको डिवाइड करें मन बुद्धि चित्त अहंकार कहे उसको अंतःकरण कहे इसके पीछे जो कारण कहे या फिर आत्मन कहे तो बहुत सारी टर्मिनोलॉजी के द्वारा आप इसको बता सकते हैं किंतु जो जिस बात पर सभी लोग एग्री करते हैं स्थूल शरीर अलग है सूक्ष्म शरीर अलग है और सूक्ष्म शरीर को चालित करने वाला आत्मन वो एक अलग है तो हिंदू धर्म के अनुसार तीन लेयर बनते हैं सबसे पहले तो है आत्मन उसके अंडर में आता है सूक्ष्म शरीर या तो अंतःकरण या फिर उसके अंडर में आता है स्थूल शरीर या तो फिर बही करण फाइनर वेरी मच फाइनर देन द बॉडी एंड यट नॉट द सोल दिस सोल इज बियोंड देम ऑल यह सूक्ष्म शरीर है यह स्थूल शरीर से तो बहुत ही ऊपर है किंतु फिर भी सूक्ष्म शरीर आत्मन नहीं है आत्मन इज अब एवरीथिंग एल्स द एक्सटर्नल बॉडी पेरिश इन अ फ्यू इयर्स एनी सिंपल कोज में डिस्टर्ब एंड डिस्ट्रॉय इट यह बाह्य शरीर है पंचमहाभूत का शरीर स्थूल शरीर कुछ सालों के बाद में उसका विनाश हो जाएगा कुछ सालों के बाद में वह भस्मी भूत हो जाएगा मिट्टी में मिल जाएगा कोई भी छोटी चीज इसको डिस्ट्रॉय कर सकती है डिस्टर्ब कर सकती है एनी सिंपल कोज में डिस्टर्ब ए एंड डिस्ट्रॉय इट छोटे-छोटे कोई भी कारण हो जिसकी वजह से अब जैसे रास्ते में चलते हुए कांटा लगा कांटा छोटा सा है किंतु हमको पूरा दिन भर वह परेशान करके रख देगा और यह तो छोटा सा एक उदाहरण है आजकल के पता नहीं किस तरह से विचित्र यह सब डिसीज चल रहे हैं अभी वह वायरल फ्लू ना कि क्या है वह कितनी ही दवाई लेने से भी नहीं मिटता ऐसा लोग कहते हैं य कोरोना का ही वो कोई म्यूटेशन है ना कि क्या है पता नहीं तो यह जो डिसीज का यह जो अंत एक के बाद एक डिसीस चलते रहते हैं एक्सीडेंट होता है क्या से क्या नहीं हो जाता छोटी-छोटी कोई भी चीज हमारे स्थूल शरीर को डिस्टर्ब कर देती है द फाइनर बॉडी इ नॉट सो इजली पेरिशेबल किंतु हमारा जो सूक्ष्म शरीर है वह इतना इजली इसका विनाश नहीं होता यट इट सम टाइम्स डिजनरेट्स एंड ट अदर टाइम्स बिकम स्ट्रंग सूक्ष्म शरीर का विनाश नहीं होता किंतु शरीर कभी-कभी कोई विकृति को प्राप्त होता है और कभी-कभी वह प्रचंड शक्तिमान भी हो जाता है दोनों चीज सूक्ष्म शरीर के साथ में होती है ऐसे काली महाराज के बारे में ऐसा जाहिर में बोलते नहीं है किंतु हम लोग आपस आपस में जद कभी डिस्कशन होता है तो ऐसा हम लोग में किसी सीनियर साधु से सुना था माने यस अनऑफिशियली कि काली महाराज ने अल्टीमेटली क्यों ऑर्डर छोड़ दिया तो पता नहीं कि ठाकुर की बातों को कितना ठीक से उन्होंने ग्रहण किया नहीं किया उनके मन में किसी तरह की विकृति आ गई थी और इसकी वजह से वह अपने को थोड़ा सा उनका अहंकार बढ़ गया था इसकी वजह से इतना आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होने के बाद में भी उन्होंने अल्टीमेटली ऑर्डर को छोड़ दिया तो यह सूक्ष्म शरीर के भीतर में विकृति आती है यह जिसका मन सूक्ष्म शरीर बहुत ही स्ट्रांग होता है वह बहुत ही अच्छा आदमी होगा जिसको कि गुड क्या अच्छा क्या है गलत क्या है यह मोरालिटी और एथिक्स की सेंस उसमें बड़ी ही स्ट्रांग होगी कभी अपनी नजरों के सामने वह अन्याय नहीं होने देगा और खुद तो कभी अन्याय करेगा ही नहीं क्यों क्योंकि उसका सूक्ष्म शरीर उसका अंतःकरण बड़ा ही स्ट्रांग है स्ट्र जिसको अंतःकरण की स्ट्रेंथ किसको कहेंगे एथिक्स और मोरालिटी को स्ट्रेंथ कहेंगे बहुत सारे लोग बोलते हैं कि अ इसकी स्मृति शक्ति बहुत अच्छी है या तो यह बहुत ही टैलेंटेड है या बहुत ही स्किलफुल है अर्थात कि इसकी इंटेलेक्ट बहुत ही अच्छी है तो इंटेलेक्ट का एक फंक्शन है हमारी लाइफ में जो कि अच्छा स्वाध्याय कर सकता है जो कि अच्छी स्मृति शक्ति है जो कि अच्छा बहुत अच्छा क्रिएटिव है अच्छे बड़े-बड़े साइंटिस्ट को देखेंगे कि बहुत अच्छे इनोवेशन करते हैं नई-नई डिस्कवरी कर लेते हैं तो उनकी मेथा शक्ति इतनी प्रचंड होती है तो आप कहेंगे कि क्या इससे ही इसका अंतःकरण या तो सूक्ष्म शरीर स्ट्रांग हो गया ओके कोई गलत नहीं है कि स्मृति अच्छा स्मृति शक्ति अच्छा होना क्रिएटिविटी अच्छा होना एक हार्ड वर्क करने की कैपेसिटी होना यह सब हमारे अंतःकरण के साथ में जुड़ा है आप देखेंगे वह जो अभी वो स्टीफन हॉकिंग वो एक साइंटिस्ट था ब्रिटेन में वो पैरालाइज हो गया था बचपन से ही उसको पैरालिसिस का रोग था फिर थोड़ा सा बड़ा हुआ बिल्कुल पैरालाइज हो गया है और वो व्हीलचेयर में बैठा है किंतु व्हील में बैठे-बैठे उसने इतनी अच्छी फिजिक्स की डिस्कवरीज नई नई वोह कर रहा था इतना अच्छा वो साइंस को समझ रहा था और लोगों के सामने प्रेजेंट कर रहा था उसने एक अच्छी किताब लिखी है ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम इस मिलियंस ऑफ कॉपी सोल्ड कि लोगों के सामने फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी कॉस्मोलॉजी के जो इतने कॉम्प्लिकेटेड आइडियाज है सरल भाषा में जनसाधारण के सामने कैसे रखना तो पूरा शरीर पैरालाइज हो गया है किंतु मन इतना स्ट्रांग है तो शरीर की शक्ति के साथ में मन की शक्ति का वैसे ऑफकोर्स होता ही है हमको तो पता है कि जब हम बीमार हो जाते हैं हम कितने डिप्रेसो जाते हैं कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती किंतु क्या है पता है दिस इज अवर माइंड प्लेइंग ट्रिक्स अपॉन अस मैंने अपना मन है ना अपने को भ्रमित करता है मन कहता है अरे आज बहुत ठंडी है उठने की जरूरत नहीं है अरे आज थोड़ा सा बुखार जैसा है बैठे रहो बढ़िया मजे से या तो फिर आज मुझे अच्छा नहीं आज मेरा मूड नहीं है आजकल की जनरेशन का देखेंगे आज मूड नहीं है मैं कार्य नहीं करूंगा तो यह मूड नहीं होना यह मेरा आज काम करने की इच्छा नहीं ये डिसिप्लिन हम नहीं मेंटेन कर सकते हैं अपनी लाइफ में यह अपना मन हमारे साथ में एक तरह का धोखा करता है एक तरह का हमके मन को भ्रमित करने का प्रयास करता है तो हमारा शरीर वह कहता है कि हमारा शरीर ठीक नहीं है या तो फिर हमारा शरीर हमारे लिए इतना इंपोर्टेंट है कि शरीर की डिमांड के अनुसार चलो किंतु हमको पता है जैसे स्टीफन हॉकिंग का उदाहरण है शरीर पूरा पैरालाइज है किंतु माइंड इतना स्ट्रांग है उसका मन या तो फिर अंतःकरण सूक्ष्म शरीर इतना स्ट्रांग है कि इस तरह की वह जिसको कहेंगे कि हैंडीकैप को भी वह अवज्ञा करके उसकी अवज्ञा करके वह अपने जीवन में सक्सेसफुल होता है वह जो पैरा ओलंपिक्स जिनको अभी अवार्ड मिला मैं देख रहा था न्यूज में वो प्रेसिडेंट हमारे इंडिया के प्रेसिडेंट ने उनको अवार्ड दिया तो देखिए कि वे लोग हैडी कप है जिनको कि दिव्यांग कहते हैं आजकल व दिव्यांग होने के बावजूद भी देखिए कि उनकी विल पावर कितना स्ट्रांग है कि जिस फील्ड में वह जाएंगे वह सक्सेस हो कर के दिखाएंगे तो ये कि हम लोग बहुत बार सोचते हैं कि यदि मेरा शरीर मुझे साथ नहीं देगा तो फिर मैं कुछ अपने जीवन में नहीं कर पाऊंगा किंतु सब समय याद रखना है कि सूक्ष्म शरीर का अपना खुद का एक डायनामिक्स है सूक्ष्म शरीर का अपना खुद का एक जीवन है यदि सूक्ष्म शरीर यानी कि अपना विल पावर अपनी मेधा शक्ति यह सबको स्ट्रांग करेंगे तो साथ-साथ में ही हम किसी भी क्षेत्र में सक्सेस होंगे किंतु साथ में एक बात याद रखनी है सूक्ष्म शरीर का सबसे बड़ा स्ट्रेंथ है एथिक्स और मोरालिटी नितर तो बहुत सारे साइंटिस्ट होते हैं भगवान ने उनको कितनी बुद्धि दी है किंतु ये लोग वेपंस डेवलप करते हैं वेपंस ऑफ मास डिस्ट्रक्शन कोई वो वायरस बनाएगा तो कोई एटम बम बनाएगा नथ कोई केमिकल वेपंस बनाएगा ना कि कोई क्या करेगा कोई कोई बहुत बड़े राजा होते हैं जैसे कि हिटलर है ना कि माओ है ना फिर यह स्टालिन है यह लोगों का देखिए कि कितनी बुद्धि शक्ति दी है बोलकर के इतने बड़े-बड़े इतने इंडस्ट्रियली एडवांस कंट्रीज के ऊपर में राज करते हैं किंतु फिर भी एथिक्स या तो फिर मोरालिटी इनके भीतर में नहीं है तो वह अपनी मेधा शक्ति का लोगों का सर्वनाश करने में इस्तेमाल करते हैं तो जब हम सूक्ष्म शरीर के बारे में बोलेंगे बात करेंगे सूक्ष्म शरीर की स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में बात करेंगे तो हमको यह बात खास याद रखना है कि दो तरह की स्ट्रेंथ और वीकनेस होती है एक तो एक मटेरियल िक टाइप की एक स्ट्रेंथ है जिसको कि हम क्रिएटिविटी कहेंगे या तो फिर जिसको कि हम मेमरी पावर कहेंगे या तो फिर लोगों को कंट्रोल में करने की लोगों को मोहित करने की एक शक्ति बड़े-बड़े जो राजनेता होते हैं वो बातें ऐसी करते हैं कि हजारों लोग जाकर के वो उनको वोट देते हैं वो इतने मोहित हो जाते हैं उनसे तो लोगों को मोहित करने की एक शक्ति यह सब मटेरियल िक टाइप की शक्तियां है मन की किंतु मन की जो स्पिरिचुअल टाइप की शक्ति है व्हिच इज मोर नियरर टू आत्मन मन की शक्तियों के बारे में कहेंगे तो एक टाइप की शक्ति है जो कि इंद्रियों की ओर जिसका ज्यादा झुकाव है इंद्रियों से उसको सब कुछ कार्य करना है और दूसरी है कि ये एथिक्स और मोरालिटी जिसका कि आत्मन की ओर ज्यादा झुकाव है तो जब स्वामी जी यह कहते हैं कि जैसे सुख स्थूल शरीर है उसको उसको तो कभी-कभी बीमारी हो जाएगी कभी-कभी वो उसको एक्सीडेंट हो जाएगा कभी-कभी इसका मृत्यु भी होगा कभी-कभी क्या इसका मृत्यु होता ही होता है तो यह सब स्थूल शरीर के साथ में होता रहेगा किंतु सूक्ष्म शरीर जो है इतना इजली डिस्ट्रॉय नहीं होता इतना इजली इसका विनाश नहीं होता किंतु हां सूक्ष्म शरीर के साथ में अप एंड डाउन होते रहते हैं इसकी भी स्ट्रेंथ है और इसकी भी वीकनेस है तो जब हम सूक्ष्म शरीर की स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में बात करेंगे तो मेनली इट इज अबाउट एथिक्स एंड मोरालिटी यम एंड नियम यह यम और नियम ही है जो कि हम क्योंकि आत्मन के तो सब ये है ना यदि हम आत्मन को स्वीकार ही नहीं करेंगे मटेरियल िक जिनका ये जो वो एक बहुत फेमस ऑथर है मैं उसका नाम भूल गया वह सब समय कहता रहता है कि देयर इज नो गॉड तो ईश्वर है ही नहीं ऐसा अथ जिनको कहते हैं अथ इजम अर्थात कि जो ईश्वर में विश्वास नहीं करते ऐसा नास्तिक वाद तो जैसा नास्तिक वाद फैलाने वालों का एक बहुत बड़ा दल है वो लोग बोलते हैं कि ईश्वर नहीं है आत्मन नहीं है जिनको कि दोनों मने जद ईश्वर नहीं है तो आत्मन भी नहीं है तो ना ईश्वर है ना आत्मन है तो फिर किंतु आप फिर तो जीवन का उद्देश्य क्या है माने ऋणम कृत्वा गतम पवे जैसे वो चार वाक फिलोसोफी है ऋण करके भी घी खाओ फिर बाद में हम मर जाएंगे तो ऋण जिसको देना है वो देंगे हमने तो अपना भोग कर लिया इंद्रियों के भोग के लिए अपना मैक्सिमाइज करने के लिए एंजॉय मैक्सिमाइज करने के लिए क्या जीवन बना है यदि आप ईश्वर या तो आत्मन को नहीं स्वीकारो ग तो एक्चुअली ईश्वर और आत्मन है बोलकर के हम लोग एथिक्स और मोरालिटी का पालन कर रहे हैं वरना व्हाई शुड आई बिकम नाइस टू माय फेलो बीइंग मेरा मित्र है उसके साथ में मैं अच्छा का बिहेवियर को क्यों करूं मैं अपने रूम अपने पूरा दिन भर में स्कूल में से या तो फिर बिजनेस या जॉब में से वापस आया हूं थका हुआ हूं मेरे पड़ोसी ने आकर के बोला कि अरे भाई मेरे पिताजी बहुत बीमार हो गए चलो मेरे साथ में हॉस्पिटल चलो थोड़ा हेल्प कर दो तो मेरा दिन भर का थकावट को भूल कर के मैं अपने मित्र के साथ में जाऊंगा हॉस्पिटल उसके पिताजी को हेल्प करने के लिए मैं ऐसा क्यों करूंगा यदि मेरे जीवन का कोई उद्देश्य यदि अपने सुख और उपभोग को ही उसका ही पूर्ति करना है तो किंतु हम सबको पता है इंस्टिंक्टिवली भले ही चाहे ईश्वर है नहीं है उसमें आप विश्वास करें ना करें दूसरों को हेल्प करना अपना कर्तव्य है सभी लोगों को मोर और लेस ये पता है है नहीं करेंगे ये अलग बात है पता है यह एकदम पक्का है तो पता क्यों है क्योंकि इसके भीतर में जो डिविटो है वो डिविह्ली यदि हम है तो कहेंगे कि इसके भीतर में वही ईश्वर की किरण ईश्वर की दिव्यता का प्रकाश है जो कि मेरे भीतर में है तो इसको हेल्प की जाए तो ये जो हायर प्रिंसिपल है स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर से ऊपर जाकर के एक कारण शरीर जो है वो है बोलकर कि यह सब कुछ चल रहा है वरना ये जो वेस्टर्न साइकोलॉजी जो फ फ्रोइडीटीईआरटी वासनाओं के भोग में यदि हम सतत हमको भोग करते रहने की सुविधा मिलती है तब तक हमारा मन खुश रहता है मन की खुशी और गम का क्या एक मात्र कारण है वासना है वासनाओं की पूर्ति होगी तब तक हमारा मन खुश रहेगा अपूर्ति होगी तो मन दुखी हो जाएगा अभी मन इन लोगों को हम कैसे समझाए कि आध्यात्मिक जीवन में वासनाओं की अपूर्ति करना ही जीवन का एक उद्देश्य है अभी मैं कल न्यू डिस्कवरी पढ़ रहा था तो स्वामी जी के अमेरिका के प्रवचनों और उनकी यात्राओं का विवरण तो क्या होता है वहां के न्यूज़पेपर होते हैं उनको तो एक सेंसेशन चाहिए तो अ कोई इतना बड़ा एक घंटे का डेढ़ घंटे का लेक्चर दिया उसमें से सबसे ज्यादा सेंसेशनल आइटम क्या है उसको निकाल कर के वो हेडलाइन बनाना है तभी तो लोग न्यूज़पेपर पढ़ेंगे तो अमेरिकन जर्नलिस्ट का ये एक बहुत ही एक इंस्टिंक्टिव सेंस रहता है कि किस तरह से सेंसेशनल वर्धी आइटम्स फट करके खोज के निकल दे तो स्वामी जीी ने पूरा एक घंटे का डेढ़ घंटे का कहीं लेक्चर दिया होगा उसका हेडलाइन बनाया आवर एम इज नॉट टू गो टू द हेवनस अभी देखिए कि क्रिश्चियन थियोलॉजी है वह सबको कहता फिरता है कि स्वर्ग में जाना हेवन में जाना मनुष्य जीवन का उद्देश्य है यदि अच्छा कार्य करेंगे तो हेवन में जाएंगे बुरा कार्य करेंगे तो हेल में जाएंगे नर्क में जाएंगे तो धर्म के पास में मनुष्य आता है हेवन में जाने के लिए नर्क से बचने के लिए पूरा क्रिश्चियन थियोलॉजी बना ही है इसके ऊपर में हाउ टू अवॉइड हेल एंड हाउ टू गो टू हेवन तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य स्वर्ग में जाना नहीं है मनुष्य के जीवन का उद्देश्य है अमरत्व प्राप्ति दिव्यता की प्राप्ति व्हिच इज बियोंड हेवन एंड हेल यदि आप पुण्य करेंगे स्वर्ग में जाएंगे तो क्षीण पुण्य मृत्य लोके विषतिंदुक प आ जाएंगे फिर से आप पुण्य करेंगे फिर से स्वर्ग लोक में जाएंगे या तो पाप करेंगे तो नर्क लोक में जाएंगे किंतु फिर नर्क का भोग खत्म हो गया पाप का तो फिर से मनुष्य पृथ्वी पर आ जाएंगे हमको तो पाप और पुण्य स्वर्ग और नर्क इन सबसे परे जाना है हमको तो यह मुक्ति या तो निर्वाण प्राप्त करना है तो स्वामी जी ऐसा कह रहे हैं तो उनमें स्वामी जी स्वामी जी भी ऐसे स्वामी जी का भी इन लोगों को पढ़ के पढ़ के वो सेंस हो गया था कि किस तरह से सेंसेशनल स्टेटमेंट दिए जाए तो स्वामी जी ने भी स्टेज के ऊपर से बोल दिया अवर एम इज नॉट टू गो टू हेवन स्वर्ग में जाना हमारा धय नहीं है हमारा ध माने ये जब क्रिश्चियन लोग पढ़ेंगे हमको तो इतना ज्यादा कुछ ये नहीं होता ज क्रिश्चन लोग पढ़ेंगे वो लोग इतने मतलब भड़क जाएंगे या तो फिर इतने आश्चर्य चकित हो जाएंगे अरे ये क्या कह रहा है ये किस तरह का धर्म है जो कहता है कि स्वर्ग में नहीं जाना तो क्या नर्क में जाना है ऐसा नहीं लिखा फिर बाद में कि स्वर्ग और नर्क से परे जाना है हेडलाइन ऐसा लगाया है कि स्वर्ग में नहीं जाना है तो नेचरली जिसने वेदांत नहीं पढ़ा उसका तो यही मन में होगा कि क्या हमको नर में जाना है क्या नर्क में जाना उद्देश्य है क्या कह क्या रहा है पढ़ो तो मने क्यूरियोसिटी इतनी एक्टिव हो जाएगी तो फिर वो आगे पढ़ने के लिए सोचेगा कि अच्छा अच्छा देखते हैं कि व क्या कहते हैं यदि नर्क में जाने को बोलते हैं तो हमको तो प्रोटेस्ट करना होगा ऐसा बोल कर के मैंने क्या है ना कि लोगों को किस तरह से वो एक्टिव करना लोगों को किस तरह से क्या कहेंगे कि इनकरेज करना या तो एनरेज करना ये मने भड़काना लोगों को ये मैंने स्वामी जी को भी पता था और वहां के वो न्यूजपेपर वालों को पता था तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि मन जो है मन बुद्धि चित्त अहंकार चित्त और अहंकार का स्वामी जी ने यूज नहीं किया किंतु मन बुद्धि चित्त अहंकार मिलकर केय सूक्ष्म शरीर होता है सूक्ष्म शरीर की चढ़ती और पड़ती होती रहती है कभी प्लस और कभी माइनस किंतु स्ट्रेंथ इज जिसको कहेंगे दैट इज एथिक्स एंड मोरालिटी नहीं कि बाकी सब स्ट्रेंथ है नहीं है ऐसा नहीं है मेदा शक्ति क्यूरियोसिटी वो सब स्ट्रेंथ है किंतु देर इज हायर टाइप ऑफ स्ट्रेंथ दैट इज टू यम एंड नियम बी गुड एंड डू गुड जिसको कि हम आजकल वो सूत्र बद्ध करके वो करते हैं ना इस बी गुड एंड डू गुड दिस इज द रियल स्ट्रेंथ ऑफ द स्थूल शरीर वी सी हाउ इन द ओल्ड मैन द माइंड लूजस स्ट्रेंथ हाउ व्हेन द बॉडी इज विगर अस द माइंड बिकम विगर अस हाउ वेरियस मेडिसिंस एंड ड्रग्स अफेक्ट इट हाउ एवरीथिंग एक्सटर्नल एक्ट्स ऑन इट एंड हाउ इट रिएक्ट्स ऑन द एक्सटर्नल वर्ल्ड आज का जो मॉडर्न युग में मन को लेकर के कॉन्शसनेस को लेकर के जो चिंतन है जो भावधारानी ने एक ही सेंटेंस में हमको यहां पर बता दिया शरीर की शक्ति होती है तब हमारा मन उत्साह में रहता है शरीर जब बिगड़ बीमार हो जाता है या शरीर जब निर्बल हो जाता है या तो वृद्ध हो जाता है तब मन की शक्तियां मन का वह जो रेसिलियंस य उह वगैरह भी ठंडा हो जाता है और आजकल लोगों को मन को यह करने के लिए प्रसन्न करने के लिए प्रफुल्ल करने के लिए मन को इनकरेज करने के लिए यह ड्रग्स वगैरह का इस्तेमाल होता है स्वामी जी अभी से कहते हैं कि हाउ वेरियस मेडिसिंस एंड ड्रग्स अफेक्टेड डिफरेंट डिफरेंट तरह की औषधियां या तो फिर यह ड्रग्स मन को कैसे अफेक्ट करती है हमने देखा है हाउ एवरीथिंग एक्सटर्नल एक्ट्स ऑन इट एंड हाउ इट रिट ऑन द एक्सटर्नल वर्ल्ड बाह्य जगत में जो कुछ भी हो रहा है इसका मन पर क्या असर होता है और किस तरह से मन इंटर्न रिएक्ट्स न्यूजपेपर पढ़ लिया ऐसी कोई बात पढ़ ली कि भारत का क्रिकेट में किसी के साथ बहुत बड़ी क्रिकेट टीम क्रिकेट मैच चल रही है इसमें हम जीत गए हम बड़े ही खुश हो गए किंतु जैसे हार गए हम बड़े ही निराश हो गए अभी वो कहां पर वो 11 और 11 प्लस आदमी लोग खेल रहे हैं स्पोर्ट्समैन क्रिकेटर्स और कहां पर मैं बैठा हूं कहां पर वह किस तरह से मेरे मन पर असर हो रहा है और किस तरह से फिर मैं रिएक्ट करता हूं मैंने ऐसे वो एक किसी कभी ने बहुत पहले बहुत पहले एक वीडियो भेजा था वो किसी की टीम हार गई नेशनल टीम तो एक एक आदमी ने क्या कहा किया जोर से उसने टीवी ही तोड़ दिया इस टीवी के मने वो अपने वो प्लेयर्स को साथ में जाकर के तो झगड़ा नहीं कर सकता जो सामने आया उसके ऊपर में अपना गुस्सा निकाल दिया तो सामने टीवी था तो टीवी तोड़ दिया तो किस तरह से क्रिकेट मैच का उसके मन पर असर हुआ और किस तरह से मन ने इंटर्न अब अपना गुस्सा निकाला तो फिर अपने मन को ठीक रखने के लिए बहुत सारे लोग अभी यह जो साइको एक्टिव ड्रग्स जिनको कहते हैं ये हेरोइन है वगैरह वगैरह बहुत टाइप की वो साइको एक्टिव ड्रग्स है अब निराश है आप डिप्रेशन में है या तो फिर आपको कोई एक एक्सटिक अनुभव करना है एक्सटिक एक्सपीरियंस करना है तो पार्टिकुलर टाइप की साइको एक्टिव ड्रग्स लीजिए आपको कोई एक ये जो 60 और 70 में ये हिप्पी यह सब जो चला था मूवमेंट अमेरिका में बहुत सारे लोग वेदांत को मने ईस्टर्न फिलोसोफी और ये ड्रग्स इस तरह से उन्होंने एक मिक्सचर किया था बहुत सारे लोग ड्रग्स भी लेते थे इंडिया में भी आते थे और इंडिया में जाकर के हिमालय में जाकर के किसी योगी और बाबा को खोजते रहते थे सबसे फेमस इसमें कहा जाए तो बीटल्स थे बीटल्स वन ऑफ द ग्रेटेस्ट टेस्ट पॉप सिंगर्स इन दैट टाइम बहुत फेमस वो पॉप सिंगर थे और फिर यह जो स्टीव जॉब्स माया एल का फाउंडर ऐसे बहुत सारे लोग जो कि बहुत ही प्रोमिन पोजीशन में थे या प्रचंड मेदा शक्ति थी जिन लोगों में अपने अपने क्षेत्र में सबसे अव्वल नंबर पर पहुंचे हैं वे लोग भी ड्रग्स लेते थे और वे लोग भी इंडिया करके स्पिरिचुअलिटी खोजने का प्रयास करते थे तो ये माइंड अल्टरिंग एक्सपीरियंस जिसको कहा जाता है साइकोलॉजी में कि किस तरह से माइंड अल्टरिंग एक्सपीरियंस किया जाए क्योंकि किसी को डिप्रेशन पसंद नहीं है बाहर में जो कुछ भी हो रहा है इजली हमारे मन को डिप्रेसो डिप्रेसो ज्यादा देर नहीं होती छोटी-छोटी बातों में हम फटाक करके डिप्रेसो जाते हैं शरीर आघात आहत हो जाता है इंजर्ड हो जाता है छोटे-छोटे एक्सीडेंट से और मन जो है छोटी-छोटी बातों से डिप्रेसो जाता है या तो डिप्रेसो जाएगा या तो क्रोधित हो जाएगा या तो फिर कामुख हो जाएगा मन के साथ में यह सब प्रॉब्लम है शरीर के साथ साथ में ये प्रॉब्लम है यह बाहर का पूरा विश्व और शरीर किस तरह से मन को चालित करते हैं और मन इन टर्न किस तरह से रिएक्ट करता है यह पूरा जोने साइकोलॉजी है इसको स्वामी जी हमको समझा रहे है तो वो जो कॉस्मो मैक्रो कजम हमको पूरा एस्ट्रोनॉमी कॉस्मोलॉजी समझाया और यहां कॉस्मो माइक्रो कजम हमारे भीतर का जो यूनिवर्स है हमारे भीतर का जो कॉस्मस है उसको स्वामी जी साइकोलॉजी के रूप में हमको समझा रहे हैं तो आज यही त कल फिर से मिलते हैं ओ शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु