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Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna : Life and Teachings : English & Hindi : 24 Jan 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda

जय मैन ओम संस्था का धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठ आयो रामकृष्ण यत नमः विव रीडिंग डी remination सर ऑफ स्वामी adbhutanand जी महाराज लाडो महाराज बट नाउ हिज remination सर रोवर आई थिंक यस्टरडे सी रीड डी लास्ट रेमेडीज एंड ओके वैन लास्ट रीमेंस डेट वैन दे वैन ऑफ डी disciplementing सो डी ठाकुर हेड लेफ्ट अस ऑफ कोर्स डिसाइडेड डेट दे हैव अन रिट्रीट इन रामबाबू हेड रिट्रीट इन kapdgachi दे विल प्ले ठाकुर्स रीमेंस हिज अस्थिर एंड डियर दे विल वरशिप ठाकुर बट व्हाट अबाउट दिस यंग बॉयज दे कैन नोट गो तू कद एंड स्टे की हाउसहोल्डर डिसीप्लस सो विद दिस बॉयज इट वाज इट डिफिकल्ट मैटर सो वैन ऑफ डी मस्ट हैव बिन एंट्री सो लेटर ऑन हो ठाकुर कम गिव डी विज़न तू सुरेश मित्र एंड आस्क हिम तू स्टार्टेड बट फॉर दिस बॉयज अन सेपरेट मठ फॉर बॉयज एंड डी सेपरेट रिट्रीट फॉर householdering डिसाइडेड सो इन ड्यूरिंग इन बिटवीन आपको रिसेट एंड mahasammati लिविंग अस ऑल अलोन इन दिस वर्ल्ड सो व्हेन दिस desaipal सईद डेट laatoma रेसिस ला तू मारा जो शोक ये वो सरप्राइज्ड हो कैन ए डिसीप्ल ऑफ ठाकुर से लेट ठाकुर हे लेफ्ट अस अलोन हो कैन अन डिसीप्ल ऑफ ठाकुर से लेट ठाकुर एवर नेवर तू लुक बैक फॉर अस नेवर तू वेरीफाई फॉर अस सो ला टॉम हर दिस रिमार्क एंड सईद ठाकुर इस डेड तू स्केप्टिक्स बट अलाइव तू ठोस हु बिलीव इन हिम अर्थात डेट मेंस डेट डोज तू डू नॉट बिलीव इन डिवाइन अवतार फूड ऑफ ठाकुर ठाकुर जय राम जय कृष्ण श्री राम कृष्ण डी वैन हु वाज राम डी वैन हु वाज कृष्ण इस हर इन डी फॉर्म ऑफ श्री राम कृष्ण सो ठाकुर हिमसेल्फ हिट बट इफ यू डोंट बिलीव हिम डेट ना इंस्पीते ऑफ बीइंग दी से अवतार ओवर डी से अवतार हु वाज कृष्ण ठाकुर जस्ट लाइक अन मोर्टल मैन एंड वुमेन हो कैन सी ट्रस्ट हो कैन सी लाइव दिस नौ बिलीव था ठाकुर वास अवतार फॉर होम स्टेट बट ठोस हु बिलीव इट ठाकुर ही इस तिल अलाइव अमोंग उस लिविंग विथ अस टेकिंग केयर ऑफर्स लुकिंग आफ्टर अस एंड गाइडिंग एवरी स्टेट ऑफ अवर लाइफ बट अलाइव तू ठोसे हो बिलीव इन हिम डोंट यू रिमेंबर डेट ही अपर तू होली मदर व्हेन यू हैव डेट काइंड ऑफ बेयर तू यू अलसो हज फड़े इन ठाकुरजी स्ट्रांगेस्ट इट वाज डी मा शारदा स्पेस मैन शारदा डी मोमेंट सी वाज ट्राईंग तू रिमूव हर ब्रेसलेट ठाकुर अपीयर्ड एंड सेड डेट अमी gateshi को था एंड वेयर हैव आई गान फ्रॉम वैन रूम तू अंदर रूम सो मदर हेड डेट ग्रेट दें ठाकुर विल अपर तू अस अलसो एंड सी नो देयर इस दिस इस फॉर अन फैक्ट डेट आफ्टर अन फ़्यू डेज़ समाधि व्हेन नरेंद्र सैम ऑफ यू ए थर्ड डिसीप्ल गार्डन हाउस तिल ओनली मोस्ट प्रोबेबली एक्सपायरी ऑन 30 अगस्त तू विजिट डी काशीपुर एवरी दे सो वैन इवनिंग व्हेन नरेंद्र एंड सैम आदर डिसीप्ल वॉकिंग ऑन डी गार्डन ऑफ काशीपुर sadanasionally नरेंद्र शो डेट सैम वैन लाइक ठाकुर स्टैंडिंग ऑफ यू फीड आवे फ्रॉम हिम असम डिस्टेंस आवे फ्रॉम हिम डी सुद्दनली रेंट तू हिम डेट तू सी हु इस इट इस इट रियली अन पुर और समवन एल्स बट बाय डी टाइम द एप्रोच दिस मिस्टीरियस फिगर डेट फिगर हेड डिसएप्ल दिस पर्सन हु लुक डी लाइक ठाकुर हिट डेज़ अपर सो नरेन सेस डेट यस आई हेड ऑफिशल लाइव प्राइवेट लिटिल ट्रबल इन डी लाइफ इन चैलेंज देयर फेसिंग दे वुड कम तू प्रेमानंद जी महाराज एंड प्रेमानंद जी महाराज विल टॉक तू डी एंड दे वुड फुल आलोट ऑफ पीस एंड सी नो डेट इनिशियली प्रेमानंद जी महाराज डिस्टेंस एक्सेप्ट स्वामी सच आत्माराम mokshatam जगत हिताची डट जगत हटाया च और कर्म योग इसे अन लेजिटीमेट वे ऑफ अटेनिंग ब्रह्मज्ञान दी स्टिचिंग वाज अन बिग डिफिकल्ट फॉर बाबूराम महाराज तू ग्रास सो ही हिमसेल्फ सेस डेट इट वाज इन काशी इन 1911 डेट ही रेड स्वामी जिस कंप्लीट शब्द वेरी थारो एंड देन ही वास कन्वींस डी वाटेवर स्वामीजी है सेड इट इस ट्रू इट इस नेसेसरी फॉर दिस आगे बिकॉज मेथड ऑफ अटेंडिंग फ्रॉम अगेन सी हैव तू गो ऑन डूइंग दिस ट्रेडिशनल वे ऑफ साधना दिस इसे तपस्या सत्य ब्रह्मचर्य वेरी austrious लाइव विच इस बेस्ट ऑन तपस्या बेस्ट ऑन डेनियल ऑफ सेंट्रल प्लेजर बट बाबू राम महाराज आफ्टर सो में इयर्स अप तू 1911 डेट मिंस आफ्टर 20-25 इयर्स ये रिलाइज डेट डी बॉयज हु आर कमिंग तू बिकम मोंक देर इंस्पायर्ड बाय स्वामी जी दे आर इंस्पायर्ड की रीडिंग ठाकुर्स लाइफ एंड अलसो बाय डी लाइफ ऑफ दिस डायरेक्ट डिसीप्लस धीम सेल्स वेयर दे आर कमिंग तू बैलून मठ दे डू नॉट हैव डी स्ट्रांग फाउंडेशन इन कैरक्टर एंड इन तपस्या इट इस नॉट पॉसिबल फॉर डेम तू तू मच डी फर्स्ट इयर इस दिस डायरेक्ट disciphers डेट सो लेटर ऑन बाबूराम महाराज रिलाइज डेट फॉर दिस न्यू बॉयज एंड स्पेशली फॉर एवरीवन टुडे तपस्या इस मतलब हार्ड डी फर्स्ट तो फोर्थ से डी पथ इस कर्म डी सर्विस ऑफ मैन इसे इन लुकिंग अत डेम इसे गोद तू सी गोद इन में एंड तू सर्व डेम दिस इस डी पथ फॉर टुडेज बॉयज दिस बाबूराव महाराज लेटर ऑन रिलीज एंड ही डेडीकेटेड हिज लाइव तू डी batorment ऑफ बेलूर मठ सो दिस इसे डी बेसिक बैकग्राउंड ऑफ बाबू राम महाराज स्वामी प्रेमानंद लाइफ सो स्वामी ब्रह्मानंद आई वेट तू दिस इस डी डिस्क्रिप्शन बाबूराम महाराज गिव्स ऑफिस मीटिंग विच के रामकृष्ण आई थिंक इट वास डी फर्स्ट मीटिंग सो बाबूराम महाराज रखा फर्स्ट प्रेसिडेंट ऑफ बेलूर मठ इन ठाकुर्स मानस पुत्र स्वामी ब्रह्मानंद एंड आई वेट तू हर्ट खोला घाट इन्वेस्ट कोलकाता तू टेक ए बॉक्स फॉर दक्षिणेश्वर राम दयाल बाबू ही वाज अंडी वोटिंग लर्निंग डेट ही वाज अलसो गोइंग तू श्री श्री राम कृष्ण सी गो इन अन बोट टुगेदर इट वास ऑलमोस्ट डक वन सी रीच रानी rashmonies काली टेंपल इस गान तू डी टेंपल ऑफ महाकाली तू ऑफर अध्य वेटेड फॉर हिम एंड सन बाबूराव marases डिड सन आय सो हिम होल्डिंग ऑन तू मास्टर वेरी केयरफुली स्वामी ब्राह्मण टुवर्ड्स माय मदर टेंपल तू फाइंड ठाकुर सन आय सो हिम स्वामी ब्रह्मानंद राजा महाराजा होल्डिंग ऑन तू ठाकुर वेरी केयरफुली रिटर्निंग विथ ठाकुर होल्डिंग हिम वेरी केयरफुली encirding सेइंग दिस आर डी स्टेप्स यू हैव तू टेक वैन स्टेप हर टेक अन स्टेप हर इट शेर वेरी फनी इंसीडेंट ठाकुर व्हेन एवर ही वाज इन भर व्हेन एवर ही हेड अन विज़न ऑफ मदर काली ही वुडन ही वुड बिकम लाइक हिज ड्रंक विज नॉट ड्रंक पीपल व्हाट हैपेंस विद देयर नॉट सी प्रॉपर्ली दे कनॉट वॉक प्रॉपर्ली लाइक अन ईयर ओल्ड बॉय व्हाट हैपेंस विद दिस टॉडलर्स दिस सो व्हेनेवर ठाकुर हेड ऑफ विज़न ऑफ मदर काली ही वुड बिहेव ही वुड बिकम जस्ट लाइक अन बेबी जस्ट लाइक अन टॉडलर ही वुडलैंड बी एबल तू वॉक प्रॉपर्ली बिकॉज ही इस हार्ट एंड हिज माइंड इस सो फुल सो फिल्ड की डिवाइन जॉय डेट यू नो डेट कंसीडरेशन ऑफ दिस वर्ल्ड वेयर एम आई व्हाट एम आई डूइंग हो एम आई एवरीथिंग विल गो आवे एंड ही विल बी पंच चित्रण ऐसी हेयर स्ट्रिंग सो मच सो फुल ऑफ दिस डिवाइन नशा दिस डिवाइस यू हैव तू टेक वैन स्टेप हर यू हैव तू टेक सेकंड स्टेप हर डीज आर डी स्टेप दिस आर डी केस यू टेक वैन स्टेप ऑन डी फर्स्ट स्टेप्स टेक डी सेकंड स्टेप ऑन डी सेकंड स्टेप लाइक दिस दे विल हैव तू गेट एंड व्हेन अन पर्सन हु प्रेजेंट नो एनीथिंग अबाउट ठाकुर ही वुड थिंक डेट ठाकुर मस्ट हैव ड्रिंक सो मच सो मच बेयर डेट नौ ही इस माइंड इस कंपलीटली क्लाउड इट बट ऑफर्स पर्सन हु इस ड्रंक सी कैन सी ही इस फेस एंड सी कैन सी ही स्कूल ऑफ तमस ऑन डी आदर एंड वन सी सी ठाकुर स्पेस सी कैन सी डेट लाइट ऑफलाइन जॉय इस शाइनिंग अपॉन हिम ही इसे अन पर्सन फुल ऑफ सी नो डेट ऑफ थ्री क्वालिटीज ऑफ माइंड राजस एंड व्हाट इसे डी मोस्ट डार्कनेस ऑल डी सेंशुअल दिस हज ऑल कम क्रोध मैड लोभ मोह ऑल दिस यू नो डेमोनिक डिसीसिस डिड मेनिफेस्ट थेम्सेल्वेस इसे अन क्वालिटी ऑफ तमस राजस इस एक्टिविटी इंटेंस एक्टिविटी डी स्वामीजी हिमसेल्फ ग्रेटली राज्यपाल बट हिज रजिस्टर उपेक्षा दें दिस लाइट ऑफ चोर एक शाइन एसपी manifes इस डी क्वालिटी ऑफ सो अन ड्रंक पर्सन व्हेन सी सी हिम ही इसे वर्किंग वेरी अनस्टेडिल्य सी कैन अंडरस्टैंड ही इसे अन पर्सन फिल विद डी मास एंड पर्सन हु इसे हु इसे डी सान्या हु हु इसे डी सेंट हु इस ट्रू डायवोर्स व्हेन हिज पंच ड्रंक इन डी वाइन ऑफ गोद सी कैन सी डी लाइट ऑफ dibinity शाइनी अपॉन हिम डेट वेयर सी कैन डिस्टर्ब एंड बाबूराव marases डेट अन आई ही ऑलरेडी न्यू डी ठाकुर हेड दिस विजंस एंड आफ्टर हिज विजंस यू वुड बी हर ड्रंक ओर हिज इट टोटल आई हेड ऑलरेडी हर्ट डी ठाकुर वुड ओपन बिकम overwell विद एक्सटेसी एंड लॉस आउटर कॉन्शसनेस देयर फॉर आई न्यू डेट ही वाज इनन एक्सटेटिक मोड व्हेन आई सो हिम कमिंग रेलिंग लाइक इट ड्रंकन मैन बाबूराव मारा सेस डेट आई न्यू ऑल अबाउट हिम एंड आई न्यू डेट ही इसे नॉट ड्रंक ही इस नॉट अन ड्रंकार्ड हिज पर्सन हु इसे इन दीप एक्सटेसी ऑफ डिवाइन जॉय ही इंटर डी रूम ओके थिस मच फॉर टुडे टुमारो वे विल कंटिन्यू विद अवर इंग्लिश क्लास

श्रीरामकृष्ण कथामृत : द्वितीय दर्शन

डी नाम हिंदी में बचाना मृत नाम है किंतु हमको पता है की ओरिजिनल नाम तो कथामृत है इसलिए मैं कथामृत के नाम से ही इसको चला रहा हूं अच्छा तो द्वितीया दर्शन के बारे में कल हमने पढ़ा किस तरह से हमने ये भी देखा की किस तरह से एक बहुत ही सुंदर स्थल है कालीबाड़ी गंगा के किनारे हैं वहां पे आप जैसे ही कोलकाता से गंगा की ओर जाएंगे गंगा में सवार होकर के काली मंदिर की ओर जाएंगे दक्षिणेश्वर तो देखेंगे की गंगा के किनारे ही पहले चांदनी बोलकर के घाट द जहां पर लोग स्नान करते हैं कपड़े धोते हैं ब्राह्मण लोग बैठकर के वंदना संध्या वंदना करते हैं बहुत ही सुंदर स्थल बनता है उसके बाद में ही 12 शिव मंदिर है जिसके भीतर में भगवान शिव का एक शिवलिंग रखा हुआ है और यह चांदनी और 12 शिवलिंग पार करके जब आप कालीबाड़ी का जो बड़ा सा चौहान है उसमें प्रवेश करेंगे तो देखेंगे सामने ही एक बड़ा ही सुंदर विस्तृत काली मंदिर है मैन काली बहुत रिनी थी वहां पे पूजा होती है काली के मंदिर के एक साइड में है उन राइट हैंड साइड वो जो जहां पे सब लोग वेट करके वो ठाकुर काली मंदिर में makadarshan कर सकते हैं या तो फिर वहां पे बैठ करके कीर्तन कर सकते हैं फिर उनकी लेफ्ट हैंड साइड है राधाकांत का मंदिर जहां पे जुगल मूर्ति राधा और कृष्ण की पूजा होती है और इसके बाद में ही लेफ्ट हैंड साइड में आप और आगे जाएंगे तो देखेंगे की वहां पे ठाकुर का कमरा है और ठाकुर के कमरे से आगे और आगे जाएंगे तो वहां पे मोहब्बत है जहां पर मैन रहती है और मोहब्बत से भी आगे जाएंगे तो वहां पे पंचवटी है जहां पर ठाकुर ने साधना की थी पंचवटी के पीछे में ही हंस कुकुर है और हंस कुकुर से थोड़े से आगे जाएंगे तो वो है बेलतला जहां जिसके नीचे ठाकुर ने तन की साधना की थी तो यह है पूरा काली वादी का एक ले आउट और इसके भीतर में ठाकुर रहते हैं ज्यादातर भक्त जो लोग ठाकुर को मिलने के लिए आएंगे कोलकाता से वे लोग या तो नौका में आएंगे या तो घोड़ा गाड़ी में आएंगे ज्यादातर नोखा में आते हैं तो जो भी हो आएंगे मैन काली के मंदिर में जाएंगे दर्शन करेंगे ठाकुर के कमरे में आएंगे ठाकुर की बात सुनेंगे हो तो थोड़ा सा समय यदि रहता है तो कालीबाड़ी में थोड़ा सा tahalenge गंजा के किनारे जहां पे वो गंगा का किनारा है बहुत ही सुंदर चलने के लिए एक रास्ता है फुटपाथ है वहां पे आप टहल सकते हैं एक साइड में गंगा है दूसरी साइड में कालीबाड़ी है एक बहुत ही खुशनुमा एक दृश्य बनता है और जब ठाकुर वहां पर द तब ठाकुर के बहुत सारे शिष्य वहां पर रहते द और रात होने से या तो फिर पंचवटी में है या तो फिर गंगा के किनारे है या तो जब मैन नहीं रहती थी तब मोहब्बत में है वहां पर कहीं पर बैठकर के दूसरे लोग साधन भजन करते द ठाकुर ने जैसे सिखाया है इस तरह से वह लोग या तो अपने किसी एक इश्क देवता का स्मरण करते द या फिर ध्यान करने की कोशिश करते द अपने हृदय में आत्मन को स्थित कर गए तो यह शत चक्र जो है तो अपने हृदय में जो स्थित चक्र है उसके ऊपर तो इस तरह से और फिर वहां पर संध्या के समय आरती होती है शंकर घंटा नींद वो सब बचत है हमने पहले प्रथम दर्शन में देखा की किस तरह ठाकुर मास्टर जब ठाकुर को पहली बार मिलने के लिए तब उन्होंने देखा की जैसे ही ठाकुर के साथ में बात करके बाहर ए रहा है वैसे ही आरती का आयोजन हो रहा है आरती हो रही है मतलब पहला दर्शन ही कितना सुंदर होगा की पहले ठाकुर के साथ बात की और फिर आरती सुनने को मिली आरती का दर्शन करने को मिला अभी द्वितीया दर्शन के बारे में हमने देखा और कैसे ठाकुर उनको सब कुछ रहे हैं की भाई तुम्हारे घर में कौन है क्या है कहां से रहते हो बगैर तो और बाद में ठाकुर केशव सिंह के वी खबर लेते हैं की हान केशव बीमार है ऐसा मैंने सुना है और इसके लिए मैं मैन सिद्धेश्वरी के पास में नारी और shasaker मतलब चीनी की मन्नत राखी है अभी इसके आगे ठाकुर क्या कहते हैं ठाकुर को लगता है की शायद जो है मास्टर महाशय के मैन में ऐसी कोई बात है की वो संसार त्याग कर ले तो इसके लिए ही वह पहले दर्शन में ही जब ठाकुर ने कहा है की संसार त्याग कब करना है जब आंखों में से आंसू आने लगे जितनी बार आप ईश्वर का नाम लेते हैं तब संसार त्याग समझ रहता है उसके अलावा यदि आप जोर जबरदस्ती संसार त्याग करेंगे तो आपको भी कष्ट होगा बाद में और आपके परिवारजनों को भी कष्ट होगा तो उसी मैंने उसी टॉपिक को आगे बढ़ते ठाकुर कहते हैं की प्रताप का भाई आया था प्रताप एक होगा कम कुछ है नहीं कहता है मैं यहां पर रहूंगा माने वह घर में कोई प्रॉब्लम होगा डोमेस्टिक समस्या कोई होगी तो वह बोलता है की घर में रहूंगा कालीबाड़ी में ठाकुर के पास रहूंगा वो मार्केट वही रह गया माने वो इस तरह का वेरा गया की कोई तकलीफ होने से ए जाता है तकलीफ चले जानी से वैराग्य भी चला जाता है तो वो कहता है की अभी वो मेरे घर में कोई प्रॉब्लम ऐसा बोलता तो नहीं है की घर में प्रॉब्लम है किंतु ऐसा ही कुछ होगा तो आके बोलता है मैं ठाकुर आपके पास रहूंगा कालीबाड़ी में फिर ठाकुर कहते हैं की और किसी से सुना की उसकी बीवी बच्चे जो है उसको ससुराल भेज दिया है वो बहुत सारे बच्चे भी हैं तो यह सुनकर के ठाकुर कहते हैं मैंने उसको खूब दांत भला देखो तो लड़के बच्चे हुए हैं उनकी देख रहे उनका पालन पोषण तुम ना करोगे तो क्या कोई दूसरे गांव वाले आके करेंगे पड़ोसी लोग करेंगे क्या शर्मा नहीं आती बीवी बच्चों को ससुर के यहां रख दिया है उन्हें कोई और पाल रहा है इस तरह से बहुत दांत और कामकाज खोज लेने को कहा तब यहां से गया इस तरह से मार्केट वैराग्य वालों की फौज एक तैयार करके एक तामसिक लोगों को सन्यासी बनाकर के हमने जो भारत में धर्म का सबसे बड़ा नुकसान किया है स्वामी जी कहते हैं ना की भारत का ये जो आधार पाटन कब हुआ की बुद्धि से आप हिंदू मतलब अमली जो वैदिक परंपरा है ये जो ब्राह्मण परंपरा है उसमें क्या होता है की ब्राह्मण है फिर क्षत्रिय है फिर वैश्य है और शुद्र है शुद्र का अर्थात ये नहीं की वो निम्न जाती का है अर्थात उसका जो ऑक्यूपेशन है उसका जो कार्य है कर्म है उसका वो खेती वगैरा ये जो मैन्युअल वर्क है वो करेंगे जो ट्रेडिंग है ये फाइनेंस है ये सब चीजों के ख्याल रखेंगे मैंने वो सब कम करेंगे ब्राह्मण जो है विद्या प्रयास लेकर रहेगा वेदों का अभ्यास लेकर रहेगा वेद सिखाएगा और क्षत्रिय जो है वो प्रजा का पालन करेंगे किसी आर्मी वगैरा वह क्षत्रियों के हाथ में तो यह पुरी वर्ण व्यवस्था है सबके लिए समाज में सबका स्थान है और ब्राह्मण का लड़का यदि उसके भीतर में क्षत्रियों चित गुण है तो वो क्षत्रिय हो सकता है यदि उसका माइंड जो है बहुत ही मंद तर्क का है मंद प्रकृति का है तो उसके लिए बटोर है की वो वैश्य या शुद्र का कम कर है ये अर्थात ये ब्राह्मण का लड़का ही ब्राह्मण होगा वैश्य का लड़का वेश्या ही हो सकता है ये सब तो बहुत बाद में आया जब इस्लामिक आक्रमण शुरू हुए उसे समय हिंदू समाज को अपने रक्षण करने के लिए समाज को बिल्कुल ही कुंठित कर देना पड़ा तो ये उसे समय की बात है पहले वैश्य का लड़का है या शुद्र का लड़का है उसके भीतर में संस्कार अच्छे दिखने से वो वेद का अभ्यास भी कर सकता था और चेन्नई धारण करके ब्राह्मण भी हो सकता था या तो फिर उसमें बाहुबली और वह जो है वो तेज एक उसका प्रजा पालन या तो shtriytva का भी वह गुण धारण कर सकता था तो यह पहले की बात है तो यहां पर भी क्या है की इस तरह से हिंदू समाज बहुत ही सुचारु रूप से चल रहा था किंतु उसे समय हिंदू समाज में कुछ ना कुछ तो तकलीफ हुई होंगी कुछ ना कुछ तो चैलेंज होंगी होंगी इसलिए तो भगवान बुद्ध को आना पड़ा ये जो पशु बाली है फिर ये ब्राह्मण लोगों का कुछ-कुछ मतलब इनके जो नीति नियम इस तरह से होने लगे द आखिर आखिर में इस समाज को शायद थोड़ी बहुत उसके मतलब हिट हो सकता था उसे समय भगवान बुद्ध आए और कहा की ये जो पशु बाली है ये जो ये इग्नू वगैरा है उससे आपको आत्म दर्शन नहीं होगा दर्शन करना है तो आपके लिए सच चरित्र होना और ये ध्यान करना मैन को एकाग्र करना वो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है तो भगवान बुद्ध ने ऐसा कहा और भगवान बुद्ध का जन्म हुआ mahasammati महापरी निर्माण बुद्धिस्म में यह शब्द है अपने यहां समाधि है उनका महापरिनिर्वाण तो महापरिनिर्वाण के बाद उनके जो डिसीप्ल द भगवान बुद्ध ने उनके उन्होंने क्या करना शुरू किया सबको पकड़ पकड़ कर के सामने भी खूब बनाना शुरू किया अपने यहां पर जैसे साधु शब्द है उनके वहां पे बिक्कू आर्क या तो फिर भी खूनी जो महिला जो मैंने जो होती है वो संन्यास धारण करके भी खुली बनती है तो जितने भी समाज के जितने भी वर्ग है सबको बोला की आपको यदि ईश्वर प्राप्ति ईश्वर प्राप्ति तो नहीं है वहां पे वहां चले आपको निर्माण प्राप्त करना है जल्दी आपको स्पिरिचुअल लाइफ में आगे बढ़ाना है आपको भी खूब बन्ना ही पड़ेगा सन्यास ग्रहण करना ही पड़ेगा और इसके लिए अच्छा मैं ये कहना भूल गया की हिंदू समाज में ये जो चार वर्णों व्यवस्था है उसके बाद में एक सन्यास है की यदि ये जो भविष्य हो ब्राह्मण हो शुद्र हो नैतिक क्षत्रिय हो जब भी चाहे उसके मैन में वैरा के उद्दीपन होता है तो वो संन्यास लेकर समाज से बाहर निकल सकता है और सन्यासियों में वो एक सन्यासी कहां से है जल्दी वह ब्राह्मण सन्यासी बना है क्षत्रिय सन्यासी सन्यासी बना है जब संन्यास ग्रहण कर लिया सन्यास धारण कर लिया फिर उनका कोई जाती वर्ण या तो नाथ वगैरा और नहीं रहता कष्ट वगैरा नहीं रहता तो इस तरह से भारतीय व्यवस्था थी किंतु यहां पर उन्होंने क्या किया बुद्धिस्ट लोगों ने की जिस जिसको भी आया सबको सान्या सन्यासी बनाते गए और समाज में एक क्षत्रिय हो ना की ब्राह्मणों का की आपको ब्राह्मण रहने की जरूरत नहीं आपको सबसे पहले भी खूब होना होगा तो ये इतना सारे लोगों को सन्यासी बनाकर के बड़े-बड़े मठ बनाए और फिर जैसे की कोई तामसिक आदमी है सन्यास ग्रहण करेगा उसके मैन में वैराग्य भी तो अभी है नहीं इतना तो फिर क्या होता है की वह दुष्कर्म करने की शुरुआत करेगा तो ये जो बड़े-बड़े मठ बुद्धिस्म के हुए द मठ वहां पर कहीं-कहीं पर थोड़ा सा करप्शन स्टार्ट हुआ और फिर जैसे होता है ना की सूखे जंगल में काफी पड़ता है तो पूरे जंगल में वो वाइल्डफिरे जिसको बोलते हैं आग पूरे जंगल में खड़ा करके फैल जाती है है तो वैसे ही हमारे हिंदू समाज के साथ हुआ भारत में की एक जगह पे कहीं पे धर्म में करप्शन स्टार्ट होने से सब जगह से वो खत्म हो गया उज्ज्वला आदमी में और फिर जब मुस्लिम लोग आए तो उनके लिए भारत पे शासन करना भारतीय को हराना आसान हो गया तभी लिया जाएगा तब की ए जो आदमी जो है वो उसे उसे लेवल पे पहुंच गया है उसके जो सत्कर्म जो है उसका जो चरित्र है उसकी जो तपस्या है उसकी जो त्याग करने की क्षमता है उसे लेवल पे पहुंच गई है तब भी उसको सन्यास लेना चाहिए उससे पहले नहीं वर्ण एक बहुत ही भयानक परिस्थिति उपस्थित होती है तो इसलिए ठाकुर यहां पर समझ गए मास्टर महाशय का भी और यह प्रताप का जो भाई है उसका भी और यह इसलिए मास्टर महाशय यह सब उदाहरण देते हैं की प्रताप का भाई आया यहां पर रह रहा था सुना की उसके बीवी बच्चों को ससुराल भेजती है और और तो फिर उनके केयर करने वाला कोई नहीं उनकी फिक्र करने वाला कोई नहीं है तब ठाकुर कहते हैं की मैंने उसको दांत और कहा की अरे बीवी बच्चे किए तो उदा देर उनकी संभल कौन लेगा अभी देखिए ये जो ट्रांसलेशन है ना ये ट्रांसलेशन भी ये इतना ठीक नहीं है वो बांग्ला बंगाली में लिखा है pratibiashera आयशा कर्वे ने की मैं ग्रामीण लोग के रख कर बे ना की तो वो जब बंगाली में ठाकुर की बात सुनते हैं ना तो अपना मैन जो है वो इतना मतलब वो लगता है की जैसे ईश्वर की बात स्वयं सन रहा है ट्रांसलेशन में हो सकता है की शायद उतना 100% भावना आए किंतु अभी क्या करेंगे बांग्ला हिंदी में क्लास है तो नेक्स्ट टाइम से मैं बंगाली kathamriti साथ में रखूंगा ठाकुर की बातें पहले बंगाली में बोलूंगा और फिर हिंदी में बोलूंगा जिससे की क्या होगा की बंगाली समझना जो लोग की नॉन बंगाली है उतना कठिन नहीं है जैसे मैं बोलूंगा फिर हिंदी ट्रांसलेट कहूंगा एक्चुअली सही तरीका यही है मैं जब यहां पर आया था साधु होने के लिए तो वो सबसे पहले मैं एक महाराज के साथ मतलब बिल्कुल मैं आश्रम में प्रवेशिका किया हूं मैं उसे समय पर युवराज जग की तरह स्वामी जी कहते हैं ना की स्वामी जी कैसे परिवार में द मैंने अभी सोच लिया था मैं भी इस तरह से ghoomunga तो ऐसे घूमते घूमते फिर आखिर में अक्कल ठीक है पता चला की अपन तो हम तो स्वामी जी नहीं है और हमको तो अभी बहुत लंबी ट्रेनिंग की जरूरत है तो फिर मैं एक चेन्नई में मठ है अपना वहां पे मैं गया तो जैसे ही मैं प्रवेश किया तो एक बड़े ही सीनियर महाराज आकर के वहां पे बैठे द उन्होंने बोला बैठो मेरे पास बैठो तो मुझे पता ही नहीं था वो कौन है मुझे तो मैं जिस महाराज को जानता था मैं जिस स्वामी जी को जानता था वो लखनऊ में रहते द और मैंने उनको फोन करके बोल दिया था की मैं चेन्नई में जा रहा हूं तो मतलब मुझे साधु होना है तो उन्होंने कहा की तुम चेन्नई में हो तुम वहां पे मरने चले जाओ टी नगर में अपना मार्ट है वहां पर मेरा एक मित्र है तो मैं मतलब एक दूसरे सन्यासी वह दिल्ली वाले लखनऊ वाले महाराज के मित्र द तो मैं उनको बोल देता हूं तुम वहां पर जाकर उनसे बात करना वह तुमको गाइड करेंगे तो मैंने कहा ठीक है तो फिर मैं इस तरह से चेन्नई मठ में चलाया और फिर आकर के किसी को बोला की मैं उसे महाराज को मिलना चाहता हूं उनका नाम तमिल था तो हरि बलगम महाराज को मिलना है तो वो कहां पे है तुला बैठो यहां पे है तो मैं बैठ करके वेट कर रहा था अभी दूसरे बहुत ही सीनियर साथ हुआ है और मेरे साथ में बैठ गए और मेरे साथ बात कर रहा है कैसे करते हैं ना की कहां से हो क्या कर रहे हो क्या पढ़ लिखाई किया घर में कौन है यहां पे क्यों आया तो मैंने सोचा की सीनियर साधु है पूछ रहा है तो मैं भी उत्तर दे रहा हूं फिर उन्होंने बात बताने पूछा तुम्हारी मातृभाषा कौन सी है तो मैंने तो गुजराती तो उन्होंने बोला तुम्हारी मैन कौन है तो अभी ऑफ कोर्स अभी जब साधु होने को आए हैं तो हमारी मैन तो है मैन शारदा देवी तो मैंने कहा की मैन शारदा तो उन्होंने कहा की तुम्हारी मैन की मातृभाषा कौन सी है मैंने कहा बंगाली तो तुम्हारी मातृभाषा कौन हुए तो मैंने कहा तो सही है मेरी मातृभाषा तो बंगाली दिन से मैंने ठीक कर लिया था की बंगाली सीखना है और कथामृत उसे समय मैंने पढ़ा था गुजराती में पढ़ा था तो मैंने ठीक किया था की कथामृत बंगाली में पढ़ेंगे बाद में पता चला जब हरि जाए तो मैंने उनको प्रणाम किया फिर महाराज बोलते हैं ना तुमने उसे महाराष्ट्र को मिले तो मैंने कहा नहीं मतलब बात हुआ सीनियर साधु है कौन है तो मतलब यही तो हमारे बड़े महाराज हैं अध्यक्ष महाराज है तब मुझे पता चला उनका नाम था कमलानंद जी और अभी काशी में वो रिटायर होने के बाद रहते द अभी कुछ समय पहले ही उनका निधन हुआ तो इस तरह से मैं बंगाली पढ़ना सिखा और कथामृत का बंगाली में पाठ करना बहुत ही वो आध्यात्मिक तरीके से और मैंने अपने स्पिरिचुअल लाइफ के लिए बहुत ही बेनिफिशियल है वो कल से मैं उसको भी पास में रखूंगा मैंने बंगाली तो जो है उनको तो पता ही है अच्छा अभी ठाकुर मास्टर को बोलते मास्टर महाशय वही प्रश्न उत्तर का सिलसिला क्या तुम्हारा विवाह हो गया है तो मास्टर बोलते हैं जी हान तो ठाकुर श्री राम कृष्ण चौक करके अरे रामलाल अरे अपना विवाह तो इसने कर डाला देखिए और जैसे बिल्कुल ही जैसे गांव में होता है ना की कोई दूसरे के जीवन में इतना वो मतलब वो प्रश्न वगैरा करता है तो ऐसे ही ठाकुर जैसे ही सुनते हैं की उनका विवाह हो गया है चौंक गए अर्थात उंगल ठाकुर को तो पूछने का आशय अलग है विवाह हो गया है अर्थ मास्टर महाशय के चेहरे पे उनको लगा की हान उनका जो चरित्र है वो जो प्रताप का जो भाई जिसको की ठाकुर ने भाग दिया यह मास्टर महाशय का चरित्र किंतु बहुत ही उच्च और बहुत ही अच्छा है तो उनको उन्होंने सोच के रखा शायद ये सन्यासी हो सकता है किंतु फिर जब यह पूछा की विवाह हो गया है तो बड़े चौक गए और ये जो रामलाल द है वह उनके भतीजे द कालीबाड़ी के पुजारी करके रामलाल को बोलते हैं अरे रामलाल सुना इसने अपना विवाह कर डाला रामलाल श्री रामकृष्ण के भतीजे और मैन काली के पुजारी है मास्टर घर अपराधी जैसे शेर नीचा किए चुपचाप बैठे हैं उनको लगा की अरे विवाह करना क्या इतना बड़ा अपराध है श्री राम कृष्ण ने फिर पूछा क्या तुम्हारे लड़के बच्चे भी हैं मास्टर का कलेजा कम उठा डरते हुए बोले जी हान लड़के बच्चे हुए हैं श्री रामकृष्ण ने फिर दुख के साथ कहा अरे लड़के भी हो गए अरे इतना अच्छा लड़का मेरे हाथ से निकल दे यार इस तरह तिरस्कृत होकर मास्टर चुपचाप बैठे रहे उनका अहंकार चूर्ण होने लगा कुछ देर बाद श्री रामकृष्ण स्नेह कहने लगे देखो तुम्हारे लक्षण अच्छे हैं यह सब में किसी के कल आंखें आदि को देखकर के ही जान लेता हूं माने यह देखिए ठाकुर जब उनके सामने कोई भी आता था यह यंग लड़के हैं या कोई भी गृह भक्त है या कोई भी है तो उनकी ये जो कल है वो फिर ये उनका एक भी तरीका था उनके हाथ का वजन करते द हाथ उनके हाथ में लेंगे फिर उसका वेट करेंगे पता नहीं ये सब चीजों से वो क्या माने यह जो अंग लक्षण देख करके चरित्र बता देना यह सब हमारे पुरातन भारत में ऐसी बहुत सारी विद्यार्थी ये जो बकरी इंसान का ग्रह हम देख सकते हैं आजकल बहुत सारे लोग ऐसा कुछ करने को प्रयत्न करते हैं किंतु यह क्या है की जो इनसाइड जो होती है ना वो इनसाइड आप जब सुपर कॉन्शियस लेवल पे चले जाते तब भी आपको मिलती ये जो ज्योतिष शास्त्र है फिर ये जो अपना वो है ना आर्किटेक्चर वो जो एक शास्त्र द मैं उसका नाम भूल गया आ किस डायरेक्शन में मकान को रखना चाहिए किस डायरेक्शन में वो वो एक है वो वस्तु शास्त्र वस्तु शास्त्र यस वस्तु शास्त्र है ज्योतिष शास्त्र है फिर ये जो अपना आयुर्वेद है यह सब जो भारतीय शास्त्र जो है ना वह आध्यात्मिकता के साथ में जुड़े हुए हैं यदि कोई कहेगा की जैसे वो जो डॉक्टर है एमबीबीएस डॉक्टर उसका चरित्र कितना ही खराब किया ना हो वो फर्क नहीं पड़ता उसको वो डॉक्टरी की जो विद्या है उसको वो ठीक-ठीक वो करेगा किंतु अपना हिंदुइज्म में अपने प्राचीन भारत में ऐसा नहीं है चरित्र और आध्यात्मिकता के साथ में यही हमारे शास्त्र हमारी स्किल्स जुड़ी हुई थी तो यदि कोई आदमी ऐसा कहता है की उसका चरित्र अच्छा नहीं है किंतु बड़ा अच्छा ज्योतिष है उसका चरित्र वो मैंने वो बहुत ज्यादा ईश्वर में मानता नहीं है या तो फिर ज्यादातर लोग ब्राह्मण होते हैं तो संध्या वंदना वगैरा नहीं करता किंतु वस्तु शास्त्र अच्छे से जानता है तो ये सब सुनकर के किंतु हम उसे तरह के वस्तु शास्त्र है या तो फिर ज्योतिष है उसके ऊपर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि आध्यात्मिक जो प्रगति वो उसके साथ में बहुत ही अच्छे से वो मतलब वो मैंने बनी हुई है मतलब फ्यूज हो गई है सुपर कॉन्शियस लेवल पे जाकर के ही वे लोग यह सब बातें बता सकते हैं तो ठाकुर तो ऑफ कोर्स आध्यात्मिक जगत के राजा द तो वो ये जब जितने भी शास्त्र है वो तो उनके हस्तगत है उनको अलग से सीखने की भी जरूरत नहीं थी ऐसा नहीं है की ठाकुर ने यह लक्षण देखकर के चरित्र का अंदाज़ कैसे करना ये सब सिखा है वह जब सुपर कॉन्शियस लेवल पे चले गए तो ठाकुर कहते हैं महाराष्ट्र समय लेते अर्थात वह जैसे बंगाल में होता है ना की वो जो वो धान वगैरा है उसको वो एक कर रहा है मैंने उसको क्या बोलेंगे उसको मैंने उसको जोर-जोर से मार रहा है मिलेट उसको धान भाग हान मिलिट्री को इंग्लिश में बोलता है तो जोर-जोर से कोई इस पर मार रहा है और कोई औरत साथ में बैठी है जैसे ही वहां पे धान का वो जादू खत्म हो जाता है बगल में जो धान पड़ा हुआ है वहां से हाथ से वो धान दल देती है तो ढाल देती है तो राष्ट्र हिले देर मतलब बांग्लादेश अभी ये पार्टिकुलर चीज बोलने की जरूरत है उसका ज्ञान जो है मैन काली उनके मैन में दल देती है तो यह जो ठाकुर को अलग अलग से ये सब चीज सीखने की जरूरत नहीं है एक बार समाधि प्राप्त हुई एक बार मैन काली के दर्शन हुए तो यह हिंदू पढ़ती के अनुसार जितने भी शास्त्र है सब कुछ ठाकुर ने astagat कर लिए ठाकुर इसका प्रदर्शन कभी नहीं करते द जो ज्योतिष विद्या है या तो फिर यह जो आयुर्वेद है यह सब का प्रदर्शन ठाकुर ने कभी नहीं किया क्योंकि ठाकुर को पता है की एक बार ऐसा प्रदर्शन होने से भीड़ जिम छूट जाएगी अरे मुझे यह दर्द है मेरी यह समस्या है मेरे यह बीमार है उसका इलाज कर दो ठाकुर तो भंवर रोग के वैद्य द नहीं की हमारे सांसारिक या शारीरिक रूप के वही द तो इसीलिए उन्होंने अपने को इतना छुपा के रखा था और उनको पता है की ठाकुर को जब कैंसर हो गया तो बहुत सारे लोग ऐसा सोचने लगे अरे बातें तो इतनी बड़ी बड़ी करते हैं वो समाधि nirvikal पर समाधि मैन के दर्शन मैन काली के दर्शन की खुद को कैंसर हुआ खुद का ट्रीटमेंट नहीं कर पाते तो हमारा क्या करेंगे ऐसा सोच करके बहुत सारे भक्त चले भी गए द और काशीपुर गार्डन हाउस में जो चुनिंदा वह जो अंतरंग भक्त द वही उनके आसपास रह गए द और वही अंतरंग भक्तों के वो जो फाउंडेशन पर यह रामचंद्र की स्थापना की उन्होंने तो इसी तरह से ठाकुर उनके लक्षण देखकर के समझ गए की मास्टर महाशय जो है बहुत ही चरित्रवान व्यक्ति है और जैसे नरेंद्र है राजा महाराज है लथु महाराज है बाबूराम महाराज है उनकी तरह जड़ी वह भी थोड़ा बहुत त्याग का उपदेश ग्रहण करेंगे तो वो भी संन्यास के मार्ग पे साधना समाधि के मार्ग पे बहुत ही आगे बढ़ पाएंगे किंतु जैसे सुना की शादी हो गई है और बच्चे भी हो गए हैं अब अच्छा उनके दूसरे भी ऐसे संतान द जैसे राजा महाराज का भी विवाह हो गया था राजा महाराज को भी एक संतान होना था बडो गोपाल और यानी की विवेकानंद जी महाराज उनका तो उनका बीवी बच्चे द भी ठाकुर से भी उम्र में बड़े द उनका देहांत भी हो गया फिर भी ठाकुर के पास आकर के वो उन्होंने उनके मतलब सन्यासी शिष्य हुए तो वह लोग द प्रज्वलित हो रहा है की वे लोग यह जो सांसारिक उसमें दुबे भी है संसार के भोग में या संसार के भीतर तो वो संसार उनको असर नहीं करता जैसे की कमल के पत्ते की तरह कमल का पत्ता पानी में रहता है किंतु उसकी जो उसका जो ये है टेक्सचर कमल के पत्ते का ऐसा रहता है की पानी उसको लक करके वो निकल जाता है उसमें छूटा नहीं है तो वैसे ही जो सन्यासी शीशे ऐसे द और ठाकुर महाशय है उनका जो gyanadani इतना तेज नहीं था ठाकुर एक बार मास्टर कथामृत नहीं वर्णन करते हैं की ठाकुर एक बार मैन के साथ बात कर रहे हैं और मैन को बोलते हैं उसको इतनी कला क्यों नहीं दी कला यानी की लक्षण उसको इसकी कला ज्यादा है इसकी कला कम है अर्थात जो है या बाकी प्रॉफिट करके अच्छा इतनी कला से ही तुम्हारा कम होगा अच्छा तो ठीक है अर्थात मास्टर महाशय को कथम् रूप लिखना था इसके लिए उनको संसार में रहना था हमको पता है की बाकी के डायरेक्ट जो लोग ठाकुर का उपदेश इस तरह से लिखने की शुरुआत की तो ठाकुर ने का दिया की अरे तुम लोग ये सब मत लिखो उसके लिए तो एक किसी को मैंने चिन्हित करके रखा है अर्थात मास्टर को तो आई थिंक महापुरुष महाराज द आई थिंक राजा महाराजा द उन्होंने शायद कुछ कुछ लिखने की शुरुआत की थी किंतु ठाकुर के कहने से उन्होंने जो कुछ भी लिखा था वो सब गंगा नदी में वह स्वाहा कर दिया था उसको फेंक दिया था क्योंकि वो ठाकुर का वो जो राज्य है सभी को एक-एक कम दिया हुआ है तो मास्टर महाशय का कम था की ठाकुर की ये जो श्री मुख से जो वचन निकलते हैं उनको लिपिबद्ध करना अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे ओम शांति शांति