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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 03 Oct 2023

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ओम स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का ज्ञान योग कॉस्मस मैक्रो कजम स्वामी जी जिस तरह से कल हमको बता रहे थे या तो फिर हम जिस तरह से कल स्वामी जी को पढ़ रहे थे कि एक के बाद एक उदाहरण देकर वह कहते हैं कि एक बीज में से कोई एक बड़ी चीज बनती है जैसे वटवृक्ष है ना कि अंडे में से बनता है एक पंखी ना कि मिट्टी में से बनती है चट्टान और चट्टान फिर उसी मिट्टी में समा जाती है व वटवृक्ष उसी बीच में चला जाता है तो यह जो लाइफ साइकिल है तो लाइफ साइकल स्वामी जी इसका उदाहरण देकर केते कि यदि हम एक छोटे से उसके बिगिनिंग और एंड इस दो चीजों को यदि हम जान ले और यदि तो क्या है कि हमको उसके बारे में सब कुछ हम जान सकते हैं या तो फिर स्वामी जी ने कहा कि उसका बिगिनिंग और एंड यह दोनों एक ही जैसा होता है जिस बीज में से वटवृक्ष प्रकट हुआ वही वटवृक्ष उसी तरह के बीज को जन्म देगा और उसी में फिर वो उसमें से नए वटवृक्ष होंगे तो शुरुआत की स्थिति और आखिर की स्थिति दोनों एक तरह सी दिखती है यह स्वामी जी ने हमको कल बताया स्वामी जी कहते हैं अप्लाइज कोर्स ऑफ रीजनिंग टू फिनोमिना यानी कि ये लॉजिक ये हमारे आसपास चल रही चीज वस्तुओं के ऊपर में लगाएंगे वी फाइंड हमको पता चलता है इन द फर्स्ट प्लेस दैट एवरीथिंग इज ऑलमोस्ट सिमिलर एट द बिगिनिंग एंड एंड द एंड जितनी भी चीजें जो जन्म लेती है वह शुरुआत में उसका जो स्थिति और अंत की स्थिति ऑलमोस्ट सिमिलर है द माउंटेन कम्स फ्रॉम द सैंड एंड गोज बैक टू द सैंड मिट्टी में से या तो बालू में से पहाड़ या चट्टान खड़ी होती है और उसी मिट्टी या तो बालू में समाहित हो जाती है द रिवर कम्स आउट ऑफ वेपर एंड गोज बैक टू वेपर बादल में से यह नदी बनती है और नदी में पानी का बापी भवन होकर के वो सूरज की गर्मी से पानी वो गैस या तो फिर वेपर होकर के फिर से उसी बादल में चला जाता है प्लांट लाइफ कम्स फ्रॉम द सीड एंड गोज बैक टू द सीड बीज में से पौधा जन्म लेता है और यही पौधा बीज में चला जाता है ह्यूमन लाइफ कम्स आउट ऑफ ह्यूमन जर्म्स एंड गोज बैक टू ह्यूमन जर्म्स मनुष्य का जीवन इसी तरह तरह मनुष्य के बीज में से प्रकट होता है और उसी में समाहित हो जाता है द यूनिवर्स विथ इट्स स्टार्स एंड प्लेनेट हैज कम आउट ऑफ ए नेबुलर स्टेट एंड मस्ट गो बैक टू इट यह जो विश्व ब्रह्मांड सितारे बादल फिर ग्रह चंद्र नक्षत्र गैलेक्सी एंड सुपर क्लस्टर्स और क्या-क्या सब स्ट्रक्चर है इस विश्व में वो सब एक नेबुलर स्टेट में से प्रकट होते हैं अर्थात कि इस तरह का एक स्टेट जिसको कि हम गैस बोल सकते हैं एक क्लाउड बोल सकते हैं या तो फिर एक जिसको डिफाइन नहीं कर सकते एक ऐसी एक स्थिति बता सकते हैं मॉडर्न साइंस की दृष्टि से देखें तो हमने देखा है किय बिग बैंग और बिग क्रंच कहो या फिर ये ओपन एंडेड यूनिवर्स ना कि ये पैरेलल पैरेलल यूनिवर्स इस अर्थ में कि वह हमेशा के लिए वह एक्सपेंड होता ही जाएगा या तो फिर एक जगह पर एक्सपेंड होकर के उसकी जो कोलप्पा होने की शक्ति है यह दोनों इक्वल हो जाएगी यह सब मॉडर्न साइंस कहता है किंतु फिर भी स्वामी जी जो कहते हैं उसके बहुत ही नजदीक है वट डू वी लर्न फ्रॉम दिस हम यह सब चीजों से क्या सीखते हैं ट द मेनिफेस्टेड और द ग्रोस स्टेट इज द इफेक्ट एंड द फाइनर स्टेट द कोज जो मेनिफेस्ट होता है जो स्थूल है जो बढ़ता है वह इफेक्ट है और उसका जो कॉज है उसका वह जो फाइनर स्टेट है व कोज है कोज यानी कि कार्य और इफेक्ट यानी कि परिणाम यह बीज जो है वह कार्य करता है और बीज में से वटवृक्ष प्रकट होता है वो उसका परिणाम है तो जो चीज बड़ी होती है जो स्थूल काई है जो हमको नजरों से दिखाई देती है वो परिणाम है और यह परिणाम स्थूल परिणाम ऑब्जेक्टिव या तो मटेरियल इफेक्ट इट इज द रिजल्ट ऑफ सटल कोज ये जो बीज रूप में सूक्ष्म रूप से जो न दिखाई देने वाले रूप से जो परिस्थिति या जो स्टेट है उस वो है उसका कार्य या तो फिर उसका कोज जिसमें कि यह फिजिकल इफेक्ट जन्म लेती है थाउजेंड्स ऑफ इयर्स अगो हजारों साल पहले इट वाज डेमोंस्ट्रेटेड बाय कपिल कपिल नामक मुनि ने यह हमको प्रदर्शित किया था कपिल कौन थे सांख्य के निर्मा सांख्य के फादर कहो ना कि सांख्य अ दर्शन है उसके रचयिता कहो जनरली क्या होता है कि जो नाम हमारे पास में आते हैं कि उन्होंने यह किया तो कभी-कभी क्या होता है कि कार्य तो बहुत पहले हो चुका होता है किंतु फिर क्या है कि एक्चुअल पर्सन जो है जिन्होंने यह लिखा है उसका नाम नहीं रख करके यह कोई एक पोजीशन कहो ना कि कोई एक ये कहो गद्दी उसका नाम दे देते हैं जैसे कि शंकराचार्य शंकराचार्य की गद्दी है या तो फिर यह वशिष्ठ या तो फिर ये व्यास ये सब पोजीशंस है ये सब एक क्या कहेंगे टाइटल है अभी कोई एक आदि शंकराचार्य होंगे जिन्होंने यह व्यास सूत्र के ऊपर में भाषा की रचना की होगी हमको पता नहीं किंतु बाद में बहुत सारे प्रकरण ग्रंथ शंकराचार्य के नाम से चल रहे हैं वो कोई आदि शंकराचार्य कोई पार्टिकुलर शंकराचार्य ने नहीं शंकराचार्य की गद्दी पर जो बैठे थे उस समय के जो आचार्य उन्होंने इन सब की रचना की है तो शंकराचार्य एक पोजीशन है और इस पोजीशन पे स्थित जो आचार्य है उन्होंने बहुत सारे ग्रंथों की रचना की है तो वैसे ही य कपिल मुनि के बारे में कहा जाता है कि सांख्य शास्त्र के रचयिता है किंतु सही में कपिल मुनि सांख्य के रचयिता है कपिल एक व्यक्ति का नाम है ना कि कोई पोजीशन का नाम है वह हमको आज हम कोई मतलब कंफर्म नहीं कह सकते हमको सिर्फ मान लेना है कि कपिल बोलकर के एक रचयिता थे आज से हजारों साल पहले उन्होंने किस चीज की पुष्टि की है स्वामी जी बताते हैं द ग्रेट फादर ऑफ ल फिलोसोफी अच्छा स्वामी जी ने तो उनको कह दिया कि जितनी भी फिलोसोफी है जितने भी दर्शन शास्त्र है उन सभी के वो जनक है दैट डिस्ट्रक्शन मींस गोइंग बैक टू द कोज जो मृत्यु है वह मृत्यु क्या है जिस बीज में से जन्म ग्रहण करता है उसी बीज में वापस समाहित हो जाना जैसे बीज जिसमें से यह वटवृक्ष हुआ तो जो वटवृक्ष जब मृत्यु जब प्राप्त होता है वटवृक्ष का जब विनाश होता है तो ऐसा नहीं है कि वटवृक्ष का विनाश हुआ फिलोसॉफिकली कपिल ने दर्शित प्रदर्शित किया कि वह उसी बीज में वापस चला जा रहा है पंखी अंडे में से जन्म लेता है फिर पंखी का मृत्यु होता है तो पंखी का एक्चुअली मृत्यु नहीं होता वह उसका जो एसेंस है वह इस अंडे में चला जाता है अभी क्यों ऐसा कहा देखो इफ दिस टेबल हियर इज डिस्ट्रॉयड इट विल गो बैक टू इट्स कोस टू दोस फाइन फॉर्म्स एंड पार्टिकल्स व्हिच कंबाइंड मेड दिस फॉर्म व्हिच वी कॉल अ टेबल जद यह टेबल हमारे सामने है जद यह भस्मी भूत हो जाए डिस्ट्रॉय हो जाए या तो फिर भस्मी भूत हो जाए तो उसका क्या होगा वो जिस उसके जो एलिमेंटल पोजीशन थी उसकी जो बीज रूप से जो अवस्था थी उसमें वह चला जाता है टू दोस फाइन फॉर्म्स एंड पार्टिकल्स उस पार्टिकल में जिसको कि कंबाइन करके इस इस एक आकृति की रचना हुई जिसको कि हम टेबल कहते हैं देखिए आज का मॉडर्न फिजिक्स यहां तक तो चला गया है कि इस जगत में जो कुछ भी देखते हो वो पीरियोडिक टेबल पे जितने भी एलिमेंट्स है उनका ही कॉमिनेशन है तो यह वो एच ए एआई वो जो हम पीरियोडिक टेबल मुख स्त करते थे ना वो हाइड्रोजन जिसका की आसपास में एक ही इलेक्ट्रॉन है उसके आसपास की ऑर्बिट में फिर उसके बाद में आता है हीलियम हीलियम की ऑर्बिट में दो इलेक्ट्रॉन है तो ऐसा वो पूरा पीरियोडिक टेबल हम मुख स्त करते थे ओके 75 ना 78 जितने भी एलिमेंट्स वो अभी तक खोजे गए हो तो ये एलिमेंट्स जो कि पीरियोडिक टेबल पे अवेलेबल है उसी का यह पूरा विश्व ब्रह्मांड बना है आपको लगेगा कि अच्छा पृथ्वी पर हीलियम है ऑक्सीजन है या गोल्ड है या निकल है ना कि टाइटेनियम है ना कि ये यूरेनियम है ये क्या पृथ्वी पे जो चीज ये सब एलिमेंट्स की बनी है तो यहां से करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर इस मिल्की वे गैलेक्सी जो हमारी आकाश गंगा गैलेक्सी है इसके दूसरे छोर पे जद मान लीजिए एक ऐसा प्लेनेट होता तो क्या वो प्लेनेट भी इसी एलिमेंट से बना होता तो साइंस ने प्रू किया है कि जितने भी प्लेनेट या तो स्टार्स या तो यह गैलेक्सी या तो फिर यह गैस जो भी है सब उसी पीरियोडिक टेबल के एलिमेंट से बने हैं तो यदि यह टेबल यहां पे जो है उस वो वो यदि डिस्ट्रॉय हो जाए यदि ये भस्मी भूत हो जाए तो उसी एलिमेंट में यह वापस चला जाएगा जिस एलिमेंट की ये लकड़ियां बनी है और इस लकड़ी में से ही तो फिर यह आखिर में यह टेबल बना है तो भस्मी भूत हो जाने से टेबल चला नहीं जा जाता उसका विनाश नहीं हो जाता वह अपने जो एलिमेंट्स है जिसमें से यह प्रकट हुआ है उसी एलिमेंट्स में वापस चला जाता है मैटर और एनर्जी दो चीजों की कोई भी चीज बनती है तो यदि टेबल को हम जला देते हैं तो मैटर है वो एलिमेंट्स के रूप में चली जाती है और उसके भीतर की जो एनर्जी है वह यह जो अग्नि के रूप में या तो फिर यह प्रकाश या तो फिर गर्मी के रूप में वो ट्रांसफॉर्म हो जाएगी ट्रांसफॉर्मेशन होता है मैटर और एनर्जी का ये स्टेटिक एनर्जी है तो फिर यह डायनेमिक एनर्जी जिसको कि हम प्रकाश या तो गर्मी या तो फिर यह जो कहते हैं वो वो डायनेमिक एनर्जी में कन्वर्ट हो जाएगा तो ये कन्वर्जन होता है नहीं कि डिस्ट्रक्शन होता है नहीं कि भस्मी भूत होता है इफ अ मैन डाइज ही विल गो बैक टू द एलिमेंट्स व्हिच गेव हिम हिस बॉडी यदि मनुष्य का मृत्यु होता है तो यदि उसको हम चीता प जलाते हैं है तो वो उसी एलिमेंट में चला जाता है जिस एलिमेंट्स का यह शरीर बना था ज कोई वेस्टर्न साइंटिस्ट को जद आप सुनेंगे या तो पढ़ेंगे तो वे लोग कहेंगे कि हम तारों के बने हुए हैं हमारा शरीर है सितारों से बना हुआ है तो वी आर मेड ऑफ द स्टार स्टफ ऐसा वे लोग कहेंगे क्यों ऐसा कहेंगे क्योंकि हमारे भीतर के जो पीरियोडिक एलिमेंट के जो एलिमेंट्स है ऑक्सीजन है ना कि फिर निकल है ना कि आयरन है ना कि जो कुछ भी है वो सितारों के भीतर में भट्ठी होती है उस भट्ठी में तैयार हुए हैं फिर जब सितारा विस्फोट होता है तारा तारे का विस्फोट होता है उसके जीवन चक्र के अंत में तब ये एलिमेंट्स चारों ओर फैल जाते हैं ये गैस क्लाउड के रूप में और फिर ये वहां से कहीं से जाकर के पृथ्वी पर आए फिर उसी एलिमेंट्स का फिर यह मनुष्य शरीर धारण हुआ तो ये डीएनए में से जब मनुष्य शरीर बनता है तो ये चारों ओर जो प्रवाही के द्वारा जो एलिमेंट्स ग्रहण किए जाते हैं उसी का यह शरीर बनता है और जब शरीर का विनाश होता है जद इसको मिट्टी में दफन कर दिया जाता है या तो फिर चिता प भस्मी भूत किया जाता है तो उसी एलिमेंट में यह शरीर वापस चला जाता है सो वी आर अभी यदि मान लीजिए कि पृथ्वी प ऐसा विस्फोट हुआ पृथ्वी जद खत्म हो गई तो फिर ये एलिमेंट्स जो है वो आकाश में कॉस्मो उस में तैरते तैरते और किसी ग्रह प जाएंगे और किसी ग्रह पर जीवन स्टार्ट होगा और इसी एलिमेंट्स के उनके शरीर बनेंगे तो ये एलिमेंट्स कॉमन है ये जो बिग बैंग से लेकर के यह एलिमेंट्स जितने भी आए हैं वह एलिमेंट से ही हम एटम्स प्रोटॉन न्यूट्रॉनस और इसके भीतर में यदि कहो तो क्वार्क्स या तो स्ट्रिंग्स इसी का सब कुछ बना हुआ है देखिए स्वामी जी कितनी एडवांस आर्गुमेंट करते हैं उनके समय में ये सब आइडियाज इतने क्लियर नहीं थे या तो फिर यदि क्लियर थे तो फिर डेडिकेटेड साइंटिस्ट लोगों को पता था आजकल हमारे जैसे ले लेमन जिसको कहेंगे इंग्लिश में कि एक सामान्य एक वाचक है हम लोग हम लोगों के पास में कितना अच्छा एक्सेस है किताबें पढ़ने का यदि कोई भी फील्ड का टेक्निकल नॉलेज हमको चाहिए कॉस्मोलॉजी है एस्ट्रोनॉमी है हिस्ट्री है जियोग्राफी है ज्योमेट्री है मैथमेटिक्स है कंप्यूटर साइंस है कंप्यूटिंग लैंग्वेजेस है तो हमको क्या करना है उसके बारे में इंटरनेट पर सर्च करना है या तो के रिलेटेड बहुत ही अच्छी किताबें बहुत ही सस्ते में हमको मिल जाती है स्वामी जी के समय इस तरह का नॉलेज इतना इजली अवेलेबल नहीं था हां प्रिंटिंग प्रेस का रेवोल्यूशन अवश्य हुआ है और न्यूज़पेपर भी उस समय तो बड़े वाइड अवेलेबल थे किंतु फिर भी जो साइंस जब वो पॉपुलर इज होता होना यह क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी के बाद में ही यह आज की एस्ट्रोनॉमी है या तो फिर आज की कॉस्मोलॉजी है वो इन 193 40 इसके बाद में यह सब पॉपुलर इज हुए हैं यह कांसेप्ट स्वामी जी के समय में यह सब स्वामी जी ग्रेस कर लिए हैं एकदम कठिन डिफिकल्ट समझने में बहुत ही विकट इस साइंटिफिक थिरी में से यह स्वामी जी की इंटेलेक्चुअल ग्रेटनेस का एक एक मान एक प्रदर्शन है कि हां यह ऐसी डिफिकल्ट किताब जिसको समझना बहुत ही कम लोगों के लिए संभव है जो कि उस क्षेत्र का एक्सपर्ट नहीं है उन्होंने उसको पढ़ के फ फटाफट करके समझ लिया आत्मसात कर लिया यानी कि जो स्वामी जी कहते हैं ना कि यदि मुझे मेरा एजुकेशन फिर से प्राप्त करना होता और वह मेरे हाथ में होता कि किस तरह से मुझे अपने को एजुकेट करना है किस तरह से मुझे अपने को शिक्षित करना है तो मैं स सर्वप्रथम एकाग्रता सीखता एकाग्रता और यह विल पावर की शक्ति को डेवलप करने के बाद में इस एकाग्र मन को मैं जिस टॉपिक पर लगाऊ जिस विषय पर लगाऊ उस विषय का संपूर्ण ज्ञान में इजली आयत कर पाऊंगा तो स्वामी जी चलिए स्वामी जी का ग्रेजुएशन एजुकेशन पहली ही कक्षा से या तो बाल मंदिर से ही शायद उनके हाथ में ना हो किंतु ठाकुर के साथ में मुलाकात होने के बाद में ठाकुर के दर्शन होने के बाद में वो जिस तरह से अपने मन को एकाग्र करना सीखे हैं और उसके बाद में जो उन्होंने फटाफट करके एक के बाद एक किताबें हैं आर्टिकल्स से या तो फिर किसी वो अमेरिका गए थे तो निकोला टेस्ला के साथ में डिस्कशन होता था तो ये सब चीजें कितनी फटाफट उन्होंने ग्रहण कर ली ये वो दिस इज ये मने बताता है कि उनका मन बाय दैट टाइम कितना एकाग्र कितना स्ट्रांग वो हो चुका होगा कि ऐसी छोटी-छोटी बातों में फटाफट करते ये ग्रहण कर लेते हैं निकोला टेस्ला के बारे में लिखा गया है अपनी किताबों में कि वो सर्वप्रथम स्वामी जी से बड़ा ही प्रभावित हुआ था और टेस्ला का लाइफ थोड़ा सा विचित्र टाइप का है जैसे कि सभी ये इन्वेंटर या तो साइंटिस्ट इन लोगों का होता है वो अकेले-अकेले बहुत ही मतलब उसका नेचर था अकेले रहने वाला था दूसरों के साथ में वो जल्दी इमीडिएट वो इजली मिक्स नहीं होता था और किसी भी सोशल ओकेज में टेस्ला जाता है तो ऐसा माना जाता था कि अरे बाप रे ये टेस्ला खुद आ रहा है निकोला टेस्ला स्वयं यहां पे ऊपर पधार रहा है दैट मींस कि यह जो फंक्शन है या तो फिर ये ओकेज है सोशल इसका कितना महत्व ऐसा माना जाता था और टेस्ला क्या उसके उसके समय उसके पास में ख्याति भी इतनी थी पॉपुलर भी इतना था और धन वैभव भी उसके पास में उस समय से थोड़ा बहुत था तो यह बड़ी-बड़ी जो होटल होती थी व वो होटल में एक बड़े से कम डाइनिंग हॉल में वो बढ़िया सा वो डिनर जैकेट अमेरिका में डिनर जैकेट पहनते हैं वो जब फॉर्मल ओकेज होता है ना भोजन करने का तब वह एक डिनर जैकेट पहना जाता है तो तो बड़ी ही अच्छी क्वालिटी का डिनर जैकेट पहन कर के और वहां प तो चार बड़ा सा टेबल उसके लिए सजा दिया जाता था वो बटलर वगैरह चारों ओर दौड़ धाम करते थे और उनके लिए उसके लिए बड़ा ही अच्छा-अच्छा ये प्लेट डिश वगैरह वो रखा जाता था वो सब वो अकेला बैठ कर के वो भोजन ग्रहण करता जैसे कि बिल्कुल कोई राजा हो यूरोप के राजा इस तरह से रहते थे अमेरिका इज अ फ्री कंट्री उस समय वो लोग कहते हैं अपने को फ्री कंट्री किंतु जो भी है तो अमेरिका उस समय फ्री कंट्री था तो ये जो सिटीजन थे साइंटिस्ट थे उन लोगों के पास में इतना पावर था या तो फिर इतना धन वैभव था कि वे लोग यूरोपियन राजा की तरह रह सकते थे तो यही निकोला टेस्ला जो कि बड़ा ही पॉपुलर जिसको कि जिसको कि समय जो कि उस समय की सेलिब्रिटी था आजकल के जो हम सेलिब्रिटी कहते हैं तो उस समय का वो सेलिब्रिटी था तो वो स्वामी जी के लेक्चर सुनने के लिए स्वामी जी के न्यूयॉर्क क्लास में आया करता था था बड़ा ही रेगुलरली और जब उसको तो क्या है लैब में काम करता था अपनी लेबोरेटरी में तो आने आते हुए थोड़ा सा देरी हो जाता था और स्वामी जी के तो एक छोटी सी जगह पर क्लास लेते थे बहुत सारे लोग इकट्ठा हो जाते थे बैठने की जगह सब रिजर्व हो वो ये हो जाती थी बहुत सारे लोग तो बैठने की जगह नहीं रहती थी तो क्या होता था यही निकोला टेस्ला जो कि बाकी सब जगह पे जो कि धनपति है पूंजीपति है सेलिब्रिटीज है सोसाइटी की वहां पे जब जाएगा तो लोग उसके सम्मान के लिए खड़े हो जाएंगे उसको सबसे सम्माननीय स्थान देंगे यही निकोला टेस्ला खड़े खड़े पीछे में लास्ट खड़े-खड़े स्वामी जी का लेक्चर सुनता था फिर एक बार स्वामी जी ने उसको पूछा कि किस तरह से यह यूनिवर्स का जो बिगिनिंग और एंड है कल्प का प्रारंभ और कल्प का अंत सृष्टि स्थिति प्रलय जो कि हिंदू शास्त्र में जिस जिस तरह से इसको इमेजिन किया गया है जिस तरह से इसका वर्णन किया गया है तो मॉडर्न साइंस इसके बारे में क्या कहता है तो स्वामी जी ने उसको पूछा होगा तो उसके रिप्लाई में निकोला टेस्ला ने एक नोट लिखा स्वामी जी को कि यह सब डिस्कशन तो बड़ा ही जटिल है और यह कॉरेस्पोंडेंस के थ्रू नहीं होगा आई इनवाइट यू टू विजिट माय लेबोरेटरी या निकोला टेस्ला की लेबोरेटरी विजिट करने का इन्विटेशन मिलना वह बड़े सद्भाव की बात है तो उसने कहा कि आप मेरी लैब में आइए मैं इस इस दिन फ्री हूं हम लोग बैठ कर के डिस्कशन करेंगे तो स्वामी जी गए उसके साथ में बैठ कर के काफी कुछ डिस्कशन हुआ किंतु देखिए कि बाद बाद में जो आइडियाज बड़े ही पॉपुलर हुए या तो फिर जिसको कि फिजिक्स या साइंस की कम्युनिटी में बड़े ही विस्तृत रूप से जिसको एक्सेप्ट किया गया वो है थिरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम डायनेमिक्स अभी वेदांत जो है वह इतना मतलब वह तो वेदांत तो आपको अल्टीमेट सब कुछ बताता है इस सृष्टि स्थिति प्रलय के बारे में विश्व ब्रह्मांड का विश्व ब्रह्मांड की रचना के बारे में तो वह तो एकदम मॉडर्न से मॉडर्न थिरी होगी वही उसके साथ में मैच करेगी तो निकोला टेस्ला जिस समय वह जो समय था 1900 18955 वे का समय उस समय यह जो दो थिरी है आज की 20th सेंचुरी की दो थिरी जो कि हमको सही सही बताती है कि कॉस्मो का स्वरूप क्या है मैटर एनर्जी टाइम और स्पेस का स्वरूप क्या है यह क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी वो उस समय नहीं थी इसलिए निकोला टेस्ला की अंडरस्टैंडिंग जो थी वो थोड़ी सी कम थी जो कि वेदांत को जो फुल फ्लेज वेदांत है जो कि रेडिकल वेदांत है वेदांत के कॉस्मोलॉजिकल रेडिकल आइडियाज है उसको वो एक्सेप्ट नहीं कर पाया इसलिए स्वामी जी वापस आए तब थोड़े से डिस पॉइंट हो गए थे किंतु बात यह नहीं थी कि स्वामी जी का अंडरस्टैंडिंग ऑफ वेदांत या तो फिर स्वामी जी जिस तरह से हमारे वेदांत को इंटरप्रेट करते हैं वो गलत है बात वही है कि उस समय उनका इतना एडवांसमेंट नहीं हुआ था फिजिक्स और कॉस्मोलॉजी में कि वेदांत को एज इट इज ग्रहण कर पाए किंतु जो भी है निकोला टेस्ला के साथ में स्वामी जी की एक दो बार इस तरह से मुलाकात हुई थी एक सारा बन हार्ड करके एक है जो कि बड़ी ही पॉपुलर उस समय की यह एक्ट्रेस थी परफॉर्मर थी तो वो और टेस्ला और स्वामी जी इन तीनों को एक कोई एक किसी एक गेस्ट के यहां पे इन तीनों को इकट्ठा किया गया अभी वहां पे भी जो धनी लोग होते हैं उनको लगता है कि हम लोग बड़ी-बड़ी पार्टी दे और बड़े ही प्रख्यात लोगों को इकट्ठा करें जैसे कि न्यूज़पेपर में आए कि क्या रे ये पार्टी हुई थी ये सोशल गैदरिंग हुआ था और यहां पे ये सब सेलिब्रिटीज इकट्ठा हुए थे तो ये सारा बनाड़ ये निकोला टेस्ला जो कि अपने अपने क्षेत्र के महारथ थे टेस्ला कहो तो साइंस और टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग का इंडस्ट्रियल इजेशन का और ये सारा बर्नहार्ड है परफॉर्मर थी एक्ट्रेस थी और रंग मंच के ऊपर में वो जो नाटक का वो ये ये करती थी एक्टिंग शी हैज बिकम एक्सट्रीमली पॉपुलर तो ये दोनों के साथ में स्वामी जी को लाया गया ईस्टन मिस्टिक तो अब ये तीनों का जो कन्वर्सेशन हुआ इसके बारे में भी एक रेमन सेंस लिखा गया है वो इस तरह से जैसे कि बिजली चमकती है जैसे कि ये इंटेलेक्चुअल जो कि श्रेष्ठ होते हैं अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पे जो आरूढ़ होते हैं वे लोग जब एक दूसरे के साथ बात करेंगे तो उस वार्तालाप का लेवल कैसा होगा वो किस माने किस लेवल प जाकर के उनका इंटेलेक्ट एक दूसरे के साथ में वो कन्वर्सेशन करेगा इंटरेक्शन करेगा यह सब हम अनुमान करके देख सकते हैं आजकल हम देखते हैं कि जैसे ये g20 वगैरह हुआ तो यह सब बड़े-बड़े प्रेसिडेंट प्राइम मिनिस्टर ये लोग इकट्ठा होते हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं ना कि आपस में डिस्कस करते हैं किंतु क्या है ये बड़े ही फॉर्मल ओकेज होते हैं मीडिया के सामने आपको बड़ा ही सोच समझ करके बोलना होता है किंतु उस समय तो इस तरह का एक्सट्रीम मीडिया का डर या तो फिर यह सब तो नहीं था आप इकट्ठा होते हैं तो बड़े ही रिलैक्स होकर के आप बात कर सकते हैं तो उस लेवल उस परिस्थिति में किस तरह का डिस्कशन होता होगा हम अनुमान करके कह सकते हैं तो यहां पर स्वामी जी क्या कहते हैं कि यदि मनुष्य भी है उसका भी यदि मृत्यु होता है उसको दफन किया गया या तो फिर उसको चिता में अग्नि दाह दिया गया वो उसी एलिमेंट में वापस चला जाएगा जिस एलिमेंट से उसका शरीर ओरिजनली बना था इफ दिस अर्थ थडा देखिए ये कॉस्मोलॉजी आज जिस तरह से हम समझते हैं यहां पर स्वामी जी कहते हैं यदि पृथ्वी का विनाश होता है अभी उस समय तो ऐसा माना जाता था कि पृथ्वी जो है व हां ऑफकोर्स वेस्टर्न साइंस उस बाय दैट टाइम गैलीलियो है ना कि कोपरनिकस है उन्होंने ये तो ठीक है कि प्रूव कर दिया था कि पृथ्वी एक छोटा सा हिस्सा है ब्रह्मांड का और उसका विनाश हो सकता है किंतु किसी धार्मिक व्यक्ति कोई रिलीजियस पर्सन यह सब स्वीकार करें इसके बारे में बोले यह बहुत बड़ी बात विदेश में मानी जाती थी क्योंकि यह कैथोलिक चर्च हालांकि साइंस और टेक्नोलॉजी बहुत आगे चले गए थे कैथोलिक चर्च अभी भी मिडिवल एज में जी रहा था कि 4000 साल पहले पृथ्वी की रचना की है जो कुछ भी आप देखते हैं हाथी घोड़ा पेड़ पशु पक्षी बादल समुंदर पहाड़ चट्टान यह सब भगवान ने एक ही साथ में रचना कर दिए थे य लशन का कांसेप्ट नहीं है उसके बेसिक एलिमेंट्स जिसमें से सब कुछ कांस्टीट्यूट हुआ है उसका आईडिया नहीं है तो उस समय उस देश में जाकर के यह कहना कि पृथ्वी का विनाश हो जाएगा यानी ये एलिमेंट्स में से सब कुछ आया एलिमेंट्स में समाहित हो जाएगा पृथ्वी का भी विनाश हो सकता है ये एकदम एडवांस आइडियाज की बातें करने वाले हैं वो स्वामी जी को पढ़ सुन कर के वहां के जो धार्मिक जिज्ञासु है धर्म पिपासु जो लोग है उनको किस तरह का रोमांच होता होगा वो हम अनुमान करके सोच सकते हैं तो स्वामी जी कहते हैं इफ दिस अर्थ डाइस जद यह पृथ्वी का विनाश होता है इट विल गो बैक टू द एलिमेंट्स फ्रॉम व्हि एलिमेंट्स व्हिच गेव इट फॉर्म उस एलिमेंट में वह चली जाएगी समाहित उस एलिमेंट में वो बिखर जाएगी जिसमें से इसका जन्म हुआ है पृथ्वी किस तरह से फॉर्म हुई है पता है ना आज से तकरीबन चार 400 करोड़ सा साल पहले 4 बिलियन इयर्स इंग्लिश में अभी 4 बिलियन का 400 करोड़ होता है ना कि जो जो कुछ भी इतने साल पहले एक बड़ा ही एक गैस का क्लाउड एक पदार्थ एक मैटर क्लाउड एक जोर से गोल-गोल घूमने लगा और घूमते घूमते उसके बीच का हिस्सा वो सूरज में परिणत हुआ और उसके चारों ओर जो वो घूम रहा था गैस क्लाउड उसमें से ये पृथ्वी है मंगल ग्रह है जुपिटर है सैटर्न है ये प्लूटो है ये सब ग्रह उसके चारों ओर बने तो ये जो गैस क्लाउड था वो एलिमेंट्स का क्लाउड जो पीरियोडिक टेबल पर जो एलिमेंट्स है उसमें से यह क्लाउड बना था और उसी में से य पृथ्वी की रचना ई पृथ्वी का विस्फोट होगा तो उसी क्लाउड में एलिमेंटल क्लाउड में वह वापस चला जाएगा बिखर जाएगा दिस इज व्ट इज कॉल्ड डिस्ट्रक्शन गोइंग बैक टू द कॉज इसको कहते हैं प्रलय अपने ओरिजिनल फॉर्म में अपने सूक्ष्म स्वरूप में वापस चला जाना ठीक है तो आज यही तक कल फिर से ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु