Transcript
ओम संस्थापक अवतार कल हम मंत्र समिति पुस्तक में से एक प्रसंग का पाठ कर रहे थे प्रसंग वैसे तो लगता है बहुत ही छोटा सा और बड़ा ही सामान्य मैन केदार बाबू को कहा की तुम लोग स्वदेशी वगैरा जो कर रहे हो तो और बढ़िया सा एक आश्रम भी बनाया है और मां कहती है हम लोग जब कोलकाता जाते हैं और कोलकाता से जब जयरामबाती आते हैं तो हमारे विश्राम के लिए एक बहुत ही सुंदर जगह बन गई है तो अच्छा होगा की मैं वहां पर ठाकुर की स्थापना कर डन तुम लोगों को प्रतिदिन भोग अनुभव आरती और पूजा करनी होगी तो यह बात सुनकर के हमने देखा की केदार बाबू जो वहां की स्थापना है तो किंतु उनका जो टेंडेंसी हमने देखा की एक सेकुलर एक सर्विस ओरिएंटेड एक अस्ति और टेंडेंसी था कठोरता करने का एक भाव था की शारीरिक कष्ट जो है वो करके ही हमारा आध्यात्मिक आध्यात्मिक उन्नति से भी ज्यादा ये जो देश प्रेम देश की सेवा का वो जो उसे समय चल रहा था पूरे भारत देश में तो उनका था की कठोरता करके संयम करके निष्ठापूर्वक हम देश का पुनः उत्थान कर पाएंगे और स्वामी जी को पड़ा है देखा स्वामी जी कर्म योग के बड़े में इतना कुछ कहते हैं तो उन्होंने जब मैन ऐसा प्रतिदिन भोग करना होगा प्रतिदिन आरती करनी होगी तो यह थोड़ा सा उन्होंने मां में क्या सोचा पता नहीं किंतु मां को डायरेक्टली माना नहीं करके एक जगह पर माना करते हैं मां जब रामेश्वरम से वापस आई थी मैंने वो रामेश्वरम शिवलिंग के वह फोटो लेकर आई थी बोला की इनकी प्रतिदिन पूजा करना तो उन्होंने तो स्पष्ट का दिया मां वैसे तो हम ठाकुर की प्रतिदिन पूजा करते हैं ऊपर से यह शिवलिंग की भी पूजा फोटो की पूजा आई है इतना सब कुछ कैसे संभव है तब मैन कहा ठीक है चलो ठाकुर घर है वहां पर फोटो को टिंग के रखना तो एक बार तो माना कर दिया था किंतु अब जब ठाकुर की पूजा करने की बात है तो फिर माना करने से पहले सोचना पड़ता है तो इनडायरेक्ट उन्होंने कहा की यदि स्वामी जी रहते तो आज राष्ट्र प्रेम का देश सेवा का कितना कम करते हैं नहीं की वो मंदिर बावत है क्योंकि स्वामी जी ने जी तरह से भारत में उन्होंने लेक्चर फ्रॉम कोलंबो को अल्मोड़ा हम पढ़ते देखेंगे जब वो वहां पे श्रीलंका में उन्होंने अवतरण किया अमेरिका से वापस आने के बाद में शिकागो पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन में विश्व विजय होने के बाद में और पूरे भारत में घूमे तो उन्होंने जो एक एथिकल मोरल जो एस्पेक्ट है रिलिजन का इस के ऊपर में भर दिया थम जगत पैच कर्म ज्ञान भक्ति और ज्ञान इन कर युगों का समन्वय करके आध्यात्मिक जीवन हमारा किस तरह से संपूर्ण परिपूर्ण हो और साथ में ही विश्व को हमारी साधना का बेनिफिट कैसे मिले हमारी साधना से विश्व का कल्याण किस तरह से हो इन दोनों पहलुओं को उन्होंने एक मंत्र आत्मनमुक्षार्थम जगत हटाया कर लोगों का अनुष्ठान करके हमको बताया था उन्होंने ऐसा नहीं कहा की भक्ति जो है वो एक प्रेम भक्ति हनी चाहिए रहा तुमि का भक्ति हनी चाहिए नहीं की विधि वडीय भक्ति विधिवादी यह भक्ति का स्थान है रामकृष्ण सॉन्ग में भी है हमको पता है की बेलूर मठ के आसपास ये जो बाली जो जी जगह पे हमारा मठ स्थित है वहां रहने वाले ब्राह्मण के मां में था की अरे यह तो स्वामी जी तो यह सब विदेशी लोगों के साथ में मिलते जलाते हैं ये वो विदेशी बातें सब करते हैं तो वो कोई ट्रेडिशनल हिंदू मठ तो नहीं यह बेलूर मठ कुछ इस तरह से दूसरे ट्रेडिशनल हिंदू मठ होते हैं तो उसे समय स्वामी जी को एक दर्शन हुआ की गंगा में से मां दुर्गा निकाल रही बाहर ए रही है तो उन्होंने ये बात देख कर के ये दर्शन उन जब उनको हुआ तो उन्होंने राजा महाराज को कहा की देखो मैंने देखा की बेलूर मठ में मां दुर्गा का अवतरण हो रहा है शुभागमन पद्रमणि हो रही है तो आगमनी हो रही है तो यह सुनकर के राजा महाराज ने भी कहा हां भाई मुझे भी तो ऐसा दर्शन हुआ है तो उसे समय से उन्होंने दुर्गा पूजा का प्रारंभ किया और जी तरह से हमारे शास्त्र में कहा गया है इस तरह से स्टेप बाय स्टेप बिना किसी चेंज के बिना किसी मिस्टेक बिना नया कुछ डेल हुए पूर्ण परंपरागत रूप से बेलूर मठ में दुर्गा पूजा का अनुष्ठान हुआ और उसको देखकर के आसपास के जितने भी ब्राह्मण थे पंडित थे यह सड़क थे सब के मां में स्थिर हो गया बिना बेलूर मठ जो है वही भारतीय हिंदू परंपरा को अनुसरण कर रहा है और समय के अनुसार जो कुछ भी आवश्यक चेंज करने होते हैं वाक्य कार्यकाल में नहीं की आंतरिक साधना में वो ये लोग कर रहे हैं तो तब से लेकर के यह जो ट्रेडिशनल कम्युनिटी जो है उसमें भी हमारा एक प्रेस्टीज कहो ना की एक हमारा हमारे एक हमारे प्रति एक श्रद्धा उत्पन्न हो गए तो केदार बाबू कहते हैं की किंतु स्वामी जी ने से टाइम और किसी चेन्नई में शशि महाराज को भेजो था वहां पे पूजा पाठ का था क्योंकि शशि महाराज का तो वह नेचर ही था किंतु जैसे अमेरिका में है वेदांत सोसाइटी की स्थापना की कनखल वाराणसी में सेवा शर्म की स्थापना की गंगाधर महाराज को लेकर के अनाथ आश्रम रैली एक्टिविटी वगैरा करवाई तो ऐसा तो उन्होंने नहीं कहा की पहले मंदिर की स्थापना करो पहले ठाकुर की पूजा पूजा प्रारंभ करो बाद में देश सेवा का कम करना बात यह है की अपने हृदय में ठाकुर के प्रति श्रद्धा भक्ति रखो और साथ-साथ में देश सेवा देशहित उसका कार्य करते जो बिना पॉलिटिक्स में गए हुए तो यह स्वामी जी का स्पष्ट मैसेज था तो जब मैन ठाकुर को स्थापित करने की बात की केदार बाबू ने कहा की स्वामी जीजाजी होते तो देश सेवा का कार्य कितना होता तो यह सुनकर के मैन क्या कहा यदि आज नरेंद्र जिंदा होता यदि आज नरेंद्र जीवित होता मेरा नरेन मां कहती है आज यदि मेरा नरेन जीवित होता तो यह ब्रिटिश गवर्नमेंट उसको जय में पूरा करके रखती क्यों क्योंकि नरेंद्र है मियां में से निकली हुई जिसको हिंदी में कहते हैं नंगी तलवार अर्थात की एक ऐसी तलवार जो की अपने शत्रुओं का सर जो है धड़ से अलग कर देने के लिए संपूर्ण रूप से तैयार है अभी शत्रु तो ऐसे नहीं है की ब्रिटिश लोक शत्रु है देखिए बाद में मां कहती है की ये लोग भी तो हमारे मेरे खुद के बच्चे हैं ऐसा मैन कहा है किंतु देखिए की ये किस तरह से मां ये लॉजिक बिल्डअप करती है हालांकि मां को हम लॉजिक के साथ में नहीं है एसोसिएट करते हैं स्वामी जी लो जी कल बात करते थे स्वामी जी साइंटिफिक अली सब समझते थे ठाकुर हालांकि भाव से प्रवश हो करके बोलते थे मां का मां के भाव का आवेश आने से उनके मुंह से अनर्गल ये धार्मिक उपदेश बदलते रहते थे किंतु उसके पीछे मां का तो एक जगदंबा का एक लॉजिक राहत ही था किंतु मां जो कुछ कहती है हमको लगता है अरे मां ऐसा हमारी मां शारदा कहां यह साइंटिफिकली लॉजिकलशास्त्र के नियम अनुसार सब कुछ समझाएंगे किंतु मैंने देखा है जितना मां को स्टडी करेंगे मां जोक भी कुछ कहती है स्टेप बाय स्टेप देखेंगे तारक शास्त्र के नियम के अनुसार साइंटिफिक लॉजिक रीजनिंग जो कहते हैं उसके अनुसार बिल्कुल परफेक्ट होता है तो मैन सबसे पहले कहां नरेंद्र जीवित होता तो कंपनी अर्थात की अंग्रेज सरकार उसको जय में दाल देती यहां पे दो चीज समझनी है स्वामी जी ने जी समय यह देश प्रेम की देश हिट की बात की थी उसे समय यह आंदोलन की शुरुआत मंत्र हो रही थी किंतु जी समय ये लोग बातें कर रहे हैं ये केदार बाबू और मां ये समय होगा तकरीबन जैसे यहां पे लिखा है 1911 1915 बस 1911 के आसपास का समय है तो उसे समय यह स्वतंत्रता आंदोलन ने इतना जोर पकड़ लिया था इतना दृढ़ बढ़ मूल हो गया था भारत की भूमि में किस अंग्रेज सरकार डर गई थी इससे पहले स्वामी जी के समय में क्या होता था हमको पता है की ये इंडियन नेशनल कांग्रेस है उसकी स्थापना एक अंग्रेज अधिकारी ने ही की थी पर जैसे की वो सब इंडियन लोगों को अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों को इकट्ठा करो और गवर्नमेंट के अगेंस्ट में इनकी का ग्रीवेंस है क्या प्रॉब्लम कंप्लेंट है वह सुनो और ऐसे कुछ लोगों की कंप्लेन को समाधान करने का पर्यटन करो जिससे की क्या होगा कंप्रेसर कुकर में जैसे सिटी बजती है ना तो प्रेशर निकाल जाता है तो वैसे ही यह यदि जान आंदोलन खड़ा होगा बहुत व्यापक तो उसको संभालना मुश्किल हो जाएगा किंतु इस तरह से अंग्रेजन के बौद्धिक गुलाम अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों को एक कांग्रेस बना करके एक कांग्रेस पार्टी बना करके इकट्ठा करेंगे और इनकी बात थोड़ा-थोड़ा सुनते रहेंगे बीच-बीच में तो ये प्रेशर बिल्ड अप नहीं होगा एक जान आंदोलन अंग्रेज सरकार के सामने खड़ा नहीं होगा ऐसा एक साइकोलॉजिकल एक ट्रिक लगा करके बुद्धि लगा करके ये अंग्रेज इसकी स्थापना हुई थी इंडियन नेशनल कांग्रेस की जी इसी कांग्रेस को बाद में महात्मा गांधी बाल गंगाधर तिलक जैसे जो मैंने सक्षम देश नेता थे जवाहरलाल नेहरू कहो ना की फिर ये सरदार पटेल को हो हमारे सुभाष चंद्र बस कहो इन सब ने मिलकर के इसी वही कांग्रेस जो की ये प्रेशर रे करने के लिए बनाई गई थी इस कांग्रेस के मृतक डे में प्राण संचार किया और इसी कांग्रेस के मध्य से हमने आजादी प्राप्त की तो वह तो यह जो प्राण संचार करने की बड़ी ए चुकी थी जब स्वामी जी बोल रहे थे तब ऐसा था की कुछ अंग्रेजी पढ़े हुए लिखे लोगों को क्रिटिसाइज करने दो गवर्नमेंट को अच्छा है लोग उनको सुनकर के खुश हो जाएंगे और कुछ और ज्यादा कोई तकलीफ नहीं करेंगे रिवॉल्यूशन नहीं लेंगे जैसे की ब्रिटेन में रिवॉल्यूशन आया तो वहां के राजा का सर कैट दिया जैसे की फ्रेंच रिवॉल्यूशन आया तो वहां के भी राजा को मार दिया था तो इसे रिवॉल्यूशन आता है तो फिर गवर्नमेंट को संभालना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है फ्रेंच रूस रिवॉल्यूशन में भी ऐसा हुआ वहां के जर जो था उसको गली मार दी तो रिवॉल्यूशन आने से बड़ा डेंजर है किंतु जब तक कुछ लोग बातें करते रहते हैं बौद्धिक गुलाम जो लोग होते हैं तब तक कोई दिक्कत नहीं है तो स्वामी जी इस युग में आए थे 1896 18 3697 98 था की अंग्रेज गवर्नमेंट थोड़ा बहुत क्रिटिसिजम वो अलाउ करती थी किंतु 19102 1902 में यह जो बांग बांग का जो एक मूवमेंट स्टार्ट हुआ और वहां से यह स्वतंत्रता संग्राम ये कुछ ड्राइंग रूम में से कुछ अंग्रेजी पढ़े हुए लिखे हुए लोग जो है उनके पास से निकाल करके जनसाधारण में भारत के मिट्टी के प्रति आ कान में ये स्वतंत्रता संग्राम ने नवजीवन संचारित किया जैसे स्वामी जी कहते हैं एन की जयंती इस अवकेनिंग आफ्टर ए लॉन्ग स्लीप लॉन्ग सलूंबर थाउजेंड एयर लॉन्ग स्लीप ये भारत की जो भूमि है भारत देश है हमारी मातृभूमि हमारी जननी 1000 साल की लंबी निद्रा के बाद में फिर से एक विराट महाकाल शरीर धरण करके दुर्गा के जैसे आठ हाथ और प्रत्येक अर्थ में एक अस्त्र राहत है एक संघार करने का एक हथियार राहत है तो प्रत्येक हाथ में एक सहर करने का हथियार लेकर के यह भारत की मातृभूमि जननी फिर से जागृत हो रही थी तो यह 1911 का वह समय था की अंग्रेज सरकार इतनी डर गई थी यह क्रांतिकारी से स्वतंत्रता चाहिए ऐसी बात करने वाले लोगों से की जैसे ही कोई ऐसी बात करेगा सीधा सीधी उनको जय में दाल देगा इसीलिए मैन मां का एक प्रैक्टिकल सेंस है की स्वामी जी ने जो कुछ भी कहा लेक्चर फ्रॉम कोलंबो तू अल्मोड़ा वो 1896 में ठीक था 1897 1898 था किंतु यह 1911 में इस तरह का लेक्चर एक भी लेक्चर देने से सीधा जय में जाना पड़ता हालांकि स्वामी जी ने खुद कहा है आखिर के समय में जब ये मातृभूमि पुनः जागृत हो रही थी एक्चुअली जागरण प्राण सुखना का कार्य ये जो वो तो स्वामी जी ने खुद ने किया है ना तो स्वामी जी के प्रयत्नों से जब मातृभूमि में जो जो जागरण ए रहा था उसे समय स्वामी जी को ऐसा लगा था की अंग्रेज सरकार शायद उनको जय में डेल बंदी बनाए या तो उनका मर्डर भी कर दे क्या पता ये अंग्रेज लोग तो कुछ भी कर सकते हैं तो वह स्वामी जी उसे समय बार-बार कहते हैं मुझे गली मारो जल्दी साहस से तो मार के देखो मुझे बोली अमर हमारे बुके गली चलूं ऐसा स्वामी जी बार-बार बोलते थे साहस है तो मुझे गली मार के देखो फिर देखो भारत में क्या होता है इस तरह का एक रिवॉल्यूशन आएगा की एक ही महीने में एक ही सप्ताह में ऐसा एक व वंतूर खड़ा होगा ऐसा ही तूफान खड़ा होगा की भारत के भाग्य विधाता स्वामी जी को मार दिया इस ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इसके बाद में ब्रिटिश गवर्नमेंट टिकेगी ही नहीं इतना पावरफुल रिवॉल्ट होगा इतना पावरफुल रिवॉल्यूशन आएगा तो स्वामी जी उसे समय कहते थे यदि एक ऐसी आशंका हो गई थी आखिर आखिर में 1901 1902 उसे समय में जब स्वामी जी सेकंड टाइम अमेरिका से लौटे थे और यह बांग भांग आंदोलन हुआ अभी मुझे एग्जैक्ट डेट मुझे नहीं पता है मुझे एक बार देखना होगा की फोर्थ जुलाई को स्वामी जी ने शरीर त्याग किया तो ये आंदोलन एग्जेक्टली कब स्टार्ट हुआ तो जो भी है तो उनको मतलब वो जो जिसको कहते हैं ना की सुबह की लालिमा छ रही है आकाश में सूर्योदय होने में ज्यादा डेरी नहीं है वैसे ही भारत में ये स्वतंत्रता अपने के लिए उत्पन्न था आकांक्षा प्रकट हो गई है बस उसके लिए जो आंदोलन है मूवमेंट है रिवॉल्यूशन है रिवॉल्ट है वो अभी शुरू होना बाकी है तो उसे समय यदि स्वामी जी को लगता था की ब्रिटिश गवर्नमेंट शायद उनको बंदी भी बना दे शायद उनको गली भी मार दे तो बार-बार कहते हैं यदि मुझे गली मारेंगे तो भारत में ऐसा रिवॉल्यूशन आएगा की जो 10 15 20 ऑलमोस्ट 1902 से लेकर के 1948 1947 यह 40 साल की हमारी ऑलमोस्ट 45 एयर की हमारा फ्रीडम मूवमेंट चला तो 45 41 साल नहीं चल करके पी इस दिन में ही हमको आजादी मिल जाति इतना गुस्सा लोगों में प्रकट हो जाता तो मां का इस पर एक तो सबसे पहले तो यह प्रैक्टिकल बात बता दी मां को ऐसा नहीं है की न्यूज़ पेपर नहीं पड़ती तो हम हम लोग आज तक जैसे मेरा है की मुझे न्यूज़ पढ़ने का एक बड़ा ही शौक है और मैं सब समय एक अपडेट एक रखना हूं की इंटरनेशनल क्या अफेयर्स हो रहे हैं इंटरनेशनल क्या न्यूज़ है नेशनल क्या न्यूज़ है इस समय सब समय पढ़ना राहत हूं मां हमको लगेगा की नहीं पढ़ पाती थी नहीं मां के पास में न्यूज़पेपर आता था ना ही मां के पास में आज की तरह ये जो मोबाइल पे सब न्यूज़ ऑटोमेटिक ब्रेकिंग न्यूज़ ए जाता था किंतु मां का जो सेंस ऑफ करंट अफेयर्स से वो इतना स्ट्रांग था की यह जो केदार बाबू जो की सपोज तू बी टीचर है मतलब करंट अफेयर्स न्यूज़ के बड़े में उनको सब पता है वो जितना नहीं समझते इतना मां समझती है मां इतना प्रैक्टिकल है तो सबसे पहले तो एक प्रैक्टिकल स्टेटमेंट दे दिया की नरेंद्र होता तो उसको ब्रिटिश गवर्नमेंट बंदी बनाकर के रख दी फिर मां कहती है अमित देखते पर तुम ना मैं वो देख नहीं पाती मां श्राप दे देती मां ऐसा नहीं देख पाती क्योंकि निश्चय मां का तो हृदय का प्राण है नरेन उसको यदि बंदी बनाकर के गवर्नमेंट ले जाए और अभी नरेंद्र कुछ बोले एन बोले श्राप देती वो उसे दिन की घटना हमने एक बार कहीं थी की मां जय राम बेट में थी पता चला की वहां एक क्रांतिकारी को पकाने के लिए पास के गांव में पुलिस वाले गए हैं तो क्रांतिकारी नहीं था तो उसकी बीबी को ये लोग पकड़ करके ले गए तो अभी तो उसे समय की प्रथम के अनुसार महिलाओं को भद्रागों की अच्छे घर की महिलाओं को तो आप पालकी में क्या इस तरह से ले जाना चाहिए जिससे की उनकी वो क्या है की मॉडेस्टी कहो की उनकी ये जो एक उनके प्रति जो रिस्पेक्ट है वह बजाएं रखें तो मैंने रिस्पेक्ट फूल को ले जाना चाहिए ऐसा नहीं करके भरे खुला बाजार में हाथ पकड़ कर ले जा रहा है तो यह बात सुनकर के मां को इतना भयानक क्रोध क्रोधित हो गई मां इतना गुस्सा ए गया मैन कहा की क्या कोई वहां पे कोई मर्द का बच्चा नहीं था की दो झट मार के पुलिस ऑफीसरों को दो झट मार के वो बेचारी औरत की रक्षा करता तो इतना क्रोधित हो गई थी मां और आसपास के मां के आसपास वी मां के भाई इन नलिनी मां को वगैरा परिवारजन यह वर्धा महाराज वगैरा मां के संतान त्यागी संतान वह लोग भी बेचारे थोड़े से डर गए की मां ने क्रोध किया है तो मां पता नहीं शराब भी दे दे किसको पता किंतु शाम तक खबर आई की उसे महिला को उसे औरत को पुलिस वालों ने रहा कर दिया है छोड़ दिया है तब कहानी जाकर के मां शांत हुए और साथ में ही मैन कहा की क्वीन विक्टोरिया का पूनिया था तो इतने दोनों तक ब्रिटिश गवर्नमेंट चली किंतु अब उनके दिन जो है वह भर गए हैं उनके दिन अब खत्म हो गए हैं तो मां कहती है की यदि नरेंद्र को जय में पर देते बंदी बना लेते तो मैं देख नहीं पाती मैन आगे कुछ नहीं कहा है किंतु हमको पता है की वो बदला स्वरूप मां का वो हरीश बोलकर के ठाकुर का वो जो पागल भक्ति था वो उसे समय मां शायद कमरपुकुर में थी ठाकुर की महादी के बाद में तो वो कम और कुकर जाकर के मां को टांग कर रहा है मां के पीछे दौड़ रहा है तो मैन एक-दो बार तो उससे जान बचाने का पर्यटन किया थोड़ा सा इधर उधर दौड़ करके फिर वो उसके पीछे मां के पीछे फिर भी दौड़ रहा है तब मैन वो विकेट स्वरूप कर लो स्वरूप बांग्ला स्वरूप धरण किया उसकी जब पकड़ी और जोर से छोड़-छोड़ करके उसके मुंह पे अच्छे से चपत मार दी कुछ तब कहानी जाकर के हरीश ठंडा हुआ तो मां का यह जो सौम्या स्वरूप सरस्वती स्वरूप लक्ष्मी स्वरूप वह हमने जो देखा है तो साथ-साथ में ही मां का यह काली का स्वरूप दुर्गा स्वरूप बांग्ला स्वरूप भी है और वह स्वरूप जल्दी प्रकट होता तो ब्रिटिश गवर्नमेंट का क्या होता ऐसा कुछ ठीक नहीं तो मैन यह दूसरी बात कहीं की पहले तो प्रैक्टिकल चीज की नरेन को यह जय में पर देते आ बंदी बना लेते दूसरा की एक जो गहन मां का जो स्वरूप है जिसके बड़े में मां बार-बार नहीं कहती किंतु हमको रीडिंग बिटवीन डी लायन मैन इंफ्रिंजिंग करना पड़ता है दो सेंटेंस के बीच में पढ़ कर के मैन नहीं जो कहा है वो अपने उनको अपनी अनुमान से मां से मां के पास से कहलवाना पड़ता है तो मैं वो देख नहीं पाती फिर मां कहती है नरेंद्र जैसे की म्यान में से निकली हुई तलवार है विलय अमेरिका से वापस आकर के मुझे कहा की मां आपके आशीर्वाद से मैं हनुमान की तरह महावीर हनुमान की तरह वह समुद्र लाख करके जंप लगा करके लंका में नहीं गया था उन्हें के जहाज में बैठ करके मैं वहां पे गया और उनको ठाकुर का वेदांत का उपदेश दिया अभी देखिए की इस बात के पीछे में कितना गहन एक संदेश है मैन कहा है की शेख ने वो देखना मां ठाकुर की महिमा स्वामी जी कहते हैं की वहां पर भी देखा मां की ठाकुर की क्या महिमा अच्छा पहले यह की आपके आशीर्वाद से मैं समुद्र लागकर के नहीं गया उनके जहाज में बैठ के गया और फिर वहां पर देखा की ठाकुर की क्या महिमा है कितने ही आध्यात्मिक जिज्ञासु आध्यात्मिक पिपासु मुकसू न नई मेरे पास में आकर के ठाकुर का संदेश उन्होंने किया है ठाकुर की दीक्षा ग्रहण की हालांकि स्वामी जी ने कहा था की मैंने इस तरह से तो कोई दीक्षा नहीं दी ओंकार ने बहुत सारे लोगों को दीक्षित किया है वो एक दूसरा टॉपिक है किंतु बहुत सारे लोगों ने आध्यात्मिक टीचिंग आध्यात्मिक उपदेश स्वामी जी से प्राप्त किया हैं अभी देखिए की मैन ऐसा क्यों कहा की नरेंद्र जो है वो एक तलवार की तरह है शिक्षक एक रुद्रा तलवार की तरह है और स्वामी जी क्यों ऐसा कहते हैं की मैं महावीर की तरह महावीर हनुमान की तरह वहां पे नहीं गया उनके जहाज में बैठ के गया हूं क्योंकि यदि स्वामी जी महावीर हनुमान की तरह हो वहां जाते हैं तो उसको लंका की तरह जलाकर के ए जाते हैं फिर जैसे वो रावण ने जी तरह से सीता का हरण किया है तो इसके लिए रावण को तो दंड मिलन ही चाहिए उसकी जो नगरी है उसका जो राज्य है उसको जलाकर के रख कर दिया तो यह जो विदेशी मास्टर है हालांकि अमेरिका ने भारत पर राज्य नहीं कर रहा था किंतु थे तो सब यही लोग ब्रिटेन से ही तो लगभग अमेरिका गए थे और भारत का खून कस करके यह जो पैसा अर्जित कर रहे थे धन दौलत अर्जित कर रहे थे ब्रिटेन के लोग वही धन जो है वो अमेरिका के स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट होता था और इस की वजह से अमेरिका की प्रोस्पेरिटी बहुत हद तक इससे भी थी भारत में से जो धन लूट गया उसकी वजह से ब्रिटेन और अमेरिका दोनों की तो उनको भी तो दंड मिलन चाहिए तो स्वामी जी एक रौद्र तलवार की तरह यदि समुद्र लाख करके वहां पर गए होते तो अमेरिका को जलाकर के वापस ए गए किंतु उन्होंने इस बार ऐसा नहीं कहा और जैसे बहुत सारे लोगों ने जैसे स्वामी जी से ठाकुर के नाम की दीक्षा प्राप्त की तो वैसे लंका में विभीषण विथ था तो विभीषण ने भी तो भगवान राम का भक्ति था तो एक एक और अमेरिका को जल देते हैं और दूसरी और सबसे कुछ जो कुछ न नई है ऐसे कुछ आध्यात्मिक पिपासु लोग जो है जिसको हम अक्षु कहते हैं सड़क कहते हैं इस ऐसे लोगों को दीक्षा दे दो बाकी के अमेरिका को जल दो ऐसा भी हो सकता है किंतु स्वामी जी ने इस बार ऐसा नहीं कर और जैसे मेरी लुइस है जिसने न्यू डिस्कवरी छह वॉल्यूम में स्वामी जी ने अमेरिका ने जो कुछ किया इसके बड़े में इतना गहन संशोधन करके छह वॉल्यूम लिख है तो मेरी लुइस लिखती है अपने वो अमेरिकन है वो स्वामी अशोक आनंद जी की डिसएबल थी वो लिखती है की स्वामी जी के चरण की राज अमेरिका में गिरी बोल करके अमेरिका की आज की जो प्रोस्पेरिटी है 1960 1970 में न्यू डिस्कवरी किताब में लिखी गई थी तो वो लिखती है की अमेरिका की आज की जो प्रोस्पेरिटी है आज का जो वैभव है आज की जो सक्सेस है वो इसीलिए है की एक विश्व अवतार ने एक विश्व आचार्य ने एक जगत गुरु ने जिसके चरणों की राज अमेरिका की धरती पर गिरी है इसके लिए हमारी आज की सक्सेस है तो स्वामी जी ने वहां पर जाकर के लंका की तरह नहीं कर दिया उनको आशीर्वाद देकर के वापस आए तो यह देखो की मैन और कितनी बड़ी बात कर दी और आखिर में जो मां कहती है सबसे इंपॉर्टेंट स्टेटमेंट तारा हो तो अमर केले की बोलो वह भी तो मेरे ही संतान है अमेरिकन निवासी क्या कहते हो देखो यह जो राम अवतार और उष्ण अवतार के बीच में ये जो एक बहुत बड़ा डिफरेंस हमको देखने को मिलता है इस तरह से कंपैरिजन नहीं करना चाहिए कंपैरिजन उचित नहीं है समय और कल के अनुसार सभी अवतार अपने कार्यकलाप करते हैं किंतु हमारे जैसे लोग हैं जिनको की ये बेड हैबिट हो चुकी है की बीच-बीच में सभी चीजों के बड़े में यह विश्लेषण एनालिसिस करते रहे कांट्रडिक्शन खुश्ते रहे तो यह भगवान राम और यह भगवान राम कृष्णा किस तरह से कांट्रडिक्शन है हालांकि महावीर हनुमान ने लंका को जल दिया किंतु फिर भगवान राम के आशीर्वाद से विभीषण राजा भी बना और बाद में लंका फिर से प्रपोज पर भी हुई किंतु जब स्वामी जी अमेरिका गए तो सिर्फ आशीर्वाद दिया इनको दंड नहीं दिया यह दंड देने की बात मुझे भी एक बार आश्चर्य हुआ था की भारत का जी तरह से शोषण हुआ है ये जो 1940 के बाद में ये जो सेकंड वर्ल्ड वार चल रहा था तब चर्चिल ने ये ठीक किया की भारत में जितना भी धनिया जो है धन एन चावल फिर ये जितना कुछ भी है अन्ना की सामग्री वो सब ये सैनिकों को खिलौने के लिए यूरोप में ले ली जाए तो भारत में से धन एन सब कुछ लेकर के यूरोप में ले गए और इसके बाद में भारत में जो काल हुआ था इसमें 40 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी सोच कर के देखिए की 40 लाख लोगों की मृत्यु तो सिर्फ जिसको की ग्रेट बंगाल फेम कहते हैं इस में हुई इसके अलावा इतने सारे फेम आफ्टर फेम काल के बाद काल आते गए हैं की कल संख्या यदि कोई ठीक-ठीक है रिसर्च करें तो 30 3 4 करोड़ से भी ऊपर होगी इतने भारत के निवासियों को ब्रिटेन ने मार दिया इसी नेगेटिव पॉलिसी बनाकर के फिर भी ठाकुर मां स्वामी जी ने इनको दंड नहीं दिया ऐसा क्यों यह बात एक सोने लायक है क्योंकि भगवान कृष्णा और भगवान राम दोनों ने अपने दुश्मनों को दंड दिया था आशीर्वाद भी दिया था किंतु जो दुष्कर्म किया है उसके लिए दंड भी दिया था तो एक भगवान राम कृष्णा ने ऐसा क्यों नहीं किया मां तो बार-बार कहती है की वे लोग भी तो मेरे संतान है वो एक सुंदर और एक उदाहरण है पहले भी हमने डिस्कस किया था की नलिनी और राजू जो मां की भतीजी है उनको वस्त्र चाहिए थे नई साड़ी वगैरा कुछ चाहिए था तो यह वर्धा महाराज को बोला होगा की महाराज उनको दादा कहते थे की जाकर के हमारे लिए नए वस्त्र खरीद के ले आए तो यह तो स्वदेशी वगैरा करने वाले लड़के करके इनको दे दिया तो यह लड़कियां बड़ी नाराज होकर जाकर के मां को कंप्लेन करके कहती है दादा ने ये जो कपड़ा ले हैं ये जो वस्त्र ले हैं तो खड्डर का मोटा वस्त्र है हमको तो इस तरह से नहीं मिल में बनाया हुआ पतला वस्त्र चाहिए तो ये बात सुनकर के वर्धा महाराज बड़े ही नाराज हो गए बोले अरे हमको तो सबको स्वदेशी व्यवहार करना चाहिए तुमको पता नहीं है ब्रिटिश एन विदेशी चीजों का विलायती की चीजों का हम लोग बहिष्कार कर रहे हैं तो यह बात सुनकर के मैन हंसकर के कहा था की अरे बेटा भी मेरे संतान है वो स्वदेशी करो ना की विलायती कहो और डिफरेंस कहां पे है इसके बाद में किंतु यह महाराज के मां को आघात ना हो उनको कष्ट एन हो बोल करके मैन और किसी भक्ति के थ्रू इन लोगों के लिए मिलकर कपड़ा मंगवा लिया था तो यह बात तो हम मां के जीवन में बार-बार देखते हैं कहते हैं की इतना अत्याचार भारत के करने भारत के ऊपर करने के बाद में भी यह लोग आशीर्वाद ही देते रहे दंड क्यों नहीं दिया तो इसके बड़े में मेरा पर्सनल ऐसा विचार है की यह जो प्रकृति के नियम के अनुसार यह जो राइस और फल ऑफ सिविलाइजेशन जो है यह राष्ट्र समाज और संस्था का उत्थान भी होता राहत है और पाटन भी होता राहत है तो उनके जो दुष्कर्म जो है ये विदेशियों के वही दुष्कर्म ही उनको लेकर के डूबेंगे मां को अपने हाथों से उनको दंड देने की जरूर नहीं रहेगी ऐसा मेरा खुद का एक कंक्लुजन है कांट्रडिक्शन खोज निकाला की मां भगवान राम ने अपने उसको दंड दिया है रावण को भगवान कृष्णा ने दुशासन वगैरा को तो उन्होंने सीधा दंड नहीं दिया किंतु यह जो दुशासन कंस वगैरा जो थे पागल लोग रक्षा दोनों उनको दंड दिया है तो भगवान राम कृष्णा या तो मां शारदा या तो स्वामी जी ने ऐसा क्यों नहीं किया तो मेरा ऐसा कंक्लुजन है की उनके जो दुष्कर्म जो दूसरे लोगों को एक्सप्लोइट करके आज बड़े हुए हैं वही कर्म इनको एलईडी देंगे और फिर स्वामी जी ने अमेरिका में कहा था की यह येलो मॉन्स्टर मैन येलो फीवर ने किया ऐसा कुछ चाइनीस लोगों के बड़े में कहा था की चीन का राइस हो रहा है चीन का उत्थान हो रहा है और यही चाइनीस लोग ये ब्रिटेन को और अमेरिका को सबक सिखाएंगे ये बात आज स्वामी जी ने 19893 1894 में कहीं थी और वही बात आज हम इतने 100 सालों से भी बाद में अब स्वामी जी की दूर दृष्टि देखिए उसे समय चीन की जो स्थिति थी भारत से भी बतर थी किंतु आज चीन मिल्रिटीली इकोनॉमिकली इतना स्ट्रांग हो गया है की अमेरिका भी उसके डर के मारे मोदी को बुलाकर के इतना सम्मान दे रहा है पहले तो मोदी को वीजा नहीं देता था की वो गुजरात में क्या उसने सब अत्याचार किया है लोगों के ऊपर में आज वही मोदी को अपने वह कांग्रेस में बुलाकर के वो सबके सामने वो लेक्चर दिलवाता है मोदी का स्टेट गेस्ट के रूप में सलमान करता है तो ऐसे नहीं करता की मोदी के ऊपर में या भारत के ऊपर में ऐसा कोई प्रेम ए गया हो बात वही है की चीन का डर ऐसा ग गया है की भारत का साथ चाहिए चीन से लड़ने के लिए तो यह बात स्वामी जी ने उसे समय कहीं थी तो यह हमारा कंक्लुजन है उनके कर्म दूसरा है चीन का डर ये चीन ये इनको सबक सिखाएंगे है तो यह इतने पैसेज में मां के देखें की कितना गहन फिलासफी कितना लॉजिकल मां सब कुछ रामकृष्ण मिशन की किस तरह से भाव उतारा है रामकृष्ण संजक किस तरह से कार्य करता है सड़क किस तरह से रहना चाहिए सब कुछ सिविलाइजेशन स्टडी ऑफ सिविलाइजेशन स्टडी ऑफ हिस्ट्री स्टडी ऑफ फिलासफी ये सब कुछ जिसने किया होगा वो भी इतना गहन इतनी गहराई से बात नहीं कर पाएगा जी तरह से मां करती है और एक जगह पे एक स्मृति कथा में मैंने पढ़ा था मैं भूल गया किस महाराज ने लिखी थी किंतु वह महाराज का रहे हैं की जब यह भक्तों मां के पास आते थे और इतने अटपटे क्वेश्चन करते थे इतने परिसर क्वेश्चन करते थे साधना के बड़े में दर्शन शास्त्र के बड़े में वेदांत के बड़े में तो यह महाराज कहते हैं हमने तो शरद महाराज को देखा है इतने विद्वान है लीला प्रसंग जिन्होंने लिखा है रामकृष्ण संग्रह के जनरल सेक्रेटरी है स्वामी जी के गुरु भाई है वो इतना सोच समझकर के जैसे प्रश्नों का उत्तर देते थे यह अनपढ़ मां मैन बाकी रूप से अनपढ़ उमा इतने वो शरद महाराज का उत्तर समझना में हमको तकलीफ होती थी किंतु इतने विद्वान किंतु मां इतने सरल रूप से उसकी व्याख्या कर देती थी इतने सरल रूप से समझा देती थी की इमीडीएटली प्रश्न करता के सभी संदेह का समाधान हो जाता था तो मां लगता है की अनपढ़ है किंतु मां की ये जो फिलोसॉफिकल अंडरस्टैंडिंग जो की साधना से जन्म लेती है यह तो एक है दूसरा की मां स्वयं सरस्वती मैन सरस्वती के पास हम प्रार्थना करते हैं मैं पहले बार रामकृष्ण मिशन में चेन्नई में जॉइन किया था तो चेन्नई वहां पे हमारा एक हॉस्टल है तो मैं देखा था की हॉस्टल के बच्चों को तो क्या है की आरती में संध्या आरती में उपस्थित रहना पड़ता है इस मंगल आरती में तो बेचारे उपस्थित रहते हैं किंतु नजर चारों और भटक दौड़ती रहती है इधर जाएगी उधर जाएगी उधर जाएगी बैठे भी रहेंगे तो स्थिर बैठ नहीं पाएंगे किंतु जब मैंने सोचता हूं की बेचारों को मंदिर में बुलाना उनके ऊपर अत्याचार हो रहा है ऐसा मुझे लगता था किंतु जब सरस्वती पूजा का दिन आया यही सब बच्चे एक साथ में लाइन लगा करके अपनी नोटबुक पेन वगैरा वो मां सरस्वती के सामने रखकर के इतना श्रद्धा भक्ति पूर्वक प्रार्थना कर रहे हैं तो मैंने सोचा की ये भी क्या एक परिवर्तन ए गया सरस्वती पूजा के दिन फिर एक सीनरी साधु ने समझा दिया की वो सरस्वती से प्रार्थना कर रहे हैं की परीक्षा में अच्छे मार्क्स से पास हो जाए मैंने कहा अच्छा ये बात है तो ये वही सरस्वती के जिनके पास से हम विद्या की आकांक्षा रखते हैं विद्या प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं तो वही मां सरस्वती शारदा का स्वरूप धरण करके आई है तो वो हमको इतना गहन चिंतन स्वरूप उपदेश देगी बात करेगी यह बात में कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा