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Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna : Life and Teachings : English & Hindi : 25 Feb 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Shivananda

बिकम्स ए क्सक्रेटेड ग्राउंड एज होली एज इट इज वृंदावन इट इज अ सोर्स ऑफ स्पिरिचुअल इंस्पिरेशन टू पीपल ऑफ ऑल डिनॉमिनेशंस बी दे नॉन डलिस्ट और डलिस्ट शास और वैष्णवास शैवास और तांत्रिकास फॉर ठाकुर प्रैक्टिस्ड ऑल दोज़ मोड्स ऑफ डिवाइन कम्युनियन एंड अटेंड परफेक्शन इन देम दक्षिणेश्वर इज़ ए होली पिल्गिमेज प्लेस फॉर ऑल डिनॉमिनेशंस ऑफ हिंदूइज़्म वेदर दे बी शा और वैष्णवा जनरली व्हाट हैप्स इट्स अ काली टेंपल ओनली शास विल गो देयर दोज़ हु वरशिप काली एंड इट्स अ राधा कृष्णा टेंपल और राम टेंपल देन ओनली वैष्णवज़ विजिट देयर बिकॉज़ दे वरशिप भग वेरियस अवतार्स ऑफ लॉर्ड विष्णु। बट दक्षिणेश्वर नॉमिनली स्पीकिंग इट इज द काली टेंपल बट वी नो दैट इवन व्हेन रासमणि कंस्ट्रक्टेड दैट टेंपल लेटर ऑन द वे श्री रामकृष्ण परफॉर्म ऑल साधना वी नॉट दैट रासमणि आल्सो इंस्टॉल द इमेज ऑफ़ राधाकांत जस्ट बसाइड्स दी इमेज ऑफ़ काली। सो इन बंगाल स्पेशली देयर वास दिस यू नो कंपटीशन देयर इज दिस एडवर्सिटी बिटवीन शाकतास एंड वैष्णवास वैष्णवास आर वेजिटेरियंस शाकतास आर नॉन वेजिटेरियंस वैष्णव इज़ प्रह एम्फेसाइजेस प्योर डिवोशन ऑन द अदर हैंड शाकताप एम्फेसाइजज़ इन वेरियस टाइप्स ऑफ तांत्रिक साधनाज़। सो दिस एडवर्सिटी वी कैन ऑलवेज सी बिटवीन द फॉलोअर्स ऑफ शाकता एंड वैष्णवा इन बंगाल। बट इवन बिफोर श्री रामकृष्ण केम एंड दिस रानी रासमणि शी हैड अ विज़न दैट इंस्टेड ऑफ़ गोइंग टू काशी शी हैड कलेक्टेड ऑल दिस मनी एंड शी हैड हायर्ड ऑल दिस बोट्स एंड हेव देम एंकरर्ड ऑन द बैंक ऑफ गंगा। सो दैट शी विल गो टू का काशी फॉर अ पिल्लगिरी मैच। एंड शी वाज़ अ वेल्थी वुमन। सो शी वांटेड टू डोनेट लार्ज अमाउंट ऑफ़ मनी इन काशी टेंपल्स आल्सो। बट देन शी हैड अ विज़न दैट इंस्टेड ऑफ़ गोइंग देयर शी शुड कंस्ट्रक्ट अ टेंपल ऑफ मदर ऑन द बैंक ऑफ गंगा नियर बाय कोलकाता इटसेल्फ। सो व्हेन शी हैड दिस विज़न वी नो दैट इवन बिफोर श्री रामकृष्ण केम। रामकृष्ण इन हिज़ ओन अवतार परसोनिफाई द डिफरेंट स्कूल्स ही ही सिंथेसाइजेस ऑल दिस डिफरेंट स्कूल्स ऑफ हिंदूइज़्म समवन से दैट चैतन्य वाज़ अह वैष्णव अवतारा समवन माइट से दैट सम दिस इज़ अ शिवा इज़ अ शाक्त अवतारा देवी इज़ अ शाक्त अवतारा वी मे से थिंग्स लाइक दिस बट व्हेन श्री रामकृष्ण केम ही सिंथेसाइज ऑल दिस रिलीजियस ऑल दी स्कूल्स ऑफ हिंदूइज़्म इन ह साधना बट इवन बिफोर श्री रामकृष्ण केम इवन बिफोर श्री रामकृष्ण स्टार्टेड सिंथेसाइजिंग प्रैक्टिसिंग ऑल दिस वेरियस फॉर्म्स ऑफ़ साधना इट वाज़ रानी रासमणि हरसेल्फ हु कंस्ट्रक्टेड द टेंपल ऑफ़ मदर अलोंग साइड द टेंपल ऑफ़ राधाकृष्णा साइड बाय साइड। सो दिस वास द प्रीमोनिशन ऑफ द थिंग्स टू कम एट दैट टाइम हाउ मेनी पीपल विल यू नो टेक दिस करेज टू हैव द टेंपल ऑफ वैष्णवा एज़ वेल एज़ अ टेंपल ऑफ शाक्त साइड बाय साइड वी नो देट व्हेन यू वर्शिप मदर काली यू हैव टू ऑफर देम नॉनवेज दिस ऑफरिंग दैट फ़ूड व्हिच इज ऑफर्ड टू द भोग व्हिच इज़ ऑफर्ड टू मदर काली इट इज़ अ नॉनवेज ऑफर आइदर फिश ऑर यू यू मे ऑफर सम गोट एटसेट्रा फिश और मीट बट द फूड ऑफरिंग भोगर टू भगवान कृष्णा इज प्योर वेजिटेरियन सो यू हैव टू हैव टू हाउसेस ऑफ कुकिंग यू हैव टू हैव टू सेपरेट किचन टू सेपरेट कुक्स वन कुक विल ऑफर दिस आमिश भोग एंड अनदर सेट ऑफ कुक विल ऑफर दिस निरामिश भोग सो दिस दिस वेसल्स इन व्हिच दिस भोग इज़ कुक्ड दैट इटसेल्फ हैज़ टू बी सेपरेट। यू कैन नॉट कुक आमिष इंटू द वेशल इनसाइड व्हिच यू हैव कुक्ड निरामिश भोग। सो एट दैट टाइम टू हैव द टेंपल ऑफ काली एज़ वेल एज़ टेंपल ऑफ राधाकृष्ण विथ इन द सेम कॉम्प्लेक्स इट इज़ अ वेरी डेयरिंग थॉट। एंड टुडे वी थिंक नथिंग अबाउट दिस थिंग्स। बट एट दैट टाइम समवेयर इन 1850 पीपल वेयर सच यू नो ऑर्थोडॉक्स इन देयर बिलीफ। सो ऑर्थोडॉक्स इन देयर एटीट्यूड टुवर्ड्स रिलीजन दैट अब शाक विल नॉट टच तुलसी। ही वाज़ दैट ऑर्थोडॉक्स बिकॉज़ तुलसी इज़ ऑफर्ड टू भगवान विष्णु। सो, दे विल डिस्क्रिमिनेट अगेंस्ट ईच अदर सो मच दैट इट वाज़ डिफिकल्ट फॉर देम टू स्टे टुगेदर। ऑफ़ कोर्स देयर वेर मेनी लिबरल साधकास आल्सो बट इन जनरल वी यूज़्ड टू सी सच ए हार्ड कोर ऑर्थोडॉक्स एटीट्यूड अमोंग दिस फॉलोअर्स ऑफ़ भगवान विष्णु एंड मदर दैट इज़ काली और दुर्गा। वी सी दिस हार्ड एटीट्यूड अह अगेंस्ट ईच अदर। एट दैट टाइम रासमणि डेड रासमणि कंसीवड ऑफ़ कंस्ट्रक्टिंग ए टेंपल व्हेयर राधांतास इमेज विल बी पुट साइड बाइ साइड टु कालीस इमेज। नाउ व्हेन श्री रामकृष्ण केम एंड ही स्टार्टेड परफॉर्मिंग ह साधना ही नेवर डिस्क्रिमिनेट दैट यस दिस इज़ अ शाक्तव साधना एंड दिस इज़ अ वैष्णव साधना एंड दिस इज़ अ वेदांत साधना ही इवन परफॉर्म इस्लाम साधना ही इवन हैड अ विज़न ऑफ़ भगवान जीसस क्राइस्ट। सो फॉर हिम ऑल द गॉड्स ऑल द वेज़ ऑफ साधना ऑल द डिफरेंट पास्ट दे लेड टू गॉड दे वेर सिमिलर इन देयर वैल्यू सिमिलर इन देयर इन देयर यूज़फुलनेस बिकॉज़ एव्री पाथ टेक्स अस टू द सेम गॉड दैट इज हिज फंडामेंटल टीचिंग बट इवन बिफोर श्री रामकृष्ण केम वी सी सच डेरिंग सच लिबरल एटीट्यूड इन रानी रासमणि सो दैट इज़ व्हाई हियर इट इज़ सेड दैट दक्षिणेश्वर इज़ अ तीर्थ नॉट ओनली बिकॉज़ श्री रामकृष्ण परफॉर्म तपस्या ऑफ़ कोर्स युगावतार डिड परफॉर्म तपस्या बट गोइंग बियों्ड द तपस्या ऑफ़ ऑफ द युगावतार देयर इज़ अनदर फैक्टर द डिवोशन ऑफ रानी रासमणि सी व्हेन रानी रासमणि केम टू दक्षिणेश्वर वन डे शी वाज़ सीटेड इन द टेंपल एंड शी रिक्वेस्टेड छोटू भट्टाचार्य दैट इज़ व्हाट दे यूज्ड टू कॉल श्री रामकृष्ण। सो शी रिक्वेस्टेड हिम दैट प्लीज सिंग सम सॉन्ग्स इन प्रेज़ ऑफ़ मदर। सो ठाकुर स्टार्टेड सिंगिंग सम सॉन्ग्स बिकॉज़ इट वाज़ रिक्वेस्टेड बाय अ ग्रेट डिवोटी ऑफ़ मदर। ठाकुर वाज़ नॉट जस्ट योर प्रोफेशनल सिंगर दैट यू जस्ट रिक्वेस्ट हिम एंड ही विल स्टार्ट सिंगिंग इट विल नेवर हैपन। रानी रासण वाज़ अ ग्रेट डिवोटी। दैट इज व्हाई 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ग्रेटेस्ट सात्विक क्वालिटीज। दैट इज श्री रामकृष्ण इन हिम ऑल द सात्विक क्वालिटीज वेर मैनिफेस्टेड। इट वास दैट प्राइमोरियल पावर द ग्रेट मदर ऑफ द यूनिवर्स द सोर्स ऑफ ऑल क्रिएशन हु फ्रीली एंड जॉयफुली एक्सप्रेस हरसेल्फ एज इट वेयर थ्रू द बॉडी ऑफ आवर ठाकुर द ठाकुर इंटेंस स्पिरिचुअल साधनास विल एक्सर्ट देयर इन्फ्लुएंस नॉट ओनली ऑन दिस अर्थ बट आल्सो इन द हायर रीजंस इवन टू हेवन एंड व्हाट ए प्ले ऑफ डिवाइन पावर इट वाज़ दैट वेंट ठाकुर वाज़ इन दक्षिणेश्वर। एवरीडे दिस डायरेक्ट डिसाइपल्स, दिस यंग बॉयज़, दिस हाउसहोल्डर्स दे यूज्ड टू विजिट हिम। एव्री मोमेंट ऑफ़ देम वाज़ अ कंसक्रेटेड मोमेंट, वाज़ अ सेक्रेड मोमेंट दैट बिकॉज़ दे वेयर इन द डायरेक्ट टच विथ द डिवाइन। अदरवाइज इफ वी गो टू टेंपल, इफ वी अह गो टू अनदर पिल्लगिरिमेज प्लेस और इफ यू मीट अदर मॉक्स व्हाट हैप्पेंस दैट यू हैव टू इंस्पाइट ऑफ इन प्रेजेंस ऑफ़ अ होली कंपनी और होली प्लेस यू स्टिल हैव टू डू अ लॉट ऑफ़ हार्ड वर्क योरसेल्फ। यू स्टिल हैव टू डू अ लॉट ऑफ़ साधना योरसेल्फ। बट बीइंग प्रेजेंट इन द कंपनी ऑफ़ श्री रामकृष्णा ऑलमोस्ट ऑल ऑफ़ योर साधना ऑल ऑफ़ योर 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श्रीरामकृष्ण कथामृत

श्री रामकृष्ण कथामृत हमने कल देखा कि किस तरह से ठाकुर यहां पे नरेंद्र के भविष्य के बारे में एक हमको एक एक ग्लिं्स देते हैं। हमको एक झांकी दिखाते हैं। ठाकुर कहते हैं कि यह जो लड़के यहां पे बैठे हैं नरेंद्र वगैरह जो लड़के उनके पास आते थे जो लोग कि बाद में सन्यास ग्रहण कर करके उनके मोनेस्ट उनके सन्यासी शिष्य होने वाले थे। तो ठाकुर ने कहा कि ये लोग जो लड़के यहां पर बैठे हैं वो पिताजी के सामने बैठे हैं तो कैसा लड़का शांत बैठता है किंतु फिर रात को वो चांदनी या तो फिर ऐसे खुली जगह पर जाकर के खेलता है तब उसका सही नटखट स्वरूप बाहर आता है। वो चीखता है, चिल्लाता है। वो तूफान मस्ती करता है। वो क्या नहीं करता। आपने देखा होगा छोटे बच्चे जब खेलते हैं बिना किसी रिस्ट्रिक्शन के तो कितने वो उनमें आनंद होता है। उनमें कितना उत्साह और स्फूर्ति होता है। तो ठाकुर कहते हैं कि नरेंद्र जो है मेरे सामने बैठा है इसलिए अभी शांत है। जब वो चांदनी में जाकर के खेलने की शुरुआत करेगा तब उसके भीतर में जो सही-सही एनर्जी है, सही-सही शक्ति है, वह मैनिफेस्ट होगी। ऐसा कहने से ठाकुर का क्या उद्देश्य है कि जब तक स्वामी जब तक ठाकुर सदैवह इस पृथ्वी पर वर्तमान है वह चाहते थे कि नरेंद्र हम सब समय उनके साथ रहे। कई कि दो-तीन बार ऐसा हुआ कि नरेंद्र जो है ठाकुर को छोड़कर के जाने वाला था। एक बार तो हुआ जब कि ठाकुर के स्वामी जी के पिताजी का देहांत हो गया और स्वामी जी को लगा कि अभी मेरे घर में तो और कोई कमाने वाला नहीं है। मुझे ही सब कुछ चिंता करनी होगी। तब नरेंद्र ने कहीं जाकर के एक बार कहा था कि आसाम के किसी टी गार्डन में चाय के बगीचे में मुझे मैनेजर की नौकरी मिली है। मैं वहां पे जाऊंगा और ये ईश्वर फिशर साधना सब भूल जाऊंगा। मुझे सबसे पहला मेरा काम है थोड़ा बहुत पैसे कमा करके मेरी मां, मेरी छोटी बहन, मेरे छोटे भाइयों की रक्षा करना, उनका पालन करना। तो यहां तक यह बात आ गई थी कि वो कोलकाता छोड़कर के आसाम में जाकर के कहीं टी गार्डन में मैनेजर होने वाले थे। अभी ऐसा होता तो मतलब एक म सोच सकते हैं कैसा एक विचित्र होता। तो ऐसा ऑफ कोर्स ऐसा ऐसा तो हुआ नहीं है। ठाकुर ने जो है नरेंद्र को पकड़ कर रखा था कि जब तक मैं हूं यहां पे ठाकुर कहते हैं तुमको और कहीं नहीं जाना है। और एक बार ऐसा हुआ कि उस बार तो चलो ठाकुर ने कुछ ना कुछ उनकी व्यवस्था कर दी। उस दिन रात नरन आया था ना तो ठाकुर ने कहा नरन ने कहा कि अभी तो मेरे पास में और कुछ नहीं है आप ही मेरी कुछ व्यवस्था कीजिए तो ठाकुर ने कहा ठीक है तुम मां काली को जाकर के मांगो तो मां के पास जाकर के वही मांगा बार-बार ज्ञान दो भक्ति दो वैराग्य दो अच्छा उसके बाद में ठाकुर ने अपनी कृपा करके मां ने भी कृपा करके उनके घर की थोड़ी बहुत व्यवस्था कर दी उसके बाद में जब नारायण प्रतिदिन ठाकुर के पास आता है तो एक दिन ऐसा हुआ उसके मन में वैराग्य का इतना मतलब तब ये हो गया कि आंदोलन हुआ कि वो सोचने लगा कि मैं अभी यहां पे इतने लोगों के साथ में इतनी भीड़ में यहां पे बैठा हूं। मेरी साधना तो ठीक से हो नहीं रही है। चलो मैं बोधगया चला जाता हूं। भगवान बुद्ध ने स्वयं वहां पर तपस्या करके निर्वाण प्राप्त किया है। मैं वहां पर जाऊंगा। मैं भी तपस्या करूंगा। मैं भी निर्वाण प्राप्त करूंगा। क्योंकि आखिर में ठाकुर ने खुद ने तो कहा है कि जीवन का उद्देश्य निर्वाण प्राप्ति है। मैं क्यों यहां पर बैठा रहूं? सब इतने गृहस्थ वगैरह यहां पे आते हैं। ये वो जो काशीपुर गार्डन हाउस की बात है जब ठाकुर को कैंसर हो गया था और उनके जो सब गृहस्थ शिष्य थे उनको वहां पे कोलकाता में ले आए थे ट्रीटमेंट के लिए। तो उस समय जो है नरेंद्र वहां से महापुरुष महाराज के साथ में तारक के साथ में निकल गया। साथ में काली महाराज भी थे शायद। मुझे एग्जैक्टली याद नहीं है कि महापुरुष महाराज तो थे। तो अभी वे लोग निकल गए। बोधगया गए और वहां पे जो है वह जो बोधी वृक्ष है जिसके नीचे में भगवान बुद्ध ने तपस्या करके निर्वाण प्राप्त किया था वहां पर बैठे और तपा वो जो है मेडिटेशन जप ध्यान करने लगे अभी देखिए कि वहां पे ऐसा हुआ ध्यान करतेकरते स्वामी जी इतने गहराई में चले गए इतनी गहराई में चले गए और वहां पे उनको एक ऐसा अद्भुत अनुभूति हुई एक अद्भुत दर्शन हुआ अभी क्या दर्शन हुआ स्वामी जी ने हमको नहीं बताया है किंतु महापुरुष महाराज कहते हैं कि वो दर्शन से एकदम स्वामी जी ध्यान से बाहर आ गए और महापुरुष तारक उनके कंधे पे अपना सर रख के फूट-फूट करके रोने लगे। अब जैसे यहां पे महापुरुष महाराज खुद कहते हैं ना अभी पिछले दिन हमने डिस्कस किया कि जब वो दक्षिणेश्वर में जाते थे तो भक्ति का उनमें इतना ये उद्रेक होता था उतना उनमें ये जो होता था भक्ति का उनसे मन इतना विगलित हो जाता था कि सब समय उनकी आंखों में आंसू लगे रहते थे। वो आंसू से उनके कर्म जो है वह धुल जाते हैं। तो जब हमको बहुत ही उच्च कक्षा की आध्यात्मिक अनुभूति होती है तब हम ये रोना जो है या तो फिर हंसना जो है रोना हंसना ये सब हमारे मन में जो एक्सट्रीम इमोशंस है वो हमारे मन में प्रकट होती है तो पता नहीं स्वामी जी को क्या अनुभूति हुई होगी महापुरुष महाराज के कंधे पे सर रखकर के रोने लगे और फिर वहां से जो है वह वापस कोलकाता आ गए तो ठाकुर ने कहा था उस समय कि जब तक मैं हूं तब तक तुमको यहां से जाने की अनुमति ति नहीं है। उसके बाद में स्वामी जी को फिर निर्विकल्प समाधि प्राप्त हुई। इस समय भी ठाकुर ने कहा जैसे शास्त्र में लिखा गया है कि निर्विकल्प समाधि में 21 दिन में मृत्यु हो जाती है। अभी ठाकुर को खुद को निर्विकल्प समाधि हुई थी। किंतु ठाकुर तो युगावतार थे और मां ने स्वयं उनको आदेश किया था कि तू भावमुख्य थाक अर्थात ये जो सुपरकॉन्शियस और कॉन्शियस की जो बॉर्डर लैंड है ये जो बाउंड्री है वहां पे तुम रहो। वहां पर तुम ऐसे देखोगे तो तुमको संसार दिखाई देगा। ऐसे देखोगे तो तुमको आत्मदर्शन होगा। वो बिल्कुल बीच में ठाकुर खड़े हैं। वो पूरे गेट में वो खड़े हैं। और यदि हमको यदि वो इस कमरे से उस कमरे में जाना है तो बीच में ठाकुर खड़े हैं। उनकी वो यदि परमिशन मिल जाती है। उनके आशीर्वाद मिल जाता है तो बहुत ही आसानी से हम इस जो सांसारिक कमरे से ईश्वरीय कमरे में जा सकते हैं। तो संसारीय ये जो पृथ्वी है वहां से स्वर्ग लोक में या तो फिर रामकृष्ण लोक में आसानी से जा सकते हैं। तो ठाकुर ने उस समय भी क्या कहा जब नरेंद्र को निर्विकल्प समाधि मिली कि देखो अभी मैंने लोक ताला मार दिया है तुम्हारी समाधि को चाबी मेरे पास रहेगी तुमको मां का काम करना है जब तक मां का काम समाप्त नहीं होता मां काली का जगदंबा का तब तक तुमको पृथ्वी पर रहना ही होगा तो अभी जब तक ठाकुर रहे नरेंद्र को वहां पे रहना पड़ा ठाकुर के साथ में ठाकुर से शिक्षा लेनी पड़ी किंतु ठाकुर कहते हैं ना जब यही लड़के चांदनी में खेलते हैं तो उनकी सही शक्ति वो प्रकट होती है। तो जैसे ही श्री रामकृष्ण का महासमाधि हुई श्री रामकृष्ण की महासमाधि नारायण ने क्या किया? यह जो एक बंधन में रखा था अपने को एक ही वराह नगर मठ में कुछ दिन रहा और फिर वहां से परिवराज होकर के निकल पड़े। और फिर पूरे भारत में उन्होंने भ्रमण किया। जहां पे भी जाते हैं यह जो राजा है, महाराजा है, यह जो गरीब है, ब्राह्मण है, वैश्य है, शूद्र है, जितने भी लोग थे, जैसे ही स्वामी जी की वाणी सुनते थे, जैसे ही उनकी प्रतिभा से प्रभावित होते थे, उनको हाईएस्ट ऑनर देते थे। उनको सर्वोच्च सम्मान देते थे। स्वामी जी एक दिन किसी गरीब की झोपड़ी में रहेंगे तो कि दूसरे दिन है किसी राजा के महल में रहेंगे। एक दिन जो है जंगल में वो तपस्या कर रहे हैं भूखे प्यासे। दूसरे जी जो है वो बहुत बड़ा भंडारा उनके सामने किसी मारवाड़ी सेठ ने लाकर के रख दिया है। तो इस तरह से जहां पे भी स्वामी जी गए उनको हाईएस्ट सर्वोच्च सम्मान मिला। अमेरिका जब गए हालांकि अमेरिका में उनको गाली देने वाले, उनकी निंदा करने वाले, अपमानित करने वाले लोगों की संख्या कम नहीं थी। किंतु साथ-साथ में ही उनको सम्मान देने वालों की, उनकी बात सुनकर के अपना जीवन परिवर्तित कर सके। ऐसे शिष्यों की संख्या भी कम नहीं थी। तो पूरे अमेरिका में, यूरोप में, ब्रिटेन में उन्होंने भारतीय आध्यात्मिकता वेदांत सिखाया और फिर भारत लौटे। तो ये जो स्वामी जी का जो पूरा ट्रेजेक्टरी है वो आप हम देखते हैं कि एक छोटी सी कहानी में ठाकुर ने कह दी है कि जब पिताजी होते हैं, लड़के शांत होकर के उनके सामने बैठते हैं। किंतु जब चांदनी में खेलते हैं तब कहीं जाकर के वो क्या कहते हैं? जब चांदनी में खेलता है तब और ही मूर्ति हो जाती है। अर्थात उनकी शक्ति मैनिफेस्ट होती है। यह लड़के नित्य सिद्ध है। यह कभी संसार में नहीं बंधते। थोड़ी ही उम्र में उन्हें चैतन्य होता है और ये ईश्वर की ओर चले जाते हैं। ये संसार में जीवों को शिक्षा देने के लिए आते हैं। संसार की कोई वस्तु इन्हें अच्छी नहीं लगती। कामिनी कांचन में ये कभी नहीं बढ़ते। यहां पे लिखा है संसार में जीवों को शिक्षा देने के लिए आते हैं। क्यों वो चांदी में जाकर के खेलेंगे? अर्थात कि वो पूरे जगत को जो है वो शिक्षा देंगे। अच्छा अभी आगे ठाकुर वो जो होमा पक्षी की बात कहते हैं जैसे कि ये कहा ना कि संसार का जो शोक ताप रोग दुख वगैरह इनको स्पर्श नहीं होता। उनके शरीर को दुख होता है, कष्ट होता है, रोग होता है। किंतु उनके मन को कुछ भी स्पर्श नहीं करता। यह बताने के लिए ठाकुर जो है वो होमा पक्षी की बात करते हैं। कैसे करते हैं कि जैसे देखिए वह जो होमा पक्षी है वह सब समय उच्च आकाश में उड़ता रहता है। फिर वहां से ही वो अंडा देता है। तो अंडा जो है वो बहुत ऊपर आकाश से पृथ्वी पे गिरता है। तो गिरते-गिरते ही जो है अंडे में से पक्षी प्रकट होता है और पक्षी बच्चा जो है वो बच्चा गिर रहा है। तब देखता है अरे वो गिर रहा है पृथ्वी पे। तो इमीडिएटली जो है वो अपनी पंखे जो है वो लगा करके वो फिर से हवा में उड़ना शुरू कर देता है। अर्थात होमा पक्षी का जो बच्चा है वो चाहे भी वो पृथ्वी पर गिर भी रहा है और पृथ्वी पर अवतरित हो के किंतु फिर भी जैसे ही उसका ज्ञान होता है कि अरे वो पृथ्वी पर गिर रहा है इमीडिएटली जो है वो जो है उड़ान भर के अपनी मां के पास चला जाता है। तो वैसे ही यह सब लड़के हैं। ठाकुर के महापुरुष महाराज जो है निरंजन महाराज जो है योगेंद्र महाराज जो है अद्वैतानंद जी बूढ़ो गोपाल नरेंद्र इन लोगों को पता चला कि जैसे ही पृथ्वी पर आए हैं तो संसार से हम घिरे हुए हैं। तो किंतु जैसे ही ये ज्ञान होता है इमीडिएटली दौड़ करके वे लोग साधना में प्रवृत्त हो जाते हैं। अपना जीवन धन्य करते हैं। समाज को भी अपने आशीर्वाद से उनके टीचिंग से धन्य करते हैं। अभी यह बात हुई यहां तक और नरेंद्र उठ गए। सभा में केदार, प्राण कृष्ण, मास्टर आदि और भी कई सज्जन उस समय बैठे हुए थे। श्री रामकृष्ण कहते हैं, देखो नरेंद्र जो है गाने में, बजाने में, पढ़ने में, लिखने में सब विषयों में अच्छा है। उस दिन केदार के साथ उसने तर्क किया था। केदार की बातों को खटाखट काटता गया। श्री रामकृष्ण और अन्य सब लोग हंस पड़े। अभी केदार कौन था? केदार था डिपुटी मैजिस्ट्रेट। अभी डिपुटी मैजिस्ट्रेट होने के लिए वो आईसीएस की एग्जाम पास करनी पड़ती होगी। मैं अनुमान कर रहा हूं। ऐसा होना ही चाहिए ऐसा कुछ। तो ऐसा जो एक इंटेलेक्चुअल माने इंटेलेक्चुअल तो नहीं कह सकते। ये लोग क्या है? रटने वाले लोग होते हैं। आजकल भी आप कंपटीशन एग्जाम देखेंगे आईएएस है या आईआईटी है या आईआईएम है। बहुत सारा लोग तो रट करके ही वो एंट्रेंस एग्जाम पास कर लेते हैं। फिर वो कितना वो अपना खुद का क्रिएटिव इनिशिएटिव ले पाते हैं। कुछ नया डिस्कवरी या तो कोई नया बिजनेस प्रैक्टिस स्टार्ट कर पाते हैं। उसका पता नहीं किंतु रट करके वो जो है मुखस्थ करके उन्होंने परीक्षा पास कर ली। तो ऐसे ही वह केदार भी है। कह सकते हैं कि हाईली इंटेलेक्चुअल होगा। रटने की भी तो एक क्षमता चाहिए, मेमोराइजेशन की भी तो एक स्किल चाहिए जो कि सबके पास नहीं होती है। तो यहां तक उसके पास में था। किंतु जैसे ही नरेंद्र जैसे किसी महापुरुष साक्षात भैरव शिव के संपर्क में आने से उसके साथ में आर्गुमेंट करने से बेचारे का कुछ भी नहीं टिकता। तो वैसे ठाकुर को ठाकुर को इस समय बड़ा गर्व होता है कि देखा नरेंद्र के साथ में आर्गुमेंट कर रहा है। केदार भी ठाकुर का प्रिय शिष्य है। किंतु नरेंद्र तो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रिय शिष्य है। तो सबको वो देंगे। देखेंगे कि कौन किसका पावर कैसा है किस में तो देखा कि केदार और नरेंद्र को आर्गुमेंट करवा दिया आपस में और जैसे ही देखा नरेंद्र उसने केदार की सभी आर्गुमेंट के बाद एक काट दी तब ठाकुर बड़े खुश हो गए और कितना गर्व लेकर के कहते हैं कि नरेंद्र ने उस दिन केदार की सभी आर्गुमेंट खटाखट करके काट दी। अभी ठाकुर मास्टर से कहते हैं कि अंग्रेजी में क्या कोई तर्क की किताब है? ठाकुर मास्टर महाशय कहते हैं जी हां है अंग्रेजी में इसको न्यायशास्त्र अर्थात लॉजिक कहते हैं। श्री रामकृष्ण कहते हैं अच्छा कैसा है कुछ सुना हो तो मास्टर महाशय अब मुश्किल में पड़े। आखिर कहने लगे एक बात यह है कि साधारण सिद्धांत से विशेष सिद्धांत तक पहुंचना। जैसे सब मनुष्य मरेंगे पंडित भी मनुष्य है इसलिए वे भी मरेंगे। और एक बात यह है कि विशेष दृष्टांत या घटना को देखकर के साधारण सिद्धांत पर पहुंचना। जैसे यह कौवा काला है, वह कौवा काला है और जितने कौवे दिख पड़ते हैं, वे भी काले हैं। इसलिए सब कौवे काले हैं। किंतु उस प्रकार के सिद्धांत से भूल भी हो सकती है क्योंकि संभव है ढूंढ तलाश करने ढूंढ तलाश करने से भी किसी देश में सफेद कौआ मिल जाए और एक दृष्टांत जहां वृष्टि है वहां मेघ भी है। अतः एवं यह साधारण सिद्धांत हुआ कि मेघ से वृष्टि होती है। अभी ये पूरा वो जो है अंग्रेजी न्याय शास्त्र कैसे चलता है उसका थोड़ा सा विवरण मास्टर महाशय कहते हैं। श्री रामकृष्ण ने इन बातों को सुन भर लिया। फिर वे अन्य मनस्क हो गए। इसलिए यह प्रसंग और आगे ना बढ़ गया। तो अभी ये जो विदेशी लॉजिक है ये जो मैथमेटिक्स है तो ठाकुर ने एक बार कहा था कि ये जो भर्ती ओठ होती है तो कैसे होती है बताओ। तो अभी मास्टर महाशय मुश्किल में पड़ गए। वो तो ग्रेविटी और वो जो किस तरह से वो जो कैलकुलेशन करके फिर भी वो जो माटी में है वो ऐसा चित्र आ करके कह रहे हैं कि ये जो पृथ्वी है ये जो चंद्र है और चंद्र पृथ्वी के आसपास घूमता है तो ये जो उसके ग्रेविटी के अट्रैक्शन से वो भरती ओठ होती है। यह जो न्यूटन का ग्रेविट यूनिवर्सल लॉ ऑफ़ ग्रेविटेशन अभी मास्टर महा ठाकुर ने थोड़ा सा ही देखा फिर कहा अबे रुक जा रुक जा मेरा माथा हमारा माथा टन टन कर है मेरा माथा जो है वो टन टन कर रहा है अर्थात ये जो विदेशी लॉजिक मैथमेटिक्स वगैरह है उसको ठाकुर अभी ये कहना अनुचित होगा कि ठाकुर नहीं समझ पाते थे ये कहना उचित होगा कि इस अवतार में उसकी अपेक्षा नहीं थी उनको सीखने की अभी किंतु ये जैसे देखिए कि ये शंकराचार्य अवतार में यह अवतार जो है वो तो पूरा तर्क दलील और न्याय शास्त्र पे ही बना है। शंकराचार्य ने तर्क कर करके यह जो यह पूर्व पक्ष उत्तर पक्ष इस तरह से आर्गुममेंट देकर के ये जितने भी करप्ट प्रैक्टिससेस थी ये कापालिक है या तो बौद्ध है उन सबको जो है देश से भगाया था। बोल के ही ये शुद्ध विशुद्ध हिंदू धर्म का फाउंडेशन वो डाल सके। तो ऐसा नहीं है कि अवतार लॉजिक या तो फिर ये सब समझ नहीं सकते हैं। ये है कि जैसे सब अवतार का अपना-अपना एक प्राधान्य है। अपनी-अपनी एक विशेषता है। अभी जैसे चैतन्य महाप्रभु तो न्याय के पंडित थे। न्याय के पंडित थे और फिर सडनली भक्ति की ओर उनका मन चला गया। तो अभी चैतन्य महाप्रभु निश्चय न्याय को बहुत अच्छी तरह से समझते होंगे। किंतु रामकृष्ण अवतार में जो है कि बेचारे वो जो पाठशाला में पढ़ते थे वहां पर उनको पढ़ाई में भी इंटरेस्ट नहीं था। भाग करके अपने मित्रों के साथ वो माणिक राजा का जो आम्रकानन था आम का बगीचा वहां पर चले जाते थे और ये जो ये जो पुराणों में जो सब घटनाएं हैं उसके ऊपर में वो जो नाटक करते थे जैसे कि ध्रुव की बात है प्रह्लाद की बात है ऐसे ये जो आख्यायिका है हमारे पुराण की वो जो है नाटक के रूप में वे लोग भज ये करते थे एक्ट करते थे तो ये ये अपने ठाकुर है ठाकुर के अवतार में इस तरह से भाव जो है उसका प्राधान्य है शंकराचार्य के अवतार में न्याय जो है उसका प्राधान्य है। तो सभी अवतार में किसी किसी एक भाव का प्राधान्य होता है। ऑफकोर्स ठाकुर के अवतार में हम कहते हैं कि सर्व देव देवी स्वरूपाय सर्व भाव समन्वय उनके भीतर में है और उनका जो लॉजिक और न्याय का जो भाव है उनके जो डिसाइपल स्वामी जी उसमें वह जो है हमको मैनिफेस्ट होता हुआ दिखाई देता है। यदि ठाकुर जो है न्याय नहीं समझते तर्क या तो मैथमेटिक्स ये जो लॉजिकल साइंस है उसको नहीं समझते तो नरेंद्र जो है उसको वो ठीक-ठीक शिक्षा नहीं दे पाते क्योंकि नरेंद्र को जो है सब कुछ न्याय के अर्थात ये आर्गुमेंट के थ्रू ही ये लॉजिकल स्टेप बाय स्टेप ही समझाना पड़ेगा उनको आप वो चमत्कार करके दर्शन मुझे ये जो मां का दर्शन हुआ तुम मेरी बात मान लो तो बाकी लोग मान लेंगे नरेंद्र मानने वाला नहीं था नरेंद्र ने कह दिया था कि ये जो भी आपके दर्शन है वह आपके मन का भ्रम है। अर्थात नरेंद्र को कन्विंस करने के लिए स्टेप बाय स्टेप लॉजिक उनको देने ही थे। तो ठाकुर वो सब समझते थे किंतु वो समझ को कहां पे प्रकट करना नहीं करना वो उनकी इच्छा पे था। वो उनके मूड पे था। तो इस समय वो उस मूड में नहीं थे तो उन्होंने कह दिया। अभी यहां पर भी उन्होंने न्याय के बारे में कुछ नहीं ज्यादा बात की और उस समय भी जब मास्टर महाशय ये सब दिखा रहे थे कि किस तरह से भर्ती वोट आती है ग्रेविटेशन की वजह से तो वो भी ठाकुर ने नजरअंदाज कर दिया ओके तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा कृष्णामस्तु