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Swami Vivekananda's Kali the Mother ·

Kali the Mother: Readings from Swami Vivekananda's Poem 14 oct 2024

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः कल दशहरा थी और दशहरा के उपलक्ष में जैसे हम शस्त्र पूजा करते हैं शक्ति प्रदर्शन करते हैं तो ठाकुर का भी एक ऐसा छोटा सा कहानी है किस तरह से शक्ति अर्थात की शक्ति का हम व्यवहार कब करते हैं जब कोई हमारा अहित करना चाहता हो या तो फिर कोई हमारे साथ में दुश्मनी रखना चाहता हो तब हम कहीं जाकर के शक्ति का प्रयोग करते हैं तो एक ऐसा ही छोटा सा इंसिडेंट ठाकुर के जीवन में है एक बार तारक हमारे जो महापुरुष महाराज थे उनका पूर्वा श्रम का नाम था तारक और वहां पर वह नौकरी करते थे तो ठाकुर के पास में आते थे तो एक बार तारक एक लड़के के साथ में ठाकुर को मिलने के लिए आए तो अभी क्या है कि वह लंबा रास्ता होता है ना तो लंबे रास्ते में साथ में किसी को ले लेते हैं आप यात्रा करने के लिए कलकाता से उस समय दक्षिणेश्वर रास्ता तो लंबा था आज की तरह सब सुविधाएं वगैरह नहीं थी व्हीकल ट्रांसपोर्ट वगैरह की तो तारक ने इस लड़के को अपने साथ में लिया था अब यह लड़का भी आकर के तारक के साथ में बैठा तारक अर्थात की महापुरुष महाराज ठाकुर के साथ में सब बातें हो रही है उस समय ठाकुर ने देखा ऑब्जर्वेशन किया कि लड़का जो है उसका ठाकुर के प्रति थोड़ा सा व्यंग भाव है व जैसे कि ठाकुर अपने जो लोग ठाकुर को परमहंस कहते हैं उन लोगों को क्या ठाकुर ठग रहे हैं या ठाकुर कुछ झूठ मूठ का कुछ बोल रहा है ऐसा एक व्यंग भाव था ठाकुर के प्रति आजकल भी हम लोग देखेंगे कि न्यूज़पेपर पढ़कर के जो लोग भी साधु होते हैं जो लोग इस तरह के धर्म का उपदेश देते हैं उनके प्रति एक संशय आ ही जाता है कि यह लोग बातें तो अच्छी करते हैं उनका चरित्र पता नहीं कैसा होगा तो यह लड़के का भी ऐसा था ठाकुर के प्रति व्यंग भाव तो ठाकुर ने उसको पूछा कि अब जैसे कि ठाकुर बड़े ही सिंसियर तारक के साथ में बात कर रहे हैं तो अभी ऐसा लड़का यहां पर बैठा होगा तो बात करने में वह ये नहीं होगा ना उनका भाव प्रकट नहीं होगा तो ठाकुर ने इस लड़के को कहा कि जाओ तुम जाकर के यह बिल्डिंग वगैरह देख कर के आओ देखो कितने सुंदर बिल्डिंग है यहां पर तो लड़के ने उत्तर दिया य सब देखा अच्छ यह सब देखा हुआ है मैंने तो ठाकुर ने पूछा कि तारक जो यहां पर आता है तो इसके बारे में तुम्हारा क्या मत है तुमको क्या लगता है कि इस तरह जैसे किसी साधु के पास जाना साधु के पास जाकर के धर्म शिक्षा ग्रहण करना यह सब उचित है क्या तुम्हारा क्या मत है तो लड़के ने उत्तर दिया तो आप आप नहीं जाने मैंने आप जानेंगे कि वह आपके पास में आ रहा है वह ठीक है कि नहीं है तो अभी देखिए दो बार ठाकुर ने प्रयास किया कि उसके अंतर मन को स्पर्श कर सके क्योंकि ठाकुर के पास में जो लोग भी आते थे भले ही चाहे उनका ठाकुर के प्रति व्यंग भाव हो कि ठाकुर के प्रति एक भाव हो ठाकुर चाहते थे कि उनके हृदय को भी स्पर्श करके ईश्वर की ओर मोड़ दे किंतु किसी-किसी का हृदय ऐसा होता है ना बहुत ही ज्यादा छिछोरापन होता है बहुत ही ज्यादा जिसमें कि तमस भरा होता है फिर उनके सामने ठाकुर भी बेचारे क्या करेंगे तो ठाकुर ने उसको भय दिखाने के लिए कहा कि यह मास्टर महाशय है मास्टर महाशय उस समय वहीं पर बैठे थे और उन्होंने यह पूरा प्रसंग कथामृत में वर्णन किया है तो ठाकुर ने कहा ये मास्टर महाशय है ये हेड मास्टर है तो जैसे ही लड़के ने सुना कि ये जो सामने अभी लड़के के मन में ऐसा ही था कि जो भी ठाकुर के पास में आते हैं उन सब लोगों का मानसिक परिस्थिति ऐसा ही कुछ होगा जो कि इजली मूर्ख बन जाए ऐसे होंगे वही लोग तो इस तरह के साधु के पास जाएंगे ना तो लड़के के मन का यह भाव था तो उसने सोच लिया होगा कि जो ठाकुर के सामने में कमरे में जो लोग सब बैठे हैं वे लोग भी ऐसे होंगे आधे मूर्ख ना कि आधे ये ना कि ऐसा कुछ ऐसा सोच करके वो आया होगा तो उसने इमीडिएट कहा कि अच्छा तो मैंने जैसे ही ठाकुर ने ऐसा कहा कि ये यह है हेड मास्टर है तो इमीडिएट ये लड़का चक गया वो बोला अरे अच्छा ओ यानी कि देखिए कि अभी उस समय तो क्या था कि ये जो हेड मास्टर होते थे यह जो गवर्नमेंट ऑफिसर होते थे इन लोगों का तो एक समाज में एक वैल्यू था एक प्रेस्टीज था ब्रिटिश गवर्नमेंट थी तो यह सब तो एक ब्रिटिश इंफ्रास्ट्रक्चर है उस सब इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर में लोग सब काम करते हैं तो जैसे ही इस लड़के ने सुना कि ये हेडमास्टर के सामने बैठा है इमीडिएट वो थोड़ा सा डर गया तो देखिए कि यहां पे ठाकुर ने दो बार प्रयास किया लड़के को थोड़ा सा उसकी बुद्धि को थोड़ा सत्व की ओर ले जाने का थोड़ा सा सात्विक उसके भीतर में प्राण संचार करने का देखा कि पूरा तमस का बना हुआ है तो फिर उसको डर भी दिखा दिया आखिर में कि देखो यहां पे हेडमास्टर बैठे हुए हैं तो मैंने जिस तरह से भी तुम बिहेव करो सोच समझ करके बोलना सोच समझ करके सोचना कि तुम किसके सामने बात कर रहे हो कि जिनके सामने हेड मास्टर भी इतना विनीत होकर के जिनके सामने प्रस्तुत होते हैं तो उनके प्रति अश्राथ अश्राथा आकु डर भी क्या कैसा दिखा सकते हैं यह जो शस्त्र प्रदर्शन या तो शस्त्र पूजा की जो कल बात विजया दशमी के दिन होती है विजया दशमी अल्टीमेटली क्या है कि अंधेरे के ऊपर में प्रकाश की विजय तमस के ऊपर में सत्य की सत्व की विजय यह है विजया दशमी का उत्सव तो कभी-कभी ऐसा होता है कि जो लोग हम लोग तो चाहते हैं ठाकुर मां स्वामी जी सभी लोग चाहेंगे कि जिनके भी हृदय में जितनी भी उसके हृदय को परिवर्तन किया जाए किंतु यदि हृदय परिवर्तन संभव नहीं है विदन लिमिटेड टाइम फ्रेम तो फिर उसको डर दिखा करके भी उसको वश में लाना चाहिए तो एक छोटी सी कहानी अच्छा तो अभी आज के मुख्य टॉपिक पर आते हैं हमने ठीक किया था कि काली द मदर इस कविता का हम इसके बारे में थोड़ी सी चर्चा करेंगे तो एक्चुअली थोड़ा सा मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि ये टॉपिक जो है एक थोड़ा सा बड़ा ही गहन रूप से सोचने वाला टॉपिक है जनरली हम स्मृति कथाएं या तो ठाकुर महा स्वामी जी का जीवन जो पाठ करते हैं उसमें जो प्रसंग होते हैं जो इंसिडेंट होते हैं उन्हीं के जीवन के वो इंसिडेंट ही हमको गाइड करते हैं वो इंसिडेंट ही बताते हैं प्रसंग ही बताते हैं कि हमको इसके ऊपर में क्या सोचना है क्या बात करनी है जैसे कि हमने पिछले सप्ताह देखा था कि किस तरह से मां तेलो भेलो के मैदान से आ रही थी ड डाकेत बाबा के साथ में मुलाकात हुई फिर उसके बाद में मां दक्षिणेश्वर में कैसे रहती थी मां के खुद के अनुभव फिर ये योगेन मां के जो स्मृति कथन स्मृति चारण यह सब पढ़ कर के हमको एक बड़ा ही सुस्पष्ट गाइड मिलता है इसके बारे में बात करने का किंतु पोयम बाय इट्स वेरी नेचर कविता जो होती है उसका नेचर ही ऐसा है कि बहुत सारी बातों को बहुत ही सीमित करके कुछ ही लाइंस के भीतर में कुछ ही पद के भीतर में इसको समा दे तो और खास कर के जब स्वामी जी जो भी ग्रेट पोएट है पोयम जब लिखते हैं उनके पूरे जीवन का अनुभव इस पोयम के भीतर में छुपा होता है इस कविता के भीतर में पूरे जीवन का रहस्य छुपा होता है और ठाकुर ठाकुर के बारे में जैसे स्वामी जी ने कहा था कि भारत की 10000 साल की आध्यात्मिक साधना और सिद्धि का मूर्त स्वरूप श्री राम कृष्ण है तो वैसे ही भारत के 10000 साल के शास्त्रीय विचार शास्त्र ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान का मूर्त स्वरूप हमारे स्वामी विवेकानंद है तो स्वामी जी का सिर्फ अपना खुद का जीवन ही नहीं यह 10000 साल का जो भारतीय आध्यात्मिक इतिहास है वह भी एक एक पोयम के भीतर में छुपा हुआ है तो इस पोयम को लेकर के इसके बारे में किसी भी तरह की चर्चा करना यह मतलब बहुत ही डिफिकल्ट काम है और मैं इससे थोड़ा सा डर भी रहा था किंतु फिर सोचा कि चलो अभी चालू किया ही है तो कर देते हैं पहले मैंने जब प्रारंभ किया पिछले सप्ताह तो मैंने सोचा कि बहुत सारी किताबें हैं जो कि इस तरह से भारत में शक्ति साधना के बारे में हमको निदर्शन देती है तो उसमें भी खास करके रामकृष्ण मिशन यह जो इंस्टिट्यूट ऑफ कल्चर गोल पार्क है उनके द्वारा प्रकाशित दो बड़े-बड़े वॉल्यूम है भारतीय शक्ति साधना शास्त्र सम्मत भारतीय शक्ति साधना उसका इतिहास तो मैंने बहुत ही सुंदर रूप से यह दो बड़े-बड़े वॉल्यूम लिखे गए हैं मोर देन 1000 पेज के दोनों वॉल्यूम होंगे तो मैंने सोचा कि पहले तो इस वॉल्यूम में से कुछ नोट्स इकट्ठा कर लेता हूं उसके बाद में मैं देखता हूं कि रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में काली पूजा के बारे में या तो फिर मां काली के बारे में क्या लिखा गया है यह सब एक एक पूरी नोट्स तैयार कर देता हूं उसके ऊपर में फिर यह पूरे क्लास करूंगा किंतु फिर आखिर में मैंने सोचा कि देखिए अभी तक मैंने जितने भी क्लास किए हैं या तो फिर इवन यह जो क्लास प्रारंभ करने के पीछे का जो मेरा मुख्य एक आशय था बात यह नहीं है कि हमेशा मैंने देखा कि ठाकुर माहा स्वामी जी के बारे में कुछ भी कोई भी कुछ भी बोलना चाहता है तो हमेशा कोई ना कोई शास्त्र का वह उदाहरण प्रस्तुत करेगा स्वामी जी ऐसा कहते हैं उसके पीछे देखिए कि इस तरह के उपनिषद में इस तरह की टीका में इस तरह के भाष्य में इस तरह के ग्रंथ में ऐसा कुछ लिखा हुआ है किंतु देखिए कि ठाकुर महा स्वामी जी का जीवन और उनका उपदेश इतना यूनिक है कि यदि हम सिर्फ शास्त्र के ऊपर में ही उनकी व्याख्या करने का प्रयास करेंगे तो मुझे लगेगा कि हम थोड़ा सा यहां पर शॉर्टकमिंग्स आ जाएगा उस उनकी व्याख्या करने में ठाकुर महा स्वामी जी की व्याख्या उनके शब्दों की या उनके जीवन के किसी भी प्रसंग की यह जो रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य समग्र जो है उसी के भीतर में से ही कुछ पैरेलल खोज करके उसी के भीतर में ही एक इनसाइट डेवलप करके हमको एक इंटरकनेक्शन बनाना होगा और इसी के बेस पर प्रत्येक जो रचना है उसके बारे में चर्चा की जाए जैसे कि ठाकुर का कथामृत है तो ठाकुर के कथामृत में जहां पर जैसे भी प्रसंग है उसका पैरेलल या तो फिर उसका एक एक्सप्लेनेशन या तो फिर उसकी एक विस्तृत व्याख्या खोजनी है तो शास्त्र तो एक सहाय है ही है किंतु साथ में ही मां का भी जीवन और उपदेश है स्वामी जी का भी जीवन और उपदेश है और साथ-साथ में यह डायरेक्ट डिसाइल्स के भी है किंतु इसके अलावा भी एक ऐसा एक एक इंग्रेडिएंट्स करने में हमको सहाय करता है वह है हमारा खुद का साधक जीवन यदि हमने ठाकुर महा स्वामी जी पर संपूर्ण भरोसा रखा है यदि हमने उनके प्रति संपूर्ण आत्म समर्पण किया है तो हमारे भीतर में ही इस साहित्य के प्रति एक इस तरह का एक इनसाइट डेवलप होगा कि जिस इनसाइट के माध्यम से हम ठाकुर मां स्वामी जी की प्रत्येक रचनाओं की एक उसका जो गुढ़ तत्व है इसका जो गुढा अथ है उस को समझने में हम कामयाब होंगे तो मैंने यह जो क्लासेस प्रारंभ किए थे तो मैंने ठीक किया था कि देखिए कि उपनिषद के बेस पर स्वामी जी का ज्ञान योग समझाने यदि आपको समझना है तो उस तरह के वक्ता और उस तरह के लेखक कोई कमी नहीं है किंतु मैं जो एक्सप्लेन करता हूं मेरा खुद का अंडरस्टैंडिंग के बेस पर करूंगा तो इससे क्या होगा कि अपने क्लास थोड़े से यूनिक भी होंगे और मुझे भी एक सेटिस क् यह मिलेगा कि मैंने अपने विचार अपनी जो मेरी इनसाइट जो है जितनी भी वह क्षुद्र क्यों ना हो कितनी भी सामान्य क्यों ना हो वह मैंने आपके साथ में शेयर की है तो इसी विचार के साथ में यह क्लासेस प्रारंभ हुए थे तो इस पोयम के साथ में भी मैंने प्रारंभ तो किया कि शक्ति साधना का पूरा इतिहास समझने का हमारे जो पुराण है हमारे जो उपनिषद है इन सब में शक्ति साधना के बारे में क्या लिखा खा गया है किस तरह से समझाया गया है वह उसको मैटर सब इकट्ठा करने का और खास करके जो माहाकाली का जो रुद्र स्वरूप है इसके बारे में हमको क्या इंसाइट मिलती है तो मैंने प्रारंभ तो किया इस तरह से फिर एट वन पॉइंट मैंने यह प्रयास छोड़ दिया मैंने कहा कि मैंने सोचा कि रदर देन की बाकी सब जगह पर शक्ति साधना के बारे में बहुत ही सुंदर आलोचना है इसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु लेट मी एक्सप्लेन दिस पोयम बेस्ड ऑन माय ओन अंडरस्टैंडिंग इस पोयम की जो हम थोड़ा बहुत जो चर्चा करेंगे मेरी खुद की अंडरस्टैंडिंग क्या है राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य समग्र इसकी क्या मेरी खुद की इनसाइट क्या है इसी के बेस पर हम एक्सप्लेन करेंगे तो ये थोड़ा सा यूनिक भी होगा क्योंकि मैं थोड़ा नेट पर भी सर्च कर रहा था मैंने देखा कि इस काली धम र पोयम के बारे में दूसरे सन्यासियों ने भी काफी उन्होंने अच्छे प्रवचन भी दिए हैं और सर्वप्रिया नंद जी के देखेंगे कि शक्ति साधना के बारे में भी उनके बड़े सुंदर प्रवचन उपलब्ध है तो रदर देन गोइंग इन ट डायरेक्शन कि हां कश्मीरी शैविज्म में किस तरह से कहा गया है शक्ति साधना क्या है या तो फिर यह जो तंत्र जो है तंत्र रचना समग्र तंत्र ग्रंथ उसमें माहाकाली का स्वर गरूप वर्णन मां काली का महात्म्य मां काली ही ब्रह्मण है इस तरह के जो इक्वेशन दिए गए हैं तो तंत्र साहित्य में किस तरह से इसका वर्णन है इसको भी छोड़ कर के लेट मी जस्ट फोकस ऑन व्हाट इज माय ओन अंडरस्टैंडिंग मेरा खुद का क्या इनसाइट है मेरी खुद की क्या समझ है उसी के बेस पर ही हम इस पोयम की चर्चा करेंगे तो देखिए कि पहले तो एक थोड़ा सा यदि मैं एक आउटलाइन दे देता हूं शक्ति साधना का इतिहास एक्चुअली क्या है तो हमको तो पता है आजकल हम लोग सिर्फ पुरुष या या अवतार यानी कि कौन है तो भगवान राम है भगवान कृष्ण है भगवान बुद्ध है और अपने हिंदू धर्म से थोड़ा बाहर जाएंगे तो आपको देखने को मिलेगा कि यह जीसस क्राइस्ट है या फिर इस तरह के दूसरे अवतार है दूसरे धर्मों में तो हमने पुरुष ईश्वर या पुरुष अवतार को ही देखा है श्री राम कृष्ण देव भी पुरुष ही है तो और जितने भी देवी देवता है हिंदू धर्म में जिनको कि हम त्रिदेव कहते हैं सृष्टि स्थिति और प्रलय इनके जो नियंत्र है ब्रह्मा विष्णु और महेश यह भी पुरुष है किंतु यह पुरुष देवता की उपासना के साथ-साथ में ही यह जो शक्ति रूपी देवताओं की उपासना भी देवियों की उपासना भी आदिम काल से चली आ रही है और इसके बारे में आपको बहुत सारे यह जो आर्कियोलॉजिकल एक्सक वेशन करके जिनको कि फर्टिलिटी फिगर या वीनस फिगराइन कहते हैं इस तरह की स्त्री देवताओं की मूर्तियां बड़े ही पुराने समय से हमको मिलनी प्रारंभ हो गई है 300 साल पहले 35000 साल पहले का जो हमने आर्कियोलॉजिकल एक्सक वेशन किया उसमें हमको इस तरह की फर्टिलिटी या तो वीनस फिगराइन हमको मिली है तो वहां से लेकर के हमको पता है कि शक्ति रूपी देवताओं की आराधना भारत विश्व के इतिहास में सिर्फ भारतीय इतिहास में ही नहीं पूरे विश्व के इतिहास में पहले से ही प्रसिद्ध है धीरे-धीरे करके पुरुष प्रधान होता गया अपना समाज और पुरुष देवताओं के ऊपर में ही ज्यादा उनकी चर्चा और ज्यादा तत्व चिंतन होने लगा किंतु यह जो शक्ति साधना है वह शक्ति साधना उतनी ही पुरानी है जितनी कि मनुष्य सभ्यता है और यह शक्ति तत्व है इसकी आलोचना भी इतने ही पुराने समय से चली आ रही है तो ज यदि हम महाकाली के बारे में देखेंगे माहाकाली के तीन तत्व तो सबसे पहले तो हमको देखने को मिलेगा कि शक्तिवर्धक शी इज अ फीमेल गॉड ये जो मेल गॉड या तो फिर पुरुष ईश्वर की जो बात चल रही है यहां पर स्त्री रूपी या तो शक्ति रूपी ईश्वर की बात भी इतनी ही पुरानी है तो मां काली के जयदिश तत्व दूसरा तत्व है यह मातृत्व अर्थात कि शक्ति तत्व तो है ही है अभी जैसे किंतु शक्ति तत्व की आप आराधना कैसे करेंगे तो इस आराधना के बहुत सारे आयाम भी है वीर भाव से भी यह आराधना होती है जिसके बारे में तंत्र शास्त्र हमको बताता है जिसके बारे में राम कृष्ण लीला प्र में भी काफी विस्तृत आलोचना है किंतु इसके इससे भी ऊपर जाएंगे तो मातृ रूपी ईश्वर की आराधना ईश्वर को अपनी मां के रूप में देखना हमको ईश्वर हम एक बालक है और मां की गोद में बैठ कर के आनंद कर रहे हैं यह भी एक भाव है मातृ भाव संतान भाव तो इस भाव से ईश्वर की आराधना यह भी एक मां काली का ही एक तत्व है और इसको यदि आज के आधुनिक युग में इस इस तत्व का जिसने सबसे ज्यादा प्रचार किया है तो वह है राम प्रसाद पोएट जिसके की सोंग्स जिनके की भजन ठाकुर हमेशा गाते रहते हैं और राम प्रसाद के बाद में ही हम देखते हैं कि श्री राम कृष्ण देव तो एक तो हो गया शक्ति तत्व दूसरा हो गया मातृ तत्व किंतु इससे भी बढ़कर के इन दोनों से भी एक इंपॉर्टेंट जो तत्व है जिनकी आलोचना हमको करनी है वो वो है रुद्र तत्व अभी हम देखते हैं कि ईश्वर होते हैं सौम्य हमेशा इवन यदि भगवान शिव का भी हमेशा रहते हैं स्मशान में व अपने गले में सर्प हार पहने हुए हैं भूत पिशाच उनके संगी है किंतु चेहरे का भाव जो है बड़ा ही कोमल भाव है और भोलेनाथ के रूप में पहचाने जाते हैं रावण जैसा रावण भी उनकी आराधना करके इजली उनके पास में से आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है तो इवन जो कि संहार के देवता है उनको भी हम सौम्य देवता के रूप में पहचानते हैं वह रुद्र स्वरूप धारण करेंगे किंतु जनरली उनका यह भोलेनाथ रूपी स्वरूप ही सबसे ज्यादा प्रचलित है किंतु मां काली का देखिए कि वह काली का स्वरूप ही है रुद्र रुद्र अर्थात कि देखिए कि हम पुराण में देखेंगे कि कहां से मां काली प्रकट हुई तो दक्ष यज्ञ जहां पर कि मां सती का अपमान हुआ और उनका देह त्याग हुआ भगवान शिव नाराज होकर के अपनी जटा अपने सर में से निकाल कर के पृथ्वी पर पटकी उसमें से जो दो एक तो वीरभद्र और एक रुद्र काली ये जो प्रकट हुए और उन्होंने जाकर के दक्ष यज्ञ में जो संहार किया ये जो पूरी कहानियां है शुंभ निशुंभ का वध एक के बाद एक राक्षस का वध तो मां काली के भीतर में रुद्र तत्व जो है वह सबसे ज्यादा प्रभावशाली या तो फिर जो कि सबसे ज्यादा दृश्य मान है और अभी प्रश्न होगा कि रुद्रा काली के भीतर में आपने मातृत्व दर्शन कैसे किया जदिवेओ तो वह तो मां सरस्वती भी है जो कि सौम्य स्वरूप धारण की हुई है मां शारदा के बारे में ही ठाकुर कहते हैं कि वह शारदा सरस्वती जगत को ज्ञान देने के लिए आई है और साथ में ही एक जगह पर कहा था कि मातृ भाव का प्रचार करने के लिए मां ने ही कहा था कि ठाकुर के देह त्याग के बाद में व किस तरह से उन्होंने देह धारण करके रखा तो ठाकुर के आदेश पर क्योंकि ठाकुर मां को रख कर के गए हैं मातृ भाव का प्रचार करने के लिए जगत में तो यदि मातृ भाव की ही आराधना करनी है तो मां सरस्वती तो है ही उनकी आराधना सौम्य देवी की आराधना क्या मातृ भाव की आराधना का एक आधार नहीं होगा क्या किंतु रुद्र भाव मई काली की मातृ भाव से ठाकुर ने आराधना की है और यह जो रहस्य है इस रहस्य का भेद करना यही एक बहुत बड़ा एक चैलेंज है हमारे लिए जैसे ठाकुर का एक विजन था कि गंगा के भीतर में से एक स्त्री प्रकट हुई उसने एक संतान को प्रसव किया और फिर उसी स्त्री ने इस संतान का भक्षण कर दिया संतान को खा गई तो जो प्रसव करती है वही उसका संहार करती है किंतु देखिए कि एक ही देवी के भीतर में दोनों स्वरूप है प्रसव भी करती है पोषण भी करती है संहार भी करती है पुरुष हमको तीन देवता चाहिए य तीनों कार्य करने के लिए सृष्टि का सृष्टि की सृष्टा करने के लिए सृष्टि का पालन करने के लिए और सृष्टि का संहार करने के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश तीन देवताओं की आवश्य सकता है यहां पर मां काली अकेली ही संतान को प्रसव भी करती है उसका पालन पोषण भी करती है और उसका संहार भी करती है यह तीनों तत्व एक ही देवी के भीतर में हमको देखने को मिलते हैं और स्वामी जी ने कहा है कि किस तरह से और उन्होंने मां काली को एक्सेप्ट किया था मां काली के प्रति स्वामी जी का हमेशा एक एक था ही था एक स्केप्टिसिजम हमेशा था क्योंकि उस समय का जो पढ़ा लिखा कोलकात्ता था एजुकेटेड कोलकाता यंग यंग बंगोल ठाकुर कहते हैं आजकल के यंग बंगोल तुम लोगों ने पानी हाटी का उत्सव देखा नहीं है चलो हम पाणी हाटी का उत्सव देख के आते हैं तो ये यंग बंगोल उस समय का उन्होंने तो यह काली के ऊपर में अंधश्रद्धा ही है बोलकर के अ उसको पूरा छोड़ दिया था मेंटली तो ठाकुर के पास आने के बाद में स्वामी जी ने मां काली को एक्सेप्ट किया था किंतु देखिए कि मां काली की संहार मूर्ति इसके बारे में स्वामी जी का किस तरह का चिंतन है स्वामी जी ने अपने विचार को किस तरह से डेवलप किया है इसके बहुत कुछ जैसे कि एक बड़ा ही सुंदर कोटेशन है स्वामी जी का और स्वामी जी कहते हैं कि य यह खास करके यह जो प्लेग हो रहा था कलकाता में उस समय की बात है स्वामी जी कहते हैं निवेदिता ने इस बात को नोट किया है स्वामी जी क्या कहते हैं कि देरर धोस हु कफ एट द एक्जिस्टेंस ऑफ काली ऐसे लोग हैं जो कि काली के अस्तित्व के ऊपर में व्यंग या कटाक्ष प्रदर्शित करते हैं यट टुडे शी इज आउट देयर अमंग द पीपल किंतु देखिए कि आज काली लोगों के बीच में घूम रही है लोगों के बीच में फिर रही है यह कौन सा समय था निवेदिता भारत आई थी भारत में प्लेग खास करके कोलकाता में कोलकाता में यह प्लेग फैल गया था और प्लेग का रिलीफ करने के लिए रामकृष्ण संघ के सन्यासियों सब इकट्ठा हुए थे तो उन्होंने यह कार्य प्रारंभ किया था जिसमें कि एक निवेदिता भी थी तो प्लेग अर्थात कि एक ऐसी भयानक महामारी जैसे कि उसमें मैंने जो हिस्टोरिकल कुछ-कुछ डिस्क्रिप्शन प्लेग के पढे हैं उसमें भी खास करके यूरोपी यूरोप में एक प्लेग हुआ था ब्लैक डेथ जिसको कि कहा जाता है उस समय यह मिडिल एजेस की बात है और ऑलमोस्ट 1 थर्ड यूरोपियन पॉपुलेशन को इसने साफ कर दिया था इसने खत्म कर दिया था और जो घर फैला था यूरोप के गांवों में शहर में इसके बारे में जो डिस्क्रिप्शन मैंने पढ़ा था यह काफी समय पहले पढ़ा था किंतु व पढ़ कर के मैं एकदम यह हो गया था कि अरे बाप रे यह मृत्यु है या तो महाविनाश है जब मनुष्य के सामने आकर के प्रकट होता है तो मनुष्य किस तरह के इससे सामने रिएक्ट करेगा अब जैसे कि यह नेपोलियनिक वॉर्स यूरोप में नेपोलियन ने एक के बाद एक युद्ध किए तो जो सैनिक थे आम आदमी था जो गांव वासी थे उन लोगों ने यह जो कहर ये अनुभव किया है कि नेपोलियन और उसके सामने यह ऑस्ट्रिया हो ना कि फिर यह प्रशिया हो ना कि ये रशिया हो इन तीनों की आर्मीज नेपोलियन के साथ में युद्ध करती थी तो किस तरह का महाविनाश गांव में फैलता था गांव में जाकर के जितना भी आहार करने योग्य जो कुछ भी है यह लोग हड़प कर लेंगे गांव के गांव जला देंगे पुरुषों को जोर जबरदस्ती करके आर्मी में जॉइन कर देंगे स्त्री हों बच्चों पर अत्याचार करेंगे क्या से क्या उस समय नहीं होता था लोगों के साथ में और उसके बाद में देखिए यह सेकंड वर्ल्ड वॉर भारत का इतिहास का एक प्रॉब्लम यह है कि ऐतिहासिक जो एक आलोचना करनी चाहिए एक बड़े ही विस्तृत रूप में वह बड़ा इजली अवेलेबल नहीं है ग्रंथ रचनाएं शायद बहुत सारी हुई होगी किंतु कई लाइब्रेरी में पड़े होंगे उसको जाकर के खोजना होगा वगैरह जबकि ये यूरोपियन या अमेरिकन हिस्ट्री है बड़ी ही इजली ईबुक के रूप में अवेलेबल है और आजकल मैं ईबुक ही पहले से ही जो कि इजली अब मेरे पास में अब यदि मैं कोलकाता में रहता तो यह एशियाटिक सोसाइटी बोलकर के एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी है जिसमें मैं यदि जाता तो बहुत सारी भारतीय साहित्य भारतीय इतिहास के बारे में पढ़ने को मिलता किंतु इस तरह का तो मेरा कोई नसीब था नहीं जो कि छोटी-मोटी लाइब्रेरी से ही मैंने किताबें कलेक्ट की है और बाद में फिर इंटरनेट से तो वो किताबें इजली अवेलेबल है जो कि यूरोपियन हिस्ट्री के ऊपर में लिखी गई है अमेरिकन हिस्ट्री के ऊपर में और भारतीय हिस्ट्री के ऊपर में वोह किताबें अवेलेबल है जो कि उन्होंने लिखा है यूरोपियन ने या तो अमेरिकन ने व्हिच इज अ वेरी बायस हिस्ट्री मैं ये तंत्र साधना का भी जब स्टडी कर रहा था तो यह जितने भी यह विदेशी ऑथर है उन्हीं की किताब सबसे ज्यादा ऊपर आ रही है भारतीय ऑथर हे बहुत अच्छे बहुत डेप्थ में एनालिसिस किया है किंतु अनफॉर्चूनेटली दोस्त बुक्स आर नॉट इजली अवेलेबल इजली अवेलेबल नहीं है यह सब किताबें तो अभी यह जो कहर या तो फिर एक महाविनाश का जो एक चित्र हमको यदि उसको देखना है तो यूरोप के के तीन इस तरह के चित्र है हमारे सामने एक तो है यह ब्लैक डेथ का दूसरा यह नेपोलियनिक वॉर्स का और तीसरा है ऑफकोर्स ये फर्स्ट वर्ल्ड वॉर और सेकंड वर्ल्ड वॉर उसमें भी यह न्यूक्लियर एक्सप्लोजन तो देखिए कि यह सब वर्णन हम पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि मनुष्य के सामने यह महाविनाश देखिए हमारे जीवन में छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हमारे जीवन में छोटे-मोटे अ क्या कहे दुख कष्ट तो आते ही रहेंगे व्यक्तिगत लेवल के ऊपर में किंतु पूरे समाज के ऊपर में जब यह एक महाविनाश आकर के खड़ा होगा महा भय पूरे समाज के ऊपर में आकर के खड़ा होगा तब समाज हम लोग किस तरह से इंडिविजुअल इसको रिएक्ट करते हैं इसका एक छोटा सा उदाहरण हमको यह कोरोना पैंमिकन देखने को मिला था कि अरे कहां से क्या कौन इफेक्ट हो जाएगा किसको क्या इंफेक्शन लगे क्या लाइफ टाइम डिसीज हमको दे कर के जाएगा यह कुछ ठिकाना नहीं था उस समय लॉकडाउन था और हम लोग जो कि मिडल क्लास में है उनका तो फिर भी परिस्थिति कोई इतना बुरा नहीं था किंतु जिन लोग की प्रतिदिन रोजी रोटी प्रतिदिन कार्य करके कर्म करके जिनको आहार जुगाड़ करना है उन लोगों की तो कैसी परिस्थिति हो गई थी तो यह महा विनाश या तो फिर महा कहर जब मनुष्य के सामने उपस्थित होता है तो मनुष्य का का हृदय किस तरह से रिएक्ट करता है दैट इज द सीक्रेट ऑफ ह्यूमन लाइफ जैसे कि स्वामी जी ने एक उदाहरण दिया था स्वामी जी कहते हैं कि मैं भारत में घूम कर के भारतीय लोगों के ऊपर में एक तरह से मेरी हताशा प्रकट हो गई थी क्योंकि यहां पे एक ब्रिटिश लोग है कहां वो सात समुंदर पार करके आंधी तूफान के बीच में यह लोग वो छोटी सी नौका उस समय की होती थी ये लकड़ी की बनी हुई इस नौका के भीतर में मने ये स्टीम बोट ही था किंतु समुंदर की शक्ति के सामने स्टीम बोट का किया क्या विसात है तो उसमें बैठ कर के सात समुंदर लांग कर के भारत में आकर के बड़े शान से हमारे ऊपर में राज कर रहे हैं और यह स्वामी जी हमारे ही एक देश बांधव जिसने कि यह सात समुंदर क्रॉस करके पार करके उनके देश में जाकर के उनको वेदांत सुनाने का साहस किया तो हमारे देश के ही कुछ रूढ़ी चुस्त लोग ऐसे थे कि स्वामी जी को जैसे कि समाज में से बहिष्कार कर दिया था स्वामी जी भारत लौटे थे निवेदिता के साथ में काली मंदिर में दक्षिणेश्वर में गए निवेदिता को प्रवेश मिला क्योंकि वो तो ब्रिटिश है माने फॉरेनर है उसके सामने कुछ आवाज खड़ी करेंगे तो ब्रिटिश लोग आकर के डंडे मारेंगे किंतु स्वामी जी को उसी मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया इस तरह का संकुचित जनमानस हमारा हो गया था तो स्वामी जी कहते हैं कि भारत में भ्रमण करके भारतीयों के ऊपर में एक तरह की हताशा मेरी प्रकट हो गई थी और मैंने सुना था कि जब युद्ध होता है तो यह भारतीय सैनिक जितने भी होते हैं जैसे ही गोला बारूद शुरू हो जाते हैं सामने आना विस्फोट होना यह लोग सब भाग जाते हैं और ब्रिटिश लोग ही ऐसे साहसी शौर शौर्य विर्य उनमें होता है कि गोला बारूद का ट के मुकाबला करते हैं तो स्वामी जी कहते हैं जब सेकंड टाइम विदेश से लौट रहे हैं कि जा रहे हैं उस समय यह जो नौका में क्या होता था ये जो यह होते हैं ना खलासी नौका चलाने के लिए बहुत सारे लोगों की जरूरत पड़ती है और तूफान आता है तो जो जितने भी यह उसको संभालना नौका को वो भी एक बड़ा मुश्किल कार्य है आप डेक के ऊपर में खड़े हैं तूफान का एक एक एक आया ये ब तरंग एक आई पानी की एक तरंग आई समुंदर की आप उठा कर के आपको समुंदर में फेंक दिया और वैसे भी प्रकृति का कराल स्वरूप आप देखेंगे मने बिजली गिर रही है बारिश हो रही है समुंदर में एक के बाद एक महा विनाशका महा विराट तरंगे आपके सामने आ रही है तो मनुष्य का हृदय किस तरह से रिएक्ट करेगा तो स्वामी जी ने अपनी नजरों से देखा स्वामी जी लिखते हैं कि े जितने भी यूरोपियन सेलर है वह सब शराब पी कर के मत हो जाते हैं क्योंकि यह जो महा कराल स्वरूप है प्रकृति का उसको व सहन नहीं कर पाएंगे मनुष्य का हृदय फट जाएगा मनुष्य बिल्कुल बेचारा वो बेहोश हो जाएगा ऐसा यह कराल स्वरूप किंतु देखा कि ये जो भारतीय खलासी है भारतीय सेलर्स है वे लोग ना ही शराब पान करते हैं मद्यपान करते हैं और वही लोग जो सड़ की जो रस्सी पकड़ कर के डट कर के खड़ा रहना है तूफान में वही लोग खड़े रहते हैं और तब से मुझे फिर से भारतीय लोगों के ऊपर में आशा का संचार हुआ है तो ये जब एक महा विनाश का एक ऐसी घटना हमारे सामने आ जाती है हम लोग किस तरह से रिएक्ट करेंगे या तो मद्यपान करके ना कि फिर एक इस तरह का कोई एडिक्शन में डूब जाएंगे कि हम सब कुछ भूल जाए इसके सामने शाहमृग यह जो होता है ना ऑस्ट्रिच समुद आप देखेंगे मैंने सुना है पता नहीं यह बात सही है कि नहीं जब उसको कोई मारने के लिए कोई हत्यारा उसके सामने आता है तो दौड़ कर के भाग जाने की बजाय या तो अपना बचाव करने की बजाय क्या करेगा रेती के भीतर में अपना सर छुपा लेगा तो ये ऑस्ट्रिच की तरह ना कि ये शम्र की तरह हम अपना सर छुपा लेते हैं जैसे कि जो हमको हत्या करने वाला आए उसको देख ना पाए भले हमारी हत्या कर ले क्योंकि हम साहस करने का उसका यह करने का तो मुकाबला करने का तो साहस नहीं है तो कैसे भी करके अपनी जो सैनिटी है अपनी यह जो मेंटल स्टेबिलिटी है उसको तो बचा के रखना है सो वी विल हाइड अवर फेस रदर देन फेस द ब्रूट तो यह प्लेग के बारे में यह स्वामी जी का कथन है स्वामी जी कहते हैं बहुत सारे लोग सोचते हैं कि काली का कोई अस्तित्व ही नहीं है किंतु देखिए कि आज यही काली लोगों के बीच में घूम रही है दे आर फ्रेंट विथ फियर एंड द सोल्जरी हैज बीन कॉल्ड टू डील आउट डेथ यह लोग जन साधारण भय के मारे पागल जैसे हो गए हैं और सैनिकों को बुलाना पड़ा है कि जो भी आदेश का उल्लंघन करेगा उसको शूट कर दे उस को मृत्यु के उसका उसको मार दे तो सोल्जरी हैज बीन कॉल्ड टू डील आउट डेथ जो भी उनकी बात नहीं सुनेगा उनका उनका संहार करने के लिए उनको मार देने के लिए सैनिकों को बुलाया गया है और यह बात सही है जब रिसेंटली ही मैं बात करूं मैं उस समय गुजरात में था मेरे पूर्वा श्रम की बात है वहां पर एक सिटी है उसका नाम है सूरत तो सूरत में प्लेग फैल गया था आपने शायद सुना होगा आज से तक करीबन 25 30 साल पहले की बात है यह तो उस समय सूरत में जब प्लेग फैला था प्रतिदिन न्यूज़पेपर में भयानक कहानियां आती थी कि कोई एक परिवार है एक गाड़ी में ले बैठ कर के भाग रहा है सिटी छोड़ कर के पता चला कि गाड़ी में ही किसी को प्लेग हो गया है अभी अपना ही लड़का है अपनी ही बहन है अपने ही मां पिताजी है किं जैसे ही पता चला इसको प्लेग हो गया है रास्ते पे ही उसको निकाल कर के गाड़ी लेकर के भाग गए उस समय यह जो अपना परिवार अपने प्रियजन यह सब कुछ भूल जाना है क्योंकि एक को प्लेग हुआ है इसका अर्थ है कि दूसरे को इंफेक्शन होगा ही होगा जो कि इनके साथ में रहेंगे तो यह ऐसा एक भय का वातावरण फैल जाता है कि लोग पागल की तरह यह लोग बिहेव करते हैं तो उनको कंट्रोल करने के लिए सैनिकों को बुलाया गया है हु कैन से द गॉड डज नॉट मेनिफेस्ट हिमसेल्फ एज इवल एज वेल लेस गुड स्वामी जी कहते हैं कौन कहेगा कि यह ईश्वर सिर्फ एक सात्विक स्वरूप में ही प्रकट नहीं होते हैं किंतु एक महा विनाशकारी स्वरूप में भी प्रकट होते हैं नहीं होते ऐसा कौन कह पाएगा इवल अर्थात की विनाशक स्वरूप गुड अर्थात की सात्विक स्वरूप हु कैन से दैट गॉड डज नॉट मेनिफेस्ट हिमसेल्फ एज इवल एज वेल एज गुड कि ईश्वर एक सा रूप में सौम्य रूप में तो प्रकट होते ही है किंतु एक महा विनाशकारी महा भयावह महा राक्षस स्वरूप भी धारण करते हैं हमारे सामने बट ओनली द हिंदू डेयर टू वशिप हिम इन द इवल किंतु सिर्फ हम हिंदू लोग ही है जो कि उनका यह जो राक्षसी सहारी स्वरूप है इवल स्वरूप है जिसकी हम आराधना करने का साहस रखते हैं है जितने भी बाकी धर्म देखेंगे ईश्वर का सौम्य स्वरूप ही आराधी होता है और जब कराल मुखी जब कोई परिस्थिति प्रकट हो जाती है चाहे प्रकृति का कराल स्वरूप हो ना कि युद्ध हो ना कि महामारी हो उस समय किसको दोष देते हैं एक शैतान है जिसने कि ईश्वर के साथ में भगवान के साथ में युद्ध करके स्वर्ग छोड़कर नरक में जाकर के अपना घर बनाया और यह ईश्वर और यह शैतान इन दोनों के बीच में हमेशा से युद्ध चलता रहता है कभी यह सत की विजय होती है कभी असत की होती है कभी यह सत्व की होती है कभी तमस की होती है तो इस तरह से उन्होंने यह इमेजिनेशन करके रखा है किंतु हम हिंदू लोग ही है जिनमें यह साहस है कहने का कि यह कराल मुखी कराल तत्व यह सिर्फ ईश्वर का यह सौम्य तत्व ही यह कराल तत्व में भी ईश्वर प्रकट होते हैं एक भयावह स्वरूप भी यही ईश्वर धारण करते हैं और यह भयावह स्वरूप की भी उपासना हम लोग कर सकते हैं यह साहस हम लोगों में है तो यह बात स्वामी जी ने प्लेग जब कलकाता में फैला था उस समय यह बात कही थी इसको रिकॉर्ड किया है निवेदिता ने तो यह कराल रुद्र तत्व जो है माहा कालिका का इसके बारे में हम इस कविता में जनरली इसकी आलोचना हमको करनी है इसीलिए जो मातृ तत्व है या तो फिर यह शक्ति तत्व है इसके बारे में हम नहीं देखेंगे रुद्र तत्व के बारे में ही हम देखेंगे तो अभी यह तो हो गया प्रथम स्टेप प्रथम आयाम कि प्रकृति या तो युद्ध या तो महामारी एक महा भयावह स्वरूप धारण करके जब हमारे सामने आती है तो हम इस किस तर से इसका मुकाबला करेंगे क्योंकि यह जो उस समय हमारे जीवन में भी देखिए व्यक्तिगत जीवन में भी बहुत सारी जिसको कहेंगे कि दुर्घटनाएं एक के बाद होती ही रहती है और हम कैसे भी करके इसका मुकाबला भी करते हैं जो कोई धार्मिक व्यक्ति होगा तो फिर थोड़ा सा सत्संग करके मंदिर में जाकर के सत ग्रंथ का पाठ कर कर के उसका जो भय है या तो फिर जो यह दुर्घटना है उस से मुक्ति पाने का प्रयास करेगा और जो अधार्वा वह शराब पान करके ना कि दु दुष्ट चरित्र वाले लोगों का संग करके अपने मन को शांत करने का प्रयास करेगा यह तो इंडिविजुअल जब सामने आ जाती है दुर्घटनाएं तो ऐसा कोई ना कोई उपाय हम अमाए ऐसा कोई ना कोई उपाय हम करेंगे किंतु पूरे संपूर्ण समाज के सामने यह महा विनाशक घटनाएं आ जाएगी तब हम इंडिविजुअली कैसे उसका सामना करेंगे सामाजिक रूप में तो हम उसका सामना करते हैं जिस देश में जिस प्रजा में शक्ति होती है वे लोग खड़े होकर के इसका मुकाबला करते हैं जो प्रजा जिनमें शक्तिहीन वीर्य हीन हो गई है फिर वे लोग घुटने टेक देते हैं तो वो प्रजा के लेवल पे सामाजिक लेवल पे तो एक बात है इंडिविजुअल लेवल पे हम महाविनाश का किस तरह से सामना करते हैं यही हमारा सबसे बड़ा टेस्ट है और इसीलिए देखिए कि जितने भी विश्व धर्म है वर्ल्ड रिलीजन ऐसे धर्म कि जिन्होंने मनुष्य समाज के एक बहुत बड़े स्तर के ऊपर में अपना प्रभाव विस्तारित किया है इस तरह के विश्व धर्मों का जन्म ही हुआ है इस तरह की कोई ना कोई महा विनाशक घटनाओं के बीच में क्रिश्चियनिटी का जन्म के बारे में सोचिए कि उस समय ये जो रोमन एंपायर था उसका पतन हो रहा था डिसइंटीग्रेशन हो रहा था और जिन लोगों को ये लोग बर्बेरिस कहते थे यानी कि ये जो ट्राइबल बहुत सारी वहां पर ये बहुत सारे दल थे उनके लुटेरों के ट्राइब्स के वे लोग बार-बार आकर के रोमन जो शहर है उनके ऊपर आक्रमण करते शहर के शहर को जला देते स्त्रियों के ऊपर में अत्याचार करते शिशुओं का संहार करते पुरुषों की हत्या करते ऐसा भयानक एक समय चला था रोमन एंपायर के डिस इंटीग्र रेशन हो रहा था उस समय उस समय यह क्रिश्चियनिटी था कि जिस जिसने कि लोगों के मन को एक महा भई के सामने सांत्वना तो चाहिए तो उस समय यह क्रिश्चियनिटी का प्रचार होना धीरे-धीरे प्रारंभ हुआ था गांव गांव शहर शहर एक के बाद एक क्रिश्चन दल बनते गए और मन को शांत रखने के लिए अपनी जो सैनिटी है अपनी यह जो मेंटल बैलेंस जो है इसको बनाए रखने के लिए लोग इस तरह के जो प्रारंभिक चर्च थे बिल्कुल शुरू शुरू के उसमें जाते थे तो यह क्रिश्चियनिटी के बारे में भी इस्लाम के बारे में भी यह बात है अपना बुद्ध धर्म को देखिए कि यह भारतीय अपना जो वैदिक धर्म था उसमें एक तरह से जब भ्रष्टाचार प्रारंभ हुआ और जब राजा भ्रष्टाचारी होता है राजा और फिर जो प्रजा का पोषण करने वाला है तो आप समझ लीजिए कि प्रजा की अवस्था क्या होती होगी कोई भी लुटेरा है कोई भी दुश्मन राजा है वह आकर के आक्रमण करेगा और वही सब कार्य करेगा भयानक कार्य करेगा तो यह बुद्धिज्म का प्रारंभ भी यह वैदिक धर्म का डिसइंटीग्रेशन हो रहा था उस समय हुआ था और आज का रामकृष्ण विवेकानंद जो हमारा जो प्रचार हुआ है उस समय को भी आप देखिए कि ब्रिटिश साम्राज्य के सामने हमारा जब यह रिबेलियंस जब प्रारंभ हुआ साथ-साथ में ही ठाकुर महा स्वामी जी का आगमन हुआ यह फर्स्ट वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर फिर यह जो अपना फ्रीडम मूवमेंट फिर यह जो महामारी वगैरह जो फेमिन वगैरह भारत में जो बार-बार आते रहे इसके भीतर में देखिए कि ठाकुर मा स्वामी जी ने आज का जो यह युवा मानस ये जो युवा वर्ग है उस समय के भी जो फ्रीडम फाइटर थे उनको किस तरह से एक तरह से सस्टेनर दिया और इसमें भी यह जो ये अपने कितने ही फ्रीडम फाइटर जिनका हम वर्णन सुनेंगे पढ़ेंगे तो देखेंगे कि स्वामी जी ने इनको साहस दिया है तो यह कोई भी धर्म है वैश्विक धर्म उसका प्रचार कब सबसे ज्यादा होता है जबकि ऐसा महा भयानक विनाश उनके सामने उपस्थित होता है तो यह हो गया कि पहला स्टेप कि हम जब रुद्र तत्व की आलोचना करते हैं तो रुद्र तत्व के भीतर में मैकेनिज्म क्या है इसके बाद का जो स्टेप है इस इसके बाद में भी बहुत सारे स्टेजेस है जिसको कि लॉजिकल स्टेप्स है स्वामी जी ने यह जो पोयम लिखी काली द मदर इसके भीतर में कौन-कौन से विचार है स्वामी जी के व तो इसका पहला स्टेप इसके बाद में भी काफी कुछ आइडियाज है जिनको कि हम एक के बाद एक डिस्कस करेंगे और जैसे ही यह डिस्कशन समाप्त होगा हम लोग पोयम इट सेल्फ उसको प्रारंभ करेंगे तो आज यहीं तक अभी कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु अ तार भतर अमाद आध्यात्मिक प्रगति की को होवे मने यह जो सृष्टि उसका पालन और उसका भक्षण इसी यह जो चक्र जो है उसी के भीतर में से हमको अमरत्व किस तरह से प्राप्त करना है वही तो अल्टीमेट है ना क्योंकि ईश्वर के पास में हम क्यों आते हैं सिर्फ ये सृष्टि का तत्व चलाने के लिए नहीं साइकिल चलाने के लिए नहीं टू ब्रेक दिस वल ऑफ संसार यह संसार चक्र जो है इसको तोड़ करके उसका उसी का भक्षण करके उसी का संहार करके हमको अमरत्व प्राप्त करना है वो कैसे प्राप्त करें वो असली उसका उद्देश्य है बतर टे समाही तो ठाकुरे विजन मैंने तो ठाकुर का दर्शन था कि एक एक ही मां के भीतर में ही देवी के भीतर में ही यह सृष्टि स्थिति और संहार तीनों विराजमान है और इसका डिस्कशन हुआ भी है जैसे मैंने प्रारंभ में जो कहा था किंतु कश्मीरी शैविज्म वगैरह एक आधार लेकर के बात करते हैं जबकि रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के भीतर में ही इसका बहुत सारा कुछ डिटेल डेवलपमेंट है जिसको कि हमको थोड़ा इसके ऊपर ज्यादा ध्यान देना होगा कश्मीर सवि जम है या तो फिर जो तंत्र साधनाएं है शक्ति साधना है जैसे मैंने एक किताब का नाम दिया कि शास्त्र समत शास्त्र मूलक शक्ति साधना और इतिहास बड़े-बड़े इतने दो वॉल्यूम है मैं उसका फोटो बाद में भेजूंगा तो उ इतना डिस्कशन है यदि तंत्र साधना शक्ति साधना का किंतु फिर अल्टीमेटली हमको यह देखना है ठाकुर महा स्वामी जी इसको किस तरह से इंटरप्रेट करते हैं और मेरा खुद का क्या इंटरप्रिटेशन है सो आई एम मेकिंग दिस पर्सनल रदर देन बेस्ड अपऑन सम शास्त्रास स्वामी जी के बारे में एक शब्द है स्वयंभू स्वामी जी है स्वयंभू उनको किसी आधार की जरूरत नहीं है एक्चुअली यहां पर जो सीक्रेट क्या है पता है मैंने जो इसका जो स्टडी किया थोड़ा सा मुझे पर्सनली जो सबसे ज्यादा फेसिनेटिंग लगा कि रुद्र तत्व तो आलोचना हुई है किंतु रुद्र तत्व के भीतर में मातृ तत्व कैसे दर्शन कर लिया यह मुझे सही में यह पैराडॉक्स है ना इसका सोल्यूशन वो उस तरह से जैसे वो जन बुद्धिज्म में क्वान होता है ना एक पजल दे देते हैं कि साउंड ऑफ वन हैंड क्लैपिंग एक हाथ से ताली बजाने का आवाज कैसा होगा उसके ऊपर चिंतन करो जिस तरह जिस दिन आ उत्तर मिल जाएगा उस दिन आपको इनलाइटनमेंट मिल जाएगा तो और ये ये हुआ है राम प्रसाद के जीवन में नॉट इवन ठाकुर यह राम प्रसाद सेन किस तरह से उन्होंने मां काली के भीतर में मातृ तत्व दर्शन किया अभी उससे पहले भी साधक हुए होंगे इसमें कोई प्रश्न नहीं है किंतु रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के परिप्रेक्ष्य में देखें तो राम प्रसाद से यह उत्तराधिकार जैसे कि ठाकुर को मिला है सो यह सबसे बड़ा पजल है कि रुद्र तत्व में से आपको मुक्ति कैसे प्राप्त करनी क्योंकि बात तो सिर्फ ये नहीं है कि रुद्र तत्व अल्टीमेटली तो अपना है स्पिरिचुअल इनलाइटनमेंट तो रुद्र तत्व के भीतर में से स्पिरिचुअल इनलाइटनमेंट कैसे प्राप्त करें दैट पजल जो कि राम प्रसाद ने सोल की बाद में ठाकुर ने उसको उसके ऊपर में डेवलपमेंट किया और यही मां काली स्वामी जी के भीतर में प्रकट हुई तो ये जो है दैट इज द रियल पजल जिसको कि च विल बी वेरी फेसिनेटिंग टू एक्सप्लोर इनको दश महाविद्या कहते हैं यह दश महाविद्या जो है बगला धूमावती काली यह जो सब हां यह बंगाल के जितने भी गांव गांव में जाएंगे ना तो 10 महाविद्याओं की भयावह मूर्ति आपको दिखेगी मैंने मैं जब पहली बार देखा था मैं चौक गया था ये क्या है हम लोग गुजराती लोग यह जो हम लोग है ना खास करके जो लोग बंगोल में नहीं रहते हैं हम लोग के काली का जो रुद्र जो स्वरूप है या ईश्वर का कराल स्वरूप इसका जिन लोग ने कोई फैमिलियरिटी नहीं है और खास करके आजकल के जो पॉप कल्चर जो है ना पॉपुलर कल्चर उससे लोग जो सब हम लोग बचपन से ही एक्सपोज है हम लोगों को लगता है यह जो सौम्य और यह हीरो और विलन यह दोनों हमेशा अलग है दोनों में युद्ध होगा किंतु फिर इसको जब हम हिंदू शास्त्र में जब देखेंगे कि यही एक ही ईश्वर रुद्र तत्व में भी प्रकट हुए हैं सौम्य तत्व में भी वही गुण भी वही इवल भी वही तब हम लोग मलब पूरा सर चक करने लगता है कि यह क्या है किंतु इस में क्या है पता है वेदांत सो एब्स्ट्रेक्ट कि हमको ना अपना रियल लाइफ के साथ में उसका कोई कनेक्शन ही नहीं मिलता अब जैसे ऐसे कितने लोग होंगे बोलेंगे कि हम ब्रह्मास्मि या तो फिर मेरे भीतर में ब्रह्मण है किंतु जब बिहेवियर की बात आ जाएगी डे टू डे लाइफ की बात आ जाएगी उस तरह से बिहेव ही नहीं कर पाएंगे तत्व चिंतन की दृष्टि से भी देखिए अहम ब्रह्मास्मि और ये अपना डे टू डे लाइफ ये अर्थशास्त्र है नीति शस्त्र है युद्ध शस्त्र है ये राज्य नीति है जो कि अपना डे टू डे लाइफ है समाज को चलाता है तो वेदांत और इसको जोड़ता क्या है जोड़ता है यह शक्ति तत्व शक्ति तत्व इज देर इन मिडल किय ब्रिज बनाता है एक है संपूर्ण रूप से अद्वैत वेदांत दूसरा है अपना डे टू डे लाइफ जिसमें कि यह समाज के भीतर में रहकर हमको आत्मज्ञान प्राप्त करना है वी नीड समथिंग व्हिच इज मोर नियरर व्हिच इज मोर अंडरस्टैंडेबल जो कि अपने सर के भीतर में जाए वरना अभी इसके साथ में मेरा झगड़ा हो गया तो मैं उसको क्षमा कर दूंगा कितने लोगों में यह साहस है लाख में से एक होगा जो कि दूसरे को क्षमा कर पाएगा बाकी हम ऐसा अपने मन में एक रखेंगे कि नहीं उसका तो मैं कुछ ना कुछ कर ही लूंगा तो य ये अल्टीमेट ब्रह्म तत्व और बहुत सारे लोगों को मैंने देखा भी है ब्रह्म तत्व की बातें करेंगे बिहेव इस तरह से करेंगे जैसे कि आपको बिल्कुल सड़क के ऊपर में चल चलने वाले लोग इस तरह से करते हैं तो शक्ति तत्व इज अ सॉर्ट ऑफ अ ब्रिज कि वो अल्टीमेट अद तत्व को आप हाउ टू इंप्लीमेंट इट हाउ टू अंडरस्टैंड विदन डे टू डे लाइफ एंड हाउ टू फाइंड पाथ आउट ऑफ दिस पजल य मेज होता है ना भुलभुलैया व देखा होगा कभी कि बहुत बड़ी भुल भुलाया होती है आपको चलना होता है उसमें से रास्ता निकलना है तोय जीवन रूपी जो भुलभुलैया है शक्ति तत्व हमको य इट विल टेक अस टू द गेट टू क्रॉस द गेट टू आउटसाइड इट विल अवतन बट एटलीस्ट यू विल नीड समथिंग इन बिटवीन और एक एक बड़ा ही सुंदर इंसिडेंट है ठाकुर एक बार आप थोड़ा सा बैठे थे थोड़ा ध्यान से शांति से एकाएक भीतर में से ठाकुर बोलते भीतर में से सच्चिदानंद बाहर आ गया और कहने लगा आमी जुगे जुगे अवतार मैं ही युग युग से अवतार हूं तो ठाकुर ने सोचा पहले ठाकुर खुद वर्णन कर र है अमी मैंने पहले सोचा मेरे मन का भ्रम है किंतु फिर वही सच्चिदानंद जो कि उनके पदर में से प्रकट हुआ है वही कह रहा है कि चैतन्य देवो शक्ति आराधना कोरे छल चैत न्य देव भी शक्ति की आराधना की थी तो देखिए कि यह बात तो ठाकुर को नरेंद्र को मनवाने थी ना कि अवतार तत्व भी तो ऐसे इन मिडल है कि अल्टीमेटली अद्वैत की दृष्टि से देखें तो अवतार नहीं है बट ठाकुर नर को क्या कहते हैं तोर वेदांत दिख दिए नाई तुम्हारी वेदांत की दृष्टि से नहीं तो यहां पर भी दोनों तत्व यह दोनों ठाकुर के विजन है पहला वाला हम बड़ा फेमस है सब जगह पर हम पढ़ते हैं कि तुम्हारी वेदांत की दृष्टि से नहीं जो राम थे जो कृष्ण थे वही आज राम कृष्ण है वर्ल्ड फेमस है है किंतु यह जो दूसरा विजन है ट इज इक्वली इंपोर्टेंट कि चैतन्य देव भी शक्ति की आराधना की थी व आमी जुगे जुगे अवतार मैं युग युग से अवतार हूं किंतु शक्ति तत्व भी इतना ही इंपॉर्टेंट है तो यह अवतार तत्व और शक्ति तत्व दोनों मिलकर के दे बिल्ड ब्रिज और यह अवतार और शक्ति ये दोनों का कॉमिनेशन दैट इज द ट्रू सीक्रेट कि आपको समझना है कि अल्टीमेट अ के पास जद आता है किसी ने ठाकुर को एक बार ठाकुर ध्यान में बैठे हैं ध्यान में से बाहर आए एकदम गंभीर भाव है ईश्वरीय भाव और पूछते हैं बोलो तुम लोग जो प्रश्न करोगे मैं उत्तर दूंगा अभी हम लोग तो सोच भी नहीं सकते ऐसा नसीब कब आएगा कि अवतार स्वयं आ कर के बोले प्रश्न करो मैं उत्तर देता हूं तो उनके सामने जो लोग बैठे थे उसमें से एक ने प्रश्न किया अभी क्या प्रश्न करेंगे उस लेवल का तो प्रश्न करता है काली कालो केन काली काली क्यों है तो ठाकुर ने उत्तर दिया कि दूरे बोले कालो काश आले कोनो कलर नहीं मने दूर है तो काली दिख रही काला कलर दिख रहा है पास में आओगे तो कोई कलर नहीं जैसे कि समुंदर का पानी है आप दूर से देखेंगे नीला कलर है किंतु पास में जाकर के हाथ में पानी उठाएंगे तो देखेंगे उसका कोई कलर नहीं है तो वैसे ही यह दूर से देखते हैं तो वोह है कि मतलब अद्वैत तत्व तो हमारे पास में नहीं है अद्वित तत्व दूर है तो दूर से हम देखेंगे तो हमको शक्ति स्वीकार करनी पड़ेगी पास में आ जाएंगे तो अहम ब्रह्मास्मि तो प्रश्न ही खत्म हो गया किंतु जब तक अवेद समझ में नहीं आता है तब तक शक्ति के अस्तित्व को स्वीकार करना है य नहीं व वो ठाकुर की कहानी है ना कि वह शाक्त और वैष्णव दोनों के भीतर में यह होता है झगड़ा तो वैष्णव कहता है कि हमारे कृष्णा है वह भवसागर के वह कांडी है भवसागर आपको नौका में बिठाकर पार करवा देंगे तो वो शाक्त कहते हैं कि हमारी मां तो राज राजेश्वरी है वह थोड़ी ना स्वयं आपकी नौका में बैठ के नौका पार कराएगी वो कृष्णा को माने ही रख दिया है व नाविक के रूप में कि आपकी नौका पार करा [हंसी] है एक्चुअली जो हमारा जो डिफिशिएंसी है ना ये पूरा डिस्कस करने का हम लोग सिर्फ अवतार तत्व माने अद्वैत दूर है तो चलो अवतार तत्व को चिंतन करते हैं किंतु साथ में शक्ति तत्व को भी लेना है ये अवतार तत्व और शक्ति तत्व दोनों मिलकर के ये रेल की दो पटरियों की तरह यह ब्रिज बनाती है शिव अवतार तत्व ब्रिज नहीं बना पाएगा बहुत सारे लोगों को अवतार के ऊपर में जो अविश्वास होता है स्वामी जी का खुद का एक बड़ा उदाहरण है तो शक्ति तत्व अवतार तत्व दोनों साथ में जब चिंतन करेंगे और तब कहीं जाकर के हमको यह ब्रिज मिलेगा उसमें भी यह सौम्य स्वरूप या तो फिर यह पालन हरता उसके साथ में यह स्वरूप इसको भी आपको इस मिक्स में डालना होगा टू हैव अ कंप्लीट पिक्चर वरना फिर आप ऐसा कहेंगे कि सौम्य ईश्वर ही है तो फिर संहार कौन करता है मेरे जीवन में इतने दुख दर्द ये जो बार-बार विद्यासागर के पास में ठाकुर जाते हैं तो विद्यासागर कहते हैं भगवान ने ऐसी सृष्टि की रचना क्यों की जिसमें इतने सारे लोग गरीब है विधवा हैं अपंग है अपाहिज है यह अनाथ है क्यों ईश्वर ने इस तरह की सृष्टि की रचना की तो उसका फिर तो उत्तर तो यही शक्ति तत्व कि जो सौम्य है जो सृष्ट करता है वही संहार भी करता है हां मने काली रुद्र तत्व जो भी है पूरा हम कवर करेंगे किंतु जैसे मैंने कहा इसके बाद में भी एक तत्व है वह मातृ तत्व माने मातृ तत्व सज यदि होता अपने साहित्य में तो वह कोई एक प्रश्न नहीं था कोई एक फेसिनेटिंग चीज नहीं थी रुद्र तत्व के साथ में मातृ तत्व कैसे बिठाया ट इज अ रियल पजल तो किंतु रुद्र तत्व की हम आलोचना व्यवस्थित रूप से करेंगे बाद में फिर कभी जब समय मिलेगा तो राम प्रसाद से प्रारंभ करके कि किस तरह से राम प्रसाद ने मां काली की आराधना प्रारंभ की किस तरह से ठाकुर ने ऐसा रुद्र स्वरूप के भीतर में मातृ स्वरूप का दर्शन किया इट विल बी वेरी फेसिनेटिंग किंतु उसके लिए ना थोड़ा सा और दिमाग को ठंडा करके फिर आराम से बैठ के सोचना पड़ेगा एक ब क्योंकि अगेन मैं जद यह जो ग्रंथ है शास्त्रीय ग्रंथ उसका सहारा लेकर के वह रेफर करके बात कर सकता हूं बट जैसे मैंने पहले ही कहा कि मेरे जितने भी क्लास है आई डोंट वांट टू रेफर टू समथिंग आउटसाइड ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर मैंने स्टडी किया है और आज भी मैंने उसको रेफर किया है थोड़ा बहुत बट अल्टीमेटली टुडे आवर क्लासेस आर बेसिकली बेस्ड ऑन राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य समग्र एंड माय अंडरस्टैंडिंग ऑफ इट क्योंकि क्या है कि राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य भी तो एक महासागर है ना कोई भी व्यक्ति ऐसा दावा नहीं कर सकता मैंने समझ लिया है सो माय अंडरस्टैंडिंग ऑफ राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य दैट इज व्हाट वी विल फोकस अपन न