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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 19 Dec 2023

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ओ स्प का यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम अभी आज से लग रहा है कि ठंड पड़ रही है कल रात भी ठंडा था आज सुबह को भी मैं जब आज पहली बार कुछ स्वेटर पहना है मैंने रूम से यहां पर आ रहा था तो खुले रास्ते में पहली बार ठंडी लगी है आज एक समय था कि दीपावली के दिन यानी कि अक्टूबर नवंबर में हम लोग स्वेटर पहना करते थे आज अभी ऐसी परिस्थिति है कि दिसंबर का एंड आने को आया है और तब कहीं जाके थोड़ी ठंडी लग रही है क्या ये क्लाइमेट चेंज करेगा पता नहीं अच्छा तो हम लोग पढ़ रहे थे कॉस्मस थिंग माइक्रो कजम पहला लेक्चर स्वामी जी का काकड़ी घाट सीरीज वाला उनका जो अनुभव था उनकी जो अनुभूति थी उसके आधार पर उन्होंने दो स्पीच दो लेक्चर दिए थे मैक्रो कजम एंड माइक्रो कजम मैक्रो कजम इज द स्टडी ऑफ द कॉस्मो एट लार्ज पूरे विश्व ब्रह्मांड का जो स्टडी है पूरे विश्व ब्रह्मांड की उत्पत्ति उसका प्रयोजन और उसका अंत यह कैसे होने वाला है यह स्टडी माइक्रो कजम में की गई और मैक को जम अर्थात कि हमारा हृदय मनुष्य मनुष्य के हृदय में क्या हो रहा है या तो फिर मनुष्य की उत्पत्ति मनुष्य का प्रयोजन क्या है यह स्टडी होगी माइक्रो कजम में हमको लगेगा कि इतने सारे साइंटिस्ट इतने सारे सालों से इतना स्टडी करते आ रहे हैं फिर भी वे लोग विश्व ब्रह्मांड को इतना अच्छे से नहीं समझ सके हैं हमारे पास में न्यूटन से लेकर के आइंस्टाइन तक की सीरीज ऑफ थिरी है कॉस्मो या तो फिर यूनिवर्स को समझाने के लिए तो क्या उनकी थिरी से भी ऊपर यह वेदांत है यह प्रश्न होगा प्रश्न होना ही चाहिए मेरा जो पर्सनल इसका निष्कर्ष है या तो फिर वेदांत इसको कहता है कि विश्व या तो फिर यह फिजिक्स है या तो फिर एस्ट्रोनॉमी है या तो फिर यह कॉस्मोलॉजी है यह क्या करते हैं अभी का ब्रह्मांड किस तरह से है उसको समझाते हैं उसकी उत्पत्ति और उसका विनाश यह कैसे होगा या हो सकता है इसके बारे में उनके पास में सिर्फ स्पेक्युलेटिंग यूनिट देखता है जैसे कि स्वामी जी ने समझाया एक पेड़ है पेड़ एक बीज को जन्म देता है इस यह बीज पृथ्वी पर गिरेगा और उसमें से एक नया पेड़ जन्म लेगा तो और फिर उस पेड़ में से नया बीज बनेगा यह जो य एक जन्म सृष्टि स्थिति और प्रलय यह जो साइकल है यह एक दूसरे के साथ में जुड़ी हुई है ऐसा नहीं है कि जो पहले वाला बीज आया वो कहीं आकाश से गिरा था ये जैसे मेटराइड या एस्टेरोइड आती है ये मेटराइड गिरती है पृथ्वी पर आकाश में से उल्कापात जैसे होता है तो वैसे या तो फिर आकाश में से बारिश होती है तो ऐसा बारिश की साथ-साथ में कुछ बीज कहां से गिरा उसमें से पेड़ हुआ और फिर पेड़ का जो बीज हुआ वो वहीं पर नष्ट हो गया ऐसा नहीं है यह साइकल है तो ये अंडरस्टैंडिंग ऑफ कॉस्मो एज ए साइकल यह हमारा वेदांत का एक यूनिक पर्सपेक्टिव है य साइंटिस्ट लोग इस साइकिल को नहीं एक्सेप्ट करेंगे ओबवियसली क्योंकि उनका जो बेसिक आधार है साइंस का आधार क्या है जो ऑब्जर्वेटरी डिसीजन या तो फिर अपनी थिरी बनानी है ऑफकोर्स देर आर थिरी देयर आर मैथ्स देयर आर इक्वेशंस व्च स्पेक्युलेटिव ऐसी ऐसी थिरी है जो कि साइक्लिकल नेचर विश्व ब्रह्मांड उत्पन्न होता है फिर उसका प्रलय होता है बिग बैंग बिग क्रंच ऐसा ये लोग कहते हैं फिर से बिग बैंग होता है फिर से बिग क्रंच होता है तो ऐसी थरी है उनकी ओके बट दे आर स्पेक्युलेटिव सिर्फ और इसीलिए हम लोग जैसे मैंने पिछली बार हम मैक्रो कजम का स्टडी कर रहे थे कि वेदांत क्या है क्या वेदांत स्पेक्युलेटिंग स्वामी जी विजन और कोई प्रूफ नहीं है और विजन को क्या हम लोग सब्जेक्टिव प्रूफ स्वीकार करेंगे कि नहीं या तो फिर सॉरी ऑब्जेक्टिव प्रूफ के रूप में उसको स्वीकार करेंगे कि नहीं क्योंकि साइंस क्या कहता है आज अभी जैसे कि वो एक एक्सपेरिमेंट है कि आप एक एक पंखी है उसका एक पीछा है ये फिदर जिसको कहते हैं पंखी का एक पीछा उसको और एक लोहे का बोल ये दोनों को आप तीसरी मंजिल से या चौथी मंजिल से जमीन पर फेंके तो सबसे पहले जमीन पर क्या गिरेगा कॉमन सेंस कहेगी कि लोहे का जो मोर पिक्ष है जैसे मान लीजिए प एक फिदर है वो जमीन पर धीरे-धीरे गिरेगा क्योंकि उसका वेट नहीं है तो अभी साइंस हमको क्या कहता है कि देखिए यह हवा आती है इसकी वजह से पीछा जिसका वेट नहीं है वह हवा की वजह से इधर-उधर जाता है बोलकर के वो देरे से गिरता है वरना यदि हवा का रेजिस्टेंस ना हो यदि हवा को ब्लॉक कर दिया जाए तो एक लोहे का अभी यह जब थिरी जब उसका हुआ यह उदय तो साथ-साथ में उसको एक्सपेरिमेंट करके प्रूव कर लिया कि हां भाई यह तो सही है कि यदि आप ऐसी जगह पर एक्सपेरिमेंट करें कि जहां पर हवा नहीं बहती है तो सच में फिदर और लोहे का बोल एक साथ में जमीन पर गिरे गए तो जैसे ही थिरी जन्म लिया थ थियोरेटिकल उन लोगों ने डेवलप कर ली वेदांत के साथ में क्या होता है स्वामी जी ने ऐसी एक बात कही कि हां यह विश्व ब्रह्मांड है उसका साइक्लिकल नेचर है उसका एक बीज में से जन्म होता है फिर यह पूरा इतना बड़ा और यह जो बीज है वो एक डिवाइन है क्योंकि डिवी निटी में से ये सीड आता है इवॉल्व होकर के गॉड इवॉल्व इन अ सीड फॉर्म जैसे स्वामी जी कहते हैं ईश्वर अपना एक बीज के रूप में निहित हो जाते हैं फिर इसी दिव्य बीज में से डिवाइन सीड में से ये आज का कॉस्मो होता है और यह कॉस्मो इवोल्व होकर के उसी ईश्वर में परिणत होता है तो अभी स्वामी जी ने जब हमारे सामने यह थिरी रख दी तो इसका प्रैक्टिकल कहां है कैसे हम प्रैक्टिकल करेंगे कहां भगवान को कहेंगे कि हमारी नजर के सामने आकर के एक बीज में परिणत हो कर के दिखाओ फिर उस बीज में से नया ब्रह्मांड बना करके दिखाओ ऐसा तो होने नहीं वाला है तो प्रश्न होगा कि स्वामी जी का ये स्पेकल है ना कि यह रियल साइंस है तो इसका क्योंकि अभी देखिए हम यदि किसी को बोलेंगे कि यह जो पंखी का पीच है यह तो फिदर है ये फिदर और यह लोहे का बोल इसका जो आपने एक्सपेरिमेंट किया और जिसके बेस पर आप थिरी बनाते हैं इसका सत्य और असत्य क्या है मेरे सामने प्रूव करो यदि हम इस साइंटिस्ट को कहेंगे तो साइंटिस्ट कहेंगे कि ये एक्सपेरिमेंट आप ही कर लीजिए देख लीजिए ऐसी हवा नहीं आती ऐसी बंद जगह में और हम जद एक्सपेरिमेंट करेंगे तो इमीडिएट हमारे सामने वही रिजल्ट आएगा यानी यह एक्सपेरिमेंट मैं करूं ना कि आप करें यह भारत राजकोट में हो ना कि कोलकाता में हो ना कि कहीं न्यूयॉर्क में हो ना कि बेजिंग में हो कहां पे भी ये एक्सपेरिमेंट होगा कोई भी इस एक्सपेरिमेंट को करेगा दे विल सी द सेम रिजल्ट इसको ऑब्जेक्टिव रियलिटी कहती है एक्सपेरिमेंट कौन करता है इसके ऊपर में एक्सपेरिमेंट के रिजल्ट का कोई फर्क नहीं पड़ता तो इस तरह का वेदांत में है क्या स्वामी जी को काकड़ी घाट जो एक यूनिक एक्सपीरियंस हुआ क्या मुझे ऐसा एक्सपीरियंस होगा कि नहीं यदि मैं स्वामी जी की तरह सेम मेथोड फॉलो करूं कि हां मैं ठाकुर तो मुझे नहीं मिलने वाला है दक्षिणेश्वर जाऊंगा तो मुझे सिखाने के लिए किंतु मान लीजिए कि मेरे में आज इतनी क्षमता आ गई तपस्या करने की और स्वामी जी की तरह निर्विकल्प समाधि मैंने प्राप्त कर ली इसके बाद में मैंने भारत भ्रमण करना शुरू किया हिमालय में कहीं जा रहा था कहीं वटवृक्ष के नीचे बैठा था सेम अभी मुझे एक्सपीरियंस हुआ कोई आध्यात्मिक अनुभूति हुई किंतु वह आध्यात्मिक अनुभूति यही होगी ना कि और कोई होगी वो अनुभूति मुझे और ही कुछ बताएगी कि नहीं यह ब्रह्मा ये भगवान विष्णु जो शेष शैया प सोए हुए थे उनकी नाभि में से कमल प्रकट हुआ और यह कमल में से फिर कहीं जाकर के वह विश्व ब्रह्मांड प्रकट हुआ मुझे ऐसा भी दर्शन हो सकता है किसको पता या दर्शन का सत्यता असत्य का उसकी ऑब्जेक्टिविटी क्या हम ठीक कर पाएंगे कि नहीं यह तो एक बहुत बड़ा प्रश्न है यानी कि स्वामी जी ने जो कहा वह फिलोसोफी है वोह साइंस नहीं है यही तो हुआ ना अभी जैसे कांड है हेजल है नकी अरो बिंदो है ये लोग बड़े-बड़े फिलोसोफर है ये लोग बड़ी-बड़ी फिलोसॉफिकल थिरी हमारे सामने रखते हैं और इस थरी को हम सीरियसली स्टडी भी करते हैं किंतु इस थरी को हम कभी भी ऑब्जेक्टिव ट्रुथ के रूप में स्वीकार नहीं करते जैसे कि हम फिजिक्स बायोलॉजी या मैथमेटिक्स को करते हैं साइंस इज साइंस फिलोसोफी इज फिलोसोफी एक ऑब्जेक्टिव ट्रुथ है दूसरा सब्जेक्टिव ट्रुथ है मैं जो स्पेक्युलेटिव उसके ऊपर में मेरा यह फिलोसोफी डिपेंड करता है अभी मेरा अनुभूति मेरा संस्कार आपसे अलग है मैंने कोई अलग तरह की किताबें पढ़ी है आपने अलग तरह की किताबें पढ़ी है मैं हिंदू हूं कोई जैन है कोई बौद्ध है कोई सिख है तो उन तीनों को चारों को जो आध्यात्मिक अनुभूति होगी वह जिस धार्मिक ट्रेडीशन में से वो आए हैं उसमें जो किताबें पढ़ी है उनके जो संत महापुरुष है उनकी जो वाणी है उसके अनुसार उनको जो दर्शन होगा मुझे मेरे ट्रेडीशन के अनुसार मैं जिस तरह से चला हूं तो मुझे उस तरह के दर्शन होंगे तो यह स्पिरिचुअल दर्शन आध्यात्मिक दर्शन सब्जेक्टिव है जिनको दर्शन होता है उनके ऊपर डिपेंड करता है नहीं कि दर्शन का अपना खुद का एक स्वरूप है यह बात हम लोग कह सकते हैं यानी कि वेदांत इज फिलोसोफी वेदांत इज नॉट ए साइंस ऐसा प्रश्न होगा तो देखिए कि 20th सेंचुरी में यह सब्जेक्टिव ऑब्जेक्टिव के बीच की यह जो बड़ी एक दीवाल थी वह टूट गई क्वांटम साइंस आने के बाद में 20th सेंचुरी में क्या हुआ हमको पता चला कि हम जब ऑब्जर्वेशन करते हैं उसमें ऑब्जर्वर का एक रोल होता है जैसे कि एक बड़ा ही फेमस फिर से थॉट एक्सपेरिमेंट ये आइंस्टाइन जर्मन था तो आइंस्टाइन इस तरह के थॉट एक्सपेरिमेंट कर किया करता था तो इसको कहते हैं गड़क जर्मन शब्द है और इसको बाद में एकेडमिक वर्ल्ड में जनरली स्वीकृत कर दिया गया है तो ये एक थॉट एक्सपेरिमेंट यह लोग करते हैं आइंस्टाइन और इन लोगों का जब झगड़ा स्टार्ट हुआ कि क्या ईश्वर सही सही में इस तरह का कोई एक विचित्र कार्य करता है जो कि सब्जेक्टिव रियलिटी क्रिएट करता है नहीं कि ऑब्जेक्टिव तब उसके व उसके अपोजिशन में आइंस्टाइन कहता है कि गॉड डज नॉट प्ले डाइस ये बहुत बड़ा फेमस उसका है कि ईश्वर यह पासे नहीं खेलता ईश्वर जुगार नहीं खेलता तो किस तरह से देखिए कि क्वांटम डायनेमिक्स किस तरह की एक विचित्र हमारे सामने कहानी रजू करता है मतलब यह जो स्वामी जी का जो एक्सपेरिमेंट जो जदी हमको यह विजन जदी हमको आउट ऑफ दिस वर्ल्ड लगेगा माने एक बहुत ही क्या कहेंगे कि मिस्टिकल विजन लगेगा तो ये लोगों का देखिए कि थॉट एक्सपेरिमेंट कहां तक जाता है ये लोग कहते हैं कि एक बॉक्स है बॉक्स में आपने बिल्ली को रखा है तो यह बिल्ली जिंदा है या मर गई इसका प्रमाण क्या है तो प्रमाण तब होगा जब आप बॉक्स खोल कर के देखेंगे कि वह जिंदा है या मृत है जदिया मृत है तो यह तो हमको कॉमन सेंस लगता है हां ऑफकोर्स कोई इस कमरे में बंद है वोह आदमी क्या कर रहा है जब तक मैं कमरे में नहीं जाऊंगा मुझे मुझे कैसे पता चलेगा ये सब कॉमन सेंस की बात है किंतु अभी क्वांटम डायनेमिक्स एक स्टेप आगे जाकर क्या कहता है यह कहता है कि बिल्ली विल बी द कैट विल बी इन सुपर पोजीशन ये सुपर पोजीशन नाम का एक भूत उन्होंने खड़ा किया है क्या कहते हैं कि बिल्ली एक साथ में जिंदा भी है और मृत भी है ऐसा नहीं है कि मुझे नहीं पता इसलिए वह जिंदा भी हो सकती है कि मृत हो सकती है मतलब रियली साइंटिफिकली मैथमेटिकली बिल्ली दोनों स्टेट में एक साथ में रहती है जिंदा भी है और मृत भी है इसको कहते हैं सुपरपोजिशन तो यह ऑब्जर्वर है व जब ऑब्जर्वेशन करेगा तब यह सुपर पोजीशन इसको कहते हैं वेव फंक्शन कोलप्पन पोजीशन है जिंदा और मृत दोनों वो एक स्टेट में फिर आ जाएगी हम जैसे ही बिल्ली को देखते हैं फिर वोह सिर्फ जिंदा होगी या वो सिर्फ मृत होगी दोनों एक साथ में नहीं होगी किंतु जब तक हम उस बिल्ली को ऑब्जर्व नहीं करते हैं तब तक वह रियली जिंदा और मृत दोनों एक साथ में है ऑफ कोर्स ये एक एक्सट्रीम एग्जांपल है यह सब एटॉमिक पार्टिकल के ऊपर में ही यह सत्य है सब एटमिक पार्टिकल अर्थात कि इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन वगैरह इससे बड़े पार्टिकल यानी कि मॉलिक्यूल या तो इंसान या तो बिल्ली इनके ऊपर में यह बात सत्य नहीं है हम हम लोग क्लासिकल फिजिक्स के भीतर में आते हैं और यह सब एटॉमिक पार्टिकल है वह व मॉडर्न यानी कि क्वांटम फिजिक्स के भीतर में आते हैं तो किंतु यह क्वांटम डायनेमिक्स सही सही क्या है उसकी विचित्र कैसी है यह समझाने के लिए इस तरह से एक क्लासिकल फिजिक्स में से एक उदाहरण हमारे सामने रजू किया है तो यह जद इस तरह का रियलिटी इज आल्सो सब्जेक्टिव रियलिटी को दो पार्ट में विभाजित कर दिया गया क्लासिकल रियलिटी एंड क्वांटम रियलिटी क्लासिकल रियलिटी क्या कहता है कहती है कि यह किताब है यह किताब मेरे टेबल के ऊपर में पड़ी हुई है अभी जब मैं अपने रूम में जाऊंगा तो यह किताब टेबल पर ही रहने वाली है हां शायद हो सके कि किसी को इस किताब को रेफर करना है पब्लिकेशन डिपार्टमेंट है किताबों की जरूरत पड़ती रहती है यहां से किसी वॉलंटस रेफर करने के लिए फिर और इधर-उधर कहीं पर रख दी अभी मैं रूम में हूं मुझे पता नहीं है कि मेरी किताब सही सही मेरे टेबल प है कि और कहीं हो सकती है ऐसा ट्रूली पॉसिबल यह मेरा इग्नोर जबकि क्वांटम डायनेमिक्स क्या कहता है कि मॉडर्न रियलिटी क्या कहती है कि जब मैं अपने रूम में चला जाऊंगा तब यह किताब यहां पर नहीं होकर के पूरे विश्व ब्रह्मांड में कहीं पर भी हो सकती है स्टेटिस्टिक्स में बैठी हुई हो 1 पर प0 पर रियालिटी है कि एंड्रोमेडा गैलेक्सी में हो 01 पर रियालिटी है कि मार्स के ऊपर में हो 001 पर रियलिटी है कि मेरे ही साथ में मेरे ही कमरे में मेरे ही बेड के नीचे में हो कुछ भी हो सकता है ब दिस इज रियल ये मेरा इग्नोर नहीं है सही सही किताब इस अनेक सारे स्टेट में वो विभाजित हो सकती है फिर मैं जब अपने रूम में से वापस आऊंगा ऑफिस में किताब को ऑब्जर्व करूंगा तब यह वेव फंक्शन कोलप्पन से यहां पर हो जाएगी देखिए यह कितना बड़ा मतलब यह रेवोल्यूशन आया है साइंस में पिछले ये 1900 से लेकर के मैक्स प्लांक ने ये क्वांटम लेंथ जब उसने आविष्कार की डिस्कवर की तब से लेकर के 1950 तक 50 साल में जो रेवोल्यूशन आया है हमारी विचार सारणी में फिजिक्स और नेचर को समझने में इट इज ट्रूली माइंड बॉगलिंग बहुत कम लोग इस बात को समझ पाए हैं आइंस्टाइन की थिरी ऑफ रिलेटिविटी और यह क्वांटम डायनेमिक्स दोनों ने मिलाकर के हम विश्व ब्रह्मांड को या तो नेचर को या तो फिजिक्स को जिस तरह से समझे हैं उसको पूरा उलट पुलट कर दिया है सब एटॉमिक पार्टिकल या तो वर्ल्ड एट एन एक्सट्रीम वेलोसिटी एक्सट्रीम वेलोसिटी यानी कि प्रकाश की स्पीड से आप 10 पर 20 पर 30 पर आप गति करना शुरू करेंगे तब आपको एक नई ही रियलिटी दिखाई देगी जब मैं यहां पर स्टेशनरी हूं या तो फिर मेरी साइज एक सब एटॉमिक पार्टिकल से बड़ी है तब तक मैं क्लासिकल फिजिक्स के भीतर में हूं मेरी साइज सब एटॉमिक पार्टिकल से कम हो गई या तो फिर मेरी स्पीड स्पीड ऑफ लाइट है 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड तो 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड की स्पीड ऑफ लाइट है उसके 10 परसेंट यानी कि मान लीजिए 30000 किलोमीटर पर सेकंड की गति से मैं दौड़ना किसी स्पेसशिप में उड़ना शुरू करता हूं तब मुझे एक नई ही रियलिटी दिखाई देगी तो ये रियलिटी एट हाई वेलोसिटी रियलिटी एट सब एटॉमिक पार्टिकल ये पूरी डिफरेंट है फ्रॉम व्हाट वी एक्सपीरियंस डे आफ्टर डे तो यह सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव की दीवाल है वो मॉडर्न फिजिक्स ने तोड़ दी है अभी कहीं जाकर के हम बोलेंगे कि हां स्वामी जी को इस तरह का एक्सपीरियंस हुआ कि उन्होंने देखा कि एक ईश्वर एक बीज के रूप में वह समाहित हुए इवॉल्व हुए और फिर इस बीज में से विश्व ब्रह्मांड की शुरुआत हुई अभी मुझे हो सकता है कि बिल्कुल ही डिफरेंट विजन हो मुझे ऐसा विजन हो सकता है कि भगवान विष्णु ने या तो फिर भगवान ब्रह्मा ने अपनी एक इस तरह से आदेश किया जैसे कि वह क्रिश्चियन बाइबल में है ना लेट दे लाइट ईश्वर ने कहा तो यह ब्रह्मांड की शुरुआत हुई य लाइट की उत्पत्ति हुई ऐसा भी मुझे विजन हो सकता है एंड बोथ विजन आर करेक्ट बिकॉज दे डिपेंड ऑन सुपर सेंशुअल सुपर कॉन्शियस एक्सपीरियंस यह मेरा जो सुपर कॉन्शियस एक्सपीरियंस है उसके ऊपर में डिपेंड करते हैं जो मल्टीपल विजन है सब सही हो सकते हैं क्यों क्योंकि हम सबके भीतर में एक ही आत्मन है स्वामी जी को विजन हुआ स्वामी जी ने जिस आत्मन के द्वारा जिस आत्मन के ऊपर में जिस आत्मन का दर्शन किया मेरे भी भीतर में में भी वही आत्मन है यह जो अंतःकरण रूपी जो मन बुद्धि चित्त और अहंकार इसको वेदांत में कहते हैं अंतःकरण तो मेरा अंतःकरण और स्वामी जी का अंतःकरण आपका अंतःकरण अलग-अलग है क्योंकि आपका मन आपकी बुद्धि आपका चित्त और आपका अहंकार यह जन्म जन्मांतर की जो यात्रा है उसकी वजह से एक फिंगर प्रिंट जैसे अपनी होती है कैसी यूनिक होती है तो वैसे ही सबका एक यूनिक यूनिक अंतःकरण होता है किंतु हम सबके भीतर में सेम आत्मन है सो ये आत्मन इज सेम अंतःकरण इज यूनिक लाइक फिंगरप्रिंट तो अंतःकरण यूनिक यूनिक होने की वजह से हमको जो दर्शन होते वो तो अंतःकरण के ऊपर में है तो हमको यूनिक दर्शन होंगे किंतु आत्मन एक ही है यानी कि दर्शन का जो तात्पर्य है दर्शन का जो एक फिलोसॉफिकल मीनिंग है दर्शन का जो एक एक कंक्लूजन या तो फिर उसकी जो इफेक्ट है वो सेम होगी दर्शन ठाकुर को आएंगे कि चलो एक मां मां काली एक छोटी बच्ची होकर के उनके साथ में खेल रही है यदि और कोई संत होगा तो उनको ऐसा दर्शन होगा जैसे मीराबाई का कि भगवान कृष्ण के साथ में भगवान कृष्ण स्वयं आकर के उ उनके साथ में वार्तालाप कर रहे है तो कहेंगे कि मां कालिका छोटी बालकी के रूप में दर्शन होना ठाकुर को या तो फिर मीराबाई को भगवान कृष्ण का दर्शन होना ठाकुर का बालक भाव थाला मीराबाई का एक तरह से कहा जाए तो मधुर भाव था तो यह भाव का तात्पर्य भाव बिल्कुल अलग है तो ऐसा क्यों यदि भगवान एक ही है तो एक ही तरह का दर्शन होना चाहिए नहीं किंतु देखिए कि दोनों का अंतःकरण बिल्कुल डिफरेंट था मीराबाई हमारी राजस्थान गुजरात की ट्रेडिशनल हुई थी इस तरह से उनकी सोच थी उनकी लैंग्वेज वो थी उसकी वजह से उनको एक यूनिक दर्शन हुआ ठाकुर बंगोल की ट्रेडीशन में बड़े हुए थे बंगोली उनकी लैंग्वेज थी और उन्होंने खैर ठाकुर इज अ यूनिवर्सल उनको तो बेंगोली नहीं कह सकते किंतु फिर भी एक लैंग्वेज की वजह से एक सरकमस्टेंस की वजह से उनको काली मंदिर में रहते थे काली के पुजारी थे तो उनका एक यूनिक दर्शन हुआ तो एक यूनिक दर्शन इनको होना यूनिक दर्शन मीराबाई को होना ऐसा नहीं है कि सब्जेक्टिव रियलिटी है बोलकर के दर्शन जो है साइंटिफिक नहीं है हम कहेंगे कि दर्शन साइंटिफिक है क्योंकि अंतःकरण की वजह से डिफरेंट डिफरेंट लगते हैं किंतु अंतर निहित आत्मन जो है वह एक ही है यानी कि दर्शन की जो इफेक्ट होगी वह एक ही होगी उनको वही निर्विकल्प समाधि में ठाकुर भी जाएंगे वही निर्विकल्प समाधि में मीराबाई भी जाएगी तो अभी यदि इस दृष्टि से हम कहे कि साइंटिफिक रियलिटी और स्पिरिचुअल रियलिटी उनको हम यदि साइंस कहेंगे तो इसको भी हम साइंस कह सकते हैं रीजनिंग बड़ा ही कॉम्प्लिकेटेड है बाह्य दृष्टि से या तो पहली बार सुनने से किंतु जितना जितना हम ज्ञान योग में डीपर जाते जाएंगे यह सब्जेक्टिव रियालिटी और ऑब्जेक्टिव रियालिटी का फर्क समझते जाएंगे अंतःकरण का रोल क्या है अंतःकरण किस तरह से हमको एक यूनिक पर्सपेक्टिव देता है ऑन वन हैंड ऑन द अदर हैंड हमारे भीतर में जो एक सर्वव्यापी यूनिवर्सल आत्मन है ऑन वन हैंड वी हैव ए यूनिक अंतःकरण ऑन दी अदर हैंड वी हैव यूनिवर्सल आत्मन तो ये यूनिक अंतःकरण और यह यूनिवर्सल आत्मन ये दोनों का जो इंटरप्ले है वो किस तरह से ऑब्जेक्टिव रियालिटी को सब्जेक्टिव बना देता है वो हम धीरे-धीरे करके देखेंगे हम को पता चलेगा कि साइंस जितना सही है अपनी जगह पर वेदांत अपनी जगह पे उतना ही सही है और हमारा हाथ पकड़ कर के चलने वाले हैं स्वामी विवेकानंद तो आज थोड़ा सा पढ़ ही लेता हूं कल हमारा पढ़ना छूट गया था द ह्यूमन माइंड नेचुरली वांट्स टू गेट आउटसाइड टू पियर आउट ऑफ द बॉडी एज इट वेर थ्रू द चैनल्स ऑफ द ऑर्गन्स यह हमारे इंद्रिय है उसकी मदद से मनुष्य का मन बाहर की ओर धावित होना चाहता है द आई मस्ट सी द ईयर मस्ट हियर द सेंसेस मस्ट सेंस द एक्सटर्नल वर्ल्ड आंख देखना चाहती है कान सुनना चाहते हैं मन मन जो है बाहर के जीवन को समझना चाहते हैं एंड नेचुरली द ब्यूटीज एंड सब्लिमिटी ऑफ नेचर कैप्ट वेट द अटेंशन ऑफ मैन फर्स्ट प्राकृतिक सौंदर्य हमारे मन को सबसे ज्यादा मोहित करता है शुरू में जब हमारा ज बच्चा बच्चा जन्म लेता है तो उसका पूरा उसकी उसका जो पूरा अटेंशन है ना अपनी मां की ओर होता है क्योंकि वो उसकी मां ही उसका उस समय जीवन है उसका उसकी मां ही उसका विश्व है उसकी मां उसको प्रेम करती है उसको खिलाती है पिलाती है उसको उसका उसको हमें मतलब बच्चे मां की गोद में ही सब समय रहता है मां ही उसका जीवन है मां ही उसका विश्व है फिर जब बड़ा होगा तब फिर दूसरे बच्चों के साथ में खेलने का उसकी इच्छा होगी खिलौने के साथ में खेलने की इच्छा होगी मां को छोड़ कर के इधर उधर दौड़ता घूमेगा फिर मां उसके पीछे दौड़ती है पहले बच्चा मां के पीछे दौड़ता है फिर मां बच्चे के पीछे दौड़ती है किंतु वो जब बच्चा बड़ा होता है तब जब वह छोटा होता है तो मां ही उसका विश्व ब्रह्मांड होती है तो वैसे ही मनुष्य जब सर्वप्रथम प्रकट हुआ जब उसकी उसकी जो बुद्धि सर्वप्रथम खुली तब यह विश्व की यह जो प्राकृतिक ये जो ब्यूटी है उसका नजारा है उससे वो सबसे पहले मोहित हुआ द फर्स्ट क्वेश्चन दैट अरोज इन द ह्यूमन सोल वेल अबाउट द एक्सटर्नल नेचर एक्सटर्नल वर्ल्ड मनुष्य के मन में सबसे पहले प्रश्न प्रकट हुए वह बाहर के विश्व के बारे में थे यह नदी है यह पहाड़ है यह सीजन है एक के बाद एक चेंज होती रहती है रुत बदलती है कभी बारिश होती है कभी ठंडी होती है कभी गर्म लगता है तो यह सब क्यों होता है कैसे होता है क्या इसके पीछे में कोई संदेश है कोई एक डिवाइन रियलिटी है क्या है मुझे समझ में नहीं आ रहा ऐसा सबसे पहले उसके मन में होता है द सॉल्यूशन ऑफ द द मिस्टरी वाज आस्क ऑफ द स्काई ऑफ द स्टार्स ऑफ द हेवनली बॉडीज ऑफ द अर्थ ऑफ द रिवर्स ऑफ द माउंटेंस ऑफ द ओशन एंड इन ऑल एंट रिलीजस वी फाइंड ट्रेसेस ऑफ हाउ द ग्रुपिंग ह्यूमन माइंड एट फर्स्ट कोट एट एवरीथिंग एक्सटर्नल यह नदी यह पहाड़ यह आकाश यह बादल यह पृथ्वी इन सबसे पूछा गया कि तुम कौन हो क्या हो कहां से आए हो क्या है तुम्हारा प्रयोजन ऑल एंट न व फाइंड रेसेस ऑ जितने भी पुराने धर्म है उन सब धर्मों में हमारी यह जो ओरिजिनल इंक्वायरी है प्रकृति के प्रति इसकी एक आभास उसकी एक रेखा हमको पुराने धर्मों में दिखती है देयर वाज अ रिवर गॉड एक नदी के देवता थे नदी का क्या प्रयोजन है नदी क्या है कैसे है क्यों ये नदी है तो इसको सब नहीं समझ पाया तो हमने बना दिया एक चलो कि एक नदी के देवता है अ स्काई गॉड अ क्लाउड गॉड अ रेन गॉड एक आकाश के देवता है बारिश के देवता है और बादल के देवता बना दिए एवरीथिंग एक्सटर्नल ऑल ऑफ व्हिच वी नाउ कॉल द पावर्स ऑफ नेचर बिकम मेटामिनडी मैसेंजर्स यह जो कुछ भी हम देखते हैं यह जिसको आज हम प्रकृति कहते हैं या प्राकृतिक घटनाएं कहते हैं नेचुरल फिनोमिना जिसको हम इंग्लिश में कहेंगे बा भवन होकर के सूरज के प्रकाश से समुंदर का पानी आकाश में जाता है बादल बनते हैं बादल पृथ्वी पर घूमते हैं रेन बारिश गिरता है यह जो पूरा प्राकृतिक घटना वली है इन सबको हमने इसके पीछे कुछ ना कुछ दैवी संकेत दिखे कोई ना कोई ईश्वरीय आभास दिखा और इन सबको कोई ना कोई ईश्वरीय उपमा हमने पहना दी तो इसी तरह से हमारा मन जब सबसे पहले क्वेश्चन करने की शुरुआत करता है कि क्या है यह जगत में कैसा है यह जगत तो यह हमारा पहला आंसर था जैसे छोटा बच्चा मां को पूछता है कि हां मां क्या मैं इस तुमको खाना बनाने में मदद करूं या तो फिर छोटा बच्चा जैसे होता है मां खाना बनाती है तो सीधा वोह उंगली डालना चाहता है अभी बच्चे की यदि उंगली वो टव को लगेगी तो वो तो बेचारा इंजर्ड हो जाएगा उसको तो बड़ा ही यह होगा तो मां इमीडिएट बच्चे को डरा धमका करके बोलती है कि फिर से यहां पर आकर के टव को हाथ लगाया तो देखना वह राक्षस आकर के तुमको खा जाएगा तो बच्चा ऐसा राक्षस के डर से वहां जाकर के उसको हाथ नहीं लगाएगा वरना यदि उसको समझाने का प्रयत्न करेगी मां तो उसकी बच्चे की बुद्धि में कुछ जाएगा ही नहीं तो मां अपने बच्चे को ऐसा डर दिखाती है लोभ लालच दिखाती है और ऐसा करके बच्चे को समझाती है पटाती है मनाती है अभी यह प्रश्न होगा कि हमारे वेद उपनिषद में जो भगवान इंद्र भगवान वरुण ये सब की बात बा की गई है वह भी क्या एक मैंने छोटे बच्चे की तरह हमने कोई कहानिया मन गणतहीन है ठाकुर को जो इतने सारे देवी देवताओं के दर्शन हुए थे वह सही है कि नहीं तो एक ऐसा प्रश्न है कि वेदांत की दृष्टि से उसके भीतर में नहीं जाना ही उचित है देखिए भक्ति शास्त्र एक है भक्ति शास्त्र कहता है वेदांत की दृष्टि से भी हम उसका उत्तर दे सकते हैं इसका उत्तर देने का एक प्रयत्न हम करेंगे वो हम कल करेंगे भक्ति शास्त्र की दृष्टि से क्या उत्तर हो सकता है और वेदांत की दृष्टि से क्या हो सकता है वह हम कल देखें आज यही तक ओम शांति शांति शांते हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु