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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः इस सप्ताह का टॉपिक है अपना राजयोग और स्पेसिफिकली स्वामी जी का राजयोग पुस्तक में से जो थर्ड चैप्टर है प्राण वह इस प्राण के ऊपर में इस चैप्टर के ऊपर में प्राण नामक चैप्टर के ऊपर में अपने कुछ क्लास हो चुके हैं अभी इस सप्ताह से हम कंटिन्यू उस करेंगे जहां से हमने बाकी हमारा बाकी रहा है वहां से बिफोर कि हम स्टार्ट करें अभी तक जो कुछ हुआ है हमने डिस्कस किया है उसका एक रिव्यू हम देख लेते हैं है देखिए कि इस जगत को यदि हमको समझना है इस विश्व को यदि हमको समझना है तो देयर आर टू टाइप्स ऑफ साइंस एक तो है मटेरियल साइंस जो कि एक्सटर्नल वर्ल्ड के साथ में डीएल करता है यह चांद हो सितारे हो पृथ्वी हो ब्रह्मांड हो स्पेस टाइम मैटर एनर्जी फोर्सेस ये ग्रेविटी स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स वीक न्यूक्लियर फोर्स पशु पक्षी मेडिसिन बायोलॉजी यह जितने भी एक्सटर्नल साइंसेस है वो एक रियम है वह एक ब्रांच ऑफ लर्निंग है किंतु इस जगत में सिर्फ जड़ पदार्थ ही नहीं है इस जगत में जीवंत मनुष्य भी है और इस मनुष्य की कॉन्शसनेस को स्टडी करना इज द सेकंड ब्रांच ऑफ साइंस अभी ऐसा है कि एक समय था बहुत पहले की बात यदि हम करते हैं कि यह साइंस ऑफ कॉन्शसनेस यानी कि मनुष्य के आंतर जगत का अभ्यास या तो फिर स्टडी एक बहुत ही आगे बढ़ गया था और इसी कॉन्शियस ने स्टडी में से ही भारत में जो दो विद्या कही जाती है योग और वेदांत इनका जन्म हुआ था और बाकी सब देशों में या बाकी सब जगहों पर जिसको हम धर्म या रिलीजन कहते हैं उस विद्या का जन्म हुआ तो वह चाहे धर्म हो ना कि चाहे योग न कि वेदांत इन तीनों का प्रादुर्भाव इन तीनों का फाउंडेशन है कॉन्शसनेस स्टडीज अभ यह कॉन्शियस नेस स्टडीज के लिए आपको एक जगह पर बैठ कर के अपने माइंड को एक्सप्लोर करना होगा यह जो बाहर में घूम रही अपनी इंद्रियां है यह जो अपना बहिर्मुखी मन है उसको आपको अंतर्मुखी ऑफ कॉन्शियस निस का सबसे बड़ा क्राइटेरिया यदि किंतु एक समय ऐसा आया कि योग वेदांत और धर्म इन तीनों में एक तरह से जैसे कि एक डार्क एज में अंधकार युग में इन्होंने प्रवेश किया योग वेदांत और धर्म के नाम पे स्पिरिचुअलिटी के नाम पे इस तरह की अंधश्रद्धा एं इस तरह की डिस्ट्रक्टिव प्रैक्टिसेस समाज में फैलने लगी कि जिसकी वजह से बहुत सारे लोगों ने जो कि प्रोमिन इंटेलेक्चुअल्स थे उन्होंने ठीक किया कि यह धर्म को छोड़ो और यह जो साइंस है जिसको कि एक्सटर्नल वर्ल्ड की यह बाह्य जगत को समझने की जो विद्या है उसके ऊपर में ध्यान केंद्रित करें किस तरह से एग्रीकल्चर को उन्नत बनाया जाए बेटर क्रॉप्स दिए जाए किस तरह से मेडिकल साइंस डेवलप किया जाए किस तरह से यह एस्ट्रोनॉमी को डेवलप करके यह नेविगेशन जो है उसको इंप्रूव किया जाए जिससे कि जहाज में बैठ कर के हम पूरे विश्व का भ्रमण कर सके और सिर्फ इतना ही नहीं शुरुआत तो भ्रमण से किया किंतु फिर बाद में दूसरे देशों के ऊपर में एशिया और अफ्रीका के वह देश जहां पर यह मटेरियल साइंस इतना डेवलप नहीं हुआ है तो उनके ऊपर में आक्रमण करके उन उनकी धन संपत्ति कैसे छीनी जाए यह मिलिटरी साइंस यह मेडिकल साइंस यह फिजिक्स यह एस्ट्रोनॉमी यह कॉस्मोलॉजी यह मटेरियल साइंस शिप बिल्डिंग साइंस इंटरनल कंबन इंजन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट यह जो जितना भी कुछ है वह एक्सटर्नल मटेरियल वर्ल्ड की स्टडीज से आया और जब यह मटेरियल डेवलपमेंट हो रहा था मटेरियल साइंस का डेवलपमेंट हो रहा था तो यह जो एशिया के जो देश है जहां पे यह बुद्धिज्म यह हिंदुइज्म य इवन यह क्रिश्चियनिटी और इस्लाम जितने भी मेजर रिलीजन है उनका जन्म तो एशिया में ही हुआ है तो एशिया के देशों में एक इस तरह का भ्रम फैल गया कि बिकॉज के यूरोप और अभी अमेरिका इतने पावरफुल है मटेरियल साइंस में उसका अर्थ यह है कि हमने यह जो हजारों साल की ये कॉन्शियस नेस स्टडीज की एशिया के देशों में कॉन्शियस नेस का जो डेवलपमेंट हुआ वो इट वाज ए डेड एंड वहां पे एक जगह तक हमको ले गए उन्नति की एक मंजिल तक हमको ले गए किंतु यहां पर डेड एंड आ गया है अभी यहां से यदि हमको आगे जाना होगा तो हमको मटेरियल साइंस को अपनाना ही होगा इस तरह का एक भ्रम हमारे एशिया के देशों में फैल गया किंतु अभी देखिए कि जैसे स्वामी जी ने अमेरिका और यूरोप में भ्रमण करके देखा था कि ये एक बहुत बड़े गोला बारूद के माउंटेन के ऊपर में शिखर के ऊपर में यह यूरोप बैठा है ऐसा स्वामी जी ने भविष्यवाणी की और यह जो गोला बारूद का यह जो पूरा पहाड़ है उस एक दिन उसमें एक ऐसा विस्फोट होगा कि सभी यूरोपियन वेस्टर्न कंट्रीज को तहस नहस कर देगा तो ऐसा हुआ भी सही फर्स्ट वर्ल्ड वॉर और सेकंड वर्ल्ड वॉर में हम देखते हैं कि कितनी महा भयानक तबाही यह यूरोप के देशों में हुई और सेकंड वर्ल्ड वॉर तो कुछ भी नहीं है सेकंड वर्ल्ड वॉर के आखिर में यह जो न्यूक्लियर बॉम ये एटम बॉम जो जापान के ऊपर में फेंके गए तब लोगों को पता चला कि यह तबाही का यह जो इंजन है द इंजन ऑफ डिस्ट्रक्शन तबाही का महा भयानक यह यंत्र उन्होंने जो डेवलप करके रखा है मटेरियल साइंस ने वो सिर्फ अपनी मानव सभ्यता को एक डेड एंड तक नहीं ले जाएगा जैसे कि ये कॉन्शसनेस स्टडीज के आखिर में हमको ऐसा लगा कि हम एक डेड एंड तक पहुंच गए हैं एक ऐसी जगह पर पहुंच गए हैं एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं कि यहां से आगे की सफर कैसे करनी है हमको समझ में नहीं आ रहा है आगे का रास्ता पूरा अंधेरे से भरा हुआ है तो यह कॉन्शियस नेस स्टडीज तो हमको सिर्फ एक डेड एंड तक लेक आया यदि यह मटेरियल साइंस जद एक आंख बंद करके पागल की तरह हम डेवलप करते रहेंगे तो वह तो न्यूक्लियर वेपंस थे आज एआई आ गया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फिर जैसे साइंस फिक्शन में होता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हाथ में यह न्यूक्लियर वेपंस दे दो उसको ठीक करने दो कि कब हमारे पे खतरा बढ़ रहा है और कब एटम बॉम अपने शत्रुओं के सामने फेंकने चाहिए अभी आप एटम बम फेंक तो आपका शत्रु तो चुपचाप रहने वाला नहीं है वोह आपके ऊपर में 10 फेंक देगा उसने 10 फेंके आपने 100 फेंके फिर उसने 1000 फेंके और यहीं पर मानव सभ्यता का आ गया अंत तो कॉन्शसनेस स्टडीज हमको सिर्फ एक डेड एंड तक लेकर गया था यह मटेरियल साइंस मटेरियल स्टडीज हमको विनाश की ओर प्रलय की ओर लेकर जाएगा यह अंडरस्टैंडिंग आज हम सबको पता है हमको सबको समझ में आ गया है तो व्हाट इज द बेस्ट वे फॉरवर्ड एक ऐसा नहीं है कि भविष्य में हम मटेरियल साइंस को रिनाउंस करके कॉन्शसनेस या तो कॉन्शसनेस साइंस को कॉन्शसनेस स्टडीज के ऊपर में ही भार देना है आइडियल य है स्वामी जी जैसे कहते हैं कि बेस्ट एलिमेंट्स ऑफ द ईस्ट कंबाइन देम विद द बेस्ट एलिमेंट फ्रॉम द वेस्ट यह जो प्राच्य सभ्यताएं हैं और यह पश्चिमी सभ्यताएं हैं इन दोनों के जो सर्वश्रेष्ठ आयाम है इन दोनों की जो सर्वश्रेष्ठ कंट्रीब्यूशन है इन दोनों को यूज करो इन दोनों को साथ में लेकर आओ उसके बाद में जो भविष्य की नई सभ्यता का निर्माण होगा दैट विल बी द ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन इन द ह्यूमन हिस्ट्री वह जो भविष्य की सभ्यता जिसमें कि प्राच्य और पाश्चात्य के सर्वश्रेष्ठ गुणों का सं संयोग है उनका संगम है वह सर्वश्रेष्ठ सभ्यता बेस्ट सिविलाइजेशन ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन के रूप में वो सिद्ध होगी तो यह स्वामी जी का आइडिया था अभी हमको यह प्रश्न होता है कि क्या कॉन्शसनेस स्टडीज यानी कि ह्यूमन कॉन्शसनेस ह्यूमन माइंड और यह मटेरियल वर्ल्ड इन दोनों के बीच में चलो फिलोसॉफिकल कनेक्शन तो हमने बिठा दिया किंतु क्या कोई रियल कनेक्शन है कि नहीं क्या ऐसा हमेशा से होगा कि अपना मान मानसिक जगत है मनो जगत जो है वह हमेशा बाह्य जगत से अलग ही रहेगा बाहर के जगत में जो हो रहा है उसका असर मेरे अच्छा बाहर में जो होता है उसका असर मेरे मन पर तो होता है यह तो बड़ा ही स्पष्ट है जब भी बाहर में मुझे सक्सेस मिलती है तो मुझे उल्लास होता है मुझे खुशी होती है मुझे आनंद आता है और बाहर में मुझे निष्फल होता मिलती है बाहर में मुझे सेटबैक मिलता है बाहर में मुझे कोई असफलता का सामना करना पड़ता है तो मेरा मन डिप्रेसो जाता है फिर फिर ये जो मूड के जो आरोह अवरोह है वही तो हमारे आध्यात्मिक जगत को नियमन करते हैं तो वह एक कनेक्शन है इनडायरेक्ट कनेक्शन कहो कि कैसा भी एक कनेक्शन कहो और दूसरी भी एक बात है जो कि हम अपने राज्य की स्टडीज में देखेंगे जिसका मन या तो फिर जिसका विल पावर बड़ा ही स्ट्रांग है वो अपनी वाणी के प्रभाव से हजारों लाखों लोगों को मोहित कर सकता है उनके पास में अपनी बात मनवा सकता है उसका एक एक मैग्नेटिक पावर उसके भीतर में आ जाता है जिससे कि लाखों करोड़ों लोग मोहित होकर के उसके फॉलोवर बन जाते हैं और यह मानव सभ्यता के इतिहास में इस तरह के महापुरुष जिन्होंने अपनी वाणी और वर्तन से लाखों लोगों के दिल जीत लिए हो या तो फिर यदि नेगेटिव बात तरीके से कहा जाए तो लाखों लोगों को हिप्नोटाइज कर दिया हो यह जो बड़े-बड़े राक्षस होते हैं ये हिटलर था यह स्टालिन था उन्होंने लोगों को वशीभूत कर दिया था अपनी वाणी और अपने कैरेक्टर के प्रभाव से अपनी पर्सनालिटी के प्रभाव से और भगवान राम भगवान कृष्ण या तो भगवान राम कृष्ण इन्होंने अपनी यह जो महकता थी उनकी आध्यात्मिक प्राप्ति की उसकी वजह से उन्होंने लाखों लोगों का दिल जीत लिया तो चाहे नेगेटिव वे में आप अपनी पर्सनालिटी को यूज करें ना कि पॉजिटिव वे में यूज करें लोगों को हानि पहुंचाने के लिए करें ना कि लोगों को लाभ देने के लिए आध्यात्मिक या तो अन्य कोई बेनिफिट देने के लिए करें आपकी पर्सनालिटी आपका मन इस जगत को परिवर्तन कर सकता है उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है और यदि भौतिक दृष्टि से यदि जगत के साथ में इंटरेक्शन करना है तो यह मनुष्य देह तो है ही है यह मनुष्य देह क्या है यह भौतिक जगत और यह मानसिक जगत के बीच में एक लिंक है यह देह के भीतर में ही मन का निवास है कॉन्शसनेस का निवास है और यह कॉन्शसनेस जो सोचता है उसके अनुसार यह देह हमारा पंचमहाभूत का बना हुआ दे भौतिक देह यह बॉडी अपना इस जगत के साथ में इंटरेक्ट करता है तो यह तीन कनेक्शन तो है ही है वैसे कि जगत बाह्य जगत और आंतर जगत के बीच में किंतु यह जो प्राण रूपी चैप्टर है यहां पर स्वामी जी हमको और एक कनेक्शन के बारे में बताते हैं और वह कनेक्शन है प्राण यह प्राण क्या है देखिए स्वामी जी इसको जिस तरह से समझाते हैं उसका अभी हमने बहुत कुछ तो देख ही लिया है मैं सिर्फ यहां पर थोड़ा सा एक ओवरव्यू ले लेता हूं मैंने आप लोगों के साथ में जो डॉक्यूमेंट शेयर किया है उसमें आप देखेंगे यह जो डॉक्यूमेंट है वह स्वामी जी का प्राण रूपी चैप्टर एज इट इज मैंने यहां पर दिया हुआ है इसमें एक भी शब्द ना ही मैंने ऐड किया है ना ही इसमें से मैंने हटाया है हां एक बात है कि मैंने टॉपिक्स दिए हुए हैं जिससे कि अभी यह पहला टॉपिक है आकाश और प्राण यह टॉपिक मेरा दिया हुआ है इसका तात्पर्य क्या है कि आकाश और प्राण ट के अंडर में जितना भी टेक्स्ट है वह इस टॉपिक के साथ में डील करता है अभी यह क्या है कि अपनी लिमिटेड अंडरस्टैंडिंग से स्वामी जी का यह जो विश्वव्यापी उनकी जो प्रतिभा है उसको टॉपिक देना अर्थात कि एक मूर्खा मी जैसा कार्य है किंतु फिर भी हम लोग अपनी बुद्धि से ही तो सब कुछ समझने का प्रयास करते हैं तो यह क्षुद्र बुद्धि से यह नहीं जो करना चाहिए इस तरह का कार्य किया है स्वामी जी के जो टेक्स्ट है उसको मैंने डिवाइड करके उसको टॉपिक दिए हैं हालांकि इन नो वे दिस रिफ्लेक्ट स्वामी जीस ओन आइडिया स्वामी जी खुद क्या कहना चाहते हैं स्वामी जी खुद क्या कहते हैं उसके साथ में इसका रिलेशन नहीं यह मैंने अपनी अंडरस्टैंडिंग के लिए यह टॉपिक दिए हैं जिससे कि मुझे समझने में और समझाने में सुविधा हो तो यह पहला टॉपिक है आकाश और प्राण यह टॉपिक हम स्टडी कर चुके हैं सिर्फ एक ओवरव्यू देखेंगे और जो हाईलाइट मैंने जो यह येलो मार्कर से किया हुआ है उसी को सिर्फ मैं पढ़ूंगा और उसी को मैं एक ऊपर ऊपर से एक्सप्लेन करूंगा एक सुपरफिशियल सुपरफिशियल तो नहीं कहेंगे एक आउटलाइन रूपी एक्सप्लेनेशन मैं देता जाऊंगा फिर जब से अपना टॉपिक जहां से बाकी है वो स्टार्ट होगा तब हम लाइन बाय लाइन स्टडी करेंगे तो देखिए कि अच्छा पहले तो हमने यह पूर्व भूमिका बांध दी कि बाह्य जगत है मटेरियल वर्ल्ड और दूसरा है आंतर जगत मानसिक ये मेंटल या तो फिर ये कॉन्शियस वर्ल्ड वर्ल्ड ऑफ कॉन्शसनेस वर्ल्ड ऑफ माइंड इन दोनों के बीच में ब्रिज क्या है तो हमने देखा कि अपनी इमोशंस है वह बाह्य घटनाओं से बहुत सारी इमोशंस प्रभावित होती है एक चीज यह तो एक सेतु हो गया बाह्य जगत और आंतर जगत में आज मुझे परीक्षा में अच्छे मार्क्स आ गए तो मैं बड़ा ही खुश हो गया अभी कल कहीं जाकर के मुझे बुखार हो गया तो मैं बड़ा ही डिप्रेसो गया तो यह जो देह के साथ में या तो बाह्य जगत के साथ में जो होता है वो एक सेतु है कि मेरे मन पर असर करेगा मेरी इमोशंस पे असर करेगा यह एक सेतु दूसरा ब्रिज दूसरा सेतु है कि मेरा जो विल पावर है मेरी अंडरस्टैंडिंग है मेरी पर्सनालिटी है मेरी वाणी है मेरे यह वचन है मेरा यह लेखन है इससे मैं दुनिया को प्रभावित कर सकता हूं बहुत सारी ऐसी किताबें हैं जिसको पढ़कर के लोगों के जीवन संपूर्ण रूप से परिवर्तित हो गए हैं स्वामी जी के कंप्लीट वर्क्स को ही देखिए यह जो शक्ति दई विचार थॉट्स ऑफ पावर ऐसी छोटी-छोटी किताबों से कितने लोगों के जीवन परिवर्तित हुए हैं तो यह तो एक दूसरा ब्रिज हो गया कि अपने भीतर में एक ऐसी शक्ति है जिसको कि हम एक्सप्रेस करेंगे इन सब कम्युनिकेशन के रास्तों के माध्यम से हम जगत को परिवर्तित कर सकते हैं आजकल देखिए कि अमेरिका में यह फेक न्यूज़ अमेरिका ही कहां पूरे जगत में किसी भी देश के इलेक्शन को आपको प्रभावित करना है तो फेक न्यूज़ ऐसे चलाइए सोशल मीडिया के ऊपर में कि लोग उल्टा-पुल्टा सब वोटिंग करें ये तो अभी होता है कि नहीं फेक न्यूज़ का इलेक्शन के ऊपर में कितना असर इट इज अ मैटर ऑफ डिबेट किंतु इस तरह के प्रयत्न तो चल रहे हैं तो यह एक दूसरा सेतु है आंतर जगत और बाह्य जगत के बीच में और तीसरा है हमारा देह देह के माध्यम से इस बाह्य जगत के साथ में हम इंटरेक्ट कर सकते हैं यदि मुझे खाना खाना है तो इस हाथ से ही मैं अन्न को अपने मुंह तक लाऊंगा इन दोनों हाथों से ही मैं खेती करूंगा इन दोनों हाथों से ही मैं एयरक्राफ्ट बनाऊंगा इन दोनों हाथों से ही मैं कंप्यूटर प्रोग्रामिंग करूंगा तो जगत को मैं अपने हाथ से नियमित कर नियमन कर सकता हूं किंतु जो चौथा सेतु है प्राण इसके बारे में स्वामी जी हमको इस चैप्टर में कहते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं थिरी बेसिक थिरी क्या है यह जो हाइलाइटेड सेंटेंस है पहले टॉपिक में आकाश और प्राण जो पहला हाइलाइटेड सेंटेंस है द होल यूनिवर्स इज कंपोज्ड ऑफ टू मटेरियल वन ऑफ व्हिच दे कॉल आकाश इट इज द ओमनीप्रेजेंट पेनिट्रेटिंग एक्जिस्टेंस यह जो पूरा विश्व ब्रह्मांड है वह दो फंडामेंटल चीजों से बना हुआ है दो फंडामेंटल एलिमेंट से बना हुआ है एक है आकाश दूसरा है प्राण अभी यह आकाश क्या है इस जगत में जितने भी पदार्थ आप देख रहे हैं जिनको कि आप स्पर्श कर सकते हैं जिनको कि आप टेस्ट कर सकते हैं जिनको कि आप देख सकते हैं जिसकी आवाज आप सुन सकते हैं या जिसको आप टेस्ट कर सकते हैं यह जो अपनी पंच ज्ञानेंद्रिय है इन पंच ज्ञानेंद्रियों से जिसको आप ग्रहण कर सकते हैं उतने जितने भी पदार्थ है ये मनुष्य देह है यह टेबल है यह मकान है यह ट्यूबलाइट है यह पेड़ है यह पौधे हैं यह फूल है यह पंखी है पृथ्वी है तारे हैं चांद है जगत में जो कुछ भी है यह वस्त्र है सब कुछ पदार्थ का बना हुआ है और यह पदार्थ के भीतर में जो मेन कांस्टिट्यूशन एलिमेंट है वह है आकाश आज की मॉडर्न लैंग्वेज में कहेंगे तो जितने भी पदार्थ इस जगत में बने हुए हैं वो बेसिकली तीन सब एटमिक पार्टिकल के बने हैं इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन और फिर इसके इस तरह के और भी बहुत सारे सब एटॉमिक पार्टिकल है फिर इस तरह की भी थिरी है कि इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन अपने से क्वार्क के बने हैं या तो स्ट्रिंग के बने हैं उसके बाद में थोड़ा सा होता है मैथमेटिकल स्पेक्युलेटिव सिक्स्थ स्टैंडर्ड फिजिक्स को अनुसरण करें तो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन से पूरा जगत बना है और यहां पे स्वामी जी कहते हैं यह जो सब एटॉमिक पार्टिकल है दे देम सेल्व आर मेड ऑफ इवन बेसिक अ इंग्रेडिएंट्स आकाश रूपी पदार्थ से ही यह सब एटॉमिक पार्टिकल बने हैं यह सब एटॉमिक पार्टिकल फिर एटम का निर्माण करते हैं एटम्स इकट्ठा होकर के मॉलिक्यूल ब बनते हैं मॉलिक्यूल फिर उस पूरे जगत को बनाता है वह जो एटॉमिक वह जो पीरियोडिक टेबल है आपने देखा होगा ए ए हाइड्रोजन हीलियम लिथियम वगैरह वगैरह वो 102 ना कि इतने कुछ एलिमेंट्स उस पीरियोडिक टेबल में है वो बढ़ते जाते हैं और जो भी है उसका लेटेस्ट उसका मतलब डिस्कवरी तो ये जितने भी एलिमेंट्स है जो हवा में ऑक्सीजन लेते हैं जो सोना है यह जो निकल है यह चांदी है यह जो मिट्टी है यह पत्थर है सब कुछ इन पदार्थों का बना है और यह पदार्थ बने हैं आकाश से और फिर स्वामी जी आगे क्या कहते हैं देखिए कि दूसरा हाइलाइटेड सेंटेंस है बाय व्हाट पावर इज दिस आकाशा मैन्युफैक्चर्ड इन दिस यूनिवर्स बाय द पावर ऑफ प्राण ये आकाश जो है जो कि अतिव सूक्ष्म तत्व है वह सब एटमिक पार्टिकल में फिर एटम में फिर मॉलिक्यूल में फिर मॉलिक्यूल के बाद में ये जो जीवंत कोष है अपने शरीर के अपने देह के उसमें किस तरह से परिवर्तित होता है यह कोष मिलाकर के मनुष्य शरीर कैसे बनाते हैं तो जो फोर्स है जो फोर्स इस आकाश को कार्य करने में इसको कंपल करती है उसको फोर्स करती है उसका नाम है प्राण और फिर स्वामी जी आगे क्या कहते हैं आउट ऑफ दिस प्राण इज इवॉल्वड एवरीथिंग दैट वी कॉल एनर्जी एवरीथिंग दैट वी कॉल फोर्स इस जगत में फिजिक्स की दृष्टि से देखें तो बेसिकली मैटर एनर्जी फोर्स तीन कंसीट्स है तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं यह जो प्राण है प्राण में से ही यह एनर्जी और फोर्स उत्पन्न होती है और यही एनर्जी और फोर्स मैटर मैटर के ऊपर में कार्य करती है अभी देखिए कि थोड़ा सा मॉडर्न फिजिक्स देख ले तो आइंस्टाइन का यह जो फेमस इक्वेशन है e = एसी स्क अर्थात कि e इक्वल्स e अर्थात एनर्जी ए मींस मैटर और सी स्क्वायर स्क्वायर ऑफ द स्पीड ऑफ लाइट यह जो एनर्जी है वह पदार्थ में परिवर्तित होती है और उसको पदार्थ के भीतर में परिवर्तित होने के समय स्क्वेयर ऑफ द स्पीड ऑफ लाइट उसका उसके साथ में वो मल्टीप्लाई होती है अर्थात कि देखिए कि इतना सा छोटा सा भी पदार्थ है उसको आप दहन करेंगे तो इतनी प्रचंड एनर्जी प्रकट होगी कि जिससे कि पूरे मतलब अभी देखिए कि ये तारों के भीतर में कौन सा एन एजी सोर्स है हम अपनी गाड़ी को चलाते हैं तो उसमें पेट्रोल डालते हैं तो तारों को चलाने के लिए तारा सितारा य जो सूर्य है और ऐसे करोड़ों करोड़ों सितारे हैं उसके भीतर में ऐसा कौन सा इंधन डाला है क्या ऑक्टेन वो जो कहते हैं ना एयरक्राफ्ट फ्यूल क्या वो डाला है ना कि क्या डाला है केरोसिन डाला है क्या डाला है जिसकी मदद से यह तारे इतने चमक रहे हैं इतने करोड़ों किलोमीटर दूर होने के बावजूद करोड़ों लाइट यर्स किलोमीटर छोड़ दीजिए कॉस्मो में किलोमीटर काम नहीं करता लाइट ईयर देखना पड़ेगा लाइट ईयर अर्थात कि एक साल में प्रकाश का किरण कितना डिस्टेंस क्रॉस करता है उसको लाइट ईयर कहते हैं तो और एक सेकंड में 3 लाख किलोमीटर एक उसका प्रकाश की किरण की गति है तो एक साल में कितना होगा कर दीजिए कैलकुलेशन मने हम पृथ्वी के ऊपर के जितने डिस्टेंस है वो किसी डिस्टेंस व स्पेस में काम नहीं करेंगे तो देखिए कि यह जो तारों के भीतर में यह जो ईंधन है वो है न्यूक्लियर फ्यूजन न्यूक्लियर फ्यूज फ्यूजन अर्थात कि पदार्थ इन प्योर एनर्जी में कन्वर्ट होता है और यही न्यूक्लियर फ्यूजन से ही न जो फ्यूजन बॉम बनता है ये जो हिरोशिमा नागासाकी पर डाले गए वो तो फिशन बम थे यूरेनियम या कोई हैवी एलिमेंट होता है उसको टुकड़े करके उसका दहन जो थोड़ा सा जो पदार्थ है वह एनर्जी में कन्वर्ट होता है किंतु फ्यूजन अर्थात कि जो लाइट एलिमेंट्स है हाइड्रोजन या ऐसा कुछ उसको जब कंबाइन करते हैं और फिर जो कुछ पदार्थ जो एनर्जी में क वर्ट होते हैं उससे जो एनर्जी प्रकट होती है भयानक एनर्जी यानी कि ऑलरेडी देखिए कि एनर्जी में से पदार्थ बनता है साइंस के द्वारा प्रूव है और यह ऑलरेडी फोर्स पदार्थ के ऊपर कार्य करती है फोर्स यानी कि ग्रेविटी को देखिए कि पृथ्वी की ग्रेविटी चंद्र को अपने आसपास में ऑर्बिट में घुमाते रहती है यह जो अपने सूर्य की जो ग्रेविटी है गुरुत्वाकर्षण है वह सिर्फ पृथ्वी को ही नहीं पृथ्वी जैसे और नौ ग्रहों को अपने आस पास में घुमाते है ऑर्बिट में और सिर्फ सूरज ही नहीं यह पूरा मिल्की वे गैलेक्सी है जिसके भीतर में करोड़ों सितारे हैं वह जितने भी सितारे हैं वह मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में जो गुरुत्वाकर्षण शक्ति है उससे वह बंद करके वह पूरे ऐसे गोल-गोल घूमते हैं इस केंद्र की चारों ओर तो यह गुरुत्वाकर्षण एक फोर्स है जो कि पदार्थ पर असर करती है तो स्वामी अभी इतना डिटेल फिजिक्स में जाने की जरूरत नहीं हमको सिर्फ इतना समझना है कि ये प्राण रूपी जो फोर्स है व बाह्य जगत के ऊपर में असर करती है अर्थात कि अभी देखिए कि प्राण जो है वोह अपनी कॉन्शसनेस के साथ में डायरेक्टली जुड़ा हुआ है तो यह कॉन्शियस निस और बाह्य जगत इन दोनों के बीच में एक चौथा सेतु एक स्वामी जी ने हमारे सामने बताया दिखाया कि हम लोग इस देह के माध्यम से तो इस जगत के ऊपर में कार्य कर ही सकते हैं यह जगत सक्सेस या फेलर्स या ऐसी कोई बाह्य परिस्थितियों के माध्यम से अपनी इमोशन से उसको वो अफेक्ट कर ही सकता है उसको वह असर कर ही सकता है अपनी इमोशन स्ट्रांग इमोशन से हम दूसरों के मन को जीत सकते हैं या तो उनको हिप्नोटाइज कर सकते हैं व्हाट एवर पॉजिटिव या नेगेटिव तो इतना तो हमने देखा किंतु साथ में प्राण एक ऐसा सेतु है एक ऐसा ब्रिज है जिसको कि हम अपनी कॉन्शियस निस के द्वारा कंट्रोल करके इस विश्व ब्रह्मांड को डायरेक्टली अफेक्ट कर सकते हैं यह स्वामी जी का फंडामेंटल थिरी है और इसी थिरी को बाद में स्वामी जी इस चैप्टर में आगे बढ़ाते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं एट द एंड ऑफ ए साइकल द एनर्जी इज नाउ डिस्प्ले इन द यूनिवर्स क्वाइट डाउन एंड बिकम पोटेंशियल इस विश्व ये जो सृष्टि स्थिति प्रलय रूपी यह जो कल्प है अच्छा मैं अपना स्क्रीन शेयर करता हूं जिससे कि आप लोग इसको बेटर समझ पाए हां यह मैंने आपके साथ में स्क्रीन शेयर किया तो देखिए यह जो है यहां पे यह पहले टॉपिक के आखिर में यह जो सेंटेंस है उसको हम पढ़ रहे हैं स्वामी जी क्या कहते हैं एट द एंड ऑफ अ साइकल द एनर्जी इज नाउ डिस्प्ले इन द यूनिवर्स क्वाइट डाउन एंड कम पोटेंशियल स्वामी जी कहते हैं कि सृष्टि स्थिति प्रलय का यह चक्र तो चलता ही रहता है जब सृष्टि होती है तो विश्व ब्रह्मांड के भीतर में जितनी भी एनर्जी है वह एक साथ में उसका मेनिफेस्टेशन होता है स्थिति यानी कि विश्व ब्रह्मांड का विकास होता है तो पहले तो देखिए कि मॉडर्न साइंस की दृष्टि से हुआ बिग बैंग बिग बैंग में से यह जितने भी पदार्थ है वह सब उत्पन्न हुए सब एटॉमिक पार्टिकल फिर सब एटॉमिक पार्ट एटम में परिणत हुए एटम्स इकट्ठा होकर के ग्रह नक्षत्र सूर्य चंद्र तारे यह सब बनाना शुरू किया फिर उसके ऊपर में इन ऑर्गेनिक मैटर में से ऑर्गेनिक मैटर में कन्वर्जन हुआ ऑर्गेनिक मैटर ने यह देह को जन्म दिया यह जीवंत प्राणी को जन्म दिया और फिर यह अमीबा फिर यह जो सागर में तैरने वाले पशु फिर उसमें से जमीन पर चलने वाले पशु और उसमें से मनुष्य यदि हम मॉडर्न इवोल्यूशन पर विश्वास करते हैं तो तो इस तरह से देखिए कि बिग बैंग में से यूनिवर्स प्रकट हुआ यूनिवर्स में से यह मनुष्य प्रकट हुआ धीरे-धीरे करके इवोल्यूशन होते-होते फिर आखिर में जब प्रलय होगा तो जितने भी पदार्थ है वह सब बिग क्रंच बोल कर के तो उसके भीतर में एक महा भयावह प्रलय के भीतर में वह फिर से खत्म हो जाएंगे उसका विनाश हो जाएगा तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि यह जब सृष्टि की यह जो साइकल है यह चक्र है उस का अंत आता है उस समय यह जो जितने भी पदार्थ है जितनी भी एनर्जी है वह सब शांत हो जाती है और अपने पोटेंशियल स्वरूप में चली जाती है एट द बिगिनिंग ऑफ द नेक्स्ट साइकल दे स्टार्ट अप स्ट्राइक अपऑन द आकाशा एंड आउट ऑफ द आकाशा इवोल्स दिस वेरियस फॉर्म्स एंड एज द आकाशा चेंजेज दिस प्राणा चेंजेज आल्सो इन ऑल दिस मेनिफेस्टेशंस ऑफ एनर्जी अभी जब यह नया सृष्टि का चक्र प्रारंभ होता है तो प्राण है आकाश के ऊपर में आघात करता है और आकाश में से यह जितने भी पदार्थ है वह फिर से मेनिफेस्ट होते हैं और यह प्राण जो है वह इस आकाश को नियमन करके सृष्टि का ये संरचना करता है अभी इसको लेकर के काफी डिस्कशन हुआ है इसलिए अभी आज इसमें इतना डिटेल में नहीं जाएंगे आगे स्वामी जी क्या कहते हैं द नॉलेज एंड कंट्रोल ऑफ दिस प्राणा इज रियली व्हाट इज मीट बाय प्राणायाम यह जो कॉस्मिक एनर्जी है कॉस्मिक फोर्स है प्राण रूपी उस उसको नियमन करना यही यही यही सही सही प्राणायाम है यदि हम यह सोचे कि आंख बंद करके नाक को दबा कर के हम सांस लेते हैं पूरक फिर यह कुंभक और यह रेचक सांस को लेना सांस को रोकना और सांस को निकालना यही प्राणायाम है तो यह बात गलत होगी पूरे विश्व ब्रह्मांड में जो कॉस्मिक एनर्जी है उसको कैसे नियमन करें यह है प्राणायाम का असली रहस्य इसके बाद में स्वामी जी कहते हैं कि मान लीजिए कि इस तरह से हमको प्राणायाम के ऊपर प्राण के ऊपर में कंट्रोल हमारा हो जाता है तो हम क्या नहीं कर सकते हैं तो यह दूसरा टॉपिक हो गया सुपर पावर स्वामी जी कहते हैं सपोज फॉर इंस्टेंस अ मैन अंडरस्टूड द प्राणा परफेक्टली मान लीजिए कि कोई एक व्यक्ति प्राण को संपूर्ण रूप से समझ ले एंड कुड कंट्रोल इट व्हाट पावर ऑन अर्थ वुड नॉट बी हिज यदि हम प्राण को समझ ले प्राणिक विज्ञान को समझ ले और उस उसको नियमन कर सके तो इस विश्व ब्रह्मांड में ऐसा क्या है जो कि हमारे से संभव नहीं है ही वुड बी एबल टू मूव द सस एंड स्टार्स आउट ऑफ देर प्लेसेस टू कंट्रोल एवरीथिंग इन द यूनिवर्स फ्रॉम द एटम्स टू द बिगेस्ट सस बिकॉज ही वुड कंट्रोल द प्राण इस तरह का योगी जो कि चांद तारे सितारे जो अपनी ऑर्बिट में घूम रहे हैं उसको अपने रास्तों से पद कर सकता है पथ कर सकता है वह चाहे तो वह इस विश्व ब्रह्मांड में जो कुछ भी है सब कुछ कंट्रोल कर सकता है फ्रॉम द एटम्स टू द बिगेस्ट सनस छोटे से छोटे अणु से लेकर के विराट से विराट यह सूर्य सितारों तक को वह कंट्रोल कर सकता है बिकॉज ही वुड कंट्रोल द प्राण क्योंकि वह प्राण को कंट्रोल करता है यदि मैं प्राण को कंट्रोल कर सकता हूं तो चांद सितारों की गति में मैं परिवर्तन ला सकता हूं देखिए छोटे से देह से मैं क्या कर सकता हूं ज्यादा से ज्यादा इस पेन को उठा कर के पेपर में लिख पाऊंगा ज्यादा से ज्यादा अपनी उंगलियों से मैं टाइप कर पाऊंगा और फिर बहुत ज्यादा होगा तो मैं मशीनरी ऑपरेट कर पाऊंगा कार चला पाऊंगा इतना ही तो इस देह की कैपेसिटी है बहुत ज्यादा बॉक्सिंग वगैरह और फिर जिम में जाकर के मैंने बहुत अपने मसल्स बना लिए तो हो सकता है 510 किलो वेट उठा पाऊंगा इतना ही तो किंतु यदि प्रा को मैं नियमन कर सकता हूं तो सूर्य चंद्र सितारों की गति को मैं परिवर्तित कर सकता हूं इतनी प्रचंड शक्ति यह प्राण मुझे अर्पित करता है प्राणिक सायंस मुझे वो देता है दिस इज द एंड एंड एम ऑफ प्राणायाम यही है प्राणायाम का प्रारंभ और अंत यही है प्राणायाम का अंतिम उद्देश्य वन योगी बिक कम्स परफेक्ट देयर विल बी नथिंग इन नेचर नॉट अंडर हिज कंट्रोल जद यह योगी परफेक्ट हो जाता है सर्वांग संपूर्ण हो जाता है तो इस जगत में ऐसा कुछ भी नहीं है जो कि इस योगी के कंट्रोल में ना हो इफ ही ऑर्डर्स द गॉड्स और द सोल्स ऑफ द डिपार्टेड टू कम दे विल कम एट हिज बिडिंग यदि वह देवताओं को भी आदेश करता है मृता आत्माओं को भी वह कमांड करता है तो वे भी उसके सामने आकर के नतमस्तक होकर के उसके आदेश पालन के लिए तत्पर होकर खड़े रहेंगे ओ ल द फोर्सेस ऑफ नेचर विल ओबे हिम एज स्लेव्स इस प्रकृति की जितनी भी शक्तियां है गुलाम की भाति योगी के आदेश का पालन करने के लिए तैयार रहेगी यह है सुपर पावर हाउ टू कंट्रोल द प्राणा इज वन आइडिया ऑफ प्राणायाम तो प्राणायाम क्या है प्राणायाम की जो डेफिनेशन स्वामी जी बार-बार देते हैं वह क्या है इस प्राण को नियमन करना वही है प्राणायाम का उद्देश्य अभी थर्ड टॉपिक प्रारंभ होता है समाधि अभी समाधि क्या है अर्थात कि वेरियस स्टेट्स ऑफ कॉन्शसनेस देखिए पहले तो यह फंडामेंटल थिरी समझ ली कि आकाश और प्राण से पूरा विश्व बना है उसके बाद में यह समझ लिया कि यदि मैं प्राण को कंट्रोल करूं तो मैं क्या से क्या ना कर पाऊं जिसको कि मिरेकल और मैजिक कहा जाता है उसको मैं एक्चुअली इस साइंस की मदद से मैं उसको कर सकता ता हूं और अभी यह प्रश्न होगा कि मन की ऐसी कौन सी परिस्थिति हमको चाहिए जिससे कि हम प्राण को नियमन कर पाए ये प्राणायाम की क्रिया तो है ही है जिसको कि स्वामी जी पूरक रेचक वगैरह स्वामी जी समझाएंगे बाद में किंतु यह जो मन की ऐसी स्टेट होना चाहिए मन की ऐसी कौन सी परिस्थिति होनी चाहिए जो कि यह प्राणायाम में या तो फिर प्राण के नियमन में हमको सहाय करें तो स्वामी जी कहते हैं कि तीन स्टेट है य तो सबको कॉशस लेवल कॉन्शियस लेवल और फिर सुपरकॉन्शियस लेवल तो इस सुपरकॉन्शियस या तो समाधि के स्टेट के बारे में स्वामी जी कहते हैं द माइंड कैन एजिस्ट ऑन स्टिल हायर प्लेन यह कॉन्शसनेस के लेवल के ऊपर में भी मन एक उच्च आध्यात्मिक स्थिति में स्थित हो सकता है द सुपरकॉन्शसनेस जिसको हम कहेंगे सुपरकॉन्शसनेस या तो फिर समाधि व्हेन द माइंड हैज अटेंड टू दैट स्टेट व्हिच इज कॉल्ड समाधि जब मन सुपरकॉन्शियस या तो समाधि की स्थिति में स्थित हो जाता है तब परफेक्ट कंसंट्रेशन सुपरकॉन्शियस निस इट गोज बियोंड द लिमिट्स ऑफ रीजन एंड कम्स फेस टू फेस विद फैक्ट्स व्हिच नो इंस्टिंक्ट और रीजन कैन एवर नो जब हम परफेक्ट कंसंट्रेशन यानी कि परफेक्ट ध्यान की मुद्रा में परफेक्ट ध्यान की स्थिति में परफेक्ट सुपरकॉन्शसनेस में स्थित हो जाते हैं तब मनुष्य का मन ऐसे एक उच्च जगत में प्रवेश करता है जहां पर एक आम आदमी एक आम लेवल पर रह कर के जिस तरह के आइडियाज को कभी सोच नहीं सकता जिस तरह की इमोशन के बारे में कभी कल्पना नहीं कर सकता इस तरह के दर्शन कि जिसके बारे में उसने कभी जाना नहीं है वह सब उसकी नजर के सामने आ जाता है ठाकुर को जब भी भाव में चले जाते थे समाधि में चले जाते थे हमको पता है कि इस तरह के एक के बाद एक उच्च आध्यात्मिक दर्शन उनकी नजरों के सामने आकर के उपस्थित होते थे वो मां काली के साथ में बात करते थे हमको प्रश्न होगा कि अरे ठाकुर पागल हो गए हैं क्या जनरली हम लोग क्या सोचते हैं कि जो आदमी अपने साथ में बातें करता रहता है वह पागल है ऐसा हम लोग एक जनरली सोचते हैं ठाकुर किंतु देखिए कि ऐसा भाव में चले गए हैं और बातें कर रहे हैं तो ये अपने से बात नहीं कर रहे एक्चुअली वो सुपर कॉन्शियस स्टेट में जाकर के एक इस तरह के राज्य में प्रवेश कर चुके हैं जो राज्य मनुष्य की आम आदमी की नजर से ओझल है वो आम आदमी की नजर के सामने नहीं आता ऐसा है कि जब तक मैं यहां के विशाखापटनम में हूं तब तक मुझे बेलूरमठ में क्या हो रहा है कुछ पता नहीं चलेगा बेलूरमठ में क्या हो रहा है उसको देखने के लिए मुझे बेलूरमठ जाना ही होगा या तो फिर बेलूरमठ में जो आदमी रहता है वह मुझे यदि मैसेज पहुंचाता है मेरा मित्र कभी फोन करके कहे कि अच्छा यहां पर देखिए कि रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज को प्रणाम करने के लिए गए थे तो महाराज जी ने ऐसी बातें की इस तरह का एक मैसेज मेरा मित्र मुझे भेज सकता है ज्यादा से ज्यादा किंतु रिविर प्रेसिडेंट महाराज को अपनी नजरों से दर्शन करना है मंदिर में ठाकुर की श्री मूर्ति विराजमान है उसको प्रणाम करना है तो मुझे सदे है वहां पर जाना ही होगा तो यहां पर भी ठाकुर वापस आकर के हमको बहुत कुछ कहते थे कि हां मां काली के साथ में इस तरह से बात हुई या इस तरह के दर्शन हुए किसकी कहां तक आध्यात्मिक उन्नति हुई है वह सब हमको बताते थे किंतु हमको अपने को यदि वह सब अनुभूति प्राप्त करनी है हमको खुद को वह एक्सपीरियंस प्राप्त करना है तो हमको यह सुपरकॉन्शियस स्टेट या समाधि में प्रवेश करना ही होगा इसके बाद में जिसको हम सुपरकॉन्शियस स्टेट कहते हैं वहां पर इस जगत की जितनी भी डुएलिटीज है वह सब एक होकर के अवत अर्थात कि नॉन ड्यूल अद्वैत जो दो नहीं है वैसा एक ऐसे एक एक एलिमेंट उसमें सब विलीन हो जाता है और वह जो सिंगल एलिमेंट है जिसमें से कि इलेक्ट्रॉन न्यूट्रॉन प्राण एनर्जी फोर्स विश्व ब्रह्मांड सब प्रकट होता है जोर सब इसके भीतर में विलीन हो जाता है ऐसा एक तत्व क्या है अपने शास्त्र क्या कहते हैं वो है ब्रह्मण या तो फिर आत्मन ये ब्रह्मण में से ही माया रूपी एक जैसे कि एक प्रोजेक्शन शक्ति है या तो फिर ब्रह्मण और शक्ति ठाकुर की भाषा में कहे तो शक्ति यह ब्रह्मण के ऊपर में एक ऐसी शक्ति विराजमान है जो कि ब्रह्मण की शक्ति से शक्ति शक्तिमान होकर के इस पूरे जगत की सृष्टि स्थिति प्रलय करती रहती है तो इसको कहेंगे अद्वैत एक्सपीरियंस और यहां पर इस टॉपिक में मैंने जो हाईलाइट किया है सेंटेंस इन द यूनिवर्स ऑफ थॉट वी फाइंड यूनिटी एंड एट लास्ट व्हेन वी गेट टू द सेल्फ वी नो दैट द सेल्फ ओनली कैन बी वन यह जो मन मानसिक जो जगत है उसमें तो हमको एक यूनिटी अर्थात की अद्वैत का अनुभूति होती ही है किंतु जब हम आध्यात्मिक जगत में पहुंच जाएंगे तो आध्यात्मिक जगत में भी इस यूनिटी की अनुभूति होती है सेल्फ कैन ओनली बी वन आत्मन की सिर्फ एक ही है एक से ज्यादा नहीं हो सकता बियोंड द वाइब्रेशंस ऑफ मैटर इन इट्स ग्रोथ एंड सटल एस्पेक्ट बियोंड मोशन देर इज बट वन यह जितने भी पदार्थ है जितनी भी एनर्जी से जितनी भी फोर्स है गुरुत्वाकर्षण शक्ति इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म स्ट्रांग वीक न्यूक्लियर फोर्स स्पेस और टाइम रूपी डायमेंशन मैटर और एनर्जी रूपी य कंसीट्स यह डार्क एनर्जी यह क्वांटम फील्ड यह मनुष्य के विचार मनुष्य की भावनाएं मनुष्य का देह सूर्य तारे पृथ्वी जितना भी वैविध्य है आखिर में तो सिर्फ ब्राह्मण के भीतर में में ही विलीन होने वाला है और ब्राह्मण में से ही उत्पन्न होने वाला है और ब्राह्मण ही उनका सही सही आइडेंटिटी है ब्रह्मण के अलावा और कुछ नहीं है दिस इज द यूनिटी इन दिस वर्ल्ड इसके बाद में स्वामी जी डिस्कस करते हैं मेथड ऑफ प्राणायाम तो क्या कहते हैं टू रीच द सटल वी मस्ट टेक द हेल्प ऑफ द ग्रोसर एंड सो स्लोली ट्रेवल टुवर्ड्स द मोर सटल पॉइंट यदि हमको कुछ स्थूल है या तो सूक्ष्म है तो सूक्ष्म वस्तु को स्थूल वस्तु से ही पकड़ना होगा और इसमें जैसे-जैसे हम स्थूल से सूक्ष्म की ओर जाते जाएंगे वैसा ही प्राण के ऊपर में हमारा नियमन बढ़ता जाएगा प्राणायाम रियली मींस कंट्रोल ऑफ दी मोशन ऑफ द लंग्स एंड दिस मोशन इज एसोसिएटेड विद द ब्रेथ अभी प्राण तो बड़ा ही सूक्ष्म है तो प्राण को पकड़े कैसे तो यह जो अपने फैसों की जो गति है ये जो हम हवा भीतर में लेते हैं अपने फेसो में अपने लंग्स में और हवा को बाहर निकालते हैं यह पूरक कुंभक और रेचक जो कि अपने देह को नियमित नियमन करता है अपने फेसो को नियमन करता है उसके माध्यम से हम प्राण को पकड़ सकते हैं प्राण को पकड़ने के लिए मैं हाथों से तो नहीं पकड़ पाऊंगा ऐसा तो नहीं होगा कि अभी ये लाइट का स्विच है अभी मैं पंखे तक तो नहीं पहुंच पाऊंगा मेरा हाथ इतना लंबा नहीं होगा कि इस फैन को में ज्यादा स्पीड बढ़ ा की स्पीड कम करूं अपने हाथों से पकड़ कर के तो मैं क्या करूंगा यदि पंखा ऑन करना है तो स्विच को दबा ंगा तो ऑफ होगा और स्विच को ऑन करूंगा तो पंखा चलने लगेगा ये लाइट का जो स्विच है और मेरे और पंखे के बीच में कम्युनिकेशन करता है तो वैसे ही मैं और यह जगत इन दोनों के बीच में जो प्राण है यह जो प्राण इन दोनों के बीच में कम्युनिकेशन का माध्यम क्या है किस तरह से मैं प्राण को पकडा तो प्राण को पकड़ना है यह पूरक रेचक और कुंभक की क्रिया के माध्यम से प्राणायाम के माध्यम से और फिर आगे क्या कहते हैं स्वामी जी दैट मस्कुलर पावर व्हिच गोज आउट थ्रू द नर्व्स टू द मसल्स एंड फ्रॉम देयर टू लंग्स मेकिंग देम मूव इन अ सर्टेन मैनर इज द प्राणा व्हिच वी हैव टू कंट्रोल इन द प्रैक्टिस ऑफ प्राणायाम प्राण ही हमारे भीतर में जाता है प्राण ही हमारे फेबस को कंट्रोल करता है और प्राण के माध्यम से ही हम सांस लेते हैं सांस को निकालते हैं ब्रीथिंग एंड एलेशन हम प्राण के माध्यम से ही करते हैं तो इस पूरक और रेचक की क्रिया को यदि हम नियमन कर पाए तो प्राण को हम नियमन कर पाएंगे इसके बारे में काफी डिस्कशन हमने इस टॉपिक के बारे में जब बात हो रही थी तब किया था अभी इससे ज्यादा इसमें जाना नहीं है फिर स्वामी जी कहते हैं एवरी पार्ट ऑफ द बॉडी कैन बी फीड विथ प्राणा दिस वाइटल फोर्स एंड व्हेन यू आर एबल टू डू दैट यू कैन कंट्रोल द होल बॉडी इस प्राण के माध्यम से शरीर शर के प्रत्येक अंग को आप भर दे सकते हैं शरीर के प्रत्येक अंग को आप यह प्राण पहुंचा सकते हैं और जब आप ऐसा कर पाएंगे तब आप अपने पूरे शरीर को कंट्रोल कर पाएंगे यहां पर प्रश्न होगा कि जो एनाटॉमी या फिजियोलॉजी जानता है मॉडर्न एनाटोमी फिजियोलॉजी वे तो कहेगा कि ये जो ऑक्सीजन हम अपने अपने नाक से अपने देह में लेते हैं तो वो तो लंग्स तक ही जाता है यह ऑक्सीजन फिर लंग्स में से प्यूरिफाई होकर के ब्लड स्ट्रीम में जाता है यह हवा अपने आप में तो पूरे शरीर में जाती नहीं है यह ब्लड स्ट्रीम के द्वारा ऑक्सीजन जाता है तो यह कहना होगा कि ये जो हवा है वह प्राण नहीं है हवा के माध्यम से पूरा को रेचक के माध्यम से हम प्राण को कंट्रोल करते हैं जो प्राण पूरे देह में जाता है और यह देह में जो प्राण है जिस जिसको कि पा पंच प्राण कहते हैं प्राण अपान व्यान उदान और समान इन पंच प्राणों की मदद से यदि इन पंच प्राण के ऊपर में हमारा कंट्रोल आ जाए तो देह की जितनी भी क्रिया है अपना यह कार्डी कार्डियक सिस्टम है या रेस्पिरेटरी सिस्टम है ये ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम है ये अपना नर्वस सिस्टम है जितनी भी सिस्टम्स है ये जो जितनी भी सिस्टम्स है अपने देह की डाइजेस्टिव सिस्टम है ये सबके ऊपर में हम कंट्रोल प्राप्त कर सकते हैं यदि ये प्राण के ऊपर में अपना कंट्रोल आ गया तो देखिए कि यहां पे प्राण के ऊपर में कंट्रोल आ जाने से हम सिर्फ सूर्य चंद्र सितारे ईश्वर ईश्वर तो नहीं किंतु यह देवता एं प्रेतात्मा इन सबको कंट्रोल जद कर सकते हैं तो साथ में अपने देह को भी कंट्रोल कर सकते हैं व्हिच इज परहे पस मोर रिलेवेंट टू अस अभी आज मैं किसी देवता को पुकार करके ना कि प्रेतात्मा को पुकार करके क्या करूंगा किंतु यदि मुझे कोई बीमारी हो गई है मेरा मन डिप्रेसो गया है या तो फिर मुझे कुछ ऐसा कुछ लग रहा है कि जो ठीक नहीं हो रहा है मेरे देह के साथ में उसको यदि मैं क्यूर कर पाऊं कैंसर यदि क्यर कर पाऊं एड्स यदि क्यर कर पाऊं यह जो फीवर है उसको यदि माइग्रेन माइग्रेन बहुत सारे लोगों को होता है ब्लड प्रेशर डायबिटीज यह कार्डियक कोरोनरी हार्ट डिसीज इन सबको जद मैं कंट्रोल कर पाऊं तो वह मेरे लिए बड़ा ही बेनिफिशियल होगा तो यह पॉसिबल है जद यह पंच प्राण को आप यह जो प्राण के माध्यम से कंट्रोल कर पाए तो अच्छा इफ यू आर स्ट्रांग एंड हेल्दी दोज दैट लीव नियर यू विल आल्सो हैव द टेंडेंसी टू बिकम स्ट्रांग एंड हेल्दी यदि आप स्ट्रांग है यदि आप हेल्दी है तो आपके आसपास में जो लोग रह रहे हैं वे लोग भी स्ट्रांग और हेल्दी होंगे यह जो आपकी तन मात ये जो प्राण के माध्यम से आपका हेल्थ और आपका स्ट्रेंथ वो ट्रांसमिट होता है बट इफ यू आर सिक एंड वीक दोज अराउंड यू विल हैव द टेंडेंसी टू बिकम द सेम किंतु आप यदि बीमार है आप यदि कमजोर है तो आपकी यह कमजोरी भी प्राण के माध्यम से ट्रांसमिट होगी और आपके आसपास में रहने वाले लोग भी डिप्रेसो जाएंगे तो यह एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट टॉपिक है देखिए कि इसके साथ में जिसको कि हम प्राणिक हीलिंग कहते हैं यदि मेरे पास में यह जो प्राण की शक्ति है मैं सामने वाले की बीमारी को ठीक कर सकता हूं इसको लेकर के बहुत सारी अंधश्रद्धा एं अपने समाज में घूमती रहती है बहुत सारे लोग ऐसा दावा करते हैं कि आपकी बीमारी को हम ठीक कर देंगे और खास करके गांव में जाएंगे जिन लोगों के पास में ना ही मॉडर्न मेडिकल फैसिलिटी है ना ही उनके पास में इतने पैसे हैं कि शहर में जाकर के मेडिकल फैसिलिटी का वह इस्तेमाल कर पाए तो वे लोग इस तरह के किसी जादूगर के हाथ में पड़ते हैं और यह जादूगर लोग उनको ठग लेते हैं तो ऐसा समाज में बहुत चलता है प्राणिक हीलिंग जिसको कहते हैं उसको लेकर के लोगों को ठगने वालों की इस समाज में कमी नहीं है किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि यह विज्ञान गलत है विज्ञान सही स्वामी विवेकानंद ने खुद ने हमको यह बात कही है देखिए कि मथुर बाबू की पत्नी जब वह बीमार थी तो मथुर बाबू को यह डर लग गया कि व वो ठाकुर के पास में आए कहा कि उसकी पत्नी की बीमारी को ठीक कर दे और फिर साथ में क्या विनती की कि जद अभी मथुर बाबू खुद तो यह कालीवाड़ा रासमुस के मालिक नहीं थे उसकी संपत्ति की अधिकार तो रानी रामनी की पुत्रियों को था अभी पुत्री के साथ में विवाह करके रानी रासमुल बाबू रानी रासमुल अपने सन इन लॉ होने की वजह से वो ये सब प्रॉपर्टी के ऊपर में वो कंट्रोल उनका आया था अभी पत्नी का ही मृत्यु हो गया तो रानी रासमुस में संपर्क विच्छेद हो जाएगा और फिर दूसरी लड़कियों के जो जमाई है उन लोगों के हाथ में यह कंट्रोल चला जाएगा तो मथुर बाबू बड़े ही परेशान होकर के ठाकुर के पास में आ करर के कहते हैं कि महाशय छोटो भट्टाचार्य जो ऐसा करके ये लोग पुकारते थे उनको कि यदि यह संपत्ति मेरे हाथ से चली जाए तो इसका मुझे गम नहीं है किंतु आपकी सेवा में नहीं कर पाऊंगा कालीवाड़ा एडमिनिस्ट्रेशन चला जाएगा मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा इस बात का मुझे गम है तो ठाकुर ने क्या किया मथुर बाबू की पत्नी की बीमारी अपने ऊपर में ले ली और फिर छ महीने तक काफी भुगे थे उनको भुगतना पड़ा था बीमारी से तो यह अपनी हेल्थ दूसरों को देना और उस की बीमारी अपने पर ले लेना यह सब पॉसिबल है और इसके पीछे में प्राणायाम रूपी विज्ञान कार्य करता है द प्राण कैन बी ट्रांसमिटेड टू अ वेरी ग्रेट डिस्टेंस यह जो प्राण है इसको हम बड़े ही लंबे डिस्टेंस के ऊपर में इसको प्रवाहित कर सकते हैं यह बेलूरमठ की एक कहानी है कि एक साधु बीमार था स्वामी जी ने एक दूसरे साधु को कहा मोस्ट प्रोबेबली ज्ञान महाराज को कि जाओ ठाकुर का चरणामृत चरणामृत उस साधु को खिला के आओ बीमार साधु को तो यह जो जिनको कहा चरणामृत लेकर के आने को बड़ा कटाक्ष करके हंस पड़े वो सोच रहे हैं कि स्वामी जी इतने साइंटिफिक है अमेरिका से आए हैं जो अंधश्रद्धा जितनी भी है उन सबका बेलूरमठ में कोई स्थान नहीं है तो बीमार साधु के लिए कहीं डॉक्टर की व्यवस्था की जाए ना कि स्वामी जी कहते हैं कि ठाकुर का चरणामृत खिला के आओ अभी शायद उसको डॉक्टर भी बुलाया होगा उसके लिए किंतु चरणामृत क्यों खिलाए भाई यह तो फिर वह वही हजार साल की जो अंधश्रद्धा हमारे सर पर आकर के बैठी है वही हमको फिर से खा जा रही है उसी को फिर से बेलूरमठ में पनाह देना है क्या अंधश्रद्धा हों को ऐसा सोच कर के यह साधु कटाक्ष के रूप में हंस दिया तो स्वामी जी ने इमीडीएटली कहा कि तुमको जाने की जरूरत नहीं है तुम तुम्हारे भीतर में चरणामृत के प्रति श्रद्धा नहीं है मैं जाकर के चरणामृत उस बीमार साधु को खिलाऊंगा तो देखिए कि यह जो सब यह जो हीलिंग है दूसरों की शक्ति ठाकुर के आशीर्वाद यह जो ठाकुर कब जी ठाकुर का देहांत कब हुआ 18864 के आसपास की यह 15 साल से भी ज्यादा का समय 15 साल के आसपास का यह बीत गया है ठाकुर की महासमाधि के बाद का फिर भी ठाकुर के आशीर्वाद उस बीमार साधु के ऊपर में आएंगे यह भरोसा स्वामी जी को था और वह तो सिर्फ 15 साल और ये ठाकुर के डायरेक्ट डिसाइल फिर भी जीवित थे आज यह 200 साल के आसपास में 150 साल के आसपास में समय बीता है और हमको पता है जो लोग ठाकुर महा स्वामी जी के शरणागत है भक्त है कि उनके आशीर्वाद किस तरह से हमारे देह को हमारे मन को नव जीवन से नित्य नव जीवन से भरपूर करते रहते हैं तो यह आशीर्वाद या तो फिर यह हीलिंग पावर वो कोई समय और अवकाश के साथ में स्थित नहीं है ठाकुर की शक्ति कहां वह अमेरिका में स्वामी जी के डिसाइल्स थे उनके ऊपर में कार्य करती थी यह कहां स्वामी जी के आशीर्वाद एक बड़ी सुंदर कहानी है कैलिफोर्निया की ये जो मिड सिस्टर्स जिनके बारे में हमने कल डिस्कस किया था तो यह जो तीन बहनें थी यह जो हेलन एलिस और केरी ये तीन बहनों के घर में स्वामी जी रुके थे उसमें से यह जो केरी थी व उसका उसको क्या है बहुत माइग्रेन होता था तो अभी स्वामी जी जब उनके घर पर रहते थे तब वह स्मोकिंग करते थे चिरोटोर करते थे फिर वह घर छोड़ के चले गए फिर दूसरी जगह पे फिर भारत में आ गए उनका तो देहांत भी हो गया महासमाधि हो गई किंतु वोह चिरू था वो वो मिड सिस्टर्स के घर में छोड़ के आए थे वो एक मे मेंटो जैसा एक जैसे कि उनकी याद उनकी इनके दिल में रहे जीवित रहे ताजी रहे तो यह चिरोटोर प्लेस होता है ना अमेरिका में ठंडी बहुत पड़ती है तो वह अग्नि जलाते हैं घर में तो उसके आसपास में एक फायर प्लेस जैसा बनाते हैं और उसके ऊपर में एक शेल्फ जैसा होता है जिसको मेंटल पीस कहते हैं वहां पर स्वामी जी की चिरू पड़ी रहती थी और सभी लोग उसको देखते थे प्रतिदिन तो अभी यह कैरी मीड केरी मीड वाइको ये जो तीसरी बहन थी उसको बहुत माइग्रेन होता था तो एक दिन उसने देखा कि स्वामी जी की रूट पड़ी हुई है वहां पे तो उसने क्या किया एकाएक उसके मन में क्या है अभी कुछ तो करना है ना माइग्रेन एक ऐसा जिसको होता है बेचारा वही सम समझ पाएगा कि क्या कष्ट है तो ये स्वामी जी की चिरू है उसको लेकर के अपने कपाल के ऊपर में ऐसा दो-तीन बार घिसा उसको उसको स्पर्श किया आश्चर्य की बात है कि माइग्रेन बिल्कुल ठीक हो गया तो यह कहानी वह कहती है कहती है देखिए स्वामी जी के जाने के बाद उनकी महासमाधि के बाद में इतने दिनों के बाद में भी स्वामी जी की प्रेजेंस उनकी उपस्थिति जैसे कि हमारे घर में है जीवंत उपस्थिति है और अभी भी उनके आशीर्वाद से हमारे देह और मन की शांति बनी रहती है तो देखिए कि प्राण की शक्ति है बड़े लंबे डिस्टेंस पर कार्य करती है समय और अवकाश कितने हजारों साल पहले यह जो भगवान कृष्ण ने भगवान राम ने जो आशीर्वाद दिए थे वह अपनी भूमि में भारत की भूमि में भारत की कहा पूरे विश्व में सभी जो विश्वास करेगा उनको वह आशीर्वाद मिलेगा ही मिलेगा और आखिर में लास्ट पैराग्राफ टॉपिका इट इज बाय द प्राणा दैट रियल क्यूरिंग कम्स द प्योर मैन हु कैन हु हैज क कंट्रोल द प्राण हैज द पावर ऑफ ब्रिंगिंग इट टू ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन व्हिच कैन बी कन्वे टू अदर्स अराउजल वाइब्रेशन प्राण के माध्यम से ही सही सही दूसरों की बीमारी को आप ठीक कर सकते हैं जो प्योर मैन है जो शुद्ध सर्वांग संपूर्ण योगी है वह प्राण को एक इस तरह के वाइब्रेशन के स्टेट पे ले आएगा फिर यही वाइब्रेशन को दूसरों के भीतर में प्रवेश करवाएगा जिससे कि दूसरे की जो बीमारी है हताशा है मानसिक यह जो संताप है रोग शोक है सांसारिक समस्याएं हैं सबसे वह मुक्ति पा सकता है तो यह है प्राणायाम की शक्ति और इसके बाद में सेवंथ टॉपिक है पावर ओवर द पीपल यहां से हमको अभी यहां तक हमको यहां तक हमने छह टॉपिक देखे हैं सातवें टॉपिक से हमको फिर से प्रारंभ करना है तो यह सातवां टॉपिक जो है इसको हम कल देखेंगे लाइन बाय लाइन देखें काफी डिटेल में डिस्कशन भी करेंगे यह अभी तक के छ टॉपिक है वो तो ऑलरेडी हमने डिस्कस कर लिए है तो मैंने सिर्फ आउटलाइन देकर के छोड़ दिया है सेवंथ टॉपिक से डिस्कशन बाकी है लाइन बाय लाइन पढ़ेंगे डिटेल में जाएंगे इस पूरा सप्ताह आज यही तक कल फिर से मिते ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु यह बात सही है कि सिद्धि के अगेंस्ट में या तो किसी भी तरह के मिरेकल पावर्स के अगेंस्ट में ठाकुर थे उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु जैसे देखिए कि यही स्वामी जी वह अमेरिका गए और वही स्वामी जी वहां का साइंस और टेक्नोलॉजी देख कर के मुग्ध हो गए और यही स्वामी जी ने भारत की अव दशा भी देखी अभी आप देखिए कि क्या आप कथामृत पढ़ कर के साधना करके भारत को उन्नत कर पाएंगे वो नहीं होगा ये 150 करोड़ लोगों को जो खाना भी खिलाना है वो तभी संभव है जबकि यह जो जेनेटिकली मॉडिफाइड क्रॉप भारत में आया है तो यह देखिए कि बिना साइंस और टेक्नोलॉजी के आज आज का जगत तो संभव ही नहीं तो फिर यदि आप साइंस और टेक्नोलॉजी को स्वीकार करते हैं तो फिर यह जो अपना प्राणिक साइंस है उसको भी क्यों नहीं स्वीकार करेंगे जिस तरह से हम आज की इंडस्ट्रीज है आज के मॉडर्न वेपंस है आज की आर्मी है आज का इसरो है उन सबको यदि इंजीनियरिंग के साथ में प्राण से भी आप यदि कंट्रोल कर पाए तो उसको हम क्यों नहीं करेंगे तो स्वामी जी का जो आईडिया था कि बेस्ट एलिमेंट ऑफ ईस्ट और बेस्ट एलिमेंट ऑफ द वेस्ट दोनों को कंबाइन करके एक नया सिविलाइजेशन बना है तो साइंस टेक्नोलॉजी को कंप्लीट रिनाउंस करके धन संपत्ति को संपूर्ण रिनाउंस करके तो देश नहीं बनेगा यह मॉडर्न इंडिया का यही हिस्ट्री है आज एक समय था कि यह बुद्ध और अशोक की भूमि थी आज अपने पास में एटम बम है आपका कहां से कहेंगे कि ठाकुर की उपदेश के कहां एटम बॉम फिट होते हैं अभी कल परसों ही हमने आधी रात को यह हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट किया और सभी जितने भी कमेंटेटर्स को पढ़ता हूं वह सब बड़े खुश होकर के कह रहे हैं कि हां हाइपरसोनिक मिसाइल अपने पास में होनी चाहिए ठाकुर ने कहां कहा कि हाइपरसोनिक मिसाइल या तो फिर किसी भी तरह के अस्त्र शस्त्र रखे किंतु जद ये जगत ही ऐसा है कि यह टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट होने ही चाहिए इस कांटेक्ट में यदि देखें प्योर टेक्नोलॉजिकल साइंटिफिक व्यू तो ये राजयोग उसमें उसका यह कार्य है आध्यात्मिक जगत को छोड़ कर के बाह्य जगत को यदि देखें तो राजयोग और या तो फिर यह प्राण इट जज ग्रेट यूटिलिटी प्योर स्पिरिचुअल दृष्टि से ठीक है किंतु प्योर स्पिरिचुअलिटी तो काम नहीं करेगी जगत में अभी इंडियन आर्मी है ठाकुर क्या कहेंगे कि इंडियन आर्मी को नहीं होना चाहिए एकच आध्यात्मिक दृष्टि से नहीं होना चाहिए वोह हमारे भीतर में जो आत्मन है वह अपने शत्रुओं में भी है किंतु फिर देखिए कि अपने कुरुक्षेत्र में भी तो यही भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि उनका वध कर और यह जो सब जितने भी मॉडर्न वेपंस थे ब्रह्मास्त्र वगैरह जो भी था वह सबका इस्तेमाल भगवान कृष्ण ने अर्जुन से करवाया तो फिर जगत में जब रहेंगे तो आपको शक्ति प्रदर्शन करना ही होगा इसको डेवलप कब होगा कि जैसे यह जो ग्रीक साइंस का रहने सा हुआ था और बचपन से ही ये लोग ग्रीक साइंस यानी कि ये साइंस और टेक्नोलॉजी मैथमे बचपन से ही पढ़ते रहते तो ग्रेजुएट होने के बाद में जो पीएचडी डिग्री आती है तो ये लोग न्यूक्लियर पावर प्लांट बना सकते हैं वह बड़े हो करके न्यूक्लियर साइंस सीखेंगे तो काम नहीं बनने वाला तो हमको भी यह प्राण का साइंस से बचपन से ही बच्चों को सिखाए तभी तो यह डेवलप होगा अभी हम तो बूढ़े हो गए हम नाक बंद करके हजार प्राणायाम करते कोई फर्क नहीं पड़ने वाला अपने लिए इस लेवल पर आकर के इस उम्र में आकर के अभी शरणागति ही एक रास्ता है इस दृष्टि से कथामृत 100 पर फिट है किंतु नई जनरेशन को आप यो खास करके राजयो क्यों नहीं सिखाएंगे इट विल बी ग्रेट बेनिफिट फॉर अवर नेशन एंड फर द वर्ल्ड पर य ब्रह्मण के ऊपर में शक्ति है शक्ति का मेनिफेस्टेशन होता है ब्रह्मण की एनर्जी को लेकर के शक्ति उसको इस जगत में कन्वर्ट करती है एंड अल्टीमेटली य उसी के भीतर में चला जाता है तो है तो द्वत अद्वैत ही किंतु जब इस शक्ति फिर यह प्राण आकाश और फिर आकाश य वैविध्य पूर्ण जगत में परिवर्तित होता है हमको लगता है सब कुछ है राइट बट अल्टीमेटली इ पार्ट ऑफ ब्रह्मण ओनली और यह देखिए एक मिसिंग लिंक था अभी यह जो पंची करण जो हम पढ़ते हैं वेदांत में कि इस तरह से ब्रह्मण का जगत में कन्वर्जन हुआ किंतु उससे ज्यादा बेटर एक्सप्लेनेशन मुझे यह आकाश और प्राण की लग रही है रदर देन पंचक बट एनीवे मैं इतना डीप भी इसका स्टडी नहीं किया है पंची करण का कि मैं इस तरह कोई डेफिनेट स्टेटमेंट दे पाऊ बट राज्य का मेरा थोड़ा स्टडी है इसलिए मुझे और खास करके य यह जो है ना आकाश और प्राण ये मॉडर्न फिजिक्स के साथ में इतना वो इजली मैच हो जाता है कि इट अपील्स मी मोर रदर देन ब्रह्म शक्ति दिस इज अ पैरेलल बिटवीन आकाश एंड प्राण दैट विल बी अ बेटर पैरेलल कॉस्मिक शक्ति जेटा मने प्राण को क्या कहेंगे जैसे कि सूरज की गर्मी पृथ्वी पर आती है और यह पेड़ पौधों को जीवन दान देती है तो वह जो पूरे विश्व ब्रह्मांड में जो एनर्जी है जिसमें मानव की शक्ति भी आ जाती है वह सब मिलाकर के प्राण यानी सिर्फ भौतिक शक्ति नहीं सिर्फ दैहिक शक्ति नहीं सबका समावेश होकर के प्राणायाम लंग्स को कंट्रोल करने के लिए नहीं यह जो प्राणायाम है प्राण को कंट्रोल करने के लिए लंग्स एक साधन है जैसे कि यह अभी यह पेन है कोई भी मेरे मुझे पेन से लिखना है तो मैं अपने हाथों से पेन को पकडू ना अपने मन को ऑर्डर करूंगा मन से कि अरे पेन तुम खड़ी हो और इसके ऊपर में लिखना शुरू कर दो तो वो तो मेरी बात सुनने वाली नहीं हाथ से मुझे पेन को पकड़ना पड़ेगा तो वैसे ही अपने लंग्स है जिससे हम प्राण को पकड़ेंगे अदर वाइज मैं कहूंगा प्राण तुम मेरी बात सुनो और यह तुम जाकर के उस चांद और सूरज की गति को परिवर्तित कर दो ऐसा नहीं होगा ये प्राणायाम यानी कि जो क्रिया है अपने लंग से की जाती है उससे मैं प्राण को पकडा प्राण को वश में लूंगा फिर उसके माध्यम से मैं प्राण को ऑर्डर करूंगा देखिए यह सब हमारे लिए सिर्फ थिरी है थियोरेटिकल स्पेक्युलेटिव ये योगा प्राणायाम में डिग्री कोर्स किया था यह वड़ोदरा में एक बहुत अच्छा एक योग निकेतन बोलकर के इंस्टिट्यूशन है वहां से और हमारे आचार्य थे वो ट्रेडिशनल योगाचार्य थे बचपन से ही यह लोग योगा सीखते थे किंतु यह करने के बावजूद हम लोग अपने को कभी भी योगी नहीं कह पाएंगे क्योंकि जो प्रॉपर प्राणायाम और आसन की जो प्रैक्टिस करनी है रणा ध्यान की वह सब हमने कभी की नहीं है थोड़ा बहुत किया है बीच-बीच में छोड़ दिया है चालू किया है वगैरह वगैरह हम लोग कोई इसमें प्रैक्टिकल एक्सपर्ट तो है नहीं हमको तो यह सब पढ़ कर के अनुमान ही करना है और इसीलिए मैं कहता हूं जो अपॉर्चुनिटी हमने मिस की वो अपने बच्चों को वो मिस ना कराए जिसके जो है छोटे बच्चे तो अवश्य उनको योग और वेदांत सिखाए जिससे कि उनका भविष्य बनेगा भारत देश का भविष्य बनेगा आकाश सूक्ष्म तत्व है जो कि यह सब एटमिक और एटम में परिवर्तित होता है अभी यह कैसे होता है वह तो भी मैं कैसे बताऊंगा स्वामी जी ने यहां तक लिखा है और कहा है कि प्राण जो है प्राण आकाश के ऊपर में आघात करता है प्राण आकाश को कंट्रोल करता है और आकाश को ट्रांसम्यूट करके आकाश को रिफॉर्म करके यह भ पदार्थ बनाता है देखिए हम लोग पढ़ कर के ही यह सब बातें करते हैं हमारे से कोई डेफिनेट स्टेटमेंट तो दिया नहीं जाएगा कि अभी जैसे हम लोग साइंस पढ़े हैं स्कूल में तो यह मैं डेफिनेटली बता सकता हूं कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर के पानी होता है जिसका कि केमिकल साइन है h2o इस तरह का डेफिनेट स्टेटमेंट में कोई आकाश और प्राण के बारे में नहीं दे पाऊंगा क्योंकि इवन हमारे ऋषि मुनियों ने और इवन स्वामी जी ने इसके बारे में जो आउटलाइन दी है इस इसको प्योर एकदम ग्रेट डिटेल में वर्कआउट नहीं किया है इसको प्रैक्टिकल नहीं बनाया है यह प्रैक्टिकल करना उन्होंने नेक्स्ट जनरेशन के ऊपर में छोड़ दिया है अब यह पीरियोडिक टेबल जो है जो वेस्ट में किस-किस साइंस ने साइंटिस्ट लोगों ने डेवलप किया तो उसको डेवलप करके आज दो एलिमेंट को कंबाइन करके तीसरा केमिकल आप बना सकते हैं यह बड़ा ही प्रैक्टिकल है किंतु अभी अपने योग में योगशास्त्र में ऐसा नहीं हुआ वह सम फ्यूचर जनरेशन को इसको देना होगा