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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 11 Apr 2024 80k

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णा यते नमः स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क्स इसमें से ज्ञान योग के बारे में हम स्टडी कर रहे हैं स्वामी विवेकानंद के दो प्रवचन है अमेरिका में लंडन में दिए हुए विदेश में दिए हुए कॉस्मो माइक्रो कजम और कॉस्मो मैक्रो कजम इन दोनों में स्वामी जी ने आज की वैज्ञानिक पद्धति का आसरा लेकर के ईश्वर और आत्मन का अस्तित्व प्रूव करने का प्रयास किया है तो इसके बारे में हमने कॉस्मो मैक्रो कजम पढ़ लिया उसमें स्वामी जी किस तरह से पूरे विश्व ब्रह्मांड की उत्पत्ति ये लॉज ऑफ इवोल्यूशन मॉडर्न एस्ट्रोनॉमी इस सब का सहारा लेकर के बताते हैं कि हां ईश्वर होना ही चाहिए अदर वाइज तो आज के यह जो संत महापुरुष है जैसे कि यह भगवान राम भगवान कृष्णा इनका भी अस्तित्व नहीं हो सकता था तो वह एक प्रवचन हुआ और यह दूसरा प्रवचन है कॉस्मो माइक्रो कजम इसमें क्या है कि यह जड़ देह यह पदार्थ का बना हुआ यह शरीर पंच महाभूत का इसके पीछे में एक चेतन आत्मन है एक चेतन वंत एक ईश्वर की स्थापना है हमारे हृदय में यह प्रूव करने का स्वामी जी का प्रयास है तो स्वामी जी किस तरह से एक के बाद एक आर्गुमेंट हमारे सामने उपस्थित करते हैं वो भी हमने देखा कि स्वामी जी कहते हैं कि यह इंद्रिय है यह हमारी आंख यह हमा कान यह हमारे नाक यह यह जो इंद्रिय है यह इंद्रिय और फिर इंद्रियों के पीछे जो मन है यह मन और मन के भी पीछे जो बुद्धि है यह सब तो जड़ है यह जड़ के पीछे में जद इनको इलुमिया आत्मन नहीं रहता यदि ईश्वर नहीं रहता तो यह जड़ देह क्या काम करता एक जीवंत शरीर और एक मृत शरीर दोनों को देखिए दोनों के बीच में डिफरेंस क्या है डेड बॉडी है वह किसी भी काम का नहीं हालांकि उसके हाथ पैर आंख कान नाक सब कुछ ऐसे के ऐसे है इसीलिए तो यह ऑर्गन डोनेशन पॉसिबल है कि यदि कोई मनुष्य उसका देहांत होता है तो देहांत से पहले या इमीडिएट बाद में वह अपने शरीर के ये जो ऑर्गन है जो किडनी है आंख है वगैरह वो ड डोनेट कर सकता है क्यों डोनेट कर सकता है उसको अभी क्यों किडनी या हार्ट की जरूरत नहीं रही किडनी या हार्ट या आंख या उसके कान यदि परफेक्टली काम करते ही होते तो वह बेचारा मर क्यों गया उसका मृत्यु हुआ इसीलिए क्योंकि इसके भीतर में रहने वाली आत्मन या तो फिर मोर टेक्निकल करेक्ट वर्ड है जीवात्मा ये जीवा मन या तो फिर सूक्ष्म शरीर उस देह को त्याग करके चला गया है एक साइड पर है यह एक जड़ शरीर और दूसरी ओर है यह चेतन शरीर या तो फिर आत्मन और इन दोनों के बीच में जो लिंक है जो कनेक्शन है वह कनेक्शन है यह सूक्ष्म शरीर तो सूक्ष्म शरीर इस देह को इस देह के भीतर में निवास करता है इस देह को वह प्राण प्रदान करता है या जैसे कि यह एक मान लीजिए कि एक जनरेटर है वहां से इलेक्ट्रिसिटी बन है और यह प्रकाश का ये एक सोर्स है ये लाइट का बल्ब है जो कि जनरेटर को ऑन करने से इलेक्ट्रिसिटी इस प्रकाश के बल्ब में आती है तो ये सूक्ष्म शरीर क्या है पता है वो जो वायरिंग जैसा है वोह जो कनेक्टिंग वायर होते हैं ना जनरेटर में से वायर आकर के इलेक्ट्रिसिटी को लाकर के बल्ब में डालते हैं तो ये वायर की तरह यह सूक्ष्म शरीर है आत्मन की शक्ति आत्मन का चेतन आत्मन का प्राण इस जड़ देह में संचार करता है जड़ देह को जीवित करता है तो यहां तक तो हमने देखा फिर स्वामी जी कहते हैं कि यह सब बातों के बारे में जद हम सोचेंगे तो एक दूसरा प्रश्न आ सकता है वह प्रश्न क्या है कि क्या यह पुनर्जन्म है कि नहीं तो स्वामी जी कहते हैं अवश्य पुनर्जन्म है यदि पुनर्जन्म नहीं रहता तो यह जड़ देह जो कि समय अवकाश के इस पिंजरे में घिरा हुआ है वो मुक्ति के से प्राप्त करता अपना सही स्वरूप जो कि समय और अवकाश स्पेस एंड टाइम मैटर एंड एनर्जी इवन यह जो पूरा कॉस्मो यह जो पूरा विश्व ब्रह्मांड दिख रहा है इसके परे कैसे ज्यादा अपना सही स्वरूप किस तरह से रियलाइफ करता इसीलिए इस जड़ देह के परे आत्मन है आत्मन से ही सूक्ष्म शरीर की उत्पत्ति होती है और यही सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक जड़ देह धारण करता जाता है जन्म मृत्यु जरा व्याधि की चक्र साइकिल चलती जाती है चलती जाएगी चलती जाएगी तब तक जब तक ना कि हमको यह ज्ञान होगा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य है ईश्वर प्राप्ति या तो आत्म दर्शन जब यह उद्देश्य हमको ज्ञात हो जाएगा जब हमको यह उद्देश्य पता चल जाएगा कि इस जीवन जिसको मैं जी रहा हूं इतने करोड़ों करोड़ों सालों से मैं आ रहा हूं जा रहा हूं मेरा मृत्यु हो रहा है जन्म हो रहा है उसका उद्देश्य क्या है यह क्या उद्देश्य यही है कि हर बार जन्म लो हर बार वही एक का एक च इस संसार की चक्की में पीसते जाओ वही अपने कैरियर बनाओ वही बच्चों को पैदा करो वही उनकी केयर करो वही बूढ़े हो वही एक के बाद एक बीमारी से ग्रस्त हो जाओ और वही उसी बीमारी से तड़प तड़प करके आखिर में प्राण त्याग कर दो क्या यही जीवन का उद्देश्य है देयर इज समथिंग हायर समथिंग बियोंड व्च अवर वर्ल्डली कंसर्न्स एंड दैट बियोंड इस आत्मन और ईश्वर यह संसार के जागतिक सुख भोग के परे भी एक उच्च उद्देश्य एक सर्वोच्च आदर्श मनुष्य के सामने है और वह आदर्श है आत्म साधना आत्म तत्व की प्राप्ति आत्मज्ञान या तो फिर ईश्वर के दर्शन तो यहां तक स्वामी जी ने बताया और फिर स्वामी जी अभी ये पुनर्जन्म वाद है इसके बारे में एक के बाद एक आर्गुमेंट कर रहे हैं हमने ऑलरेडी देखा कि स्वामी जी का हमको समझाने का तरीका क्या है स्वामी जी सिर्फ एक सिद्धांत वाक्य देकर के छोड़ कर के चले नहीं जाते कि हां तुम सब लोग यह स्वीकार कर लो कि आत्मन है तुम सब लोग यह स्वीकार कर लो कि एक सूक्ष्म शरीर है जो कि आत्मन से एनर्जी प्राप्त करके आत्मन से जीवन प्राप्त कर करके इस जड़ देख के भीतर में प्राण का संचार करता है और फिर यही सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म देह एक के बाद एक जड़ शरीर को धारण करता जाता है और इससे पुनर्जन्म वाद कहते हैं तो स्वामी जी सिर्फ इस तरह से हमको सिद्धांत वाक्य नहीं देते किंतु लॉजिकली स्टेप बाय स्टेप डायलेक्टिकली डायलेक्टिक्स जिसको कहते हैं फिलोसोफी की लैंग्वेज में तो डायलेक्टिकली हमारे सामने स्टेप बाय स्टेप आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट देते हैं और इसी आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट हमको लगेगा शायद बहुत ज्यादा ड्राई हो जाएगा बहुत ज्यादा ओवर्टली इंटेलेक्चुअल हो जाएगा तो वैसे सडन एकाय जैसे मान लीजिए घना बादल छाया हुआ है और एका एक बादल में से थोड़ी सी जगह हुई और सूर्य का प्रचंड प्रकाश पूरी पृथ्वी पर छा गया तो वैसे ही अभी एक आर्गुमेंट कर रहे हैं स्टेप बाय स्टेप लॉजिकल इंटेलेक्चुअल हम शायद पढ़ते पढ़ते थोड़ी देर के बाद में हो जाए किंतु सडन एक ऐसा इंस्पिरेशनल बिजली की तरह एक स्ट्राइक करता है उनके कुछ कुछ मैसेज तो स्वामी जी को पढ़ने का यह आनंद है कि कभी-कभी यह पूरा आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट स्टेप बाय स्टेप लॉजिकल प्रोसेस चलता है तो कभी सडन इट फ्लाइट ऑफ रेटरी एक ऐसा प्रेरणा का स्रोत व बहा देते हैं जैसे कि हमारा शरीर और मन तृप्त हो जाए तो हम यहां तक पहुंचे थे पुनर्जन्म वाद के बारे में स्वामी जी आर्गुमेंट कर रहे हैं यहां पर भी स्वामी जी ने कहा कि पहले तो लोग क्या कहते हैं उसको काउंटर करते हैं लोग कहेंगे कि अरे पुनर्जन्म यदि होता है तोय हमको पिछले जन्म की बात क्यों याद नहीं है तो स्वामी जी कहते हैं कि हमको कल क्या खाया था परसों क्या खाया था यह याद नहीं है तो पुनः पहले के जन्म में क्या किया क्या नहीं किया कैसे याद रहेगा क्या आता क्या है पहले के जन्मों में से जैसे वो अपने संस्कार आते हैं जैसे कि बैंक बैलेंस बैंक में आप एक के बाद एक ट्रांजैक्शन करते जाइए कभी पैसा डाला कभी पैसा विथड्रावल वाइज डिटेल में दिखाएगा किंतु वो बैंक बंद करके वो बैंक में से अकाउंट क्लोज करवा करके नई बैंक में यदि अकाउंट ओपन करवाया तो क्या होगा आपका पिछली बैंक का पूरा ट्रांजैक्शन क्या नई बैंक में जाएगा ऐसा नहीं होगा जो बैंक बैलेंस बचा है सिर्फ वही नई बैंक में जाएगा अकाउंट क्लोज करने के बाद में पता चला कि मेरे अकाउंट में ₹1 लाख है तो यह ₹1 लाख का बैलेंस ही नए बैंक के नए अकाउंट में जाएगा वह ₹1 लाख उसके पीछे मैंने कितने हजारों ट्रांजैक्शन किए थे कब-कब विड्रॉ किया था कब-कब डिपॉजिट किया था वह सब नई बैंक में नहीं जाने वाला है तो वैसे ही जितनी भी घटनाएं पूर्व जन्म में बनी है वह सब शायद याद ना रहे कि किंतु घटनाओं के आखिर में अच्छी मैंने अच्छे कर्म किए तो अच्छे संस्कार और बुरे कर्म किए तो बुरे संस्कार ये अच्छे और बुरे संस्कारों का बैलेंस जो है वह नए जन्म में आएगा फिर स्वामी जी यह तो समझा देते हैं फिर आखिर में क्या कहते हैं कि यह तो हो गया कि जो लोग पुनर्जन्म वाद के विरोध में आर्गुमेंट करते हैं इसको मैंने काटा किंतु क्या पुनर्जन्म वाद के फेवर में क्या कोई पॉजिटिव आर्गुमेंट है तो स्वामी जी कहते हैं है क्या आर्गुमेंट है पॉजिटिव आर्गुमेंट कि यह जो हमारी सीखने की शक्ति है लर्निंग कैपेसिटी यह पूरी पुनर्जन्म के ऊपर में आधारित है हमको यह बात सुनकर के थोड़ा सा तो आश्चर्य होगा कि स्वामी जी ने कहां से कैसे यह कनेक्शन बिठाया है पुनर्जन्म के ऊपर में क्या मेरी सीखने की कैपेसिटी मेरी लर्निंग कैपेसिटी मेरी बुद्धि मेरा एक्सपीरियंस क्या उसके ऊपर कैसे डिपेंड हो सकता है तो स्वामी जी अगेन स्टेप बाय स्टेप समझाते हैं सबसे पहले तो क्या कहते हैं कि मैं कोई भी चीज सीखता हूं तो वो किस चीज का परिणाम है मान लीजिए कि आज सुबह को मैं मैंने एक गुलाब का फूल देखा तो गुलाब का फूल मैंने जैसे ही देखा मेरे दिमाग के भीतर में गुलाब मैंने बचपन से लेकर के आज तक हजारों गुलाब के फूल देखे थे तो उस पुराने गुलाब के फूलों के चित्र मेरे ब्रेन के भीतर में स्टोर हो कर के पड़े हैं उसके साथ में नए आज के गुलाब के चित्र का मैंने कंपैरिजन किया कंपैरिजन करके मुझे पता चला मैं जिसको गुलाब का फूल अपने ब्रेन में स्टोर करके रखा है डाटा इंफॉर्मेशन उसके साथ में यह मैच हो रहा है तो यह गुलाब का फूल है तो यह हो गया मेरा नॉलेज मेरा ज्ञान और मान लीजिए कि मैंने एक ऐसा फूल देखा जिसको कि मैंने पहले कभी नहीं देखा था अभी मैं उसको देख कर के अपने ब्रेन में सिग्नल भेजता हूं कहता हूं ब्रेन के भीतर में जो स्टोरेज पड़ा हुआ है डेटाबेस पड़ा हुआ है उसको कि इसको खोल कर के देखो डेटाबेस में कि ये वाला फूल क्या है इसके बारे में तुमको क्या पता है तो डेटाबेस में से रिप्लाई आएगा कि इसके बारे में कोई भी इंफॉर्मेशन नहीं है तो यदि कोई इंफॉर्मेशन नहीं है तो ऐसा अनजान फूल हो गया और यह हो गया मेरा अज्ञान अभी स्वामी जी कहते हैं देखिए ऐसी यह हो गई सीखने की पद्धति ऑलरेडी मेरे ब्रेन में जो पड़ा हुआ है उसी के साथ में मैं जो कुछ भी दिन प्रतिदिन देखता हूं कंपेयर करूंगा और कंपेयर करके जब दोनों का कंप रीजन होगा तब मुझे ज्ञान होगा रिप्लाई मिलेगा कि हां यह चीज यह है अच्छा स्वामी जी अभी इस आर्गुमेंट को और दूसरी बात है कि आज का जो मशीन लर्निंग है यह जो न्यूरल नेटवर्किंग है जिसके बेस के ऊपर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई काम करता है यह पूरे पूरे प्रिंसिपल्स यह पूरे स्वामी जी ने यह जो कहा इसी के बेस के ऊपर में है रेन फोर्सड लर्निंग तो स्वामी जी हमको जो बताते हैं कि किस तरह से ह्यूमन ब्रेन काम करता है उसी सिद्धांत के ऊपर में उसी प्रिंसिपल्स के ऊपर में आज यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को ट्रेन किया जाता है तो यहां तक हुआ फिर स्वामी जी कहते हैं कि देखिए जब बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे के जन्म के साथ में ही उसके भीतर में मृत्यु भय होता है अभी ये मृत्यु भय कहां से आया बच्चे का तो अभी जन्म हुआ है अभी तो उसने आंखें खोल कर के जगत को देखा है उसको ना ही यह पता है जन्म क्या है मृत्यु क्या है मां क्या है पिताजी क्या है उसको कुछ नहीं पता फिर भी उसके मन में मृत्यु भय है तो यह मृत्यु भय कहां से आया तो ये पिछले जन्म के नॉलेज का परिणाम है पिछले जन्मों के अनुभव का परिणाम है स्वामी जी एक दूसरा उदाहरण देते हैं बतक का बच्चा है तो यह बतक का बच्चा मान लीजिए जैसे ही जन्म लेगा वैसे ही पानी में गिर कर के तैरना शुरू कर देगा तो यह तैरना उसको किसने सिखाया अभी तो जन्म लिया है तो तैरना सिखा पिछले जन्मों के अनुभव के आधार पर तो यहां तक स्वामी जी फिर स्वामी जी क्या कहते हैं कि अच्छा यह पिछले जन्मों के ये जो अनुभव है जो कि हम लोग अनुभव कहते हैं पिछले जन्मों के किंतु साइंटिस्ट लोग आजकल के इसको इस तरह से काटेंगे आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट हो रहा है तो स्वामी जी पहले एक आर्गुमेंट लेते हैं फिर उसको काटने के लिए काउंटर आर्गुमेंट लेते हैं फिर इसी काउंटर आर्गुमेंट को काटने के लिए एक आर्गुमेंट लेते हैं पूर्व पक्ष उत्तर पक्ष तो ये न्याय की जो प्रणाली है तो अभी इस बात को काटने के लिए कि हां यह बच्चा बतक का बच्चा जैसे ही जन्म लेता है वैसे ही पानी में तैरता है इसका क्या उत्तर दोगे उत्तर मुझे तो ऐसा लगता है कि पुनर्जन्म वाद है तुम बताओ तुमको क्या कहना है तो आजकल के मॉडर्न पढ़े लिखे लोग वे लोग क्या कहेंगे यह इंस्टिंक्ट है तो अभी यहां तक हम आके रुके हैं स्वामी जी कहते हैं इंस्टिंक्ट क्या है अभी अच्छा देखते हैं तो अच्छा ये इंस्टिंक्ट के बारे में भी स्वामी जी ने कल बता दिया इंस्टिंक्ट एक्चुअली क्या है जैसे मान लीजिए कि एक बच्चा पियानो सीखता है या तो फिर ये टाइपिंग सीखता है जब पियानो पहली बार दे सीखते हैं तो प्रत्येक की के ऊपर में उसको ध्यान रख कर के उसको टाइप करना पड़ता है किंतु जैसे ही उसको पियानो आ गया तो वैसे ही वह आंख बंद करके एकदम स्मूथली पियानो बजाएगा जो लोग पहले पहले टाइप करना सीखते हैं वो पहली पहली बार ए बी सी डी देख देख देख करके प्रत्येक की के ऊपर में वो उंगली डालते हैं टाइप करने के लिए किंतु जैसे ही एक्सपीरियंस हो गया तो वैसे ही आंख बंद करके फटाफट फटाफट करके टाइप कर सकते हैं तो ये जो फटाफट करके टाइप करते हैं या तो फिर आंख बंद करके एकदम स्मूथली एकदम फास्ट पियानो बजाते हैं ये जद इंस्टिंक्ट हो गया है तो ये इंस्टिंक्ट के पीछे क्या है बहुत ही लंबा अभ्यास है तो ये लंबा अभ्यास किए बिना ना यह इंस्टिंक्ट नहीं आएगी तो यानी कि आप यह कहते हैं कि बतक का बच्चा जैसे ही जन्म लेता है वैसे ही पानी में गिर करके तैरना शुरू कर देता है ये इंस्टिंक्ट है तो ये इंस्टिंक्ट कोई हवा में से नहीं आई कितने हजारों जन्म गए होंगे यह बतक ने पानी में जाकर के तैरना सीखा होगा कभी तैरा होगा कभी डूब गया होगा कितने ही एक्सपीरियंस कितने ही एक्सपेरिमेंट किए होंगे उसका पूरा बॉडी इस तरह से रिफॉर्म हुआ होगा जो इवोल्यूशन की प्रोसेस है उसके अनुसार पानी में तैरने के लिए पूरा बॉडी मॉडिफाई हुआ होगा जन्म जन्मांतर तक तब कहीं जाकर के आज के बतक के बच्चे के भीतर में वह इंस्टिंक्ट के रूप में तैरना आ गया है अच्छा यहां तक हमने देखा फिर स्वामी जी क्या कहते हैं व्हाट वास फर्स्ट डन विथ कॉन्शियस विल डज नॉट रिक्वा र लेटर ऑन एन एफर्ट ऑफ द विल जो पहले बहुत ही मेहनत करके करना पड़ता है वह बाद में इतनी मेहनत करके नहीं करना पड़ता जैसे कि मैं एक उदाहरण दे सकता हूं यहां पर आश्रम में कभी-कभी डोसा बनता है तो हमारा जो कुक है ये जो हमारा रसोइया वैसे तो है बंगोली बंगोली लोगों को तो वैसे डोसा बनाना इतना कहां से आएगा तो वह जब बेचारा डोसा बनाता है तो डोसा कैसा होता है कभी मोटा हो जाता है कभी पतला हो जाता है कभी ज्यादा जल जाता है कभी कच्चा रह जाता है और फिर वो डोसा भी बनाएगा तो ऐसा गोल-गोल घुमाने में भी उसको तकलीफ होती है किंतु कुछ दिनों पहले यहां पर कुछ फंक्शन था और बाहर से ढोंस बनाने वाले को एक कारीगर को बुलाया था किसी एक्सपर्ट को तो मैं थोड़ी देर वहां पर खड़े रह कर के देखा अरे बाप रे वो कैसे डोसा बनाता है ऐसा फड़ फड़ फड़ करके वो वो जो चलाता है ना अपना वो जो ये इसको क्या बोलते हैं वो जो हैंडल ना कि जो कुछ भी ऐसा फटाफट फटाफट करके वो धोसा बनाएगा जैसे कि मशीन बनाता है ऐसा तो देखिए कि ऐसा नहीं है कि ये जो आदमी जो डोसा बनाता है इतना परफेक्टली राउंड होता है परफेक्ट थिकनेस प्रत्येक डोसा का जो थिकनेस है इतना ही रहेगा और जितना वो जो उसको वो जो रोस्ट होना है इतना ही गर्म होगा कच्चा भी नहीं रहेगा जल भी नहीं जाएगा तो ये परफेक्शन है डोसा बनाने का तो वो तो कोई उसको एक दिन में नहीं आया या तो फिर वह जन्म से करके नहीं आया साल भर साल की प्रैक्टिस के बाद में वह इतना परफेक्टली डोसा बनाता है तो स्वामी जी कहते हैं कोई भी विद्या सीखने के लिए शुरू में तो बड़ा ही मेहनत करना पड़ता है किंतु बाद में यह अपने आयत हो जाती है आंख बंद करके उस विद्या का हम उसको इस्तेमाल कर सकते हैं दिस इज नॉट यट अ कंप्लीट प्रूफ स्वामी जी कहते हैं किंतु यह कंप्लीट नहीं है यह जो प्रूफ मैं जो दे रहा हूं वोह कंप्लीट नहीं है वन हाफ रिमेंस एक हाफ इस प्रूफ का बाकी है एंड दैट इज दैट ऑलमोस्ट ऑल द एक्शंस वच आर नाउ इंस्टिंक्टिव कैन बी ब्रोट अंडर द कंट्रोल ऑफ द विल स्वामी जी कहते हैं देखिए पहले तो मेहनत करके कोई भी एक्शन को आपने इंस्टिंक्ट बना दिया किंतु यह कंप्लीट पिक्चर नहीं है आधा पिक्चर अभी बाकी है आधा पिक्चर क्या है जो इंस्टिंक्टिव एक्शन है उसको आप मेहनत करके आपके कं ट्रोल में ला सकते हैं उसको आप कॉन्शियसली उसको कंट्रोल कर सकते हैं जैसे कि अपने हार्ट बीट यह बहुत सारे एक्सपेरिमेंट विदेश में हुए हैं मनुष्य का हृदय एक गति से धमकता है एक गति से धड़कता है उसे जो हार्ट बीट होते हैं वो परफेक्टली रेगुलर होते हैं हां अभी कोई बीमारी हुई हार्ट बीट में प्रॉब्लम हुआ तो अलग बात है वरना एक हेल्दी पर्सन है उसका हार्ट बीट एकदम रेगुलरली चलता रहता है किंतु जो लोग मेडिटेशन करते हैं रेगुलर ध्यान करते हैं इन लोगों का अपने हार्ट के ऊपर में इस तरह का कंट्रोल आ जाता है कि व ध्यान करने के बैठेंगे तो धीरे-धीरे करके अपने जो हार्ट बीट्स से उसको स्लो करते जाएंगे हृदय के धड़कने की जो धमक की जो गति है उसको वो धीरे-धीरे करके स्लो करते जाएंगे जनरली ये 90 बिट्स पर सेकंड ना कि कितना जो होता है वो 70 बिट्स के व्हाट एवर तो उसको धीरे-धीरे करके स्लो करके ऑलमोस्ट इसको स्टॉप कर सकते हैं यहां तक ये जो इंस्टिंक्ट है उसको आप फिर से कॉन्शियस विल के कंट्रोल में ला सकते हैं यानी दो चीज हुई पहले तो मैं जब अ पियानो सीखता हूं तो मेहनत करके कॉन्शियसली सीखता हूं जो कि बाद में इंस्टिंक्टिव हो जाता है ऑटोमेटिक मेरी उंगलियां चलती है जो यह गान करने को यदि मुझे बोला गया हार्मोनियम पे जैसे कि यहां पे अपने आश्रम के सभी सेंटर में प्रत्येक संध्या को खंडन भव बंदन ठाकुर की आरती होती है तो जो पुजारी महाराज ये प्रतिदिन आरती करते हैं वो आंख बंद करके आरती करके चले जाएंगे मेरे साथ में एक ऐसी हुआ था मैं पहली पहली बार वो सीख रहा था वह खंडन आरती तो हुआ ऐसा कि अभी तो सब देख देख करके करना पड़ता है ना कौन सी स्विच कहां पर है क्या है सामने स्क्रिप्ट रखी हुई है तो सडन लाइट चली गई अभी होना ऐसा चाहिए लाइट है नहीं है वह आरती तो परफेक्टली च चलनी चाहिए तो लाइट चली गई तो मुझे किताब नहीं दिख रही मुझे कौन सी की कहां पे है नहीं दिख रही एकदम गड़बड़ गड़बड़ होना शुरू हो गया अभी ठाकुर की आरती में गड़बड़ होने से तो बड़ा ही गलत बात है किंतु क्या करें मेरा इतना प्रैक्टिस नहीं था उस समय फिर जद इमीडिएट किसी ने वोह लैंप ऑन किया और फिर से मैं देख देख करके टिक टिक करने लगा किंतु जो महाराज जो स्वामी जी जो भी डिवोटा प्रतिदिन आरती करते हैं उनको फिर किताब देखने की जरूरत नहीं है वो लाइट भी चली जाएगी आंख भी बंद कर देंगे तो वैसे ही वह पूरा आरती वह हारमोनियम प बजा सकते हैं क्योंकि एक बार मेहनत करके आरती गाना उन्होंने इंस्टिंक्टिव बना दिया है किंतु साथ-साथ में यह जो इंस्टिंक्टिव प्रोसेस ऑलरेडी है उसको आप अपने कॉन्शियस विल के कंट्रोल में ला सकते हैं जैसे कि हार्टबीट है अ कथामृत में एक सुंदर उदाहरण है कि ठाकुर कहते हैं किसी ने यह बात कही कि भूकैलाश ने कि वहां पर एक एक वहां पर वो कोई एक्सक वेशन कर रहे थे कई खोद काम कर रहे थे जमीन व कोई गुफा वगैरह होगी तो उसमें जाकर के वे लोग देख रहे थे कि इसके भीतर में क्या है तो अभी भीतर में जाकर के देखा तो एक योगी को देखा जो कि कितने सालों से जड़ समाधि में पड़ा हुआ था उसका शरीर वैसे ही एकदम स्थिर होकर के बैठा था अभी वह जगह भी ऐसी है वहां पर ना हवा जाएगी नहीं व वह पानी जाएगा नहीं वहां पर खाना मिलेगा और उसका सांस बिल्कुल स्टॉप हो गया था अभी हमको लगेगा कि अरे जो सांस नहीं ले रहा है जो खाना नहीं खा रहा है जिसको हवा और पानी नहीं मिल रहा है उसका तो मृत्यु नहीं हो जाएगा क्या किंतु यह योगी जो समाधि में था पता नहीं कितने सालों पहले वह समाधि में चला गया होगा तो वैसे ही बिना खाए बिना पिए बिना आंख खुले हृदय की धड़कन बिल्कुल स्टॉप होकर के समाधि में मग्न होकर के बैठा था अभी जिन लोगों ने इस योगी को तो अभी यह उदाहरण हमने देखा कि ऑलरेडी कथामृत में इस तरह का उदाहरण है तो यह अपने शरीर के जितने भी इंस्टिंक्टिव ऑपरेशंस है इंस्टिंक्टिव चीजें हैं खाना पीना सांस लेना यह हृदय की धड़कन सब कुछ आप मेहनत करके अपने कंट्रोल के भीतर में ला सकते हैं ईच मसल ऑफ द बॉडी कैन बी ब्रोट अंडर कंट्रोल अपने शरीर का प्रत्येक मसल अपने कॉन्शियस विल अपने कंट्रोल के भीतर में ला सकते हैं दिस इज परफेक्टली वेल नोन इस बात को तो बहुत अच्छे तरीके से हम लोग जानते हैं जैसे कि देखिए जो ओलंपिक के स्विमर होते हैं इन लोगों की पानी के भीतर में सांस को रोकने की कैपेसिटी कितनी स्ट्रांग होती है मने मैं एक स्विमिंग सीखता था मैं जब में पढ़ता था तब वेकेशन वेकेशन में स्विमिंग सीखने के लिए जाता था तो हमारे इंस्ट्रक्टर थे यह जो हमको स्विमिंग सिखाते थे तो वह एक बार पानी में जंप लगाएंगे फिर पूरे पानी में ही तैरते रहेंगे तो हमको कभी-कभी डर लगता था अरे भैया वह जिंदा भी है लेकिन उनका डेड बॉडी तर तेर रहा है उतना उनका कंट्रोल था सांस को रोकने में अर्थात कि अपने शरीर के प्रत्येक अवयव प्रत्येक अंग प्रत्येक ऑर्गन प्रत्येक मसल को आप अपने विल के कंट्रोल में ला सकते हैं ईच मसल ऑफ द बॉडी कैन बी ब्रोट अंडर कंट्रोल दिस इज परफेक्टली वेल नोन इसके बारे में सभी लोगों को पता है सो द प्रूफ इज कंप्लीट बाय दिस डबल मेथड यह जो डबल मेथड है एक मेथड यह है कि हां हमको पता है कि यह जो मैं आज इंस्टिंक्टिवली सीखता हूं करता हूं उसके पीछे लंबा अभ्यास है और दूसरा कि लंबे अभ्यास से कोई भी चीज इंस्टिंक्टिव बना सकते हैं व्हाट वी नाउ कॉल इंस्टिंक्ट इज डी जनरेशन ऑफ वॉलंटरी एक्शंस जो मेहनत करके जो कार्य करते हैं उसी वही चीजें धीरे-धीरे बाद में इंस्टिंक्ट में परिणत होती है देयर फॉर इफ द एनालॉजी अप्लाइज टू द होल ऑफ क्रिएशन इफ ऑल नेचर इज यूनिफॉर्म देन व्ट इज इंस्टिंक्ट इन लोअर एनिमल्स एज एज इन मैन मस्ट बी द डिजनरेशन ऑफ विल यही सिद्धांत जद पूरे विश्व ब्रह्मांड को विश्व ब्रह्मांड में जीवित जितने भी पशु पक्षी प्राणी मनुष्य है इन सबको जद यह सिद्धांत अप्लाई करें तो जो कुछ भी इंस्टिंक्टिवली हो रहा है पंखी का बच्चा जैसे ही जन्म लेता है पंखी की मां बच्चे की मां उसको धक्का मार के उसके घोसले से भगा देती है व जब वह पेड़ के ऊपर में से गिरेगा तभी वह पंख पसारे और उड़ना शुरू करेगा हमको लगेगा मैंने जब पहली बार एक डॉक्यूमेंट्री देखा था उसमें इस तरह से है कि छोटे बच्चों को ही मां उसकी जो मां है वह जोर जबरजस्ती करके वह घोसले से बाहर भगा देती है तो मुझे लगेगा कि पंखी की मां क्रूअल नहीं है क्या निष्ठुर नहीं है क्या किंतु पंखी की मां को पता है कि पंख उसका बच्चा जो है वह जन्म से ही उड़ना सीख कर के ही आया है यदि उसको उड़ने के लिए फोर्स नहीं किया जाएगा तब वह उड़ना कभी नहीं सीखेगा बचपन से ही उसके मन में उड़ने के प्रति डर बैठ गया कि अरे मैं जद जंप लगाऊंगा पेड़ के ऊपर में से तो जमीन पर गिरंगा मर जाऊंगा ये डर जदी बैठ गया तो व कभी उड़ेगा नहीं तो उसको जोर से धक्का मार के घोंसले से भगाए गी अभी बच्चा वो घोंसले से पड़ रहा है गिर रहा है गिर रहा है और सडन फिर वो अपनी पांक पसारे और उड़ना शुरू कर देगा ठाकुर कहते हैं ना कथामृत में सुंदर वो वेद में होमा पक्षी की बात है होमा पक्षी हमेशा आकाश में एकदम ऊंचाई पर उड़ता रहता है उसका जब बच्चा भी होता है तो अंडा आकाश में से ही गिरता है गिरता है उसमें से बच्चा प्रकट होता है बच्चा ही सडन नीचे देखता है देखता है कि मैं जद गिरंगा जमीन के ऊपर में तो मैं मर जाऊंगा सत्यानाश हो जाएगा इमीडिएट वो अपनी पंख पसार करके उड़ता उड़ता अपनी मां के पास में चला जाता है तो प्रश्न होगा कि यह जो आकाश में से गिरते हुए बच्चे को किस किने उड़ना सिखाया वो तो इंस्टिंक्ट था यही सिद्धांत जो कि मेहनत करके करके कोई चीज सीखते हैं इंस्टिंक्ट में परिणत हो जाती है इसी सिद्धांत को विश्व ब्रह्मांड के सभी को अप्लाई कर सकते हैं अप्लाइड वी ड्वे अपॉन अंडर मैक्रो कजम ट ईच इवोल्यूशन प्रिसपोज एन इवोल्यूशन एंड ईच इल एंड इवोल्यूशन वी सी दैट इंस्टेंट इज इवॉल्वड रीजन यह जो इसके पहले वाला प्रवचन था कॉस्मो मैक्रो कजम इसमें स्वामी जी ने लॉजिक क्या दिया था ईश्वर के होने का प्रूफ क्या दिया था कि मान लीजिए आज हम ऐसे पुरुषोत्तम को देखते हैं भगवान कृष्ण भगवान राम भगवान बुद्ध भगवान राम कृष्णा तो यह शून्य में से तो यह सर्जन नहीं हुआ होगा ईश्वर ऑलरेडी होंगे ईश्वर ने अपने को एक बीज स्वरूप में अपने को डाला होगा यही बीज आज विस्तृत विस्तृत होकर के विश्व ब्रह्मांड हुआ है और इसी विश्व ब्रह्मांड की लास्ट फाइनल प्रोडक्ट है भगवान रामकृष्ण स्वामी विवेकानंद यदि यह कहेंगे कि यह जो सृष्टि का यह जो पूरा यात्रा है इसके एक छोर के ऊपर में हमको भगवान रामकृष्ण स्वामी विवेकानंद दिखते हैं तो इसका अर्थ यही होना चाहिए कि भगवान रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद में रही हुई डिविता पहले भी होगी ईश्वर के रूप में फिर यही जैसे कि पेड़ है पेड़ इवॉल्व होकर के बीज बनता है बीज में से फिर पेड़ बना होता है तो पेड़ का ही बच्चा बीज और बीज में से ही बड़ा होकर के नया पेड़ तो वैसे ही ईश्वर एक बीज स्वरूप में अपने को डालते हैं जहां से यह ब्रह्मांड की शुरुआत हुई इवोल्यूशन हुआ स्वामी जी कहते हैं तुम लोग कहते हो इवोल्यूशन है हम लोग इवोल्यूशन को स्वीकार करते हैं यदि तुम लोग इवोल्यूशन को स्वीकार करोगे अर्थात की जिस बीज स्वरूप में से जिस हिरणीय गर्भ में से विश्व ब्रह्मांड बना है वही बीज ईश्वर में से प्रकट हुआ है उसका जो सीड है ईश्वर के भीतर में से आया है तो यह स्वीकार कर लो तो स्वामी जी कहते हैं इसी चीज को इसी लॉजिक को यदि यहां पे अप्लाई करते हैं तो एक जगह पे जहां पे इंस्टिंक्ट है तो दूसरी जगह पे रीजन होगा अर्थात कि कॉन्शियसली मेहनत करके एक क्रिया को एक एक्शन को इंस्टिंक्ट तक ले आया हूं और यही इंस्टिंक्ट आखिर में मैं रीजन में भी कन्वर्ट कर सकता हूं तो वो ईश्वर में से सृष्टि सृष्टि का सर्वोच्च व इवोल्यूशनरी स्टेप है भगवान श्री राम कृष्ण और यही भगवान श्री राम कृष्ण फिर से ज सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकिल चलती रहती है तो जब प्रलय होगा तो यह आज के दिव्यता है दिव्यता बीज स्वरूप में चली जाएगी वही ईश्वर में विलीन हो जाएगी तो ईश्वर में से ही सृष्टि होती है और ईश्वर में ही यह सृष्टि विलीन हो जाती है यह सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकल चलती रहेगी तो यही रीजन यही लॉजिक को स्वामी जी हमको यहां पे अप्लाई करने को कहते हैं व्हाट वी कॉल इंस्टिंक्ट इन मैन और एनिमल्स मस्ट देयर फोर बी इवॉल्वड डिजनरेटेड वॉलंटरी एक्शंस एंड वॉलंटरी एक्शंस आर इंपॉसिबल विदाउट एक्सपीरियंस जिस चीज को हम इंस्टिंक्ट कहते हैं पशु में पक्षियों में वह वॉलंटरी एक्शन या तो फिर मेहनत करके की गई हुई प्रक्रिया का ही एक डी जनरेशन है एक छोटा सा निम्न स्तर है और यही निम्न स्तर को और यह निम्न स्तर जो है वॉलंटरी एक्शन का मेहनत की कर करके की गई प्रक्रिया का वह उसी के भीतर में से यह एक्सपीरियंस प्रकट होता है बिना एक्सपीरियंस केय कोई भी चीज संभव नहीं है एक्सपीरियंस स्टार्टेड दैट नॉलेज एंड ट नॉलेज इज थर एक्सपीरियंस के भीतर में से नॉलेज आता है और फिर वही नॉलेज के भीतर में से वह नॉलेज हमारे भीतर में रहता है द फियर ऑफ डेथ द डकलिंग टेकिंग टू द वाटर एंड ऑल इवोलेट एक्शंस इन द ह्यूमन बीइंग्स व्हिच हैव बिकम इंस्टिंक्टिव आर द रिजल्ट्स ऑफ पास्ट एक्सपीरियंस जब किसी भी बच्चे का जन्म होता है तो पहले से ही मृत्यु भय होता है बतक का बच्चा पानी में गिर कर के ही तैरना सीख जाता है यह होमा पाखी का बच्चा होमा पक्षी का बच्चा आकाश में से गिरता है जैसे ही उसको होश आता है वैसे ही वह उड़ना शुरू कर देता है तो यह सब चीजें यह मेहनत करके की गई हुई पिछले जन्म में जो मेहनत करके जो सीखा है उसी का इंस्टिंक्ट रूपांतरण है अच्छा इसके बाद में स्वामी जी एक नया टॉपिक स्टार्ट करते हैं स्वामी जी कहते हैं कि यह जो हम जिसको इंस्टिट कहते हैं जो कि पिछले जन्म की अनुभव का परिणाम है साइंटिस्ट लोग कहेंगे कि यह सब तो आपके इन्हेरिटेंस में जेनेटिक इन्हेरिटेंस में आया है हमारे भीतर में डीएनए है और यह डीएनए जो है इसमें बहुत सारी पॉसिबिलिटीज छुपी हुई है आज मैं जिस डीएनए को लेकर के जन्म ग्रहण किया है उसी डीएनए के भीतर में यह मृत्यु भय भी है पक्षी का जो डीएनए है उसी के भीतर में ये उड़ना कैसे सीखा जाए यह इंस्ट्रक्शन लिखी हुई है जैसे कि एक प्रोग्राम होता है ना कंप्यूटर के भीतर में प्रोग्राम इंस्टॉल कीजिए तो जो प्रोग्राम किया होगा उसके अनुसार कंप्यूटर कार्य करेगा यदि वह अकाउंटिंग का प्रोग्राम है तो कंप्यूटर हमारे लिए अकाउंट बनाएगा यदि वह डिजाइनिंग का प्रोग्राम है जैसे कि फोटोशॉप तो इसी कंप्यूटर में बैठ कर के हम लोग चित्रों को मॉडिफाई कर सकते हैं जिस तरह का प्रोग्राम हम इस कंप्यूटर में इंस्टॉल करेंगे उसी के अनुसार कंप्यूटर कार्य करेगा तो ज वैसे ही यह जड़ देह के भीतर में एक डीएनए होता है यह डीएनए के भीतर में सब इंस्ट्रक्शन लिखी हुई होती है और इसी इंस्ट्रक्शन के अनुसार यह देह कार्य करता है पक्षी के शरीर के भीतर में उड़ने का प्रोग्राम है बतक के शरीर के भीतर में तैरने का प्रोग्राम है हमारे शरीर के भीतर में यह सांस लेने का हृदय के धबकर का यह फिर यह मृत्यु भई यह सब प्रोग्राम है यह बच्चा जब हंसता है बच्चे को अच्छा देखिए वो मां को देख कर के वह सीखता है किंतु हास्य तो उसके भीतर में पहले से ही होगा तो यह हंसने का प्रोग्राम यह सभी हमारी एक्शन से ये हमारे डीएनए में सब इंस्ट्रक्शन लिखी हुई है इसीलिए हम यह सब करते हैं है इसमें आपको पुनर्जन्म लाने की जरूरत नहीं है मॉडर्न साइंस कहता है कि हमारे जितने भी पुरखे थे जितने भी पूर्वज थे उन सबके भीतर में उनके एक्सपीरियंस के अनुसार उनके डीएनए रेडी होते गए और य डीएनए के थ्रू यह सब चीजें आती है इसके लिए आपको पुनर्जन्म को लाने की जरूरत नहीं है यह जो नॉर्मल ट्रांसमिशन जो होता है मां और पिताजी से बच्चे का जन्म ग्रहण करना और माताजी और पिताजी के गुण बच्चे में आना यह सब डीएनए के थ्रू ही हो सकता है पुनर्जन्म लाने की जरूरत नहीं है तो ये एक काउंटर आर्गुमेंट हुआ और इस आर्गुमेंट का स्वामी जी क्या उत्तर देते हैं इसको हम कल देखें आज यही ओम शांति श कणा