बेलूर मठ में मेरी प्रथम दुर्गा पूजा
ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म समर्पण अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद तो आज से तो दुर्गा पूजा स्टार्ट हो रही है माका बोधन और इसके बाद में सप्तमी अष्टमी नवमी और दशेरा मुझे याद है कि मैं जब रामकृष्ण मिशन जवाइन करने के लिए आया था बेलूर मठ में तो मैं आया था एक्चुअली अक्टूबर महीने में ना जुलाई या सितंबर में आया था तो फर्स्ट सेलिब्रेशन बेलूरमठ में मैंने देखा था ये दुर्गा पूजा का तो व मैंने वैसे तो क्या होता है कि हम लोग उत्सव सेलिब्रेशन फेस्टिवल यह सब घर में तो देखते ही है और जब कहीं-कहीं कभी-कभी बाहर भी जाते हैं किंतु ऐसे लार्ज स्केल पर जब कोई भी सेलिब्रेशन होता है और उसमें पार्टिसिपेट करना फ्रॉम इनसाइड एज अ पार्ट ऑफ द टीम वो दैट वाज अ कंपलीटली न्यू एक्सपीरियंस फॉर मी और वो भी बेलूरमठ तो सोचिए कि यहां पर सर्वप्रथम दुर्गा पूजा स्वामी जी थे मां थी राजा मा थे उस समय स्टार्ट हुई थी तो वहां के जो वाइब्रेशंस है वो इतने पवित्र इतने सुंदर है मुझे याद है कि मेरा ड्यूटी था सुबह को हम लोग पीपीटीसी के ब्रह्मचार्य का भी ड्यूटी होता था तो ज्यादातर ड्यूटी तो ट्रेनिंग सेंटर के ब्रह्मचार्य का होता है कि तो हमको भी थोड़ा बहुत कुछ मिलता था साथ में तो सुबह को ये फ्लावर प्लकिंग करना होता था फूल बचने होते थे थोड़ने होते थे व मंदिर में जाकर के दे देना है और फिर क्या है कि ज्यादातर ऐसे तो हमारा और कोई ज्यादा काम नहीं था वहां पर उपस्थित रहना है वो पेंडल होता है वहां पर सुबह से लेकर के चैटिंग वगैरह आरंभ हो जाता है तो वह सुनना है और बस आनंद करना है और पास में ही गंगा का किनारा है तो मुझे याद है कि वो आगमन के गीत काली कीर्तन यह सब एक के बाद एक चलता रहता था और हम लोगों के साथ बिकॉज कि हम लोग नए आए थे और हमारे में से तो ज्यादातर लोग बंगोली नहीं होते हैं क्या होता है था कि एक महीने पहले से ही आगमन और काली कीर्तन का प्रैक्टिस वहां पर स्टार्ट हो जाता था हम ब्रह्मचार्य के लिए तो वो पहली बार ट वाज माय फर्स्ट इंट्रोडक्शन टू काली कीर्तन शुरू शुरू में सुना तो थोड़ा सा विचित्र ला इस तो लैंग्वेज समझ में नहीं आती है फिर उसके पीछे का आइडियाज क्या है हालांकि हम लोग कथामृत पढ़ते हैं तो बहुत सारे सोंग से बहुत सारे भजन से ऑलरेडी फैमिलियर हो जाते हैं किंतु वो क्या है एक वैसे पढ़ना एक चीज होता है है और सुनना एक कंपलीटली एक डिफरेंट एक्सपीरियंस तो उसका भी तो एक मने एक जो लोग बंगोल में बड़े होते हैं बंगोल में जिनका जन्म होता है तो क्या है कि वे लोग बचपन से यह सब चीजें सुनते हैं दे आर क्वाइट फैमिलियर टू इट और हम यहां पे गुजरात या तो नॉर्थ इंडिया वेस्ट इंडिया यहां सब जगहों से वहां पर गए हैं तो हमारा बचपन बिल्कुल डिफरेंट कल्चर में बीता है तो पहली बार काली कीर्तन सुनना पहली बार आगमन संगीत सुनना और वो भी सब साधु ब्रह्मचारी लोग एक साथ में मिलकर के गा रहे हैं जब हमारी प्रैक्टिस होती थी वो एक कंप्लीट दूसरा माहौल था जब पेंडल में सब गाते थे तो क्या था कि सभी मतलब हजारों भक्त एक साथ में गाते हैं तो वो तो एक है किंतु जब हम ब्रह्मचार्य की प्रैक्टिस होती थी दैट वाज अ कंपलीटली डिफरेंट एक्सपीरियंस वहां पे एक विजिटर्स रूम है बेलूरमठ में गंगा के सामने जहां पर उस समय की बात अभी आजकल की बात नहीं आजकल तो बहुत सारे महे बेटर अच्छे-अच्छे बड़े-बड़े रूम वहां पे वो हो गए हैं कंस्ट्रक्ट यह जब स्वामी जी थे राजा महाराज थे डायरेक्ट डिसाइल थे उस समय जो विजिटर्स आते थे उनको विजिटर्स रूम में बिठाया जाता था तो अभी नाम है विजिटर्स रूम किंतु फॉर ऑल प्रैक्टिकल पर्पसस हम लोग संगीत रूम के रूप में उसका यूज करते हैं कि ब्रह्मचारी लोग वहां पर जाकर के संगीत का प्रैक्टिस करेंगे तो वहां पर हम लोगों का प्रैक्टिस चलता था तो गंगा का किनारा है रात का समय होता था और एक सीनियर महाराज आते थे स्वामी जी जो हमको वोह सिखाते थे काली कीर्तन व आगमन संगीत वगैरह बाद में यह शिफ्ट हो गया वहां पे लाइब्रेरी बिल्डिंग में वहां पे साधु लोगों के लिए अलग से लाइब्रेरी थी जो कि उस शिफ्ट होकर के अभी जो पुराना टीसी है वहां पर चली गई तो वहां पर जो लाइब्रेरी जो ओरिजिनल थी वो अी बहुत बड़ा होल है वहां तो वहां पर वो फिर प्रैक्टिस चलती थी तो ये जो सब हम साधु ब्रह्मचार्य की जो प्रैक्टिस हो होती थी दैट वाज कंपलीटली डिफरेंट सब ब्रह्मचारी मिलकर के एक साथ में आगमन संगीत काली कीर्तन गान करेंगे उस सच्चे डिवाइन एटमॉस्फेयर वास क्रिएटेडटेड नहीं करेगा तब तक उसका वह जो दिव्य आनंद है वह वर्णन करना मुश्किल है और फिर बाद में तो मां आएगी पेंडल में फिर वो बोधन होगा उसके बाद में काली कीर्तन एक के बाद एक चलेगा पूजा चलेगी संधि पूजा होगी कुमारी पूजा होगी फिर वह विसर्जन होगा ये एक के बाद एक यह जो ट्रेडिशनल वे में बेलूर मठ में दुर्गा पूजा होती है उसको पहली बार जब मैंने देखा था मैं जब पीपीटीसी में था ट वाज द इवेंट ऑफ माय लाइफ मैंने जब अभी तक तो मैंने बहुत सारी दुर्गा पूजा बाद में देख ली है मैं तो ट्रेनिंग सेंटर में भी दो साल था फिर बाद में चार साल मेरा बेलूरमठ में पोस्टिंग था कंप्लीट वर्क्स प्रोजेक्ट के ऊपर में काम करने के लिए तो बहुत बार दुर्गा पूजा देखने का चांस मिला है ठाकुर ने मुझे कृपा करके वह अपॉर्चुनिटी दी है किंतु द फर्स्ट टाइम आई स्टिल रिमेंबर मैं जब भी आंख बंद करके सोचता हूं दुर्गा पूजा तो मैं बिल्कुल नया आया हुआ ब्रह्मचारी एक दो एक दो महीने ही हुए थे और वह जो मैंने दुर्गा पूजा का जो आनंद लिया था दैट वाज स्टिल फ्रेश इन माय माइंड वो हमेशा के लिए दुर्गा पूजा बोलकर के वो फर्स्ट दुर्गा पूजा ही मेरे मरण में मेरी स्मृति में रहेगी तो आज से फिर कल से एक के बाद एक कार्यक्रम बेलूर मठ में चालू होंगे जो जिनको देखने का मौका मिलेगा दे आर वेरी फॉर्चूनेटली बार वो देखने का मौका मिलेगा दे दे आर इवन ग्रेटर फॉर्चून दे हैव गट क्योंकि ये एक बंगोल में जन्म नहीं लेने का ये एक मैं कहूंगा कि एक गुड फॉर्च्यून यह है कि बंगोल के के जो सेलिब्रेशंस है बड़े होकर के जब एक एक लेवल की हमारी अंडरस्टैंडिंग हो जाती है तब एक बिल्कुल नया फ्रेश एक्सपीरियंस होता है तब हमारा माइंड जो है उसको ग्रहण करने के लिए रेडी रहता है ये बात शायद मुझे लगता है कि स्वामी जी को अमेरिका में जो ये वेलकम मिला उसके पीछे में भी शायद ये एक रीजन हो सकता है इंडिया पूरा वैसे ही ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या इसके नारों से गूंज रहा है तो स्वामी जी क्या कहते हैं उसमें नया क्या है जबकि वो एक मटेरियल िक सिविलाइजेशन थी अमेरिका की वे लोग एक इंटेलेक्चुअल मैच्योरिटी को पहुंच गए थे स्वामी जी ने क्या कहा था कि भोग के चुड़ा पे ये लोग बैठे हैं अर्थात कि मटेरियल ज्म के हाईएस्ट लेवल पे ये लोग बैठे हैं उनका माइंड जो है इट इज नाउ ओपन टू रिसीव सब्लाइम आइडियाज तो जब स्वामी जी ने ब्रदर्स एंड सिस्टर्स ऑफ अमेरिका कहा ना वो फट करके सबने उनको सर पर बिठा लिया तो मुझे लगता है कि ये सेम थिरी यहां पे काम कर रही है हम लोग यहां पे वो गुजरात में एक पूरे डिफरेंट कल्चर में बने बड़े हुए हैं हमारे लोगों का वैसे मैं इतना कोई ज्यादा मटेरियल िक नहीं था किंतु फिर भी तो संसार से आते हैं साधु समाज में प्रवेश करते हैं तो एक पूरा एक डिफरेंट लाइफ हम देखते हैं तो वह पहला ही जो एक्सपीरियंस इट वास सो ग्रेट कि और पता है मुझे लगता है कि अपने ऑर्डर में इस तरह की दुर्गा पूजा के रिलेटेड दोही सेलिब्रेशन है जो इसकी क में आ सकते हैं इन इट्स स्केल माने मतलब डिवाइन और वो उ डिविल की बात कर रहा हूं तो स्केल में जद देखे तो दुर्गा पूजा है एक तो कुमारी पूजा सबसे एक एक आएगा कुमारी पूजा दूसरा आएगा वो कल्पतरु सव काशीपुर में और तीसरा आएगा ठाकुर का तिथि पूजा जब होता है तब पब्लिक सेलिब्रेशन होता है फर्स्ट संडे आफ्टर द तिथि पूजा तिथि पूजा के बाद का जो पहला संडे है पहला रविवार है वो वो पब्लिक सेलिब्रेशन होता है तो तीन जो हमारे उत्सव है दे आर द ग्रेटेस्ट इन इन स्केल नॉट मने दिव्यता तो क्या होता है कि हृदय के भीतर में से आती है जब पुजारी महाराज पूजा करते हैं देखिए यदि हम इस तरह के जद देखे कि आनंद कब आता है तो जैसे कि पेंडल में जो ये हो रहा है काली कीर्तन उससे ज्यादा आनंद जब आया जब हम सिर्फ साधु ब्रह्मचारी लोग काली कीर्तन कर रहे थे तो वैसे ही पूजा मैंने सबसे ज्यादा एंजॉय कब किया है राजा महाराज की तिथि पूजा के दिन जब पूजा होती है तब राजा महाराज के मंदिर के सामने समाधि मंदिर के सामने एक पेंडल लगाया जाता है और वहां पर सुबह को वह चैटिंग वगैरह होता है अभी देखिए ठाकुर महा स्वामी जी तो फिर भी पॉपुलर है उनकी तिथि पूजा होने से ही भीड़ तो लग जाती है राजा महाराज तो इतने बंगोल के बाहर या तो इवन आउट ऑफ अवर डिवोटा सर्कल इतने पॉपुलर नहीं है तो वो जब सुबह को जो चैटिंग होता था तब यहां पर मतलब इस तरह का माहौल है कि वहां पर वो झाड़ू भी लगा रहा है पास में वो हमारा वर्कर और यहां पर हम लोग कुछ साधु ब्रह्मचारी बैठ कर के चैटिंग कर रहे हैं तो उस वो जो आनंद है कि एकदम स्मॉल एसेंबली हो बहुत ही कम लोग हो फुल्ली डेडिकेटेड हो गाने का जो स्तोत्र का पाठ हो रहा है उसका बहुत ही अच्छा अभ्यास हो तो जब चैटिंग होता है तो एकदम परफेक्ट उसका हार्मोनाइजेशन होता है परफेक्ट उसका ताल बद्ध होता हो होती है और गंगा का किनारा है अर्ली मॉर्निंग सुबह का वातावरण है ठाकुर की मंगल आरती के बाद में ही हम लोग सीधा वहां पर चले आते थे ये तीनों सभी तिथि पूजा में होता है समाधि मंदिर जितने भी है राजा महाराज के मां के और स्वामी जी के तो तीनों की तिथि पूजा के दिन सुबह को जब ठाकुर की मंगल आरती होगी बाद में हम सब साधु ब्रह्मचारी वहां पर उनके मंदिर के सामने आएंगे समाधि मंदिर के सामने वहां पर पैडो लगा होता है वहां पर बैठेंगे वहां पे दूसरी मंगलारती होगी फिर वो स्वामी जी की या तो मां की या तो राजा महाराज की और फिर हम वहां पर बाहर में बैठ कर के वो सब चैटिंग करेंगे बाद में तो वो जो माहौल है वो मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है कि यदि पूजा का एंजॉयमेंट कब होना है तो सिर्फ साधु ब्रह्मचारी है और कुछ ही है और फिर वहां पर एकदम शांत और निस्तब्धता है और मने क्या है एक सॉलिट्यूड होता है तब एक मेरा मन अंतर्मुखी वन टाइप ऑफ एंजॉयमेंट एंड अनदर टाइप ऑफ एंजॉयमेंट इज इन द स्केल तो स्केल की दृष्टि से देखा जाए तो मैंने देखा जो मेरा खुद का एक्सपीरियंस है वो है कुमारी पूजा दूसरा है कि यह पब्लिक सेलिब्रेशन द फर्स्ट संडे आफ्टर ठाकुर तिथि पूजा और यह कल्प तर उत्सव माने इतना विराट व मतलब माहौल बनता है इतने हजारों हजारों लोग आते हैं मैं मुझे पहली बार मैं तो पीपीडी से और मेरा गुड फॉर्च्यून था कि जनरली क्या होता है कि जो लोग मान लीजिए कि फेब्रुअरी मार्च महीने में जॉइन करते हैं तो उस समय तो सभी हमारे यदि आपने हमारा तिथि पूजा का कैलेंडर देखा होगा तो आपको पता होगा कि हमारे जितने भी उत्सव है ये बड़े-बड़े उत्सव जिसको कहेंगे तो दुर्गा पूजा काली पूजा फिर मां की तिथि पूजा स्वामी जी की तिथि पूजा फिर महाशिवरात्रि और ठाकुर की तिथि पूजा सब वो कुछ ही महीनों के भीतर में वो आ जाता है अक्टूबर नवंबर डिस जनवरी फेब्रुअरी मार्च इन जनरल तो जो लोग मार्च के बाद में जॉइन करते हैं उन लोगों में पीपीटीसी की बात कर रहा हूं खास करके बेलर मट की तो उन लोगों के साथ में क्या होता है कि यह बड़े-बड़े उत्सव स्टार्ट होने से पहले ही उनका पोस्टिंग कहीं पर हो जाता है तो मुझे तो यह सब पता नहीं था मैं जब आया था ठाकुर की कृपा देखिए कि उसी टाइम आया था जब यह बड़े उत्सव स्टार्ट होने वाले थे तो मैं जुलाई के आसपास में कहीं पर आया होंगा और ठाकुर की कृपा से जितने भी बड़े उत्सव सब थे वो सब मैंने पहली बार बेलूरमठ में देखने का मुझे सभागार में वगैरह में नहीं जाता था और गुजरात में मैं रहता था किंतु राजकोट आश्रम में तो मेरा जब मैं पोस्टिंग हुआ गुजरात में तब मैं पहली बार राजकोट में आया था तो ऐसे बड़े उत्सव तो मैंने अपने ऑर्डर में देखे ही नहीं थे और वो भी हमको एज ए इनसाइडर पार्टिसिपेट करना वाज अ मच ग्रेटर कि जहां पे होलिस्टन पे वो जो होता है पूजा होती है जहां पे यह सब होता है चैटिंग सबसे पहले जाकर के बैठने का हमको मौका मिलता है तो एक के बाद एक सब उत्सव मैंने अपनी आंखों से देखे एंजॉय किया दुर्गा पूजा काली पूजा उसके बाद में मां की तिथि पूजा स्वामी जी की तिथि पूजा महाशिवरात्रि ठाकुर की तिथि पूजा और बाद में मेरा पोस्टिंग हुआ था तो अभी भी जब भी मुझे सेलिब्रेशन के बारे में मैं सोचता हूं तो मुझे वही याद आता है कि मैं जब बिल्कुल नया आया हुआ था और उस समय जो मैंने एंजॉय किया था अभी वो सेम थिरी फिर फिर से आ जाती है अभी इतना सिचुएशन हो गया सेलिब्रेशन सेलिब्रेशन करते करते कि अभी वो मुझे ऐसा कोई जा कर के बैठने की या फिर वोह भजन में पार्टिसिपेट करने की इच्छा नहीं होती तो यह भी एक बात है कि एक होलीनेस या तो फिर सेलिब्रेशन वगैरह क्या है कि हम लोग किस तरह से उसमें पार्टिसिपेट करते हैं हम लोगों का माइंड सेट क्या है उस समय का ट मैटर्स अ लॉट मेरा अभी का जो माइंड सेट है मेरा रूम है तो मंदिर के पास में ही है तो वहां पर वो भजन कीर्तन अभी काली कीर्तन चल रहा है व यहां पर भी यहां पर भी वो ब्रह्मचार्य की प्रैक्टिस के लिए एक महीने आगे से ना कि दो-तीन सप्ताह आगे से वह काली कीर्तन का प्रैक्टिस चालू हो गया था किंतु मैं नहीं गया था अपने रूम में बैठता था और सुनता था तो अभी का मेरा है कि जितना भी सेलिब्रेशन होता है आई प्रेफर टू स्टे अलोन अकेले रहना पसंद करता हूं और आंख बंद करके अकेले अकेले बैठे रहने का वो मैं ज्यादा करता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि जो हाईएस्ट इन सेलिब्रेशन है वह मैंने बेलूर मठ में देख लिया और वह भी ठाकुर की कृपा से ऐसा नहीं कि पूरा माइंड सैचुरेट हो गया था और अच्छा ठीक है अभी तक तो हम जो देख रहे हैं दुर्गा पूजा वही दुर्गा पूजा थोड़ा बड़े स्केल में है थोड़े से मोर डिवाइन लेवल पे है ऐसा नहीं कुछ नहीं था और सडन द हाईएस्ट ऑफ द सेलिब्रेशंस बेस्ट ऑफ द सेलिब्रेशंस वो देखने का मौका मिल गया तो दैट वाज अ ग्रेट गुड फॉर्च्यून ऑफ माइन और मैंने सोचा कि इसके बारे में बात करके थोड़ा सा शुरुआत करते
ईश्वर के बारे में हमारी अवधारणा की उत्क्रांती
हैं तो कॉस्मो मैक्रो कजम हम लोग इसके बारे में बात कर रहे थे और देख रहे थे कि किस तरह से स्टेप बाय स्टेप स्वामी जी एक के बाद एक इन लोगों के पॉइंट्स वो खुद उपस्प्रिंग इफ दैट इज सो टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक मैन एट द अदर एंड दिस होल सीरीज इज वन लाइफ यह जो सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म से परफेक्ट मैन तक की यह जो पूरी सीरीज है पूरा प्रवाह है इसको एक जीवन के रूप में देखो और यहां पर वेदांत का प्रारंभ होता है ज कि मटेरियल िक थ थिरी है उसके ऊपर में किस तरह से देखिए ये मैंने कल भी कहा था कि इवोल्यूशन ऑफ गॉड स्वामी जी का एक है बड़ा ही डेरिंग कांसेप्ट है आजकल हमको ईश्वर के बारे में भगवान के बारे में कुछ भी बोलना है बड़ा सोच समझ करके बोलना पड़ता है मैंने आई डोंट नो कि किस तरह का यह प्रोग्रेस है किंतु स्वामी जी के समय में खास करके और खास करके यह यूरोप अमेरिका में एक ऐसा एक माहौल था कि देयर वाज एन एटमॉस्फियर ऑफ फ्री इंक्वायरी आप किसी भी होलिस्टन सेप्ट है उसके ऊपर में आप क्वेश्चन कर सकते हैं उसको क्रिटिसाइज कर सकते हैं आज आपको थोड़ा सोचना पड़ेगा किंतु उस समय स्वामी जी ने जिस तरह से हमको बताया कि व्हिच आर अवर मोस्ट चेरिश्ड आइडियाज हमारे सबसे प्रिय आइडियाज जो है हमारे सबसे प्रिय थिरी जो है उसको भी क्वेश्चन करना ना भूले तो एक के बाद एक उन्होंने खास करके इवोल्यूशन ऑफ गड का जो कांसेप्ट है कि किस तरह से हमारी सबसे पहली पहला जो आइडिया था कि एक ऐसा ईश्वर जो कि घमंडी भी है स्वार्थी भी है और वो जो हमसे सतत सैक्रिफाइस मांगता रहता है और यदि उसको सैक्रिफाइस नहीं देंगे तो नाराज होकर के किस तरह का कहर हमारे ऊपर में बरसाए ना ही बारिश ले आएगा ना कि वोह क्या वो फ्लड ले आएगा ना कि फेमिन ले आएगा क्या करेगा हमको सतत उसके डर में रहना पड़ता है तो जो भय देता है वो कहर बरसाता है एक ऐसे ईश्वर से प्रारंभ करके प्रेममय ईश्वर और फिर ईश्वर बाहर में क्यों हमारे भीतर में क्यों नहीं चेतन तत्व हमारे भीतर में ही है जिन लोगों ने ध्यान धारणा तपस्या साधना करके मेडिटेशन करके जब अपने हृदय की गहराइयों में डुबकी लगाई हमारे ऋषि मुनियों ने तब उन्होंने पाया कि चेतना का महासागर चेतन तत्व का महासागर तो हमारे हृदय में ही उछल रहा है सुनामी की तरह उसके वेव हमारे हृदय की दीवारो प ही टकरा रहे हैं तो क्यों हम किसी ईश्वर को बाहर खोजने को जाएंगे दैट वास अनदर ग्रेट इवोल्यूशनरी स्टेप और वहां से देखा कि जिस चेतन तत्व को पुरुष जिसको कि संज्ञा दी अभी आप कह सकते हैं कि पुरुष ही क्यों कहा स्त्री क्यों नहीं कहा प्रकृति को स्त्री की उपमा दी है पुरुष को चेतन तत्व को पुरुष की तो क्या यह मतलब उस समय के वो पिकलि आइडियाज तो जो भी है आजकल के हमारी जो थिंकिंग है उससे हमको यह सब प्रश्न होते हैं तो ठीक है वो समय अलग था आज का समय अलग है तो यह पुरुष रूप में जिसको पहचाना गया वह चेतन तत्व देखेंगे कि पूरे विश्व ब्रह्मांड का जो अल्टीमेट चेतन तत्व है दे आर सिमिलर अहम ब्रह्मा स्मी तत्वम असी प्रज्ञान ब्रह्मा दिस वाज द अल्टीमेट इन दी स्पिरिचुअल रियलाइफ इन एनी रिलीजियस फिलोसोफी तो यह जो इवोल्यूशनरी आइडियाज का डेवलपमेंट हुआ है स्वामी जी इसी इवोल्यूशनरी चेन को यहां पर मटेरियल साइंस मटेरियल फिलोसोफी के साथ में कंबाइन करते हैं वहां पर उन्होंने स्पिरिचुअल फिलोसोफी को लक्ष्य करके बताया कि किस तरह से गड ईश्वर के संबंध में हमारे कांसेप्ट हमारी हमारे आइडियाज डेवलप हुए यहां पर स्वामी जी मटेरियल साइंस को आधार बना कर के कह रहे हैं कि यदि आपने ऑलरेडी यहां तक तो स्वीकार कर दिया है कि विश्व ब्रह्मांड जो है वो एक छोटे से एक प्रोटोप्लास्मिक कहो ना कि एक क्वांटम फ्लक्ट एशन कहो जद मॉडर्न लैंग्वेज यूज की जाए तो क्वांटम फ्लक्ट एशन में से बिग बैंग हुआ आज का इतना 12 बिलियन कि 15 बिलियन लाइट इयर्स जिसको कि विजिबल यूनिवर्स कहते हैं उसको भी कहते हैं विजिबल यूनिवर्स नॉट डी यूनिवर्स एक्चुअल यूनिवर्स देखा जाए तो कितना बड़ा है हमको पता नहीं किंतु हमारे दूरबीन से टेलिस्कोप से जितना दिखता है वह इतना है ऑलमोस्ट 15 बिलियन लाइट यर्स उसकी यह परिधि है उसका यह रे रे रेडियस है तो यह यह जद आप स्वीकार करते हैं यदि आप यह स्वीकार करते हैं कि सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट में से जो आज का मनुष्य परफेक्ट मैन इन लोगों की परफेक्ट परफेक्ट मैन की लैंग्वेज में कहा जाए तो जीसस क्राइस्ट और अल्बर्ट आइंस्टाइन और हम हम किसको परफेक्ट कहेंगे तो भगवान राम भगवान कृष्ण भगवान राम कृष्ण भगवान बुद्ध तो यह परफेक्ट मैन की हमारी जो भी डेफिनेशन है वहां तक आते-आते जो पूरी इवोल्यूशनरी चेन है ट्रीट इट एज वन लाइफ उसको अद्वैत के रूप में देखि अद्वैत शब्द यूज नहीं किया है किंतु यह कांसेप्ट का प्रारंभ यहां पर हो चुका है आगे स्वामी जी क्या कहते हैं देयर फॉर द प्रोटोप्लास्मिक वजह से नदी का पानी या समुंदर का पानी वाष्प भवन होकर के वाष्प भूत होकर के बादल में प्रवेश करता है आखिर वो बादल में से पानी बरस करके फिर वह फिर से नदी और समुंदर को भरपूर करेगा किंतु बादल को यदि कहा जाए कि बादल उसका फादर है इसका पिता है नदी या समुंदर का तो कहा जाएगा कि बादल कहां से आता है तो इसी समुंदर और इसी नदी में से तो बादल बनते हैं तो जो फादर है ही गिव्स बर्थ टू सन एंड द सन इन टर्न इवोल्व डेवलप्स इनटू अनदर फादर तो ये जो चेन है देयर फॉर द प्रोटोप्लास्मिक एक सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म जो है वह जो कि हाईएस्ट इंटेलिजेंस है उसके बीज स्वरूप है उसके उसका बीज होकर के यह सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म आया था यू मे नॉट सी इट बट दैट इवॉल्वड इंटेलिजेंस इज व्ट इज अन क्लिंग इट सेल्फ अंट्स मेनिफेस्टेड इन द मोस्ट परफेक्ट मैन आपको शायद ये नहीं दिखेगा किंतु वो इवॉल्वड इंटेलिजेंस यानी कि हाईएस्ट इंटेलिजेंस का जो बीज बना वही बीज अन कोइलिया ने वर्ड यूज किया है अन कोइलिया कोइल करना यानी कि किसी की चीज के आसपास में उसको घुमाना और अन कोइल करना यानी कि घुमाई हुई चीज को वापस उसको अनरोल करना तो ये अनरोलिंग कह सकते हैं दूसरी लैंग्वेज में तो ये अन कोइल हो रहा है जैसे कि डीएनए में से बच्चे का जन्म होता है अभी स्वामी जी ने कहा यहां पे कहा है कि आपको नहीं दिखता किंतु इसमें से इस तरह से होता है अभी यह उनके समय में था आज के समय में बिकॉज कि यह टाइम लैप्स फोटोग्राफी है यह बाइन कुलर्स है यह दूरबीन है इस सब की मदद से हम लोग सब कुछ देख सकते हैं जैसे कि मैंने कहा था कुछ दिनों पहले कि मैंने एक ऐसा वीडियो देखा था कि एक बीच को मिट्टी में डाला फिर बीच के पास में काच रख दिया है और काच के सामने एक कैमरा रख दिया है और टाइम लैप्स फोटोग्राफी की है एवरी एक फोटो लेते हैं और फिर पूरा 5 मिनट में वो सीड में से बीज में से कैसे पौधा बना वो दिखाते हैं तो देख कर के हमको लगता है अच्छा तो धीरे-धीरे करके बीज जो है उसमें उसके उसका जो आउटर लेयर है उसका दो टुकड़ा होगा उसमें से ग्रीन शूट्स जो है वो निकलेंगे एक शूट नीचे जाएगा जड़ के रूप में दूसरा शूट ऊपर जाएगा उसकी उसके पौधे के रूप में व पौधे में से थोड़ा सा एक छोटा सा एक पत्ता निकलेगा फिर वो प पता जमीन मिट्टी को काट कर मिट्टी में से निकल कर के ऊपर में आएगा अभी हमको लगेगा कि हमने बीज बोया है उसके एक सप्ताह बाद में कि इतने के कुछ बाद में यह पौधा निकला किंतु ऐसा नहीं है बोने के साथ में ही प्रोसेस स्टार्ट हो गया है किंतु जो प्रोसेस है वो मिट्टी के अंदर था किंतु आज के साइंस के लिए सब कुछ विजिबल है तो यहां पर स्वामी जी ने कहा है कि हमको शायद नहीं दिखेगा कि यह बीच में से यह पूरा विश्व ब्रह्मांड आया है किंतु यह बीज में से कोई भी चीज प्रकट होती है इवन बच्चे का गर्भ के भीतर में कैमरा रख कर के इन्होंने यह टाइम लैप्स फोटोग्राफी ली है वो भी मैंने देखा है कि किस तरह से सिंगल सेल मल्टीप्लाई होते होते पूरा एक डेवलप होता है किस तरह से फेटसू बच्चे को बच्चा भी नहीं बच्चे के पूर्वरूप को फिटस कहते हैं तो फिटस डेवलप होता है और उसमें से बच्चा प्रकट होता है छोटा बच्चा तो यह पूरा टाइमलेप्स फोटोग्राफी तो हम सबने देखा है तो स्वामी जी कहते हैं है कि आपको शायद नहीं दिखेगा किंतु बीच में से यह सब कुछ प्रकट हुआ है य उनके समय था आजकल हमको एटलीस्ट साइंटिफिक एविडेंस तो बड़ा ही क्लियर है कि बीच के भीतर में से कोई भी वटवृक्ष है या तो कुछ भी है व प्रकट होता है इन द केस ऑफ ह्यूमन वो डी डीएनए में से यह सब कुछ होता है अभी देखिए स्वामी जी के पास वो लैंग्वेज नहीं थी स्वामी जी के पास में आज की जो साइंटिफिक क्लेरिटी है वह भी नहीं थी किंतु फिर भी कितना एक्युरेटली वो जो फिनोमिना डिस्क्राइब करते हैं कि उसमें कहीं पर भी गलती रहने की संभावना नहीं होती है अदर वाइज मैं इन जनरल कभी-कभी ऐसा होता है कि दूसरे दूसरे कोई फिलोसोफर को मैं पढ़ता हूं स्वामी जी के जो कि समकालीन थे मैं नाम नहीं देना चाहता तो कभी-कभी मैं उनकी किताबें पढ़ता हूं तो आज इतनी आउटडेटेड लगती है उस समय उनको जो भी सुनते होंगे उनको बड़ा ही मतलब स्टाइलिश ट्रेंडी और मॉडर्न लगता होगा किंतु आज कंपलीटली आउटडेटेड लगता है क्योंकि आज हमारी क्लेरिटी ऑफ कांसेप्ट रिगार्डिंग दिस नेचर रिगार्डिंग साइंस रिगार्डिंग फिलोसोफी इ मच बेटर देन व्ट वाज एट दैट टाइम किंतु स्वामी जी को कभी भी आप पढ़िए उतने ही फ्रेश लगते हैं उनके अभी उनके पास में सेम वर्ड्स नहीं है उनके पास में जेनेटिक्स और डीएनए का कोई आईडिया नहीं है यह क्वांटम डायनेमिक्स थिरी ऑफ रिलेटिविटी बिग बैंग ये एक्सपेंडिंग कॉस्मो यह सब आइडियाज उनके पास में नहीं थे किंतु फिर भी वो जो फिनोमिना डिस्क्राइब करते हैं उसको हम बड़ी ही इजली आज की मॉडर्न ल में ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं बड़ी ही इजली हमको इनको मॉडर्न लैंग्वेज में एक्सप्लेन कर सकते हैं तो यू मे नॉट सी इट आपको शायद यह नहीं दिखेगा बट ट इवोल्व इंटेलिजेंस व जो महत्व में से जो बीज बना इस व्ट इज अन कोलिंग इट सेल्फ वह बीज ही धीरे-धीरे करके अन कोइल हो रहा है अनरोल हो रहा है अंट्स मेनिफेस्टेड इन द मोस्ट परफेक्ट मैन वो अनरोल होता होता अनकल होता होता प्रकट होता होता आखिर में मोस्ट परफेक्ट मैन के स्वरूप में वोह उपस्थित होता है सबसे जो कि पुरुषोत्तम जिसको कहेंगे उस रूप में वह प्रकट होता है दैट कैन बी मैथमेटिकली डेमोंस्ट्रेटेड अभी देखिए स्वामी जी मैथमेटिक्स और फिजिक्स को यहां पे कुछ समय के लिए ले आएंगे अभी उनका मैथमेटिक्स और फिजिक्स उनकी लैंग्वेज में या तो उनके समय की दृष्टि से देखेंगे तो उस समय भी इतने ही एक्यूरेट थे जितने कि आज हमारी जो अंडरस्टैंडिंग ऑफ फिजिक्स एंड क्वांटम डायनेमिक्स है वो आज भी इतने ही एक्यूरेट है हालांकि जो कि बॉर्डरलाइन फिजिक्स जिसको कहते हैं कटिंग एज फिजिक्स वो बड़ा ही डिफरेंट है बड़ा ही वियर्ड है बड़ा ही स्ट्रेंज है तो पहले स्वामी जी की एक्सप्लेनेशन पढ़ लेते हैं फिर हम देखेंगे कि आज की मॉडर्न दृष्टि तक में व कहां तक वो ठीक रहती है इफ द लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी इज ट्रू कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी का नियम जदी सही है कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी क्या कहती है यह थर्मोडायनेमिक्स का सर्वप्रथम लॉ है इसके अनुसार जो भी एनर्जी है इस विश्व ब्रह्मांड में वह एक ही है उसकी मात्रा नहीं कम होती नहीं ज्यादा होती कंजर्वेशन यानी कि एक समान रहती है मुझे अभी कंजर्वेशन का एग्जैक्ट हिंदी शब्द सोचना होगा अभी ऐसा होता है कि इंग्लिश के इतने सारे शब्द हमारी डे टू डे वोकेबुलेरियो गु गुजराती रहना है ट्रांसलेशन करना है कुछ भी लिखना है तो मैं फिर कोई भी बोलूंगा कि मैं अपनी लैंग्वेज में बोल दूंगा खिचड़ी लैंग्वेज में कि ऐसा ऐसा लिखो फिर वो हमारा ऑपरेटर बोलेगा महाराज ये तो इंग्लिश शब्द है ये हिंदी शब्द है इसका गुजराती अब मैं भी एकदम बड़ा ही टेंशन में आ जाओ अरे भाई इसका गुजराती में कहां से खोजू डिक्शनरी है डिक्शनरी खोलने से मुझे जो शब्द मिलता है वो गुजराती शब्द मुझे नहीं समझ में आता फिर मैं किस तरह से अपेक्षा रखूं कि मेरे रीडर्स को समझ में आएगा इंग्लिश शब्द मुझे समझ में आ जाता गुजराती शब्द मुझे समझ में नहीं आता है तो यह मुझे लगता है कि आजकल जनरली सभी लोगों की यह समस्या होगी कि बिकॉज कि ये सोशल मीडिया है यह मास कम्युनिकेशन के जो साधन है ये हम सबकी लैंग्वेज धीरे-धीरे करके इतनी वो मिक्स हो जाती है कि प्योर एक लैंग्वेज में बोलना संभव नहीं जैसे कि मैंने कहा अन कोइलिया गया कि क्या कहना चाहते हैं किंतु अभी मैं कैसे उसका हिंदी करूं मुझे एक बार साथ में हिंदी किताब लेकर के बैठना होगा जिससे कि कि मैं साथ में इस इली हिंदी शब्द में बोल पाऊं क्योंकि तो यहां पे कहते हैं कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी एनर्जी का जो प्रमाण है वह सब समय समान रहता है स्वामी जी इसको आगे समझाते हैं यू कैन नॉट गेट एनीथिंग आउट ऑफ ए मशीन अं अनलेस यू पुट इट इन देयर फर्स्ट कोई भी एक मशीन है उसमें जितनी भी एनर्जी आप डालेंगे उसमें से उतनी ही एनर्जी बाहर आएगी यदि थोड़ी सी मॉडर्न लंग यूज की जाए तो इनपुट जो है और जो आउटपुट है वह सिमिलर रहता है हालांकि बीच में प्रोसेस होता है इनपुट ट्रांसफॉर्म होता है चेंज होता है और कोई अलग स्वरूप धारण करता है किंतु आउटपुट जो होगा वह अल्टीमेटली इनपुट के इक्वल होगा जितना एनर्जी डालेंगे किसी एक इंजन के भीतर में उतना ही एनर्जी बाहर आएगा अमाउंट ऑफ वर्क दैट यू पुट ट यू गेट आउट ऑफ एन एंजन इज एक्जेक्टली द सेम एज यू हैव पुट इनटू इट इन द फॉर्म ऑफ वाटर एंड कोल नादर मोर नोर लेस किसी भी एक द अमाउंट ऑफ वर्क दैट यू गेट आउट ऑफ एन इंजन कोई भी एक इंजन है उसके भीतर में से जो वर्क यानी कि जो कार्य आपको मिलता है ट इन द फॉम गेट इ एगजैक्टली द सेम एज यू हैव पुट इट इन द फॉर्म ऑफ वाटर एंड कोल कोई भी इंजन के भीतर में से जो कार्य आपको मिलता है वो इतना ही है जितना में पानी और कोल कोल यानी कि कोयला ये कोयला और पानी इसके भीतर में जितना रखते हैं उसमें से जो एनर्जी मिलती है इतना ही कार्य आपको उस इंजन में से मिलता है नादर मोर नोर लेस ज्यादा भी नहीं कम भी नहीं देखिए इसको थोड़ा सा डिस्कस करते हैं सबसे सिंपल एग्जांपल है बाइसिकल चलाने का मैं मैं बचपन में हमेशा मैं प्रेफर करता था कि मैं साइकिल लेकर सब जगह पर जाऊं मैं अपने क्लास में अपने स्कूल में मेरे पास में वो मोपेड था मुझे पता नहीं आजकल ये लोग मोपेड यूज करते हैं कि नहीं हमारे समय था वो आज स्कूटी जैसा होता है किंतु पहिए थोड़े से बड़े होते हैं उसके तो मैं उसको अवॉइड करता था और साइकिल लेकर सब जगह जाता था वो एक मेरा हैबिट था वो साइकिल चलाने का मुझे बहुत अच्छा लगता था और मेरा क्लास भी जो थे कुछ कुछ क्लास वो क्या है कि मतलब शहर का नाम तो मैं नहीं बताऊंगा किंतु वहां पर क्या है कि एक बहुत बड़ा पैलेस है पैलेस के लगकर के एक बहुत ही सुंदर रास्ता है उसके दोनों ओ बहुत ही सुंदर पेड़ है और उस रास्ते प इतना कोई ज्यादा भीड़भाड़ भी नहीं होता है ट्रैफिक भी नहीं होता है और वो वो रास्ते से मैं जाता था साइकिल लेकर ग और उस रास्ते के एंड पे वो कुछ लाइब्रेरीज थी मेरे कुछ क्लास थे वगैरह वगैरह तो मुझे उस रास्ते से साइकिल चलाते जाना मुझे इतना अच्छा लगता था जैसे कि मेरा मन अंतर्मुखी प चलाता था फुट पाट की साइड प चलाता था रास्ता बहुत चौड़ा था और ट्रैफिक कम होता था और मैं फुट पाट के लग कर के ही पासपास में ही चलाता था तो मेरा मन पूरा अंतर्मुखी निकली वो हाथ पैर काम करते हैं ब्रेक और पेडल और वो स्टीयरिंग वो सब मैकेनिकल काम करते हैं किंतु मन क्योंकि कुदरती सौंदर्य जो होता है ना वो उसकी वजह से ये हमारे मन पे ये असर होती है कि ऑटोमेटिक वो अंतर्मुखी वो बेस्ट मेमोरीज ट के मैं उस रास्ते पर साइकिल चलाकर जाता था और कहीं पर पेड़ की छाया है कहीं पर थोड़ी सी धूप है एकदम चौड़ा सीधा रास्ता था ठाकुर ने खुद कहा एक बार ठाकुर सुबह को मॉर्निंग वक के लिए जाते थे रामलाल दादा के साथ में वो ग्रांड ट्रंक रोड पे तो वहां प जाकर के वो रामलाल दादा को बोलते थे हमारे लिए रामलाल दादा उनके लिए रामलाल उनका भतीजा तो रामलाल देखो जब हम ये सीधे रास्ते से जाते हैं तो मुझे ऐसा उद्दीपन होता है जिस जो कि शुद्ध आदमी है उसका हृदय वो कितना उसके भीतर में जो अंकट बंकट या बंगोली शब्द है वो ट्विस्टेड और वो जैसे टेढा मेड़ा पन जिसके हृदय में होता है तो वो जैसे टेढ़ी मेड़ी गलियों से जाते हैं तो जिसका हृदय लगता है कि किसी का तड़ा मेड़ा है उसका वो ऐसा एक आभास होता है वो सीधे रास्ते से चलते हैं तो जो पवित्र व्यक्ति है उसका हृदय कितना वो एक स्ट्रेट लाइन में चलता है स्ट्रेट लाइन यानी कि ऑनेस्टी और जो भी कहे आप उसको तो मुझ उसका ईश्वर का उद्दीपन हो जाता है तो स मुझे भी कि वो सीधे रास्ते प वो चलता था साइकिल लेकर के दैट वाज वन ऑफ द बेस्ट मेमोरीज ऑफ माय लाइफ तो यहां पे देखिए साइकल इज द बेस्ट एग्जांपल कि आप कितनी एनर्जी उसमें डालते हैं उतनी ही एनर्जी आपको मिलेगी हां फिर वो उस समय ये सब अभी देखिए कि इन्वेंशन भी नई-नई हो रही है गियर की इन्वेंशन हो रही है कि आप एक चक्कर मारेंगे पेडल का तो मतलब बिना गियर की साइकिल आपकी मान लीजिए कि 10 फुट चलने वाली है तो विथ गियर वो 20 फुट चलेगी किंतु कंपैरेटिव आपको जो पेडल लगाने होंगे वो ज थोड़ा सा हार्ड लगाने पड़ेंगे वो थोड़ा सा और एनर्जी उसमें डालनी पड़ेगी इस विश्व ब्रह्मांड विश्व ब्रह्मांड की तो खैर छोड़ दीजिए बात किंतु वो मैं बाद में बताता हूं कि जब तक हमारा प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस जाता है हम लोग जिस जितने भी इंजन हमने बनाए हैं अभी तक ऐसा नहीं हुआ कि हमने जो अमाउंट ऑफ एनर्जी उसमें डाली है उससे ज्यादा एनर्जी हमको मिली है ऐसा कभी भी नहीं होता हां आप लोग कहेंगे कि फिर यह कैसे होता है कि यह डैम है डैम में से हाइड्रोइलेक्ट्रिक एनर्जी हमको मिलती है तो वो जो काइनेटिक एनर्जी है नदी की व पानी के प्रवाह की वो इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट होती है यहां पे स्वामी जी ने वो इंटरनल कंबन इंजन का उदाहरण दिया है कि पानी और कोयला वाटर एंड कोल जितना डालेंगे उतना ही एनर्जी प्रगट होगा और इंटरनल कंबन इंजन उनके समय में ट्रेन चलाया करता था वो रेलगाड़ी च चलाता था या तो फिर ये जो इंडस्ट्रियल मशीन से वो सब चलाया करते थे इंटरनल कंबशन इंजन से आजकल की मॉडर्न इन्वेंशन जो है बैटरी पावर इंजन होते हैं ना कि हाइड्रो हाइड्रोजन सेल्स होते हैं ना कि ये जायरोस्कोप होते हैं को कोई भी अमाउंट ऑफ कोई भी किसी भी मॉडर्न स्टाइल इंजन ले लीजिए या तो आप किसी भी किसी भी एनी टेक एनी प्रोसेस इन द वर्ल्ड जो इलेक्ट्रिसिटी के फॉर्म में या तो कोयले के फॉर्म में या तो न्यूक्लियर रिएक्टर के न्यूक्लियर रिएक्शन के फॉर्म में फ्यूजन एंड फ्यूजन दोनों किस इलेक्ट्रिसिटी के में किसी भी फॉर्म में मैकेनिकल फॉर्म में किसी भी फॉर्म में आप एनर्जी डालेंगे तो जितना एनर्जी हमने डाला उतना ही एनर्जी दूसरे साइड से आउटपुट के रूप में निकलेगा इनपुट और आउटपुट हमेशा समान होगा यह पॉइंट स्वामी जी ने हमको यहां पर बताया इसका और थोड़ा सा डिस्कशन और फिर मॉडर्न इंप्लीकेशन क्या है वह हम थोड़ा कल देखते हैं अच्छा आज तो फ्राइडे कल सैटरडे है तो वैसे भी दुर्गा पूजा है तो भी सैटरडे संडे छुट्टी रख लेते हैं हम मिलेंगे फिर अभी मंडे को ओम शांति शा हरि ओम त श्री राम