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ॐ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः अब ज्ञान योग फिर से करते हैं स्टार्ट थोड़ा डिफिकल्ट है टॉपिक किंतु हमको पता है कि कभी-कभी मैं ऐसा सोचता हूं जब क्लास के समय में कि जैसे बहुत ज्यादा डिफिकल्ट टॉपिक होते हैं बहुत ज्यादा डिफिकल्ट पैसेजेस जहां पर आते हैं उनको क्या स्किप कर देना है कि फिर उसको पढ़ कर के उसके बारे में टेक्निकल डिस्कशन करना ही करना है ऐसा विचार कभी-कभी मेरे मन में आता है किंतु पता है मैं बेलूर मठ में मेरा पोस्टिंग हुआ था कंप्लीट वर्क्स डिपार्टमेंट में वहां पर एक पूरा टीम था उस समय था कि किस तरह से कंप्लीट वर्स को रीऑर्गेनाइज करना है रिअरेंज करना है और उसका थोरो प्रूफ रीडिंग करना है तो यह सब चल रहा था वहां पे तो उस समय मैंने क्या देखा पता है कि स्वामी जी को वैसे तो हम पढ़ते हैं और स्वामी जी के बारे में हमारा एक आईडिया होता भी है कि हां स्वामी जी ने ऐसा कुछ कहा है स्वामी जी वाज अ वेरी पेट्रियोटिक पर्सन व जब अमेरिका गए थे तो इतना बढ़िया सा महल जैसा मकान था उसमें भी वह जब सोने के लिए गए जब वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में सक्सेसफुल हो गए और जब बड़े-बड़े धनपति लोग स्वामी जी से प्रभावित होकर के उनको अपने कम अपने घर में आमंत्रण देते हैं स्वामी जी जाते हैं किंतु उनके घर में जब सोने को जाते हैं तो इतना सुंदर बिस्तर इतना आरामदायक उसके ऊपर नहीं सो कर के जमीन पे सोते हैं क्यों क्योंकि भारत में जो गरीबों की स्थिति है वह उनकी नजर के सामने आ जाती है सोचते हैं कि वे लोग बेचारे ऐसे जीते हैं तो मैं इस तरह से लग्जरी में कैसे रहूंगा तो यह जो एक मेंटल पिक्चर है हम सबके सामने खड़ा होता है मैं भी जब स्कूल में पढ़ता था तो हम लोग स्वामी जी के बारे में क्या जानते हैं तो स्वामी जी जो अमेरिकन ब्रदर्स सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका वह जो संबोधन किया शिकागो जाकर के वह है स्वामी विवेकानंद ऐसा एक वन पैराग्राफ इंट्रोडक्शन अभी मुझे याद है शायद ज्यादा होगा भी सही किंतु इतना तो कुछ याद नहीं किंतु इतना याद है कि भारत को उन्होंने अपना स्वमान फिर से दिलवाया उससे पहले विदेशी लोग भारत को कितनी तुच्छ दृष्टि से देखते थे और स्वामी जी के आने के बाद में हमको फिर से एक सन्मान की नजर से देखने लगे ऐसा कुछ एक स्कूल स्टूडेंट को पढ़ाया जाता है तो स्वामी जी के बारे में हमारे आईडियाज भी कुछ ऐसे हैं पैट्रियोट है और यह जो देशभक्ति सिखाते हैं सेवा योग सिखाते हैं वगैरह वगैरह किंतु जब आप कंप्लीट वर्क डिटेल में पढ़ेंगे तो देखेंगे कि देयर आर सो मेनी एस्पेक्ट्स ऑफ स्वामी जी जिस तरह से स्वामी जी ने ने ठाकुर के बारे में कहा कि 10000 साल की भारतीय साधना का मूर्तिमंत स्वरूप श्री राम कृष्ण है अर्थात की 10000 साल तक हमारे ऋषि मुनि संत महापुरुष अवतार जितनी भी साधनाएं करते आ रहे हैं सब साधनाएं ठाकुर ने अपने एक जीवन काल में कर दी है और उसमें सिद्धि प्राप्त कर ली है तो सेम थिंग कैन बी टोल्ड अबाउट स्वामी विवेकानंद की 10000 साल की हमारी फिलोसॉफिकल डेवलपमेंट है दर्शन शास्त्र का ये जो विकास है वह पूरा विकास पूरा डेवलपमेंट पूरा 10000 साल का भारत का दार्शनिक इतिहास दार्शनिक चिंतन विचारधारा स्वामी जी ने अपने एक जीवन काल में समाप्त कर दिया है उसके बारे में चिंतन करके और उसको आधुनिक मनुष्य के सामने आधुनिक भाषा में रख कर के जिस तरह से शंकराचार्य ने फिर से यह जो उपनिषद थे और ब्रह्मसूत्र था उसका जो पुनरुद्धार किया हालांकि उ निषद तो वैदिक युग में लिख कर के गए थे किंतु बीच में एक ऐसा समय आया कि लोग उपनिषद के प्राण वंत उपदेश को भूल गए और यह कापालिक और यह वो तंत्र साधना और किसकिस तरह की उटपटांग साधना हों में डूब गए यह जो बुद्धिज्म में जो व्यभिचार हुआ उसके बाद की घटना तो फिर से जब उपनिषदों के प्राण वंत अमृतम वो उपदेशों का फिर से शंकराचार्य ने पुनरुद्धार किया तो फिर से भारत का जो पुनरुत्थान स्टार्ट हुआ तो सेम थिंग स्वामी जी ने फिर से किया है कि विदेशी आक्रमण होने के बाद में इस तरह की उटपटांग धारणाएं हमारे मन के भीतर में आ गई कि भारतीय दर्शन शास्त्र की पुनरुत्थान आवश्यक था और इसीलिए जब मैं कंप्लीट वर्क्स एडिट करता था तब मैं देखता था वैसे तो हम पढ़ लेते हैं किंतु जब किसी चीज को एडिट करते हैं आपको एकदम पॉइंट बाय पॉइंट लाइन बाय लाइन वर्ड बाय लाइन वर्ड उसके ऊपर में फोकस करना होता है और मुझे कंप्लीट वर्स एडिट करने का ठाकुर की कृपा से स्वामी जी की कृपा से दो बार मौका मिला एक बार गुजराती में किया और दूसरी बार किया ओरिजिनल इंग्लिश में बेलर मठ में तो फिर मेरा जो एक अंडरस्टैंडिंग डेवलप हुआ कंप्लीट वर्ष के बारे में तो मैं जब यहां पर राजकोट में वापस आया तब मैंने देखा कि स्वामी जी के बारे में जो हम छोटी कंप्लीट वर्क्स में तो वैसे सब कुछ है किंतु ये जो शक्ति दय विचार है या तो फिर ये डिफरेंट अग्नि मंत्र है वगैरह जो किताबें है उसमें स्वामी जी का एक ही एस्पेक्ट हम पब्लिश करते हैं पेट्रियोटिक म या तो फिर ये सेल्फ कॉन्फिडेंस आत्म श्रद्धा स्वामी जी के जो फिलोसॉफिकल आइडियाज है उसको भी इतना ही प्रॉमिनेंस देना चाहिए जितना कि बाकी सब आइडियाज को देते हैं तो हर रोज सुबह को मैं इस तरह के कोटेशन स्वामी जी के कलेक्ट करता था जिसके बारे में बहुत कम लोगों को वैसे जनरली पता होता है और वो पढ़ने के बाद में आपको एकदम एक नया ही आईडिया आएगा अरे आपको प्रश्न होगा कि ये स्वामी जी है इस तरह से स्वामी जी इस तरह की बातें भी की है तो क्या है कि स्वामी जी का एक हिडन एस्पेक्ट लोगों के सामने आए वो एक मेरा हमेशा से प्रयास था तो यहां पर भी जब हम क्लास करते हैं तो मेरा भी यही हमेशा से यह प्रयास होता है कि एक तो है स्वामी जी को जो एक जनरल दृष्टि से जो देखा जाता है स्वामी जी को एक सामान्य नजर से एक समझा जाता है उसके अलावा गोइंग डीपर माने एक गहराई में डुबकी लगाते हैं ना समुंदर में ठाकुर क्या कहते है गहराई में डुबकी लगाने से हमको रत्न प्राप्त होते हैं रत्नाकर के गर्भ में रत्नाकर अर्थात कि समुद्र समुद्र में जितना गहराई में डुबकी मारेंगे उतना ही ज्यादा से ज्यादा मूल्यवान हीरा मोती हमको हीरा तो नहीं तो जमीन में से निकाला जाता है मोती हमको प्राप्त होंगे तो यहां पर भी जितना टेक्निकल डिस्कशन भले ही चाहे हो उसके भीतर में हम जाएंगे जिससे कि हमको स्वामी जी किस तरह से थिंकिंग करते थे स्वामी जी के आइडियाज किस तरह से इवोल्व हुए स्वामी जी ने किस तरह से आज के आधुनिक समय को समझा है उसके बारे में भी हम समझ सके तो आज का जो पैसेज है वैसे ऐसा ही डिफिकल्ट है इसका पट भूमिका या तो फिर बैकग्राउंड क्या है बैकग्राउंड है यह डिस्कशन कॉस्मो माइक्रो कजम लेक्चर के हम पाट कर रहे थे बैकग्राउंड यह है स्वामी जी हमको पुनर्जन्म के बारे में समझाते हैं और एक के बाद एक आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट का दौर यहां पर चलता है स्वामी जी अपने से ही बाकी लोग इस अपनी आर्गुमेंट का क्या विरोध कर सकते हैं वह पॉइंट निकाल कर के स्वामी जी ही पॉइंट या तो फिर एक ऑब्जेक्शन खड़ा करते हैं और उसी ऑब्जेक्शन का अपने से ही उत्तर देते हैं तो एक ऑब्जेक्शन यह खड़ा होता है कि यह आज का जो मॉडर्न इन्हेरिटेंस या तो फिर हेरेडिटरी थिरी है इन्हेरिटेंस नहीं हेरेडिटरी थी थिरी ऑफ हेरेडिटी या तो फिर कहेंगे थय ऑफ जेनेटिक्स जेनेटिक्स थोड़ा सा मॉडर्न शब्द है उस समय ज्यादा पॉपुलर शब्द था हेरेडिटरी या तो ये हेरेडिटरी हेरेडिटी की ये जो थिरी है उसके अनुसार पिता और माता में से जितने भी जो पार्टिकुलर ट्रेट्स या तो पार्टिकुलर गुण है वह बच्चे में आते हैं जैसे कि हमने ऑलरेडी थोड़ा सा डिस्कशन किया था यूरोप में जाएंगे तो ब्लू आई एंड ब्लड हेयर ब्लड अर्थात कि सुनहरे बालों वाले और बुरी नील आंखों वाले बच्चे पुरुष होते हैं वहां पे तो बच्चों के भीतर में भी वह नील आंखें और सुनहरे बाल आते हैं भारत में देखेंगे तो हमारी आंखें काले कलर की या ब्राउन कलर की होती है और बाल जनरली काले कलर के होते हैं तो यहां पर भी बच्चे जब प्रकट पैदा होंगे तो उनके भीतर में भी माता और पिता से वही गुण आते हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि हेरेडिटरी थिरी वाले लोगों का कहना है कि यह जो आपके संस्कार है अच्छे संस्कार या तो बुरे संस्कार यह आप कैसे कह सकते हैं कि एक सूक्ष्म शरीर रहेगा जो कि जन्म जन्मांतर से संस्कारों को वन करेगा आपको यह सब कहने की क्या जरूरत है आप आप यह हेरेडिटरी थिरी को ही ले लीजिए और उसी समय अभी एक पॉइंट यहां पर ऐसा है कि हेरेडिटरी या तो ये जो थिरी है जेनेटिक्स की इसमें एक बहुत बड़ा डेवलपमेंट हुआ था ग्रेगर मेंडेल ने किया था 18657 5 में जद ये ग्रेगर मेंडल का आइडियाज यदि पब्लिश हो गया होता तो स्वामी जी को तो उसके बारे में पता हो होना ही चाहिए क्योंकि स्वामी जी तो काफी कुछ अप टू डेट रहते थे मॉडर्न साइंस और थिंकिंग में किंतु ग्रेगर मेंडेल के बारे में ऐसा है कि उसके आइडियाज वाइड स्प्रेड हुए 1900 में इससे पहले हालांकि 18651 65 में ग्रेगर मेंडेल ने पब्लिश कर दिया किंतु 192 साल तक यानी कि नेक्स्ट 50 इयर्स तक 40 इयर्स तक उसके आइडियाज इतने पॉपुलर नहीं हुए थे तो अभी हमारे सामने एक प्रश्न हो सकता है स्वामी जी जब यहां पे जेनेटिक्स को समझाते हैं तो उनके पास में ग्रेगर मेंडेल के आइडियाज थे कि नहीं मोस्ट प्रोबेबली नहीं होने चाहिए क्योंकि टेक्निकल जनरल जर्नल में पब्लिश हुआ था वाइड स्प्रेड पॉपुलर आइडियाज नहीं थे तो जो भी है उसके बाद में वाटसन एंड क्रिक जिन्होंने की 1955 में 1955 में आज का मॉडर्न डीएनए और आज का मॉडर्न जेनेटिक्स उन्होंने डेवलप किया अ डिस्कवर किया तो वह तो बहुत भविष्य की बात है स्वामी जी जब उनके जो मेंटल बैकग्राउंड है आइडियाज फिलोसोफी का बैकग्राउंड है उस समय जेनेटिक्स के आइडियाज इतने डेवलप नहीं थे इसलिए यह जो एक पूरा पैसेज है बहुत ही टिपिकल है मैं पढ़ लेता हूं एक बार उससे हमको पता चलता है कि स्वामी जी के आइडियाज कहां तक जाते हैं और कहां तक रुक जाते हैं आज का मॉडर्न साइंस इसके बारे में क्या कहता है तो स्वामी जी कहते हैं द सिंपल हेरेडिटरी थिरी टेक फॉर ग्रांटेड द मोस्ट एस्टोनिया थिरी है एक बहुत ही चमक प्रद कंक्लूजन या तो फिर चमक प्रद विचार को बिना किसी प्रूफ के बिना किसी सबूत के स्वीकृत कर लेती है दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन बी रिकॉर्डेड इन मैटर्स दैट मेंटल एक्सपीरियंस कैन बी इवॉल्वड इन मैटर मन के जो एक्सपीरियंस है वह मैटर या तो फिर यह पंचमहाभूत का जो देह है इसके भीतर में यह रिकॉर्ड हो सकता है या तो फिर यह रे पंचमहाभूत के देह के भीतर में इसको कहीं पे स्टोर कर सकते हैं जैसे कि स्वामी जी ने हमको आगे में उदाहरण दिया कि पंखी का बच्चा वैसे जन्म के साथ में ही उड़ना सीखता है बतक का बच्चा हो उसको जद आप पानी में डालेंगे इमीडिएट वह तैरना सीखता है तो यह जो ज जन्म के साथ में ही जो चीज बच्चा सीख के आता है जैसे मृत्यु भय है मृत्यु भय या तो फिर कोई भी इंस्टिंक्टिव एक्शन है जन्म के साथ में ही बच्चे के साथ में प्रकट होती है तो स्वामी जी कहते हैं कि यह जो मानसिक अनुभव है वह क्या अपने देह के भीतर में रिकॉर्ड हो सकते हैं इसके बारे में आपके पास में प्रूफ कहां है अभी देखिए यह सेंटर्स जो है सेंटर्स पढ़ कर के ही पता चलता है कि स्वामी जी को यह ग्रेगो मेंडेल के जो आइडियाज है इसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी जानकारी यदि होती तो वह ऐसा नहीं कहते कि जींस के भीतर में इंस्टिंक्टिव एक्शन स्टोर की जा सकती है अर्थात कि यह जो जेनेट डीएनए जो होता है बच्चे का मां मां और पिता से जो मिलता है उसके भीतर में सिर्फ वह नहीं कि वह लड़का होगा या लड़की होगी उसके बालों का कलर क्या होगा उस के स्किन का कलर क्या होगा उसका जो हेरेडिटरी डिसीज जो है वह उसको मिलेंगे कि नहीं मिलेंगे उसके साथ-साथ में इंस्टिंक्ट भी डीएनए के भीतर में रिकॉर्ड होती है और वही डीएनए के थ्रू ही यह इंस्टिंक्ट बच्चे में ट्रांसमिट होती है यह बात का स्वामी जी को पता नहीं था इसलिए यह जो पूरा पैसेज है इसका आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से थोड़ा सा उसका महत्व कम हो जाता है किंतु फिर भी इसका जो अंडरलाइन अशन है स्वामी जी जो बेसिक पॉइंट प्रूव करना चाहते हैं कि हमारे संस्कार है संस्कार वह डीएनए के माध्यम से नहीं आएंगे वह सूक्ष्म शरीर के माध्यम से ही आएंगे यह जो स्वामी जी का बेसिक पॉइंट है वह तो प्रूव होता ही होता है इसलिए हम आगे पढ़ते हैं व्हेन आई लुक एट यू इन द लेक ऑफ माय माइंड देर इज अ वेव मैं जद आपके सामने देखता हूं तो मेरे मानस सरोवर में एक तरंग उठती है दैट वेव सबसाइड बट इट रि नस इन फाइन फॉर्म एज एन इंप्रेशन तरंग तो मिट जाएगी किंतु तरंग उत्पन्न हुई थी इसके बारे में एक सूक्ष्म इंप्रेशन संस्कार रह जाएगा वी अंडरस्टैंड अ फिजिकल इंप्रेशन रिमेनिंग इन द बॉडी हम लोगों को यह तो समझ में आता है कि कोई शारीरिक क्षमता शरीर के भीतर रह जाएगी जैसे कि पिता के भीतर में शारीरिक शक्ति ज्यादा है तो बच्चा थोड़ा सा मजबूत जन्म लेगा फिजिकल स्ट्रेंथ उसमें ज्यादा होगी और पिता के भीतर में मान लीजिए कि ऐसी कोई हेरेडिटरी डिसीज है जैसे कि मान लीजिए हेरेडिटरी क्या होता है फॉर एग्जांपल हाई डायबिटीज मान लीजिए फॉर एग्जांपल मुझे पता नहीं कि डायबिटीज हेरेडिटरी है कि नहीं तो फॉर एग्जांपल मैं बता रहा हूं मान लीजिए कि पिता के भीतर में डायबिटीज है तो बच्चे के भीतर में ये फिजिकल डायबिटीज जो फिजिकल ट्रेट है वो आएगा क्योंकि शरीर के वो शरीर का गुणधर्म है जबकि वो मन का गुणधर्म है तो मन का गुणधर्म जन्म के साथ में नहीं आएगा किंतु शरीर का गुणधर्म आएगा अर्थात कि स्वामी जी क्या कहते हैं कि यदि मैं आपके सामने देखता हूं और आपके सामने देख कर के आपके बारे में मेरे मन में एक इंप्रेशन हुई कड़ी कि अच्छा यह यह सज्जन जो है बड़े ही सुसंस्कृत दिखते हैं अच्छे कपड़े पहने हैं अर्थात कि ये अच्छे मने पढ़ाई लिखाई उन्होंने की होगी जबकि यह एक आदमी है थोड़ा मजदूर जैसा लगता है वो कपड़े भी उसके अच्छे नहीं है यानी कि वो कोई लेबर वर्क करता होगा किसी को भी देख कर के कोई भी एक इंप्रेशन अपने माइंड में जन्म लेती है अभी ये इंप्रेशन डीएनए के थ्रू कैसे जाएगी वो तो मेरे मन में ही रहती है वो जाएगा डीएनए के थ्रू जो कि मेरे शरीर के साथ में संबंधित है मेरे में यदि हाई डायबिटीज है तो मेरे बच्चे में शायद ये रेडिट जाएगा मेरी आंखों का कलर यदि ब्लू है या ग्रीन है तो मेरे बच्चे के भीतर में वह ग्रीन या ब्लू आंखों का कलर जाएगा अर्थात कि मैं अपने बच्चे को क्या ट्रांसमिट करूंगा मेरे जो विचार है यह कंप्लीट वर्ष का मैंने स्टडी किया यह स्टडी में थोड़ी ना डीएनए के थ्रू मेरे बच्चे में जाने वाला है हो सकता है कि वह एकदम मूर्ख साबित हो पिता कॉलेज के प्रोफेसर है और बच्चा मूर्ख है ऐसा भी तो हो सकता है पिता का जो स्टडी है वह तो बच्चे के भीतर में नहीं जाएगा पिता की जो फिजिकल ट्रेट है शारीरिक क्षमताएं हैं वह बच्चे में जाएगी बट व्हाट प्रूफ इज देयर फॉर एजूमिन दैट मेंटल इंप्रेशन कैन रिमन इन द बॉडी सिंस द बॉडी गोज टू पिसेस जो मानसिक हमारे विचार हैं मानसिक एक्सपीरियंस है मानसिक हमारे आइडियाज है मेरा जो अभ्यास है मेरे जो लाइक्स एंड डिसलाइक्स है वह शरीर के साथ में बच्चे के भीतर में जाएगा ऐसा आप कैसे कह सकते हैं क्योंकि शरीर तो नष्ट हो गया तो फिर जाएगा क्या हेरेडिटरी व्हाट कैरीज इट जो बच्चे में क्या वहन करता है इवन ग्रांटिंग इट वेर पॉसिबल फॉर ईच मेंटल इंप्रेशन टू रिमन इन द बॉडी दैट एवरी इंप्रेशन बिगिनिंग फ्रॉम द फर्स्ट मैन डाउन टू माय फादर वाज इन माय फादर्स बॉडी हाउ कुड इट बी ट्रांसमिटेड टू मी यदि मैं यह मान लेता हूं कि मेरे जितने भी विचार है मेरे जितने भी मानसिक एक्सपीरियंस है सम हाउ मेरे शरीर में रिकॉर्ड हो जाते हैं और सिर्फ मेरे ही नहीं प्रथम मनुष्य से लेकर के प्रथम प्रोटोप्लास्मिक शी जीव से लेकर के आज तक के जितने भी ऑर्गेनिस्ट म हुए हैं सबके मानसिक एक्सपीरियंस मेरे शरीर के भीतर में है और मेरे शरीर में से सम हाउ मेरे बच्चे के शरीर में जाएंगे तो क्या यह पॉसिबल है और यदि जाते हैं तो कौन सा मैकेनिज्म है जो कि ले जाता है वो मैकेनिज्म है जींस किंतु जींस के बारे में अभी स्वामी जी को पता नहीं है इसलिए स्वामी जी यह आर्गुमेंट करते हैं और यहां पे यह भी देखना है हालांकि स्वामी जी संस्कार के बारे में बात करते हैं किंतु यहां पर संस्कार और इंस्टिंक्ट दोनों मिल गया है स्वामी जी ऐसा फाइन डिस्टिंक्शन नहीं करते कि मैं सिर्फ संस्कार के बारे में कह रहा हूं ऐसा नहीं कहते कि वो इंस्टिंक्ट भी यहां पे बाय डिफॉल्ट आ जाता है यह देखिए थोड़ा सा अपना खुद का मेंटल क्लेरिटी कर लेते हैं कि संस्कार क्या है और सहज वृत्ति क्या है इंस्टिंक्ट क्या है और एक्सपीरियंस क्या है दो चीजें हैं एक तो है कि इंस्टिंक्ट या तो फिर सहज वृत्ति मुझे मृत्यु का भय है मुझे भूख लगती है यानी कि मैं बचपन से ही जन्म होने के साथ में ही भूख शुदा तृष्णा काम क्रोध यह सब मेरे मन में आ ही जाएगा क्योंकि यह सब इंस्टिंक्ट है किंतु क्या नहीं आएगा एक्सपीरियंस या तो फिर विजडम या तो फिर लर्निंग पिताजी मेरे पिताजी बहुत अच्छे इंजीनियर थे तो नॉट नेसेसरी कि मेरे भीतर में उनकी जो इंजीनियरिंग की जो नॉलेज है वह सब आ जाएगी इनफैक्ट मेरे पिताजी सही में इंजीनियर है और मैं हाई स्कूल ड्रॉप आउट हूं तो ये दिस इज एनटायर पॉसिबल कि आपके पिताजी हो सकते है कि बड़े विद्वान है और आप बिल्कुल मुरख है या तो फिर जैसे आजकल बार-बार न्यूज़पेपर में आता है कि वो रिक्शा वाले का लड़का या लड़की ज्यादातर तो लड़कियां ही वो जो बोर्ड की एग्जाम में या यूपीएससी एग्जाम में टॉपर हुए हैं तो प्रश्न होगा कि अरे वो रिक्शा वाला है कहां वो झाड़ू लगाता है कहां उसकी मां लोगों के घर में काम करने के लिए जाती है और वो लड़की यूपीएससी में कैसे टॉपर हो गई तो यह तो ठीक नहीं कहा जाएगा कोई भी थिरी इसको प्रमोट नहीं करती है कि पिता या माता की बुद्धि या तो फिर उनका अनुभव या तो फिर उनकी जो विजडम ज्ञान वो बच्चे में जाता है ऐसा तो कोई नहीं कहता क्या जाता है इंस्टिंक्ट जाती है जो कि इंस्टिंक्ट लाखों करोड़ों साल से हमारे डीएनए में लिखी गई है तो ये दोनों चीजों को हमको सेपरेट रखना है एक्सपीरियंस एंड इंस्टिंक्ट नॉलेज एंड इंस्टिंक्ट ये दो अलग-अलग है स हिंदी में कहेंगे तो इंस्टिंक्ट को कहेंगे सहज वृत्ति और एक्सपीरियंस या नॉलेज को कहेंगे ज्ञान या तो फिर विज्डम तो ये दोनों अलग चीजें हैं इंस्टिंक्ट डीएनए के थ्रू जाएगी एक्सपीरियंस या तो फिर नॉलेज ज्ञान डीएनए के थ्रू नहीं जाएगा किंतु यह पैसेज के बारे में जब इस पैसेज में स्वामी जी इस तरह का डिस्टिंक्शन नहीं करते इसके पहले उन्होंने इंस्टिंक्ट के बारे में बोला है तो इस पैसेज को पढ़ कर के हमको ऐसा लगता है कि स्वामी जी दोनों चीजों के बारे में बोल रहे हैं ये जो जो एक्सपीरियंस एंड इंस्टिंक्ट नॉलेज और ये सहज वृत्ति दोनों नहीं जा सकते ऐसा स्वामी जी का कहना है ऐसा हमको लग रहा है इसलिए इस पैसेज में थोड़ा सा आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से थोड़ा सा हमको अ भूल तो नहीं कहेंगे मिस्टेक भी नहीं कहेंगे हम कहेंगे कि स्वामी जी यदि और 50 साल के बाद में आते तो आज की जितनी भी मॉडर्न हमारी अंडरस्टैंडिंग है सबको जैसे कि खा जाते हैं और हमको एकदम परफेक्ट व उत्तर देते हैं कि जो भी है यह थोड़ा सा हमको ख्याल में रखना है कि यहां पर इंस्टिंक्ट और एक्सपीरियंस दोनों मिले हुए हैं स्वामी जी की इस पैसेज के भीतर में और जहां तक इंस्टिंक्ट का प्रश्न है यह पैसेज इनकरेक्ट है और जहां तक एक्सपीरियंस का प्रश्न है यह पैसेज करेक्ट है यह हमको ख्याल में रखना है इवन ग्रांटिंग यह तो हमने देख लिया इवन ग्रांटिंग इट वेर पॉसिबल फॉर चच मेंटल इंप्रेशन टू रिमन इन द बॉडी दैट वेरी दैट एवरी इंप्रेशन बिगिनिंग फ्रॉम द फर्स्ट मैन डाउन टू माय फादर वाज इन माय फादर्स बॉडी हाउ कुड इट बी ट्रांसमिटेड टू मी प्रत्येक मेंटल इंप्रेशन प्र प्रथम मनुष्य से लेकर के जो कि मेरे पिता जी के भीतर में आई है धीरे-धीरे करके युग युगांतर के यह इवोल्यूशन से जनरेशन बाय जनरेशन किस तरह से मेरे भीतर में आएगी थ्रू बायोप्लाजमा सेल ये बायोप्लाजमा सेल बोलकर के स्वामी जी कहीं पे कुछ पढ़े होंगे इस तरह का अभी हम हम लोग इस तरह का शब्द नहीं यूज करते हम लोग जींस या तो फिर डीएनए शब्द यूज करते हैं यह पुराना शब्द है क्या बायोप्लाजमा सेल के द्वारा स्वामी जी पूछते हैं हाउ कुड ट बी ये कैसे पॉसिबल है बिकॉज द फादर्स बॉडी डज नॉट कम टू द चाइल्ड इन टोटो पिता का शरीर या तो पिता के शरीर की लाक्षणिक एज इट इज बच्चे में नहीं आ जाती और नहीं आती हमको पता है % जो जींस होते हैं वो एक्स क्रोमोजोम कि वा क्रोमोजोम वो पिता में से आते हैं और एक क्रोमोजोम मामे से आता है तो 50-50 पिता और माता का कॉमिनेशन होता है द सेम पेरेंट्स मे हैव ए नंबर ऑफ चिल्ड्रन देन फ्रॉम दिस थिरी ऑफ हेरेडिटरी ट्रांसमिशन वेयर द इंप्रेशन एंड द इंप्रेस्ड दैट इज टू से मटेरियल आर वन इट रिगर असली फॉलोज दैट बाय द बर्थ ऑफ एवरी चाइल्ड द पेरेंट्स मस्ट लज अ पार्ट ऑफ देयर ओन इंप्रेशंस और इफ द पेरेंट शुड ट्रांसमिट द होल ऑफ देयर इंप्रेशंस देन आफ्टर द बर्थ ऑफ द फर्स्ट चाइल्ड देर मा बी अ वैक्यूम पूरा स्वामी जी यह पैसेज है पूरा पैराग्राफ की तरह और एसेंशियली इस पैसेज में जो कहना चाहते हैं वह आज के विज्ञान के साथ में सहमत नहीं है स्वामी जी कहते हैं कि सेम पेरेंट्स में हो ना एक पिता के त एक मां और पिता के एक से ज्यादा संतान हो सकते हैं तो जद यह हेरेडिटरी ट्रांसमिशन या तो फिर यह जन्म गत सं का की यह जो थिरी है जिसमें इंप्रेशन एंड इंप्रेस्ड आर वन इंप्रेशन अर्थात की यह जो एक्सपीरियंस और इंप्रेस्ड अर्थात कि जिसके भीतर में यह एक्सपीरियंस स्टोर हुआ है अर्थात कि शरीर के भीतर में मेरे ये ये अनुभव है यह अनुभव मेरे शरीर में स्टोर हो गए यानी कि इसका स्टोरेज मेरा शरीर है नहीं कि स्थूल शरीर है नहीं कि सूक्ष्म शरीर यह जो स्वामी जी की जो कहने की स्टाइल है ना इंप्रेशन एंड इंप्रेस्ड आर वन य मैंने एकदम एकदम रियली क्या कहेंगे कि फिलोसॉफिकल लॉजिकल की दृष्टि से उन्होंने कहा है कि यह जो जो भी अनुभव है मेरे शरीर में रिकॉर्ड हुए हैं नहीं कि मेरे मन में अर्थात कि मेरा शरीर और यह अनुभव दोनों एक ही है इट रिगर असली फॉलोज ट बाय द बर्थ ऑफ एवरी चाइल्ड पेरेंट्स मस्ट लोज पार्ट ऑफ देयर ओन इंप्रेशन अर्थात कि जद मेरे अनुभव मेरे शरीर में स्टोर हुए हैं मेरे पिता के अनुभव उनके शरीर में स्टोर हुए हैं तो मैं मुझे जब जन्म दिया होगा तो उनके शरीर का एक भाग उन्होंने गवाया होगा और इफ द पेरेंट शुड ट्रांसमिट द होल ऑफ देयर इंप्रेशंस देन आफ्टर द बर्थ ऑफ द फर्स्ट चाइल्ड देयर माइंड्स वुड बी अ वैक्यूम जदी सभी सभी का वह जो उनके सभी अनुभव उन्होंने बच्चे में दे दिए होते तो उनका माइंड ब्लेक हो जाता अभी देखिए कि इस तरह से तो होता नहीं है शरीर के भीतर में जब अनुभव स्टोर होते हैं तो बच्चे को जब जन्म देते के समय में वह अनुभव उठा कर के तो नहीं दे देते यह तो कॉपी करके देते हैं जो आज की कंप्यूटर की लैंग्वेज में कहेंगे कट पेस्ट और य कॉपी पेस्ट यह कट पेस्ट का क्या अर्थ है कि यहां से एक पिक्चर है इमेज है आपने कट किया और दूसरी जगह पर पेस्ट किया यानी पहली जगह पर इमेज जीरो हो गई दूसरी जगह प आ गई और कॉपी पेस्ट का क्या अर्थ है कि एक जगह पर जो इमेज है उसका आपने कॉपी किया डुप्लीकेट किया और फिर उसे दूसरी जगह पर पेस्ट किया तो ये जो जेनस है ये जेनेटिक इन्हेरिटेंस है वो कॉपी पेस्ट होता है कट पेस्ट नहीं होता तो स्वामी जी यहां पे ये एज्यूम कर लेते हैं उस समय की थिरी के अनुसार ऐसा हो सकता है कि कट पेस्ट हो सकता है माता और पिता के जो अनुभव है उनकी जो वृत्तियां है उनके शरीर में जद स्टोर होती होगी उनके मन में कहीं पर स्टोर होती होगी बच्चे में जाती होगी तो वहां से कट पेस्ट होकर के बच्चे में चली गई तो उनका खुद का ब्रेन तो वैक्यूम हो जाएगा उनका खुद का ब्रेन तो ब्लैंक हो जाएगा इस तरह की आर्गुमेंट स्वामी जी करते हैं हालांकि ये उस समय के लिए शायद इसका कोई वैलिडिटी होगा आज के लिए उसका कोई वैलिडिटी एज सच नहीं है क्योंकि आज हमको पता है कि इंस्टिंक्ट कॉपी पेस्ट होती है नहीं कि कट पेस्ट अगेन इफ इन द बायोप्लाजमा सेल द इफाटॉप हैज एंटर्ड वयर एंड हाउ इज ईट स्वामी जी कहते हैं कि मान लीजिए यह बायोप्लाजमा सेल जिसके भीतर में एक मनुष्य सभ्यता की या तो पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से लेकर के जितने भी अनुभव जितने भी डेवलपमेंट इस सेल के भीतर में स्टोर हुए हैं तो यह सेल कहां पे है किसको देख रहा है और किस तरह से स्टोर हुए हैं यह प्रश्न स्वामी जी करते हैं इसका उत्तर आज हमको पता है कि डीएनए के भीतर में है दिस इज अ मोस्ट इंपॉसिबल पोजीशन एंड फिजियोलॉजिस्ट कैन प्रूव हाउ एंड वेयर दोज इंप्रेशंस लिव इन दैट सेल्फ एंड व्हाट दे मीन बाय मेंटल इंप्रेशन स्लीपिंग इन द फिजिकल सेन देयर पोजीशन कैन नॉट बी टेकन फॉर ग्रांटेड स्वामी जी कहते हैं कि ये कहना कि इतने लाखों लाखों जनरेशन से जितने भी फिजिकल मेंटल डेवलपमेंट हुआ है किसी एक सेल के भीतर में है और यह सेल पिता में से बच्चे में जाता है जब तक आप ये प्रूव नहीं कर देते हो तब तक हम इस बात को स्वीकृत नहीं करेंगे क्योंकि यह तो बड़ा ही असंभव सा दिखता है करोड़ों करोड़ों सालों का यह जो ह्यूमन इवोल्यूशन है इतना छोटे से सेल में कैसे रिकॉर्ड कर सकते हैं कि कौन इस बात को स्वीकार करेगा किंतु इस बात को आज हमने स्वीकार किया है यह जो दो चीज यह जो 20th सेंचुरी है ना अपना खास करके य 1900 के बाद में उन्होंने दो तरह के यूनिवर्स हमारे सामने एक्स पॉइंट किए हैं एक तो मैक्रो कजम और माइक्रो कजम स्वामी जी की लैंग्वेज लेते हैं मैक्रो कजम अर्थात कि ब्रह्मांड ब्रह्मांड अर्थात क्या हम लोग यह सोचते थे कि अरे यह पृथ्वी है वही ब्रह्मांड का केंद्र है और आजूबाजू में यह जो मंगल वीनस जुपिटर ये ग्रह घूमते रहते हैं और सूरज भी हमारे आसपास में घूमता है ऐसा एक मेंटल इमेज था उसमें से धीरे-धीरे करके अपनी ये मेंटल इमेज विस्तृत होती गई पता चला कि विश्व ब्रह्मांड इतना बड़ा है इतना ना बड़ा है कि इसमें आप क्या कहेंगे पृथ्वी एक जैसे कि बड़ा समुंदर का किनारा है समुंद्र के किनारे पर पूरी रेत बिछी हुई है और रेत का एक कण लीजिए इतनी छोटी सी पृथ्वी है किंतु इसके बाद में भी एक बहुत बड़ी डिस्कवरी हुई यह जो 19 सेंचुरी के शुरुआत में इसको कहते हैं गैलेक्सी हमको पता चला कि ये जो छोटे-छोटे बादल जैसे आकाश में दिख दिखाई दे रहे हैं यह छोटे-छोटे बादल नहीं है यह बादल अपने आप में एक गैलेक्सी है अर्थात ये मिल्की वे गैलेक्सी जिसमें की करोड़ों करोड़ों सितारे हैं इतनी बड़ी गैलेक्सी एक नहीं है करोड़ों करोड़ों गैलेक्सिया है यानी कि इस गैलेक्सी को जद हम धीरे-धीरे करके दूरबीन देखते देखते हम विश्व ब्रह्मांड समझते थे पता चला ऐसी तो कितनी ही सारी गैलेक्सिया है विजिबल यूनिवर्स एक्सटेंड्स 15 बिलियन लाइट यर्स इन डायमीटर 15 करोड़ लाइट ईयर जितना इस विजिबल यूनिवर्स का परिधि है और यह तो सिर्फ विजिबल यूनिवर्स है इसके परे और भी क्या होगा यानी कि बाहर का ब्रह्मांड हमारी इंटेलेक्चुअल अंडरस्टैंडिंग इतनी एक्सपें हुई साथ-साथ में यह माइक्रो कजम जो है मैक्स प्लांक का एक यह है प्लैंक कांस्टेंट यह प्लांक कांस्टेंट इतना छोटा सा है एग्जैक्ट नंबर तो मैं नहीं बता पाऊंगा किंतु इतना छोटा सा ये प्लैंक कांस्टेंट है कि ये पूरी रियलिटी है ना माने ये स्पेस टाइम मैटर एनर्जी वो सब उस लेवल पे जाकर के ग्रेन्यूलर हो जाते हैं अर्थात की ये कंटीन्यूअस ग्रेन्यूलर व बड़ा टेक्निकल डिस्कशन हो जाएगा किंतु कहने का ये एक अर्थ है कि ये जो एकदम छोटे से छोटा यूनिट कितना छोटा हो सकता है ये हमने पहले कभी कल्पना भी नहीं की थी तो उसके उसकी साइज के अनुसार डीएन तो बड़ा बहुत बड़ा है तो डीएनए में करोड़ों करोड़ों साल के एक्सपीरियंस टोर हो सकते हैं इस बात को देख कर के आज किसी को आश्चर्य नहीं होगा अब यह मेरा मोबाइल ही है इस मोबाइल में आज यह जो टेक्नोलॉजी इतनी डेवलप हो गई है कि यह जो अपोलो मिशन था मनुष्य को चांद पे ले जाने वाला मिशन उसका जो अपोलो स्पेसशिप था उसकी जो कंप्यूटेशनल कैपेसिटी थी यानी कि कितनी प्रचंड होगी उस समय की टेक्नोलॉजी के अनुसार वो पूरी मेरे आज की मोबाइल चिप के भीतर में है यानी कि सूक्ष्म से सूक्ष्म चीजों के ऊपर में आप कितनी इंफॉर्मेशन रिकॉर्ड कर सकते हैं यह मनुष्य की कल्पना 19th सेंचुरी का मनुष्य कभी भी नहीं कर सकता था इसलिए स्वामी जी जब ऐसा कहते हैं कि आप कैसे कह सकते हैं कि करोड़ों करोड़ों साल का ह्यूमन इवोल्यूशन है हमारे जितने भी फिजिकल डेवलपमेंट है सबने आपने एक सेल के भीतर में रिकॉर्ड कर दिया और यह सेल पिता से पुत्र में जाता है कैसे आप कह सकते हैं प्रूफ दिखाइए यह बात पढ़ कर के थोड़ा सा हमको एक हंसी भी आता है है और क्या कहेंगे कि देखिए कि स्वामी जी लॉजिकल तो थे किंतु आज का मॉडर्न साइंस कितना आगे बढ़ गया है कि उस समय की लॉजिकल चीजों को भी इलॉजिकल प्रूव कर देता है तो यह एक बात है साइंस के आधार पर आध्यात्मिकता को समझाने का यह खतरा है मैं रंग नाथा आनंद जी की गीता जो है उसको एक बार पढ़ रहा था तो रंग नाथा आनंद जी वैसे बड़े ही अप टू डेट थे साइंस में और उस समय 1960 70 उस समय के साइंस के अनुसार कुछ ना कुछ आइडिया समझाते हैं कि गीता में ऐसा है और इसका इस तरह से हम एक्सप्लेन कर सकते हैं किंतु प्रॉब्लम वही है कि अगेन 1960 और 1970 के जो दशक थे उससे आज का आधुनिक विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है कि यह जो किताब हम लोग गुजराती में ट्रांसलेट कर रहे थे तो मैं हर बार यह सोच रहा था कि अरे उस समय के आइडियाज को अभी आज के समय में हम किस तरह से लेंगे हमत तो फुट नोट तो देना पड़ेगा कि ना महाराज जी उस समय जो कहते थे किंतु आज के समय के अनुसार तो विज्ञान पूरा बदल गया है या तो ज्यादा एडवांस हो गया है तो यह सब विचार आते हैं अल्टीमेटली मैंने फुट नोट का विचार ही छोड़ दिया यदि फुट नोट देता तो पूरा फुट नोट से ही भर जाता तो यह विज्ञान के अनुसार वेदांत को समझाने का य एक थोड़ा सा खतरा है कि सही में करोड़ों करोड़ों साल का इवोल्यूशन डीएनए के भीतर में आप स्टोर कर सकते हैं रिकॉर्ड कर सकते हैं सो फार इट इज क्लियर देन दैट दिस इंप्रेशन इज इन द माइंड दैट द माइंड कम्स टू टेक इट्स बर्थ एंड रीबर्थ एंड यूज द मटेरियल व्हिच इज मोस्ट प्रॉपर फॉर इट एंड दैट द माइंड व्हिच हैज मेड इट सेल्फ फिट फॉर ओनली अ पार्टिकुलर काइंड ऑफ बॉडी विल हैव टू वेट अंट्स दैट मटेरियल तो अभी तक का जो चिंतन किया उससे यह एक बात तो क्लियर है कि जितने भी अनुभव है वह मन में रिकॉर्ड हो जाते हैं और एंड दैट माइंड कम्स टू टेक इट्स बर्थ एंड रीबर्थ यहां पर माइंड का अर्थ है कि सूक्ष्म शरीर तो स्वामी जी कहते हैं कि स्थूल शरीर के भीतर में कुछ भी रिकॉर्ड नहीं होगा किंतु सूक्ष्म शरीर के भीतर में सब रिकॉर्ड होगा और सूक्ष्म शरीर वेट करता है कि कब उसकी मान लीजिए कि सूक्ष्म शरीर में बहुत सारे पाप रिकॉर्ड है तो पशु योनि में जन्म लेगा और सूक्ष्म शरीर में बहुत ज्यादा पाप तो रिकॉर्ड नहीं है पुण्य भी रिकॉर्ड है तो मनुष्य शरीर लेगा मनुष्य योनि में जन्म लेगा और यदि बहुत अच्छे सत्कर्म सूक्ष्म शरीर के भीतर में रिकॉर्ड हुए हैं तो मनुष्य योनि में भी उसकी संत की विचारधारा संत के संस्कार उसके भीतर में आएंगे तो स्वामी जी ने हालांकि देखिए कि ये पूरा पैसेज जो है उसको समझा करके एक्सप्लेन करके हमको बताया कि शरीर के भीतर में मानसिक एक्सपीरियंस रिकॉर्ड नहीं हो सकते मानसिक एक्सपीरियंस मानसिक अनुभूति अनुभव सूक्ष्म शरीर में ही रेकॉर्ड हो सकता है तो हमको इस तरह से इसको लेना है कि इंस्टिंक्ट हमारे डीएनए में या तो हमारे शरीर में रिकॉर्ड हो सकती है किंतु अनुभूति वह वहां पर रिकॉर्ड नहीं हो सकती हमारे विचार हमारा विज्ञान हमारी अंडरस्टैंडिंग हमारा विजडम हमारा लर्निंग वो डीएनए में रेकॉर्ड नहीं होगा वो हमारे सूक्ष्म शरीर में रेकॉर्ड होगा यानी कि मैं जब ये जन्म धारण करता हूं मनुष्य योनि धारण करता हूं मेरे पास में दो चीज आती है एक तो डीएनए के द्वारा स्पेसस इवोल्यूशन जो है वह मेरे शरीर के भीतर में आता है और सूक्ष्म शरीर के द्वारा यह जो आत्मन का यह जो सूक्ष्म शरीर का इवोल्यूशन है वह आता है यानी कि दो चीजें मुझे बनाती है एक तो डीएनए बनाता है मेरे शरीर को और सूक्ष्म शरीर बनाता है मेरे संस्कार को द थिरी देन कम्स टू दिस ट देर इज हेरेडिटरी ट्रांसमिशन सो फार एस फर्निशिंग द मटेरियल टू द सोल इज कंसर्न अर्थात की यह हेरेडिटरी ट्रांसमिशन कहां तक शक्य है बट द सोल माइग्रेट्स एंड मैन्युफैक्चर्स बॉडी आफ्टर बॉडी एंड चच थॉट वी थिंक एंड इच डिड वी डू स्टोर्ड इन इट इन फाइन फॉर्म्स रेडी टू स्प्रिंग अप अगेन एंड अगेन टू टेक अ न्यू शेप मन सूक्ष्म शरीर के भीतर में हमारे सभी संस्कार रेकॉर्ड होते हैं यह सूक्ष्म शरीर अपने संस्कार के अनुसार स्थूल शरीर धारण करता है बार-बार स्थूल शरीर धारण करता जाता है प्रत्येक समय स्थूल शरीर धारण करता है नए-नए संस्कार इस सूक्ष्म शरीर के ऊपर में लिखे जाते हैं और नए संस्कार के अनुसार फिर से नया शरीर यह स्थूल शरीर यह सूक्ष्म शरीर धारण करेगा ठीक है आज के लिए इतना ही बहुत ज्यादा टेक्निकल डिस्कशन हो गया और भी थोड़ा सा टेक्निकल डिस्कशन आएगा स्वामी जी का जैसा है कि जैसे कोई कोई यूनिवर्सिटी में फिलोसोफी का कोर्स करवाना है तो यह सब पढ़ कर के वो प्रोफेसर लोग बड़े खुश हो जाएंगे कि हां इसको बोलते हैं फिलोसोफी लगाओ इसको फिर स्वामी जी ऐसे संत महापुरुष की तरह ऐसा इंस्पिरेशनल उस बातें करना शुरू कर देंगे वो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बड़े ही मायूस हो जाएंगे अरे ये क्या कर रहा है अभी तो बढ़िया सा फिलोसोफी चल रहा था अभी ये फड़क करके इंस्पिरेशन कहां से आ गया तो ये है स्वामी जी कभी फिलोसोफी कभी इंस्पिरेशन हमको दोनों स्वामी जी को लेना है यदि हम ऐसा सोचेंगे कि मैं सिर्फ इंस्पिरेशनल स्वामी जी को लूंगा ये टेक्निकल स्वामी जी को नहीं लूंगा तो क्या है पता है स्वामी जी को समझने की हमारी अंडरस्टैंडिंग थोड़ी सी डिमिनिशिंग हम स्टडी करेंगे तो कल फिर से ते शांति शांति शांति हरि तसत श्री राम कृष्णर्पण
Questions & Answers
मस्तु देखिए प्रॉब्लम यहां पर कहां होता है स्वामी जी इंस्टिंक्ट और एक्सपीरियंस को एक साथ में क्लप कर देते हैं यहां पर हमारे साथ में प्रॉब्लम होता है जब तक यदि हम इंस्टिंक्ट की दृष्टि से स्वामी जी को पढ़ेंगे तो स्वामी जी थोड़े से गलत साबित होंगे क्योंकि सही सही में इंस्टिंक्ट डीए में लिखी जाती है किंतु एक्सपीरियंस डीएनए में नहीं लिखा जाता कौन कहेगा मेरे पिताजी को इंजीनियरिंग आता है तो मुझे इंजीनियरिंग आएगा कोई इसका कोई सपोर्टिंग एविडेंस नहीं है मेरे जो सत संस्कार है मान लीजिए मेरे पिताजी ने बहुत सारे पुण्य किए तो हो सकता है उनका लड़का बहुत बड़ा पापी साबित हो ऐसा तो कितने ही उदाहरण है और बहुत बड़ा पापी है उसका लड़का संत हुआ है तो ऐसे तो हजारों उदाहरण है हमारे सामने यानी कि पिताजी का नॉलेज विजडम और स्पिरिचुअलिटी व बच्चे में नहीं होता ट्रांसमिट वह बच्चा अपना खुद का वोह लेकर आता है उसका खुद का सूक्ष्म शरीर पिछले समय कब होगा तो उस दृष्टि से बड़ा ही क्लियर है कि इंस्टिंक्ट आएगा डीएनए में से और संस्कार आएंगे सूक्ष्म शरीर के थ्रू इस पैसेज के साथ में प्रॉब्लम यही है कि स्वामी जी ने दोनों को क्लब कर दिया है संस्कार और दोनों कैसे डीएनए के थ्रू ट्रांसमिट होगा दोनों ही तो सूक्ष्म शरीर के थ्रू ट्रांसमिट होगा इस तरह का वो बोल रहे हैं ट इज द प्रॉब्लम लार्जर पॉइंट ये है कि स्थूल शरीर के भीतर में एक आत्मन है राइट तो अभी ये आत्मन जद इटरनल रहेगा तो हमको प्रश्न होगा कि यह स्थूल शरीर बार-बार आता जाता है क्यों और फिर यह जद बार-बार स्थूल शरीर आता आएगा और जाएगा तो हमारे संस्कार कैसे ट्रांसमिट होंगे क्योंकि प्रॉब्लम सब यहां प होता है कि जद क्रिश्चन लोग जैसा कहते हैं कि आत्मन जो है वह अमर है किंतु वह अनंत नहीं है अर्थात कि एक बार सोल का जन्म होता है वो मरे शरीर जाएगा किंतु आत्मा नहीं जाएगा सोल नहीं जाएगा सोल विल गो टू हेवन और हेल जिस तरह से उसने सत्कर्म किया दुष्कर्म किया हम लोगों का कहना है जो चीज का अंत नहीं है उसका आदि कैसे हो सकता है राइट अ वेरी एकदम टिपिकल फिलोसॉफिकल क्वेश्चन आप कहते हैं कि सोल का मृत्यु नहीं है सोल विल ऑन द डे ऑफ जजमेंट विल गो आदर हेल और टू हेवन शरीर का मृत्यु होगा शरीर भीतर में मिट्टी में मिल जाएगा सोल विल रिमन इटरनल तो जो चीज इटरनल है उसका तो आदि कैसे हो सकता है कि आज मेरे आत्मन का जन्म हुआ किंतु अभी वह मरेगा कभी नहीं किंतु आज मेरी मे बच्चे का जन्म हुआ अर्थात की आत्मन का जन्म हुआ हम लोग तो कहते आत्मन तो हमेशा से है आत्मन का यदि मृत्यु नहीं है तो का जन्म भी नहीं हो सकता है राइट एक चीज दूसरा कि जिसका मृत्यु और जन्म नहीं है जिसको कि हम इनफाइनों सकता है थोरेट्स की एक्चुअली आत्म अबाउ स्पेस एंड टाइम राइट तो अभी यह अबाउ स्पेस एंड टाइम आत्मन है उसका इस थूल देह के साथ में संयोग कहां से होता है दिस इज द बिगेस्ट प्रॉब्लम हम सभी के साथ में मैं क्यों इस काम कांचन अविद्या अस्मिता राग द्वेष यह मढ़ता में डूबा हुआ हूं जद मेरा सही नेचर यह अनंत अजर अमर यह दिव्यता होती मैं यदि ईश्वर होता तो मैं क्यों इस गड्ढे में गिरा हुआ हूं क्यों मैं इस दलदल में ड हुआ हूं इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए टेक्निकली साइंटिफिकली यह सब समझाते हैं कि हां आपका शरीर बार-बार आएगा बार-बार जाएगा और इस शरीर के साथ में सूक्ष्म शरीर है जो कि आपके अनुभवों को वहन करेगा जब तक आपके सूक्ष्म शरीर की मुक्ति नहीं है तब तक यह जो जैसे कि यहां पर वो फर्नीचर का काम हो रहा था यह जो नया बिल्डिंग बना तो फर्नीचर का काम हो रहा है तो लकड़ी का जो दो ये है टुकड़े उसको जॉइन करने के लिए बीच में फेविकॉल लगाते हैं फेविकोल लगाया तो लकड़ी के दो टुकड़े जॉइन हो गए तो जब तक फेविकोल स्ट्रांग रहेगा लकड़ी के दो टुकड़े कनेक्ट ही रहेंगे भाई जिस दिन फेविकोल गल गया तो दो टुकड़े फट कर के सेपरेट हो जाएंगे राइट तो ये सूक्ष्म शरीर है ना वो आत्मन और स्थूल शरीर के बीच के ये बंधन है जब तक सूक्ष्म शरीर अपने कु संस्कारों से ग्रस्त है तब तक कि आत्मन और पंचमहाभूत के देह का बंधन रहेगा रहेगा जिस दिन आपने सूक्ष्म शरीर को सुसंस्कृत कर दिया जिस दिन यह फेविकॉल हमारा गल गया उसी दिन ये आत्मन स्थूल शरीर से सेपरेट हो जाएगा फिर उसको बार-बार स्थूल देह धारण करने का प्रयोजन नहीं रहेगा तो यह है स्वामी जी का बेसिक आइडिया मैक्रो कजम अर्थात कि हमारे भीतर में एक सूक्ष्म शरीर है और यह सूक्ष्म शरीर इज यूनिक टू वेदांत और इंडियन फिलोसोफी यह वेस्टर्न फिलोसोफी में सूक्ष्म शरीर है ही नहीं उन लोगों के वहां पर यह सूक्ष्म शरीर और सोल जिनको हम आत्मन कहते हैं दोनों को मिलाकर के एक खिचड़ी जैसा एक कांसेप्ट है जो कि हमारे यहां पर हम दो आत्मन और सूक्ष्म शरीर को बिल्कुल सेपरेट करते हैं तो यह जो इतना सूक्ष्म आइडिया है वह वेस्टर्नर के जड़ बुद्धि के भीतर में घुसाना है बोलकर के स्वामी जी को यह सब मेंटल जिम्नास्टिक करना पड़ रहा है और अब विदेशी लोगों को तो छोड़ दीजिए हम लोग भी आजकल के यह जो पॉपुलर जो लिटरेचर है ना उसको पढ़कर के ये सूक्ष्म शरीर आत्म से सेपरेट है हम लोगों के मन में भी यह ज्यादा बात नहीं आती मुझे खुद को यह सब समझ में आया तभी जबक मैंने स्वामी जी को पढ़ना शुरू किया पहली बार मेरा जन्म हुआ होगा मेरे सूक्ष्म शरीर का जन्म हुआ होगा और आखिरी जब मुझे मुक्ति होगी यह सूक्ष्म शरीर विनाश हो जाएगा राइट विघटित हो जाएगा तो मेरे सूक्ष्म शरीर का जन्म है मृत्यु है दोनों तो जिस चीज का जन्म और मृत्यु है इट इज पार्ट ऑफ मटेरियल वर्ल्ड उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है यहां पर किंतु अगेन मैक्रो कजम माइक्रो कजम डिस्टिंक्शन करना है कॉस्मिक लेवल पर अज्ञान जो है ना ब्रह्मण और माया यह दोनों अनादि अनंत है स्वामी जी ने उदाहरण दिया है पटरी के दोनों ट्रैक की तरह हमेशा जब तक ब्रह्मण है तब तक माया रहने ही वाली माया और ब्रह्मण ऐसा कभी नहीं होगा कि माया चली जाएगी यह सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकल चलती ही रहेगी चलती ही रहेगी अज्ञान का विनाश कब होगा माइक्रो कजम यानी कि इंडिविजुअल लेवल पे मेरा अज्ञान एक दिन जाएगा मुझे मुक्ति मिल जाएगी मेरा सूक्ष्म शरीर विघटित हो जाएगा किंतु यह कॉस्मिक माया है वह इटरनल रहेगी यानी कि ये स्पेस टाइम मैटर एनर्जी रूपी ये जो मटेरियल वर्ल्ड है वो हमेशा रहेगा और यह आत्मन ब्रह्मण भी हमेशा रहेगा सो दैट इज वन डिस्टिंक्शन