Swami Vivekananda
इन वन आफ्टर अंदर फर्स्ट ऑफ जो एंजॉयमेंट इस लाइक ए मिलियन हेडेड सर पर यू नो डी स्टोरी ऑफ डेट आईएफ यू कट सो दिस इस अलसो और इन गीता अलसो आईटी इस सीटेट ना जा तू कम आना शामियाती व्हाट दस आईटी मीन डेट सम पीपल थिंक डेट आईएफ वेरी आईएफ यू वांट एंजॉयमेंट इन अवर लाइफ आईएफ यू वांट तू रिनाउंस एंजॉयमेंट दें ऑफ कोर्स रजिस्टर पाठ डी पाठ विच इस ब्यावर ट्रेडीशन बाय अवर योजीज मी अवर ऋषि और भैया अवतारा व्हाट इसे डी पाठ डेट एफ आई वांट तू रिनाउस एनीथिंग डेट आई मस्त उसे मी बिल पावर इन ऑर्डर तू गेट रीड ऑफ डेट धीरे बट तेरे इस अनदर स्कूल ऑफ थिंकिंग था सपोज इट्स आई वांट तू रिनाउस समथिंग दें आई शुड डू सो मैच ऑफ डेट आई मैच एंजॉय सो मैच अल्टीमेटली आई बिल गेट आई बिल गेट फेड अप विथ डेट थिंक नो यू नो डेट ओशो पीपल लाइक ओशो थे एडवोकेट दिस आउट ऑफ टीचिंग्स डेट ओनली वे ऑफ गेटिंग रीड ऑफ एंजॉयमेंट इस एंजॉय सो मैच डेट अल्टीमेटली यू बिल विकम फेड अप विथ यू बिल विकम बोर्ड विद आईटी बट दिस इस एन वेरी डेंजरस टीचिंग डेट यू कैन नोट गेट रीड ऑफ योर एंजॉयमेंट बाय एंजॉयिंग डी एंजॉयमेंट डेट इस वही इन गीता आईटी इस सैड ना जा तू कामना उपभोग कम के नोट बी गेट रीड ऑफ बाय एंजॉयिंग डी काम हमेशा कृष्णमूर्ति है वो पुरी एवर नहीं वो बर्थ दे डेट मेंस आईएफ आई वांट तू डेट इस एन फायर ऑफ होम और व्हाट इसे डी बेस्ट वे ऑफ सपोज डेट आईटी डी और ऑफ डी फॉर्म आई वांट तू एक्सटिंग्विश फायर और व्हाट डू वे डू हर वे एड वे द रो और आईटी डी मोमेंट एक्सटिंग्विश बट सपोज हर इन गीता सिस इंस्टिट्यूट ऑफ थ्रोइंग कर्ड आईएफ यू थ्रोी आईएफ यू थ्रो बटर ऑन डी फायर तेल ऑन डी फायर दें फायर बिल ओनली यू नो आईटी बिल इंक्रीज फुर्थर आईटी बिल ओनली एन बोर्न विथ रिन्यूड पेशेंट सो दिस इस डी दिस इस हो दिस फ्रिस्टेड थिंकिंग गिटार डी काउंटर्स डेट ट्विस्टेड थिंकिंग डेट डी वे पीपल लाइक ओशो टीच डेट आईएफ यू वांट तू गेट रीड ऑफ रिनोसिएशन दें आ गेट रीड ऑफ एक्चुअल में दें एंजॉय डेट पर्टिकुलर थिंक सो मैच डेट यू बिल विकम फड़फ्रेटिक सो गीता एंजॉयिंग डी थिंक योर डिजायर पर डेट थिंक बिल को ऑन इंक्रीजिंग आईटी बिल नेवर यू नो एक्सटिंग्विश कंपलीटली ना जा तू कामना समिति कहां मत डिजायर बिल नेवर बी एक्सटिंग्विश बाय एंजॉयिंग डी डिजायर पर डी मोर डेट इस वही स्वामीजी हेयरकट एंजॉयमेंट इस लाइक एन मिलियन एडल्ट सर यू कट वन हेड और अंदर बिल आईटी बिल कम अप यू कट और अगेन डेट बिल कम अप व्हाट इसे डी वे ऑफ डिस्ट्रॉयिंग दिस मिलियन हेडेड सरप्वाइंट वे टेक आईटी इन इट्स हार्ड यू यू पंच हार्ट विद डी स्वोर्ड और ए डागर और डेट इस डी ओनली वेयर तू कल दिस मिलियन हेडेड सरपट सो आईएफ यू वांट तू गेट रीड ऑफ ओवर धीरे आईएफ यू वांट तू गेट रीड ऑफ ओवर एंजॉयमेंट दें डी बेस्ट वे इस तू जस्ट तू रिनाउंस डेट थिंक कंपलीटली टोटली और तू उसे ओवर बिल पावर में पीपल थिंक डेट आईएफ वे टॉक अबाउट डी बिल पावर आईएफ वे टॉक अबाउट ब्रह्मचर्य दें दे बिल थिंक डेट वे आर गेसिंग वे आर गोइंग बैक इन टाइम वेयर गोइंग टुवर्ड्स डी उन सिविलाइज्ड टाइम टुडे वे आर सो सिविलाइज्ड यू नो इन्वर्स स्कूल अलसो गवर्नमेंट हज डिक्लेअर डेट नो नीड तू टेक अन्य एग्जामिनेशन बिकॉज़ आईएफ यू टेक डी एग्जाम डी चिल्ड्रन विकम और स्ट्रेसफुल गेट इस सो मैच ड्रेस पट अपन डी चिल्ड्रन दे दे कम सुसाइड सो जस्ट आउट ऑफ एन मिलियन स्टूडेंट हूं आर स्टडाइंग आईएफ वन स्टूडेंट कम सुसाइड और तू स्टूडेंट कम सुसाइड दे बिल यू गेट एन टायर वन मिलियन स्टूडेंट आर अंडरस्टैंडिंग दे आर लॉजिंग देवर स्लीप दे आर लॉजिंग देवर हेल्थ दे आर लॉजिंग देवर पीस ऑफ मन सो डोंट टेक एग्जाम्स जस्ट प्रमोट दें इन डी नेक्स्ट क्लास और व्हाट इसे डी रिजल्ट हर जस्ट डी यस्टरडे आई वज टॉकिंग विथ सम देवोतीस और देवर टुडे इन स्टूडेंट ऑफ 8 स्टैंडर्ड बाय और इट्स स्टैंडर्ड स्टूडेंट आईएफ यू आस्क हम तू रीड हज नाम यू कैन नोट ट्रेड आईएफ यू आस्क आईटी तू स्टैंडर्ड स्टूडेंट तू राइट ही इस नाम पी के नोट राइट इसने बिकॉज़ वे हैव रिमूव्ड जो डी प्रेशर अपन हम डेट वे हैव रिमूव्ड जो डी कंपल्शन फ्रॉम हम पर हम तू स्टडी सो आईएफ आईटी देश नोट स्टडाइंग डी फर्स्ट स्टैंडर्ड मटर ही बिल बी प्रमोटेड तू सेकंड स्टैंडर्ड आईएफ यू डिसेंट स्टडी इन डी सेकंड स्टैंडर्ड नो प्रॉब्लम यू बिल बी प्रमोटेड तू थर्ड फोर्थ सिक्स्थ आते नाइन टेन और टेन बिल बी एग्जामिनेशन बिकॉज़ यू बिल हैव तू गेट एडमिशन संवारे और 12th देवर बिल बी एग्जामिनेशन और बाय डी टाइम यू आर ग्रेट डुएट सपोज अप तू ग्रेजुएट देवर इस नो प्रॉब्लम बट बाय डी टाइम यू आर ग्रेजुएट और गोस इन सर्च ऑफ जोक इन पेरेंट्स रिलाइज डेट सन इस कंपलीटली ऑन एम्पलाईबल एवं दो ही इस बी टेक और ही इस एन इंजीनियर ही डेजॉन्ट नो एनीथिंग है हस नो आम सेंस ही हज नो प्रैक्टिकल वे ऑफलाइन इस नॉलेज वही दिस हिपर्स बिकॉज़ वे हैव रिमूव्ड जो डी कंपल्शन फ्रॉम हम वे हैव रिमूव्ड डी प्रेशर फ्रॉम हम तू लर्न सो इन दिस इस डी टुडे सिविलाइज्ड यू डू नोट पट प्रेशर अपन आनेवन यू डू नोट मेक अन्योन यू डू नोट क्रिएट कंपल्शन पर अन्य स्टूडेंट तू स्टडी यू डू नोट क्रिएट इन एनवायरनमेंट ऑफ स्टूडेंट बिल विकम फ्राइटर्ड और दें ही माइट कम सुसाइड सो डू नोट डू एनीथिंग ऑफ दिस जस्ट लेट हम स्टडी एट हज ऑन फेस नो दिस आइडिया इस वेरी गुड बाय और वे नीड तू डू डेट अलसो क्रिएटिविटी इस अलसो आईएफ पार्ट ऑफ अवर से साइकोलॉजी कल मेक अप क्रिएटिविटी इस अलसो आते एसेंशियल पार्ट ऑफ अवर डेवलप सो डी स्टूडेंट तू टेक इनिशिएटिव आईटी इस वेरी गुड बट तू रिमूव एक कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन तू रिमूव जो सॉर्ट ऑफ एसेसमेंट तू रिमूव जो सॉर्ट ऑफ प्रेशर फ्रॉम डी स्टूडेंट तू परफॉर्म डी रिजल्ट बिल ओनली बी लजीनेस और साल्ट ऑफ एलईटीआरजी और एन लेग ऑफ फॉक्स ऑन स्टूडेंट 5 आईएफ आई गिव डी बुक तू टुडेस स्टूडेंट 85 आस्किंग डेट प्लीज स्टडी रीड दिस बुक दिस बुक है 600 पेज व्हेन आई यूज्ड तू रीड बुक्स आई यूज्ड तू को तू लाइब्रेरी और आई वुड सिलेक्ट डी बिगेस्ट बुक था आई कैन फाइंड डी सिक्स 600 पेज 800 पेज 1000 पेज 1100 पेज दिस शॉर्ट टॉप बुक आई यूज्ड तू बिंग तू मी होम और आई वुड रेडी और वुड ओनली मी आई हैव सीन मनी स्टूडेंट इन ऑफ मी आगे और यंगर थीं लव तू रीड बिग बुक्स टुडे आईएफ यू वांट तू डेट बुक यू बिल विकम फ्राइटर्ड सो बुक हज तू बी स्मॉल और बुक हज तू बी बिग इन साइज तू बी लोट ऑफ पिक्चर्स और आईटी ओनली दें सम वन बिल ट्राई तू रीड आईटी यू हैव तू हैव पिक्चर्स और यू हैव तू हैव बिग टाइप ऑफ फॉर्म साइज डेट तू बी बी ओनली दें पीपल बिल रीड डी बॉयज और गर्ल्स रेडी सो दिस इस हो एक्चुअली वे आर नोट सिविलाइजिंग ओवर सेल्फ दिस इस डी तू गोइंग बैकवर्ड इन टाइप गोइंग बैक टुवर्ड्स डी टाइम नोट एबल तू फॉक्स अवर मन ऑन 1.4 लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम तू स्टडी आईटी इन एन सच डेट दिस टॉपिक वे विकम मास्टर ऑफ दिस टॉपिक टुडे एवं विद सी दिस स्टूडेंट ऑफ बी टेक एम टेक एचडी दे हैव वेरी लिटिल अंडरस्टैंडिंग ऑफ देवर ऑन सब्जेक्ट मटर सो दिस मास्टरिंग ऑफ सब्जेक्ट मटर विकम एन एक्सपर्ट इन डेट मटर व्हाट इसे डी नेसेसरी थिंग्स डेट कंपल्शन फोर्स डेट प्रेशर डेट कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन डेट अब दिस बिल पावर दिस संकल्प शक्ति दिस इसे व्हाट इसे नेसेसरी इन ऑर्डर तू मास्टर टॉपिक और दिस इस डी से रिक्वायरमेंट विच इस नेसेसरी इन डी फील्ड ऑफ स्पिरिचुअल सपोज आई वांट तू मेडीटते पर वन ओवर आते आईटी इस नेसेसरी पर मी तू मेडिट्रेड पर वन ओवर बट आईएफ आई कैन डू आईटी दें व्हाट बिल हैपन डेट मी लाइक एन स्पिरिचुअल लाइफ ओके आई कैन क्लेम डेट ओके आई एम रिलिजियस परसों आई एम गोइंग तू टेंपल और आई ऍम रीडिंग होली बुक्स इतरा बट एंटिलियन अनलेस डी दे आफ्टर आई कुक दीक्षा सेफ पर एग्जांपल आफ्टर वन एयर आई तोक दीक्षा टुडे और आफ्टर 1 एयर और 2 एयर आईएफ आई एम नोट एबल तू सीट इन मेडिटेशन पर जब पद्य ना पर एटलिस्ट वन ओवर दें मी टेकिंग दीक्षा इस नॉटेड जो आईएफ यू यूजफुल तू मी दिस आफ्टर टेकिंग दीक्षा पर लेटेस्ट 2 इयर्स इन ऑर्डर तू मेक प्रैक्टिस आफ्टर टेकिंग दीक्षा पर वन वीक आई बिल डू जब हम धनाम से पर 10 मिनट्स और फोर अंदर मंथ आई बिल इंक्रीज मी टाइम तू 20 मिनट्स और अंदर मठ आई बिल इंक्रीज मी टाइम अंदर 10 मिनट्स लाइक दिस गिव आई को ऑन रिलीजिंग फाइव मिनट टाइम 10 मिनट पीरियड एवरी मंथ दें लेट मी टेक लेट स थिंक डेट वन एयर और 2 एयर आते डी मोस्ट आते डी और ऑफ डी तू इयर्स आईएफ आई कनॉट सी पर वन ओवर 60 मिनट्स इन जापान डेम मेडिटेशन दें मी टेकिंग दीक्षा हज नोट ऑफ बिन मैच उसे तू मी ओके आई हैव टेकन दीक्षा और गुरु हिल्स टेकन बाय रिस्पांसिबिलिटी और आई एम सीटिंग पर से सम फाइव मिनट्स 10 मिनट्स ड्यूरिंग डी डेट टाइम डेट इस ओके और दिस सॉर्ट ऑफ स्लो मेरे फोन बिल को ऑन से पर वन हज लाइफ पर डी नेक्स्ट लाइफ और डी नेक्स्ट तू नेक्स्ट लाइफ आईटी बिल को ऑन बट आईटी बिल नोट एक्सीलरेट ओवर प्रोग्रेस इन ऑर्डर तू एक्सीलरेट ओवर प्रोग्रेस इन ऑर्डर तू विकम तू डेवलप अवर्स स्पिरिचुअलिटी फास्टर और फास्टर वे नीड तू इंक्रीज टाइम देवर पर विच वे सीट ड्यूरिंग जब पंप और मेडिटेशन बट वन इस दिस पॉसिबल दिस इस पॉसिबल अन्य ओनली व्हेन वे अप्लाई योर बिल पावर व्हेन वे अप्लाई योर संकल्प शक्ति लेट आई वांट तू डू दिस और मटर आईएफ मी बैक इस हर्टिंग मी आईएफ देवर इस एन ब्लू सरकुलेशन हज टॉप फ्रॉम मी लेग्स और और आई एम फीलिंग वर्टिको आई कैप आई एम फीलिंग हंगरी आईएफ आई एम सीटेट पर 10 मिनट्स और सुद्दनली आई एम सॉर्ट ऑफ फिजिकल डिस्कॉम वे बिल हैव तू फॉरगेट और वे बिल हैव तू फोर्स ओवर सर तू सीट लंगर और लोंगर और ओनली दें वे कैन आफ्टर वे कैन सीट पर वन ओवर एटलिस्ट डेली दें वे कैन से डेट ओवर ट्रू स्पिरिचुअल लाइफ इस स्टार्टड वैसे तो स्वामी
स्वामी विवेकानन्द
विवेकानंद ने भी कहा है राजा हमारा अजनबी कहा है की सही जो आध्यात्मिक जीवन जो है कब स्टार्ट होता है जब हमको समाज ही प्राप्त होती है तो अभी समाधि प्राप्त होने को तो कितने जन्म जन्म मंत्र चले जाएंगे तो चलो अभी हम इतनी डर ना रहा देखें किंतु हम इतना तो प्रॉमिस कर सकते हैं अपने को आई बिल कैच दी चलो दिन में 1 घंटा में बैठ पाऊं तो मैं का सकता हूं की ठीक है चलो अभी मेरा थोड़ा बहुत है जो की स्पिरिचुअल लाइफ मेरी आर्मबीएच हुई है मैं अपने को सड़क का सकता हूं वरना क्या है हम लोग सब मुनुक्ष तो है मुमुक्षु इस अर्थ में की हां हमको ईश्वर चाहिए और ईश्वर को अपने के लिए हम क्या जनरली जो किया जाता है की इस तरह से सत्संग अटेंड करते हैं धर्म ग्रंथ का पाठ करते हैं फिर यात्रा कहानी पे अच्छे जो यात्रा स्थल होते हैं वहां पे हम जाते हैं मंदिर में जो है हम नियमित जाएंगे वगैरा सब मोक्ष लेवल पे हम लोग सब कुछ करेंगे किंतु मुलुक्ष से सड़क लेवल पे हम ग्रेजुएट कम होंगे जब हम एटलिस्ट दिन में 1 घंटा मिनिमम बैठकर के जब ध्यान कर सके तभी होंगे और ये 1 घंटा बैठना कब होगा जब मैं अपने मां को फोर्स करूंगा जब मैं अपने मां पे एकदम एक प्रेशर डालूंगा की ना करना ही होगा ये जो संकल्प शक्ति है बिल पावर है उसको मैं जो है अपने को ठाकुर है ना ठाकुर कथामृत में पढ़ेंगे हम लोग की एक बार ओ हो सकता है की उनके मां में कैसा कोई विचार आया होगा किसी डिफरेंट टाइप का तो एकदम उन्होंने गला गली देना शुरू कर दिया तो ये हमारे की बिगड़े ने भी ट्वीट किया जाए और जैसे की अपने मां में किसी को माया जड़ी उनके मां में प्रवेश करने का पर्यटन कर रही है और ठाकुर उसको जोर-जोर से गली दे रहे हैं निर्वस्त्र हो जाता है ठाकुर तो पता है वो सद्भाव में ए जाते हैं तो दिगंबर हो जाए तो दिगंबर हो करके अपने कमरे में चारों और घूम रहे हैं और सब भक्ति लोग बेचारे बैठ करके देख रहे हैं ठाकुर किया किसी विभिन्न विभिन्न प्रकार के ठाकुर के तो भाव अवस्थाएं होती थी तो ये भी एक विभिन्न रेट नए प्रकार की व्यवस्था है तो फिर नींद लगता हैं की हां हो सकता है की ठाकुर के मां में माया ने प्रवेश करने का पर्यटन किया होगा ठाकुर उससे नाराज हो गए और उसको गली दे रहे हैं तो इस तरह से चोर अपने मां में होना चाहिए तुम मेरे मां में प्रवेश करना चाहोगी मेरे मां में स्वामी जी को हो गया है तेरी माया चूड़ी माया की हिम्मत कैसे हुई की मेरे हृदय में प्रवेश करें या तो मुझे जो है की मुझे लुभाने का पर्यटन करें चले जो यहां से ऐसा करके एकदम जोर से उसको बोलना है तो ये जो अपने मां में ये जो एकदम में एक वीरभाव प्रकट करना अपने मां को एकदम मजबूत कर देना अपने और हृदय को एकदम सख्त कर देना जैसे की किसी भी तरह की वीकनेस अपने मां में ना प्रवेश है ये है संकल्प शक्ति और इसलिए यहां पे स्वामी जी कहते हैं की ये जो एंजॉयमेंट है ये भोग जो है वो लाखों शेर वाला एक साथ है एक ये सांप के एक सर कैट देंगे तो दूसरा सीट चलाएगा दूसरा कैट देंगे तो तीसरा चलाएगा इसके हृदय में यदि हम खंजर नहीं पोगेंगे इसके हृदय में यदि हम तलवार नहीं मारेंगे तो यह जो ₹1 लाख शेर वाला जो सर्प है वो वो जो है हमको छोड़ने वाला नहीं है यदि हम यह कहते हैं जैसे ठाकुर की कहानी है ना की एक-एक था तो एक आदमी था गांव में रहने वाला उसकी बीबी ने कहा की अच्छा देखो तुम तो कुछ कर नहीं का रहे हो ये मैं वो अपने पड़ोसी को देखो कैसे सब कुछ एक-एक करके त्याग कर रहा है यह उसने आज हो सकता है की उसने नए कपड़े पहने का त्याग कर दिया हो जो की नए जो पुराने कपड़े हैं वही पहना होगा आज जो है वो मिठाई वगैरा खाने के उसको अच्छा लगता है तो दूसरे दिन उसने उसका त्याग कर दिया तीसरी दिन जो है उसे तीसरी चीज का त्याग कर दिया उसको जो चीज अच्छी लगती है प्रतिदिन नियमित कर नियमित रूप से वो एक-एक चीज का चेक करता जाता है देखो उसकी तुम उसके सामने देखो और तुम देखो क्या है ये बीबी अपने पति को बोल रही है और तुमको देखो तुम वैसे ही यहां पे बैठ के बढ़िया मजे से बैठे हो बुक का पी रहे हो तो वो किसान जो है वो बोलना है खेती करें वो कहता है की अरे खेती का मैं नहीं करूंगा ट्रांसलेशन आ वह कहता है की अरे देखो इस तरह से तो त्याग नहीं होता है देखो आ की त्याग कैसे होता है ऐसा बोलकर के वह गमछा जो है अपने आ अपने कंधे पे डाला और उठ करके चला गया चला गया तो चला गया बस नहीं फिर से कभी घर वापस आया नहीं कभी उसने ये जो है जो फैमिली का जो कंफर्ट है उसमें फिर से रहा तो यदि त्याग करना है तो ऐसे ही त्याग करना है ऑफ कोर्स ऐसे तो हमारे लिए भी संभव नहीं है की फटकार के सब कुछ छोड़ के चले जैन एवं आ आपके लिए तो नहीं होगा हमारे लिए साधु के लिए भी नहीं है क्योंकि हमने सब कुछ छोड़कर के जब यहां पे आए हैं तो यहां पे ये जो आप देखिए की चारों और सब कर्मचारी रहे हैं यहां के कर्म के भीतर में हमको रहना है क्योंकि क्या है की इस तरह से त्याग करने से किंतु एक दूसरी चीज होती है एक बड़ा ही खतरनाक एक कंडीशन खड़ा होता है जिसके बाद में जो है स्वामी जी बाद में कहते हैं की जब हम त्याग करते हैं तब क्या होता है की एक अपना जो मां जो है बड़ा ही फॉर ट्रिपल हो जाता है उसे समय अपना जो मां है वो बड़ा ही कमजोर हो जाता है क्योंकि हमारा जो अवलंबन ये भोग हमारे अवलंबन है यह जो फैमिली अपना अवलंबन है या तो फिर जो दिन भर में हम जो कुछ कम करते हैं वो हमारा अवलंबन है उसको फाटक करके त्याग कर दिया तो क्या होगा की बाया अवलंबन चला गया और भीतर में तो समाधि की स्थिति प्राप्त नहीं हुई है तो ये बीच वाला जो पीरियड है डेट इस डी मोस्ट ऑफ वल्नरेबल पीरियड ऑफ वर्तक इस समय जो है अपने मां में माया का प्रवेश होता है और इसी समय जो है जो सड़क जो है वो भ्रष्ट होने का सबसे बड़ा चेस यही पे होता है ये जो बुद्धिस्म में अपने हिंदू धर्म में तो क्या है सबकी अपनी उसकी माटी देखकर के उसकी साइकोलॉजी देख करके उसको कम दिया जाता था यदि कहेंगे की इसकी कार्य करने की जो साइकोलॉजी है इसका जो बैंक ऑफ मन जो है उसकी जो मनोहर स्थिति जो है वह कर्म करने की है उसको वैश्य या तो शुद्ध शुद्ध और वैश्य कोई समाज में छोटी बात नहीं है वो शुद्ध जो है वो कर्म करता है वो खेत में कम करता है शारीरिक बाल वाला जो भी कार्य है वो करता है और वैसे जो है वो तो ट्रेड है मर्चेंट है यहां पर है समाज में कोई कम छोटी चीज नहीं है आज भी हम देखते हैं किसान को क्या हम थोड़ी ना कोई ऐसा कहेंगे की सामाजिक रूप से हमसे कम है वो तो एक प्रकार का कार्य करता है और जिसमें बहुत ही स्थिति जिसका मन जो है वो इंटेलेक्चुअल बैंक ऑफ मन है तो वो ब्राह्मण बनेगा जिसका की एडमिनिस्ट्रेटिव बैंक ऑफ मन है वारियर बेल्ट ऑफ मन है एग्रेसिव बैंक ऑफ मन है तो वो छतरियां होगा तो उसकी मेंटालिटी देखकर की उसको कर्म देते थे किंतु बुद्धिस्म आने से क्या हुआ उन्होंने सोचा की वन और जो और वन और जो सबको पकड़ करके साधु बना दो क्योंकि होना ही सर्वश्रेष्ठ रास्ता है अभी भी खूब होना सर्वश्रेष्ठ है यदि आप आध्या इस वीडियो में प्रगति करना चाहते हैं उसे बात में कोई माना नहीं है किंतु सबका तो वो वेट ऑफ मन नहीं है सबका तो वो साइकोलॉजिकल स्थिति ऐसा नहीं है की वो जो कर्मिक करते हैं उसको बाल जब ही से वो कर्म उसके पास से ले लो और बिना कर्म के उसको बिठा दो जैसे ही उसको बिना कर्म के बिठाएंगे और जो जैसे इंग्लिश में कहते हैं ना की एम्टी मन इस ओवर शो ऑफ डेविल खाली मां जो होता है वो शैतान का घर होता है तो जैसे मां में से सभी प्रकार का अवलंबन ले लिया कर्म सब तरह के ले लिया तो इस तरह के मां में जो है शैतान का वास होता है वो जो है उसका वो जो उसका जो भ्रष्ट होने की यदि शुरुआत होती है तो उसे समय होती है तो ये त्याग वैसे तो ग्रैजुएल ही करना है जैसे हम लोग भी घर छोड़कर के आए तो हमने सब कुछ त्याग नहीं कर दिया वहां पर जो कर्म करते थे तो यहां पर थोड़ा सा अभी जैसे कोई डॉक्टर है तो वहां पर वह डिस्पेंसरी में अपने घर में यदि किसी खुद की डिस्पेंसरी होगी या तो फिर किसी हॉस्पिटल में जाता होगा साधु हुआ है तो ऐसा नहीं है की वह ठाकुर कहते हैं ना एक केक करनी को जय में बैंड कर दिया तो अभी वो जय में पूर्तिया तो अभी जय में से बाहर निकाल के वो क्या करेगा धीरे-धीरे करें नाच में ना की आभार श्री करने गिरी करवा अर्थात यदि एक सड़क है किरानी अर्थात वो जो दुकान वाला है वो सड़क है वो साधना करने लगा तो वो क्या करेगा वो साधना करने के समय वो नाश्ता करेगा ने किया वो तो किरानी जो अपनी दुकान ही चलाएगा साथ-साथ में साधना करेगा तो वैसे ही यहां पे कोई डॉक्टर यदि साधु बने के लिए आता है लड़का तो उसको जो है वो जो उसको किसी डिस्टेंस अपनी तो इतनी साड़ी डिस्टेंस सारीज है तो किसी डिस्टेंस में बिठाएंगे किसी अस्पताल में वो सेवा देगा तो वो जो अपने भूख के लिए पैसा इकट्ठा करता था उसकी वजह जो है जल सेवा के लिए वो वही कम कर रहा है सिर्फ उसका जो डायरेक्शन है वो हमने जो अपने संघ में चेंज कर दिया है इंजीनियर है बाहर में कहानी वो मल्टीनेशनल कंपनी में जब करता था कोई लड़का तो यहां पे आया तो अभी वही कम कर रहा है विद्या मंदिर है अपनी स्कूल हैं बड़ी-बड़ी वहां पे जो है वो वो वहां पे इस तरह का वो इंजीनियरिंग कई कम कर रहा है जिनको भी वो लोग कल्याण के लिए कर रहा है तो उसका जो कर्म है उसकी दिशा चेंज कर दी है कर्म उससे नहीं ले लिया गया है तो यहां पे भी हमको देखना है जैसे हमने कल देखा था ना की स्वामी जी कहते हैं की ब्लेस्ड अर्थ ठोस हूं कैन नोट रीड बिकॉज़ दे हैव वन थिंक ली तू टेक हम आवे फ्रॉम गॉड मैं अर्थात की जिनको पढ़ाई लिखी नहीं आई है उनके ईश्वर उनके ऊपर में ईश्वर का आशीर्वाद है क्योंकि वो एक चीज कम हो गई जो की उनको ईश्वर से दूर ले जाएगी वरना तो फिर वो पढ़ाई में ही इतने ग गए की फिर वो ईश्वर के सामने देखा नहीं तो जैसे स्वामी जी का एक्सट्रीम स्टेटमेंट है किंतु जब स्वामी जी के ही अप्लाई करेंगे तो नहीं होगा क्योंकि स्वामी जी खुद कितने विद्वान थे और ये सब खाने के बाद में भी वो फिर उनको शर्म नहीं आई है की चलो उन्होंने एक बार ऐसा स्टेटमेंट दे दिया तो फिर वो खुद पढ़ाई लिखी छोड़ दे ऐसा नहीं फिर वो पेनिस है तो फ्रेंच लैंग्वेज सीखना शुरू कर देते हैं जर्मन जाता है जर्मन वाउचर लैंग्वेज उसको बोलते हैं द्वेष द्वेष लैंग्वेज सीखना शुरू कर दिया तो वो ऐसा स्टेटमेंट भी देते हैं वन है फिर वो नए-नए लैंग्वेज सीखने लगता हैं तो क्या वो जो दोष है या फ्रेंच है उसको सीकर के क्या वो ठाकुर से दूर नहीं हो गए वो शर्म भी नहीं आई दोनों चीज एक साथ में करते हैं तो स्वामी जी के बड़े में हमको ये देखना है की उनके जो स्टेटमेंट होते हैं वैसे बड़े ही एक्सट्रीम होते हैं क्यों है ऐसा एक्सट्रीम स्टेटमेंट क्यों देते हैं जिससे की अपने मां पे एक इंपैक्ट हो उसका अपने मां पे एक असर हो स्ट्रांग उसका एक इफेक्ट हो फिर वो जो स्ट्रांग इफेक्ट है धीरे-धीरे परकलेट हो करके वो अपने जो सब कॉन्शियस मन में जाएगा और फिर वहां से र करके वो कम करेगा स्वामी जी ने कहा है ना की जो एक आदमी यदि एक गुफा में बैठकर के सालों तक ध्यान करने के बाद में यदि पांच अच्छे विचार वो है तो क्या होगा की उसे आदमी को फिर गुफा में से खड़े होकर के जगत में जाकर के चारों और वो चारों और प्रचार करने की जरूर नहीं पड़ेगी यह जो पांच विचार है वही इस गुफा की दीवारों को भेद करके इस समाज में जाएंगे और लोगों के मध्य से वो विचार कम करें तो ये स्वामी जी ने ये सब विचार हमको दे दिए हैं की जो है की भोग जो है वो लाखों शेर वाला एक सांप है और उसके हृदय में जब तक खंजर नहीं भिगोगे जब तक उसके एक-एक सर काटने से वो त्याग नहीं होने वाला है उसके हृदय में ही अटैक करना होगा उसके हार्ट पे ही अटैक करना होगा तो इसे एक्सट्रीम स्टेटमेंट उन्होंने हमको दे दिया है हमको स्टेटमेंट को याद रखना है और हमको किंतु त्याग जो है वो एक-एक सर कैट के ही करना पड़ेगा अदर वाइस यदि एक साथ में उसके हृदय में यदि हमने खंजर मार दिया तो क्या होगा की सब करना त्याग करने पढ़ेंगे और यदि सबकर मत त्याग कर दिए तो हम करेंगे क्या किस ओलंपिक को लेकर रहेंगे मनुष्य कर्म लेकर राहत है बिना कर्म के मनुष्य र नहीं सकता वो र सकते हैं वो शंकराचार्य जैसे लोग ठाकुर जैसे लोग लाखों जन्म की साधना के बाद में मां इतना शुद्ध परिषद उतना वो जो स्ट्रांग हो गया है की कर्म उसके पास में भी नहीं फिरता या फिर ईश्वर के अवतार स्वयं है जिसको की कर्म ज्ञान भक्ति ज्ञान जिनके लिए एक हो गया है समरस हो गया है तो वो उनके लिए है उनको तो कर्म लेकर ही रहना है और इसलिए हमको जो है स्वामी जी का स्टेटमेंट जान लेना है किंतु त्याग जो है सर्प का इस सांप का एक-एक सर कैट के ही करना है
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर कहते हैं मास्टर महाशय क्या लिखने हैं कुछ कुछ प्रैक्टिकल पॉइंट जो है की मास्टर ठाकुर हमको दे देते हैं हम लोग सोचते हैं ना की बहुत सारे लोग ऐसे कहते हैं की मेरा तो कोई प्रमोशन नहीं हुआ क्योंकि मैं चमचागिरी नहीं कर सकता हूं जिन्होंने चमचागिरी की उनका प्रमोशन हो गया मैं तो अपने सिद्धांत में बड़ा पक्का किंतु देखिए की यदि जगत में रहते हैं तो लोगों के साथ में आपको रिलेशन बनाना ही पड़ेगा यदि कोई आदमी अच्छा कम कर रहा है तो उसके अब थोड़ी बहुत प्रशंसा नहीं करेंगे उसको प्रशंसा अर्थात हम उसकी चमचागिरी नहीं कर रहा है एक जुनून हम अप्रिशिएसन कर रहा है अप्रिशिएसन जो है फिर ये चित प्रसाद क्या है मैत्री करुणा मुदिता और अपेक्षा मैत्री अर्थात एक मित्रता का भाव अपने मां में होना चाहिए करुणा अर्थात की एक कंपैशन दूसरों के प्रति एक लगे का भाव होना चाहिए यदि उसके साथ में कुछ बड़ा हो गया तो अरे चलो मैं उसको जाके हेल्प करता हूं अपने साथ हूं मैं यहां पर खास ऐसा है यदि किसी को बुखार हो गया या कोई सातों बीमा हो गया सब सतुचा करके पूछेंगे की महाराजा आपका कोई कम है तो हमको दीजिए कपड़े धोने हैं घर में झाड़ू पूछा लगाना है खाना ले आना है किचन में नहीं जा पाएंगे सबके साथ में डाइनिंग हाल में नहीं जा पाएंगे पंगा तो मैं जाकर नहीं बैठ पाएंगे मैं खाना आपके लिए ले आऊंगा सुबह साधु जो है जाकर के उनको पूछेंगे तो ये जो घोड़ा है जो जिसको मदद की जरूर है उसको उसे समय मदद करनी है मैत्री जो है हम जिसके साथ में र रहे हैं जिसके सामने हम मिल रहे हैं अमेरिका में जाएंगे ना खास करके ऐसा होगा की इन लोगों का एक फ्रेंड्लीनेस है देखा है स्वामी जी ने भी ये नोट किया है यदि आप जॉगिंग पर जा रहे हैं बहुत सारे लोग जॉगिंग करते हैं सुबह में और किसी के सामने साथ में मुलाकात हो गई अभी ना ही उसको कभी देखा है ना ही उसके साथ में फिर कभी मुलाकात होगी फिर भी बढ़िया वजह से हंसना मुर्रा करके गुड मॉर्निंग उसको बोल दिया यहां पर मैं जब कंप्लीट में था तो मैं मेरे जो इंचार्ज महाराष्ट्र हमारे डिपार्मेंट टिंचर बेलूर मठ में वह थे आत्मरूप जी महाराज वो ही इस अमेरिकन है मैन व्हाइट अमेरिकन उन्होंने सन्यास लेकर के हमारे साथ में आकर के अभी अमेरिकन है किंतु संस्कृत श्लोक इस तरह से बोलते हैं जैसे हम जो भारत में बड़े हुए हम भारतीय हमारे से ज्यादा स्पष्ट उच्चारण उनका होता है तो इतने मतलब वो अपने को उन्होंने हिंदू परंपरा में दल दिया था तो अभी वैसे तो बाहर से पूरे हिंदू हो गए हैं किंतु उनके भीतर में जो ये जो अमेरिकन का वो जो एक एक्सपेरिमेंट राहत है ना तो इतना फ्रेंडली सबके साथ बिहेव करेंगे कोई भी एकदम और सीनरी इतने उम्र में 80 साल है उनकी उम्र ऑलमोस्ट 80 इयर्स किंतु अभी एकदम नया ब्रह्मचारी भी आएगा ना तो उसको इतना फ्रेंड भी उसके साथ में बात करेंगे की उसको पता नहीं चलेगा की उसको लगेगा की नहीं क्योंकि ये अपने 80 साल इतने सीनरी हैं उससे तो ये जो फ्रेंडशिप जो है ना वो क्वालिटी हमको ये डेवलप करनी चाहिए ये विदेश में यह सब बहुत होता है कुछ मतलब आम सेंस कहते हैं तो फिर ठाकुर भी यहां पर जब इसके पास में आते हैं मैत्री करुणा मुदित और अपेक्षा तो ये जो विद्यासागर के पास आते हैं तो बढ़िया मजे से का दिया की अभी तक मैं जो छोटी-छोटी नदी और केन का पानी पिता था आज मैं समुद्री में आकर के मिला हूं तो विद्यासागर कहते हैं वही तो विनम्रता तो दिखानी पड़ेगी तो का देते हैं की नहीं इसको खर पानी होता है तो ठाकुर सामने कहते हैं तुम तो खर पानी क्यों होने लगे तुम तो सीरियस सागर हो अमरूद के सागर हो तो ऐसा कोई प्रशंसा नहीं की है मैंने इस अर्थ में नहीं की उससे कुछ बेनिफिट लेना चाहता है एक जेनयूआईएनजी अप्रिशिएसन है एक जो ह्यूमन नेचर है सिविलाइज नेचर है स्वामी विवेकानंद कहते हैं की बिफोर यू बी कम है मॉम विकम ए जेंटलमैन सतु होने से पहले जेंटलमैन बानो जेंटलमैन होना एक बहुत बड़ी हॉलीडे है सोसाइटी में रहना है समाज में रहना है 10 लोगों के साथ में हमको डीलिंग करना है एक जेंटलमैन नेचर नहीं होगा छोटी-छोटी चीजों में गुस्सा ए जाएगा या तो फिर ईर्ष्या ए जाएगी अरे ये मेरे साथ वाला जो है वो उसका प्रमोशन हो रहा है उसको लोग एफिशिएंट कर रहे हैं उसकी प्रशंसा कर रहे हैं तो मेरे मां में द्वेष का भाव प्रकट हुआ तो यह सब चीज जो है ना वो हमको पशुओं की और ले जाति है मनुष्य की और ले जान के लिए देवत्व अपना तो सिर्फ मनुष्यता तो नहीं है ना अशुद्धता से मनुष्य तो मनुष्यता से देवत्व की और जाना है तो देवता की और ले जान वाली ये जो चित प्रसार है उसको हमको डेवलप करना है और ठाकुर हमको यही शिखा रहे हैं हालांकि वो नाम नहीं देते हैं मास्टर महाशय भी उसके ऊपर में कंट्री नहीं करते हैं किंतु देखिए कथामृत कितना बड़ा है हजार पेज का है तो सब चीजों के ऊपर में कंट्री करने को जाएंगे तो कब खत्म होगा तो इंसिडेंट सब दे देते हैं उसकी व्याख्या जो है हमको अपने से करनी है फिर ठाकुर क्या कहते हैं की तुम्हारा कर्म तो सात्विक कर्म है यह सत्व का राजस्व है सत्व गन से दया होती है जैसे हमने कल भी देखा था की कर्म दो तरह का होता है मैं अपने भोग के लिए कर्म करूंगा तो वो तमस का कर्म हो जाएगा तामसिक कर्म हो जाएगा और यदि में लोक कल्याण के लिए कर्म करता हूं या तो साधना करता हूं साधना भी तो एक कर्म है सब ग्रंथ का पाठ करना मंदिर में जाना सत्संग करना फिर जो आश्रम की एक्टिविटी से उसमें इंवॉल्वमेंट होना ऐसा बोला एनटीआर तो ये भी तो कर्म है तो ये सात्विक कर्म है सात्विक कर्म जो है उसकी जंजीर जो है वो होती है वैसे किंतु वो सोनी की जंजीर होती है फटाफट करके टूट जाएगी और तामसिक कर्म है उसकी लोहे की जंजीर है वो इतनी आसानी से टूटने वाली नहीं है कर्म मंत्र जंजीर माता जंजीर में भगत है हमको बंधन में बंता है किंतु वह जो सात्विक कर्म है वो हमको धीरे-धीरे ईश्वर की और ले जाएगा अपने कर्म धीरे-धीरे कम करता रहेगा और है तामसिक कर्म जैसे यहां पर वह हमने कहा ना की मैं जा तू कम वालों को खाओगे ना शर्मियां थी हम यदि तामसिक कर्म जितने ही चाहे करते रहे वो उसकी लालसा लिप्स उसकी वासना बढ़नी ही जाएगी कम नहीं होती तो इसीलिए ठाकुर कहते हैं विद्यासागर को तुम कर कम कर्म कर रहे हो बहुत अच्छी बात है ऑन वन हैंड ठाकुर ही कहते हैं की एकता फरमाना दिया बच्ची अर्थात एक कर्मनाशा बोल के एक नदी है उसमें मैंने वो उसमें मैंने उसमें में डुबकी लगा दी तूने बैक गया जैसे हम वो इलाहाबाद जाकर के वो संगम में डुबकी लगाते हैं तो संगम में स्नान करते हैं तो मानते हैं की अपने जो पाप है वो सब चले गए हालांकि ठाकुर कहते हैं की आप क्या करते हैं फिर वो पेड़ के ऊपर में बैठे रहते हैं किनारे पे और जैसे ही हम वो संगम से बाहर है तो फिर से वो पेड़ के ऊपर में से चलांग लगा के फिर से अपने सर पे स्वर हो जाते तो उसका अर्थ कुछ रिचुअल करने से नहीं चलेगा जन्म मंत्र की साधना करनी पड़ेगी तो किंतु यहां पर जो ठाकुर जो कहना चाहते हैं की जो सात्विक कर्म जो है वो सात्विक कर्मद धीरे-धीरे अपने कर्मों को कम करेंगे और इसीलिए वो बिटिया सागर की इतनी प्रशंसा कर रहा है हालांकि ठाकुर ने खुद कहा है की कर्मनाशा नदी के बड़े में उन्होंने बताया है और इस नदी में और डुबकी देने के लिए भी बोला है अर्थात की कर्म का वो जो है कर्म को नस करने के बड़े में बोला है किंतु जो है की कर्म नष्ट का जो स्टेज जो है ना पहले तामसिक कर्म अर्थात हम लोग अपने भोग के लिए कर्म करते हैं अपनी नाम और फेम के लिए कर्म करते हैं प्रेस्टीज अपने के लिए कर्म करते हैं वहां से एक स्टेज ऊपर आकर के लोक कल्याण के लिए निस्वार्थ कर्म करना फिर वहां से कर्म स्थिति में जाना यहां अब तामसिक कर्म कर रहे हैं सीधे अपने कर्म हैं स्थिति पे जान पे स्टेज पे जान में जंप लगाया तो बीच का जो कर्म हैं जो पीरियड जो है वो पीरियड में माया अपने मां प्रवेश करेगी अपने को पूरा करप्ट कर देगी वेरी डेंजरस की हम लोगों ने बचपन से ही कर्म करते ए रहे हैं स्वीडनली कर्म का त्याग कर दिया तो क्या होगा वो माया वितरण प्रवेश करेगी अपने मां को तबाह कर देगी इसलिए साधना जो है साधना हमेशा सात्विक कर्म की आरंभ करके की जाति है तो इसलिए यहां पे ठाकुर कहते हैं की तुमने सात्विक करना शुरू कर दिया है तो तुम मानो ना मानो जनों की ना जानो विश्वास करो की ना करो तुम सादात हो चुके हो अभी आगे ठाकुर कहते हैं सिद्ध तो तुम हो तो विद्यासागर हंसने लगे की महाशय तो ठाकुर भी हंसते-हंसते कहते हैं आलू परवल सिद्ध होने से नरम हो जाते हैं तो तुम भी बहुत नम हो तुम्हारी ऐसी दया अर्थात यदि किसी का नेचर जो सौम्या स्वभाव हो जाता है तो उसका अर्थ है ठाकुर जैसा कहते हैं की जब हम ये जो फल है या तो यह जो सालबा जी ये जो आलू है परवल है उसको हम जब बॉयल करते हैं तो कैसे सॉफ्ट हो जाते हैं तो वैसे ही आदमी के भीतर ये जो सत्गुण सत्संस्कार सत्कर्म ऐसा करके जब उसकी जो मां का सु संस्कृतिकरण होता है तो वो मनुष्य जो है सौम्या उसका स्वभाव हो जाता है वरना किसी किसी का स्वभाव भी इतना वो जो पशुवत होता है छोटी-छोटी चीजों में गुस्सा हो जाएगा यह मतलब बहुत ही नेगेटिव टाइप का उसका स्वभाव यानी वो जो आलू की तरह बिना बॉयल्ड किया हुए आलू की तरह वो कठिन होता है वो हार्ड होता है किंतु बेल कर दिया है जो आलू को तो बड़ा सॉफ्ट हो जाता है तो वैसे ही जो है तुम्हारा जो मां है सु संस्कृत हो गया है सिद्ध सिद्ध शब्द को दो अर्थ में लेना है सिद्ध का एक आध्यात्मिक अर्थ है की उसने जो है आध्यात्मिक जगत में जो अपने वाली चीज हैं उसे वो चीज को उसने का लिया है उसको सिद्ध कहते हैं और बंगाली में सिद्ध अर्थात बॉयल की हुआ किया हुआ जैसे आलू को बॉयल करते हैं तो उसको कहते हैं आलू को सिद्ध करना तो ठाकुर ने जो है शब्दों के ऊपर में उन्होंने राम की है यहां पे किसी शब्द के ऊपर में उन्होंने भी प्रयोग करके एक एक मतलब डिवाइस उसको उसे किया है तुम सिद्ध हो गए इसको दो अर्थ में ले सकते हैं तुम तुमको बॉयल कर दिया गया है जैसे आलू को इस तरह से सॉफ्ट हो गए हो और तुमको आध्यात्मिक जगत में जो है बहुत कुछ प्राप्त हुआ है आध्यात्मिक जगत में तुमको कुछ है आशीर्वाद मिला है ईश्वर का भले ही चाहे तुम उसको स्वीकार करो ना करो इसलिए तुम सॉफ्ट हो गया मत करता है कौन रहेगा की ठाकुर जो है निरक्षा है तो कहते हैं तो तुम भी नम हो तुम्हारी ऐसी दया तो विद्यासागर फिर से हंसते-हंसते कहते हैं की पिसा उड़द जो है सिद्ध होने पर तो सख्त हो जाता है तो सब लोग हंसना शुरू करते हैं अभी मुझे पता नहीं है पीस उर्द क्या है उसका बंगाली भी मैंने पढ़ा होगा तो वो भी कुछ पता नहीं किंतु एक ऐसी कोई चीज जिसको सिद्ध करने से सत्य हो शक्ति है तो वो विद्यासागर तो फिर क्या है की थोड़ी सी तो विनम्रता दिखानी पड़ेगी ठाकुर प्रशंसा पे प्रशंसा किया जा रहे हैं और वह कुछ सामने ठाकुर की प्रशंसा नहीं कर रहे क्योंकि ठाकुर के बड़े में शायद जानते नहीं है या तो फिर जो ठाकुर जी चीज को रिप्रेजेंट करते हैं की संसार त्याग करके आ आपको जो है आध्यात्मिक रास्ते पे जाना शायद विद्यासागर इस बात को पसंद ना करते हो इसलिए बाद में उन्होंने कहा था की क्यों तुम बार-बार जो है की दक्षिणेश्वर जा रहे हो सिर्फ तुम जा रहे हो इतना नहीं ये छोटे बच्चों का ब्रेनवाश कर रहे हो छोटे बच्चों को तुम जिसमें की ये जो पालतू है यह जो नारायण है यह सब मास्टर महाशय के स्टूडेंट है देखा की उनमें जो है की सात्विक उनकी एक उनका मन देखा की वो बड़े सत्तरिक है तो फिर ठाकुर के पास ले जाता है फिर पैरंट लोग जो है वो कंप्लेन करेंगे विद्यासागर को की वहां पर आपकी एक मास्टर महाशय है क्योंकि हमारे बच्चों का दिमाग खराब करते हैं तो इसीलिए वो जो विद्यासागर जो है वो ठाकुर के सामने प्रशंसा इसलिए नहीं कर पाते जब ये अदर वाइस तो कोई ऐसा का अरे आप बहुत विद्वान है तो फिर मुझे तो ऐसा कहना पड़ेगा की आप बहुत अच्छा भजन ग लेते हैं कोई महाराज मुझे बोलेगा की तुम अच्छा एडिटिंग कर ले तो हो तो फिर तो मुझे सामने वो कंप्लीमेंट्री रिटर्न करना पड़ेगा महाराज जी मैंने सुना है की अब मैंने सुना है की मुझे पता है क्या इतना अच्छा भजन गेट हैं की सब भक्ति लोग जो है आपका भजन सुन करके उनके मां में बड़ा ही जो है श्रद्धा भक्ति का वो उदय होता है या तो फिर कोई मुझे बोलेगा की अच्छा तुम जो है की अच्छे से पढ़ाई लिखी कर देता हूं तो मुझे उनको कहना पड़ेगा महाराज आप इतना अच्छा अकाउंट कर देते हैं इतना अच्छा अकाउंट मेंटेन करते हैं जीएसटी वगैरा जो सब आजकल इतना सब झमेला है ना अकाउंट में फॉरेन कंट्रीब्यूशन आता है तो उसका सब प्रॉब्लम है आप इतना अच्छे से अकाउंट मेंटेन करते हैं की हमारा ऑडिटर का कहना है की अपने अकाउंट में कहानी पे भी कोई भी प्रॉब्लम नहीं है एकदम परफेक्ट चल जाए तो कोई अपने को कंप्लीमेंट देता है तो इसे आम सेंस है की कंप्लीमेंट को रिटर्न करना है किंतु विद्यासागर का यहां पर एक है की जैसे हमने उसने बाद में थी की वो मास्टर महाशय वगैरा जो ठाकुर के पास जाते हैं उसका उनको पसंद पसंद नहीं था वह ठाकुर की यह जो स्पिरिचुअलिटी का जो टीचिंग है वह भी उनको पसंद नहीं था शायद हमेशा अनुमान कर सकते हैं तो सामने कंप्लीमेंट देने की बजे वो विनम्रता दिखाने का पर्यटन करता है ठाकुर कहते हैं तुम सिद्ध हो गए हो अर्थात तुम सु संस्कृत हो तो ये आपके सामने से कहते हैं की ये जो एक ऐसा किस्सा औरत ऐसा कोई एक चीज ऐसी है जिसको सिद्ध करने से किंतु वह तो कठिन हो जाति है यानी की आपका यह जो सिद्ध करने की जो बात है वो सब समय कम नहीं करती है तो ठाकुर कहते हैं की तुम वैसे क्यों होने लगे खाली पंडित कैसे हैं जैसे की मानो पैक फल का अंश जो अंत तक कठिन ही र जाता है वे ना इधर के है ना उधर के गीत जो है बहुत ऊपर उड़ता है पर उसकी नजर जो है जो नीचे पे कूड़ा जो करता राहत है कचरा जो राहत है इस के ऊपर में रहती है जो खाली पंडित है वे सुनने के ही पंडित है पर उनकी कामिनी कंचन पर ए शक्ति होती है गिद्ध की तरह पूछते हैं आसक्ति का अभिक्षा के संसार में है आसक्ति का घर जो है अविद्या के संसार में है दया भक्ति बैरागी ये विद्या के ऐश्वर्या है अर्थात यदि ये कहते हैं की तुम सिद्ध होने से जो कड़े हो जाते हो तो ऐसा तुम्हारे साथ में क्यों होने लगा क्योंकि जैसे गीत जो है वो दो तरह के पंडित होते हैं दो तरह के आप लोगों को कहेंगे की एक जो है की वो जितना ही आकाश में उड़ेंगे गीत की तरह जितना ही उड़ते रहे हो जितने उड़ते रहे नजर होती है जमीन पर कहां पूरा कचरा पड़ा है वहां पे उसको शिकार पकड़ेगा और जहां पर डेड बॉडी पड़ा है उसको वो खाएगा किंतु जो है जो सही-सही पंडित है उसमें जो दया विद्या प्रेम भक्ति श्रद्धा ये सब सदगुण जो है धीरे-धीरे प्रकट होना शुरू होंगे इसलिए जो है तुम आलू की तरह सिद्ध हो नहीं की वो पिछले उर्द की तरह सिद्ध होने के बाद कठिन हो गए अच्छा तो आज ही था कल फिर से मिलते हैं