प्रार्थना
ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः आज जिस टॉपिक को हम देखने वाले हैं स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए भाषणों में से एक आज स्वामी जी डिस्कस करने वाले हैं कि बुद्धिज्म का बौद्ध धर्म का भारत के ऊपर में क्या प्रभाव हुआ और हमको एक प्रश्न हो सकता है कि भविष्य के भारत की नई भविष्य के भारत का नव निर्माण करने के लिए स्वामी जी जो प्रवचन दे रहे हैं उसमें इतिहास का क्या कार्य है तो इतिहास का कार्य यह है कि स्वामी जी सबसे पहले तो हमको भारत की जो अवनति हुई उसका कारण बताते हैं इस अवनति का कारण समझ कर के तभी हम नए भारत का जब निर्माण करेंगे तो जिस कारण से यह अवनति हुई उस कारण के बारे में हम सजा ग रहे सावध रहे और वही गलतियां फिर से न दोहराए तो एक तो स्वामी जी ने कहा कि जिस समय भारत स्वामी जी के समय का जो भारत था 18 सेंचुरी का 19 सेंचुरी का उसमें ऑलरेडी आजकल जिसको हम एनजीओ कहते हैं उस तरह की वहां पर रिफॉर्म सोसाइटीज व शुरू चालू हो गई थी ब्रह्म समाज है आर्य समाज है वगैरह और उन्होंने नए भारत के निर्माण के लिए सब अपने सजेशंस कहो या तो फिर अपनी परिकल्पना एं कहो देना शुरू कर दिया था तो उस सबके बारे में स्वामी जी का यह कहना है कि देखिए कि आपको यदि ऐसा कहना है कि भारत में जो नए आने वाला जो है उसमें अंधश्रद्धा एं ना हो उसमें बाल्य विवाह ना हो यह बाल्य विवाह के ऊपर में स्वामी जी का बड़ा ही क्रोध था कई जगह पर उन्होंने लिखा है कि इस तरह के कुछ-कुछ ऑर्थोडॉक्स होते हैं लोग जो लोग समझते हैं कि 10 साल
“Somehow, the parents must dispose of a girl in marriage, if she he nine or ten years of age! And what a rejoicing of the whole family if a child is born to her at the age of thirteen! If the trend of such ideas is reversed, then only there is some hope for the ancient Shraddhâ to return. And what to talk of those who will practice Brahmacharya as defined above—think how much faith in themselves will be theirs! And what a power for good they will be!” -- Swami Vivekananda
की बच्ची का गर्भाधान कैसे हो उसी में उनका जैसे कि पूरा धर्म आ जाता है यानी कि जब भी ऐसा कहा जाए कि छोटी बच्ची का विवाह नहीं होना चाहिए वैसे ही यह लोग एकदम नाराज हो जाएंगे कुछ ऑर्थोडॉक्स लोग और यह कहना चलाएंगे कि हमारा हिंदू धर्म खतरे में है किंतु देखिए कि मैंने छोटी बच्ची का विवाह करके कोई हिंदू धर्म कोई साबित नहीं हो जाता हिंदू धर्म का यह कोई लक्षण भी नहीं है यदि सही सही हिंदू धर्म देखना है तो वह है अपने उपनिषद अपनी गीता और अपना ब्रह्मसूत्र तो जो वेदांत है वह है हमारे सनातन धर्म का फाउंडेशन नहीं कि यह देश काल से यह जो सब पिछले 1000 साल से जो सब कचरा हम इकट्ठा करके आए हैं जो प्रथाएं हम इकट्ठी करके आए हैं यह सब कोई हिंदू धर्म का एसेंशियल हिस्सा है ही नहीं तो यह बात एक बार समझने से ही धीरे-धीरे करके हमारा यह सनातन धर्म पुनः जागृत होगा तो इसी सिलसिले में
भारत में रुढिचुस्त और रिफॉर्म सोसाइटी वालों में निंदा-प्रतिनिन्दा का भयानक परिणाम
स्वामी जी कहते हैं कि और एक गलती हम करते हैं जैसे कि रिफॉर्म सोसाइटी वाले एक सबसे बड़ी गलती कर देते हैं कहते हैं कि यह लोग पहले तो वे लोग कहते हैं कि हिंदू धर्म में जितनी भी अंधश्रद्धा एं हैं उस सबको पहले तो गाली देना शुरू करते हैं तो स्वामी जी कहते हैं देखिए कि ये दोनों एक्सट्रीम गलत है जो ऑर्थोडॉक्स लोग हैं वे लोग कहते हैं कि 10 साल की बच्ची का गर्भाधान हो उसी में जैसे कि हिंदू धर्म का पूरा एसेंस आ गया है यह भी गलत है संपूर्ण रूप से गलत है और यह लोग रिफॉर्म सोसाइटी वाले वे लोग जब यह कहना शुरू करते हैं कि नहीं हिंदू धर्म की जितनी भी अंधश्रद्धा एं हैं सब दूर फेंक दो और उसमें फिर क्या करते हैं ये लोग वो जैसे हिंदी में इंग्लिश में मुहावरा है टू थ्रो द बाथ टू थ्रो द बाथ वाटर अलोंग विद द बेबी यानी कि एक छोटे से टब में पानी डाल कर के अपने एक छोटे से बच्चे को उसमें आप स्नान करवा रहे हैं बच्चे का स्नान हो गया तो फिर वह जो बाथ वाटर है वो उसको फेंक देना है किंतु जो मूर्ख है कोई इस तरह का कि वो बाथ वाटर को फेंकने के साथ में वह बच्चे को भी फेंक दिया पहले तो बच्चे को तो उस टब में से निकालो फिर वह स्नान किया हुआ पानी फेंको तो इस तरह से यह रिफॉर्म सोसाइटी वालों का कहना है कि जितनी भी अंधश्रद्धा एं हैं साथ-साथ में जितने सनातन सत्य हैं वह सब गलत है सबको यहां से हटा दो तो यह दोनों एक्सट्रीम गलत है पहले तो स्वामी जी यह कहते हैं फिर बाद में स्वामी जी और थोड़ा सा डीप में जाते हैं
भारत के पतन का मूल कारण: बौद्ध धर्म में भ्रष्टाचार
कहते हैं कि यह सब अंधश्रद्धा है जो आज हम देख रहे हैं जिसके बारे में रिफॉर्म सोसाइटी वाले बड़े नाराज है किंतु उनको यह नहीं पता है कि किस तरह से यह अंधश्रद्धा एं दूर की जाए तो अंधश्रद्धा हों का मूल कहां पे है जड़ कहां पे है तो हमने कई बार सोचा भी है सुना भी है कि पिछले 1000 साल से भारत पर जो आक्रमण होते रहे भारत को जो एक के बाद एक विदेशियों ने गुलाम बना कर के रखा उसमें अपने सेल्फ डिफेंस के लिए हो सकता है कि हम लोगों ने यह सब पर्दा प्रथा है बाल्य विवाह प्रथा है सती प्रथा है यह सब हमने अपनी रक्षा के लिए डेवलप किया हो इस तरह की एक थिरी है और वह उसका मेंशन कई जगह पर आपको मिलेगा किंतु यहां पर स्वामी जी और एक थिरी लेकर आते हैं स्वामी जी कहते हैं कि बुद्धिज्म का जो डिग्रेडेशन भारत में प्रारंभ हुआ उसमें से ही सर्वप्रथम भारत की अवनति या तो भारत का डिग्रेडेशन स्टार्ट हुआ तो बुद्धिज्म के बारे में स्वामी जी का जो यह विचार है वह बड़ा यूनिक है स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि भारत में आजकल इस तरह की प्रथा है कि लोग सभी लोग भगवान बुद्ध की बड़ी वाह-वाह करते हैं बड़ी प्रशंसा करते हैं उनके उदार दिल का उदाहरण देते हैं कहते हैं कि देखिए भगवान बुद्ध की जो उदारता है उसी ने हिंदू धर्म की रक्षा की थी वरना तो भगवान बुद्ध के आने से पहले जो हिंदू धर्म ओरिज ल वैदिक संस्कृति थी उसमें जो गिरावट आई थी उसमें जो अवनति अधोगति आई थी उसमें से तो भगवान बुद्ध ने ही हमको बचाया तो यह बात सही है कि बुद्ध का जो विशाल हृदय था बुद्ध की जो उदारता कंपेज था धर्म को जैसे कि यह विधि विधान के दायरे में से पिंजरे में से निकाल कर के जनसाधारण के सामने उन्होंने रखा और कहा कि बाह्य विधि विधान आप जितना भी करते रहिए जब तक आपका हृदय परिवर्तित नहीं होता तब तक आप आध्यात्मा में आगे नहीं बढ़ते तो यह उपदेश जो बुद्ध ने दिया यह उपदेश की वजह से ही जो उस समय का वैदिक संस्कृति का जो डिग्रेडेशन हुआ था डिक्लाइन एंड फॉल हुआ था उससे हम लोग बचे यह बात बिल्कुल सही है किंतु फिर 1000 साल ना कि इतना यह जो बौद्ध धर्म चला उसके बाद में बौद्ध धर्म में भी भी उसी तरह का डिक्लाइन होना शुरू हुआ उसी तरह के जो सब प्रॉब्लम्स दिखने शुरू हुए जो कि जिसकी वजह से फिर आखिर में भारत में पुनः वही अवनति का अधोगति का लक्षण दिखने लगा काल का चक्र फिर से फि फिरने लगा तो यहां पर
भारत के पतन का मूल कारण: बुद्ध के हृदय और ब्राह्मणों की बुद्धि के बीच दरार
स्वामी जी हमको कहते हैं कि ऐसा तो क्या था जो कि बौद्ध धर्म के साथ में इसने प्रॉब्लम खड़ा करके लाया तो मैंने क्या किया है यहां पे स्वामी जी का जो इस लेक्चर में जो कहना है माय प्लान ऑफ कैंपेन उसके साथ-साथ में ही कंप्लीट वर्क्स में से दूसरी दूसरी जगहों पे भी स्वामी जी ने बौद्ध धर्म की अधोगति के बारे में डिग्रेडेशन इन बुद्धिज्म के बारे में जो जो कुछ कहा है उसका एक छोटा सा कंपाइलेशन किया है उस कंपाइलेशन में हमको एक बड़ा ही इंटरेस्टिंग चीज जानने को मिलता है स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि पहले तो अपना वैदिक धर्म था वैदिक आध्यात्मिक प्रथाएं थी उसमें जो बौद्धिकता जो हमने डेवलप की थी इंटेलेक्चुअल एक्यूमेन जो हमने डेवलप किया था हमारे ऋषि मुनियों का वैदिक युग में अपने ऋषि मुनियों की बौद्धिक क्षमता इतनी तीव्र थी इतनी तेज थी कि जिसके परिणाम से उन्होंने यह जो माया का पर्दा है उसको चीर करके माया के पीछे जो अनंत तत्व अनंत जीवन विद्यमान है जिसको कि हमारे वेद उपनिषद आत्मन या ब्राह्मण करके पुकारते हैं उसका पर्दाफाश किया उसको हमारे सामने लाकर के खड़ा किया तो यह ऋषि मुनियों की बौद्धिक क्षमता की आध्यात्मिक क्षमता का एक बहुत बड़ा परिचय है किंतु हुआ ऐसा कि यह ब्राह्मण जो एक ट्रेडिशनल जैसे कि यह आत्म तत्व अपने पास में एक तरह से छुपा करके रखा जो बाकी सब काष्ट है क्षत्रिय है कि शुद्र है ना कि वैश्य है उन सबके साथ में शेयर करने की उनकी ऐसी कोई इच्छा हुई नहीं तो यहां पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ उन्होंने ब्राह्मण ट्रेडिशनल जो उपनिषद के गहरे रहस्य है आत्म तत्व या तो ब्रह्मज्ञान इस ब्रह्मज्ञान का उन्होंने साक्षात्कार किया और इसी साक्षात्कार करके उन्होंने इस ब्रह्मज्ञान को जनसाधारण में बांटना शुरू किया देखिए कि यह कंफ्लेक्स में उस वैदिक युग में चल रहा था एक और है ब्राह्मण ट्रेडिशनल चाहते हैं कि उन्होंने यह जो आत्म तत्व आविष्कार किया है अपनी तीव्र बुद्धिमत्ता को लेकर के बहुत माने एकदम गहन कठोर कठिन साधना और तपस्या करके तपस्या और बुद्धिमत्ता इन दोनों का आश्रय लेकर के ब्राह्मणों ने जो ब्रह्म तत्व आविष्कार किया है उसको वे लोग शेर नहीं करेंगे यहां पर क्षत्रिय काष्ट है क्षत्रिय थे जिनका कि हृदय विशाल था और उन्होंने यही ब्रह्म तत्व को उनके पास में से लेकर के या अपने से आविष्कार कर के यह जो विधि विधान जितने भी यह जो क्रियाएं थी कर्मकांड थे इस कर्मकांड के दायरे में से ब्रह्म तत्व को बाहर निकाल कर के क्षत्रिय लोगों ने यह प्योर आत्म तत्व का प्रचार किया ब्राह्मण लोगों के पास में जाएंगे पहले तो हजार कर्मकांड दिखाएंगे फिर आखिर में आपको ब्रह्म तत्व का छोटा सा उपदेश देंगे जबकि क्षत्रियों के पास में आएंगे तो हटाओ सब कर्मकांड और सीधा आत्म तत्व आत्म साक्षात्कार ही जीवन का उद्देश्य है उसके लिए आप हजार कर्मकांड करें कि ना करें कोई फर्क नहीं पड़ता तो यह भगवान बुद्ध भी वही क्षत्रिय ट्रेडिशनल तत्व का साक्षात्कार किया ब्रह्म तत्व को पूरे गांव-गांव शहर शहर तक फैलाया बस वही बात है कि उन्होंने ब्रह्म आत्मन ईश्वर वगैरह शब्दों का यूज नहीं नहीं किया उन्होंने सिर्फ यह जो साक्षात्कार करने का जो मार्ग था अष्टांग मार्ग इस अष्टांग मार्ग का प्रचार किया कहा मध्यम पंथा अष्टांग मार्ग कहा कि इसका आप फॉलो कीजिए और इसके इस रास्ते के आखिर में जो आएगा वही अंतिम सत्ता है यह ब्राह्मण लोगों की तरह वाद विवाद में मत डूब जाइए एक कहता है कि अच्छा यह आत्म तत्व ठीक है कोई कहता है कि नहीं हमारे ईश्वर ठीक है वगैरह वगैरह वह सब चर्चा में जाने की कोई जरूरत नहीं है इस रास्ते को फॉलो कीजिए यह ऐसा हो गया कि यहां से मान लीजिए कि रामकृष्ण मिशन तक आने का रास्ता है कोई आपको कहेगा कि यह बाजार में से आप बाजार में खड़े हैं यह मार्केट में से रामकृष्ण मिशन कैसे जाया जाए तो कोई कह देगा कि वह इस रास्ते से चलके आप चले जाइए व उसके आखिर में जो आएगा वह है रामकृष्ण मिशन वो आपको जदी पूछे आप जदी पूछेंगे अच्छा रामकृष्ण मिशन में क्या हो रहा है वहां पर किसकी पूजा होती है आपने तो कभी गए नहीं है आपने कभी देखा नहीं है मेरे साथ में एगजैक्टली वही हुआ था मैं पहली बार अ हमारे शहर में तो प्राइवेट सेंटर है वहां पर तो आश्रम था नहीं तो उस समय 2001 की बात है गुजरात में अर्थक्वेक हुआ था तो मैंने सोचा कि चलो एक बार रिलीफ किया जाए क्योंकि मैं गांधी जी को बहुत पढ़ा था उस समय और गांधी जी ने जो कहा था कि पढ़े लिखे लड़कों को गांव में जाकर के सेवा करनी चाहिए वही हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए तो मैं भी सोच रहा था कि कैरियर फेरियर नहीं बना कर के गांव में जाते हैं सेवा करते हैं तो किंतु कोई एक अपॉर्चुनिटी कोई एक मौका भी तो मिलना चाहिए तो उस समय यह अर्थक्वेक हुआ मैंने सोचा कि चलो अर्थक्वेक के बहाने से हम सेवा कार्य चालू करते हैं तो हमारे शहर में जो प्राइवेट सेंटर था जाकर के मैंने कहा वहां पर पहचान थी तो कहा कि क्या रिलीफ वर्क करने का कोई अपॉर्चुनिटी है तो उन्होंने कहा कि चलो लिंबड़ी में चले जाओ वहां पर अपना आश्रम है इस रास्ते से इस रास्ते से यहां यहां करके तुम जाना तो मैं लिमडी गया जब मैं लिमडी गया रामकृष्ण मिशन के बारे में प्रैक्टिकली मुझे कुछ नहीं पता था साधु कौन होते हैं कैसे होते हैं कौन है रामकृष्ण कौन है विवेकानंद कुछ नहीं पता था बस उन्होंने मुझे वहां वड़ोदरा से मुझे रास्ता दिखा दिया गया कि इस रास्ते से तुमको जाना है तो उस रास्ते से मैं लीमड़ी रामकृष्ण मिशन में चला आया फिर वहां पर जाकर के मुझे सब कुछ पता चला कि हां कौन है रामकृष्ण कौन है विवेकानंद कौन क्या है यह सब साहित्य धर्म वगैरह इससे पहले यदि मैं वहीं पर मेरे शहर में ही प्राइवेट सेंटर में ही बैठ कर के डिबेट करता रहता जो वहां पर जो डिवोटा थे उन डिवटी हों के साथ में कि अच्छा वहां पर क्या-क्या होता है साधु लोग किस क्यों इस तरह से त्याग करके रहते हैं और मैं डिवटी हों के साथ में यदि डिबेट में बैठ जाता आर्गुमेंट में बैठ जाता तो मैं कभी भी यह रास्ता तय करके सफर तय करके मैं वहां पर जर्नी के एंड में रामकृष्ण मिशन में जाता नहीं ना ही मुझे कभी पता चलता कि रामकृष्ण कौन है स्वामी विवेकानंद कौन है तो भगवान बुद्ध कहते हैं कि वह जर्नी के अंत में क्या है उस सबके आर्गुमेंट छोड़ो पहले तो वहां पर तुम चले जाओ एक बार चले जाओगे उसके बाद में पता चलेगा कि यह ब्रह्मण क्या है या आत्मन क्या है या ईश्वर क्या है ठाकुर ने क्या कहा कि जगत में सब कुछ ऐठा हो गया है झूठा हो गया है किंतु बस एक ब्रह्म तत्व झूठा नहीं हुआ झूठा नहीं हुआ अर्थात कि मुंह में से बोला नहीं गया जो चीज आप अपने मुंह में डालेंगे वो जूठी हो जाएगी उसको और कोई खाएगा नहीं व आपी को खाना होगा बाद में तो मुंह से जो निकला है वह सब जूठा हो गया है तो किंतु ब्रह्म तत्व जूठा नहीं हुआ क्योंकि मुंह से कभी भी वह उसका उच्चारण नहीं हुआ कि इसका अर्थ क्या है इसका तात्पर्य क्या है उसकी व्याख्या क्या है इसका नेचर क्या है इसका प्रयोजन क्या है वह सब स्पेक्युलेटिव जो हम करते हैं ब्रह्म तत्व के बारे में जो भी चिंतन वह सब स्पेक्युलेटिव के बागान में जाते हैं तो कितने पेड़ है कितनी डालियां है कितने पत्ते हैं उसके पेड़ के ऊपर में कितने आम लगे हैं यह सब थोड़ी ना आप कैलकुलेशन करने को बैठेंगे आपका कार्य है आम आम के बागान में जाकर के आम को तोड़ना और फिर टे हुए आम को खाना और खाके हष्ट पुष्ट होना होना बाद में यह कितने पेड़ है आम के कितनी डालिया है वह अपने से पता चल जाएगा उसकी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है और पता नहीं भी चलता है डज नॉट मैटर आपने आम खा लिया है आपका प्रयोजन सिद्ध हो चुका है तो वैसे ही भगवान बुद्ध का जो बेसिक आईडिया था कि यह ब्रह्म तत्व आत्म तत्व ईश्वर तत्व यह सब चीजों के बारे में डिस्कस करने की वजह सबसे पहले तो अष्टांग मार्ग का आश्रय लेकर के पहले इस सब चीजों को साक्षात्कार कर लिया जाए निर्वाण प्राप्त कर लिया जाए एक बार जब हम निर्वाण प्राप्त करेंगे उसके बाद में निर्वाण का क्या स्वभाव है क्या नेचर है क्या हेतु सिद्धि प्रयोजन है सब अपने से पता चल जाएगा उसके बारे में हमको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है तो यह उनका मुख्य उपदेश था किंतु बाद बाद में क्या हुआ कि स्वामी जी क्या
बौद्ध धर्म के पतन का मूल कारण: बौद्ध धर्म में अन्य समुदायों की अंधश्रद्धाओं का प्रवेश
कहते हैं कि जो जो प्रजा है जिन्होंने बुद्धिज्म को अपनाया क्योंकि बुद्धिज्म तो फर्स्ट मिशनरी रिलीजन था तो ब्राह्मण अपना जो वैदिक संस्कृत और यह बौद्ध धर्म इस दोनों में देखिए कि किस तरह का एक डिफरेंस हमको देखने को मिलता है हमको यह तो पता है कि ब्राह्मण लोग कहीं जाकर के किसी को एक्टिवली कन्वर्ट नहीं करते थे भगवान राम अयोध्या से लंका की यात्रा की उसमें जितने भी प्रदेश आए मध्य भारत में सेंट्रल इंडिया में साउथ इंडिया में सब जगह पर उन्होंने सनातन वैदिक संस्कृति का प्रचार किया यह तो हमको पता है बिना प्रचार किय प्रचार किया ऐसा नहीं है कि वह मिशनरी के रूप में गए थे वो जिनके साथ में चर्चा करते हैं सभी लोग उनके चरित्र उनकी दिव्यता से प्रभावित होकर के स्वतः उनके शरणागत हो जाते थे तो वही भगवान राम ने भगवान राम के इस यात्रा की वजह से यह जो पूरा भारत एक हुआ तो हिंदुइज्म में देखिए कि उसका प्रचार होता तो था पहले-पहले आप देखिए कि यही हिंदू धर्म यही रामायण की कहानियां महाभारत की कहानियां यह सभी साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज में फैली है म्यानमार है थाईलैंड है फिलिपींस है यह चाइना है सब जगह पे आप जाकर के देखिए कि रामायण की कहानियां वहां पे चलती है तो अपना हिंदू धर्म फैलता था उसमें कोई प्रश्न नहीं है किंतु बौद्ध धर्म इट वाज एन एक्टिवली मिशनरी धर्म उन्होंने बहु जैसे राजा अशोक ने सब जगह पे एंबेसी भेज भेज करके बौद्ध भिक्खू को भेज भेज करके उन्होंने सबको बु बौद्ध धर्म में कन्वर्ट करने का एक आग्रह प्रकाशित किया और भगवान बुद्ध की जो चरित्र है उनकी लीला है उनका जो व्यक्तित्व है उनकी दिव्यता है उससे प्रभावित होकर के काफी लोग बौद्ध बन भी गए थे किंतु साथ-साथ में इस कन्वर्जन के पीछे में एक एक तरह का एक दूसरा भी प्र कारण था दूसरा एक कारण क्या था कि बौद्ध धर्म ने बड़े-बड़े मंदिर बनाए बड़े-बड़े मठ बनाए बड़े-बड़े मठ में बड़ी-बड़ी एक होल होते थे वहां पर बुद्ध की मूर्तियां बिठाते थे वहां पर भव्य सेरेमनीज करते थे और फिर क्या हुआ दूसरी बात कि यह जो एक्टिव मिशनरी रिलीजन था तो वह जहां-जहां पर भी गया ऐसी जगहों पर गया जहां पर धर्म के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं था किंतु अंधश्रद्धा हजार थी तो यह अंधश्रद्धा है जहां-जहां पर बौद्ध धर्म ने लोगों को कन्वर्ट करना चाहा तो जो लोग वर्ट होकर आए वह साथ में अपनी अंधश्रद्धा एं अपने भूत पिशाच राक्षस वो जो मैंने वो कहानियों में जो उनकी होते हैं वह सब लेकर आए और सब बुद्धिज्म में घुसा दिए तो बुद्धिज्म की हालत आखिर में ऐसी हुई कि यहां पर भूत है पिशाच है देवी है देवता है भगवान बुद्ध ने कहा था कि किसी भी तरह की बाह्य जो चीजें हैं उस पर विश्वास मत करो आत्म दीपो भव अपनी खुद की परिश्रम से जो सिद्धि प्राप्त होती है निर्वाण प्राप्त होता है उसी पर भरोसा रखो किंतु वही भगवान बुद्ध को भगवान बना दिया उनकी पूजा होने लगी यह बाहर से जितने भूत पिशाच आए उनको सब यह जो चढ़ाने लगे लोग सब धरावा वगैरह वगैरह तो बुद्धिज्म के भीतर में प्रचार करने के परिणाम से यह सब कुछ विकृतियां प्रकट हुई सामने यहां पर देखिए
भगवान राम ने वैदिक संस्कृति का प्रचार किया लोगों को प्रेरित कर के, नहीं की मोहित कर के.
कि भगवान राम ने जिस तरह से हिंदू धर्म का प्रचार किया व वहां वहां पर गए ऐसा कभी किसी को नहीं कहा कि तुम लोग वैदिक संस्कृति को अपनाओ जो लोग स्वतः स्फूर्त होकर के वैदिक संस्कृति को अपनाते हैं वह वेलकम है और जो कहते हैं कि नहीं मुझे इस संस्कृति के साथ में ज्यादा कोई लेना देना नहीं है मेरे खुद के जो ट्राइबल गॉड है ट्राइबल भूत पिशा पिशाच है उसके साथ में मैं खुश हूं तो खुश रहो ऐसा किसी को जोर जबरदस्ती करके कन्वर्ट करने का मामला नहीं है तो उसकी वजह से हिंदू धर्म में जो लोग प्रवेश किए वे लोगों का अंतर्मन ऑलरेडी हिंदू धर्म से प्रभावित था हिंदू धर्म के जो बेसिक आधार थे सिद्धांत थे उन्होंने ऐसे ही स्वीकार कर लिए जबकि
बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार भव्य समारोहों के आकर्षण से हुआ। वैदिक संस्कृति के गृह-अग्नि उत्सवों की तुलना में फ़िके पड़ गए।
बुद्धिज्म का था कि कन्वर्ट करना है तो तो फिर सामने वाले की पात्रता देखे बिना आंख बंद करके जब कन्वर्ट करना शुरू करेंगे तब क्या होगा सामने वाला तो अपने खुद के जो ट्राइबल गॉड है अपनी ट्राइबल ट्रेडिशनल सिशन है वह तो छोड़ने वाला नहीं है वो किसी कारण से प्रलोभन में आकर के हो तो बड़ी-बड़ी सेरेमोनिया देख कर के हो तो वो बौद्ध धर्म में कन्वर्ट हो गया ये बौद्ध धर्म स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि हम लोगों को लगता है कि भगवान बुद्ध का महत चरित जो था उसकी वजह से उससे प्रभावित होकर के बहुत ज्यादा लोग बुद्धिज्म में कन्वर्ट हुए किंतु इसके साथ-साथ में दूसरी भी एक बात याद रखनी है कि वैदिक युग में छोटे-छोटे अग्नि होते थे जो प्रत्येक घर में यह अग्नि की स्थापना होती थी प्रत्येक घर में कर्मकांड होते थे तो वह क्या है डोमेस्टिक लेवल पे था किंतु बुद्धिज्म ने क्या किया यह डोमेस्टिक रिलीजन को जैसे कि एक सोसाइटल रिलीजन पब्लिक रिलीजन बना दिया एक पब्लिक स्पेक्टेक खड़ा कर दिया और इस पब्लिक स्पेक्टेक से प्रलोभन लोग आने लगे यह होता है ना स्पेक्टेक पब्लिक स्पेक्टेक इसका क्या अर्थ है आप बहुत बड़ा सेरिमनी कीजिए इस तरह का अभी आजकल जैसे कि मैच चलती है तो क्रिकेट मैच में आप देखिए कैसा बड़ा स्पेक्टेक खड़ा होता है वो वहां पर कोई फिल्म स्टार को बुलाया है वहां पर कोई सेलिब्रिटी है सबके ऊपर में कैमरा जाता है तो क्रिकेट से ज्यादा तो यह स्पेक्टेक जो है सेलिब्रिटीज वगैरह उसके ऊपर में उसको देखने के लिए लोग ज्यादा आते हैं तो ऐसे ही यहां पे भी कि भगवान बुद्ध की वजह जिसकी मूर्ति तो उन्होंने बिठा दी थी उसके अलावा भी यह भव्य स्पेक्टेक जो खड़ा किया था यह सेरिमनी चल रही है यह लोग वो लोग सब भूत पिशाच वगैरह का सब कुछ ना कुछ चल रहा है मिस्टिसिजम मनुष्य क्या है मिस्टिसिजम को पसंद करता है कि अच्छा यहां पर कोई शॉर्टकट मिल जाए तो अच्छा है मुझे बुखार आ रहा है तो उसका रीजन यह नहीं कि मेरा लाइफ स्टाइल चेंज करने की जरूरत है मेरा लाइफस्टाइल गलत है बस मुझे कोई शॉर्टकट मिल जाए तो मैं वही पुराना लाइफ स्टाइल चालू रखूं जिससे कि मुझे और मैं भोग करता रहूं भोग नहीं छोड़ना है साथ में योग करना है तो यह दो दोनों कब होगा जब आप मिस्टिसिजम में जाएंगे मिस्टिसिजम ही आपको योग और भोग दोनों का उपदेश देगा सही सही धर्म है कभी नहीं कहेगा कि योग और भोग दोनों साथ में चल सकते हैं तो इसीलिए यह पब्लिक स्पेक्टेक खड़ा किया ग्रांड सेरेमनीज खड़ी की यह सब लोगों को आकर्षित करके कन्वर्ट करना शुरू किया अभी जो लोग कन्वर्ट हुए हैं वह साथ-साथ में अपनी पुरानी सभी अंधश्रद्धा एं लेकर के बौद्ध धर्म में प्रवेश किए और बौद्ध धर्म में प्रवेश होने के बाद में वही भूत पिशाच को बौद्ध जैसे कि एक पहना दिया एक आवरण पहना दिया यानी कि हमको आज आज यदि पढ़ेंगे तो लगेगा कि अरे बुद्धिज्म में ये भूत पिशाच कहां से आ गए यह सब देवी देवता एं कहां से आ गए यह राक्षस यह सब कहां से आ गए तो वो इसी तरह से आए हैं जि ओरिजिनल बुद्धिज्म में बिल्कुल नहीं थे तो जो भी है ये कन्वर्ट करने के तरीके होते हैं कन्वर्ट आप पहले तो ठीक-ठीक यदि आपको धर्म का फैलाव करना है तो अपने धर्म की पवित्रता
अपने धर्म की मूल नैतिकता को बनाए रखें। निष्ठाहीन लोगों को प्रलोभन दे कर अपने धर्म में लाने की कोशिश न करें।
अपने धर्म की महत्ता को देख कर के आकर्षित होकर के जो लोग आते हैं उन्हीं को रखिए भले ही आपका धर्म चाहे बहुत ज्यादा ना फैले जो कम फॉलोवर होंगे वे लोग प्योर हार्टेड होंगे किंतु आपको यदि ऐसा करना है कि जोर जबरदस्ती मुझे अपने संख्या बढ़ानी है आज हम लोग रामकृष्ण मिशन की देखिए संख्या कितनी है मुश्किल से मुझे लगता है है कि हमारे एक्टिव फॉलोअर 50 60 लाख होंगे ऑल ओवर द वर्ल्ड यदि इतने भी होंगे तो किंतु क्या है जो लोग यहां पर आए हैं उनको कोई प्रलोभन दे कर के नहीं लाया गया ऐसा कह के नहीं लाया गया कि यहां पर आकर के ठाकुर के सामने श्रीफल ऑफर कीजिए तो आपका यह काम सिद्ध हो जाएगा अपनी यह आपकी यह वासना सिद्ध हो जाएगी आपका यह अंतराय है आपके जीवन में यह राम कृष्ण के नाम की अंगूठी पहन लीजिए ताबीज पहन लीजिए उनके नाम का यह विधि कर ली यह व्रत ले लीजिए मां के नाम का तो आपके जीवन के यह अंतराय दूर हो जाएंगे ऐसा बोलकर के हम किसी को यहां पर नहीं लाए यहां पर रामकृष्ण मिशन में जितने भी लोग आए हैं वह हमारी फिलोसोफी है ठाकुर महा स्वामी जी का चरित्र है या तो फिर साधुओं का जो एक प्रभाव होता है उससे उसको देख कर के यह लोग यहां पर आए हैं या तो फिर हमारी जो य शिव ज्ञान है जीव सेवा है तो हमारी एक्टिविटी के साथ में जुड़ कर के आए हैं किसी को प्रलोभन देकर के यहां पर नहीं लाया गया इसका अर्थ है कि हमारी संख्या हमेशा लिमिटेड ही रहने वाली है जबकि बुद्धिज्म में संख्या बढ़ाने के चक्कर में आकर के इन लोगों ने जो सबको लेना शुरू किया उसके साथ-साथ में ही उन सब की अंध श्रद्धा भी आकर के घुस गई और बुद्धिज्म का पतन होना शुरू हुआ तो यह एक बहुत बड़ा कारण है बुद्धिज्म के भीतर में डिग्रेडेशन आने का उसका पतन होने का उसके साथ में ही
हिन्दू धर्म की अवनति का कारण : ब्राह्मणों का विद्यानुराग और मेधाशक्ति और बौद्धों के उदार ह्रदय के बिच में दरार
स्वामी जी एक दूसरा कारण देते हैं स्वामी जी कहते हैं कि देखिए ब्राह्मण ज्म या तो यह जो वैदिक ट्रेडिशनल मार्क क्या था कि तीव्र बुद्धिमत्ता यह जितनी भी सुपरस्टिशन है जितनी भी अंधश्रद्धा एं हैं जितना भी नॉनसेंस है उस सबको यह ज्ञान रूपी तलवार से ज्ञान रूपी खड़ग से काट दो उसके भीतर का जो एसेंस है उसको ले लो तो यह जो वैदिक होल मार्क था ब्राह्मण ज्म का यह जो एक यह था मैं सबसे बड़ा शस्त्र कि यह बुद्धिमत्ता बौद्धिकता और तपस्या तो यह बुद्धिमत्ता वो उनका एक सबसे बड़ा था और यहां पर बुद्धिज्म का देखिए कि विराट हृदय था कि ब्राह्मण लोगों ने एक बार ब्रह्म तत्व को खोज तो लिया फिर उसको जनसाधारण में प्रचार करने की वजह उसको छुपाना शुरू किया कर्मकांड के दायरे में उसको बंद करना शुरू किया वेद आप पढ़ेंगे शुरू से लेकर के आखिर तक जाएंगे तब कहीं जाकर के आपको उपनिषद पढ़ने को मिलेंगे पहले तो आपको दुनिया भर का वह कर्मकांड सिखा देंगे तो यह कर्मकांड के दायरे में से ब्रह्म तत्व को बाहर तो निकाला बुद्धिज्म ने किंतु साथ-साथ में ही प्रचार करने के साथ में ही उदार हृदय के साथ में ब्राह्मण लोगों की जो बुद्धिमत्ता थी तीव्र तीक्षण उनकी यह जो चेतना थी जिसकी वजह से वे लोग अंधश्रद्धा के जो पर्दे को काट कर के माया के पर्दे को काट कर के पीछे का आत्म तत्व पहचान पाए थे उसको उन्होंने छोड़ दिया तो हुआ क्या कि बुद्धिज्म के पास में विराट हृदय है ब्राह्मणों के पास में विशाल बुद्धिमत्ता है इन दोनों का जो डाइवोर्स हुआ यह डाइवोर्स स्वामी जी कहते हैं कि वो भारत के लिए बड़ा ही घातक सिद्ध हुआ स्वामी जी कहते हैं कि बुद्धिज्म एक्चुअली इज अ फुलफिलमेंट ऑफ हिंदुइज्म होना क्या चाहिए था यदि आइडियल सिचुएशन हमको यदि ऐसा करना है प्लान करनी है कि मैं चाहता हूं कि आइडियल हो भारत में आइडियल क्या होता कि ब्राह्मण लोगों ने अपना बुद्धि अपनी मेधा शक्ति अपनी विद्वत्ता का यूज करके अपनी तपस और ब्रह्मचर्य की शक्ति से सबसे पहले तो ब्रह्म तत्व को खोज निकाला उसके बाद में इस ब्रह्म तत्व को ब्राह्मण लोगों को ही जन साधारण में प्रचार करना था तो यदि ऐसा होता तो यह विद्वता या तो फिर यह मेधा शक्ति और यह उदार हृदयत इन दोनों का संगम होता यह दोनों का संगम आपको भगवान राम भगवान कृष्ण में अवश्य दिखता है किंतु वही बात हुई कि धीरे-धीरे करके यह जो उदार हृदय ता हिंदुइज्म जो उसके फॉलोअर्स जो थे फॉलोअर्स में जाती गई यानी कि यह जो अपने वैदिक ट्रेडिशनल गई सिर्फ यह मेधा शक्ति और यह जो बौद्ध धर्म जो प्रारंभ हुआ उसमें आ गई उदार हृदयत स्वामी जी कहते हैं बुद्धिज्म को हिंदुइज्म का कंक्लूजन होना था परिपूर्ण होना था उसकी वजह दोनों में हो गई स्प्लिट और यह स्प्लिट की वजह से कि एक र चली गई विद्वत्ता और एक और चली गई उदार हृदयत तो इसकी वजह से भारत में धीरे-धीरे करके यह सभी डिग्रेडेशन डिक्लाइन फॉल अवनति स्टार्ट हुई यदि यह दोनों एक साथ में रहता बुद्धिमत्ता विद्वता मेधा शक्ति और दार हृदयत लोगों के प्रति करुणा कंपेज एंपैथी यदि यह दोनों साथ में रहता तो उस समय का भारत आज के आधुनिक यूरोप और अमेरिका से कई गुना आगे बढ़ जाता उसी समय हम लोग यह न्यूक्लियर रिएक्शन है कि फिर यह क्वांटम कंप्यूटर है ना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है सॉलिड स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स है रोबोटिक्स है वह सब हम उसी समय खोज निकालते हैं जद यह दोनों ब्रांच एक साथ में मिलकर के जुट जाती तो किंतु यह जो स्प्लिट हुई यह स्प्लिट ने भारत का बारा ह बजा दिया तो यह पूरा जो एनालिसिस है बुद्धिज्म का वह स्वामी जी हमको इस सिर्फ ये माय प्लान ऑफ कैंपेन में ही नहीं किंतु यह जो कोलंबो लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा फिर ज्ञान योग अपने जो स्वामी जी ने जो जितने भी प्रवचन दिए बहुत सारी जगह पर उन्होंने बुद्धिज्म के बारे में कुछ ना कुछ कहा है वो सबका कंपाइलेशन में ने एक ही जगह पे यहां पे इसी एक ही टेक्स्ट में कर दिया है जिसको कि हम एक के बाद एक पढ़ेंगे किंतु आउटलाइन जो है स्वामी जी के आइडियाज की वो इतनी है सर्वप्रथम तो कि बुद्धिज्म को हिंदुइज्म का परिपूर्ण होना था हिंदुइज्म का जैसे कि एक तरह से कंप्लीमेंट होना था उसका कंक्लूजन होना था ऐसा नहीं होकर के बुद्धिज्म एक सेपरेट ब्रांच में डिवाइड हो गया और उसी की वजह से धीरे-धीरे करके भारत में से बुद्धिज्म को जाना पड़ा तो यह जो स्प्लिट है वह बहुत बुरी रही भारत के लिए दूसरा कि बुद्धिज्म ने प्रचार के ऊपर में जो इतना ध्यान दिया कि कौन-कौन उसके धर्म में आ रहा है वह बोलना व सोचना उन्होंने छोड़ दिया तो यह सोचना छोड़ दिया जितने भी अंधश्रद्धा वाले लोग हैं जितने भी ट्राइबल लोग हैं सबको उठा उठा करके अपने धर्मों में जगह देना शुरू कर दिया उसकी वजह से जो अंधश्रद्धा हों का प्रवेश हुआ जो भूत पिशाच राक्षसों का प्रवेश हुआ देवी देवताओं का बुद्धिज्म में प्रवेश हुआ उसकी वजह से बु भगवान बुद्ध का जो ओरिजिनल आईडिया था कि तपस्या करके साधना करके परिश्रम करके कठोरता करके ब्रह्मचर्य का पालन करके निर्वाण प्राप्ति करनी है वह सब चला गया और दुनिया भर के यह जो शॉर्टकट है वह बुद्धिज्म में आ गए सो ट इज स्वामी जी ओवरऑल कंक्लूजन तो यहां पर थोड़ा सा हम आज पाठ कर लेते हैं स्वामी जी
Reason for India’s decline is Buddhist degradation
कहते हैं कि टुडे इट इज द फैशन टू टॉक ऑफ बुद्धिज्म एंड बुद्धिस्ट एग्नोर इन द साउथ आजकल यह बुद्धिज्म और यह बौद्धिक रेशनल एग्नोर के प्रति विरक्ति यह इसके बारे में बात करना प्रशंसा करनाना एक बड़ी फैशन हो गई है खास करके साउथ इंडिया में यह देखिए यह रिफॉर्म सोसाइटी ये थ्रेड कहां से आ रहा है स्वामी जी कहते हैं रिफॉर्म सोसाइटीज जो है वो चाहती है कि भारत में से सुपरस्टिशन जाए भारत में से अंधश्रद्धा जाए और यह जो थ्रोइंग द बेबी अलोंग विद द बाथ वाटर इसके ये जो है उन का थिंकिंग कि हिंदुइज्म जो है वो सब गलत है उसमें हिंदुइज्म तो होना ही नहीं चाहिए होना चाहिए बुद्धिज्म क्यों कि बुद्धिज्म में किसी भी तरह का भगवान नहीं है कि ओरिजिनल बुद्धिज्म जब भगवान बुद्ध की कहानी पढ़ेंगे तब आपको लगेगा कि बुद्धिज्म में तो ना ही भगवान है ना ही ये कोई अंधश्रद्धा एं हैं कितना रेशनल है कितना मतलब ये इंटेलेक्चुअल है तो स्वामी जी कहते हैं कि ये जो रिफॉर्म वाले हैं खास कर के साउथ इंडिया में इन लोगों में एक फैशन स बन गई है कि हिंदुइज्म यानी कि अंधश्रद्धा हों से भरा हुआ देवी देवता भूत पिशाच ये वो सबसे भरा हुआ 10 साल की बच्ची का विवाह करके उसका बच्चा प्रकट हो इस सब में डूबा हुआ जबकि बुद्धिज्म को देखिए कि भगवान बुद्ध का उदार हृदय था नात जात उससे ऊपर आकर के उन्होंने यह सब किया था वगैरह वगैरह और यह कारण है ये जो भगवान बुद्ध की उस समय जो प्रशंसा हो रही थी यही कारण है कि बाद में आंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़ कर के बौद्ध धर्म को अपनाया क्यों क्योंकि हिंदू धर्म में जो नात और जात की प्रथा इतनी भयानक रूप से इतनी पैशा चिक रूप से एक इतने विषैले रूप से अपने समाज को खाई जा रही थी कि उनको ऐसा लगा कि यदि हिंदू धर्म नहीं छोड़ेंगे तो अपना उद्धार नहीं है दलितों का तो फिर हिंदू धर्म छोड़ कर के कौन से धर्म में जाए सब तरह के धर्म देख लिए इधर-उधर फिर उनको लगा कि बहुत बौद्ध धर्म की जो उदारता है बौद्ध धर्म की जो रेशल है एग्नोर म है एग्नोर का स्केप्टिसिजम या तो एक तरह की नास्तिकता नास्तिकता यानी कि ईश्वर के प्रति नहीं किंतु अंधश्रद्धा हों के प्रति नास्तिकता तो ये एग्नोर जम है बौद्धिक वो उनको बड़ा अच्छा लगा तो वो बौद्ध हो गए तो वो जो उसके जो सीड है वो उनके कन्वर्जन के वो उसी वह स्वामी जी के समय से ही दिख रहे थे इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि आजकल एक फैशन स बन गई है कि बहु ब धर्म बड़ा ही रेशनल है बड़ा ही इंटेलेक्चुअल है बड़ा ही उदार हृदय का है बड़ा ही एग्नोर है किंतु देखिए लिटल डू दे ड्रीम दैट दिस डिग्रेडेशन व्हिच इज विथ अस टुडे हैज बीन लेफ्ट बाय बुद्धिज्म किंतु इन लोगों को बिल्कुल पता नहीं है यह लोग सपने में भी नहीं सोच पाएंगे कि भारत की अवनति भारत के डिग्रेडेशन का जो राज है सीक्रेट है वह बुद्धिज्म की वजह से है बौद्ध धर्म ने ही भारत को इस इतने बड़े गड्ढे में डाल के रखा है दिस इज द लिगसी व्हिच बुद्धिज्म हैज लेफ्ट अस यह जो भयावह परिस्थिति भारत की हुई है यह परिस्थिति बुद्धिज्म की वजह से है यू रीड इन बुक्स रिटन बाय मैन हु नेवर स्टडीड द राइज एंड फॉलो ऑफ बुद्धिज्म दैट द स्प्रेड ऑफ बुद्धिज्म वाज ओइंग टू द वंडरफुल एथिक्स एंड द वंडरफुल पर्सनालिटी ऑफ गौतम बुद्धा जिन लोगों ने भगवान बुद्ध के बारे में कभी भी नहीं कुछ पढ़ा बुद्धिज्म का राइज ऑल फॉल के बारे में कुछ भी नहीं पढ़ा वे लोग आज किताब लिख लिख करके बड़े जोर-जोर से नारा लगाते हैं कि बौद्ध धर्म का जो पूरे विश्व में प्रचार हुआ उसके पीछे रीजन था भगवान बुद्ध की महत पर्सनालिटी और उनकी दिव्यता वंडरफुल एथिक्स एंड वंडरफुल पर्सनालिटी एथिक्स यानी कि एथिक्स हमको पता है सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य तप शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर प्रदान यह जो 10 नियम नियम है उसको हम एथिक्स कहेंगे एथिक्स यानी कि हमको इस तरह से रहना है कि हमारा जीवन समाज के लिए आशीर्वाद मय बन जाए हम सबको सहायता करें हम सबके प्रति मैत्री और करुणा का व्यवहार करें किसी को भी हम कष्ट ना पहुंचाए किसी की धन संपत्ति चुरा ना ले किसी का शोषण ना करें यह जो वैल्यूज है जीवन में वह उसको एथिक्स कहते हैं और भगवान बुद्ध में यह एथिक्स भर भर करके पड़े हुए थे तो भगवान बुद्ध के यह एथिक्स भगवान बुद्ध की यह वैल्यू यूज और उनकी पर्सनालिटी इसकी वजह से बुद्धिज्म फैला है स्वामी जी कहते हैं कि देखिए जिन लोगों ने बुद्धिज्म का राइज एंड फॉल बुद्धिज्म फैला कैसे बुद्धिज्म में अवनति कैसे आई इसके बारे में कुछ भी स्टडी नहीं किया है वे लोग ऐसा कहते हैं कि भगवान बुद्ध के एथिक्स और पर्सनालिटी की वजह से बुद्धिज्म फैला हां वोह फैक्टर थे किंतु दूसरे भी फैक्टर थे वो क्या थे आई हैव एवरी रिस्पेक्ट एंड वेनरेशन फॉर लॉर्ड बुद्धा बट मार्क माय वर्ड्स स्वामी जी कहते हैं मुझे भगवान बुद्ध के प्रति सबसे ज्यादा श्रद्धा और भक्ति है हमको पता है कि स्वामी जी को सर्वप्रथम दर्शन हुआ था वह भी भगवान बुद्ध का हुआ था तो स्वामी जी कहते हैं और फिर वह जब ठाकुर बीमार थे दक्षिण वहां पर काशीपुर में तो ठाकुर को छोड़ कर के वहां पर बोध गया चले गए थे तपस्या करने के लिए महापुरुष महाराज और काली महाराज के साथ में तो बुद्ध के प्रति स्वामी जी का आकर्षण पहले स ही था तो स्वामी जी कहते हैं कि बुद्ध के प्रति मेरी अनंत श्रद्धा भक्ति है किंतु यह बात याद रखिए मार्क माय वर्ड्स द स्प्रेड ऑफ
Reason for Buddhism’s spread = public spectacles, gorgeous ceremonies, beautiful temples, and idols
बुद्धिज्म वाज लेस ओइंग टू द डॉक्ट्रिन एंड पर्सनालिटी ऑफ द ग्रेट प्रीचर देन टू द टेंपल्स दैट वेर बिल्ट द आइडल्स देर वेर क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर और व्यक्तित्व भगवान बुद्ध के सिद्धांत और व्यक्तित्व का उतना हिस्सा नहीं था जितना हिस्सा था द ग्रेट द टेंपल्स जो बड़े-बड़े मंदिर बनाए गए थे आइडल्स ट वेर इरेक्टेड यानी कि बड़ी-बड़ी मूर्तियां बनाई गई थी सुंदर मूर्तियां बनाई गई थी एंड द गॉर्जियस सेरेमोनियल्स दे वेर पुट बिफोर द नेशन और बड़े-बड़े सुंदर सेरेमनीज गॉर्जियस यानी कि भव्य यह सब अ उत्सव है ना कि सेरेमनीज है फेस्टिवल है वगैरह वगैरह इन सबका मैंने उसका उन सबका कारण ज्यादा है यह सब चीजें कारण भूत ज्यादा है और हमने ऑलरेडी ये डिस्कस किया कि देखिए कि क्रिकेट में आजकल जैसे होता है कि क्रिकेट की मैच को छोड़ दीजिए यह जो सब वहां पे फिल्मी स्पेक्टेक जो खड़ा होता है यह जो सेलिब्रिटीज आते हैं वहां पे वो आधे लोग तो शायद हो सकता है उन्हीं को देखने को आते हो वो क्रिकेट तो साइड प रह जाता होगा तो वैसे ही यहां पे बुद्धिज्म के साथ में ऐसा ही हुआ इतनी भव्य सेरिमनी इतने भव्य यह सब पूजा पाठ वगैरह चैटिंग वगैरह मंदिर है मठ है मूर्तियां है फिर यह सब शॉर्टकट दिए जाते हैं वहां पर उससे आकर्षित होकर ज्यादा लोग आए हैं नहीं कि भगवान बुद्ध के सिद्धांत उनके उपदेश और उनकी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर के तो यह स्वामी जी का एक बहुत बड़ा स्टेटमेंट है दस बुद्धिज्म प्रोग्रेस एंड द लिटल फायर प्लेसेस इन द हाउसेस इन व्च द पीपल पोर्ड देर लाइब वेर नॉट स्ट्रंग इनफ टू होल्ड देयर ओन अगेंस्ट दिस गॉर्जियस टेंपल्स एंड सेरेमनीज तो इस तरह से बुद्धिज्म का प्रचार हुआ और जो छोटे-छोटे अग्नि थे यह छोटे-छोटे घरों में ब्राह्मणों के घरों में वैदिक संस्कृति के घरों में जिसमें कि लोग घी डाला करते थे जिसमें अग्नि की जो उपासना किया करते थे तो यह जो डोमेस्टिक सेरेमनीज थी उसका इतना आकर्षण नहीं था जितना आकर्षण यह भव्य मंदिर भव्य पब्लिक स्पेक्टेक पब्लिक सेरेमनीज इतना था आप सोच कर के देखिए आजकल भी आप देखेंगे कि गांव में आप अपने घर में पूजा कर रहे हैं और सडन बाहर में ढोल बजना शुरू हो गया जोर-जोर से किसी की वो दुर्गा पूजा हो रही है जैसे कि फॉर एग्जांपल यह पब्लिक सेरिमनी का ही जो बात है तो दुर्गा पूजा का एक उदाहरण देते हैं है तो आप मेरा खुद का यह अनुभव आपको बताता हूं कि बेलूर मठ में मैं था तो अपने घर में बैठ के जब जप करते हैं तो वह एक चीज हो गया कि आराम से बैठ कर के शांति से पंखा चल रहा है बेलूरमठ का वातावरण है पास में ही गंगा बह रही है मेरे घर में एकदम शांति है वो बैठ कर के मैं जप कर रहा हूं और यहां पर दुर्गा पूजा बाहर में जब चालू होगी तो बाहर में जोर-जोर से ढोल बजाए जाएंगे शंख बजाए जाएंगे इतना सब चित्कार होगा वोह उलू धनी होगा सब क्या-क्या होगा तो उसी क्षण में खड़ा होकर के बाहर आकर के वह पूजा मंडप में चला जाऊंगा उस समय अपने घर में बैठ कर के शांति से जप करने की मेरी बिल्कुल इच्छा नहीं होगी क्यों क्योंकि यह ह्यूमन नेचर है कि जहां पर बहुत सारे लोग इकट्ठा होते हैं वहां पर जाने का जहां पे सेलिब्रेशन हो रहा है जहां पर फेस्टिवल मनाया जा रहा है वहां पर जाने का यदि आजकल आप जो पिछले एक दो सप्ताह में ही यह बेलूर मठ में वह पब्लिक सेलिब्रेशन हुआ था ठाकुर की तिथि पूजा के बाद में सप्ताह में नेक्स्ट वीक सैटरडे को एक पब्लिक सेलिब्रेशन होता है जिसमें हजारों हजारों लोग आते हैं रात को पटाखे फोड़े जाते हैं आजकल तो वह सब बंद हो गया है पहले वह फायर वर्क्स होता था गंगा में गंगा के भीतर में वह एक जहाज लाकर के जहाज में से व यह सब हवाई वगैरह छोड़ते थे फायर वर्क्स होता था वो इतना भव्य इतना आकर्षण वाला वो स्पेक्टेक था एक साधु रेयरली कोई साधु मिलेगा आपको कोई भक्त मिलेगा आसपास के वह रहने वालों में जो कि उस दिन अपने घर में बैठ कर के जप करेगा जनरली संध्या का समय है सभी लोग अपने घर में बैठ कर के या किसी के एकांत जगह प जाकर जप करेंगे किंतु जिस दिन पब्लिक सेलिब्रेशन है मिला मुझे कोई दिखा दीजिए यदि रेयरली कोई साधु मिलेगा जो कि अपने घर में बैठकर जप कर रहा है या तो वृद्ध है या तो फिर बीमार है तो अलग बात है वर ना जो चलते फिरते हैं वह रेयरली कोई अपने रूम में बैठे होंगे जप कर रहे होंगे सबके भीतर में यह आकर्षण होता है कि जहां प यह सेरेमनी है जहां पे फेस्टिवल है दौड़े दौड़े जाए सुबह को प्रेसिडेंट महाराज को प्रणाम होता है सभी साधु इकट्ठा होते हैं प्रेसिडेंट महाराज को प्रणाम करने के लिए क्यों क्योंकि उस समय अपने कमरे में बैठना कोई मीनिंग नहीं है क्योंकि वह प्रेसिडेंट महाराज को प्रणाम होता है इतना एक आनंद फैलता है एक मने जहां पर लोग इकट्ठा होते हैं जहां पर यह दिव्यता भव्यता का वातावरण होता है ऑटोमेटिक यह मनुष्य का स्वभाव ही है वहां पर जाने का तो स्वामी जी कहते हैं कि पहले वैदिक युग में ऐसा होता था पब्लिक सेलिब्रेशन जैसा तो खास कुछ नहीं था बस अपने-अपने घर में लोग ये अग्नि प्रकट करके कुछ ना कुछ किया करते थे हां भव्य पब्लिक सेलिब्रेशंस होते थे नहीं होते थे ऐसा नहीं अश्वमेध यज्ञ राजसूय यज्ञ यह सब राजा लोग किया करते थे उसके बाद में प्रजा को भोजन करवाते थे वो सब प्रथाएं थी किंतु क्या था वोह सब रेर ओकेज पे होता था जबकि बुद्धिज्म में यह डेली ट्रेडिशनल गई कि बड़ा मंदिर बनाओ प्रत्येक संध्या आरती मंगल आरती वगैरह वगैरह पता नहीं वे लोग क्या करते होंगे य संध्या आरती मंगल आरती तो आज का कांसेप्ट है हमारा किंतु इसका इक्विवेलेंट डेली पब्लिक सेरिमनी वहां पे होती होगी तो अपने यहां पे डेली सेरिमनी में जो घर में अग्नि प्रकट करके उसको वह जो आहुति देने की बात है वह इस मंदिरों के सामने ना टिक पाया सभी लोगों के मन में वही इच्छा है कि सुबह शाम मंदिर में जो आरती होती है या व्हाट एवर जो सेरिमनी होती होगी वहां पर जाकर के पार्टिसिपेट करें सो दैट अट्रैक्शन वाज व्ट ब्रॉट मोस्ट ऑफ द पीपल टू बुद्धिज्म बट लेटर ऑन द होल थिंग डिजनरेटेड किंतु बाद में यह पूरा चीज यह पब्लिक स्पेक्टेक पब्लिक सेलिब्रेशन पब्लिक फेस्टिवल बड़े-बड़े मठ बड़ी-बड़ी मूर्तियां यह सब में जैसे कि एक तरह की अधोगति आ गई इट बिकम अ मास ऑफ करप्शन ऑफ व्हिच आई कैन नॉट स्पीक बिफोर दिस ऑडियंस इस तरह का भयानक करप्शन इसमें प्रकट हुआ कि जिसके बारे में मैं इस ऑडियंस के सामने बोल भी नहीं पाऊंगा दोज हु वांट टू नो अबाउट इट मे सी अ लिटिल ऑफ इट इन दोज बिग टेंपल्स फुल ऑफ स्कल्पचर्स इन सदर्न इंडिया इसके बारे में यदि आपको कुछ जानना है तो साउथ इंडिया में जो बड़े-बड़े मंदिर हैं उसमें यह जो ब मूर्तियां है यह जो मुझे लगता है कि य स्वामी जी बात कर रहे हैं इलोरा एजेंटा की वहां की जो मूर्तियां है हमको पता है कैसी है तो स्वामी जी कहते हैं कि यह जो करप्शन जो घुसा उसका आपको यदि एक अंदाज प्राप्त करना है तो मंदिरों की यह जो मूर्तियां है अर्ध नग्न मूर्तियां उसमें आप शायद जाकर के देख सकते हैं दिस इज ऑल द इन्हेरिटेंस वी हैव फ्रॉम द बुद्धिस्ट और यह है बुद्धिज्म का इन्हेरिटेंस भारत के लिए तो इस तरह से स्वामी जी पूरा बुद्धिज्म के बारे में हमको समझाते हैं अभी इसके बाद में स्वामी जी शंकराचार्य के बारे में स्टार्ट करेंगे जिसको कि अभी हम कल देखते हैं ओ ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण
प्रश्न: हमने भारत में सभी धर्मों का स्वागत किया, फिर भी बौद्ध धर्म भारत में टिक नहीं सका। ऐसा क्यों?
मस्तु अभी इसके बाद में जो शंकराचार्य वाला जो पोर्शन है ना उसमें स्वामी जी एक एक्सप्लेनेशन ऐसा देंगे कि बुद्धिज्म का जो कुछ कुछ पॉइंट है वह शंकराचार्य ने अपने हिंदू इजम में मिला दिया है जैसे कि सन्यास धर्म है वगैरह भारत में या तो हिंदुइज्म में त्याग का भावना तो है ही है किंतु यह जो इंस्टीट्यूशनल सन्यास है वह एक बुद्धिज्म का एक बहुत बड़ा उदान है व्हिच इज व्ट शंकराचार्य मिक्सेस विथ हिंदुइज्म तो बुद्धिज्म चला गया ज आपने कहिए ना कि साप गया पर लिसो रया तो बुद्धिज्म चला गया किंतु बुद्धिज्म के जो कुछ कुछ कंट्रीब्यूशन है दैट इज स्टिल हियर इन इंडिया और इसीलिए व शंकराचार्य को प्रच्छन्न बौद्ध कहते हैं स्वामी जी खुद यह बात करेंगे बाद
प्रश्न: वैदिक भारत में संघबद्ध संन्यास जीवन नहीं था शायद। बौद्ध धर्म की यह देन है
में वैदिक धर्म का जो था कि ब्रह्मचर्य आश्रम गृहस्थाश्रम वानप्रस्थाश्रम फिर सन्यास आश्रम और जो सुखदेव जो कि बचपन से ही बाल ब्रह्मचारी थे तो उसके पिताजी उसके पीछे में जाते अरे तुम इस तरह से घर छोड़कर चले जाओगे तो कैसे [हंसी]
प्रश्न: कुछ सन्यासी-संघ भव्य-उत्सवों का आयोजन करने में बहुत माहिर हैं. हम भव्य-उत्सव ज्यादा नहीं मनाते. किन्तु हमारे साधुओं में विद्वत्ता और निष्ठा बहोत होती है.
चलेगा यह जो ठाकुर का जो वैदिक ट्रेडिशनल कि इंडिविजुअल आपकी साधना स्ट्रांग होनी चाहिए आपका पब्लिक सेलिब्रेशन हो ना हो दैट डज नॉट मैटर वो तो एक ऑलरेडी ठाकुर ने डाल दिया था फिर स्वामी जी ने आ करर के बोल दिया शिव ज्ञान जीव सेवा यानी कि अपना जो पब्लिक मैनेजमेंट का जो [हंसी] एक्सपर्टाइज्ड चला लेते हैं क्योंकि हमारे यहां पे एक तरह से देखा जाए तो रिस्ट्रिक्टेड बहुत हो गया है एक मेंटल स्पेस जबकि वे लोग क्या करते हैं आउटसोर्स कर देते हैं तो आउटसोर्स ने में फिर बड़ा बेटर चलता है सो एनीवे किंतु दिस आर जैसे आपने कहा दिस आर द स्टार्क कंट्रास्ट एक तो इंडिविजुअल स्पिरिचुअलिटी पर बहुत ज्यादा फोकस है और फिर यदि आपको पब्लिक में कुछ करना ही है तो सेवा कार्य करो सेलिब्रेशंस विल टेक केयर ऑफ देम सेल्व इस सिलसिले में इंटरेस्टिंग एक लेटर मैंने पढ़ा था अ उस समय प्रभानंद जी महाराज जीएस थे और स्वामी जी की 1th एनिवर्सरी सेलिब्रेट हो रही थी तो सभी सेंटर में जैसे इंस्ट्रक्शन जाता है ना कि आपको पब्लिक 150 इज अ बिग थिंग तो सेलिब्रेट करना है तो साथ-साथ में उसमें एक पैराग्राफ ऐसा था कि यह सब कुछ दिस इट एवरीथिंग ऑफ दिस शुड रिमन एज मियर सेरिमनी एग्जैक्ट वर्ड मुझे याद है ये मियर सेरिमनी ना रह जाए इसके लिए हम इस उपलक्ष में सेवा कार्य भी स्टार्ट कर रहे हैं और यह सेवा कार्य वह गदाधर अभ्युदय प्रकल्पना विवेकानंद स्वास्थ्य परि सेवा प्रकल्प वगैरह वगैरह वो दो-तीन प्रकल्प चालू किए थे यानी कि इवन दैट टाइम इट सेल्फ कि ये इट्स अ मैटर ऑफ सेलिब्रेशन स्वामी जी की 150 एनिवर्सरी बट इट शुड रिमन मियर सेलिब्रेशन वी नीड टू डू सम सर्विस वर्क दैट इज द कोर ऑफ रामकृष्ण
प्रश्न: लोगों में हमारे संघ के प्रति बहुत सम्मान है
मिशन मैंने बहुत सारे लोगों को सुना है मैं लिमडी में था तब भी राजकोट में था तब भी बहुत सारे लोग आके बोलते थे कि देखिए कि आप आपके यहां पर सब तरह के लोग आते हैं किंतु वहां पर तो सिर्फ उन्हीं के लोग जाते हैं उन्हीं के लोगों का सब है तो एक अपना एक य यह क्या कहेंगे कि कॉस्मो टम भी है ईगलिटेरियन जम भी है व वी अपील अवर अपील स्प्रेड्स बियोंड कास्ट एंड यह सब जो है नोमिन उसके बियोंड अपनी अपील जाती है जबकि उनका ऐसा है कि देर अपील इज लिमिटेड टू सम कास्ट सम कॉमिनेशन टसेट सो दैट फैक्टर इज आल्सो
प्रश्न: हमारा संघ जाति और वर्ग की सीमाओं से परे है। हम यूनिवर्सल वैल्यूज की शिक्षा देते हैं। इसी लिए कॉस्मोपॉलिटन लोग हमारी और आकर्षित होते है.
देयर यह देखिए कि शंकराचार्य ने जिस तरह से जो मोनेस्ट्री इंस्टीट्यूशनलिज्म जो बुद्धिज्म में से एक उठाया है उठाया नहीं है बट ही हैज एडेप्टेड इट तो हीय जो पब्लिक जो सेलिब्रेशन वगैरह जो है ना वह भी एक तरह से देखिए कि जो चैतन्य देव ने नगर कीर्तन में एक एक तरह से एडेप्ट कर लिया है कि आप अपने घर में बैठकर साधना कीजिए और नगर कीर्तन में जाइए जो उमंग और उत्साह आएगा कि आपके जैसे जो दूसरे 50 लोग हैं वह प्रभु का हरि बोल हरि बोल करते जा रहे हैं कीर्तन करते-करते वो जो निर्मल आनंद आएगा और देखिए कि ठाकुर के खुद के जन्म उत्सव का पालन ठाकुर के रहते रहते होना शुरू हो गया था तो ठाकुर कहते हैं एक दिन एक आया था उसी दिन ठाकुर का जो बर्थडे था उसी दिन कोई एक आया डिवोटा फिर कहता है कि वहां पे वह श्रमिक लोगों का यह जो कोई है वहां पे जाना है इंस्टिट्यूशन है वहां पर जाना है लेबर इंस्टिट्यूशन में तो वह जब चला गया तो ठाकुर कहते हैं देखिए उसके कपाल में ही नहीं है आज इतना आज यहां पे कितना आनंद होता कितना नाच गान होता उसके कपाल में ही नहीं है बोलकर के ठाकुर किसी को बोलते चलो तुम चालू करो अभी कीर्तन तो इवन ठाकुर का भी ये साइकोलॉजी बड़ा क्लियर है कि ये कीर्तन भजन ये पब्लिक सेलिब्रेशन पानी हाटी का क्या है ठाकुर का खुद का जो यह था आकर्षण पाणी हाटी की प्रति वो भी तो ये स्वामी जी की साइकोलॉजी के भीतर में फिट बैठता है पहले पहले जब ठाकुर में दिव्य भाव प्रकट हुआ तब ठाकुर के मन में एक इच्छा हुई कि जो जिसको आकर्षण कहते हैं लोगों का आकर्षण यानी कि दिव्यता से प्रभावित होकर के लोग आकर्षित होते हैं वो आकर्षण मुझे देखना है तो फुई श्याम बाजार ऐसा ही कुछ नाम है वह शहर का ना कि गांव का उसी कामर पुकुर के आसपास का है वहां पर ठाकुर गए और वहां पे तीन दिन दिन रात कीर्तन चल रहा है वह नहीं खाने को समय है नहीं शौच जाने को समय है कीर्तन चल रहा है तो चल रहा है हजारों हजारों लोग ठाकुर के आसपास इकट्ठा हो गए थे तब ठाकुर ने कहा कि हां इसको कहते हैं दिव्य आकर्षण तो यह जो दिव्य आकर्षण लोगों को इकट्ठा करके यह जो एक पब्लिक स्पेक्टेक खड़ा करना ये ट्रिक तो ठाकुर के पास में भी थी यानी कि लोगों की साइकोलॉजी मास साइकोलॉजी जिसको कहते हैं वो ठाकुर उससे बड़े वाकफ थे सो इन दैट वे बुद्धिज्म का जो कुछ कुछ एलिमेंट्स अभी तक टिका
प्रश्न: वैदिक युग में ब्राह्मण ऋषिओं ने ब्रह्म साक्षात्कार कर के उसे छुपा के रखा यह बात समझ में नहीं आ रही. उनका ह्रदय तो करुणा से भरपूर हो जाना चाहिए था. फिर क्षत्रिय अवतारों को आकर क्यों ब्रह्मज्ञान को बाँटना पड़ा?
है देखिए यह बात हमको ठाकुर के डिसाइल में भी देखने को मिलती है यह जो बाबूराम महाराज है योगेंद्र महाराज है हरि महाराज है वे लोग टिपिकल ब्राह्मण थे हरि महाराज के बारे में तो स्वामी जी कहते इज अ परफेक्ट ब्राह्मण किंतु जब स्वामी जी कहते हैं कि अमेरिका जाकर के वेदांत प्रचार करना होगा तो यही हरि महाराज कहते हैं मेरे से वह सब नहीं होगा तब स्वामी जी ने रो कर के उनका गला पकड़ कर के उनको आलिंगन करके कहा कि भाई मैं ही सब मेहनत करते-करते मर जाऊंगा क्या तब कहीं जाकर के हरि महाराज रेडी हुए सो दैट हरि महाराज एंड स्वामी जी वी कैन से तो ब्राह्मण और क्षत्रिय वो जो कॉन्फ्लेट उस समय था एगजैक्टली टुडे वी कैन सी इन देम ऐसा नहीं है कि हरि महाराज को इन लोगों के प्रति कोई द्वेष है या वगैरह बाय नेचर ही इज इंट्रो ब्राह्मण कौन होता है जो कि जगत के साथ में उसका वैराग्य हो चुका है और वह फिर बैठे-बैठे विद्या अभ्यास करते करते तपस्या करते करते ब्रह्मचार्य का पालन करते करते ब्रह्म साक्षात्कार करता है उसके बाद में उसका वही है कि देखिए वह जहां पर रहेगा भूमि पवित्र हो जाएगी किंतु वह जो ट्रेडिशनल प्रीचर है उसकी तरह प्रीचिंग करने को नहीं जाएगा जो प्रीचिंग कार्य जो बुद्धिज्म ने किया जो आज स्वामी जी कर रहे हैं तो क्षत्रिय लोगों ने जो प्रीचिंग किया दैट वी कैन सी इन द फॉर्म ऑफ स्वामी जी ब्रह्म इन लोगों ने जो पवित्रता साक्षात्कार किया वी कैन सी इन द फॉर्म ऑफ हरि महाराज क् हरि महाराज का ऐसा नहीं था मुंह पोच के बैठने ही जाते थे उनका ऐसा था कि एक्टिव प्रचार नहीं करना है वह अपना काम नहीं है दैट इज हां आप जद उनके पास में जाएंगे रहेंगे तो आपको बड़ा अच्छे से सिखाएंगे हरि महाराज के बाद बाद के जो वो स्पिरिचुअल ट्रेजर वार्तालाप है पत्र है देखिए कि कितना सुंदर है किंतु वही है कि आपको उनके पास में जाना होगा द मोहम्मद विल हैव टू गो टू माउंटेन माउंटेन विल नॉट टू
प्रश्न: साधना करने से, कुण्डलिनी जागृत होने से, धी, धृति, मेधा, वगैरह अतीन्द्रिय शक्तियाँ प्राप्त होती है. इसका क्या अर्थ है?
मोहम्मद मुझे भी देखना पड़ेगा यदि मैं एक अनुमान करके कहूं देखिए कि जैसे जैसे ठाकुर का ही उदाहरण लेते हैं कि ठाकुर को लोगों का चरित्र देखने की एक क्षमता थी उनके पास में जो भी आता था उनका हृदय में वह देख सकते थे कि इसका चरित्र किस तरह का है जैसे मास्टर महाशय को उनका घर बता दिया अभी यदि आपको चरित्र देखना है लोगों का तो इस आंखों से तो आप नहीं देख पाएंगे उसके लिए आपको तीसरी दृष्टि खोलनी पड़ेगी तो ये जो हायर फैकल्टी की जो आप बात करते हैं ठाकुर के जीवन में वह हमको दिखता है कि लोगों के हृदय में क्या है वह देख पाएंगे तो वह हायर फैकल्टी हायर विजन कब खुलेगा जबकि आप स्पिरिचुअलिटी में प्रोग्रेस करेंगे स्वामी जी है मां है लोगों का संस्कार समझ सकते थे संस्कार समझ कर के वह किस डायरेक्शन में जाएगा तो बेटर रहेगा बोलकर इस तरह की उसको आध्यात्मिक शिक्षा देते थे अब स्वामी जी को देख कर के ही ठ पहचान लिए कि हां यह मेरा मतलब वारसदार होने योग्य है राजा महाराज को देख कर के ही पहचान लिए कि यह मेरा मारस पुत्र होने को योग्य है भले ही चाहे राजा महाराज के संस्कार इवेंचर ठाकुर का इतना ये था इनसाइट कि पता चला कि अल्टीमेटली ही विल गोइंग टू बिकम वन ऑफ द ग्रेटेस्ट स्पिरिचुअल सोल अपऑन अर्थ सो ट जो इनसाइट थी ठाकुर की वो मुझे लगता है कि इसके बारे में ऐसा कुछ होगा
प्रश्न: स्वामीजी का ऐतिहासिक विश्लेषण बहुत प्रभावशाली है। हम उत्सुकता से जानना चाहते हैं कि वे शंकराचार्य के बारे में क्या कहते हैं।
ये ये स्वामी जी का जो है ना इस स्वामी जी का देखिए वेरी रेयरली आपको ऐसा कुछ मिलेगा स्वामी जी का हिस्टोरिकल विजन इतना स्ट्रांग है आज के आज के युग के लिए रेमेडी देनी है तो भविष्य के लिए रेमेडी देनी है तो पहले तो हिस्टोरिकल एनालिसिस करते हैं कहते हैं कि हाउ वी केम हियर देन वी कैन इसी ट्रेंड लाइन को फॉलो करते हैं जैसा आपने कहा इसी ट्रेंड लाइन को फॉलो करके हमको फ्यूचर में जाना है यू आर नॉट गोइंग टू मेक एनी रेडिकल चेंजेज आज आप जाके अफगानिस्तान में कहेंगे वेदांत का प्रचार करो इट्स नॉट गोइंग टू बिकम ट इजी भले ही चाहे वेदांत उनके लिए बेटर होगा ऑप्शन बट जो उनका ट्रेंड लाइन जो है हिस्टोरिकल डेवलपमेंट जिस डायरेक्शन में जा रहा है संस्कार का प्रवाह व संस्कार का प्रवाह ओवरनाइट चेंज नहीं होने वाला है तो भारत का संस्कार का प्रवाह क्या है पहले उसको पकड़ो वह नस पकड़ो फिर उसको बोलकर उसको समझ कर के रेमेडी दो यह अपनी देखिए रामायण की कहानियां भारत
प्रश्न: व्यास-वाल्मीकि जो सीखा के गए वह हमारे DNA में मौजूद है.
का बच्चा बच्चा रामायण की कहानी से प्रभावित है भले मैं खुद बचपन में नास्तिक जैसा ही था कभी मंदिर में नहीं जाता था कभी ऐसा कोई धर्म में इंटरेस्ट नहीं था किंतु टीवी पर रामायण चल रहा है तो मैं बैठ के देखता था एक भी एपिसोड छोड़े नहीं है मिस नहीं किए हैं और साथ-साथ में भारत की हिस्ट्री के साथ में यह प्रॉब्लम है कि पहले तो इसने आ कर के हमारी पिटाई की उसके बाद में वो आ कर के पिटाई करके चला गया उसके बाद में यह आ कर के लूट करके चला गया ये जो ये जो पिछले 1000 साल की हिस्ट्री पढ़ते हैं ना मैं एकदम डिप्रेसो जाता हूं फिर प्रॉब्लम है वैदिक हिस्ट्री का प्रॉपर सोर्स नहीं है या तो फिर अंधश्रद्धा एं हैं या तो फिर टाइप का एक डिफरेंट टाइप का एक इंटरप्रिटेशन है तो फिर उसके ऊपर विश्वास नहीं होता कि यह सही कितना है गलत कितना है और और यह सब हुआ देखिए विदाउट भारत का
प्रश्न: दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू धर्म कितना व्यापक रूप से फैल चुका है
एक्टिव उसमें कोई पुश लगाए बाकी जितने भी धर्म है वहां के हेड क्वार्टर है और हेड क्वार्टर की ओर से प्रचंड पुश होता है पैसा डाला जाता है रिजोर्ट डाले जाते हैं हमने भारत में से कुछ नहीं किया विश्व के हिंदुओं के लिए ऊपर से उनको गाली द है इन स्पाइट ऑफ ट यह सब हुआ है इसको कहते स्प्लिट पर्सनालिटी एक और हम अपने को जगतगुरु मानते हैं दूसरी ओर सबसे कम आत्म श्रद्धा जो है वह देश अपना इंडिया है ये शेमलेसली हिंदू होना पब्लिक लाइफ में इ अ रिसेंट फिनोमिना ना किंतु देखिए भाव का ही एक स्वरूप है यह जो ठाकुर का जो भाव है यह शांत भाव दास भाव सख्य भाव मधुर भाव मातृ भाव बालक भाव उसी का एक दया भाव है बस वही है कि हम दया भाव को एक थोड़ा सा निम्न कक्ष का मानते हैं जो भक्ति भाव ईश्वर के प्रति है उसी को लोगों की ओर रीडायरेक्ट कर देना है उन्हीं के भीतर में शिव का दर्शन करना है तो वो जो भाव प्रकट होगा तो इट विल एक्सपें इन बोथ डायरेक्शन इंटरनल एज वेल एज
प्रश्न: शंकराचार्य कहते है ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या, किन्तु ठाकुर कहते है ब्रह्म भी सत्य जगत भी सत्य।
एक्सटर्नल नहीं यह बात है ना स्वामी जी ने खुद ने कही है कि शंकराचार्य वगैरह पंडित जी मात्र थे क्योंकि उनका उदार हृदय नहीं था जबकि जो अवतार गण होते हैं उनके उदार हृदय होते हैं बुद्धिमत्ता तो होती है उदार हृदय भी होते हैं टवे जो भगवान राम भगवान कृष्ण उनकी जो उदारता थी उनकी जो मेधा शक्ति थी उसी का रिफ्लेक्शन हमको श्री राम कृष्ण में देखने को मिलता है वही है कि बिकॉज ऑफ दिस बुद्धिज्म यह जो स्प्लिट जो आखिर आखिर में हुआ कि यह बुद्धिमत्ता यहां पर चली गई उदार हृदयत यहां पर आ गई और फिर उदार हृदयत के साथ में सब करप्शन आ गया बोलकर के सब प्रॉब्लम स्टार्ट हुआ सो श्री राम कृष्ण इज अ कंटिन्यूएशन ऑफ द ट्रेडिशनल एंड श्री कृष्णा देखिए यह जो सरलता और बुद्धिमत्ता
प्रश्न: ठाकुर कहते है भक्त हो तो मूरख क्यों हो? यह सरलता और प्रैक्टिकल सेंस दोनों एक साथ कैसे रह सकते है?
यानी कि प्रैक्टिकल सेंस इसका परफेक्ट कॉमिनेशन हमको स्वामी जी के लाइफ में मिलता है स्वामी जी जब अमेरिका गए तो कोई प्लानिंग नहीं कुछ यह नहीं जब यात्रा भी करनी है तो कपड़ों को ठीक-ठीक करके वो बांध करके वो बैक पैक करना है ऐसा कोई उनको सेंस ही नहीं था सब कुछ आखिरी घड़ी में यह सब करते थे इसलिए स्वामी जी की जितनी भी लेडी डिसाइल थी वो लोग ठीक करती थी कि स्वामी जी का जो भी मैनेजमेंट करना है हम लोग करेंगे यह स्वामी जी मिड सिस्टर के वहां पर रहने को गए लॉस एंजलिस में तो वह जो एलिस हेंस ब्रो कहती है कि मैं आपके एजेंट के रूप में एडवांस एजेंट के रूप में सान फ्रांसिस्को जाऊंगी वहां पे मैं सब ठीक करके बाद में आपको बुलाऊंगा तब आप आइएगा तो और फिर जब स्वामी जी ने टर्क स्ट्रीट पे जो फ्लैट लिया वहां पे रहने लगे तो यह मिसेस हेंस ब्रो है फिर होम ऑफ ट्रुथ की वो जो संचालिका थी वे लोग वही लोग सब डे टू डे एक्टिविटी मैनेज करते थे स्वामी जी वो जस्ट लेचर देते थे और वह सब हवाहवा में उनका था तो य स्वामी जी में देखिए कि बोथ एक तो इनक्रेडिबल प्रैक्टिकल सेंस हिस्टोरिकल अंडरस्टैंडिंग भारत का भविष्य वर्तमान भूतकाल य इतना पावरफुल और किसी ने बुद्धिमत्ता किसी ने दिखाई नहीं होगी रिसेंट समय में साथ में ही वह इतने ही इंप्रैक्टिकल थे इतने ही बालक जैसे थे ये जितने भी लेडी डिसाइल है फॉरेन अमेरिका के वो सबका रेमसंस पढ़ के देखिए कि वे लोग स्वामी जी को बिल्कुल अपने संतान के रूप में देखती थी सारा ओली बुल वह सब समय स्वामी जी को एक तरह से प्रोटेक्ट करने का प्रयास करती थी क्यों क्योंकि वे लोग यह भी देखती थी कि इन स्पाइट ऑफ हैविंग सो मच स्कॉलरशिप विद्वता इनसाइड ही इज लाइक अ चाइल्ड इतने सरल है कि कोई भी उनको कष्ट देक चला जाएगा कोई भी उनको धूर्त बना कर के चला जाएगा तो हाउ इज दिस पॉसिबल टू हैव बोथ ऑफ दिस स्वामी जी इज दैट परफेक्ट एग्जांपल