Swami Vivekananda
ओम स्थापा कौच धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठ आओ रामकृष्ण यत नमः टीचिंग्स ऑफ स्वामी विवेकानंद सो लेटेस्ट नो हर स्वामीजी से अवर बेस्ट क इस दान अवर ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस इस एक्साइड व्हेन वे आर विदाउट थॉट ऑफ सेल जो ग्रेट जीनियस लेटेस्ट ओपन ओवर सेल्स तू डी वन डिवाइन एक्टर और लेट हम एक्ट दो नथिंग अवर्सेल्स और अर्जुन आई हैव नो ड्यूटी इन डी होल वर्ल्ड से कृष्णा बी परफेक्टली रिजाइंड परफेक्टली अनकंसर्न्ड और दें अलोन कैन यू डू अन्य ग्रेट क नो दिस इस एन वेरी इंपॉर्टेंट टीचिंग रिगार्डिंग दिस हर स्वामीजी गिव्स डी की ऑफ डी सक्सेस तू अन्य क नो वे नो पर अन्य क तू बी सकसीड डी मोस्ट इंपॉर्टेंट थिंक डू नोट पट अन्य हार्ड क सपोज आईएमएस स्टूडेंट आईएफ आईटी इस नेसेसरी पर मी तू से फोर एग्जांपल से डेड तू पास वन एग्जामिनेशन सो आईटी इस अब्सोल्युटली नेसेसरी पर मी तू स्टडी पर एटलिस्ट सेवरल अवर्स तू और थ्री अवर्स डेली दिस डेली और ब्यूटी स्टडी विद एन कांस्टेंट प्रेशर नोट जस्ट नियर स्टडी दिस इस व्हाट इस अब्सोल्युटली नेसेसरी इन ऑर्डर तू पास दी एग्जाम सपोज आई एम प्रिपेयरिंग सपोज आई एम डूइंग क सपोज आई ऍम जिवन एन प्रोजेक्ट पर एग्जांपल इन रांची मोराबादी वे हैव एन सेट देवर आई वज वर्किंग देवर इन और डेवलपमेंट सो इन और डेवलपमेंट एवरिवन प्रोजेक्ट सिर्फ पर एग्जांपल किसान मेला फार्मर्स इन सराउंडिंग एरियाज वे हेड हैव फॉर्म हाउस वे हेड एन वेरी बड़े फार्म ऑलमोस्ट 75 एकड़ इन वन ऑफ डी ट्रबल एरियाज और व्हेनेवर मेला फार्मर्स फिर वे वुड गिरधर मोर दें से 23000 फार्मर्स वुड गदर इन वन प्लेस और दें वे बिल देश सेलिब्रेशन देवर बिल बी सम कलर प्रेजेंटेशन बाय डी फार्मर्स डर वुड बी सम स्पीशीज में डी मोंक देवर बिल बी सम डिग्निटी इसे कमिंग डर और डर बिल बी शॉप्स अरेंज एवरीव्हेयर इन दिस किसान मेला इस ए वंस इन एन एयर इवेंट और एवरी वन वर्किंग इन दिस और डेवलपमेंट डिपार्मेंट वे वुड क हार्ड पर डेज ऑन और सेफ पर एटलिस्ट वन मठ बिफोर दिस किसान मेला वे हेड तू स्टार्ट वर्किंग और सेंडिंग इनवाइट तू सम डिग्निटेरी इनवाइट तू सम सीनरी मेंस और दें गैदरिंग दिस टीम सो फार्मर्स और स्टार्ट कलेक्टिंग सजेशन फ्रॉम डेम डेट सो शॉप्स दे आर गोइंग तू पट व्हाट बिल बी डी प्रोड्यूस थे बिल सेल इन डी पर दिस फेयर और डर बिल बी कल्चरल प्रोग्राम सो वे बिल गेट दिस टीम्स ऑफ दिस वूमेन और गर्ल्स और दे बिल कंसर्ट अमोंग डेम सिस और देवर सजेस्ट डी दिस आर डी सोंग्स एट सिटेरा डेट दे बिल परफॉर्म सो जो डी शेड्यूल हैशटैग बी प्रिपेयर्ड फ्रॉम डी बिगनिंग दिस इस सो मैच पर क पर वन मठ वे वुड बी परफेक्टली बिजी विथ नथिंग बट दिस किसान मेला सो बिकॉज़ वर्किंग सो हार्ड किसान मेला विकम सक्सेसफुल बट सपोज आई डू नोट क हार्ड सपोज थिंग्स डेट ओके व्हाट इसे आईटी मटर डेट आई हैव तू क सो हार्ड डी किसान मेला गोस ऑन एवरी एयर और देवर इस नथिंग न्यू हर और लेट पीपल मेक डर ऑन डिसीजन आई डू नोट हैव तू बी इंवॉल्वड इन एवरीथिंग डेट इस गोइंग ऑन सो आईएफ आई हैव दिस केयरलैस एटीट्यूड व्हाट बिल हैपन डेट ऑन डी दे ऑफ डी फार्मर्स फेयर आईटी सेल्फ देवर बिल बी सम स्मॉल डिजास्टर सोमेटाइम्स डेट पर वाटर विच हेयर ड्रिंकिंग वाटर आईटी बिल आईटी बिल से विकम एम्टी डेट कैन ऑफ ड्रिंकिंग वाटर बिल नोट बी डर डेट फूड डेट वज गोइंग तू बी सर्व तू एवरीवन दत दे बिल बी फूड शॉर्ट आगे देवर बिल बी सो में ट्रबल्स और डिफिकल्टी और शॉर्ट कमिंग्स और स्मॉल डिसऑर्डर्स माइ हैपन विद किसान मेला डेट इस वही एवरेज टाइप ऑफ फेयर एवरी स्टेप ऑफ दिस मेला एवरी मोमेंट ऑफ डी मेला क फ्रॉम डी बिगनिंग चॉक्ड आउट डेट दिस टाइम वे बिल डू दिस एट दिस टाइम वे बिल डू दिस और एवरीथिंग डेट इस नीडेड देवर बिल बी एन स्टॉक कनेक्ट बिफोर हेड और देवर बिल बी देवर वेयर ओवर फॉर्म हज और देवर इस एन बिग स्टोरेज एरिया वे बिल गेट दिस कंस ऑफ ड्रिंकिंग वाटर दिस रा मटेरियल पर मेकिंग फूड से राइस और चिकन और एवरीथिंग बिकॉज़ आईटी वज एन ट्राईबल फेयर देवर बिल बी चिकन सर्वे तू डेम सो एवरीथिंग वुड बी गदर और कलेक्ट इन ओवर चुनाव वेयर हाउस एवरी मटेरियल इस प्रिकेटेड बिफोर हैंड डी किसान मेला इत्सेल्फ बिल बी वेरी सक्सेसफुल सो दिस पुटिंग इन एन लोट ऑफ एफर्ट पुटिंग इन एन लोट ऑफ टाइम इसे डी टाइम पर सक्सेस ऑफ अन्य इवेंट बट हर स्वामीजी सेस डेट व्हेन वे सेड इस इन गीता दिस इस डी रेशन ऑफ गीता रास्ते मां फलेषु कदाचनाम डेट योर राइट इस ऑन डी कर्म बट नोट ऑन डी फ्रूट डर ऑफ सपोज तेरे इस वेरी ग्रेट डेंजर व्हेन दिस किसान मेला बीकमस वेरी सक्सेसफुल पीपल बिल स्टार्ट गैदरिंग अराउंड मी और देवर इसे डेट यू हैव दान वेरी नाइस पर यू आर वन ऑफ डी बेस्ट साउथ रोमांस बिल इंक्रीज डेट यस आई एम डी वन हूं इस डूइंग डी जो डी क और अदर पीपल आर ओनली हर डूइंग लिटिल लिटिल सो दिस इस एन ग्रेट डेंजर सपोज आई वांट तू मेक अन्य इवेंट्स सक्सेसफुल आई हैव तू क वेरी हार्ड पर डेट बट देवर इस एन एसोसिएटेड डेंजर हर डेट E5 क वेरी हार्ड और दें आई बिल ऑफ कोर्स सकसीड और देवर इस एन ग्रेट पॉसिबिलिटी डेट आई बिल सकसीड और दें वंस आई एम सक्सेसफुल पीपल बिल कम तू मी प्रेस्ड मी और व्हेन डिप्रैस मी मी एरोगेंट बिल इंक्रीज मी एगो बिल इंक्रीज और आई बिल से आई बिल सी स्टार्ट थिंकिंग मी लाइफ सक्सेसफुल आईएफ आई एम नोट हर नो वन बिल क हार्ड और किसान मेला बिल स्टार्ट मी लाइनिंग अवर नाम डेविल से रामकृष्ण मिशन अरेंज थिस बिग फार्मर्स फेयर बट डियर वज नो ड्रिंकिंग वाटर डर वज नो फूड ऑन टाइम दिस डिग्निटी कैंप दिस विप गेस्ट बट देवर वज नो वन तू नो वन तू ग्रीट प्रोग्राम्स और कलर इवेंट तेवर जो आउट ऑफ टाइम आउट ऑफ तूने इन लाइक डेट पीपल बिल स्टार्ट मालानी डी नाम ऑफ रामकृष्ण मिशन दिस इस व्हाट आई बिल स्टार्ट थिंकिंग डेट बिकॉज़ ऑफ मी एवरीथिंग इस सक्सेसफुल नो वे नो डेट इन ऑर्डर तू बी एन साधक इन ऑर्डर तू बी एन देवोटी वे हैव तू डिस्ट्रॉय अवर एक परफेक्टली कंपलीटली बट इन ऑर्डर तू डिस्ट्रॉय मी एगो व्हाट शुड आई डू वर्किंग हार्ड पर अन्य इवेंट दिस इस डी ग्रेट डिलेमा इन स्पिरिचुअल लाइफ और सोमेटाइम्स पीपल स्टार्ट थिंक स्टार्ट थिंकिंग था क वेरी हार्ड मी एगो बिल इंक्रीज सो लेट मी स्टॉप वर्किंग हार्ड लेट मी फेल डीओईएसएन'टी मटर डेट आईएफ आई फेल इन आउटर वर्ल्ड आई बिल आई बिल सकसीड इन इन एन वर्ल्ड दिस इसे एन एटीट्यूड सम पीपल दे कल्टीवेट दे स्टार्ट थिंकिंग डेट आई एम सक्सेसफुल आउटसाइड आई एम ए फेलियर इनसाइड और इन ऑर्डर तू बी सक्सेसफुल इनसाइड आई हैव तू फेल आउटसाइड नो दिस इस एन इदर और इदर आई विकम सक्सेसफुल इन सम वर्ल्डली प्रोजेक्ट सम वर्ल्डली एक्टिविटी सम सांसारिक एक्टिविटी और आई कैन डू जपम और दम मी साधना रेगुलरली दिस बोथ टुगेदर दिस इस एन इंप्रेशन डेट में पीपल हैव गो और दिस इस व्हाट स्वामी जी से स्टेटमेंट बुद्धिस्म स्टार्टड ट्रेडिंग दिस आइडिया ऑफ मॉनेस्टिसिजम अमोंग जो इन ओवर एन वैदिक आगे डर वेयर एवरी वन हेड डेट ड्यूटी अक्षय हूं प्रोटेक्ट्स डी ग्लोबल अब ब्राह्मण इस डर हूं टीचिस पीपल शुद्ध इसे डर हूं ट्रेड्स आइटम्स आईटी प्रॉपर टाइम तू आईटी और वेश्या इस देवर हूं दस जो डी हार्ड क लाइक ग्रोइंग दिस फूड आइटम्स सो दत पीपल किन आईटी सो एवरीवन हेड डेट ड्यूटी सो इंसटिड ऑफ थे परफॉर्मिंग दे ड्यूटी प्रॉपर्ली बुद्धिस्म स्टार्टड सेइंग डेट आईएफ यू आर परफॉर्मिंग योर ड्यूटी परफेक्टली आईएफ यू आर परफॉर्मिंग योर ड्यूटी राइट दें यू बिल बी सक्सेसफुल और आईएफ यू आर सक्सेसफुल यू बिल विकम रिच यू बिल गेट डी जो दिस नाम और सम और सोशल रिकॉग्निशन और डेट बिल यू बिल को डॉ यू बिल सिंक डॉ इन डी संसार योर आध्यात्मिक लाइफ आईटी बिल विकम आईटी बिल डिस्ट्रॉय योर आध्यात्मिक लाइफ बिल बी डिस्ट्रॉय सो लीव योर धर्म अलोन आईएफ डी तू क्षत्रिय प्रोटेस्ट पीपल बिकॉज़ यू प्रोटेस्ट पीपल व्हाट बिल हैपन यू बिल बी किंग और यू बिल गेट जो दिस प्रेस्टीज जो दिस किंग है सच एन ग्रेट प्रेस्टीज इन डी सोसाइटी सो आईएफ यू पीपल बिल कम और दे बिल रिक्वेस्ट यू तू सॉल्व देवर प्रॉब्लम्स और आईटी बिल ओनली इंक्रीस योर अरा गंज डी स्टॉप बीइंग एन किंग और विकम अमाउंट तू ब्राह्मण दिस योर टीचिंग पीपल और यू आर सक्सेस यू आर एन गुड टीचर दें डू यू बिल हैव में डिसाइड और देवर आर में डिसीप्लस दे बिल कम तू यू और आस्क यू पर गाइडेंस और व्हेन दे कम तू यू और आस्क यू पर गाइडेंस आईटी बिल इंक्रीज योर एक सो स्टॉप टीचिंग तू वेश्या से डेट आईएफ यू ट्रेड यू बिल विकम रिच आईएफ यू विकम रिच यू कैन परचेज सो में थिंग्स होगा सो में थिंग्स ऑफ सेंशुअल प्लेजर सो स्टॉप बीइंग रिच और तू वैश्य डिसएड डेट आईएफ यू क वेरी हार्ड और आईएफ यू प्रोड्यूस वेरी नाइस क्रॉप आईटी बिल गिव यू सेट इट्स फ्रिक्शन और आईएफ यू गेट सेटिस्फेक्शन सेटिस्फेक्शन बिल इंक्रीज योर अरा गंज सो स्टॉप बीइंग सेटिस्फाइड और स्टॉप वर्किंग इन डी फॉर्म्स इट्स एवरीवन विकम मोंक और वंश विक्रम मोर यू डोंट हैव तू डू एनीथिंग यू बिल नेवर बी सक्सेसफुल और आज एन रिजल्ट यू बिल नेवर योर एगो बिल नेवर इंक्रीज और वंस युवर एगो गोस डॉ योर एबिलिटी तू फॉक्स ऑन योर डेली सारण बिल इंक्रीज दिस इस व्हाट बुद्धिस्म स्टेटिक टेलिंग तू पीपल बट हर इस एन ग्रेट दे डेंजर व्हेन एवरीवन विकम से मोंक क्षत्रिय विकम से मोंक हूं इसे गोइंग तू प्रोटेस्ट डी पीपल इन ब्राह्मण विकम सम्मा हूं इसे गोइंग तू टीच डी पीपल व्हेन शुद्ध विकम सम्मा हूं इसे गोइंग तू डू ट्रेडिंग और मर्चेंडाइज और जो दिस कॉरपोरेशन टुडे वे हैव बिग कॉरपोरेशन एट दे टाइम देवर वज स्मॉल परचेज आईटी वन प्लेस और सलाद अंदर प्लेस और आईएफ शुद्ध स्टॉप्स वर्किंग इन डी फॉर्म और फैक्टरीज और गोल्ड स्मिथ और इसे अन्य वन अन्य ऑफ डी ट्रेड दें हूं गोइंग तू प्रोड्यूस जो दोस्त सोसाइटी बेलकम्स स्लोली इन ग्रैजुअली डिटेरिऑरेटिंग और व्हेन इस्लामिक अटैक नो वन तू प्रोटेस्ट अवर पीपल और तू टीच अवर पीपल और तू प्रोड्यूस दिस वेपंस इट्स नो वन तू फाइव देवर वेयर नो सोल्जर सो दिस बुद्धिस्म दिस एंटायर रंग आइडिया ऑफ स्पिरिचुअलिटी डिस्ट्रॉय हिंदुइज्म इन डिस्ट्रॉय इंडिया और इस एन रिजल्ट देवर वेयर 1000 इयर्स ऑफ स्लेवरी और ऑफ कोर्स एवं एवरीवन विकम से मोंक एन परसों हूं इसे नोट एलिजिबल आईटी जो ही इसे नोट क्वालिफाइड इन एवं इन लीडिंग स्पिरिचुअल लाइफ व्हाट बिल हैपन विथ हम यू बिल को डॉ साइंस इन करप्शन आईटी इस सो डिफिकल्ट तू प्रैक्टिस ब्रह्मचर्य इसे आईटी पॉसिबल डी परसों हूं इस सो डेडीकेटेड एवं पर हम आईटी इस डिफिकल्ट तू प्रैक्टिस ब्रह्मचर्य हो कैन परसों हूं इसे फोर्सफुली मेड ए मॉम ही बिल प्रैक्टिस ब्रह्मचर्य जब हमको सक्सेस मिलती है किसी भी कार्य में तो हमारा अहंकार बाढ़ जाता है तो इसीलिए जो बुद्ध लोगों ने जो है एक इस तरह का एक प्रचार करना शुरू कर दिया की क्षत्रिय को जो है प्रजा का रक्षण में ही
स्वामी विवेकानन्द
करना है ब्राह्मण को जो है लोगों को शिक्षा नहीं देनी है वो वैश्य जो है वो जो है जो ट्रेडिंग करते हैं मर्चेंडाइज जो करते हैं वो सब नहीं करना है जैसे की बाजार में कुछ मिलेगा ही नहीं और यह जो शुद्ध है जो शारीरिक कर्म करते हैं जो घर बनाते हैं जो खेती में कम करते हैं जो जूता सिलाई करते हैं कपड़े बन देते हैं उन लोगों को खुशी किसी भी तरह का कम नहीं करना है सबको साधु हो जाना है जब आप साधु हो जाएंगे एक भी खूब बन जाएंगे जैसे बुद्धिस्म में जिसको भी खूब बोलते हैं तो फिर क्या होगा की आप किसी भी कार्य में सक्सेसफुल नहीं होंगे और सक्सेसफुल नहीं होंगे तो आपको कोई आपके प्रशंसा नहीं करेगा प्रशंसा नहीं करेगा तो आपका अहंकार नहीं बढ़ेगा अहंकार नहीं बढ़ेगा तो आपका जो है आध्यात्मिक जीवन में बड़ी ही उन्नति इस तरह का एक ऐसा डेंजरस अब प्रचार अपने भारत में चला की सक्सेस होने से ही आपका मृत्यु है आध्यात्मिक मृत्यु है या तो अब बाहर के जीवन में सक्सेस हुई है या तो यदि बाहर के जीवन में सक्सेस होंगे तो भीतर के अंतर आध्यात्मिक जीवन है उसमें आप फेल हो जाएंगे और आप आध्यात्मिक जीवन में सक्सेसफुल होना चाहते हैं तो बाहर के जीवन में आपको फेल होना ही होगा ऐसा क्योंकि अहंकार जो है सबसे बड़ी बुराई की जड़ है ऐसा का के उन्होंने सबको सब कम करवाना बैंड कर दिया यह स्वामी जी का कहना है की इसकी वजह से जो हुआ की मठ में जो मॉनेस्ट्री थी बुद्धिस्ट लोगों की इतने सारे लोग इकट्ठा हो गए और सोसाइटी में क्या है की जो लोग अच्छे-अच्छे जो है जिनको का क्या है की अच्छा संस्कार होता है वही तो ऐसा हार्ड क करके किसी भी चीज में सक्सेसफुल होते हैं तो यह अच्छे अच्छे संस्कार वाले लोग उनको इस तरह से भ्रमित कर दिया गया की आप बाहर के जगत में कुछ मत कर के अपनी जगत में कुछ कीजिए तो वे लोगों ने अपना वह जो ब्राह्मण है उसने जो सबसे अच्छा ब्राह्मण है बाकी सब ब्राह्मण तो क्या है की वो लोग पैसों के लिए सब कुछ करते हैं किंतु जो सबसे श्रेष्ठतम ब्राह्मण है उसने शिक्षा देने की बजे वो साधु हो गया अभी क्या है की उसका तो कर्म संस्कार उसका वो जो शारीरिक गठन वो सब तो शिक्षा देने के लिए ही बनाता बिना मतलब का वो साधु बन के बैठा है शिक्षा देना भी नहीं हुआ समाज को जो की बहुत अच्छे से कर पता था और वो साधु बने के लिए वह योग्य नहीं है और बिल फिर भी साधु बन के बैठा है क्षत्रिय जो की सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय है वो बहुत अच्छे से प्रजा का पालनपुर कर सकता है पोषण कर सकता है रक्षण कर सकता है उसकी बजे वह भी साधु होके बैठा है अभी क्या है की जो कम वो अच्छे से कर सकता था जो उसका धर्मत था वो छोड़ के बिना मतलब का साधु होकर बैठा है अभी ना ही उसे प्रिया धर्म का पालनपुर हुआ ना ही वह सन्यास धर्म का क्योंकि फिर ब्रह्मचर्य का पालनपुर करना जो लोग की जिनका संस्कार होता है साधु होने का जिन लोगों का मां जो सकता है उसे दिशा की और जाता है उन लोगों के लिए भी यदि ब्रह्मचर्य का पालनपुर करना कठिन है तो जिनका संस्कार ही नहीं है जिनका संस्कार क्षत्रिय होने का है राजा होने का है जिनका संस्कार एक शिक्षक होने का है आचार्य होने का है उनको आप जबरदस्ती सन्यासी बना देंगे तो क्या होगा दोनों जगह पे बाहर में एक राजकता फेल जाएगी क्योंकि श्रेष्ठ जो एडमिनिस्ट्रेटर था चला गया श्रेष्ठ टीचर चला गया और वो मॉनेस्ट्री में भी मठ में भी अराजकता मिलेगी क्योंकि जी जहां पे ब्रह्मचर्य का पालनपुर ही सर्वश्रेष्ठ सबसे जो कर टीचिंग जो कहा जाए कर प्रेक्टिस कहा जाए सबसे फाउंडेशन प्रैक्टिस जो कहा जाए वो तो ब्रह्मचर्य का पालनपुर है तो वो वहां पर ठीक से नहीं हो रहा है तो यह जो उल्टा टीचिंग जो था बुद्धिस्म का की अहंकार को करने के लिए उन्होंने पूरे मटको भी नष्ट कर दिया और समाज को भी नष्ट कर दिया जैसे वो एक कहानी है ना एक मित्र देख रहा है की उसके और दूसरे मित्र के सर के ऊपर में एक मक्खी बैठी हुई है तो सोचा की अरे मेरा इतना प्रिया मित्र है उसके सर पर मक्खी बैठी है मैं उसे मक्खी को मार दूंगा ऐसा बोल के वो एक वो हथौड़ी लेकर के जोर से उसके ऊपर मारा वो मक्खी के ऊपर में मक्खी तो बेचारी मा गए किंतु उसका मित्र भी मा गया तो उसके जैसा ये हो गया की अहंकार को खत्म करने के लिए जो है सक्सेस होना जीवन में वो छोड़ दिया तो ये चलो अहंकार खत्म हो गया किंतु समाज का भी वो जो पाटन हुआ और जो मठ है जहां पे ये लोग सब साधु बन के बैठे थे वहां पे भी दुराचार फेल गया वहां पे भी भ्रष्टाचार फेल गया तो ये बहुत ही डेंजरस एक स्थिति ये जो बौद्धिक टीचिंग की वजह से भारत में आई थी किंतु एडिक्शन है की आप कार्य करेंगे तो आप सक्सेस होंगे ही और सक्सेस यदि हार्ड क करेंगे आपका धर्म का ठीक-ठीक पालनपुर करेंगे मैं विद्यार्थी हूं विद्यार्थी धर्म का अच्छे से पालनपुर करूंगा तो जो है मैं तो अच्छे से मार्ग से पास मैं यदि कोई राजा हूं राज्य धर्म का ठीक से पालनपुर करूंगा तो मैं जो प्रजा है वो सुखी होगी तो मुझे तो प्रशंसा मिलेगी अहंकार मिलेगा तो इस कांट्रडिक्शन का क्या सॉल्यूशन है तो यह सॉल्यूशन तो गीता में जो है भारतीय धर्मशास्त्र में बहुत पहले ही देख दिया गया है उसका स्टडी नहीं करके उसको ठीक से नहीं समझ करके ही बुद्धिमान में जो इतना प्रॉब्लम हुआ भगवान बुद्ध की वजह से नहीं उनके बाद बात के जो डिसीप्ल है उनकी वजह से ये प्रॉब्लम हुआ था उनका मिस रीडिंग था भगवान बुद्ध का नहीं तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं की बेस्ट सॉल्यूशन क्या है तो स्वामी जी कहते हैं अगर बेस्ट क इस दान ओवर ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस एक्सरेटेड व्हेन वे आर विदाउट आउट ऑफ सेल जब हम अहंकार हम खुद के लाभ के लिए मैं अपने खुद के बेनिफिट के लिए जब कोई कार्य करता हूं तब तो मेरा अहंकार बढ़ेगा किंतु मैं अपने बेनिफिट के लिए कार्य नहीं करूंगा सेल्फलेस होकर के कार्य करूंगा लोक कल्याण के लिए कार्य करूंगा तो मेरा अहंकार नहीं मिलेगा अभी जैसे मैंने किसान मिले का उदाहरण में वह बहुत बड़ा कृषि विज्ञान केंद्र है प्रतिवर्ष वहां पर किसान मिले का आयोजन होता है और मेरे ही हाथ में था उसका ऑर्गेनाइजेशन तो एक महीने पहले से इतना कम करना पड़ता है इतना कम करना पड़ता है अभी देखिए वहां पे दो तरह के लोग कम करते हैं तो हमारा कम था वॉलिंटियर था और दूसरे हम लोग साधु लोग थे तो साधु लोगों का जो स्टाफ और वॉलिंटियर का मैंने देखा था की जब किसान मेला खत्म हो जाता है तो वो सब इकट्ठा करके अड्डा वाला करके वो क्या है की वो जो किसान लोग जो आते हैं वो उनकी प्रशंसा करते अरे बहुत अच्छा कम हुआ बहुत अच्छा कम हो तो हमारा जो स्टाफ है वो जो वॉलिंटियर्स स्टाफ और वॉलिंटियर्स दोनों वे लोग को बड़ा मजा आता था ये सुनकर के हां ये किसान लोग हमारी प्रशंसा कर रहे हैं किंतु जितने साधु लोग थे जैसे ही किसान मेला खत्म हुआ वैसे ही गाड़ी में बैठ करके आश्रम में चले जाते थे जहां पर रात के 12:00 बजे तक 9:00 बजे के आसपास 10:00 बजे के आसपास से मेला खत्म होगा है तो 10 11 बजे तो हम लोग आश्रम में पहुंच गए हैं सो भी गए दूसरे दिन सुबह को मंगल आरती में जाना है वो हमारी फिक्र है किंतु हमारा स्टाफ जो है और वह जो कुछ ट्रबल लोग बहुत सारे गांव से आते थे तो पुरी रात भर बैठ कर के गैप लगाते थे और वो ट्रक ड्राइवर लोगों को तो बड़ा मजा आता है ना की इतना बड़ा किसान मिला है तो उनकी ये जो चीज जो बेचते हैं उनके वो खेत में से जो कुछ भी उपज हुई है उनका जो लाइव स्टॉक है वो जो कुछ भी प्रोड्यूस करते हैं वो तो मिले में बेचते हैं तो बहुत पैसा मिलता है क्योंकि बहुत सारे लोग आते हैं तो फिर ये किसान लोग हैं या तो फिर ट्रबल लोग हैं जब हमारे स्टाफ की प्रशंसा करेंगे फर्स्ट आपको बड़ा अच्छा लगेगा फिर दूसरे दिन वह लोग ऑफिस में आकर बोलेंगे अरे महाराज ऐसा बोल रहे थे ऐसा बोल रहे थे हमको बड़ा मजा आया देखिए ये साधु और वो जो इन लोगों के बीच में डिफरेंस क्या है की वो लोग जो है की हार्ड क कर रहे हैं हम लोग भी हार्ड क कर रहे हैं और हमको पता है की किसान मिले को सक्सेसफुल कर नहीं है किंतु मेला खत्म होने के बाद में उन लोगों के मां में एक राहत है की हां इतना हार्ड क किया इतना मेहनत किया इतना सक्सेस जब हुआ तो उससे थोड़ा बहुत तो हमको यह मिलन चाहिए एक एगो को बूस्ट मिलन चाहिए तो उनको जब प्रशंसा सुनते इतना अच्छा लगता है हालांकि उनको पैसा कुछ नहीं मिलता क्योंकि ये सब लोग तो बिल्कुल शूज ट्रिंग बजे जिसको कहते हैं ना की बिल्कुल कामरूप में कम करते थे बिल्कुल कंप्रेसर में तो मुझे भी लगता था की चलो बेचारे को थोड़ी सी प्रशंसा सुनने दो पैसा तो मिलता नहीं है तो थोड़ा इसी से ही उनका कम चल जाए किंतु देखिए साधु लोग जो है हमारे जो बड़े महाराज थे वहां के हमारे सीनरी सी थे वो जो गेस्ट संज्ञा सी जो आते थे वहां पे भी किसी को भी ऐसा नहीं लगता था की चलो यहां पे खड़े र करके हम लोग रोके प्रशंसा सुन जैसे ही गाड़ी तैयार हुई जान के लिए सब लोग बैठ गए सब लोग आश्रम में ए गए फिर आपस में कोई बात नहीं किया अच्छा बहुत बड़ा कम कर दिया बहुत अच्छा हुआ आज के मिनिस्टर आया था वो मिनिस्टर आया था कुछ नहीं बिल्कुल साइलेंस जैसे ही आप मठ में आएंगे बिल्कुल साइनस और सबके मां में एक ही बात है की अरे आज रात को तेरी है तो कल सुबह को मंगल आरती में जा पाएंगे की नहीं तो यह जो सेल्फलेस होकर के कार्य करना यह है आपका यह जो आपका कांट्रडिक्शन जो है की आप यदि हार्ड क भी करेंगे मेहनत भी करेंगे और सफल होने से प्रशंसा मिलेगी उससे अहंकार की भी बढ़ेगा तो क्या करना है अहंकार को छोड़ने के लिए जो मेहनत को छोड़ दिया जाए जिससे की पूरा समाज को क्षति हो नहीं मेहनत करनी है किंतु लोग कल्याण के लिए मेहनत करनी है यदि विद्यार्थी ऐसा सोचता है की हां मैं डॉक्टर बन कर के मैं मेहनत करूंगा अच्छे से मार्क्स लॉन्ग और बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा या सोल्जर बनेगा या तो डिप्लोमेट बनेगा और मेरे देश के लिए मैं कार्य करूंगा यदि कोई बिजनेसमैन है वो ऐसा सोचेगा की आज तो यह सर होता है ना कोर्ट सोशल रिस्पांसिबिलिटी तो ऐसा जो मैं जितना भी अर्जन करता हूं मनीष जितना भी पैसा कामता हूं इसका जो थोड़ा सा अंश है थोड़ा सा नहीं ज्यादा अंश में जो है वह जो बड़े-बड़े अच्छे-अच्छे जो गो है या तो रामकृष्ण मिशन जैसी बहुत संस्थाएं हैं तो ऐसी संस्थाओं में दानवे दूंगा तो फिर जैसे की मैंने एक प्रोजेक्ट के बड़े में पढ़ा था जो महिंद्रा फाउंडेशन है ना महिंद्रा और महिंद्रा ये जो मोटर व्हीकल बनाते हैं उन लोगों का एक बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है वो कच्ची काली बोलके तो वे लोग क्या करते हैं की गांव में तो क्या है की गर्ल्स एजुकेशन के ऊपर में ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता ज्यादातर बच्चों को भेजते हैं स्कूल में और लड़कियों को नहीं भेजते लड़कियों को वहां घर में कम करवाने के लिए रखना है आज तो खैर बहुत सर अवेयरनेस ए गया है किंतु आज से मैं 15-20 साल पहले की बात कर रहा हूं तो इन लोगों का एक प्रोजेक्ट है महिंद्रा और महिंद्रा का की एक गर्ल चाइल्ड को स्पॉन्सर करेंगे और उनके तो बहुत सारे कनेक्शन रहते हैं तो उन्हें एक ब्रोशर बनाकर सब जगह पे शेर कर देते हैं की इतना 10000 की इतना रुपया दो इट्स स्पॉन्सर वन गर्ल चाइल्ड तो इतना रुपया वो लोग देंगे यदि 10000 या एक गर्ल के लिए एक लड़की के लिए तो उसे लड़की का एजुकेशन बिल एक्स्पोज़र करेंगे ऐसा करके करके उन्होंने कितनी लड़कियों का एजुकेशन जो है उसे स्पॉन्सर किया है तो आप ने यह नहीं का रहा हूं की वह जो महिंद्रा जो है वो कोई बहुत बड़ा आध्यात्मिक आदमी है किंतु देखिए उसका यह तो सेंस है की कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी होता है यदि आप कोई बड़ी जगह पे बैठे हैं तो आपके मां में से ये बात आनी चाहिए की अरे भगवान ने मुझे इतना दिया है तो इसमें से क्या मैं थोड़ा सा भी इन लोगों के लिए शेर नहीं कर सकता जो की अनफॉर्च्युनाते है जो की पद्दलित है अभी कल ही में अखंडानंद जी की एक बायोग्राफी पढ़ रहा था वहां पे अखंडन लिखने हैं वो जो महला वगैरा में जो उन्होंने सर्वप्रथम ये जो सेवा कार्य की शुरुआत की तो वे लोग वो क्या करते थे की वह गांव गांव में जाकर के टिकट बनते थे तो जिनको टिकट पहले तो घर में जाएंगे देखेंगे की वहां पर सही सही वे लोग गरीब है की नहीं खाने को मिलता है की नहीं फिर उनको टिकट देंगे दूसरे दिन वह लोग गांव में आकर के वह जो भंडार उनका होता था वहां पर टिकट दिखा करके वहां पर लिखा हुआ है की इस घर में इतने लोग हैं और इनको इतना अनाज मिलन चाहिए लेकर के वे लोग महमूद ग्राम में अपना जो आश्रम था वहां पर जाएंगे और वो जो टिकट दिखा करके वो अनाज लेक चले आएंगे तो महाराज लिखने हैं की कोई कोई गांव में ऐसा गरीबी था की वहां पे रात को जाएंगे तो एक भी दिया जलने को नहीं मिलेगा आपको पता ही नहीं चलेगा यहां पे गांव है संपूर्ण अंधकार महाराज लिखने हैं की लॉकर थके जो लोग भूटर मत हो अर्थात की भूत की तरह लोग रहते हैं इतना मतलब रात को दिया जलन के लिए भी उनके पास कुछ नहीं है और फिर उनके घर में जाकर के बोल देते थे की आप लोग क्या खाता हैं तो वो जो बुद्धि हम वो जो होते हैं वो बेचारे रोते-रोते बोलती थी की वह जो यह खास वगैरा जो होते हैं उसको कैट के वे लोग खाता हैं बॉयल करने के लिए भी कुछ नहीं है सीधा कच्छ घास पत्ता जो है ये लोग का लेते हैं तो ऐसी भाया वह स्थिति थी तो देखिए की जब अखंडानंद जी ने सेवा कर की शुरुआत की एक आदमी ने ऐसा किया तो वहां का जो जिला कलेक्टर है फिर वह जो क्या है की अखंडानंद जी प्रतिदिन वह एक लेटर लिखने थे बैलून मठ में मोहल्ला से की आजादी यहां पर ऐसी स्थिति है मैंने इतने लोगों को इतना अन्य वितरण किया तो जो राजा महाराज बैलून मठ में थे प्रेसिडेंट का बेलूर मठ वो इस लेटर को अखंडानंद जी के लेटर को बासुमति पत्रिका में प्रकाशित करवाते थे फिर यही लेटर अखंडानंद जी मद्रास में शशि महाराज को लिखने थे तो रामकृष्ण आनंद जी अपनी जो पत्रिका है उद्बोधन वहां पे उसमें प्रतिदिन उसको मतलब जब भी वो लेटर आता है उसे प्रकाशित करते थे तो वह लेटर पढ़कर के इतना पैसा आना शुरू हो गया मुद्रा से एक आदमी ने सीधा 1.5 हजार भेज दिया उसे समय में 1.5 हजार की कितनी वैल्यू है तो एक आदमी ने निस्वार्थ होकर के कम करने के शुरुआत की एक सन्यासी ने तो वहां पर जो है कितने गांव में लोक कल्याण का कार्य शुरू हुआ अभी अखंडानंद जी लिखने हैं एक जगह पर की मैं कितने ऐसे दिन गए हैं कर पांच दिन में सोया नहीं हूं बिना सोए मैंने कार्य किया है तो इतनी मेहनत करने के बाद में भी अखंडानंद जी का अहंकार जो है तनिक भर भी बढ़ाने करती है क्यों क्योंकि वह लोग कल्याण के लिए करते थे अभी कोई आदमी है की खुद के पैसे बनाने के लिए अभी जैसे आईटी फील्ड में ऐसा होता है मेरे जितने भी यहां पे आईटी वाले आते हैं वे लोगों के पास से सुनता हूं की संडे को भी छुट्टी नहीं मिलता सैटरडे के बीच छुट्टी नहीं मिलता प्रति डेली जाकर के कम करना पड़ता है बहुत दिन रात हमसे कम करवाते हैं तो फिर मैं पूछता हूं की कितना सैलरी देते हैं तो कहां वो पैसा तो अच्छा मिलता है और इतना मेहनत करते हैं तो पैसा भी तो सामने मिलता है ठीक है ना तो इससे तो कोई आपका अहंकार का वो ये नस नहीं होने वाला है ये तो जैसे वो जैसे गी अग्नि में जैसे जितना गी डालते जाएंगे तो अग्नि तेल ही ज्यादा प्रचलित होता जाएगा इस तरह की ये तो बात हो गई तो इसीलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं की अगर बेस्ट क इस टर्नओवर ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस इस एक्साइड व्हेन वे आर विदाउट फोटो सेल्फ और जीनियस नोटिस लेटेस्ट ओपन ओवरसीज तू दी वन डिफाइन एक्टर और लेट हम एक्ट और तू नथिंग ओवरसीज अर्थात की अपने हृदय को ओपन करो अपने हृदय में ईश्वर को बिठाऊ ठाकुर को बिठाऊ ठाकुर की जी तरह से आशीर्वाद देते हैं जी तरह से परामर्श देते या खानदान की जो बायोग्राफी में पढ़ रहा हूं तो एक्चुअली में गुजराती में ट्रांसलेट कर रहा हूं हमारे मैगजीन के लिए फिर उसमें वो महाराज लिखने हैं की जी दिन वाला से एक्चुअली क्या हुआ था वो किसी कम की वजह उनको क्या घूमने फर्न का बड़ा शौक था तो उसे समय स्वामी जी वो अल्मोड़ा गए थे स्वामी जी भारत ए गए थे और अल्मोड़ा गए थे अपने भक्तों को लेकर के डिसीप्ल को लेकर तो अखंडानंद जी ने सोचा की मैं यहां पे बैठे-बैठे क्या कर रहा हूं उसे समय सदानंद जी महाराज जो थे स्वामी जी के वो जो प्रथम मॉनेस्टिक डिसीप्ल उनको एक कुत्ते ने कैट लिया था तो फिर सदानंद महाराज तो चेन्नई चले गए थे उसे समय मद्रास तो यहां पर अखंडानंद जी ने सोचा देखिए उनका मन भी कैसे कम करता है ये कुत्ते ने काटा होगा तो उनको यदि ये हो जाएगा वो फीवर वगैरा तो फिर उनका क्या होगा मद्रास में तो उन्होंने सोचा था वहां पर गांव है बहुत अच्छा कविराज है उसके पास एक बहुत अच्छा है तो वो औषध लाने की वो गए और औषध लेकर के उन्होंने वहां से ही उसको पोस्ट कर दिया मद्रास फिर उन्होंने सोचा की मैं जब यहां तक ए ही गया हूं इस आंचल में इस विस्तार में जितने भी गांव है जितने भी शहर है चलो घूम के देखो उसे समय उन्होंने ये सब देखा था तो इस समय वो बहुला में थे तो अभी क्या था की लोगों का कष्ट देखकर के अभी वो क्या करेंगे वो तो बेचारे सन्यासी है उनके पास में तो एक फटी कुड़ी भी नहीं है तो वो उन्होंने ऐसा सोचना शुरू कर दिया की अरे मेरे पास तो एक पैसा भी नहीं है मेरे पास में कुछ भी नहीं है तो फिर मैं लोगों का यहां पे कष्ट देखा हूं उससे मुझे इतना दर्द होता है की चलो इस विस्तार को छोड़ करके मैं चला जाऊं जैसे की मुझे दर्द ना देख ना पड़े क्योंकि मैं कुछ कर नहीं सकता हूं ऐसा करके जैसे वो खड़े होने की शुरुआत की तो उठा को ऐसा लगा की ठाकुर ने जैसे उनका हाथ पकड़ कर बैठा दिया हो और ठाकुर ने खुद उनके मां में जाकर के कहा उनके मां में प्रकट होकर के अरे इन लोगों को इस अवस्था में छोड़कर के तुम क्यों जा रहे हो तुम कैसे जा पाओगे तो जैसे ही ठाकुर की बात यह सनी उन्होंने तीन बार खड़ा होने का पर्यटन किया रे ठाकुर तो यह सब बोलते रहेंगे मेरे पास पैसा कहां है की मैं कुछ कर पाऊं तो तीन बार खड़े होने का पर्यटन किया तीनों बार ठाकुर ने उनको पकड़ के बिठा दिया तब उनको लगा की हां नहीं अभी ये जो ठाकुर की ही इच्छा है की मिस में यहां पे आकर के जो है लोक सेवा का कार्य करो तो ये जो ठाकुर यहां पे स्वामी जी कहते हैं ना की लेट उस ओपन ओवर सेल्स तू डी वन डिफाइन एक्टर और लेट हम एक्ट और डू नथिंग अवर सेल्फ ऐसा नहीं है की अखंडानंद जी ने सोचा की मैं लोगों के लिए कुछ करना चाहता हूं हां सोचा था खुद सोचा था और नहीं कर का रहे थे बोल करके ही वहां से जाना चाहते थे किंतु फिर भी ये जो उनके हृदय में जो ठाकुर बैठे हुए थे अल्टीमेटली तो उनके आदेश से ही कार्य स्टार्ट हुआ और बिकॉज़ के ठाकुर के आदेश से कार्य स्टार्ट हुआ था एक राती भर भी उनके मां में स्वार्थ नहीं था उनको वह लोग दांडी ठाकुर बोलते थे वहां पर पहले तांत्रिक राहत था उसको लोग डंडे ठाकुर बोलते थे तो उन्हें की जगह पे वो फंडेंजी रहने को गए तो उनको भी दांडी ठाकुर बोलकर के नाम देना शुरू कर दिया तो जहां पे भी गांव में जाते थे जैसे ही पता चला था की दांडी ठाकुर आए हैं फैट करके कितने लोग इकट्ठा हो जाते हैं बूढ़े बुद्धि बच्चे बच्ची न नई सब लोग आकर के इकट्ठा होके दांडी ठाकुर दांडी ठाकुर बोलो इतना सम्मान मिलता है किंतु उनके मां में एक इतना भी अहंकार उसे समय प्रकट नहीं होता था उनको संतोष होता था की हां मैं ठाकुर के लिए लोक कल्याण के लिए कार्य कर रहा हूं किंतु यह जो संतोष है कभी अहंकार में प्रेरित नहीं होगा
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
अच्छा अभी कथा अभी ठाकुर ब्रह्मा क्या है सोम मुंह से नहीं कहा जा सकता सभी चीज झूठी हो गई है वेद पुराण तंत्र शर-दर्शन सब झूठ हो गए हैं मुंह से पढ़े गए हैं मुंह से उच्चरित हुए हैं इसी से झूठ हो गए हैं पर केवल एक वास्तु झूठी नहीं वह वास्तु ब्रह्मा है ब्रह्मा क्या है आज तक कोई मुंह से नहीं का सका विद्यासागर यह बात सुनकर के बड़े आनंदित हो जाते हो और अपने मित्रों से कहते हैं की वह यह तो बड़ी सुंदर बात हुई आज मैंने एक नई बात सखी देखिए यह जो ठाकुर ने पहले से ही ब्राह्मण के बड़े में बोलना क्यों शुरू कर दिया यह भी जो कितना अच्छे से कथामृत लिखा गया है उसका भी एक प्रमाण है की देखिए यह छोटा सा प्रमाण है की सबसे पहले मास्टर महाशय ने आपको याद बहुत दो-तीन दिन पहले हमने बात की थी की मास्टर महाशय विद्यासागर को पूछते हैं की यह जो हिंदू धर्म के बड़े में आपकी क्या धरना है तो विद्यासागर कहते हैं की वे लोग जो अपने ऋषि मनी जो है वह अपने शास्त्र में ईश्वर के बड़े में जो समझने को गए वो समझा नहीं पे वे लोग खुद थोड़े कंफ्यूज हो गए कंफ्यूज शब्द यहां पे नहीं इस्तेमाल किया है विद्यासागर ऋषियों के बड़े में ऐसा बोलेंगे की भी नहीं किंतु रीडिंग बिटवीन डी लाइफ इसका जो कंक्लुजन हम ऐसा निकाल सकते हैं की विद्यासागर को लगता है की जैसे ये जो ज्ञान मार्गी और ये भक्ति मार्गी जैसे हमने बात की थी वो दो साधुओं के बीच में जो झगड़ा होता है एक बोलना है तो हम दूसरा बोलना है सो सदा सदा सोहन तो एक बोलना है मैं ही ईश्वर हूं अर्थात मेरे भीतर में ईश्वर का प्रकाश है और मेरे ऊपर में जो आज्ञा का आवरण है जैसे ही हटा दूंगा तो भीतर में ईश्वर का प्रकाश जो है स्वयं सिद्ध हो जाएगा और दूसरा बोलना है की ईश्वर आकाश में के कहानी पे राहत है सर वो भी आई है जहां पे भी हो किंतु मैं जो है उनका दास हूं मैं उनका शरणागत हूं मैं उनकी कृपा अपने के लिए उनकी भक्ति करता हूं तो ऐसा ज्ञान मार्ग भक्ति मार्ग कर्म मार्ग ध्यान मार्ग कितने ही रास्ते हैं तो इतने सारे रास्ते में अलग-अलग तरह से ईश्वर को वर्णित किया गया है अभी एक ही ईश्वर जैसे वो मास्टर मा से शुरू में बोले थे ना एक ही ईश्वर है तो उसके अलग-अलग वर्ण कैसे हो शक्ति है तो मैन कोई ऐसा हो थोड़ी ना हो सकता है की ईश्वर काली भी हो और कृष्णा भी है ऐसे दो-दो ईश्वर कैसे हो सकते हैं तो इसीलिए वो विद्यासागर कहते हैं की वैसे ही इतनी डिफरेंट डिफरेंट फिलासफी और वैसे ही इतने 33 कोटी देवी देवता तो उसका अर्थ है की जिसके मां में योग आया उसने वो लिख दिया विदाउट अन्य थिंकिंग विदाउट अन्य अंडरस्टैंडिंग तो ऋषि मनी जो हमको समझने को गए वो समझा नहीं पे ऐसा ये जो है विद्यासागर की धरना है तो ये एक्चुअली ये बात जो है वो मास्टर महाशय के साथ हुई थी कुछ दोनों पहले हुई थी ठाकुर के साथ नहीं हुई किंतु ठाकुर कैसे अंतर्यामी है वो कैसे देख गए एक सेकंड में वो समझ गए की विद्यासागर के मां की स्थिति क्या है और इमीडियाटली उन्होंने जो है की ब्रह्मा किस तरह से वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और ब्रह्मा को व्यक्त करने के लिए वो जो एक कहानी है ना जैसे की वो हाथी है वो हाथी को चार-पांच अंधे लोग हैं तो कोई हाथी की पूछ पकड़ता है तो बोलना है की ईश्वर जो है इस लंबे सांप की तरह है कोई पर पड़ता है तो बोलना है की ये जो पर जो वृक्ष है उसका थर्ड उसके जैसा है तो कोई कान पड़ता है तो बोलना है ये सुपर की तरह है तो वैसे ही ब्रह्मा जो है वो शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता वो अब व्यक्त है उसको शब्दों में व्यक्त करने के जितने भी प्रयास है वो सब जो है वो जो की वो अपूर्ण है वो अप्रियाप्त है थोड़ा पर्यटन किया गया है किंतु पर्यटन जो है पर्याप्त है अपूर्ण है इसलिए सबको कांट्रडिक्शन दिखाई देती है तो ठाकुर ने विद्यासागर के साथ यह बात तो की ही नहीं थी किंतु फिर भी जो है की उन्होंने उनकी मां की स्थिति से समझ करके अंतर्यामी थे इसलिए उन्होंने यह बात कर दी किंतु मास्टर महाशय क्या करते हैं मास्टर महाश समझ जाते हैं की ठाकुर ने विद्यासागर के मां की बात समझ ली उन्होंने ब्रह्मा जो है अव्यक्त है शब्दों में इस तरह से बात शुरू की है तो इससे क्योंकि जो वाचन है रीडर से उनके मां में ये कन्फ्यूजन ना हो जाए जो की हमारे जैसे वो सब समय सोचते रहते हैं ना कोई गलती निकलते हैं कुछ यहां पे ये करते हैं एनालाइज करते हैं तो ऐसे लोग जो है वे लोग कहानी पे ये सोचना ना शुरू कर दे की विद्यासागर के पास जाकर के इमीडीएटली ब्रह्म की बात क्यों की तो मास्टर महाशय ने पहले ही जो विद्यासागर के साथ में जो डिस्कशन हुआ था जो बातचीत हुई थी उसका सारांश यहां पे लिख दिया की विद्यासागर ऑलरेडी कंफ्यूज थे ईश्वर के स्वरूप के बड़े में और यह स्वरूप जो है क्या था वो समझना ही पे इसलिए थोड़े बहुत नास्तिक थे बहिया कर करते थे जनवरी पहना थे तिलक लगाते थे वगैरा किंतु ईश्वर के ऊपर में थोड़ा बहुत नास्तिक बहुत था तो यह बात जो है मास्टर महाशय ने पहले ही कर दी जिससे की हमको पता चले हमारे लिए बैकग्राउंड तैयार हो की ठाकुर ने क्यों इसके बड़े में यह बात कहीं है किंतु देखिए मास्टर महाशय कुशल बात कहना छोड़ देते हैं वह यह नहीं कहते की ठाकुर अंतर्यामी है उन्होंने विद्यासागर के मां का भाव समझ करके डायरेक्ट ब्रह्मा से बात शुरू की ब्रह्मा अवयव है उन्होंने यह बात जो है हमारे ऊपर में छोड़ दी है की ये जो रीडर जो है वो कितना उसके कितना चालक है कितना स्मार्ट है की वो ये कनेक्शन खोज ले तो यह बात जो है मास्टर अपने पे छोड़ दी है तो पहले वो लिख लेते हैं की अपने खुद का डिस्कशन विद्यासागर के साथ में फिर यह शुरू करते हैं की जो ठाकुर ने जो है सीधा ब्रह्म अव्यक्त है वहां से बात शुरू की है ठाकुर कहते हैं ब्रह्म क्या है सोमू से नहीं कहा जा सकता सभी चीज झूठी हो गई है वेद पुराण तंत्र सर-दर्शन सब झूठ हो गए विद्यासागर स्वस्थ थे की वेद में एक तरह से लिखा है पुराण में तरस लिखा है तंत्र में एक तरह से लिखा है तो ठाकुर पहले ही बोल देते हैं की सब झूठ हो गए हैं क्योंकि ब्रह्मा को व्यक्त करने का पर्यटन कर रहे और ये जो पर्यटन है और पूर्ण है और पर्याप्त है थोड़ा बहुत जैसे ईश्वर की जो अभी जैसे आप भगवान विष्णु के बड़े में सोचिए उनकी दया उनकी करुणा उनकी ये जो है की ये जो एक उनका ये कहेंगे हरशॉट फूल अभाव उनका एक शून्य भाव और जैसे भगवान शिवा का है एक रुद्रा भाव है उनका प्रलय के वो ये है देवता है तो ये थोड़े बहुत जो पर्यटन हुए हैं वो गलत नहीं है किंतु यह पर्यटन संपूर्ण नहीं है जैसे की हाथी का वर्णन कोई ऐसा करें की वो लंबे सांप की तरह है तो ये वर्णन गलत नहीं है ये वर्णन पर्याप्त है अपूर्ण है ये इनकंप्लीट है तो वैसे ही ये सब जो वेद पुराण तंत्र वहां पर जो वर्णन दिया गया है अंतिम सत्ता का अल्टीमेट अथॉरिटी का अल्टीमेट ये जो ये जो एनटीटी है उसका वो गलत नहीं है किंतु अब पर्याप्त है तो ठाकुर कहते हैं की वेद पुराण तंत्र शरद दर्शन सब झूठ हो गए हैं मुंह से पढ़े गए हैं मुंह से उच्चरित हुए हैं इसी से झूठ हो गए पर केवल एक वास्तु झूठी नहीं हुई है वह वास्तु ब्रह्मा है ब्रह्मा क्या है यह आज तक कोई मुझे नहीं का पाया अर्थात यदि सही सही ईश्वर को जानना है तो वेद पुराण तंत्र जो है आपको गाइड करेंगे यहां तक की अमृत आईटी सिर्फ आपको सिर्फ गाइड करेगा स्वामी जी का कंप्लीट वर्क आपको गाइड करेगा किंतु यह जो आपको जो साधन पद्धति बताते हैं वो साधन पद्धति का अमल करके उसको प्रैक्टिस करके आपको जो है अपने मां को परी शुद्ध करना होगा और इसी परिशुद्ध मां में ईश्वर की जो धरना है वो धीरे-धीरे करके प्रकट होना शुरू होगी जिससे हमने देखा की अखंडानंद जी को ठाकुर ने बोल दिया अरे चाबी को था यह खाने ही थकना देखना की हो ठाकुर ऐसा भी बोलते हैं बंगाली में की अभी कहां जोगी यही पे रहो देखो की क्या होता है वो जो अखंडानंद जी सोच रहे थे ना की मैं सेवा कर पाऊंगा की नहीं पैसा तो है नहीं तो देखो की हो देखिए कितना बड़ा बात कर दिया देखो की हो बोल देखो ना की क्या होता है तो जैसे ही कुछ ही दोनों में चेन्नई से मद्रास से डेड हजार रुपया गया फिर वो कोलकाता की महाबोधि सोसाइटी है उन्होंने कितना रुपया देना शुरू कर दिया बोलते हैं हमारे यहां बहुत बड़ा ये है वो जो रिलीफ के लिए बहुत ज्यादा पैसा उन्होंने कलेक्ट किया है ऐसा ये लोग भी ऐसा है ना की रिलीफ के लिए पैसा कलेक्ट करते हैं फिर क्या करेंगे बड़े-बड़े फंक्शन करेंगे डिग्निटी डिग्री इसको बुलाएंगे विप को बुलाएंगे इस में आधा पैसा दाल देंगे डोली दो आदमी को चल देंगे चावल देंगे दो-तीन आदमी को दो-तीन जगह पे जाकर के थोड़ा बहुत कपड़े वगैरा दे देंगे वो उसमें जितना पैसा खर्च करेंगे उससे दोगुना खर्च तो वो फंक्शन करने में करेंगे अपना नाम बनाने में करेंगे ऐसा दूसरे लोग जो सेवा करते हैं मेजर रांची में था तो बहुत सारे गो क्योंकि वो तो ट्राईबल एरिया है ना तो ट्रबल वहां पे कन्वर्जन बहुत चला है तो विदेशी जो ये जो फोर्ड फाउंडेशन ये वगैरा जो फाऊंडेशंस है तो वे लोग बहुत ज्यादा पैसा देते हैं वहां पे इस तरह के क्रिश्चियन गोस को कम करने के लिए तो क्रिश्चियन जो क्या करेंगे वहां पे जाके इतनी साड़ी आइटम्स देंगे इतने सारे वो जो अच्छी-अच्छी चीज देंगे की वे लोग जो है की उनके बड़े ही ये चलो मुफ्त में सब मिल जा रहे हैं यहां पे फिर धीरे-धीरे करके उनको कन्वर्ट करेंगे तो मैं तो देखा था गांव गांव में कितना कन्वर्जन हो रहा है तो ये जो है की आप किसी मतलब करने के लिए कर रहे हैं कोई लाभ अपने के लिए कर रहा है और रामकृष्ण मिशन का है की हम लोग जहां पर कार्यक्रम करते थे पहले पहले तो अपना बैनर भी नहीं लगाते थे बात-बात में हमने बिकॉज़ की गवर्नमेंट से पैसा ले रहे हैं डोनर्स हमको पैसा दे रहे हैं तो बोलते हैं की आपको फोटोग्राफ्स तो देने पढ़ेंगे तो जल्दी फोटो नहीं रहेगा तो हमको पता कैसे चलेगा आप कम कर रहे हो तो हमको पता है वैसा कम कर रहे हैं किंतु यह तो अकाउंट का मामला है हमको प्रूफ चाहिए तो फिर तो बैनर लगाकर के फोटो लेने की शुरुआत हुई किंतु हम लोग यदि 100 गांव में कम करेंगे तो हो सकता है की कहानी एक गांव में जाकर बैनर लगा के फोटो लेंगे और उन लोगों का है की एक गांव में जाकर कम करेंगे तो रांची में आकर के वो 100 फंक्शन करेंगे के मिनिस्टर को बुलाएंगे उसको बुलाएंगे और सब जगह न्यूज़पेपर में देंगे मैं उन्होंने न्यूज़पेपर रिपोर्ट पढ़कर सोचता था की ये लोग सही सही इतना कम करते हैं किंतु फिर से अब गांव में जाकर के देखने की शुरुआत की बहुत सर समय तो गलोक क्या करते थे हमने जो चीज दी है जैसे की वो हाय क्वालिटी वो जो फ्लावर जो फूलों की खेती हम करवाते थे क्योंकि फूल बेचे से बहुत सर पैसा मिलता है क्योंकि वो जो बड़े-बड़े शहर होता है ना वहां पे ये फूलों की बड़ी डिमांड रहती है मंदिर में रहती है यह जो यह जो शादी वगैरा में रहती है तो फूलों की खेती हमने शुरू करवाई थी तो हमारे फूलों के वो जो खेत है वहां पे फोटो पटकर के वो लोग लेकर के वो अपना नाम से शुरू कर देते थे तो यह जो है की नाम और फ्रेम के लिए जो कार्य किया जाता है वह बाहर जगत में सक्सेसफुल होगा किंतु सही सही ईश्वर के लिए जो कार्य किया जाएगा उससे हमारी आध्यात्मिक उन्नति होगी तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा