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Cosmic Civilization Homo Spacian 5 Mar 2024

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः स्वामी जी का पत्र हम पाठ कर रहे थे जैसे कि कल हमने देखा कि स्वामी जी का जिस तरह से दो एस्पेक्ट एक तो है कि इंडिविजुअल एस्पेक्ट एंड सोशल या तो फिर कहेंगे कि सिविलाइजेशनल एस्पेक्ट तो यह दोनों एस्पेक्ट का जो अंडरस्टैंडिंग था वह स्वामी जी के कितना डीप था वह हमको स्वामी जी के लेटर्स या लेक्चर पढ़ कर के समझ में आता है मैं जब इस तरह से जो मेरा भी एक फॉर्मेटिव पीरियड था तो इस फॉर्मेटिव पीरियड में मैं सोचा करता था कि एक्चुअली मनुष्य जीवन का का हाईएस्ट यह क्या होना चाहिए एंबिशन कहो ना कि हाईएस्ट एम कहो कि हाईएस्ट उपलब्धि कहो मनुष्य जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि क्या है तो जनरली जिस तरह से हम लोग सोचते हैं मनुष्य जीवन की उपलब्धि तो वही होगी जो मनुष्य जीवन दूसरों के कल्याण में आ सके जैसे कि कोई भी आज एक लड़का होगा कॉलेज में या स्कूल में पढ़ता होगा उनको हम जद पूछेंगे कि अच्छा यह बताओ कि ऐसा कौन व्यक्ति है जिसने जिसके आने से ह्यूमन सिविलाइजेशन को सबसे ज्यादा बेनिफिट हुआ है तो जो लोग थोड़ा बहुत स्टडी करते हैं वे लोग कभी भी किसी पॉलिटिकल लीडर का नाम नहीं लेंगे वे लोग क्या कहेंगे पता है या तो फिर कोई साइंटिस्ट है या तो फिर कोई इस तरह से जिसने कोई कोई लिटरेरी जिसने कंट्रीब्यूशन किया है या तो फिर कोई संत है इस तरह के लोगों का नाम लेगा अभी संत होना तो कितना मुश्किल है किंतु साइंटिस्ट होना या तो फिर कोई फिलोसोफर होना या तो फिर कोई आर्ट या लिटरेचर में ऐसा कुछ लिख करके कंट्रीब्यूट करके जाना जो कि हमेशा के लिए अमर हो जाए यह सब करना फिर भी हमको लगता है कि दिस इज विद इन अवर रेंज मने संत होना वो तो एक तो बड़ी दूर की बात है और पॉलिटिशियन लोगों का नाम आजकल इतना खराब हो गया है कि कोई ऐसा नहीं कहेगा कि मैं इस तरह से ऐसा कुछ बनना चाहता हूं माने जो कोई एक आइडियलिस्टिक पर्सन है आइडियलिस्टिक स्टूडेंट है स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाला उसकी मैं बात कर रहा हूं आज हम देखते हैं कि स्वामी जी के सामने भी यह हाईएस्ट आइडियल क्या है जीवन का उसके बारे में उन्होंने भी बहुत सारा चिंतन किया था यह गंभीरानंद स्वामी विवेकानंद बाय ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइल यह मैं कुछ दिनों पहले पढ़ रहा था उसमें बड़ा विस्तार से वर्णन है कि कॉलेज के दिनों में स्वामी जी किस तरह से उनका एक फॉर्मेटिव फेज उनका पसार हुआ है किस तरह से उनके फॉर्मेटिव यर्स में जिस ईयर में एक लड़के का एक मानसिक संतुलन ठीक होता है उसका एक वर्ल्ड व्यू फॉर्म होता है उस पीरियड में स्वामी जी क्या सोच रहे थे तो यह जो एक फिलोसॉफिकल क्वेश्चन हम सबके सामने है मनुष्य जीवन का सर्वोच्च आदर्श क्या है तो ये इस आदर्श के अनुसार यदि मेरा एम ऐसा कुछ है कि ना मुझे एक रूटीन में एक कॉमन मैन की तरह रहना है जिस तरह से मेरे पुरखे जिस तरह से मेरे आसपास में मैं सबको देखता हूं कि एक कॉमन एक टिपिकल लाइफ होगा एक पढ़ाई अ अच्छे से पढ़ाई लिखाई करेंगे अच्छे से एक बिजनेस या तो जॉब करेंगे फिर एक फैमिली बसाएंगे और फैमिली लाइफ में हमको हैप्पीनेस चाहिए बीच-बीच में यूरोप में जाएंगे टूर में फिर यदि हम घर में शादी ब्याह होगा तो हम उसमें लाखों का खर्च कर पाए और फिर बस यही तो जीवन है रिटायर होने के बाद में घर में शांति से रहेंगे बच्चे बच्चियां पोते पोतिया उन लोगों को देख कर के खुशी मनाएंगे यह एक टिपिकल आर्क होता है ह्यूमन लाइफ का किंतु जो लोग आइडियलिस्ट होते हैं वे लोग कहते हैं कि आई डोंट वांट टू लिव दिस टिपिकल लाइफ जो कि सब लोग जिस तरह से एक जीते हैं मुझे उससे कुछ अलग इस समाज से ऊपर उठ कर के मुझे एक हायर एक आइडियल चाहिए मेरे जीवन में जब एक लड़का या एक लड़की इस तरह से सोचने की शुरुआत करते हैं तब यह जर्नी स्टार्ट होती है कोई भी स्पिरिचुअलिटी की जो जर्नी है ना वो दो तरह से स्टार्ट हो सकती है एक तो है कि जीवन में एक मैं एक टिपिकल रास्ते पर जा रहा था कि मैं एक टिपिकल स्टूडेंट हूं एक टिपिकल हाउसहोल्डर हूं एक टिपिकल एंप्लॉई हूं एक टिपिकल फादर हूं सडन उस जीवन में एक ऐसा एक क्राइसिस खड़ा हुआ एक ऐसा डिजास्टर आया कि फिर अपने को कंसोल करने के लिए एक इतना बड़ा शौक अपने जीवन में संताप आ गया कि मन को हलवा मन में एक तरह का एक शांति प्राप्त करने के लिए हम आध्यात्मिकता की ओर आते हैं कि अरे यह संसार तो असार है संसार करके हमने देख लिया कितनी एक के बाद एक क्राइसिस आती है चलो मैं मंदिर में जाता हूं साधु संग करता हूं इससे मन को थोड़ी सी शांति मिले यह तो एक आध्यात्मिकता की ओर आने का रास्ता है किंतु देर इज अ हायर पाथ यहां पे आप तो आप तो जैसे कि चल रहे हैं ठोकर खाई रास्ते में अब कहीं जाकर के ईश्वर का नाम लेना शुरू किया यह तो एक लोअर पाथ है देयर इज अ हायर पाथ हायर पाथ क्या है कि आपके फॉर्मेटिव पीरियड में आप आइडियल के बारे में सोचे कि ईश्वर ईश्वर तो छोड़ ही दीजिए चलिए मैं ईश्वर की बात ही नहीं कर रहा किंतु जीवन का एक उच्च आदर्श क्या हो सकता है मुझे एक टिपिकल लाइफ नहीं लीड करनी मुझे एक आदर्श वाला जीवन लीड करना है फिर यह आदर्श आपको चाहे कहीं पर भी ले जाए यह आदर्श आपको हो सकता है कि सिलिकॉन वैली में एक एंटरप्रेन्योर बना दे यही आदर्श हो सकता है चाहे आपको स्लम में जाकर के एनजीओ फॉर्म करके बच्चों को पढ़ाई लिखाई करवाने के लिए प्रेरित कर यही आदर्श आखिर में आपको टीचर या तो सोल्जर या तो फिर जीवन के एक आर्टिस्ट फिलोसोफर एक पोएट एक म्यूजिशियन यह आदर्श चाहे आपको फिर कहीं प भी ले जाए किंतु इस जहां पर आप जा रहे हैं उसके पीछे में एक आपका आदर्श है आप एक टिपिकल लाइफ नहीं लीड कर रहे तो यह आदर्श ये हमेशा देखेंगे कि किसी भी एक टीन एज लड़का या लड़की होता है यह कॉलेज में जब प्रवेश करते हैं यह बात उनके सामने आती ही आती है फिर भले ही चाहे ऐसी परिस्थिति आ जाए कि घर की परिस्थिति ऐसी है कि अभी मैं आदर्श के बारे में ज्यादा नहीं सोच सकता यहां पे मैं कुछ लड़कों को देखता हूं कि वे लोग कैसे भी करके कॉलेज में पढ़ाई लिखाई करते हैं साथ में वह एक लड़का है यहां पे वह एलएलबी ना कि ऐसा कुछ कर रहा था तो साथ में वह आर्टिकलशिप ना कि ऐसा कुछ होता है किसी र के साथ में वो कर रहा है यानी कि पढ़ाई लिखाई भी कर रहा है आश्रम में भी रह रहा है तो आश्रम में रह रहा है तो थोड़ा बहुत तो कर्मयोग करना पड़ेगा तो वह काम भी कर रहा है फिर वोह कहीं लॉयर के साथ में वह एक अप्रेंटिस हो जाए जब भी इस तरह का बर्डन सर के ऊपर होता है तो आदर्श के बारे में ज्यादा सोचने को समय नहीं मिलता या तो आदर्श इ इज अ लग्जरी आइडियल बिकम अ लग्जरी हम अफोर्ड नहीं कर पाते किंतु यदि मान लीजिए कि आप इस तरह के बैकग्राउंड से आते हैं स्वामी जी ने खुद ने कहा है कि आइडियलिस्टिक कौन हो सकता है दो मिडल क्लास में जो है वही हो सकते हैं जो कि जिनके पास में आर्थिक असहाय या तो नाणा कीय तंगी है उन लोगों के सर पर हमेशा इतना बर्डन या इतना टेंशन रहेगा कि वो आइडियल के बारे में सोच नहीं सकते आइडियल बिकम अ लग्जरी फॉर देम और जिस के पास में बहुत सारा पैसा है उसके सामने भोग राग के इतने सारे उपकरण उपलब्ध है कि फिर उसमें से वह समय निकाल कर के आइडियल के बारे में नहीं सोचेगा आइडियल के बारे में सोचेगा एक मिडिल क्लास लड़का या लड़की जिसके पास में कि एक एक तरह का फ्रीडम है कि हां घर की परिस्थिति इतनी खराब नहीं कि मैं अभी खाने पीने को भी नहीं जुटा पाता और फिर इतना भी पैसा नहीं कि मेरे पास में सुबह को उठ कर के ही 10 चमचे खड़ बड़े हो जाते हैं मित्र का नाम लेकर के मित्रता का नाम लेकर के कहेंगे चलो यहां घूमने जाते हैं यह करते हैं वो करते हैं इस आशा में कि हम पैसा खर्च करेंगे तो उनको कुछ हिस्सा मिलेगा इस इसमें तो इस तरह से हम चमचों से इस तरह से पैरासाइट से भी घिरे नहीं है वी हैव ए सर्टेन फ्रीडम लेजर जिसको कि कहते हैं लेजर इन टाइम एंड फ्रीडम ऑफ एक्शन तो यह जब अपने पास होता है तब हम आइडियल के बारे में सोचना शुरू करते हैं स्वामी जी का ऐसा ही था पिताजी की मृत्यु से पहले घर की परिस्थिति इतनी तो अच्छी थी कि अभी खाने पीने का क्या जुगाड़ होगा पता नहीं तो उस परिस्थिति में उन्होंने आइडियल के बारे में सोचना शुरू किया और यह आइडियल उनको फिलोसोफी के विभिन्न क्षेत्रों में इतिहास के मानव सभ्यता की जो उपलब्धि है उस सब में उनको ले गया और स्वामी जी का जो ब्रेन है ना स्पोंज की तरह और नॉलेज को शौक करता नॉलेज को ब्लैक होल में कोई चीज डालते हैं तो कैसी फट करके इसके भीतर में सक हो जाती है तो वैसे ही स्वामी जी का ब्रेन है कि नॉलेज सकिंग मशीन या तो फिर एक नॉलेज वैक्यूम क्लीनर जिसके भीतर में फटाफट करके वो किताबें पढ़ते थे और फटाफट करके सब ग्रहण करते थे तो देखिए कि स्वामी जी ठाकुर के पास आए वच वास द अभी स्पिरिचुअलिटी क्या है इट्स द हाईएस्ट एक्सप्रेशन ऑफ द आइडियल किंतु इससे पहले आल के बाकी जितने भी एवेन्यूज है आइडियल के बाकी जितने भी ब्रांचेस है सभी इन्होंने एक्सप्लोर कर दी है और इसीलिए स्वामी जी हमको कुछ भी कहते हैं आध्यात्मिकता के बारे में जो समझाते हैं वह उनका एक ट्रेडिशनल शास्त्र और संस्कृत के ऊपर में लिमिटेड नहीं रहता ऑफकोर्स स्वामी जी ने शास्त्र और संस्कृत इन दोनों का अपनी भारतीय ट्रेडीशन का बड़ा ही गहनता से अभ्यास किया था किंतु गो बियोंड ट यह जो मॉडर्न एज है आज का यह जो इंडस्ट्रियल इजेशन का युग है और इस इंडस्ट्रियल इजेशन के इस इंडस्ट्रियल इजेशन के युग में हमारे सामने जो समस्या खड़ी हुई है इसका स्वामी जी ने बखूबी अभ्यास किया था आजकल की यह जो है कि बड़ी-बड़ी फैक्ट्री की वजह से एक पूरा जो समाज का एक हिस्सा है उनके पास में ये कुछ मींस ऑफ एंप्लॉयमेंट नहीं रहता तो फिर क्या होगा कि वे लोग पॉवर्टी में चले जाएंगे यह पॉवर्टी इज अ मॉडर्न फिनोमिना पहले पॉवर्टी नहीं था पहले क्या था कि सबके पास में अपना अपना कार्य था वैदिक युग को हम चाहे जितना ही क्रिटिसाइज करें और कुछ कुछ चीजों में क्रिटिसाइज करना उचित भी है किंतु एक चीज में हम उसको प्रेज करना चाहिए हम एक चीज के बारे में हम उनको सही सही में उनको एम्युलेट करना चाहिए उनके पास से कुछ सीखना चाहिए और वो वो यह है कि उस युग में पोवली नहीं थी ऐसा नहीं था कि किसी के पास में कुछ काम नहीं है वैसे ही बेकार बैठा है और उसके पास में खाने पीने को कुछ नहीं है सबके पास में अपना-अपना कार्य है तो सभी लोग ये वर्णाश्रम ये व्यवस्था के अनुसार अपना अपना कार्य करते हैं एक सोसाइटी में एक हार्मोनी है आप यह कहेंगे कि हां कोई एक लड़का जदिया आप्या करना है तो शायद उसके पास में इतनी अपॉर्चुनिटी ना हो खास करके लेट वैदिक एजेस में कि उसके बाद में क्या हुआ था पहले तो ऐसा था कि जिसके पास जो टैलेंट थी उसके अनुसार उसको कार्य प्राप्त होता था बाद में यह हेरेडिटरी हो गया तो ये एटलीस्ट हेरेडिटरी वाले समय में कंप्लेन हो सकती है कि मुझे मेरी एंबिशन के अनुसार या टैलेंट के अनुसार कार्य नहीं मिलता यह कंप्लेन हो सकती है किंतु ऐसी कंप्लेन नहीं होगी कि चलो भाई मेरे पास में करने के लिए कुछ भी नहीं है और मैं भिक्षा मांगता हूं भिक्षुक कौन है जो कि अपनी मर्जी से भिक्षुक हुआ है आध्यात्मिक पथ का साधक है वह भिक्षुक है भिक्षा वही मांगेगा और किसी को भिक्षा मांग के खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी सामयिक ऐसी परिस्थिति आ जाएगी यदि महामारी हुई है यदि युद्ध हुआ है यदि ऐसा कोई क्राइसिस हुआ है फेमिन हुआ है या तो फिर फ्लड हुआ है नेचुरल डिजास्टर हुए हैं तो अलग बात है किंतु जब तक नेचर हमारा साथ देता है सिविलाइजेशन वाज वेरी सेल्फ कंटेंट सेल्फ अवेयर तो यह वह समय था किंतु आज के युग में क्या हुआ है यह फैक्ट्री की वजह से इंडस्ट्रियल इजेशन की वजह से ये जो मैन्युफैक्चरिंग है इट इज कंसंट्रेटेड इन मेगा फैक्टरीज और उसमें भी आज ऐसा तो एटलीस्ट था कि चलो जो लोग रूरल एरिया में रह रहे थे वो यदि अर्बन एरिया में माइग्रेशन करें तो अर्बन एरिया में उनको जॉब मिल जाएगा आज तो कैसा है ऑटोमाइज और एआई यह दोनों मिलकर के फैक्ट्री की जो मैन्युफैक्चरिंग जिसको कि ब्लू कॉलर जॉब कहते हैं वह भी लोगों से छिन रहे हैं तो अभी एक एक आदमी करेगा तो क्या करेगा आधर की आप एक बहुत ही अच्छी यूनिवर्सिटी से बहुत ही अच्छी पढ़ाई लिखाई करके बहुत ही तगड़ा एक डिग्री लेकर के आज ये मॉडर्न टेक्नोलॉजी है उसमें कोई अच्छी सी जॉब खोज ले या तो फिर आप का फिर कैपिटल एक है आपके पिताजी के पास ने कि ऐसा कुछ कहीं से आपको पैसा लेकर के आप अपना एक बिजनेस वगैरह चालू कर सकते हैं जिन लोगों के पास यह अपॉर्चुनिटी नहीं है उन लोगों के पास में अन एंप्लॉयमेंट एक बहुत बड़ी समस्या है आज आप देखेंगे कि इवन दो कि इंडियन इकोनॉमी इतना ग्रो कर रही है इतना रैपिड लार्जेस्ट ग्रोइंग अ फास्टेस्ट ग्रोइंग लार्ज इकोनॉमी इन द वर्ल्ड ऐसा इंडिया को कहा जा रहा है किंतु फिर भी यह अनइंप्लॉयमेंट का प्रॉब्लम हमारे सामने इतना ही विकट रूप से खड़ा रहा है जितना कि पहले था तो यह अनइंप्लॉयमेंट यानी कि लोगों से नौकरी छीन कर के बड़ी-बड़ी फैक्ट्री में चली जाए मैन्युफैक्चरिंग जॉब और वहां पर भी फिर ऑटोमेशन और एआई आ जाए तो फिर एक आम आदमी क्या करेगा जिसके पास में तीव्र मेधा शक्ति नहीं है जिसके पास में एक सुपर्ब प्रैक्टिकल सेंस नहीं है बिजनेस करने की उसके पास में कोई एक पार्टिकुलर फील्ड में एक्सपर्टाइज्ड हो लिटरेचर हो फिलोसोफी हो ना कि ऐसा कोई भी फील्ड है वहां पे एक्सेल स्पोर्ट है वहां पे एक्सेल करने की उसकी कैपेसिटी नहीं एक टिपिकल कॉमन मैन है तो वह क्या करेगा यह प्रश्न आ सकता है तो देखिए कि यह प्रश्नों का सिविलाइजेशनल स्केल पे जो अपने पास में प्रॉब्लम्स से क्राइसिस है इसका इजी सोल्यूशन नहीं है इसका एक लॉन्ग टर्म सोल्यूशन यह है कि स्कूल कॉलेज में ही स्पिरिचुअलिटी को स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस को इंट्रोड्यूस किया जाए जिससे कि क्या होगा कि योगा और मेडिटेशन और वेदांत योगा और वेदांत वेदांत है फिलोसॉफिकल एस्पेक्ट योगा इज अ प्रैक्टिकल एस्पेक्ट ऑफ स्पिरिचुअलिटी यह दोनों को बिल्कुल ही किंडरगार्डन कहो ना कि बाल मंदिर से फर्स्ट स्टैंडर्ड से कहो वहां से इंट्रोड्यूस करके उनको लोगों को बच्चों को सिखाना चाहिए जिससे कि क्या होगा बाय द टाइम कॉलेज कंप्लीट करें उन लोगों के अपना खुद के ब्रेन के ऊपर में खुद की कॉन्शसनेस के ऊपर में खुद की इंटेलेक्ट के ऊपर में इतना कंट्रोल आ जाएगा कि जिस और यह इकोनॉमी कहो ना कि इंडस्ट्री कहो ना कि ये जॉब अपॉर्चुनिटी कहो जिस डायरेक्शन में मिलती है उस डायरेक्शन में वह रेपिडली प्रोग्रेस करके अपने का अपना फ्यूचर अच्छा बना सके किंतु यह सब क्वेश्चंस के बारे में सोचना यह स्वामी जी ने किया था और इसीलिए हमारे पास में स्वामी जी जी का सिर्फ योग और वेदांत के बारे में जो विजडम है सिर्फ यही नहीं है यह अंडरस्टैंडिंग ऑफ दिस सिविलाइजेशन यह भी स्वामी जी के पास में था कि हाउ सिविलाइजेशन राइज एंड हाउ सिविलाइजेशन फॉल्स तो यह राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन दिस इज अ यूनिक कंट्रीब्यूशन ऑफ स्वामी जी नो डाउट अपने यह जो पुरखे थे जिन्होंने यह आश्रम और वर्ण व्यवस्था की रचना की थी इन्होंने भी समाज को देखा खा था यह जो निवेदिता कहती है कि कितने वर्षों के बाद एक ऐसा हुआ कि स्वामी जी की तरह एक उच्च कोटि का ऋषि उच्च कोटि के एक ऋषि जिन्होंने कि कन्याकुमारी चट्टान के ऊपर में बैठ के पूरे भारत के ऊपर ध्यान किया अब ध्यान करेंगे ईश्वर के ऊपर में ध्यान करेंगे भगवान शिव भगवान कृष्ण के ऊपर में इन्होंने मां भारती के ऊपर में भारत की इस भूमि के ऊपर में ध्यान किया भारत की इस संस्कृति सभ्यता के ऊपर में और सिर्फ भारत ही नहीं एक ह्यूमन सिविलाइजेशन एज ए होल आपको देखना होगा भारत देश को पृथ्वी से आप कट करके अलग से तो नहीं देख सकते मान लीजिए कि आप कोई एक प ब्रह्मांड का स्केल तो ऐसा है पता है ना यहां से सबसे नजदीक का तारा है अल्फा सटोरी यहां से चार लाइट यर दूर है अभी लगेगा चार लाइट यर ये तो कुछ नहीं है किंतु एक जो सेकंड होता है लाइट सेकंड 3 लाख किलोमीटर पर प्रकाश की जो स्पीड है वो 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड की है यानी कि एक लाइट सेकंड 3 लाख किलोमीटर की है अभी एक सेकंड का इतना है तो मल्टीप्लाई बाय फोर ईयर कर दीजिए इतना दूर सबसे नजदीक का तारा है तो ब्रह्मांड के स्केल कितने बड़े-बड़े मान लीजिए कि और कहीं आज से यहां से 100 लाइट यर दूर ना कि 1000 लाइट यर दूर एक सोलर सिस्टम है वहां पर एक एलियन स्पीशीज वहां पर रह रही है वहां पर भी जीवन प बन पा है वहां पर भी इंटेलेक्ट का उदय हुआ है वहां पर भी इस तरह से सिविलाइजेशन डेवलप हुई है किंतु हमारे से बहुत ज्यादा एडवांस है फिर उन्होंने ये बाइन कुलर ये तो टेलिस्कोप से ना कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी से उन्होंने देखा कि पृथ्वी पर एक इसी तरह से ऑर्गेनिस्ट मम है माने इंटेलेक्चुअल इंटेलिजेंट ऑर्गेनिस्ट इंटेलिजेंट स्पेसस है तो उसका स्टडी करेंगे तो वो थोड़ी ना देखेंगे कि एक छोटे से टुकड़े में भारत देश है वहां पर भारतीय लोग क्या कर रहे हैं उस टुकड़े में अमेरिका है अमेरिकन क्या कर रहे हैं वे लोग तो पृथ्वी को एज ए होल ही देखेंगे पृथ्वी के ऊपर में देखेंगे कि यह ह्यूमन स्पीशीज होमो सेपियंस जो हमको कहते हैं हम अपने को कहते हैं ये होमो सेपियंस स्पीशीज का क्या प्रारंभ है क्या मिडल है क्या एंड है इसका क्या गति है मैंने जद अपने शास्त्रों की जद लैंग्वेज थोड़ा सा ली जाए तो इसका क्या है मैंने इसका डेवलपमेंट किस तरह से हो रहा है इनकी उपलब्धि क्या है इनकी सक्सेस फेलियर क्या है यदि स्टडी करेंगे दे विल स्टडी द एंटायस पियंस स्पीस नॉट अ सिंगल नेशन और नॉट ए सिंगल सिविलाइजेशन तो स्वामी जी ने इस पूरी ह्यूमन सिविलाइजेशन पृथ्वी के ऊपर में जितने भी मनुष्य हैं एक पूरा जो डायनामि जम है होमोसेपियंस स्पीस है उसको स्टडी करके हमको बताया है कि किस तरह से ह्यूमन सिविलाइजेशन डेवलप होती है किस होने से क्या होने से इसका अंत आता है तो यह जो स्वामी जी का जो नेक्टर रूपी विजडम है हम जितना भी पाठ करते हैं हमको कितना सब कुछ सीखने को मिलता है नॉट ओनली इन द फील्ड ऑफ स्पिरिचुअलिटी बट आल्सो इन द फील्ड ऑफ सिविलाइजेशनल स्टडीज तो और दिस इज वन ऑफ माय मने हम लोगों की जो एक विश होती है ना कि क्या होने से हमको बड़ा अच्छा लगेगा तो स्वामी जी का योग एंड वेदांत एस्पेक्ट लेकर के काफी कुछ स्टडी हुआ है किंतु उनका अंडरस्टैंडिंग ऑफ सिविलाइजेशन राइज एंड फॉल एंड डेवलपमेंट एंड प्रोग्रेस एंड इवेंचर डिस्ट्रक्शन ऑफ सिविलाइजेशन यह जो उनका स्टडी है इसको लेकर के इतना चिंतन शायद अभी तक नहीं हुआ यह होना चाहिए क्योंकि इसका बेनिफिट आज हम सम यदि हमको यह मिलता है एक सिस्टमिक स्टडी के रूप में देन वी कैन एंप्लॉय इट इन एवरी फील्ड ऑफ ह्यूमन लाइफ आज एक जद आइडियो जीी कहा जाए तो बेसिकली एक ही डियोल जीी है वो है कम्युनिज्म जो कि कार्ल मार्क्स ने उसको डेवलप किया था मार्क्स है एंजल्स है फिर यह लेनिन है फिर यह माओ है य कुछ कुछ लोग थे जिन्होंने कि ये कुछ कुछ नहीं एक्चुअली काफी लोग है इवन फॉरन की आईवी लीग यूनिवर्सिटी में देखेंगे ना तो पॉलिटिकल साइंस के नाम पर यह सॉफ्ट कम्युनिज्म ना कि सोशलिज्म ही ज्यादा चलता है तो यह एक आइडियो जीी जो उ उन्होंने डेवलप की तो उसी आइडियो को आज कितने लोग कहां-कहां पर इस्तेमाल करते हैं या तो फिर कहेंगे कि कैपिट ज्म जो कि एडम स्मिथ है या तो फिर केनेस है इन लोगों ने डेवलप किया कैपिट इज्म शुरू में थोड़ा सा हार्श था किंतु बाद में यह वेलफेयर कैपिट इज्म जो डेवलप हुआ यह सोशल सिक्योरिटी वगैरह जो कि अमेरिका में इंट्रोड्यूस हुआ इसका फायदा यह है कि आज कैपिट इज्म उसके डिफरेंट डिफरेंट फॉर्म में सॉफ्टर फॉर्म में वेलफेयर कैपिटल ज्म के फॉर्म में आज सबसे ज्यादा स सफुल है तो यह और उसके अलावा दूसरी भी एक थिरी थी फासिज्म जिसको कहते हैं किंतु फासिज्म तो उसका तो मने उसका विनाश ही हो गया मने कंपलीटली डिस्क्रेडिटेड फिलोसोफी पॉलिटिकल फिलोसोफी टुडे इसके अलावा गांधी जी का सत्याग्रह था अभी सत्याग्रह मुझे ऐसा लग रहा है कि मैंने स्वामी जी की थिरी का ही एक विकसित एक प्रैक्टिकल स्वरूप है किंतु ट इज अनदर मैटर ऑफ डिबेट किंतु स्वामी जी का जो है यह कैपिट ज्म को जिस तरह से एज अ वर्ल्ड व्यू के रेप में डेवलप किया गया कम्युनिज्म को एज ए वर्ल्ड व्यू के रिप में डेवलप किया गया स्वामी जी के आइडियाज को भी एज ए एंटायस एन कंपासेस एवरी एक्टिविटी इन द ह्यूमन लाइफ यह पॉलिटिक्स है फिर ये इकोनॉमिक्स है सोशल य सोशल स्टडीज है इन सबको एक ओवरऑल कंप्रिहेंसिव फिलोसोफी के रूप में स्वामी जी के आइडियाज को डेवलप कर सकते हैं ऑल द थिंग मने सब कुछ यहां पे है कैपिट ज्म या कम्युनिज्म जिस-जिस पार्टिकुलर टॉपिक्स को पॉइंट्स को डिस्कस करके फिलोसोफी के रूप में स्वीकृत हुए हैं आज आप किसी भी ह्यूमैनिटी स्टडीज के डिपार्टमेंट में जाएंगे इनको एज ए ऑथेंटिक फिलोसोफी के रूप में वर्ल्ड व्यू के रूप में सिखाया जाएगा और उसकी जो क्राइटेरियास होती है ऑल ऑफ देम आर फुलफिल्ड इन स्वामी जीज राइट एंड स्पीस ओनली थिंग इज कि वी नीड टू डेवलप इट एज अ वर्ल्ड व्यू जो कि ह्यूमन सोसाइटी की ह्यूमन समाज की सभी एक्टिविटी को इनकंपास कर सके और यहां पर तो एडेड बेनिफिट भी है मैंने कैपिट इज्म और कम्युनिज्म ने जो एक क्रुशल एस्पेक्ट क्रुशल ह्यूमन एक्टिविटी छोड़ दी है स्पिरिचुअलिटी तो यहां पर वो भी आ जाती है यानी कि सोच लीजिए कि स्वामी जी के आइडियाज को प्रॉपर फिलोसोफी के रूप में डेवलप किया जाए तो वहां पे वेदांत है वहां पे योग है और वहां पे ह्यूमैनिटीज है तो यह तीनों का एक कॉमिनेशन हमको इस तरह से मिलता है कि इस वर्ल्ड व्यू के ऊपर में यदि एक सिविलाइजेशन की स्थापना हो देन दैट सिविलाइजेशन व कल बिकम द ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन यह कम्युनिज्म का जब जोहार आया था तब यह रशिया और चाइना और ऐसे कितने ही देश उन्होंने सोचा कि वैसे भी हमारे पास कुछ नहीं है अपने देश तो वैसे ही गड्ढे में रा है तो यदि हमको बाहर निकलना है तो एक पावरफुल फिलोसोफी चाहिए यह कम्युनिज्म के बारे में सभी लोग बात कर रहे चलो इसको अपना करके इसको इंप्लीमेंट करके देख ले तो उन्होंने फटाफट करके कम्युनिज्म को लेकर के थोड़ा बहुत डेवलपमेंट किया भी सही उनकी क्राइसिस और पूरा सब कुछ तो इतिहास में लिखा हुआ है कि व्हाट आर द स्ट्रेंथ ऑफ कम्युनिज्म एंड व्हाट आर द वीकनेसेस और ऑन द पैरेलल ये जो वेस्टर्न कंट्रीज है नॉर्थ अमेरिकन कंट्रीज है उन्होंने कैपिट ज्म को डेवलप किया कैपिट इज्म में भी एक के बाद एक क्राइसिस आई तो वे लोग अपने को एडेप्ट करते गए तो इस तरह से देखिए कि यह वर्ल्ड व्यू दो है वो कितने डीप स्प्रेड हुए हैं सोसाइटी में किंतु ये दोनों वर्ल्ड व्यू ने हमको मटेरियल िक कर दिया है एंटागनिस्टिक कर दिया है नास्तिक कर दिया है एक तरह से क्योंकि हमको लगता है कि मटेरियल डेवलप है मटेरियल डेवलपमेंट है हम यदि कॉलेज में स्कूल में जाकर के सीखेंगे ह्यूमैनिटी स्टडीज में यदि आप आईएएस ऑफिसर है या तो आप डिप्लोमेट है या तो फिर आप पॉलिटिशियन सब एक ही तरह से सोचते हैं कि ना मटेरियल िक डेवलपमेंट होना चाहिए जीडीपी नंबर्स दिखने चाहिए पर कैपिटा इनकम दिखनी चाहिए यह जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट होना चाहिए सक्सेस क्या है तो हम इतने इतनी सड़क बना दी इतनी इतने कंटीन्यूअस बिजली मिलती है पानी मिलती है गैस का यह सिलेंडर मिलता है नो डाउट यह बिजली पानी गैस का सिलेंडर सड़कें एयरपोर्ट यह तो मने दिस आर क्रुशल यह जो मेडि इंफ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग यह दिस आर क्रुशल एस्पेक्ट ऑफ ह्यूमन सोसाइटी उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु यदि यह साथ-साथ में ही ये स्पिरिचुअल एस्पेक्ट भी इसके साथ में जुड़े तो सोच के देखिए कि हमारा डेवलपमेंट कितना आगे तक बढ़ जाएगा सो वी नीड टू डेवलप दैट होलिस्टिक फिलोसोफी बियोंड कैपिट ज्म एंड बियोंड कम्युनिज्म वीी नीड टू डेवलप स्वामी जी आइडियाज इन सच वर्ल्ड व्यू दैट एन कंपासेस एवरी एक्टिविटी इन ह्यूमन सोसाइटी ह्यूमन सिविलाइजेशन और इसके बेस पर हम नए भारत का नए विश्व का गठन करें यदि हम स्वामी जी की दृष्टि से देखें तो मैं अपने को व्हाई शुड आई लिमिट माइसेल्फ टू ए जियोग्राफिक लोकेशन मैं सिर्फ यह क्यों सोचूं कि मैं भारतीय हूं मैं यह ना सोचूं कि मैं इंसान हूं मैं मनुष्य हूं पूरी पृथ्वी तो मेरा घर है यह कॉस्मोलॉजी की स्टडी जो लोग करते हैं उनको एक बहुत बेनिफिट होता है कि पृथ्वी कितनी नग है वो उनको लगता है कभी-कभी हमको ऐसा लगता है मेरा देश कितना महान है किंतु लुक एट इट कॉस्मोलॉजिकल स्केल आज पृथ्वी चंद्र के साथ में टकरा जाएगी तो कहां भारत रहेगा कहां अमेरिका रहेगा कहां चीन रहेगा कुछ नहीं रहेगा और दिस इज अ रियल पॉसिबिलिटी माने एक पृथ्वी चंद्र एक्चुअली पृथ्वी के साथ में और किसी एक सेलेटििन बॉडी का टकराव हुआ था उसमें से चंद्र आया है तो माने ये ग्रहों का टकराव तारों का टकराव गैलेक्सी का टकराव ये कोई माने दिस इज नॉट ए बिग डियल अभी कुछ ही दिनों पहले मैं एक पिक्चर देख रहा था तो सोलर फ्लेयर सोलर फ्लेयर है उसके सामने पृथ्वी रखी है तो पृथ्वी दिखती है इतनी सी और सोलर फ्लेयर दिखता है इतना बड़ा जैसे कि एक सोलर फ्लेयर एक आएगा तो हजार पृथ्वी यां ध्वंस हो जाएगी माने यह जो प्रलय काल की जो कल्पना है सही सही अपने को नजर के सामने देखने को मिलेगी तो ये दिस इज अ फैक्ट कि ब्रह्मांड के लेवल पे ब्रह्मांड के स्केल पे पृथ्वी तो सिर्फ इतनी एक छोटा सा एक बिंदु मात्र है जैसे कि एक महा विराट समुंदर है उसके किनारे पर रेती का एक कण यह है पृथ्वी और इसी पृथ्वी पर हम लोग छोटे-छोटे मनुष्य तो हम लोगों का ये जो वर्ल्ड व्यू है वी नीड टू एक्सपें दिस वर्ल्ड व्यू और यह एक्सपेंडेड वर्ल्ड व्यू के मेरा आइडेंटिफिकेशन सिर्फ इस नेशन के साथ में सिर्फ इस लैंग्वेज के साथ में ही नहीं पूरी पृथ्वी के साथ में है गोइंग बियोंड दैट व्हाई शुड आई लिमिट माय सेल्फ टू अर्थ व्हाई कैन नॉट आई कंसीडर माइसेल्फ अ कॉस्मिक सिटीजन ये पूरा ब्रह्मांड तो मेरा है मुझे नहीं पता कि ब्रह्मांड में जद हम एक्सपें होना शुरू होंगे व्हेन वी कन्वर्ट अवर सेल्फ इनटू अ स्पेस फेयरिंग सिविलाइजेशन वो एक सिविलाइजेशन का स्केल है ने आप सिविलाइजेशन के कौन से लेवल पे है कि आप हंटर गैदरर के लेवल पे है ना कि आप फार्मिंग के लेवल पे सिटी स्टेट के लेवल पे आए हैं ना कि नेशन स्टेट के लेवल पे आए हैं ना कि आप यू हैव बिकम अ स्पेस फेयरिंग सिविलाइजेशन तो जदी वी हैव टू बिकम अ स्पेस लेवल सिविलाइजेशन कि हां मनुष्य मानव सभ्यता से पृथ्वी पे सीमित नहीं है आज अवकाश में स्पेस स्टेशन है चांद पे मनुष्य जा चुका है परसों कहीं जाकर के मार्स के ऊपर में ह्यूमन हैबिटेशन डेवलप हो देन वी विल बिकम ट्रूली स्पेस लेवल सिविलाइजेशन उसके बाद में स्पेस में हम एक्सपें कर सकते हैं व्हाई डू आई लिमिट माय सेल्फ टू अर्थ सो व्हेन आई कंसीडर माय सेल्फ अ सिटीजन ऑफ स्पेस पूरा ब्रह्मांड मेरा घर है इस तरह से जब मैं सोचना शुरू करूंगा देन आई विल नीड अ कंपलीटली डिफरेंट वर्ल्ड व्यू आज ये कैपिट इज्म या तो फिर सोशलिज्म या तो फिर ये ह्यूमैनिटीज की जितनी भी स्टडीज है वो सब वहां पे फेल हो जाएगी आई विल नीड अ कंप्लीट न्यू वर्ल्ड व्यू अ कंप्लीट न्यू फिलोसोफी टू अंडरस्टैंड ट स्पेस एनवायरमेंट कि जहां पे मुझे रहना है यहां पे मनुष्य कोई एक पार्टिकुलर रिलीजन पार्टिकुलर रीजन पार्टिकुलर लैंग्वेज से नहीं आते वो जो स्मॉल स्मॉल आइडेंटिटी वो चली गई नाउ वी हैव अजूम अ कॉस्मिक आइडेंटिटी तो व्हेन आई वांट टू एज्यूम दिस कॉस्मिक आइडेंटिटी आई विल नीड अ कॉस्मिक वर्ल्ड व्यू एंड दिस इज व्हाट स्वामी जी गिव्स अस कि कभी-कभी स्वामी जी को देखेंगे कि कितने हार्डकोर पेट्रियट है और दूसरे ही क्षण उनकी बातें इस तरह से मने एक ऊंचाई पे एक शिख र पे विराजित हो जाती है हवा में एक ऊंचाई पर उड़नी शुरू होती है जैसे लगता है कि कहां एक देश पड़ा रहा कहां एक छोटी सी मेरी आइडेंटिटी पड़ी रही आई एम दिस कॉस्मो दिस कॉस्मो इज इनसाइड माय हार्ट अपने तो इतना जद वेदांत यदि ऐसा कहता है कि आई एम आइडेंट कल विद दिस कॉस्मिक सोल देन व्हाई कैन नॉट आई बी आइडेंट कल विद दिस कॉस्मिक स्पेस ऐसा क्यों है भाई कि मैं अपने को एक और मैं कहूं कि अहम ब्रह्मास्मि और फिर दूसरी ओर कहू कि भाई माय आइडेंटिटी इज लिमिटेड टू दिस पर्टिकुलर रीजन कल्चर एटस हां एक तो है कि लोकेलिटी जो है उसका एक इंपॉर्टेंस है जैसे हमने कल भी डिस्कस किया था कि एक फिलोसोफी भले ही चाहे हमारी कल्चर विजडम जो है लर्निंग जो है चाहे कितना ही ग्लोबल क्यों ना हो कल्चर एक लोकल उसका एक महत्ता है उसको प्रिजर्व करना चाहिए किंतु यह कल्चर जो है ना दो तरह के होते हैं एक तो ओपन एंडेड हो होते हैं दूसरे क्लस्ट्रोफोबिक होते हैं एक क्लस्ट्रोफोबिक कल्चर क्या सोचता है कि मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं या तो मेरे में ही कुछ सार है जैसे स्वामी जी ने कहा ना कि मैं ही सही मैं ही आध्यात्मिकता प्राप्त कर सकता हूं यह जो शशि बाबू बोलकर के जिसने ये वो किताब लिखी जिसने कि स्वामी जी को भेजा उसमें क्या लिखा है कि सिर्फ हम ही लोग सक्सेस हो सकते हैं हम जो कुछ मुट्ठी भर लोग है जो कि इस पार्टिकुलर जगह पर रहते हैं पार्टिकुलर लैंग्वेज बोलते हैं और ये पार्टिकुलर रिच को फॉलो करते हैं हम ही लोग सक्सेस दिस इज अ क्लस्ट्रोफोबिक कल्चर एंड देयर इज अनदर ओपन कल्चर जैसे कि आजकल रामकृष्ण मिशन में पाया जाएगा कोई भी यहां पर आएगा मैं हिंदू हो ना कि मुस्लिम हो ना कि मराठी हो ना कि गुजराती हो ना कि बंगाली हो ना कि साउथ इंडियन हो आप कुछ भी खाते हैं कुछ भी पहनते हैं कैसी भी भाषा आपकी है सब तरह के लोग यहां के कॉस्मिक कल्चर में वेलकम है तो कल्चर है वैसे लोकलाइज किंतु ये ओपन कल्चर है सस वेलकम्स एवरीवन यह सुपीरियर का दंभ नहीं रखता कि मैं सुपीरियर हूं बाकी सब इनफीरियर है इस तरह का घमंड नहीं रखता यह अपने भीतर में एक वेलकमिंग एक एक मैसेज रखता है कि हां पूरे विश्व में जहां जो भी जो भी रह रहे हैं जिस तरह से रह रहे हैं ऑल आर लिविंग इन अ गुड मैनर सबके लिए वसुधैव कुटुंब कम एक कुटुंब तो एक छोटा सा ही होता है किंतु वसुधैव कुटुंबकम का क्या अर्थ है पृथ्वी के जितने भी कुटुंब है सबके साथ में हमारी सहानुभूति है सबके भीतर में वही एक ईश्वरीय चिंतन धारा विचारधारा वह प्रवेश कर रही है इस तरह से एक क्या कहेंगे कि एक वेलकमिंग एटीट्यूड रखना है तो एक कॉस्मिक कल्चर जद अपने को डेवलप करना है एक कॉस्मिक आइडेंटिटी उभी खड़ी करनी है इफ वी आर टू होमो सेपियंस से हमको होमो स्पेस होमो स्पेस टू कोइन वर्ड होमोसेपियंस टू होमो स्पेशियल यदि हमको इस नेक्स्ट लेवल पे जंप करना है सिविलाइजेशन के सोसाइटी के इवोल्यूशन के देन वी नीड स्वामी विवेकानंदा वर्ल्ड व्यू अदर वाइज आजकल की जितनी भी आइडेंटिटी है आजकल की जितनी भी फिलोसोफी है वो इतनी लिमिटेड है कि उसको लेकर के यदि हम स्पेस में जाएंगे तो पृथ्वी पर हम जो यह एटम बम से लड़ रहे हैं स्पेस में कहीं जाकर के और भी बड़े-बड़े वेपन खड़े कर दें और उससे युद्ध करना शुरू कर देंगे सो इन ऑर्डर टू गो टू द नेक्स्ट लेवल ऑफ इवोल्यूशन होमो स्पेशिन देन वी नीड स्वामी जी वर्ल्ड डिस्कस करके ही आज पूरा समय चला गया तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओ शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णर्पण मस्तु