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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda : English & Hindi : 7 Mar 2023

Swami Vivekananda

लेट मी शेयर माय स्क्रीन। एस यू कैन सी हियर स्वामी विवेकानंदा सेस माय मास्टर टॉट दैट रिलीजन इज वन। ऑल प्रोफेट्स टीच द सेम बट दे कैन ओनली प्रेजेंट अ प्रिंसिपल इन अ फॉर्म। सो दे टेक इट आउट ऑफ द ओल्ड फॉर्म एंड पुट इट बिफोर अस इन अ न्यू वन। सी हियर इन दिस वन सेंटेंस स्वामी जी गिव्स अस दी कंप्लीट हिस्ट्री ऑफ रिलीजियस थॉट डेवलपमेंट। अह देयर इज़ वन अमेरिकन ऑथर अह हर नेम इज़ आर्मस्ट्रांग। आई फॉरगॉट हर फर्स्ट नेम अह हर लास्ट नेम इज़ आर्मस्ट्रांग। आई थिंक मोस्ट प्रोबेबबली केरेन आर्मस्ट्रांग शी हैड रिटन अ बुक इवोल्यूशन ऑफ गॉड। नाउ व्हेन यू रीड द टाइटल ऑफ दिस बुक यू माइट वंडर दैट हाउ कैन वी से दैट इवोल्यूशन ऑफ गॉड गॉड इज चेंजलेस गॉड द इनफैक्ट गॉड नेवर बोर्न्स नेवर डाइस इट इज़ ही और शी और इट व्हाटएवर द प्रोनाउन मे वी प्रेफर इट रिमेंस इज़ द सेम फॉर्म थ्रू आउट इनफैक्ट गॉड इज़ सपोज्ड टू बी बिय्ड स्पेस एंड टाइम चेंज म्यूटेशन एंड एनी अदर डेवलपमेंट। सो हाउ कैन गॉड इवॉल्व? बट दिस बुक वाज़ वेरी पॉपुलर इन आवर ट्रेनिंग सेंटर एंड मेनी ब्रह्मचारीज़ यूज़्ड टू रीड इट। दोज़ हु वेर इंटेलेक्चुअली इंक्लाइंड। सो दैट बेसिक द सेम थिंग स्वामी जी आल्सो डिस्कसेस इन कंप्लीट वर्क्स बट यू नो वी आर सो अह अट्रैक्टेड बाय फॉरेन ऑथर्स दैट यस फॉरेन ऑथर राइट समथिंग लाइक दिस। अमेरिकन ऑथर राइट समथिंग लाइक दिस। सो स्वामी जी थ्रू आउट द कंप्लीट वर्क्स टेल्स हाउ गॉड हैज़ इवोल्वड बट वी आर बिकॉज़ बीइंग सच ए दैट अट्रैक्शन टुवर्ड्स दिस अमेरिकन ऑथर्स आई रेड दैट बुक बेसिकली द बुक सेस दैट गॉड हिमसेल्फ और इटसेल्फ नेवर इवॉल्व्स ऑफ कोर्स व्हाट इवॉल्व्स इज़ आवर अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ गॉड व्हेन वी वेर यू नो हंटर गैदरर्स व्हेन वी वेर ट्राइबल वी वेर लिविंग इन ट्राइबल ग्रुप्स व्हेन वी वेर माइग्रेटिंग विथ हर्ड्स इन ऑर्डर टू फाइंड आवर फूड दैट वाज़ इन प्री सिविलाइजेशनल डज़ प्री फार्मिंग एंड सेटलमेंट डज़ एट दैट टाइम वी वेर वरशिपिंग गॉड आउट ऑफ फियर एंड वी व्हेनएवर वी वांट समथिंग वी विल परफॉर्म देयर वेल शमान्स एंड व्हाट वुड अ शमान डू शमान वुड परफॉर्म सम सॉर्ट ऑफ़ सेरेमोनी ही विल सैक्रिफाइस सम गॉड और सैक्रिफाइस सम अनदर एनिमल देयर वेयर इवन ह्यूमन सैक्रिफाइसेस सो शमान वुड वुड परफॉर्म सम सच एजोटेरिक सेरेमोनी पर ही विल एजोटेरिक राइट एंड देन ही वुड इनवोक सम गॉड सम टेरेबल गॉड मॉन्सर लाइक गॉड एंड ही वुड से दैट ओके आई आई एम आस्किंग दिस गॉड सो दैट वी विल हैव गुड हंटिंग दिस सीजन ओर वी विल हेव नो वाइल्ड फायर दिस सीजन ऑल ऑफ दिस शमांस यूज्ड टू डू फ्रॉम दैट इवेंचुअली वी कम टू अंडरस्टैंड एंड द नेचर ऑफ़ गॉड इज़ नॉट टेरेबल। गॉड इज़ नॉट अ मॉन्सर लाइक। गॉड इज़ लाइक आवर लविंग फादर एंड मदर। व्हेन दिस हैपन व्हेन वी एक्चुअली सेटल डाउन फ्रॉम दिस अंटर गैदर ट्राइबल डेज़ टू दिस सिटी अह विलेज रूरल लाइफ। वी डेवलप दिस फार्मिंग वी सेटल डाउन इन ऑर्डर टू फार्म एंड देन वी डेवलप ऑल दिस स्ट्रक्चर दैट देयर विल बी द सरपंच ऑफ़ द विलेज। देयर विल बी अह एंड बिकॉज़ फार्मिंग गिव्स अस इन लॉट ऑफ़ वेल्थ। देयर वाज़ लेज़र इन दिस अमोंग दिस पीपल हु वेर लिविंग इन द विलेज एंड दे कैन डवर्सिफाई इन सेवरल ट्रेड्स। सो देयर विल बी यू नो पीपल हु विल वर्क विथ मेटल पीपल हु विल हु आर मर्चेंट्स पीपल हु आर हु विल परफॉर्म एडमिनिस्ट्रेशन पीपल हु विल डेवलप लर्निंग दे विल डेवलप लैंग्वेज दे विल डेवलप राइटिंग एंड दे विल ऑल्सो डेवलप दिस पेपीरस अह अह अह मेथड ऑफ़ राइटिंग और दिस पेपीरस अह दे हैव टू अप्लाई सम पर्टिकुलर केमिकल ऑन दिस लीव्स। एंड अपॉन दिस केमिकल इफ यू राइट द राइटिंग विल प्रिजर्व फॉर ए लॉन्ग टाइम दिस कोफ टेबलेट राइटिंग एवरीथिंग विल बी डेवलप वंस वी सेटल डाउन सो वंस वी सेटल डाउन आवर गॉड्स आल्सो बिकम मेलो एंड लविंग रेदर देन टेरेबल मॉन्सर लाइक गॉड्स वी स्टार्टेड वरशिपिंग देम बिकॉज़ वी फाउंड दैट गॉड लव्स अस एंड वी शुड इन टर्न लव देम सो दिस जीसस केम ही वास द परफेक्ट गॉड फॉर दिस अवतारा रेदर लेट मी से ही वाज़ द परफेक्ट अवतारा फॉर दिस सेटल्ड फार्मिंग कम्युनिटीज़ फार्मिंग कम्युनिटीज़ फिशरमैन कम्युनिटीज़ फोर ऑफ़ देम एंड इन आवर इंडियन सोसाइटी आल्सो दिस वैष्णव रिलीजन दिस वैष्णव ब्रांच ऑफ़ अह दिस से फिलॉसोफी इट आल्सो डेवलप कीपिंग इन माइंड दिस लविंग गॉड रेदर देन अ टेरेबल गॉड। यू नो दिस इंद्र इज़ अ फिकल गॉड। इंद्र वुड थिंक इंद्र इज़ अ जेलस पर्सन। सो व्हाट वुड हैपन इफ़ सम ऋषि मुनि इज़ डूइंग तपस्या इंद्र विल बिकम वेरी फ्राइटेंड दैट इफ़ ही सक्सेस इन हिज़ तपस्या ही विल टेक अवे माय इंद्रासन। ही विल टेक अवे माय किंगडम। सो ही विल सेंड सम अप्सरा टू टू डिस्टर्ब दिस ऋषि एंड वंस दिस ऋषि इज़ टेंपटेड हिज़ तपस्या विल बी डिस्ट्रॉयड एंड इंद्रस आसना इंद्रस किंगडम वुड बी सेफ। सो इंद्र वाज़ सच अ फिकल गॉड। इंद्र वाज़ सच अ जेलस गॉड बट देन केम विष्णु। विष्णु इज़ सच अ ग्रेट गॉड। ही हैज़ सच एन इनफाइनाइट कंपैशन इन हिज़ हार्ट एंड लक्ष्मी हरसेल्फ इज़ हिज अह वाइफ सो कंसोर्ट्ट। लेट मी से डिवाइन कंसोर्ट्ट। द वर्ड इज़ डिवाइन कंसर्ट। सो लक्ष्मी इज़ हिज डिवाइन कंसर्ट। सो ही हैड नो यू नो ही डजंट लेक दिस मनी एंड किंगडम एंड वेल्थ। सो ही कैन बी क्वाइट जेनरस। सो, सी दिस इज हाउ आवर आइडिया ऑफ गॉड हैज़ इवॉल्व्ड। फाइनली देन केम बुद्धिज्म एंड जैनिज्म। दे से दैट व्हाई डू यू इमेजिन गॉड विथ हैविंग टू हैंड्स, टू लेग्स। इमेजिन गॉड इज़ स्पिरिट लाइक एयर इट इज़ अ सर अह इट इज़ एवरीवेयर। यू डोंट हैव टू देयर इज़ नो सच अ थिंग वेयर गॉड इज़ नॉट देयर लाइक सनलाइट। सनलाइट इज़ एवरीवेयर। लाइक एयर। एयर इज़ एवरीवेयर। सो, गॉड इज़ ऑल्सो इन अ स्पिरिट फॉर्म, एंड ही इज़ ऑल्सो एवरीवेयर। सो लेट अस वरशिप दिस गॉड बट देन इफ इज अ ह्यूमन फॉर्म गॉड देन वी शुड वी नीड टू वरशिप हिम हाउ कैन यू वरशिप द स्पिरिट फॉर्म गॉड गॉड हु हैज़ नो बॉडी ही हैज़ नो फॉर्म सो द मेथड ऑफ प्रइंग टू हिम रेदर द साधना ऑफ़ दिस फॉर्मलेस गॉड इट इज़ मेडिटेशन कंसंट्रेशन एंड त्यागा एंड रनाउंसिएशन सो दे विल डेवलप दिस ज्ञान मार्ग आवर क्षत्रियस दिस ज्ञान मार्ग गा इज़ पार्टिकुलरली अ रेबेलियन अगेंस्ट ह ब्राह्मण हु यूज़्ड टू परफॉर्म ऑल दिस राइट्स एटसेट्रा एंड डिमांडिंग मनी एंड गिफ्ट्स फ्रॉम एवरीवन एंड इफ समवन अ पुअर पर्सन फॉर एग्जांपल ही कैन नॉट अफोर्ड टू गिव हिम ए गिफ्ट दे वुड हैरेस हिम दे वुड कर्स हिम दैट इफ यू वांट फीड दिस मेनी ब्राह्मिस ऑन दिस दिस मेनी ओके देन देयर विल बी कर्स ऑफ़ इंद्रा कर्स ऑफ़ वरुणा अपॉन दिस विलेज एंड देयर विल विल बी ड्रोट एंड वरुणा गॉड विल बिकम एंग्री और अग्नि गॉड विल बी एंग्री विथ यू एंड देयर विल बी फायर दिस सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स वेर गोइंग ऑन। सो दिस क्षत्रिय रेबेलियन अगेंस्ट दिस गॉड्स ऑफ वेदास दैट वाज़ लेड बाय दिस क्षत्रियस एंड दे डेवलप्ड दिस फॉर्मलेस गॉड बाय द श्रमण स्कूल एंड आल्सो ब्राह्मण स्कूल। इन बोथ द स्कूल्स दिस फॉर्मलेस गॉड वास डेवलप श्रमण स्कूल सेड दैट दिस फॉर्मलेस गॉड लिव समवेयर आउटसाइड ऑफ अस एंड दिस ब्राह्मण स्कूल सेज़ ब्राह्मण स्कूल नॉट मींस ब्राह्मिस बट दिस वैदिक स्कूल इन वैदिक स्कूल देयर वर ब्राह्मणस एंड क्षत्रियस शूद्रास एंड वैश्य वैश्य अमोंग दिस क्षत्रियस सेड दैट दिस फॉर्मलेस गॉड लिव्स इन आवर हार्ट सो दिस इज़ दी कॉन्सेप्ट ऑफ आत्मन और ब्रह्मन दिस इज़ हाउ दिस कॉन्सेप्ट ऑफ आत्मन एंड ब्रह्मन केम टू बी डेवलप। सो हियर स्वामी जी सेस दैट माय मास्टर टॉट दैट रिलीजन इज वन। ऑल प्रॉफेट टीच द सेम बट दे कैन ओनली प्रेजेंट अ प्रिंसिपल इन अ फॉर्म। फॉर्म मींस सम सॉर्ट ऑफ़ गॉड। हियर देयर वाज़ वरुण देव, द अग्नि देव, दिस इंद्रदेव एंड देयर इज़ अ जुपिटर एंड देयर इज़ अ फादर इन हेवन। ऑल दिस आर फॉर्म्स। देयर इज़ अल्लाह। ऑल दिस आर फॉर्म्स। ऑफ़ कोर्स अल्लाह इज़ फॉर्मलेस। एनीवे सो दे टेक इट आउट ऑफ द ओल्ड फॉर्म एंड पुट इट बिफोर अस इन अ न्यू वन व्हेन वी फ्री आवरसेल्व्स फ्रॉम नेम एंड फ्रॉम सी दिस इज व्हाट क्षत्रिय रेबेलियन लुक्स लाइक क्षत्रिय से दैट डोंट वरी अबाउट एनी ऑफ़ दिस नेम एंड फॉर्म इमेजिन दैट गॉड लिव्स इनसाइड योर ओन हार्ट वी कॉल इट आत्मन और ब्रह्मन एंड द वे टू रियलाइज दिस आत्मन दिस आत्मदर्शन और ब्रह्म दर्शन इट इज टू रनाउंस आवर सेंसुअल डिजायर सेंुअल प्लेज़र्स वर्ल्डली प्लेजर्स टू रनाउंस एवरीथिंग टू फोकस आवर माइंड एकाग्रता एंड संकल्प शक्ति विल पावर एंड कंसंट्रेशन दिस आर द वे यू कैन अटेन यू कैन हैव द विज़न ऑफ़ दिस फॉर्मलेस गॉड एस अह दैट इज़ व्हाई स्वामी जी सेज़ दैट व्हेन वी फ्री आवरसेल्व्स फ्रॉम नेम एंड फॉर्म एस्पेशियली फ्रॉम ए बॉडी व्हेन वी नीड नो बॉडी गुड और बेड देन ओनली डू वी एस्केप फ्रॉम बॉन्डेज। दिस इज दी हाईएस्ट अद्वैदिक टीचिंग अकॉर्डिंग टू आवर वैदिक स्कूल ऑफ फिलॉसोफी। वेदांत स्कूल ऑफ फिलॉसोफी। वेदांता इज़ जस्ट ए पार्ट ऑफ दिस वैदिक महासागरा। सो वेदांता सेस दिस अद्वैत वेदांता इज हाईएस्ट। यू कम टू अद्वैत थ्रू सो मेनी फॉर्म्स। यू यू मे वरशिप भगवान विष्णु। यू मे वरशिप भगवान राम, यू मे वरशिप भगवान कृष्णा, यू मे वरशिप मदर काली। यू मे वरशिप एनी ऑफ दिस 33 कोटि गॉड्स एंड गॉडेसेस देवीस एंड देवताज़। यू मे लाइक एंड देयर आर इक्वल नंबर ऑफ अवतारास यू मे वरशिप देम। यू कैन प्रे टू देम डजंट मैटर। अल्टीमेटली यू विल हैव टू कम टू दी अद्वैता। ऑफ़ कोर्स लेटर ऑन स्वामी जी आल्सो सेज़ दैट यू मे फॉलो एनी ऑफ़ दी पाथ। नॉट नेसेसरी दैट अल्टीमेटली यू विल हैव टू कम टू अद्वेता। इफ आई एम इफ आई वरशिप श्री रामकृष्ण डजंट मीन दैट आई स्टॉप वरशिपिंग रामकृष्ण एट वन पॉइंट इन टाइम एंड टर्न टू अद्वैता। वरशिपिंग श्री रामकृष्ण इटसेल्फ विल टेक मी टू दिस हाईएस्ट गोल इन स्पिरिचुअल लाइफ। ओनली दैट अद्वैता इज़ कंसीडर्ड टू बी फिलॉसोफिकली हाईएस्ट। नॉट एज़ अ पाथ। एज़ अ पाथ ऑल आर इक्वल। बट एज अ फिलॉसोफी इज अ फिलॉसोफिकल सोफिस्टिकेशन अद्वैता इज द हाईएस्ट। सो इफ यू आर सो फिलोसोफिकली इंक्लाइंड यू मे विश टू गो देर अदरवाइज डजंट मैटर टू व्हाटएवर द इष्ट देवता यू हैव सिलेक्ट यू लाइक और एनी ऑफ़ द अवतार दैट यू हैव सिलेक्टेड टू वरशिप दैट यू लाइक फॉलो देम एंड दैट पाथ विल लीड यू टू आवर अल्टीमेट निर्वाणा और आत्मदर्शन और ईश्वर दर्शन। नेक्स्ट स्वामी जी सेस गुड वर्क्स आर ओनली वैल्यूएबल एस अ मीन्स ऑफ एस्केप दे डू गुड टू द डअर नेवर टू एनी अदर सी देयर इज़ सच एन इंपॉर्टेंट कांसेप्ट हियर दैट व्हेन वी आर डूइंग समथिंग गुड दिस कर्म योगा इट एक्चुअली प्यूरिफाई माय ओन संस्कारा इफ इट हेल्प्स अदर्स फॉर एग्जांपल वी हैव आवर डॉक्टर महाराज हियर वर्किंग इन आवर डिस्पेंसरी इन आवर डिस्पेंसरी देयर आर ऑलमोस्ट 1000 डेली पेशेंट्स देयर आर ऑलमोस्ट मोर देन 15 टू 20 ऑपरेशंस डेली कंडक्टेड इन आवर आई डिपार्टमेंट इन आवर सेरेब्रल पालसी डिपार्टमेंट फिजियोथरेपी डिपार्टमेंट सो मेनी पीपल बेनिफिट कमिंग टू दिस हॉस्पिटल आवर डिस्पेंसरी इट इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट स्टेट ऑफ द आर्ट डिस्पेंसरी इन अ इन दिस रीजन दिस रीजन इज़ कॉल्ड सौराष्ट्र रीजन इन दिस सिटी राजकोट इज़ लोकेटेड। सो इन सौराष्ट्र रीजन आवर डिस्पेंसरी इज़ कंसीडर्ड टू बी वन ऑफ़ द मोस्ट स्टेट ऑफ द आर्ट डिस्पेंसरी एंड आवर महाराज द इंचार्ज स्वामी जी हु इज़ देयर ही इज़ एक्चुअली अ डॉक्टर। ही इज़ एक्चुअली अ डॉक्टर ही लेफ्ट हिज होम। ही केम हियर एंड हिज सर्विंग टू हिज ऑल दिस पीपल। नाउ डॉक्टर हैज़ सो मेनी अपॉर्चुनिटीज़ टू यू नो अर्न मनी एंड एववरीथिंग। ही कुड हैव डन वेरी वेल इन हिज़ पूर्वाश्रमा इन हिज़ होम। स्टिल ही केम हियर एंड रिनाउंस एव्रीथिंग एंड नाउ ही इज़ वर्किंग इन आवर डिस्पेंसरी। नाउ वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट ही वर्क्स इन द डिस्पेंसरी दिस गुड डीड दैट ही इज़ डूइंग इट इज़ हेल्पिंग टू दिस इट इज़ वेरी हेल्पफुल टू दिस पेशेंट्स। नो डाउट देयर इज़ नो वंडर अबाउट इट। बट अबव ऑल एल्स इट हेल्प्स हिमसेल्फ। इट हेल्प्स हिम टू क्लींस हिज ओन हार्ट टू क्लींस हिज ओन संस्कारास। दिस इज द ट्रू मोटिव ऑफ कर्म योगा। बिकॉज़ यू सी अ पर्संस लाइफ इज़ लाइक अह दिस साइकिल ऑफ जन्म मृत्यु जरा व्याधि एंड दिस साइकिल इज़ ब्रोकन ओनली व्हेन वी गेट रीड ऑफ ऑल आवर गुड कर्माज़ एंड बैड कर्माज़। दिस बैलेंस शीट बिकम्स इक्वल एंड देयर इज नथिंग फर्दर टू रिमेन टू डू व्हेन दिस हैप्स वी अटेन निर्वाणा और आत्मदर्शन व्हिच एवर द फिलॉसोफिकल वे यू लुक एट इट और ईश्वर दर्शन सो दिस कर्म योग इट हेल्प्स अस नॉट टू अदर्स ऑफ कोर्स इट हेल्प्स अदर्स देयर इज़ नो वंडर अबाउट इट सो मेनी थाउजेंड्स ऑफ़ पेशेंट्स आर बेनिफिटिंग फ्रॉम सच ए वेल फंक्शनिंग डिस्पेंसरी बट दिस इज़ दैट इज़ इंसिडेंटल इफ आई थिंक दैट आई एम हेल्पिंग दिस पेशेंट्स एंड इफ द मोमेंट आई स्टार्टेड थिंकिंग दैट आई एम हेल्पिंग दिस पेशेंट व्हाट विल हैपन दिस एोगेंस विल कम इन माय हार्ट दैट ओके आई एम अ डॉक्टर एंड आई आई हैव रनाउंस एवरीथिंग एंड आई एम हेल्पिंग सो मेनी पीपल सो पीपल शुड कम एंड गिव गिव मी देयर रिस्पेक्ट दे शुड पे मी देयर रिस्पेक्ट दे शुड प्रज़ मी दे शुड कीप ऑन सेइंग ओ डॉक्टर महाराज यू आर सच अ वंडरफुल पर्सन बट सी आवर डॉक्टर महाराज इस सच सच अ हंबल पर्सन ही इज़ सच अ जेंटलमैन दैट ही नेवर वरीस अबाउट एनीवंस प्रज़ और क्रिटिसिज्म। इनफैक्ट ही स्टेज़ अवे फ्रॉम एनी लाइमलाइट ही डज़ंट गो टू एनी फंक्शन फ्रॉम हिज़ रूम टू डिस्पेंसरी डिस्पेंसरी टू रूम। दैट इज़ हिज लाइफ। ही नेवर गोज़ एनीवेयर आउटसाइड। नो वन इवन नोज़ दैट सच अ वेल फंक्शनिंग डिस्पेंसरी इज़ मैनेज्ड बाय सच अ जेंटलमैन साधु। सच अ ट्रू साधु। सो, ही रिमेंस हिडन ऑलवेज। सो दिस इज़ द स्ट्रेंथ ऑफ़ आवर इंडियन स्पिरिचुअलिटी। सी इन हिंदूइज़्म देयर आर सो मेनी साधकास हु रिमेन हिडन ऑल द टाइम। यू मे सी सेवरल पीपल टॉकिंग विथ एवरीवन। यू मे सी पीपल इन मीडिया वेयरिंग गेरुआ क्लोथ एंड क्लेमिंग दैट आई विल परफॉर्म दिस मिरेकल दैट मिरेकल। एंड इफ यू कम टू मी। मैं यह चमत्कार कर दूंगा। आप

श्रीरामकृष्ण कथामृत : चतुर्थ दर्शन

यदि मुझे इतना दक्षिणा दीजिए, इतना प्रणामी दीजिए। आपके जितने भी ये जो रोग वगैरह है आपके जितने भी प्रॉब्लम है सब मैं सॉल्व कर दूंगा। ऐसे जो मीडिया वाले साधु होते हैं उन्होंने तो हमारे हिंदू धर्म को डूबा ही दिया है। ये लोग ना ही साधु है ना ही ये लोग साधक हैं। ये लोग तो है सिर्फ शो मैन है। सिर्फ पैसों के लिए ये सब करते हैं। जैसे ही आपने लोगों के सामने जाकर के ये कहना शुरू कर दिया कि आपकी समस्याओं का उपाय जो मेरे पास में है आप मुझे दक्षिणा दीजिए। मुझे सम्मान दीजिए। मुझे आप जो है अपने सर अपने सर आंखों पर बिठा लीजिए और बस जैसे ही ऐसा कहना शुरू किया ये भीतर में एक ऐसा अहंकार एक प्रकट होगा वो जैसे मतलब वो जो काल राक्षस की तरह ये अहंकार है वो इस तरह के ये जो साधु जो सो कॉल्ड साधु अपने को साधु महात्मा संत जो भी कहलाता है उसको भी ग्रस्त कर लेगा और उसके जो जितने भक्त वगैरह है उनका भी वो सत्यानाश कर देगा। इसलिए जो लोग मीडिया में सब समय आकर के बड़े-बड़े क्लेम करते हैं चमत्कार वगैरह इन लोगों से तो हमेशा दूर रहना सही-सही साधु वो है जो कि संपूर्ण रूप से विनम्र है जिसके ह्रदय में जो कि है अहंकार का एक लेश मात्र भी नहीं है। जैसे ये डॉक्टर महाराज के बारे में कहा। आश्रम के बाहर किसी को पता भी नहीं होगा। लोग सोचते होंगे आश्रम में इतना बढ़िया सा डिस्पेंसरी चलता है। तो कौन चलाता है? लोग सोच लेते हैं ये सब चीजें ऑटोमेटिक होती है। ये ऑटोमेटिक एक्चुअली नहीं होती। किसी का पूरा जीवन इसके भीतर में डला हुआ रहता है। तो ये डॉक्टर महाराज ने पूरा जीवन डाल के इतना बढ़िया डिस्पेंसरी बनाया और थोड़ा सा भी उनको ना ही ये लोकमान्यता चाहिए ना ही नेम एंड फेम चाहिए ना ही थोड़ा सा भी ये पॉपुलैरिटी चाहिए। तो ऐसे साधक ऐसे साधक भारत में हजारों लाखों साधक है पूरे पृथ्वी में है ऐसे लोग जो कि साइलेंटली काम करते हैं जो कि हमेशा विनम्रता से जीते हैं उनकी जो साधना आराधना है वो इस तरह से ठाकुर बोलते हैं ना मन बने और कोण साधना तपस्या कैसे करनी चाहिए मन में करनी चाहिए किसी कॉर्नर में जाकर अपने घर के किसी अंधारे कोने में जाकर के करनी चाहिए जैसे कि घर में दूसरे लोगों को पता ना चले ठाकुर कहते हैं ना वो मसारी वो जो ये जो मॉस्किटो नेट लगा हुआ है घर घर वाले सोच रहे हैं कि ये सो गए किंतु एक्चुअली वो मॉस्किटो नेट के भीतर में बैठकर के जप कर रहे हैं। तो ऐसे घर में भी पता ना चले इस तरह से घर के किसी कॉर्नर में करना चाहिए और वन में अर्थात किसी स्पिरिचुअल रिट्रीट कोई आश्रम हो कोई इस तरह से वो रिमोट दूर जगह पे कोई मंदिर वगैरह हो वहां पे जाकर के तपस्या करनी चाहिए। जैसे कि जो है लोगों को पता ना चले कि भाई यह इतने अच्छे साधक हैं। यह जो अपनी साधना तपस्या को छुपा के रखना अपनी ये जो कार्य जो सिद्धि है उसको छुपा के रखना ये जो अपनी जो उपलब्धियां है उसको छुपा के रखना और चुपचाप अपना काम किए जाना ये सही-सही साधक का एक सबसे बड़ा निशानी है। हां, जैसे-जैसे लोगों को पता चलता जाएगा कि इस तरह के कोई साधक है। फिर लोग जो है अपने से उनके आसपास में इकट्ठा होना शुरू कर देंगे। फिर ऐसे जो साधक है, साधु है वो उनके आशीर्वाद इस तरह से लोगों के जीवन में वो प्रवेश होते हैं। जैसे स्वामी जी कहते हैं ना कि वेदांत का इन्फ्लुएंस कैसा है जगत के ऊपर में। जैसे कि यह जो सुबह का जो यह ओस है जो यह जो फोग है मॉर्निंग फोग वो किस तरह से जेंटली वो आपके कम गुलाब का फूल है उसके ऊपर में गिरता है और उसके ऊपर में गिरने से उसकी ये जो जड़ है वो मजबूत बना जो मैंने पहले भी कहा था कि जो लोग गार्डनिंग करते हैं उनको पता है कि ये जो मॉर्निंग फोक जो है ये जो वो कितना इंपॉर्टेंट है ये जो गुलाब के डेवलपमेंट के लिए तो वैसे ही जेंटली जैसे हम पानी डालेंगे तो क्या होगा? एकदम जोरों से पानी गिरेगा। किंतु यह जो ओस है वह इतना जेंटली गिरता है कि पता भी नहीं चलता कि वह उसके हमारे सर पे गिरा है या तो गुलाब के ऊपर गिरा है। तो इस तरह से साइलेंटली जो है उनके आशीर्वाद उनके जो भक्त हैं उनके हृदय में प्रवेश करके हृदय को परिवर्तन करते हैं। यही लोग जो है असली असली साधु है। रियल रियल साधु है। और ये जो स्वामी जी कहते हैं कि कर्म करते हैं तो पता ही नहीं चलना चाहिए कि मैंने इतना कर्म कर दिया। हां फिर जैसे आप देख रहे हैं कि हमारे ही बहुत सारे साधु हैं जो कि प्रवचन भी देते हैं। बहुत सारी जगह पर जाते हैं। फिर हमारे प्रेसिडेंट महाराज होते हैं। वाइस प्रेसिडेंट महाराज होते हैं। बड़े-बड़े सेंटर के हेड होते हैं। उनको क्या है पब्लिक लोगों लोगों की नजर में रहना पड़ता है। पब्लिक आई में रहना पड़ता है। क्योंकि क्या है कि ये लोग इंस्टीट्यूशन मैनेज करते हैं। किंतु ये बात भी देखिएगा कि उनको ये पोस्ट दी गई है बोल करके वे लोग कर रहे हैं। अभी डॉक्टर महाराज को कहीं पर अध्यक्ष बना देंगे तो उनको अध्यक्ष का काम करना पड़ेगा। वो ऑप्शन नहीं है। यह भी हमारे को हम खास करके रामकृष्ण मिशन के साधुओं को हमको जो काम दिया जाता है वो हम करते हैं। सिंसियरली करते हैं। यदि वो काम छुप के करने वाला है। जैसे पुजारी का काम है, जैसे भंडारी का काम है, जैसे अकाउंटेंट का काम है तो इस तरह से करेंगे लोगों को पता भी नहीं चलेगा। और इस तरह का कोई काम है पब्लिक आई में आकर के करना है। लोगों के सामने आकर के करना है। जैसे हेड ऑफ द सेंटर है। हमारे ट्रस्टीज है, वाइस प्रेसिडेंट महाराज है, प्रेसिडेंट महाराज है। तो वे वो काम भी वे लोग इतनी ही सिंसियरिटी से करेंगे और सब समय ठाकुर को प्रार्थना करते रहेंगे। यदि सही-सही साधु है तो कि ठाकुर यह जो काम ये ओपोरर्चुनिटी जो है यह भक्तों को सर्व करने की जो यह ओपोरर्चुनिटी मुझे दी है इससे मेरे मन में थोड़ा सा भी अहंकार ना बढ़े। इस तरह की कृपा मेरे पर करना। ऐसा सोच करके ही वे लोग जो है इस तरह के कार्य को हाथ में लेते हैं। इस तरह का कार्य पब्लिक आई में जो करने वाला है वह कार्य ये लोग करते हैं। अच्छा श्री रामकृष्ण कथामृत अभी हमने देखा कि जो मास्टर महाशय फोर्थ टाइम चतुर्थ बार वहां पे आए थे और ठाकुर ने उनको कह दिया कि 4:00 बजे मोर को अफीम खिलाया दूसरे दिन ठीक 4:00 बजे जो है मोर वहां पे उपस्थित हो गया। तो ठीक है। अभी ये मुलाकात का भी अंत आया। रात हो गई। अब मास्टर घर जाएंगे पर जाने को जी नहीं चाहता। इसलिए नरेंद्र से विदा होकर के नरेंद्र से भिड़ा दिया था ना ठाकुर ने उनको तो उनसे वैसे तो अभी ये उनका आर्गुममेंट करने का वो सब तो चला ही गया है बेटा मास्टर महाशय का। सिर्फ बात करके पूछा कि क्या कर रहे हो? कैसा है? तो नरेंद्र से विदा लेकर के फिर श्री रामकृष्ण को ढूंढने लगे। उनका गीत सुनकर के मास्टर महाशय मुग्ध हो गए हैं। जी चाहता है कि फिर उन उनके मुंह से गीत सुने। उनके श्री मुख से गीत सुने। ढूंढते हुए देखा कि मां काली के मंदिर के सामने जो नाट्य मंडप है, नाट्य मंडप है, उसी में श्री रामकृष्ण अकेले टहल रहे हैं। मंदिर में मूर्ति के दोनों तरफ दीपक जल रहे थे। विस्तृत नाट्य मंडप में एक लाल टेन जल रही थी। रोशनी धीमी थी। प्रकाश और अंधेरे का मिश्रण सा दिख पड़ता था। अब कितना सुंदर वर्णन है। अंधेरा है वहां पर वो जो लालटेन वो जो जो मशाल है वगैरह जल रहा है। एकदम अंधेरा मिश्रित उजाले का एक मधुर एक वातावरण खड़ा हुआ है। वहां पर जो है ठाकुर है। यह सब हम जब जप करते हैं, ध्यान करते हैं तो यह सब इमेजिन करने से हमको कितना बेनिफिट होता है। मास्टर श्री रामकृष्ण का गीत सुनकर मुग्ध हो गए हैं। जैसे सांप मंत्रमुग्ध हो जाता है। अब बड़े संकोच से उन्होंने श्री रामकृष्ण से पूछा क्या आज फिर गाना होगा? श्री रामकृष्ण ने जरा सोचकर कहा नहीं आज अब ना होगा। यह कहते ही मानो उन्हें फिर याद आई और उन्होंने कहा हां एक काम करना मैं कलकत्ते में बलराम के घर जाऊंगा तुम भी आना। वहां गाना होगा। मास्टर कहते हैं अच्छा आपकी जैसी आज्ञा। श्री रामकृष्ण कहते हैं तुम जानते हो बलराम बसु को? मास्टर कहते हैं जी नहीं। श्री रामकृष्ण कहते हैं बलराम बसु बोसपाड़ा में उनका घर है। मास्टर कहते हैं जी मैं पूछ लूंगा। देखिए ये जो है कि कितना अच्छा उदाहरण दिया कि सांप से मंत्रमुग्ध जैसे हो गए हैं। वो जो जैसे सांप मंत्रमुग्ध हो जाता है। वो जो ये होता है ना वो जो बजाता है वो क्या एक इंस्ट्रूमेंट होता है वो जो सपेरा वो जो इंस्ट्रूमेंट बजाता है उसका नाम मैं भूल गया। ऐसा लंबा होता है बंसी जैसा वो वो बजाने से ही वो जो जैसे सांप मंत्रमुग्ध हो जाता है वैसे ही ये मंत्रमुग्ध हो गया। तो और ठाकुर को पूछने लगे कि अब गीत ये जो भजन है कहां पर होगा? तो ठाकुर ने कहा कि अभी आज तो यहां पे नहीं होगा। बलराम बसु के घर चले जाना वहां पे होगा। अभी देखिए वो जो ठाकुर कहते हैं ना कि कोलकाता में मेरे कुछ-कुछ किले हैं। कुछ-कुछ अड्डे हैं। तो वहां पे ठाकुर का यह जो है वो जो एक घर है वहां पे वो था एक बलराम बसु का घर। जैसे सुरन मित्र का घर। ये जो रामचंद्र दत्त का घर ऐसे ऐसे कुछ-कुछ जगह हैं। किंतु बलराम मंदिर जो है वो सबसे बड़ा उनका गढ़ था। सबसे बड़ा किला था उनका। वहां पे ही ठाकुर ने सबसे ज्यादा लीला की थी। माने दक्षिणेश्वर से जब कोलकाता में जाते थे उस समय। अभी श्री रामकृष्ण मास्टर के साथ टहलते हुए पूछ रहे हैं। अच्छा तुमसे मैं एक बात पूछता हूं। मुझे तुम क्या समझते हो? चार बार आए हैं। चार बार ठाकुर को देखा है। इसी में ठाकुर ने परीक्षा लेने की शुरुआत कर दी कि मेरे बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है। अभी यह नहीं है कि ठाकुर जानना चाहते हैं कि उनके बारे में ठाकुर जानना चाहते हैं मास्टर महाशय किस तरह से ठाकुर का असेसमेंट करते हैं। पहले तो पूछा कि नरेंद्र के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है? अभी पूछ रहे हैं मेरे बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है। माने वो नरेंद्र के बारे में या तो खुद के बारे में नहीं जानना चाहते हैं। वो तो उनको पता ही है कि उनका स्वरूप क्या है? नरेंद्र का क्या है? मास्टर महाशय किस तरह से असेसमेंट करते हैं उनका वो वो जानना चाहता है। यदि कोई यह कहता है कि अच्छा वो नरेंद्र लड़का है वो जो बहुत ही ज्यादा घमंडी है और क्या बेतुकी बातें करता रहता है और पता ही नहीं वो तो पढ़ाई लिखाई में भी इतना अच्छा नहीं है। उसमें कथामृत में है एक जगह पे कोई एक भक्त ठाकुर को पूछता है। अरे महाशय आप सब समय नरेंद्र नरेंद्र क्या कहते रहते हैं। पढ़ाई लिखाई में भी वह ठीक-ठाक नहीं है। वो उसके अच्छे मार्क्स नहीं आते हैं। हमको लगता है स्वामी जी बहुत ब्राइट थे। बहुत इंटेलिजेंट है। वो थे किंतु जो ये एकेडेमिक पढ़ाई होती है उसमें उनका यह नहीं था। स्वामी जी खुद कहते हैं कि परीक्षा के आखिरी दिन में मेहनत करके परीक्षा पास कर लेता था। तो एकदम वो 80 90%ेज मार्क आ जाए फर्स्ट आ जाए क्लास में ऐसा उनका नहीं था। वो मतलब जो मिनिमम मेहनत करके जो जितने मार्क्स आने चाहिए वो लाते थे। तो ऐसे वो भक्त लोग भी पूछ रहे हैं कि नरेंद्र तो पढ़ाई लिखाई में भी इतना तेज नहीं है। क्यों आप नरेंद्र नारायण कर रहे हैं? तो ऐसा कहने वाले भी लोग थे और ऐसा कहने से ही ठाकुर को पता चल जाता था कि उसकी बुद्धि कहां तक है और मास्टर महाशय क्या कहते हैं वो सोच के मास्टर महाशय की बुद्धि कहां तक है वो भी उनको अंदाज आ जाएगा तो इसलिए पूछते हैं कि मुझे तुम क्या समझते हो तो मास्टर चुप रहे श्री रामकृष्ण ने फिर से पूछा तुम्हें क्या मालूम होता है मुझे कितने आने ज्ञान हुआ है मास्टर महाशय कहते हैं आने की म कितना परसेंटेज मुझे ज्ञान हुआ है 100 में से कितना परसेंटेज ज्ञान हुआ है। एक एक में 100 पैसे रहते हैं ना तो 50 पैसे का ज्ञान हुआ है। 75 पैसे का ज्ञान उस समय ये आना वगैरह थे तो इसके हिसाब से पूछते थे। तो मास्टर महाशय कहते हैं आने की बात तो मैं नहीं जानता। यानी कितना पैसा 100 में से कितना पैसा ज्ञान हुआ है? 50 पैसा 50% ज्ञान हुआ है। 70% हुआ है? 80% हुआ है कि 100% हुआ है? तो मास्टर महाशय कहते हैं कि कितने परसेंटेज ज्ञान हुआ है इस तरह का आकलन तो मैं नहीं कर सकता परंतु आपके जैसा ज्ञान या प्रेम भक्ति या विश्वास या वैराग्य या उदार भाव मैंने और कभी कहीं नहीं देखा। देखिए कितनी बड़ी बात कर दी। ठाकुर पूछते हैं कि मुझे कितना परसेंटेज नॉलेज हुआ है। मास्टर महाशय कहते हैं परसेंटेज कितना हुआ है मुझे पता नहीं। शायद आपको 10% भी हुआ हो। शायद आपको 100% भी हुआ हो। ये जो आध्यात्मिक महासागर है उसका अंत कहां तक आता है? वो अंत तक पहुंचने वाले मनुष्य का किस तरह का स्वभाव रहता है वो सब मुझे क्या पता। किंतु मुझे यह एक बात पता है कि मैंने अपने जीवन में जितने लोगों को देखा या जितने लोगों के बारे में पढ़ा उन सब में आप जैसा ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, प्रेम, भाव मैंने किसी में नहीं देखा अभी तक। यह बात सुनकर के श्री रामकृष्ण हंसने लगे। अर्थात मास्टर महाशय परीक्षा में पास हो गए हैं। अभी फर्स्ट स्टैंडर्ड पास करके सेकंड स्टैंडर्ड में उनका ग्रेजुएशन हो जाएगा। इस बातचीत के बाद मास्टर महाशय प्रणाम करके विदा हुए। फाटक तक जाकर फिर कुछ याद आई। उल्टे पांव लौटकर फिर श्री रामकृष्ण के पास नाट्य मंडप में हाजिर हुए। उस धीमी रोशनी में श्री रामकृष्ण अकेले टहल रहे थे। निहसंग जैसे सिंह वन में अकेला अपनी मौज में फिरता रहता है। देखिए कितना सुंदर डिस्क्रिप्शन दिया है। जैसे अंधेरा है वो जो एक दो मशाल लालटेन वगैरह जल रहा है। तो कितना खूबसूरत एक वातावरण खड़ा हुआ होगा। मां काली का मंदिर है, द्वादश शिव मंदिर है, राधाकांत का मंदिर है। और आज की तरह सब जगह पर फ्लड लाइट, ट्रैफिक और मोबाइल क्या-क्या सब आजकल तो ये माने महा डिस्ट्रैक्शन चारों ओर मैं एक बार उज्जैन जा रहा था तो मुझे एक्सीडेंटली एक छोटे से जगह प्रॉब्लम क्या हुआ था कि ट्रेन था इंदौर का और उज्जैन आता है सुबह को बहुत ही अर्ली मॉर्निंग। 3:00 बजे ना 2:00 बजे। तो अभी अनफॉर्चूनेटली ऐसा हुआ कि उज्जैन स्टेशन चला गया और मैं थोड़ा सा आगे चला गया। फिर मुझे सडनली पता चला अरे उज्जैन तो चला गया। तो मैंने क्या कहा क्या क्या किया कि वो जो बिल्कुल मुझे पता ही नहीं कौन सा स्टेशन है। मैं इमीडिएटली उतर गया। मैंने सोचा मैं रिटर्न ट्रेन में उज्जैन चला जाऊंगा। वो यात्रा पे मैं गया था तो उज्जैन जाना था। इंदौर जाना था। फिर इंदौर से ओमकारेश्वर जो अपनी छोटी सी कुटिया है वहां पे जाकर के मैं दो महीना रहने वाला था। तो ओमकारेश्वर में उज्जैन आता है बीच मैंने सोचा महाकाल का दर्शन करके जाऊंगा। अनफॉर्चूनेटली 2 2:30 बजे वो स्टेशन आना था। तो वो स्टेशन मिस हो गया और इसके पास में ही उसके उसके नेक्स्ट या सेकंड थर्ड कोई स्टेशन होगा। मुझे जैसे ही पता चला कि उज्जैन मिस हो गया। मैं इमीडिएटली उतर गया। वो ट्रेन चली गई। अभी मैं वहां पे खोज रहा हूं कि नेक्स्ट ट्रेन कब आएगी। किंतु तब मुझे पता चला कि मैं एक ऐसे स्टेशन पे उतरा हूं। वो जो स्टेशन जैसा कुछ है ही नहीं। वहां पर एक विस्तृत सुविशाल फार्म लैंड है। खेतर ही खेतर है। खेत ही खेत है और कुछ नहीं है। एक छोटा सा एक बेंच है। एक छोटी सी वो जो एक कुटिया जैसा एक है। वहां पर वो टिकट क्लार्क जैसा कोई बैठा हुआ है और एक एक भी आदमी नहीं है। कुछ नहीं है। वो जैसे कि बहुत ही छोटा सा गांव हो। जहां पे किसी तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर ना हो। जहां पे कुछ ना हो। सिर्फ एक दो कुत्ते थे। वो बेचारे सोए हुए थे। एक स्टेशन मास्टर था। वो अपनी छोटी सी केबिन में बैठा हुआ था। इतना सा 8 10 फुट का वो प्लेटफार्म होगा और फिर बस और कुछ नहीं। जहां तक नजर जाए आपकी वहां तक ये खेत ही खेत खेत ही खेत। तो पहले तो मैं बड़ा ये हो गया। मैं थोड़ा सा डर भी लगता है कि इस तरह की जगह पे हम अकेले खड़े हैं। कोई भी नहीं है तो क्या होगा हमारे साथ? फिर वो स्टेशन मास्टर भी उस समय नहीं था। तो मैंने सोचा थोड़ा सा वेट करते हैं देखते हैं ट्रेन आती है स्टेशन मास्टर आएगा कुछ तो होगा तो मैं वहां पर बेंच पर बैठा तो थोड़ी अभी तो वो तो सुबह का 3:00 बजे का समय था ना अंधेरा था बहुत ही अंधेरा था किंतु धीरे-धीरे ये जो है वो वो प्रभात हो रहा था सुबह हो रही थी तो देखा अभी हम लोग तो शहर में रहते हैं ना मकानों से घिरे हुए सूर्योदय तो हम तो देखते ही नहीं है देखा वो खेत ही सुविस्तुत खेत के एक कोने से धीरे-धीरे सूर्य भगवान वो जो है वो वो वो प्रकट हो रहे हैं। तो वो इतना सुहाना दृश्य देखकर के मुझे इतना अच्छा लगा। वो वो मैं क्या है था उस समय ये बहुत काम करके बहुत मतलब वो जो मेरा जो काम था उस समय थोड़ा हेक्टिक हो गया था। तो हेक्टिक काम से वो छुट्टी लेके मैं जा रहा था। तो बड़ा मेरा मन में थोड़ा सा ये अशांति भी था। थोड़ा ये भी था। वो मतलब क्या चंचलता भी थी और ट्रेन में फिर वो उज्जैन का मंदिर मिस हो गया। तो फिर मुझे थोड़ा मैं ये हो गया था थोड़ा निराश हो गया था किंतु जब वो सूर्य देवता को उगते हुए देखे सुविस्त्र वो जो खेतर में से खेत में से तो वो सीन मेरे मन को इतना शांति दिया मुझे लगता है कि यदि मैं उज्जैन में यदि उतर भी जाता यदि महाकालेश्वर के दर्शन हो भी जाते तो भी मेरे मन को इतना सुकून नहीं मिलता इतना सुकून मुझे वहां पे मिला होगा मिला था तो मैं बढ़िया सा मजे से बेंच पे बैठा हूं और वो जो सूर्य सूर्य भगवान धीरे-धीरे करके खेतर में से निकल रहे हैं। वो दर्शन कर रहा हूं। और इतना मैं मजे ले रहा हूं। इतना आनंद कहां मैं दिन भर यहां पे काम करता रहता था। वो उस समय वो जो रथ यात्रा वगैरह हमारे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे थे। तो मैं पूरा उसको लेकर के परेशान हो गया था। तो सब मुसीबत से दूर, सब झंझट से दूर एक इस तरह का गांव जो कि मुझे वो मैप में मिल भी नहीं रहा है। मेरा मोबाइल भी नहीं चल रहा, सिग्नल भी नहीं मिल रहा। कुछ नहीं। पता नहीं कैसे जंगल में कहां पे मैं खड़ा हूं। पता ही नहीं है कि मैं कहां पे हूं और यह सूर्य देवता निकल रहे हैं। बढ़िया मजे से बैठा हूं और मन में अपने आप जप शुरू हो गया। जैसे कि मतलब अजपा जप कहते हैं ना सहज रूप से जो जप होता है। सहज रूप से जो साधना होती है ऐसा शुरू हो गया। मुझे पता ही नहीं है कि मेरे मन में जप चालू हो गया है और मेरा मन शांत हो गया। इतना सुहाना सुंदर आध्यात्मिक वातावरण जैसे कि ठाकुर ने मेरे पे जो मैंने जितना भी काम किया उसका ये जो फल मुझे प्रदान किया मेरे सर पर हाथ रख के आशीर्वाद दिया। मेरे मन को शांत किया। बढ़िया मजे से मैं बैठा हूं और सडनली देखा कि कहां से किसी ने स्टीरियो चालू कर दिया और जोर-जोर से गाना बजा रहा है। ओ अरे भगवान मतलब मैं जैसे आसमान से गिर कर के पृथ्वी पे गिरा। कहां ये छोटा सा गांव भी होगा पता नहीं खेत में मुझे तो कोई घर भी नहीं दिखाई रहा था और कहां ये जोर-जोर से गाना बजा रहा है और सुबह की पूरी शांति नष्ट कर दी। वो मुझे लगा कि अरे चलो यहां से निकले एटलीस्ट शहर में ये तो कोई आपके नॉइस पोलशन के नियम तो है। शहर में थोड़े बहुत तो नियम है कि लोग इस तरह से पागल की तरह सुबह-सुबह ये गाना बजाना नहीं करते हैं। मतलब बड़ा परेशान हो गया था। तो देखिए ये जो आज का जो समय है यह जो टेक्नोलॉजी हमारे मन को इस तरह से ग्रस्त कर दिया है। हमारे मन को इस तरह से वो वो भ्रष्ट कर दिया है कि ये जो थोड़ी सी भी शांति जब मिलती है मन को तो वो उनको पसंद नहीं आता। वो डर जाते हैं शांति से और इमीडिएटली कुछ अशांति खड़ी करने की प्रयत्न करते हैं। तो ठाकुर की कृपा से मास्टर महाशय जब ठाकुर को मिलने को गए थे तो ये सब टेक्नोलॉजी ये जो राक्षसी जो ये सब ये जो ये गैजेट्स वगैरह है वो हमारा मन को डिस्ट्रैक्ट करने के लिए हमारे मन को ग्रसित करने के लिए वो वहां पे नहीं थे। तो इसलिए जब दक्षिणेश्वर में आप बैठे हैं तो शांति से दक्षिणेश्वर में ठाकुर के भजन ही सुनेंगे। वो वहां पर कोई डीजे या स्टीरियो चालू करके पूरे वातावरण को अशांत नहीं बना देगा। तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे।