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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 18 Oct 2023

This objection of the evolutionists does not hold water, as we shall see by applying our theory

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद इसमें से हम पाठ कर रहे हैं कॉस्मो मैक्रो कजम ज्ञान योग की सीरीज का यह लेक्चर है और हमको पता है कि स्वामी जी को किस समय काकड़ी घाट जा रहे थे अल्मोड़ा के रास्ते में उस समय जो उनको विजन हुआ था जो दर्शन हुआ था उस समय उन्होंने जो नोट्स लिखी थी उसके बेस पर ये दो लेक्चर उन्होंने बाद में डिलीवर किए थे वन इज कॉस्मो मैक्रो कजम अनदर इज कॉस्मो माइक्रो कजम अर्थात कि हमारे भीतर में जो जीवात्मा है जो कि माया से लिप्त है जो कामना वासना काम क्रोध मद लोभ मोह से जो निपट है वो जीवात्मा यदि उसको परिशुद्ध किया जाए यदि उसका संस्कार किया जाए तो वह शुद्ध परिशुद्ध अनंत अजर अमर पूरे विश्व में व्याप्त ब्रह्मण के साथ में इसका तादात है एक रूपता हो सकती है वह दिखाने के लिए यह दो व्यष्टि और समष्टि यदि हम वेदांत की भाषा में कहे तो यह दोनों यह कांसेप्ट और इसको महावाक्य के रूप में उपनिषद में जाना जाता है अहम ब्रह्मास्मि अर्थात कि मेरे भीतर में जो कॉन्शसनेस है दैट कॉन्शसनेस इज इक्वल टू द कॉस्मिक कॉन्शसनेस तो हमने कुछ बैकग्राउंड इसका देखा अभी आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं स्वामी जी ने कल जो कंसेप्ट डिस्कस किया था कि हम लोग इवोल्यूशन को स्वीकार करने को तैयार है यदि इवोल्यूशनिस्ट इवोल्यूशन को स्वीकार करने को राजी हो इवोल्यूशन क्या है सूक्ष्म में से स्थूल की उत्पत्ति और इवोल्यूशन क्या है स्थूल में से सूक्ष्म का प्रकटीकरण अर्थात कि वटवृक्ष है वो एक बीज को जन्म देता है वह इवोल्यूशन हुआ वट वृक्ष अपने को अपना पूरा स्ट्रक्चर है वो स्ट्रक्चर उसकी जो क्वालिटीज है उसकी जो प्रॉपर्टीज है यदि आजकी आज की मॉडर्न लैंग्वेज में कहा जाए तो उसकी जो प्रॉपर्टीज है व सब वो रिड्यूस करके उसको रिफाइन करके उसको फाइन करके उसके डीएनए में एक बीज रूप में उसको प्रोड्यूस करता है तो यह हो गया इवोल्यूशन और यह इवोल्यूशन इस बीज को यदि जमीन में रोपा जाए तो इस बीज में से वही जो जिसका ब्लूप्रिंट यदि हम दूसरा एक मॉडर्न वर्ड यूज करें तो वह जो वटवृक्ष था उसका ब्लूप्रिंट या तो फिर डीएनए जो कि इस बीज में था उस बीज में से वो डीएनए या तो ब्लूप्रिंट के आधार पर इक्वली नए वटवृक्ष का वो निर्माण होगा नए वटवृक्ष का विकास होगा तो यह प्रोसेस ऑफ इवोल्यूशन और प्रोसेस ऑफ इवोल्यूशन यह दोनों हमेशा चलता रहेगा स्वामी जी कहते हैं जद हम लोग इवोल्यूशन स्वीकार करने को तैयार है यदि आप लोग इवोल्यूशन को स्वीकार करें दूसरा प्रश्न स्वामी जी दूसरा पॉइंट हमारे सामने रखते हैं कि यदि साइंटिस्ट लोग यह स्वीकार करते कि इवोल्यूशन चलो मान ले के सही है तो इवोल्यूशन किसमें से हुआ यह बीज जो बना वो एक वटवृक्ष में से बीज बना बीज में से वटवृक्ष बना किंतु हमको तो पता है कि सृष्टि का प्रारंभ हुआ तो सृष्टि कहां से यह सृष्टि का बीज या तो हिरण्य गर्भ वो कहां से उत्पन्न हुआ था तो उसका उत्तर हमने देखा था कि ठाकुर ने कथामृत में एक बार कहा है कि एक बार ये आए थे केशव सेन ठाकुर को पूछते हैं कि आप काली तत्व समझाइए तो काली तत्व समझाते समझाते ठाकुर ने कहा था कि जैसे एक गृहिणी है उसके घर में एक छोटा सा एक कटोरा होता है उस कटोरे में वह सब चीजें रखती है छोटी-छोटी तो इसी तरह मां काली आद्याशक्ति जगदंबा भी जब एक प्रलय होने वाला है सृष्टि का तो सृष्टि के प्रलय के समय सृष्टि के जो बीज है उसकी जो डीएनए या तो फिर उसका ब्लूप्रिंट है वो कलेक्ट करके अपने पास में एक छोटे कटोरे में रखती है फिर इसी कटोरे में से नई सृष्टि की रचना करती है तो ठाकुर ने तो यह उत्तर हमको दिया था स्वामी जी ने भी यही कहा कि इवोल्यूशन होता है आउट ऑफ गॉड शब्द स्वामी जी ने गॉड यूज किया है ईश्वर तो ईश्वर में से इवोल्यूशन होता है ईश्वर में से ये हिरण्य गर्भ या तो ब्रह्मांड का ब्लूप्रिंट बना ब्रह्मांड का डीएनए बना और इसी डीएनए में से आगे जाकर के सृष्टि की रचना होती है तो अभी इसके सामने ये इवोल्यूशनिस्ट हमारे सामने एक प्रश्न खड़ा करते हैं देखिए किस तरह से इसको वाद विवाद वाद संवाद की दृष्टि से इसके रूप में स्वामी जी हमको समझाते हैं वो एक पॉइंट देते हैं हम एक पॉइंट से काटते हैं हम एक पॉइंट देते हैं तो वो हम उसके सामने काउंटर पॉइंट देते हैं तो जब स्वामी जी ने कहा कि ईश्वर में से सृष्टि की रचना हुई है तो इवोल इवोल्यूशनिस्ट हमको क्या कहते हैं यह बात तो सही नहीं हो सकती क्योंकि ईश्वर या तो भगवान या तो गॉड इज सेंसेंट इसके भीतर में मेधा शक्ति है चेतन शक्ति है चेतना है तो यदि जिसके भीतर में सेशंस है चेतना है वो एक जड़ जगत को कैसे प्रकट कर सकता है आप कहते हैं कि मनुष्य चेतन है ईश्वर चेतन है तो ईश्वर की चेतना में से मनुष्य की चेतना प्रकट हुई यहां तक हम मान लेते हैं किंतु बीच में तो करोड़ों करोड़ों साल गए कि जबकि यह जगत जड़ था तो चेतन में से जड़ की उत्पत्ति यह तो आप ही का तो आपका जो पॉइंट है कि जड़ में से चेतन नहीं उत्पन्न हो सकता तो सामने ये लोग भी तो कहेंगे कि जड़ चेतन में से जड़ कहां से प्रकट होगा देखिए स्वामी जी की बात स्वामी जी की बात से ही काटने का प्रयत्न हो रहा है स्वामी जी कहते हैं कि जड़ में से चेतन नहीं होगा तो ये लोग कहते हैं कि ब्रह्मांड की जैसे कि आज का मॉडर्न साइंस कहता है कि 1200 करोड़ साल पहले याना कि या तो फिर 1500 करोड़ साल पहले ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी उसके बाद में एक के बाद एक हेवियस बनते गए कॉस्मिक इवोल्यूशन जो थिरी है जो कि क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी को मिक्स करके जो बनाई गई है वो हमको बताती है कि लाइटर एलिमेंट में से हेवियस हुए गैस क्लाउड में से एक के बाद एक गैलेक्सिस बनती गई गैलेक्सी गैलेक्सी में से सोलर सिस्टम आई सोलर सिस्टम में से एक पृथ्वी का ग्रह उत्पन्न ना हुआ तो यह 1500 करोड़ साल की जो जर्नी है उसमें पृथ्वी का जन्म या तो पृथ्वी का क्रिएशन तो पिछले 450 करोड़ साल पहले ही हुआ था तो अभी और इसमें भी यदि हम होमो सेपियंस कहे होमो सेपियंस का उद्भव हुआ आज से सिर्फ 3 लाख साल पहले तो ईश्वर में से सृष्टि की रचना हुई ये सृष्टि की रचना में चेतन स्वरूप धरा हुए यह मनुष्य की रचना तो 1500 करोड़ साल में से 3 लाख साल पहले ही हुई है तो इतना लंबा समय सृष्टि जड़ कैसे हुई यदि वह चेतन शक्ति में से उत्पन्न हुई तो यह प्रश्न इवोल्यूशनिस्ट स्वामी जी को करते हैं उसका उत्तर स्वामी जी क्या देते हैं आखिर का एक सेंटेंस कल वाला में फिर से पढ़ लेता हूं इट इज इन मैन एंड द हायर एनिमल्स ट वी अच्छा द इवोल्यूशन ऑफ व्हाट पिछले कल का एक पैराग्राफ पढ़ लेता हूं इवोल्यूशन ऑफ व्ट किसमें से इवोल्यूशन हुआ व्हाट वाज इवोल क्या इवोल इवोल्यूशन किस चीज का था तो ईश्वर का गॉड द इवोल्यूशनिस्ट विल टेल यू दैट द आइडिया दैट इट वाज गॉड इज रंग इवोल्यूशनिस्ट कहेंगे कि यह जो आईडिया है कि ईश्वर में से सृष्टि आई यह गलत है व्हाई क्यों बिकॉज़ यू सी गॉड इज इंटेलिजेंट क्योंकि आपको पता है कि ईश्वर जो है वह इंटेलिजेंट है वह एसिंट है बट वी फाइंड दैट द इंटेलिजेंस डेवलप्स मच लेटर ऑन इन द कोर्स ऑफ इवोल्यूशन ईश्वर मस सृष्टि की रचना हुई किंतु फिर ये इंटेलिजेंस जो है यह मेधा शक्ति जो है चेतना शक्ति जो है वो तो कहां 1500 1550 करोड़ साल के बाद में डेवलप हुई है मनुष्य के भीतर में इट इज इन मैन एंड द हायर एनिमल्स दैट वी फाइंड इंटेलिजेंस बट मिलियंस ऑफ इयर्स हैव बीन पाड इन दिस वर्ल्ड बिफोर दिस इंटेलिजेंस केम मनुष्य के भीतर में और यह चिंपांजी जैसे कुछ वेल वेल का आई क्यू आपको जद पता होगा यह वेल है डोल्फिन है इनका बड़ा हाई आईक्यू रहता है साइंटिस्ट लोग जो एक्सपेरिमेंट करते हैं तो उनको पता चलता है तो यह लोग कहते हैं स्वामी जी कहते हैं हायर एनिमल यानी कि ये वेल या तो फिर डॉल्फिन या तो चिंपांजी या तो मनुष्य होमो सेपियंस हम लोगों के भीतर में इंटेलिजेंस आई है किंतु यह तो करोड़ों करोड़ों सालों के बाद में उत्पन्न हुई है अभी स्वामी जी आज क्या कहते हैं दिस ऑब्जेक्शन ऑफ द इवोल्यूशनिस्ट डज नॉट होल्ड वोटर स्वामी जी कहते हैं इवोल्यूशनिस्ट का यह जो ऑब्जेक्शन है यह जो उनका विरोधी मत है इट डज नॉट होल्ड वटर यह किसी काम का नहीं है मैंने होल्ड वोटर य एक डियम है इंग्लिश का इसका अर्थ है कि दिस डज नट दिस डज नॉट वर्क यह ऑब्जेक्शन स्टैंड नहीं होता यह ऑब्जेक्ट काम नहीं करेगा क्यों एज वी शल सी बाय अप्लाइज अपनी थिरी को अप्लाई करेंगे तब हमको पता चलेगा कि यह ऑब्जेक्शन उनका सही क्यों नहीं है गलत क्यों है द ट्री कम्स आउट ऑफ द सीड गोज बैक टू द सीड एक वृक्ष है वह बीज में से प्रकट होता है और बीज में समाहित हो जाता है द बिगिनिंग एंड द एंड आर द सेम बीच में से प्र गटा बीच में समाहित हुआ प्रारंभ और अंत दोनों एक समान है द अर्थ कम्स आउट ऑफ इट्स कॉज एंड रिटर्न्स टू इट पृथ्वी का जो ग्रह है वो जद कॉस्मोलॉजी या तो एस्ट्रोनॉमी की दृष्टि से कहा जाए तो कह अच्छा पहले तो स्वामी जी क्या कहते हैं द अर्थ केम आउट ऑफ पृथ्वी जो है वो एक कारण एक किसी एक पदार्थ में से प्रकट हुई और उसी एक पदार्थ में वापस चली जाएगी अभी कॉस्मोलॉजी क्या कहती है एक बहुत बड़ा गैस क्लाउड था हाइड्रोजन फिर यह गोल्ड आयरन प्लूटोनियम यूरेनियम यह सब हेवियस का बना हुआ एक बहुत ही बड़ा गैस क्लाउड था यह गोल-गोल घूमता गया चक्रा का गति से जैसे कि भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र घूमता है इस तरह से इसके केंद्र में सूरज की रचना हुई वह ग्रेविटी की वजह से गैस जो है या तो मैटर जो है वह कलेक्ट होती है तो केंद्र में सूर बना और उसके चारों ओर ग्रह बने जैसे कि पृथ्वी है मंगल है जुपिटर है सैटर्न है प्लूटो है यूरेनियम तो यह सब ग्रह उसकी चारों ओर बने तो स्वामी जी जब यह कहते हैं कि जिस पदार्थ में से पृथ्वी का जन्म हुआ है उसी पदार्थ में पृथ्वी विलीन हो जाएगी इसका कॉस्मोलॉजी की दृष्टि में यह अर्थ होगा कि एक समय आएगा पृथ्वी का विस्फोट होगा पृथ्वी पर विस्फोट होगा या तो फिर एक्चुअली ग्रह का इस तरह से विनाश नहीं होता विनाश होता है तारों का तारों का एक जीवन चक्र होता है उस जीवन चक्र के अनुसार यह ग्रेविटी और टेंपरेचर एक दूसरे के साथ में फाइट करते हैं एक समय ऐसा आएगा टेंपरेचर जीत जाएगा या तो ग्रेविटी जीत जाएगी तारा तारे में बहुत बड़ा एक्सप्लोजन होगा जिसको कि सुपरनोवा एक्सप्लोजन कहते हैं और इसके बाद में ये तारा का जो एक्सप्लोजन होगा इतना पावरफुल होगा कि उसके इर्दगिर्द रहे हुए जितने भी ग्रह होंगे उसमें भी विस्फोट हो जाएगा वो भी खत्म हो जाएंगे तो सूरज में विस्फोट होगा तो वो विस्फोट की असर से पृथ्वी पर भी विस्फोट होगा और यह पृथ्वी यह सूरज यह ग्रह चांद सब कुछ उसी गैस क्लाउड में फिर से मिल जाएंगे जिस गैस क्लाउड में से सोलर सिस्टम बना है स्वामी जी जो कहते हैं किंतु उस समय का साइंस इतना एडवांस नहीं था किंतु स्वामी जी की अंडरस्टैंडिंग इतनी एडवांस थी कि आज के साइंस के साथ में वह मैच हो जा रहा है और देखे गए कि स्वामी जी का जो इनसाइट जो है वह इतना पावरफुल है कि इवन आज के बाद में भी एस्ट्रोनॉमी या कॉस्मोलॉजी या क्वांटम डायनेमिक्स ना किय फिजिक्स ना किय साइंस ना बायोलॉजी ना जो कोई भी साइंस है जितने भी एडवांसमेंट होते रहेंगे जो भी थिरी डेवलप होती रहेगी स्वामी जी का जो लॉजिक है वह कभी गलत नहीं साबित होगा मैंने एक बार हम एक सीनियर साधु के साथ में हमारी बात हो रही थी तो किसी ने पूछा कि महाराज यह स्वामी जी का जो थिरी ऑफ इथर है तो इथर के बारे में स्वामी जी ने टेस्ला के निकोला टेस्ला उस समय का एक बड़ा ही फेमस साइंटिस्ट था तो उसके साथ में डिस्कस करके स्वामी जी ने इथर के बारे में कुछ बोला है इथर के बेस पर उन्होंने वेदांत के कांसेप्ट को समझाने का प्रयास किया है तो किसी ने पूछा कि महाराज इथर की थिरी जो है वो 19th सेंचुरी में तो तो बड़ी ही पॉपुलर थी किंतु आफ्टर द डेवलपमेंट ऑफ रिलेटिविटी एंड क्वांटम डायनेमिक्स ये जो आज का मॉडर्न साइंस जो है इसका फाउंडेशन यह दो थिरी के ऊपर में है 19th इन द ईयर 1900 1900 की साल में एगजैक्टली 1900 की साल में मैक्स प्लांक बोलक के एक साइंटिस्ट था उसने यह क्वांटम डेवल थिरी का डेवलपमेंट स्टार्ट किया और 1905 में यह स्पेशल थोरी ऑफ रिलेटिविटी का पेपर आइंस्टाइन ने पब्लिश किया तो यह दो थिरी 1900 की साल से लेकर के 1950 की साल तक 50 साल में इतनी पावरफुल उसने डेवलपमेंट किया है हमारा अंडरस्टैंडिंग ऑफ दिस कॉस्मो इस हद तक बढ़ा दिया है कि हम आज विश्व ब्रह्मांड को मनुष्य की जाति को हम यह जो पूरी प्रकृति के है उसको एक बिल्कुल ही नई दृष्टि से देखते हैं तो यह देखिए कि ये जो ये रेवोल्यूशन है हमारी अंडरस्ट डिंग में एवरी 100 इयर्स एक रेवोल्यूशन आता है और रेवोल्यूशन इतना पावरफुल होता है कि हमारी प्रीवियस अंडरस्टैंडिंग को पूरा तहस नहस कर देता है एक समय था कि क्रिश्चियन बाइबल पढ़ने वाले लोग बोलते थे कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र है किंतु यह कोपरनिकस गैलीलियो आइंस्टाइन न्यूटन आइंस्टाइन नहीं सॉरी न्यूटन इन सब लोगों ने मिलकर के जो डेवलप किया थिरी ऑफ ग्रेविटी को इससे पता चला कि ब्रह्मांड का केंद्र बोलकर के कोई चीज नहीं है ब्रह्मांड तो है वैसे ही एक विराट क्लॉक वर्क की तरह उस समय यह मैकेनिकल क्लॉक्स बहुत ही पॉपुलर था ये स्वीडिश स्वीडिश क्लॉक के बारे में आपने शायद सुना होगा किस तरह से इतने बारीक इंस्ट्रूमेंट स्प्रिंग है सर्कल है फिर गियर है इतना बारीक रूप से इतना पावरफुल इंजीनियरिंग करके वो क्लॉक बनाते हैं वो रिस्ट वच वगैरह कि वो कितने सालों तक चलती जाएगी उसमें कभी भी कोई उसमें कोई डिटेरिंग उसके फंक्शनिंग में तो यह क्लॉक मेकर जिस तरह से एक क्लॉक की रचना करते हैं एक घड़ी की रचना करते हैं कि गियर है स्प्रिंग है फिर ये उसकी जो हाथ है वो समय दिखाने वाले वो सब मिलकर के वोह चलते ही जाएंगे चलते ही जाएंगे तो वैसे ही यह क्लॉकवर्क यूनिवर्स है पृथ्वी जो है सूरज के आसपास घूमती है सूरज पता नहीं क्या करता होगा इससे बाहर की अंडरस्टैंडिंग हमारी थोड़ी कम थी तारे हैं वगैरह सब कुछ है तो सब एक जैसे घड़ी के भीतर में गियर और सब घूमता है वैसे ही ये ब्रह्मांड काम करता है किंतु जब तो दैट वाज अ ग्रेट रेवोल्यूशन उससे पहले जो हमारी अंडरस्टैंडिंग थी इसके बाद में क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी ने बिल्कुल हमारी समझ को बदल दिया ब्रह्मांड एक्सपें हो रहा है जब थिरी ऑफ रिलेटिविटी में यह पता चला आइंस्टाइन को कि यूनिवर्स का एक्सपेंशन हो रहा है तो बोला उसने सोचा कि नहीं मेरी थिरी में कुछ गड़बड़ होनी चाहिए वरना एक्सपेंशन कैसे होगा यूनिवर्स का यूनिवर्स तो एक क्लॉकवर्क यूनिवर्स है न्यूटन वगैरह ने जो प्रूव किया है मैंने तो उसकी थिरी में थोड़ा सा एक स्टेप ही तो आगे बढ़ा हूं ना किंतु बाद में पता चला रिलेटिविटी रिलेटिविटी वाज कंपलीटली न्यू एक्सप्लोरेशन ऑफ कंपलीटली न्यू फ्रंटियर तो दैट वाज वन ग्रेट रेवोल्यूशन अभी ये आज की 21 सेंचुरी है देखिए कि हमारी सेंचुरी में कितना बड़ा रेवोल्यूशन आ चुका है यह अभी 10 15 साल पहले तक हम लोग मानते थे कि यह रिलेटिविटी और क्वांटम डायनेमिक्स ने हमको सब कुछ समझा दिया है इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है हमने सब समझ लिया है किंतु सडन वन डे हमको पता चला कि यह जिसको हम विजिबल यूनिवर्स कहते हैं वह तो सिर्फ 4 टू 5 पर है 90 टू 95 पर इज इनविजिबल टू ह्यूमन आई एज वेल एज ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग माने सोच लीजिए कि यह हम लोग सोचते हैं कि दूर दूर दूर तक जो गैलेक्सी दिखती है जो तारे दिखते हैं यह जो क्वासार्स दिखते हैं यह जो सुपरनोवास दिखती है ब्लैक होल जो दिखते हैं वो हमने पूरे ब्रह्मांड को समझ लिया किंतु ब्रह्मांड का यह दिखाई देने वाला सिर्फ 5 पर हिस्सा है इसके बाद का 90 पर पार्ट जो है 90 टू 9 पर पार्ट इसको ये लोग डार्क एनर्जी और डार्क मैटर कहते हैं और यह क्या है किसी को पता नहीं स्पेक्युलेटिंग है अभी 1015 साल पहले लोग सोचते थे कि एस्ट्रोनॉमी का अंत आ गया एंड ऑफ साइंस थिरी ऑफ एवरीथिंग हमने खोज निकाला किंतु अब पता चला कि जो हमारी थिरी ऑफ एवरीथिंग है जो कि सब कुछ डिस्क्राइब करती है ब्रह्मांड में वह सिर्फ 5 पर ब्रह्मांड को डिस्क्राइब करती है 95 पर ऑफ द यूनिवर्स इज इनविजिबल हमारी आंखों से और हमारी थिरी के सामने अदृश्य है तो अभी जब ये नई नई थिरी डेवलप होगी तब भी आप देखिएगा कि स्वामी जी का लॉजिक जो है स्वामी जी की वेदांत को समझाने की एक इनसाइट जो है वो तो वैसे ही बनी रहेगी और इसीलिए जब हमने उस महाराज को पूछा था कि महाराज जी ये थिरी ऑफ इथर जो है वो तो अभी डिस्कार्ड हो चुकी है उसको तो कोई पूछता भी नहीं है तो स्वामी जी जब इथर की थिरी के ऊपर में आत्मन ये आकाश और प्राण स्वामी जी ने राजयोग में जो समझाया है आकाश और प्राण तो ये आकाश और प्राण का जो कांसेप्ट है वो उसको जो थिरी ऑफ इथर है वगैरह उसके ऊपर में जो बेहस किया है तो क्या वो इथर की थिरी गलत हो गई तो आकाश और प्राण यह राज्यों का जो बेसिक साइंस हमारी वेदांत की अंडरस्टैंडिंग क्या सब कुछ गलत हो गया तो फिर महाराज जी ने कहा कि देखो यह सब तो एनालॉजी है यह सब तो उपमा है ठाकुर जिस तरह से उपमा देते हैं ना कि किस तरह से हमारा मन ईश्वर में रहना चाहिए भले चाहे हम संसार का सब कुछ काम करें तो किस तरह से तो एक एक गांव में से एक औरत आई है शहर में काम करने के लिए अभी वह अपने जो जिनके मालिक के शेठ के घर रहती है उनका सब कुछ काम करती है और उनके शेठ के लड़के को कहती है मेरा रामू मेरा बेटा मेरा लड़का किंतु उसके मन में एकदम यह बात पक्की है कि यह जो जिसके घर काम करती है जो कि उसका एंप्लॉई है आज मालिक शब्द यूज नहीं नहीं होता उस समय मालिक यह सब शब्द यूज होते थे आजकल हम कहते हैं एंप्लॉई और एंप्लॉयर ये करेक्ट वोकेबल आज के समय के अनुसार तो उसके जो एंप्लॉयर जो है उसके घर जो रह रही है शी इज जस्ट एन एंप्लॉई वो तो वहां पर काम करती है तो अभी वो जद उसके जो एंप्लॉयर है वह कह देंगे कि ठीक है तुम चली जाओ अभी तुम्हारा यहां कोई काम नहीं है तो वो जो एंप्लॉयर का जो लड़का है उसको वहीं पर रख कर के उसको घर चले जाना हो होगा उसका सही लड़का तो उसके गांव में कहीं पे खेल रहा है तो ठाकुर कहते हैं कि जिस तरह से उस औरत का मन अपने गांव में अपने लड़के के पास है तो वैसे ही हमको जब दुनिया भर का कुछ भी काम कर लो अपना मन ईश्वर के ऊपर में केंद्रित रखना है तो अभी देखिए कि क्या होगा आज के मॉडर्न युग में जिस तरह से रोबोट्स डेवलप हो रहा है फिर जिस तरह से ये ह्यूमन राइट्स की बात हो रही है किसी के घर काम करना उसको मालिक कहना या तो फिर वो यदि डांटे तो चुपचाप सुन लेना आजकल यह सब चीजें बहुत ज्यादा नहीं चलती यदि न्यूज़पेपर में आ जाए कि आप आपके घर के में जो काम कर रहे हैं उसके साथ में अत्याचार कर रहे हैं उसको एब्यूज कर रहे हैं तो इमीडिएट ह्यूमन राइट्स वाले आक के आपको पकड़ लेंगे ये सब इंसिडेंट आजकल दिल्ली वगैरह जो नोएडा दिल्ली वहां पे बहुत चलते हैं कि ये वो घर की जो नौकरानी अभी नौकरानी शब्द भी आप नहीं क सकते वो तो बहुत ही गलत हो गया किसी व्यक्ति को इस तरह से तुच्छ रूप से से उसको यह करना उसको एड्रेस करना उसको संबोधन करना तो यह तो एक बात है कि हमारा यह जो एंपैथी है हमारे लॉज एंड हमारे कानून का वो भी बढ़ता जा रहा है हमारे हृदय में भी एक थोड़ा सा एक ज्यादा एक कि अरे चलो छोटी बच्चियों को हम लोग घर में काम करने के लिए बर्तन घिसने के लिए वो बुलाने की प्रथा है मैंने देखा है तो 12 साल की लड़की होगी वो वो आकर के वो बर्तन मांज रही है किंतु यह तो चाइल्ड एंप्लॉयमेंट लॉस का यह तो किंतु यह भंग हो गया अभी हम लोग अपने आश्रम में भी किसी को रखेंगे तो पहले सब कुछ पूछ लेंगे भाई तुम्हारी उम्र वगैरह क्या है वो बताओ तुम लीगली काम करने के लिए लायक हो कि नहीं यह सब एलिजिबिलिटी देख कर के यह सब काम दिया जाता है तो एक तो कानून लॉज यह सब चेंज हो रहे है दूसरा ये रोबोटिक रेवोल्यूशन आ रहा है आपको घर में किसी व्यक्ति को लाकर के काम करने एल्डरली केयर जिसको कहते हैं वृद्ध लोगों की सेवा तो अभी तो यह जापान में वृद्ध लोगों की संख्या इतनी बढ़ रही है कि अभी ये लोग रोबोट बना दिए हैं अभी रोबोट ही सब कुछ सेवा करेंगे आप बिस्तर में से ही आपको खाना भी ले आएंगे और आपका व घर का क्लीनिंग भी कर देंगे आप उसको जो कमांड देंगे वो सुन कर के वो सामने वो काम भी कर लेंगे सब कुछ रोबोट करेंगे तो अभी प्रश्न होगा कि यदि घर में नौकरानी रखने की ये प्रथा उसको नौकरानी शब्द भी ये नहीं यूज करना है इस स्त्री को रख कर के उसके पास काम करने की प्रथा यदि बंद हो जाए तो ठाकुर का यह पूरा संदेश ही यह जो मैसेज जो है ये उपदेश जो है कि जगत का सब काम करो अपने अपने जैसे कि मैं यहां पब्लिकेशन डिपार्टमेंट में काम करता हूं किंतु मन सब समय एक रहना चाहिए कि हां ठाकुर है ये मंदिर है मंदिर में ठाकुर बैठे हैं और उनके लिए मैं यहां पे आया हूं नहीं कि यह सब डिपार्टमेंट का काम करने के लिए हां यह सब करना है ठाकुर का ही काम है कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु दिस इज नॉट बी ऑल एंड एंड ऑल ऑफ माय लाइफ ये मेरे जीवन का सर्वस्व कुछ नहीं है मेरे जीवन का जीवन सर्वस्व तो ठाकुर है तो यदि यह उपमा गलत साबित हो गई कि घर में इस तरह से क स्त्री को रखना नहीं है रोबोट ही सब काम करेंगे तो क्या फिर यह अपने मन को ईश्वर में रख कर के बाकी सब काम करना य यह उपदेश भी क्या गलत हो गया नहीं वो तो उपमा थी इस चीज को समझाने के लिए वो आप घर में वोह नौकरानी रखने की प्रथा बंद भी हो जाए किंतु यह उपदेश गलत साबित नहीं होगा यह नई उपमा आ जाएगी उसके बाद में कि आप रोबोट को किसी भी तरह से प्रोग्राम करें उसमें यह बेसिक आइडिया हमेशा रख देना है कि डू नॉट हार्म अ ह्यूमन बीइंग जो भी काम करो रोबर्ट किसी व्यक्ति को हानि मत पहुंचाओ तो यह सब नई नई उपमा नए जमाने के अनुसार वेदांत को समझाने के लिए आ जाएगी तो इसीलिए जब कोई भी उपमा हमारे लिटरेचर में होती है जिसको समाइल कहते हैं या तो फिर उसको एग्जांपल कहते हैं तो यह सब चीजों को एग्जांपल के रूप में उदाहरण के रूप में में ही समझना है ये सब चीजों में बहुत जाकर के उसका वो मतलब हेयर स्प्लिटिंग आर्गुमेंट जिसको कहते हैं ना कि बहुत डिटेल में जाकर के अरे इसका तो यह चीज मैच नहीं हो रहा उसका वो चीज मैच नहीं हो रहा ठाकुर क्या कहते हैं उपमा है एक देशी अर्थात कि शेर की तरह दहाड़ता है उसका अर्थ क्या हुआ उसका जो क्रोध है वो वो जब क्रोध में आकर के वो चिल्लाता है तो शेर की तरह चिल्लाता है किंतु उसका यह अर्थ नहीं करना है कि शेर की तरह चार पैरों पर चलता है शेर की तरह उसकी पूंछ है शेर की तरह वह शिकार करता है वह सब गुण नहीं लेने है सिर्फ शेर की तरह दहाड़ का रोर रोरिग जिसको कहते हैं चिल्लाने का या क्रोध प्रकट करने का वही एक एक मात्र एटिबल या कैरेक्टरिस्टिक शेर का लेना है तो वैसे ही यहां पर स्वामी जी कहते हैं ये व वृक्ष वगैरह का उदाहरण भले ही देते हो हमको यह बात खास ख्याल में रखना है कि इवेंचर के माध्यम से हमको हमारी आत्मन और ईश्वर ब्रह्मण जीव जगत इसी के बारे में सोचना है जितने भी उपमा है हैं जितने भी एग्जांपल है इवेंचर ले जाएंगे तो स्वामी जी कहते हैं कि इन लोगों का यह जो आर्गुमेंट है कि ईश्वर तो चेतन है ईश्वर तो इंटेलिजेंट है सेंसेंट है तो उस उसमें से करोड़ों करोड़ों सालों तक जड़ सृष्टि बनी जड़ सृष्टि का डेवलपमेंट हुआ आखिर में कुछ 3 लाख साल पहले यह चेतन शक्ति न रखने वाले मनुष्य आए तो ये तो तुम्हारा थिरी गलत हो गया चेतन में से जड़ कैसे आएगा जैसे हम लोग हिंदू लोग कहते हैं कि जड़ में से चेतन नहीं उत्पन्न हो सकता है असत में से सत नहीं प्रकट हो सकता है तो इसी थिरी को फ्लिप कर दिया चेतन में से जड़ कैसे प्रकट होगा सत में से असत कैसे प्रकट होगा तो स्वामी जी कहते हैं कि हम जब अपनी थरी अप्लाई करेंगे तो यह बात गलत साबित हो जाएगी किस तरह से अप्लाई करते हैं बीज में से वृक्ष हुआ है वृक्ष में से बीज हुआ है अर्थात कि शुरुआत की स्थिति और अंत की स्थिति दोनों एक समांतर है द ट्री कम्स आउट ऑफ द सीड गोज बैक टू द सीड वृक्ष में से बीज में से वृक्ष प्रकट होता है वृक्ष बीज में समाहित हो जाता है द बिगिनिंग एंड द एंड आर द सेम शुरुआत और अंत समान है द अर्थ कम्स आउट ऑफ इट्स कोज एंड रिटर्न्स टू इट पृथ्वी जिस घटक परिमाण में से प्रकट हुई है उसी में वह वापस मिल जाएगी वी नो दैट इफ वी कैन फाइंड द बिगिनिंग वी कैन फाइंड द एंड हमको पता है कि यदि हम शुरुआत को खोज निकालेंगे तो हम अंत को भी पा लेंगे कितना बड़ा स्टेटमेंट है इ कन्वर्सो ये लेटिन या तो फ्रेंच वर्ड है इसका अर्थ है इन रिवर्स इफ वी फाइंड द एंड वी कैन फाइंड द बिगिनिंग यदि हम अंत खोज लेते हैं तो हम उसकी शुरुआत को भी प्राप्त कर लेंगे बहुत बड़ा स्टेटमेंट इसको थोड़ा सा डिटेल में देखना होगा इफ ट इज सो टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज यदि यह बात सही है तो यह पूरा इवोल्यूशन का जो चक्र है इसको आप एक संपूर्ण रूप से देखिए इफ दैट इज सो टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक मैन एट दी अदर यह पूरा इवोल्यूशन का जो यात्रा है प्रवाह है उसको देखें एक अंत में है प्रोटोप्लास्मिक लैंग्वेज में कहेंगे सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म एक सेल एक कोशी जीवन उसमें से धीरे-धीरे इवोल्यूशन होकर के यह फिश या तो फिर वाटर बोन एनिमल्स उसमें से रेप्टाइल रेप्टाइल में से मेमल मेमल में से ये प्राइमेट प्राइमेट में से होमोसेपियंस होमोसेपियंस में से आखिर में जीसस या कृष्णा या तो राम या तो फिर आखिर में भगवान राम कृष्णा यह जो पूरा जर्नी है फ्रॉम सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म टू भगवान श्री राम कृष्ण परफेक्ट मैन यह जो पूरा जर्नी है फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक यह जो सबसे पहला जो जीव था वहां से लेकर के परफेक्ट मैन संपूर्ण पुरुषोत्तम पुरुषोत्तम होने की जो जर्नी है दूसरे अंत तक एंड दिस होल सीरीज इज वन लाइफ यह जो पूरी सीरीज है दैट इज वन सिंगल लाइफ देखिए कितना बड़ा स्टेटमेंट ये सब चीजों को हमको बड़ा ही डिटेल में बड़ा ही अच्छे से डिस्कस करना होगा इन द एंड वी फाइंड द परफेक्ट मैन सो इन द बिगिनिंग इट मस्ट हैव बीन द सेम यदि हम इस सीरीज के एंड में संपूर्ण मनुष्य को देखते हैं तो इसका अर्थ है कि सीरीज के प्रारंभ में भी एक संपूर्ण पुरुषोत्तम मनुष्य उपस्थित होगा जिसमें से कि यह प्रोटोप्लास्मिक में प्राइमेट होमोसेपियंस भगवान श्री राम कृष्ण प्रकट हुए परफेक्ट मैन इन द बिगिनिंग परफेक्ट मैन एट द एंड स्वामी जी कहते हैं कि किस तरह से ये दोनों मैच करवाते हैं कि जैसे बीज में से वृक्ष हुआ वृक्ष में से बीज हुआ तो जो अंत है वही बिगिनिंग है तो अंत यदि परफेक्ट मैन है तो द बिगिनिंग आल्सो मस्ट बी द परफेक्ट मैन अंत में यदि भगवान राम कृष्ण है तो शुरुआत में भी भगवान राम कृष्ण ही होंगे अंत में यदि भगवान राम है तो शुरू में भी भगवान राम ही होंगे इस भगवान राम में से ही सृष्टि हुई उसी सृष्टि डेवलप होते होते आखिर में भगवान राम में परिणत हुई तो बिगिनिंग और एंड यह दोनों समान है यह चक्र ये पूरा संपूर्ण वहीं पे आकर के समाप्त होता है किंतु इसके साथ में जो बाकी सब कांसेप्ट है कि द होल लाइफ इज वन यह कल हम अच्छे से डिटेल में देखेंगे तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु