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Spiritual Capitalism 29 Feb 2024

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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी जी का लेटर हम पाठ कर रहे थे कल दो सब्जेक्ट हमने देखे के किस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि यदि हमको आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ना है अने अपना जो यह ट्विन आइडियल है आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च उसमें सक्सेस प्राप्त करनी है हालांकि सक्सेस शब्द जद आध्यात्मिकता के साथ में यूज करते हैं तो थोड़ा सा कंट्रक्शन हो जाता है जिसको सक्सेस नहीं होना है वह त्याग के रास्ते पर चलता है किंतु फिर भी देखिए कि एक सात्विक एंबिशन भी होता है ठाकुर ने कहा था कि मैं चाहता था कि मैं भक्तों का राजा हो स्वामी जी ने कहा था कहा था वो न्यू डिस्कवरी जो है ना मेरी लुईस के द्वारा रचित ग्रंथ उसके स्टार्टिंग में यह कोटेशन दिया है स्वामी जी का जो मुझे बड़ा अच्छा लगता है कि बुद्धा हैड ए मैसेज फॉर द ईस्ट एंड आई हैव अ मैसेज फॉर द वेस्ट अर्थात कि भगवान बुद्ध ने भगवान बुद्ध के पास में पूर्वी देशों को देने के लिए फॉर द ईस्ट अर्थात कि पूर्व के लिए एक था आई हैव ए मैसेज फॉर द वेस्ट अर्थात कि ये पाश्चात्य देश है यह आधुनिक देश है उनको देने के लिए मेरे पास में एक मैसेज है तो ऐसा नहीं है कि हमको अपनी जो एंबिशन है उसको संपूर्ण परणे त्याग करके यहां पर आना है यदि एंबिशन नहीं रहेगी तो हम जड़ स्वरूप हो जाएंगे पत्थर स्वरूप हो जाएंगे यह जो डिसिप्लिन भी फॉलो करना है सुबह को उठकर के दिन प्र जैसे कि मैं बेलूर मठ में जवाइन किया था तो हम लोगों का जहां पर वहा तो डोरमेट्री होती है ना एक डोरमेट्री में पांच बेड थे पांच ब्रह्मचारी के लिए जगह थी एक बेड एक डेस्क और एक चेयर और एक टेबल लैम और एक शेल्फ जिसमें आप अपनी किताब रख सके बस इतना एक ब्रह्मचारी को दिया जाता था एक डोरमेट में पांच ब्रह्मचारी रह सकते हैं तो एक नया ब्रह्मचारी आया एक दिन तो वह मुझे बोलता है कि मेरा तो इच्छा है कि मैं दिन भर गंगा के किनारे बैठ कर के जब ध्यान कर करता रहूं तो मैंने क्या किया वहीं पर बेड के पास में ही हमारा डेली रूटीन डेली शेड्यूल टांगा था वह मैंने उठा कर के उसके हाथ में दे दिया और कुछ मैंने कहा नहीं वो जो शेड्यूल देखा वो आश्चर्य चकित हो गया सुबह को 3:30 को उठना है 4:00 बजे मंगल आरती में जाना है इसके बाद में चैटिंग करना है उसके बाद में योगासन उसके बाद में सा 6:30 को ब्रेकफास्ट उसके बाद में वेजिटेबल कटिंग उसके बाद में गार्डनिंग उसके बाद में में स्नान कपड़े धोना रूम क्लीनिंग वगैरह करना उसके बाद में पांच पांच क्लास और दोपहर को भी ऐसा नहीं कि रेस्ट मिलता है वो खाने के बाद में दोपहर को भोजन के बाद में बैठ कर के कथामृत पढ़ना है माने वोह कथामृत पढ़ कर के थोड़ा सा लेटे वहीं तो ढाई बजे का क्लास स्टार्ट हो गया और उसके बाद में वॉलीबॉल फिर प्रेयर फिर मेडिटेशन फिर रात को दूसरा क्लास आहार के बाद में मिशन ऑफिस में जनरल सेक्रेटरी महाराज के साथ में और एक क्लास होता था रात को हम लोग हमारा ट्रेनिंग सेंटर था वहां पर आते थे 10:30 को तो 10:30 को इतने थके होते थे और सुबह तो उठना है 3:30 को तो जैसे ही लेटे वैसे ही नींद आ गई ऐसा मैंने ये जो नींद की समस्या जो आजकल लोगों के है कि अनिद्रा माने नींद नहीं आती स्लीपलेसनेस लोग यह सब नींद की गोली खाते हैं व बेलून मट जाकर के जवाइन कर देंगे हमारे वो नए आए हुए ब्रह्मचारी के ट्रेनिंग सेंटर में और नींद की सवन है और नींद नहीं आना चला जाएगा दिन भर वोह बैठे-बैठे और ऐसा भी नहीं कि वह फिर दिन में नींद आता है वहां भी एक इस तरह से एक सात्विक एटमॉस्फियर खड़ा हो गया था कि ऐसा यदि अपने घर में बैठे हैं रात को नींद नहीं आया और काम करते करते कैसा वो मन वहां पर एकाग्र नहीं होता है सर झुक जाता है ऐसा मैंने सुस्ती बिल्कुल नहीं लगता था एकदम फ्रेशनेस लगती थी क्योंकि क्या है वहां के वाइब्रेशन ही इस तरह के हैं तो क्या यह सब फॉलो करने के लिए आपके भीतर में कुछ तो एंबिशन एक होनी चाहिए अदर वाइज यह फॉलो नहीं कर पाएंगे किंतु यह सब है सात्विक एंबिशन एक सात्विक टारगेट अपने जीवन में रखना है तो स्वामी जी का कहना है कि यदि जीवन में इस आध्यात्मिक जीवन में अगेन यूजिंग ट कंट्रा इक्टर टर्म सक्सेस होना है तो आत्म श्रद्धा और परोपकार करने की यह हमारे भीतर में कंपेज यह दोनों होना चाहिए तभी हम सक्सेस होंगे इसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं तई भगवान आमी भगवान मानुष भगवान दुनियाते सब को है कल के जो हमने पढ़ा कि मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा तुम कुछ नहीं कर पाओगे यह सब कौन सी मेरे भीतर में भी भगवान है तुम्हारे भीतर में भी भगवान है और यही भगवान दुनिया में सब काम कर रहे हैं इससे डरने की क्या बात है ही तो बुद्धिर दौड़ जद कल्याण चास ओ सबब हिंसा झगड़ा छेड़े दिए काजे लेगे जा जारा ता कोते पार बेना ता देर बदाई करे दे देखिए यहां पर एक बिल्कुल नया टॉपिक स्टार्ट किया है स्वामी जी ने क्या कहते हैं यदि कल्याण चाहते हो अर्थात की जीवन में मंगल चाहते हो तो यह सब हिंसा और झगड़ा हिंसा अर्थात की ईर्षा ईर्षा और झगड़ा छोड़ कर के काम में लग जाओ जारा ता कोते पार बेना जो लोग यह नहीं कर पाएंगे उनको विदाय कर दो देखिए एक और तो स्वामी जी ने बताया कि परोपकार के लिए कार्य करना है और दूसरी बार हमको बताया कि आत्म श्रद्धा होनी चाहिए अभी हमको एक डेंजर बता दे रहे हैं कि एक ऑर्गेनाइज होकर के जब हम काम करेंगे अच्छा पहले तो सबके ऊपर में वाणी का प्रहार करके करके सबको डांट डांट करके इकट्ठा तो किया अभी इकट्ठा होने के बाद में इट इज नॉट लाइक इट इज अ स्मूथ सेलिंग माने इकट्ठा हो गए बस हो गया स्वर्ग प्राप्ति हो गई ईश्वर के दर्शन हो गए जगत का कल्याण भी हो गया ऐसा नहीं है एक्चुअली ये इकट्ठा होने के बाद में तो सही चैलेंज स्टार्ट होती है जब तक आप अकेले-अकेले भ्रमण करते थे आपकी जो चैलेंज थी वोह व्यष्टि चैलेंज थी व्यक्तिगत चैलेंज थी यहां पर यदि हम व्यष्टि साधना को छोड़कर के समष्टि साधना की बात करते हैं तो सामने यह व्यष्टि चैलेंज अर्थात कि इंडिविजुअलिस्टिक हमारे सामने क्राइसिस जो खड़ी होती है उससे भी एक स्टेप ऊपर जाकर के यह कलेक्टिव क्राइसिस हमारे सामने आती है और यह कलेक्टिव क्राइसिस क्या है जैसे हमने कल वो बात-बात में बात की थी कि जद हम इस तरह से परोपकार के बारे में सोच तो रहे हैं अभी पैसा किसी वो दान पेटी में डाल देना या तो किसी भिक्षु को दे देना यह है ना चीप कंपेन है यह उसमें कोई आता जाता नहीं है हां आपको आधा संपत्ति दान कर देते हैं तो अलग बात हो गई किंतु जनरली वो जो र पा रप हम डालते हैं तो इट वो तो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है किंतु मान लीजिए कि हम किसी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में रह रहे हैं वो बाहर के जगत का कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर हो ना कि ये मॉनेस्टिक कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर हो इट अ कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर इन दैट सेंस कि यहां पे एक ऑर्गेनाइज्ड वे ऑफ लाइफ है रूल्स एंड रेगुलेशंस अकाउंटिंग सिस्टम्स प्रमोशंस एंड डिमोशन प्रेज एंड पनिशमेंट यह सब यहां पे भी है बाहर में भी है इसको कहेंगे कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर तो कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में रहेंगे उसके बाद में कंपेरिजन दिखाना मान लीजिए कि किसी का प्रमोशन हो रहा है और फिर मैं यदि यह सोचूं कि नहीं मुझे प्रमोशन नहीं चाहिए भले उसी का हो जाए मुझे कोई दिक्कत नहीं है तो उस समय यह अपने मन को मना लेना कितना कठिन है और यदि मुझे प्रमोशन मिलता है और मेरे हृदय में अ एकाक कंपेज आ जाए कि अरे नहीं मुझे यह पोजीशन नहीं चाहिए मैं इस मेरे से तो यह जो मेरा कलीग है ही इज मोर क्वालिफाइड या तो फिर ही इज मोर नीडी टू सीट इन दैट स्पेस देन उस तरह का मने विचार आना कितना कठिन है एक्चुअली इस बात का सोल्यूशन यही है कि यदि हमको मौका मिलता है देन अपना यह क्या है कि यह धर्म है हम किस जगह पर रहते हैं उस सभी जगह का एक धर्म है यदि क्षत्रिय है तो उसका धर्म है शत्रु की हत्या करना और ब्राह्मण है तो उसका धर्म है कि विद्या अभ्यास सिखाना बच्चों को अभी ब्राह्मण यदि शत्र उठा ले तो वो उसके लिए अधर्म होगा और यदि क्षत्रिय यह सोचे कि अहिंसा परमो धर्म तो वह उसके लिए अधर्म हो जाएगा तो हम जिस जगह पर है वह हमारा धर्म है उस धर्म का पालन करके हमको जो पोजीशन मिलती है कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में हमको यदि प्रमोशन मिलता है तो प्रमोशन को ईश्वर की देन समझ करके स्वीकार करके यूज ट पोजीशन फॉर द बेटरमेंट ऑफ पीपल और रदर टू हुम वी आर सर्विंग इफ यी आर सर्विंग इन अ कॉर्पोरेशन एंड इट इज द ऑब्जेक्टिव ऑफ द कॉर्पोरेशन टू प्रॉफिट मैक्सिमाइजिंग देन डू दैट दे एक्चुअली आज के जमाने में क्या होता है हमको लगता है कि प्रॉफिट मैक्सिमाइज होता है तो कुछ लोगों के पॉकेट में जाता है जाता है नो डाउट किंतु साथ में शेयर मार्केट में बहुत सारे स्मॉल इन्वेस्टर भी होते हैं उनको भी तो इन ए वे फायदा होता है यह कैपिट इज्म पर बहुत आघात हुए हैं यह कम्युनिज्म फासिज्म ये सोशलिज्म सॉफ्ट कैपिटल सॉफ्ट कम्युनिज्म बहुत सारे एक्सपेरिमेंट हो चुके हैं किंतु कैपिट इज्म सभी फाइट के सामने अभी भी टिका हुआ है और इवन आज चाइना भी कहने से तो कम्युनिस्ट कंट्री है किंतु स्ट्रक्चर आधा कैपिट जैसा है तो ये कैपिट ज्म जीतता क्यों है बार-बार यह सोशलिज्म कहता है कि हम लोग लोगों सेय धनवान लोगों से संपत्ति छीन करके गरीबों में बांट देंगे यह उनका एक मेथोडोलोग्य अमंग द स्मॉलर इन्वेस्टर्स तो यह जो एक नेगेटिव और एक पॉजिटिव वह जो एक अपनी कहानी है ना एक फेमस साइंटिस्ट मैं उसका नाम भल जा रहा हूं जगदीश चंद्र बसो ना कि जो भी है वो एक उसके वो जब स्टूडेंट है तो बोर्ड के ऊपर में टीचर ने एक रेखा दोरी एक चौक से एक लाइन आ आका और कहा कि ये जो रेखा मैंने जो दोरी है यह जो लाइन मैंने बनाई है इसको छोटा कैसे किया जाए तो बाकी जितने भी स्टूडेंट उन्होंने क्या किया कि वह खड़े होकर के वह बोर्ड के ऊपर में जो लाइन है तो डस्टर से लाइन को काट दिया मुछ दिया इरेस कर दिया तो लाइन छोटी हो गई अभी एक स्टूडेंट था उसने क्या किया कि चौक लिया और उससे एक लंबी लाइन आग दी उसी लाइन के नीचे में तो मैंने लंबी लाइन के सामने तो वो लाइन ऑटोमेटिक छोटी हो गई आपको तो इरेज करने की जरूरत नहीं रही तो दिस इज द पॉजिटिव वे ऑफ प्रोग्रेस यह जो कैपिटल जम इसीलिए अभी भी टिका हुआ है कोई यह नहीं कहेगा कि अपने स्वभाव को मार दो आपकी एंबिशन को दबा दो या तो फिर आपका जो धर्म है उसका वध कर दो या तो फिर आपकी जो टैलेंट है उस टैलेंट को व्यर्थ जाने दो ऐसा नहीं कहेगा ऐसा कहेगा कि आपकी जो टैलेंट है आपकी जो एंबिशन है मैक्सिमाइज इट एंड देन गिव अदर द बेनिफिट ऑफ व्हाट एवर यू अर्न तो यहां पर भी यदि हम एक बार कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में आते हैं तो हमारे सामने यह सब डेंजर्स खड़े होते हैं कि एक अनब्रिडल्ड एंबिशन फिर एक अन ब्रिड एक जेलस एंड फिर यह द्वेष और फिर एक भीतर से सबोटाज करने की एक प्रवृत्ति जागृत होना यह सब कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में आता है एक तो है कि एंबिशन व्हिच इज अ पॉजिटिव एंबिशन एक तो है कि नेगेटिव एंबिशन यह जो एक माने सोशलिज्म और कम्युनिज्म की तरह है कि मैं यदि मुझे सामने वाले को छोटा करना है तो मैं उसको उसके पैर काट दूंगा ऑटोमेटिक वो मेरे से छोटा हो जाएगा जैसे वो लाइन थी तो लाइन को छोटी कैसे करना है डस्टर से उसको आधा इरेज कर दो लाइन छोटी हो जाएगी एंड अनदर इज द पॉजिटिव एंबिशन पॉजिटिव टैलेंट कि हां मैं अपने को बड़ा बनाऊं मैं जैसे अपने को बड़ा बनाऊंगा सामने वाला वैसे ही छोटा हो जाएगा एक चीज और दूसरा कि जब मैं अपने को बड़ा बनाता हूं हूं तो ऐसा नहीं है कि यह जो बेनिफिट सिर्फ मैं अकेला ले जाऊंगा आई विल शेयर इट अमंग एवरीवन यानी यह स्पिरिचुअल कैपिट इज्म यना रियल स्पिरिचुअलिटी बहुत सारे लोग सोचते हैं कि यह जो स्पिरिचुअल रिलीजियस कम्युनिटी होती है यदि उसको आप प्रॉपर्ली मैनेज करना चाहते हैं देन यू विल हैव टू गो फॉर कम्युनिस्ट मॉडल ये खास करके यह अमेरिका में ऐसी छोटी-छोटी कम्युनिटीज क्वेकर्स वगैरह बहुत सारी है वहां पे क्या कहेंगे कि लेट अस हैव कलेक्टिव अ पोजीशन ऑफ एसेट्स यानी कि कोई इंडिविजुअल के पास में फैक्ट्री नहीं होगी कोई इंडिविजुअल का कोई घर नहीं होगा वह जो विलेज एल्डर जो होगा वही सबको घर अलॉट करेगा वही सबको वर्क अलॉट करेगा वही सबको प्रॉफिट अलॉट करेगा एक्चुअली यहां पे होता क्या है कि एक इंडिविजुअल के पास में बहुत सारा पावर आ जाता है और जैसे कहते हैं ना कि पावर करप्ट्स एंड एब्सलूट पावर करप्ट्स एब्सलूट यानी कि आप एक क्लोज कम्युनिस्ट लेवल की कम्युनिटी बनाई वहां पे एक डिक्टेटरशिप बिठा दिया है और सभी व बाकी सबको डिस एंपावर कर दिया है अभी डिक्टेटरशिप जदी जब तक ठीक है तब तक सब कुछ ठीक काम करता है जैसे ही वहां पर करप्शन प्रकट हुआ वैसे ही आपकी पूरी कम्युनिटी बर्बाद हो गई तो यह सब और उसके सामने यह कैपिट इज्म का देखिए कि इंक्रीज योर टैलेंट इंक्रीज योर इवन इंक्रीज योर एंबिशन बट इन अ पॉजिटिव डायरेक्शन डू इट इन ए वे दैट योर प्रोग्रेस व्हाट एवर यू अर्न इन टर्म्स ऑफ टैलेंट इन टर्म्स ऑफ नॉलेज इन टर्म्स ऑफ लर्निंग इन टर्म्स ऑफ विजडम देन अर्न इट एंड शेयर इट अमंग योर कलीग्स योर फेलो ह्यूमन बीइंग्स तो आई थिंक ये पॉजिटिव कैपिट इज्म इट विल बी अ बेटर रोल मॉडल फॉर स्पिरिचुअल रिलीजियस कम्युनिटीज रदर देन दिस कजम माने यह कम्युनिज्म को लेकर के आजकल के ये जो हावर्ड यह आइ विलिक जो सब यूनिवर्सिटीज होती है बड़ी-बड़ी वहां पर लोग ऐसा सोचते हैं कि कम्युनिज्म इज अ बेटर अल्टरनेट देन कैपिट इजम माने ये भी कंट्रक्शन है वो हावर्ड जैसी आईविल यूनिवर्सिटीज में करोड़ों करोड़ों रुपए का ट्यूशन देकर के कौन जाते हैं तो यह जो लोग ने बहुत पैसा कमाया है जो लोग कैपिटल जम में सक्सेस हुए हैं उनके लड़के आईवी लीग यूनिवर्सिटी में पढ़ने को जाते हैं और बिकॉज के एकदम सक्सेस के ऊपर में बैठे हैं तो तो उनको पैसों की या तो फिर हार्ड वर्क की स्ट्रगल की कोई महत्ता नहीं समझ में आती वे लोग कहते हैं कि जितने भी पैसे वाले हैं उन्होंने झूठ मूठ बोल करके चोरी लूट फाट करके पैसा इकट्ठा किया है तो उनका उसके को कोई अधिकार नहीं छीन लो इसको और गरीबों में बांट दो इस तरह की वहां पर सब बातें होती है एक्चुअली बिना परिश्रम के कुछ होता नहीं तो ये अभी यहां पर स्वामी जी जो कहते हैं कि हिंसा और झगड़ा र्षा और झगड़ा छोड़ कर के काम में लग जाओ और जो ईर्षा या तो फिर भीतर में द्वेष या तो भीतर में क्रोध या तो फिर दूसरों के ऊपर में शत्रु भाव यह सब पोषण करते हैं उनको विदाई कर दो कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर बनाया है ऑर्गेनाइजेशन बनाया है कलेक्टिव वर्किंग स्टार्ट किया है तब वह कलेक्टिव चैलेंज सामने आएगी जब तक ये वो दंड लेकर के और सर के ऊपर में वो जो ये मैंने पगड़ी पहन के वह घर-घर घूमते थे जंगल-जंगल घूमते थे नदी नदी घूमते थे भिक्षा मांगते थे जहां सोने को मिलता था सो जाते थे जहां पर खाने को मिलता था खा लेते थे यह सब उस समय जो हमको चैलेंज नजर के सामने आती थी हमको लगता है कि नहीं चलो ऑर्गेनाइजेशन बना कर के बेलूरमठ में बैठेंगे देन वी विल लिव हैप्पीी एवर आफ्टर हमको खाने की चिंता नहीं कपड़ों की चिंता नहीं मेडिसिन की चिंता नहीं एक स्टेडी वर्क है और स्टेडी ड्यूटी होने से क्या होता है एक हमारा लाइफ रूटीन में आ जाता है वरना तो आज आप भ्रमण कर रहे हैं आज को आपको सुबह को 10 बजे खाना मिला तो हो सकता है दूसरे दिन रात को 10 बजे खाना मिले आपका रूटीन आपका शेड्यूल आपकी नियमित तपस्या जप वो सब कहां हवा में उड़ जाएगा यदि भ्रमण में है तो आप किंतु बैठे हैं एक आश्रम में सब कुछ आपका ठीक-ठाक है आपका एक कम्युनिटी है आपकी केयर करने के लिए बीमार होने से आपको ट्रीटमेंट करने के लिए सब व्यवस्था है तो आपको लगता है कि कम्युनिटी लाइफ इज इन अ वे मच बेटर देन दिस परिव्राजक लाइफ किंतु कम्युनिटी लाइफ के उसके उस उतने माने इतनी भयानक चैलेंज उसके सामने आती है जब हम एक बार धीरे-धीरे करके डीपर प्रवेश करेंगे तब इसलिए स्वामी जी सी एंटीसिपेट्स एवरीथिंग माने भविष्य देख लेते हैं कि साथ में मिलकर के रहने से क्या हो सकता है ईर्षा और द्वेष यह दो दोनों आएगा ही आएगा इट इज अ ह्यूमन नेचर तो इसको हमको ट्रांसडूसिन है कि आत्म श्रद्धा चाहिए और परोपकार करने की वृत्ति चाहिए साथ में ही यह हिंसा और द्वेष इससे ऊपर उठने की एक विल पावर चाहिए वो विल पावर नहीं रहेगा तो हम यहां पर रह के ऑर्गेनाइज्ड स्ट्रक्चर में रह कर के हम तो डूबेंगे साथ में हमारे साथ में जो रह रहे हैं उनको भी ले डूबेंगे तो यह एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पॉइंट स्वामी जी का कि कल्याण चाहते हो तो हिंसा अर्थात की द्वेष ईर्षा और झगड़ा छोड़ कर के काम में लग जाओ और जो वह ना कर पाए उसको विदाई कर दो अभी इसके बाद में स्वामी जी एक बहुत लंबा टॉपिक लेते हैं इस टॉपिक को पढ़ने से पहले मैंने दो बार सोचा दो बार नहीं कई बार सोचा कि इस तरह से यह जो टॉपिक है इसके ऊपर में बात करनी उचित है कि नहीं है उसका रीजन यह है कि आजकल तो लोगों की सेंसिटिविटी बहुत बढ़ गई है तो कुछ भी बोलने से लोग आज नाराज हो जाते हैं तो वह एक कंसीडरेशन था मेरा किंतु फिर भी इसके ऊपर में इसको पढ़ कर के इसके ऊपर में थोड़ी सी तो चर्चा करना मैंने तय इसलिए किया कि अल्टीमेटली क्या है कि कोई भी सिविलाइजेशन को सरवाइव करना है तो उसको सेल्फ एनालिसिस सेल्फ डिसेक्शन करने की एबिलिटी कैपेसिटी होनी चाहिए यदि आप अपने को एनालाइज नहीं कर सकते हैं आप अपने हृदय के भीतर में क्या चल रहा है आपकी खुद की वीकनेस आपके खुद के हमारे खुद के मैं मेरी ही जद बात करूं मुझे यह जद ना समझ में आए कि मेरा किसी के ऊपर में द्वेष है तो उसकी उसका रीजन उसका कारण मैं खुद हूं क्योंकि उसके ऊपर उसके मेरे में मेरे से ज्यादा टैलेंट है उसमें या तो फिर उसका प्रोग्रेस बहुत रेपिडली हो रहा है या तो फिर लोग उसको ज्यादा रिस्पेक्ट देते हैं मेरे से या तो फिर वह जहां पर भी जाता है तो बहुत लोग उसकी बात सुनने के लिए आ जाते हैं और मुझे कोई नहीं बुलाता या तो मेरी बात कोई नहीं सुनता तो इसके लिए मेरी उसके ऊपर में ईर्षा है और मैं पीछे पीछे उसकी निंदा करता रहता हूं और मैं सोचता हूं कि अरे इस तरह के साधु को या इस तरह के व्यक्ति को ठाकुर क्यों आश्रम में लाए तो मैंने जद मैं जद यह नहीं समझता कि अरे उसकी निंदा करने के पूछे मेरी खुद की विटनेस है तो क्या होगा कि मैं एक कंपलीटली डिफरेंट एक कंप्लीट रंग पिक्चर अपने ऑर्गेनाइजेशन के बारे में खड़ा करूंगा अपने मन में एक मेंटल इमेज तो ये एबिलिटी टू डिसेक्ट एंड एनालाइज इट इज वेरी नेसेसरी फॉर ए सिविलाइजेशन टू सरवाइव ये पहले मैं इसको थोड़ा सा पढ़ते हैं फिर इसके बारे में और डिटेल डिस्कशन करेंगे बहुत कुछ इस पैसेज के ऊपर में सोचने को है स्वामी जी ने भारत के ऊपर में जिस तरह से बात की है भारत का हिंदू धर्म भारत देश इसके प्रति स्वामी जी का जो प्रेम था वह अद्भुत था माने राष्ट्र प्रेम के प्रतीक ही थे स्वामी विवेकानंद यह फर्स्ट जनरेशन ऑफ फ्रीडम फाइटर्स सभी लोग स्वामी जी से प्रेरित हुए थे इंक्लूडिंग महात्मा गांधी इंक्लूडिंग सुभाष चंद्र बोस इंक्लूडिंग सरदार पटेल जितने भी आप जिनके प्रति आज हमारी रिस्पेक्ट है सभी लोग अरो बंदो थे भगत सिंह थे सभी के सभी के मन में स्वामी जी के ऊपर में रिस्पेक्ट थी तो रिस्पेक्ट थी क्योंकि स्वामी जी वाज अ ट्रू नेशनलिस्ट ट्रू पेट्रियट तो एक ट्रू पेट्रियट सही सही देशभक्त जब अपने देश के दुर्गुणों का एक एनालिसिस करता है तो उसको बड़ा ध्यान से समझना चाहिए और सोचना चाहिए कि यह दुर्गुण है तो इसके हम किस तरह से काउंटर करें तो देखिए स्वामी जी क्या लिखते हैं विमला शशी सेंलर लिखित एक पुस्तक पाठ छन एवं लिखे छन जे शशि बाबु संसार अष अत्यंत खराब अभी विमला बोलकर के स्वामी जी का एक परिचित व्यक्ति था उसने क्या किया शशि सैंडल हमने सैंडल य एक अपभ्रंश है व अटक यानी सरनेम होगा सान्याल तो एक सान्याल शशि सान्याल सरनेम वाले किसी ने एक किताब लिखी है और इस किताब को उसने स्वामी जी के पास में भेजा है और क्या कहा है कि शशि बाबू जिसने यह किताब लिखी उसकी सांसारिक अवस्था बड़ी खराब है ताई जन्नो तार पुस्तक जदी ए देश कहो के हो सहायता करे तो इसकी सांसारिक अवस्था बड़ी खराब है इस लेखक की तो इस लेखक के द्वारा लिखी हुई पुस्तक यदि अमेरिका में सेल करके अमेरिका वासियों को मना करके इस पुस्तक के लेखक को यदि थोड़ी सी हेल्प कर दे फाइनेंशियल मोनेटरी हेल्प तो बहुत अच्छा रहेगा अभी स्वामी जी इसके ऊपर में अपनी कमेंट देते हैं पहले तो यह पूर्व भूमिका बांध दी कि विमला बोलकर के स्वामी जी का परिचित व्यक्ति उसने यह शशि बाबू की किताब उनके पास भेजी और एक किताब बंगोली में लिखी हुई है और इस किताब के सहारे कोई आहा कोई धन की अपेक्षा वह नाणा कीय सहाय की अपेक्षा रखते हैं यह पूर्व भूमिका स्वामी जी ने बना दी अभी देखिए स्वामी जी इसके ऊ परर में क्या कमेंट देते हैं स्वामी जी कहते हैं दादा श पुंथी होलो बांगला भाषा दादा अर्थात की बड़े भाई भाई वह किताब है बांगला भाषा में ए देश लोग की शहा जो करे मैंने बंगोली में किताब लिखी है अभी इस देश के लोग क्या हेल्प करेंगे सहाय करेंगे पुंथी पड़े बिमला अवगत होए दुनियाते जोतो लोक तारा ले अपवित्र इस किताब को पढ़कर के विमला जिसने यह किताब स्वामी जी को भेजी है वह अवगत हुआ है अर्थात कि उसने जान लिया है कि दुनिया में जितने भी लोग है सब अपवित्र है एवम तादिल धर्म होबार जोटी नाई और इन लोगों की अपवित्र प्रकृति है इस प्रकृति की वजह से वोह लोग धर्म के रास्ते पर कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते केवल भारत बोर शेर एक मुष्ठापा सिर्फ भारत में मुटि में एक मुट्ठी भर जितने ब्राह्मण है सिर्फ उनका ही धर्म हो सकता है आबार तादम शशि आर बिमला चरण रा होन चंद्र सूरज स्वरू और जो भारत में जो मुष्टीफंड एक मुट्ठी भर ब्राह्मण है जो लोग धर्म सही सही कर सकते हैं उनमें भी यह चंद्र और सूर्य स्वरूप है यह शशि और विमला शाबाश की धर्मर जोर रे बाप स्वामी जी कहते हैं शाबास क्या धर्म का जोर लगा दिया है विशेष बांग्लादेश धर्मो बोड़ सज मने बांग्लादेश अर्थात की बंगल में यह धर्म बड़ा ही सहज है अमन शोजा रास्ता तो आर नहीं इस तरह का सहज रास्ता तो दूसरा नहीं है जब तोप आर सार सिद्धांत ही ज आमी पवित्रो आर सब अपवित्र जप और तप करके एक जो सार निकाला है उसका जो एक एसेंस निकाला है वह क्या है कि मैं पवित्र हूं और बाकी सब अपवित्र है पैशा चिक धर्म राक्षसी धर्म नारकीय हैं यह किस तरह का धर्म है तो यह है पैशा चिक धर्म यह है राक्षसी धर्म और यह है नरक में ले जाने वाला नारकीय धर्म माने इस अभी देखिए पहले तो कुछ कुछ डिस्क्लेमर यहां पर स्वामी जी ने ब्राह्मण शब्द प्रयोग किया है और दूसरा शब्द प्रयोग किया है बंगोल का तो पहले तो यह समझ लेना है कि स्वामी जी किसी जाति विशेष या तो कोई राज्य विशेष को टारगेट करके नहीं कह रहे हैं स्वामी जी ने जब यह कहा कि एक इस तरह की किताब एक ब्राह्मण ने लिखी है कि वह किताब पढ़कर हमको लगता है कि मैं और यह जो मेरी नाथ और यह मेरे जो रिलेटिव्स हम लोग सही सही पवित्र है बाकी पूरी दुनिया अपवित्र है और मेरा धर्म सही है बाकी सबका गलत है यदि धर्म के रास्ते पर कुछ प्राप्त होना है तो मैं मुझे ही होगा और किसी को कुछ नहीं होगा यह जो सेल्फ सर्विंग एक इंग्लिश शब्द है सेल्फ सर्विंग अर्थात कि मैं अपनी ही जैसे गुजराती में एक कहावत है वो वर जो होता है उसकी प्रशंसा कौन करेगी तो वर की मां ही करेगी तो ऐसा अपनी खुद की प्रशंसा क्मक किताब एक लिखी गई है तो इसको टारगेट करके जो स्वामी जी कहते हैं किसी जाति विशेष या किसी राज्य विशेष को नहीं इन जनरल कहते हैं कि जिन लोगों की यह टेंडेंसी है कि मैं पवित्र हूं और बाकी सब अपवित्र है एक धर्म के रास्ते पर चलके एक ऐसा भाव आ जाता है जैसे हमने अभी डिस्कस किया ना कि दूसरों की जब टैलेंट देखते हैं तो ईर्षा द्वेष इस तो अपने हृदय में आने ही वाला है एक तो ईर्षा और द्वेष भी हो गया और एक एक क्या है कि एक गुमान गुरूर अहंकार भी होता है कि हां मेरी जाति उच्च जा आती है या तो मेरे पिताजी के पास में बहुत सारे पैसे हैं या तो मैं जिस फैमिली से आता हूं फैमिली बड़ा ही प्रतिष्ठित फैमिली है या तो फिर मैंने जो कुछ विद्या अभ्यास थोड़ा बहुत भी कर लिया है तो उससे मुझे ब बड़ा एक अ ये तो यह सब जाति नाथ फिर यह प्रतिष्ठा यह धन यह विद्या यह सबका एक गुरुर आ जाता है एक घमंड आ जाता है तो एक और है हिंसा और द्वेष और दूसरा है यह घमंड यह हिंसा द्वेष और घमंड इकट्ठा होकर एक ऐसा मन में प्रकट होता है कि जो कोई अभी इस विश्व में धर्म करता है तो वह मैं ही हूं और मेरे अलावा और कोई नहीं है तो स्वामी जी इसके ऊपर में आघात करके जो शब्द कहते हैं व शब्द की जरूर क्यों है क्योंकि यह सब यह जो भाव है यह जो नेगेटिव पेजस और इमोशंस है यह तो हमको तमस में डाल देंगे सत्व की ओर जाने की तो बार बात दूर रह गई और घोर तमस में हम डूबते जाएंगे भारत वैसे ही तमस में था और इस तरह का घमंड करो और ज्यादा द्वेष करो और ज्यादा अहंकार करो और ज्यादा क्रोध करो और गड्ढे में गिरो तो स्वामी जी इस गड्ढे में हम और ज्यादा ना जाए इसके लिए वाणी का प्रहार करके तमो नाश करने के लिए स्ट्रांग लैंग्वेज का यूज करते हैं इस यह धर्म किस तरह का है तो पैशा चिक धर्म रा धर्म और नार की धर्म फिर आगे क्या लिखते हैं जद अमेरिका लोकर धर्म होते पारे ना जदी अमेरिका के लोगों का धर्म ना हो सके जदी य देश धर्म प्रचार करा ठीक न जदी इस देश में धर्म प्रचार करना ठीक नहीं है तबे ताहा देर सहज ग्रहण आवश्यक की तो फिर इन लोगों की सहाय प्राप्त करने की हमको आवश्यकता क्या है जद अमेरिका वालों का धर्म नहीं होगा अमेरिका वाले जड़ बुद्धि के हैं अमेरिका वाले राक्षसी है तो फिर अमेरिका में यह किताब भेज करके अमेरिका वासियों से पैसा इकट्ठा करना कि भाई मैं गरीब ब्राह्मण हूं मुझे पैसा दे दो तो क्या जरूरत है भाई इस तरह से राक्षसी लोगों का पैसा ग्रहण करने की मत लो उनसे पैसा जो भी भगवान ने तुमको दिया है तुम्हारा तो धर्म ठीक-ठीक हुआ है जो भगवान ने दिया है उसी से संतुष्ट रहो यह हमने बेलूर मठ बनाया बेलूरमठ का ज्यादातर पैसा आपको पता है कि विदेश से आया है जमीन खरीदने का भी और यह मंदिर बनाने का भी वो इनिशियल समय में तो अभी आज मैं खड़ा होकर कहने लगूं कि अमेरिकन लोगों को यह स्वामी जी समझ में नहीं आएंगे उनको वेदांत समझ में नहीं आएगा उनको सिंपल सिंपल चीजें समझाओ तो फिर तो फिर स्वामी जी वहां पर गए वहां से पैसा लेकर आए उस पैसों का मठ बनाया उस मठ में मैं रह कर के उसका मैं लाभ ले रहा हूं तो फिर क्या जरूरत है भाई जद मैंने ये तो एक पूरा एक क्या कहेंगे हिपोक्रिटस भी लेनी है और उसको गाली भी देनी है क्या जरूरत है इस तरह से जो गरीब थे भगवान ने गरीब रखा था गरीबा में रहो उन लोगों से पैसा भी लेते हो उनको गाली भी देते हो यह किस तरह का तुम्हारा धर्म है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि मैं पवित्र बाकी सब अपवित्र उसमें भी ये मलेच्छ माने कि ये मलेच्छ वो कहते थे ना किय भारत के बाहर में जो रहते उस मलेच्छ है तो मलेच्छ लोगों का तो धर्म किसी काल में हो ही नहीं सकता यदि ऐसा मानते हो तो ले लोगों से पैसा क्यों कलेक्ट करते हो ए दिके उजा चित मृति धूम आबार पुंथी मय आक्षेप आमाई केव किछु दे ना यहां पर एक आपका मैं अपनी प्रशंसा करने की एक बड़ी धूम मचा के रखी है और दूसरी ओर आक्षेप करके रखते हैं कि कोई मुझे कोई मुझे रिकग्निशन नहीं देता कोई मुझे प्रणामी नहीं देता कोई मुझे प्रतिष्ठा नहीं देता अपनी खुद की प्रतिष्ठा प्रशंसा भी करनी है दूसरों को गाली भी देनी है और फिर दूसरों को यह भी कहना है कि मैं गाली भी दूंगा और तुम मुझे प्रतिष्ठा भी दो धन भी दो और नहीं देते तो फिर कंप्लेन करना कि देखो मैं उनको गाली देता हूं फिर भी वह मुझे धन नहीं देते यह किस तरह का हाइपोक्रेटिन ज जखन भारत शुद्ध लोक शशि आर बिमला पदो प्रांत धनराशि ढेले दे ना तखन भारत सर्वनाश उपस्थित विमला ने यह किया है यह मान लिया है कि भारत में जितने भी लोग है सभी लोग धनराशि विमला और शशि बाबू के पैरों में ढाल नहीं देते तो फिर भारत का सर्वनाश आकर के उपस्थित हो चुका है कारण शशि बाबू सुखो व्याख्या बगतो आन एवं विमला तत् पाठे निश्चित अवगत होए छन ज तीनी छड़ा ए पृथ्वी ते आर के होई पवित्र नाई क्यों कारण क्या है तो शशि बाबू ने सूक्ष्म तत्व पढ़ कर के समझा है और यह सूक्ष्म तत्व पर किताब लिखी है और यह किताब पढ़कर के विमला है वह भी समझ गया है कि हमारे जैसा पवित्र इस जगत में और कोई नहीं है इस पृथ्वी पर और कोई नहीं है ही रोग अच्छा यह थोड़ा सा स्वामी जी का कटाक्ष का भाव कि किस तरह से स्वामी जी इन लोगों का स करते हैं अभी आगे क्या कहते हैं ए रोगर औषध की यह जो रोग लगा है कि मैं बड़ा मैं बड़ा बाकी सब तुच्छ तो इस रोग का औषध क्या है बोली शशि बाबू के माला बारे जैते बोलो कहता हूं शशि बाबू को यह साउथ इंडिया साउथ मला बार बोलकर के जो विस्तार था वहां पर जाने को कहो शे खान का राजा समस्त प्रज जमी छनि निए ब्राह्मण गणर चरणा पण कोरे छ वहां का जो राजा है उसने क्या किया है समस्त प्रजा की जमीन छीन करके ब्राह्मण लोगों को दे दी है ग्रामे ग्रामे बड़ो बड़ो मठ चर्बे बड़े मठ है और खाने का छपन भोग की धूम मचा के रखिए है चब चर्बी आर चुश यानी विभिन्न तरह का जो खाना होता है ना उसके बारे में उसकी धूम मचा के रखिए आबार नगद नगद अर्थात की फिर केश में भी वो बने उनको प्रणामी मिलती है भोगेर समय ब्राह्मण तर जाते स्पर्श दोष नहीं माने भोग करने के समय जो ब्राह्मण नहीं है ऐसे लोगों को स्पर्श करने से दोष नहीं है भोग शांगो होले स्नान भोग समाप्त होने से ही उनको स्पर्श किया था तो स्पर्श के पाप से या तो स्पर्श की अपवित्र से रक्षा पाने के लिए स्नान कर लो केनो ना ब्राह्मण तर जाति अपवित्र क्यों यह ब्राह्मण तर जाति अपवित्र है अन्न सुमय ता देर स्पर्श कराओ नहीं अन्य समय भोग के अलावा और कोई समय उनको स्पर्श भी नहीं करना है एक श्रेणी साधु सन्नासी आर ब्राह्मण बदमाश देष उन्न दिए छ मने एक खास प्रकार के कुछ लोग है जो कि धर्म का दिखावा करता है धर्म का स्वांग पहनते हैं उन्होंने इस देश का सर्वनाश मचा के रखा है देही देही चूरी बदमाशी एरा आबार धर्मर प्रचारक माने धर्म के नाम पर चोरी और बदमाशी और फिर धर्म के प्रचारक है ऐसा स्वांग दिखा कर के ऐ सब भग पहन के घूमते हैं पैसा नेबे सर्वनाश करबे आबार बोले छु ना छु ना पैसा लेंगे सर्वनाश करेंगे और फिर कहेंगे हमको छूना मत हमको छुना मत इस पैसेज के ऊपर में यह पैसेज और भी काफी लंबा चलता है इसके ऊपर में और भी ज्यादा हम थोड़ा सा विश्लेषण व हम कल करते हैं आज तक ओम शांति शांति शांति हरि ओ श्री राम i