Swami Vivekananda
नोइंग इज ओनली रिलेटिव वी कैन बी गॉड बट वी नोवर नो हिम नॉलेज इज अ लोअर स्टेट एडम्स फॉल वाज़ व्हेन ही केम टू नो बिफोर दैट ही वाज़ गॉड ही वाज़ ट्रुथ ही वाज़ प्योरिटी वी आर आवर ओन फसेस बट कैन सी ओनली अ रिफ्लेक्शन नेवर द रियल थिंग अच्छा सो हियर देयर इज़ अ डिफरेंशिएशन मेड बिटवीन नोइंग एंड बीइंग इफ़ इफ आई नो समथिंग फॉर एग्जांपल आई नो दैट दिस इज़ अ पेंसिल बट देन पेंसिल इज़ समथिंग आउटसाइड ऑफ़ मी पेंसिल इज़ समथिंग डिफरेंट देन मी बट इफ आई से दैट आई नो शशि बट दैट विल बी रोंग बिकॉज़ दिस शशि इज़ नॉट अ सम पर्सन हु इज़ अनदर देन मी दिस इज़ माइसेल्फ। सो आई हैव टू बी माइसेल्फ रेदर देन टू नो माइसेल्फ। दिस इज द क्रिटिकल डिफरेंस बिटवीन ऑल द फिलॉसोफीस इन द वर्ल्ड एंड अद्वैता। यू कैन टेक एनी मोस्ट एडवांस फिलॉसोफी दैट ट्राइ टू अंडरस्टैंड रिलीजियस रियलिटी। अल्टीमेट रिलीजियस रियलिटी। नाउ वी कैन सी दैट अदर देन हिंदूइज़्म और अदर देन वेदांता दैट इज़ ज्ञानमार्ग। देयर आर सेवरल फिलॉसोफीज़ व्हिच कम वेरी नियर टू अद्वैत वेदांता। फॉर एग्जांपल दिस बुद्धिज्म और जैनिज्म क्रिश्चियनिटी एंड इस्लाम आर अनएपोलजिटिकली द्वैतिस्ट फिलॉसोफीस वैष्णवा बेसिकली इज अ द्वैतिष्ट फिलॉसोफी बट दे से दैट देयर आर हायर रियम्स वंस यू कम टू नो कृष्णा देयर इज़ पॉसिबिलिटी दैट यू कैन बिकम कृष्णा सो देयर इज़ ऑलवेज अ हायर स्टेट इन वैष्णविज़्म और वी मे से द्वैतिस्ट फिलॉसोफीस बट व्हाट हैपेंस इन अदर बुद्धिस्ट फिलॉसोफी और वी मे से दिस जैनिस्ट जैनी जैनिज्म व्हाट हैप्स दैट दे कैन से दैट द रियलिटी दैट यू सी आउटसाइड इट इज़ नॉट रियल ओके बट व्हाट इज़ रियल दे डू नॉट से दैट द रियलिटी लाइज़ विथ इन यू दे से दैट द वे दिस आउटसाइड वर्ल्ड इज़ नॉट रियल यू योरसेल्फ आर नॉट रियल नाउ व्हाट मिस्टेक दे मेड दे थिंक दैट दिस माय बॉडी मेड ऑफ़ पंचमहाभूत पंचतन जन्म मात्रास पंच ज्ञानेंद्रिय पंचकर्मेंद्रिय मन बुद्धि चित्त अहंकार ऑल दिस थिंग्स व्हिच ट्रेडिशनली आर कंसीडर्ड टू बी माय बॉडी दे सेड दिस माय बॉडी इज़ आल्सो मेड ऑफ़ दिस पंचमहाभूत एंड दे इट इज़ मेड ऑफ़ दिस कॉम्बिनेशन एंड वन डे दिस कॉम्बिनेशन विल डिसॉल्व एंड बॉडी विल आल्सो गो अवेयर एंड द सेम थिंग आउटसाइड वर्ल्ड दिस आउटसाइड वर्ल्ड इज़ आल्सो मेड ऑफ़ दिस कॉम्बिनेशन ऑफ़ पंचमहाभूत, पंचतन मात्रा, एट्सेट्रा। एंड इट विल आल्सो डिसोल्व। सो नाइदर दिस आउटसाइड वर्ल्ड इज रियल नर योर बॉडी इज रियल। अल्टीमेट रियलिटी इज निर्वाण। दैट इज समथिंग दैट गोज़ बियड योर बॉडी। एंड हियर इज़ अ क्रिटिकल डिफरेंस बिटवीन बुद्धिस्टिक निर्वाणा एंड अद्वैतिक वेदांता। अद्वैत वेदांता सेस दैट ओके वी एक्सेप्ट और रेदर अद्वैत वेदांता इट्स हैज़ कम टू दिस कंक्लूजन ऑन इट्स ओन दैट यस दिस आउटसाइड वर्ल्ड मेड ऑफ़ पंचमहाभूत पंच तन मात्रा इज आल्सो नॉट रियल इट आल्सो विल इट विल आल्सो डिसोल्व वन डे दिस बॉडी मेड ऑफ़ पंचमहाभूत पंच तन्म मात्रा मन बुद्धि चित्त अहंकार दिस पंच कर्मेंद्रिय ज्ञानेंद्रिय दिस आल्सो विल डिसोल्व वन डे इट आल्सो विल डिसअपीयर वन सो व्हाट विल रिमेन नॉट सम एजोटेरिक रियलिटी कॉल्ड निर्वाणा बट द रियलिटी व्हिच एक्चुअली रिसाइड्स विद इन दी इनर शेल दिस आउटर शेल दिस बॉडी मेड्स एन आउटर शेल एंड विद इन दिस आउटर शेल रिसाइड्स दैट अल्टीमेट रियलिटी। सो इन ऑर्डर टू सर्च फॉर दिस अल्टीमेट रियलिटी आई डू नॉट नीड टू अटेन सम एजोटेरिक स्टेटस स्टे स्टेट लाइक निर्वाणा बट इफ आई कैन गेट रिड ऑफ़ माय सेंक्सुअल प्लेज़र्स दिस सेंसुअल प्लेज़र इज़ अ फेटर इन आवर लेग्स इट इज़ अ इट इज़ द जंजीर इट इज़ दिस शेकल इन आवर फिट इट बाइंड्स अस इट ड्रैग्स अस डाउन टुवर्ड्स दिस वर्ल्ड मेड ऑफ ऑल दिस पंचमहाभूत एटसेट्रा सो इफ आई गेट रीड ऑफ़ माय सेंसुअल डिज़ायर्स, माय नीड फॉर दिस मटेरियल प्लेज़र, दिस काम, कांचन, अह ऑल ऑफ़ दिस इफ आई कैन गेट रीड ऑफ़ दैट देन दिस रियलिटी, दिस अल्टीमेट रियलिटी व्हिच इज़ हिडन इनसाइड माय ओन हार्ट, इट विल शाइन फोर्थ। सो, दिस इज़ वी मे से दैट देयर आर सेवरल स्टेजेस ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग दिस अद्वैतिक रियलिटी। फर्स्ट इज वेरी क्रूड द्वैतिक फॉर्म ऑफ रिलीजन दैट आई एम द डिवोटी एंड आई एम द साधका एंड देयर इज अ गॉड लिविंग समवेयर इन स्वर्ग इन हेवन एटसेट्रा एंड इफ आई प्रे टू हिम इफ आई प्रे टू दिस गॉड हु लिव्स इन हेवन और इन स्वर्ग द गॉड विल लिसन टू माय प्रेयर एंड फुलफिल माय डिजायर्स नाउ एनी काइंड ऑफ़ डिजायर इफ आई प्रे फॉर हिम ही विल फुलफिल इफ आई वांट दिस मटेरियल प्रोस्पेरिटी इफ आई वांट वेल्थ नेम एंड फेम दैट आल्सो विल बी प्रोवाइडेड बाय गॉड प्रोवाइडेड इफ आई डू दैट पर्टिकुलर टाइप ऑफ विधिस क्रियाज़ ओम यज्ञ एटसेट्रा एटसेटरा दैट इज़ व्हाट आवर क्षत्रियस दैट इज़ व्हाई क्षत्रियस रेबेल्ड अगेंस्ट ब्राह्मण दिस इज़ दी लॉन्ग ट्रेडिशन लॉन्ग हिस्ट्री लॉन्ग पास्ट हिस्ट्री वी डू नॉट वी व्हेन वी रीड इंडियास हिस्ट्री वी रीड दिस यस दिस मुगल केम एंड दिस इस्लामिक इन्वेशन केम एंड देन दिस दिस ईस्ट इंडिया कंपनी केम एंड ऑल दिस अटैक्स एंड इन्वेजंस एंड वॉर्स एटसेट्रा दिस इज़ द काइंड ऑफ़ हिस्ट्री दैट वी रीड इन स्कूल बट इंडियास हिस्ट्री बेसिकली इज़ अ हिस्ट्री इन द चर्नी ऑफ फिलॉसोफिकल रिलीजियस स्पिरिचुअल थॉट। इंडियास हिस्ट्री इज़ द हिस्ट्री ऑफ़ आवर साधकास। हाउ फॉर थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ इयर्स वन साधक आफ्टर अनदर वन सेंट आफ्टर अनदर वन अवतार आफ्टर अनदर केम एंड दे एनरीच आवर फिलॉसोफिकल रिलीजियस थॉट एंड देन अल्टीमेटली दे गव अस वेल सिंथेसाइज्ड वेल फॉर्म्ड वेल अंडरस्टुड वेल एनालाइज्ड वेदांतिक फिलॉसोफी एंड व्हेन वी रीड दिस वेदांत फिलॉसोफी व्हेन वी अंडरस्टैंड हाउ दिस वेदांत फिलॉसफी वाज़ इवॉल्व डेवलप हु वेर दिस ग्रेट महापुरुष सेंट्स प्रोफेट्स पंडित स्कॉलर्स अवतार साधु सेंट्स सन्यासी हु वेर दिस पीपल हु डेवलप दिस वेदांत फिलॉसोफी इन ऑल इट्स पेराफेरनलिया ऑल इट्स ग्रेट वाइड डायवर्सिटी देन ओनली वी कैन अंडरस्टैंड द रियल हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया एंड हिंदूज़्म एंड दैट इज़ व्हाई आई से दैट द पर्सन हु हैज़ स्टडीड अबाउट इंडिया इन स्कूल्स एंड कॉलेजेस इज़ नाउ डेज़। आई डू नॉट नो अबाउट नवा डेज़। आई थिंक आफ्टर कमिंग ऑफ़ बीजेपी न्यू गवर्नमेंट देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ चेंज इन सिलेबस। सो आई डू नॉट नो व्हाट इज़ हैप्पेनिंग नाउ डेज। बट एटलीस्ट आय कैन श्योरली से दैट इन माई टाइम व्हेन आई वास स्टडिंग द हिस्ट्री दैट वी हैव लर्न इज़ कंप्लीटली यूज़लेस हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया। ऑफ़ कोर्स, देयर इज़ अ हिस्ट्री ऑफ़ फ्रीडम मूवमेंट व्हिच इज़ वैरी गुड। नथिंग रोंग अबाउट इट। बट एनीथिंग दैट केम बिफोर फ्रीडम मूवमेंट जस्ट जस्ट अ स्टूपिड सॉर्ट ऑफ हिस्ट्री दैट वी हैव बीन टॉट इन आवर स्कूल। सो दिस वेदांता सेस दैट सी इफ यू वांट टू अंडरस्टैंड दिस अद्वैत फिलॉसोफी देन यू हैव टू अप्रोच इट इन सेवरल स्टेजेस। यू नो व्हेन अह दिस इज़ माई अह एक्सपीरियंस दैट व्हेन वी वांट टू अंडरस्टैंड दिस मॉडर्न कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स से फॉर एग्जांपल हाउ क्वांटम डायनेमिक्स वर्क्स। हाउ दिस प्रिंसिपल ऑफ अनसर्टेनिटी वर्क्स? हाउ दिस टाइम डलेशन, रिलेटिविटी, जनरल रिलेटिविटी, स्पेशल रिलेटिविटी इज़ एक्सपाउंडेड बाय आइंस्टाइन, हाउ इट वर्क्स और हज़नबर्ग और फर्मिस, पैराडॉक्सिस एटसेट्रा। इफ वी वांट टू अंडरस्टैंड दिस वेरी वेल, देन वी हैव टू अंडरस्टैंड हाउ दिस वेस्टर्न साइंस, फिजिक्स हेज़ डेवलप्ड थ्रूउ, 2,000 इयर्स ऑफ़ हिस्ट्री। इफ वी बिगिन बाय पाइथागोरस एंड देन वी डेवलप व्हेन वी गो फर्दर इन हिस्ट्री हाउ न्यूटन डिस्कवर लॉज़ ऑफ डायनेमिक्स एंड लॉज़ ऑफ ग्रेविटी यूनिवर्सल लॉ ऑफ़ ग्रेविटी एंड हाउ दिस यूनिवर्सल लॉ ऑफ़ ग्रेविटी वाज़ मॉडिफाइड बाय आइंस्टाइन एंड हाउ आइंस्टाइन अंडरस्टैंडिंग वाज़ इन टर्न वाज़ अपेंडेड एंड अह एक्सपेंडेड बाय क्वांटम डायनेमिक्स एंड दिस कोपनहेगन स्कूल ऑफ़ थॉट। देन वी कैन ट्रूली अंडरस्टैंड दिस डेवलपमेंट ऑफ वेस्टर्न साइंस, वेस्टर्न फिजिक्स एंड सिमिलरली इज अबाउट वेदांता। इफ यू वांट टू ट्रूली अंडरस्टैंड व्हाट आर द करंट थॉट्स इन वेदांता व्हाट आर द हाईएस्ट थिंकिंग ऑफ वेदता व्हिच इज करंट टुडे देन वी हैव टू अंडरस्टैंड हाउ दिस वेदांतिक स्कूल डेवलप इन द फर्स्ट प्लेस। हाउ स्टेप बाय स्टेप वी स्ट्रू ब्लाइंड एलस एंड डेड ब्रांचेस एंड देन वी रिटर्न एंड अगेन एंड अगेन थ्रू लॉट ऑफ हार्ड वर्क तपस्या साधना स्पिरिचुअल विज़ स्पिरिचुअल एक्ससी आवर फोरफादर्स सेंट्स एंड फिलॉसोफर्स हाउ दे डेवलप दिस ग्रैंड फिलॉसोफिकल स्ट्रक्चर हाउ दे इनेक्टेड दिस ग्रैंड फिलॉसोफिकल पैलेस दैट अंडरस्टैंडिंग दैट अंडरस्टैंडिंग दैट लर्निंग इज़ द ग्रेटेस्ट एडवेंचर, ग्रेटेस्ट इंटेलेक्चुअल एडवेंचर दैट वी कैन एवर अंडरटेक। अह जस्ट इमेजिन दैट हाउ वेयर दिस अद्वैत फिलॉसोफी टुडे स्टैंड्स। वी कैन वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट एटलीस्ट वी हैव टू गो बैक एटलीस्ट 10 टू 20,000 इयर्स इन द पास्ट एंड ट्राइ टू अंडरस्टैंड दैट हाउ दिस पीपल हु वेर नोमेड्स, हु वेर हंटर गेदरर्स। हु वेर लिविंग इन द केव्स व्हेन सम लाइटनिंग विल स्ट्राइक इट विल बर्न द ट्रीज़ डिजीज विल स्ट्राइक एंड इट विल किल दे लव वंस देयर विल बी फ्लड्स देयर विल बी वाइल्ड फायर्स देयर विल बी इवन से ड्रोट एवरीथिंग दिस सो मेनी डिजास्टर्स आर एसोसिएटेड विथ ह्यूमन लाइफ देर लव्ड वंस योर फैमिली मेंबर्स एनी टाइम टाइगर विल कम एंड कैच देम एंड ईट देम अ स्नेक विल बाइट देम एंड दे विल डाई दिस डेथ वाज़ सच अ कॉन्सेंट कंपेनियन ऑफ आवर फोर फादर्स लिविंग 20,000 इयर्स एगो दैट दे स्टार्टेड थिंकिंग दैट देयर मस्ट बी अ हायर पावर देयर मस्ट बी अ सुप्रीम पावर लिविंग समवेयर हायर इन द क्लाउड्स दैट इफ वी प्रे टू देम दे विल लिसन टू आवर प्रेयर्स एंड दे विल स्टॉप आवर लव्ड वंस बीइंग किल्ड और दे विल ग्रांट अस दिस प्रोस्पेरिटी दैट वी सॉ डिजायर सो फ्रॉम दैट दिस आउट ऑफ फियर आउट ऑफ दिस डिजायर टू गेन समथिंग फॉर देम दे स्टार्टेड बिलीविंग इन सम हायर अथॉरिटी एंड ऑफ़ कोर्स राइट फ्रॉम द बिगिनिंग इटसेल्फ इवोल्यूशन इज़ बेस्ट ऑफ़ स्पिरिचुअल क्वेस्ट। सो देयर इज ऑलवेज द डीप इनसाइड क्यूरियोसिटी इन आवर हार्ट। डीप सीटेड क्यूरियोसिटी दैट आई वांट टू नो व्हाट इज बिय्ड दिस नॉर्मल डे टू डे लाइफ बिय्ड व्हाट आई कॉल दिस हम ड्रम एकिस्टेंस दिस रूटीन दिस बोरिंग लाइफ देयर हैज़ टू बी सम हायर ग्रेटर एडवेंचर सम एक्साइटिंग रियलिटी दैट आई कैन अटेंड टू एंड आय कैन बी फ्री ऑफ़ दिस बोरिंग लिटिल लाइफ दैट आई हैव गोट विथ मी माई लिमिटेड पावर्स माई वीक बॉडी आई आई कैन बी स्ट्रांग फ़िज़िकली बिट कंपेयर टू टू दिस थंडरस्टार्म कंपेयर टू दिस सुनामी दैट वी सी इन द वर्ल्ड कंपेयर टू दैट हाउ प्यून टाइनी एंड वीक आई एम सो आई आल्सो वांट टू बी ग्रेट आई आल्सो वांट टू अंडरस्टैंड समथिंग व्हिच विल गिव मी सम सॉर्ट ऑफ़ पावर इट विल गिव मी सम पीस इन माय माइंड इट विल ग्रांट मी इटरनल विज़डम सो दिस एंबिशन दिस स्ट्रांग डिजायर टू ट्रांसेंड माय वीकनेस माय डे टू डे एक्सिस्टेंस देट इज व्हाट हैज़ ड्रिवन इवोल्यूशन फ्रॉम द वेरी बिगिनिंग राइट फ्रॉम द वन सेल अमीबा टू मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म टू देन फिशेस एंड देन टू एफीबियस ऑर्गेनिज्म्स देन टू डॉग्स एंड मंकीज़ एंड फ्रॉम देयर टू ह्यूमन बॉडी दिस ह्यूमन बॉडी वी हैव अटेन गोइंग थ्रू सो मेनी इनकारनेशंस ऑफ फिजिकल फॉर्म्स। तो इन एव्री फॉर्म वी हैव थॉट दैट आई वांट टू ट्रांसेंड दिस लिमिटेड बॉडी दैट आई हैव गॉट। आई वांट टू ट्रांसेंट दिस लिमिटेड इंटेलेक्ट दैट आई हैव गॉट। आई वांट टू ट्रांसेंड दिस लिमिटेड अंडरस्टैंडिंग एंड विज़डम अबाउट द वर्ल्ड दैट आई हैव गॉट। एंड दिस स्ट्रगल दिस मुमुक्षुत्व दैट इज व्हाट हैज़ ड्रिवन आवर इवोल्यूशन और द डेवलपमेंट ऑफ़ आवर फिलॉसोफिकल थॉट्स। सो व्हेन वी थिंक दिस वे वी कैन सी दैट अद्वैत वेदांता स्टैंड्स ऑन द वेरी पिनेकल वेरी टॉप ऑफ दिस इवोल्यूशनरी फूड चेन इवोल्यूशनरी फिलॉसोफिकल चेन द अद्वैत वेदांता इट इज द लास्ट वर्ड इन ह्यूमन फिलॉसोफिकल इवोल्यूशन नथिंग कैन बी फर्दर देन दैट व्हाट कम्स आफ्टर अंडरस्टैंडिंग अद्वैत वेदांता इज टू इंप्लीमेंट इन आवर लाइफ आई हैव टू एक्ट अकॉर्डिंगली एज इफ आई आई एक्चुअली बिलीव इन दिस थिंग अदरवाइज व्हाट हैप्स दैट पीपल स्टडी वेस्टर्न फिलॉसोफी पीपल स्टडी ईस्टर्न वेस्टर्न साइकोलॉजी दे आल्सो स्टडी ईस्टर्न साइकोलॉजी फिलॉसोफी वेदांता एंड बुद्धिज्म एंड सिखिज्म दे स्टडी मेनी थिंग्स देयर आर मेनी स्कॉलर्स नॉट अस बट देयर आर मेनी स्टूडेंट्स ऑफ़ फिलॉसोफी व्हेन दे स्टडी इट दे डू नॉट अंडरस्टैंड दैट फिलॉसोफी इज़ नॉट मेयरली समथिंग टू स्टडी इट नीड्स टू बी अप्लाइड आल्सो इन फ़िज़िक्स देयर आर आर टू ब्रांचेस थ्योरिटिकल अंडरस्टैंडिंग एंड दिस प्रैक्टिकल एप्लीकेशन व्हिच इज़ कॉल्ड इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी। सो थ्योरिटिकल साइंस ऑलवेज फॉलोस बाय इट्स प्रैक्टिकल एप्लीकेशन टेक्नोलॉजिकल इंजीनियरिंग एप्लीकेशन। ओनली देन यू कैन मेक इट वर्केबल फॉर योरसेल्फ। अदरवाइज़ व्हाट वास इंडियास प्रॉब्लम दैट यस वी हाव गट ऑल दिस ब्यूटीफुल थिअरीज़ अबाउट शून्य एंड एव्रीथिंग। बट व्हेन इट केम टू एक्चुअली अप्लाई दैट इन ऑर्डर टू किल योर एनिमीज़। ओके ऑफ कोर्स वी आर पीस लविंग नेशन सो वी डिडंट डेवलप वेपन्स बट देयर आर मेनी अदर थिंग्स दैट वी कुड हैव डेवलप्ड एंड वी डिड डेवलप इन वैदिक एजेस नथिंग टू से अबाउट दैट बट इन मॉडर्न टाइम्स व्हेन रेनेसा कम इन 13थ 14थ सेंचुरी इन यूरोप वी फाउंड आवरसेल्व्स थाउजेंड्स ईयर एटलीस्ट अ थाउजेंड ईयर बैकवर्ड्स एटलीस्ट अ थाउजेंड ईयर बिहाइंड वेस्टर्न यूरोप एंड दैट इज़ व्हाई अ थाउजेंड इयर्स स्लेवरी फॉललोड इन इट्स वेक सो वी हैव टू टेक दिस दिस लेसन टू आवर हार्ट एंड जब हम यह कहते हैं कि
श्रीरामकृष्ण कथामृत : चतुर्थ दर्शन
अच्छा कि हम लोगों ने तो साइंस और टेक्न साइंस जो है फिजिक्स के जितने भी मतलब एडवांस आइडियाज आप देख लीजिए यदि आजकल के जो नोबेल लोरिएट फिजिश फिजिसिस्ट है या फ्रिड्स ऑफ कैप्रा है ना कि ऐसे किसी को भी आप देखिएगा इवन हज़नबर्ग है इवन आइंस्टाइन है हमेशा वे लोग वेदांत के बारे में बात करते ही है जब न्यूक्लियर एक्सप्लोजन सर्वप्रथम पहली बार हुआ वो वो वहां पे नेवाड़ा डेजर्ट में तो हज़नबर्ग वहां पर उपस्थित था। ही वास द फादर ऑफ एटॉमिक बम। तो वो गीता का वो जो फेमस श्लोक है ना कि वो पूरे संसार को मैं अपने मुंह में जाकर के ग्रहण कर रहा हूं। उसको मैं उसको मैं भक्षण कर रहा हूं। भक्ष कर रहा हूं। वो गीता का श्लोक जो हज़नबर्ग उस समय न्यूक्लियर एक्सप्लोजन होने के समय में वो बोला था। अर्थात न्यूक्लियर एक्सप्लोजन इस तरह की जो शक्ति है कि जैसे भगवान विष्णु अपना जो विश्वूप जो प्रदर्शित करते हैं वो जो शक्ति प्रदर्शित हुई है इस तरह की शक्ति न्यूक्लियर एक्सप्लोजन में है। ऑफ कोर्स हमको पता है कि फिजिकल पावर जो है फिजिकल एनर्जी जो है इट इज़ नथिंग इन कंपेयर टू स्पिरिचुअल एनर्जी और स्पिरिचुअल फोर्स। बट एनीवे एटलीस्ट वो कंपेयर करने की अकल तो उसमें थी। तो देखिए कि उन लोगों ने जिस तरह से सिर्फ थ्योरेटिकल अंडरस्टैंडिंग को ही फिजिक्स की बात करता हूं। फिजिक्स की थ्योरिटिकल अंडरस्टैंडिंग को ही नहीं डेवलप किया। उसके प्रैक्टिकल उसके एप्लीकेशनेशंस इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी उस फील्ड में भी वे लोग उसको लेके आए। तो हमको भी ये जो है वेदांत जो है वेदांत इतनी पावरफुल थ्योरी है। इतनी पावरफुल फिलॉसोफी है कि यदि हम उसको अप्लाई नहीं करेंगे देन इट विल बी अ सीन ऑन आवर पार्ट। माने हमारे लिए वो पाप कहा जाएगा। मतलब जिसको पता नहीं है वेदांत के बारे में वो नहीं फॉलो करता है वो ठीक है चलो वो अज्ञानी है तो हमको पता है कि वेदांत क्या है वेदांत के जो डिफरेंट ब्रांचेस क्या है वेदांत का इवोल्यूशन कैसे हुआ वेदांत के जो संत महापुरुष जो है उनके बारे में हम जानते हैं पहचानते हैं उनको हम फिर यदि हम उनके थोड़ा सा भी प्रैक्टिस हम अपने जीवन में नहीं करेंगे तो मतलब ये कितने दुख की बात होगी कि ऋषि मुनि के संतान हम है भारत देश में और ऋषि मुनियों का यह जो भव्य हमारे लिए जो छोड़ के गए हैं संपत्ति उसको हम ही लोग जो है इग्नोर कर रहे हैं। उस उसको जो है हम ही लोग जो है ये नेगलेक्ट कर रहे हैं। तो एटलीस्ट हमारे जीवन में जितना भी हो सके ये जो वेदांत के कुछ-कुछ आइडियाज को फॉलो करना है। और वेदांत समझना कोई इतना उसको कठिन काम नहीं है। ये जितने भी साधु ठाकुर मां स्वामी जी की ये कहानियां हम इसलिए तो यहां पे वो हम बातें करते हैं इसके बारे में। उसमें से जैसे थोड़ा बहुत जितना भी है हमको सीखना चाहिए। अच्छा तो मैं जो बता रहा था कि जो अद्वैत वेदांत इसके बारे में जो यहां पर स्वामी जी ने कहा है तो अद्वैत वेदांत एक्चुअली उसमें और द्वैत वेदांत में डिफरेंस क्या है? या तो सिर्फ द्वैतिष्ट स्कूल जो है द्वैत स्कूल में वेदांतिक और नॉन वेदांतिक दोनों आते हैं। द्वैत में जैसे वैष्णविज्म है। यह भक्ति मार्ग है या तो योग मार्ग है। ये सब जो है वेदांत के भीतर की द्वैतिक स्कूल्स है। और नॉन वेदांतिक द्वैतिक स्कूल तो बहुत सारी क्रिश्चियनिटी, इस्लाम, बुद्धिज्म, जैनिज्म ये सब जो है नॉन वेदांतिक द्वैतिक स्कूल है। तो इसमें वो जो किस तरह से डेवलप हुआ? ईश्वर कहीं बाहर में है। वो उनको हम प्रार्थना करेंगे। कोई विधि वगैरह कर देंगे तो हमारे जितने भी सुख भोग के साधन है या तो फिर यह जो मेरे जो प्रियजन है वह बीमार हो गए हैं उनको मृत्यु शैया पे है तो उनको बचा लेंगे या तो मेरे मुझे इतना सब रोग वगैरह हुआ है मुझे कष्ट है मेरे जीवन में उसमें से मुझे बचा लेंगे तो भव रोग से बचने के लिए हम भगवान की प्रार्थना हम कोई विधि वगैरह करते थे वहां से शुरू हो के फिर एक ऐसा आया कि नहीं ईश्वर तो प्रेम स्वरूप है और प्रेम पाने के लिए ईश्वर का ईश्वर की कृपा करुणा पाने के लिए मैं उनको प्रार्थना कर रहा हूं। मुझे फिर ईश्वर से और कुछ नहीं चाहिए। जैसे स्वामी जी का स्वामी जी के घर में पिताजी का देहावसान हो गया। ठाकुर के पास आए। बोला कि आप मेरे घर में कुछ व्यवस्था कर दीजिए तो मैं यहां पे आकर के शांति से ईश्वर की साधना कर सकूं। ठाकुर ने भेज दिया मां के पास मां काली के पास और स्वामी जी के मुंह से बार-बार यही निकलता रहा। ज्ञान दो, भक्ति दो, वैराग्य दो। ऐसा कभी नहीं निकला कि मेरे घर के लिए कोई व्यवस्था कर दो। जैसे कि मैं शांति से तुम्हारा नाम ले सकूं। तो मैं ईश्वर को प्रार्थना करता हूं। पूजता हूं इसलिए नहीं कि मुझे अपने जीवन में कुछ उसको मुझे कुछ मिल जाएगा। हां मुझे कष्ट है। मेरा भाई को कितना कष्ट था। फिर भी वो भगवान कृष्ण से ऐसा तो नहीं मांगा कि उसके पति जो है उसका वो अकल ठीक हो जाए। फिर वो जो उसके जीवन में वो जो वहां पे जो राजमहल में रहती थी उसके जो प्रॉब्लम्स है वो सब ठीक हो जाए। नरसिंह मेहता की कहानी हम पढ़ेंगे तो हमको इतना मतलब अच्छा लगेगा कि वो नागर ब्राह्मण थे। नागर ब्राह्मण तो उसके इतना तिरस्कार करते थे। उसकी इतनी निंदा करते थे। फिर भी जो है उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि भगवान कृष्ण श्रावण शाह सेड्स कि हां भाई वो जो है इन लोगों का मुंह बंद करवा दो। इनकी जुबान बंद करवा दो। उन्होंने इतना ही कहा कि आपकी रास लीला जो है उसका नियमित रूप से मुझे दर्शन होता रहे। वही वरदान मैं चाहता हूं। तो ईश्वर के पास से मांगना हम मांगते हैं सिर्फ ज्ञान भक्ति वैराग्य और ना ही कि कोई ये जो भौतिक पदार्थ भौतिक सुख समृद्धि की चीजें तो ये सेकंड लेवल इवोल्यूशन हुआ। सबसे पहले तो हम ये अपनी सुख सुविधा के लिए कुछ मांगते थे। डर करके कुछ मांगते थे। फिर उससे बाद में आया कि हम ईश्वर का प्रेम पाने के लिए कुछ मांग रहे हैं। उसके बाद में आया कि जैसे बुद्धिज्म या तो जैनिज्म है वे कहते हैं कि ईश्वर बाहर है ही कहां पे? वो तो जो भी आप जिसको कि हायर रियलिटी बोलते हैं वो तो अपने हृदय में ही है। या तो फिर ऐसा कहेंगे कि व्यक्ति का स्वरूप क्यों दे रहे हो ईश्वर को? माने एंथ्रोपोमोफाइस क्यों कर रहे हो ईश्वर को? हम जैसे इंसान है। हमारे दो हाथ है, दो पैर है, एक सर है। तो ईश्वर थोड़ी ना ऐसे दो हाथ दो पैर और एक सर वाले होने वाले हैं। मान लीजिए कि कोई दूसरे ग्रह पे इस तरह का समुद्र में वो व्हेल जैसे है पृथ्वी पर व्हेल है तो अभी तो इवोल्यूशन फेवर्ड ह्यूमन स्पीशीज। किंतु और किसी प्लेनेट पे यदि इवोल्यूशन फेवर्ड व्हेल और शार्क तो वो जो व्हेल और शार्क जो है उन्होंने सिविलाइजेशन डेवलप किया होता तो उनके जो ईश्वर होते वो तो मछली की तरह होते। हालांकि हमारे यहां मत्स्य अवतार है। मैंने ये जब पहली बार सोचा था कि एंथ्रोपोमोफाइस क्यों करना है ईश्वर को? यदि दूसरे ग्रह पे दूसरे तरह के माने स्पीशीज होगी तो उनके ईश्वर भी उस तरह के होंगे। किंतु देखिए कि हमारे हिंदूइज़्म में वो भी प्रावधान है। वो मत्स्य अवतार भी है। कुर्म अवतार भी है हमारे यहां पे। अर्थात यह भी पॉसिबल है कि इफ यदि इवोल्यूशन ने और किसी स्पीशीज को फेवर किया होता और उन्होंने सिविलाइजेशन हायर सेंशिएंट हायर इंटेलिजेंस का डेवलपमेंट किया होता तो वो उन्होंने अपने ईश्वर को उस तरह से सोचा होता। तो हमने ऑलरेडी हिंदूइज़्म ने ऑलरेडी दूसरी दूसरी स्पीशीज के ईश्वर को भी खोज के निकाला है। यदि माने दूसरे ग्रह पे कोई ऑक्टोपस तरह का कोई यदि उनका ऑर्गेनिज्म होता फिजिकल स्ट्रक्चर तो उस तरह के वो ईश्वर को सोचते हैं। किंतु बुद्धिज्म ये जो श्रवण स्कूल ऑफ थॉट है वो कहते हैं कि आप ये किसी शरीर वाले ईश्वर को क्यों सोचते हैं? ईश्वर इज जस्ट अ स्पिरिट। हायर रियलिटी इज अ स्पिरिट। जैसे हवा है। जैसे ये हवा ऑक्सीजन है वो पूरे जगत में व्याप्त है। ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन का कोई शेप है। हवा का कोई शेप है। वो तो सर्वव्यापी है। अग्नि है। अग्नि का तो कोई शेप नहीं है वो दावा नल तो हर जगह पर व्याप्त है हर जगह का स्वरूप ले सकता है तो ईश्वर भी एज अ स्पिरिट सब जगह व्याप्त है सब तरह का स्वरूप ले सकते हैं स्वरूप हीन है तो फिर और ये एक चीज हो गया और ये इस तरह के स्पिरिट फॉर्म में जो ईश्वर है स्वरूपहीन जो ईश्वर है उनको प्राप्त करने का क्या तरीका है तो फिर यह जो संसार की जो माया जाल है उसमें से अपने मन को संपूर्ण रूप से मुक्त कर देना अपने मन को संपूर्ण संपूर्ण रूप से विथड्र कर देना और ये जो हायर रियलिटी जिसको हम कहते हैं उसके ऊपर में मन को एकाग्र करना। अभी ये हायर रियलिटी स्पिरिट के फॉर्म में है तो हम उसके ऊपर में कैसे एकाग्र करेंगे मन को? तो फिर उन्होंने डच चक्र है या तो फिर कमल के फूल है या तो अग्नि शिखा है उसके ऊपर में मन को केंद्रित करो। ये सिखाया या तो फिर यह जो षड चक्र है अपने शरीर में हृदय है कंठ प्रदेश है आज्ञा चक्र है अपने कपाल में या तो फिर सहस्त्रार चक्र तो ये जो षड चक्र है उसके ऊपर में मन को केंद्रित करो और फिर जो है वो अपने से ही मन की एकाग्रता जब मैच्योर हो जाएगी एक लेवल तक पहुंच जाएगी तो ऑटोमेटिक जो है अपना मन का जो यह संस्कार वगैरह अपने से ही वो चला जाएगा और यह जो निर्वाण है उसकी प्राप्ति हो जाएगी तो यह जेनिज्म और बुद्धिज्म का कांसेप्ट है। अभी अद्वैत वेदांत है। यह उससे एक स्टेप ऊपर जाकर के कहता है कि ओके चलो आपने मान लिया कि मनुष्य के रूप में ईश्वर क्यों होने लगे? या तो फिर खुर्मा अवतार के मत्स्य अवतार के रूप में क्यों होने लगे? हम मान लेते हैं ईश्वर और व्हाटएवर दिस हायर रियलिटी इट इज़ इट इज़ अ फॉर्मलेस रियलिटी। इट इज़ अ सम सॉर्ट ऑफ़ स्पिरिट। किंतु फिर इस रियलिटी को फिर आप बाहर में क्यों सोचते हैं? सोचिए कि आपके भीतर में ही वो अल्टीमेट रियलिटी विद्यमान है। ये जो आत्मन है या तो जो ब्राह्मण है दैट रिसाइड्स विद इन यू इटसेल्फ। जैसे ही आप बाहर में कुछ सोचते हैं आप इस जगत को वैलिडेट कर देते हैं। जगत के जितने भी सुख भोग है उसकी एक ऑथॉरिटी आप स्वीकार कर लेते हैं। जगत के सुख भोग को या तो जगत को संपूर्ण रूप से निगेट कर दो। वो चीज है ही नहीं। जगत है ही नहीं। जो कुछ भी है वो हमारे भीतर में ही है। इवन यह जो शरीर भी है जो जगत के साथ में मिला हुआ है इसका भी तो वैसे कोई अस्तित्व नहीं है। जो भी हायर रियलिटी है दैट रिसाइड्स विदिन आवर ओन सेल्फ और फिर जितने भी साधन पद्धति है या तो फिर यह जो द्वैतिक साधन पद्धति है उनको भक्ति करना पूजा करना या तो फिर ये योगिक साधन पद्धति है एकाग्र करना मन को या तो फिर ज्ञान मार्ग है त्याग करना या तो फिर यह जो कर्म मार्ग है निस्वार्थ कर्म करना ये जितने भी साधन पद्धतियां आपने अभी तक खोज निकाली है ऑल ऑफ देम आर वैलिड पाथ ऑफ अटेनिंग दिस अल्टीमेट रियलिटी दैट रिसाइड्स विद इन आवर ओन हार्ट। सो दिस इज अद्वैतिक कंक्लूजन। तो देखिए ये जो अद्वैतिक कंक्लूजन है वो जैसे हवाहवा में नहीं आया है। कितने सारे इवोल्यूशनरी जो फिलोसोफिकल इवोल्यूशनरी स्टेप्स को पार करके हम उस अल्टीमेट कंक्लूजन तक पहुंचे हैं। तो इसीलिए जब हम इस उसको प्रॉपर्ली अंडरस्टैंड करना चाहते हैं, प्रॉपर्ली इसको समझना चाहते हैं तो हमको ये भी समझना है कि किस तरह से यह जो अल्टीमेट आईडिया जो है अद्वैतिक आईडिया वो कैसे डेवलप हुआ। अच्छा अभी कथामृत हमने देखा कि किस तरह से ठाकुर अपने भक्तों को लड़ा देते हैं। उनमें युद्ध करवा देते हैं। यहां पे मास्टर महाशय को कहा कि नरेंद्र के साथ जाकर के बात करो। तो नरेंद्र के साथ बात हुई तो नरेंद्र ने क्या कहा कि मैं साधारण ब्राह्म समाजी हूं। कॉलेज में पढ़ता हूं इत्यादि। देखिए नरेंद्र का भी ये जो आईडेंटिफिकेशन ब्राह्मण समाज के साथ में इतना है। इससे हमको ये समझना है कि उस उस समय के कोलकाता के समाज में ब्राह्मण समाज का क्या इन्फ्लुएंस था कि ये ये जितने भी लड़के लोग हैं ये जितने भी गृहस्थ हैं जितने भी ये जो ऐसा सोचते हैं कि नहीं हमको ये कोई ये जो ट्रेडिशनल हिंदूइज़्म उस उस ऐसी एक परिस्थिति में पहुंच गया था कि जैसे आइदर आपको ये मतलब ये बलि प्रथा है। ये काली की पूजा है जिसको कि सर रैंक सुपरस्टिशियन वो सबको सब कुछ एक्सेप्ट कर लो या तो फिर तुम हिंदू धर्म से बाहर निकल जाए एक एक नैरो मेंटालिटी एक हिंदू धर्म की हिंदू धर्म की नहीं किंतु जो लोग हिंदू धर्म का प्रचार करते थे उन लोगों की ऐसी एक खो गई थी उन लोगों के लिए जो ब्रह्मो समाज है या तो फिर ये आर्य समाज है दे ब्रॉट ए विंड ऑफ फ्रेश विंड ऑफ फ्रीडम कि हां हमारे धर्म में या तो फिर ब्रह्म समाज लोग मुझे पता नहीं कि एग्जैक्टली अपने को हिंदू कहलाते थे कि नहीं। उन्होंने क्रिश्चियनिटी के बहुत सारे एलिमेंट्स को अडॉप किया था। और जैसे ये फॉर्मलेस ईश्वर ये जो निराकार बिना स्वरूप बिना रूप के ईश्वर ये जो हमने कहा ना कि हाईएस्ट इवोल्यूशन क्या है? तो ये सब स्टेज में जाकर के इवोल्यूशन हुआ है। तो उन्होंने भी यह सोच लिया है। उन्होंने ना ही अद्वैत का पता था। अद्वैत क्या है कि सभी तरह की साधन पद्धति को एक्सेप्ट करता है। सभी तरह की फिलॉसोफी को एक्सेप्ट करता है। और कहता है कि उस फिलॉसोफी के आकर के तुम ये अल्टीमेट रियलिटी तक मिल जाना। किंतु ये जो बाकी जितनी भी फिलॉसोफीस है जो हमको अद्वैत तक ले जाती है उनका यह कहना है कि हम ही सही है और बाकी सब यदि तुम करो तो ठीक है गलत नहीं है। वे लोग आउटराइट निंदा अभी आजकल कोई नहीं करता। पहले तो ऐसा था कि या तो तुम हमारा धर्म स्वीकार करो या तो तुमको हम मार डालेंगे। तो ऐसा पहले होता था। आजकल इतना क्रूड फॉर्म में हम लोग नहीं बोलते हैं। इवन ये जो बीच-बीच में ये जो कॉन्फ्रेंस होती है वो कैथोलिक चर्च की तो ये जो वेटिकन लास्ट उनकी ये जो फाइनल कॉन्फ्रेंस हुई थी वेटिकन कॉन्फ्रेंस आई थिंक समवेयर इन 1950 1960 तो उसमें उन्होंने ये एक्सेप्ट किया है कि क्रिश्चियनिटी इज नॉट द ओनली पाथ। वरना तो पहले तो ऐसा होता था कि ये जो हेरेटिक स्कूल है उसमें ये जितने भी लोग हैं क्रिश्चियनिटी में भी बहुत सारी स्कूल्स डेवलप हुई थी। तो ये जो मेन जो लोग थे वे लोग बोलते थे कि ये जितनी डिफरेंट-डिफरेंट स्कूल वाले हैं विद इन क्रिश्चियन फोल्ड वे लोग हेरेटिक है वो लोग उनको मर्डर कर दो किसी राजा को बुलाएंगे उसको बोलेंगे यदि तुम्हारे तुम्हारे तुमने जितने भी पाप किए हैं वो सबसे मुक्ति पाना चाहते हो तो यह जो हमारे ऐसे लोग हैं क्रिश्चियन लोग जो कि हमारी बात नहीं मानते हमारा जो नैरो इंटरप्रिटेशन ऑफ़ बाइबल है वह नहीं स्वीकार कर तुम लोगों को मार दो हम तुमको मुक्ति दे देंगे अर्थात तुम्हारे जितने भी पाप है उसमें से हम तुमको स्वर्ग का पासपोर्ट दे देंगे ऐसा पोप जो है स्वर्ग का पासपोर्ट बेचता था। तो ऐसे-से उनकी कॉन्फ्रेंस बहुत सारी हुई। तो लेकिन आखिरी कॉन्फ्रेंस जो वेटिकन कॉन्फ्रेंस वेटिकन वन एंड टू उनमें एटलीस्ट उन्होंने एक्सेप्ट तो किया है कि हां चलो कि दूसरे जो पाथ है वो गलत नहीं है। किंतु ये है कि जो उनका जो मेन कैथोलिक पाथ है दैट इज द हाईएस्ट और आपको यदि बहुत अच्छे से बहुत डेवलप करना है तो आपको यहां पे तो आना ही पड़ेगा। तो यहां तक तो एटलीस्ट वे लोग पहुंचे हैं। अद्वैत वेदांत कहता है कि जितने भी पाथ है सब सत्य है। इफ यू फॉलो इट सिंसियरली। तो ये ब्राह्म समाज ये बिकॉज़ के अद्वैत नहीं समझता था। एटलीस्ट उन्होंने हिंदू धर्म का विरोध तो नहीं किया किंतु निराकार ईश्वर के बारे में उन्होंने बोलना शुरू कर दिया और यह कहना शुरू कर दिया कि ये जो मूर्ति पूजा है खास करके काली पूजा देखिए मतलब ये भी ये कितना एक आयरन आयरनिक एक परिस्थिति है कि ब्राह्म समाज का जो सर्वश्रेष्ठ प्रचारक यदि बोला जाए सर्वश्रेष्ठ एक रत्न कहा जाए तो वो था केशव चंद्र सेन और ब्राह्म समाज जिस चीज के मतलब एकदम अगेंस्ट था कि ये काली पूजा माने काली पूजा का अर्थ ही करते थे कि जितने भी तरह की सुपरस्टिशन जितनी भी तरह की अंधश्रद्धा हिंदू धर्म में वर्तमान है वो सब काली मंदिर में काली पूजा में और काली पुजारी के भीतर में वो वर्तमान है। माने काली पुजारी वो उनके माइंडसेट में ऐसा है कि वो जो सबसे अधम व्यक्ति जो कि आध्यात्मिक साधना में जो माने यदि रैंकिंग किया जाए साधकों का मतलब तो जो काली का पुजारी जो है वो सबसे आखिर में वो आएगा। ऐसा उनका मानना था। तो उनका जो सर्वोच्च उनका जो प्रचारक था वो केशव सेन वह आखिर में एक काली पुजारी के चरण के पास में बैठकर के आध्यात्मिक साधना के पाठ पड़े। यह भी एक कॉस्मिक आईनी है। वो पता नहीं ईश्वर किस तरह से मजाक कर लेते हैं। हमारे साथ में हमारे साथ में किस तरह से एक ये कर देते हैं। पैराडॉक्स खड़ा कर लेते हैं कि यदि हम उसका चिंतन करते हैं तो हमको लगता है अरे ये कहां से कहां हमको गोलगोल घुमा दिया इन्होंने। तो यहां पे किंतु नारायण का शुरू शुरू का समय है तो इसलिए बोलता है कि मैं ब्राह्म समाजी हूं और कॉलेज में पढ़ता हूं वगैरह वगैरह। वो ब्राह्म समाजी उसका भाव बहुत ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है किंतु बेचारे को पता नहीं है। अच्छा अभी नेक्स्ट हम कल देखेंगे।