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Sri Ramakrishna & Sri Ma Sarada devi Teachings ·

Sri Ramakrishna & Sri Ma Sarada devi : English & Hindi : 31 Dec 22

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda

ऑल दिस अवार्ड होली प्लेसिस वेयर मेड डर्टी एंड इन एक्सेसिबल एंड माइनस तू विजिट नौ अवर डेज़ अवर होली प्लेसिस आर मच बटोर manched बट दिस इस हो दिस manimali परिसर देयर ही विजेटेड ए टेंपल ही सो डेट देयर आर में बैगर्स इन बैगर्स केप्ट आस्किंग फॉर मणि डी केप्ट क्रिएटिंग केव्स एंड मिनिट्स डेट प्लीज गिव अस मणि प्लीज गिव अस मणि लाइक देयर सो ठाकुर रिप्लायड यू आर इरिटेटेड बिकॉज sadhouse आस्क यू फॉर वैन और तू पैसा वैन तू नोट गो ऑन ए पिलग्राइमेज विद दिस सॉर्ट ऑफ एटीट्यूड ठाकुर ओवर वेल्थ शुड बी गिवन तू चैरिटी फॉर डी साधु सेवा फॉर डी सेवा ऑफ गोद फॉर इष्ट देवता फॉर डीटी इन डी टेंपल एंड फॉर डी बेनिफिट ऑफ अवर फेलो ह्यूमन बीइंग्स हु आर पुर एंड पुर सफरिंग सो जिस धन शुद्ध कॉन्सेप्ट इस ऑन ओनली थिंग इस डेट स्पेसिफिकली वही आई मेंशन दिस क्राइम इतरा एसोसिएटेड विद ओवर होली प्लेसिस ए इट इट बिकम वेरी यू नो सिंस सिचुएशन संवारे इन अन 90 इस इन 1000 सब 20 इयर्स सो धुज वेयर एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी कंडीशंस डेट ओवर होली प्लेसिस वेयर एक्चुअली अन मिस मैनेज बट नौ व्हाट इसे आई थिंक अगेन देयर बटोर मैनेज वंश तू गो ऑन ए पिलग्राइमेज विद दिस आउट ऑफ एटीट्यूड एक्सपेक्ट हिम तू लीव बट इन पीपल इन जनरल वैन डी स्ट्रीट दे में भी सफरिंग फ्रॉम इदर सैम साइकोलॉजिकल डिफेक्ट और सैम सॉर्ट ऑफ बिहेवियरल इन दिस ऑर्गेनाइज्ड इंस्टीट्यूशंस नॉट जस्ट रामकृष्ण मिशन देयर आर में सच गुड ऑर्गेनाइजेशंस दे हैव वेरी हाईएस्ट स्टैंडर्ड ऑफ में पावर होम एवर दे एक्सेप्ट इसे मेंस देयर मोस्टली ग्रेजुएट मोस्टली देयर एबल तू वर्क वेरी हार्ड एंड क्यूट डेडीकेटेड ऑन डी पथ ऑफ साधना सो था इस वही ठाकुर स्पेसिफिकेशन डी रीजन इसे ऑफ फार्मिंग एंड हॉर्टिकल्चर इन दिस रीजन लॉट इन ड्रिंकिंग वाटर एंड वर्किंग इन फार्म इट्स इंटरेक्ट बट इट प्रीवियस नो कनाल कनाल सी कैन कंस्ट्रक्ट डम्स एंड सी कैन कंस्ट्रक्ट कनाल बट ब्रिटिश गवर्नमेंट हेड नो डेट इंटरेस्ट इन डी वेल बीइंग ऑफ इंडिया सो व्हाट वास डी सॉल्यूशन ऑफ वाटर इन डी विलेज वेयर राखल डेट इसे राजा महाराज स्वामी brahmanandal लाइव्स डेट हिज एंड sstril विलेज ऑफ कोर्स नौ डेज़ टाइम व्हेन दिस इंसीडेंट इस नॉरेटेड इट दे टाइम ही वैसे लिविंग इन कोलकाता बट है एन्सेस्ट्राल विलेज वेयर राजा महाराज सो ही टोल्ड ठाकुर डेट्स सी देर इस सैम प्रॉब्लम इन माय विलेज ठाकुर सईद दिस तू दिस मणि मलिक सईद कर सिटी ऑफ वोटर इन डी विलेज इन विच राखल वो स्पॉन सो आईएफ पॉसिबल देयर दिस इंसीडेंट इस नॉट गिवन हर इन फुल बट इन कथम् डी से इंसीडेंट इस नॉरेटेड इट इस अन वेरी फनी इंसीडेंट सो ठाकुर ठाकुर डिटेल्स एनीथिंग बट ही स्टार्टेड लाफिंग सो स्वीट ठाकुर अलसो यूज्ड तू हैव अन ह्यूमर्स एक्सचेंज विथ हिज देवोट्स एंड आदर्श अलसो स्टार्टेड लाफिंग डी ऑफ कोर्स डेट इस मोस्ट स्टिंग इन ठाकुर्स वेंट ठाकुर मैक्स फैन ऑफ एनिमल सैम टाइम्स सी मेक फैन ऑफ सैम वैन सी डू दिस आउट ऑफ bittorrentz और आउट ऑफ एंगल बिकॉज बी कनॉट फाइट विद डेम सो इंसटिड ऑफ coraling विद देयर सी मेक फैन ऑफ डेम सो देयर इसे अन स्टिंग ऑफ बिटर्नेस इन अवर पोकिंग फैन ऑफ सैम वैन देर वाज मास लाइक थिंग सी ठाकुर इफ ही पॉक्स 180 गुड ह्यूमन सो जस्ट हैव अन गुड लाफ बिकॉज व्हेन फ्रेंड्स गदर सी जस्ट मेक फैन ऑफ एच आदर सो दिस इस हो सी मेक सच गैदरिंग्स एंटरटेनिंग सो दिस इस हो सी हैव तू अंडरस्टैंड एंड manimali तू डी डिफरेंट ऑल यू यू नीड तू आस्क पुश तू आस्क मणि फ्रॉम मी यू हैव नो नीड तू कॉल तेली एंड नाम कॉलिंग ठाकुर टोल्ड हिम नौ डेट यू आर ओल्ड फॉरगेट दिस वर्ल्ड इन डी हार्ट ड्रॉस नौ यू सी व्हाइट नौ यू आर एन ओल्ड मैन यू शुड फोकस मोर ऑन गोद बिकॉज एस सी हैव डिसकस्ड दिस बिफोर अलसो देयर आर फॉर आश्रमास इन अन इंडियन शास्त्र फॉर आश्रम असर डिस्क्राइब फर्स्ट 25 इयर्स आते डी ब्रह्मचारी आश्रम दें 25 इयर्स वानप्रस्थ एंड दें 25 इयर्स इसे सन्यास आश्रम इसे नॉट इक्विवेलेंट तू व्हाट डी वे आफ्टर दिस ब्रह्मचर्य परशुराम फोर हिम ढेर में एवरीथिंग इन हिज हार्ड एंड ट्री तू फोकस मोर एंड मोर अपॉन डी रीडिंग होली बुक्स विजिटिंग सैम पिलग्राइमेज प्लेसिस विजिटिंग सैम टेंपल लिसनिंग तू सर्च होली डिस्कोर्स एट सेटेरा दिस इस हो दे टेक देयर माइंड आवे फ्रॉम डी दे तू दे वर्ल्डली लाइफ सो डेट इस वही ठाकुर टेल्स हिम डेट इफ यू आर अंगार पर्सन यू वुड बी सो बिजी अर्निंग मणि हेविंग योर करियर एंड टेकिंग केयर ऑफ योर फैमिली इट्स अन ट्री आई अंडरस्टैंड डेट मच बट नौ डेट यू आर एंड ओल्ड पर्सन यू शुड फोकस मोर ऑन गो सो डेट वैसे ओवर इंग्लिश क्लास नौ ओवर

स्वामी शिवानन्द : माँ की मधुर स्मृतियाँ

हिंदी क्लास मैन की बातें हम पढ़ रहे द स्वामी शिवानंद जी महाराज महापुरुष महाराज जो है वो हमें क्या कहते हैं मैन के बारे में पहले तो हम हमने जब लास्ट क्लास में पढ़ा था की किस तरह से पौराणिक युग में गार्गी मैत्री सीता सावित्री आदि अद्भुत नारी चरित्र का विकास हुआ था वैसे ही इस युग की नारियों में आध्यात्मिकता राजनीति विज्ञान शिल्प कला साहित्य आदि सभी विषयों में अति आश्चर्य जनक जागरण हुआ है और आगे भी होगा जब सब देवी शक्ति का खेल है साधारण मनुष्य इसका अर्थ नहीं समझ सकते अर्थात यानी यह नहीं देखना है की बहुत सारे मैन के पास में आती है जो लड़कियां मैन के पास में आती है या मैन की बातें पड़ती है या तो मैन की पूजा वगैरा करती है उनके प्रति श्रद्धा भक्ति करती है रखती है उनका तो जीवन परिवर्तित हुआ है उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु साथ-साथ 50% भी यदि बहाने होंगी तो 300 करोड़ की पापुलेशन है बहनों की तो इन सब का जीवन परिवर्तित हुआ है मैन के आने से क्योंकि क्या है की जो मैन के जो आशीर्वाद है वो सिर्फ उनके साक्षात संपर्क में आकर के मिलते हैं ऐसा नहीं है स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था की एक जो एक साधु है यदि एक गुफा में बैठकर के पंच अति पवित्र अति उच्च कक्षा के विचार करता है तो क्या होगा पता है ये जो पंच विचार जो है ना वो उसके मस्तिष्क में से बाहर निकल कर के ये गुफा की दीवारों को भेद करके पूरे समाज में जाकर के छा जाएंगे और अदृश्य रूप से अपना कम करेंगे तो यह आशीर्वाद भी होते हैं वह इस तरह से वैन तू वैन सिर्फ ट्रांसमिट नहीं होते की मैंने वहां पर गया मैंने उनके पैर छुए और मुझे आशीर्वाद मिला साधु जहां पे रहता है वो पुरी जो समस्त जमीन जो है उसको पूरा जो इलाका है वह पवित्र हो जाता है के मैन में शांति और आनंद से भर जाता है उनको पता भी नहीं चलता की इसके पीछे का कारण क्या है क्योंकि आशीर्वाद जो है वह ऐसा व्यक्ति विशेष पर कम नहीं करता वो सब जो माया और यह जो भालोबासा बांग्ला जो शब्द है यदि हिंदी में करेंगे तो स्नेह प्रेम नहीं किंतु उसने अब तो ये माया और भालू भाषा में डिफरेंस क्या है पता है भालोबासा मतलब ईश्वर का भालोबासा की माया जो होती है वो मैन अपने बच्चे के प्रति होती है किंतु भालोबासा अर्थात जो ईश्वर का जो प्रेम होता है उसे सब के प्रति समान है हालांकि हम उसको कितना ग्रहण करते हैं कितना नहीं ग्रहण करते हैं वह हमारे ऊपर है ठाकुर ने कहा है ना की पवन तो बे ही रहा है हमको सिर्फ अपना ये जो सेल है पाल है वो जो साद गुजराती में कहता है उसको खोल देना है तो उसमें हवा आएगी और हमारी नौकर चलने लगे अभी ये जो मेरा जो सेल है उसको में ही बंद करके रखूंगा तो नहीं मुझे मेरी नौका को हवा लगेगी नहीं मेरी नोखा जो है बहुत सागर होगी उसमें हम हवा का दोष नहीं दे सकते की पवन नहीं है इसलिए मेरी नौका नहीं चल रही पवन तो है ही है हमको नौका का ये जो ये सेल है पाल या तो साद मुझे पता नहीं हिंदी शब्द क्या है तो उसको खोल देना है तो उसको खोलने से ही हमारी नौका चलने लगेगी तो वैसा ही यहां पे है जो मैन का जो आशीर्वाद है पूरे समग्र संसार में धीरे-धीरे करके वो प्रविष्ट हो रहा है सभी बहनों के जीवन को वो उन्नत बना रहा है उनके जीवन की ये जो ट्रेडिशनल जो समस्याएं थी उसको धीरे-धीरे करके दूर कर रहा है वही है की हमको समझना है की किस तरह से ये आशीर्वाद कम कर रहा है महापुरुष महाराज आगे कहते हैं मैन सबकी मैन थी उनमें कितनी दया कितनी क्षमा और कितनी अद्भुत सहनशीलता थी हम लोग भी उन्हें कहां समझ सकें बस उन्होंने कृपा करके इतना ही समझा दिया है की वे साक्षात जगदंबा थी महापुरुष महाराज कहते हैं की जो ठाकुर के जो साक्षात सन्यासी शिक्षा द वे भी ठीक से नहीं समझ पाए द स्वामी जी समझे द ठाकुर समझे द और बाकी जितने भी डायरेक्ट डिसीप्ल द धीरे-धीरे करके समझना शुरू हुए द किंतु महापुरुष महाराज यह भी कहते हैं की मैन ने खुद ने कृपा करके हमको समझा दिया है की वो जगदंबा थी जब तक वे स्वयं कृपा करके अपना स्वरूप प्रगति नहीं करती तब तक उन्हें कोई नहीं समझ सकता पहले योगिन महाराज और बाद में शरद महाराज ने मैन की खूब सेवा की थी मैंने भी एक बार जय राम बाती जाकर रसोई बनाकर मैन को खिलाई थी मैं शशि महाराज और एक कोई व्यक्ति अन्य भी था याद नहीं है शायद कोका महाराष्ट्र हम तीनों मैन का दर्शन करने के लिए जय राम बाती गए उन दिनों जय रामबाती की यात्रा बड़ी ashuvidhajanak थी और भक्त लोग भी वहां पर कम जाते द हम लोगों ने मैन को पहले से सूचना दे दी थी हमें देखकर मैन को जो आनंद हुआ वह अवनी है सारे दिन वे हम लोगों को खिलाने और हमारी सुख सुविधा की व्यवस्था करने में व्यस्त रहियो पूरा दिन यहां पे इतनी सारी जो डिटेल्स हमको बाकी भक्त लोगों से जानने को मिलती है की मैन जब gajerama की छोटा सा गांव है वहां जो किराने की दुकान भी है वो इस तरह की है की आप कहीं जाकर के चार पंच लोगों का समान एक साथ में लिहाज तो किराने की दुकान में भी समान खत्म हो जाएगा क्योंकि वो तो गरीब गांव है तो जब कोलकाता से बच्चे लड़के लोग जाते द यह भक्त लोग तो उनको तो क्या है की सुबह को उठकर के नाश्ता करने की हैबिट है ऊंचाई पीने की हैबिट है नाश्ता नहीं भी मिले तो बहुत लोगों को सबसे पहले चाय चाहिए अभी वहां पर दूध कहां मिलेगा तो बाद में एक भक्त ने मैन को मैन के घर में डोनेशन में दिया था गे क्योंकि मैन के भक्तों की सेवा को बोल करके किंतु शुरू में तो यह भी नहीं था तो मैं क्या करती थी एक पत्र लेकर के गांव गांव में घूमती थी अभी पैर में वाट है वो आर्थराइटिस है ठीक से चल भी नहीं पाती बेर घसीट करके चलती थी अर्ली मॉर्निंग सुबह-सुबह जब लोग कहां जब ध्यान करेंगे ठाकुर का नाम करेंगे पूजा पाठ करेंगे कुछ sadgranth का पाठ करेंगे ये समय जो होता है इतना पवित्र समय उसे समय वहां पैर घिसते घिसते एक पत्र को लेकर के गांव का घर घर जाती थी कहती थी मेरे बच्चे आए हैं कोलकाता से उनको पीने के लिए चाय के लिए दूध चाहिए यदि आपके पास थोड़ा सा दूध है तो दे दे तू गांव वाले भी कहां किसके घर में यह सब रहेगा वह तो मिट्टी की दीवाल है और वो जो पावल हो जो होता है ना वो वाला अर्थात हिंदी शब्द है जिसको बोलता है उसका वह जो छत बनाया हुआ है तो ऐसे घर में रहते हैं बेचारे कहां वह फ्रिज नहीं है दूध हुआ है तो कहां से मिलेगा थोड़ा सा देते हैं होता है घर में यदि बच्चा हो जाए तो बच्चे बच्चे को पिलाने के लिए दूध चाहिए तो वे लोग भी फिर भी देखते द की मैन का जो प्रेम कितना है उनके बच्चों पे तो उससे vigalit हो करके वे लोग थोड़ा थोड़ा दूध दे देते द तो एक घर से थोड़ा सा दूध मिला दूसरे घर से और थोड़ा सा दूध मिला तीसरे घर से ऐसा मिला और ये लेकर के मैन फिर से अपने घर वापस आए चाय बनाई सुबह सुबह और बच्चे को पिलाई तो वो अभी ये जो भक्त आया है उसको पता भी नहीं है की यह सुबह-सुबह वो तो आराम से उठाता है और जैसे कोलकाता का हैबिट है और फिर उठ करके मैन को कंप्लेंट करता है अरे मैन ये तो छह में क्या किस तरह की चाय है पानी ज्यादा है ना यह जो नाश्ता किया है उसमें तुम सिर्फ हमको यह मुडी दे रही हो मुडी के अलावा और कुछ नहीं है नाश्ते में तो इस तरह से कंप्लेंट करते द और मैन बेचारी यह कभी नहीं कहती थी करें तुम्हारे लिए मैंने सुबह सुबह घर घर जाकर के दूध की भिक्षा की है वह सिर्फ इतना कहती थी बेटा ये तो गांव है गांव में इतना ही मिलेगा तो इससे तुम ये ले लो तो इस तरह से मैन को यदि आप ठीक से पहचान लेंगे नहीं जैसे इस तरह से यह डायरेक्ट भी सर पर तो उनको पता भी नहीं चलेगा की मैन उनके लिए शारीरिक कष्ट कितना करते द उन्होंने अपना जीवन अपना जो शरीर है शरीर में रोग प्रवेश हुआ किस तरह से हुआ भक्तों के पाप ग्रहण करके ठाकुर को कैंसर क्यों हुआ भक्तों के पाप ग्रहण किए इसलिए ठाकुर को कैंसर हुआ इतना पवित्र देह उसमें रोग वगैरा कैसे जाने वाला है तो ये लोग भी यह समझते नहीं द कोई कोई केयर हमारे पाप ग्रहण करके मैन को कला ज्वार होता था इतनी खासी जुकाम और जवार होता था की वो मतलब हम देखेंगे तो हम हमारा हृदय कैंप जाएगा उनका पूरा शरीर आखिर में चार दो तीन साल शरीर कला पद गया था इतना वह शरीर में सिर्फ हड्डियां दिखती थी मैन के वह जो 19 2018 उसे सबके जो फोटोस है वो देखेगा पता चलेगा पुरी हड्डियां दिख रही है शरीर पूरा कला पद गया है वर्ण तो मैन जब ठाकुर के साथ रहती थी तो भक्तों ने वर्णन किया है कहीं पे है की मैन का जो शरीर का जो वर्ण था शुक्र वर्णन था तो बात-बात में यह कला जो और ये सब फीवर वगैरा होकर वर्ण जो है शरीर का पूरा मालिन हो गया था तो यह सब हमारे लिए माने सब सहन किया ऊपर से कोई कोई लोग इसमें भी कंप्लेन करते द किंतु यह डायरेक्ट डिसीप्ल को तो एटलिस्ट पता था की ना मैन को इतना कष्ट नहीं देना चाहिए जय रामबाती एक छोटा सा गांव है महापुरुष महाराज लिखते हैं और वहां बहुत कम चीज उपलब्ध है तो भी माने तरह तरह की सख्त सब्जियों और ग्वाले से कहकर दूध की भी व्यवस्था कर ली थी मैन जानती थी की कोलकाता के लोगों को चाय पीने की आदत होती है इसलिए उन्होंने हमारे लिए चाय का भी प्रबंध कर रखा था पूरे दिन बड़े आनंद में बीट गया हम लोग ताल कुकुर तालाब में खूब नहाए मैन प्रायः हम लोगों के सामने नहीं आती थी बातचीत भी नहीं करती रात में भोजन के बाद सोते समय शशि महाराज के साथ सलाह मशवरा करके यह निर्धारित हुआ की अगले दिन हम लोग रसोई बनाकर मैन को खिलाएंगे देखिए कितना यह मधुर प्रसंग है अगले दिन सुबह चाय पीने के बाद झाग मैन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया तो पहले उन्होंने हंसकर हमारी बात को उदा दिया बोली यह भला कैसे हो सकता है बेटा मैं मैन हूं कहां मैं भोजन बनाकर तुम लोगों को खिलाऊंगी पर उल्टे तुम्हीं लोग भोजन बना कर मुझे खिलाना चाहते हो फिर तुम लोग भोजन बनाओगे आंखों में पीड़ा होने लगे मैन बच्चे के लिए कैसे सोचती है खुद भोजन बनाती है खुद वह जो आग का चूल्हे पे वो उसे समय तो कितनी तकलीफ थी आज तो गवर्नमेंट की यह सब योजनाएं हैं यह प्रोजेक्ट है तो गैस का बॉटल सब घर-घर में मिलना उपलब्ध हुआ वर्ण गांव की स्त्रियों की ये सबसे बड़ी समस्या की वो चूहे पर खाना pakaayegi और झूले की जो ये धुआं होता है उससे उनको कितना कष्ट होगा तो मैन देखिए मैन बच्चे को बोल रही है की बेटा तुमको कष्ट होगा किंतु यह नहीं सोच रही की बच्चे के लिए वो खाना बनाती है तो उसको कितना कष्ट होता है की तुम भोजन बनाओगे भी तो कैसे धुएं से तो तुम लोगों की आंख में पीड़ा होने लगी वह इसी तरह की अनेक कठिनाइयां बताने लगी पर हम लोगों ने मैन की आपत्तियों को स्वीकार नहीं और है करने लगे अंत में महापुरुष महाराज मैंने कहा अर्थात यह महापुरुष महाराज ने कहा हम लोगों का ब्राह्मण जन्म है हमारे हाथ की रसोई खाने में आपको कोई आपत्ति तो नहीं होनी चाहिए ठाकुर ने भी हम लोगों के हाथ की रसोई खाई थी वगैरह-वगैरह आखिरकार मैन राजी हो गई शशि महाराज और मैंने रसोई बनाई माता जी ने प्रसन्नता पूर्वक भोजन किया और खूब उनको पसंद भी किया जिस तरह से यह सन्यासी शिष्य मैन के पास में जाते द तो किस तरह से इनका यह जो मैन के साथ में आचरण है और बाकी भक्तों का यह हम धीरे-धीरे करके पढ़ेंगे मैन के जीवन में की भक्त जब जाते हैं तो वह डिमांड करते हैं की मैन मुझे यह चाहिए मुक्ति दे दो हमको बहुत सागर पार करवा दो और फिर खाने पीने की बातों में ज्यादा डिमांड करने वाले लोग ज्यादा नहीं द की कुछ कुछ है की हमको ठीक से मतलब यह चाय वगैरा यह कंप्लेंट करने वाले पूछते लोग किंतु यह जो सन्यासी संतान द ठाकुर के सन्यासी संतान उनको पता था की मैन की सेवा हम खोल नहीं लेनी है हमको मैन की सेवा करनी है इसीलिए जब शरद महाराज ने उद्बोधन का उद्बोधन बनाया ये जो कोलकाता में माहिर बाती उद्बोधन माहिर बाती तो वहां पे क्या हुआ की शरद महाराज खुद मैन की सेवा में नियुक्त द और शरद महाराज के अंडर में बहुत सारे युवा सन्यासी ब्रह्मचारी द जो की मैन की सेवा कर रहे द वहां पे जाके मैं आपको खाना बनाना ये भक्तों की सेवा वो वगैरा नहीं करना पड़ता था क्योंकि फिर तो यह जो महिला पकते भी थी और लेडी dipoti भी थी वहां पे और ये सन्यासी शिष्य बीट है तो वहां पर मैन बिल्कुल राज राजेश्वरी की तरह रहती थी सब कुछ मैन के लिए तैयार हो जाता था मैन सिर्फ ठाकुर की पूजा करती थी और फिर जो है जो भक्त आते द उनके साथ में बात करके आध्यात्मिक कोई उपदेश देना या तो दीक्षा देना मैन अपना पूरा जीवन इस तरह से रह सकती थी किंतु फिर भी माने ये ये सिलेक्ट किया मैंने ये ठीक किया की वो आधा दिन जो है साल के वो जयरामबाती जाकर के रहेगी वहां पे नाक को कोई सूख-सुख सुविधा है नहीं ये मैन के संज्ञा सी है सन्यासी भक्तगण वगैरा वहां पे जाते हैं बाकी सेवा करने के लिए वहां पे वो मच्छर वगैरा है तो बार-बार बीमारी ज्वार हो जाता है मैन को खाने पीने की सुविधा और जो भक्त आएंगे मैन को खुद को अपने हाथों से उनकी सेवा करनी पड़ती है तो यह कष्ट सहन करने के बाद में भी माने यह अभी मे ये सब कंसिस्ट्स तो डिसीजन नहीं करती जगदंबा का जो मैन होता है वह तो अपने सहज स्वाभाविक ऋतिक चलता है किंतु हम जो मनुष्य है हमको इस तरह से लॉजिक समझ में आता है की यदि मैन चेहरा के आसपास के कितने लड़के लड़कियां उनसे प्रभावित हुए द बहुत सारे लड़के उनके पास में सन्यास भी ग्रहण किया था वह शायद नहीं हो पता ठाकुर और स्वामी लड़के लड़के द किंतु ग्राम में क्या होता है की उनकी भी तो समस्याएं हैं उनकी दैहिक समस्याएं हैं आर्थिक समस्याएं हैं आध्यात्मिक समस्याएं हैं तो महादी गांव में नहीं जाती तो ग्रामोधर नहीं होता और खासकर के भारत में हमको यह जरूरत है की यह जो सिटी के ऊपर में जो सब समय बर्डन बढ़ता जाता है ना गांव में से लोग खेती वगैरा छोड़कर के शहर में आकर रहते हैं फिर शहर में रोजगार नहीं मिलता तो बेकरी है उसका प्रमाणन अनइंप्लॉयमेंट उसका प्रमाण बढ़ता ही जाता है फिर उन एंप्लॉयमेंट होता है जॉब नहीं मिलती बिजनेस नहीं कर सकते इससे हमारा जो अनइंप्लॉयमेंट रेट बहुत ज्यादा हाई है तो यह लड़के लड़कियों को जॉब नहीं मिलने से क्या करेंगे ये जितना भी यह बेड हैबिट से कूट है वह सब चीजों में चले जाएंगे और भी बहुत सारी समस्या ये युवाओं में ये कितनी बढ़ती जाती है जो स्ट्रेस है आजकल मैं कुछ दिनों पहले मैंने पढ़ा वह न्यूज़ पेपर में की वो जो कोटा है जहां पे कंपटीशन एग्जाम की प्रिपरेशन होती है राजस्थान में वो कहां एक सप्ताह में ना की छह-सात लड़के लड़कियों ने आत्महत्या कर ले तो ये शहर के ऊपर में ये जो बर्डन बढ़ता जाता है उसका रीजन यह है की गांव में कुछ है ही नहीं अभी तो चलो अब गवर्नमेंट की इतने सारे स्कीम्स से और डेवलपमेंट की एजुकेशन गारंटी स्कीम एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम वगैरा वगैरा समस्या का वो थोड़ा सा समाधान हुआ है उसे समय तो कुछ नहीं था तो यदि मैन घाव में जाकर के खां का पुनरुद्धार नहीं करेगी तो क्या होगा की हमारे जो महानगर है वह इस तरह से पापुलेशन के बारे में ऐसे दब जाएंगे की फिर महानगरों का भी है जो फिर क्राइम बढ़ जाएगा अल्टीमेटली क्या होता है की यदि आपको लीगल एंप्लॉयमेंट नहीं मिलता है तब इलीगल चीजों के पीछे में चले जाएंगे खाना पीना तो है परिवार का भरण पोषण तो करना ही है तो इस तरह से शहरों पे ये बाहर ना पड़े गवन का भी उन्नति हो एक चीज और दूसरी चीज देखिएगा की जो हमारे आध्यात्मिक जो ये जो प्राण धारा जो है हमारी वो गांव में ज्यादा स्ट्रांग्ली बहती है गांव में क्या होता है की ये शायद आजकल के गांव की बात नहीं कर रहा है अभी सब जगह मोबाइल टावर वगैरा हो गए हैं पहले क्या होता था की मेंस ऑफ कम्युनिकेशन जो है वगैरा बहुत कम द तो उसे दिन में खेत में कम किया या जो भी छोटा मोटा कम किया और फिर शाम को या रात को घर में जाकर के वो अपने परिवार जनों के साथ में बैठते द और ये जो खास करके बंगाल में है या गुजरात में इतना मुझे पता है की गुजरात में दायरा होता है बंगाल में यात्रा होती है तो है की यह जो धार्मिक जो नाटक वगैरा है जो धार्मिक पुराण के पत्र है उनका नाटक वगैरा वहां पर अभिनय होता है ठाकुर खुद हमने देखा है की यात्रा में वो खुद शिव का रूप सच करके उन्होंने अभिनय किया था तो ये सब देखकर के क्या है की मैन के ऊपर में इतना प्रेशर भी नहीं होता जितना शहर में होता है तो वहां पे मुक्त मैन से लोग अपने जीवन का एक पोषण अपने दिन का एक समय आध्यात्मिक चिंतन में लगा सकते हैं तो ये यदि गांव का यह जो प्राण शक्ति है गांव के भीतर की वह यदि चली जाएगी तो सब तरह से भारत को नुकसान होगा तो मा इस तरह से लॉजिकल ही नहीं सोचती जगदंबा का हृदय है सबके लिए खुला है देखा की कोलकाता में जितनी जरूरत है उतनी जयरामबाती के आसपास में भी जरूरत है तो मैन वहां पर जाते द किंतु हम लोग थोड़े से मॉडर्न थिंकिंग वाले हैं तो इसलिए हमको इस तरह से भी सोचना चाहिए की यहां पर भी बाकी आप जितने भी राज्य में देखेंगे तो अभी जैसे मैं मेरा पोस्टिंग नागपुर में था महाराष्ट्र में तो एक बार हम मुझे मैं वहां पे गया था शेगाव बोलकर के एक जगह पे है वहां पे गजानन महाराज करके एक है तो उनका भी मैंने देखा की वो वारकरी संप्रदाय उनका गांव गांव में उनके ये जो मंडल बने हुए हैं वो कीर्तन वगैरा करते हैं वो और वो क्या है की लोग उसमें इतने अनमोल हो जाते हैं की वो मतलब उनका जो समय है बहुत अच्छा से वो भगवान के नाम गुण कीर्तन करने में यात्रा वगैरा करने में निकल जाता है तो इस तरह से सभी राज्यों में ऐसा है की गांव में गांव गांव जाकर के संत लोगों ने मंडलीय बनाई है और वहां पर बहुत अच्छे आदमी उपदेश वगैरा डैन किए हैं तो कोलकाता में यही कम और जयरामबाती वगैरा में ये मैन ने खुद ने किया है अभी ऑफ कोर्स हमको यह पता है की मैन जब गांव में जाती है तो सिर्फ वही एक एरिया नहीं किंतु भारत के जितने भी गांव है सभी मैन का आशीर्वाद मिलेगा क्योंकि आशीर्वाद जो है वो समय या तो यह जो लोकेश स्थल है उससे सीमित नहीं होता आशीर्वाद अमर है वो सब समय के लिए वहां पर रहता है और सब जगह पे वो sarvvyaprut होता है तो आज के लिए इतना ही कल फिश है ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्ण प्रणाम हमारा आवाज़ तो ठीक है