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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

Swami Vivekananda's Cosmos Microcosm: Summary And Outline (1) 15 May 2024

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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः तो जिस तरह से हमने कॉस्मस माइक्रो कोसम वह जो पूरा हमने देखा मैक्रो कजम का स्लाइड शो वैसे ही ये कॉस्मो माइक्रो कजम ऑन ए ह्यूमन लेवल जो स्वामी जी का जो लेक्चर है उसका पूरा स्लाइड शो मैंने बनाया है तो मैं स्क्रीन शेयर करता हूं इस पूरे स्लाइड शो को हम देखेंगे और उसके बारे में डिस्कस करेंगे तो एक के बाद एक स्लाइड्स लेते हैं और उसके बारे में देखते हैं कॉस्मस माइक्रो कजम कंप्लीट वर्क्स का यह पार्ट है यह प्रवचन और इस स्लाइड शो में जितने भी अ टेक्स्ट है जितने भी कोटेशंस से स्वामी जी के अपने हैं मैंने अपना एक भी शब्द इसमें ऐड नहीं किया है अदर देन के ऊपर में जो हेडिंग दिया है प्रत्येक को प्रत्येक स्लाइड को वही हेडिंग ही मैंने अपना एक ऐड किया है बाकी कोटेशन पूरे स्वामी जी के हैं स्वामी विवेकानंद के हैं और यहां पर रेफरेंस भी दिया हुआ है 2.22 यह जो रेफरेंस है उसका अर्थ है कि कंप्लीट वर्क्स वॉल्यूम टू पेज नंबर 112 तो यह है फर्स्ट स्लाइड स्वामी जी प्रवचन की शुरुआत करते हैं क्या कहते हैं द ह्यूमन माइंड नेचुरली वांट्स टू गेट आउटसाइड टू पियर आउट ऑफ द बॉडी एज इट वेर थ्रू द चैनल्स ऑफ द ऑर्गन्स ये ह्यूमन माइंड जो है वो नेचुरली बाहर की बाहर के जगत की ओर प्रकृति की ओर धावित होता है आंखों से सब दृश्य को देखना चाहता है कानों से सब कुछ सुनना चाहता है जिह्वा से टेस्ट करना चाहता है हाथों उ से स्पर्श करना चाहता है यह बाह्य जगत की ओर ही मनुष्य का मन नेचुरली प्रवाहित होता है द फर्स्ट क्वेश्चंस दैट अरोज इन द ह्यूमन सोल वेर अबाउट द एक्सटर्नल वर्ल्ड तो नेचरली बच्चा जब जन्म लेता है तो सबसे पहले तो अपनी मां को ही देखेगा यह मां जिसकी गो जिसके पेट में वह इतने सालों से इतने महीनों से जो बड़ा हो रहा था वही मां ही तो उसका सबसे पहला वो उसका जगत है तो मां कौन है मां का स्वभाव क्या है मां के साथ में उसका क्या रिलेशन है बच्चे के मन में जदिया प्रकट हो गे तो यही विचार सबसे पहले प्रकट होंगे तो वैसे ही इस प्रकृति की गोद में हमने जन्म लिया है यह पृथ्वी माता के ऊपर में धरती माता के ऊपर में तो जब भी हमारी यह थिंकिंग फैकल्टी ओपन होगी जब भी हम इस इवोल्यूशन के इस स्तर पे आ जाए जबकि ये शुधा ये जो अ ये जो मेरे दैनंदिन जीवन के जो स्ट्रगल है कि खाना है आहार निद्रा भय और मैथुन शास्त्र में इस तरह से कहा गया है कि हमारे सबसे बेसिक क्या नीड्स है तो सबसे बेसिक नीड्स जब समाप्त हो जाती है तब एक हायर थिंकिंग फैकल्टी ओपन होती है तब हमारे सामने यही प्रश्न सबसे पहले खड़ा होता है कि ये पृथ्वी यह समुंदर यह पहाड़ यह नदियां यह जंगल यह प्राकृतिक सौंदर्य ये प्राकृति का यह एक एक विकट स्वरूप यह सब क्या है हमारा इसके साथ में रिलेशन क्या है एस द क्वेश्चन वेंट डीपर एंड डीपर जैसे जैसे हमारा एनालिसिस डीपर एंड डीपर जाता गया द क्वेश्चन वाज आस्क ऑफ मैनस ओन सोल मनुष्य ने इस प्रश्न को अपने ही ओर डायरेक्ट कर दिया कि मेरा सही स्वरूप क्या है फ्रॉम द मैक्रो कजम द क्वेश्चन वाज रिफ्लेक्टेड बैक टू द माइक्रो कजम यह पूरी प्रकृति रात को जब अंधेरा होता है तो इतने सारे वो सितारे चमकते हुए दिखते हैं यह चांद दिखता है दिन के समय यह सूरज दिखता है यह बादल दिखते हैं ये पूरा विश्व ब्रह्मांड यह कॉस्मो ये कॉस्मो क्या है जैसे-जैसे हमारा इंटेलेक्चुअल स्पिरिचुअल इवोल्यूशन होता गया वैसे-वैसे ही यह प्रश्न बाहर के जगत की ओर से अंदर के जगत की ओर रीडायरेक्ट होना शुरू हुआ फ्रॉम द एक्सटर्नल वर्ल्ड द क्वेश्चन वाज रिफ्लेक्टेड टू द इंटरनल दिस क्वेश्चनिंग ऑफ द इंटरनल मैन कम्स विथ ए हायर स्टेट ऑफ सिविलाइजेशन ये जो मैं अपने को खुद को यह प्रश्न करता हूं कि मेरा सही स्वरूप क्या है यदि किसी के साथ में मेरा झगड़ा हुआ तो जिसका एक्सटर्नल माइंड है वह सामने वाले के दोष देखेगा किंतु जिसने एक आंतर दृष्टि प्राप्त की है वह यह सोचेगा कि मेरे में तो ऐसी कौन सी कमी है कि जिसकी वजह से उसको आकर के मेरे साथ में झगड़ा करना पड़ा है ऐसा नहीं है कि सब समय अपना ही फॉल्ट होता है बहुत बार देखते हैं कि सामने वाले की ग्रीड सामने वाले का लोभ सामने वाले की दूसरों के ऊपर में अत्याचार करने की इच्छा इसी वजह से हमारा उसके साथ में झगड़ा होता है ऐसा बहुत बार देखते हैं किंतु फिर तो क्वेश्चन है कि अपने को स्ट्रांग करें भीतर से इतना स्ट्रांग करें कि सामने वाला 10 बार सोचे कि झगड़ा करने से पहले तो पहले तो अपने को क्वेश्चन करना दिस कम्स विथ हायर स्टेट ऑफ ग्रोथ हायर स्टेट ऑफ सिविलाइजेशन इसीलिए जैसे-जैसे सिविलाइजेशन डेवलप होती है वैसे-वैसे ही उस सिविलाइजेशन की उस नेशन की मिलिटरी सिस्टम जस्टिस सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम पॉलिटिकल सिस्टम इकोनॉमिक सिस्टम साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूशंस ऑफ हायर लर्निंग यह सब ज्यादा से ज्यादा स्ट्रांग होते जाते हैं अपनी सनातन भारतीय परंपरा थी कि ये समाज को चार वर्ण में विभाजित कर दिया था कि यह ब्राह्मण है यह क्षत्रिय है तो क्षत्रिय का कार्य है कि समाज को सुरक्षित रखना देश या राज्य जनपद को सुरक्षित रखना ब्राह्मण का जो कार्य है कि यह जो विद्या अर्जन हुई है हमारे पुरखों ने जो सालों साल तपस्या करके जब ध्यान मेडिटेशन करके आंतर दृष्टि से फिलोसोफी डेवलप करके ये अ धनुर्वेद हो ना कि आयुर्वेद हो धनुर्वेद अर्थात की शस्त्र विद्या और आयुर्वेद अर्थात की आरोग्य विद्या जितनी भी विद्या है हो सब वास्तुशास्त्र कितनी सारी हमारी वैदिक विद्या एं हैं जो कि आज तो लुप्त हो चुके हैं किंतु उस समय सब वंश परंपरागत ब्राह्मणों ने यह सब विद्याओं को जीवित रखा था तो दिस क्वेश्चनिंग ऑफ इंटरनल मैन कम्स विद हायर स्टेट ऑफ सिविलाइजेशन अच्छा अभी प्रश्न होता है कि यह जो प्रश्न हम करते हैं यह प्रश्न कौन सा है क्या प्रश्न है जो कि हायर स्टेट ऑफ सिविलाइजेशन करती है इस थेर नथिंग परमानेंट इन दिस इनेसेंट ह्यूमन लाइफ यह जो परिवर्तनशील मनुष्य जीवन है क्या इसमें सनातन हमेशा रहने वाला अजर अमर क्या कुछ नहीं है इस देर नथिंग दे हैव आस्क व्हिच डज नॉट डाई अवे व्हेन दिस बॉडी डाईज यह जब शरीर जब मृत्यु में यह जो अग्नि में समर्पित हो जाता है अग्नि यह जो जब उसका मृत्यु होता है इसको चीता पर जला दिया जाता है यह शरीर की यह जो पंचवा महाभूत में विघटित हो जाता है तो क्या कुछ नहीं बचता यह जो पंच महाभूत से आए थे पंच महाभूत में विलीन हो गए मिट्टी का शरीर मिट्टी में मिल गया क्या इसके अलावा इस शरीर में और कुछ नहीं है क्या इस देर नॉट समथिंग लिविंग वेन दिस फ्रेम क्रम ल्स इनटू डस्ट यह शरीर जब मिट्टी में मिल जाएगा तो क्या कुछ नहीं रहेगा इज देयर नॉट समथिंग व्हिच सर्वाइव्स द फायर व्हिच बर्न्स द बॉडी इनटू एस यह जो चीता पे जब शरीर जला दिया जाता है इसकी राख हो जाती है क्या कुछ भी नहीं बचेगा एंड इफ सो व्हाट इज इट्स डेस्टिनी यदि कुछ बच जाता है तो उसका क्या स्वरूप है वेयर डज इट गो वनस डिड कम यदि कुछ बच गया तो वह कहां से आया है वह कहां जाने वाला है अभी यह शुरुआत हुई हमारी आंतर यात्रा की यह पूरा जो स्लाइड शो है आपने आप देखेंगे कि जब मैक्रो कजम का स्लाइड शो था वह थोड़ा सा छोटा था क्योंकि उसमें जो आर्गुमेंट थी थोड़ी सी कंडेंस थी यहां पे स्वामी जी बड़ी ही विस्तृत रूप से आर्गुमेंट करते हैं इसलिए मैंने इस स्लाइड शो को चार पार्ट्स में डिवाइड कर दिया है तो यह जो पहला पार्ट है दैट इ इज द एनाटोमी ऑफ माइक्रो कजम जब हम यह प्रश्न करने की शुरुआत करते हैं कि मेरा सही स्वरूप क्या है पंचमहाभूत के मिट्टी के बने हुए इस देह के परे भी क्या कुछ है कि नहीं तो इस प्रश्न का उत्तर यह पार्ट वन में हमको स्वामी जी देते हैं स्वामी जी इसको पूरा एनालाइज करते हैं अपने इस देह को क्या कहते हैं आई एम लुकिंग एट यू हाउ मेनी थिंग्स आर नेसेसरी फॉर दिस विजन मैं यदि आपके सामने दिखता हूं तो जो मुझे आप दिखते हैं वो देखने की क्रिया के लिए कौन-कौन सी चीजों की आवश्यकता है तो उत्तर है फर्स्ट द एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट्स देन द ऑर्गन टू व्हिच दिस एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट विल कैरी द सेंसेशन एंड लास्टली द ऑर्गन इट सेल्फ मस्ट बी जॉइन टू द माइंड पहले तो यदि मैं आपके सामने देखूंगा तो देखने के लिए आंख चाहिए अनफॉर्चूनेटली जिनकी आंख नहीं है जो कि दिव्य चक्षु है उनका बाकी सब शरीर चाहे जितना भी सुस्त सबल हेल्दी क्यों ना हो आंख नहीं रहने की वजह से वे लोग देख नहीं पाएंगे तो यह जो एक्सटर्नल मशीन जो है इंस्ट्रूमेंट वो है आंख वो सबसे पहले चाहिए दूसरा है कि आंख का कनेक्शन ब्रेन के साथ में होना चाहिए क्योंकि आज एनाटॉमी और यह ह्यूमन एनाटॉमी का स्टडी करके साइंटिस्ट लोगों ने पाया है कि ब्रेन ही एक्चुअली देखता है ब्रेन यह सब सिग्नल ग्रहण करता है आंख से और वही इस सिग्नल को इंटरप्रेट करता है यदि ब्रेन नहीं रहेगा या जो ब्रेन का जो पार्ट है जहां पे ये विजुअल सिग्नल जाते हैं वो जद डैमेज होगा तो फिर हम आंख स्वस्थ रहने के बावजूद नहीं देख पाएंगे यह कैसा है जैसे कि मेरे पास में यह मोबाइल है मोबाइल में मेरे पास में बहुत अच्छा कैमरा है तो कैमरे से मैं फोटो तो खींचता हूं किंतु जो ऐप है जो कि इस फोटो को प्रोसेस करती है या तो फिर इसके भीतर का जो माइक्रोप्रोसेसर है जो कि इसको प्रोसेस करता है इसको स्टडी करता है इसको एनालाइज करता है तो वही जद डैमेज होगा तो वो जितना ही अच्छा कैमरे का लेंस होगा फोटो नहीं खींच पाएगा मेरा मोबाइल तो वैसे ही यहां पे ब्रेन का इतना इंपॉर्टेंस है और आखिर में ब्रेन का माइंड के साथ में मन के साथ में कनेक्शन होना आवश्यक है ब्रेन को यदि हम हार्डवेयर कहेंगे तो माइंड को कहेंगे सॉफ्टवेयर या तो फिर ऐप तो यदि ये यह जो मनुष्य देह की जो एनालॉजी मोबाइल के साथ में करनी है तो आंख है वह कैमरे का लेंस ब्रेन है वह माइक्रोप्रोसेसर और माइंड है वह प कैमरा एप जो कि इस ये चित्र को यह विजन को हमारे सामने प्रॉपर्ली इंटरप्रेट करके रखता है तो यह तीन चीजें चाहिए यदि मेरे पास में मुझे इस आंखों से कुछ भी देखना है तो अभी स्वामी जी क्या कहते हैं व्हेन द माइंड इज नॉट जॉइन टू द ऑर्गन द ऑर्गन एंड द ईयर मे टेक द प्रशन एंड यट वी शल नॉट बी कॉन्शियस ऑफ इट ऐसा बहुत बार होता है लाइब्रेरी में बैठा हुआ हूं मेरी पूरा अटेंशन किताब पढ़ने के ऊपर में ही है और यहां पर चाहे जितना ही हल्लागुल्ला हो जाए 10 लोग आकर के गप लगा कर के चले जाए मैं सुनता हूं मैं देखता भी हूं शायद किंतु मेरा मन ये सब इंप्रेशंस को कभी भी ग्रहण नहीं करता यहां पर मैंने कुछ कुछ एब्सेंट माइंडेड लोगों को देखा है यह तो हो गया कि एक पॉजिटिव स्पिन कि हां मेरा मैं और किसी अच्छी चीज में एंगेज था बोलकर के मेरे मन ने यह सब बाकी चीजें ग्रहण नहीं की अब अब जैसे कि अर्जुन है तो बाकी सबको पूछा गया कि यह पंखी को पंखी की आंख के ऊपर में तीर मारना है तो बाकी सबको पूछा गया कि आपने क्या-क्या देखते हैं तो वह कोई कहेगा कि हां यह पेड़ दिखता है यह डालियां दिखती है यह फल दिखता है यह सब कुछ दिखता है किंतु जब अर्जुन को पूछा गया कि क्या दिखता है तो उसने कहा सिर्फ पंखी की आंख ही दिखती है क्यों क्योंकि पंखी की आंख के ऊपर में ही तीर मारना है तो ऐसे ही जब हम किसी चीज पे फोकस करते हैं तो बाकी सब चीजें चली जाती है तो ऐसे ही यह मन का यह इंपॉर्टेंस है यह तो एक पॉजिटिव हो गया नेगेटिव भी है जो लोग एब्सेंट माइंडेड होते हैं व उनका मन माइंड के उ 10 बार कह दो कि यह काम इस समय करना है इस तरह से करना है आखिर में भूल ही जाएंगे तो ऐसा नहीं है कि उनको सुनाई नहीं देता अपना इंस्ट्रक्शन ऐसा नहीं है कि हम जब बता बताते हैं तो वह देखते नहीं है देखते भी है सुनते भी है ब्रेन के भीतर में प्रोसेस भी होता है किंतु उनका माइंड और कहीं पे होता है तो यह माइंड का ये इंपॉर्टेंस है अभी जब माइंड है तो उसके साथ में एक हायर फैकल्टी है जिसको कहेंगे बुद्धि मन बुद्धि इंटेलेक्ट द माइंड टू इज ओनली द कैरियर इट हैज टू कैरी द सेंसेशन स्टिल फॉरवर्ड एंड प्रेजेंट इट टू द इंटेलेक्ट ये जो मन जो इंटरप्रेट करता है कि हां मैं अभी मैं एक जगह पर बैठा हुआ हूं और मेरे सामने जो कुछ भी चल रहा है मैं देख रहा हूं तो मुझे जो दिखता है उसके लिए मेरी आंख वो देखने के दृश्य को मेरे ब्रेन तक पहुंचाती है ब्रेन उसको उस प्रोसेस करके माइंड तक पहुंचाता है माइंड उसको एक्चुअली ग्रहण करता है और इंटेलेक्ट ले जाता है इंटेलेक्ट डिसाइड करेगा कि अभी मुझे क्या करना है द इंटेलेक्ट इज द डिटरमाइंड फैकल्टी एंड डिसाइड्स न व्हाट इज ब्रॉट टू ईट रास्ते प जा रहा हूं शेर आ गया तो आंख शेर को देखती है ब्रेन मुझे बताता है कि हां यह शेर है और शेर आदमी को खाता है माइंड उसके साथ में इमोशनल रिएक्शन ऐड करता है उसको कहते हैं फियर किंतु इंटेलेक्ट मुझे बताएगा कि फाइट और फ्लाइट कि मुझे उसके साथ में फाइट करनी है क्योंकि मेरे पास में बहुत अच्छी बंदूक है या तो फिर मेरे पास में अपने स्व बचाव के लिए कोई साधन नहीं तो भैया अच्छा यहां से दौड़ कर के चले जाए और कहीं पे तो यह डिसीजन मेकिंग करता है इंटेलेक्ट और इंटेलेक्ट के ऊपर में है आत्मन किंग अपॉन द थ्रोन स्वामी जी की भाषा में स्टिल दिस इज नॉट सफिशिएंट द इंटेलेक्ट इज द डिटरमाइंड एंड डिसाइड्स अपॉन व्हाट इज ब्रॉट टू इट स्टिल दिस इज नॉट सफिशिएंट द इंटेलेक्ट मस्ट कैरी फॉरवर्ड एंड प्रेजेंट द होल थिंग बिफोर द रूलर इन द बॉडी द ह्यूमन सोल द किंग न द थ्रोन यह जो कुछ भी मैंने देखा कि शेर आ रहा है मेरे सामने और जब मन और बुद्धि ने यह ठीक कर लिया कि शेर एक खतरा है अपने को डिफेंड करना है किस तरह से डिफेंड करना है जद यहां से दौड़ के चला जाऊं ना कि मैं उसका सामना करूं तो यह जो पूरी प्रोसेस हो रही है इसको एनर्जी कौन देता है इसको यह जो मन और बुद्धि जो जीवंत है जो जागृत है वो जीवन कौन प्रदान करता है वरना डेड बॉडी के भीतर में भी तो हो सकता है कि आंख भी अच्छी है ब्रेन भी अच्छा है यह जो डेड बॉडी जो जिन लोग बहुत सारे लोग के पता है ना अपने ऑर्गन डोनेट करके जाते हैं आंख डोनेट करके जाते हैं किडनी डोनेट करते हैं हार्ट डोनेट करते हैं कि जब मेरा मृत्यु होगा उसके बाद में मेरी आंखों को किसी को दे देना जो कि दिव्य प्रज्ञा चक्षु है तो प्रज्ञा चक्षु को देने से मेरी आंख फिर दूसरे शरीर से देखती रहेगी तो ऐसा तो नहीं है कि शरीर का मृत्यु होने से आंख चली जाती है आंख तो फिर भी जीवंत है किडनी है ब्रेन है यह सब तो फिर भी जीवंत है किंतु डेड बॉडी और जीवंत शरीर और मृत शरीर इन दोनों में डिफरेंस क्या है मृत शरीर में आत्मन का प्रकाश नहीं है और जीवंत शरीर में आत्मन का प्रकाश है बिफोर हिम दिस इज प्रेजेंटेड इस आत्मन के सामने यह पूरा दृश्य श्राव विश्व जगत उनके सामने प्रकट किया प्रेजेंट किया जाता है एंड देन फ्रॉम हिम कम्स द ऑर्डर यह जो पुराने जमाने में जो बड़े-बड़े चक्रवर्ती राजा थे तो वह जो राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर ने किया था तो सब जितने भी राजा महाराजा थे उस अंचल के उस पूरे भारतवर्ष में से उन्होंने आकर के युधिष्ठिर के सामने प्रणाम करके उन्होंने भेट सोगा उनको अर्पित की थी क्योंकि वह चक्रवर्ती राजा है तो ऐसे ही राजा के साम हमने आपको भेट सौगात अर्पण करनी होती है उनको खुश रखना होता है इन टर्न राजा आपकी रक्षा करेगा दुश्मनों की चढ़ाई होगी दुश्मनों का आक्रमण होगा तो यह चक्रवर्ती राजा अपना सैन्य भेज देगा जिससे कि ये उसके अंडर में जितने राजा जमींदार वगैरह जो कोई भी है वो उनसे वो दुश्मन से रक्षा पाए तो यह जो पुराना जो ये अपना ये जो एक जनरल आइडिया है उसी को स्वामी जी यहां पर रखते हैं एनालॉजी के रूप में उपमा के रूप में इस राजा के सामने अपना पूरा शरीर मन बुद्धि यह ब्रेन ये ये जिनको कहेंगे कि यह ये जो यह है आंख कान नाक वगैरह ज्ञानेंद्रियां ये ज्ञानेंद्रियां सब इस राजा के सामने यह पूरा प्रेजेंट करती है दृश्य श्राव्य विश्व को और यह राजा ठीक करता है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है मनुष्य जीवन क्या है एक अल्टीमेट पर्पस क्या है अपना अल्टीमेट पर्पस है जब ये कंक्लूजन तो पता चलेगा कि वो तो आत्मज्ञान या तो फिर यह ब्रह्म साक्षात्कार ईश्वर ईश्वर साक्षात्कार तो किंतु इसके लिए जो प्रेजेंटेशन होना है वो इस राजा के सामने होगा एंड द ऑर्डर गोज डाउन इन द सेम सीक्वेंस टू द इंटेलेक्ट टू द माइंड टू द ऑर्गन्स एंड द ऑर्गन्स कन्वे इट टू द इंस्ट्रूमेंट्स एंड द परसेप्शन इज कंप्लीट जब राजा ये ऑर्डर देगा जब पता चलेगा कि ये जितने भी उनकी आंख है ब्रेन है माइंड है इंटेलेक्ट है वहां से जो भी ऑर्डर आया कि हां शत्रुओं का आक्रमण हुआ है तो राजा कहेगा कि अच्छा सैन्य को युद्ध के मैदान में भेजो और शत्रुओं का विनाश करो तो यह जोब ऑर्डर आएगा तो राजा अपने वजीर को देगा वजीर फिर सेनापति को देगा सेनापति अपने सैन्य के जितने भी कमांडर्स हैं तो कमांडर्स को बटालियन कमांडर्स जिनको कहते हैं तो यह बटालियन कमांडर्स को देंगे और फिर यह कमांडर उनके अंडर में जितने भी सोल्जर्स हैं उनको ऑर्डर देंगे कि चलो युद्ध के मैदान में जाने का समय आ गया है अपने ने शस्त्र अस्त्र शस्त्र सब सज्जित हो जाओ पहन करके बख्तर वगैरह यह जो तो यह जो ऑर्डर पहले तो ऑर्डर ऊपर में जाता है राजा के पास में इंफॉर्मेशन राजा के पास जाती है राजा से के पास से ऑर्डर आता है नीचे में सो दिस एंटायस कंप्लीट अभी यह जो आंख ब्रेन माइंड और इंटेलेक्ट यह जो है इसको स्वामी जी दो डिवीजन में बा ते हैं क्या कहते हैं द इंस्ट्रूमेंट्स आर इन द एक्सटर्नल बॉडी द ग्रॉस बॉडी ऑफ मेन बट द माइंड एंड द इंटेलेक्ट आर नॉट यह जो आंख और ब्रेन है ये जो ज्ञानेंद्रिय है और जो ब्रेन है जो कि हमारे स्थूल देह के भीतर में है जब यह मेडिकल साइंस के स्टूडेंट जो होते हैं शरीर को डिसेक्ट करते हैं वो उनको डिसेक्शन का वो होता है उनका एक कोर्स होता है तो हमारे बॉडी के भीतर में कितनी वनस है यह जो इंटरनल ऑर्गन्स है उनका कहां पे लोकेटेड है उसका क्या फंक्शन है वह बॉडी को डिसेक्ट करते हैं तो डिसेक्ट जब करेंगे उनको यह आंखें दिखेगी ये आंखों के पीछे का ब्रेन दिखेगा किंतु क्या नहीं दिखेगा माइंड और इंटेलेक्ट दे आर इन व्हाट इज कॉल्ड इन हिंदू फिलोसोफी द फाइनर बॉडी एंड व्हाट इन क्रिश्चियन थियोलॉजी यू रीड ऑफ एज द स्पिरिचुअल बॉडी ऑफ मैन फाइनर वेरी मच फाइनर देन द बॉडी एंड यट नॉट द सोल दिस सोल इज बियोंड देम ऑल यह जो मेडिकल साइंस के स्टूडेंट जब बॉडी को डिसेक करेंगे आंखें दिखेगी कान दिखेगा और आंख और कान का जो न्यूरल नेटवर्क है वह सब तो उनको दिखेगा किंतु यह जिनको कहते हैं मन या जिनको कहते हैं बुद्धि यह नहीं दिखेगा तो अभी आजकल का जो मॉडर्न कंक्लूजन है कि ब्रेन ही सब कुछ चलाता है ब्रेन इज द मेन ऑर्गन इन अवर बॉडी तो हम लोग कहते हैं हम हिंदू शास्त्र कहता है कि यह जो स्थूल देह है इसके भीतर में एक सूक्ष्म देह विराजमान है जो कि हमारे जो बाइन कुलर्स है फिर यह जो एनाटोमी ये जो डिसेक्शन के जो इंस्ट्रूमेंट है इसके द्वारा हमको नहीं दिखते आंखों से नहीं दिखते हाथों से स्पर्श नहीं कर सकते ज्ञानेंद्रिय और कर्मेंद्रिय के माध्यम से हम इन को ग्रहण नहीं कर पाएंगे इसको कहेंगे सूक्ष्म शरीर और यह मान और बुद्धि इसी सूक्ष्म शरीर के ही पार्ट है इसी को किंतु साथ-साथ में ही स्वामी जी एक डिस्टिंक्शन करते हैं सूक्ष्म शरीर आत्मन नहीं है जिनको कि सोल कहते हैं अभी यहां पर स्वामी जी ने क्रिश्चन थियोलॉजी का सहारा लिया तो है कहा तो है कि जिसको कि क्रिश्चन थियोलॉजी में स्पिरिचुअल बॉडी कहते हैं वगैरह वगैरह किंतु क्रिश्चियन थियोलॉजी में आत्मन और यह सूक्ष्म शरीर इन दोनों के बीच का डिस्टिंक्शन इतना स्पष्ट नहीं है शायद कोई कोई टेक्स्ट आपको दिख जाएगी जहां पे डिस्टिंक्शन होगा किंतु हिंदू धर्म में ये जो क्लियर डिस्टिंक्शन है कि सूक्ष्म शरीर अलग है और यह आत्मन अलग है ये क्लियर डिस्टिंक्शन आपको और किसी भी फिलोसोफी में नहीं दिखेगा दिस इज द यूनिकनेक्ट है सूक्ष्म शरीर है और जब सूक्ष्म शरीर का नाश हो जाएगा तब हमको निर्वाण प्राप्त हो जाएगा जबकि हिंदू धर्म एक स्टेप आगे जाकर के कहता है कि यह सूक्ष्म शरीर का जब नाश हो जाएगा तब यह आत्मन में हम स्थित हो जाएंगे सूक्ष्म शरीर के ऊपर में भी जो एक हायर स्टेज है व है आत्मन उसमें हम स्थित हो जाएंगे दिस इज द यूनिकनेक्ट के परे भी एक अल्टीमेट अस्तित्व को यह स्वीकार करता है जस्ट एज द बॉडी हैज इट्स प्रोग्रेस एंड डिकेडेंस सो आल्सो हैज द माइंड एंड देयर फॉर द माइंड इज नॉट द सोल बिकॉज द सोल कैन नाइ दर डिके नॉर डिजनरेट यह सूक्ष्म शरीर और आत्मन के बीच का डिफरेंस क्या है जैसे कि स्थूल शरीर है मेरा यह शरीर जब जन्म हुआ तो कितना मेरा 8 10 केजी ना की इतना वेट होगा जो कि नए हो ज में हुए बच्चे का होता है आज मेरा वेट हो सकता है 60 70 केजी होगा तो यह जो परा मेरा वेट बढा मेरे बाल सफेद हो रहे हैं यह जो बुढ़ापा मेरे शरीर में अभी वो धीरे-धीरे करके असर कर रहा है और भी जितना जितना समय जाएगा वह शरीर मेरा जैसे झुकता ही जाएगा खाने की देखने की सुनने की ये जो कैपेसिटी है वो क्षीण होती जाएगी तो यह जो युवानी बचपन से युवानी युवानी से मध्यम मिडल एज और मिडल एज से वृद्धावस्था यह जो अपनी यात्रा है शारीरिक देह में हमको बड़ी स्पष्ट दिखती है तो वैसे ही यह सूक्ष्म शरीर के ऊपर में भी इसकी असर होती है हालांकि देह के साथ में सूक्ष्म शरीर का इतना डायरेक्ट रिलेशन नहीं है ऐसा हो सकता है कि किसी का सूक्ष्म शरीर जैसे-जैसे वो एक हेल्दी लाइफस्टाइल जीता है ना फिजिकली एंड मेंटली फिट होता है तो जैसे मैंने कहा था एक बार शायद डिस्कशन हुआ था कि ऐसे में अ जो कि रिटायर्ड साधु है यहां पर जिनका कि इतना उम्र हो गया है कि अभी वह एक्टिव किसी ड्यूटी में नहीं है किंतु रिटायर होकर के रहते हैं किंतु उनके पास में जाकर के ही हमारा मन एकदम शांत हो जाता है इतनी सुंदर बातें करते हैं कौन से शास्त्र में से कौन सा रेफरेंस लाकर के हमारे साथ बात करेंगे उनके साथ में 10-15 मिनट बिताने से ही लगेगा कि हां किसी संत महापुरुष के साथ में जाकर के हम अपने को रिचार्ज करके आए हैं तो देखिए कि उनका देह तो धीरे-धीरे करके क्षीण हो रहा है किंतु उनका जो सूक्ष्म शरीर है धीरे-धीरे करके बलवंत हो रहा है वो बल उनको स्ट्रेंथ हो रहा है तो ये नॉट नेसेसरी कि देह जब क्षीण हो तो सूक्ष्म शरीर क्षीण हो उम्र के साथ में सूक्ष्म शरीर स्ट्रांग भी होता है और रिवर्स भी होता है कि फिजिकली तो मैं यंग हूं किंतु यह डिप्रेशन है यह लाइफस्टाइल आजकल लोगों की ऐसी हो गई है कि यंग एज में ही मन से बूढ़े हो जाते हैं वह हार जाते हैं जीवन से कि अरे भैया इस जीवन में अपने लिए कुछ रखा ही नहीं है वैसे ही यह वैसे ही हम हार चुके हैं तो जो भी चलता है चलने दो अभी किसी भी तरह का प्रयास नहीं करना है तो युवानी में ही ये लोग हार मान जाते हैं और उनका सूक्ष्म शरीर युवानी में ही बूढ़ा हो जाता है तो ये हो सकता है कि य अपना जो स्थूल देह है वो युवान हो किंतु सूक्ष्म देह वृद्ध हो सकता है और हो सकता है कि स्थूल देह वृद्ध हो किंतु सूक्ष्म देह एकदम बच्चे की तरह परमहंस का क्या लक्षण है ठाकुर कहते थे बच्चे की तरह है वो तो बच्चे की तरह है कितना वो इसके साथ में मैच हो रहा है स्वामी जी के इस सेंटेंस के साथ में बच्चे की तरह है अर्थात कि उनका जो सूक्ष्म देह है वो बच्चे का कैसे एक एंथू सियास्मॉलटूल दिन में जितनी बार हंसता है वो एग्जैक्ट फिगर दिया था एवरेज कैलकुलेशन करके बहुत सारा स्टडी करके उसके कंपेयर में यह जो एडल्ट मनुष्य है एक एडल्ट पर्सन है उसका थ टाइम दिन में हंसता है यानी कि मान लीजिए कि बच्चा दिन में अ 100 बार हंसता होगा तो एक म एक युवान आदमी या तो एक वृद्ध आदमी दिन में 10 बार हंसता है यानी कि यह जो जीवन का आनंद लेने की कैपेसिटी है उसकी वो चली जाती है तो यह परमहंस होता है तो परमहंस शायद शरीर से वृद्ध होगा किंतु वह बच्चे जैसा है अर्थात कि उनका सूक्ष्म शरीर है अभी भी बच्चे की तरह युवान है अभी पार्ट टू स्टार्ट होता है यहां तक हमको देखिए कि स्वामी जी हमको स्थूल देह से परे सूक्ष्म देह है सूक्ष्म देह के परे आत्मन है यहां तक तो ले आए अभी सूक्ष्म देह के बारे में उन्होंने हमको थोड़ा बहुत जानकारी भी दे दी किंतु इस ले का मुख्य उद्देश्य है आत्मन के बारे में समझाना क्योंकि स्थूल देह सूक्ष्म देह आपको अपने डॉक्टर्स है साइकेट्रिस्ट है साइको एनालिस्ट है यह सब जितना ही चाहे एनालिसिस कर लीजिए आध्यात्मिक जीवन के लिए तो आत्मन का क्या स्वरूप है उसी को समझना सबसे इंपॉर्टेंट है क्योंकि इसी के बेस पर तो हम साधना करते हैं तो पार्ट टू इज द नेचर ऑफ आत्मन ये आत्मन का सही स्वरूप क्या है तो क्या कहते हैं स्वामी जी हाउ कैन वी नो दैट देयर इज समथिंग बिहाइंड दिस माइंड यह जो सूक्ष्म शरीर हमको दिखाया स्वामी जी ने इसके परे आत्मन है यह बात हम कैसे स्वीकार करेंगे कैसे हम मान ले बिकॉज नॉलेज व्हिच इज सेल्फ इलुमिनाटी एंड बेसिस ऑफ इंटेलिजेंस कैन नॉट बिलोंग टू डल डेड मैटर यह जो नॉलेज जो है जो कि सेल्फ इलुमिनाटी है अभी वो कोई एक मृत देह का भाग नहीं हो सकते पंचमहाभूत के मिट्टी से बने हुए देह का भाग नहीं हो सकते यह किस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि जैसे कि मान लीजिए कि वह मृत देह का हमको उदाहरण दिया है यहां पे मैंने उसको दिया नहीं है उसमें वह स्वामी जी अपने लेक्चर में कहते है कि मृत देह में सब कुछ है स्थूल आंखें भी है कान भी है नाक भी है सब कुछ है हाथ पैर भी है ब्रेन भी है किंतु इसके भीतर में यह मन और बुद्धि नहीं है क्यों क्योंकि उसमें से यह सूक्ष्म देह चला गया है तो यह मृत देह के भीतर में प्राण संचार कौन करता है तो यह आत्मन आत्मन जदी प्राण संचार करेगा तभी तो वह सूक्ष्म देह उसमें आकर के निवास करेगा तभी तो उसमें यह प्राण प्रतिष्ठा होगी तो अभी जैसे मान लीजिए कि एक उदाहरण देते हैं कि कोई नया मंदिर का निर्माण हुआ तो नए मंदिर में एक आरस पहाड़ की यह मार्बल की एक मूर्ति जो है ठाकुर की उसको रखा गया किंतु इस मूर्ति की पूजा जैसे ही हमने वो वहां से लेकर के आए जो शिल्पी है वहां से लाकर के इमीडिएट तो हम उसकी पूजा करना नहीं शुरू कर देते हम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव करते हैं इस महो इस पूजा के जो जानकार है ये जो अपनी वैदिक ये जो परंपरा है इस विधि जो है उसके जो जानकार पुजारी है उस पुजारी को पुजारी महाराज को बुलाते हैं पुजारी महाराज इस मार्बल की इमेज में प्राण प्रतिष्ठा करेंगे यह प्राण प्रतिष्ठा जब होगी तभी यह इमेज जागृत होगी जीवंत होगी और उसकी पूजा नेक्स्ट डे से की जाएगी तो यह जो पुजारी है उसको हम आत्मन मान ले और यह जो मार्बल की जो इमेज है उसको पंचमहाभूत का बना हुआ देह मान ले तो जब प्राण प्रतिष्ठा होती है मूर्ति जीवंत होती है उसको कहेंगे सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म शरीर उनमें आकर के विराजमान हुआ है तब कहीं जाकर के यह मृत देह जागृत हुआ है तो यह जो मृत देह के भीतर में स्थूल देह के भीतर में यह मन और बुद्धि का प्रवेश होना यह तभी हो सकता है जबकि यह उसके पीछे में आत्मन की शक्ति हो जैसे कि स्वामी जी यहां पर एक उदाहरण देते हैं ये चांद है चांद के डिफरेंट डिफरेंट फेजस है जैसे जैसे सूरज का प्रकाश विभिन्न रूप से इसके ऊपर में पड़ता जाएगा वैसे-वैसे चांद के हमको डिफरेंट डिफरेंट फेजस दिखेंगे किंतु हमको पता है कि चांद के यह जो प्रकाश जो हमको अलग-अलग दिन अलग-अलग दिखता है इसका अर्थ यह है कि चांद खुद प्रकाशमान नहीं है सूरज प्रकाशमान है इसीलिए हमको सूरज के फेजेस कभी नहीं दिखते क्योंकि वह स्वयं प्रकाशमान है चांद के फेजस दिखते हैं क्योंकि उसने अपना प्रकाश कहीं से उधार लिया हुआ है दैट व्हिच इज सेल्फ लुमिनस कैन नॉट डिके सूरज के डिफरेंट डिफरेंट फेज नहीं होते सूरज का यह क्षय और यह उसका भरती और ओट य सूरज में नहीं आता द लुमिनोसो अ बरोड लाइट कम्स एंड गोज जिसने उधार लिया हुआ है यह प्रकाश उसका खुद का प्रकाश बढ़ता जाता है कम होता जाता है के बट ट व्च इज लाइट इट सेल्फ व्ट कैन मेक ट कम एंड गो फ्लोरिश एंड डिके किंतु जो कि खुद स्वयं प्रकाशमान है उसका खुद का प्रकाश आएगा जाएगा ऐसे कैसे हो सकता है हां आप कह सकते हैं कि यह बादल जब सूरज के ऊपर में आ जाता है तो सूरज का प्रकाश कम हो जाता है किंतु यह तो अपने अज्ञान स्वरूप बादल है वह तो सूरज के ऊपर में बादल नहीं है अपने ही देह में अपने ही मन में अज्ञान स्वरूप बादल ये आए हैं सूरज खुद उसका प्रकाश आता नहीं जाता नहीं अभी यह जो नेचर ऑफ आत्मन है पहला एक बताया कि आत्मन का क्या स्वरूप है तो यह स्वयं प्रकाशमान है फिर आत्मन का स्वरूप क्या है इट कैन नॉट बी दैट द सोल नोज इट इज नॉलेज ऐसा नहीं है कि आत्मन जानता है आत्मन ज्ञान स्वरूप है इट कैन नॉट बी दैट द सोल हैज एक्जिस्टेंस बट इट इज एक्जिस्टेंस इट सेल्फ ऐसा नहीं है कि आत्मन जीवित है आत्मन जीवन स्वरूप है स्वयं जीवन है इट कैन नॉट बी दैट द सोल इज हैप्पी इट इज हैप्पीनेस इट सेल्फ ऐसा नहीं है कि आत्मन आनंदित है आत्मन खुश है आत्मन आनंद स्वभाव है आनंद स्वरूप है दैट व्हिच इज हैप्पी हैज बरोड इट्स हैप्पीनेस जो खुश है उसने अपनी खुशी कहां से ली हुई है छोटे थे तब बहुत ज्यादा हंसते थे तो हमारी जो बूढ़ी अम्मा थी मां थी दादी मां थी वो हमको कहा करती थी बहुत ज्यादा मत हंसो वरना तो जितना हंसोगे उतना ही रोओगे तो ऐसा क्यों क्योंकि हमारी हंसी खुशी वो बाहर के सरकमस्टेंस के ऊपर में वो लगी हुई है वो जो हमको छोटे बच्चे को काला वो तिलक पहनाते है ना मां वो वो इससे वो ये करती है उसका क्या रीजन है कि बच्चे को किसी की नजर ना लग जाए किसी की ईर्षा का यह भोग ना हो जाए किसी की ईर्षा इसके ऊपर होगी तो कोई आकर के इसको हानि पहुंचाने का प्रयास करेगा उसकी हंसी खुशी छीन लेने का प्रयास करेगा किंतु यदि यह हंसी और खुशी मेरा स्वभाव ही है तो हजार लोग चाहे हजार ईर्षा करें मुझे हजार हानि पहुंचाने को आए मेरी हंसी खुशी पर कोई हाथ नहीं डाल पाएगा दैट व्हिच हैज नॉलेज हैज रिसीवड इट्स नॉलेज एंड दैट व्हिच जज रिलेटिव एक्जिस्टेंस हैज ओनली अ रिफ्लेक्टेड एक्जिस्टेंस जो कि जिसने लाइब्रेरी पढ़के पढ़ के ज्ञान इकट्ठा किया है उसको आप प्रश्न करते जाइए उसने जो किताब पढ़ा है उसी में से उत्तर देगा वो सिलेबस के बाहर के प्रश्न पूछेंगे तो उसके पास में उत्तर नहीं रहेगा किंतु ठाकुर को देखिए ठाकुर के मन में मां सरस्वती स्वयं ज्ञान राशि डाल देती थी इनको यह विद्या ईश्वर चंद्र विद्यासागर आए ना कि ये वो बंकिम चंद्र आए है ना कि फिर ये केशव सेना है जो भी लोग इसके उनके पास में आए वो विद्या का महासागर था उसमें जिनको जो चाहिए वो मिल जाता था ठाकुर ज्ञान स्वरूप स्वयं थे ऐसा नहीं था कि ठाकुर ने वो जो मास्टर महाशय जाकर के पूछते हैं वो वृंदा दसी को ना कि इन्होंने तो बहुत सारा किताबें वगैरह पढ़ा होगा तो वृंदा दसी क्या उत्तर देती है कि अरे यह किताब बताब वगैरह क्या है सब कुछ तो उनके मुह पर मुख स्त है सब कुछ उनके मन में ऑलरेडी विराजमान है किताब पढ़ कर के उनका नॉलेज नहीं आया तो मास्टर महाशय वो सोच में पड़ गए अभी तो वो ग्रेजुएशन एमए वगैरह करके आए हैं वो सोच रहे हैं कि बिना किताब पढ़े भी क्या किसी के मन में इतनी विद्या शक्ति इतना विजडम इतना स्पिरिचुअल नॉलेज हो सकता है क्या यह तो बिल्कुल आश्चर्यजनक बात देखी है तो जैसे क्यों क्योंकि ठाकुर ने किताब पढ़कर अपनी विद्या अर्जन नहीं की थी वह आत्मन के साथ में एकाकार हो गए थे एकही भूत हो गए थे तो आत्मन तो ज्ञान स्वरूप स्वयं है बोलकर के वह ज्ञान स्वरूप हो गए थे विश्व की जितनी भी लाइब्रेरीज है वह सब नॉलेज ठाकुर के सामने वह अपने से वो प्र प्रकाशमान हो गया था अगेन आत्मन इस बियोंड स्पेस एंड टाइम इफ द एक्जिस्टेंस ऑफ द सोल इज ड्रॉन फ्रॉम द आर्गुमेंट दैट इट इज सेल्फ लुमिनस दैट नॉलेज एक्जिस्टेंस ब्लेसेडनेस आर इट्स एसेंस इट नेचुरली फॉलोज दैट दिस सोल कैन नॉट हैव बीन क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर है कि इस आत्मन को कभी भी इसका जन्म नहीं होगा ना ही इसका मृत्यु होगा यह आत्मन को कहीं पर बनाया गया नहीं होगा क्योंकि जैसे मान लीजिए एक एक कुंभार है एक घड़े को बनाता है तो घड़ा इतना सुंदर रूप से बनाता है तो घड़े का जो यह सौंदर्य है उसका यह जो महात्म है वह महात्म्य तो शिल्पी ने दिया है कुंभार ने दिया है जदिया घड़े का ही यदि यह स्वरूप हो कि सौंदर्य जिसका स्वरूप हो मान लीजिए कुंभार तो कुंभार का तो और कोई कुंभार को नहीं बनाएगा मैं एनालॉजी दे कर के कहता हूं जिसका जो स्वरूप है उसको कोई बना नहीं सकता क्योंकि यदि कोई बनाएगा तो इसका अर्थ यह हुआ कि इसका जो मेकर है उसका जो पिताजी है उसका जो फादर है वहां से वह सब गुणधर्म इसको प्राप्त हुए हैं तो यह लॉजिकली जो कि आनंद स्वरूप है जो कि ज्ञान स्वरूप है जो कि प्रकाशमान स्व है उसको कोई बना नहीं सकता क्योंकि यह सब उसके गुणधर्म है अ सेल्फ लुमिनस एक्जिस्टेंस इंडिपेंडेंट ऑफ एनी अदर एसिस्टेंसिया प्रकाश जो कोई भी चीज है जो कि और किसी चीज पर डिपेंडेंट नहीं है तो वह किसी प्रक्रिया का आउटकम नहीं हो सकता जैसे बच्चा है बच्चे के भीतर में बहुत सारी विद्या है तो हम कह सकते है कि उसके पिताजी के माध्यम से यह विद्या उसके भीतर में आई है या तो उसके शिक्षक के माध्यम से आई है या तो फिर उसकी मां के माध्यम से आई है किंतु जो प्रकाशमान स्वरूप स्वयं है आत्मन उसको यदि कोई बनाता तो वह स्वयं प्रकाशमान नहीं हो सकता उसने बोरो किया है उधार लिया है इट ऑलवेज एसिस्टेड देयर वाज नेवर अ टाइम व्हेन इट डिड नॉट एक्सिस्ट आत्मन हमेशा से अस्तित्व में था ऐसा कहीं कभी नहीं था कि आत्म नहीं था बिकॉज इफ द सोल डिड नॉट एक्सिस्ट वयर वाज द टाइम ये समय कहां था यदि आत्मन ही नहीं था यदि ब्रह्मण ही नहीं था तो यह समय कहां था टाइम इज इन द सोल इट इज व्हेन द सोल रिफ्लेक्ट्स इट्स पावर्स ऑन द माइंड एंड द माइंड थिंस दैट टाइम कम्स यह समय भी इसी आत्मन इसी ब्रह्मण के भीतर में अवस्थिति है उसकी वि विराजमान है वह उसको वह उसी के भीतर में रहता है क्यों क्योंकि जब आत्मन अपने प्रकाश जब बुद्धि के ऊपर में डालता है बुद्धि मन के ऊपर में डालती है प्रकाश यह सूक्ष्म शरीर जब जीवित होता है तभी इसके साथ में ही यह समय और अवकाश प्रकट होते हैं सूक्ष्म शरीर के साथ में ही यह समय और अवकाश जुड़े हुए हैं आत्मन इट सेल्फ इज बियोंड दिस पे टाइम एंड सटल बॉडी यह समय अवकाश और यह सूक्ष्म शरीर तीनों के परे ही अस्तित्व है इस आत्मन का यह जो लास्ट लाइन है वह बहुत ही इंपॉर्टेंट है इसके बारे में हम बहुत कुछ डिस्कस कर सकते हैं इसके ऊपर में पूरी पूरी पीएचडी थीसिस आप ल लिख सकते हैं टाइम इज इन द सोल इट इज व्हेन द सोल रिफ्लेक्ट्स इट्स पावर्स ऑन द माइंड एंड द माइंड थिंक्स दैट टाइ कम्स यह समय अवकाश और सूक्ष्म शरीर तीनों का अस्तित्व आत्मन के ऊपर में ही आधारित है आत्मन जब अपने को मेनिफेस्ट करता है प्रोजेक्ट करता है तब यह सब चीजें हमको दिखती है यह जो वेदांत की यह जो सर्वमान्य कुछ कुछ उपमा एं है कि जब रस्सी है तो रस्सी के ऊपर में सर्प का आभास होता है किंतु रस्सी का सर्प के साथ में कोई लेना देना नहीं है रस्सी अपने वहां पर वैसे ही निर्विकार कुटस्था रूप से तटस्थ रूप से पड़ी हुई है इसके ऊपर में सांप दिखे ना कि यह पानी का पाइप दिखे ना कि और कुछ भी दिखे वो दिखने वाले के ऊपर में निर्भर करता है रस्सी को उस भ्रम के साथ में कोई लेना देना नहीं है यदि मान लीजिए कि मुझे कोकोनट का जो पेड़ है वो मुझे बहुत अच्छा लगता है किसी को आम का पेड़ बड़ा अच्छा लगता है किसी को यह वट वृक्ष बड़ा अच्छा लगता है जब मरुभूमि में तीन लोग जा रहे हैं जिसको यह जो खेजूर का पेड़ है न कि यह पाम ट्री है न कि कोकोनट ट्री है वो अच्छा लगेगा तो जब मरुभूमि में जो यह मिराज होता है वो मिराज उसको कोकोनट ट्री यानी कि पाम ट्री के रूप में दिखाई देगा दूसरे को जिसको कि आम का पेड़ अच्छा लगता है उसको मरुभूमि में वोह आम का पेड़ मिराज के रूप में दिखाई देगा और तीसरे को जो कि वटवृक्ष अच्छा लगता है उसको मरुभूमि में वटवृक्ष दिखाई देगा किंतु ये जो डेजर्ट इट सेल्फ इसको ये तीनों पेड़ों से कोई लेना देना नहीं है वो तो जो पेड़ को देखता है उसके पूर्व संस्कार के अनुसार इसको यह सब दिखता है तो वैसे ही ब्रह्मण अपने से तटस्थ है निष्क्रिय है और सभी चीजों से परे है उसके ऊपर में एक अज्ञान का एक आवरण आता है एक मेनिफेस्टेशन होता है प्रोजेक्शन होता है तब कहीं जाकर के यह सूक्ष्म शरीर ना स्थल शरीर ना कि ये समय और अवकाश बाद में प्रकट होते हैं आज की लैंग्वेज में कहे तो स्पेस टाइम मैटर एंड एनर्जी यह सभी कुछ बाद में इसमें से आता है बियोंड बर्थ एंड डेथ इट हैज नाइ दर बर्थ नोर डेथ बट इट इज पासिंग थ्रू ऑल दिस वेरियस स्टेजेस आत्मन का ना तो जन्म है ना तो मृत्यु है किंतु जन्म मृत्यु जरा व्याधि के इस चक्र से आत्मन पसार होता है आत्मन कहे ना कि आत्मन का जो किरण है इस स्थूल देह के भीतर में सूक्ष्म शरीर वो सूक्ष्म शरीर पसार होता है इट इज मेनिफेस्टिंग स्लोली एंड ग्रेजुएट हायर एंड सो ऑन आत्मन ही यह जो सूक्ष्म शरीर है जो कि विभिन्न देह धारण करके उसका विकास होता रहता है यह सूक्ष्म देह का इट इज एक्सप्रेसिंग इट्स ओन ग्रैंडर वर्किंग थ्रू द माइंड ऑन द बॉडी एंड थ्रू द बॉडी इट इज ग्रास्पिंग द एक्सटर्नल वर्ल्ड एंड अंडरस्टैंडिंग इट आत्मन का ही भव्यता आत्मन की ही आत्मन का का ही सौंदर्य सूक्ष्म देह के माध्यम से सूक्ष्म देह से स्थूल देह के माध्यम से और स्थूल देह की ये कर्मेंद्रियों के माध्यम से यह पंच महाभूत का ये जो पूरा विश्व है उसको वो इफेक्ट करता है उसको वो उसके साथ में ये कनेक्ट होता है इट टेक्स अप अ बॉडी एंड यूस इट एंड व्हेन दैट बॉडी हैज फेल्ड एंड इज यूज्ड अप इट टेक्स अनदर बॉडी एंड सो ऑन इट गोज एक शरीर धारण करेगा एक सूक्ष्म देह धारण करेगा आत्मन मन के सूक्ष्म देह स्थूल देह धारण करेगा और स्थूल देह एक के बाद एक धारण करता जाएगा जब तक कि उसकी इवोल्यूशन का अंतिम छोर तक नहीं पहुंच जाता सूक्ष्म देह वोह आत्मन में विलीन नहीं हो जाता किंतु एक बात देखने की है कि आत्मन इट सेल्फ तो तटस्थ और निष्क्रिय है और वो एक ही है यह जो सूक्ष्म देह है वह विभिन्न रूप से विभिन्न देह धारण करते जाते हैं तो जैसे कि यह जो एक उपमा है कि सूरज तो आकाश में एक ही है किंतु बहुत सारे घड़े पानी के भरे हुए हैं तो घड़े को कहेंगे स्थूल देह और पानी के भीतर में जो सूरज का प्रतिबिंब गिरता है उसको कहेंगे सूक्ष्म देह तो सूक्ष्म शरीर तो ये बहुत सारे घड़े हैं बहुत सारे घड़ों के भीतर में बहुत सारे सूरज के प्रतिबिंब है किंतु ये प्रतिबिंब जो कुछ भी करते हो ये घड़े जो कुछ भी करते हो एक घड़े को आप उठा कर के अपने घर में ले आए ना कि अपने गार्डन में रख दे अपने बैकयार्ड में रख दे ना कि और कहीं अपने मित्र के वहां ले जाए उसके भीतर में पानी बड़ा स्वच्छ है तो प्रतिबिंब बड़ा ही स्वच्छ दिखेगा मलीन पानी है उसमें धूल मिट्टी मिली हुई है तो प्रतिबिंब शायद इतना स्वच्छ ना दिखे किंतु घड़े के साथ में जो कुछ भी हो जाए प्रतिबिंब के साथ में जो कुछ भी हो जाए व जो सही सूरज है उसके साथ में कुछ होने वाला नहीं है तो सिमिलरली यह सूक्ष्म देह का वो स्ट्रांग होता है वोह वीक होता है डिप्रेशन की वजह से धीरे-धीरे करके वो मलिन हो जाता है हंसी खुशी की वजह से वो स्ट्रांग होता है यह स्थूल देह वृद्ध होता है जवान होता है व्याधि ग्रस्त होता है मृत हो जाता है यह सब जन्म मृत्यु जरा व्याधि की साइकिल चलती रहती है चलती रहती है स्थूल और सूक्ष्म देह के साथ में किंतु आत्मन अपने से निर्विकार निर्विकल्प होकर के वह स्थित है अच्छा यह थर्ड पार्ट है रिइनकारनेशन किंतु फिर इसको अभी बहुत सारी स्लाइड्स है आई थिंक 10 और ज्यादा स्लाइड्स है तो इसके बारे में हम कल देखेंगे आज ओम शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णा अर्पणम

Questions & Answers

स्तु यह जो सूक्ष्म शरीर का कांसेप्ट जो है ना देखिए कि तीन भागों में यदि हम डिवाइड कर दे इस फिलोसोफी को तो यह वेस्टर्न फिलोसोफी जद कहेंगे जिसमें कि क्रिश्चियनिटी भी आ जाएगी इस्लाम भी आ जाएगा और जूडा इजम भी आ जाएगा तो इनका कहना है कि ये स्थूल देह है और फिर एक इसके परे एक सूक्ष्म देह है और फिर एक गॉड है एक ईश्वर है राइट तो जिसको कहेंगे कि फादर सन एंड होली कोस्ट इस तरह से कुछ कहेंगे देखिए ये तो मैं अपने रीडिंग के अनुसार कह रहा हूं हमेशा दूसरी फिलोसोफी के बात करने के समय यह प्रश्न खड़ा होता है वे लोग हमारे सामने कहेंगे कि आपने हमारी सभी फिलोसोफी की किताबें अच्छे से पढ़ी है आप कैसे यह सब कहते रहते हैं तो नहीं पढ़ी है मैंने तो अपनी किताबों में पढ़ कर के जो कुछ समझ में आया है उसको जो मैं बता रहा हूं तो वहां पर क्या है कि यह जो सूक्ष्म शरीर है इन वेस्टर्न फिलोसोफी में वो एक ही बार आता है स्थूल देह के साथ में स्थूल देह के साथ में ये सूक्ष्म शरीर भी चला जाता है फिर एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड अपोकेलिप्स हो ना कि जजमेंट डे उस समय ईश्वर आकर के वो कहेंगे कि ये तुमने पाप किया है तो तुम नर्क में जाओ और पुण्य किया है तो स्वर्ग में जाओ एक ही बार का यह जीवन है एक ही चांस मिलता है और एक ही चांस में आपको सब कुछ खत्म कर देना है बुद्धिज्म जो है इससे एक स्टेप आगे जाता है बुद्धिज्म भी कहता है कि स्थूल देह है सूक्ष्म देह है ईश्वर को नहीं स्वीकार करता बुद्धिज्म कहता है ईश्वर की बजाय देयर इज अ रिइनकारनेशन पुनर्जन्म बार-बार होता रहता है बार-बार यह जो पासे जो फेंकते रहते हैं और हर बार जो कोई पासे की अनुसार आपने जो कर्म किया उसके अनुसार यह पॉजिटिव नेगेटिव का बैंक बैलेंस आपका बनता जाता है आखिर में बुरे कर्म समाप्त हो गए अच्छे कर्म से आपका मन भर गया तो आपको निर्वाण प्राप्त हो जाएगा स्थूल देह तो विघटित हो ही जाएगा सूक्ष्म देह भी विघटित हो जाएगा वेदांत कहता है ये स्थूल देह है सूक्ष्म देह तो है और ईश्वर भी है किंतु हम लोगों की ईश्वर का जो कांसेप्ट है व्हिच इज डिफरेंट फ्रॉम ये बुद्धि क्रिश्चियनिटी का जो ईश्वर का जो कांसेप्ट है हम लोगों के लिए ईश्वर कोई एक स्वर्ग में बैठे हुए देवता नहीं जो कि हमारे अच्छे कर्म और बुरे कर्मों का फल देते हैं हमारे लिए ईश्वर है जो कि हमारा सही स्वरूप है जिसके साथ में हमको एकही भूत हो जाना है यह डिफरेंस कैसा है कि जैसे कि आप प्रजा है और राजा के महल में जाकर के राजा को विनती करते हैं कि आप हमको न्याय दीजिए आप हमारी रक्षा कीजिए आप हमारे रोजी रोजक रोटी रोजगार है उसको बनाए रखिए मुझे खुश र मेरी रक्षा कीजिए ये आप राजा को जाकर के विनती करते हैं और हम है यह क्रिश्चन लोगों का हो गया हम है कि हम राज महल में जाकर के राजा को कहेंगे तुम्हारे ही साथ में तुम्हारे ही राज सिंहासन पर मैं बैठूंगा क्यों जो क्योंकि तुम जो हो वही मैं हूं दिस इज द डिफरेंस तो यह तीन फिलोसोफी है और यह मैंने एक सिंपल एक अंडरस्टैंडिंग है तीनों का कि सूक्ष्म शरीर का काम है आत्मन या तो ईश्वर के साथ में एकही भूत हो जाना सूक्ष्म अपने कर्म के अनुसार बुद्धिज्म के ऊपर में देखिए बुद्धिज्म और क्रिश्चियनिटी के दोनों के कुछ-कुछ एलिमेंट्स यहां पे है बट ऑफकोर्स माने वो तो बड़े हिंदुइज्म इज ओरिजिनल फिलोसोफी ये तो मैं जस्ट उपमा देने के लिए कह रहा हूं कि क्रिश्चियनिटी के ईश्वर भी है और बुद्धिज्म का पुनर्जन्म भी है किंतु हमने किस तरह से इसको एक्सप्लेन किया है अपने कर्मों के अनुसार सूक्ष्म शरीर देह धारण करता रहेगा जैसे कि बुद्धिज्म कहता है और क्रिश्चियनिटी के अनुसार ये ईश्वर भी है या दैत इष्ट है तो आप ईश्वर कहेंगे अद्वैत इष्ट है तो आत्मन या ब्रह्मण कहेंगे किंतु एक हायर सत्ता एक है जो कि सूक्ष्म शरीर के परे है तो किंतु हम ये सूक्ष्म शरीर ऐसा नहीं है कि यह हायर सत्ता के सामने जाकर के हाथ जोड़ कर के कहता है कि आप मेरी रक्षा कीजिए हम कहते हैं कि हम इसी अराजा के साथ में ईश्वर के साथ में विलीन हो जाएंगे देखिए यह सूक्ष्म स्थूल और यह कारण शरीर का जो डेफिनेशन जद मैंने कहा ना कि यह मोबाइल के माध्यम से भी हम दे सकते हैं कि ये यह जो कैमरा है जिसकी वजह से यह मोबाइल पिक्चर लेता है व है स्थूल शरीर फिर यह इसके भीतर में माइक्रो प्रोसेसर है जो कि सबको प्रोसेस करता है इसको पप को कहेंगे सॉरी इसके भीतर की जो पप है जो कि इसको प्रोसेस करता है इसको कहेंगे सूक्ष्म शरीर और यह मेरा मोबाइल है मोबाइल क्या करेगा इसका जो डिसीजन मेकिंग है या तो मोबाइल को जो कि मीनिंग देता है वह मैं हूं तो वह मैं हूं आत्मन इस तरह से आप इसको कह सकते हैं यह फिजिकल मोबाइल है वह है स्थूल शरीर इसके भीतर का जो सॉफ्टवेयर है वह है सूक्ष्म शरीर और मैं जो कि इसका नियंत्र हूं मैं इसको एक मीनिंग प्रदान करता हूं मैं हूं आत्मन आप ही तो इस मोबाइल को एक मीनिंग दे देते हैं ना शॉप में पड़ा हुआ है दुकान में पड़ा हुआ है तो वैसे ही पड़ा है जब तक आप इसको खरीदेंगे नहीं इसको किसी कार्य में नहीं लगाएंगे मान लीजिए आप टीचर है तो यह आप एजुकेशन पप इसमें इंस्टॉल करेंगे इसके थ्रू आप एजुकेशन अपने बच्चों के एजुकेट करने का कार्य करवाएंगे मान लीजिए कि आप सोल्जर है तो यह जीपीएस यह जो अस्त्र शस्त्र ऑपरेट करने वाले ऐप इसके भीतर में डालेंगे तो मने आप ही तो इसको एक मीनिंग प्रदान करते हैं अदर वाइज तो एक डेड इंस्ट्रूमेंट है दुकान में पड़ा हुआ है बहुत सारे शब्द इसके बारे में यूज किए गए हैं जीवात्मा कह सकते हैं सूक्ष्म शरीर कह सकते हैं लिंग शरीर कह सकते हैं बहुत कुछ कह सकते हैं किंतु उसका बेसिक साइंस जो है वो जो मैंने चार्ट बताया था ना उसके अनुसार मन बुद्धि चित्त और अहंकार यह चार मिलकर के ये सूक्ष्म शरीर होता है यहां पे आपके जो आईडियाज है ना थोड़े से कन्फ्यूजिंग है यह पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रिय पंच महाभूत पंच तन मात्रा फिर यह पंच प्राण सत्व रजस तमस यह तीन गुण यह मन बुद्धि चित्त अहंकार यह जो भी 24 तत्व कहो ना कि जो कुछ भी कहो यह सब स्थूल जगत के भीतर में है और यह स्थूल जगत जो है यह ये जो अपना जो सही आत्मन कहो ना कि ईश्वर कहो इसके ऊपर में एक भ्रम मात्र है तो यह भ्रम आएगा जाएगा हम इस स्थूल देह में एक के बाद एक जन्मा जन्म जन्मांतर से आते जाएंगे जाते जाएंगे जब तक हमको अपना या तो फिर हम ईश्वर में विलीन नहीं ही हो जाएंगे या तो फिर आत्म साक्षात्कार नहीं होगा डिपेंड्स कि आप कौन सी फिलोसोफी की दृष्टि से देखते हैं द्वैत अद्वैत विशिष्ट अद्वैत तो जब तक हमारा उस परमात्मा के साथ में मिलन नहीं होगा तब तक एक स्थूल देह के भीतर में रहेंगे पृथ्वी पर रहेंगे पृथ्वी के हंसी खुशी गम आंसू गम सबका भोग करते रहेंगे और जब परमात्मा के साथ विलीन हो जाएंगे हम इन सब से मुक्त हो जाएंगे ये है बेसिक फिलोसोफी तो एक्चुअली देखिए हम साधक होने की क्या है एक्चुअली क्या होता है यह सब फिलोसॉफिकल दृष्टिकोण डेवलप करना उसके लिए हमको बहुत सारा समय देना पड़ता है बहुत सारा रीडिंग करना पड़ता है जद हम इसमें ज्यादा बहुत कुछ ना भी जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि साधक के रूप में हमको सिर्फ इतना ही देखना है कि मुझे मेरी साधना कैसे करनी है ये जो चार योग है ना कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग इसी के बारे में डिटेल में जानना है मुझे यह फिलोसोफी तो क्या है कि यदि आप में यह कैपेसिटी है इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी डीप में जाने की तब आप इसमें जाएंगे और या तो फिर एक जनरल एक क्यूरियोसिटी होती है कि हां भाई यह सब भी सुन लेते हैं तो हमने सुन लिया अदर वाइज आप इसके कांसेप्ट बहुत ज्यादा क्लियर नहीं भी होते हैं डज नॉट मैटर आपको योग के ऊपर में ध्यान केंद्रित करना है कि मैं भक्ति योग कैसे करूं मैं यह ज्ञान योग कैसे करूं राज योग कैसे करूं ना कि कर्म योग कैसे करूं ज्ञान योग कर्म योग राज योग और भक्ति योग ये चार योगों का समन्वय है साधन पद्धति ना जैसे स्वामी जी ने मैक्रो कजम में इवोल्यूशन डिस्कस किया ना तो हम लोग ऐसा सोच सते हैं कि इवोल्यूशन इज अ फोर्स ऑफ नेचर कि मिलियंस एंड बिलियंस ऑफ इयर्स धीरे-धीरे करके इवोल्यूशन होता जाएगा यह हम पानी में थे तो धीरे-धीरे करके हम जल स्थल के ऊपर में आए तो स्थल के ऊपर में है तो कभी पंखी बने तो कभी बंदर बने पेड़ पर रहते हैं और कभी शेर की तरह चार पैर हुए एक पूंछ हुई तो हमको लगता है कि हजारों लाखों साल पे ये इवोल्यूशन होता है एक्चुअली इवोल्यूशन क्या है सूक्ष्म शरीर को धारण करने के लिए एक स्थूल देह चाहिए जैसे कि मान लीजिए कि सब्जी वगैरह आप एक टोपी में रख कर के टोकरी में रख कर के आप प्लेटफॉर्म पर रख देते हैं या फ्रिज में रख देते हैं तो यह फ्रीज या ये जो ये जो बांस की टोकरी है वो सब्जी को रखने के लिए एक पात्र हुआ किंतु सोना आपने के जो जवाहरात है तो जवाहरात क्या करेंगे वो आप टोकरी में रख के फ्रिज में नहीं रखेंगे उसको आप बैंक में वो एक वो लोकल रूम आप ओपन करेंगे उसके भीतर में सोना जवाहरात रखेंगे ये गोल्ड बिस्किट जो होते हैं सोने के बिस्किट वो उसके भीतर में रखेंगे तो उसको धारण करने का वह पात्र है तो सोना के जवाहरात को आप लोकल रूम में रखेंगे और सब्जी है या क्या उसको आप इसमें रखेंगे दूध है तो आप प्लास्टिक की या गिलास की बोतल में रखेंगे जो चीज है उसको किसमें रखेंगे किस पात्र में रखेंगे वो चीज के ऊपर डिपेंड होता है दूध एक तरह के पात्र में रखा जाता है सब्जी एक तरह के पात्र में रखी जाती है और सोने के जवाहरात जो है एक तरह के पात्र में रखा जाता है तो वैसे ही सूक्ष्म शरीर की क्या शक्ति है उस शक्ति को धारण करने के लिए स्थूल देह बनता है यदि डिप्रेशन में आकर के मायूस होकर के काम क्रोध में डूब कर के तामसिक होक के सूक्ष्म देह क्षय के बाद क्षय होता जाता है तो इस बार तो शायद मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ होगा नेक्स्ट टाइम पशु पक्षी का जीवन प्राप्त होगा और भी ज्यादा जद वो उसमें जाएगा तो जड़ व पौधे में परिणत हो जाएगा किंतु यह सूक्ष्म देह स्ट्रांग होता जाएगा तो धीरे-धीरे करके यह मनुष्य और इससे भी मने वो जो सुचि नाम श्रीमतावश्णोदेवी के भाव का आवेश हुआ तो शरीर भी उस भाव को धारण करने के लिए परिणत हुआ यानी ये नॉन साइंटिफिक नहीं है साइंस को ही ये माने साइंस न स्टेरॉइड्स ठाकुर कहते हैं कि ईश्वर की साधना करते करते एक व ईश्वरीय वह देह बनता है फिर वह प्रेम का एक लिंग होता है प्रेम से रमण होता है तो मास्टर महाशय हसना शुरू कर दिए तो ठाकुर पता है कि इस बात को सुन कर के हो सकता है कि ठाकुर चाहते होंगे यह सब हंसी मजाक करने के लिए किंतु फिर व सीरियस होक के यह सब बात करते हैं तो यह भग भवती तनु या प्रेम का लिंग और प्रेम के लिंग से रमण यह सब एक्चुअली यह सूक्ष्म शरीर के ही गुणधर्म है सूक्ष्म शरीर यह सब क्वालिटी इकट्ठी करता है जैसे मेरा स्थूल देह है तो जैसे मेरे घर पे वहां पे वो जो नेम प्लेट मेरे पिताजी ने ल करके रखी थी कि नाम है और नीचे में लिखा है बीटेक अर्थात कि यह मेरी डिग्री है तो मेरी मां ने भी लिखी है उसके नीचे में वो डिग्री बीए फिर ब्रैकेट में लिखा है फेल यह सब डिग्री जैसे हम धारण करते हैं तो वैसे ही यह सूक्ष्म देह यह सब डिग्रियां धारण करता है देखिए कि सूक्ष्म शरीर की स्ट्रेंथ जैसे बढ़ती जाती है उतना ही वह ईश्वर के समीप जाने के लिए साधना कर सकता है राइट अभी जिसका सूक्ष्म शरीर कमजोर है या तो फिर पशु पक्षी के भीतर का जो सूक्ष्म शरीर है वह साधना नहीं कर सकता साधना करने के लिए मनुष्य देह ही धारण करना पड़ता है हमारे शास्त्र में तो यहां तक लिखा गया है कि देव योनि में भी आप साधना नहीं कर सकते साधना करके मुक्ति प्राप्त करनी है तो ईश्वर को देवताओं को भी यह मनुष्य देह मनुष्य योनि धारण करनी होगी तो ये मनुष्य योनि का यह स्पेशलिटी अपने शास्त्र के अनुसार है कि मनुष्य योनि के भीतर में जो सूक्ष्म देह है इतना स्ट्रांग है कि वह साधना कर सकता है बाकी जितने भी देह है इवन अमीबा तो क्या देवताओं के देह के भीतर में भी जो सूक्ष्म शरीर रहेगा वह साधना करके ईश्वर प्राप्ति नहीं कर सकता देखिए यह जो आपने वो एक कर्व देखा है ना हॉकी कर्व इसको कहते हैं चार्ट होता है चार्ट इसको हॉकी कर्व कहते हैं इसका अर्थ क्या है तो धीरे धीरे धीरे करके जाता है फिर एक इफ्लेक्शन पॉइंट आता है सीधा ऊपर जाता है राइट तो ये आज देखिए कि ये कल ही मैं देख रहा था ये ओपन एआई का वो जो एक नया एक रिलीज है वो 4o उसका ओमनी चेट जीपीटी वर्जन 4o और आज ही मैं देख रहा था वो सुंदर पिचाई वो रिलीज कर रहा है ये जमनी का 1.5 प्र और वगैरह वगैरह तो ये एआई रेवोल्यूशन कितना प्रचंड पावर से चल रहा है आज मैंने ये मल्टीमॉडल एआई यानी कि ऑडियो वीडियो जो कुछ भी है पिक्चर टेक्स्ट सब कुछ इनपुट के रूप में लेगा और सभी को इनपुट के आउटपुट के रूप में डालेगा मैं यदि ऐसा कहूंगा कि ये वीडियो देख कर के मैं यहां पे बात कर रहा हूं आपके साथ में तो मैं ये वीडियो अब स्क्रीन के ऊपर रख दूंगा कहूंगा ये सब प्रश्न है पढ़ कर के उसका उत्तर दे दो तो क्या करेगा पता है ये ये प्रश्न पढ़ेगा फिर मेरे ये जो अपने क्लास रिकॉर्ड होते हैं youtube0 पावर इसका हो गया है तो क्या है इफ्लेक्शन पॉइंट आता है उसके बाद में यह इवोल्यूशन प्रचंड स्पीड से चलता है तो दिस इज ट्रू इन इवोल्यूशन आल्सो कि ये तो धीरे-धीरे त चलता है उसके बाद में इफ्लेक्शन पॉइंट से एकदम सुपर स्पीड पकड़ता है ये ये दिस इज हैपनिंग एक्चुअली नजरों के सामने चल रही है