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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम आज सुबह को मैं ऐसा थोड़ा सा सोच रहा था जैसे कभी-कभी मन ऐसे चिंतन के मूड में जब चला जाता है तो हम लोग जनरली क्या होता है कि यही डे टू डे लाइफ लेकर के हम लोग व्यस्त रहते हैं कि अभी आज क्या करने वाले हैं आज ऑफिस में जाकर क्या होगा इसके साथ में क्या हमको मैंने सब कुछ तो हम कर्म लेकर के ही तो यहां पर रहते हैं किंतु कभी-कभी ऐसा मन अपना या तो परिस्थितियां ऐसी हो जाती है ना कि भीतर से मन में से ही एक ऐसा एक आता है कि यह डे टू डे लाइफ से मन उर्ध्व उठ करके ना कि फिर और कहीं पर जाकर के और कुछ नए तरह के विचार करना शुरू कर देता है तो मैं आज सोच रहा था कि व्हाट इज स्पिरिचुअल लाइफ ले कि आध्यात्मिक जीवन एक्चुअली है क्या तो उत्तर क्या मिला पता है यह जीवन है पत्थर नहीं उठाने की साधना यह ठाकुर की वह जो कहानी है ना कि एक दिन वो कैलाश में शिव और पार्वती बैठे हुए थे एक एक भगवान शिव उठकर के दौड़े कहीं पर गए तो मां पार्वती ने पूछा कि अरे भगवान कहां जा रहे हैं तो भगवान ने उत्तर दिया मेरा चेला है यह मेरा शिष्य है वह रास्ते से जा रहा था धोबी लोगों ने कपड़े सुखाए थे गीले कपड़े सुखाने के लिए रखे थे उसके ऊपर इसका पैर पड़ गया तो धोबी लोग उसको मारने के लिए जा रहे हैं इसलिए मैं अपने भक्त की रक्षा करने के लिए जा रहा तो अच्छा मां पार्वती ने सोचा भगवान का तो यही काम है थोड़ी देर के बाद देखा भगवान शिव आ करके अपने आसन पर बैठ गए तो मां ने पूछा क्यों भगवान आप अपने शिष्य की रक्षा नहीं की क्या तो भगवान ने क्या उत्तर दिया कि उसने अपने ही रक्षा करने के लिए हाथ में पत्थर उठा लिया तो अभी यदि उसने पत्थर उठा लिया है तो मेरी क्या जरूरत है वह करे अपनी रक्षा अपने खुद करें मेरे पर उसको विश्वास नहीं है कि वह मुसीबत में आएगा तो मैं जाऊंगा और उसको बचा उंग यह विश्वास तो है नहीं उसको तो भले वो करे अपनी रक्षा अपने से तो यह पत्थर नहीं उठाना यह एक साधना है ठाकुर ने वह जो एक साप का भी उदाहरण दिया कि साप को पूछा कि अरे तुमने अपनी आत्मा रक्षा क्यों नहीं की तो कहा कि आपने ही तो मना किया है कि किसी को किसी की हत्या नहीं करना तो साधु ने कहा जिसने साब को कहा था कि दूसरों की हत्या मत करना कि अपनी आत्मरक्षा के लिए फोस तो करनी चाहिए भले ही तुम लोगों को दसों नहीं किंतु फिर आखिर में क्या कहा साधु जो है वो साधु को यह फस भी नहीं कर चाहिए आत्म रक्षा के लिए अभी यहां पर साधु शब्द से मैं यदि साधक शब्द डाल दूं तो यह हम सभी के लिए हो जाता है कोई भी क्षेत्र में आपको जदिया साधना करते हैं तो साधना करने का सर्वप्रथम यह एक क्राइटेरिया है कि आप अपनी आत्मरक्षा ना करें क्योंकि यदि आप अपनी आत्मरक्षा करेंगे तो इसका अर्थ यह हुआ कि इस जगत में ईश्वर है इस जगत को ईश्वर चलाते हैं ईश्वरीय नियम से दिव्य नियम से यह जगत चलता है यह विश्वासी फिर हम लोग खो देंगे तो यदि मुझे लगता है कि ना यह पूरे जगत के ऊपर में मां काली स्वयं विराजित है और मां काली मेरी रक्षा कर रही है या तो फिर मां काली अपने नियम के अनुसार इस जगत को चलाती है और यह नियम क्या है यह नियम है कि मनुष्य योनि का मनुष्य जन्म का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य है आत्मज्ञान प्राप्ति आत्म साक्षात्कार इसके अलावा जितने भी मंसूबे लेकर के लोग कार्य करेंगे इसके अलावा जितने भी एम्स ऑब्जेक्टिव्स एंड गोल्स लेकर के लोग कार्य करेंगे वे लोग फेल होने ही वाले हैं और जो आत्म साक्षात्कार के लिए ईश्वर दर्शन के लिए जीता है वही अल्टीमेटली सक्सेस होगा ऐसा हम मान लेते हैं यदि ईश्वर इस जगत के जदी अधिपति है तो किंतु हम इस जगत में क्या देखते हैं बार-बार देखते हैं कि असत की ही जय होती है जो कि असुरी वृत्ति है उन्हीं की जय होती है जो लोग अपना पावर मैक्सिमाइज करना चाहते हैं और अपने पावर को मैक्सिमाइज करने के लिए दूसरों का शोषण करना चाहते हैं उन्हीं की जय होती है तो ऐसा क्यों भाई तो फिर यह दिव्य सत्ता है उसके ऊपर मैं विश्वास रख के मैं क्या करूंगा मैं बिकॉज आई बिलोंग टू ए मिडिल क्लास फैमिली अभी मिडिल क्लास फैमिली का सपना क्या होता है ऐसा तो है नहीं कि बाप दादा बहुत सारी जमीन जायदाद रख के गए हैं तो उसके ऊपर में जिएंगे हम मिडिल क्लास वालों का है कि भाई कैसे भी करके पढ़ाई लिखाई करके एक अच्छा डिग्री प्राप्त कर लो और इसके बेस के ऊपर में कोई अच्छी प्राइवेट सेक्टर में जॉब खोज लो गवर्नमेंट जॉब तो मिलने वाली नहीं हम तो उस कैटेगरी में आते नहीं है तो किसी भी प्राइवेट सेक्टर में एक अच्छी जॉब खोज लो यह एक अपना एक अल्टीमेट एम रहता है मिडिल क्लास के लड़ का या लड़कियों का तो अभी मैं भी था इस तरह से पढ़ाई लिखाई कर रहा था 12थ में था व एकाएक एक दिन प्रश्न आया कि ये जो सब मैं उस ऑलरेडी मैं सब पढ़ रहा था सोच रहा था सब हायर थिंकिंग एक प्रारंभ हो गया था कि जीवन का उद्देश्य मुझे जिस तरह से मैंने अपने पिताजी को देखा अपने चाचा को देखा अपने जितने रिलेटिव्स को देखा अपने मित्रों को देख रहा हूं इस तरह से जीवन नहीं जीना जीवन जीना है एक नई डायरेक्शन में एक नए पथ पर चलना है वही पुराने पथ पर मुझे नहीं चलना तो फिर मैंने ठीक किया कि जद मैं यह जो कैरियर के चक्रवात में मैं पड़ूंगा तो उसमें से कभी मैं बाहर ही नहीं निकल पाऊंगा बेटर है कि कैरियर को यहीं पर खत्म करें और कुछ अच्छा कार्य करने के बारे में सोचे तो उस समय में गांधी जी को बहुत पड़ता था तो गांधी जी ने जैसे कहा है ना कि यंग लड़के सब गांव में जाए क्योंकि इंडिया लीव्स इन द विलेजेस भारत गांव में जीता है गांव में रहता है असली भारत तो वही गांव में जाकर लोगों की सेवा करें और फिर बस यह कैरियर बैरियर को तिलांजलि दे दे फिलहाल के लिए क्योंकि यह भारत माता की यह नीड है यह आवश्यकता है तो उस समय स्पिरिचुअलिटी का तो ऐसा कुछ नहीं था किंतु यह एक मुझे एक नोबल आईडिया लगा कि गांव में जाएंगे गांववासियों की सेवा करेंगे तो मैंने करियर छोड़ दिया 12थ की में एग्जाम ही नहीं दिया और जाता था वैसे घर से निकल कर के किंतु एग्जामिनेशन सेंटर होता है ना 12थ की तो बोर्ड की एग्जाम होती है तो अपनी खुद की स्कूलों में तो नहीं होती वो और किसी स्कूल में नंबर आएगा वहां पर जाना है और 12थ की एग्जाम आजकल का तो पता नहीं उस समय इतना टेंशन रहता था इतना टेंशन रहता था तो मने कि बाप रे माताजी पिताजी अपने रिलेटिव सभी लोग सोच रहे हैं अरे यह बोर्ड की एग्जाम दे रहा है पता नहीं कितना बड़ा वो युद्ध करके करने के लिए जा रहा है तो मैं घर से तो निकलता था किंतु फिर वो एग्जामिनेशन सेंटर जाने की बजह और कहीं पे वो साइकिल प जाता था तो इधर-उधर घूमता रहता था साइकिल पे फिर शाम को वापस आ जाता था घर वालों को लगा कि यह परीक्षा देने के लिए जा रहा है फिर ऐसा कुछ दिनों के बाद में रिजल्ट आया रिजल्ट में सभी में एब्सेंट एब्सेंट तो घर में ऐसा हल्लागुल्ला मच गया अरे ये तुमने क्या कर दिया क्यों परीक्षा देने के लिए नहीं गए तब मैंने कहा कि मेरी ऐसी इच्छा है कि मुझे यह सब नौकरी नहीं करनी इस तरह से मुझे करियर नहीं बनानी पैसा नहीं अर्जन करना य फैमिली नहीं करना मैं चाहता हूं कि मैं अपने जीवन में कुछ महत कार्य करो तो अभी खैर वह तो एक पूरा एक घर में झगड़ा वगैरह बहुत हुआ बहुत रोना धोना हुआ बहुत कुछ हुआ किंतु पता है कि अभी यह तो एक मिडिल क्लास का जो सपना है कि एक एक कैरियर बनाना इसको मैं वायलेंटली मैं इसके से दूर चला गया ना तो इसका मेरे मन प क्या क्या असर हुआ पता है हालांकि मेरे मन में तो मैंने सोच लिया कि हां एक हायर फिलोसॉफिकल लाइफ लीड करना है सेवा करनी है यह करना है वो करना है इवेंचर कृष्ण मिशन में आया साधु भी बना सब कुछ किया किंतु यह जो एक शौक था उस घटना का एक आघात था वो पता है बहुत साल तक मुझे कभी-कभी रात को ऐसे सपने आते थे दुस्वप्न नाइटमेयर जिसको कहते हैं कि मैं परीक्षा हॉल में बैठा हुआ हूं आखिरी बेंच पर बैठा हुआ हूं और मेरे सामने परीक्षा का पेपर है मुझे एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं आता और मैं ऐसा डर गया हूं क्वेश्चन पेपर के सामने में ब्लैंकली देख रहा हूं कुछ मेरा माइंड एकदम ब्लैंक हो गया परीक्षा के पेपर के सामने देख रहा हूं कुछ एक भी प्रश्न नहीं समझ में आता एक भी उत्तर नहीं समझ में आता क्या होगा क्या होगा और फड़क करके नींद खुल जाता था तो यह प्र ये नाइटमेयर ना कि उसका कोई ना कोई वेरिएशन उसका कोई ना कोई थोड़ा सा डिफरेंट स्वरूप इस तरह का सपना मुझे बहुत साल तक आता था अभी कुछ समय से बंद हो गया किंतु कल रात को यही सपना फिर से आया मुझे इतने सालों के बाद में इतना सब कुछ मैंने अपने जीवन में अचीव किया है मैंने गंगा किनारे भजनानंद जी के साथ में बैठ कर के स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क्स एडिट किया है यह सिद्धि यह अपॉर्चुनिटी यह फॉर्च्यून कितने कम लोगों को मिलता है रामकृष्ण संघ के इतने सारे साधु है कोई कोई फॉरेन रिटर्न है कोई पीएचडी है कोई क्या है कोई कौन है इतने सारे साधुओ में से यह फॉर्च्यून प्राप्त होना कितने कम लोगों के नसीब की बात है मैं मुझे वो प्राप्त हुआ अभी यह तो ठाकुर की ही कृपा है मैं तो कोई क्वालिफाइड पर्सन तो हूं नहीं किंतु इतनी सब सिद्धि सिद्धि कह सकते हैं एक तरह से वो प्राप्त होने के बावजूद भी देखिए कि यह सपना कल रात को मुझे फिर से आया और मैं तभी से मैं यह सोच रहा हूं कि यह सब कुछ जो मैं कर रहा हूं क्या अल्टीमेटली मैं कौन हूं मैं वही एक मिडिल क्लास लड़का हूं कि जिसका एम क्या है जिसके जीवन का उद्देश्य क्या है अच्छे से पढ़ाई लिखाई करके करियर बनाना मैंने इतनी ठाकुर म स्वामी जी को पढ़ा स्वामी जी के बारे में इतना चिंतन किया स्वामी जी का कंप्लीट वर्क्स मैंने दो बार एडिट किया है सर्वप्रथम गुजराती में किया दूसरी बार मैंने इंग्लिश में किया तो इतना सब कुछ करने के बाद में क्या कोई भी क्राइसिस आएगा तो आई विल गो बैक टू माय बेसिक नेचर जो कि एक मिडिल क्लास लड़के का है जिका एक सपना है एक मिडिल क्लास एक ड्रीम है इज दैट माय ट्रू आइडेंटिटी और आई हैव टू राइज अबाउट दिस माय नॉर्मल आइडेंटिटी टू गो बियोंड दिस टू अचीव समथिंग हायर इन माय लाइफ ऐसी जब घटना हो जाती है तो हमको ऐसा एक शौक लगता है कि अरे भाई मैं सही रास्ते पे तो जा रहा हूं कि नहीं कि नहीं ऐसा ना हो जाए कहीं पे कि पूरा मेरा साधु जीवन समाप्त हो गया मैं रिटायर होकर के बैलून मठ में हमारा आरोग्य भवन है वहां पर बैठा हुआ हूं और सडन मेरे मन में एक ऐसा रिग्रेट आ गया कि भाई यह तो तुमने जो 50 साल 60 साल का जो तुम्हारा साधु जीवन है तुमने जो ठाकुर महा स्वामी जी को पढ़ा तुमने ठाकुर महा स्वामी जी को प्रार्थना की यह सब मिथ्या चला गया क्यों क्योंकि जो असली कार्य तुमको करना था वह तुमने नहीं किया ऐसा तो कभी नहीं होगा तो मेरे साथ में जीवन के आखिरी समय पे आकर के आई डोंट नो पता नहीं कि यह साधक जीवन मेरा कहां तक ले जाएगा और अभी ऐसा तो एक हुआ फिर मैं यह भी सोच रहा था कि देखिए कि इस तरह का सपना सडन मुझे क्यों आया इतने सालों के बाद में इतना सब कुछ होने के बाद में इस तरह का सपना मुझे फिर से क्यों आया तो ऐसा होता है ना कभी-कभी कि परिस्थितियां अपने विपरीत हो जाती है अब जब विपरीत परिस्थिति होती है तो हम इसका कैसे मुकाबला करेंगे क्या हम उस भगवान शिव के भक्त की तरह पत्थर हाथ में उठा लेंगे जो मेरी मेरे पर पत्थर फेंकते हैं मैं भी उनके ऊपर में पत्थर फेंकना शुरू कर दूंगा कि नहीं साधक जीवन का जो मुख्य कर्तव्य है ईश्वर के ऊपर में भरोसा करके बैठे रहना फिर भले ही चाहे ईश्वर सो रहे हो ठाकुर के ठाकुर को कहा कि ठाकुर देखिए मैं सब कुछ छोड़ करर के आया हूं मैंने अपने को शून्य से शून्य तम बनाने का प्रयास किया है कोई कोई लोग सोचता है कि पहले मैं एक सक्सेसफुल पर्सन होकर के मैं साधना करता हूं जिससे कि ऐसा ना हो जाए कोई बाद में कहे कि अरे तुमने अपने जीवन में क्या प्राप्त किया है कि जिसको तुम त्याग करोगे स्वामी जी का वह जो फेमस उदाहरण है एक लड़का स्वामी जी के पास में आया कहता है कि मुझे साधु होना है तो स्वामी जी ने कहा कि देखो भगवान बुद्ध के पास में तो त्याग करने के लिए पूरा राज्य था तुम्हारे पास में त्याग करने के लिए क्या है कि तुम त्यागी होकर के साधु हो गए पहले तो कुछ अर्जन करो कि जिसको तुम त्याग करोगे बाद में तो तुम साधु होगे अभी मेरी तो यदि मैं स्वामी जी के पास में ज्यादा ऐसा सोच कर के कि मैंने ये 12थ की पढ़ाई लिखाई छोड़ दी है उसमें पूरी सभी एग्जाम में मैं एब्सेंट था अभी आप मुझे स्वीकार कर लीजिए तो स्वामी जी क्या ऐसा कहते हैं कि नहीं नहीं पहले तो तुम साधु होने के लिए ग्रेजुएट होकर के आओ उसके बाद में तुमको यहां पर लेंगे कुछ बाहर के जीवन में तो तुम्हारी सक्सेस होनी चाहिए बाद में ही तो तुम साधु हो गए तो अभी प्रश्न यह होता है कि मैंने उस समय जो सोचा था कि जद मैं ये करियर के चक्रवात में फसू तो मैं कभी भी ना ये माया के जगत में से बाहर निकल नहीं पाऊंगा क्योंकि वो कैरियर आपको हमेशा एक से दूसरे स्टेप पे दूसरे से तीसरे स्टेप पे खींच के ले ही जाता है कहेगा कि अच्छा आज तुमने 12थ पास पास कर दिया कल अभी तुम कहीं जाकर के कॉलेज का अच्छा डिग्री ले लो अभी कॉलेज का अच्छा डिग्री ले लिया तो होगा कि ये कैंपस प्लेसमेंट होगा अभी कैंपस प्लेसमेंट हो गया तो यह विप्रो है ना कि टाटा है उसमें अभी तुम्हारा हो गया है तो जाओ उसका एक एक्सपीरियंस लेकर के आओ अभी वहां पर चले गए तो होगा कि यह जो रेट रेस जो है ना ये चूहों की दौड़ कि अभी मुझे यह जो प्रोजेक्ट अपने अभी मैं जद य एक कॉमन प्रोग्रामर हूं तो फिर मुझे अभी ये प्रोजेक्ट लीड होना है अभी मैं प्रोजेक्ट लीड हूं तो अभी मुझे यह एग्जीक्यूटिव होना है सी सूट जिसको कहते हैं तो अब ये जिसको कहते हैं ना चीफ ए एटिव ऑफिसर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तो ये सी सूट पे अभी मुझे जाना है दैट इज अ रेस व्हिच नेवर एंड्स तो मुझे पता था कि मैं जद उस रेस में जाऊंगा तो मेरे में वह कैपेसिटी नहीं कि मैं फिर उसमें से निकल के आऊं तो कैसे भी करके एक बार तो मैं साहस करके निकल के यहां पर आ गया अभी इतने सालों के बाद में यदि मुझे लगता है कि मैंने यह शून्य से शून्य तम करने की यह साधना का प्रारंभ किया इससे कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं इतना वल्नरेबल हो गया हूं कि कोई भी आकर के मेरे पर आघात करे तो मुझे अपने को डिफेंड करने की कैपेसिटी नहीं यदि ऐसा होता तो मैंने यह उस दिन से जो सोच कर के इस दिन तक की मेरी जर्नी है पूरी जर्नी ही विफल चली जाएगी ऐसा तो यदि होगा तो क्या होगा तो यह एक प्रश्न है आज सुबह से मैं इसके बारे में सोच रहा हूं आज था कि ये स्लाइड शो का था किंतु सडन ये घटना वली ऐसे हमको एक अलग एक ऐसे अनएक्सपेक्टेड रास्ते पर ले जाती है यदि ऐसा कोई चाहता है विपरीत परिस्थितियां एक के बाद एक आती ही जाती है और यदि हम उसका प्रतिकार नहीं करेंगे यदि हम उसको अपने को डिफेंड करने का एक प्रयास नहीं करेंगे तो हमारी स्थिति क्या होगी यह विपरीत परिस्थितियां और ज्यादा से ज्यादा शक्तिशाली होती जाएगी और हमको और ज्यादा से ज्यादा हमको इतना दबा करके रखेगी हमको इतना मायूस कर देगी हमको इतना मने संपूर्ण रूप से हमारा जैसे कि विघटन कर देगी कि हम आखिर में एक ऐसी परिस्थिति में चले जाए कि मैं कुछ भी ना कर सकूं हमें मैं आई फील माइसेल्फ दैट आई एम अ लूजर अभी मैं आई एम ए फेलियर इन माय लाइफ अभी मेरा जो जीवन है अभी तक का आज तक का उसमें मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कि अबाउट व्हिच आई कैन बी प्राउड अबाउट व्हिच आई कैन से दैट यस दिस इज समथिंग सक्सेसफुल आई हैव डन अबाउट व्हिच आई कैन से विद सम काइंड ऑफ डिग्निटी दैट यस दिस इज माय अचीवमेंट बिकॉज मैंने ठाकुर महा स्वामी जी को प्रार्थना की है उनकी शरण में गया हूं तो उससे मुझे इतना तो प्राप्त हुआ है भले ही चाहे वह जो मेरा मिडिल क्लास ड्रीम है कैरियर का वह तो चला गया माता-पिता की जो सेवा करनी थी वह भी नहीं हो पाई एक डिग्निफाइड लाइफ जो संसार में जीना था वो तो नहीं हो पाया किंतु एटलीस्ट इस रास्ते पर आकर के ठाकुर महा स्वामी जी की सेवा में मैंने कुछ तो हासिल किया है कुछ तो मैंने अपनी क्षुद्र जो कैपेसिटी है वह जो स्क्विरल है वो राम जो राम सेतु भगवान राम सेतु बना रहे हैं तो वहां पर जाकर के गिलहरी अपना एक छोटा सा पत्थर व रखती है वहां पे तो एटलीस्ट उतना तो मैंने किया है तो यदि किंतु ऐसी परिस्थिति हो जाए और मुझे यह डाउट होने लगे कि गिलहरी की तरह एक पत्थर रखना भी मेरे से संभव नहीं हुआ आई एम फेलर इन एवरी स्टेप ऑफ माय लाइफ इन एवरी वे ऑफ एवरीथिंग आई हैव डन तो फिर मेरे साथ में क्या होगा तो पता है जब ऐसी परिस्थिति आ जाती है तब हमारे सामने दो रास्ते होते हैं एक तो है कि पत्थर उठाओ एक तो है कि सामना करो जो मेरा अहित करने का प्रयास कर रहा है या तो फिर यह जो विपरीत परिस्थितियां खड़ी हो रही है उसका डट कर के मुकाब करो यह एक रास्ता है दूसरा है कि अच्छा स्वीकार कर लो क्या आई एम ए फेलियर डंट मैटर चलो यह जीवन तो चला गया कि एक मैंने अच्छा सोच करके कुछ अच्छा कार्य करने का शुरू किया था प्रारंभ किया था आई फेल मैं निष्फल हुआ और भले निष्फल हुआ भले ही मेरा कोई कंट्रीब्यूशन ना रहे आखिर में जो भी मैंने कंट्रीब्यूशन किया है वह सब हवा में विलीन हो जाए सभी लोग कहे कि भले इसने जो कुछ किया कुछ नहीं किया समाज हमको गाली दे लोग हमको हमारा तिरस्कार करें परिस्थितियां हमारे से विपरीत हो जाए सब कुछ जदी हो जाए किंतु जो एक महत उद्देश लेकर के मैंने अपने जीवन का प्रारंभ किया था कि नहीं एक अच्छा कार्य करना है भले ही चाहे जो कुछ भी हो जाए तो इस जीवन में तो उस महत् उद्देश्य को पकड़ करके रखना है नेक्स्ट जन्म में जो होगा सो होगा जैसे कि स्वामी जी का स्वामी जी एक बार स्वामी जी का प्रॉब्लम क्या था कि उनकी एंबिशन बहुत ज्यादा थी कि यह पूरे विश्व को परिवर्तन कर देंगे यह कर देंगे आत्म साक्षात्कार आत्म साक्षात्कार की तो क्या उनको जरूरत नहीं थी किंतु उनका था ना कि गुरु भाइयों को संबद्ध करके एक ऐसे मशीन की स्थापना मशीन को किक स्टार्ट करके जाना है कि सब समय के लिए समाज कल्याण के लिए कार्य करता रहे तो उस बात में कभी-कभी उनको लगता था कि उनके गुरु भाई कहो ना कि ये जो रामकृष्ण संघ के साथ में जो जो सब अ जुड़े हुए हैं उन लोगों की विजन इतना ग्रेट नहीं है विजन इतना लॉन्ग टर्म नहीं है शॉर्ट टर्म विजन लेकर के छोटी-छोटी चीजों के लिए झगड़ा करते हैं स्वामी जी कहते हैं रिलीजन हैज गोन इन टू द किचन कि मैं मैंने ये छोटी-छोटी चीज को लेकर झगड़ा करना तो स्वामी जी एक बार इतने फ्रस्ट्रेट हो गए कि सीधा ठाकुर को गाली देना शुरू कर दिया अभी ये जो बाकी के गुरु भाई थे वो इससे बड़े ही दुखित हो गए कि स्वामी जी हमको गाली देते हैं वो एक ठीक है अपने नसीब को फटकार देते हैं वो भी एक ठीक है किंतु ठाकुर को गाली क्यों दे रहे हैं हमारा पूरा जीवन हमारा घडतर ही तो ठाकुर के बलबूते पे हुआ है ठाकुर के आदर्श और ठाकुर के उपदेश के अनुसार हु है ठाकुर को गाली क्यों दे रहे हैं अभी स्वामी जी ठाकुर को गाली देते देते सडन एकाएक थम गए अभी स्वामी जी का अधिकार है वो ठाकुर के ठाकुर ने उनकी अपनी पूरी शक्ति उनमें वो ट्रांसफर कर दी थी उने ठाकुर मां स्वामी जी एक तीन तीन एक तो स्वामी जी का अधिकार है ठाकुर को गाली देने का हमारा नहीं है तो जो भी है स्वामी जी गाली देते देते एकाएक रुक गए उन्होंने देखा कि गुरु भाई बड़े ही मायूस हो गए तो स्वामी जी ने इमीडिएट क्या कहा पता है देखिए कि हमारे जन्म जन्मांतर से अनंत जन्म आते हैं जाते हैं तो एक जन्म हमने इस पागल पागल बामुन बांगला ते बोले एक पागल ब्राह्मण के ह कर दिया एक पागल ब्राह्मण के लिए एक जन्म हमने फेंक दिया तो उससे क्या फर्क पड़ता है और आने आने वाले कितने कोटि कोट जन्म है जो कि हमारे पास में है जिसमें कि वी विल डू समथिंग बेटर तो दो ऑप्शन है अपने पास में जब ऐसा एक अंधेरा हमारी नजर के सामने छा जाता है तो मैं पत्थर उठाऊं कि ना उठाऊं मैं अपना सेल्फ डिफेंस करूं कि ना करूं जो हमको हानि कर के लिए जो हमारा हमारी निंदा करने के लिए जो लोग है उसके सामने मैं कुछ आवाज उठाऊं कि ना उठाऊं यह प्रश्न कभी-कभी अपने जीवन में आता है साधक के जीवन में मैं सिर्फ साधु सन्यासी की बात नहीं कर रहा सभी साधक के जीवन में यह प्रश्न आता है इफ यू आर ए जेनुइन साधक एक बार मैंने कहा था ना कि अपनी यह जो मॉर्निंग क्लास की ये जो सीरीज है तो व्हाट इज दिस ये फिलोसोफी है ना कि ये ठाकुर महा स्वामी जी का चिंतन मनन है क्या है एक्चुअली आई फील द दिस इज अ साध्य साधक और साधना ये साधना साधक जीवन के मेरे जो एक्सपीरियंस है दैट इज व्हाट अल्टीमेटली आई एम शेयरिंग विद यू नॉट के कोई बहुत बड़ा फिलोसोफी ना कि ये वेदांत वगैरह ठीक है वो तो बात-बात में हम डिस्कस करते ही है ठाकुर महा स्वामी जी के प्रसंग किंतु अल्टीमेटली दिस सीरीज दिस क्लासेस आर अबाउट साधक जीवन साधक जीवन की क्या समस्याएं हैं इसका क्या उकेल है मुझे लगता है कि सही सही प्रयोजन या तो फिर मेरा अपना जो शेयर करने के लिए मेरे पास में सही कुछ है और तो कुछ है नहीं यूनिवर्सिटी की कोई बड़ी डिग्री ना कि कोई बड़ी पोस्ट ना कि कोई बहुत बड़ी सक्सेस ना कि कोई बहुत बड़ी फिलोसॉफिकल अंडरस्टैंडिंग ऐसा तो कुछ नहीं है जो है अपने को शून्य से शून्य तम करने की यह साधना शरणागत होने की यह मेरी जर्नी यह यात्रा सब समय मन में ऐसा होता है यह जो स्वामी जी खीर भवानी गए देखा कि मां का मंदिर भग्न अवस्था में है तो स्वामी जी ने एकदम वीर भाव से कहा कि मां जद मैं उस समय होता और आपका मंदिर तोड़ने वाले यदि आक्रमणकारी मेरे सामने आते तो मैं सबका सफाया कर देता सबको मैं यह कर देता परास्त कर देता तो मां ने प्रकट होकर के कहा बेटा तुम मेरी रक्षा करोगे ना कि मैं तुम्हारी रक्षा करूं यह मंदिर जो नष्ट हुआ है वह मेरी ही लीला का एक भाग है यह जो जो साइ चलती रहती है ना सृष्टि स्थिति प्रलय की उसी साइकिल का एक पार्ट है मंदिर की रचना हुई मंदिर में आकर के बहुत सारे साधक साधु सन्यासी गृहस्थ लोगों ने सांत्वना प्राप्त की और समय के अनुसार मंदिर भगन भी हो गया और फिर कोई आएगा साधक और या कि कोई संत इस मंदिर का पुनर्गठन करेगा यह साइकल तो चलती ही रहेगी यू आर पार्ट ऑफ दिस साइकल तुमको क्या चाहिए तुमको शरणागत होना है किंतु ये जो कि हमेशा हमारे भीतर में स्वामी जी भी ऐसा हो जाते थे मैं ऐसा करूंगा मैं ऐसा करूंगा फिर माकोवा करके उनको शिक्षा दी और इतने सालों के बाद में निर्विकल्प समाधि प्राप्त कर ली अमेरिका में विजय प्राप्त करके आए ठाकुर ने अपनी शक्ति उनके भीतर में ट्रांसफर कर दी फिर भी स्वामी जी के मन में यह सब प्रश्न आते थे काश्मीर गए काश्मीर में एक तांत्रिक का चेला उनके पास आता था तांत्रिक ने नाराज होकर के स्वामी जी के ऊपर में पता नहीं किस तरह का जादू टोना कर दिया स्वामी जी को इतने डायेंट हो गई कि वो दौड़ कर के मने भाग कर के वहां से कलकाता आए मां के पास में जाकर के कंप्लेन कर र हैं कि आमा के हकते हकते पालिया आते होलो अर्थात कि मैंने वो सोच करते करते मुझे भाग कर के यहां प आ कर के आना पड़ा क्या तुम्हारे ठाकुर ने क्या कर लिया तो ऐसा दो तीन बार जब कहा तो माने क्या कहा तोर टीकी नार हाथ बांधा आज पहले तो कहा कि बेटा विद्या मानते हुए विद्या को स्वीकार करना होगा संसार में शक्ति को स्वीकार करना होगा किंतु आखिर में क्या कहा तुम्हारी चोटी जो है ना ठाकुर के हाथ में है तुम कहां पर भी दौड़ के जाओ ठाकुर खींच कर के ले आएंगे तो वैसे ही ये जो संसार में है य अविद्या शक्ति भी है विद्या शक्ति भी है कभी-कभी लगता है कि अविद्या शक्ति की ताकत इतनी प्रचंड है कि हम कुछ भी करें ना हर जगह से हमको एक ठोकर मिलेगी हर जगह से हमको एक धक्का मिलेगा हर जगह पर जाकर के हमको ऐसा एक शौक लगेगा कि हम बिल्कुल ये हो जाएंगे मन में ही मन में मर जाएंगे जैसे ऐसा होगा ही होगा लगता है कि क्यों विद्या शक्ति क्यों नहीं है ईश्वरीय शक्ति क्यों नहीं है मैंने अपना जीवन जो इतनी कुर्बानी दी इतना सैक्रिफाइस दिया मेरे माता-पिता को छोड़ कर के यहां पे आया अपने जीवन में अपने लिए कुछ भी नहीं मांगा यदि मांगता तो मैं ग्रेजुएशन करके आता कह सकता कि मुझे मेरा यह ये ग डिग्री है इसके अनुसार पोजीशन चाहिए ऐसा मैं कर सकता था पहले से ही सोचा कि ऐसा नहीं करेंगे तभी ऐसा नहीं था कि कोई आध्यात्मिक जीवन की कोई अंडरस्टैंडिंग थी ऐसा नहीं था कि मैंने कोई स्पिरिचुअल आध्यात्मिकता की किताबें पढ़ी थी कुछ भी ऐसा नहीं था ठाकुर महा स्वामी जी के बारे में पढ़ना तो मैंने बहुत सालों के बाद में शुरू किया तो किंतु एक इनेट अंडरस्टैंडिंग था कि नहीं कि यदि अपने हाथ में डिग्री आती है अपने हाथ में किसी भी तरह की सक्सेस आती है तो साथ में ही एक तरह का गुरुर आएगा एक तरह का घमंड आएगा एक तरह का एक सेंस ऑफ अचीवमेंट आएगा फिर उस घमंड या उस गुरुर या तो फिर एक सेंस ऑफ सक्सेस से निकल कर के शरणागति की बात आनी या तो फिर एक महत उद्देश्य की बात आनी वह हो ही नहीं पाएगा ऑफकोर्स ऐसा तो नहीं कहता कि सभी को ऐसा होना ही चाहिए अपने संग में हाईली सक्सेसफुल बहुत सारे लोग हैं और मैंने बहुत ही महत जीवन उन्होंने व्यतीत किया है मैं सिर्फ ने बारे में कह रहा हूं कि मेरे में इतनी वीकनेस थी कि यदि सक्सेस होता तो फिर मैं इस ओ नहीं आ पाता सबका अपना अपना एक ये होता है ट्रेजे क्ट्री होता है तो मैं अपनी ट्रेजे कटरी के बारे में कह रहा हूं तो जद इतना सक्सेसफुल होने के बाद में आखिर में जब हमारे सामने यह चौराहे पर जाकर के हम खड़े हो जाए क्रॉस रोड्स के ऊपर में जाकर के या तो फिर हम फेल हो या तो फिर हम पत्थर उठाए अपने हाथ में व्हाट इज माय ऑप्शन इसके अलावा और कोई ऑप्शन मुझे नहीं दिखता यदि मैं पत्थर नहीं उठाऊंगा अपनी रक्षा करने के लिए तो मैं डिप्रेशन के आत्म शलाका के एक सेंस ऑफ फेलियर के इतने गहरे गड्ढे में जाकर के डूबू कि उस गड्ढे में से फिर से मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा इस जन्म में तो नहीं निकल पाऊंगा अगले जन्म में जो होना है सो हो तो ऐसा यदि चौराहे पर जाकर के खड़े हो तो हमको कौन सा ऑप्शन लेना है यह साधक जीवन की सही सही कसौटी वहीं पर है कि ईश्वर मिले ना मिले वो एक बात है भले मिले भले ना मिले किंतु पत्थर नहीं उठाना है यह जो टेस्ट यह टेस्ट साधक के सामने बार-बार आता है और हम इस टेस्ट में क्या ऑप्शन सिलेक्ट करते हैं उसके ऊपर में हमारी नेक्स्ट जन्म की क्या ट्रेजे क्ट है वो ठीक होगी इस जन्म में तो भले चाहे हम लोग डूब गए इस जन्म में तो चाहे हम फेलियर हो गए इस जन्म में तो चाहे असफल हो गए डिप्रेशन के गहन गड्ढे में डूब गए नेक्स्ट जन्म में किंतु मुझे लगता है कि यदि ठाकुर मां स्वामी जी सही है तो मेरा यह डिसीजन कि मैंने आत्मरक्षा के लिए पत्थर नहीं उठाया उसका कुछ ना कुछ वैल्यू तो होगा उसका कुछ ना कुछ क्रेडिट तो उनके पास में जमा होगा यह ठाकुर रूपी बैंक जो है उसमें कुछ ना कुछ पूंजी तो जमा होगी ही होगी मेरे इस डिसीजन से ऐसा भरोसा करके हमको रहना है और जद पत्थर उठा लिया तो मैंने यह पहले से लेकर के जो जर्नी की थी वो पूरे में स्टेप वन के ऊपर में आ गया उस समय ही मुझे सक्सेसफुल हो जाना था उस समय ही मुझे इतनी बड़ी डिग्री इतना बड़ा इतना सारा सिद्धि इतना धन दौलत पावर इकट्ठा कर लेना था कि भविष्य में जाकर के कोई मेरी मेरा अहित कर ही ना पाए मेरे पास में इतनी शक्ति है कि कोई अहित करने को आए तो मैं डट कर के सामना करूंगा पहले से मुझे यह कर लेना था पूरा जीवन डाल कर के आखिर में मैंने यह करने को गया क्या अर्थ हुआ तो जब हम ऐसा करेंगे पत्थर नहीं उठाने का एक डिसीजन लेंगे गड्ढे में गिरेंगे असफलता रूपी डिप्रेशन में जाएंगे किंतु मुझे भरोसा है कि इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में अगले जन्म में नहीं तो उसके अगले जन्म में हमारी शरणागति की यह यात्रा संपूर्ण होगी और जब यह शरणागति की यात्रा संपूर्ण होती है ठाकुर म स्वामी जी के ऊपर में पूरा भरोसा करके हम रहते हैं तब कहीं जाकर के अपने पास में सात्विक शक्ति आएगी एक सात्विक खड़क तलवार अपने पास में आएगी तब कहीं जाकर के हम स्वामी जी की तरह जो कोई भी झगड़ा करने को आएगा ऐसा उसको झाड़ देंगे कि वह पूरा भागेगा भाग खड़ा होगा किंतु वह कब वो स्वामी जी की तरह झगड़ा करना स्वामी जी की तरह लोगों के साथ में एकदम मारपीट करने के लिए तैयार हो जाना वह कब तभी कि हमारी यह शरणागति की जर्नी उसके लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचे नहीं कि उससे पहले और यह जो अंडरस्टैंडिंग है कि कब हमको आत्मरक्षा करनी है तभी करनी है जब हमने अपने को शून्य तम कर दिया है हमने अपने को मैं मेरी जो आइडेंटिटी है मैं हूं हम हूं यह मैं को मैंने पूरा शून्य कर दिया है भीतर में ठाकुर के अलावा और कुछ नहीं है ठाकुर का मैं भक्त हूं ठाकुर का पूरा शरणागत हूं ठाकुर मेरे हृदय में आकर के विराजमान हुए हैं यह सेंस यह अचीवमेंट जब आएगी तब कहीं जाकर के यह जो सात्विक महाशक्ति का उदय होगा यह सात्विक महाशक्ति फिर अभी क्या है कि मेरा सेल्फिश बस तो पूरा चला गया है मेरा आइडेंटिफिकेशन पूरे विश्व के साथ में हो गया है तो यह आप आदमी यह जनसाधारण के अगेंस्ट में जो आवाज खड़ी करता है जनसाधारण का जो शोषण करता है उसके अगेंस्ट में फिर मैं पुकार उठाऊंगा उनके अगेंस्ट में फिर मैं यह खड़क उठाऊंगा यह पूरा अपना जीवन परिवर्तित हो जाएगा स्वामी जी ने यह जितने भी उदाहरण है किय स्टेशन मास्टर के साथ में झगड़ा किया अभी हमको लगता है स्वामी जी का ऐसा क्या जरूरत था कि फर्स्ट क्लास में मुसाफर करते वो तो कह ही सकते हैं कि अच्छा ठीक है मैं तो साधु हूं क्या फर्क पड़ता है सेकंड क्लास थर्ड क्लास में चला जाऊंगा किंतु यहां पे क्या था कि वह जो ब्रिटिश ऑफिसर था उसके मन में ऐसा ही घमंड था कि जितने भी भारतीय है ये सभी भारतीय कीट की तरह है एक वम्स की तरह है उनको हम जितना भी अत्याचार करें हम कर सकते हैं तो यह ब्रिटिश राज की जो मेंटालिटी थी भारत देश के प्रति उसको स्वामी जी को तोड़ना था नहीं कि खुद को फर्स्ट क्लास में बैठना था अपने को तो शून्य कर दिया अपने को तो ठाकुर में समाहित कर दिया वह फर्स्ट क्लास में बैठे ना कि सेकंड ना कि थर्ड क्लास पैदल चले क्या फर्क पड़ता है यह भारत देश की रक्षा करने के लिए स्टेशन मास्टर के साथ में झगड़ा मोल लिया तो यह एक अपना शरणागति करते करते करते हमको ऐसा लगेगा कि फेलियर के अलावा हताशा और निराशा के अलावा ठाकुर है ही नहीं ऐसा एक भाव होने के अलावा कुछ भी हाथ में नहीं आ रहा किंतु ये सालों साल की जन्म जन्मांतर की यात्रा करते-करते आखिर में एक दिन ऐसा सडन आएगा कि ठाकुर आकर के प्रकट होंगे कहेंगे कि भाई तूने अपने मैं को जो मार दिया है उसका यह परिणाम है कि तुम्हारे हृदय में आकर के मैं विराजित हुआ हूं और जब यह शरणागति की यात्रा अपने लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचेगी एक सात्विक महाशक्ति खड़ी होगी स्वार्थ संपूर्ण रूप से चला जाएगा पूरे जगत के साथ में आइडेंटिफिकेशन होगा और यह महाशक्ति जगत के कल्याण के लिए जितने भी आसुरी शक्तियां है कॉस्मिक लेवल पर उनके साथ में फाइट करेगी यह मां को पृथ्वी पर आना पड़ा हमने वह गंभीरानंद जी की अवतरण का में पड़ा है क्यों क्योंकि आज यह युद्ध हमारे हृदय में है आसुरी शक्ति और देवी संपद यह युद्ध हमारे हृदय में है बार-बार यह प्रश्न बार बार इस क्रॉस रोड्स पे यह चौराहे पर हम आके खड़े होते हैं मैं अपने को डिफेंड करूं कि ना करूं और जितनी बार में डिफेंड ना करने का डिसीजन लेता हूं उतनी बार और ज्यादा हताशा निराशा आती जाती है तो हताशा और निराशा को सहन करेंगे क्योंकि इनिशियली डिसीजन लिया है कि साधक होना है श्री राम कृष्ण को शरणागत होना है अपने जीवन को बलि स्वरूप मां के सामने बलि स्वरूप करना है बलि स्वरूप देना है ऑफर देना है तो यह डिसीजन ि एक बार हो गया तो भले ही चाहे निराशा के बाद निराशा दु स्वप्न के बाद दु स्वप्ना नाइटमेयर्स के बाद नाइटमेयर्स आते ही जाए मैं कितनी ही बार मुझे वह याद आए कि वह परीक्षा के वह हॉल में मैं आखिरी बेंच पर बैठा हुआ हूं और मेरे सामने यह जो परीक्षा का जो पत्र है वह जो क्वेश्चन पेपर उसके सामने मैं बिल्कुल मूर्ख की तरह देख रहा हूं कुछ भी पता नहीं चल रहा क्योंकि मैंने पढ़ाई लिखाई बीच में ही बंद कर दी थी तो एक भी उत्तर उसका नहीं आता यह नाइटमेयर्स कितनी ही बार हमारे सामने आता जाए किंतु ठाकुर पर भरोसा है कि यह जन्म जन्मांतर की यात्रा एक दिन तो सफल होगी यह एक दिन तो मैं मेरा में श्री राम कृष्ण को संपूर्ण रूप से शरणागत होगा और श्री राम कृष्ण मेरे हृदय में फिर से प्रकाशमान होंगे तो ऐसा सुबह सेय सब सोच रहा था तो मैंने सोचा कि वह स्लाइड शो छोड़े आज यह सब थोड़ा सा शेयर करें आज यही तो कल फिर से मिलते श्री राम कृष्णर्पण मस्तु व जो ठाकुर की कहानी है ना कि दो
Questions & Answers
लोग चल रहे है मित्र और सामने शेर आ गया एक बोलता है चलो भगवान को याद करें दूसरा बोलता है भगवान को क्यों कष्ट दे रहे हो आओ इस पेड़ पे चढ़े जाए किंतु यहां पे देखिए पेर पे चढ़ने को बोला है वाघ का सामना करने को नहीं बोला सो यह प्रतिकार की बात यहां पे भी नहीं है बहुत बार मैं यह उदाहरण कभी देता हूं तो कोई बोलता है अरे ठाकुर का यह भी तो उदाहरण है सामने कि शरणागति की बात कहां कही है उन्होंने तो आत्मा पुरुषार्थ की बात कही है तो पुरुषार्थ की बात कही है प्रतिकार की बात नहीं की प्रतिकार इस उदाहरण में भी नहीं है सो दैट इज समथिंग वी हैव टू रिमेंबर ठाकुर ने कहा ना कि वो साधक साधु ने कहा था साब को फोस तो करना चाहिए अपनी रक्षा के लिए है ना तो दो है कि एक तो आप कहेंगे कि साधक है किंतु मंद वैराग्य है और साधक है तो तीव्र वैराग्य है जो तीव्र वैराग्य वाले साधक है उनको आत्मरक्षा भी नहीं करनी चाहिए और एक सांसारिक रिस्पांसिबिलिटी है और आत्मरक्षा नहीं करनी ऐसा सोच के बैठ जाएंगे तो अपने ऊपर में डिपेंडेंट लोग जो है आपका फैमिली वगैरह वोह तहस नहस हो जाएगा वच इज नॉट गुड कि आप वे लोग आपके सामने मुंह करके बैठे हुए हैं अपना योग क्म अपने कल्याण के लिए उनको आप यदि धोखा दे दे इस तरह से यह तो नहीं चलेगा यह जो अपने वो वालियो लुट ारो उसकी जो बात है वो जो नारद मुनि को पकड़ लिया तो बोलते हैं क्यों तुम लूटमार करते हो डके क्यों करते हो तो मैं अपने माता-पिता की भरण पोषण के लिए तो बोलो कि जाओ पूछ के आओ तुम जो पाप करते हो उसमें वह हिस्सा लेंगे कि नहीं तो जाकर के पूछने को गए अपने पिताजी माताजी को कि मैं आपको खिलाता हूं मेरी धन संपद में आपका हिस्सा है किंतु जो पाप करके जो खिलाता हूं वो पाप में आप हिस्सा लेंगे कि नहीं तो बोले कि नहीं तुम्हारा रिस्पांसिबिलिटी हमको खिलाना तुम पाप करो कि कुछ भी करो उसमें हमारा क्या हिस्सा तो उनसे वैराग्य आ गया ये तो क्या बोल रहा है और उसमें से वाल्मीकि ऋषि हो गए तो अभी देखिए कि उनकी वो कैपेसिटी थी वाल्मीकि ऋषि हो गए किंतु ज्यादातर लोग तो आपके पिता माता आपके जो भी है डिपेंडेंट है आपकी तो रिस्पांसिबिलिटी है की भरण पोषण करने की वह छोड़ के यदि आप चले जाए तो ठीक नहीं संसार नहीं ही करना था या तो फिर या तो फिर यदि तीव्र वैराग्य आता है तो कर देना है माने ये मंद वैराग्य तीव्र वैराग्य आप कौन से लेवल प है ये जो स्वामी जी की बात है अ प्लेग रिलीफ हुआ स्वामी जी ने कहा हमरा तो नट सन्यासी गाच तलाई थाकी अर्थात कि हम तो नंगे सन्यासी है पेड़ के नीचे रहने के लिए हम तो अभ्यस्त है ये मठ वाड़ी वगैरह क्या है मठ को बेच कर के मिशन जमीन बेच कर के प प्लेग रिलीफ करें तब माने कहीं जाकर के स्वामी जी का कान पकड़ा ये जमीन किसकी है स्वामी जी अपना पूरा जीवन डाल कर के खून पसीना बहा करके अमेरिका से पैसे लेकर आए फिर भी यह क्या तुम्हारी जमीन है स्वामी जी ने उत्तर दिया ठाकुर की जमीन है तो तुम्हारा क्या अधिकार है इसको बेचने का बोल कर के फिर जमीन रही अपने पास में सो दिस इज यह इंडिविजुअल लेवल पर और इंस्टीट्यूशनल लेवल प यह बात सेपरेट हो जाती है इंस्टीट्यूशनल लेवल पर जितनी भी प्रॉपर्टी है ठाकुर उस नहीं कररी