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Rise And Fall Of The Civilizations 4 Mar 2024

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णाय ते नम स्वामी जी का लेटर हम पढ़ रहे थे तो देखा कि किस तरह से स्वामी जी को अभी जिसका सही सही अभी बच्चे को डिसिप्लिन ठीक-ठीक कौन करता है मां ही करती है क्यों क्योंकि मां सही सही अपने बच्चे को प्रेम करती है जिसको आप प्रेम करेंगे इनकी जद कोई बैड हैबिट्स होगी वह आपकी नजर में आएगी तो आप उनको डिसिप्लिन करके अच्छे रास्ते पर लाने का प्रयत्न अवश्य करेंगे अदर वाइज जो कि अपना बच्चा नहीं है मान लीजिए हम पार्क में गए हैं देखा कि अपना बच्चा बहुत ज्यादा तूफान मस् मस्ती करता है दूसरे लोग जो वहां पर आए हुए हैं घूमने के लिए उनके लिए परेशानी खड़ा करता है तो हम क्या करेंगे इमीडीएटली उसको पकड़ करके उसको डांट या तो फिर हो सकता है अभी तो य पहले के जमाने में होता था ज्यादा एक दो एक दे मने मार भी देंगे उसको किंतु यदि दूसरे का बच्चा इस तरह से गार्डन में जाएंगे या पब्लिक प्लेस में जाएंगे उसको कोई गड़बड़ करते देखेंगे हम उसको डिसिप्लिन करने का प्रयास नहीं करेंगे क्यों नहीं करें क्योंकि वह अपना बच्चा नहीं है इसके लिए उसको डिसिप्लिन करने का अधिकार अपने को नहीं है हां हम उसके बारे में कंप्लेन अवश्य करेंगे अथॉरिटीज को कि आ एक लड़का है वहां पे वो बाकी सबके लिए असुविधा खड़ी कर रहा है उसके लिए आप कुछ कीजिए इस तरह से आप कोई अथॉरिटीज होंगी या तो फिर बच्चे के मां-बाप होंगे उनको आप कंप्लेन करेंगे किंतु उस लड़के को आप डिसिप्लिन नहीं करेंगे डिसिप्लिन अपने ही लड़के को किया जाता है तो यहां पर भी देखिए स्वामी जी का भारत के प्रति जो प्रेम था भारत को अपनी जननी जन्मभूमि के समान गिनते थे इसीलिए भारतवासियों के जो दोष उनकी दृष्टि में आए उनको वह अपने नजर के सामने बताने का प्रयास अवश्य करेंगे यह ब्राह्मण समाज की तरह ना कि बाकी सब लोगों की तरह विदेश में जाकर के भारत में यह खराब है भारत में यह दूषण है भारत में यह अंधश्रद्धा है भारत में यह कु प्रथा है ऐसा बोल बोल करके उनके तो लाडले हो जाएंगे ऊपर से अपने लिए धन बटोर करके आएंगे कि हां हमको क्रिश्चियनिटी का प्रचार करना है भारत में इसके लिए हमको पैसा दीजिए हम यदि अपना धर्म परिवर्तन करेंगे तभी हमारा कुछ अच्छा होगा या तो फिर हम अपना एक नया धर्म चालू करेंगे जैसे इन दोनों का था ब्रह्म समाज और थियोसोफिकल सोसाइटी दोनों का वे लोग प्योर क्रिश्चियन नहीं थे किंतु क्रिश्चियनिटी के बहुत सारे एलिमेंट्स इनके भीतर में थे कुछ ईस्टर्न और कुछ वेस्ट दोनों का मिक्स अप करके उन्होंने अपना पंथ बनाया था तो इस तरह के लोग ज्यादा थे उस समय कि भारत में तो जो कुछ करना है तो उनको नया ही धर्म सिखाना पड़ेगा नया ही कल्चर देना पड़ेगा तभी भारत का कुछ उत्थान होगा जबकि स्वामी जी क्या कहते हैं भारत का उत्थान भारत की मिट्टी में से पैदा हुए प्रकट हुए महापुरुष ही कर पाएंगे वो विदेश की मिट्टी से आए हुए नए विचार विदेशी विचार वि विदेश भाव या विदेशी संस्कृति भारत के ऊपर में बिठा देने से भारत का कल्याण कभी नहीं होने वाला हां विदेशी लर्निंग लेना है पर उनकी संस्कृति नहीं लेनी जैसे जापान का देखिए आज जापान में जाएंगे उन्होंने अपनी लैंग्वेज अपना कल्चर बिल्कुल बरकरार रखा है किंतु ऐसा नहीं है कि वे लोग पूरे मिडिवल एजेस में या अंधकार भरे युग में जी रहे हैं वेस्ट की जो लर्निंग है मॉडर्न लर्निंग उन्होंने पू पूरा अपना लिया है और उनको उन्हीं की गेम में हरा रहे हैं तो अपनी संस्कृति चाहिए और ग्लोबल लर्निंग चाहिए संस्कृति शुड बी लोकल एंड लर्निंग शुड बी ग्लोबल जद ये ग्लोबल लर्निंग लोकल कल्चर ये दोनों का कॉमिनेशन होगा तभी कोई भी सोसाइटी कोई भी सिविलाइजेशन अपने रास्ते पर आगे बढ़ पाएंगी हां आप कहेंगे कि ऐसे बहुत सारे कंट्रीज थे इतिहास यदि आप खोल के देखेंगे आर्नोल्ड टोयन बी ने स्टडी ऑफ हिस्ट्री बोल कर के एक बहुत बड़ी किताब लिखी है उसमें वह स्टडी और सिविलाइजेशंस को स्टडी करता है वो स्टडी करके उसने पाया कि ना कि 30 34 में एग्जैक्ट नंबर भूल गया इतनी सिविलाइजेशंस ह्यूमन हिस्ट्री में आज तक रिकॉर्डेड हिस्ट्री में उसके पहले की बात नहीं रिकॉर्डेड हिस्ट्री में 3034 के आसपास सिविलाइजेशन हो चुकी है उसमें से कोई कोई सिविलाइजेशन है कि एक बार फॉरेन कल्चर का अटैक हुआ आक्रमण हुआ तो उसने अपनी जो एक यूनिकनेक्ट थी वह गंवा दी और फॉरेन सिविलाइजेशन का कल्चर उसने अपना लिया जैसे कि उसका सबसे बड़ा एग्जांपल है इजिप्शियन इजिप्ट सिविलाइजेशन इजिप्त में क्या हुआ कि वो फेरोस थे वहां पर हम देखेंगे 8000 साल पहले ना 6000 साल पहले 4000 साल पहले पिरामिड बनाए थे उनकी एक लैंग्वेज थी उनका एक रिलीजन था सब कुछ था किंतु एक बार इस्लाम उन्होंने अपना लिया तो उनकी जो इंडिजन कल्चर और रिलीजन उनको वह पूरे विस्मृत हो गए यही चीज यह ये जिसको कि हम मेसोपोटामिया कहते हैं जो एरिया यूफ्रेट्स रिवर के आसपास का ये इराक है ईरान है इनकी भी बहुत पुरानी कल्चर और संस्कृति थी उनका भी धर्म था किंतु अगेन जैसे न नया धर्म आया पुराना धर्म पुराना कल्चर उनकी इवन की लैंग्वेज भी उन्होंने संपूर्ण रूप से वे लोग भूल गए तो यह जो नए कल्चर का जब आगमन होता है और आपका कल्चर आपकी सिविलाइजेशन उसके प्रभाव के नीचे आकर के अपने को भूल जाता है या उसका विनाश हो जाता है तो तो वो सिविलाइजेशन ही समाप्त हो गई अभी वोह जगह वही है वही है यह मेसोपोटामिया वही है किंतु सिविलाइजेशन अभी नए सिरे से स्टार्ट हुई है भारत में भी इस तरह से देखेंगे कि अपनी भी हजारों साल पुरानी जो आदि संस्कृति थी कुछ-कुछ यह ंग हो रिवर सिविलाइजेशन ये सिंधु रिवर सिविलाइजेशन मेसोपोटामिया अर्थात की यूफ्रेट्स सिविलाइजेशन और यह नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन यह चार पुरानी आदि संस्कृतियों थी तो इन चारों में से देखिए कि आज सिर्फ भारत ने ही अपनी लाक्षणिक अपनी कैरेक्टरिस्टिक बजाए रखी है यह जो यूफ्रेट्स इन दोनों पर अभी इस्लाम का प्रभाव है और यह वंग हो रिवर वैली सिविलाइजेशन थी वहां पर बुद्धिज्म और कम्युनिज्म आ गया है माने उसकी जो अच्छा यह ओरिजिनल ये ईस्टर्न सिविलाइजेशन के बारे में कहेंगे तो उन्होंने अपना पूर्ण रूप से वो अपना कल्चर ये नहीं कर दिया है उन्होंने तज नहीं दिया है त्याग नहीं दिया है किंतु वो ज्यादातर जो अभी उनका मेजर रिलीजन तो बुद्धिज्म ही है उनका जो थिंकिंग और आइडियो जीी तो यहां का ही है कम्युनिस्ट का ये मॉडर्न कल्चर का तो इसलिए अभी देखिए कि सिर्फ ये सिंधु रिवर वेरी सिविलाइजेशन ये गंजे िक वैली सिविलाइजेशन ही एक हमारी ऐसी है कि स्वामी जी ने कहा कि मनु भी जदी भगवान मनु भी आज भारत में वापस आ जाएंगे तो उनको वही भारत देखने को मिलेगा इस अर्थ में नहीं कि हम लोग अभी भी संस्कृत में बातें करते हैं इस अर्थ में नहीं कि हमारे यहां पर अभी भी चार वर्ण व्यवस्था या तो आश्रम व्यवस्था है इस अर्थ में कि हिंदुओं के जो आध्यात्मिक जर्नी वही सर्वे सर्वा थी कि ईश्वर दर्शन ही जीवन का उद्देश्य है ये एम जो था हमारा वैदिक एज में वही टारगेट वही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य आज भी है आज आप देखेंगे कि बड़े-बड़े धनपति बड़ा-बड़ा उत्सव करते हैं तो वहां पर भी उनका कोई ना कोई रिलीजियस एलिमेंट होगा ही होगा और यह रिलीजियस एलिमेंट अपना वही हजारों साल पुरानी संस्कृति से ही लिया होगा आज की मॉडर्न कोई कल्चर में से नहीं लिया होगा तो यह जो है कि अपना वही ट्रेडिशनल कल्चर एंड रिलीजन जो कि हजारों साल पहले था वो आज भी चला आ रहा है तो दिस इज वन डिस्टिंक्शन कि ये बाकी जो चार सिविलाइजेशन थी आदि सिविलाइजेशन जदी हम उनको कहेंगे ओरिजिनल सिविलाइजेशन तो हमारे में और उन तीनों में ये एक डिफरेंस है किंतु देखिए कि हम लोग अभी देखिए कि जद ये वेस्टर्न क्रिश्चियन सिविलाइजेशन को भी लेंगे तो उनका भी एक समय ऐसा आया था कि सूर्यास्त होने की प्राय परिस्थिति आ गई थी जब यह क्रिश्चियनिटी का उदय हुआ जब यह रोमन एंपायर का ऑलमोस्ट डिसइंटीग्रेशन होकर के होली रोमन एंपायर का एस्टेब्लिशमेंट हुआ उसके बाद से एक डार्क एजेस यूरोप में स्टार्ट हुआ और डार्क एजेस अर्थात कि यह थियोलोजियंस जो है कि हां हमारे धर्मशास्त्र में यही लिखा है और इसी तरह से आपको बिहेव करना है इससे आगे पीछे और कुछ नहीं यह जो थियोलोजियन उन्होंने यह ठीक किया कि किसी भी तरह का नया लर्निंग किसी भी तरह का नया टेक्नोलॉजी किसी भी तरह का नया थिंकिंग इट इज एनेथ मा इट इज ब्लास फेम इट इज अगेंस्ट अवर रिलीजन तो ये धीरे-धीरे करके ये लर्निंग का ह्रास हुआ लर्निंग धीरे-धीरे करके वहां की सोसाइटी से जाने लगा तब ये जो अरब सिविलाइजेशन थी खास करके ये बगदाद में ये बगदाद की जो सिविलाइजेशन थी वहां पे एक एक इस तरह से एक लर्निंग का प्रारंभ हुआ कि ये ग्रीक यह रोमन ये इजिप्त यह भारत यह चाइना चारों ओर से चारों दिशाओं से जितना भी एंसेट लर्निंग एंसेट विजडम था ये अरेबिक सिविलाइजेशन अपने में कलेक्ट करने लगी यह जो पूरा डार्क एजेस था उन्होंने ही ये इस लर्निंग को मेंटेन करके रखा और इसके बाद में यूरोप में स्टार्ट हुआ रेनेसा री किंडलिंग रीबर्थ ऑफ लर्निंग तो जब यह यूरोप में रेनेसा स्टार्ट हुआ तो वहां पे लर्निंग कहां से गया वोह ग्रीक या तो फिर रोम से नहीं गया क्योंकि ग्रीस और रोम या तो फिर एलेक्जेंड्रा जो कि इजिप्त में था या तो दमा स्कस यह जो पूरा वोह जो रेन ऑफ द मेडिटरेनियन ओशन जो है मेडिटरेनियन ओशन का जो पूरा यह किनारा है वहां पर जितने भी बड़े-बड़े सिटीज थे प्राय सभी का खात्मा हो चुका था वहां पर जो बड़ी-बड़ी लाइब्रेरीज थी जैसे कि एलेक्जां प्रिया की लाइब्रेरी के बारे में हम कितना सब कुछ सोचते सुनते हैं म वन ऑफ द लार्जेस्ट लाइब्रेरी इन द वर्ल्ड ऐसा कोई ग्रंथ नहीं होगा जहां पर नहीं होगा वगैरह वगैरह तो वही एलेक्जेंड्रा की लाइब्रेरी पूरी जला कर के भस्मा हो गई थी तो ये जो लर्निंग कहां पर प्रिजर्व हुआ था तो यह अरेबियन सिविलाइजेशन ने उसको प्रिजर्व किया था और जैसे ही ये इटली में रेनेसांस स्टार्ट हुआ तो ये अरेबिक लर्निंग फिर से यूरोप में आया तो यू नो दिस इज अ टॉर्च ऑफ लर्निंग कि एक सिविलाइजेशन दूसरी सिविलाइजेशन को पास करती है अभी आज देखिए कि परिस्थिति बिल्कुल रिवर्स हो गई है यह बाद में अरेबिक सिविलाइजेशन का जो डिसइंटीग्रेशन स्टार्ट हुआ और यह जो यूरोप ने जो अपनी जो फ्लेम अपनी मशाल अपनी टॉर्च जो प्रकट की वो आज मतलब इतनी प्रचंड तेज से वह जल रही है कि पूरे विश्व को वह उजाला दे रही है यहां तक कि स्वामी जी को भी अमेरिका जाना पड़ा उनको सुनना पड़ा यह बात कि स्वामी जी आपकी जो टैलेंट है उसका ठीक-ठीक एप्रिसिएशन विदेश में ही होगा भारत में नहीं होगा यदि आप वहां पर सक्सेसफुल होंगे तो भारतवासी जान जाएंगे कि हां आप यह कोई मतलब ये जो सेठ लोगों ने जद वो वो कहानी है ना मैं बार-बार कहता हूं कि वहां पे गांव में वो गरीब लोग किसान लोग खाने को बैठे उनको आचार की ऐसा कुछ दिया गया तो बोले कि अरे ये क्या है हमने तो पहले कभी खाया नहीं तो जो परोस रहा था उसने कहा कि आपके आगे जो सेठ लोगों ने बैठ के खाए उन्होंने इसको खाया है तो वो किसान लोग बोले अच्छा अच्छा ओ अच्छा तो सेठ लोगों ने यदि खाया होगा तो ये अच्छा ही होगा दे दो हमको तो वैसे ही अमेरिका ने यदि प्रशंसा की होगी तो वो अच्छा ही होगा यहां तक कि गांधी जी भी गांधी जी ये ब्रिटेन में गए वो इनर टेंपल बोलकर के जगह है वो एकेडमी है वहां पर वो सीखे उसके बाद में साउथ अफ्रीका गए यह जो विदेश का पूरा एक्सपीरियंस उनको मिला यह विदेशी लर्निंग लेकर भारत में आए तब कहीं जाकर के भारत की स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार हो पाए थे ये फर्स्ट हरोड़ के प्रथम पंक्ति के जितने भी फ्रीडम फाइटर्स थे देखिए कि सभी लोग एक्ट वन पॉइंट और अनदर ये यूरोप में जाकर के शिक्षा लेकर आए थे तब कहीं जाकर के वो हमको ये एक लीडरशिप दे पाए तो दैट इज ट्रू ऑफ अवर इनिशियल यह जो किक स्टार्टिंग हुआ अपनी सिविलाइजेशन का यह जो मशाल हमने यह अरेबियन सिविलाइजेशन को दी अरेबियन सिविलाइजेशन ने लर्निंग और विजडम की ये टोर्च ये यूरोपियन सिविलाइजेशन को पास की और फिर वही यूरोपियन सिविलाइजेशन से ये नेचुरल लर्निंग नॉट स्पिरिचुअल लर्निंग स्पिरिचुअल लर्निंग की बात ही अलग है किंतु ये नेचर ये साइंस की जो विजडम की ये जो टॉर्च है वो हमको यूरोप से वापस मिली तब कहीं जाकर के भारत में फिर से यह नया सूर्योदय हुआ किंतु भारत में और बाकी सब जगह पर यह जो डिफरेंस है मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि भारत में ही यह यूनिक नेस है हमने तो देखा कि जापान में भी देखिए कि उन्होंने क्या किया जब यूरोप में यह लर्निंग स्टार्ट हुआ और यूरोप से सीखने की बारी आई तो उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि इजिप्त की तरह ना कि मेसोपोटामिया की तरह हम ऐसा करें कि अपनी धर्म अपना धर्म संस्कृति सब कुछ छोड़ दे पूरे पूरा 100% उनको अपना ले आज मॉडर्न एज में ऐसा नहीं हुआ जो कि इतिहास में एक बार जो हो गया खास करके यह आप देखिए कि यूरोपियन लोग यह जो अमेरिकन नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका और अफ्रीका और यह ऑस्ट्रेलिया चार जगह पर जो गए हैं उन्होंने वहां की स्थानिक संस्कृति का संपूर्ण रूप से सर्वनाश कर दिया है तो भारत में ऐसा नहीं हुआ एटलीस्ट एशिया में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि एशियन सिविलाइजेशन इतनी तो स्ट्रांग थी जापानीज और इंडियन यह दोनों के बारे में खास करके कि लोकल कल्चर ट्रेडिशनल इजेशन और अपना रिलीजन इतना तो स्ट्रांग था कि यूरोप जब आया तो हमने लॉक स्टॉक एंड बैरल इंग्लिश में एक शब्द है कि सब कुछ बेच करके सब कुछ विदेशी नहीं अपना लिया इतना तो एक विवेक रखा कि नहीं विदेश में से लेने को बहुत है किंतु विदेश में गड़बड़ भी बहुत सारी है और अपना गड़बड़ बहुत कुछ है किंतु सब कुछ प्रॉब्लेम िक नहीं है सब कुछ गलत नहीं है देयर आर नगेट्स ऑफ ट्रुथ इफ यू जस्ट रिमूव द एस फ्रॉम दी सेंडर्स यदि अग्नि जलाते हैं तो एक समय ऐसा आएगा कि जलते जलते लकड़ी राख में बदल जाएगी अभी राख की वजह से यह अग्नि क्या है धीरे-धीरे करके बुझ जाएगी तो आपको लगेगा कि अग्नि समाप्त हो गया है अग्नि पूरा बुझ गया है ऐसा नहीं आप जैसे हवा डाल कर के हवा की मदद से राख को हटाएंगे देखेंगे कि भीतर में व जो कोयले की तरह वो अभी भी किंडलिंग हो रहा है स्पार्क्स तो हो रहे हैं उसके ऊपर में और थोड़ा सा ईंधन डाल लेने से फिर से अग्नि प्रकट जाएगा यह जो हम अपने मंदिर में होम वगैरह करते हैं तो यह देखने को मिलता है हमको तो ये कि हमने यह गलती दो तरह की सिविलाइजेशन जैसे कि मैं बता रहा था शुरू से कि एक तरह की सिविलाइजेशन कि जिसका एक एक्सपायर डेट आ गया और उसके बाद में जब नया ग्रहण करने की नया लर्निंग नया विजडम ग्रहण करने की बात आई तो उन्होंने अपना इंजीनियस सब कुछ भूल गए और नए कल्चर को संपूर्ण अपना लिए एक कौन-कौन सी है यह नॉर्थ अमेरिकन जो ट्राइब्स थी साउथ अमेरिकन ट्राइब्स थी ये ऑस्ट्रेलियन एबोरिजिनल्स कहते हैं इनको ये अफ्रीकन ट्राइब्स थी ये चार जगह पर मॉडर्न युग में ऐसा हुआ है कि वेस्टर्न सिविलाइजेशन के जाने से लोकल सिविलाइजेशन का पूरा खात्मा हो गया और इतिहास में जो हुआ है इजिप्शियन और ये नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन और ये मेसोपोटामियन सिविलाइजेशन ये दोनों के साथ में ऐसा हुआ किंतु देयर इज अनदर कैटेगरी ऑफ सिविलाइजेशन कि आदि काल से हमेशा से चली आ रही है बार-बार उसका उसके साथ में उसके ऊपर आक्रमण हुए हैं उसका पतन भी हुआ है उसके भीतर में करप्शन भी प्रवेश किया है अंधश्रद्धा भी उसके भीतर में आई है किंतु हर बार यह जो फिनिक्स पंखी है कि वोह एक बार वृद्ध होगा तो अपने को एक भस्मा अग्नि में जला देगा किंतु वही अग्नि में से वह फिर से प्रकट होगा तो ये फिनिक्स पंखी की तरह ये अपनी भारतीय सिविलाइजेशन बार-बार प्रकट हुई है फ्रॉम द एस ऑफ द ओल्ड न्यू हैज टेकन रीबर्थ एंड ईच टाइम वी आर मोर पावरफुल मोर रेस्प्लेंडेंट मोर यू कैन से एडवांस एंड विथ ग्रेटर विजडम हमने बाहर की सिविलाइजेशन जो नई नई सिविलाइजेशन नए नए राज्य नई नई प्रजा है उनका जो नया-नया लर्निंग है सब कुछ एक्सेप्ट कर लिया है किंतु साथ में ही अपना पुराना है उसको नहीं छोड़ा ये अपने भीतर में यूरोप में देखेंगे कि एक बार रेनेसा हुआ है भारत में बार-बार रेनेसा होता रहा है तो यह भारत की यह जो एबिलिटी है हमेशा अपने को रि जनरेट करना पुराने को छोड़ कर के नए को अपनाना किंतु पुराने जो सार तत्व है उसको अपना के रखना और इसके पीछे बेसिक आईडिया क्या है तो स्वामी जी कहते हैं कि श्रुति और स्मृति दो पंथ है भारत की धार्मिक चिंतन में श्रुति है अर्थात की कोर ऑफ इंडियन कल्चर इंडियन सिविलाइजेशन इंडियन विजडम इंडियन रिलीजन श्रुति अर्थात की ये न्याय प्रस्थान जिसको कि हम ब्रह्मसूत्र कहते हैं ये श श्रुति प्रस्थान जिनको कि हम उपनिषद कहते हैं और स्मृति प्रस्थान जिनको कि हम कहते हैं श्रीमद् भगवत गीता तो यह प्रस्थान त्रय श्रुति प्रस्थान स्मृति प्रस्थान और न्याय प्रस्थान भगवत गीता उपनिषद और ब्रह्मसूत्र यह तीन हमारी धर्म संस्कृति के आधार है यह जितनी भी बार हम नए को ग्रहण करेंगे हम हो सकता है कि अपनी लैंग्वेज चेंज करें यह जो अपनी हिंदी भाषा जो कि हम ज्यादातर भारत के लोग बोल रहे हैं वह तो अपनी कोई वैदिक वो लैंग्वेज नहीं है वो वैदिक संस्कृत जो था उसका यह अरेबियन पर्शियन बहुत सारी भाषाओं के साथ में मिक्स अप हुआ तब कहीं जाकर के आज की हिंदी भाषा बनी है तो वो ठीक है हम लोग संस्कृत में बात नहीं करते करनी चाहिए नहीं कर पाते दिस इज अवर ड्रॉबैक दिस इज अवर वीकनेस वो भले जो भी हो किंतु संस्कृत में बात नहीं कर पाते इसका यह मतलब नहीं कि ऋषि मुनियों ने हमको जो बताया है वो हम समझ नहीं पाते हम समझ पाते हैं क्यों क्योंकि प्रत्येक युग में भारत में एक नए महापुरुष का जन्म होता है जो कि उस लोकल लैंग्वेज में उन वही पुराने ऋषियों की बातें लोकल लैंग्वेज में करते हैं देखिए कि भगवान बुद्ध आए पाली भाषा में उन्होंने वही सनातन धर्म का प्रचार किया किंतु उनके डिसाइल ने यह सोच लिया कि लैंग्वेज अलग है तो धर्म को भी अलग कर दो बाद में किंतु यह प्रॉब्लम नहीं हुआ आज देखिए कि ठाकुर ने बंगोली भाषा में बोला है स्वामी जी ज्यादातर इंग्लिश में बोले हैं तो यह बंगोली यह इंग्लिश यही तो आज की भाषा आज के कल्चर आज की हमारी थिंकिंग सिस्टम के साथ में मिला कर के वही वोह पुराने उपनिषद के सत्य वही ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या का सनातन नाद जो कि अपने ऋषि मुनियों के मन में गूंज रहा था अपनी वही वैदिक संस्कृति की चारों ओर वो गूंज रहा था वही नाद उन्होंने हमको आज फिर से दिया है तो तो यह है भारत का पूरा 10 पूरे विश्व की सिविलाइजेशन का एक ओवरऑल आउटलाइन इस परिपेक्ष में देखिए कि स्वामी जी चाहते थे कि भारत संपूर्ण रूप से अपने को विस्मृत ना हो जाए फिर से यह रिजन की फिर से रेनेसा की बारी आई है फिर से अपना पुराना लर्निंग को एक हाथ के पकड़ के रहना है दूसरा जो मॉडर्न लर्निंग है दूसरे हाथ से पकड़ना है और मैं यह बार-बार ये दूसरा भी उदाहरण देता हूं इसरो का इसरो के साइंटिस्ट तिरुपति में जाकर के यह जो पूजा ऑफर करते हैं दैट इज द बेस्ट एग्जांपल ऑफ द ट्रेडिशनल मॉडर्न ये ट्रेडिशनल दोनों का संगम इस तरह की भारत की कुछ-कुछ संस्थाएं हैं देख कर के हमको हमारे आंखों को मन को सुकून मिलता है तो यह है कि अपना आइडिया कि अभी देखिए यह जो स्वामी जी बार-बार हमको डांटते हैं कभी हमको सुन कर के कष्ट होगा कि क्यों हमको ऐसा कह रहे हैं यदि हमको कभी-कभी क्या होता हैना वो दुखती नर्स दबाई जवी मैंने गुजराती में कहते हैं कि जद वह कोई ऑलरेडी कहीं पर पेन हो रहा है और किसी ने वहीं पर प्रेस कर दिया तो क्या है कि ऑलरेडी हमको लगता था कि नहीं यह मेरा कुछ तो गलती है फिर स्वामी जी ने उसको पॉइंट आउट किया तो हम भड़क जाते हैं अरे भाई वो कौन हते हैं मुझे पॉइंट आउट करने वाले तो ऐसे यह बात सुनकर के डिफरेंट डिफरेंट तरह के रिएक्शन आ सकते हैं मेरा बस यही रिक्वेस्ट है कि जब इन सब चीजों को हम पब्लिक में डिस्कस करते हैं तो इससे पॉजिटिव वे में इसको लीजिए देखिए अपनी ओर अपने सामने देखिए और सोचिए कि हां ऐसा क्या है जो कि मुझे अपने में करेक्ट करने की जरूरत है ऐसा क्या है जिससे कि मैं अपने को इंप्रूव कर पाऊं सो दैट आई कैन सरवाइव दिस रेस ऑफ इवोल्यूशन वरना तो सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट यह बात हमेशा से सही है बहुत सारे आजकल के मॉडर्न साइंटिस्ट देखेंगे वे लोग कहेंगे अरे ये पूरा गलत कांसेप्ट है इवोल्यूशन इस तरह से काम नहीं करता इवोल्यूशन कोऑपरेशन से काम करता है वगैरह वगैरह किंतु जितने भी कोऑपरेटिंग एलिमेंट्स है सभी को इन देयर ओन वे कु तो सर्वाइवल के लिए स्ट्रगल तो करना ही पड़ेगा तो ये है बात कि स्वामी जी जब हमको डांटते हैं इस तरह से तो इस डांट को पॉजिटिव स्पिरिट में हमको लेना है थोड़ा आगे पढ़ता हूं अभी यह स्वामी जी ने पूरा कह दिया और फिर क्या कहते हैं ए शकल कोथा बोलबार माने ई यह जो सब मैंने पूरा डांटा यह सब डांटने का अर्थ यही है प्राचीन काले ढेर भलो जिनीस छलो खराब जिनीश छलो इतिहास में भूतकाल में बहुत सारी अच्छी खराब चीजें भी थी अच्छी चीजें भी थी भालो गुली रखते हो किंतु आजचे ज भारत फ्यूचर इंडिया एंसेट इंडियार अपेक्षा अनेक बड़ो होबे अच्छी बातों को रखना होगा किंतु याद रखो यह जो फ्यूचर इंडिया आ रहा है वह एंट इंडिया से कहीं कहीं ज्यादा अच्छा होगा कहीं ज्यादा कीर्तिमान होगा ज दिन रामकृष्ण जन्मे छन से दिन थके मॉडर्न इंडियार सत्य जुगे आविर्भाव जिस दिन से श्री राम कृष्ण का जन्म हुआ है उसी दिन से आधुनिक भारत सत्य युग का आविर्भाव हो चुका है आर तुमरा ए सत जुगर उद्बोधन करो और तुम लोग यही सत्य युग का आवाहन करो इसको आमंत्रण करो य विश्वा से कार्ज खेत्रे अवती हो शंख बजा कर के यह जो नया यहां पर जब य शंख की आवाज ना सुनकर के मुझे अभी भी याद है बेलूर मठ में जॉइन किया था मैं पीपीटीसी में जो कि नए आए हुए लड़कों के लिए वहां का ट्रेनिंग सेंटर है तो पहली पहली बार वैसे तो क्या होता है कि प्रतिदिन पूजा के समय शंख तो बचता है किंतु हमारा जो ट्रेनिंग सेंटर था वो मंदिर से बहुत दूर था तो मंदिर में सुबह में पूजा भी होगी तो शंख ऐसा कोई खास हमको सुनाई मुझे तो नहीं याद आ रहा है कि मैंने शंख सुना था किंतु जब दुर्गा पूजा आई तो हमको सबको पूरे दिन भर वहां पूजा मंडप में रहना था और जो विभिन्न विभिन्न पूजा हों के समय जो शंखनाद सुनता था वो पहली बार मुझे ऐसा लगता है मुझे याद नहीं आ रहा है कि घर पर रहकर कभी मैं शंखनाद सुना होगा ये टीवी वगैरह में शायद सुन लिया होगा किंतु यह सही सही लाइव शंखनाद मुझे याद नहीं आ रहा है कि मैंने और कहीं सुना होगा वही गंगा के किनारे बिलुर मठ में बैठ कर के पहला शंख ना सुना था तो ऐसा एकदम एक रोमा मांच हो गया था पूरे शरीर में अरे बाप रे म ये तो अपनी सनातन ध्वनि है ना वो महाभारत के युद्ध का वो दृश्य देखेंगे कि भगवान कृष्ण सारथी है और यहां पर अर्जुन शंख बजा रहा है शंख नाथ कर रहा है माने युद्ध के मैदान में प्रवेश करने से पहले ये युद्ध का मैदान एक एलेग है हमारे भीतर के जो शत्रुओं का वध करने के लिए यह साधन यज्ञ साधन समर साधन संग्राम उसका जब हम शुभारंभ कर रहे तब हम शंखनाद बजता है तब हम बजाते हैं सुनते हैं तो यही शंखनाद से इस सूर्योदय को सत्य युग को नए भारत का आवाहन करो उसको बताओ इसको हम आमंत्रण दो ताई ते जखन तुमरा बोलो राम कृष्ण अवतार अबार तार पर बोलो हमरा किछु जानी ना खन बोली मिथ्या चोर झूठ बिल्कुल जब एक और तुम लोग बोल रहे हो कि श्री राम कृष्ण अवतार है और दूसरी ओर तुम लोग कह रहे हो कि मुझे तो कुछ आता नहीं मैं तो कुछ नहीं आई एम नोबडी तभी मैं कहूंगा कि तुम लोग झूठ बोल रहे हो तुम लोग मक्कार हो चोर हो बिल्कुल झूठे हो क्यों यदि ठाकुर यदि सत्य है तो तुम लोग को भी सत्य होना है यदि जोदि राम कृष्ण परमहंस सत होन तुमरा ओ सत यदि राम कृष्ण परमहंस सत्य है तुम लोग भी सत्य हो किंतु दिखाते होवे सुध बोलने होवे ना स सिर्फ किंतु दिखाना पड़ेगा सिर्फ बातें करने से नहीं होगा कि हां ठाकुर अवतार है तो अवतार है चलो हमने यह मीटिंग करके ये हमने चाय वगैरह पीते पीते तीन चार मित्र इकट्ठा हुए हैं बढ़िया मजे से चाय पीते पीते गप लगा दिया कि अरे ठाकुर तो अवतार है यह वो अच्छी बात है किंतु सिर्फ बैठ जाने से नहीं होगा आगे स्वामी जी ने जो एक एक मने एक क्या एक वो जो उनके फ्लेयर जो होते है ना इंटेलेक्चुअल फ्लेर अप तरह के स्टेटमेंट वो आगे उन्होंने एक तरह का एक स्टेटमेंट दिया था कि शक्ति थाक ली विकास दिखाते होए अर्थात की शक्ति है तो उसका मेनिफेस्टेशन दिखाना पड़ेगा विकास दिखाना पड़ेगा तो वैसे ही यह एक दूसरा मने ये स्टेटमेंट कि किंतु दिखाते होवे राम कृष्ण अवतार है तो सिर्फ बैठ कर के बोलने से नहीं चलेगा दिखाना पड़ेगा कैसे दिखाना पड़ेगा अपने जीवन को ट्रांसफॉर्म करके अपने जीवन की गति श्री राम कृष्ण देव के उपदेश के अनुसार धावित करके उस डायरेक्शन में ले जा कर के और राम कृष्ण अपना नया तो कुछ नहीं बोले वही तो सनातन ऋषियों की वाणी वही सनातन वही अर्जुन का वह जो शंखनाद स्वामी जी ने आज फिर से हमको सुनाया है वही सारथी फिर से आज रामकृष्ण और में आए हैं हमारा जीवन रथ उसको दौड़ने के लिए उसको राइट डायरेक्शन में सही डेस्टिनेशन पर ले जाने के लिए तो वही सनातन वाणी एटलीस्ट चलो कुछ ना कर पाए तो जैसे गुजराती में एक कहावत है निशान चूक माफ नहीं माफ नीचू निशान अर्थात कि यदि आप टारगेट मिस हो जाते हैं तो आपको क्षमा कर दी जा सकती है किंतु टारगेट ही आप छोटा रखो टारगेट ही आप लोवर रखो तो उसको क्षमा नहीं कर सकते यदि जीवन का उद्देश्य ही इस तरह के रखो कि हां खाएंगे पिएंगे मजे से रहेंगे तो फिर वो तो क्षमा नहीं है टारगेट ऊंचा रखो कि हां मैं कोई महत कार्य अपने जीवन में करूंगा नहीं कर पाए या तो फिर जितना होगा उतना ही हुआ तो वो ठाकुर की इच्छा किंतु एटलीस्ट हमने यह तो कहा कि हमने टारगेट ऊंचा रखा है जीवन को एक महत्व डायरेक्शन देने का प्रयास किया है जीवन में एक आदर्श रख के चलने का का प्रयास किया है आदर्श विहीन जीवन आपको बाहर से कितना ही सक्सेसफुल लगे किंतु हमेशा याद रखिएगा कि इस जीवन में कभी भी सेटिस्फेक्शन नहीं होता वो आप अ छोटे हैं बचपन में देखेंगे कि आपका मित्र वह मित्र के घर गए तो उसके पास में बहुत सारे खिलौने हैं तो वह खिलौने देख कर के हमको भी थोड़ा सा ईर्ष होती है कि अरे मेरे पास इतने खिलौने इतने सुंदर सब चीजें होती मटेरियल सब चीजें तो कितना अच्छा होता यह सोच कर के हम घर पर आकर मां के पास में पिताजी के पास में रोते हैं कि मुझे भी वह महंगा वाला खिलौना दे दो अभी अपने पिताजी माताजी की वह परिस्थिति नहीं है कि इतना अच्छा खिलौना दे दे किंतु देखिए कि वो हमको मां और पिता का प्रेम इस बात पर नहीं है कि वह हमको कितना महंगा खिलौना देते हैं वो हमको जो प्रेम करते हैं ट लव इज अनकंडीशनल वो लव तो हमेशा प्रेम तो मां और और पिता का हमेशा रहेगा और यही हमारे जीवन में अल्टीमेटली आप जब 40 साल 50 साल 60 साल के होंगे और फिर जब जीवन में पीछे देखेंगे आपको यह याद नहीं आएगा कि पिताजी ने आपको कितने महंगे खिलौने ला दिए थे या तो नहीं ला दिए थे मां और पिताजी आपको कितना प्रेम करते थे स्नेह करते थे वही बात आपको जीवन के उस स्टेज पर जाक याद रहेगी और कुछ याद नहीं रहेगा तो वैसे ही तो मादर सकलर भतर महाशक्ति आ नास्तिक भतर घोड़ार टीम आ तुम सब लोगों के भीतर में महाशक्ति है और नास्तिक लोगों के भीतर में घोड़े का अंडा है माने यह बंगोली एक कहावत है यदि आपको कुछ नहीं आपके पास में कुछ नहीं है या तो कुछ प्राप्त नहीं होगा या तो कोई चीज मिथ्या है इसको यह लोग कहेंगे घोड़ार डीम अर्थात की घोड़ घोड़े का अंडा अभी पता है कि घोड़ा तो कभी अंडा देने वाला नहीं घोड़े का अंडा होता ही नहीं यानी कि यह जो बात है इसका कोई अर्थ नहीं तात्पर्य नहीं मिथ्या है इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि तुम सबके भीतर में महाशक्ति है जो लोग की विश्वास करते हैं जो लोग की आस्तिक है जिनके जीवन में आदर्श है और जिनके जीवन में आदर्श नहीं है जिनके जीवन में यह सब शाइनिंग टॉयज महंगे महंगे खिलौने ही है उनके जीवन में घोड़ा यानी कि कुछ भी नहीं है जिनके जीवन में मां पिताजी परिवार जनों का प्रेम सही सही मिला है ऋषियों की वाणी को समझा है उसके अनुसार अपने जीवन को परिवर्तित करने का प्रयास किया उन्हीं का जीवन सही जीवन है फिर हम कुछ सही में कर पाए या ना कर पाए दिन में 10 बार फिसल भी गए जीवन में 10 बार फिसल भी गए किंतु यह प्रेम यह आदर्श यह विश्वास यह श्रद्धा हमको हर बार हाथ पकड़ कर के खड़ा करेगी और हर बार अपनी डेस्टिनेशन की ओर आगे की ओर ले जाएगी और जो विश्वास नहीं करते जिनको कि इस तरह से प्रेम पर विश्वास नहीं आदर्श पर विश्वास नहीं जो लोग सोचते हैं कि यह मटेरियल जो चीज है यह धन संपत्ति वैभव मान प्रतिष्ठा यही सब मेरे जीवन में है इसी के पीछे में मैं दौडा तो फिर इसके जीवन में घोड़ा डीम अर्थात कि घोड़े के अंडे के समान कुछ भी रहने वाला नहीं है जारा आस्तिक तारा वीर ता देर महाशक्ति विकास होवे जो लोग आस्तिक है वो वीर है उनके भीतर में महाशक्ति का विकास होगा दुनिया भेसे जावे दया दीन उपकार मानुष भगवान नारायण आत्ता स्त्री पू नप ब्रह्म क्त्र आदि भेदना ब्रह्मादेवी दुनिया हमारे सामने ढल जाएगी जद पूरी यह बाधा विपत्ति विरोध की यह जो बड़ी-बड़ी दीवारें हमारे सामने जद यह दुनिया खड़ी करेगी तो यह दीवाले ढह जाएगी दया दीन उपकार ये तीन जीवन के हो महामंत्र दया दन उपकार मानुष भगवान नारायण मनुष्य भगवान है मनुष्य के भीतर में ही नारायण का दर्शन करना है आत्ता स्त्री पू नप ब्रह्म खत्रा भेद नाई आत्मा के भीतर में स्त्री और पुरुष ब्राह्मण ना कि क्षत्रिय ना कि अन्य कोई जात आत्मा में कोई भी भेद नहीं है ब्रह्मादेवी एक छोटे से छोटा घास का तिनका वहां से लेकर के पूरे विश्व के विधाता ब्रह्मा पर्यंत सब कोई वही नारायण मय है ईश्वर मय है आत्मा मय है आत्मा के ही विभिन्न मेनिफेस्टेशन है कीट लेस मेनिफेस्टेड ब्रह्मा मोर मेनिफेस्टेड एक कीट है एक कीड़ा है उसके भीतर में ब्रह्म शक्ति का छोटा प्रकाश है ब्रह्म के में पूर्ण प्रकाश है एव्री एक्शन दैट हेल्प्स अ बीइंग मेनिफेस्ट इट्स डिवाइन नेचर मोर एंड मोर इज गुड एव्री एक्शन ट रिटर्स इट इज इवल जो एक मनुष्य के भीतर में आत्मन या के ब्रह्मण का प्रकाश करने के लिए जितनी भी एक्शन हो वह अच्छी है और आत्मन या तो ब्रह्मण का प्रकाश इसको कम कर दे या इसको बुझा दे यह जितनी भी एक्शन है वह गलत है वह शैतानी एक्शन है इट इज इवल तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु