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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम तो हम लोग यह कॉस्मस माइक्रो कजम उसका समरी और आउटलाइन कल हमने डिस्कस किया य कॉस्मो माइक्रो कजम कॉस्मो मैक्रो कजम और यह उसका जो कंपेनिया लेक्चर है कॉस्मो माइक्रो कजम यह दोनों लेक्चर स्वामी जी की यह जो ज्ञान योग सीरीज है इसका एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट पार्ट है तो अभी यह मैक्रो कजम है अर्थात कि यह कॉस्मिक लेवल पर किस तरह से यह स्पिरिचुअलिटी के आइडियाज स्वामी जी एक्सप्रेस करते हैं अर्थात कि ईश्वर का अस्तित्व है यह बात जी प्रूव करते हैं विद द हेल्प ऑफ द मॉडर्न साइंस और यह अभी हमको यह प्रश्न होगा कि ईश्वर का अस्तित्व प्रूव करने का वैसे ऐसा कौन सा प्रयोजन आ गया है तो प्रयोजन इस तरह से है खास करके स्वामी जी यह बात तो अमेरिका में कह रहे थे तो अमेरिका में उस समय या तो फिर कहेंगे वेस्टर्न सिविलाइजेशन का जो पुरुष पट भूमि का था उसका जो बैकग्राउंड था वो बैकग्राउंड क्या था बैकग्राउंड था कि किस तरह से यह चर्च में और यह क्रिश्चियनिटी के भीतर में एक तरह का एक ऐसा गिरावट आया एक ऐसा करप्शन आ गया कि यह धर्म गुरु जितने भी थे वहां पर पोप एंड कार्डिनल्स एंड बिशप यह लोग सब पॉलिटिकल बाबत में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिए थे और वहां पर राजा को किस तरह से राज्य करना है वगैरह सभी जो दैनंदिन यह जो सब कार्यकलाप होते हैं राज्य शासन के उसमें अपनी बात रखना शुरू कर दिए थे तो नेचुरली है कि अ जिस तरह से वहां पर एक ब्रिटिश फिलोसोफर ने कहा था कि पावर करप्ट्स एंड एब्सलूट पावर करप्ट्स एब्सलूट तो ये जो एब्सलूट पावर जब जिसके हाथ में आ जाता है तो उसके भीतर में करप्शन तो आना ही है बेटर ऑलवेज टू हैव द सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट सेपरेशन ऑफ साइंस एंड रिलीजन तो यह जो सेपरेशन हुआ वेस्टर्न सिविलाइजेशन में वहां से एक स्केप्टिसिजम भी प्रवेश हुआ कि ईश्वर की जरूरत ही क्या है अपना यह जो वेलफेयर स्टेट है और यह मॉडर्न साइंस है वही मानव सभ्यता के लिए इतना बेनिफिशियरी हुए हैं इतना लाभदायक है कि हमको ईश्वर की जरूरत ही क्या है ईश्वर की जरूरत थी एक जमाने में जबकि हम जंगल में रहा करते थे जबकि हमारे पास में पहनने को वस्त्र भी नहीं थे जब भी आग लगती थी बारिश होती थी ना कि यह तूफान होता था यह अकाल पड़ता था तब हम बिल्कुल उसके सामने असहाय से खड़े हो जाते थे और किसी हायर पावर को इवोक करते थे तो उस समय तो ईश्वर की जरूरत थी आज ईश्वर की जरूरत क्या है आज कोई भी नेचरल डिजास्टर होगा कोई भी मैन मेड डिजास्टर होगा देन वी कैन ऑलवेज यूज अवर मॉडर्न स्टेट पावर ऑफ द मॉडर्न स्टेट एंड द पावर ऑफ मॉडर्न साइंस टू हेल्प अवर सेल्फ आज का आधुनिक ये जो अ ये एडम राज्य है आज के आधुनिक ये जो सब गवर्नमेंट है उसके पास में इतना ज्यादा पावर है कि वह कुछ भी कर सकते हैं विद द हेल्प ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी किंतु जब यह स्केप्टिसिजम जैसे ही प्रवेश हुआ उस समय स्वामी जी ने नोट किया था कि यह जब वोह यूरोप में गए थे क्या उन्होंने नोट किया था कि यूरोप इज सिटिंग ऑन द पाउडर माने गन पाउडर अ बैरल ऑफ गन पाउडर माने है कि ये बहुत बड़े विस्फोट होने वाला है उसकी कतार पर यूरोप खड़ा है आज से 50 साल में इतना भयानक एक एक दुर्घटना होगी कि इतने इतनी खूना मर की होगी और सही में ऐसा ही हुआ कि 50 साल के बाद में स्वामी जी ने यह बात कहीं 18954 में फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हुआ और 1939 टू 1945 सेकंड वर्ल्ड वॉर हुआ मोर और लेस स्वामी जी ने जो टाइम फ्रेम स्पले किया था उसी टाइम फ्रेम में आखिर में हिरोशिमा और नागास के ऊपर में एटम बम फेंका गया दैट इज अ डिजास्टर ऑफ सच डेंजरस काइंड के यह न्यूक्लियर वेपंस अपने हाथ में आ जाने के बाद में मनुष्य जो चाहे वह कर सकता है पूरी पृथ्वी को अभी दो-तीन लोग पागल हो जाए तो ठीक है किंतु अभी दो मने पहले के जमाने में ऐसा होता था कि मनुष्य संहार करेगा तो क्या करेगा उसके हाथ में बंदूक रहेगी ना कि तोप रहेगी ना कि वह कहीं पर आग लगाएगा तो कहीं पर तलवार से मारेगा इतना ही तो किंतु विद हेल्प ऑफ द न्यूक्लियर वेपंस एटम बम इस तरह की एक शक्ति है कि पूरी पृथ्वी का विनाश कर सकती है कुछ ही पागल के हाथ में कुछ ही पागल लोग 1015 पागल लोग मिलकर के पृथ्वी का संहार कर सकते हैं तो ये आज की जो परिस्थिति है इसके भीतर में ईश्वर का होना ईश्वर पर विश्वास रखना एक धार्मिक आध्यात्मिक जीवन का क्या सही मायने है वो सब सोचना बड़ा ही आवश्यक हो गया है स्वामी जी ने यह सब उस समय देख लिया था भारत की परिस्थिति देखें तो थोड़ी डिफरेंट टाइप की है यहां पर लोगों को ईश्वर पर अविश्वास या तो धर्म पर अविश्वास इतना नहीं हुआ ऐसा रेयरली ही भारत में आपको कोई मिलेगा जो कि कहेगा कि मैं अथ हूं अर्थात कि मैं नास्तिक हूं भारत में नास्तिक लोगों की संख्या बहुत कम है यूरोप में अमेरिका में बहुत ज्यादा मिल जाएगी भारत में बहुत कम ही नास्तिक मिलेंगे किंतु जितने भी आस्तिक है ना वो सिर्फ मुंह से बोलने वाले आस्तिक है हां वो मैं वर्बल एक्सेप्ट करता हूं शब्दों से मैं स्वीकार करता हूं ईश्वर है किंतु यदि ईश्वर सही में है तो मुझे मेरा जीवन में जो परिवर्तन लाना चाहिए वह मुझे कहां पे दिख रहा है जैसे ठाकुर ने वह चोर का उदाहरण दिया था यदि एक चोर है उसको पता चले कि एक बंद कमरे में बहुत सारा सोना महर रखा हुआ है बहुत सारा सोना रखा हुआ है हीरा जवाहरात रखा हुआ है यदि यह बात चोर को विश्वास होती तो वह क्या चुपचाप वह सोते रहता ना कि चुपचाप वो बैठे रहता वो कमरे के सामने वो खड़ा होकर के कमरे का ताला तोड़ने का भर चक प्रयास करता बहुत प्रयास करता किंतु वह तभी करता प्रयास कि यदि उसको पता है उसको विश्वास है कि हां कमरा का ताला खोलेगा तो भीतर में मुझे वो हीरा जवाहरात मिलेंगे यदि और किसी ने आकर के कह दिया ऐसे किसी व्यक्ति ने कि हां यह कमरे का ताला तोड़ो तो तुमको हीरा जवाहरात मिलेगा किंतु यह जो कहने वाला व्यक्ति है उसके ऊपर में यदि चोर को विश्वास नहीं है तो वो कुछ कुछ नहीं करेगा चुपचाप बैठा रहेगा तो हम लोगों में से ज्यादातर लोगों की ऐसी ही परिस्थिति है हां ईश्वर है ईश्वर है तो क्या है चलो है तो है वो वहां प वैकुंठ में बैठे हुए हैं ना कि कैलाश पर बैठे हुए हैं हम लोग अपने घर में मजे से बैठे हुए हैं हमको ईश्वर की क्या जरूरत है या तो फिर कहेंगे कि जब बूढ़े होंगे तब ईश्वर का नाम लेंगे है ना हम लोग अपना जीवन का परिवर्तन ईश्वर के होने से नहीं करते यह जो ईश्वर है ऐसा मुंह से तो बोल लेते हैं किंतु वह सही सही विश्वास भीतर से प्रकट नहीं हो होता तो स्वामी जी इस तरह की परिस्थिति में उन्होंने समाज में ऑलरेडी देख ली थी एक तरह से तो एक बहुत बड़ा एक वर्ग है यूरोप वेस्टर्न कंट्रीज में जो कि मुंह पे बोल देता है कि हम लोग नास्तिक है और इस यहां पे ईस्टर्न कंट्रीज में एक बहुत बड़ा वर्ग है जो कि मुंह से तो कभी नहीं कहेगा कि हम लोग नास्तिक है किंतु उनके कार्यकलाप पूरे नास्तिक लोगों के जैसे ही है तो स्वामी जी के सामने यह च लेंज थी कि ईश्वर का अस्तित्व आज की मॉडर्न साइंस जिसके ऊपर में ज्यादातर लोगों का विश्वास है तो इस मॉडर्न साइंस की मदद से ईश्वर का अस्तित्व प्रूव करते तो यह एक पूरा एक उनका रह गया कि किस तरह से उन्होंने इवोल्यूशन और फिर आखिर में यह थर्मोडायनेमिक्स यह दो मॉडर्न आइडियाज के बेस पर ईश्वर का अस्तित्व पुरवार करने का प्रयास किया है तो ऑफकोर्स यह एक लेक्चर पढ़कर के जो नास्तिक है वह आस्तिक नहीं हो जाएगा जो शब्दों से आस्तिक है किंतु कार्यकलाप से नास्तिक है वह आदमी भी कार्यकलाप से आस्तिक नहीं हो जाने वाला है वह कोई साधक में परिणत नहीं हो जाने वाला है यह सब चीजें पता है किनके ऊपर में असर करती है जो लोग भी बॉर्डर लाइन पे खड़े हैं जैसे कि मैं था मैं जब इस तरह से स्कूल में पढ़ता था मैं अपने को खुलेआम नास्तिक घोषित करता था मैं कभी मंदिर में भी नहीं जाता था और कभी किसी भगवान पर विश्वास भी नहीं था मेरी दृष्टि से ऐसा होना चाहिए कि हमको समाज की सेवा करनी चाहिए क्योंकि एथिक्स एंड मोरालिटी वो ह्यूमन सिविलाइजेशन का फाउंडेशन है तो मुझे सेल्फिश नहीं होना है मुझे सेल्फलेस होना है मुझे अपना जीवन गरीब लोगों की सेवा में डालना है ऐसा मैं सोचता था किंतु गरीब लोगों की सेवा करने के लिए कोई मुझे ईश्वर की जरूरत नहीं है भगवान ने ही यदि मुझे दो हाथ दिए हैं ही उसी दो हाथों से परिश्रम करके ना कि मैं समाज सेवा ना करूं क्या तो इस तरह से मैं सोचता था किंतु मेरे मन में ऑलरेडी यह सब विचार बड़े ही चल रहे थे कि यदि यह जीवन का प्रयोजन क्या है व्हाई द ह्यूमन सिविलाइजेशन राइज एंड फॉल्स कभी-कभी ऐसा होता है ह्यूमन सिविलाइजेशन के साथ में जैसे भारत के साथ में ही देख लीजिए सतयुग था तो हम बड़े ही चरम सुख पे हम लोग ह्यूमन भारतीय सिविलाइजेशन बड़ी ही एडवांस थी जितने भी क्षेत्र देखें शैल क्रिया है ना कि फिलोसोफी है ना कि य ज कि अ युद्ध शास्त्र है न कि ये राजनीति है कोई भी क्षेत्र ले लीजिए सभी क्षेत्र में हम लोग पारंगत थे इकोनॉमिक है फिर यह पॉलिटिक्स है सभी क्षेत्र में हम लोग एकदम चरम शिखर पर बैठे हुए थे फिर वहां से इस तरह से हमारी अधोगति हुई कि हजार साल की हमारी गुलामी हमारे सर पर आक के बैठ गई और फिर से फिर भारत का फिर से उत्थान होने लगा तो यह जो राइज एंड फॉल ऑफ एनी सिविलाइजेशन इसके पीछे क्या कारण है जद यह कारण पता चलेगा तभी तो हम यह जो समाज में आज समाज में जो गरीबी है जो लोगों को कष्ट हो रहा है उसको तो हम थोड़ा सा हेल्प कर पाएंगे तो यह चिंतन मंथन चल रहा था उस समय जब मैंने स्वामी जी को पढ़ा तो सडन मुझे लगा कि नहीं स्वामी जी जो उत्तर देते हैं मेरे प्रश्नों का वो मुझे बिल्कुल सही लगते हैं तो यह सब प्रवचन है स्वामी जी के वो जो लोग बॉर्डर लाइन प बैठे हुए हैं उनके लिए परफेक्ट है कि ऑलरेडी मन के भीतर में मंथन चल रहा है मन ऑलरेडी किसी को गुरु के रूप में स्वीकार करने के लिए उत्सुक होकर के बैठा है किंतु वह गुरु मिल नहीं रहा और मन से भी मैं कॉन्शियसली एक्सेप्ट नहीं कर रहा हूं कि मुझे गुरु चाहिए भीतर में तो बड़ा घमंड रहता है कि गुरु की किसको जरूरत है हम लोग अपने ही चिंतन से अपने ही परिश्रम से यह सब फिलोसॉफिकल क्वेश्चन सॉल्व कर लेंगे ऐसा मन में तो बड़ा घमंड रहता है किंतु सबकॉन्शियस लेवल पर मन हमेशा किसी एक गुरु को खोजता रहता है तो वो मु त्व जब एक कतार पर आकर के खड़ा रह जाए हमारे यह जो ईश्वर की यह जो सबकॉन्शियस लेवल से पुकार कि कोई आए और मुझे मार्गदर्शन दे वह पुकार जब वह ऊपर में सुनाई दे तब कहीं जाकर के स्वामी जी का यह साहित्य अपने हाथ में आता है और हमको एक पूरी नई डायरेक्शन देता है तो स्वामी जी की यह जो सब लेक्चर है लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा या तो फिर ये लेटर्स ऑफ स्वामी विवेकानंद ना कि ये राजयोग कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग यह जो सब प्रवचन है वह इन लोगों के लिए है जो कि सबकॉन्शियसली ऑलरेडी रेडी होकर के बैठे हुए हैं जैसे कि जमीन बड़ी ही फर्टाइल हो चुकी है उसके भीतर में यदि एक बीज भी डालेंगे तो उसमें से नया पेड़ आना शुरू हो जाएगा तो इन लोगों के लिए स्वामी जी के यह सब लेक्चर है तो यह तो एक पॉइंट हुआ दूसरा एक पॉइंट है कि स्वामी जी ने कहा जिसको मैं मैं कहता हूं प्रॉब्लम ऑफ इवल अ स्वामी जी ने जैसे कहा कि ईश्वर ही एक बीज के रूप में इवॉल्व हुए जैसे कि पेड़ है पेड़ अपने पेड़ में से फ फूल आते हैं फूल में से फल आते हैं फल में से बीज प्रकट होता है और यही बीज के भीतर में जैसे कि हम आम का पेड़ मान ले तो आम के पेड़ के ऊपर में आम आते हैं आम के भीतर में वो आम का वो गोट ला जो हि गुजराती शब्द है व तो उसके आम के भीतर में आम का एक बीज रहता है अभी यही बीज जद जमीन में गिरेगा तो उसी बीज में से नया आम का पेड़ खड़ा होगा तो अभी प्रश्न यह है कि आम के पेड़ का जो पूरा डीएनए आज की मॉडर्न लैंग्वेज को यूज करें तो आम के पेड़ का डीएनए आम के आम के फल के भीतर में ये जो बीज है उसके भीतर में चला जाता है वही जब जमीन में जाता है तो दूसरा आम का पेड़ खड़ा होता है इसी लॉजिक को लेकर के स्वामी जी ने एक्सप्लेन किया कि ईश्वर में से यह ब्रह्मांड का बीज प्रकट हुआ और इसी बीच के भीतर में ईश्वर का डीएनए था ईश्वर का ब्लूप्रिंट था ईश्वर की डिवाइन शक्ति डिवाइन पावर इस बीज के भीतर में था इसी में से यह बिग बैंग होकर के पूरा ब्रह्मांड प्रकट हुआ इवोल्यूशन होकर के धीरे-धीरे करके एक कोषी जीव में से बहु कोषी जीव और उसमें से फिर आखिर में मनुष्य तो सृष्टि के एक छोर पर यदि हमको भगवान राम भगवान कृष्ण या तो फिर भगवान बुद्ध दिखाई देते हैं तो हमको यह मान लेना चाहिए कि जिस डीएनए में से भगवान राम कृष्ण भगवान बुद्ध प्रकट हुए तो उस डीएनए के जो जनक होंगे वह ईश्वर ही होंगे अर्थात कि ईश्वर ही डीएनए में समाहित हुए डीएनए में से भगवान रामकृष्ण प्रकट हुए यह पूरा एक एक चक्र है जो कि एक अपने को परफेक्टली एक्सप्लेन करता है तो इस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि यदि आज हमको भगवान राम कृष्ण दिखते हैं तो इस यात्रा के इस उत्क्रांति के प्रथम छोर के प्रथम स्टेप में ईश्वर ही होने चाहिए यदि शुरू में ईश्वर नहीं होते तो आज रामकृष्ण कहां से आते तो बड़ा ही सुंदर और लॉजिक एक्सप्लेनेशन है किंतु साथ में ही एक दूसरा प्रश्न खड़ा होता है यदि भगवान राम कृष्ण आज हमको दिखते हैं तो साथ में हमको ये रावण है कंस है हिटलर है और ऐसे कितने ही हैवानियत भरे स्वभाव वाले लोग हमको इस पृथ्वी पर दिखते हैं तो इसका क्या अर्थ है ईश्वर का जो डीएनए है उसके दो पार्ट थे एक पार्ट में से भगवान राम कृष्ण ना कि भगवान राम प्रकट हुए और उसके दूसरे पार्ट में से यह फिर रावण या तो फिर यह ईस्ट इंडिया कंपनी प्रकट हुई ये ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत का जो शोषण किया है और बाद में यह ब गवर्नमेंट ने उसके बारे में अभी तक तो आज की आधुनिक जनरेशन को पता ही नहीं है पुरानी पुरानी हिस्ट्री ठीक से पढ़ के देखें तो पता चलता है यह बंगोल फेमिन बंगोल फेमिन क्यों आया वो चर्चिल ने ठीक किया कि भारत में से जितना भी ये धान वगैरह है जितना भी यहां पे जो उपज है कि खेती की उपज वो सब यूरोप में ले जाओ क्योंकि यूरोप में सेकंड वर्ल्ड वॉर चल रहा है तो यहां से जितना भी धान जितना भी खेती की उपज वहां पे ले गए तो बंगाल में जो फेमिन आया कितने करोड़ों लोग उसमें मर गए उसका कोई रिकॉर्ड ही जैसे कि हम लोगों के पास नहीं है ऐसा वो पूरा नेशनल कॉन्शियस में से यह पूरा घटना ही चली गई है तो मैंने चर्चिल ने जितने लोग भारतीयों को मारा है मुझे नहीं लगता कि इवन यह सब जितने भी हमारे पुराण काल के राक्षस होंगे उतने सबने मिलकर के जितने भारतीयों को नहीं मारा होगा उतना तो ये चर्चिल ने मार दिया होगा या तो फिर ये ब्रिटिश गवर्नमेंट ने या तो ये ईस्ट इंडिया कंपनी ने मार दिया होता मार दिया था तो जो भी है यह यदि इस तरह से यदि राम कृष्ण के साथ में यह ईस्ट इंडिया कंपनी भी आती है चर्चिल भी आता है यह ब्रिटिश गवर्नमेंट भी आती है भगवान राम के साथ में यह रावण भी आता है भगवान कृष्ण के साथ में यह कंस है ना कि दुशासन है ना कि ये फिर यह जरा संग वगैरह यह लोग भी आते हैं तो क्या ईश्वर के डीएनए के दो पार्ट है मैंने एक में से देवी शक्ति प्रकट होती है और एक में से आसुरी शक्ति प्रकट होती है यदि ऐसा होता तो इस तरह के ईश्वर के बारे में हमको क्या कहना हम तो कहेंगे भाई हमको ना ही ये ईस्ट इंडिया कंपनी चाहिए ना ही आपके राम कृष्ण चाहिए जो है हमको शांति से रहने दीजिए क्योंकि ये जद दोनों साथ-साथ में आएंगे तो एक हमको ईश्वर की ओर ले जाएगा एक बड़े पैमाने पर संहार करेगा तो बेटर है कि ना ही ईश्वर चाहिए ना ही संहार चाहिए एक सामान्य जीवन हमको जीने दीजिए शांति से खाए पिए शांति से मर बाद में आपको जो करना है वो करना स्वर्ग में ले जाना है तो स्वर्ग में और नर्क में ले जाना है तो नर्क में तो यह एक प्रश्न हमारे सामने खड़ा होता है स्वामी जी ने इस प्रश्न का उत्तर इस प्रवचन में क्यों नहीं दिया यह थोड़ा सा आश्चर्य की बात है उन्होंने यह प्रश्न सोचा तो होगा ही ठाकुर ने भी इस प्रश्न के बारे में थोड़ा बहुत चिंतन किया है मैं अपने तरीके से इसका एक उत्तर देने का प्रयास करता हूं ऐसा नहीं इस तरह के जो प्रश्न आते हैं ना जिसके कि सोल्यूशन ऑलरेडी अपने लिटरेचर में बड़े ही क्लियर अवेलेबल नहीं होते हैं तब हमारे मन में थोड़े से एक एक द्विधा प्रकट होती है कि इतना बड़ा प्रश्न है कि प्रॉब्लम ऑफ इवल तो किस तरह से इसका सोल्यूशन किस मुंह से दे अपना कोई ऐसा तो नहीं है कि हम लोग कोई बहुत बड़े फिलोसोफर हैं ना कि हमने बहुत सारा व चिंतन मनन स्मरण कर लिया है यह सब लिटरेचर का धार्मिक और फिलोसॉफिकल कि हमारी यह कैपेसिटी हो यह प्रश्न का उत्तर देने की तो जो भी है थोड़ा बहुत अपनी कैपेसिटी है उसके अनुसार हम लोग अपने विचार तो रख ही सकते हैं तो देखिए कि यह जो ईश्वर का कांसेप्ट है जिसके साथ में आजकल के लोग हम लोग सबसे ज्यादा फैमिलियर है वह क्या है तो ईश्वर इज गुड भगवान है वह अच्छे हैं हमारी भलाई के लिए ही सब कुछ करते हैं और हमारे साथ में जो कुछ भी बुरा होता है एक शैतानी या तो फिर एक आसुरी शक्ति एक अलग से है जिसका कि ऑलरेडी ईश्वर के साथ में झगड़ा है यह जो क्रिश्चियन माइथोलॉजी में जो लन एंजल की जो बात है ना कि वह भी भगवान के साथ में बहुत सारे एंजल्स रहते थे उसमें सेय लुसिफर बोलकर के एक था उसने भगवान के साथ में झगड़ा कर दिया फिर स्वर्ग में से उसका पतन हुआ नर्क में गया फिर हर समय वह नर्क में रहते रहते भगवान और भगवान के ये जो फॉलोअर्स भक्त है उनके विरुद्ध में कोई ना कोई कंस्पिरेशन किया करता था तो ये दो डिफरेंट डिवीजन कर दिए भगवान अच्छे हैं और यह लुसिफर बोलो ना कि ये शैतान बोलो वो बुरा है जो भी बुराई है वो वो शैतान में से आती है जो भी अच्छाई है ईश्वर में से आती है अपना वेदांतिका केशन नहीं करता हम लोग ऐसा कभी नहीं कहते कि ईश्वर अच्छे हैं और बुराई जो है वो एक दूसरी सत्ता से आती है यदि ऐसा होता तो फिर ईश्वर के बारे में अपना जो कांसेप्ट है वही गलत हो जाता ईश्वर को हम ऐसा कहेंगे सर्वशक्तिमान है ईश्वर को यदि ऐसा कहेंगे कि वह समय और काल के परे है ईश्वर या तो फिर ब्रह्मण या तो फिर आत्मन यदि इसके बारे में ऐसा कहेंगे कि इसके जो जो कुछ भी इंफाइटिंग शक्ति वो कहां से आ सकती है ईश्वर या तो ब्रह्मण या तो आत्मन एक ही है फिर इसके ऊपर में एक अज्ञान का आवरण चढ़ता है एक अज्ञान का आवरण इसके ऊपर में वो प्रतीत मान प्रतिमान होता है फिर इस अज्ञान के आवरण से हम इस जगत को जब देखते हैं तो जैसे कि यह जो ये जो कलर वाले चश्मे जिसको गोगल्स कहा जाता है ना ये काले कलर के ना कि ये नील कलर के ना कि ग्रीन कलर के गोगल्स आजकल के लोग पहनते हैं तो यदि ग्रीन कलर के गोगल्स पहनेंगे चश्मे पहनेंगे तो पूरा जगत ग्रीन कलर का दिखेगा तो वैसे ही यदि ये अज्ञान का आवरण अपनी नजर के सामने है तो अज्ञान के आवरण की वजह से हम उनको यह अच्छा बुरा विभिन्न चीजें दिखती है यह किस तरह से फॉर एग्जांपल अभी कुछ दिनों पहले एक डिवटी के साथ में मेरा कुछ डिस्कशन हो रहा था यह जो डिवटी है उनका नेचर थोड़ा सा इंट्रोवर्ट है थोड़ा सा अंतर्मुखी थोड़ा सा नहीं ज्यादा ही कुछ अंतर्मुखी और यह जो इंट्रोवर्ट लोग होते हैं उनके साथ में हमेशा एक समस्या रहती है कि वे लोग अपने विचार बड़ा इजली लोगों के सामने व्यक्त नहीं कर सकते वे लोग अपने को बड़ इजली डिफेंड नहीं कर सकते यदि कोई उनका शोषण करना चाहे यदि कोई उनका बेनिफिट ले लेना चाहे जद कोई उनको हानि करने को आए तो वे लोग अपने को बड़ा इजली डिफेंड नहीं कर सकते मन में ही मन में बड़े ही वे लोग परेशान होते रहेंगे मन में ही मन में सोचते रहेंगे कि यह व्यक्ति जो है जो कि मेरा अनादर करता है मेरा अपमान करता है या तो फिर मुझे हानि पहुंचाने का प्रयास करता है उसके साथ में मैं कल जाकर के कल सुबह को उठकर के इस तरह से झगड़ा करूंगा उसको जाकर के यह सुना दूंगा व सुना दूंगा उसके साथ में यह करूंगा व करूंगा किंतु वास्तविक जब दूसरा दिन शुरू होता है वह कुछ नहीं कर पाता क्यों क्योंकि वह अपने मन में ही मन में घुटन महसूस करता है और यह बात जब मैं उस डिवोटा के साथ कर रहा था तो मैंने कहा कि देखिए मेरा भी वही इसी तरह का एक इंट्रोवर्ट नेचर है मेरे साथ में कोई कुछ भी कर ले मैं बड़ा इजली अपने को डिफेंड नहीं कर पाता हूं मन में ही मन में मैं सोचता रहूंगा कि अरे ऐसा क्यों कर रहा है वैसा क्यों कर रहा है मैंने उसका क्या बुरा कर दिया है मैंने उसके बारे में क्या कुछ बुरा कहा है फिर भी वह मेरे पीछे में क्यों लगा है तो इस तरह से मेरा भी ऐसा है कि बड़ा इजली में अपने को डिफेंड नहीं कर पाता तो अच्छा तो अभी यह जो डिवटी था तो मुझे पूछता है कि इसका सलूशन क्या है क्या साधना करने से मन ठीक हो जाएगा मैंने कहा कि देखिए साधना करने से तो साधना तो एक अल्टीमेट औषध है इस जगत के जितनी भी औषध है उसकी सब वो जो स्टैंडर्ड दवाई है वह है वह साधना तो साधना करने से तो वैसे सभी दुख दूर हो जाएंगे जगत के व उसमें तो कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु यह जो पार्टिकुलर प्रॉब्लम जो है ना इसके साथ में हमको और भी एक चीज देखनी है जो इंट्रोवर्ट होता है वह हमेशा यदि यह सोचता है कि यह व्यक्ति मेरा अपमान क्यों कर रहा है यह व्यक्ति मेरे साथ में इस तरह से बिहेव क्यों कर रहा है वो व्यक्ति मैं मेरे साथ में ऐसा क्यों कर रहा है तो ऐसा सोचते सोचते यह इंट्रोवर्ट लोगों के भीतर में एक भयानक सेल्फिश चली आती है वे लोग सिर्फ अपने ही बारे में सोचना शुरू कर देते हैं कि यह मेरे बारे में ऐसा कह रहा है वो मेरे बारे में ऐसा कह रहा है यह मेरे साथ में ऐसा कर रहा है वो मेरे पीछे में इस तरह की बातें कर रहा है तो मेरे साथ में कुछ बुरा हो रहा है मेरे साथ में यह हो रहा है करके करके मैं मैं मैं करते करते एक ऐसी भयानक सेल्फ सेलफिशनेस एक भयानक एक स्वार्थ की वृत्ति उसके मन में प्रकट हो जाती है कि फिर वह अपने से आगे देख ही नहीं सकता सबके प्रति उसके मन में एक कटु भाव रह जाता है कि यह ऐसा है वो ऐसा है यह ऐसा है इसका सल अच्छा अभी आप कहेंगे कि नहीं जैसे मैं अपनी ही बात करता हूं मैं इंट्रोवर्ट हूं और मेरे साथ में इस तरह से बहुत बार हुआ है कि मैं लोगों के बारे में इस तरह से एक नेगेटिव ओपिनियन बना के बैठा हूं किंतु मैं तो कहूंगा कि मैं सेल्फिश नहीं हूं मैं तो जब से स्कूल में पढ़ रहा था तभी से मैंने सोचा था कि गरीब लोगों के लिए काम करना है और मैंने पूरा जीवन यह प्रयास भी किया है कि गरीब लोगों के लिए जितनी भी सेवा हो सके मैं रांची में था वहां पर मैं ट्राइबल डेवलपमेंट का काम करता था जब मैं स्कूल में था तब मैं स्कूल में जाते समय वहां पे एक मैदान आता है रास्ते में वहां प ये माइग्रेंट लेबर होते हैं उनके छोटे-छोटे बच्चे जो कि बिना वस्त्र के बिल्कुल ंगे पुंगे वहां पर दौड़ते रहते हैं मैदान में उनको जाकर के मैंने सिखाने का प्रयास किया है मैं प्रतिदिन शाम को जाता था थोड़ा बहुत उनको अक्षर ज्ञान देना थोड़ा बहुत उनके साथ में अच्छी बातें करना वह तो मैं स्कूल के दिनों से कर रहा हूं मैं कैसे सेल्फिश हो सकता हूं किंतु पता है यहां पर सेल्फिश की और सेल्फलेसनेस की दो डेफिनेशन है एक तो है कि मैं फिलोसॉफिकली सेल्फलेस हूं मैं एक तो है कि मैं फिलोसॉफिकली सोचता हूं कि मैं जगत के बारे में मैं कुछ अच्छा मैं कंट्रीब्यूशन रख कर के जाऊं मेरा एक लिगसी हो एक पॉजिटिव लिगसी में रख कर के जाऊं कि मैंने जो लोग डिसएडवांटेज है जो कि पद दलित है जो लोग समाज से जिनको ठुकरा दिया गया है उनके लिए मैंने कार्य किया है उनके लिए मैंने अपना जीवन समर्पित किया है यह एक हायर लेवल पे सेल्फलेसनेस है मैंने जिसको कहेंगे स्वामी जी की ही लैंग्वेज यूज करके कहेंगे दिस इज अ कॉस्मिक सेल्फलेसनेस सेल्फलेसनेस ऑन द लेवल ऑफ मैक्रोकॉस्म किंतु साथ-साथ में ही एक व्यक्तिगत सेल्फलेसनेस होती है सेल्फलेसनेस ऑन एन इंडिविजुअल लेवल कि हम अपना नेचर एक इस तरह से बनाए जिससे कि हम आसपास में हम जिनके लोगों हमारे कलीग्स है हमारे फैमिली मेंबर्स है अपने फ्रेंड्स है जिनके साथ में हम रहते हैं उन सबके साथ में मेरा एक बड़ा ही अच्छा व्यवहार हो जिसको कि योग शस्त्र की भाषा में कहते हैं चित्त प्रसाद मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा यह चार तरह का व्यवहार मैं व्यक्तिगत लेवल पे मैं बाकी सब लोगों के साथ में कर पाऊं तो यह एक इंडिविजुअल लेवल पे सेल्फलेसनेस और यह कॉस्मिक लेवल पे सेल्फलेसनेस फिलोसॉफिकल लेवल पे सेल्फलेसनेस ये दो डिफरेंट है यह मैंने अपने खुद के जीवन में पाया है मैं हमेशा फिलोसॉफिकली तो यह सोचता रहता हूं कि इस तरह का कौन सा एक ऑर्गेनाइजेशनल सेटअप होना चाहिए जो कि इस इंडियन सिविलाइजेशन को फिर से अपनी चरम सीमा पे लेके जाए किस तरह के प्रोजेक्ट्स हमको रन करने चाहिए सर्विस प्रोजेक्ट्स जिससे कि मैक्सिमम लोगों को बेनिफिट मिले स्वामी जी कहते हैं कि एजुकेशन एजुकेशन एजुकेशन तो किस तरह की एजुकेशन सिस्टम हमको एस्टेब्लिश करनी चाहिए जिससे कि मैक्सिमम लड़के उस एजुकेशन सिस्टम से पसार होकर के अपना जो फुल पोटेंशियल है उसको मेनिफेस्ट कर पाए यह सब फिलोसॉफिकल लेवल पर तो मैं सोचता हूं किंतु इंडिविजुअल लेवल पर जब बात आती है मेरे मन में एक तरह की सेल्फलेस सेल्फिश एक तरह की स्वार्थ वृत्ति बन गई है किस तरह से मैं यह सोचता रहता हूं यह व्यक्ति मेरे साथ में ऐसा क्यों करता है वह व्यक्ति मेरे साथ में ऐसा क्यों करता है इसका सॉल्यूशन है कि मैं एक्टिवली उनके प्रति करुणा की वृत्ति मेरे मन में जागृत हो उन एक्टिवली उनके साथ में जाकर के मैं दो अच्छे शब्द कहूं कि भाई आज तुम्हारा दिन कैसा गया आज सुबह को उठकर के क्या अच्छा हुआ क्या बुरा हुआ तुम अपने बारे में कुछ बताओ यह जो एक सहानुभूति एक कहेंगे कि एक ह्यूमन वर्थ एक अपने नेचर में होनी चाहिए वो मेरे में नहीं है मैं एकदम एक क्या कहेंगे कि ड्राई एक मेरा एक नेचर है जदिया हूं और सामने से कोई साधु मिलेगा कोई डिवटी मिलेगा एक मने कभी भी मैं उसको यह खड़ा रख कर के पूछता नहीं उसके बारे में भाई कैसे हो क्या चल रहा है तुम्हारे साथ में जब जो वो खुद मेरे साथ मेरे साथ बात जब तक नहीं करेगा तब तक मैं सामने से किसी के साथ बात करने को नहीं जाऊंगा इतना मेरा अस्तित्व मेरे में ही इंडिविजुअल लेवल प मेरे में ही एक केंद्रित होकर के रह गया है कि मैं ऐसा सोचता हूं दूसरे लोग मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं किंतु मेरा जो एक स्वामी जी का एक बहुत ही सुंदर कोटेशन मेक द हार्ट लाइक एन ओशन अपने हृदय को समुंदर की तरह विस्तृत बनाओ अपने हृदय में मनुष्य के प्रति बाकी जितने भी हमारे भाई बांधव है भाई भगिनी है बांधव है उनके प्रति एक एक प्रेम का भाव एक कंपेज एक करुणा का भाव रखो यह भाव मेरे हृदय में नहीं है यह बात मैंने धीरे-धीरे करके ऑब्जर्व की है और यह जो सेल्फिश से है इंडिविजुअल लेवल पे यहीं से जितने भी ये इविल है उसका प्रारंभ होता है देखिए कि मैं हिटलर का उदाहरण देता हूं हिटलर है वह भी फिलोसॉफिकल लेवल प यह सोचता था कि जर्मन देश जो है मेरा जर्मनी जो है मेरा उसका यह जो अधोगति आज हुआ है इसको मुझे जर्मनी को उसकी जो भूतकाल की यह जो उसकी ग्लोरी जो है उसकी भव्यता है उस भव्यता के लेवल पर मुझे लाकर के इसको बिठा देना है अच्छा अच्छी बात है उसने ये बहुत अच्छे-अच्छे प्रवचन भी दिए बहुत सारे लोग उससे प्रभावित भी हो गए उसको इलेक्शन में भी जीता दिया जर्मनी का चांसलर भी हिटलर बन गया किंतु इसके बाद में क्या हुआ हिटलर के साथ में मैंने हिटलर की बायोग्राफी पढ़ी है इसलिए मुझे यह जो बायोग्राफी पढ़ना बड़ा अच्छा लगता है उसमें हिस्ट्री एंड साइकोलॉजी इन दोनों का संगम होता है इसलिए आप ह्यूमन नेचर ऑन ए कॉस्मिक स्केल एंड ह्यूमन नेचर ऑन ए इंडिविजुअल स् केल दोनों आप समझ सकते हैं तो हिटलर ने जब एक बार जब चांसलर हो गया उसके बाद में उसके साथ में उसी के कुछ मित्र है उन्होंने धोखा उसके धोखा दारी की उसके पीछे में कुछ कंस्पिरेशन बनाई जब यह कंस्पिरेशन हिटलर ने देखी उसका मन बिल्कुल माने जैसे वो एक डॉक्टर जकिल मिस्टर हाइड वाली स्टोरी है ना कि दिन के समय में एक बड़ा अच्छा आदमी है रात को उसके सर के ऊपर में हैवानियत सवार हो जाती है तो हिटलर के साथ में भी ऐसा हुआ कहां जर्मनी का विकास करेंगे यह करेंगे वो करेंगे बातें कर रहा है और यदि कुछ लोगों ने मिलकर के उसके साथ में कुछ बुरा किया तो बिल्कुल उसके सर का वो जो है वो कुछ गड़बड़ हो गया और उसने ठीक किया कि जितने भी मेरे दुश्मन है सबको मैं मार दूंगा ये जो रिवेंज लेने की उसकी वृत्ति जो स्टार्ट हुई तो आखिर तक वो रिवेंज माइंड सेट में ही वो फंसा रहा जर्मनी का जो होगा सो होगा आखिर में एक ऐसी परिस्थिति आ गई यही हिटलर जो चाहता था कि जर्मनी वही अपनी भूतकाल की वो भव्यता के ऊपर में में वापस चला जाए यही हिटलर है जबकि युद्ध में हार रहा है तो उसने क्या कहा पता है जितने भी जर्मन नर नारी बालक बालिकाएं हैं उन सबका कर्तव्य है दुश्मन के साथ में लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना यदि मैं मरता हूं यदि जर्मनी हारता है तो जर्मनी के एक भी नागरिक को जीवित रहने का अधिकार नहीं है हम लोग पूरे जर्मनी को आग में डुबा करके चले जाएंगे जर्मनी को खत्म हो जाने दो जो जर्मनी जीत नहीं सकता हार जाता है उस जर्मनी को पूरा तबाह हो जाने दो ऐसा करके जर्मनी को पूरा तहस नहस करके गया तो यही हिटलर जो कि जर्मनी का अच्छा चाहता था वही आखिर में कितने बड़े गड्ढे में जर्मनी को जाकर डुबा कर के गया तो यह जो भाव था उसका कि मैं दूसरों के प्रति रिवेंज लूंगा क्योंकि इन लोगों ने मेरे साथ में बुरा किया है यह जो इंडिविजुअल लेवल पे सेल्फिश है दिस इज व्हाट ब्रिंग्स द इवल यही शैतानिया को ना कि आसुरी वृत्ति को जन्म देती है तो हम लोग चाहे कॉस्मिक लेवल पे फिलोसॉफिकल लेवल पे चाहे कितने ही सेल्फलेस हो कितने ही नोबल हो कितने ही अच्छे हमारे विचार हो यदि हम इंडिविजुअल लेवल पे इस नोबिलिटी को इस अच्छे विचारों को इस सेल्फलेसनेस को एक्सप्रेस नहीं कर पाएंगे तो हम अपने जीवन में ज्यादा कुछ नहीं बन पाएंगे हम लोग बड़े तो हो जाएंगे क्योंकि मेरे फिलोसॉफिकल पावर और ये कार्यक्षमता मेरी बहुत कुछ है तो मैं कोई बड़े ऑर्गेनाइजेशन में अच्छी पोस्ट पे या तो ऐसा तो मैं चला जाऊंगा किंतु यह जो इंडिविजुअल लेवल पे सेल्फिश हैसर उसकी वजह से सब समय में यह सोचता रहूंगा कि जिन लोगों ने मेरा बुरा किया है उसको मैं बदला लूंगा उसका आई विल टेक रिवेंज अगेंस्ट टेम और ये रिवेंज मेंटालिटी एक दिन ऐसा आएगा कि यह जो बैलेंस है वो बैलेंस टिप हो जाएगा यह रिवेंज की प्रति मेरा अच्छा जितना भी है वो रिवेंज की आग में बदला लेने की यह आहु जो अग्नि है उसके भीतर में आहुति के रूप में चली जाएगी मेरा अच्छा सब चला जाएगा बुरा सिर्फ रह जाएगा तो ये इंडिविजुअल लेवल पे दूसरों के प्रति यह जो मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा चित्त प्रसाद वो होना बड़ा ही आवश्यक है यदि यह नहीं रहेगा तो हम कहां अच्छी लाइन में जा रहे हैं एक अच्छी डायरेक्शन में जा रहे हैं और कहां वो हम वहां से चल कर के किसी एक बहुत बड़े गड्ढे में गिर गए और बिकॉज के हमारे पास में यह फिलोसॉफिकल पावर है हमारे पास में यह कार्य दक्षता है तो हम अकेले ही नहीं डूबेंगे हमारे साथ में जितने भी लोग हैं सबको लेकर डूबेंगे यानी कि इस तरह का व्यक्ति जो कि अल्टीमेटली तो लोगों का भला करना चाहता था उसने सभी का विनाश कर दिया सभी को मैंने वो अपने बदले की आग में सभी को झोक दिया तो यह एक है मेरी दृष्टि से कि जिसको कहेंगे कि प्रॉब्लम ऑफ इविल ऑफकोर्स इसके साथ में और भी बहुत सारे पॉइंट जुड़े हुए हैं इसके बारे में हम बहुत सारी डिस्कशन कर सकते हैं किंतु ये एक जो पॉइंट था जो कि मेरे मन में था जिसको कि मुझे आपको बताना था ये मेरे खुद के अनुभव से इसके बारे में और भी थोड़ा डिस्कशन जैसे जैसे हमको समय मिलेगा हम लोग करते रहेंगे तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम स श्री राम कृष्णर्पण
Questions & Answers
मस्तु वो जो ठाकुर का विजन है ना कि वह गंगा में से वह मां काली एक बड़ी ही सुंदर युवती के रूप में वह बाहर आई बच्चे को प्रसव किया फिर कराल वदनांग और भक्षण दोनों करती है सो ये कोई डिस्टिंक्ट आइडेंटिटी नहीं है कि यह अच्छा हम सबके भीतर में ये जो ड्यूल डीएनए है नाना व हम सबके भीतर में है एक गुडनेस भी है एक इवल भी है आसुरी शक्ति भी है और यह देवी शक्ति देवी संपद आसुरी संपद दोनों हमारे भीतर में है हम किसको किस तरह से प्रोजेक्ट करते हैं मेनिफेस्ट करते हैं उसके बेस पर हम य ईश्वर जगत को देखते हैं यदि मैं आसुरी शक्ति को ही प्रोजेक्ट करूंगा मुझे सब जगह प ये आसुरी लोग दिखेंगे कि यह आदमी बुरा है यह आदमी ऐसा है वो आदमी ऐसा है और जदी मैं अपना वो जो देवी संपत को मैं मेनिफेस्ट करूंगा तो वो मुझे सब कुछ अच्छा दिखेगा जैसे धर्मराज युधिष्ठिर दुर्योधन को सुयोधन करके पुकारते थे दुशासन को सुशासन करके पुकारते थे मने य दुर्योधन और दुशासन में भी वो अच्छा ही देखते थे ये जो अपने जैन धर्म है जैन धर्म के साथ अहिंसा को एक एक्सट्रीम लेवल पर लेकर गए हैं जैन मुनि है अपने मुंह पर वो वस्त्र पहनेंगे जिससे कि वह अपने सांस में भी यह जो बैक्टीरिया वगैरह है उसकी मृत्यु गलती से भी ना हो जाए तो अब ठाकुर के पास में जो भक्त लोग आते थे उनका भी ऐसा था अहिंसा अहिंसा तो यह किसके बारे में है मास्टर महाशय के बारे में ना कि बलराम बसु के बारे में मैं एगजैक्टली भूल गया ठाकुर ने एक बार कहा कि ये जो सब कीड़े वगैरह है वो बेड बग्स जो होती है ना वो बिस्तर के ऊपर में जो कीड़े कुछ निकलते हैं जाओ उसको बाहर ले जाकर के मार दो तो अभी वो लेकर के गए और फिर छोड़ कर के आ गए फिर वापस आए तो ठाकुर ने पूछा उसको मार दिया तो बोला नहीं महाशय मैंने उसको छोड़ के आया हूं तो बोला कि मैंने तुमको उसको मारने को बोला था उसको छोड़ के आने को नहीं बोला था जाओ जा कर के मार के आओ वो वापस आएगा और वही तकलीफ वो फिर से देगा तो मने ये जो संहार नहीं करना इसको कि हम जो धर्म के रूप में एक चला रहे हैं अहिंसा परमो धर्म ठाकुर बड़े क्लियर थे कि हिंसा जो है ना इज अ पार्ट ऑफ दिस नेचर ये सृष्टि स्थिति प्रलय ये जो श्रीजन और भक्षण दोनों ही एक ही ईश्वर के भीतर में है जैसे ठाकुर जो सौम्य सरस्वती या दुर्गा के सरस्वती या देवी की जो आराधना करेंगे मां शारदा की वही ठाकुर वो भयानक का मां काली की भी पूजा करते हैं तो कहां मां शारदा और कहां मां काली दो एक्सट्रीम मां शारदा कभी भी उनका मातृत्व इतना वो सर्वव्यापी था कि जो भी आता था सबको अपने बच्चे के रूप में ग्रहण करती थी और मां काली जो है जैसे भी उसका वो जो लगेगा कि कोई भी उ आसुरी शक्ति वाला तो सीधा वो खड़ निकाल कर के हर कर देगी दो एक्सट्रीम है ठाकुर ने दोनों की पूजा की है सो दिस इज व्हाट वेदांतिका और देवी शक्ति दोनों पार्ट ऑफ द सेम माया हमको इसके परे जाना है जब तक माया के राज्य में ठाकुर का वो जो तीन चोर वाली बात है कि एक आदमी को रास्ते में जंगल में तीन चोरों ने पकड़ लिया तो उसके सब कुछ लूट लिया फिर एक एक चोर कहता है इसको मार डालो अभी इसका काम खत्म हो गया तो दूसरा चोर कहता है अरे नहीं नहीं उसको मार कर के क्या होगा जाने तो बेचारे को तीसरा चोर है कि उसके जो बंधन में डाला था तो हाथ पैर छुड़ा करके बंधन से उसके घर तक लेकर गया तो वो जो मार डालने की बात करता है वो है तामसिक गुण उसको बचाने की बात करता है वो है राजसिक गुण और तीसरा जिसने उसको घर तक जाने की मदद की वह है सात्विक गुण किंतु जब वो आदमी उस तीसरे चोर को कहता है कि आप मुझे बचा कर के मेरे घर तक तो ले आए हैं आप आइए मेरे घर में आइए तो तीसरा चोर कहता है कि नहीं नहीं तुम्हारे घर में आऊंगा तो पुलिस वाले मुझे पकड़ ले े तुम्हारे घर जाने का वो मेरा वो योग्यता नहीं है अर्थात कि सत्व रजस और तमस तीनों के परे जाकर के ही हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं अच्छा बुरा जो भी है इस रिलेटिव एक्जिस्टेंस के भीतर में ही है इसका जो सोल्यूशन मैंने जो अपने वर्कआउट किया है एक जो सेल्फ एनालिसिस कि हमेशा जद हम एक बार जद मेरा मन दूसरों का दोष देखता है या तो एक बार मेरा मन किसी भी चीज में आसक्ति में प्रवृत होता है इमीडिएट इस कर दो इस मिरर को इमीडिएट यह अटेंशन अपने पर ले आओ मेरा मन आसक्ति में प्रवृत हो रहा है मेरा मन क्या दूसरों के प्रति बदले की भावना मेरे मन में प्रकट हो रही है व्हाट इज रंग विद मी यह फट करके सेल्फ एनालिसिस पर चले आओ रदर देन की थिंकिंग अबाउट द वर्ल्ड कि यह चीज है ही इतनी सुंदर कि उसमें मेरा मन आकर्षित हो जाता है या तो यह व्यक्ति है ही इतना बुरा कि इसके प्रति मुझे द्वेष का भाव आता है इमीडिएट अपने मन में ले लो कि यह चीज एक व्यक्ति का सौंदर्य या तो फिर दूसरे की बुराई मुझे दिखते ही क्यों है यही से तो मेरा प्रॉब्लम स्टार्ट होता है कि मैं जब यह देखता हूं तब मेरे मन में यह सब बाकी के विकार प्रकट होते हैं मैं जद अपने को प्रॉपर्ली एनालाइज करके यह जितने भी अच्छे भाव बुरे भाव इसका जो स्रोत है इसका जो फाउंड उसका जो ओरिजिन है वो मेरे ही मन में है जब तक यह मुझे दृढ़ रूप से विश्वास नहीं होता तब तक यह इसका सॉल्यूशन नहीं आएगा देखिए मैं अपना खुद का एक अनुभव शेयर करता हूं कि कभी-कभी मेरा मन बहुत ही विक्षिप्त हो जाता है कुछ-कुछ घटनाओं से तो मैं जब रूम में जाकर के बैठता हूं जब ध्यान करने का प्रयास करता हूं कर ही नहीं पाता फिर मने इतना फिर यह तो ऐसा है ना कि ये इको चेंबर है ना अपना माइंड तो आप जब ध्यान करने को जाएंगे और आपका मन विक्षिप्त है तो यह विक्षिप्त लाखों गुना बढ़ जाएगी क्योंकि जब ध्यान तो मन को बंद करने की बात है और यह बंद कमरे में जद फ धमाका होता है फटाका फुट्टा है तो उसका कितना भयानक असर होगा बाहर में खुले में आप फटाका फोड़िए और एक बंद कमरे में फोड़िए उसका एक जो उसका जो एक्सप्लोजन है ना बड़ा ही भयानक होगा तो यह बंद मन मन को जद बंद करते हैं जब ध्यान करने के लिए और विक्षेप प्रारंभ होता है एकदम पागल जैसी परिस्थिति आ जाती है मैं इमीडिएट सब जब ध्यान छोड़ कर के किताब पढ़ने में लग जाता हूं क्योंकि मुझे पता है कि इस तरह की परिस्थिति में जब ध्यान नहीं करना चाहिए तो ये तो एक तरह का एक्सपीरियंस मुझे हुआ है दूसरे ही सामने ही जब जब भी मैं सक्सेसफुली अपने को सेल्फ एनालिस किया है सेल्फ एनालाइज किया है कि अरे यदि मैं ही दूसरों के प्रति एक तरह से उदासीन हूं मैं ही एक तरह से दूसरों के प्रति एक तुच्छ भाव रखता हूं मैं ही एक तरह से सोचता हूं कि आई एम सुपीरियर टू अदर्स मेरे मन में एक सुपीरियोर कॉम्प्लेक्शन सामने वाला देखता है और फिर वह अकॉर्डिंग बिहेव करता है वह सोचता है उसको पता है कि यह आदमी अपने को बड़ा ही 30 मारखा समझता है उसके सामने मेरी कोई वैल्यू ही नहीं है तो इसके साथ में हम कितना ही बुरा भला करें डजन मैटर तो यह जो सेल्फ एनालिसिस जब हुआ तब मन ऐसा शांत हो जाता है कि जब मैं रूम में जाकर के आंख बंद करके बैठूं तो फिर मुझे ऐसा जब करने की प्रयास करके करने की जरूरत नहीं पड़ती ऑटोमेटिक मन शांत होक के ही कितना समय चला गया पता नहीं चलता सो ये दोनों चीजें मैंने एक्सपीरियंस की है मैं मेरा मन शांत इसलिए नहीं हुआ कि मैंने जाकर के उसके साथ में झगड़ा करके उसको उसकी औकात दिखा दी इससे कभी मेरा मन शांत नहीं हुआ जब मैंने यह सोचा कि मेरी गलती है और यह अनुभूति की य पक्का हुआ य एक तब कहीं जाके मेरा मन शांत हुआ है सो टेकिंग रिवेंज इज नेवर अ सोल्यूशन किंतु वो जब करने को जाते तब पता चलता है सही सही में कितना डिफिकल्ट है कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम एक अघात गड्ढे में डूब जा रहे हैं जद में अपने को डिफेंड नहीं करूंगा तो धीरे-धीरे करके मेरी परिस्थिति ऐसी हो जाएगी कि मेरी कोई वैल्यू नहीं रहेगी किंतु यह अपने को डिफेंड नहीं करना वही एक बहुत बड़ी साधना है कभी-कभी लगेगा कि मैं इतने गहरे गड्ढे में डूब जाऊंगा कि फिर इससे बाहर ही नहीं निकलूंगा किंतु वही तो है एक आत्म समर्पण यही तो है कि सर्वस्व नो छावर कर देना ईश्वर के रास्ते पर चलते चलते यही तो आध्यात्मिकता का सही सही मायने हुआ कि मुझे अपने लिए कुछ भी नहीं चाहिए वो जो सर्वस्व त्याग वो सही टेस्ट वही तभी होता है यह जो आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल डिसीज जितने भी है ना ये हाई ब्लड प्रेशर है शुगर है यह कोरोनरी हार्ट डिसीज है य ये सभी के पीछे इसी तरह की सब भावनाएं है जो मन में ही मन में घुटन चलती रहती है मन में ही मन में दूसरों के प्रति द्वेष या तो फिर एक तरह का एक मायूसी एक डिप्रेशन में आ जाता हूं कि मैं अपने को डिफेंड नहीं कर पाता दैट मींस मैं कितना कमजोर हूं यह कमजोरी का एहसास अपने को इतना एक भयानक डि डिप्रेशन में डाल देता है कि उस डिप्रेशन में से आदमी फिर धीरे-धीरे करके वह मेंटल डिसीज फिजिकल डिसीज में कन्वर्ट हो जाता है ये आज की बहुत बड़ी समस्या है आज के जो ऑर्गेनाइजेशनल सेटअप है ना हम इजली अपने को डिफेंड नहीं कर पाते हमको पता है कि अपने जो सुपीरियर है उसके साथ में मुझे अच्छा रखना ही पड़ेगा वरना उसके साथ में बिगाड़ा तो ही विल टेक रिवेंज ऐसा एक बड़ा ही स्ट्रांग हमको डर लगता है तो वे लोग अपने साथ में जितना ही बुरा करते ही जाइए और हम कुछ डिफेंड नहीं कर पाएंगे अपने को इसमें से डिप्रेशन स्टार्ट होता है और यह डिप्रेशन बड़ा भयानक है मैंने ऐसे बहुत सारे लोगों के साथ बात किया है जो कि मुझे कहते हैं कि हम लोग जब जॉब करते हैं तो हमारा बस है वो हमारे सामने बिल्कुल मने तुच्छ ता छिल करके बात करता है किंतु क्या करेंगे हम लोग यदि सामने कुछ भी बोलेंगे तो वो नौकरी से निकाल देगा तो फिर नौकरी से जद निकाल देगा तो फिर घर में बीवी बच्चे क्या खाएंगे कैसे भी करके मुझे तो नौकरी करनी है और बॉस को भी पता है कि यह अभी लड़का मेरे कंट्रोल में है मैं उसके साथ में जितना ही अत्याचार चाहे करता रहूं तो ये आधुनिक जो मॉडर्न फॉर्म ऑफ वायलेंस है ना यह जो ऑर्गेनाइजेशनल सेटअप प परपे चुएट होता है दिस इज वेरी डेंजरस और बाकी जो इंडियन पीनल कोड है आपने रास्ते में चलकर जा रहे हैं किसी ने डके ती डाला और आपके पैसे चचोरा लिए या तो फिर आपको मर्डर कर दिया तो इस सबके अगेंस्ट में इंडियन पीनल कोड है आप पुलिस में जाके कंप्लेन करेंगे इसका सॉल्यूशन आएगा किंतु ऑर्गेनाइजेशनल लेवल पे यह जो मेंटल वायलेंस होता है इसका कोई कोडिफाइड वे ऑफ रेजोल्यूशन नहीं है इसमें सबसे ज्यादा एक्सप्लोइटेशन होता है और उसी से आज के ये सब मॉडर्न साइकोसोमेटिक डिजीज कहो ना कि लाइफस्टाइल डिजीज कहो स्टार्ट होते हैं