Swami Vivekananda
ओम स्थापकाय धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः सो टीचिंग्स ऑफ स्वामी विवेकानंदा एस वी वर डिस्कसिंग लास्ट फ्रॉम लास्ट सम डेज लेट मी शेयर माय स्क्रीन हियर इट इज सो यस्टरडे वी शो दिस कोटेशन स्वामी विवेकानंद व्हाट ही सेस दैट डिफरेंशिएशन क्रिएट्स होमोजेनिटी और सेमनेस इज गॉड गेट बियड डिफरेंशिएशन देन यू ककर लाइफ एंड डेथ एंड रीच इटरनल सेमनेस एंड आर इन गॉड आर गॉड सी टू वर्ड्स आर इन गॉड एंड आर गॉड हियर हाउ ब्यूटीफुली स्वामी जी सिंथेसाइजेस दिस दिस टू थ्रेट्स व्हिच हैव बीन कमिंग थ्रू आउट द हिस्ट्री ऑफ इंडियंस स्पिरिचुअलिटी ऑफ आवर हिंदू रिलीजियस थॉट। वन थॉट सेज़ देयर इज़ अद्वैतिक कांसेप्ट ऑफ रिलीजन दैट इज़ अद्वैतिक कांसेप्ट ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी। दैट इज गॉड। और व्हाटएवर वी मे कॉल दैट सुप्रीम रियलिटी। वी मे कॉल इट निर्वाण। वी मे कॉल इट से केवली स्थिति। और वी मे कॉल इट गॉड। और व्हाटएवर वी मे कॉल इट आत्मन ब्रह्मन इट रिसाइड्स विदिन मायसेल्फ विदिन माय ओन हार्ट एंड आई हैव टू सिंपली रिमूव दिस स्क्रीन ऑफ इल्यूजन दिस कर्टेन ऑफ पाया एंड आई व्हाट इज माय ट्रू नेचर आई विल बी एबल टू सी इट आई विल बी एबल टू रियलाइज इट नॉट सी इट सीइंग इज़ अ रोंग वर्ड सीइंग इज मींस समथिंग यू आर व्हिच इज़ समथिंग आउटसाइड ऑफ अस सो टू बी अस टू बी आवर ट्रू नेचर ओके एंड हियर ही सेज़ इन गॉड व्हाट डस दैट मीन दैट इज़ अ द्वैतिक फिलॉसोफी बाय व्हिच वी मे सी दैट ओके हियर इज़ गॉड लिविंग इन हेवन और वैुंठा और कैलाश व्हेरएवर इट इज़ एंड इफ आई गो टू कैलाश आई विल हैव अ दर्शन ऑफ़ भगवान शिवा इफ आई गो टू वैकुंठ आई विल हैव दर्शन ऑफ़ भगवान कृष्णा सो आई विल बी इन गॉड सो स्वामी जी सो डेप्टली इंटरव्यूस बोथ दिस फिलॉसोफीस दिस इज़ अ होलमार्क ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद थॉट बिफोर ऑल द स्कॉलर्स एंड पंडित्स हु हैव कम इन इंडिया। व्हाई आई आई एम सो पार्टिकुलर डिफाइनिंग दिस डिफरेंट-डिफरेंट थ्रेड्स ऑफ़ फिलॉसोफीज़। व्हाई आई कीप सेइंग दैट दिस इज़ अद्वैता। दिस इज़ नॉन अद्वैता। दिस इज़ द्वैता। दिस इज़ से श्रवण स्कूल ऑफ़ थॉट लाइक निर्वाण बुद्धिज़्म और जैनिज़्म। दिस इज़ दैतिक स्कूल ऑफ़ थॉट लाइक अह वैष्णविज़्म। व्हाई आई एम सो पार्टिकुलर इन डिफाइनिंग ऑल दिस फिलॉसोफीज़? बिकॉज़ दिस इज हाउ आवर स्कॉलर्स, पंडित्स एंड सेंट्स, एवरीवन एल्स हैव डिफाइन दिस रिलीजियस थॉट। सो फार बिफोर कमिंग ऑफ श्री रामकृष्ण स्वामी विवेकानंदा। व्हेन देयर इज़ अ शंकराचार्य, शंकराचार्य वी आर श्योर टू नो दैट ही विल टॉक इन द टर्म्स ऑफ अद्वैतिक टर्मिनोलॉजी, अद्वैतिक आइडियाज, कॉनसेप्ट्स, अद्वैतिक फिलॉसोफी। इफ देयर इज अ देयर इज़ अ गौरांग महाप्रभु और देयर इज अ मधवाचार्य और रामानुजाचार्य दे आर श्योर टू टॉक अबाउट अ रिलीजन और गॉड इन द्वैतिक टर्म्स दैतिक टर्मिनोलॉजीस द्वैतिक आइडियाज एंड फिलॉसोफीस बट एवर सीन्स द एडवांट ऑफ रामकृष्ण विवेकानंदा वी हैव सीन दैट स्पेशली दिस टू हैव व्हाट दे हैव डन दे हैव इंटरवोन बोथ दिस आइडियाज एंड कॉन्सेप्ट्स इन द सेम सेंटर सेंटर्स नाउ दे आर टॉकिंग अबाउट द्वैता एंड नाउ दे आर यूटिलाइजिंग दी अद्वैतिक टर्मिनोलॉजी। आई एम गॉड। दिस इज़ अद्वैतिक टर्मिनोलॉजी। आई एम विथ गॉड और आई हैव दर्शन ऑफ़ गॉड। दिस इज़ दैतिक टर्मिनोलॉजी। नो वन हैज़ डन दिस सो फार। इवन इन गीता यू विल सी दैट इवन दो भगवान कृष्णा हैज़ सिंथेसाइज ऑल दिस सेपरेट थ्रेड्स ऑफ थिंकिंग एंड फिलॉसोफिकल थॉट। ही कीप्स देम सेपरेट इन सेपरेट श्लोकाज़। इफ देयर इज़ अ श्लोका ऑन कर्मा दैट श्लोका मीन्स फॉर कर्मा। इफ देयर इज़ अ श्लोका ऑन डिवोशन दैट श्लोका मीन्स फॉर डिवोशन। इफ देयर इज़ अ श्लोका ऑन ज्ञाना दैट श्लोका इज़ मेंट फॉर ज्ञाना। वी नो दैट यस इन वन बुक ऑल दिस ज्ञान भक्ति कर्म एंड ध्यान आर सिंथेसाइज। बट द श्लोकास देमसेल्व्स पार्टिकुलर पैसेजेस एंड पैराग्राफ्स देमसेल्व्स दे टॉक अबाउट ओनली वन कांसेप्ट। बट हियर इन रामकृष्ण विवेकानंदा लिटरेचर वी विल सी दैट समटाइम्स द सेम लेक्चर स्वामी जी गिव्स ही सिंथेसाइजज़ ही थ्रोस एज एज़ इट वेयर ही थ्रोस इट अस ऑल दिस फोर स्ट्रीम्स टुगेदर द टर्मिनोलॉजीस ऑफ़ फोर स्ट्रीम्स टुगेदर समटाइम्स इन अ सिंगल पैसेज वी विल सी दैट नाउ ही हैज़ स्टार्टेड टॉकिंग अबाउट द्वैता एंड ही हैज़ एंडेड ऑन अद्वैता एंड हियर इन फॉर एग्जांपल इन दिस पर्टिकुलर सेंटेंस वी सी दैट इन द सेम सेंटेंस ही यूज दैतिक वर्ड्स एंड द सेम टाइम ही यूज अद्वैतिक वर्ड्स एज इफ फॉर ठाकुर एंड स्वामी जी द्वैता अद्वैता डिफरेंस डस नॉट मीन एट ऑल देयर इज नो डिफरेंस एट वन पॉइंट यू मे से आई एम हैविंग अ विज़न ऑफ़ गॉड आई हैव सच अ ग्रेट डिवोशन फॉर हिम एंड द नेक्स्ट मोमेंट इटसेल्फ यूज़ आई एम गॉड एज इफ दैट यू हैव जंप्ड थाउजेंड्स ऑफ इयर्स ऑफ़ स्पिरिचुअल इवोल्यूशन इन वन सेंटेंस वन मोमेंट हाउ हाउ इज दिस पॉसिबल? आई मायसेल्फ आई एम सरप्राइज? आई मसेल्फ वाज़ यू नो कंफ्यूज्ड दैट व्हाई दे डू दिस। ओके? दे एवरीवन नाउ डेज से दैट एवर सिंस गीता वाज़ रिटन दैट देयर आर नो पर्टिकुलर डिफरेंसेस इन वेदर यू फॉलो ज्ञान मार्ग और ए भक्ति मार्ग। अल्टीमेटली यू विल रीच दी सेम हाईएस्ट रियलिटी। ओके? वी ऑल एक्सेप्ट इट। बट व्हाई डू यू मिक्स दिस कांसेप्ट्स फिलॉसोफिकली? फिलॉसोफिकली आर दे नॉट डिफरेंट। ज्ञान मार्ग इज सो डिफरेंट फ्रॉम भक्ति मार्ग हैविंग अ डिवोशन टुवर्ड्स गॉड हैविंग अ विनम्रता ह्यूमिलिटी इन माय हार्ट दैट इज वन थिंग एंड टू से दैट आई एम ब्राह्मण आई एम देयर इज नो फोर्स इन द दे देयर इज़ नो माया इन दिस यूनिवर्स दे कैन टेंपट मी दे कैन मेक मी वॉक ऑन द पाथ ऑफ़ सेंसुअल प्लेज़र दे कैन मेक मी वांट सेंसुअल प्लेज़र देयर इज़ सच अ प्राइड एंड सच अ यू नो सेल्फ कॉन्फिडेंस आत्मश्रद्धा इन द इन अ ज्ञानी वी हैव सीन द एग्जांपल ऑफ़ तोतापुरी दैट हाउ ग्रेट तोतापुरी सेल्फ कॉन्फिडेंस वाज़ ही यूज्ड टू बिकम एंग्री एव्री टाइम ठाकुर यूज्ड टू गो टू टेंपल एंड प्रे टू मदर वो व्हेनएवर ठाकुर वुड क्लैप हिज हैंड्स इन ऑर्डर टू सिंग कीर्तन सो व्हाट वुड तोतापुरी से तोतापुरी वुड से इन हिंदी रोटला रोटी ठोकते हो क्या लाइक ऐ दैट व्हेनएवर यू क्लेप टेकिंग मदर्स नेम व्हेनवर ठाकुर यूज्ड टू डू दैट तोतापुरी हिज गुरु ही वुड से दैट यू नो व्हेन इन नॉर्थ इंडिया व्हेन वीमेन मेक रोटी दे क्लेप द रोटी बिटवीन देयर हैंड्स सो दैट रोटी कैन गेट ह प्रॉपर राउंड शेप। सो आर यू मेकिंग रोटी? दैट इज व्हाट हाउ तोतापुरी यूज्ड टू टोंट श्री रामकृष्णा दैट इंस्टेड ऑफ़ प्रइंग टू मदर यू आर एक्चुअली मेकिंग अ रोटी। सो सी तोतापुरी यूज्ड टू बिकम वेरी एंग्री और नॉट एंग्री एटलीस्ट लेट मी से डिस्प्ली एंग्री इज अ स्ट्रांग वर्ड डिस्प्लेस विल बिट एन माइंड माइल्ड वर्ड सोतापुरी यूज्ड टू गेट अ बिट डिस्प्लीज़ विथ श्री रामकृष्णा बट ऑफ़ कोर्स वी हैव सीन सच इज़ द माया दैट एट द एंड ऑफ़ द डे तोतापुरी हिमसेल्फ वाज़ फोर्स टू एक्सेप्ट द स्ट्रेंथ ऑफ वाज़ वाज़ फोर्स टू एक्सेप्ट शक्ति। यू नो दैट फेमस इंसिडेंट वन नाइट तोतापुरी हैज़ सच अ ग्रेट स्टमक पेन दैट ही कुडंट स्टैंड इट एट ऑल एंड ही डिसाइडेड दैट इंस्टेड ऑफ़ सफरिंग दिस पेन लेट मी एंड माय लाइफ। सो ही स्टार्टेड वॉकिंग इनसाइड द गंगा। ही थॉट दैट आई विल सिंक मायसेल्फ। आई विल जंप इनसाइड गंगा एंड दैट विल बी अ होली डेथ फॉर अ साधु। सो ही स्टार्टेड वॉकिंग इन द गंगा एंड ही वेंट ऑन वॉकिंग एंड वॉकिंग। वी नो एवरीवन हु नो हु लिव्स इन कोलकाता दे नो दैट सच अ वास्ट एंड डीप गंगा रिवर इज सो दिस तोतापुरी वेंट ऑन वॉकिंग ही रीच हाफ वे मार्क टू द गंगा एंड येट वाटर विल नॉट राइज अबव ह वेस्ट सो ही सेस ये क्या देवी माया ही सेज़ इन हिंदी ततपर यूज़ टू स्पीक इन हिंदी व्हाट डिवाइन मिरेकल इज दिस व्हाट डिवाइन हेलुसिनेशन और इल्लुजन इज दिस सो एस इफ मदर डज़ नॉट वांट हिम टू एंड हिस लाइफ जस्ट नाउ देयर इज़ लॉट मोर वर्क टू बी डन बाय तोतापुरी। सो दैट इज़ व्हाई ही रिटर्न एंड फ्रॉम दैट डे ऑनवर्ड्स ही रियलाइज़ दैट यस एज़ लॉन्ग एज़ वी आर लिविंग ऑन प्लेनेट अर्थ हैविंग दिस ह्यूमन बॉडी वी आर बाउंड बाय ऑल दिस ह्यूमन सफरिंग्स एंड ह्यूमन लॉस एंड देयर इज़ शक्ति इन दिस वर्ल्ड दैट वी हैव टू एक्सेप्ट। बट दिस ऑल हैप्स विद इन श्री रामकृष्णस लाइफ स्वामी विवेकानंदास टीचिंग्स बट बिफोर दैट वी हैव सीन क्लियर कट डिस्टिंशन इफ देयर इज़ अ वैष्णव ही विल ऑलवेज रिवाइल तांत्रिक्स और ही विल ऑलवेज रिवाइल शास ही विल ऑलवेज रिवाइल अद्वैतीस एंड इफ देयर इज़ एन अद्वैतीन ही विल हैव वेरी लो ओपिनियन अबाउट दी शाकताज़ एंड वैष्णवाज़ एंड तांत्रिक्स एटसेटरा सो देयर वाज़ सच अ क्लियर डिमार्केशन ऑफ़ फिलॉसोफिकल थॉट्स दे मे नॉट कोरल लाइक अदर फिलॉसोफिकल थॉट्स आर डूइंग देयर इज़ अ शिया सुन्नी देयर दे आर ऑलवेज फाइटिंग प्रोटेस्टेंट एंड क्रिश्चियन देयर हैव बीन एक्चुअल वॉर्स एंड किलिंग्स एटसेट्रा इन इंडिया वी डोंट गो टू वॉर ऑन रिलीजन वी डोंट किल ईच अदर बट एटलीस्ट वी हैव दैट अह यू नो सेंस ऑफ़ सुपीरियरिटी टुवर्ड्स अदर रिलीजन वी कंसीडर देम इंफीरियर टू अस दिस एटलीस्ट इज़ इज़ देयर इन इंडिया इवन नाउ टू सच एन एक्सटेंट बट हियर इन रामकृष्णास एंड ठाकुर स्वामी जीसस लाइफ वी सी दैट दे हैव सिंथेसाइज दिस द्वैता अद्वैता वैष्णविज़्म शाकता इन सच ए वे दैट वििन सिंगल सेंटेंस दे आर यूजिंग वर्ड्स दैट डिस्क्राइब ऑल ऑफ़ देम बट हियर व्हाई आई एम मेकिंग क्लियर दैट दिस इज़ दिस वर्ड और दिस टर्मिनोलॉजी और दिस आइडिया और दिस फ्रेज़ बिलोंग्स गोस टू दिस स्कूल एंड दिस प्रेस बिलोंग टू दिस स्कूल। सो दैट वी कैन अंडरस्टैंड इट एनालिटिकली। फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ़ साधना वी नीड नॉट डिस्क्रिमिनेट फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ़ आवर आवर ओन स्पिरिचुअल लाइफ वी नॉट नीड टू सी एनी डिफरेंस एनी डिस्क्रिमिनेशन बिटवीन द्वैता एंड अद्वैता। बट फ्रॉम द पॉइंट ऑफ फिलॉसोफी फ्रॉम फ्रॉम द पॉइंट ऑफ अ रीडर फ्रॉम द पॉइंट ऑफ अ थिंकर इफ वी नो दैट टू व्हाट दिस आइडिया रेफर्स टू देन दिस आइडियाज विल बिकम वेरी क्लियर इन आवर माइंड एंड वी विल बी एबल टू सी द ब्यूटी ऑफ दिस सिंथेसिस वी विल बी एबल टू सी द ग्रेटनेस ऑफ ठाकुर एंड स्वामी जी हाउ ब्यूटीफुली दे हैव सिंथेसाइज्ड सो मेनी डिफरेंट थ्रेड्स ऑफ डेवलपमेंट ऑफ आवर थॉट। थॉट रिलीजियस थॉट हाउ ब्यूटीफुली दे हैव सिंथेसाइज दिस डिफरेंट थ्रीट्स इन अ वेरी एलगेंट ब्यूटीफुल एंड गर्जियस टेपेस्ट्री। सो दिस इज़ व्हाई आई एम टीचिंग आई एम टेलिंग यू अबाउट ऑल दिस वर्ड्स एंड देयर डिफरेंशिएशन। सो हियर स्वामी जी सेस अगेन लेट अस वी कैन सी इट अगेन स्वामी जी सेस दैट वी आर इन गॉड आर गॉड दैट इज फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ़ द्वैता वी कैन बी विथ गॉड फ्रॉम द पॉइंट ऑफ व्यू ऑफ़ अद्वैता वी आर गॉड गेट फ्रीडम इवन एट द कॉस्ट ऑफ लाइफ सी दिस इज़ अनदर ग्रेट आइडिया स्वामी जी सेस दैट इफ यू गो टू वेस्ट यू विल सी द सोल्जर्स हु आर सो यू नो स्ट्रांग विल्ड सो करजियस दैट दे विल गो टू वॉर एंड दे वोंट माइंड यू नो वॉकिंग इन फ्रंट ऑफ वेरी हैवी शूटिंग एंड कैनन फायर एटसेट्रा बिफोर स्वामी जी देयर वेर नेपोलियनिक वॉर्स इन नेपोलियनिक वॉर्स लेटर ऑन देयर वेर वर्ल्ड वॉर्स व्हिच रिडफाइन द यू नो स्टैंडर्ड ऑफ़ कार्नेशन एंड अह डिस्ट्रक्शन बट बिफोर दिस वर्ल्ड वॉर्स दे वेयर नेपोलियनिक वॉर्स एंड नेपोलियनिक वॉर्स वेर वेरी डेडली, वेरी डेंजरस एंड सो फार इन द हिस्ट्री ऑफ़ मैनकाइंड दे हैव किल्ड लार्जर नंबर ऑफ़ ह्यूमन बीइंग्स देन एनीवन एल्स। सो एवरी स्पेशली व्हेन नेपोलियन वेंट टू रशिया टेकिंग हिज आर्मी ग्रैंड फ्रेंच आर्मी एंड दिस एंटायर आर्मी वाज़ डेसिमेटेड इन रशियन विंटर एंड नेपोलियन हेड टू रिटर्न विथ डिफिट एंड ही वाज़ फोर्स्ड टू एक्सेप्ट ऑल दिस ह्यूमिलिएटिंग ट्रीटीज़ बाय वेस्टर्न एलाइज़ एंड ही वाज़ सेंट टू सेंट एलेना इन अह अह इंप ऐज़ ऐज़ अ प्रिजनर। सो ऑल दिस स्वामी जी हैड एन आईडिया बिकॉज़ ही वाज़ अ वेरी गुड स्टूडेंट ऑफ हिस्ट्री। सो ही सेस दैट सी वेस्टर्न पीपल सी द डिफरेंस बिटवीन वेस्टर्न पीपल एंड इंडियन पीपल दे हैव अ करेज टू फेस द कैनन। दे हैव द करेज टू फेस द बुलेट। वी हैव करेज टू यू नो स्टैंड सच हार्डशिप। स्टैंड सच ऑस्टेरिटी। स्वामी जी हिमसेल्फ सेज़ दैट वन डे ही सो अ मैन व्हेन
श्रीरामकृष्ण कथामृत : भक्तों के साथ श्रीरामकृष्ण : 11 मार्च 1882
ही वाज़ अ परिव्राजक इन इंडिया। जब स्वामी जी भारत में प्रवरज्या कर रहे थे। उन्होंने देखा कि ये जो ये कहते हैं ना कि अमेरिकन है या यूरोपियन है उनमें करेज होता है बुलेट को फेस करने का। अर्थात युद्ध क्षेत्र में जाकर के अपना बलिदान देने का। अपने देश के लिए, अपने राष्ट्र के लिए और हमारे हिंदुओं का वो जो स्पेशलिटी है कि आध्यात्मिक दर्शन पाने के लिए या तो फिर निर्वाण या मुक्ति पाने के लिए हम लोग जो है हमारा खुद का बलिदान देते हैं। ये जो है ये बहुत बड़ा सिविलाइजेशनल डिफरेंस है। इसके बारे में स्वामी जी कहते हैं। स्वामी जी कहते हैं कि जब वो एक बार प्रवज परिव्राजक थे। भारत में घूम रहे थे। देखा एक संत को साधु को कि दोनों हाथ ऊपर करके खड़ा है और कितने सालों से खड़ा है कि दोनों हाथ बिकॉज़ के वो ऊपर हो करता है तो वो तो जो ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है तो कंप्लीटली डेसीमेट हो गए थे दोनों हाथ सिर्फ उन्हें हड्डियां दिखाई दे रही थी उसके ऊपर का जो मांस है ये जो मसल है पूरा गल गया था तो स्वामी जी कहते हैं फिर भी वो और जब उसने पहली बार ऐसा किया होगा सोच के देखिए कि कितना पेन हुआ होगा इससे मतलब उतना पेन पेन हुआ होगा कि यदि कोई हमारे हाथ काट देता है तो एक ही बार पेन हो के एक ही बार दर्द हो के वो खत्म हो जाती है बात किंतु सब समय हाथ को ऐसा ऊपर उठाए रखना यह प्रण लेकर के कि जब तक ईश्वर का दर्शन नहीं होगा मैं अपने हाथ को नीचे नहीं लूंगा तो इस तरह से प्रण लेकर के प्रतिज्ञा करके हाथ को ऊपर उठाए रखना और देख सकते हैं कि यहां से कंधे से लेकर के ऊपर का पूरा हाथ एक थोड़ा सा भी मसल या कुछ भी नहीं रहा पूरा पूरा वो जो है कंकाल सार हो गया है। तो स्वामी जी कहते हैं कि ऐसे लोग भारत में है कि जो कि ईश्वर दर्शन के लिए ईश्वर की कृपा आशीर्वाद पाने के लिए इतनी कठोर तपस्या कर सकते हैं। और पश्चिम में हम देखेंगे कि अपने देश के लिए अपने राष्ट्र के लिए वे लोग जो है दुश्मनों को मारने के लिए तैयार हो जाते हैं। तो स्वामी जी कहते हैं कि वे लोग दूसरों से ऑस्टेरिटी करवाते हैं। हम लोग जो है अपने से ऑस्टेरिटी करते हैं। यह जो हिंदू है और जो नॉन हिंदू है इन दोनों में यह सबसे बड़ा फर्क है। तो गेट फ्रीडम इवन एट द कॉस्ट ऑफ लाइफ। अभी इस बात को यदि कोई वेस्टर्नर पढ़ेगा तो वो सोचेगा कि यदि मेरा देश गुलाम है तो मुझे जैसे वो जो सुभाष चंद्र बोस कहते थे ना कि तुम मुझे खून दो। मैं तुम्हें आजादी दूंगा। यदि अपना देश गुलाम है तो अपना खुद का बलिदान देकर के भी देश की आजादी के लिए मुझे काम करना चाहिए। और इसी सेंटेंस को लेकर के फिर बहुत सारे जो है जो बंगाल में जो क्रांतिकारी है वो लोग स्वामी जी से प्रभावित क्यों हुए थे? स्वामी जी बीच-बीच में इस तरह से सेंटेंस फेंकते हैं। उसके बहुत सारे अर्थ होते हैं। अभी आप द्वैत की दृष्टि से देखेंगे तो एक अर्थ होगा। अद्वैत की दृष्टि से देखेंगे तो एक दूसरा अर्थ होगा। पेट्रियोटिज्म की दृष्टि से देखेंगे, राष्ट्रवाद की दृष्टि से देखेंगे तो एक तीसरा अर्थ होगा। ये साम्यवादी जो है वो स्वामी जी को बड़ा कोट करते हैं। आपको पता होगा शायद कि ये जो जो कम्युनिस्ट पार्टी की जो स्थापना हुई है उसमें जो पायोनियरिंग मेंबर्स जो थे उसमें स्वामी जी के भाई ही थे। वो भूपेन चंद्र दत्त ना कि भूपेंद्रनाथ दत्त ना कि ऐसा उनका कुछ नाम था। मैं एग्जैक्ट महेंद्रनाथ के भूपेंद्रनाथ दो में से एक थे। तो ये दोनों स्वामी जी के छोटे भाई थे और दोनों में से एक इतना प्रभावित थे कम्युनिस्ट विचारधारा से और उन्होंने एक किताब भी लिखा कि प्रॉफेट पेट्रियोट स्वामी विवेकानंद कौन है? तो हां ठीक है वो लोग आपको आप उनको साधु के रूप से चलाते हैं। ये बेलूर मठ में स्थापना हुई। सब साधु लोग इकट्ठा होकर के मंदिर में आरती पूजा करते हैं। किंतु दैट इज नॉट ऑल ऑफ स्वामी विवेकानंद थॉट्स। स्वामी विवेकानंद के जो आइडियाज है इस तरह से आप पढ़ेंगे। गेट फ्रीडम इवन एट द कॉस्ट ऑफ लाइफ। इवन अपनी जिंदगी अपने जीवन का बलिदान देकर के भी मुक्ति प्राप्त करो। इसका अर्थ यह है कि ब्रिटिशरों से भारत को आजादी दिलवाओ। तो ऐसा सोच करके ये कम्युनिस्ट पार्टी ये क्रांतिकारी ये सब क्यों हम लोग कर रहे हैं? हम लोग तो स्वामी जी के ही विचारों को अनुसरित कर रहे हैं। आप लोग जो साधु लोग मंदिर में बैठकर के पूजा पाठ भजन वगैरह करते हैं। इसका समय चला गया। अभी जो है अपने राष्ट्र हित के लिए खून बहाने का समय आ गया है और स्वामी विवेकानंद ने खुद ने कहा है। एक्चुअली देखिए कि स्वामी जी जो वही कुछ कहते हैं वह सब कुछ स्पिरिचुअल हाईएस्ट अद्वैतिक वेदांतिक पॉइंट ऑफ व्यू से ही कहते हैं क्योंकि स्वामी जी खुद ने कहा है कि अल्टीमेट फिलॉसोफी इज अद्वैता किंतु बाकी सब लोगों के लिए जैसे ठाकुर ने कहा है कि जार पेटे जा सोए माने अब मां जो है उसके जो बहुत सारे बच्चे हैं तो जिस बच्चे का जिस तरह का जो डाइजेशन कैपेसिटी है उसको वो उस तरह से खिलाती है बिल्कुल छोटा बच्चा होगा एक दो साल का तो उसको दूध बना के खिला खिलाएगी। बड़ा लड़का होगा तो उसको चाय बना के खिलाएगी। और कोई होगा जिसको कॉफी पसंद है तो उसको कॉफी बना के पिलाएंगी। अभी मैं मछली का उदाहरण नहीं दे रहा हूं क्योंकि बहुत सारे लोग वेजिटेरियन है तो चाय, कॉफी, दूध इस तरह से जिसको जो भी पसंद है उसको मां जो है वो खिलाएगी, पिलाएगी। तो यहां पे यदि आप क्रांतिकारी की दृष्टि से देखेंगे, फ्रीडम फाइटर की दृष्टि से देखेंगे तो उसका जो है आप स्वामी जी का इस तरह से इंटरप्रिटेशन करेंगे। इसलिए उन्होंने एक किताब लिखा था कि लिखा है स्वामी विवेकानंद द प्रॉफेट पेट्रियोट अर्थात इनका वो जो आने का जो रीजन है प्रकट होने का जो तात्पर्य है वो भारत को आजादी दिलवाना अभी ठीक है वो स्वामी जी के भाई है वो इंटरप्रेट कर सकते हैं उससे हमको कुछ कहना नहीं है किंतु हमको ये क्लियरली पता होना चाहिए कि स्वामी जी के आने का जो मुख्य तात्पर्य है वो बेसिकली यह है कि यहां पर वह हमको अद्वैत वेदांत की ओर ले जाए स्लोली एंड ग्रेजुअली। अच्छा अभी रामकृष्ण कथा हमने देखा कि कल किस तरह से मास्टर महाशय को और भी स्वामी जी के ठाकुर के भजन सुनने की इच्छा हुई और ठाकुर के पास जाकर के बोलते हैं कि क्या अभी और भजन होगा। तो ठाकुर ने कहा नहीं फिर कहा तुम बलराम बसु के वहां पर चले आना। अभी बलराम बसु के बारे में अभी तो मास्टर महाशय को तो ज्यादा पता नहीं है कि ठाकुर के जो विभिन्न भक्त है वो भी ठाकुर के जैसे ही कितने वो जो आध्यात्मिक और उदार हृदय वाले हैं तो वो जाकर के वो ठाकुर को कहते हैं मास्टर महाशय कि अच्छा वो जो बलराम बसु होगा वो तो बड़ा ही धनी होगा मैं यदि उसके घर जाऊंगा तो मुझे नेगलेक्ट करेगा वो घर में प्रवेशने ही ना दे तो बेटर है कि मैं दक्षिणेश्वर में आकर के ही फिर से आपके साथ बात करूंगा उस समय जब जो है कि श्री रामकृष्ण कहते हैं कि अरे नहीं तुम वहां पर जाकर के मेरा नाम लेना। मेरा नाम लेने से तुम्हारे लिए सब दरवाजे खुल जाएंगे। वे लोग तुमको मेरे पास ले आएंगे। देखिए अभी ये भी कितने सारे अर्थ होते हैं कि मेरा नाम लेना तो तुमको सीधा मेरे पास ले आएंगे। अर्थात कहीं पे भी जीवन में कोई तकलीफ भी है हमको और यदि हम ठाकुर का नाम लेते हैं तो जो भी बंद दरवाजे हैं वो हमारे लिए खुल जाएंगे। माने ये एजोटेरिक फिलॉसोफिकल इंटरप्रिटेशन यदि ठाकुर के प्रत्येक छोटी-छोटी बातों का हम ठीक-ठीक से इंटरप्रिटेशन करना शुरू करें तो हमको पता चलेगा कि कितने डीप में जाकर के वो सब कहते हैं और दूसरी बात है कि मास्टर महाशय मास्टर महाशय ये सब चीजें लिख रहे हैं ठाकुर की महासमाधि के 10 12 15 साल के बाद में जब तक तो बलराम बसु की भी महासमाधि हो गई थी और जो ठाकुर के जितने भी शिष्य हैं सबको एक दूसरे के बारे में पता था तो मास्टर महाशय को बखूबी पता था कि बलराम बसु कौन है? ये जब कथामृत लिख रहे थे उस समय किंतु फिर भी कथामृत जो है वो पिल्गिम्स प्रोग्रेस करके वो जो एक क्रिश्चियन एक किताब है कि किस तरह से डाउट है फिर वो जो वो बोलते डिप्रेशन है उसमें से जाकर के पिल्गिम जो है वो अल्टीमेटली जीसस का वो जो सानिध्य प्राप्त करता है। तो यहां पे भी ये जो है दिस इज अ पिल्गिम्स प्रोग्रेस। दिस इज अ साधकास प्रोग्रेस। बात यह नहीं है कि सिर्फ हमको मास्टर महाशय यह कहते हैं कि ठाकुर ने क्या कहा है? ठाकुर के उपदेश क्या है? किंतु रीडिंग बिटवीन द लाइंस विद डीपर अंडरस्टैंडिंग हमको यह भी पता चलता है कि मास्टर महाशय का एज ए साधक जो जर्नी है पहले ठाकुर पे डाउट होना पढ़े लिखे हैं एक तो अपना एक अहंकार भी होगा और ये अनपढ़ ब्राह्मण है काली का पुजारी है तो एक डाउट सहज है फिर धीरे-धीरे करके ठाकुर पे विश्वास होना फिर ठाकुर की ये जो सब शिष्य है नरेंद्र है बलराम बोस है उन सबके ऊपर में विश्वास होना आखिर में मास्टर महाशय खुद दक्षिणेश्वर में कुछ समय के लिए रहने के लिए जाते हैं। वो ही वो मेरा पर्टिकुलरली फेवरेट मतलब वो मतलब पैसेज वो अध्याय है। वो जो कथामृत में वो जो मास्टर महाशय खुद जब दक्षिणेश्वर में रहने के लिए जाते हैं तो वो बहुत ही सुंदर वर्णन है। ठाकुर जो है उनके साथ में वन टू वन बात करते हैं। उस समय जबकि कोई नहीं होता। तो मास्टर महाशय के जितने भी संस्कार है जितने भी उनके कर्म है वगैरह सब समझ करके ठाकुर उनको किस तरह से गाइड करते हैं एक बहुत ही बढ़िया जगह पैसेज है ठाकुर उनको कहते हैं कि अच्छा तुम यहां पर रहने के लिए आए हो तुम जाकर के नौबत में रहो नबत में तो मां शारदा देवी खुद रही है नबत जो कि पास में ही है तो वहां पे तुमको रहना बड़ा अच्छा लगेगा तो अच्छा सॉरी थोड़ा कंफ्यूजन हो रहा ठाकुर ने उनको और कहीं पर रहने को कहा था। मास्टर महाशय ने नब के फर्स्ट फ्लोर पे रहने का सिलेलेक्ट किया। क्योंकि क्या है कि मास्टर महाशय कहते हैं कि वहां पर रहकर के ये जो नदी है, ये जो चांद है, यह जो हवा है, ये जो सब ग्रीनरी है वो देखने में मुझे बड़ा आनंद आता है क्योंकि वो एक पोएट थे, एक कवि थे। इस तरह इसलिए उन्होंने वो पर्टिकुलर रहने का स्थान पसंद किया। यानी कि तब तक भी जो ठाकुर कहते थे वो मास्टर महाशय फट करके स्वीकार नहीं कर लेते थे। किंतु आखिर आखिर में ऐसी परिस्थिति आई कि जो ठाकुर कहेंगे उन उसकी उनकी बातों को उनके शिष्य जो है शब्दश स्वीकृत कर लेंगे। शब्दश वो स्वीकार कर लेंगे। तो ये जो मास्टर महाशय का जो पूरा जर्नी है उसको भी आप जो है कथामृत में पढ़ेंगे और अनफॉर्चूनेट यह है कि बाकी सब शिष्यों ने इस तरह से अपनी जर्नी जो है वो रिकॉर्ड नहीं की। हमको पता है कि जो महापुरुष महाराज स्वामी शिवंद जी वो कुछ-कुछ नोट्स रखते थे। किंतु फिर ठाकुर ने कहा कि अरे नहीं ये सब चीजें करने की तुमको कोई जरूरत नहीं है। इसलिए उनका जो ठाकुर के साथ में इंटरेक्शन है वो हमको सब सेकेंडरी सोर्स से पाना पड़ रहा है। सेकेंडरी सोर्स से सुनना पड़ रहा है। बात बाद बात में बेलूर मठ में उन्होंने कहीं किसी भक्त को बोला होगा या कोई आपस में चर्चा की होगी और कोई भक्त उपस्थित होगा तो उसने नोट डाउन कर लिया। इस तरह से महापुरुष महाराज है या तो फिर हरि महाराज है या तो फिर काली महाराज है या तो लाटू महाराज है उनका ठाकुर के साथ में क्या इंटरेक्शन रहा ठाकुर ने कैसे उनको गाइड किया कैसे उनका खुद का स्पिरिचुअल जीवन गठित हुआ ये सब चीजें हमको सेकेंडरी सोर्स से सुनने को मिल रही है वो भी यदि हमारे पास होता तो यदि जो लोग एनालिस एनालिसिस करते हैं जो लोग एनालिटिकल है उन लोगों के लिए कितना बड़ा एक खजाना साइकोलॉजिकल मिल जाता ये देखने के लिए कि मास्टर महाशय का तो एक तरह का साइकोलॉजिकल बेंट है। बाकी कितने तरह के साइकोलॉजिकल बेंट वाले साइकोलॉजिकल डिफरेंट डिफरेंट प्रोफाइल वाले भक्त ठाकुर के पास आते थे और सभी भक्तों को ठाकुर ने किस तरह से उनका जीवन गठन किया आध्यात्मिक जीवन गठित किया वो जानने में हमको कितना आनंद आता। अनफॉर्चूनेटली ऐसा नहीं है तो फिर हमको कथामृत से ही संतोष मानना पड़ रहा है। अच्छा अभी परिच्छेद फाइव बलराम के मकान पर श्री रामकृष्ण तथा प्रेमानंद में नृत्य रात के 8 9 बजे का समय होगा होली के सात दिन बाद फॉर्चूनेटली देखिए यहां पे भी होली के ही कुछ दिनों के बाद की बात है। राम मनोमोहन राखाल नृत्य गोपाल आदि भक्तगण श्री रामकृष्ण को घेर कर खड़े हैं। सभी लोग हरि नाम का संकीर्तन करते-करते तन्मय हो गए हैं। कुछ भक्तों की भावावस्था हुई है। भाववस्था में नृत्य गोपाल का वक्षह स्थल लाल हो गया है। सबके बैठने पर मास्टर ने श्री रामकृष्ण को प्रणाम किया। श्री रामकृष्ण ने देखा राखाल सोए हुए हैं भाव मग्न बाह्य ज्ञान विहीन। वे उनकी छाती पर हाथ रखकर कह रहे हैं शांत हो शांत हो। राखाल की यह दूसरी बार की भावावस्था थी। वे कोलकत्ते में अपने पिता के साथ रहते हैं। बीच-बीच में श्री रामकृष्ण का दर्शन करने आ जाते हैं। इसके पूर्व उन्होंने श्यामपुकुर में विद्यासा विद्यासागर महाशय के स्कूल में कुछ दिन अध्ययन किया था। देखिए दो बात सबसे पहले तो जैसे पहले वाले चैप्टर में हमको नरेंद्र का परिचय मिला। इस तरह से इस चैप्टर में जो है हमको राखाल का परिचय मिलता है और दूसरा कि किस तरह से पहले तो उन्होंने मास्टर महाशय ने ठाकुर को भजन गाते हुए और समाधि मग्न देखा था। यहां पर देखिए कि किस तरह से ठाकुर कीर्तन कर रहा है। तो माने जब हम भी यदि ठाकुर को कीर्तन करते हुए देखेंगे तो हमको भी महसूस होगा कि किस तरह का एक स्ट्रांग स्पिरिचुअल करंट जो है उस समय चारों ओर बह रहा होता। और इमेजिन करके देखिए कि यदि हम वहां पर खड़े रहते तो कितने जन्म जन्मांतर के लिए हमारा स्पिरिचुअल चार्जिंग हो जाता। कोई कहेगा कि यदि ठाकुर का कीर्तन देखा तो दूसरी बार जन्म लेने की ही आवश्यकता नहीं है और कोई कहते कि नहीं नहीं जितनी बार ठाकुर आएंगे उतनी बार उनका लीला दर्शन करने के लिए हम लोग साथ में आएंगे। अनफॉर्चूनेटली हमने ठाकुर को देखा नहीं है। तो हमारा हाथ में तो वो डिसीजन नहीं है कि अभी मतलब इतनी आध्यात्मिक ऊंचाई पर साधना करके चले गए हो कि मैं ठीक कर सकूं कि अभी मुझे दूसरा जन्म लेना है कि नहीं लेना है। तो हमको तो शायद बार-बार आना पड़ेगा जब तक ठाकुर कृपा करके हमारे जो है जन्म मृत्यु ये जो जरा व्याधि का जो चक्र है संसार चक्र वो तोड़ ना दे हमारे लिए। श्री रामकृष्ण ने मास्टर से दक्षिणेश्वर में कहा था मैं कलकत्ते में बलराम के घर जाऊंगा तुम भी आना इसीलिए वे उनका दर्शन करने के लिए आए हैं। फाल्गुन कृष्णा सप्तमी शनिवार 11 मार्च 1882 ईस्वी देखिए जो मास्टर महाश है इतना मैटिकुलसली वो जो डायरी मेंटेन करते थे तो तिथि वार नक्षत्र सब कुछ जो उन्होंने एकदम ठीक-ठीक करके लिखा है। हनुमान जी जैसी वो उनकी हालत नहीं थी कि राम का दर्शन करने के बाद तिथि वार नक्षत्र सब भूल जाते थे। माने ये भी आयरनिक है। माने ये भी एक पैराडॉक्स है कि ठाकुर जो है वो जानबूझकर के हनुमान के बारे में वो मास्टर महाशय के सामने में बोला करते होंगे कि उनको पता है उन्होंने ही जो है कि एक डिवाइन जो एक वो होता है ना मिशन वो मास्टर महाशय को मिला हुआ है कि ठाकुर के बारे में तिथि व नक्षत्र सहित प्रतिदिन की प्रतििक्षण की घटना को वो निरूपित करें। वो ठाकुर को पता है। फिर भी जो है वो मास्टर महाशय के सामने बार-बार वो हनुमान का वो उदाहरण देते थे कि जब राम के दर्शन होते थे या राम के भाव में मग्न होते थे तब हनुमान कहते हैं कि भाई तिथि व नक्षत्र क्या है मुझे पता नहीं। अर्थात यदि हमको ये कोई काम भी मिला हो डिवाइन जो हमको ये मिशन मिला हो डिवाइन जो कर्म योग करने का हमको मौका भी मिला हो तब भी तब भी हमको सब समय यह बात याद रखनी है कि जो है कि निर्वाण जो है या तो आत्मदर्शन जो है दैट इज बिय्ड दिस कर्म दैट वी आर डूइंग हाउएवर होली इट इज कितना ही चाहे ईश्वर का काम क्यों ना हो कितना ही चाहे पवित्र काम क्यों ना हो यहां पे तो ठाकुर के खुद के शब्दों को लिपिबद्ध करना इससे बड़ा पवित्र काम क्या हो सकता है? आप मंदिर में जाकर पूजा भी करेंगे। वह भी इतना पवित्र नहीं है जितना कि आप ठाकुर के श्री चरण के पास में बैठकर के ठाकुर के जो शब्द है उसको लिपिबद्ध करते हैं। उनको अंकित करते हैं। फिर भी फिर भी जो है ठाकुर उनको पीरियडिकली याद करवाते हैं कि इसको पकड़ के मत बैठे रहना। अल्टीमेटली जब यदि हमको मुक्ति चाहिए तो इस जगत में जो कोई भी जंजीर है वो तामसिक जंजीर हो ना कि वो राजसिक जंजीर हो ना कि वो सात्विक हो उससे भी हमको परे जाना है। ये भैरवी ब्राह्मणी की बात हमको पता है कि भैरवी ब्राह्मणी आई थी वो ठाकुर को तंत्र साधना सिखाने के लिए। फिर जो 64 तंत्र है उसमें लिखी हुई जितनी भी साधनाएं सब भैरवी ब्राह्मणी ने ठाकुर से करवाई। एक बात ऐसी आ गई किंतु वहां तक बात आ गई कि भैरवी ब्राह्मणी का एक आसक्ति हो गया था ठाकुर के ऊपर में एक मातृभाव आ गया था ये सोच कर के मैंने ही तो ठाकुर की आध्यात्मिक साधना का गठन किया है। मैंने ही तो ठाकुर को ईश्वर दर्शन कराया है। अर्थात उनके ऊपर मेरा हक है। जब मां शारदा ठाकुर के पास आई तो भैरवी ब्राहणी जो थी वो सासु की तरह वो बहुत ही नाराज उनसे रहा करती थी कि ठाकुर का अटेंशन अभी मां की ओर चला जाएगा। वो मुझे इतना अटेंशन नहीं देंगे जितना वो पहले देते थे। वो एक ईर्ष्या और क्रोध का भाव था। विद्वेष का भाव। तो क्या हुआ कि वो भैरवी ब्राह्मणी सब समय वो मां को डांटा करती थी। मां बड़े डर से रहती थी। और फिर ठाकुर ने कहा है ना कि मुझे जितना भी डांटो मुझे कुछ भी कर लो तुम्हारे लिए क्षमा है। हृदय को बोला था। किंतु यदि मां का अपमान करोगे, अवगणना करोगे तो तीनों लोक में बचाने वाला कोई नहीं है। वही हुआ। हृदय के साथ झगड़ा हो गया और हृदय तो पूरा राक्षस जैसा था। वो भैरवी भैरवी कुछ मानता नहीं था। एक कोई चीज उठा के सीधी भैरवी के सर पे मार दी। उसके कपाल पे लगा खून बहने लगा। तब कहीं जाके उसको अकल आई कि अरे वो खुद तो साधक है। उसको खुद ने तो वैराग्य और त्याग की जो शिक्षा है वो ठाकुर को दे रही है। किंतु ऑन दी अदर हैंड वो खुद ठाकुर की माया में फंस गई है। माने यह भी एक माया है। तो फिर उसने ठीक किया कि वो काशी जाएगी। वहां पर वो जाकर के बाकी के अपने दिन बिताएगी ध्यान और साधना में। तो यहां पे भी माने इनडायरेक्टली जो है वो जो ठाकुर मास्टर महाशय को कहते हैं कि भले तुम मेरे शब्द लिपिबद्ध करो तिथि व नक्षत्र सब ठीक रखो किंतु अल्टीमेटली इसको भी पीछे छोड़ के वो जो उच्च जो पाथ है ईश्वर की ओर जाने का उस पर तुमको चलना होगा। ये पांच पांडवों की बात है ना। वो जब आखिर में वो जो स्वर्गारोहण कर रहे हैं तो पांचों पांडव एक साथ में द्रौपदी के साथ में चल रहे हैं। पहले तो द्रोपदी पीछे रह गई छूट गई वो मतलब वो बर्फ में वो गिर गई और देहावसान हो गया। उसके बाद में जो है सहदेव नकुल भीम अर्जुन एक के बाद एक सब पीछे रह गए। धर्मराज युधिष्ठिर है वही अकेले ऊपर में गए। साथ में एक कुत्ता था सिर्फ वो फिर वो जो एक रथ आया बोला कि चलो अभी स्वर्ग में चलते हैं। ये कुत्ते को छोड़ दो पीछे में। तो उन्होंने कहा नहीं ये कुत्ता ही तो मेरा अभी तक का साथी रहा है। मेरे भाई है मेरे पत्नी है जो भी मेरे सबसे प्रिय थे वो भी तो पीछे छूट गया। तो ऐसा किया जैसे ही कहा वो कुत्ता जो है वो धर्मराज के रूप में वो परिणत हो गया। कहा कि अच्छा मैं तुम्हारा टेस्ट ले रहा था। ये तुमने सही बात कही। आखिर तक धर्म ही चलता है। हमारे रिलेशनशिप चाहे कोई भी हो। इवन ठाकुर के साथ में भी यदि ऐसा कोई संबंध है जिससे कार्य करने का तो वो भी जो है पीछे रह जाएगा। आखिर में स्वर्ग में जाने के समय हमारे साथ में धर्म ही रह जाएगा। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्स श्री राम कृष्णपस्तु