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Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna Hindi 27 April 2023

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अच्छा कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर विद्यासागर को कहते हैं की यह जो एक बहुत ही फंडामेंटल आइडिया है आज हम लोग यह कहते हैं की विकास की हमारी यहां डेमोक्रेसी है सभी के पास में एक-एक वोट होना चाहिए तो हम सब लोगों को पता है क्योंकि कानून की दृष्टि से और आजकल की जो पॉलीटिकल फिलासफी है उसकी दृष्टि से सभी व्यक्ति जो है सभी इंसान जो है वो इक्वल है इन लोगों में व्यक्ति एक दूसरे व्यक्ति में हम लोग कभी भी भेदभाव नहीं करते हम लोग कभी यह नहीं कहते की कोई आदमी करोड़पति है और लखपति है तो उसके पास में 10 वोट होना चाहिए या तो फिर कानून जो है उसके लिए अलग होना चाहिए और जो आदमी जो की जी जो की मजदूर है शारीरिक श्रम करके तो रोटी कमरा रोटी का रहा है वो वो चाहे भिखारी भी है या तो फिर खेत में कम करता है या तो किसान है तो फिर उसको आधा वोट मिलन चाहिए और उसके लिए कानून दूसरे तरह के बने चाहिए हमारा अर्थशास्त्र आजकल का जो आधुनिक युग है अर्थशास्त्र हो ना की यह जो नीति शास्त्र हो एन किया जो राजनीति हो कहानी पे भी हम लोग आज ऐसा नहीं कहते की एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से बड़ा है या तो फिर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से छोटा है जो बंगाली में आ एक आ शब्द है छोटू लोग अर्थात की वो जो है की वह उसका एक हिंदी में अर्थ क्या कहेंगे की वो निम्न जाति का आदमी है अभी आज कल हम किसी के भी बड़े में निम्न जाति का या छोटे लोग ऐसा कहेंगे तो लोग नाराज हो जाते हैं की इस तरह से उन्होंने क्यों का दिया तो ये जो है की आजकल सोसाइटी में हां प्रैक्टिस में चाहे जो भी होता हो प्रैक्टिस में तो हमको पता है की जो लोग बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं जो लोग की बहुत बड़े पॉलीटिशियन है वो कानून को अपने हिसाब से वह तोड़ मरोड़ करके अपना फायदा जो है पॉलीटिकल बेनिफिट वो जो है की मॉनिटरी बेनिफिट वे लोग ले लेते हैं यह तो प्रैक्टिस में हम सब ने देखा है और हम लोग जो भी यहां पर ज्यादातर मिडिल क्लास या तो लोअर मिडिल क्लास बैकग्राउंड से आते हैं हमको पता है की प्रत्येक छोटे-छोटे चीज गवर्नमेंट के पास में से जो किसी गवर्नमेंट डिपार्मेंट में से हमको कम करना होता है एवं यहां तक की बैंक में जाना है या कुछ भी करना है तो हमको कितना कष्ट होता है यह सब तो हम लोग देखते हैं किंतु इसके बावजूद भी है इसके बावजूद भी हम लोग जो है मतलब हमको पता है की कानून जो है हमारे लिए अलग है इन प्रैक्टिस और बड़े लोगों के लिए अर्थात की जो लोग बड़े पॉलीटिशियन है या तो बड़े धनी हैं इन लोगों के लिए अलग है इन प्रैक्टिस ऐसा होता है किंतु इन थ्योरी जाहिर में प्रकाश कोई ऐसी बात नहीं करता अभी आ इस तो हम सब लोगों को ये पता है अभी जब ठाकुर ने किंतु जब यह का दिया की विभिन्न लोगों में विभिन्न तरह की शक्ति होती है तो विद्यासागर को बड़ा आश्चर्य हुआ की आजकल हम लोग गृहस्ट जो है की दम भले ही चाहे इसको दम भूख कहो की प्रैक्टिस में हम लोग जो चाहे पावरफुल व्यक्ति अपना बेनिफिट ले ही लेट है और कमजोर आदमी जो है उसको बेचारे को लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है कहां पर भी जाए या तो सब जगह पर भी उसको परेशानी का सामना करना पड़ता है किंतु यह जो दम है की तुम मुझे तो इटली से इतना कहेंगे की सभी आदमी इक्वल है सभी इंसान इक्वल है तो जब ठाकुर ने ऐसा का दिया की यदि सभी के भीतर में शक्ति का प्रकाश जो है अलग-अलग है तो यह बात सुनकर के विद्यासागर को बड़ा आश्चर्य हो गया तो उन्होंने पूछा की क्या सभी के भीतर में अलग-अलग शक्ति है अभी हम लोग तो यह देखते ही है स्कूल में थे तो कोई लड़के थे तो बहुत ज्यादा मेहनत करने की उनमें कैपेसिटी रहती थी बहुत ज्यादा वह कम कर सकते थे बहुत अच्छा वह रैंकिंग प्राप्त करते थे और कोई-कोई लड़के ऐसे थे की वह कितना ही चाहे स्ट्रगल कर ले वो उनकी मेमोरी जो है ना की ग्रास्पिंग कैपेसिटी है उतनी शार्प नहीं थी मेहनत करने के बाद में भी विलो का वो जो परीक्षा में वो जो मार्क्स जो आते थे ग्रेट जो आते थे वो कम आते थे तो मैंने ये तो हम बचपन से ही देखते हैं फर्स्ट स्टैंडर्ड से सेकंड स्टैंडर्ड से ही हम देखना शुरू कर देते हैं की कोई कोई लड़के बड़े ही शार्प होते हैं कोई-कोई लोग हैं हम लोग बुद्धू तो नहीं कहेंगे की किंतु हम लोग कहेंगे की उन लोगों को सीखना जो है थोड़ा सा मुश्किल राहत है जो कोई भी नई चीज सीखना उनके लिए तो यह बात तो ठीक है की सभी के भीतर में शक्ति का प्रकाश अलग-अलग है किंतु ठाकुर इस बात को कैसे समझते हैं ठाकुर कहते हैं की देखो की विभोर रूप से ईश्वर सर्व भूतों में विराजमान है अर्थात की पोटेंशियल मेरे भीतर में ईश्वर का निवास यही है यदि यह कहा जाए इस किताब के भीतर में भी ईश्वर का निवास है इस किताब के भीतर में भी आत्ममन है किंतु जो है आत्मन का जो मेनिफेस्टेशन है वो डिफरेंट डिफरेंट है अभी मेरे भीतर में जो मेनिफेस्टेशन है और इस किताब के भीतर में जो मेनिफेस्टेशन है वो डिफरेंट इसलिए है क्योंकि किताब जो है वो जड़ पदार्थ है मैं जीवंत हूं अभी मां लीजिए की मैं हूं और आइंस्टीन है तो आइंस्टीन में जो है आसमान का प्रकाश मेरे से और कहानी ज्यादा है क्यों क्योंकि फिर उसने इस तरह से अभी मैं आइंस्टीन की एक बायोग्राफी बोल रहा हूं वाटर मैंने बहुत पहले भी एक बार पढ़ा था अभी मैं दूसरी बार पढ़ रहा हूं तो कितना सुंदर रूप से वहां पर वह दर्शाया गया है की एक के बाद एक वेस्टर्न जो फिलॉस्फर्स और साइंटिस्ट और फिजिसता थे उन्होंने एक के बाद एक एक्सप्लोरेशन करके ये जो है जो अपना विश्व ब्रह्मांड है उसके बड़े में उसकी जो हमारी जो धरना है उसके बड़े में हमारी ये जो कल्पना है वो कितना विशाल बनाया किंतु ये जो आइंस्टीन है उसने जो हमको आइडिया दिए स्पेशल रिलेटिविटी और जनरल लिबर्टी रिलेटिविटी यह दोनों इतने एडवांस थे इतने पावरफुल थे की पूरे इतिहास में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है की साइंस ने इतना बड़ा जंप लगाया है वो है इसाक न्यूटन तो न्यूटन ने जब आकर के हमको वो जो लॉस ऑफ डायनामिक से और थ्योरी ऑफ ग्रेविटी है वह जो दी है और जो आइंस्टीन ने दिया थिस वेयर देवर तू लार्जेस्ट जंप्स इन अवर अंडरस्टैंडिंग ऑफ फिजिक्स और कास्मोसिस यह दो जो है वो हमारी समझ में सबसे बड़े ये एक विस्ता सबसे बड़े जंप है तो देखिए उसके भीतर में आत्मन का प्रकाश कितना शार्प कितना स्ट्रांग होगा कितना मतलब वो जजुअली मां होगा की उसने जो है की इतना मतलब यहां पे बैठ के यदि विश्व ब्रह्मांड की साइज देखें विश्व ब्रह्मांड का ये जो कहते हैं की समथिंग लाइक 13 बिलियन लाइट इयर्स उसका वो जो है की ये इतिहास है और वो जो नॉन यूनिवर्स है वो तो कहां तक जाता है यानी की हमारा जो सिर्फ गैलेक्सी ही जो है वो गैलेक्सी समथिंग अराउंड गैलेक्सी मिल्की वे गैलेक्सी के एक चोर यह दूसरी और दूसरे चोर में प्रकाश के किरण को गति करने में प्रकाश के किरण को पहुंचने में एक 100 मिलियन साल यानी की 10 करोड़ साल लगेंगे और प्रकाश के किरण की गति क्या है 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड तो इतनी स्पीड से जान में भी 10 करोड़ साल लगता हैं प्रकाश के किरण को सिर्फ हमारी मिल्की वे गैलेक्सी की एक कोनी से दूसरे कोनी में जाते तो ऐसी तो करोड़ गैलेक्सी है इस ब्रह्मांड में तो पूरे ब्रह्मांड में किस तरह से ग्रेविटी कम करते हैं किस तरह से यह जो है की लाइट कम करता है किस तरह से ये जो फील्ड थ्योरी जिसको बोलते हैं वो सब कम करते हैं यह दिखाने के लिए यह सब एक कुछ एक पेपर में लिखे हुए इक्वेशन से हमको समझा दिया कहां वो एक छोटा इतना विश्व ब्रह्मांड इतना बड़ा इसमें एक सामान्य से मिल्की वे गैलेक्सी इतनी सामान्य से की वे गैलेक्सी में एक नगरी कहा जाता हुआ हमारा जो स्टार है उसका नाम है सन उसे सन की साइज कितनी है पता है जो पृथ्वी जो है शायद 1 लाख पृथ्वियां इस हमारा जो सूर्य है उसमें ए जाएगा तो कहानी 100 मिलियन लाइक की स्पैन वाली ये हमारी गैलेक्सी उसमें से एक छोटा सा सूर्य और एक छोटे से सूर्य में एक वो जो है धूल की रचना सी हुई एक पृथ्वी तो इस पृथ्वी पर बैठे हुए उसने पूरे विश्व ब्रह्मांड को कुछ सिंपल इक्वेशन से समझा दिया की ग्रेविटी कैसे कम करती है तो यह जो है वह जो आसमान के प्रकाश के बिना होता नहीं है तो मेनिफेस्टेशन इस डिफरेंट उसका जो ये जो ये जो है उसका प्रभाव वह अलग-अलग है हालांकि पोटेंशियल सभी में और हमको जो है की साधना करने से सिद्धि प्राप्त होगी ही होगी इसलिए ठाकुर यहां पर कहते हैं की ऐसा यदि एन होता तो तुम को देखने के लिए लोग क्यों आते क्या तुम्हारे सर पर दो सिंह ज हुए हैं की लोग तुमको देखने को आते तुम्हारे भीतर में ज्यादा शक्ति है बोलकर के लोग तुमको मिलने के लिए आते हैं श्री राम कृष्णा कहते हैं केवल पंडिताई में कुछ नहीं है लोग किताबें इसलिए पढ़ने हैं की वे ईश्वर लाभ में सहायता करेगी इससे ईश्वर का पता लगेगा आपकी पोथी में क्या है किसी ने एक साधु से पूछा साधु ने उसे खोलकर दिखाए हर एक पेट पे सिर्फ और सिर्फ ओम लिखा हुआ है जो किताब में से जो हम विद्या प्राप्त करते हैं अर्जुन करते हैं उसका वो जो क्या कहेंगे उसका फल क्या है क्या यदि हमको इससे ईश्वर प्रताप होगी की भी नहीं होगी यदि नहीं होती है तो सिर्फ इस तरह की पंडिताई जो की हमको किताबें पढ़ कर के हम रात लेते हैं उससे क्या लाभ है देखिए ये बात जो है दोनों क्षेत्र में कम करती है पहले तो स्पिरिचुअल क्षेत्र में दूसरा की यह साइंस और टेक्नोलॉजी में जगत का कोई भी क्षेत्र हो किताब में से अर्जन की हुई विद्या यदि हम तोता की तरह उसको रात लेते हैं तो हमको ज्यादा दूर नहीं ले जाति जैसे हमने आइंस्टीन का उदाहरण दिया आइंस्टीन के समय में जो भी टेक्स्ट बुक लिखी थी उसके बड़े में आइंस्टीन कोई बहुत ज्यादा ब्रिलियंट स्टूडेंट नहीं था 3 साल की उम्र तक तो उसने बोलना भी नहीं शिखा था और वह बड़ा फैमली उसने एक बार कहा था की जब वो स्टूडेंट था उसका मैथमेटिक्स सोचा था यहां तक रिलेटिविटी खोज निकाल और विश्व प्रसिद्ध वह साइंटिस्ट बन गया जहां पर भी जाता था वो किसी रॉकस्टार या प्रेसिडेंट आता है तो उतना कितने हजारों लोग इकट्ठा हो जाते हैं उसको देखने के लिए उसको कितना सम्मान मिलता है ऐसा इंस्टेंट को मिलता था किंतु फिर भी उसने क्या किया था एक एक बहुत ही अच्छे मैथमेटिशियन को रखा था अपने अजय अपना कंपनियों के रूप में और जब वो कोई भी नई थ्योरी सोचता था तो उसका मैथमेटिक्स को खुद तो वर्कआउट करता था किंतु वो जो इसका साथी जो मैथमेटिशियन है उसकी सलाह सब समय लेट था अभी फिजिक्स जो है या तो जो भी थ्योरी उसने डेवलप किया उसका फाउंडेशन ही है मैथमेटिक्स विदाउट मैथमेटिक्स को कुछ होने वाला नहीं है तो मैथमेटिक्स में भी वो इतना शार्प नहीं था उसके पास क्या था उसके पास था वो थी कल्पना शक्ति उसने एक बार कहा था की इमेजिनेशन इस मोर पावरफुल इंटेलेक्ट देखिए कितना बड़ा स्टेटमेंट दिया इंटेलेक्ट की वजह से आपने जो वर्तमान जो फिजिक्स की जो टेक्स्ट बुक है उसमें जो लिखा है वो आप पढ़ लेंगे किंतु जो इमेजिनेशन नहीं रहेगा तो इसके पैर क्या है मैन न्यूटन ने तो हमको एक तरह के लॉज ऑफ डायनामिक दे दिए किंतु न्यूटन का जन्म तो अभी 360 साल पहले हुआ था उसके बाद में तो इतना सर डेवलपमेंट हुआ है इतने सारे कॉस्मिक ऑब्जरवेशन हुए हैं तो उसको एक्सप्लेन करने के लिए नया थ्योरी क्या है वो तो आपको वो फिजिक्स की वो पुरानी जो किताब में से नहीं देखने को मिलेगा तो एक इमेजिनेशन चाहिए जी इमेजिनेशन की वजह से आप जो है की यह देख सके एक अनुमान कर सके की हां ऐसा ऐसा हो सकता है जिसको वंडर बोलते है ना वंडर क्यूरोसिटी इमेजिनेशन ये सब बहुत ही पावरफुल टूल है मनुष्य के पास में तो तो इसकी वजह से इस इमेजिनेशन वंडर और क्यूरोसिटी की वजह से जो है वो इस तरह की दुनिया का वो आविष्कार करता है की जहां पे जिसके बड़े में हमने कभी सोचा भी नहीं होता गुजराती में एक कहावत है जनजाए रवि त्यहा जाए कवि मैन जहां पे रवि नहीं जाता वहां पे कभी जाता है इसका अर्थ क्या है की रवि अर्थात सूरज तो इस जगत में सब जगह पे जाता है पहुंच सकता है वो तो इतना ऊपर आकाश में है किंतु जैसे इस रूम के भीतर में सूरज नहीं जा सकता तो जहां पर सूरज नहीं जा सकता वहां पे कभी जा सकता है क्यों क्योंकि कवि के पास में कल्पना है और जो चीज एवं सूरज के लिए भी अंधकार मैं है वो कवि के लिए प्रकाशन हो जाति है तो इसीलिए यह जो कल्पना जो है वो हमारी बहुत ही बड़ी शक्ति है तो वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो गया और यहां पर हो गया साधन भजन एक क्षेत्र में वहां पर हमारे पास में कल्पना इमेजिनेशन है क्यूरोसिटी है एक सेंस ऑफ वंडर है एक सेंस एक धीरे पर एक्सप्लोरेशन है वो सब वहां पे है और यहां पे अपने पास क्या है यहां पे अपने पास में आत्मा श्रद्धा है यहां पे अपने पास में भक्ति है यहां पे अपने पास में संकल्प शक्ति है जिसका हम लोग जो है संकल्प शक्ति से मैं अपनी इंद्रियों के ऊपर में संयम रख सकता हूं भक्ति की मध्य से मैं जो है अब मेरा जो अहंकार उसको जो है मैं संयम में रख सकता हूं और आत्मा श्रद्धा जो है वो सब समय मुझे प्रेरित करती है की आज मैं चाहे इतना 1 घंटा वेट करके भले ही चाहे मैंने जब ध्यान किया और मुझे कोई भी आध्यात्मिक अनुभूति भले चाहे एन हुई किंतु आत्मा श्रद्धा है तो मुझे पता है की मेरे भीतर में आत्मन यही है आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों परसों नहीं तो नसों कहानी ना कहानी जाकर के इस जन्म में नहीं तो अगले की जन्म में ईश्वर दर्शन या तो आध्यात्मिक अनुभूति मुझे होगी ही होगी तो इस तरह से मनुष्य की जो लिमिटेड है किंतु इस पोटेंशियल को मेनिफेस्ट करने के लिए जो स्पेशल टूल्स चाहिए वो टूल्स का इस्तेमाल करके हम लोग जो है मनुष्य से देवता तक बन सकते हैं यहां पे पृथ्वी के छोटी सी धूल के रजकां समीप पृथ्वी के एक कॉर्नर में बैठ के एक छोटा सा आदमी पूरे विश्व ब्रह्मांड की वह जो उसका जो स्ट्रक्चर है उसका जो डायनामिक है उसका वह जो इवोल्यूशन है उसका हिस्ट्री है उसका बिगनिंग और और क्या है सब कुछ बैठ करके कुछ इक्वेशन की वजह से इक्वेशन की मदद से डिस्क्राइब कर सकता है जैसे फिजिशियन कर सकता है तो यहां पर हम लोग जो है एक सड़क एक छोटा सा शरीर है लेकिन तू इस शरीर की यदि लिमिटेशंस इस शरीर की ये जो है की सीमाएं लाख करके वो एक मा चैतन्य समुद्र में वो डुबकी मार सकता है एक महाकाश में वो प्रवेश कर सकता है जहां पे समय कल या मां बुद्धि चित अहंकार ये सब की लिमिटेशंस नहीं रहती हम लोग जो है ईश्वर स्वयं बन जाते हैं जितने भी भूतकाल में जो कुछ हुआ भविष्य में जो कुछ होने वाला है वर्तमान में इतने करोड़ करोड़ लोग क्या कर रहे हैं सब कुछ जो है हमारी नजर के सामने ये सब वो दिखे जाता है ऐसा कोई भी ज्ञान नहीं जो की हमारे से छुपा हो तो ये हमको मनुष्य से अति मानव बनाने में यह जो हमारी कल्पना का हो एक्साइड में और या तो फिर आत्मा श्रद्धा हमारा यह संकल्प शक्ति और भक्ति वो सामान्य भक्ति नहीं तो यह जो है यह टूल्स है जो की हमारी जो मेनिफेस्टिंग या जो पोटेंशियल डीवीडी है उसको मेनिफेस्ट करते हैं तो सिर्फ किताब के ऊपर में भरोसा करके नहीं चलेगा सिर्फ रात करके नहीं चलेगा वरना तो लाखों लाखों फिस्सिट जो है बैक एमएससी ग्रेजुएट जो है वो निकलते हैं यहां पे वो लाखो लाखो लोग जब कर लेते हैं ठाकुर ने कहा है ना की कोहली काटते वो लॉकर लाखो लाखो जब करें वह उन्होंने खानकी पर जो करें नीचे अर्थात की कलकत्ता में लोग लाखों लाखों जाप करते हैं मैन वह यहां तक की वो जाप करते-करते वो मछली का भाव लाल करते हैं यह मछली अभी मुंह से तो बोल नहीं सकते तो उंगली के इशारे से दिखा देते यह वाला तो ये वाला दो और इतने रुपए में लो तो ठाकुर कहते हैं की कोलकाता में लोग जाप कर लेते हैं किंतु फिर भी उनको कुछ मिलता नहीं है क्यों क्योंकि यह जो लीग जो है यह लिप ऑफ इमेजिनेशन जो है यह लिप ऑफ एटमॉस राहत जो है तो हमको लगा नहीं होगी सिर्फ एक पुष्टिका के मध्य से सिर्फ हमने जो पढ़ लिया है उसके मध्य से होगा नहीं हालांकि आपको पता होगा शायद मैंने पहले भी कहा है की प्रभु महाराज कहा करते थे की जो 12 साल कथामृत का नियमित पाठ कर सकता है तो उसको मुक्ति मिलने ही मिलनी है तो यहां पे हमको इसको दो तरह से इंटरप्रेट करना है सिर्फ ये नहीं की सिर्फ पाठ करके और सिर्फ मुख्खास तक करके वो हो जाएगा किंतु मैं ऐसा मां रहा हूं यहां पे की जब हम इसका पाठ करते हैं तो ऑटोमेटिक हमारे भीतर में यह संकल्प शक्ति ये संयम की शक्ति ये सब प्रगति होती है और इसके मध्य से हमको जो है साधना करने की प्रेरणा मिलती है मैं जब बिल्कुल पहले पहले बार प्रथम पढ़ रहा था मैं मैं बेलूर मठ में जॉइन किया तो बेलूर मठ में क्या है की जो हम लोग जो नए आए हुए जो ब्रह्मचारी है उन लोगों के लिए एक अलग से एक ट्रेनिंग सेंटर था तो वहां पर हम लोग जो है कर पांच लड़के एक रूम में एक डॉरमेट्री में रहते थे तो एक प्रत्येक ब्रह्मचारी के लिए एक बेड था एक टेबल था इस तरह से देते थे और ऐसा नियम था की जब रात होती है संध्या के बाद में संध्या आरती के बाद में सबको अपने कमरे में वापस आकर पहले तो जब ध्यान करना है वो स्वामी जी का जो समाधि मंदिर है वहां पे बैठ के और इसके बाद में अपने रूम में वापस आकर के वो जो है पढ़ाई करनी है और ऐसा नियम था की कोई भी जो है वो लाइट ऑन नहीं करेगा युटुब लाइट वगैरा जो की डेस्क लैंप है इस से इस के मध्य से पढ़ना है अर्थात की इतना सुंदर एक एटमॉस्फेयर खड़ा होता था वो पूरा अंधेरा भी है प्रकाश भी है आलू आधार मिश्रित वो जो कथामृत में वह जो वर्णन है ना की जब मास्टर महाशय जब पहले बार ठाकुर को मिलने को आए तो ठाकुर ने कहा था की तुम जाकर के वो बलराम भवन में आके मुझे मिलन तो फिर मास्टर महाशय को लगा बलराम तो की बड़ा आदमी होगा मुझे वह वेलकम भी करेगा की नहीं तो ठाकुर को ये बोलने के लिए आए की मैं बलराम भवन में नहीं जाऊंगा यही पे आपका आपके साथ बात करूंगा तो उसे समय ठाकुर ने का दिया अरे वो तुम वहां जाके मेरा नाम लेना सब दरवाजे खुला जाएंगे देखिए ये कितना बड़ा महामंत्र है इसमें छुपा हुआ है ठाकुर का नाम लेने से सब दरवाजे खुला जाएंगे तो जो भी है उसे समय मास्टर महाशय जो वापस ए रहे थे तो उन्होंने देखा की वो जो चंद वो जो नाट्य मंदिर है जो लोग दक्षिणेश्वर गए होंगे पता है उनको पता होगा की मां काली का जो मंदिर है उसके सामने वो नाट्य मंदिर है वहां पे वो सब लोग बैठ करके भजन कीर्तन कर सकते हैं वो मां की आरती देख सकते हैं तो वहां पर ठाकुर एक मार्शल या ऐसा कोई दिया जल रहा है और उसके वहां पे ठाकुर जो है वो पी चारी कर रहा है वरना वो वहां पे टहल रहा है तो अंधेरा भी है और थोड़ा सा वो मार्शल है या बत्ती जो है उसका उजाला भी है तो मास्टर वहां से लिखने हैं इतना सुंदर वर्णन करते हैं की वो अंधेरा और प्रकाश मिश्रित जो एक वहां पे एटमॉस्फेयर बना था वहां पर ठाकुर टहल रहे हैं तो जैसे वो शेर की तरह दिखते हैं तो यहां पे भी ये जो अंधेरा और प्रकाश मिश्रित ये जो हमारा जो जगत है उसमें से हमको जो है वो रास्ता निकालना है अभी इसलिए ठाकुर कहते हैं की जो यह सिर्फ पंथी गत विद्या है वह जो हमारी किताब की ये जो विद्या है अच्छा की मैं किंतु प्रभु महाराज के बड़े में का रहा था अच्छा मैं वो हां बेलूर मठ के बड़े में का रहा था तो हम लोग सब लोग जो है की वो वहां पे बैठे थे वो बैठने थे और वो जो डेस्क लैंप के लाइट में हम लोग पढ़ने थे तो पढ़ने थे तो उसे समय आप आकर के देखेंगे तो इतना सुंदर प्रकाश और अंधेरे मिश्रित एक दृश्य बंता था और मैंने ठीक किया था की मैं जो है कथामृति पढ़ूंगा उसे समय और कुछ नहीं पढ़ूंगा तुम्हें कथामृत पढ़ना था तो मैं तीन-चार लाइन पढ़ने के बाद में ही मुझे वो किताब जो है बैंड करके वो थोड़ा सोने की जरूर पड़ती थी ऐसा नहीं की कथा करके हम अन्य कोई जैसे न्यूज़ है या तो फिर नोबेल है तो कसम फट-फट करके पद जाते हैं तो इस तरह से नहीं पढ़ सकते दो-तीन लाइन पड़ी और फिर आंख बैंड करके वो चिंतन मनन स्मरण जो है वो शुरू हो जाता है अपने आप होता है स्वत एसएफआर तो होता है ऐसा नहीं की मैंने अपनी मेहनत करके ऐसा करता हूं इसका अर्थ यह है की आज भी देखिए कथामृत का एक पेज कंप्लीट करने के लिए हमको कितना टाइम लगता है क्योंकि प्रत्येक शब्द इतने सारे चिंतन मनन का जो है वो एक पुरी चेन एक जैसे डोमिनोज की तरह वो जो है एक के बाद एक वो हमको एक चैन हमारे मां में आरंभ कर देता है की हमको लगता है की प्रत्येक सेंटेंस जो है प्रत्येक पैसे जो है उसके ऊपर में कितना गहन चिंतन करने की हमको जरूर है तो ये चिंतन मनन स्मरण मनन विद्याश्रण जो है वही तो ज्ञान योग की असली पद्धति है की जिसकी मदद से हम ईश्वर प्रताप करेंगे ज्ञान योग में क्या कहा गया है की हम ब्राह्मणी ये जो महामंत्र है उसके उसका चिंतन करना है मनन करना है मरण करना है अर्थात की उसका जो अर्थ जो है उसका वह जो मीनिंग है उसमें गंभीर रूप से जो है हमको वह डुबकी मरनी है उसको जो है गंभीर रूप से उसको हमको अनुभूति करनी है चिंतन करना है उसको ऊपर में सोचना है तो यहां पर भी आप देखिए की कथामृत जब आप पढ़ेंगे तो उसका प्रत्येक सेंटर प्रत्येक उसका पैसे उसका प्रत्येक आइडिया प्रत्येक कौन से आपको इतना गहन चिंतन में लेकर के जाएगा ये चिंतन मनन की भीम ही हमारे लिए साधना बन जाएगी और इसी से हम लोग जो है वो सुपर कॉन्शियस लेवल पे पहुंच जाएंगे तो यहां पे जो ठाकुर ने कहा है की पुङीगत विद्या से आपको कुछ मिलने वाला नहीं ये बात कथामृत के लिए भी सही है यदि हम कथामृत सीधा-सीधे पढ़ लेंगे तो इससे ज्यादा कोई लाभ नहीं होगा कहानी ये जो प्रभु महाराज ने भी जो कहा है उसके भीतर में भी यही अर्थ जो है बिना कहे ये जो रीडिंग बिटवीन डी लाइन हमको लेना है जैसे जैसे हम पढ़ेंगे डिपर मीनिंग्स जो है जैसे की वह अनियन जो होती है उसके एक के बाद एक लेयर हम निकलते हैं तो एक लेयर्स हटाए तो दूसरा लेयर दिखाई देगा दूसरा निकाला तो तीसरा दिखाई देगा तो एक के बाद एक लेयर्स हमको अनियन में दिखाई देते हैं वो जो है प्याज में तो यहां पे भी इतने सारे लेयर्स आफ्टर लेयर्स से मीनिंग्स आफ्टर मीनिंग से चिंतन आफ्टर चिंतन है की हम लोग जो है बहुत ही दीप में जाएंगे जा सकते हैं जाना ही चाहिए तो वही हमारी साधना हो गई ये जो हम लोग जब ध्यान करते हैं वो जो है योग की साधना है राजयोग की साधना ये जो हम ईश्वर को प्रार्थना करते हैं या तो सच्चे मां से पूछा करते हैं वो भक्ति योग की साधना हो गए जो निष्काम कर्म करते हैं वो कर्मयोग की साधना हो गए किंतु यह जो चिंतन मनन करते हैं किसी भी एक धार्मिक टेक्स्ट को लेकर के यह हो गई ज्ञान योग के साधना यह हमने पढ़ा और उसके बड़े में चिंतन किया इसको सुना यही हमारी साधना है जितना करते हैं उससे जो पोटेंशियल हमको जो बेनिफिट होता है स्पिरिचुअल इतना ही बेनिफिट यह सब चिंतन मनन करके हमको पता है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलता है ओम शांति शांति