Skip to transcript
ClassesSaradakosh

General ·

अद्वैत वेदांत और स्वामी विवेकानन्द का आत्मविश्वास 13 Sep 2024

Transcript

स्काय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कल एक बड़ा इंपॉर्टेंट प्रश्न हुआ था कि स्वामी जी का यह जो मैसेज है आत्मविश्वास या तो फिर आत्म श्रद्धा इसका अद्वैत वेदांत के साथ में कनेक्शन क्या है थियोरेटिकल कनेक्शन कहां पे है जैसे कि हम लोग यह तो समझते हैं कि ज्ञान और वेदांत इसका कहां पर कनेक्शन है नित्या नित्य वस्तु विवेक इसका अद्वैत वेदांत के साथ में क्या कनेक्शन है यह त्याग या ब्रह्मचर्य इसका क्या कनेक्शन है तो फिर यह आत्म श्रद्धा है जिसके बारे में स्वामी जी कह रहे हैं इसका अद्वैद विदान के साथ में क्या थियोरेटिकल कनेक्शन है एक्चुअली कनेक्शन इतना सिंपल है और इतना सहज है जितना कि ये शरणागति का त वेदांत के साथ में है या तो फिर द्वैत सिस्टम ऑफ फिलोसोफी के साथ में है द्वैत अर्थात कि हम ईश्वर को एक व्यक्ति या अवतार के रूप में भक्त बन कर के उनकी पूजा करते हैं आराधना करते हैं और कोई ना कोई भाव से उनके साथ में जुड़ते हैं जैसे कि मातृ भाव है जैसे कि बालक भाव है जैसे कि शांत भाव है जो कि ऋषियों का था मधुर भाव है जैसे कि गोपियों का या तो फिर राधा रानी का था इस तरह से ईश्वर के साथ में कोई ना कोई एक दिव्य संबंध हम बनाते हैं यह हो गया ध्व वेदांत का साधना का लक्षण द्वैत वेदांत की साधना हों का लक्षण तो यह जो आत्म श्रद्धा है यह आत्म श्रद्धा भी एक तरह से इसको हम दो परिपेक्ष में देख सकते हैं एक तो हम उसको साधन मार्ग के रूप में भी देख सकते हैं जैसे कि त्याग एक साधना है वैराग्य एक साधना है फिर यह ब्रह्मचर्य एक साधना है नित्या नित्य वस्तु विवेक समाधि टक संपत्ति जिस तरह से साधनाएं हैं इस तरह से आत्मविश्वास भी इसी तरह की एक साधना है हालांकि इसके बारे में हमने बहुत ज्यादा डिटेल में अपने शास्त्रों में देखेंगे शायद कि इतना डिटेल में डिस्कशन नहीं हुआ है उसका रीजन क्या था कि पौराणिक युग में या तो फिर वैदिक युग में ऑलरेडी लोगों के भीतर में आत्म श्रद्धा थी ही थी वे लोग आर्य के संतान थे ऋषि मुनियों की संतति थे ऋषि मुनियों का वारसा देवी देवताओं का वारसा इनमें आया था बोलकर के आत्म श्रद्धा डेवलप करनी है या इसको कल्ट वेट करना है वह सेपरेट एक विचार उनके मन में इतना नहीं आया होगा जितना कि ये 1000 साल की गुलामी के बाद में हम संपूर्ण रूप से जिस तरह से हत विर्य हो गए थे जिस तरह से हम लोगों ने अपनी मर्दानगी खो कर के यह मानना शुरू कर दिया था कि भारत देश और भारतीय और भारतीय संस्कृति हम लोगों में कुछ भी सार नहीं है हम लोग असार है हम लोगों का जन्म ही जो लोग हमारे ऊपर में राज्य करने के लिए आते हैं उनके पद दलित होकर के रहना यह एक बात हमारे भीतर में प्रवेश कर गई थी और यह जब आत्म श्रद्धा जिस दिन से हमने खोदी उसी दिन से यह ना ज्ञात और ज्ञात और यह कास्ट सिस्टम वगैरह यह हमारे में प्रवेश कर गया उससे पहले ये कर्म का डिवीजन था कि हां कोई ब्राह्मण का कार्य करता है कोई जिसमें ज्यादा बल वीर्य उत्साह और यह है शौर्य साहस तेज तो वह क्षत्रिय का कार्य करेगा जिसमें यह फिजिकल वर्क करने की कैपेसिटी और टेंडेंसी ज्यादा है वह शुद्र का कार्य करेगा यानी कि शुद्र का कार्य यानी कि अभी शुद्र शब्द आज थोड़ा सा निम्न कक्षा का कहा जाता है उस समय तो जो लोग किसान है जो लोग कारपेंटर है जो लोग मैनुअल वर्क करते थे वे लोगों का तो एक समाज में प्रेस्टीज होता था तो उन लोगों को वो कार्य करना है और जिन लोगों के मन में थोड़ी सी चातुर्य बुद्धि है वे लोग वाणिज्य का कार्य करते थे उनको वैश्य कहते थे तो आपकी टेंडेंसी के अनुसार कर्म के अनुसार आपका यह समाज में स्थान निर्धारित होता था बाद में बाद में गुलाम होने के बाद में यह सब हेरेडिटरी हो गया जन्म गत हो गया मैं ब्राह्मण का लड़का हूं तो ब्राह्मण ही बनूंगा शुद्र का लड़का हूं तो क्षत्रिय होकर के राज्य करने का या तो फिर विद्या अर्जन करके विद्याभ्यासम करके आचार्य या शिक्षक होने का मुझे अधिकार नहीं क्योंकि शुद्र के वंश में मैंने जन्म ग्रहण किया है यह सब बहुत-बहुत बाद में हुआ और यह गुलाम मानस से बाहर निकलने के लिए ही स्वामी जी ने आत्म श्रद्धा आत्म वीर्य इस गुण के ऊपर में इतना जोर दिया वरना ये जिस तरह से यह समाधि टक संपत्ति है जैसे यह शरणागति या भाव साधनाएं हैं एक जो एटीट्यूड डेवलप करना जैसे कि यम और नियम योगशास्त्र में सबसे पहले ही कहा जाता है कि आपको यह एटीट्यूड यह बिहेवियरल मॉडिफिकेशन आपको अपनी लाइफ में इंट्रोड्यूस करने होंगे यम यानी कि सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य और नियम अर्थात की तप शोच संतोष स्वाध्याय और ईश्वर प्राणि दन तो जिस तरह से यह 10 यम और नियम है वैसे ही एक आत्म श्रद्धा है किंतु क्या होता है कि युग की आवश्यकता के अनुसार गुणों के ऊपर में एक एमफे साइज दिया जाता है आर्य युग में आर्य सतयुग में इवन त्रेता और द्वापर में भी हम लोगों के पास में इतना कॉन्फिडेंस तो था बाय डिफॉल्ट था वो ऑटोमेटिक था कि हमको यह सब अलग से रिमाइंड करवाने की जरूरत नहीं पड़ती थी कि भाई यह महान कार्य है उसको करने के लिए तुम्हारा जन्म हुआ है तुमको के रास्ते पर चल कर के यह कार्य तो करना ही होगा तो वह उस समय का जिस तरह का जो एटमॉस्फियर था उसके अनुसार उस समय उस गुणों की चर्चा की गई उस गुणों को प्राधान्य दिया गया अभी आज ऐसा है खास करके कि हमारे भीतर में मने इवन उस समय की तो बात छोड़ ही दीजिए हम जब गुलाम थे मैं आज की बात कर रहा हूं यहां पर मैं स्टूडेंट्स का क्लास लेता हूं तो मैं हमेशा कहता हूं कि देखो क्लास समाप्त होने के बाद में तुम लोग मुझे कुछ ना कुछ क्वेश्चन करना यदि तुम लोग मुझे क्वेश्चन नहीं करोगे तो तुम लोग कुछ सीखो ग नहीं तुम लोगों के मन में मैं जो बताता हूं वो डीप उसमें वो इंप्रिंट नहीं होगा अपनी छाप नहीं छोड़ेगा किंतु रेयरली कोई कुछ क्वेश्चन करेगा और बात ऐसी नहीं है कि मैं साधु हूं तो मेरे सामने लज्जा हो रही है या शर्म आ रही है बात करने की हमारे यहां कोचिंग क्लासेस चलते हैं तो मैं टीचर को भी पूछता हूं कि ये लड़के क्या प्रश्न करते हैं तो वह बोलते हैं कि हां यदि टेक्निकल डिफिकल्टी होती है तो कभी रेयरली कोई कुछ पूछ लेता है कि अपना काम अटक गया है तो मैं यह पूछ लेता हूं किंतु इन जनरल जिसको कहा जाए कि सस्टेन बेसिस पे एक आदान प्रदान करके अपने गुरुजनों के साथ में अपनी विद्या बुद्धि को बढ़ोतरी देना इस तरह का कार्य बहुत कम स्टूडेंट करेंगे बड़ा ही रेर कोई करेगा य मैंने ये स्टूडेंट अवस्था से ही देखिए बचपन से ही देखिए कि टीचर के सामने एकदम चुपचाप बैठे रहना है कुछ भी पूछना नहीं है इस तरह का एक डर अपने स्टूडेंट्स में पहले से ही प्रवेश कर गया है यह सरकार माय बाप है उसके सामने बहुत ज्यादा जो मिलता है उसको चुपचाप ले लो और फिर जो नहीं मिलता है तो नहीं मिला तो नहीं मिला क्या करें अपने नसीब को दोष दे कर के बैठे रहो अपने राइट्स के लिए फाइट करना ये हम लोग कब सीखेंगे वह भी तो एक देखने की बात है अभी जैसे देखिए ब्रिटिश लोगों ने भारत पर हमला किया तो भारत पर हमला किया तो 1857 वो जो प्लासी का युद्ध था उसके बाद में देखेंगे कि भारत में से एक तरह से विरोध समाप्त ही हो चुका था वैसे ही तो पहले ही मुगल लोगों का राज्य था तो हिंदू लोग तो वैसे भी डर करके बैठे थे ये राजपूत और मराठा यह कुछ राजा थे जो कि थोड़ा बहुत साहस किया करते थे मुगल लोगों के सामने इसके बाद में तो बिल्कुल ठंडे हो गए और फिर बाद में देखिए कि एक बार किंतु यह ब्रिटिश साम्राज्य स्टार्ट हो गया 1857 के बाद में उसके बाद में तो जो आर्म्ड रेजिस्टेंस जिसको कहते हैं हम लोग प्रायः ही भूल गए थे उसके अगेंस्ट में आप अफगानिस्तान का ये एग्जांपल लीजिए जैसे ही ब्रिटिश आर्मी जितनी भी बार वहां पे गई है इतनी कड़ी उनको हार उनको स्वीकार करनी पड़ी है इतना मार खाना पड़ा है अफगानिस्तान में यह रशियन भी मार खाके चले गए यह ब्रिटिश लोग लोगों ने भी हार स्वीकार कर ली और आखिर में अमेरिका को भी वहां से भगा दिया तीन महासत्ता है सोवियत यूनियन को इंपीरियल ब्रिटेन और यह आज का यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका तीन-तीन महासत्ता हों को अफगानिस्तान में वह हार का सामना करके ना पड़ा है जबकि भारत में देखिए कि यह ब्रिटिश लोगों ने सेकंड वर्ल्ड वॉर में जब बहुत ही बुरी तरह से उनकी पिटाई हुई थी हिटलर के द्वारा हिटलर के हाथों से तब कहीं जाकर के और ब्रिटेन में यह जो डेथ रेट बहुत बढ़ गया इकोनॉमी की अवस्था बहुत खराब हो गई युद्ध जीते तो सही अमेरिका की मदद से किंतु ब्रिटेन की ख खुद की आर्थिक अवस्था बहुत ही बुरी हो गई थी तो उन्होंने आखिर में कहीं जाकर के भारत को आजादी देनी पड़ी नो डाउट हमारा भी एक फ्रीडम मूवमेंट था किंतु अपना फ्रीडम मूवमेंट का मेन फोकस था कि भारत में जो एक विघटन हो गया है नात नाथ में जात जात में यह लैंग्वेज ग्रुप में एक के बाद एक दूसरे प्रांतों में राजा रजवाड़ा यह सब जो बंटवारा हो गया है ब्रिटिश लोगों ने बड़ा ही केयरफुली बड़ा ही क्लेवर हमको जो डिवाइड करके हमारे पर रूल कर रहे थे तो अपनी फ्रीडम मूवमेंट का सबसे बड़ा लक्ष्य तो यह था कि पहले तो पूरे इंडिया को यूनाइट करें इंडिया यूनाइट होगा तब तो कहीं जाकर के फ्री इंडिया अपने को रूल कर पाएगा अपने को गवर्न कर पाएगा वह भी डेमोक्रेसी के बेसिस पे तो वो फ्रीडम मूवमेंट का वो मेन लक्ष्य था आजादी मिली है उसमें फ्रीडम फ्रीडम मूवमेंट से भी ज्यादा यह ब्रिटिश लोगों की यह सेकंड वर्ल्ड वॉर में जो हार हुई है हार तो नहीं कहेंगे किंतु जो दूरा अवस्था हुई है दैट वाज अ बिग फैक्टर तो यह आत्म श्रद्धा या आत्मविश्वास आज भी देखिए कि हम लोग लोगों में कितना कम है तो यह तो एक बात हुई दूसरी एक बात क्या है पता है कि जिस तरह से आजकल जितने भी यह थिंकिंग लोग हैं उन लोगों ने यह स्वीकार करके रखा है कि ऐसा तो हो नहीं सकता कि जो इंडियन लोग हैं उनके देवता एक होंगे अमेरिकन लोगों के एक होंगे ये अरब लोगों के तीसरे होंगे चीन जापान के चौथे होंगे ऐसा तो पॉसिबल नहीं है कि इतना सा क्षुद्र सोलर सिस्टम उसमें भी एक छोटी सी पृथ्वी उसमें भी हम चीटी जैसे हम लोग हैं तो ऐसा हजार लोगों के लिए एक-एक नए-नए भगवान बनना शुरू हो जाए ऐसा तो संभव ही नहीं है सृष्टि का जो करता हर्ता जदी होगा तो वह एक ही है जिसको कि हम भिन्न-भिन्न नाम से पुकारते हैं तो यह अंडरस्टैंडिंग बेसिकली आजकल जो थिंकिंग लोग है जो लोग एक ग्लोबल उनका एटीट्यूड है एक ग्लोबल आउटलुक है वे लोग सभी लोग इस बात को स्वीकार करेंगे भले ही चाहे प्रकाश उसको एक्सप्रेस करे ना करें उसको स्वीकृत करे ना करें किंतु मन में तो यह होगा ही कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि अलग-अलग देवी देवता एं हो तो जद इस तरह से जो हमने ज्यादातर लोगों ने स्वीकार किया है वैसे ही ये द्वैत अद्वैत विशिष्ट द्वैत ये जो सब फिलोसॉफिकल डिवीजन है वो भी तो कैसे हो सकते हैं यदि इस सृष्टि का कारण हरता धरता जद एक ही होगा तो उसको समझने के लिए फिलोसोफी भी तो एक ही होगी जिस तरह से देखिए कि फिजिक्स में सब समय एक एफर्ट चलता रहता है ग्रांड यूनिफाइड थिरी इसका अर्थ क्या है इसका अर्थ यह है कि एक ही तरह एक ही सेट ऑफ इक्वेशन से आप पूरे विश्व को एक्सप्लेन कीजिए पूरे विश्व के जितने भी लॉज ऑफ फिजिक्स है उसको डिस्क्राइब कीजिए जैसे कि ये अभी मान लीजिए कि फॉर एग्जांपल यह वर्ल्ड में ये यूनिवर्स में कितनी तरह की फोर्सेस है तो पहले माना जाता था एक ग्रेविटी है फिर यह मैग्नेटिज्म है फिर यह लाइट यानी कि इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स है फिर धीरे-धीरे समय गया तो पता चला कि ये मैग्नेटिज्म और इलेक्ट्रिसिटी एक ही फोर्स के दो विभिन्न मेनिफेस्टेशन है और उसको एक ही सेट ऑफ इक्वेशन से मैक्स जेम्स क्लार्क मैक्सवेल के इक्वेशन से इसको आप डिस्क्राइब कर सकते हैं इसके बाद में आया न्यूक्लियर लेवल पे स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स बक न्यूक्लियर फोर्स तो उसको भी धीरे-धीरे करके न्यूक्लियर फोर्स और ये इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म इनको एक ही सेट ऑफ इक्वेशन से डिस्क्राइब कर दिया अभी जो एफर्ट चल रहा है कि इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म स्ट्रांग एंड वीक न्यूक्लियर फोर्स ये तीन एक हो गए हैं और साथ में एक ग्रेविटी बचा है तो ग्रेविटी ये चार फोर्सों को तीन एक हो गए हैं एक ग्रेविटी ही एक अकेला सेपरेट बचा है तो इन इस ग्रेविटी को भी इसके साथ में यूनिफाइड थिरी के द्वारा समझाया जाए तो यह एफर्ट उनका हमेशा से चल रहा है कि विश्व जदी एक ही सेट ऑफ बेसिक प्रिंसिपल से बना है तो अब जैसे कि ये केमिस्ट्री में पीरियोडिक टेबल है एक समय था कि जब माना जाता था कि अरे इतने सारे जैसे जैसे ये यूरोप में साइंटिफिक रिसर्च और डेवलपमेंट होने लगा ये डिफरेंट डिफरेंट तरह के केमिकल्स चालू डेवलप होने लगे वे लोग सोचते हैं कि ऐसा तो कौन सा सिस्टम है कि जितने भी विभिन्न एलिमेंट से केमिकल्स है ये मिनरल्स है उन सबको एक ही सिस्टम के द्वारा समझाया जाए तो यह पीरियोडिक टेबल का धीरे-धीरे करके डेवलपमेंट हुआ वहां पे आप देखेंगे कि किसका कितना यह हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन का परसेंटेज ये है नंबर्स कितने हैं उसके बेस के ऊपर में आप उसके ये एलिमेंट्स को डिस्क्राइब कर सकते हैं तो ये हो गया साइंटिफिक डेवलपमेंट की डायरेक्शन कि जितने भी विभिन्न विभिन्न फिनोमिना है विभिन्न विभिन्न ये इवेंट्स है फोर्सेस है थियस है उनको एक ही सेट ऑफ इक्वेशन सिंगल सेट ऑफ थिरी के द्वारा समझाया जाए यह तो फिजिक्स और नेचुरल साइंस का डेवलपमेंट था तो वैसे ही रिलीजन में भी यह प्रयास हमेशा से होता रहा है किय मान लीजिए कि विभिन्न तरह के देवी देवता एं हैं किसी का क्रोध किसी का रुद्र स्वभाव है तो कि किसी का सौम्य स्वभाव है तो किसी का मातृ स्वभाव है तो यह विभिन्न तरह के देवता है किसी की इस तरह से पूजा होती है किसी की पूजा करने का यह मंत्र है तो ये और फिर यह इस रीजन के यह देवता है तो उस रीजन के वो देवता है तो इतना जो आध्यात्मिक रिलीजियस फील्ड में वैविध्य है उस सभी वैविध्य को एक ही सेट ऑफ थिरी थियोरेटिकल इक्वेशंस के द्वारा कैसे समझाए जाए तो इसी में से यह अद्वैत वेदांत का प्रारंभ हुआ था अभी आज ऐसा है कि अद्वैत वेदांत में भी बहुत सारी स्कूल्स डेवलप हो चुकी है अद्वैत वेदांत नहीं करके मैं यदि वेदांत शब्द का ही यूज करूंगा तो वेदांत में भी बहुत सारी स्कूल्स डेवलप हुई है अभी देखिए कि श्री रामकृष्ण देव की दृष्टि से वेदांत क्या है श्री राम कृष्ण देव कहते हैं कि ब्रह्मण है और शक्ति है जब वोह स्थिर रहते हैं अटल अचल निष्क्रिय रहते हैं सृष्टि स्थिति प्रलय नहीं करते हैं जब वो आत्म ज्ञान में आत्मा वो आत्मा आनंद में निमग्न रहते हैं तब मैं उनको ब्रह्मण कहता हूं और जब वह सृष्टि स्थिति प्रलय करते हैं भक्तों के ऊपर में आशीर्वाद बरसाते हैं भक्तों की मनोवांछित जिस तरह से आइंस्टाइन ने जो वो सेट ऑफ इक्वेशंस दिए है जो सबसे फेमस इक्वेशन कि e = mc2 ई फॉर एनर्जी एम फॉर मास सी फॉर स्पीड ऑफ लाइट सो एनर्जी ऑफ एनी मास इ स्क्वेयर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट तो ये e फ इल एसी स्क्वा जो ये वर्ल्ड फेमस इक्वेशन है नेचुरल वर्ल्ड में तो यहां पे भी ठाकुर का भी यह फेमस इक्वेशन है ब्रह्मण इक्वल्स शक्ति यह ब्रह्मण और शक्ति एक ही है अभेद है और दोनों एक दूसरे के इक्विवेलेंट है एक सिक्के के दो पहलू है जब वोह स्थिर रहेंगे तब ब्रह्मण कार्य करेंगे तो शक्ति तो यह ब्रह्मण इक्वल्स शक्ति इस इक्वेशन के माध्यम से आध्यात्मिक जगत के जितने भी इवेंट्स है जितनी भी थिरी है जितने भी फिनोमिना है जितने भी वैविध्य पूर्ण यह जगत दिख रहा है आध्यात्मिक धार्मिक जगत उन सबको आप विद इन दिस थियोरेटिकल फ्रेमवर्क आप यूनिफाई कर सकते हैं और फिर इस फर्स्ट प्रिंसिपल से जैसे कि फिजिक्स में भी होता है कि फर्स्ट प्रिंसिपल है यह उसके ऊपर में आप बाकी सब थिरी आप डिराइवर कर सकते हैं जैसे कि यह कहेंगे कि पीरियोडिक कल टेबल यह फर्स्ट प्रिंसिपल है उसमें से आप प्रिडिक्ट कर सकते हैं कि उसका जद एटॉमिक मास इतना होगा या हाइड्रोजन की हाइड्रोजन में जद इलेक्ट्रॉन की संख्या इतनी होगी कोई भी एलिमेंट में इलेक्ट्रॉन की संख्या इतनी होगी तो इस तरह से ये एलिमेंट बिहेव करेगा तो फर्स्ट प्रिंसिपल से पूरे जगत को आप डिराइवर कर सकते हैं तो इसी तरह से यहां पे भी ब्रह्मण इक्वल शक्ति इस इक्वेशन के माध्यम से आप पूरे विश्व को डिराइवर कर सकते हैं पूरे आध्यात्मिक जगत को डिराइवर कर सकते हैं तो तो इसमें ये आत्म श्रद्धा का क्या स्थान है आत्म श्रद्धा का स्थान ये है कि बाकी जितने भी गुण है बाकी जितने भी कैरेक्टरिस्टिक और एटीट्यूड और बिहेवियरल मॉडिफिकेशन है जैसे कि ये श्याम दम उप्रति श्रद्धा फिर ये यम नियम जिसमें हम कहेंगे कि ये ईश्वर प्रधान सत्य अहिंसा वगैरे या तो फिर यह जितने भी ये मैत्री करुणा मुदिता अपेक्षा जिसको हम चित्त प्रसाद कहते हैं जितनी भी पॉजिटिव इमोशंस है उस पॉजिटिव इमोशंस को हमको अपने जीवन में कल्टटर है इस पॉजिटिव इमोशन और पॉजिटिव एटिट्यूड पॉजिटिव बिहेवियर इमोशन एटीट्यूड और बिहेवियर इसको जैसे-जैसे हम कल्ट वेट करते जाएंगे अपना ब्रेन जो है वह रिप्रोग्राम होता जाएगा इसके बाद में आता है एक्शन यदि मेरे भीतर में पॉजिटिव इमोशन है तो मेरी एक्शंस भी पॉजिटिव होगी यदि मेरे भीतर में यह मैत्री करुणा आत्म श्रद्धा वगैरे गुण है तो मैं जगत के साथ में मेरे साथियों के साथ में मेरे बांधव के साथ में मैं अच्छे से वर्तन करूंगा अच्छे से पेश आऊंगा रास्ते में जा रहे हैं स्कूटर पे और किसी के साथ में स्कूटर का टकराव हो गया तो वैसे ही स्कूटर को छोड़ कर के नीचे उतर करके उसके साथ में जो गाली गलोज करना शुरू कर दिया ऐसा दृश्य देखा होगा शायद आपने मैंने देखा है मैं जा रहा था स्कूल में देखा सामने दो लोग जा रहे हैं दोनों स्कूटर पे बाइक पे थे टकरा गया कैसे भी करके अभी ज्यादा कुछ नहीं हुआ है ऐसा थोड़ा सा यह हुआ था एक का काच टूट गया इसका यह हो गया बस दोनों ने सीधा सधी मारामारी करना चालू कर दिया मैं डर गया था मैं तो स्कूल का लड़का था तो बाद बगल में से निकल कर में चला गया तो बहुत सारे लोग इकट्ठा हो गए थे तमाशा देखने के लिए तो देखिए कि यदि भीतर में एक मैत्री करुणा एक पॉजिटिव इमोशंस होती है ये आत्म श्रद्धा होती है तब क्या होता है छोटी-मोटी चीजों को हम उसके स्थान पे लेते हैं किसी ने कुछ कर दिया तो मेरे साथ में यह हो गया होता यदि इंजरी हुई होती तो वो एक चीज है तो हमको ज लग जाता है बहुत सारे लोग होते हैं लो मैं यह नाथ का हूं मैं यह जाति का हूं मैं यह हूं तो मेरा तो घमंड इतना है कोई मुझे कुछ कह क्या जाए यदि किसी ने कुछ कह लिया तो बस मैं तलवार निकाल करके उसका सर काट दूंगा ये जो गुरुर जो होता है घमंड यह सब धीरे-धीरे करके चला जाएगा और किसी में हताशा और निराशा भी होती है किसी के भीतर में भयानक डर बैठा होता है कि कोई भी आकर के उसको लात मार कर के उसकी जो चीज चाहे छीन कर के चला जाए वह अपनी आत्मरक्षा भी नहीं कर पाता तो इस तरह के लोग भी होते हैं तो इस चीज से भी डरना है हमको किसी पर अत्याचार नहीं करना ना ही दूसरों को अपने ऊपर में अत्याचार होने करने देना है ये दोनों चीज उस पॉजिटिव इमोशंस पॉजिटिव एटीट्यूड और पॉजिटिव बिहेवियर में से ये डेवलप होता है और यह तो सब सामान्य चीजें हैं उसके बाद में कंसंट्रेशन है शरणागति है फिर नित्या नित्य वस्तु विवेक है त्याग है ब्रह्मचर्य है आज ही सुबह को मैं कथामृत पढ़ रहा था ठाकुर कहते हैं कि उर्ध्व रेता उर्ध्व रेता अर्थात कि जिनका कभी भी वीर्यपात नहीं हुआ जैसे कि सुखदेव है और कुछ-कुछ होते हैं जैसे कि धैर्य रहता एक बार वीर्यपात हो गया किंतु बाद में उन्होंने अपने को संभाल लिया है 12 साल यदि आप धैर्य रहता यदि है तो आपको ईश्वर दर्शन आत्मानुभूति अवश्य प्राप्त होगी और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है भगवान बुद्ध और अपने राजा महाराज भगवान बुद्ध का भी संतान था वो भी शादीशुदा थे किंतु एक दिन सडन एक भीतर में से एक अवेयरनेस जागृत हुआ कि अरे यह मैं क्या कर रहा हूं जन्म मृत्यु जरा व्याधि रूपी संसार में बस इस चक्की में मैं पिसता ही जाऊंगा पिसता ही जाऊंगा इसके अलावा इससे ऊपर में क्या कुछ नहीं है मनुष्य जीवन का उद्देश्य तो यह सोच कर के उन्होंने घर महल अपनी रानी अपना बच्चा राज राज्य सब कुछ त्याग करके वन में चले गए 12 साल तपस्या की देखिए उनको निर्वाण प्राप्त हुआ और साथ में ही है हमारे राजा महाराज ठाकुर के मानस पुत्र स्वयं ठाकुर के पास आते थे बिल्कुल निर्दोष थे बिल्कुल पवित्र शुद्ध आत्मा थे ठाकुर ने खुद ठाकुर के खुद के गोद में बैठ कर के जैसे बच्चा अपनी मां का स्तन पान करता है इस तरह से वह बिहेव करते थे ठाकुर की गोद में बैठ कर के माइक हच वो बांगला में लिखा है कथामृत में तो यह राजा महाराज के भीतर में भी कर्म का कुछ बाकी था कुछ आखिरी कर्म कुछ बाकी था तो ठाकुर ने कहा तुम जाओ जाकर के अपने घर में रह कर के आओ कुछ दिनों तक तो घर गए थे उनको संतान भी हुआ था किंतु आखिर में फिर उन्होंने ठाकुर की जब बीमारी प्रारंभ हुई कैंसर प्रारंभ हुआ तो ठाकुर की सेवा करने के लिए घर संपूर्ण रूप से छोड़ दिया अपनी बीवी को भी अपने बच्चे को भी और उनकी जो बीवी है बीवी थी विश्वेश्वरी उसकी भी बड़ी सुंदर कहानी है व जद जब वो राजा महाराज प्रव्रज्या के लिए छोड़ कर के राह नगर मठ छोड़ कर के कलकत्ता छोड़ कर के चले गए थे तो वह भी बिल्कुल ब्रह्मचारिणी की तरह ही व एकदम सिंपल सीधे कपड़े पहनती थी सामान्य जमीन पर सोती थी बिस्तर के ऊपर में नहीं और कठोर तपस्या करती थी एक दिन रात को उसको सपना आया कि राजा महाराज का देहांत हो गया है तो दूसरे ही दिन उसने आत्महत्या कर ली थी अभी यह स्वप्न का अर्थ क्या है मैं सोचता रहता हूं कभी-कभी तो इसका ये एक अभी अपनी क्षुद्र बुद्धि होती है ना यह सब आध्यात्मिक जगत में तो क्या-क्या होता है वैसे तो समझ में मुश्किल है क्षुद्र बुद्धि से हम लोग चला करके थोड़ा सा समझने का प्रयास करते हैं तो मुझे ऐसा लगता है कि राजा महाराज का संसार के प्रति जो आखिरी एक जो एक था नाथा उस दिन रात को टूट गया होगा संपूर्ण रूप से वोह वैरागी ब्रह्मचारी उस दिन बन गए होंगे तो उसी उनकी पत्नी को लगा कि संसार में से उनका मृत्यु हो गया है सदे ह थे आध्यात्मिक साधना का प्रवाह हमेशा के लिए बहते रहना था किंतु संसार की दृष्टि से सांसारिक दृष्टि से उनकी मृत्यु हो गई थी तो हो सकता है कि इसीलिए विश्वेश्वरी को यह स्वप्ना आया होगा और उसने भी समझ लिया होगा कि अभी पृथ्वी पर रहेगी तो उनके लिए भार्य स्वरूप ही रहेगी या तो फिर उनके जाने के बाद में उसका रहना किस मतलब का है उसका क्या तात्पर्य है तो उसने इस तरह से शायद आत्महत्या कर ली होगी तो ये देखिए कि सबसे प्रथम एक्शंस और पहले तो एक तीन स्टेजेस में हम देखेंगे इसको एक तो है पॉजिटिव इमोशन पॉजिटिव आइडियाज पॉजिटिव एटीट्यूड पॉजिटिव बिहेवियर वो तो एक हो गया मेंटल लेवल पर सेकंड है एक्शंस डे टू डे एक्शंस हमारी जिस तरह से होती है अपना भीतर में जद पॉजिटिव है तो बाहर में भी अपनी एक्शंस पॉजिटिव होगी आध्यात्मिक होगी दूसरों के प्रति मैत्री करुणा और मुदिता और उपेक्षा बने रहेंगे इसके बाद का स्टेज है साधना यह दोनों स्ट्रांग फाउंडेशन हो जाते हैं कि पॉजिटिव इमोशंस एंड पॉजिटिव एक्शंस तब कहीं जाकर के साधना सुचारू रूप से चलती है वरना मान लीजिए कि मन के भीतर में सतत एक तरह का द्वंद बना ही रहे एक तरह का युद्ध एक तरह का सब समय संघर्ष बना ही रहे कि मैं यह कर रहा हूं वह सही है कि नहीं है मैं मेरा उसके साथ में दुश्मनी है तो मुझे उसका बदला लेना ही लेना है मेरा यह एक है टारगेट कि मुझे अपनी कंपनी में इतना प्रॉफिट तो करना ही करना है या तो फिर मेरी जॉब पर मुझे प्रमोशन चाहिए ही चाहिए तो उसके लिए मुझे जो कुछ भी करना होगा एक्स्ट्रा टाइम दिन रात मेहनत करनी पड़ेगी तो वह भी करने को तैयार हूं यह सब कुछ जब तक रहेगा तब तक अपनी एक्शंस उसी डायरेक्शन में चलती रहेगी अपनी साधना कभी भी एक एक लेवल से ऊपर नहीं उठेगी किंतु भीतर में अपना एक्शन अपना बिहेवियर एटीट्यूड आइडियाज जैसे जैसे क्लियर होना शुरू हुआ वैसे ही अपनी एक्शंस भी धीरे-धीरे करके उस अपना मोड़ घुमाना शुरू करेगी बात ऐसी नहीं है कि संसार त्याग करके सबको सन्यासी हो जाना है संसार में एक तरह का मॉडरेशन एक तरह का संयम प्रवेश करवाना है हां बिजनेस भी करेंगे जॉब भी करेंगे मास्टर महाशय ने पूछा था ठाकुर को कि मैं क्या जॉब करता हूं जो नौकरी करता हूं वहां पर मुझे ज्यादा पैसा मिले इस तरह का प्रयास में कर सकता हूं कि नहीं तो ठाकुर ने कहा सत रास्ते से चल कर के जो आप करना चाहते हैं कर सकते हैं यदि ज्यादा पैसा चाहिए सत रास्ते से मिलता है तो वह भी आप कीजिए तो बात यह नहीं है कि आध्यात्मिकता आपको संपूर्ण रूप से त्याग करने को कहती है वह तो जन्म जन्मांतर की यात्रा है किंतु इतना तो अवश्य कहेगी आध्यात्मिकता कि अपने जीवन में एक तरह का मॉडरेशन एक तरह का संयम इंट्रोड्यूस कीजिए आज 1 पर मॉडरेशन कीजिए संयम कीजिए कल कहीं जाकर के 2 पर कीजिएगा इस जन्म में यदि 10 पर भी हो पाए तो कोई आपत्ति नहीं है अगले जन्म में यह बैंक बैलेंस 10 पर का बना ही रहेगा वहां से आप 11थ पर से आप स्टार्ट कीजिएगा अपना नया जन्म तो यह हो गया एक थियोरेटिकल फ्रेमवर्क कि यहां पे आत्म श्रद्धा कहां पर फिट हो रही है तो आत्म श्रद्धा इस तरह से फिट होती है कि प्रत्येक युग में कुछ कुछ गुणों के ऊपर में कुछ कुछ कुछ एटीट्यूड कुछ कुछ बिहेवियरल मॉडिफिकेशन के ऊपर में भार दिया जाता है फोकस किया जाता है उस युग की लाक्षणिक के अनुसार उस युग की आवश्यकता के अनुसार इस युग में हमको चाहिए आत्म श्रद्धा खास करके भारतीयों को विदेशियों में तो देखिए स्वामी जी ने विदेश में जाकर के नहीं कहा अराइज अवेक एंड स्टॉप नॉट टिल द गोलज रीच वो लोग ऑलरेडी अराइज और अवेक हो चुके हैं ऑलरेडी उन्होंने भारत में राज्य करने का गोल हासिल कर लिया है अभी तो उनको स्थिर होकर के बैठना है उनको राज योग कर्म योग भक्ति योग ज्ञान योग सिखाना है तो बात ऐसी नहीं है किय आत्म श्रद्धा इ समथिंग यूनिवर्सल फॉर ऑल टाइम फॉर एवरी पीपल कोई भी गुणधर्म ऐसा नहीं होता कुछ कुछ होते हैं दो होते हैं मैंने कुछ कुछ क्या दो है पक्के हैं एक है सत्य दूसरा है ब्रह्मचर्य कोई भी युग में हो कोई भी अवस्था में हो कोई भी स्टेशन पर हो कोई भी परिस्थिति में हो सत्य और ब्रह्म इन दोनों को तो पकड़ के ही रहना है आध्यात्मिक जीवन इन दोनों के बिना आगे बढ़ने वाला ही नहीं है भले ही चाहे आप यह कहे कि 100% नहीं पालन होगा यथाशक्ति तो हमको करना ही है तो यह दोनों सनातन गुणधर्म है सनातन यह कैरेक्टरिस्टिक है आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए किंतु बाकी जितने भी गुण है उस सबको आपको आवश्यकता के अनुसार उसको अप्लाई करना है यह अशोकानंद जी महाराज अशोकानंद जी महाराज पहले तो प्रबुद्ध भारत के एडिटर थे और महात्मा गांधी के विरुद्ध में उनका काफी क्रोध था उनका काफी एक नाराजगी थी क्यों क्योंकि भारत में यह अर्जुन की भूमि है यह महावीर भीम ये भगवान कृष्ण की भूमि है यहां पर अहिंसा के माध्यम से अहिंसा के द्वारा बिल्कुल ही हत विर्य होकर के रोते रोते ब्रिटिश सरकार के सामने हाथ जोड़कर कहना कि हमको आजादी दे दो आजादी दे दो यह सब क्या है दूसरा कि यह स्वदेशी वगैरह अभी यदि आप में पूरा आत्मविश्वास है जैसे कि स्वामी जी ने कहा तो पहले तो क्षात्र वीर्य भी होना चाहिए ब्रह्म तेज भी होना चाहिए क्षात्र वीर्य से हम अपनी आजादी ब्रिटिश लोगों से छीन कर के ले लेंगे और ब्रह्म तेज से हम अपना खुद का साइंस टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज इतना डेवलप करेंगे कि जिस तरह से ब्रिटिश भारत में एक्सपोर्ट करते हैं हम लोग फिर से ब्रिटेन में यूरोप में अमेरिका में एक्सपोर्ट करना शुरू कर देंगे पूरे वर्ल्ड में तो ये ब्रह्म तेज और क्षात्र वीर्य यह तो स्वामी जी का मैसेज है यह तो दो हाथ जोड़ कर के आजादी की भिक्षा मांगना दूसरे की यह स्वदेशी स्वदेशी करके अपने इंडस्ट्री और यह टेक्नोलॉजी और साइंस के ऊपर में ताला लगा देना यह सब क्या है तो अशोकानंद जी के इस तरह के एटीट्यूड की वजह से हेड क्वार्टर को बेलूरमठ को थोड़ा सा डर लग गया वैसे ही तो गांधी जी इतने पॉपुलर है पूरे इंडिया में और और पहले पहले ही कुछ कुछ लोगों का रामकृष्ण मिशन के प्रति एक वक्र दृष्टि था एक एक तरह से नाराजगी थी कि पूरा भारत जद आज आजाद की यह फ्रीडम मूवमेंट में लगा हुआ है तो स्वामी जी के द्वारा स्थापित बेलूरमठ इसकी आगे वानी क्यों नहीं लेता इसमें कंट्रीब्यूशन क्यों नहीं करता वैसे ही तो एक नाराजगी थी ऊपर से जो फ्रीडम मूवमेंट एक चल रहा है उसमें भी इन लोगों का फिर अपोजिशन है एक तरह से गांधी जी के साथ में अपोजिशन है दूसरी और जो रेवोल्यूशन मूवमेंट है उसके सामने भी कि आप किसी का मर्डर करके तो आप आजादी हासिल नहीं कर सकते बॉम फेंक करके टेररिज्म कर करके इस तरह से तो फ्रीडम हमको जद मिलेगा तो वह हमारे डीएनए में ही ये टेररिज्म घुस जाएगा जैसे कि आज कुछ-कुछ हमारे पड़े सु देशों के साथ में है तो इस तरह से भी तो हमको आजादी नहीं चाहिए तो ना ही फ्रीडम मूवमेंट में पार्टिसिपेट करते हैं ना ही वो जो फ्रीडम मूवमेंट में पार्टिसिपेट करते हैं उसके क्रिटिसिजम करना चालू कर देते हैं तो हेड क्वार्टर ने फिर अशोकानंद जी को अमेरिका में भेज दिया कैलिफोर्निया में जाओ वहां पर जाकर के स्वामी जी का प्रचार करना ये क्षात्र वीर्य ब्रह्म पेज अमेरिकन लोगों को सुनाओ अभी भारत में अभी इसकी जरूरत नहीं है ये देखिए कि जिस अभी स्वामी जी को समझना अपने नेशनल परिप्रेक्ष्य में यहां पर मेरा भी एक ओपिनियन यह है कि गांधी जी का जो फ्रीडम मूवमेंट था उसके साथ में मैं बहुत हद तक एक्री करता हूं बहुत हद तक मेरा एक उसके साथ में मैं मेरा एक यह है पॉजिटिव उसके बारे में सोचना कि उन्होंने जिस तरह से यह कहा कि देखिए एक तो आर्म्ड रेजिस्टेंस है आर्म्ड स्ट्रगल जो है सशस्त्र मूमेंट जैसे कि अमेरिका ने युद्ध करके ब्रिटन से आजादी प्राप्त की या तो फिर जैसे कि चाइना ने युद्ध करके सिविल वॉर था चाइना में सिविल वॉर की जरूरत थी वहां कुछ कुछ लोगों का राज्य उने जो जमींदार लोग होते हैं जो ट्रेडिशनल जिन लोगों के पास में जो पावर होता है उन लोगों का इतना प्राधान्य बढ़ गया था कि वो जो निम्न कक्षा के जो लोग हैं उन लोगों को कैसे भी करके वे लोग थोड़ा सा भी एक इकोनॉमिक सहूलियत देने से वे लोग इंकार कर रहे थे तो वो आर्म्ड रेजिस्टेंस सिविल वॉर वहां पे चाहिए था भारत में सबसे बड़ा प्रॉब्लम यह था कि हमारे जितने भी ये प्रांत है जितने भी राजा रजवाड़ा है वो सब इतने बटे हुए थे कि ब्रिटिश लोगों को हमारे पर राज करने के लिए बहुत ज्यादा कुछ अकल नहीं चलानी है आज आपने एक ब्रिटिश ऑफिसर का मर्डर कर दिया या तो एक ब्रिटिश आर्मी के साथ में युद्ध में आपने विजय प्राप्त कर लिया इससे तो हमारा जो डिवीजन है वह तो जाने वाला नहीं है कल और कोई आकर के यह भाइयों भाइयों को लड़ाएगा दोनों में ऑलरेडी एक वैमनस्य बना हुआ है दोनों में ऑलरेडी एक वैर दुश्मना वट बनी हुई है तो वो दुश्मना आवट को जब तक आप ठीक नहीं नहीं करेंगे तब तक ये यूनिटी भारत में नहीं आएगी और जब तक यूनिटी नहीं आएगी तब तक भारत को आजादी हसल नहीं होगी फ्रीडम प्राप्त नहीं होगा यह जो महात्मा गांधी का यह जो एकदम एक कोर आइडिया था वह भी स्वामी जी के साथ में बड़ा ही मैच होता था स्वामी जी ने खुद ने कहा कि यदि भारत को उत्थान होना है भारत का यदि उद्धार होना है तो यह जो अपने पतित क्लास है पतित वो जो दल है पूरा पद दलित जो लोग है उन का सबसे पहले उत्थान करना होगा पूरे भारत को यूनाइट करना होगा धर्म संस्कृति और आध्यात्मिकता के एक प्लेटफार्म पे तब कहीं जाकर के एक आवाज से यदि हम जयघोष करेंगे तो ब्रिटिश लोग दूसरे ही दिन भाग के खड़े हो जाएंगे जैसे कि ये बाल गंगाधर तिलक ने कहा था इतने सारे 30 करोड़ भारतीय है उसमें 1 लाख जितने ये ब्रिटिश लोग हैं हम लोग सब एक साथ में मिलकर के थूक भी तो इतना बड़ा सैलाब आएगा कि ये लोग सब बह के चले जाएंगे भारत से तो किंतु एक साथ में थूकने का भी तो कैपेसिटी होना चाहिए ये जो यूनिटी है यूनिटी इन एक्शन थॉट एंड बिहेवियर दैट इज फर्स्ट ऑफ ऑल रिक्वायर्ड तो अपनी जो फ्रीडम मूवमेंट थी उसका वो एक था उद्देश्य तो अभी देखिए कि ये इवन अहिंसा के माध्यम से हमने यह फ्रीडम मूवमेंट किया हो या तो फिर स्वामी जी का जो बेसिक आईडिया था ब्रह्म पेज और क्षात्र वीर्य का उसके ऊपर में हमने यह युद्ध किया होता अपनी मुक्ति के लिए फ्रीडम के लिए दोनों के भीतर में आपको प्रचंड आत्मविश्वास चाहिए ही था गांधी जी की लाइफ को स्टडी करेंगे वोह नाताल में वह साउथ अफ्रीका में जहां पे भारत में तो तो रिप्रेशन था ब्रिटिश साम्राज्य का जितना था उससे हजार गुना ज्यादा रिप्रेशन यह साउथ अफ्रीका में ब्रिटिश गवर्नमेंट का था वहां पे ब्रिटिश लोगों के सामने लड़ कर के उन्होंने यह मजदूर लोग जो थे उन लोगों को हक अपने राइट्स दिलवाए थे भारत में आई ये चंपारण चंपारण बोलकर के जो हिमालय के पास में व है बिहार का एक प्रदेश वहां पे वह जो ब्रिटिश मिल के मालिक वगैरह जो थे फैक्ट्री के उन लोगों का इतना अत्याचार था कि किसी का साहस नहीं था वहां पर जाकर के कुछ भी करने का गांधी जी जब वहां पर गए तो वह पुलिस कमिश्नर जो होता है वो जो यह होता है सब लोकल मैजिस्ट्रेट सबने उनको धमकी दी कि यहां से भाग जाओ वरना पिटाई करके जेल में डाल देंगे तो नहीं ऐसे तो मैं नहीं जाऊंगा यदि आपको जेल में डालना हो तो डालिए पिटाई करना हो तो कीजिए जो भी करना हो कर लीजिए मुझे इनके राइट के लिए इनके हक के लिए लड़ना ही लड़ना है तो जैसे ही उन्होंने यह गांव में जाने का प्रारंभ किया गांव-गांव जाकर के लोगों की पिटीशन लोगों की अवस्थिति अपनी नजरों से देखने का वैसे ही पूरी ब्रिटिश सिस्टम में डर फैल गया कि एक दुबला पतला एक एक मूर्ख आदमी है एक इंडियन है जो कि गांव गांव जाकर के लोगों के साथ में बात करता है लोगों की अवस्था का व यह करता है अवलोकन करता है इसी घटना से पूरे वाइस रोय तक यह बात चली गई वहां से यह हुकम आया उन लोकल पुलिस कमिश्नर को लोकल ये जो उनके जो फैक्ट्री ओनर थे कि हां वो एमके गांधी को जो करना चाहते हैं करने दो उनके कार्य में बाधा मत दो तो एक आदमी साहस पूर्वक जद बड़ा हो जाता है तो पूरा ब्रिटिश गवर्नमेंट पूरा वर्ल्ड वाइड गवर्नमेंट कहा जाता था कि ब्रिटिश गवर्नमेंट के ऊपर में कभी भी ब्रिटिश एंपायर के ऊपर में कभी भी सनसेट नहीं होता सूर्यास्त नहीं होता क्यों जिस समय ब्रिटेन में सूर्यास्त होता है तो हांगकांग या इंडिया में सूरज उपता रहता है जब भारत में सूर्य सूर्यास्त होगा तब कहीं ब्रिटेन में जाकर के सूर्योदय होगा तो पूरी पृथ्वी पर कहीं ना कहीं प तो ब्रिटिश एंपायर के ऊपर में सूर्य का प्रकाश पड़ता ही रहेगा तो सन नेवर सेट्स ऑन ब्रिटिश एंपायर इस तरह के ब्रिटिश एंपायर मने सैकड़ों गन बोट है हजारों उनका सोल्जर्स है पूरी पावरफुल आर्मी है दुनिया का एक भी कंट्री ऐसा नहीं कि उनके सामने खड़ा होकर के युद्ध करने की घोषणा का साहस कर सके उस पूरे ब्रिटिश एंपायर को एक लॉयर ने एक सामान्य भारतीय ने अपनी श्रद्धा के अपनी श्रद्धा के आधार हर पर उनको पूरी उनको पूरी हार हार का सामना करवा दिया गिव देम ए टेस्ट ऑफ डिफीट तो यह है आत्म वीर्य आत्म श्रद्धा का प्रभाव तो यह जो है एक समय था कि जब कि यह मैत्री करुणा वगैरह गुणों के ऊपर में बहुत ज्यादा चिंतन किया गया था आज का समय है खास करके हम भारतीयों के लिए कि आत्म श्रद्धा रूपी गुण के ऊपर में ज्यादा से ज्यादा चिंतन करें इसको अपने जीवन में जितना हो सके उतना हम अप्लाई करें तब तो कहीं जाकर के बाकी की जो आध्यात्मिक साधना है द्वैत अद्वैत विशिष्ट द्वैत जो भी कहो उसमें हम सक्सेस होंगे अदर वाइज यह फंडामेंटल गुण ही यह फंडामेंटल बिहेवियर ही हम नहीं डेवलप करेंगे तो इससे आगे जाना हमारे लिए मुश्किल है तो आज यही तक कफ उदेश दक्षा तेली हरि ओ दसत श राम कृष्णा यह जो विदेशी थिंकर जो होता है ना वे लोग कहते हैं भारत तो फिर भी थर्ड वर्ल्ड कंट्री है अब यह फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री अमेरिका के बारे में ही देख लीजिए कि युद्ध करके ब्रिटिश से फ्रीडम तो प्राप्त किया किंतु नॉर्थ नॉर्थ था इंडस्ट्रियल और साउथ था अग्रेन और वहां पर स्लेव को रखने की भी प्रथा थी तो नॉर्थ वालों ने क्या सोचा कि यदि हमको यह प्राइमस चाहिए इंडस्ट्रियल इकोनॉमिकल तो यह स्लेव प्रथा बंद करवानी होगी साउथ अमेरिका की साउथ अमेरिका यानी कि ये अमेरिका के ही जो सधन स्टेट है उसकी तो जब तक यह स्लेव प्रथा नहीं जाएगी तब तक लोग हम लोगों का इंडस्ट्री डेवलप नहीं होगा क्योंकि मशीन से बड़े सस्ते में ये स्लेव काम करते हैं तो उन्होंने क्या किया यह अमेरिका में सिविल वॉर हुई कहा तो ता है कि स्लेव को फ्रीडम देने के लिए किंतु उसके पीछे का सीक्रेट यह है कि नॉर्दर्न इंडस्ट्री डेवलप हो इसके लिए नॉर्थ और साउथ में सिविल वॉर हुआ हजारों लोग मर गए अब्राहम लिंकन जैसे एक ग्रेट नेता प्रकट हुए फिर कहीं जाकर के अमेरिका को फिर से यूनाइट किया उन्होंने तो अभी आप युद्ध करके फ्रीडम तो प्राप्त कर लिया किंतु आपको यूनिटी के लिए तो सिविल वॉर करना पड़ा था भारत में अभी चाइना को देखिए को देखिए जर्मनी को देखिए इटली को देखिए जापान है इजराइल है प्रत्येक देश को देखिए युद्ध और सिविल वॉर वॉर एंड सिविल वॉर इसके भीतर में जाकर के लाखों लोगों का विनाश हुआ है तब कहीं जाकर के नेशनल यूनिटी प्राप्त हुई है और वे लोग डेमोक्रेसी के सामने देखते ही नहीं है रशिया है चाइना है वे लोग कहेंगे डेमोक्रेसी लाएंगे तो दूसरे ही दिन बिखर जाएगा फिर से हम लोगों ने बिना सिविल वॉर के फ्रीडम प्राप्त किया यूनिटी प्राप्त की और डेमोक्रेसी में रह रहे हैं जितने भी पागल है सब लोग अपने-अपने ओपिनियन देते रहते हैं फिर भी इंडिया की डेमोक्रेसी टूटी बनी रही है यह विदेशी पंडित जितने भी है डेली प्रिडिक्ट करते हैं कि इंडिया की डेमोक्रेसी खतरे में है इंडिया कल टूट जाएगा इंडिया परसों टूट जाएगा यहां पे नॉर्थ सेपरेट हो जाएगा साउथ सेपरेट हो जाएगा ईस्ट सेपरेट हो जाएगा अभी तक कुछ हुआ नहीं है और जब तक ठाकुर महा स्वामी जी का आशीर्वाद बना रहेगा तब तक कुछ होने वाला नहीं हिस्टोरियन आर्नोल्ड टोयन बी एक ब्रिटिश ऑथर है हिस्ट्री के ऊपर ने उसने एक सेमिनल वर्क है उसका स्टडी ऑफ हिस्ट्री पूरा इतना बड़ा है म 10 12 वॉल्यूम हो गए एक एक वॉल्यूम इतना इतना मोटा है तो पूरा हिस्ट्री सिविलाइजेशन का स्टडी करके फ्रॉम द बिगिनिंग ऑफ टाइम टू द प्रेजेंट डे उसने कुछ कुछ कंक्लूजन निकाले हैं अभी आप उसके साथ साथ में हिस्टोरिकल वर्क के साथ में एग्री हो ना हो उसका एक जो कंक्लूजन है व्हिच इज वेरी इंटरेस्टिंग वोह कहता है कि यह जो जगत है ना सिविलाइजेशन जो है उसको चलाने वाले कुछ ही चंद मुट्ठी भर लोग ही होते हैं जिनको कि वह कहता है क्रिएटिव माइनॉरिटी जो क्रिएटिव माइनॉरिटी जो सोचती है आज जो करती है जो इनोवेशन है डेवलपमेंट है सोशल वर्ल्ड में ना कि ये साइंटिफिक नेचुरल वर्ल्ड में स्पिरिचुअल वर्ल्ड में ये कुछ मुट्ठी भर लोग ही है जो कि वो ब्रेक थ्रू वो लाते हैं और फिर पूरा जगत जो है ना उसको भेड़ उ वो जो एक भेड़ जो होता है ना वो जो उसका वो जो गोपाल होता है गोपाल वो भेड़िए को चराने के लिए ले जाता है खेत में तो सब पूरा जगत उनको फॉलो करता है चुपचाप वो लगता है कि ये लोग है जिनको हमको फॉलो करना चाहिए तो एक क्रिएटिव माइनॉरिटी जो है वो सब चलाती है जिस देश में जिस सिविलाइजेशन में क्रिएटिव माइनॉरिटी सेल्फलेस होती है उस देश या उस सिविलाइजेशन का बड़ा डेवलपमेंट होता है जैसे कि यह आप रेनेसा यूरोप को देखिए एक के बाद एक साइंटिफिक डेवलपमेंट होता गया और यह साइंटिफिक डेवलपमेंट ने इंडस्ट्री को इतना डेवलप किया कि आज देखिए कि प्री इंडस्ट्रियल प्री रेनेसा वर्ल्ड और पोस्ट इंडस्ट्रियल पोस्ट रेनेसा वर्ल्ड आसमान जमीन का फर्क है अब जैसे कि भारत में यह एक के बाद एक धार्मिक महापुरुष होते गए कितने सेल्फलेस थे आध्यात्मिकता से भूमि का सिंचन किया जबकि अफ्रीका वगैरह कुछ-कुछ कंट्री ऐसे हैं कि जहां पर यह जो क्रिएटिव माइनॉरिटी प्रचंड सेल्फिश थी लोगों का शोषण करके कैसे भी करके अपनी सत्ता को बनाए रख अभी भारत में भी आज अपने पड़ोस में देखिए ऐसे सब सेल्फिश रूलरसोंग्स होती है तो वो डेवलप होता है सोसाइटी और उस क्रिएटिव माइनॉरिटी सेल्फिश होती है तो वो सोसाइटी का सत्यानाश हो जाता है भारत में देखिए कि भारत की क्रिएटिव माइनॉरिटी है ना हमेशा आध्यात्मिकता से बहुत ज्यादा प्रेरित होती रही है गांधी जी हालांकि थे पॉलिटिकल लीडर बट ही वाज डिपलीट ठाकूर और स्वामी जी का तो प्रश्न ही नहीं है हमारे जितने भी महापुरुष को देखिए इतिहास में देखिए स्वामी जी का एक बड़ा ही सुंदर स्टेटमेंट है यूरोप में कोई अ धर्म गुरु भी होगा जैसे कार्डिनल होगा तो वह बड़ा उसको होगा यह कहने में कि मेरे जो पूर्वज थे ना वो रोवर बेरंस थे अर्थात कि वो लूटेरे थे क्योंकि लुटेरों को वहां पर बड़ा ही यह उनका एक उनका यह माना जाता है क्या कहेंगे उस बड़ी प्रतिष्ठा है समाज में और भारत में देखिए कि राजा भी होगा तो राजा कहेगा कि हमारे पूर्वज जो थे ऋषि मुनि थे ऋषि मुनियों के हम संतान है क्योंकि भारत में प्रतिष्ठा है ऋषि मुनियों की तो भारतीय क्रिएटिव माइनॉरिटी विल ऑलवेज गो टुवर्ड स्पिरिचुअलिटी तो भारतीय समाज आज 150 करोड़ की ना की जितनी भी अपनी पॉपुलेशन है उसमें से हजार लोग भी ये क्रिएटिव माइनॉरिटी में आते हैं वो लोग जद स्पिरिचुअल होते हैं तो भारत के बाकी के 150 करोड़ लोग जितने ही भोगवा में डूब जाए उनके कुछ भी करने से भारत देश की डेस्टिनी पर कोई असर नहीं होने वाला है जो ये हजार लोग क्रिएटिव माइनॉरिटी जो करे उसी से असर होने वाली है और यह क्रिएटिव माइनॉरिटी का हिप्नोटाइज करने के लिए ऑलरेडी ठाकुर और स्वामी जी का आगमन हो चुका है तो ये मेरा खुद का एक उदाहरण के रूप में बताता हूं मैं बड़ा ही सेकुलर था रिलीजन में आध्यात्मिकता में मुझे थोड़ा सा भी इंटरेस्ट नहीं था किंतु यह जो एक जर्नी होती है ना इंटेलेक्चुअल जर्नी वो जर्नी पूरी करके आखिर में मुझे पता चला स्पिरिचुअलिटी इज द ओनली वे ऑफ लाइफ तो मैं खुद के एग्जांपल से कहता हूं जो लोग रियल थिंकिंग है जिनका रियल क्रिएटिव माइनॉरिटी है उनको भारत में यदि रहते हैं तो ठाकुर महा स्वामी जी के पास में आध्यात्मिकता में आना ही होगा यह तो भारत की बात हो गई दूसरा देखिए चाइना के बारे में चाइना में जो बुद्धिज्म है टेओ इजम जो है वो इतना गहराई से वो वहां की प्रजा में डूबा हुआ है कि यह जो कम्युनिस्ट गवर्नमेंट आकर के ऊपर ऊपर से जितना ही सेकुलरिज्म करती रहे भीतर में से वह टेव इज्म कन्फ्यूशंस म या तो फिर यह बुद्धिज्म यह तो बने ही रहेंगे वहां के लोग इतने भीतर से इतने स्पिरिचुअल है कि उसका अंदाज हम आज हमको नहीं होता है किंतु थोड़ा सा चाइना के बारे में पॉलिटिकल और इकोनॉमिकल पढ़ना बंद करके थोड़ा सा वहां पे वो जो सोशल ट्रीटीज जो होती है वहां की वो पढ़ेंगे ना तो पता चलेगा कि बुद्धिज्म स्टिल गवर्न्स हाफ ऑफ द चाइनीज मेजॉरिटी ऑफ द चाइनीज तो स्पिरिचुअलिटी एशिया में है ही है और उसी के बलबूते पे वे लोग आज इतने डेवलप हुए हैं और तो ये तो एक बात हो गई कि दूसरा कि यह जो जोर जबरदस्ती चाइना ने जो इकोनॉमिक डेवलपमेंट किया है मैं भी उसका एक प्रशंसा करता था एक समय किंतु जो रिसेंट ट्रेंड है चाइना की इकोनॉमी इज सफरिंग वेरी बेडली चाइना के जितने भी स्टेटिस्टिक्स है ऑल ऑफ देम आर सस्पेक्ट ऑल ऑफ देम आर रिजेक्टेड बाय एवरीवन एल्स कि कहते हैं कि 5 पर जीडीपी डेवलपमेंट हो रहा है ना कि इतना इंडस्ट्रियल आउटपुट है ना कि इतना हमारा एक्सपोर्ट फिगर है वो जितने भी फिगर वो देते हैं ना वो 70 पर ही सही होंगे 60 टू 70 पर बाकी सब झूठ मोठ का चल रहा है तो इकोनॉमिकली दे आर सफरिंग वेरी मच और खास करके अभी जो फ्यूचर जो है नियर फ्यूचर उसमें इसका टर्न अराउंड नहीं दिख रहा है ऑलरेडी इंडिया का एमएससीआई जो इंडेक्स कहा जाता है कि डेवलपमेंट इंडेक्स कि किस इकोनॉमी का कितना कंट्रीब्यूशन है इंडिया इज ऑलरेडी अहेड चाइना ऑलरेडी वी आर लार्जेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी हमारा जो इकोनॉमी ग्रोथ 6 पर % से ऑलरेडी हो चुका है ऑलरेडी हमारी पॉपुलेशन इज ग्रेटर देन चाइनीज तो आज जितना भी फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आता है वोह सब अभी भारत की ओर सबसे ज्यादा है ब्लूमबर्ग जो है ना ये ब्लूमबर्ग एक इकोनॉमिक वो वेबसाइट है उसका स्टडी करने से यह सब पता चलता है लो कटिंग एज यह सब रिसर्च वगैरह देते रहते हैं देखिए कि हम लोग डेमोक्रेसी होने के बावजूद पिछले जो 203 सालों में जो डेवलपमेंट किया है करोड़ों लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया है और वह भी सब लेजिटीमेट झूठ मूठ के स्टेटिस्टिक्स देकर के नहीं लिटरेसी परसेंटेज है लाइफ एक्सपेक्टेंसी है यह जो चाइल्ड मोर्टालिटी है वगैरह जो स्टेटिस्टिक्स बेसिक स्टेटिस्टिक्स आप देखेंगे प्रचंड इंप्रूवमेंट हुआ है पिछले 30 40 साल में और वो भी डेमोक्रेसी करके हमने किया है सो स समथिंग रिमाल अचीवमेंट ना वी हैव टाइम बात करने के लिए हमेशा समय है सत्संग करने के लिए हमेशा समय है देखिए इकोनॉमी को जद जैसे आपने कहा टू फायर ऑल द सिलेंडर्स टू रन इट ऑन ऑल द सिलेंडर्स फायरिंग सबसे इंपॉर्टेंट जो चीज है ना वो है कैपिटल इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री में प्रचंड इन्वेस्टमेंट आपको करना होगा तब कहीं जाकर के आपका एक इंडस्ट्रियल बेस तैयार होगा तब कहीं जाकर के एंप्लॉयमेंट जनरेशन होगा अभी भारत में देखिए कि अपना ब्रेन पावर तो जबरदस्त है तो सर्विस इंडस्ट्री तो बहुत ही जोरदार काम कर रही है यह अपना सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट ये जो सर्विस इंडस्ट्री है 300 ना कि 200 बिलियन डॉलर्स एक्सपोर्ट है अपने व्हिच इज जबरदस्त किंतु कोई भी देश उसको जद एंप्लॉयमेंट जनरेशन करना है तो आपको मैन्युफैक्चरिंग जॉब आपको डेवलप करनी होगी चाइना का सबसे बड़ा आज यह जो डेवलपमेंट हुआ है मासस लेवल पर जो गया है उसका रीजन यही है कि उन्होंने यह मैन्युफैक्चरिंग जॉब उन्होंने बहुत उन्होंने यह डेवलप कर दी है इसकी वजह से यह उनका इंडस्ट्रियल बेस और उनको एंप्लॉयमेंट जनरेशन दोनों हुआ है अभी आपको कैपिटल इन्वेस्टमेंट करने के लिए पहले तो है कि आपको एंप्लॉयमेंट जनरेशन करना होगा एंप्लॉयमेंट जनरेशन के लिए आपको सर्विस इंडस्ट्री सफिशिएंट नहीं है सर्विस इंडस्ट्री आपको 5 पर 10 पर जो कि एलिजिबल जो जॉब सीकर है उनको एंप्लॉयमेंट दे सकती है 7080 पर लोगों को मैन्युफैक्चरिंग ही जॉब दे सकता है इवन एग्रीकल्चर में भी आप देखिए कि जिस तरह से लैंड डिवीजन हो रहा है व्हिच इज वेरी बैड फॉर एग्रीकल्चरल आउटपुट एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी आज आपको 50 एकड़ 100 एकड़ का खेत होगा तो कहीं स्केल ऑफ इकोनॉमी आपको प्रॉफिट मार्जिन बनाएगी वरना तो गवर्नमेंट को दुनिया भर का सब्सिडी देना पड़ेगा आपकी इकोनॉमी कभी खड़ी ही नहीं होगी इस तरह से हमारा एग्रीकल्चर सेक्टर सब इतना भयानक रूप से जो चल रहा है किंतु प्रॉब्लम यह है कि आप यदि खेतों को इकट्ठा करेंगे यदि आप खेतों को इकट्ठा करेंगे और मैकेनाइजेशन करेंगे तो यह खेत मजदूर कहां जाएंगे राइट तो अभी यह आज का प्रॉब्लम सबसे बड़ा यही है खेत में से ऑलमोस्ट टू थर्ड लोगों को आपको निकाल लेना है एग्रीकल्चर में से और जितने भी अन एंप्लॉई है सबको इकट्ठा करके आपको एटलीस्ट 10 से 20 करोड़ मैन्युफैक्चरिंग जॉब चाहिए और इसके लिए एक ही उपाय है कि इंडस्ट्री में प्रचंड कैपिटल इन्वेस्टमेंट हो इंडस्ट्री में और इंफ्रास्ट्रक्चर में तभी कहीं जाकर के 15-20 करोड़ मैन्यूफैक्चरिंग जॉब बन सकती है और तब कहीं जाकर के यह डेमोग्राफिक डिविडेंड हमको मिलेगा वरना यह जो रेडिकल जो आइडियोस है यह जो ऑर्थोडॉक्स आइडियो जीी है उसमें सब अपने लड़के चले जाएंगे अपना भी जीवन खत्म करेंगे देश को भी बर्बाद कर देंगे अभी इ अभी यह तो हो गया कि दिस इज सोल्यूशन तो अभी इस सोल्यूशन को लाने के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट करने के लिए क्या उपाय है तो वो उपाय है शेयर मार्केट कैपिटल इन्वेस्टमेंट कौन कर सकता है कैपिटल इन्वेस्टमेंट एक तो गवर्नमेंट कर सकती है किंतु गवर्नमेंट का हमेशा एक लॉजिक रहता है कि कैसे भी करके आपको इलेक्शन जीतना है तो इलेक्शन जीतने के लिए आपको रेवड़ी देनी ही पड़ेगी अदर वाइज आप कैपिटल इन्वेस्टमेंट ज्यादा करेंगे तो इंडस्ट्रियल लोगों को फायदा आपको जॉब जनरेट होता है किंतु लोग इतना देखते नहीं है उनको रेवड़ी हाथ में आ गई तो उनको बस मजा आ गया तो गवर्नमेंट इतना कैपिटल इन्वेस्टमेंट नहीं कर सकती अभी प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में दो रास्ते हैं एक तो है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट जो आता है दूसरा है कि डोमेस्टिक जो इन्वेस्टर होते हैं स्मॉल स्केल मिडल स्केल इन्वेस्टर इंडिया में प्रॉब्लम यह है कि चाइना जब जो डेवलप हो रहा था 2000 वकेड में 2010 2000 से लेकर के 2010 2015 तक जो चाइना का जोरदार डेवलपमेंट चला उसमें फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट इट वाज 4 पर ऑफ जीडीपी चाइनीज जीडीपी जो था उसका 4 पर फॉरेन इन्वेस्टमेंट था भारत में अनफॉर्चूनेटली फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट वैसे तो बहुत आ रहा है किंतु व एक पर से ज्यादा वो डेवलप ज्यादा नहीं हो रहा है अर्थात कि भारत की जीडीपी का 1 पर से ज्यादा वो फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट नहीं आ रहा है किंतु पॉजिटिव बात यह है कि डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट जोरदार है आज कोई भी आप इकोनॉमिस्ट को पढ़ेंगे सुनेंगे वो कहेगा कि हमारा शेयर मार्केट वैल्यूएशन है ना बहुत ज्यादा है भारत के जितने भी शेयर है वो बहुत ही महंगे है इसीलिए बाहर वाले लोग लेने में यह होता है दिक्कत होता है जितने भी नए-नए शेर आते हैं नई नई कंपनी का ये होता है आईपीओ वगैरह ये इंडियन इन्वेस्टर ही सबसे पहले उसको खींच लेते हैं तो इंडिया में डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा है कंपेयर टू बाकी सब कंट्री इसको और ज्यादा बढ़ा सकते हैं जद ये गवर्नमेंट रेगुलेशंस वगैरह जो हो ना वो थोड़ा सा स्ट्रांग हो यह जो 93 में वो जो शेयर मार्केट में कैसा एक स्कैंडल हुआ था वो हर्षद मेहता वगैरह लोगों ने किया था कितने ही लोगों का इन्वेस्टमेंट डुबा दिया था तो उसके बाद में यह सेबी वगैरह जो जो ये जो कहते है ना कि ये वच डॉक ये व गवर्निंग बॉडी सब तो इन लोगों का रोल थोड़ा सा बड़ा है किंतु यह रेगुलेशन बहुत ही स्ट्रांग होने चाहिए कि आपने इन्वेस्ट किया तो आपका पैसा डूबेगा नहीं इस तरह का कोई गारंटी आपको मिलेगा तो इ डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट और भी ज्यादा बढ़ जाएगा अभी मुझे अपना मैं मैं जॉब खोज रहा हूं जॉब नहीं मिल रहा है तो छोड़ो जॉब को मैं अपना खुद का एक बिजनेस स्मॉल स्केल मिडल स्केल चालू करना चाता हूं मुझे इन्वेस्टमेंट चाहिए मुझे कैपिटल चाहिए अभी कैपिटल इन्वेस्टमेंट का जद इजी सोर्स मेरे पास में है तो मैं फटाफट करके यह चालू कर दूंगा फिर सिर्फ मैं अपने लिए नहीं 10 लोगों के लिए एंप्लॉयमेंट जनरेशन करूंगा सो यह इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट जो है भारत में इसको बहुत ज्यादा अच्छा और करने की जरूरत है दिस इज द सोल्यूशन टू गेन दिस डेमोग्राफिक डिविडेंड यू नो द बेस्ट मॉडल क्या है इकोनॉमिक डेवलपमेंट का कैलिफोर्निया कैलिफोर्निया में देखिए कि तीन-चार फैक्टर इकट्ठा हुए थे एक तो कि पावरफुल एकेडमिक इंस्टिट्यूशन यह कार्ल टेक यह प्रिंसटन वगैरह इतने वर्ल्ड क्लास सब एकेडमिक इंस्टिट्यूशन थे जहां पे कि कटिंग एज रिसर्च हो रहा है डेवलपमेंट हो रहा है वह एक फैक्टर था दूसरा था कि यह मिलिटरी इंडस्ट्रियल एक हंगर है कि हमको कंटीन्यूअस कुछ ना कुछ नया वेपन सिस्टम नया सेटेलाइट नया यह नया वो चाहिए तो यह उनका मने एक एक था कि इनोवेशन सेंटर से दूसरा है कि इंडस्ट्रियल इनपुट एक चाहिए उनको तीसरा था कि वेंचर कैपिट इज्म वहां पे इजी कैपिटल आपको मिल जाता है तो इसका जो कुछ-कुछ शाइनिंग एग्जांपल है ना तो माइक्रोसॉफ्ट है google2 मार्टिन है फिर यह जो बोइंग है ना कि ये सब अ कटिंग एज रिसर्च के रिसर्च और डेवलपमेंट के लेवल पे भी और यह स्केल के लेवल पे भी इंडिया में ना यह सब कुछ को इकट्ठा होना है इंडिया में अभी भी आर एनडी करने के लिए अपनी यूनिवर्सिटीज में वो नहीं है अब जितने भी अ पीएचडी करेंगे तो कॉपी पेस्ट करके जूठ मुठ का वह सब पीएचडी कर देंगे आज वह लड़का वह ग्रेजुएट है उसको अपना नाम भी ठीक तरह से लिखने का नहीं आता वो चोरी करके ऐसा करके वह सब ग्रेजुएट हो जाते हैं आधे लोग तो एक तो एक एकेडमिक इंस्टिट्यूट को बड़ा स्ट्रांग होना चाहिए कि वर्ल्ड क्लास रिसर्चर है वर्ल्ड क्लास थिंकर्स है ऑर्गेनाइजर है मैनेजमेंट सब ग्रेजुएट्स से उनको प्रोड्यूस करो दूसरा कि वेंचर कैपिटल पूरा एक क्लाइमेट खड़ा करो तीसरा कि अपना इंड अभी मिलिट्री को इतना डेवलप नहीं भी करेंगे तो अभी एटलीस्ट एक इंडस्ट्रियल बेस इतना स्ट्रांग हो कि जो प्रोडक्ट खड़ी होगी वो सबको फटाफट करके वो लोग खींच ले तब कहीं जाकर के ये किक स्टार्ट होगा अपना वो एक पूरा इकोसिस्टम एक्चुअली क्या है कि जैसे मैंने कहा ना कि क्रिएटिव माइनॉरिटी अ क्रिएटिव माइनॉरिटी सभी देश में होती ही है भारत में भी है और वो क्रिएटिव माइनॉरिटी क्या करती है कि उनका एक कटिंग एज एक थिंकिंग चलता ही रहता है वही है कि कैलिफोर्निया में इस क्रिएटिव माइनॉरिटी को एक पूरा एक मिल गया था इकोसिस्टम भारत में भी इस तरह का एक इकोसिस्टम उभा कर खड़ा करेंगे तब वो एक क्रिएटिव माइनॉरिटी है ऑलरेडी वह दे विल स्टार्ट थ्राइविंग इसमें क्या है कि किसी का इस तरह का थिंकिंग है किसी का नहीं है जिसका नहीं है उसके बारे में हम कुछ नहीं कर सकते किंतु जो लोग ऑलरेडी इस तरह का थिंकिंग करते हैं लेट अस गिव देम दैट सॉर्ट ऑफ प्लेटफॉर्म सो दैट दे कैन डेवलप देम सेल्स जैसे ठाकुर कहता है ना कि जब वेद और उपनिषदों का पाठ होता है तो वह बड़ा ही डिफिकल्ट होता है समझने के लिए फिर यह काव्य काव्य रस जद प्रारंभ होता है व मैंने ठाकुर का यह नहीं है ठाकुर के सामने और किसी ने य श्लोक बोला था अभी एजेक्ट व सीक्वेंस में भूल गया व फिर काव्य काव्य जब प्रारंभ होता है तब वो लोगों का रस ज्यादा बढ़ जाता फिर ये जो कहानी वगैरह है वो जब प्रारंभ होती है तो वो रस और भी बढ़ता जाता है और ज्यादा लोग उसको सुनते हैं फिर जो एक सुंदरी स्त्री वहां से जाती है तो सबका अटेंशन उसमें चला जाता है किंतु जब भूख लगती है तो पूरा वोह सुंदरी स्त्री में से भी मन जाकर के अपनी भूख पर वो कंसंट्रेट हो जाता है क्या कहते हैं अन्न चिंता चमत्कारा अर्थात कि यह देखिए कि ये लोगों के अटेंशन को खींचने के लिए लोगों का मन परिवर्तित करने के लिए सब यह है आप जितना इजली जितना आप कहेंगे कि लोक भोग्य रूप में किसी भी आईडिया को शेयर करेंगे उतना ही ज्यादा फैले अभी यह अपने पुराण उपनिषदों के जो ट्रुथ है जो फैक्ट है उसी को पौराणिक कहानियों के माध्यम से पॉपुलर इज किया गया तो वैसा मेरा खुद का भी ऐसा मानना है कि ठाकुर महा स्वामी जी और उपनिषद के जो तथ्य है उपनिषद को भी छोड़ दे सिर्फ मैं ठाकुर महा स्वामी जी प करूं फोकस तो उन के जो आइडियाज है उनके जो विचार है उसको भी कहानियों के माध्यम से हमको लोगों में शेयर करने होंगे और नए पुराण नई कहानियों की हमको रचना करनी होगी तब कहीं जाकर के यह सब आइडियाज दे विल बिकम फार मोर पॉपुलर अदर वाइज क्या होता है ये जो स्वामी जी का बायोग्राफी है युग नायक ये ठाकुर का बायोग्राफी है लीला प्रसंग मां का बायोग्राफी जो ऑथेंटिक बायोग्राफी की बात कर रहा हूं वो गंभीरानंद जी का मां की जीवनी ये तीन बायोग्राफी को बाकी लोग तो छोड़ ही दीजिए अपने ऑर्डर के साथ में जो कनेक्टेड लोग है जिन्होंने अपने संघ में दीक्षा ली है तीनों का पाठ किसने किया है वो बता दीजिए बहुत ही कम लोग मिलेंगे कि युग नायक है लीला प्रसंग है मां की जीवनी है तीनों का पाठ किया हो कथामृत पढ़ लेते हैं किंतु कंप्लीट वर्क से उसको कौन हाथ लगाता है आजकल कर्म ज्ञान भक्ति यह सब योग है उसमें कौन डीप में जाता है तो ये जो आइडियाज है ना उसको समझना अपने खुद के लिए बड़ा कठिन है जोक अपने साथ में कनेक्टेड है बाहर वाले लोगों की तो आप बात ही छोड़ दीजिए तो यदि आपको इस आइडियाज को खास करके आधुनिक युग के लिए ठाकुर महा स्वामी जी के आइडियाज परफेक्ट है तो इनको जद आप पॉपलाइन होगा ऑन ए लार्ज स्केल तो यह आपको कहानियों के माध्यम से ही करना होगा दैट इज माय पर्सनल बिलीफ