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Sri Ramakrishna & Sri Ma Sarada devi Teachings ·

Sri Ramakrishna & Sri Ma Sarada devi : English & Hindi : 11 Jan 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda

श्री राम कृष्ण यस्टरडे यस्टरडे पार्टिकुलरली दीप इंप्रेशन आपका भूटान जी महाराज सेस डेट ला तोमर से डेट सैम टाइम्स सी सी सी सैम ऑफ डी थिंग्स सी सी एवरी दे बट एवरी वंस इन ए विले डी रेगुलर थिंग डेट मानदंड थीम डेट एवरी दे ऑक्युरेंस इट क्रिएट्स दीप इंप्रेशन अपॉन अस आई नो दिस वेरी वेल बिकॉज यू सी सनराइज सनसेट एवरीडे बट सोमेटाइम्स इट हैपेंड इट अवर माइंड इस इन सच अन स्टेट डेट दिस फेनोमेना ऑफ सनराइज क्रिएट्स दीप इंप्रेशन अपन अस आई रिमेंबर व्हेन आई वाज इन अन स्कूल वैन दे आई वाज स्टैंडिंग ऑन डी वे सन इस टाइम एंड एंटीरे वर्ल्ड हेस बिकम गोल्डन कलर व्हेन डट सैन सेट्स डेट यू नो डेट उसे क्लाउड एंड स्काई एंड लाइव चेंज कलर तो थ्रेड पार्टिकुलर डेज़ डी क्लाउड एंड स्काई एंड एवरीथिंग इस बिकम गोल्डन एंड आय अलसो वाज थिंकिंग समथिंग आई डू नॉट रिमेंबर एक्जेक्टली वर्थ बट सनसेट एंड दिस anteyer गोल्डन वर्ल्ड आई आई थॉट तू माय सब्जेक्ट डी होल वर्ल्ड इस बिकम गोल्डन समथिंग वंडरफुल समथिंग एल्स गोइंग तू हैपन यू नो देयर आर मैजिकल मोमेंट्स इन अवर लाइफ व्हेन एवरीडे थिंग्स दे बिकम पार्टिकुलरली यू नो मैजिकल मास्टर महाशय ही गोज तू दक्षिणेश्वर एंड हिज हिट बिकॉज ऑफ ठाकुर्स साधना बिकॉज ऑफ ठाकुर स्पिरिचुअल अटेनमेंट एवरीथिंग इन डी कालीबाड़ी डी बिल्डिंग डी टेंपल एवं डी गेटमैन एवं डेट वर्कर्स ऑफ कालीबाड़ी उबर ऑफ वेरी बेड कैरेक्टर आई नो डेट दिस इस बिन मेंशन रिपीटेडली इन कथा अमृत तो एवं थे हैव बिकम इसे यू मेड ऑफ लाइट मेड ऑफ डिवाइन लाइट सो एवरी वंस इन अवर दिस इवेंट ऑफर्स इन अवर माइंड डेट एवरीथिंग डेट सी सी हज बिन एक्वायर्स अन मैजिकल क्वालिटी सो डेट इस वही अद्भूतानन्द स्टेज आईएसओ ठाकुर इन समाधि में टाइम्स बट तेरे इस वन टाइम नॉट फॉरगेट इट आनंद जी बीइंग डी सेवक ऑफ ठाकुर ही हेड सेंट ठाकुर गोइंग इन समाधि ऑलमोस्ट एवरीडे ठाकुर गुड गोइंग तू समाधि मॉर्निंग एंड इवनिंग एंड ड्यूरिंग दे टाइम व्हेनेवर देयर इसे एवं इम्मीडिएटली गोइंग तू महाराज मल्टीपल टाइम्स सो लाटू महाराज मस्ट हैव सीन ठाकुर गोइंग इन समाधि 1000 लाइफटाइम एंड सी नेवर सी अन्य वैन गोइंग इट तू समाधि और गेट इन समाधि avarsers बट ही हा हा डेट ग्रेट गुड फॉर्च्यून ऑफ लेटर एंड अथॉरिटी व्हाट इसे डी यूज्ड तू सी समाधि एवरीडे मल्टीप्लेयर टाइम्स सो लार्सटजेस थिंग बट आई रिमेंबर वैन पार्टिकुलर दे एंड यू नो वही इट हैपेंड डेट तू थिंग्स डेट इस आई सईद डेट इस सनसेट हेड बिकम मैजिकल फॉर मी बिकॉज डी नेचर ऑफ डेट फिनोमेना डेट सनसेट वैसे वेरी ब्यूटीफुल अलसो माय माइंड गोज इन सच अन स्टेट इन सच अन रिसेप्टर सोमेटाइम्स व्हेन सी थिंक सैम व्हाट हैपेंस डेट सी आर थिंकिंग अपॉन सैम टॉपिक एंड सी गेट सैम rivallation डेट यस दिस इस व्हाट कर सकते हो हैपन और दिस इसे डी सॉल्यूशन ऑफ दिस पार्टिकुलर प्रॉब्लम व्हेन दिस रिवॉल्यूशन कम्स अवर माइंड नो इट एक्सपेंस अवर कॉन्शसनेस एक्सपर्ट्स आते bikams वेरी रिसेप्टर इन दिस रिसिप्ट ऑफ माइंड वाटेवर डी प्रॉब्लम और वाटेवर डी इतिहास व्यूअर थिंकिंग अपॉन नोट ओनली दे बिकम वेरी क्लियर बट दिस anteyer वर्ल्ड ई अराउंड अस और अन्य स्मॉल स्मॉल थिंग था वे सी अराउंड अस ऑल ऑफ थे एक्वायर अन स्पेशल मैजिकल साइनिफिकेंस सो दिस इस व्हाट मस्ट हैपन विथ सेल्फ डट यू नो डेट हिज हैपेंस व्हेन तू टाइप्स व्हेन डट फिनोमिना इट सेल्फ इसे मैजिकल एंड ऑफ कोर्स सी हैव तू बी इन वेरी रिसेप्टिव स्टेट ऑफ माइंड नव देयर इस अन वेरी लॉन्ग डिस्क्रिप्शन ऑफ डी नाइट ऑन विच ठाकुर अटेंड महासमाधि इट विल नॉट बी पॉसिबल तू फिनिश एंटीरे थिंग इन वैन क्लास सो सी विल रीड वैन पैराग्राफ एवरी टाइम फ्री नाइट जस्ट बिफोर गोइंग तू बेड ठाकुर वुड से हरि ओम तत्सत ठेठ लास्ट नाइट इन काशीपुर गार्डन हाउस ही auttered दिस हरिओम आगे तू बिकम वेरी हॉट बिकॉज समवन नीडेड तू फैन हिम कंटीन्यूअसली सो डेट यू कैन गेट सैम कूल एयर एग्जिट टाइम इलेक्ट्रिसिटी सोना इलेक्ट्रिक फैंस नरली 11 ओ'क्लॉक इन समाधि इट वाज ऑलमोस्ट 11 ऑफ क्लॉक ठाकुर साइड ही वेट इन समाधि ब्रदर्स तू चेंज हरिओम तत्सत लॉरेन मेंस नरेंद्र दें ही 8 लिटिल फरीना पुडिंग विच शशि महाराज एंड बिकम वर्थ ही कॉल्ड गोपाल दादा गोपाल दादा वैसे अंदर डायरेक्ट मॉनेस्टिक डिसीप्ल ऑफ ठाकुर बट ही वास ओल्डर इन आगे ठाकुर एंड देयर विल तू गोपाल तू गोपाल कॉम इन तू ठाकुर गोपाल दादा इम्मीडिएटली लेफ्ट फॉर दक्षिणेश्वर एंड रामलाल दादा कम बैक की फर्स्ट ही एग्जामिनड ठाकुर एंड सईद डी क्राउन ऑफ है हेड इस तिल बोन डेट इसे दी शीर्ष प्रदेश वेयर देयर इस सहस्त्रार चक्र सी नो डेट इन तंत्र दे लाइव वन इट लाइव्स अवर बॉडी इट लीव्स विथ दिस सहस्त्रार चक्र सो दिस सहस्त्र चक्र हेस बिकम कोल्ड डेट इस डी पॉप ऑफ ओवर हेड बिकम कोल्ड डट मिंस लाइफ इस लेफ्ट बॉडी सो दिस वाज दी ऑल यू नो दिस एंट्री का सीज ऑफ तंत्र एंड योग एंड वेदांत दिस सोमेटाइम्स सी बिलीव दिस मॉडर्न साइंस आंसर्स तू एवरी क्वेश्चन बट व्हेन सी स्टडी ओवर असिएंट हिंदू साइंस देयर ऑफ वंडरफुल नॉलेज था इफ सी स्टार्ट लर्निंग इट विल फाइंड डेट मॉडर्न साइंस सो दिस रामलाल दादा न्यू डेट हो दिस लाइफ लाइव्स बॉडी सो ही टच ऑन हिज डी टॉप ऑफ हिज हेड इस सहस्त्रार चक्र एंड डिक्लेयर डेट इट इस स्टील वॉर्म दे मेंस लाइफ इस तिल देयर अन लिटिल लाइफ स्टील दे इन ठाकुर प्लीज कॉल कैप्टन नौ कैप्टन वैसे विश्वनाथ उपाध्याय अनवर ऑफ देवोटी ऑफ ठाकुर एंड ही अलसो हेड स्टडी ऑल दिस थिंग शॉर्टली आफ्टर था कैप्टन विश्वनाथ उपाध्याय ही आस्क उस तू रब ठाकुर विद घी शशि रब हिज बॉडी इन वसंत वैकुंठ हिज unorthern डिसीप्ल अंदर देवोटी एंड शशि शशि रामकृष्ण आनंद जी फिट बट इट वाज ऑफ नो आवे लेटर डेट मॉर्निंग डॉक्टर महेंद्र था इस महेंद्र नाथ सरकार व्हेन सी रीड कथामृत सी विल रिलाइज डेट महेंद्र नाथ सरकार इस वैन ऑफ डी मोस्ट यू कैन से डेट पॉप्युलर डॉक्टर टेक टाइम इन कोलकाता वेरी एक्सपेंसिव एंड ही वाज अन वेरी बिजी पर्सन एंड यू वुडन यूजुअली गो तू पीपल होम तू गिव डेम ट्रीटमेंट प्लीज डिस्पेंसरी बट हर ही उसे तू कम तू ठाकुर एवरीडे एंड आफ्टर टेकिंग हिज पल्स इतरा वाटेवर दैन डॉक्टर्स विथ पेशेंट ही वुड टेक हिज conditionss तू ठाकुर्स कथामृत एंड ही वुड से तू ठाकुर सी बिकॉज यू हैव अन कैंसर ऑफ योर थ्रोट आय तू फोर बी डू तू स्पीक बट यू शुड एंड स्पीक विद अन्य वैन एल्स बट आई परमिट यू तू स्पीक विद मी सो डेट आई कैन लिसन तू योर डिवाइन दिस कोर्स आई कैन लिसन तू योर सिंगिंग मदर नेट सो दिस मच महेंद्र नाथ सरकार हस बिकम देवोटेड तू ठाकुर एंड ही वो सचिन पर्सन यू वाज नास्तिक हो और नास्तिक इन डेट सेंस डेट आगे इट हैपेंस अमोंग ओवर हिंदू सी हिंदू snevar डिक्लेयर्ड डेट आई एम अन आस्तिक एंड आई डू नॉट बिलीव इन गोद लाइक ईश्वर चंद्र विद्यासागर एवर यूज्ड तू राइट समथिंग ओम और नारायण समथिंग लाइक था ऑन डी टॉप ऑफ एवरी पेज डेट ही वुड एवरी लेटर डेट यू वुड राइट बट डी से टाइम ही डेंट हिम ग्रेट इन गोद एंड वैन दे मास्टर महाशय एस्क्ड ईश्वर चंद्र डेट वुड यू बिलीव व्हाट इसे योर ओपिनियन ऑफ ओवर स्क्रिप्चर्स सो व्हाट इट ईश्वर चंद्र विद्यासागर से ही सेठ हिट आई विल यू डिड डियर कंडत एक्सप्लेन व्हाट दे विल ट्राईंग तू तेल अस डेट मिंस रुचि इसे रिलाइज समथिंग रिलाइज बिकॉज दे अंडरस्टैंडिंग वाज कन्फ्यूज्ड दिस वैसे ओपिनियन ऑफ ईश्वर चंद्र विद्यासागर सो दिस विल हैपेंस अमोंग ओवर हिंदुस्तान आदर नाम ऑफ हिंदू जस्ट अंदर पार्ट सेट ऑफ हिंदू सो फ्रॉम माय फैमिली एवरीवन गुड गो तू देयर आर एंड एवरीथिंग बट आई नेवर हिट कनविक्शन इन माय लाइफ स्पिरिचुअल लाइफ इस वर्थ समथिंग ऑल ऑफ दिस आई नेवर हेड अंतिल एंड तिल डी दे स्टार्टेड रीडिंग अकबर एंड दें ठाकुर के हिम इन माय लाइफ एंड ही ब्रेन फास्ट मी सो दिस इस अलसो महेंद्र नाथ सरकार स्टोरी इस अलसो लाइक दिस लाइक एवरीवन एल्स हु आर नास्तिक इन हिंदुइज्म यू वुड नेवर फॉर्मली रिनाउंस इंडोसम और नेवर फॉर्मली से डेट आई एम नास्तिक आई एम अखिलेश बट ही विल नेवर हैव अन्य ट्रू कनविक्शन अपॉन वर्ड और डी वर्थ ऑफ स्पिरिचुअल लाइफ सरकार व्हेन ही कम तू ठाकुर फोर strictment रोगी ही वाज डी विद रोगी बट इट डी रोल वाज रिवर्स वेरी क्विकली ही वह ही हेड डी भवरा महेंद्र नाथ सरकार रिलाइज एंड ही रिलाइज्ड ठाकुर विल गो ऑन टॉकिंग एंड सिंगिंग एंड एवरीथिंग एंड महेंद्र नाथ वुड लिसन स्पेल माउंट एवरेस्ट ही इस लिसनिंग ही इसे ड्रिंकिंग अमृता एंड ही कैन नेवर गेट सेटिस्फाइड ही नीडेड तू ड्रिंक मोर एंड मोर अमृत इस लाइक थिस इफ यू ड्रिंक वाटर इफ यू ड्रिंक कोल्ड ड्रिंक और इफ यू ड्रिंक सब जूस में लाइक इट वेरी मच यू कैन नॉट ड्रिंक मोर दें वैन और तू ग्लास दिस अमृता इट इस डी नाम ऑफ गोद यू कैन गो ऑन ड्रिंकिंग एंड ड्रिंकिंग एंड यू विल नेवर सेट इस फाइन इट विल मेक यू बटोर एंड बटोर पर्सन

स्वामी सारदेशानन्द : माँ की मधुर स्मृतियाँ

ओके सो दिस मच फॉर इंग्लिश लेटेस्ट स्टार्ट की हिंदी महाराज को हमने गुजराती मैगज़ीन के लिए ट्रांसलेट किया था और हमारे ही एक्टिविटी ने किया था तो वो और ये rementions बहुत ही सुंदर है बहुत ही मतलब यह जो मारा जाए सर जैसा ना जी महाराज जय राम भाटी में मैन के साथ में रहे हैं और प्रतिदिन की जो छोटी-छोटी घटनाएं है मैन कैसे खाती थी रहती थी भक्तों के साथ किस तरह से बात करती थी उसे सब का इतना सुमधुर वर्णन है और गंभीरानंद जी महाराज ने भी जब यह किताब लिखी है जो मैन की ऑथेंटिक बायोग्राफी उन्होंने इसी reminations में से बहुत ज्यादा मटेरियल लिया है अभी मैन के बारे में बहुत लोग बहुत कुछ कहते हैं जैसे ये कल हमने हरि प्रेमानंद महाराज का पढ़ा तो उन्होंने एक पार्टिकुलर एक उनके माइंड में एक इच्छा थी की मैन को अप के स्वरूप में देखना है तो उनको दिखाई दे तो किंतु अभी क्या है जब आप ऑथेंटिक बायोग्राफी लिखना और बोलना पड़ता है तो ये जो सर जी महाराज है उनके रिमिनीस में से मैंने देखा वो जो गंभीरानंद जी की अभी यहां पे सैटरडे को मेरा क्लास होता है मंदिर में मंदिर के नीचे खोल है हमारा तो एवरी सैटरडे इवनिंग तो मैं उसी में से जो भक्त जननी चैप्टर है वो गंभीर नाना जी का तो वह मैं पढ़ रहा हूं तो उसमें मैंने देखा की sardesanand जी का बहुत सारा कुछ उन्होंने लिया है फिर और एक चैप्टर है एक लेडी वो टीका है उसका नाम सरयू वाला देवी ने किया ऐसा कुछ मुझे एक्सेप्ट किया नहीं ए रहा है उसमें से उन्होंने बहुत कुछ लिया है तो इतने सारे मतलब सैकड़ो रैम्यूनरेशन लिखे गए हैं मा के बारे में तो डायरेक्ट डिसाइड की मॉनेस्टिक डिसीप्ल की बात जाने देते हैं बाकी सब में से गंभीरानंद जी ने तीन या चार लोगों के ही reminissons को ऑथेंटिक समझ करके ग्रहण किया उनमें से एक है शायद जी तो यहां पर दो चीज समझनी है एक तो है की पालिटी ऑफ उनके रिमेनिंग मैन को जिस तरह से उन्होंने देखा उसकी एक मतलब एक दिव्या एक आभा है दिव्या एक प्रभा है एक चीज दूसरा की sadheshanand जी का जो मैन जो है उनकी ये जो कॉन्शसनेस है उसे स्पिरिचुअल इतनी मेच्योर है की सोच समझकर के लिखते हैं वैसे ही ढंग बेड ढंग कुछ नहीं लिखते तो दिस इस वेरी गुड rementions जी महाराज लिखते हैं जब मैं पहली बार लिखते हैं अर्थात वह तो कहते होंगे किसी को और किसी ने लिख दिया है जब मैं पहली बार मैन के दर्शन करने उद्बोधन गया उसे समय मैन गांव गई हुई थी अर्थात जयरामबाती अतः उसे बार मुझे मैन के दर्शन का सौभाग्य नहीं मिला कुछ गोलपारा उसे समय वही थी उनके दर्शन तथा प्रणाम करने पर जब गुलाब मैन को पता चला की हम लोग इतनी दूर से कष्ट उठाकर आए हैं तो उन्होंने खूब स्नेह और सहानुभूति प्रदर्शित की और यह कहकर दुख प्रकट करते कहा की मैन के दर्शन नहीं हुए थी मैन के साथ रहती थी और मैन की सेवा करती थी किंतु एक बात थी जाना बहुत काश्तकार है वहां गांव में रहना यह सब शहर की महिलाएं हैं यदि आदेश दिया किंतु मैन का भी ऐसा था की जय rambate में माघ बिना किसी भी यह जो पार्षद गंज जो रहते हैं ना आपको बड़ा प्रोटेक्शन में रखते हैं आज सुबह ही vimlat मनन जी यहां से मूसा राजकोट आश्रम से विदाई ली तो कल दीक्षा द उनकी तो वो मेरा मतलब माय गुड ग्रेट फॉर्च्यून के वो दीक्षा के समय जो गुरु प्रणाम होता है तो देवोते लोग जो उनको ऑफर करते हैं तो फिर महाराज के हाथ में ऑफर करेंगे फिर महाराज के हाथ से लेकर के वो रख देना होता है तो इट वास माय गुड फॉर्च्यून क्योंकि यह इस तरह से मुझे वो महाराज के साथ में बैठने का मौका मिला एक घंटा गुरु प्रणाम चला होगा तो देखिए महाराज यहां बैठे हैं वहां उनके आसपास में पंच से छह साधु खड़े है और भक्त लोग जो आकर प्रणाम करते हैं तो जैसे ही महाराज तो अभी उम्र हो गई है तो वह जो एक बास्केट होती है बास्केट में फल फूल वगैरा बहुत कुछ महाराज किया जाता है तो महाराष्ट्र को उठा नहीं पाएंगे और 76 वह भक्तों ने दीक्षा ली थी तो इतना उठा-उठा कर महाराज के हाथ में दर्द हो जाएगा तो जैसे भक्त लोग महाराज के हाथ में रखेंगे हमको वह बास्केट ले लेनी है तो देखिए यह जो हमारे जो महाराज होते हैं जो इस तरह से उच्च paddsht होते हैं या तो आध्यात्मिक साधना में बहुत टेक होते उनके बहुत सारे पार्षद परिजन होते हैं उनको घर करके रहते हैं सब समय और भक्तों लोग जो है उसका इतना आसानी से महाराज के साथ बात नहीं कर सकते हमारे थ्रू उनके पास जाना पड़ता है क्योंकि उनका समय भी लिमिटेड है उनकी शारीरिक कंडीशन भी इतनी फिट नहीं होती कितना लंबा समय बात कर सके तो मैन को पता था की जब तक वो जो है यह पार्षद पारंगत से paribhrit होकर के रहेगी भक्तों का मैन के पास आना सब समय लिमिटेड रहेगा सब समय सीमित रहेगा अभी इन लोगों का तो जन्म ही हुआ है लोग कल्याण के लिए अभी कल जो से मैंने देखा महाराष्ट्र सुबह से जो बैठे हैं तो बैठे ही है बैठे ही है की 12:15 हो गए तो आसान पर बैठकर के चुप बोलते ही जाना उपदेश देते जाना वो कितना डिफिकल्ट है तो ये सब चीज हमको लगता है की अरे वो तो क्या है उद्देश्य दे रहा है किंतु उसका जो शरीर और मैन पे जो असर पड़ता है वो मतलब सही-सही वो मतलब बहुत ही ये होता है जब तक आपकी तपस्या साधना jhadyan नहीं होते तो वो मतलब सहन करना मुश्किल है तो मैन jhelambar सब लोग मैन को इतना प्रोटेक्शन में रखते हैं कोलकाता में किंतु मैन jheram बाती जाएगी ये ठीक एन कर करके की वहां पे ये कोई भी आडंबर नहीं आडंबर तो मैन के साथ में होता ही नहीं है किंतु किसी भी तरह का फिल्टर नहीं होना चाहिए मैन और बच्चे के बीच में वहां पर जो कष्ट करके जाएगा उन सबको मैन बिना किसी शिक्षक के बिना किसी वह परिजन से परिवृत्त कोई भी ना उनके ऊपर आशीर्वाद करेगी उनके ऊपर में कृपा करें तो वह जो दिनों की जो बात है जय rambate की वो बात ही अलग है और उसे सब इसीलिए पसंद है इसलिए कहा की यह लोग गुलाब मा कहती है की मैन जय राम बाती गई है किंतु मैन इन लोगों को लेकर के जयरामबाती कभी नहीं जाएगी हम लोगों के अच्छा हम लोगों के यह कहने पर की हम उन्हें के दर्शन पाकर के अर्थात गुलाब माह के दर्शन पाकर के आनंदित हो गए हैं तो golaapma हंसते-होए बोली मधु अभाव गुड़ाम dathya अर्थात मठ के मर्द नहीं मिला तो गुड खाकर के ही अपने आनंद का लिया अर्थात मैन के दर्शन नहीं मिले गोलाप मा के दर्शन मिल गए तो दर्शन से भी आनंद हुआ तो किंतु जब मैन के दर्शन हो जाएंगे फिर गुलफाम रूप में है ना की वह मास्टर मा से एक दिन आते हैं फिर दूसरे दिन आते हैं मतलब हंस करके वो कहते हैं देखो की एक मोर ने किसी ने एक दिन अफीम खिला दिया अभी अफीम का तो टेस्ट लग जाता है तो जिस दिन जिस समय अफीम खिलाया था दूसरे दिन उसी समय वो मोर फिर से हाजिर हो गया किंतु एक बात है की ए खाने से शरीर और मैन पर बहुत ही बुरी असर पड़ती है और ये आध्यात्मिक अमृत पैन करने से हमारा जीवन धन्य हो जाता है और उन्होंने हैबिट हैबिट फार्मिंग दोनों ही है एक हमको आध्यात्मिक ऊंचाई पर ले जाता है दूसरा है हमको ये इंद्रियों के वो जो है पटल लोक में ठेक देता है तो यहां पे भी एक बार मधु का आस्वाद मिल गया तो फिर गुड जो है उसका टेस्ट आपको अच्छा नहीं लगेगा उसे समय में मैन के बारे में विशेष कुछ नहीं जानता था महाराज जी बोलते हैं बस इतना ही सुना था की ठाकुर की sahdharmi जीवित है और उद्बोधन में रहती है भक्तगण उनका दर्शन करते हैं और किसी किसी भक्त को उन्होंने दीक्षा भी दी है पर उद्बोधन में ही बोला मैन की बातों से समझ में आया की मैन कुछ भिन्न प्रकृति की ही है और उनका दर्शन पाना परम सौभाग्य की बात है हमको तो पता है की ठाकुर ने खुद कहा है की जो मैन की आध्यात्मिक उपलब्धि है वह ठाकुर से भी ज्यादा बढ़कर के उन्होंने बोला था की तुम जल्दी मुझे नाराज कर दोगे तो शायद तुम कुछ क्षमा हो सकती है और मोहब्बत में जो रहती है उनको तुम नाराज करोगे तो तीनों लोक में तुम्हारा कोई स्थान नहीं रहेगा तीनों लोक में तुमको बचाने वाला कोई नहीं रहेगा पर जो मित्र गाड़ी चला रहे द सहसा गिर गए और उनका एक हाथ टूट गया तब उन्हें लेकर घर वापस लौट आना पड़ा था देखिए वह मैन को मिलने के लिए गए और इस तरह की दुर्घटना हो गई वापस ए जाना पड़ा यह जो सब होता है ना की प्रवाह हमको पता ही नहीं चलता कहां से कैसे वह हमको यहां पर लेकर आता है मेरे खुद के साथ में ऐसा हुआ था 2001 में अर्थक्वेक हुआ था तो मैं हमारे शहर में तो आश्रम था नहीं प्राइवेट सेंटर था जो केंद्र होता है तो मैं वहां पर गया और कहा की इस तरह से मैं सेवा करना चाहता हूं तो की बात है 2001 में मैं अपने आश्रम में आया साधुओं से मिला कथामृत पढ़ने की शुरुआत की स्वामी जी को पढ़ने की शुरुआत की बहुत अच्छा लगा की आश्रम का वातावरण और उसे समय मेरे मैन में ठीक हो गया था की अभी संसार नहीं करना है यदि रहना है तो इस तरह से जो है पवित्र जीवन का इतना आइडिया तो नहीं था किंतु मैरिज नहीं करना है संसार नहीं करना इतना मैं समझ गया था और लोगों को कल्याण के कम करना है क्योंकि यह जब साधु लोग इस तरह से जो धरती कम 2001 का शायद आपको पता होगा गुजरात में इतना भयानक था हजारों लोग मार गए द और जिस शहर में लिमडी करके गांव है यहां पे वहां पे मैं गया था तो वहां पर 21 स्कूल बिल्डिंग हमने नए बनाए द तो उनको साधु जो की सरवत त्यागी है ये इस तरह से लोक कल्याण के कम करते देख कर मुझे इतना अच्छा लगा मैंने यह सोचा था की इस तरह से लोक कल्याण का कम करना है किंतु सन्यास में ग्रहण कर पाऊंगा की नहीं वो इतना मेरी कैपेसिटी है की नहीं वो डाउट था तो उसे बार में छोड़कर के चला गया बाकी बहुत जगह पे मैंने बहुत कुछ कम किया और कहीं जाकर के तीन दो से तीन साल के बाद में फिर से जो है की इस तरह की घटनाएं हुई मेरे जीवन में की फिर से मैं वापस आया मतलब वो जो कर्म जो बाकी रह जाता होता है ना उसको कट देना पड़ता है वो कम कोई सेवा कार्य करके या तो फिर कर्मयोग करके तो वो बचा होगा कुछ तो मैं गांव में जाकर के मैंने बहुत सारा कम किया था तो वो सब छह वो सब कट गया और मेरा वापस यहां पे आना हुआ तो ऐसा बहुत लोगों के जीवन में होता है की हम प्रयत्न करते हैं ठाकुर के पास आने का किंतु हो नहीं पता बीच में कुछ ना कुछ योगदान ए ही जाता है वह धीरे-धीरे करके समय कट जाते हैं और फिर आखिर में जो है हम ठाकुर के श्री चरणों में उपस्थित होते हैं कभी-कभी हमको लगता है अरे मुझे आने में इतना देरी हो गया कितना मतलब मैं जब ध्यान कितना और ज्यादा लोग कभी जब काउंट करते हैं मैंने देखा है की आज इतने हुए कल इतने हुए आज इतने हुए तो 1 लाख कब होंगे 2 लाख कब होंगे 3 लाख कब होंगे ऐसा कोई कोई लोग करते हैं मैंने भी एक समय करने का प्रयत्न किया था फिर छोड़ दिया क्योंकि वो सब समय काउंट करना मुश्किल होता है आलस की वजह से छूट गया किंतु यदि मेरे मैन में एक तो बात था की यदि मैं पहले ए जाता तो आज तक तो मैंने और कितना सारा जप कर दिया होता यह हमें और कितना ज्यादा मैं किताबें पढ़कर के और ज्यादा मेरा अंडरस्टैंडिंग कितना बढ़ गया होता वह सब रहता है किंतु क्या है की अल्टीमेटली हमारे जो कर्म प्रवाह है उसके अनुसार ही हम ठाकुर के पास आते हैं फिर चाहे हम चाहे की ना चाहे और बाद में यदि आगे में हम चाह करके भी नहीं ए पाए बाद में जब हमारा मैन तैयार हो जाता है तो हम नहीं चाहेंगे फिर भी ठाकुर कान पड़कर खींच के ले आएंगे भले चलो अभी टाइम हो गया है अभी बाकी सब कम छोड़ दो तो वैसे ही 4 साल 3 साल मैंने सोचा नहीं था की मैं वापस ए पाऊंगा किंतु वो ठाकुर के ग्रुप से आना हो गया इसके करीब 2 वर्ष बाद देखिए उसे घटना को 2 साल हो गए मा को मिलने के लिए जा रहे द तो हमने किसी बंधु का एक्सीडेंट हो गया नहीं जा पाए उसके 2 साल के बाद मेरे मित्र स्वामी gyannand ने वह मुझे पत्र लिखा की जय राम बाती जाकर मैन के दर्शन और उनकी कृपा पाने की विशेष सुविधा है इसी बीच ही देखो भक्त लोग भी सोचते हैं की जय रामबाती जाके माता दर्शन करेंगे वह अच्छा रहेगा कोलकाता में इतने सारे साधु सन्यासी और मैन की इतनी सारी संगिनी या सेबी का खड़ी रहती है की वो ठीक से मैन के साथ बात भी नहीं करने की चलो चलो ऐसा करके वह आगे बढ़ा देंगे बहुत सारे भक्त भी लाइन में खड़े हैं हम आपको प्रणाम करने के लिए यहां पर उसे तरह का कोई असल नहीं है कैलाश मानसरोवर की यात्रा करनी है तो आपको कष्ट कठिन है आपका मैन निर्मल हो जाएगा जब तक आप बाबा के पास में जाते हैं तब तक तो यहां पर भी ऐसा है मैन के पास आते आते आपका मैन जो है वो ठीक शुद्ध पवित्र हो जाएगा मैन को प्रणाम और महा ग्रहण कर पाए जिससे की आपको इसी बीच मेरे दो शुभचिंतक मित्रों ने मैन की कृपा प्राप्त की थी कृपा प्राप्त करना अर्थात दीक्षा ग्रहण की थी मैन से दीक्षा प्राप्त की थी एक ने उद्बोधन में और दूसरे को कभी देखा है अच्छा है उनसे मैंने मैन की बातें सुनी एक दिन स्वप्न में मैन के दर्शन हुए देखिए मार्केट कमरे के दरवाजे पर अपना समान रखकर ठाकुर को प्रणाम करके जब हम लोग काली मामा के घर के द्वार के सम्मुख आए तो मैन उसे समय उन्हें के घर से बाहर निकल रही थी हमें देखते ही वे दरवाजा के सामने खड़े विशाल पत्थर के टुकुर टुकड़े पर दोनों पैर नीचे लटका कर और अपनी गोद में दोनों हाथों को रखकर बैठ गई ऐसा चित्रा भी है ऐसा फोटो भी है मैन का हालांकि मैन पत्थर के टुकड़े पर नहीं बैठी है अपने वरांडा पे ही बैठी है हमारे आश्रम में राजपूत आश्रम में जब आप आएंगे तो आश्रम से इंटर होते ही एक बहुत बड़ा पोस्टर है उसमें इसी पीओएस के मैन की फोटो है और साथ में मैन का एक सुविचार लिखा है गुजराती में जब के ऊपर में सुविचार क्या है मैं भूल गया हूं किंतु आने से ही मैन का यह फोटो आपको दिखाई देगा आश्रम में प्रवेश करके ही उन्होंने लाल की नारी की सफेद सदी पहनी थी आधा चेहरा घूंघट से धक्का हुआ और दाहिना हिस्सा अनवरत था जैसे हम मैन के पिक्चर में देखते हैं थोड़े घुंघराले केस दाहिने कंधे से नीचे झूम रहे द हाथों में कंगन पांव में अंगूठे के लोहे की अंगूठियां पावों के अंगूठे पांव की उंगली में अंगूठे की लोहे की अंगूठियां गले में खूब महीन रुद्राक्ष की माला उन्नत शरीर अभी मे ऐसे झुक करके नहीं बैठी है ऐसा सीधे हो के बैठी है उसे समय व्यस्त हो और सबल थी प्रसन्न दृष्टि से बात यह इसलिए लिखते हैं क्योंकि बात-बात में यह जो चेहरा बाती में मच्छर का उत्पाद और फिर बार-बार बीमारियां आना वहां का पानी जो है वह बहुत ही यह मालिन रहता है इन सब चीजों से मैन को इतनी बार बुखार और बीमारियां होने लगी की शरीर को पूरा पुरुष के हो गई थी और शरीर का जो वर्ण है पूरा मालिन हो गया था पूरा कला पद गया था तो ज्यादातर लोग तो मैन को पीछे बाद में ही तो मिलने को आए द इसलिए वो महाराज यहां पे खास करके लिखते हैं की आपने जिस तरह से मैन को देखा है खुश कहां और मैलिनो वर्ण किंतु महीने जब मैन को देखा था वो बहुत ही वो उनका शरीर जो था स्वस्थ था और शरीर का उभारना भी बड़ा उज्जवल था ठाकुर के बारे में है ठाकुर जब साधना कर रहे द तो साधना करके यह जो सब सिद्धियां प्राप्त होती है तो उनके शरीर में से प्रकाश निकलता था उनका शरीर का जो पूरा वर्णन है सोने जैसा हो गया था और जब वो बाहर निकलते द अपने घर से खासकर की बात कर रहे हैं वह जब तालाब कुकुर में वह स्नान करने को जाते द तो सब लोग रास्ते में खड़े रह करके उनको दर्शन करने के लिए खड़े हो जाते यह देखो ठाकुर ने सोचा की इस चीजों का भी एक अहंकार होता है तो ठाकुर कहते हैं की बाद में मैंने अपने शरीर को मार-मार करके बोला की ये जो प्रकाश है यह जो उज्जवल वर्ण है वो चले जाओ चले जाओ ऐसा करके मैन को कितनी प्रार्थना की तब जो है उनका शरीर जो है उनका वर्णन मालिन हो गया और उनका शरीर थोड़ा सा पुरुष के हो गया माफी बहती है की जब वो ठाकुर को पहली बार मिली होगी तब वह ठाकुर जो है सोने का ताबीज पहनते द मैंने ताबीज के वह जो यह रहता है वो सोने का था तो मैन कहती है की वो सोनिया सोना जो है ठाकुर के वर्ण के साथ में मिलन हुए मतलब वो मिक्स हो जाता था इतना ठाकुर का उज्जवल वर्णन था बात-बात में जो है की ये सब चीज जो है अहंकार उत्पन्न करती हैं या तो फिर क्या होता है की इस तरह के लोग आपके पास में आना शुरू कर देते हैं की जिन लोगों की एक आध्यात्मिक आपसे उद्देश्य नहीं चाहिए किंतु मेरे घर में यह कोई समस्या है उसका कोई सॉल्यूशन चाहिए इस सांसारिक समस्याओं के सॉल्यूशन के लिए वे लोग आना शुरू कर देते हैं चलिए उनको लगता है की हान ये कोई धार्मिक या तो आध्यात्मिक पर्सन है किंतु जब चेहरा देखकर के लगता है अरे इसमें तो कुछ है नहीं तो फिर जब तक कोई अच्छा सच्चा भक्त नहीं होता तब तक लोग आपके पास नहीं आएंगे ठाकुर ने कहा है ना की वो कैंसर क्यों हुआ लोग बादशाह की जो लोग सच्चे सच्चे भक्त हैं वो रह जाएंगे बाकी के भाग जाएंगे ये करके ठाकुर अपने कैंसर को नहीं कर कर सकते तो हमको क्या हेल्प करेंगे तो इस तरह से यह जो शरीर की जो कांति है शरीर का सौंदर्य होता है जिस तरह का वर्णन हम अपने पुराने में पाते हैं भगवान शिव भगवान परमा पार्वती मैन सीता या भगवान राम का तो हमको शायद कभी-कभी ये मैन में आएगा की मैन और ठाकुर का इस तरह का वर्णन और रुक क्यों नहीं है तो था किंतु उन्होंने ही प्रार्थना करके इससे मुक्ति पाली अर्थात इसी तरह के लोग उनके पास में आएंगे जो की सही सही भक्त है है उसे समय तो क्या था ना की वह राम और कृष्ण के समय में की बहुत सारे लोग इस तरह से वो वेद पाठ वगैरा करते द तो उनको इतना तो सेंस था की भाई ये जो अवतार है उनके पास में जाकर के छोटी मोती चीज नहीं मांगनी चाहिए वो सीधा भाव सागर कैसे पार कर दे भंवरों से कैसे मुक्ति पाएं वही मंगा जाता है ठाकुर कहते हैं ना की जितनी कोई बादशाह या कोई बड़े राजा के पास जाएंगे तो अब हम 20-30 थोड़ी ना भिक्षा में मांगेंगे पूरा राज्य पथ मांग लेंगे उसके पास उसकी देने की इतनी क्षमता है तो वैसे ही ठाकुर के पास मैन के पास देने की जो क्षमता है तो वो हम क्यों ना मैन के सब जन्मों के सभी कर्म कट जाए निर्वाण प्राप्ति हो जाए यह क्यों एन हम मांगे छोटी मोती मुझे नौकरी लग जाए इसकी बीमारी है वो ठीक हो जाए ऐसा सब छोटी मोती चीज हम क्यों मानते हैं उनके पास जाकर के आजकल के लोगों को इतनी सेंस नहीं है पहले थी तो वे लोग आखिर तक इस तरह से अपना भव्य रूप बनाकर के रहते द किंतु आजकल अवतार भी जमीन पर आते हैं उनको छुप करके रहना पड़ता है कहीं वह जाकर के वह स्टंप्ड ना हो जाए इतना बड़ा भीड़ ना हो जाए जैसे की सच्चे सच्चे जो भक्त है वो उनके पास में है अच्छा तो आज ही तक कल फिर से मिलेंगे अच्छा आपका एक प्रश्न था की क्यों नहीं आते हैं बात यह है की साधु होना की आपको ठाकुर को पुकारा पड़ेगा जैसे माने उनके भीतर में यह एक रहता है की हम मुक्ति पाए किंतु क्या है की वो शब्दों में ये सब चीज आर्टिकुलेट नहीं हो पाती है हम सब समय ये चीजों को अपने समझ नहीं पाते हैं की भीतर में यह मुख्य होते हैं