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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 13 June 2024

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का कंप्लीट वर्क्स पार्ट वन राजयोग राजयोग का थर्ड चैप्टर प्राण तो कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि प्राण का जो हाईएस्ट मेनिफेस्टेशन है वह है थॉट और हमने यह भी देखा कि किस तरह से यह पार्टिकुलर मेनिफेस्टेशन जिसका नाम है विचार क्रिएटिव थिंकिंग या तो फिर हायर थिंकिंग किस तरह से आज की इंफॉर्मेशन जज में हमको सहाय भूत हो सकता है तो थोड़ा सा इस में आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं द प्राण इज द वाइटल फोर्स इन एवरी बीइंग थॉट इज द फाइनेस्ट्राइड है वह है विचार थॉट अगेन एस वी सी इज नॉट ऑल अभी विचार के बारे में जो हम सोचते हैं विचार अकेला सब कुछ नहीं है देर इज आल्सो व्ट वी कॉल इंस्टिंक्ट और अनकॉन्शियस थॉट विचार के साथ-साथ में एक इंस्टिंक्ट या तो फिर बिना विचार किए हुए विचार भी आते हैं द लोएस्ट प्लेन ऑफ एक्शन एक्शन यानी कि कर्म कर्म का सबसे निचला स्तर यह है बिना सोचे हुए आते हुए विचार इफ अ मॉस्किटो स्टिंग अस अवर हैंड विल स्ट्राइक इट ऑटोमेटिक इंस्टिंक्टिवली यदि हम बैठे हैं और एक मच्छर हमको 10 ले तो इमीडिएट हम एक हाथ पर यदि मच्छर 10 लेता है तो दूसरा हाथ इमीडिएट उस मच्छर को भगाने के लिए व एक्शन लेगा सोच की जरूरत नहीं पड़ेगी यह एक इंस्टिंक्टिव एक्शन है और यह मच्छर दसन की बात से एक स्टोरी याद आ गई स्वामी जी और गिरीश घोष दक्षिणेश्वर में एक बार दोनों ने सोचा कि चलो वहां पर जाकर के ध्यान करते हैं तो दक्षिणेश्वर गए पंचवटी के बेलतला दो में से एक के नीचे बैठे थे एग्जैक्ट लोकेशन मुझे याद नहीं तो वहां पर दोनों लोग बैठे हुए हैं अभी गि श घोष का तो पता है वो तो नाटक कंपनी का मालिक था वह खुद तो ये था एक्टर था अभी वोह ध्यान करेगा तो अभी उसका जो ध्यान करने की एकाग्रता वगैरह आप सोच लीजिए कि कितना होगा कितना डीप वो मेडिटेशन कर पाएगा तो ठीक है गिरीश घोष अपना बेचारा प्रयास कर रहा है यहां पर नरेद युवा स मतलब अभी सन्यासी तो नहीं है किंतु एक युवा की शक्ति है शरीर और मन में ठाकुर के शिष्य है ठाकुर ने खुद ने अपनी शक्ति उनमें प्रवाहित की थी वह सप्तऋषि के एक ऋषि तो नरेंद्र ध्यान कर रहा है भविष्य के स्वामी विवेकानंद और यहां पे है गिरीश घोष कुछ देर हुई तो गिरीश घोष ने आंख खोल दी अभी ध्यान नहीं हो रहा क्यों क्योंकि इतने सारे मच्छर काट रहे हैं काट रहे काट रहे हैं तो उसने आंख खोल दी बोला कि अभी होगा नहीं मेरे से ध्यान और नरेंद्र के सामने देखा तो एकदम आश्चर्य चकित हो गया नरेण ऐसा ध्यान मुद्रा में पद्मासन में सीधा हो कर के बैठा था और पूरे शरीर पर इतने मच्छर इतने मच्छर कि ऐसा लगता था कि मच्छर का पूरा ब्लैंकेट उसके शरीर के ऊपर में छा दिया है मच्छर का बनाया हुआ ब्लैंकेट उसके शरीर के ऊपर में आवृत है तो यह देख कर के गिरीश डर गया वो बोलता है कि यह मुझे जो मच्छर काट रहे हैं बार-बार मैं मच्छर को भगा रहा हूं तो मैं तो तो थोड़े से मच्छर से ही परेशान हू और यहां पे यह नरेन है पूरा मच्छर से आवृत है जितना खुला उसका शरीर है दोनों हाथ पूरा चेहरा सब कुछ तो पता नहीं इसके वो नरेंद जिंदा भी है कि नहीं क्या पता समाधि में पता नहीं क्या-क्या होता है पता तो है तो और गिरीश घोष डर गया और खड़ा हो गया और नरेंद्र को जोर-जोर से हिला रहा है अरे नरेंद्र रे नरेंद देखो देखो तुम्हारे शरीर पर इतने मच्छर है देखो क्या हो रहा है तुम्हारे साथ में अभी यह बोल रहा यह सब कुछ और नरेंद्र को धक्का दे रहा है जैसे नरेंद्र को धक्का दिया नरेंद्र जैसे ऐसा वो पद्मासन में बैठा था दोनों वो उसी पद्मासन में गिरा अपने पीठ के बल पैर दोनों पद्मासन में ही है हाथ जैसे तत्व मुद्रा में है वैसे ही है वही पद्मासन की ध्यान की स्थिति में ही पीछे में गिरा और वहीं पर वैसे ही ध्यान कर रहा है जैसे कि एक ल मूर्ति एक बनाई हो पत्थर की मूर्ति या लकड़ी की मूर्ति वो मूर्ति को आप गिराए तो कैसी वैसी की वैसी पोजीशन में गिरेगी नरेण भी ऐसी ही पोजीशन में गिरा और पूरे शरीर पर मच्छर तो इतने के इतने ही है तो गिरीश घोष को उस समय पता चला कि सही सही ध्यान किसको कहते हैं मन जो है हमारे शरीर पर हमेशा रहता है हमारे शरीर के सुख दुख ठंडी गर्मी सुविधा असुविधा व यह सबको लेकर के ही व्यस्त रहता है फिर यह हजार तरह के विचार सुबह को उठकर के ही यह विचार अपने मन में चालू हो जाते हैं कल मेरे साथ क्या हुआ था परसों क्या हुआ था कल क्या होने वाला है मेरा भविष्य का प्लान क्या है मेरा कर्तव्य क्या है हजार चीजें मेरे मन में सब समय चलती रहती है तो यह चीजें जैसे कि हमारे गले में पत्थर बन कर के हमको जमीन पर जमीन की ओर खींचती रहती है हमारे मन को मुक्त पंखी की तरह इस खुले गन में उड़ने नहीं देती विचरण नहीं करने देती तो यह सब शरीर के ऊपर में हमारी आसक्ति शरीर के ऊपर में शरीर रूपी यह बंधन यह जो पंखी है पंखी को आप पिंजरे में बंद कर देंगे तो कैसा पंखी बेचारा वह उसका दम घूंट जाएगा तो वैसे ही हमारे भीतर में जो आत्मन है या तो फिर आत्मन का एक प्रकाश की किरण है जिसको कि हम जीवात्मा कहते हैं यह इस शरीर और विचार रूपी पिंजरे में बंधा हुआ है इस पिंजरे को तोड़ कर के इस पंखी को जीवात्मा रूपी पंखी को गगन में मुक्त रूप से हमको उड़ान बड़नी चाहिए तभी तो वह कहीं जाकर के आध्यात्मिक जगत में एक के बाद एक सोपान सर करेगा तो जो भी है ये व मच्छर की बात से यह बात याद आई तो स्वामी जी कहते हैं कहते हैं कि प्राण का जो रूपांतरण है व है विचार अभी सोच लीजिए कि विचार में भी कुछ अलग-अलग तरह के विचार होते हैं जो हमारे मस्तिष्क में जो कुछ चल रहा है उसके तीन लेवल है तीनों लेवल को यहां पे स्वामी जी समझाएंगे एक तो लेवल है सबकॉन्शियस जहां पे सब इंस्टिंक्टिव एक्शन होती है अर्थात कि मेरे हाथ एक हाथ के ऊपर में मच्छर बैठ तो इमीडिएट मैं दूसरे हाथ से उस मच्छर को भगाने का प्रयास करूंगा ये सबकॉन्शियस एक्शन हो गई फिर ये कॉन्शियस लेवल है जहां पे कि मैं यह अपने मन से जो सब कुछ विचार हूं प्लान करता हूं आज अभी क्लास लेना है तो क्लास में क्या मुझे बोलना है यह सब कॉन्शियस लेवल पे आता है और एक सुपरकॉन्शियस लेवल है जैसे कि मैं जब बोलता हूं यहां पे क्लास में यह सब कॉन्शियस लेवल पे सोच समझ करके विचार करके बोलता हूं किंतु दक्षिणेश्वर में ठाकुर भक्तों के सामने जो कुछ बोलते थे वो विचार सुपरकॉन्शियस लेवल से आते थे मां खुद मां सरस्वती स्वयं उनकी जिगवा पर सवार होकर के भक्तों को उपदेश देती थी तो वो ठाकुर जो बोलते थे वह सुपर कॉन्शियस लेवल से आता था मैं हम ज्यादातर हम लोग जो कुछ बोलते हैं सोच समझ करके जो बोलते हैं वो कॉन्शियस लेवल से आता है और एक छोटा बच्चा होता है बिल्कुल अभी उसका जन्म ही हुआ है छोटा सा बेबी है तो उसको जब भूख लगेगी तो वह जोर से चिल्लाएगा रोएगा उसकी मां तो उसकी मां दौड़ी आएगी अच्छा छो छोटा सा बच्चा रो रहा है मतलब वह भूखा है या तो उसको कुछ असुविधा हो रही है कुछ भी है बच्चा अपने मुंह से तो विचार व्यक्त नहीं कर सकता समझा नहीं सकता कि मुझे क्या हो रहा है वह रो कर के या हंस करके या नाराज होक के या तो खुश होकर के वह अपने मन की जो बात है वह बताएगा वो इंस्टिंक्टिव लेवल का है बच्चे का अभी कॉन्शियस लेवल अभी इतना डेवलप नहीं हुआ है तो वो सबकॉन्शियस लेवल से वो सब इंस्टिंक्टिवली कार्य कर र रहा है तो यहां पर स्वामी जी कॉन्शसनेस के तीन लेवल बताते हैं सबकॉन्शियस कॉन्शियस और सुपरकॉन्शियस हम यहां पर अपनी वेदांत की भाषा में स्वप्न जागृत सुषुप्ति और तुरीय इस तरह से कहते हैं स्वप्न और सुषुप्ति यह सबकॉन्शियस लेवल पर हो गया स्वप्न अर्थात कि सोते हैं तो जो स्वप्न आते हैं वो और सुश पति अर्थात कि जद हम कोमा में चले जाते हैं बेहोश हो जाते हैं या तो बहुत ही गहरी निंद में चले जाते हैं जहां पर बेहोश जैसा ही एक आभास होगा उसको कहेंगे सुश सुप्ति तो यह स्वपना और सुश पति हो गए सबकॉन्शियस लेवल पे जागृत जागृत लेवल यानी कि ये कॉन्शियस लेवल हो गया और तुरीय यानी कि सुपरकॉन्शियस हो गया तो यह तीन स्टेट को यहां पर स्वामी जी हमको बताते हैं तो सबसे पहले तो कहते हैं कि प्राण का ही एक मेनिफेस्टेशन या तो रूपांतरण है विचार और यह विचार के तीन लेवल है तीन लेवल से विचार आते हैं दिस इज वन एक्सप्रेशन ऑफ थॉट यानी कि मच्छर एक हाथ पर बैठा दूसरा हाथ मच्छर को भगाने के लिए इमीडिएट कार्य करेगा इसको यह विचार का एक लेवल है वन एक्सप्रेशन ऑफ थॉट विचार का एक मेनिफेस्टेशन है ऑल रिफ्लेक्स ऑल रिफ्लेक्स एक्शंस ऑफ द बॉडी बिलोंग टू दिस प्लेन ऑफ थॉट रिफ्लेक्स एक्शंस यानी कि ये ऑटोमेटिक होने वाली जितनी भी प्रतिक्रिया है यह सब इस लेवल पर आएगी जैसे कि मेरा हार्ट बीट अपना हृदय अपने से कार्य कर रहा है यदि मैं आहार ग्रहण करता हूं तो मेरा यह जो लीवर है फिर इंटेस्टाइन है वह ऑटोमेटिक आहार को अन्न को डाइजेस्ट करने के लिए जो कार्य करना है वह करेगा रास्ते से मैं जा रहा हूं सडन एक गाड़ी मैं रास्ता क्रॉस कर रहा हूं और मेरा ध्यान नहीं है जोर से मने एकदम स्पीड से एक गाड़ी आ गई मेरे सामने तो इंस्टिंक्टिवली मैं जंप लगा कर के सामने चला जाऊंगा यानी जिसको कि फाइट और फ्लाइट इंस्टिंक्ट ऐसा कुछ कहते हैं तो वह सब इंस्टिंक्टिवली होता है वो एक लेवल है देयर इज अगेन द अदर प्लेन ऑफ थॉट द कॉन्शियस विचार का एक दूसरा लेवल है जिसको कि कॉन्शियस कहते हैं यह जिसको कि हम जनरल एक कॉन्शियस कहते हैं आज सुबह कर उठ कर के अभी दो दिन से यहां पर गर्मी इतना हो रहा है कि सुबह-सुबह को दूध फट जाता है तो क्या करेंगे मैं मेरा ऐसा है कि सुबह को मैं यहां पे 7:00 बजे के आसपास आ जाता हूं फिर इसको यहां पे एक लड़का है वह चाय बनाएगा चाय के साथ में बिस्किट खाऊंगा और फिर क्लास स्टार्ट होगा अभी अभी दो दिन से ऐसा हो रहा है ये लड़का बोल रहा है महाराज जी चाय दूध फट गया तो मैंने कहा अरे यह तो बड़ा मुश्किल हो गया तुम जाओ बाहर जाकर के चाय खरीद के ले आओ अब अभी ये पूरा जो थिंकिंग का प्रोसेस है कि अच्छा वह लड़का मुझे बताता है कि दूध फट गया तो क्या करना है तो बाजार में जाकर के यहां पास में ही है पीछे में ही है वो जो लारी वो गल्ला जो वगैरह होता है ना वो जहां पे ये लोग चाय बनाते हैं आसपास में बहुत सारी दुकान है तो यह दुकान वाले वहां पर वहां से चाय मंगवाते हैं तो मैंने जो इसको कहा सोच करके कि अरे भाई बिना चाय पिए हुए क्लास कैसे होगा मजा नहीं आएगा तुम जाकर के चाय लेक आओ ये कॉन्शियस लेवल का है अभी मुझे यहां पर मैगजिन एडिट करना होता है एवरी मंथ एक नया मैगजिन का इशू पब्लिश होगा यहां से तो इस महीने में 21 जून को इंटरनेशनल योगा डे है तो दो महीने पहले से ही मैंने यह सोचना शुरू कर दिया था कि अरे भाई योगा डे है तो क्यों नहीं एक योगा स्पेशल इशू बनाते हैं कि जिसमें रिलेटेड टू योगा सब बातें होगी और आजकल तो पता है ना कि विदेश का यह जो अनुकरण करके हम लोग क्या सोचते हैं योगा अर्थात कि यह आसन और प्राणायाम यह फिजिकल एक्सरसाइज जो कि फिटनेस के लिए की जाती है तो इस तरह से एक जनरल ट्रेंड चल रहा है तो मैंने सोचा कि इस इशू में सब तरह से योगा को कवर किया जाए यहां पर ठाकुर योग के बारे में क्या कहते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं मां क्या कहती है अपने जो अन्य डायरेक्ट डिसाइल है महापुरुष महाराज राजा महाराज वह क्या कहते हैं फिर आज का जो मॉडर्न अ योगा के बारे में किस तरह का रिसर्च हो रहा है अपनी हेल्थ के लिए हेल्थ भी तो एक इंपोर्टेंट चीज है हम हेल्थ को नेगलेक्ट क्यों करें ऐसा हम क्यों कहे भाई बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जिनको कि हम प्यूरिस्ट कहते हैं कि एकदम योग का एक ही अर्थ है वो है आध्यात्म आपकी उन्नति के लिए आप यदि ऐसा सोचते हैं कि स्वास्थ्य के लिए योग करना वो तो बहुत गलत हो गया ऐसा कुछ सोचने वाले लोग है मैं तो कहता हूं कि ठाकुर ने जैसे कहा ना कि वो कोई कोई लोग होते हैं जो शहनाई होती है उसमें से एक ही राग बजाते हैं एक ही वो सुर बजाएंगे ठाकुर कहते हैं मैं तो सभी तरह के राग रागिणी सभी तरह के सूर बजाऊंगा सब तरह से मैं आनंद करूंगा तो मेरा भी ऐसा है सोचना कि आप ऐसा क्यों सोचे कि भाई योगा सिर्फ आध्यात्मिक जीवन के लिए है ऐसा भी कहिए कि शारीरिक स्वास्थ्य का भी तो एक इंपॉर्टेंस है स्वास्थ्य यदि बिगड़ता है तो आप आध्यात्मिकता पर ईश्वर पर थोड़ी ना आपकी नजर रहेगी ठाकुर का जो उदाहरण है कि यदि दांत में दर्द हो रहा है है तो आपका मन सब समय उस दांत के ऊपर में जाके रहेगा आप फिर ठाकुर का नाम लेंगे यह कथामृत क्लास करने को बैठेंगे किसी भी चीज के ऊपर में ध्यान नहीं होगा ध्यान रहेगा दांत के ऊपर में तो भले हेल्थ के रिलेटेड स्वास्थ्य के रिलेटेड उसके ऊपर में भी आर्टिकल कुछ-कुछ है तो एक संपूर्ण रूप से एक पूरा स्पेक्ट्रम कवर करके योगा का इशू मैंने पब्लिश किया इस महीने के लिए तो ये जो पूरा मेरी विचार सरणी है वो एक नॉर्मल कॉन्शियस प्लेन पे हुआ है तो अभी तक स्वामी जी ने दो प्लेन बता दिए एक तो सबकॉन्शियस जो कि रिफ्लेक्सिवली है कॉन्शियस प्लेन जहां पर हम कु सब कुछ प्लान करके करते हैं आज का दिन सुबह को उठ कर के ही मेरे मन में जैसे ही मैं ऑफिस में आता हूं मैं यह सोचना शुरू कर देता हूं कि मेरे यहां पर जो छह सात लोगों का स्टाफ है तो सभी स्टाफ आकर के पूरा दिन भर क्या-क्या कार्य करेंगे तो अभी जैसे मान लीजिए कि चार-पांच किताबें हैं जिसके ऊपर में यहां पर एक साथ में काम हो रहा है तो एक को बोल दिया तुम इस किताब का ट्रांसलेशन करना दूसरे को बोल दिया तुम इस किताब का प्रूफ रीडिंग करना तीसरे को बोल दिया कि इस किताब का जो टाइटल कवर है वो डिजाइन कर देना फिर मैगजीन है तो मैगजीन में ये ये आर्टिकल हमको कलेक्ट करने हैं तो वो कार्य तुम चालू कर देना यानी कि ये पूरा प्लानिंग करना सब कुछ जागृत अवस्था में जो कुछ भी करते हैं वह सब कॉन्शियस लेवल पर हो जाता है तो स्वामी जी ने दो लेवल्स बताए आई रीजन आई जज आई थिंक आई सी द प्रोस एंड कॉनस ऑफ सर्टेन थिंग्स यट ट इज नॉट ऑल यह जो कॉन्शियस लेवल है वह क्या है आई जज यानी कि मैं निर्णय लेता हूं आई थिंक अर्थात कि मैं सोचता हूं आई सी द एंड कॉनस ऑफ सर्टेन थिंग्स कोई एक ऐसी चीज है जिसका गुड पॉइंट यह है बैड पॉइंट यह है उसका एडवांटेज यह है डिसएडवांटेज यह है प्रो एंड कॉन कोई भी चीज का यह मैं ठीक करता हूं यह सब आई रीजन मैं सोचता हूं यह सब कुछ मैं कॉन्शियस लेवल पर करता हूं यट दिस इज नॉट ऑल किंतु यह सब मैंने यह जो बताया सबकॉन्शियस लेवल और कॉन्शियस लेवल दिस इज नॉट इनफ वी नो दैट रीजन इज लिमिटेड हमको पता है कि रीजन या तो विचार शक्ति की एक सीमा है रीजन कैन गो ओनली टू अ सर्टेन एक्सटेंट विचार सिर्फ एक ही लेवल तक जा सकते हैं एक ही सीमा तक जा सकते हैं बियोंड दैट इट कैन नॉट रीच एक सीमा के परे विचार नहीं जाते द सर्क विदन चच इट रंस इज वेरी वेरी लिमिटेड इनडीड जो वर्तुल जो सर्कल जिसके भीतर में यह विचार कार्य करते हैं उसकी परिधि बहुत ही छोटी है यह सर्कल बड़ा ही छोटा है यट एट द सेम टाइम फिर भी साथ-साथ ही वी फाइंड फैक्ट्स रश इन टू दिस सर्कल हमको पता है कि कभी-कभी कहां से मने एक हमको पता ही नहीं है वैसे विचार इस वर्तुल के भीतर में दौड़े चले आते हैं हमको पता है कि हमारी जो बुद्धि शक्ति है यह इतनी ही लिमिटेड है किंतु कभी-कभी हमारे जीवन में कुछ ब्रेक थ्रू होते हैं साइंस की लैंग्वेज में इसको कहते हैं ब्रेक थ्रू कोई साइंटिस्ट सोच रहे हैं सोच रहे हैं एक स्टोरी है छोटी सी बढ़िया स्टोरी है एक साइंटिस्ट था वह बहुत लंबे समय से आर्टिफिशियल रबर खोजने के बारे में वह कार्य कर रहा था अभी पता है रबर ऐसा है ना जो कोई कुछ कुछ तरह के पेड़ होते हैं उसमें से यह रबर जो है उसका जो रस है वह सीक्रेट होता है यानी वोह कुछ एक पार्टिकुलर टाइप का रस उस उसमें से निकलता है जिसमें से यह रबर बनता है किंतु यह जैसे-जैसे यह इंडस्ट्रियल एज है वो डेवलप होती गई उसका एडवांसमेंट होता गया तो रबर की जरूरत बहुत जगह प पड़ने लगी तो यह जो नेचुरल सोर्स में से जो रबर मिलता है उसका तो एक लिमिटेड है कि आप कितना रबर कल्ट वेट कर पाएंगे तो एक साइंटिस्ट था वह सोचता है कि मुझे आर्टिफिशियल रबर डेवलप करना है तो वोह क्या करेगा उसका जो बेसमेंट था उसके घर का वह जो बेसमेंट यानी कि गुजराती में कहते हैं भोरू मुझे अभी पता नहीं तहखाना हिंदी में कहते हैं तहखाना तो जो भी है तो बेसमेंट में वो उसने एक लेबोरेटरी बनाई और लेबोरेटरी में वो केमिकल बहुत सारे इकट्ठा किए और फिर केमिकल को मिक्स करके वो एक्सपेरिमेंट कर रहा है अभी जब केमिकल मिक्स करेगा तो कभी विस्फोट भी होगा तो सब तरह का एक्सपेरिमेंट करना है कभी बदबू भी आएगी कभी आग भी लग जाएगी कभी कब क्या होगा कुछ ठीक नहीं तो ये साइंटिस्ट की बीवी जो है वो बड़ी नाराज हो गई एक दिन बोलती है कि ये सब समय यहां पे अब धमाका होता रहता है बदबू आती रहती है आग लग जाती है क्या सब पागलपन रखा है है तो वो क्रिसमस का दिन था शायद मोस्ट प्रोबेबली बारिश वो जो स्नो फॉल हो रहा था बर्फ की बारिश हो रही थी तो उस उसकी बीवी ने उस दिन नाराज होक के उसके लेबोरेटरी और यह साइंटिस्ट जो है एक्सपेरिमेंट करता ही जा रहा है करता ही जा रहा है वो आर्टिफिशियल रबर डेवलप ही नहीं हो रहा है तो यहां पे उसकी बीवी नाराज है यहां पे उसके एक्सपेरिमेंट में सक्सेस नहीं मिल रही तो बेचारा क्या करेगा वो जिस तरह से आदमी पिस जाता है ना चक्की में ऐसा वो बेचारा उसके के साथ में ऐसा हो रहा था तो एक दिन उसकी बीवी को बस उसका हो गया मने नाराज इतनी हो गई कि फेड अप हो गई जैसे कहते हैं और उसने क्या किया बेसमेंट में जाकर के जितने केमिकल केमिकल सब बेचारे ने मेहनत करके इकट्ठा किए थे सबको उठा कर के बाहर में गार्डन में फेंक दिया जहां पे यह स्नो फॉल हो रहा था तो अभी यह साइंटिस्ट बेचारा बड़ा ही विमर्श हो गया बड़ा ही हतो उत्साह हो गया उसकी कैरियर भी दांव प लगी है फैमिली लाइफ भी अभी वह हाथ से जाने को बैठी है वह बेचारा क्या करेगा तो रात भर तो ऐसी बीती सुबह को जाकर के गार्डन में देखा तो एक्चुअली उसका एक्सपेरिमेंट में जो प्रॉब्लम था जिस वजह से रबर नहीं बन रहा था वो था कि उसको टेंपरेचर को कम करना जरूरी था वह बात इसको पता नहीं थी अभी रात को जो केमिकल वहां पे बर्फ के ऊपर में फेंके तो बर्फ में तो टेंपरेचर कम हो जाता है ऑटोमेटिक वहां पर बर्फ बन गई और रबर बन गई गया तो वो देख कर के एकदम वो आश्चर्य जकित हो गया अच्छा तो यह रबर बनाने का यह फार्मूला है यानी कि सोच लीजिए कि इतने दिनों से वह एक्सपेरिमेंट कर रहा था कुछ नहीं हो रहा और एक दिन की ऑटो मने एक्सीडेंटली इसको बाहर में फेंक दिया और एक्सीडेंटली उसका रबर बन गया किंतु यह जो विचार उसके मन में इमीडिएट स्ट्राइक हुआ कि हां इसको टेंपरेचर कम करने की जरूरत है जिसकी मदद से यह रबर बनेगा फटाक करके वो फिर से लेबोरेटरी में गया दूसरे नए केमिकल परचेस करके ले आया और उसको ठंडा किया और रबर बन गया यह जो आर्टिफिशियल रबर बना उसने अपनी रबर की फ कंपनी चालू की जिसका उसने अपने खुद के नाम से उसका नाम रखा हम सबको उस कंपनी का नाम पता है वैसे उसका नाम है गुड ईयर टायर साइंटिस्ट का नाम था गुड ईयर और उसने गुड ईयर बोल कर के टायर की कंपनी स्टार्ट की तो देखिए कभी-कभी कैसा होता है ये जो हमारी जो विचारों की परिधि है यह साइंटिस्ट लोग एक्सपेरिमेंट करते जाते हैं जाते हैं कुछ मने उसका अंत ही नहीं आता और वन डे सडन एक ऐसा ब्रेक थ्रू होगा कि जैसे कि उस दिन उसके सभी जो सोच रहा था जो एक्सपेरिमेंट कर रहा था जो एक्सप्लोर कर रहा था उसका उत्तर मिल जाए साइंस में साइंस की हिस्ट्री जो है ना उसमें कभी-कभी कहते हैं एनस मिरा बिलिस अर्थात की यर ऑफ मिरेकल यह यर ऑफ मिरेकल का क्या अर्थ थे पता है एक ऐसा वर्ष एक ऐसा ईयर कि जहां पर एक ऐसा साल जहां पर ग्राउंड ब्रेकिंग डिस्कवरीज हुई है सायंस में तो यह जो है अल्बर्ट आइंस्टाइन उसके जीवन में एक एनस मिरा बिलिस ईयर ऑफ मिरेकल 1905 1905 की साल जिस साल में उसने यह स्पेशल थिरी ऑफ रिलेटिविटी खोजी वह एक बार सोच रहा है बैठ कर के उसके सडन उसके मन में विचार आया कि क्या होता है जदी मैं प्रकाश के किरण के साथ में उडू क्या ऐसा होगा कि मुझे प्रकाश की किरण स्थिर दिखाई देगी जनरली मान लीजिए कि एक गाड़ी है वो ट्रेन ट्रेन 60 किमी की गति से जा रही है तो आप यदि प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं तो ट्रेन आपको जूम करके आपकी नजर के सामने से चली हुई दिखाई देगी किंतु मान लीजिए ये रेल की जो पटरी है उसके साथ-साथ में पैरेलल एक रास्ता जा रहा है तो ट्रेन चल रही है 60 किलोमीटर की गति से और आप भी उस रास्ते पर 60 किलोमीटर की गति से एक गाड़ी में जा रहे कार में जा रहे है व कार में बैठ कर के आप ट्रेन के सामने देखेंगे तो क्या दिखाई देगा ट्रेन जैसे कि आपको स्थिर दिखाई देगी क्यों क्योंकि आप दोनों 60 किलोमीटर की गति से जा रहे हैं तो इसने सोचा कि जदी में प्रकाश के किरण की स्पीड है 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड तो मैं 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड की गति से मैं प्रकाश के किरण के साथ में उडू तो क्या मुझे प्रकाश का किरण स्थिर दिखाई देगा ों एक बहुत बड़ी बात है प्रकाश 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड यानी कितनी बड़ी स्पीड हो गई उस प्रकाश का किरण को स्थिर देखना यह भी तो एक मने नजारा होगा ना तो इमीडिएट उसको उत्तर मिला नहीं प्रकाश का किरण हम जितनी ही गति से गति करें उसका स्पीड कांस्टेंट रहेगा यानी कि उसके बाद में बहुत कुछ स्टार्ट होता है साइंस और मैथमेटिक्स उसकी डिटेल में जाने की जरूरत नहीं कि तो यह जो उसकी इनसाइट थी कि आप कितनी ही गति से चले जाए प्रकाश का किरण की गति एक ही फिक्स ही रहेगी इट यूनिवर्सल कांस्टेंट ऑफ स्पीड उसके ऊपर से उसने ये स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी खोज निकाली तो ये जो एक स्ट्राइक होता है एक ब्रेक थ्रू होता है एक सर्कल में हम दौड़ते रहते हैं दौड़ते रहते हैं और सडन एक एक जैसे कि एक ऊपर में से कहीं पर स्वर्ग में से जैसे कि एक विचार अपने मन में आ जाता है हमारे पुराने ऋषि मुनियों को देख लीजिए गंगा के किनारे है न कि कहीं हिमालय पहाड़ पर है बैठ कर के ध्यान कर रहे हैं जप कर रहे हैं ईश्वर चिंतन कर रहे हैं और सोच रहे हैं कि इस ब्रह्मांड का स्वरूप क्या है यह जो मेरा मैं खुद हूं मेरा खुद का सही स्वरूप क्या है क्या मैं यह पंच महाभूत का बना हुआ देह हूं क्या मैं यह पंच ज्ञानेंद्रिय हूं क्या मैं यह पंच कर्मेंद्रिय हूं ना कि यह पंच प्राण हूं ना कि यह मन बुद्धि चित्त अहंकार रूपी यह क्या मैं मन हूं ना कि फिर इससे परे और कुछ मेरा सही स्वरूप है तो एक दिन सडन यह ब्रेक थ्रू हुआ मेरा सही स्वरूप मुझे दर्शन हो गया पता चला मैं वही सनातन अजर अमर आत्मन हूं जिनका गान ऋषि मुनि युग युगांतर से करते आ रहे हैं वो जो परम पुरुष नारायण जिसको कि हम मानते थे कहीं स्वर्ग में बैठे हैं नहीं वही नारायण मेरे ही हृदय में विराजमान है वह नारायण ही मेरा सही स्वरूप है यह जो ब्रेकथ्रू अद्वैत वेदांत का यह भी एक हमारा मन की सीमा यह जो एक सर्कल के भीतर में हमारे मन घूमते विचार घूमते रहते हैं ये सर्कल टूट गया जैसे कि क्षण भर के लिए और कहीं एकदम स्वर्ग में से कहीं हवा में से ये उच्च विचार हमारे मन में प्रवेश किए वही दक्षिणेश्वर में देखिए कि ठाकुर रो रो करके मां को पुकारते हैं मां आओ दर्शन दो दर्शन दो और यदि दर्शन नहीं दोगी तो मेरा क्या होगा ऐसा रो-रो करके बच्चे की तरह पुकार रहे हैं मां दर्शन नहीं दे रही तो आखिर में एक दिन ठाकुर परेशान हो गए कहा कि जदी मां का दर्शन ना हो तो इस जीवन धारण करके फायदा क्या है इस जीवन का प्रयोजन क्या है उन्होंने मां के हाथ में से खड़ग छीन लिया और खड़ग अपने गले प रख कर के कहा कि यदि तुम मुझे दर्शन नहीं दोगी तो इसी खड़क से मैं अपना गला काट दूंगा अपना बलिदान दे दूंगा मुझे इस तरह का जीवन नहीं चाहिए जिस जीवन में तुम्हारा दर्शन प्राप्त ना हो और ऐसा करके जैसे ही खड़क को अपने गले के साथ में वो स्पर्श करवाया वैसे ही जैसे कि वह पत्थर की मूर्ति में से एक चेतन मूर्ति मां काली की प्रकट हुई ठाकुर को दर्शन दिया ठाकुर को जैसे कि आनंद के महासागर में डूब गए और वहीं पर वह समाधि स्थ हो गए यह जो एक नॉर्मल लेवल थिंकिंग में से एक सुपरकॉन्शियस थिंकिंग में चले जाना यह है सुपरकॉन्शियस स्टेट ऑफ अवर माइंड यट एट द सेम टाइम्स किंतु साथ-साथ ही वी फाइंड फैक्ट्स रश इनटू दिस सर्कल यह छोटा सा सर्कल है कॉन्शियस लेवल का उसमें कहीं हवा में से बाहर में से नए विचार दौड़े चले आते हैं लाइक द कमिंग ऑफ कोमेट सर्टेन थिंग्स कम इनटू दिस सर्कल जैसे कि एक उल्का हवा में उड़ कर के हमारे आकाश में आती है तो कैसा प्रकाश चारों ओर फिल जाता है वैसे ही ऐसे कुछ-कुछ विचार इस सर्कल के भीतर में चले आते हैं देखिए स्वामी जी ने कितना सुंदर एक उदाहरण दिया है अभी कुछ दिनों पहले एक वीडियो वायरल हुआ था स्पेन कहीं पर एक मेटराइड एक हवा में से जा रहा है तो उसने पूरा रात्रि का आकाश है ना झगमग दिया था मैंने उससे बहुत सारे वायरल वीडियो है उस घटना के अभी आई थिंक एक आद महीने पहले की ही बात है तो स्वामी जी ने एगजैक्टली वही उदाहरण देकर के कहा है जैसे कि रात्रि में अंधेरा आकाश होता है वैसे ही मैं कुछ विचार कर रहा हूं कर रहा हूं उसका मुझे कोई उत्तर ही नहीं मिल रहा उपा पाय ही नहीं मिल रहा अंधेरे में मैं भटक रहा हूं दर बदर एकाएक एक उल्का पात की तरह यह अंधेरा आकाश मेरे मन का झगमग हो गया प्रकाशित हो गया और जहां पर मुझे रास्ता नहीं दिख रहा था मुझे रास्ता दिखाई दिया कितना सुंदर एक विजुअल एक उन्होंने ये एक उपमा दी है इट इज सर्टेन दे कम फ्रॉम आउटसाइड द लिमिट लद अवर रीजन कैन नॉट गो बियोंड यह पक्का है कि यह मन के विचारों की सीमा के परे से यह सब उच्च विचार आते हैं किंतु इस सर्कल को तोड़ कर के तो हमारे विचार नहीं जा पाते द कॉज ऑफ द फिनोमिना इंट्रूडिंग देम सेल्व इन दिस स्मल लिमिट आर आउटसाइड ऑफ दिस लिमिट यह छोटे वर्तुल के भीतर में जो बाहर से जो विचार आते हैं उसका उसका जो घर है उस उच्च विचारों का यह सर्कल के बाहर ही है तो माइंड कैन एसिस्ट ऑन स्टिल हायर प्लेन द सुपरकॉन्शियस अर्थात कि इस मन का और एक लेवल है उस लेवल को कहेंगे सुपरकॉन्शियस वेन द माइंड हैज अटें टू ट स्टेट जब मन ने सुपरकॉन्शियस स्टेट को प्राप्त कर लिया है विच इज कॉल्ड समाधि जिसको कि कहेंगे समाधि परफेक्ट कंस सुपरकॉन्शसनेस जिसको कहेंगे समाधि या तो कि परफेक्ट संपूर्ण एकाग्रता परफेक्ट एकाग्रता या तो फिर अति चेतना अति चेतन अवस्था इट गोज बियोंड द लिमिट्स ऑफ रीजन एंड कम्स फेस टू फेस विथ फैक्ट्स विच नो इंस्टिंक्ट और रीजन कैन एवर नो उस कुछ इस तरह के तथ्यों के सामने आता है कुछ इस तरह के दर्शनों के सामने आता है जिसको कि हम ना ही इंस्टिंक्ट या तो फिर ना ही विचार के द्वारा पा सकते हैं समझ सकते हैं यदि हम कहे कि यह हमारा इंस्टिंक्टिव नेचर है मच्छर बैठा एक हाथ पे तो दूसरे हाथ ने बिना सोचे समझे उस मच्छर को भगाने के लिए कार्य किया मेरा हृदय ऑटोमेटिक थबक रहा है मेरा इंट टाइन मेरे हाथ पैर उसके भीतर में जो ब्लड सर्कुलेशन है ऑटोमेटिक चल रहे हैं बहुत सारी इंस्टिंक्टिव एक्शन है माइक्रो कजम लेक्चर में हमने देखा था कि बतक का बच्चा जन्म लेता है तो साथ-साथ में ही पानी में तैरना सीख लेता है पंखी का बच्चा जन्म लेता है तो साथ-साथ में हवा में उड़ना भी सीख लेता है मनुष्य का बच्चा जन्म लेने से ना ही पानी में तैरना सीखेगा ना ही हवा में उड़ना सीखेगा क्योंकि उसका वो लेवल का फिजिकल मेंटल अप नहीं है तो उन लोगों का है तो वो रिफ्लेक्टिव एक्शन जो है रिफ्लेक्स एक्शन वो भी उस सुपरकॉन्शियस को नहीं पहुंच पाएंगे ना ही ये कॉन्शियस लेवल मैं यहां पर हजार योगा इशू तैयार कर दूं सोच करके सोच करके किंतु इस योगा ईशु के भीतर में जिस कुंडलिनी का वर्णन है जिस आध्यात्मिक चेतना का वर्णन है महापुरुष महाराज ने जिस तरह से जप करते-करते मन को संपूर्ण रूप से शरणागत होने की बात कही है महापुरुष महाराज का बड़ा सुंदर था उनका एक कुत्ता था एक कुत्ता पाला हुआ था तो एक दिन वह क्या कहते हैं अपने कमरे में बैठे थे सामने ही ठाकुर की छवि है तो उन्होंने क्या कहा अपने कुत्ते के सामने उंगली करके कहा ज इशारा करके कहा जैसे यह मेरा कुत्ता है वैसे ही मैं इनका कुत्ता हूं अर्थात कि ठाकुर का ठाकुर की ओर उंगली निर्देश करके कहा इशारा करके कहा तो देखिए कि अपने को किस हद तक उन्होंने ठाकुर के श्री चरणों में में शरणागत कर दिया है तो मैं ऐसे हजार योग इशू यहां पर पब्लिश करता रहूं किंतु महापुरुष महाराज ने जिस लेवल की शरणागति की बात की है वह कोई इजली मेरे मन में नहीं आने वाली उसके लिए पता नहीं जन्म जन्मांतर की तपस्या जप साधना त्याग यह सब करना पड़ेगा ईश्वर की कृपा चाहिए तब वह मेरे मन में आएगा तो यह दोनों चीजें इकट्ठा होकर के सबकॉन्शियस या तो कॉन्शियस लेवल के विचार दोनों मिलकर के भी यह सु सुपरकॉन्शियस तथ्य है सुपरकॉन्शियस फैक्ट है सुपरकॉन्शियस विजन है ना ही उसको प्राप्त कर पाएंगे ना ही वहां तक पहुंच पाएंगे वह हमारे भीतर में कॉन्शियस लेवल पर कब आएंगे जब या तो हमारी तपस्या हमारे मन की एकाग्रता उस लेवल की हो गई या तो फिर ईश्वर की कृपा हुई तभी वह हायर लेवल से विचार या दर्शन इस कॉन्शियस लेवल पर पदार्पण करेंगे अवतर करेंगे अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते शांति शांति शांति हरिस श्री राम कृष्णर्पण मस्तु क्योंकि क्या है पता है हम लोग सुपर कॉन्शियस चीजों को कॉन्शियस लेवल पर समझने का प्रयास कर रहे हैं इसलिए थोड़ा सा डिशन होगा और कंट्रक्शन या तो इस तरह के प्रश्न हमारे मन में होने ही चाहिए जिससे कि पता चलता है कि हम इसके बारे में सोच रहे हैं सीरियसली सोच रहे हैं जैसे ठाकुर कहते हैं ना कि आप किसी को रसगुल्ला है जैसे कि उसका टेस्ट का हजार वर्णन कर लीजिए उससे अपने मन को संतोष नहीं मिलेगा जब तक आप रसगुल्ला खाएंगे नहीं तो वैसे ही यह हम लोग जब तक विचार करते रहते कि हां ईश्वर ऐसे होंगे ईश्वर वैसे होंगे वेदांत के बारे में पढ़ते हैं यह सोचते हैं इस तरह से क्लासेस करते हैं जब तक ईश्वर के दर्शन नहीं होंगे अपने मन को सुकून नहीं मिलेगा और वो जो सुकून मिलेगा ना वो इमीडिएट पता चल जाएगी कि हां यही वह चीज है जिसके लिए मैं जन्म जन्मांतर से भटक रहा था यह जो ठाकुर का वोह कहानी है कि एक गांव का आदमी शहर में आया बोला कि राजा को मिलना है अच्छा ठीक है तो उसका मित्र उसको लेकर गया राजमहल में तो वहां पे एक के बाद एक कमरे पसार हो रहे हैं और बढ़िया-बढ़िया वस्त्र पहने बड़े-बड़े वो दाढ़ी मूछ वाले लोग बैठे हुए हैं तो जैसे ही एक कमरे में जाते हैं तो गांव का वो लड़का पूछता है अच्छा क्या यही राजा है वो बोला नहीं यह राजा नहीं दूसरे कमरे में जाता है और बढ़िया कपड़े पहनने वाला एक आदमी बैठा है ये राजा है नहीं ये राजा नहीं तीसरे कमरे में जाता है आखिर में जब राज दरबार में पहुंचता है असली राजा को देखता है तब पूछने की जरूरत नहीं रहती तब भीतर में से ही उसको आता है हां यही राजा है जिस तरह के उसकी भव्यता जिस तरह से उसकी शान जिस तरह प उसका चेहरे पर जो एक्सप्रेशन तो व इंस्टिंक्टिवली हम समझ जाएंगे कि यह अब तक विचार के क्षेत्र में थे अब विचार के बाहर आ गए देखिए विचार से हम बहुत दूर तक जा सकते हैं है ना विचार से हम बहुत दूर तक जा सकते हैं जैसे कि अभी इंस्टिंक्ट और जनरल विचार मैं जब मैं जब यह ठीक किया कि मुझे पढ़ाई लिखा खाई नहीं करनी और उस समय 12थ में था 12थ की एग्जाम के बाद की ही बात है और ठीक किया कि अभी करियर वगैरह उसमें जाने की मेरी इच्छा नहीं है मैं समाज सेने मुझे गांव में जाकर के काम करना है रूरल डेवलपमेंट उस समय में गांधी जी को बहुत पढ़ता था गुजरात में गांधी जी का प्रभाव है तो थोड़ा तो मैं गांधी जी को बहुत पढ़ता था गांधी जी कहते हैं कि सब शहर के लड़के गांव में जाए और गांव का कल्याण करें तो मैंने ठीक कर लिया मैं भी गांव में जाऊंगा छोटे से गांव में एक झुपड़ी बनाऊंगा वहां पे वो जो बच्चे होंगे गरीब लोगों के किसानों के उनको मैं पढ़ाई लिखाई वो क माने वो वो सब थोड़ा सा सिखाऊंगा तो ऐसा सोच के मैं बैठा था तो मेरे दो मित्र व सालों से जिनके साथ में मैं पढ़ाई लिखाई करता था सब कुछ करता था दो मित्र उसमें से एक मुझे मिलने के लिए आया वो मुझे बताता है वो मुझे क्या कहता है कि अरे तुम पागल हो गए हो क्या यह सब जो तुम कर रहे हो धर्म सेवा यह सब तो बूढ़े होकर के रिटायर होने के बाद करने की चीज है अभी तो तुम अपना मेहनत करो करियर बनाओ मां पिता की सेवा करो यह सब करो यह सब क्या पागलपन किया है अभी देखिए कि यह जो मेरा विचार था कि मुझे एक महत कार्य में अपना जीवन समर्पण करना है नहीं कि एक जो मेरे मित्र जिस तरह से कैरियर बनाते हैं फैमिली लाइफ करते हैं उसमें मुझे जाना है तो वो तो मैंने कॉन्शियस लेवल पे ही किया अभी कॉन्शियस लेवल पे ही तो मैंने धीरे-धीरे करके मैंने ठाकुर को पढ़ा कथामृत पढ़ा समझा और ठाकुर का नाम जप करने की श शुरुआत की मान लीजिए कि एक ऐसा दिन आएगा मैं आशा रखता हूं प्रार्थना करता हूं कि ऐसा दिन आएगा इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में अगले जन्म में नहीं तो हजार जन्मों के बाद जब भी कि साधना करते करते ठाकुर का दर्शन हो तो वो जो ठाकुर का दर्शन करने की जो अंतिम जो ये जो है मंजिल वहां पर जाने की जो प्रथम जो स्टेप्स है वो तो मैंने कॉन्शियसली ही लिया है कॉन्शियसली ही ठीक किया है कि कैरियर नहीं बनाना व कुछ महत कार्य करना है वहां से कदम बढ़ाते बढ़ाते चलते चलते चलते साधना करते करते जन्म जन्मांतर से आखिर में एक दिन ठाकुर का दर्शन होगा ऐसी मैं आशा रखता हूं तो वो ठाकुर का दर्शन जो होगा सुपरकॉन्शियस लेवल प किंतु उसके बारे में जो निर्णय है उसके बारे में जो पूरा जीवन को यह करना है वह तो मैंने कॉन्शियस लेवल पर ही किया है देखिए जब दर्शन होता है तो उसको आप यह डिफरेंशिएबल नकी एकाग्रता का परिणाम है कि ज्ञान से विचार य कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान चार योगों से हमको ईश्वर की प्राप्ति होती है ईश्वर दर्शन होता है किस पार्टिकुलर पथ को फॉलो करके यह हुआ या किस पार्टिकुलर साधना का यह परिणाम है ऐसा हम डिटरमाइंड नहीं कर पाएंगे क्यों जैसे कि मान लीजिए कि अभी मैं एक सब्जी बनाता हूं तो सब्जी में मैंने थोड़ा सा यह चीनी भी मान लीजिए डाला थोड़ा सा सब्जी भी डाला थोड़ा सा हल्दी भी डाला थोड़ा सा ये मिर्ची भी डाला अभी मैं मैं जब ये सब्जी खाता हूं तो क्या मैं यह ठीक कह पाऊंगा कि यह पार्टिकुलर ये इसका टेस्ट है मिर्च का ना कि ये हल्दी का ना कि ये हिंग का ना कि सब टेस्ट मिक्स होकर के ये सब्जी बनती है तो दर्शन जब होता है हम यह ठीक नहीं कर पाएंगे कि शरणागति का परिणाम है कि यह त्याग का परिणाम है ना कि एकाग्रता का परिणाम है दर्शन दर्शन वहां पर यह सब डिफरेंशिएबल प है वो सब मिट जाते हैं जैसे गीता में कहा है ना पुरुषार्थ और परमार्थ ये सब माने यहां पर हम लोग परमार्थ कहते हैं विदेश में उसको लक कहते हैं मने ये जो सेकुलराइजेशन न्यूटन ने ही उसके ऊपर में चिंतन करके मनन करके पुरुषार्थ करके यह लॉ ऑ ग्रेविटेशन खोज निकाला बाकी सब लोग वैसे ही सफर जन किरा तो बहुत अच्छा उसको खा लो खा लिया होगा राट एक एक कफ्स ऑफ इवेंट्स होता है एक आप फॉर्चूनेटली ईश्वरीय कृपा होने से बाद में सब कुछ होगा नहीं जैसे सबसे बड़ा उदाहरण है यह अपने आध्यात्मिक जगत में यह जो ये जो था नित्य गोपाल तो उसको ठाकुर ने कहा था साधु सावधान वो एक किसी एक लेडी डिवोटा थी उसके घर जाता था वो लेडी डिवटी का उसके ऊपर में मातृ भाव था तो ठाकुर ने कह दिया य बाद में यही मातृत्व ही ये तल्य हो जाएगा मैंने मैंने वो क्या है कि मातृ भाव व सब बातें अच्छी है कि हमेशा एक यह रखना है आपको डिस्टेंस रखना है सबसे तो यह नहीं समझ करके वह समझा नहीं आखिर में वह उसका पतन तो हुआ ही था तो यह देखिए कि ठाकुर खुद कहते थे उसकी परमहंस अवस्था है जब ठाकुर कीर्तन करते थे उसको बार-बार समाधि होती थी ही सच अ फोर्चुनेगीएंट्स एक आपको बुट दे देगा तो पुरुषार्थ नहीं होने से आप उसको टिका नहीं पाएंगे मेंटेन नहीं कर पाएंगे जिसको हम कॉन्शसनेस कहते हैं या तो अपना मन कहते हैं उसको नियमन करने के लिए उसको मैनेज करने के लिए चार योग है स्वामी जी ने बताए हैं कर्म ज्ञान भक्ति और ध्यान चार रास्ते हैं रामकृष्ण मिशन का यदि आप सिंबल देखेंगे ना तो उसमें आपको वो चारों दिखाई देंगे तो चारों रास्ते से जैसे स्वामी जी कहते हैं राजयोग की उसके के प्रारंभ में कि चारों रास्तों से या तो चारों में से कोई भी रास्तों का कॉमिनेशन करके हम अपने मन को संयमित कर सकते हैं नॉट नेसेसरी कि आप कर्म योग ही करें भक्ति योग ही करें आपका प्रकृति कैसा है किसी किसी का एक्टिव प्रकृति होता है तो वह कर्म योग करे किसी किसी का इंट्रोवर्ट नेचर होता है तो व ज्ञान योग करें किसी किसी का भावुक नेचर होता है इमोशनल नेचर होता है तो वे लोग भक्ति योग करें किसी किसी का मन बहुत ही स्थिर होता है तो वे लोग राजयोग करें या तो फिर ध्यान एकाग्रता यह सब करें आपकी प्रकृति के अनुसार अभी जैसे देखिए कि कफ एंड कोल्ड यह सर्दी जुकाम हो जाता है तो उसकी बहुत सारी मेडिसिन होती है किंतु आप जब डॉक्टर के पास जाएंगे तो व जब एग्जामिनेशन करेंगे एग्जामिनेशन करके अपनी प्रकृति के अनुसार वो डायग्नोज करेंगे डायग्नोसिस करेंगे कि एगजैक्टली क्या हुआ है क्या डेंगू हो गया है ना कि ये ये हो गया है मलेरिया हो गया है क्या-क्या रीजन है जिसकी वजह से बुखार आता है फिर उस रीजन के अनुसार मेडिसिन देंगे तो प्रकृति के अनुसार औषध दिया जाता है अदर वाइज औषध कहो ना मेडिसिन कहो वो तो हजार है मुझे भी पता है कि कफ या होने से बुखार होने से यह मेडिसिन लिया जाता है किंतु फिर मैं अपने से जाकर के मेडिसिन नहीं लूंगा हमेशा मैं किसी एक एक्सपर्ट डॉक्टर को दिखाऊंगा उसके वो मुझे डायग्नोज करेगा वो कहेगा आपकी ऐसी प्रकृति है यह पार्टिकुलर रोग है इस पार्टिकुलर रोग की यह पार्टिकुलर दवाई जैसे कि किसी का डाइजेशन अच्छा होता है तो वह ऑयली चीज है ना कि स्पाइसी खाना है वह खा सकता है किसी का डाइजेशन इतना अच्छा नहीं है तो उसको बॉईल चीजें खानी होती है तो डाइजेशन कैसा होता है उसके अनुसार आहार ग्रहण करना होता है डायबिटीज हो गया है तो शुगर नहीं खाना है ब्लड प्रेशर ज्यादा है तो नमक नहीं खाना है यह सब चीजें हम प्रकृति के अनुसार करते हैं तो साधना भी ऐसी है सभी साधनाएं का विवरण अपने शास्त्र में भी है अपने राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य में भी है प्रकृति को देख कर के हमको अपनी पार्टिकुलर साधना सिलेक्ट करनी है भाव मुखे था ठाकुर को दोदो बार इस तरह से आदेश मिला था भाव मुखे था अर्थात की कॉन्शियस सुपर कॉन्शियस की बाउंड्री है बॉर्डर लाइन है वहां पर रहो पूरी मानव जात को रास्ता दिखाओ वह रामानुज का है रामानुज के गुरु को मंत्र दिया गुरु ने रामानुज को मंत्र दिया कहा कि यह मंत्र किसी को देना नहीं यह मंत्र बड़ा ही सिद्ध मंत्र है तो पहला ही काम किया वह सबको चिल्ला चिल्ला करके मंत्र बताना शुरू कर दिया तो यह साधना करो यह मंत्र लो आप सभी लोग सिद्ध हो जांगे