swami Adbhutananda : Sri Ramakrishna as we saw him
सो सी आर रीडिंग फ्रॉम दिस बुक श्री राम कृष्ण देव इसे ओम sthapa का सर्वधर्म स्वरूप सी आर रीडिंग ला तू महाराज डिस्क्रिप्शन सेलिब्रेटेड इन वेस्ट बंगाल की सेलिब्रेशन डेट वैसे अलसो डी फर्स्ट ईयर डेट आई अटेंडेड डी फेस्टिवल इट पानी हर्टिंग विद डी मास्टर डट इसे श्री रामकृष्ण एंड हो rekauns दिस रीमेंस इसे लेटर स्वामी अद्भूतानन्द हिज से फर्स्ट ईयर 1883 अटेंडेड पानी फेस्टिवल विश्राम कृष्ण राखल भावना एंड आदर्श वेट इन रामबाबू scarez राखल गोस्वामी ब्रह्मानंद रामबाबू वैसे हाउसहोल्डर देवोटी हाउसहोल्डर डिसीप्ल मिनी आधार देवोतीस ऑफ डी मास्टर अलसो अटेंडेंट गोस्वामी वास्ते एंड मास्टर सुद्दनली बेगिन तू सिंग विथ हिम ऑल ऑफर्स स्टार्टेड तू सी मास्टर गो इन भाव समाधि है ब्रीदिंग हैंड्स रेडिक मोड में पीपल रश तू टेक डी डस्ट ऑफ हिज वेट इन अन डायलॉग इन उपरोड रामबाबू से तू मी लाटो डोंट ट्री तू स्टॉप पीपल टच हिम एंड बिग ब्लेस्ड बट आई डिड'टी ओबे हिम फॉर आई न्यू डेट इफ यू जस्ट एनीबॉडी टेस्टिंग समाधि ही वुड एक्सपीरियंस deribal पेन इट लास्ट थ्री ऑफर्स डेट इस स्वामी अद्भुत आनंद जी राखल bhaugunath एस्कॉर्टेड हिम श्री राम कृष्ण फ्रॉम डी ग्राउंड तू डी पार्लर डियर वाज वैन हाउस नियर बाय कंटिन्यू तू टच हिज फीट दें डू यू नो व्हाट रामबाबू dateful ऑफ डस्ट फ्रॉम डी ग्राउंड एंड ट्रस्टेड तू डी मास्टर्स फिट एंड दें स्टार्टेड तू डिसटीब्युटेड अमोंग द पीपल एसोसिएटेड इन पानी इन अन बंगाली और इन हिंदी डी देयर आर में ग्रुप ऑफ सिंगर कीर्तन सिंगर हु वुड गदर देयर एंड देयर विल बी सोंग्स ऑफ गोद एंड गोडसे सर मैनली ऑफ कृष्ण एंड राधा एंड धर विल बी कीर्तन अलांग विथ कीर्तन दे विल बी डांस असेट्स सो ठाकुर डी मोमेंट ही स्टार्टेड लिसनिंग तू ऑल दिस कीर्तन इवेंट इन समाधि एंड व्हेन ही वेंट इन समाधि एवरीवन रिलाइज्ड दिस इस वैन महापुरुष अमोंगस्ट सी रेयरली सी anevan गोइंग इन समाधि विरेंस लॉट ऑफ डिस्क्रिप्शन अबाउट इट डेट यू आर दिस इस डी housema दे विल फुल लाइक दिस इस डी डिस्क्रिप्शन ऑफ समाधि रेयरली अन्योन इन अवर लाइफ सी डेट पर्सन इन समाधि इन रियलिटी विद ओर नो ऑल दिस सिंगर एंड डांसर एंड देवोतीस ह्यूज क्राउड गदर ऑन डी बैंक ऑफ गंगा एंड दें इन डी मैच ऑफ डेम ठाकुर वेट इन नौ सी कैन इमेजिन डी पेड़ अमोनियम डेट विल ब्रेक आउट evriven इस रशियन हर एंड देर और डेट गोद हिमसेल्फ अन कृष्ण हिमसेल्फ इस अराइव्ड ऑन डी प्लैनेट अर्थ अगेन इन डी फॉर्म ऑफ दिस सिंपल मैन दिस पुर ब्राह्मण ही इसे डी पुजारी ऑफ काली टेंपल इन दक्षिणेश्वर एवरीवन इस रशियन तू टच ही स्पीड एंड देयर इस अन तपेश एंड देयर इस अन रियल डेंजर ऑफ ठाकुर गेटिंग क्रस्ट इन डी रश ऑफ डी क्राउड डट वैसे वैन प्रॉब्लम विथ बेड कर्म बेड संस्कार नेगेटिव sanskaaraaj टच ठाकुर अन्य रिंग वेट आपको रीजन संबदी ठाकुर फिल्म टेरिबल पेन बिकॉज हिमसेल्फ हिज डायरेक्टली कनेक्टेड विद डी ब्रह्मज्ञान सो इफ अन पर्सन टच यू सीन इस नेगेटिव करमास एंड विल इंपोर्ट ब्रह्मज्ञान तू दिस पर्सन सो दिस पर्सन विल ग्रेटली बेनिफिट हिज करमास etsetra विल ब्रेकडाउन हिज करमास विल वॉश आवे बट ठाकुर विल हैव तू सफर डोज करमास इन हिज बॉडी एंड हिज तू फिल्म टेरिबल पेंट सो दिस यंग बॉयज दे वांटेड तू से ठाकुर एंड टेक हिम तू अन नियर बाय प्लेस बट व्हाट हैपेंड डेट अमाउंट डिसीप्ल तू ग्रुप वैन इसे डी ग्रुप ऑफ यंग मॉनेस्टिक डिसेबल्स अंदर हाउसहोल्डर डिसेबल्स सो यंग मॉनेस्टिक डिसीप्लस न्यू डेट एवं था ठाकुर इस इन आउटर ठाकुर इसे ठाकुर अलसो इस अन ह्यूमन ठाकुर इस अन कांबिनेशन ऑफ अन ह्यूमन एंड गोद एंड ही हज ऑल दिस हायर स्पिरिचुअल क्वालिटीज लाइक परिग्रह ऑल दिस ग्रेटर कोलाइटिस आर देर इन ठाकुर आते डी से टाइम ही सफर्स इन अन वे अन ह्यूमन वुड ठाकुर सफर डी पेन ऑफ डी पासिंग ओवर फिर रिलेटिव्स ही हज कंपैशन हिल्स लव टुवर्ड्स एवरीवन एल्स ही हैज अलसो बॉडी एंड लेटर ऑन ही haidance एंड ही सफर्ड फिजिकल अलसो सो ही इस अन गोद इन डी लाइक यू नो यू पुट से वेरी नाइस सरबत अन वेरी मिल्क इन अन वेसल स्टील ग्लास सो यू कैन से डेट लिक्विड इस मिल्क बट ग्लास इस तिल राइट सो डी से वे इस अन फिजिकल बॉडी इसे अन गोद हे अराइव अवतरण डी वर्ड इसे ऑफ डी रन डेट इस वही देयर होल्डर सो डी बॉडी ऑफ दिस यंग मॉनेस्टिक डिसीप्लस एंड दिस फोल्डर हाउस होल्डर प्रैक्टिस थॉट्स बॉडी इस जस्टिस कम फॉर डी batorment ऑफ ह्यूमन एंड इन ऑर्डर तू हेल्प पीपल आईएफ यू सपर्स ए लिटिल फिजिकल डीओईएसएन'टी मैटर डीओईएसएन'टी मैटर बिकॉज इट इस ठाकुर ड्यूटी तू टेक आदर्श सीन एंड गिव डेम पुण्य हिज ऑन पूर्णिया एट सेटेरा सो देयर वेयर तू क्लियर डिस्टिंक्शंस हैव तू क्लियर ग्रुप अमोंग डी ठाकुर्स सो रामचंद्र दत्त वांटेड तू कीप ठाकुरद्वारा एंड लेट एवरीवन गिव देयर साइंस डियर बेड करमास तू ठाकुर एंड टेक ठाकुर्स ब्लेसिंग्स एंड रिसीव आत्मा ज्ञान फ्रॉम ठाकुर एंड यंग मॉनेस्टिक disciphers वांटेड तू से हिम सो लेटर ऑन व्हाट हैपेंड डेट दिस यंग बॉयज वेयर एबल तू से ठाकुर टेक हिम आउट ऑफ दिस क्राउड आउट ऑफ दिस अमोनियम रश एंड देयर वाज अन डेंजर ऑफ रहीम ट्रैंपलिंग नियर बाय सेफ इन हाउस ऑफ अन देवोटी बट वुड रामचंद्र डीड ही तुक ऑफ फिश फुल ऑफ डस्ट फ्रॉम ठाकुर एंड हिट डस्ट डेट डस्ट तू ठाकुर स्वीट डेट मेंस नौ डेट इस इट होलीडेज व्हाट सी कॉल इन हिंदी चरण राज सो दिस होली डस्ट स्टार्टेड थ्रोइंग एवरीव्हेयर एंड अपॉन होम एवर ब्लेस्ड बाय ठाकुर सो दिस वैसे डी क्लियर डिस्टिंक्शन डेट हेड इमर्ज लेटर ऑन इट ठाकुर ग्रुप ऑफ डिसीप्लस बट एस फॉरेस्ट ठाकुर हिमसेल्फ अस faristed रामकृष्ण हिमसेल्फ ही नेवर केप्ट अन्य वैन हु वाज जेनुइन एस्पायरेंट ही हेड नेवर रेसिस्टेड फ्रॉम गिविंग डेम अन्य ब्लेसिंग्स और टीचिंग्स एवं डी टाइम ऑफ टाइम ऑफिस डेथ टाइम ऑफिस महासमाधि ही पास्ड आवे ही अटेंड mahasamundhi इन अगस्त 1886 एवं व्हेन डी टाइम वैसे अप्रोचिंग ही हेड ए कैंसर इन हिज थ्रोट एंड ही कंडत ए वैन स्पीक प्रॉपर्ली हिज बॉडी हेस बिकम लाइक यू नो स्केल्टन ऑल है मसल्स एट सेटेरा हेड मेल्टेड आवे ही वो सो सी डेट ही कैन नॉट एवं सेटअप फ्रॉम हिज पेट एवं इन डी टेरिबल कंडीशन यूज्ड तू गिव अन्य वैन हु वुड कम तू हिम ही विल गो ऑन टीचिंग हिम अस मच अस आई कैन इफ यू कैन नॉट स्पीक दें ही विल जेस्चर और ही विल से समथिंग इन वेरी इन ऑडिबल वॉइस बट ही और ही विल टच हिम टेक है बेड करमास एवं डोज हिज बॉडी इस सफरिंग सो मच यू विल टच हिम टेक केयर बेड करमास तिल डी एंड ऑफिस लाइफ ठाकुर थिएटर हु वांटेड तू हैव ब्लेसिंग ऑफ ठाकुर हु वांटेड तू हैव दर्शन ऑफ ठाकुर बट सी न्यू डेट ठाकुर हेड अन कैंसर एंड ही वाज लिविंग इन काशीपुर एंड हिज प्रोटेक्टेड बाय ऑल दिस यंग डिसीप्लस दिस यंग बॉयज हु विल नेवर लेट अन पर्सन हु इसे अन सिन्नर लाइक हर लेट एप्रोच ठाकुर बिकॉज आउट ऑफ हिज कंप्लीशन ठाकुर विल टच बेड karmave सी विल बी लेफ्ट साइड बट ठाकुर विल हैव तू सफर एक्स्ट्रा सो व्हाट सी डिड सी एप्रोच काली पढ़ो शोल्डर डिसीप्ल ऑफ ठाकुर काली पढ़ो एडवाइस हर तू ड्रेस अन ब्रिटिश जेंटलमैन इन अन कोर्ट एंड हेड एंड हेडिंग ऑफ फैक्ट डेट्स इंडियन वुमेन इंडियन एक्ट्रेस बिकॉज सी वैसे अन व्हाइट स्किन सो इट वज़ीर तू डिजीज हिम आगे अन ब्रिटिश ऑफिस एंड हिट तू गेट वुमेन दिस एक्ट्रेस ठाकुर निरंजनानंद जी महाराज निरंजन निरंजन महाराज hiostanding गार्ड विथ स्टिक इन हिज हैंड एंड ही वुड नेवर लेट अन्योन पास इनसाइड बट दिस काली प्रदोष वासन ओल्ड देवोते एंड दें दिस इसे अन ब्रिटिश ऑफिसर अलांग विथ ही हु विल नॉट आस्क फॉर bresingra सो ही पुट डेट इट सेफ तू लेट हिम गो तू ठाकुर सो ही लेट थे बोथ पस्त नौ दिस एक्ट्रेस व्हाट सी डिड व्हेन से वेंट तू ठाकुर सो रूम इसकी रिमूव्ड हर हेड एंड हॉट एंड कोल्ड ठाकुर डेट आई एम एक्चुअली एंड एक्ट्रेस एंड आई हैव कम हर तू सीकर ब्लेसिंग ठाकुर हार्ड डिस्क ही व सरप्राइज एंड ही वास सो हैप्पी डेट सी पीपल वांट सो में पीपल हु डेसपरेटली वांट इस ब्लेसिंग सो ठाकुर लाफ आउट लाउड एंड ही ब्लेस्ड हर एंड व्हेन दिस इंसीडेंट कम तू बी नॉन तू ऑल दिस यंग बॉयज एक्स्ट्रा बिगिनिंग बट दें अलसो लाफ टेक हो काली फॉर डी घोस्ट अन मेक अन फूल ऑफ थे सो सी तिल डी एंड ऑफ हिज लाइफ ठाकुर यूज्ड तू ब्लेस्ड दिस पीपल इन दिस वे एंड देयर इस वेरी अंदर इंसीडेंट वेरी सिमिलर इंसीडेंट इन डी लाइफ ऑफ होली मदर से थिंग होली मदर अटेंड mahasamundhi संवारे इन 1920 सो जस्ट बिफोर हर महासमाधि सी वाज वेरी इल से हद फीवर shikudent एवं सेटअप एंड सी हेड तू सफर टेरिबली हर बॉडी से हद लॉस्ट अन लॉट ऑफ वेट से थिंग इट वाज नॉट पॉसिबल तू हैव वेरी गुड ट्रीटमेंट ऑफ ऑल दिस लाइफ कंजूमिंग दिस इस सो एंड ऑफ हर लाइफ टुवर्ड्स डी एंड ऑफ फॉर लाइफ मदर हद तू सफर टेरिबली फॉर डी रिपीटेड अबाउट फीवर सो एंड फीवर एक था टाइम सम थिंग हैपेंड था मॉनेस्टिक डिसीप्लस डेडीकेटेड एंट्रेंस ऑफ मद्रास रूम एंड दे सेड डेट सी विल नेवर सी विल नॉट लेट न्यू देवोतीस एप्रोच मदर बिकॉज मदर विल गिव डेम ब्लेसिंग एंड सी विल टेक दिस साइंस एंड मदर विल हैव तू सफर टेरिबल ने इट इसे डी टाइम ऑफ मदर मा समाधि लेट हर बी आते हर इस एटलिस्ट फॉर लास्ट डेज़ ऑफ हर लाइफ एंड वैन दे व्हाट हैपेंड वैन यंग देवोटी कम तू मीत मदर सो दिस monkswagen डेट सी विल नेवर सी विल नॉट लेट अन देवोटी मीत हर सो सी विल दे विल नॉट लेट दिस बॉय मीत मदर सो दिस एमडी ही स्टार्ट ही बिकम वेरी एंग्री एंड ही स्टार्टेड शूटिंग लेट हु गिव यू डी राइट तू गोद मदर एंट्रेंस मदर लाइक अस एंड इफ यू वांट मदर दें यू आर कमिटिंग डी सीन यू आर कमिटिंग अन पाप अगेंस्ट मदर जगदंबा सो देयर वाज सच अन लाउड कोरल गोइंग ऑन इन डेट पैसेज एंड फ्रॉम हर बेड होम फ्रॉम हर रूम मदर इंक्वायर्ड डेट वही देयर शूटिंग आउटसाइड सी गो एंड चेक सो समवन वेंट एंड सईद डेट मोंक आर नॉट लेटिंग अन devotic कम एंड मीत थे सो मदर व्हाट सी डिड सी कॉल्ड इनसाइड वो स्टैंडिंग गार्ड एंड मदर टोल्ड हिम डेट हैवी कम इट रसगुल्ला इन बंगाली दिस अन वेरी नाइस आई एम राखी रोसोगोल्ला कहते हैं मेंस मदर लाइफ ठाकुर लाइफ तू बी प्रोटेक्टेड अस मच अस इस पॉसिबल अल्टीमेटली दे हैव नोट कम ऑन प्लैनेट अर्थ तो यू एंजॉय द एडमिरेशन एंड रेगुलेशन ऑफ़ द देवोतीस विवेक कंफर्टेबल लाइफ सराउंडिंग वरशिप एंड प्रणामी etsetra डी लाइफ ऑफ डी होली मैन मेड बी ठाकुर मैन स्वामी जी डायरेक्ट डिसाइड अन्य वैन इस लाइफ डेडीकेटेड तू डी वेलफेयर ऑफ डी डिसीप्ल ऑफ डी जेनुइन स्पेंस जेनुइन मोमो शो एंड दे डोंट केयर ऑफ केयर ऑन कंफर्ट्स ऑन हैप्पीनेस एंड mizoy देयर एंटीरे एम इन डी लाइफ तू हेल्प टीच एंड एलीट इस मच इस डेक्कन तू अन्य वैन दे कम तू मीत डेम सो आ दिस वाज अवर ठाकुरमार एंड स्वामीजी एंड मोर सी रीड अबाउट हिम मोर बी रिलाइज हो सच अन ग्रेट सो देयर सो ओके दिस इस डी एंड ऑफ इंग्लिश क्लास नौ सी विल स्टार्ट हिंदी क्लास यह किताब है श्री रामकृष्ण देव जैसा हमने
स्वामी अद्भुतानन्द : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा
हमने देखा इसमें से हम पाठ कर रहे हैं स्वामी adbhutanand जी जो की ठाकुर के एक सन्यासी द वो इलिटरेट भी द गांव से आए द फिर भी ठाकुर के प्रति उनका इतना गहन भक्ति था ये adbhutana इसीलिए उनका नाम भी देखिए किस तरह से स्वामी जी ने दिया है अद्भुत आनंद क्योंकि उनका लाइफ एक अद्भुत जीवन था बाकी जो सब डिसीप्ल द उन लोगों ने तो क्या है की फिलासफी पढ़ा है जैसे स्वामी जी है राजा महाराजा है वगैरा तो पहले से ही ब्राह्मण समाज में जाते द फिलासफी पड़े हैं रिलिजन क्या है स्पिरिचुअलिटी क्या है वेदांत क्या है उसे सब का एक आइडिया है वे लोग तो एक जिओ मतलब पहले से ही खोज भी रहे द गुरु को तो उन्होंने ठाकुर को गुरु के रूप में स्वीकार किया और बाद में सन्यास ग्रहण करके ठाकुर के संग में योगदान दिया वो तो चलो हम फिर भी समझ सकते हैं किंतु लाटो महाराज का वह तो चरवाहा है की लड़के द वह ठाकुर का एक जो गुरु ही भक्त द रामचंद्र दत्त उनके वहां वो नौकर द और उनका तो बुद्धि शक्ति भी इतना ज्यादा नहीं था तो वह जब मतलब बुद्धि हम जैसे हम ये भी देखने की बात है की हम बुद्धि किसको बोलते हैं सद्बुद्धि भी होती है और एक सांसारिक बुद्धि भी होती है तो सांसारिक बुद्धि का अर्थ है की हम लोग ये जो साइंस टेक्नोलॉजी है जो व्यवहार की जो चीज हैं पैसा कमाने के लिए या तो फिर ये जो प्रकृति है बाकी प्रकृति उसको समझने के लिए जो हमारी बुद्धि होती है उसको हम जैसे सांसारिक बुद्धि या तो फिर नेचुरल इंटेलेक्ट कहते हैं किंतु यह जो ईश्वर को पाने की बुद्धि है satbuddhi है ठाकुर कहते हैं ना शेख चालक की चालाकी बांग्ला में कहते हैं माने वही बुद्धि असली बुद्धि है जो की आपको ईश्वर लाभ कर सके तो वह जो satbuddhi ईश्वर मैं बुद्धि तो उनमें थी आदर वाइस ठाकुर को अपने गुरु के रूप स्वीकार नहीं करते तो उतना तो उनका था किंतु वह जो सांसारिक को जो ज्ञान उनका थोड़ा सा कम था बाहर की चीजों के बारे में तो ये सब ठाकुर द जो बाकी के डिसीप्ल है खास करके स्वामी जी वो थोड़ा बहुत मजाक भी करते द और उनको प्लेटो करके बुलाते द अभी पता नहीं उनका नाम था तो बंगाली में लेट हो करते द लेटो करके बुलाते द तो लेट उसे स्वामी जी ने प्लेटो कर दिया वो हंसी मजाक में करते द प्लेटो करके बुलाते हैं अभी प्लेटो कौन है तो वो ग्रीक फिलोसोफर है वैन ऑफ डी ग्रेटेस्ट फिलॉस्फर्स इन ह्यूमन हिस्ट्री ह्यूमन सिविलाइजेशन तो कहां ला तुम्हारा है जो की वो निरीक्षण है और कहां वो प्लेटो जो की वो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ दार्शनिकों में से एक जीना जाता है तो इससे उन्होंने इस तरह के हमारे लाती महाराज ने सन्यास ग्रहण किया तो स्वामी जी ने उनको अद्भुत आनंद ऐसा नाम दिया था क्योंकि उनका जीवन इतना अद्भुत है तो यही अद्भुत कल हमने नवभारत में जो उत्सव पणिहाती में जो उत्सव हुआ उसके बारे में हमने बात की आज महाराज कहते हैं अगले वर्ष यानी की 1884 में ऑलमोस्ट संवारे प्रोबेबली 18 अगले वर्ष भी मैं उनके साथ पणिहाती गया इस बार हम लोग नव से गए किसी ने श्री मैन से भी साथ चलने के लिए पूछा था किंतु उन्होंने इनकार कर दिया था ठाकुर ने इसलिए उनकी प्रशंसा की थी ठाकुर ने कहा उसकी समझदारी तो देखो उसने हम लोगों के साथ जाने से इनकार कर दिया ताकि हम लोगों को हम लोगों की कोई आलोचना एन कर सके उसे वर्ष ठाकुर ने सबके साथ प्रसाद पाया था और दोनों हाथ उठाकर भाव में नृत्य किया था देखिए यह भी एक बहुत ही इंटरेस्टिंग इंसीडेंट है और सब लोग जा रहे हैं तैयारी हो रही है वह प्लानिंग हो रहा है इस गाड़ी में पहुंच जाएगा उसे गाड़ी में पहुंच जाएगा ठाकुर के साथ जाएंगे तो दक्षिणेश्वर में यह सब चहल गलत है तो निश्चय मा के मैन में होगा की ठाकुर जब इतने भक्तों के साथ जा रहे हैं तो मैं भी उनके साथ जाऊं मैं भी यह जो दिव्या आध्यात्मिक नृत्य गीत वगैरा जो होगा उसका दर्शन करूं मैं भी उसमें पार्टिसिपेट करूं कीर्तन वगैरा देखूं ईश्वर का वो जो पानी हट्टी में दो रंग महाप्रभु वगैरा जो मूर्ति वगैरा होगा मंदिर होगा उनमें दर्शन करूं प्रसाद पौन किसकी ऐसी इच्छा नहीं होगी ऐसी सातवें इच्छा हो भी हो ही सकती है तो माने क्या कहा क्या किया ठाकुर को यहां पे नहीं लिखा लेकिन तुम आके जीवन में है की माने किसी के थ्रू ठाकुर के पास संदेश भेजा की क्या मैं भी आपके साथ में आऊं की पणिहाती तो ठाकुर ने क्या कहा उसको कहो की यदि उसकी इच्छा है तो आए तो मास समझ गए यदि ठाकुर चाहते की वो मैन उनके साथ में तो वो कहते की हान चलो बिल्कुल चलो उसको तो आना ही चाहिए वह भी यह सब देखे तो वो भी सीखें तो ऐसा नहीं का के कहा उसकी इच्छा है तो मैं समझ गई की नहीं ठाकुर नहीं चाहते की मैं यहां उनके साथ में जाऊं तो उसके इस बाद में मैन नहीं गई तो देखिए ठाकुर उनकी प्रशंसा करते हैं और कहते हैं की यदि हम दोनों साथ में गए होते तो हमारी आलोचना होती है यहां पे नहीं लिखा एक किंतु और एक दूसरे पर जगह पे ठाकुर ने कहा है की लॉकर बोल वे हंसो हंसी ऐसे है माने हंस और हंसी का जो जोड़ा होता है दंपति वे लोग आए हैं और ठाकुर परमहंस द तो इस तरह से वो मतलब मैन का अपमान भी हो सकता था वहां पर कटाक्ष करके लोग बोल सकते द और अभी ऐसा क्यों होने की संभावना है क्योंकि मैन तो कोई सामान्य भक्त नहीं थी की बाकी सब भक्तों की तरह ही उनको रहने खाने को मिले वह तो ठाकुर की मतलब वो तो लीला संगिनी थी ठाकुर ने स्वयं मैन की स्वार्थी के रूप में पूजा की थी शोषित देवी के रूप में और सबको पता था की मैन तो भगवती का अंश स्वयं है तो ठाकुर को जितना सम्मान मिलना चाहिए उतना सम्मान तुम मैन को भी मिलना चाहिए तो अभी इस तरह से उन दोनों को सम्मान दे रहे हैं सब भक्त लोग तो बाकी के लोग जो है वो तो वही कहेंगे की अरे ये तो ठाकुर जो है वो कहते हैं मुंह से तो कहते हैं कम कंचन त्याग करो किंतु उन्होंने तो शादी भी किया है और एक बीवी भी है उनके साथ में जिसको लेकर के वो घूमते हैं तो उनका ये जो मुंह से बोलने वाला जो संदेश है वो कर्म में तो वो पारित नहीं हुआ ठाकुर बंगाली में कहते हैं मौन मुख एक कोरा माने मुंह से जो बोलते हैं वो अपने मैन में भी वही भाव रहना चाहिए हमारे कर्मों में भी वही chhalakna चाहिए तो ऐसा तो होता नहीं है मतलब ठाकुर के जीवन में आपने ऐसा कहा देखा वो जब जब अपनी बीवी के साथ में घूम रहे हैं तो इस तरह से ठाकुर की आलोचना होना चलो ठाकुर तो यह सब सहन कर लेंगे उसके लिए बहुत ही डेंजरस चीज साबित हो सकती है और हृदय की बात पता है की मैन दक्षिणेश्वर में द उसे समय हृदय उनका सेवक था तो हृदय में मैन का कहीं पे एक दिन अपमान किया था तो ठाकुर ना हृदय को क्या बोला था की तुम यदि मेरा अपमान करते हो तो फिर भी तुम्हारे लिए क्षमा है किंतु जो मैन का तुमने अपमान किया तो तुमको इस तीन लोक में भी क्षमा नहीं है तीन लोक में भी तुम रक्षा नहीं पाओगे मैन के कृपा कोख से मध्य जो मैन काली की जो ये होता है कोक होता है क्रोध होता है तीन लोग में तुमको कोई नहीं बचा पाएगा तो इस तरह से मैन को ले जाने से मैन का यदि अपमान होता है तो जो अपमान करेगा उसको तो कितना बड़ा खतरा है तो इसलिए सब कुछ समझ करके सोच करके ठाकुर ने इस तरह से निर्णय लिया था की मैन उनके साथ में वो वहां पर पानी में हटी ना जाए वही अच्छा रहेगा तो मैन भी समझ गई और देखिए इनका जीवन जो है प्रत्येक क्षण यह जो secref जो भरा हुआ है वो इतनी छोटी-छोटी चीजों में हमको देखने को मिलता है और वेदांत में कहा है ठाकुर ने भी कहा है की कम क्रोध मैड लोभ मोह का त्याग करना है अविद्या अस्मिता राज द्वेष अभिनव वेश्या जो panchlesh है उससे हमको छुटकारा पाना है तो ये हमने वेदांत में तो पढ़ लेते हैं किंतु जो अपने जीवन की प्रतीक्षा में उसका जो इंप्लीमेंटेशन करना है उसको जो प्रैक्टिस करना है तो वो प्रैक्टिस कैसे करें बहुत बार हम समझ नहीं पाते हमको लगता है की अरे इसको तो सारे इसको इंद्रिय सुख थोड़ी ना कहेंगे इसको इसको भोग थोड़ी ना कहेंगे इसको एंजॉयमेंट थोड़ी ना कहेंगे ऐसी ऐसी चीज हम लोग करते हैं समझ ही नहीं पाते की यह सब sukshmbh भोग है यह घूमने के लिए जाना बार-बार यात्रा करने के लिए जाना भक्तों के साथ में या तो मित्रों के साथ में बहुत सारे गैप लगाते रहना बोलते रहना यह सब एवं यह जो कर्म करना यह सब जो है हमारे इंद्रिय सुख के विषय है वह हमारी इंद्रियों को सूक्ष्म आनंद प्रदान करते हैं और जब सही सही त्याग करना होता है तो हमको सब समय अपने मैन को ये एनालिसिस करता रहना करते रहना होता है की मैं यह जो चीज कर रहा हूं मैं आनंद से प्रेरित होकर के कर रहा हूं ना की मैं आउट ऑफ माय ड्यूटी जो है ड्यूटी या तो फिर साधना साधना के लिए कर रहा हूं मैं तीर्थ स्थान के लिए जाता हूं तो निश्चय ईश्वर को माने जिस तीर्थ में जाता हूं वहां के जो तीर्थ देवता है वहां के जो स्थानिक देवता है उनको प्रणाम करने से पूजा आराधना करने से मुझे पुनिया अवश्य मिलेगा उनका आशीर्वाद अवश्य मिलेगा किंतु तीर्थ यात्रा करने से यह जो आनंद भी एक साथ में जो मिलता है उसको भी हमको थोड़ा सा सावधानी से लेना चाहिए क्योंकि सभी तरह के आनंद जो है हमारे यह जो इंद्रिय सुख के यह जो सूक्ष्म स्वरूप है एक तो है ग्रॉस यह जो भोग है जिसको की हम समझ सकते हैं जैसे किसी को मिठाई अच्छा ऐसा लगता है तो वह मिठाई खाता रहता है तो इंद्रिय सुख हो गया वह तो उसको भी समझ में आता है की यह मतलब aadhyat मतलब वेदांत की दृष्टि से योग की दृष्टि से आप उसको ना खाएं इसके अलावा भी सेहत की दृष्टि से भी ये जो है बहुत ज्यादा इंद्रिय जो भोग है वो गलत है वो उससे आपको हनी पहुंच सकती है रोग हो सकता है इतना तो सबको पता है सभी लोग स्वीकार भी करते हैं किंतु यह जो सूक्ष्म आनंद जो होते हैं हमारे जीवन के हम उनको समझ भी नहीं पाते वो बहुत ज्यादा मित्रों के साथ में बैठ करके बात करते रहे उससे जो आनंद आता है अभी मित्रता तो करनी ही चाहिए हंसी मजाक तो करना ही चाहिए आदर वाइस जीवन तो क्या है एक निराशा और हताशा से भर जाएगा है वह तो है किंतु वहां पर लिमिट क्या है यह सब चीज हम अपने आध्यात्मिक पोषण की बजाय क्या वो कुपोषण तो नहीं बन जाती एक बॉन्ड 1 पॉइंट वो क्या हमारे इंद्रियों के आनंद में तो नहीं था उसके सूक्ष्म आनंद में तो नहीं प्रेरित हो जाती ये हमको सब समय ध्यान रखना चाहिए और कोई भी चीज हम ऐसा सोच करके करते हैं की नहीं नहीं यह तो साधना का एक भाग है इसको तो शास्त्र में कहा गया है की मंदिर में जाना है मंदिर में ठाकुर के साथ में बैठे रहना है वो साधुओं के साथ बात करना है यह सब तो शास्त्र में कहा गया है सब कुछ ठीक है होना ही चाहिए किंतु साथ-साथ में यह जो आयुर्वेद में कहा गया है ना की कोई भी चीज अति मात्रा में लेने से विश हो जाती है कोई भी औषध आप अति मात्रा में ले तो औषध कितना ही गुणकारी क्यों ना हो अति मात्रा में वो विश हो जाता है तो यह कोई भी है की हम चीज करते हैं तो आध्यात्मिक पोषण हमको मैंने बहुत ही इंटरेस्टिंग कन्वर्सेशन है मैं नया-नया ज्वाइन ट्रेनिंग सेंटर की बात है आपको पता है की बेलूर मठ में दो साल का ट्रेनिंग सेंटर होता है तो मैं वहां पर था हमारे बहुत ही सीनियर स्वामी जी के साथ में मेरी बात हो रही थी तो मैंने उनको कहा की देखिए मैं अपने को बहुत पूरे रखने का प्रयत्न किया हूं जब से मैं ज्वाइन किया हूं सोचने में खाने में विचारने में मैं क्या करता हूं सभी चीजों में सावधान रहता हूं जिससे की कहीं पे मेरे मैन पे कोई बुरा दाग ना लग जाए तो पता है उन्होंने पहले तो सन लिया फिर वह क्या कहते हैं किंतु देखो यह बात याद रखना की यह जो तुम अपने को पूरे रखने की बात कर रहे हो पुरी का तुमको हम करना ए जाए तो मैं तो एकदम आश्चर्य चकित हो गया हमको ठीक से बताया गया indreshup से दूर रहा करना है साधना में मैग्ना रहना है त्याग करना है त्याग करते-करते यही साधना करते करते यही जब ध्यान करते करते क्या उसका अहंकार ए जाएगा माने मतलब ये तो मैंने सोचा ही नहीं था कभी और इतने सालों में मुझे 17-18 साल हुए मैंने सही सही देखा है की ये सब चीजों का अहंकार ए जाता है और हम यह सोचना शुरू कर देते हैं की होली और दिन धाव इंग्लिश में कहते हैं की मैं बाकी लोगों से ज्यादा पवित्र हूं मैं उनसे उच्च कक्षा में और रहता हूं और वो मेरे लिए सामने तू अच्छा है ऐसा दूसरों के प्रति पिचका रह जाता है अपने मैन में अपनी खुद के साधना के बारे में हम कर जाता है तो कोई भी पोषण आप अति मात्रा में लेते हैं तो विश हो जाता है तो साधना के बारे में यह यात्रा है जब ध्यान है त्याग है सब कुछ को आप इस तरह से कीजिए की या तो वह फिर सूक्ष्म आनंद में एन परिवर्तित हो जाए की एन तो वो अहंकार में परिवर्तित हो जाए है तो यही चीज हमको ईश्वर की ओर ले जाने की बजाय वह ईश्वर प्राप्ति के रास्ते में antarray बन के रह जाएगी तो ऐसा ना हो ऐसा ख्याल रखना है एक सन्यासी के बारे में सुना था उन्हें किताब में पढ़ा था बहुत पुरानी बात है 1920 में की 1930 की जब बेलूर मठ में सब डायरेक्ट डिसाइड पाल भी द खोखा महाराज द योगेन सॉरी बाबू राम महाराज द राजा महाराष्ट्र महापुरुष महाराज द उसे समय की बात है एक लड़के ने ज्वाइन किया यंग लड़के ने बहुत ही सिंसियर था सबकी सेवा कर रहा है उसका सेवा करने की बहुत इच्छा थी महाराज का नाम में भूल गया किताब में पढ़ा था तो कुछ दिनों के बाद में उनको लगा की अरे मैं जितनी सेवा कर रहा हूं इतने मतलब मैन प्राण दे करके तो इस सेवा करने से मेरे मैन में हम कर जा रहा है तुम चलो मैं कम करता हूं यह अहंकार को छोड़ने सबको ये सब बातें उसे समय भी होती थी की साधना इस तरह से नहीं करनी है की अहंकार छोड़ने की साधना इस तरह से नहीं करनी है की आखिर में साधना का अहंकार ए जाए और छाती से प्रख्याति से हम को अहंकार बढ़ता है हमारा तो उसको त्याग करने के लिए साधना करनी है तो ऐसा ना हो जाए की त्याग का अहंकार ए जाए तो वो सब तो पहले से ही सुनता था तो बहुत सिंसियर ली सेवा करते द वो महाराज जी तो फिर उनके मैन में आया ये बात आया की सभी लोग मेरी बहुत प्रशंसा कर रहे हैं की मैं बहुत ही sincerrali सेवा करता हूं और बेलम मठ में तो पानी नहीं था बिजली नहीं था गंगा में से पानी वो बाल्टी में उठा करके रोज सुबह को लाना है तो बैक पेन भी बहुत लोगों को हो जाता था किंतु यह महाराज है एकदम मतलब बलिष्ठ द युवक है तो एकदम छोड़ दौड़ करके पानी ले आते द वो खाने में चाहिए शौच क्रिया में चाहिए सब तरह से सब कुछ वो करते द जो की सन्यासी युवा सन्यासी को करना चाहिए तो बहुत प्रशंसा भी पाते द तो बोल दिया एक दिन की मैं काशी जा रहा हूं पैदल जाऊंगा तपस्या करूंगा और ये अहंकार से बेचूंगा देखिए ये बात जो है वो सिर्फ आज की नहीं है उसे किसी भी ऐसा था की आप बहुत ज्यादा sinchali कोई कम करते हैं उससे जो प्रशंसा अर्जन होती है तो उसका भी शायद आपको अहंकार ए सकता है तो मैंने सब तरह से सावधान रहना है अब मुझे याद नहीं है की बाद में क्या हुआ वो महाराज एक्चुअली काशी गए की नहीं किंतु इस तरह से उन्हें दूसरों सन्यासी के साथ बात कर रहे द और ये बात का एक अंश मैंने पढ़ा था अच्छा अभी लाती महाराज आगे कहते हैं इसी महोत्सव में ठाकुर को ₹5 प्रणामी दी गई थी अन्य साधुओं को मात्रा एक या दो रुपए प्रणामी दी गई थी यानी की ठाकुर को समाधि प्राप्त हुई तो ₹2 की जगह ₹5 समाधि का प्राइस हो गया ₹3 एक्स्ट्रा उपहार देकर साधु को सम्मान करना एक भारतीय प्रथा है यहां पर एक्सप्लेनेशन में लिखा गया फिर भी महोत्सव के जो व्यवस्थापक द उन्होंने बहुत से जोर बहुत आग्रह किया और चुपके से राखल को रुपए दे दिए टोकरी आम और ठाकुर के लिए मिठाइयां खरीदी थी जब ठाकुर को यह पता चला तो राखल के ऊपर क्रोधित हुए और उन्होंने राखल को चेतावनी दी पुनः ऐसा कम कभी मत करना तुम्हारे स्वीकृति का अर्थ है मेरी स्वीकृति साधु को चिड़ियों के समान होना चाहिए और भविष्य हेतु कोई परी ग्रहण नहीं जो आप परिग्रह का अनुष्ठान करते हैं आपको जितना चाहिए जितना आपको यह जो जीवन निर्वाह के लिए यह जो तीन चार जोड़ी कपड़े यहां पर बहुत सारी चीज साधुओं के रूम में बहुत कम चीज रहती है मेरे रूम में बहुत सारी किताबें हैं किंतु उसको छोड़ कर के और कुछ नहीं है की अभी और कपड़े साधुओं के कमरे में देखा है की किसी भी साधु के रूप में किताबें कपड़े को छोड़कर के ज्यादा कुछ आपको दिखने को नहीं मिलेगा तो यह जो अपरिग्रह का अर्थ यह नहीं है की आप सब कुछ छोड़ दें जंगल में रहने को चले जाए किंतु यह जो जीवन निर्वाह के लिए अति आवश्यक जो चीज हैं वो रखें फिर आप इंस्टीट्यूशन में रहते हैं इंस्टीट्यूशन का अपना एक वर्क फ्लो है इंस्टीट्यूशन के अपने एम से ऑब्जेक्टिव से जिसमें की हम जुड़ने हैं जैसे इतने सारे भक्त यहां पर आते हैं तो कोई भी कम करने के लिए बाहर जाने के लिए उनको गाड़ी मिल जाएगी ऑफिस में बैठकर कम करने के लिए बहुत ही अच्छी ऑफिस की सुविधा रहेगी हमारे यहां पर भंडार है बहुत अच्छे से प्रसाद मिलेगा सबको मिलेगा ठाकुर का कम करने के लिए इस तरह की सुविधा यहां पर उपलब्ध किया की गई सन्यासियों के लिए भी भक्तों के लिए भी सबके लिए और हमारा हॉस्पिटल है हमारी यहां की डिस्पेंसरी में डेली 900 से 1000 तक पेशेंट का ट्रीटमेंट होता है बहुत ही अध्ययन अस्पताल है एकदम बहुत ही महंगे जो इक्विपमेंट्स होते हैं डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के वो सब यहां पे रखे गए हैं तो सेवा करने के लिए पूजा करने के लिए जो भी चाहिए यह सब आश्रम में उपलब्ध है किंतु यह जो हमारा जो व्यक्तिगत जीवन जो है सन्यासी का यह हमारे भक्त का भी इस तरह से होना चाहिए की जो की जो चीज एकदम एसेंशियल है वह हमारा व्यक्तिगत यह हो और अच्छा ठीक है ऑफ कोर्स आप कहेंगे की आप संसार में रहते हैं आपको तो ऐसा नहीं है की बीमार हुए तो यहां से पैसा मिल जाएगा आपकी बीमारी के लिए आपकी ट्रीटमेंट के लिए तो आपको पैसा चाहिए पैसा कामना पड़ेगा बैंक बैलेंस रखना पड़ेगा यह जो इंश्योरेंस वगैरा लेना पड़ेगा आपको कंफर्टेबल बैंक बैलेंस नहीं है तो फिर रिटायर हो करके बुद्ध हो करके आपके साथ में क्या होगा वो सब तो चिंता करनी है ऐसा नहीं है की वो सब चीजों का त्याग करना है किंतु त्याग जो होता है वो हमेशा मैन से होता है ये तपस्या भी मैन से होती है त्याग भी मैन से होता है और शारीरिक त्याग करना शायद इतना संभावना हो क्योंकि हमको तो इस जमाने में पहले ऐसा होता था ना की बहुत सारी चीज जो है वो आकर के जुब जाते द क्योंकि अभी आज के जमाने में ऐसा होता है की गवर्नमेंट के रेगुलेशंस वगैरा होते हैं तो वह सब चीजों को ध्यान में रखकर के जॉब है अपना बिजनेस है सब कर करके मैन से त्याग करना है और इसीलिए जो फिजिकल तब भी एक सूक्ष्म आनंद हमको मिलने लगता है तो त्याग होता है मैन से तपस्या होती है मैन से एंजॉयमेंट भी मैन से ही होता है इन यह जो अहंकार भी मैन से ए जाता है तो इसीलिए हमारी जो pariparshak अवस्था क्या है उससे भी ज्यादा हमारे मैन में क्या हो रहा है उसके बारे में हमको सब समय chaukanne रहना है और ठाकुर तो त्यागियो के राजा द लातों महाराज ने एक पैसा ले लिया और वो फिर ठाकुर की एक बहुत अच्छी दूसरी भी कहानी है यह जो यदु मलिक के बारे में हमने बात किया और ये दो मलिक का गार्डन हाउस पास में ही था तो ठाकुर वहां पे जाते द yaduvan लेके तो धार्मिक सज्जन व्यक्तित्व है अभी अपने बिजनेस में कितना भी वो गोलमाल करते हो ठाकुर के पास में एक सिंसियर के रूप में उपस्थित होते द inspirants के रूप में ठाकुर भी उनको प्रयास करते द तो एक दिन उनके वहां पर ठाकुर ने बात-बात में बोल दिया की मुझे पेट में दर्द हो रहा है तो फिर वो यदु मलिक ने क्या किया उसे समय तो अफीम देते द पेट का दर्द वगैरा पेन किलर के रूप में अफीम उसे किया जाता था तो राजा हमारा साथ में द तो अफीम उनको दे दिया तो अच्छा मैं भूल जा रहा हूं की एक कैसे हुआ था बात ऐसा था की शायद yadumalli को पता नहीं था और और किसी ने राजा महाराजा परफ्यूम दे दिया हो या ठाकुर को पता नहीं था जो भी है वो properally वो अफीम नहीं लिया गया था तो ठाकुर जो वापस ए रहा है sadanasionally उनको अंधेरा दिखने लगा नज़र के सामने वो रास्ता नहीं देख का रहे चलो वो जैसे की पूरे दिशाहीन हो का रहा है तो राजा महाराज दर गया बोला गया रे ठाकुर को ऐसा क्यों हो रहा है तो ठाकुर ने बोला क्या तुमने वहां से कुछ लिया है घर मलिक की बिना आज्ञा के बिना परमिशन के तो बोला हान यह अफीम है वो शायद उनकी जो नौकर है उसमें उनको दिया है तो ठाकुर ने बोला तुम अभी वापस लेकर आओ मैं उसको प्रॉपर वे में उनको यह चीज नहीं मिली है मैं उसको ग्रहण नहीं कर पाऊंगा तो राजा महाराजा गए फिल्म करके ठाकुर को फिर से सब कुछ दिखने लगा तो ये जो सही सही त्याग करते हैं तो ठाकुर बोलते हैं जी मैन बचाले पाप पड़ते देवेन माने बचाले पापड़ा माने की उनका जो उनका जो जीवन है वो गलती से भी गलती नहीं कर पाएंगे वो जो स्वामी जी की बात है और ठाकुर बोलते हैं मैं पैसों को छू नहीं सकता और बिस्तर के लिए पैसा रख दिया ठाकुर बैठने को जाते हैं एकदम खड़े हो गए जैसे किसी ने काटा हो पे बिच्छू ने काटा हो गलती से भी गलती नहीं करने देंगे ठाकुर आपको छतिया अपनी साधना में अपने त्याग में सिंसियर है वह इसीलिए मतलब ठाकुर का सब कुछ एक्सट्रीम था वो साधना भी करते द तो इस तरह से साधना करते द की जैसे उनके शरीर में परिवर्तन ए जाए जो हनुमान भाव सब कुछ उनका एक्सट्रीम था हम तो कहते हैं की मैन से साधना करनी है ठाकुर अपने शरीर मैन प्राण सब कुछ दल के साधना करते द तो उनके शरीर में भी इस तरह से परिवर्तन आता था जैसे हमको मैजिकल लगे लगे की मिरेकल हो रहा है की क्या है इवोल्यूशन जो है पूरा इवोल्यूशन को वो चेंज कर देते द जो हनुमान भाव की दसी भाव की साधना करते द तो अपने अपने आप को इस तरह से उन्होंने ढाल दिया था की जैसे वो वही महावीर हनुमान है की नीला प्रसन्न में रेखा है की जैसे जो हनुमान को जो एक पूछ होती है तो वैसे ही उनकी करोड़ रज्जू का जो आखिरी वह जो मैन का था जो आखिरी करोड़ रज्जू थी वो लंबी होना शुरू हो गई थी जैसे की उनको पूछ निकल रही हो इस तरह से उन्होंने अपने मैन प्राण सब कुछ डालकर के उन्होंने ये साधना शुरू कर दी थी की वो हनुमान है भगवान राम के अनुज और उनका जो जीवन है संपूर्ण रूप से उनके श्री चरणों में समर्पित है तो इस तरह से साधना करने से इवोल्यूशन जो है यह जो प्रकृति है वह भी आपके मैन के वश में ए जाती है जो जनरली क्या होता है की शरीर बीमार होता है तो मैन से कुछ करने की इच्छा नहीं रहती आज मुझे रात को नींद नहीं आई है या आज बुखार है तो मेरा मैन भी इस तरह से की कुछ लिखने की कुछ कम करने की इच्छा नहीं हो रही है जो की मुझे करना चाहिए तो जैसे की ये जो शरीर है जो प्रकृति है जड़ प्रकृति हमारे मैन को कंट्रोल करती है ये बात हमने सब जगह पे देखिए अपने जीवन में ठाकुर का कैसा था या हमारे जीवन में भी हो सकता है की यदि हमारा ये जो विल पावर है यह जो संकल्प शक्ति है साधना है वो इतनी दृढ़ कर सके हम यदि तो ये जो जड़ प्रकृति भी है वो हमारे बस में ए जाएगी ठाकुर कहते हैं सत्य वचन जो बोलते हैं वो उसका उतना उसकी वाणी में पावर ए जाता है वह कुछ कहता है तो पहाड़ तक चल जाएंगे आकाश गिर जाएगा आकाश टूट जाएगा बाहर ताल जाएंगे ऐसा उसका जो ताकत है उसकी वाणी में ए जाता है जो की सत्य वचन की यह जो प्रैक्टिस करता है साधना करता है तो इस तरह से यह जो हमारे पूर्वजों ने यह जो वेद है उपनिषद है वहां पर जो साधना के बारे में ये जो विवरण लिख के रखे हैं वो आज तक हमको लगता था की अरे वो शायद उन्होंने उसे समय अनुभव किया हो या तो उन्होंने कल्पना करके लिख हो किसको पता वो सही की नहीं है आज हमने आज के आधुनिक युग में मॉडर्न आगे में ठाकुर के जीवन में यह सब चीजों को चरितार्थ होते हुए देखा है तो आज इतना ही हम कल फिर से मिलेंगे जय राम कृष्ण