Swami Vivekananda
तले स्वामी विवेकानंद बोल छे और बेस्ट क इस डन ओवर ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस इस एक्साइड व्हेन वे आर विदाउट थॉट ऑफ सेल जो ग्रेट जीनियस लेटेस्ट ओपन ओवर सेल्स तू डी वन डिवाइन एक्टर और लेट हम एक्ट इन तू नथिंग ओवर सेल्वेस वे ऑलरेडी तू आईएफ वे आर सक्सेसफुल दें आईटी बिल इंक्रीज ओवर एगो और आईएफ वे आर अनसक्सेसफुल दें आईटी बिल विकम डी सिविलाइजेशन आईटी बिल वे कैन अवर पोजीशन सोशली और फाइनेंशली और इनफ नंबर ऑफ पीपल आर नोट वर्किंग हार्ड इन अप दें आईटी बीकंस डी सिविलाइजेशन इसे आईटी हैपन विद इंडिया डेट व्हेन दिस स्टार्टड टीचिंग डेट वे डू नोट नीड तू क डेट मैच अब ग्रामीण नितनोटेक पीपल शुद्ध शुड नोट क हार्ड इन डी फील्ड और एवरीवन शुड विकम मोंक बिकॉज़ बाय वर्किंग इन संसार यू आर ओनली इंक्रीजिंग दिस चेंज ऑफ डेज व्हेन बुद्धिस्ट स्टार्टड टीचिंग डेट व्हाट हैपन देवर विथ तू क्राइसिस फर्स्ट ऑफ जो ओवर सिविलाइजेशन विकम वीक बिकॉज़ नो वंस वर्किंग हार्ड इन अप और सेकंड व्हेन एवरीवन गेदर्ड हूं आर नोट एलिजिबल तू विकम ए मोंक इन डी मॉनेस्ट्रीज डी मॉनेस्ट्री करप्शन स्टार्टड और आईटी वे कैन डी इंस्टीट्यूशन ऑफ सन्यास डेट इस वही स्वामी जी मिडिल बटर वे इस आईटी इसे टूट इन गीता क विदाउट अन्य एक्सपेक्टेशन ऑफ रिजल्ट कर्म करना है किंतु विश्वकर्मा के फल की अपेक्षा नहीं रखना है वे हैव तू क बट नेवर तू एक्सपेक्ट रिजल्ट ऑफ डी फ्रूट ऑफ डी क डेट इसे वही स्वामीजी सेस डेट दिस टीचिंग वज ऑलरेडी देवर इन डी गीता और आईएफ वे कैन डू दिस सेल्फलेस क दान आईटी बिल एक्चुअली मेक ओवर क शार्पर मोर क्रिएटिव मोर इफेक्टिव मोर लोंगर्लास्टिक दिस इसे दी ट्रू वे ऑफ वर्किंग दिस इस डी मोस्ट इफेक्टिव वे ऑफ वर्किंग और स्वामी जी से लेटेस्ट ओपन ओवर सेल्स तू डी वन डिवाइन एक्टर और लेट हम एक्ट और दो नथिंग अवर सेल्स आईएफ इन अवर ऑन हार्ट सपोज आईएफ वे थिंक डेट यस दिस ठाकुर हिमसेल्फ इस टेलिंग मी आस्किंग मी तू क यू नो व्हाट हैपन वे स्वामी जी व्हेन ही वस्त्रादे ऑन डी रॉक इन डी कन्याकुमारी इन डी ओसियन नियर डी कन्याकुमारी ही वज मेडिटेटिंग ऑन डी रॉक और है वास थिंकिंग ही वज इमेजिंग मेडिटेटिंग अपन डी एंटीरे इंडिया हिस्ट्री और कलर और एवरीथिंग डेट व्हाट वैसे डेट वज एन टाइम सत्य युग और ऋषि इस यूज्ड तू वॉक अपन डी दिस होली सॉइल ऑफ ओवर मदरलैंड और दें दिस स्टार्टड और एवरीथिंग स्वामी विवेकानंद श्री राम कृष्णा हिमसेल्फ अपीयर्ड और पॉइंटेड तू डी वेस्ट और सेट डेट यू बिल हैव तू को देवर नो वे नो दिस रिपीटेडली दत स्वामी जी रिक्वेस्टेड बाय में पीपल राजा ऑफ खेतड़ी दिस राजा ऑफ लिंड और जी मदरसे डिसाइड्स डेट मैं स्वामी जी यू शुड को तू डी वेस्ट देवर इस एन वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन बट स्वामी जी नेवर कमिटेड हिमसेल्फ तू गोइंग तू डी वेस्ट वही बिकॉज़ ही वांटेड हज एन साइन फ्रॉम ठाकुर दिस साइन ही रिसीव इन कन्याकुमारी ऑफ कोर्स वेट कन्याकुमारी बिफोर इवेंट तू दी चेन्नई सो बट ही नीडेड दत साइन दत वंश ही रिसीव ठाकुर्स कमांड दें ही डिसाइड यस आईटी इस ही कैन ही इसे बिलिंग तू को तू आईटी इस नेसेसरी पर हम तू को तू डी वेस्ट तू अटेंडेंस पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन नो हेड ही गान देवर विदाउट रिसीविंग ठाकुर्स ब्लेसिंग दें व्हाट फूड हैव हैपेंड वेरी सक्सेसफुल प्रीचर नो डाउट इन पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन बट आफ्टरवार्ड्स व्हाट हैव हैपेंड धर्म चक्र प्रवर्तन जी रिवॉल्यूशनाइजिंग ऑफ दिस रिलिजियस वर्ल्ड बिकॉज़ डी युगल संधि और ओल्ड युग दत पासिंग दिस प्रीवियस युग और इट्स रिलिजियस प्रैक्टिसेज इट्स स्पिरिचुअल प्रैक्टिस थे नीडेड तू बी रिन्यू रिफ्रेशड और डी नीडेड तू बी री प्रेजेंटेड बिफोर डी पीपल दिस अलोंग विथ दिस चेंजिंग ऑफ डी युग फ्रॉम डी काली युग तू डी सत्य युग कॉम दिस धर्म चक्र प्रवर्तन दिस रिवॉल्यूशन इन डी रिलिजियस वर्ल्ड सो आईटी वज स्वामी हिंदू ओवरसीज परसू ओवर ऑन रिलिजन निवेदिता और हर इंट्रोडक्शन तू डी कंप्लीट क से वेरी वेरी ब्यूटीफुल एक्सप्रेस सही इसे डेट वेयर स्वामी विवेकानंद स्टूडियो अप तू स्पोक इन डी वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन ही वांटेड तू टॉक अबाउट हिंदुइज्म बट वही डी टाइम ही फिनिश्ड न्यू टूरिज्म वास बोर्न सी सच ए ब्यूटीफुल एक्सप्रेशन स्वामीजी वांटेड तू टॉक अबाउट हिंदुइज्म नोट आउट अबाउट डेट और ही टुकड़ अबाउट हिंदुइज्म बट व्हाट ही डिड हिट तू काउंट दी एसेंशियल प्रैक्टिस ऑफ हिंदुइज्म या पुटिंग एन साइड जो दिस ड्रास जो दिस यू नो सुपरस्टिशन जो डीज अननेसेसरी एन ट्रेडीशंस डेट हिंदुइज्म हेड एक्वायर गदर थ्रोट एज थ्रोट मिलेनियम सो स्वामी जी पट साइड दोस्त अननेसेसरी ट्रेडीशंस ट्रेडीशन इस गुड व्हेन आईटी इस एवरी ट्रेडीशन इसे एप्रुपरिएटिड सो पर एग्जांपल्स व्हाट फूड हैव हैपेंड डेट आईएफ डी राजपूत किंग इस किल्ड इन डी फील्ड ऑफ मेटल दें दिस मैसेंजर बिल कम बैक तू डी पैलेस और नो कुछ इनवेडर्स आर कमिंग तू डिस्ट्रॉय डी कैपिटल सो व्हाट वुड डी किंग डू सही वुड परफॉर्म जोहार सही वुड लीड ह्यूज बोनफायर और सही वुड जंप इनसाइड आईटी अलोंग विथ जो अदर वेमन फ्रॉम डी पैलेस बिकॉज़ डेट आईटी इस आईटी इस बटर तू दी बर्निंग इन डी फायर दें तू फल इन डी हाथ ऑफ दिस इनवेडर्स मैं बटर तू बी डेथ इस बटर दें हमिलिएशन सो डेट वज डी बिगनिंग ऑफ दिस जोहार प्रथम डी सती प्रथम एवरीथिंग बिगड़ ड्यूरिंग दिस डार्क एज बट तू कप कंटिन्यू दिस सती प्रथम टुडे वुड हैव बिन वेरी डेंजरस पर जो डी वूमेन सो डेट इस वही आईटी इसे नेसेसरी तू रिफ्रेश थे रिलिजन इन पर एवरी युग दिस एसेंशियल टीचिंग ऑफ रिलिजन इस जिवन इन डी उपनिषद और दिस उपनिषास हैव बिन टोमेटो ब्रह्मास्त्र और दिस उपनिषद टीचिंग ह्यूमन पॉपुलर इन गीता सो दिस थ्री टेक्स्ट उपनिषद ब्रह्मास्त्र और गीता आरती फंडामेंटल फाउंडेशन टेक्स्ट ऑफ हिंदुइज्म उपनिषद आर कॉल्ड श्रुति प्रस्थान ब्रह्मास्त्र इस कोल्ड स्मृतिप्रस्था और सॉरी ब्रह्मा सूत्र इस कॉल्ड न्याय प्रस्थान और गीता इस कॉल्ड स्मृति प्रस्थान सो दिस श्रुति समृति न्याय उपनिषद गीता और ब्रह्मास्त्र आईटी इस कॉल्ड दिस थ्री प्रस्थान को आरती फाउंडेशन टेक्स्ट ऑफ डी उपनिषद और वॅटीवर इस नोट इनसाइड विद इन दिस प्रस्तावना और आगे आईटी इसे एक्सप्लेन बाय लेटर अवतार दें आईटी शुड नोट फॉर्म एन पार्ट ऑफ ईटरनल सनातन धर्म सेलिब्रेशंस दिस दिस वरशिप ऑफ वेरियस गॉड सेंड एप्रुपरिएट आगे एप्रोप्रियेट साइकोलॉजी एप्रोप्रियेट देश कल पत्र व्हेन दिस पर्टिकुलर टाइम दिस पर्टिकुलर प्लेस दिस पर्टिकुलर टाइप ऑफ परसों पर दिस पर्टिकुलर टाइप ऑफ परसों स्पेसिफाई सम स्पेसिफिक साधना सो स्पेसिफिक साधना पर दें डोरा जनरल साधना इन दिस जनरल साधना वे नो डेट त्याग और सत्य दिस तू आर डी ग्रेटेस्ट फाउंड दिस तू अर्थ कर फाउंडेशन कर एलिमेंट्स ऑफ अवर प्रस्थानांतराया रीड अन्य ऑथर बुक बेस्ट ऑन प्रस्थान और दे बिल नेवर टेलर तू कंप्रोमाइज विद दिस तू ग्रेट टेस्ट ऑफ डी इतिहास था इस वही स्वामी जी व्हेन ही स्टूडियो पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन ही स्टार्टड स्पीकिंग अबाउट हिंदुइज्म बट व्हेन हज हिंदुइज्म वह अपड उपनिष अधिक हिंदुइज्म इस हिंदुइज्म बाज ऑफ दिस प्रस्थान ट्रे हिंदुइज्म नोट दिस लेटर प्रैक्टिसेज विचार स्पेसिफिक प्रैक्टिसेज डिस्क्राइब से पर इन बंगाल देवर आर डर इस एन विष्णु मूवमेंट इन गुजरात जैन और स्वामी नारायण मोमेंट इन एवरी पार्ट ऑफ डी ओवर इंडिया देवर आर डिफरेंट डिफरेंट मोमेंट्स स्टार्टड बाय डिफरेंट डिफरेंट सैंड्स स्टार्टड बाय डिफरेंट डिफरेंट देवोट्स बेकर्स ईटीसी बट जो दिस रिलिजियस मूवमेंट एक्टर रूट ऑफ थे इस दिस प्रस्तनतराया ओवर उपनिषद ब्रह्मास्त्र और गीता दिस थ्री फॉर्म डी कर ऑफ हिंदुइज्म और अन्य रिलिजियस टेक्स्ट और अन्य रिलिजियस मोमेंट और अन्य रिलिजियस फीचर और अन्य स्पिरिचुअल साधना दे आर नोट एसोसिएटेड डू नोट आईटी आईएफ दे डू नोट ड्राइव एक्सटेंशन फ्रॉम दिस व्यवस्था दिन जी साधना आर नोट देवर कनॉट बी कॉल्ड तू फॉर्म डी पार्ट ऑफ अवर एसेंशियल हिंदू एस्पेक्ट हिंदू रिलिजन सेफ पर एग्जांपल जैनिज्म और बुद्धिस्म वे नो डेट नो आई वुड और काउंट सिक्स हज अप बट एट लिस्ट चायनिज्म और बुद्धिस्म दे से डेट वे डू नोट बिलीव इन डी वेदर सो देवर प्रैक्टिस आर वेरी गुड बट और ऑफ डी दे कर ऑफ हिंदुइज्म दे आर नोट पार्ट ऑफ दिस कर ऑफ हिंदुइज्म सो व्हेन स्वामी विवेकानंद स्टार्टड स्पीकिंग अबाउट हिंदुइज्म ही एक्चुअली रीडिफाइंड हिंदुइज्म बट हो जो ऑफ डेट वज पॉसिबल ओनली बिकॉज़ ही रिस्टम की कमांड ऑफ ठाकुर लेट मी को तू डी वेस्ट आई एम वेरी लर्न्ड परसों आई हैव रीड सो में स्क्रिप्चर्स और आई नो बाय डिबेटिंग जो दिस क्रिश्चियन क्रिएचर्स डेट आई कैन इजीली डिफरेंट डेम सो आईटी इस बटर तो गोइंग तू डी वेस्ट आई बिल अर्न लोट ऑफ प्रेस्टीज और ऑफ कोर्स आई बिल उसे दिस प्रेस्टीज इन ऑर्डर तू ऑन सम मनी गदर सम फंड आई बिल कलेक्ट सम फन सो केन आई कैन स्टार्ट दिस एक्टिविटीज फ्रॉम रामकृष्ण मिशन इन इंडिया बट विदाउट इस ऑर्डर ऑफ ठाकुर हेड स्वामीजी थॉट लाइक दिस और गोंद देवर दें यू वुड नोट हैव बिन स सक्सेसफुल इस ही वज लेटर ऑन आईटी वज ओनली ठाकुर्स कमांड दिस अपीरियंस दिस विजन ऑफ ठाकुर डेट मेड हम सक्सेसफुल डेट इस वही हर स्वामीजी सेफ देवर आर तू एसेंशियल कंडीशंस ऑफ सक्सेस इन अन्य किड ऑफ क फर्स्ट ऑफ जो यू नीड तू डू दिस क सेल्फलेसली और सेकंड डेट ईश्वर लेट गॉड लेट दिस इस डी देवता सीट इन योर हार्ट और फ्रॉम योर हार्ट ही बिल तेल यू व्हाट तू डू यू डू नोट हेल्प तू थैंक यू गदर एन लोट ऑफ रोड डाटा स्वामी टाइम ट्रैवल थ्रोट इंडिया की अंडरस्टैंड पर फु डेज इन क्रिश्चियन सेमिनरी इन गोवा इन लर्न फ्रॉम दिस क्रिश्चियन क्रिएचर्स दिस क्रिश्चियन मिशनरीज सो स्वामी जी वसंत सो इनोसेंट ही डिटेंड अंडरस्टैंड एनीथिंग और सुद्दनली आपको कैंप और ही वेट तू डी वेस्ट की क रियली हार्ड इन ऑर्डर तू फैमिलियर हिमसेल्फ विद दिस करंट ट्रेंड्स ऑफ डी टाइम डेट डी ट्रेंड्स विच वेयर देवर हो दिस क्रिश्चियन आर वर्किंग और दें हो धी राजस और ब्रिटिश रेजिडेंट्स इट्स एत्र आर वर्किंग दिस राजस इंडियन राजस्व यू नो डेट दे आर सच ए ग्रेट डिसएप्वाइंटमेंट व्हेन आई रीड व्हेन वे
स्वामी विवेकानन्द
रीड स्वामी अखंडानंद जी इस रिमिनिस्सन अखंडानंद जी जहां जहां जाते हैं और काठियावाड़ में गए फिर जहां गए ना वहां पे एक दो तीन जगह पे उन्होंने बहुत ही मतलब क्या है की सुपर स्टेटमेंट दिया है बहुत ही आश्चर्यजनक स्टेटमेंट दिए हैं वहां पर जाकर एक बार देखते हैं की राजा जो है वह अपनी प्रजा की खबर नहीं लेट तो फिर वो वहां पर लिखने हैं की वो राजा को जाके बोलते हैं की ब्रिटिश गवर्नमेंट की तरह आप जो है की किसी के साथ में जैसे ब्रिटिश गवर्नमेंट सबको जो है इक्वल ट्वीट करती है जिसको न्याय चाहिए उसको न्याय देती है आपके राज्य में अन्य हो रहा है आप अन्य मत कीजिए तो यह पढ़कर के ही मैं तो बड़ा ही आश्चर्य चकित हो गया हम लोग तो ऐसा सोचते हैं ना की ब्रिटिश लोग तो जो है की भारत के ऊपर में अध्यक्ष मतलब ये जो भारत का शोषण कर रहे थे तो शोषण कर रहे थे किंतु साथ-साथ नहीं हुए क्या है की उन्होंने जो उनका यह जो जस्टिस सिस्टम है यह पुलिस सिस्टम है यह कोर्ट सिस्टम है वगैरा उन्होंने इस तरह से एफिशिएंट लगाया हुआ था और उसके सामने हमारे जो हिंदू राजा थे उन लोगों के वहां पर कुछ नहीं था ना ही जस्टिस था ना ही पुलिस थी प्रॉपर्ली वह राजा की खातिर सब लोग करेंगे जिसको की यह जो मौसा है बोले मौसा है अर्थात वो जो चमचे लोग जो होते हैं वो जो राज्य दरबार में बैठे रहते हैं वो सब समय वो चमचागिरी करते राहत है वो खानदान जी एक बार कहते हैं की लिंबड़ी में वो सॉरी खेतड़ी में वो एक बार थे तो खेतड़ी में वो पता नहीं की शास्त्र की बात ए गई शास्त्र की ना किस ऐसा कोई धर्म ग्रंथ की तो एक चमचा जो एक मुसा है वहां पे बैठा हुआ था उसने बड़े मजे से राजा की तारीफ करना शुरू कर दिया की राजा जी आप तो इतने विद्वान है धर्म ग में की सब तरह के धर्म ग्रंथ जो है अपने मुक्तहस्त करके रखें हैं उसका जो सर है आपको पूरे पूरा पता है अब धर्म ग के अब बड़े ही बहुत बड़े ज्ञात है तो अखंडानंद जी सामने बैठे थे उनसे बेचारे से रहा नहीं गया वो एकदम गुस्सा हो के बोल उठे की अरे हम लोगों को सालों साल लगे हैं कितने सालों की मेहनत लगी है हमने पूरा घर छोड़ है संसार त्याग किया है सन्यासी है तब कहानी जाकर के धर्म ग के बड़े में उनको थोड़ा बहुत जानकारी दुबे रहते हैं उसके पास में पढ़ाई लिखी के लिए थोड़ा सा भी टाइम नहीं है और आप ये बोलना शुरू कर दिया की उसको धर्मग्रंथ के बड़े में बहुत अच्छी जानकारी है आपको शर्म नहीं आई इस तरह से मिथ्या बात करते हुए तो ये सुनकर के वो जो चमचा था वो मूसा है वो बड़ा डर गया उसको लगा की अभी तो राजा जो है वो कैसे किसी को खुशी भी होती है की वो राजा वैसे इतने साधुओं को इतना सम्मान देते हैं अभी यह साधु ने अपने ही हाथों पे अपने ही पैरों पे अपने हाथों से कुल्हाड़ी मार दी है वो शूटिंग इन डी फूड जैसे इंग्लिश में कहते हैं ना यह शूट हिमसेल्फ इन डी फूड अपनी ही बंदूक से अपने ही पर में गली मार दी है कहां राजा का वो सलमान का रहा था तो थोड़ी बहुत चमचागिरी करके रहने से क्या दिक्कत है किंतु अभी उसने राजा की निंदा कर दी देखो राजा क्या बोलना है अभी किंतु वह जो अजीत सिंह था वो तो स्वामी जी का शिष्य था और ऑफ डी दे कितना ही भोगी चाहे क्यों ना हो तो बोलना है की बजा फरमाया स्वामी जी बजा फार्मा दुरुस्त दुरुस्त ऐसा वह जैसे वह राजस्थान में बोलते हैं तो यह जो चमचा था वो बाद में कुछ कुछ एक दूसरे दिन या बाद में वो अखंडानंद जी के पास आया बोला की स्वामी जी अपने जोक कहा राजा को बिल्कुल ठीक कहा ऐसा ही कहना चाहिए किंतु हम लोग क्या करेंगे हम लोग तो जल्दी इस तरह से उनकी प्रशंसा नहीं करेंगे झूठ की प्रशंसा तो वो तो हमारा वो जो है वो मेहता ना बन कर देंगे हमारी नौकरी चली जाएगी हमको बाकी लोगों को बाकी लोगों की तरह किसान की तरह एन किया जो ये जो खेत मजूजूर है उनकी तरफ खेत में कम करना पड़ेगा या तो ये मोची चमार है उन लोगों की तरफ शारीरिक कर्म करना पड़ेगा तो आपने अच्छा किया किंतु एटलिस्ट आपने तो यह साहस है की राजा को मुंह पे बता देने का तो ये जो साहस है जो सन्यासी का वह भी तो देखिए की मतलब आश्चर्य की बात ये है की अखंडानंद जी के रैम्यूनरेशन पढ़ते जो पता चला है की हम लोग ऐसा कभी-कभी सोचते हैं की हमारे राजा जो थे उनके पास में यदि राज्य तो भारत की कितनी उन्नति किंतु राजाओं का भी ऐसा एक अवनति उसे समय हो गया था की पता नहीं की उनके रहते और भी इंडिया कितना नहीं डब जाता तो अच्छा है की स्वामी जी वहां पर गए स्वामी जी ने वहां पे वो वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन में भाषण दिया और अल्टीमेटली जो है जो कार्य की जो शुरुआत हुई वो इतना सक्सेसफुल हुआ वो इसीलिए हुआ क्योंकि ठाकुर उनके हृदय में बैठे हुए थे तो इस जो ये जो स्वामी जी का कोटेशन है दो इंपॉर्टेंट चीज हम सीखने हैं सर्वप्रथम तो जो है की कर्मों को कैसे सक्सेसफुल बनाया जाए इसके बड़े में दो सूत्र है सर्वप्रथम तो निष्काम कर्म किया जाए दूसरा की ईश्वर को अपने हृदय में बिताया जाए और ईश्वर की आजा के अनुसार कर्म किया जाए
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
अभी कथामृत कल हमने देखा की ऐसे हमने देखा की यह जो कथामृत का जो लिखा गया है उसके पीछे का यह जो सीक्रेट जो है की हमको इतना इजी लगता है पढ़ने में किंतु ये लिखना इतना इजी नहीं था कहां पे वो कितना सोच समझकर के ये जो है मास्टर महाशय ने सोचा होगा की सीधा-सीधी ठाकुर जी विद्यासागर के साथ में यह ब्राह्मण के बड़े में बात करना शुरू कर देते हैं तो फिर वो कोई जो है कोई इस तरह का वो जो उल्टा पुल्टा सोने वाला जो रीडर होता है उसका जो एनालिटिकल जो एक होता है वो भक्ति से कोई पढ़ने हैं कोई बुद्धि से पढ़ने हैं तो बुद्धि से पढ़ने वाला कभी प्रश्न कर सकता है की क्यों आकर के सीधा उनके साथ में वो जो है ब्राह्मण और माया के बड़े में बात करना शुरू कर दिया जो ऐसा कहा की जो सब कुछ जो है वो झूठ हो गया है जैसे कोई भी ईश्वर का नाम लो कोई भी धार्मिक यह कहो की साधना कहो की कोई भी संत कहो जो भी कहो वो झूठ हो गया क्योंकि इसके बड़े में मुझे बोला है क्योंकि ब्राह्मण क्या है वो वाक्य मनातीत है और उसके बड़े में वो जो है साधना करके शुद्ध मां जो होता है शुद्ध मां के वो गोचर है शुद्ध मां के द्वारा उनको समझ सकते हैं उनको साक्षात्कार कर सकते हैं किंतु इस जो अशुद्ध मां जो है अपना या तो फिर ये सब कहेंगे की कर्म की माया जल से बांदा हुआ ये जो मां है उसके द्वारा ब्राह्मण का वर्णन संभव नहीं है तो सीधा सीधी क्यों इस तरह की बात करना शुरू कर दी तो उन्होंने सोच समझकर के पहले तो ये देखा होगा की इस तरह का क्वेश्चन ए सकता है फिर उन्होंने उसका सॉल्यूशन भी दिया की विद्यासागर के साथ में मास्टर महाशय ने खुद ने जो बात कहीं थी जो वार्तालाप हुआ था उन्होंने उसकी पूर्व भूमिका में बंद दिया इससे दो-तीन चीज पता चलती है तो कितना सोच समझकर के कथामृत लिखा गया है दूसरा है की ठाकुर का जो अंर्तयामिता है दूसरों का मां जो समझ लेते थे की वह विद्यासागर को मुंह लेकिन जरूर नहीं है की मुझे अपने हिंदू धर्म ग पर विश्वास नहीं है या तो जो ईश्वर की ये जो 30 कोटी 33 कोटी ईश्वर के जो स्वरूप दिखाएं गए हैं तो कोई कोई बहुत सारे लोग तो आपस में ही लड़ना झगड़ना शुरू कर देते हैं वो इंद्र जो है वो विष्णु के आगे इश्क में वो कोई कंस्पायरेसी करेगा ना की वो ये अपने ही देवी देवता आपस में लड़ेंगे तो अर्थात की ऋषि मनी जो है की उनको जो कुछ समझने को गए जो समझा नहीं पाया तो ठाकुर को अभी विद्यासागर को यह बात मुंह से बताने की जरूर नहीं पड़ी ठाकुर ने सोच उनका जो मां में जो चल रहा है वो समझ लिया और सीधा-सीधा करके यह बात का दी अभी ठाकुर जो है इसके ऊपर में एक उदाहरण भी देते हैं की एक पिता के दो लड़के थे ब्रह्मा विद्या सीखने के लिए पिता ने लड़कों को आचार्य को सोप कुछ वर्ष बाद वे गुरु गुरु से लौटे आकर पिता को प्रणाम किया पिता की इच्छा हुई के इन्हें कैसा ब्रह्मा ज्ञान हुआ है वो पूछ तो उन्होंने बड़े लड़के को पूछा की बेटा तुमने तो सब कुछ पढ़ा है अब बताओ ब्रह्मा के सा है तो लड़के ने वेद में से बहुत सारे श्लोक की आवृत्ति करना शुरू कर दिया और वेद के आधार पर यह जो यह सबके आधार पर ब्रह्म का स्वरूप समझने लगा पिता चुप रहे समझ गए की उसने अभ्यास किया है किंतु उसको आत्मसात नहीं किया जैसे एवं अपना जो स्टडी में भी ऐसा होता है जो मैथमेटिक्स या तो साइंस आप पढ़ेंगे तो अभ्यास कर लिया है रात लिया है किंतु जब तक आप आत्मा साथ नहीं करेंगे उसको जो इतिहास को कॉन्सेप्ट को तब तक कोई नया डिस्कवरी या इनोवेशन नहीं कर सकते हैं यह देखिए की एक न्यूटन होगा जिसने की यह जो लॉज ऑफ डायनामिक खोज निकले आज जो है की लाखो लाखो इंजीनियर अपनी यूनिवर्सिटी में से निकलता है किसी का वो कैपेसिटी नहीं है की कोई एक नया जो लो है फिजिक्स का या तो नया आइडिया है वो खोज नहीं निकले उन्होंने रेड करके सब पास हो गया है एक न्यूटन था एक आइंस्टीन था एक हमारे जगदीश बस थे जगदीश चंद्र बस तो ये कितने ही ये जो है की साइंटिस्ट होते हैं दो तरह के एक तो है की रात लेते हैं बहुत सारे जैसे अपनी स्कूलों कॉलेज में होता है दूसरे लोग जो है की उसके उसको आत्मसात करते हैं आत्मसात करके उसके ऊपर में कोई नया इनोवेशन या डिस्कवरी कर सकते हैं तो धार्मिक जगत में भी ऐसा है यह जो कोई भी धार्मिक टेक्स्ट आप पढ़े तो धार्मिक किताब तो उसको पढ़कर के सिर्फ रात नहीं लेना है उसको आत्मसात करना है आत्मसात करेंगे तो साधना शुरू होगी जो किसी भी व्यक्ति को आप देखें की जैसे भागवत पढ़ रहा है या तो योग वशिष्ठ पढ़ रहा है या तो पंचदशी पद रहा है और किंतु साधना नहीं कर रहा तो समझिएगा की या तो वो पेशेवर वो पाठक होता है ना पाठक ठाकुर जैसे वो बंगाल में होते हैं की कहां पे इस तरह से वो जो स्वामीनारायण की कथा जैसे गुजरात में होती है की इस तरह की कोई कथा कहना नहीं है तो ऐसे लोगों को बुला लेते हैं वो किताब खुलकर के उसमें से कथा का के चले जाते हैं तो ये लोग जो है जिन्होंने कोई धर्म ग्रंथ पढ़कर के उसको आत्मा साथ नहीं किया साधना शुरू नहीं की तो उसका कोई अर्थ नहीं है तो देखिए तरह रात लिया है तो ये जो पहले लड़का जो है पिता ने देखा की दो लड़के गए ऋषि मनी के पास में किसी पाठशाला में वो सीखने के लिए तो पहले लड़के को पूछा ब्रह्मा का स्वरूप क्या है तो किताब में से रतन शुरू कर दिया वेद में से तो पिता चुप रहे फिर उन्होंने छोटे लड़के से पूछा तो छोटा लड़का सर झुका कर के चुपचाप खड़ा रहा क्योंकि छोटे लड़के को पता है की बाकी सब जितने भी ये जो ये वत सावित्री व्रत है ना की जो भी है जितने व्रत है ये जितने उत्सव है या तो जितने साधु महात्मा करना है या तो अवतार है उनके कृष्णा की लीला बहुत ही अच्छे से ये जो भागवत में दी गई है यह जो योग वशिष्ठ में भगवान राम का बहुत ही डिफरेंट टाइप का एक पाव ब्रह्म स्वरूप उसमें वर्णन किया गया है तो आप जितना ही चाहे सब बोले किंतु ब्रह्म के बड़े में बोलने जाएंगे तो बोल ही नहीं पाएंगे क्योंकि ब्रह्म क्या है मुंह से बोला नहीं जा सकता तो जब ये छोटा बेटा जो है वो सर झुका कर के चुप खड़ा रहा तब पिता ने प्रश्न हो करके छोटे लड़के से कहा बेटा तुम्ही ने कुछ समझा है ब्रह्मा क्या है वह मुझे नहीं कहा जा सकता फिर ठाकुर आगे कहते हैं मनुष्य सोचता है की हम ईश्वर को जान गए एक चींटी चीनी के पहाड़ के पास गई थी एक गाना खाकर उसका पेट भर गया एक दूसरा दाना मुंह में लिए अपने दर को जान लगी जान समय सोच रही है की अबकी बार आकर समूचे पहाड़ को ले जाऊंगी मैंने एक चींटी है वो चीनी का बहुत बड़ा पहाड़ है तो एक गाना समय ले लिया और एक दाना उसे पॉकेट में दाल दिया और अपने घर जा रही है बड़े खुश होकर के सोच रही है की नेक्स्ट टाइम जब होगी तो पूरा पहाड़ी उठे जाऊंगी किंतु कहां वो चींटी का जो ग्राहकीय करने का वो जो कैपेसिटी ग्रहण करने का कैपेसिटी और कहा ये चीनी का पहाड़ तो वैसे ही हम मनुष्य का ये जो अशुद्ध बुद्धि है मैन शुद्ध बुद्धि तो उसका तो इंफिनिटी कैपेसिटी है ईश्वर की बातें ग्रहण करने का समझना का आत्मसात करने का किंतु यह जो अपनी ये जो माया दाल में फैंसी हुई कर्म के द्वारा लिपट करने के कर्म की जंजीरों में फैंसी अशुद्ध बुद्धि है उसके द्वारा यदि हमने ये कथामृत दो तीन बार पढ़ लिया या तो फिर ऐसा कथामृत का पाठ कर लिया तो भी हमारे लिए बहुत है तो चीनी जा के समय सोच रही है की नेक्स्ट टाइम ए करके पूरा पहाड़ ले जोगी तो ठाकुर कहते हैं शुद्ध जीव यही सब सोचते हैं वह नहीं जानते की ब्रह्मा वाक्य मां के अतीत है कोई भी हो वह चाहे कितना ही बड़ा क्यों ना हो ईश्वर को जान थोड़े ही सकता है सुखदेव आदि मानव बड़े चीते हैं चीनी के आठ 10 डेन मुंह में ले ले और क्या देखिए कितनी बड़ी बात का दी किंतु यहां पे एक बात समझनी है की ऐसा नहीं है की हम ब्राह्मण का साक्षात्कार नहीं कर सकता हम ब्रह्म का साक्षात्कार कर सकते हैं हम उसको इस बुद्धि के द्वारा जान नहीं सकते यह जो है वेदांत का बहुत ही डिफिकल्ट कॉन्सेप्ट है स्वामी ठाकुर ने यहां पर हमको समझाया है की जब तक हम यह जो मां है ये जो मां बुद्धि चित और अहंकार इससे बना जो अंतरण है जब तक हम इस माया के राज्य में र रहे हैं तब तक ब्राह्मण का जो सही स्वरूप है उसके बड़े में हम तो अपने मुंह से बोलेंगे अपने हाथों से वह एक चित्र बनाएंगे जैसे ईश्वर का वो भगवान के चित्र गणेश के चित्र कोई कोई बहुत अच्छा पेंट करता है भगवान शिवा के पेंट करते हैं तो हाथ से डरेंगे मुंह से बोलेंगे कान से श्रवण करेंगे आंख से दर्शन करेंगे पैरों से वहां पर तीर्थ स्थान भ्रमण करेंगे हाथों से पुजारन से ईश्वर को जानना हमेशा जो है वो लिमिटेड ही रहेगा वो भले चाहे सुखदेव ही क्यों ना किंतु जब अपनी बुद्धि शुद्ध हो जाए मनुष्य शुद्ध हो जाए तबस्स्य करके जब हम लोग जो है की साधना करके ये जो आध्यात्मिक जीवन के उच्च से उच्चतर शोपनो को सर करना जब शुरू कर दें तब अपना जो शुद्ध मां है उसमें जो ईश्वर का प्रकाश होगा वो प्रकाश अनंत हो सकता है अखंड हो सकता है जैसे ठाकुर को यह जो है कहां-कहां की बातें पता चलती थी नरेंद्र ठाकुर के सामने आया तो ठाकुर को उसका जितने जन्म है और जितना भविष्य है भूतों भविष्यति सब कुछ जो है उनको समझ में ए गया इस धरातल के ऊपर में सब कुछ ठाकुर को समझ में ए गया था किंतु ठाकुर के देखेंगे ₹200 जब वह हमारे साथ जैसे की वह मास्टर महाशय खुद यह जो है की देखिए वो सब केस वो इंटरकनेक्शन है यहां पे ये ब्रह्मा जो है समझ नहीं सकते हैं वो टीचिंग यहां पे दिया है और प्रथम दर्शन द्वितीय दर्शन तृतीय दर्शन में देखिए की मास्टर महाशय जो है कितने विस्मित हो जाते हैं कैसे आश्चर्य चकित हो जाते हैं की अरे ये ठाकुर जो है अभी समाधि में चले जाते हैं अभी उनके चेहरे पे दिव्या जो है प्रकाश दिखाई देता है यहां पे नरेंद्र वह भजन ग रहा है और ठाकुर जो है की इतने उच्च भाव में स्थित हो गए हैं यह एक ठाकुर और अब ये दूसरे ठाकुर को बच्चों के साथ में हंसी मजाक कर रहे हैं नाश्ते कौन से क्या है की मास्टर महाशय जब ए गए दूसरे तीसरी दिन बार-बार एक ही ठाकुर के पास ए रहा है तो ठाकुर देख कर के हंस गए और क्या मजाक करते करते क्या बोलते हैं की एक मोर को 4:00 बजे एफ मिला दिया तो दूसरे दिन 4:00 बजे ठीक वो मोर ए गया फिर से अफीम खाने के लिए अफीम का जो है उसको वो लट ग गई है उसको हैबिट ग गई है तो ये ठाकुर जो की हंसी मजाक करते हैं और सबके साथ में ऐसी बातें करते हैं और दूसरे ठाकुर जो कहा वो ब्रह्मा वो दर्शन में वो ली हो गए हैं ब्रह्म साक्षात्कार में वो डब गए हैं तो ये जो ड्यूल पर्सनालिटी है ठाकुर की अभी जैसे छोटे बच्चे की तरह नरेन ने बोल दिया की वो तो जातक पक्ष नहीं है चमगादड़ है तो बेचारे इतने परेशान हो गए रोते-रोते मां के पास में जाकर के मंदिर में का रहे हैं की मां में मूर्ख हूं इसके लिए क्या मुझे धोखा दिया मेरे साथ में इस तरह का मजाक किया तो दूसरे क्षण में मैन दर्शन दे के का दिया अरे वो तो बच्चा है नरेंद्र उसको क्या समझ में आएगा तो अभी मां के सामने रो रहा है अभी हृदय में से ही मां का जो प्रकाश मां का दर्शन जो है वो हो करके दिखे रहा है ऐसा तो नहीं है की वो पत्थर की मूर्ति में मां की मूर्ति में उसमें से वो मां निकाल के आई है पत्थर की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा ठाकुर ने ही की है ठाकुर थे तो वो मूर्ति जीवंत हो गई है तो कपूर के हृदय में से ही तो वह ईश्वर का जो ब्रह्म का जो प्रकाश है वह प्रकट हुआ है तो ये जो है की ठाकुर के दो स्वरूप कहां अभी वो एकदम सर्वश्रेष्ठ आश्रम पे स्थित है पूरे जगत को जो है वो उपदेश दे रहे हैं जो विद्यासागर को मिलने से पहले रास्ते में से वो जो गाड़ी में से निकाल रहा है तो मास्टर महाशय को पूछ रही है जैसे बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह की ये जो कुर्ता है उसका बटन खुला है तो क्या मैं बटन बैंड कर डन विद्यासागर महाशय क्या सोचेंगे मेरे बड़े में तो इस छोटे बच्चे की तरह से छोटी-छोटी चीजों के लिए डर रहा है और दूसरा ही क्षण जैसे विद्यासागर को मिलते हैं भावांतर हुआ वो कहां वो उसके ऊपर में वो ईश्वर के दर्शन में वो ये हो गए और जैसे महाराष्ट्राले दे ठाकुर के तो जैसे की वो एक कहानी बोलते हैं ठाकुर की गांव में क्या होता है वो जो धन कूटने का वो जो ये होता है मशीन तो मतलब वो जो ये क्या मैं नाम भूल गया तो धन कूटने के लिए तो जैसे-जैसे वो लकड़ी का यह है ने गिरता जाता है तो एक औरत वहां पर बैठी है जिससे वो धन वह जो है वो ये हो जाता है की नीचे और धन था के तो जैसे वो धन वो जो है वो उसका ये हो गया कृष हो गया दूसरे ही वो जो ये ठग होता है धन का उसमें से वो जो औरत वो फिर से राष्ट्र खेल दे बांग्ला से बोले मैं अर्थात मुझे पता नहीं अभी हिंदी में क्या करेंगे वो रीडिंग बांग्ला में किया है तो इस शब्द सब बंगाली के ही ए जाता है तो वो क्या है की जब वो टेकी के वो पड़ता है तो धन ये फुट जाता है मतलब उसे कृष हो जाता है तो दूसरा ध्यान जो है वो हाथ से वो सिरका करके है वो दाल देती है तो वैसे ही कहां पे वो बच्चे की तरह सोच रहे हैं की कुर्ते का बटन बैंड करो ना करो दूसरी ही क्षण जो है विद्यासागर महाशय को इतने प्रख्यात इतने विख्यात कोलकाता के मतलब ये प्रतिष्ठित व्यक्ति उसको इस तरह से ज्ञान दे रहे हैं जैसे की वो खुद जगतगुरु और विद्यासागर एक चुपचाप एक बात के बिना उनकी पुरी बात सुन रहे थे पूरा ये चैप्टर हम पढ़ेंगे पता चलेगा विद्यासागर बिल्कुल ज्यादा कुछ नहीं बोलते मिनिमम बात करते हैं यह बात वह केशव सेन के साथ में भी होती थी हमने पहले डिस्कस किया था की केशव हुसैन जब ठाकुर के पास उनके चरणों के पास बैठकर के वो जो स्टूडेंट होता है ना वो स्कूल में जाता हुआ विद्यार्थी लड़का वो कैसे अपने टीचर की बात चुपचाप सुनता है वरना कुछ बोलेगा तो टीचर एक झापड़ मारेगा तो वैसे ही वो एक दम चुपचाप वो ठाकुर के पैरों के पास बीच करके वो केशव से उनकी बात सुनता था ये देख करके उनके वो जो बाकी सब शिष्य थे उनको अच्छा नहीं लगता था बोलते हैं आप लंदन जाकर के आए हैं क्वीन विक्टोरिया से सम्मानित होकर क्या है कोलकाता में आपकी इतना प्रतिष्ठा है और ये गरीब काली का पुजारी काली का पुजारी होना अर्थात उसे समय के सभ्य समाज में अंदर श्रद्धा का वो मां है वो पूरा मतलब एक ऐसा आदमी जो की अंधश्रद्धा से पूरा भारत हुआ है तो एक गरीब काली के पुजारी के पेड़ के सामने बैठकर चुपचाप सुन रहे हैं तो वो केशव सेन की वो लोग बाकी डिसएबल जो थे केशव के वह नाराज हो जाते थे किंतु केशव को पता था जब ठाकुर बोलना शुरू करते हैं है तब फिर जो है उनकी वाणी के सामने किसी की भी वाणी टिक नहीं शक्ति क्योंकि बाकी सब समय ठाकुर हंसी मजाक करते हैं तो वह हंसी मजाक सामने कर लेना है किंतु केशव सेन में इतनी साधना की सिद्धि थी की वह समझ सकता था की वो बच्चे की तरह बालक स्वभाव ठाकुर है और यहां पे जगदंबा स्वयं जो है ठाकुर के हृदय में ठाकुर के ऊपर में आविष्ट हुई है जगदंबा स्वयं बोल रही है तो थोड़ी ना जगदंबा को सामने आप उपदेश देने को जाएंगे तो केशव को तो इतना पता था और यह विद्यासागर को वैसे कुछ नहीं पता था विद्यासागर को इतना पता था की हमारे शास्त्र है सब कन्फ्यूजन में है किंतु उन्होंने यह समझ लिया की मां जो शारदा सरस्वती स्वयं जब किसी की वाणी पे वो प्रगति होती है उसे वाणी से जो बात होती है सामने कुछ नहीं कहा जा सकता तो वैसे ही ऐसा नहीं है की ब्राह्मण को समझ नहीं सकते शुद्ध बुद्धि से समझ सकते हैं और यह जो हम जो दे टुडे अपना यह जो मन सेट है उसमें से हम यह सब कथामृत पढ़कर चिंता चर्चा कर सकते हैं किंतु कथामृत में जो सर है उसको आत्मसात करने के लिए तो सुबह को सुबह शाम अकेले में बैठकर के एकांत में बैठकर के ठाकुर के नाम का जाप करना हो या तो जो भी अपने इस्ट देवता है भगवान राम भगवान कृष्णा उनके नाम का जाप करना होगा तभी जो है ये जो वाणी है ठाकुर की वो आत्मसात होगी अच्छा तो आज यही तक फिर से मिलता है ओम शांति शांति