Invocation
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए भाषणों की श्रृंखला में से एक हम देख रहे थे कि किस तरह से स्वामी जी अमेरिका गए योग उर वेदांत का प्रचार करने के लिए उस समय उनके सामने जो विरोध खड़े हुए उसका यहां पर स्वामी जी उसका प्रतिकार कर रहे हैं एक तरह से बता रहे हैं कि उनके साथ में क्या-क्या हुआ जिससे कि भारत की आने वाली पीढ़ियां आने वाली जनरेशन इनको पता रहे कि भारत के उत्थान में सही-सही कौन से फैक्टर्स है जो कि भारत के उत्थान के लिए रिस्पांसिबल है झूठ मूठ की बातें तो बहुत सारे लोग करते हैं अपना पेट्रियोटिक दिखाने वाले लोग बहुत सारे हैं किंतु जो कार्य अपने शब्दों को कार्य में परिणत कौन करते हैं तो बहुत कम लोग ही ऐसे दिखाई देते हैं और यहां पे स्वामी विवेकानंद वह एक महापुरुष थे वह एक युग नायक थे कि जिन्होंने भारत की उन्नति के लिए भारत को सुप्त भारत को फिर से उत्थ करवाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया यहां पर स्वामी जी अपने खुद के गुणगान नहीं गाना चाहते हैं किंतु यहां पे आइडियाज की लड़ाई है विचारों का युद्ध है कौन के किसके विचार जीतते हैं क्योंकि विचारों के ऊपर में तो नया भारत गढ़ने वाला है यदि हम यह सोचना शुरू करें कि नहीं थियोसोफिकल सोसाइटी का बहुत अच्छा कंट्रीब्यूशन है तो चलो हम यह जो महात्मा जिनके बारे में वह बात करते हैं कुथम और मोरया तिबेट में कहीं पर रहते हैं और वहां से वह हवाई मार्ग में आकर के ना टेलीपैथी से हमको मैसेज देते हैं तो चलो वह कौन है क्या है उसके बारे में पढ़े तो बिना मतलब का अपना दिमाग भ्रष्ट करने की वजह स्वामी जी ने जो सिखाया है अद्वैत वेदांत यह अद्वैत वेदांत क्या है उसको समझने का प्रयास करें तो यहां पर बात सिर्फ यह नहीं है कि थियोसोफिकल सोसाइटी की विजय होती है ना कि स्वामी विवेकानंद की विजय होती है देखने वाली बात है कि अद्वैत वेदांत की विजय होती है ना कि वह तथाकथित महात्माओं की विजय होती है विचारों का युद्ध विचारों के क्षेत्र पर डट कर के लड़ा जाना चाहिए तभी तो भविष्य में आने वाले भारत की नीव इतनी मजबूत बनेगी कि आज यदि हम चांद के ऊपर में यह स्पेसक्राफ्ट भेज रहे हैं यह मार्स मंगल ग्रह के ऊपर में भेज रहे हैं तो वह कहीं पर हवाहवा में यह सब ना हो जाए वह कुथु मी और मोरया का फोटो लेकर वह कहीं चांद या तो फिर मंगल ग्रह पर हमारा स्पेसक्राफ्ट ना पहुंच जाए यह सब मतलब कोशन और प्रिकॉशन रखने के लिए स्वामी जी ने विचारों का यह युद्ध छेड़ा है अभी यहां पर हम आगे देखते हैं कि स्वामी जी और क्या कहते हैं पॉइंट नंबर फाइव इसका टाइटल मैंने दिया है पर्सीक्यूशन ऑफ स्वामी विवेकानंद रिफॉर्म सोसाइटीज ऑफ मद्रास अभी देखिए कि जिस तरह से कलकाता में रिफॉर्म सोसाइटीज थी ये खास करके जिसका सबसे प्रोमंत्र में भी आज के चेन्नई में भी इस तरह की रिफॉर्म सोसाइटीज थी अभी स्वामी जी हमारे सामने इस श्रोताओं के सामने एक बड़ा ही क्लियर डिस्टिंक्शन खड़ा करते हैं स्वामी जी कहते हैं कि कोलकात्ता की जो रिफॉर्म सोसाइटीज थी या तो है वह एक तरह से जैसे कि पथभ्रष्ट हो गई है क्योंकि कोलकात्ता का जो एटमॉस्फियर है पूरा वह एक्शन और रिएक्शन में चला गया है जबकि चेन्नई या तो फिर मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटी है वह उससे कहीं ज्यादा बेहतर है क्यों क्योंकि यह जो एक्शन और रिएक्शन जो बंगल में आया था वह चेन्नई में नहीं आया अभी स्वामी जी यह एक्शन और रिएक्शन का क्या अर्थ करते हैं यह एक हम देखेंगे दूसरा स्वामी जी कहते हैं कि बंगोल में रिवाइवल हो रहा है जबकि मद्रास में ग्रोथ हो रहा है तो यह चार टर्म्स स्वामी जी ने हमको इस पैसेज में जो पैसेज हम पाठ कर करेंगे उसमें दी है सबसे पहले तो कहते हैं कि चेन्नई कोलकाता की तरह एक्शन और रिएक्शन मद्रास में नहीं आया है दूसरी बात कहते हैं कि कोलकाता में रिवाइवल हो रहा है जबकि मद्रास में ग्रोथ हो रहा है इनका क्या अर्थ है इन टर्म्स का वह देखेंगे पहले यह पैराग्राफ हम पढ़ लेते हैं तो स्वामी जी ने सबसे पहले तो थियोसोफिकल सोसाइटी के बारे में कहा थियोसोफिकल सोसाइटी को अच्छे से डांटा सबके सामने उसके बाद में यह मो समाज को ले लिया मजूमदार को ले लिया क्रिश्चियन मिशनरीज को डांट दिया अभी बारी है यह रिफॉर्म सोसाइटीज मद्रास की स्वामी जी क्या कहते हैं नाउ आई कम टू द रिफॉर्म सोसाइटीज इन मद्रास अभी मैं मद्रास की रिफॉर्म सोसाइट हों के बारे में दो शब्द कहना चाहता हूं दे हैव बीन वेरी काइंड टू मी वो मेरे प्रति बड़े अच्छे से वो वर्तन किए हैं मेरे साथ में बड़े अच्छे से पेश आए हैं दे हैव गिवन मी वेरी काइंड वर्ड्स उन्होंने बड़े अच्छे शब्दों से मेरी सराहना की है बड़े अच्छे से मेरे साथ में वर्तन किया है एंड दे हैव पॉइंटेड आउट एंड आई हार्टिली एग्री विद देम दैट देयर इज अ डिफरेंस बिटवीन द रिफॉर्मर्स ऑफ बंगाल एंड दोज ऑफ मद्रास और यह मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटी हों ने मुझे कहा है दे पॉइंटेड आउट कि कोलकाता की रिफॉर्म सोसाइटीज में और मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटीज में बहुत बड़ा फर्क है और मैं उनके साथ में एग्री होता हूं कि हां यह फर्क है और सही बात है मेनी ऑफ यू विल रिमेंबर दैट आई हैव वेरी ऑफें टोल्ड यू दैट मद्रास इज अ वेरी ब्यूटीफुल स्टेट जस्ट नाउ आप में से बहुत सारे लोगों को शायद याद होगा कि मैंने पहले भी कई बार कहा है कि मद्रास अभी आज एक बड़ी ही सुंदर परिस्थिति में है इट हैज नॉट गोट इनटू द प्ले ऑफ एक्शन एंड रिएक्शन एज बंगल हैज डन बंगाल की तरह एक्शन और रिएक्शन के चक्रवात में बद्रस नहीं फंस गया है हियर देयर इज स्टेडी एंड स्लो प्रोग्रेस ऑल थ्रू यहां पे धीरे से किंतु धीरा किंतु एक स्टेडी प्रोग्रेस है स्लो एंड स्टेडी प्रोग्रेस मद्रास में चल रहा है हियर इज ग्रोथ एंड नॉट रिएक्शन यहां पे ग्रोथ हो रहा है रिएक्शन नहीं हो रहा है इन मेनी केसेस एंड टू अ सर्टेन एक्सटेंट देयर इज अ रिवाइवल इन बंगल बंगोल में जो हो रहा है वह एक तो रिएक्शन भी हो रहा है एक एक्शन भी हो रही है और कुछ हद तक रिवाइवल भी हो रहा है बट इन मद्रास इट इज नॉट अ रिवाइवल इट इज अ ग्रोथ एंड अ नेचरल ग्रोथ किंतु मद्रास में रिवाइवल नहीं हो रहा है ग्रोथ हो रहा है और वह भी नेचुरल ग्रोथ हो रहा है एज सच आई एंटायस पॉइंट आउट एज द डिफरेंस बिटवीन द टू पीपल्स बट देयर इज वन डिफरेंस व्हिच दे डू नॉट अंडरस्टैंड अच्छा इस वजह से क्योंकि मद्रास में रियल ग्रोथ हो रहा है इसकी वजह से मैं एग्री होता हूं कि मद्रास के रिफॉर्म सोसाइटीज में और बंगाल के रिफॉर्म सोसाइटीज में बड़ा डिफरेंस है वहां पे एक्शन रिएक्शन और रिवाइवल हो रहा है कोलकात्ता में जबकि यहां पे मद्रास में ग्रोथ हो रहा है कहीं-कहीं पे नेचुरल ग्रोथ हो रहा है तो अच्छा अभी इसके बाद का जो पैराग्राफ है उसको पढ़ने से पहले हम इस पैराग्राफ को बड़ा क्लियर समझते हैं कि स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं देखिए भारत देश एक तरह से देखें तो 1000 साल के अंधेरे में से गुजरा हुआ है क्योंकि यदि देखें कि वैदिक सभ्यता का अस्ताचल जब हुआ या तो कहेंगे कि वैदिक सभ्यता धीरे-धीरे अपनी अ अंत समय तक पहुंची उस समय भारत में बुद्धिज्म का प्रचार बड़े पैमाने पे होने लगा था अभी बुद्धिज्म के प्रचार के साथ-साथ में ही बहुत सारी इस तरह की प्रथाएं भी प्रवेश कर गई थी भारत में जिस कु प्रथाओं ने वैदिक धर्म के ऊपर में रचित भारत की धरोहर को जैसे कि भीतर से खा लिया तो यह भारत भीतर से जैसे कि धीरे-धीरे कमजोर होने लगा और फिर एक समय ऐसा आया कि जब बाहर के आक्रमण शुरू हुए पहले इस्लामिक आक्रमण और फिर इसके बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन इन दोनों के सामने हम टिक नहीं पाए और हमारी ज्यादातर प्रजा इनकी गुलाम हो कर के बाह्य सत्ता हों की गुलाम होकर के रह गई अभी जब यह 18th सेंचुरी 177th सेंचुरी यह सब जिस समय स्वामी जी और स्वामी जी के कुछ समय के पहले का काल जब भारत में एक तरह से पुनः यह एक क्योंकि ठाकुर का जन्म हुआ था 1836 में वेरी इंटरेस्टिंग ईयर कि उसी समय भारत में एक मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम को एंटर करने का प्रयास किया गया था प्रयास क्या वह प्रवेश करवाई गई थी और जिसका एक हेतु था कि यह जो जितने भी भारतीय है या तो फिर उनको गुलाम बना के रखो या तो फिर उनको क्लार्क बना के रखो ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश राज के जिससे कि उनके मन में एक ही बात रह जाए बाकी सब बातें चली जाए कि उनको कैसे भी करके ब्रिटिश राज ईस्ट इंडिया कंपनी को सर्व करना है उनको सहूलियत पहुंचा नहीं है भारत में अपना बिजनेस करने के लिए तो एक क्लार्क मेकिंग फैक्ट्री भारत में 1836 में ही चालू हो गई थी किंतु यह जो विदेशी एक तरह का एजुकेशन इंग्लिश लर्निंग भारत में जैसे प्रवेश किया साथ-साथ में ही देखिए कि भारत ने भी इसका उत्तर दिया भारतीय संतों को जन्म दे कर के इन संतों में सर्वप्रथम अग्रणी है हमारे भगवान श्री रामकृष्ण 1836 में ही उनका जन्म हुआ और उन्होंने हमारी हिंदू सभ्यता की जितनी भी साधनाएं हैं सब साधना करके उसमें सिद्धि प्राप्त की और आखिर में हमको महामंत्र दिया ब्रह्म शक्ति एक अभेद स्थिर है तो ब्रह्म है चलित है कार्य करती है तो वह शक्ति है और यह ब्रह्म साक्षी साकार ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है यह शक्ति के जगत में भले ही हम चाहे रहते हो किंतु शक्ति द्वारा प्रोड्यूस्ड शक्ति द्वारा प्रगट जो वासना एं कामनाओं के विषय है उनसे हमको अपने मन को बटोर लेना है अपने मन को अपने मन से कामना वासनाओं का त्याग करना है जगत में यदि रहना है तो जगत वासियों की सेवा करके रहना है उनको शिव ज्ञाने उनकी उपासना करनी है तो यह महामंत्र भगवान श्री रामकृष्ण ने हमको दिया इसके साथ-साथ में ही बंगोल में जैसे कि एक तरह का एक इंटेलेक्चुअल विंड एक इंटेलेक्चुअल एक कहेंगे कि जागरण प्रारंभ हुआ बहुत सारे यंग लड़के थे बहुत सारे फिलोसोफर थे बहुत सारे के समाज के धनी प्रतिष्ठित लोग थे उन्होंने यह सोचना शुरू किया कि यदि ब्रिटेन में यूरोप में इतनी प्रोस्पेरिटी है इस तरह का साइंटिफिक लर्निंग एडवांसमेंट है तो भारत में वह क्यों नहीं आ सकता इस प्रश्न का उत्तर उन्होंने यह पाया कि भारतीय सभ्यता भारतीय धर्म में ही कहीं पे फंडामेंटल फॉल्ट है भारतीय धर्म को यहां से हटा दो और विदेशी धर्म को भारत में लेके आओ अभी यह विदेशी धर्म को भारत में लेकर आने की बात जो लोग कर रहे थे उनमें से बहुत सारे लोग तो क्रिश्चियन ही हो गए जैसे कि माइकल मधुसूदन दत्त और कुछ-कुछ लोगों ने सोचा कि 100% यदि क्रिश्चियनिटी को भारत में लाएंगे तो शायद भारतीय लोग उसको एक्सेप्ट नहीं करेंगे तो बेटर है कि क्रिश्चियनिटी का एक अंश लेकर के अपने इंडियन कल्चर के साथ में उसको एक तरह का खिचड़ी बना कर के उसको लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाए व्हिच माइट बी मोर पलटेबल टू द पीपल जो कि शायद लोगों को और ज्यादा बेटर पसंद आए तो वह खिचड़ी प्रयास था ब्रह्मा ब्रह्म समाज तो यह ब्रह्म समाज ना किय क्रिश्चन मिशनरी सब लोगों ने मिलकर के भारत में एक ऐसी हवा खड़ी की कि यदि भारत में भारतीय धर्म को नहीं हटाया जाएगा भारतीय धर्म के जो कु रिवाज है कुरीतिया है उसको संपूर्ण रूप से नेस्तनाबूद नहीं किया जाएगा तब तक भारत का यूरोप की तरह उत्थान नहीं होने वाला वाला तो यह एक पूरा चालू हुआ अभी देखिए कि साथ-साथ में ही कुछ लोगों ने ऐसा सोच लिया कि अरे यह बाहर से जो प्रथाएं भारत में आ रही है यह तो बड़ा ही डेंजरस है हमारी पुरानी प्रथाएं क्या गलत है उसमें क्या कुछ फॉल्ट है क्या बोल कर के इन लोगों ने जितने भी मोस्ट रिप्रेसिव एस्पेक्ट थे अपने भारतीय धर्म के हिंदू धर्म के उसको फिर से पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जिसमें कि जैसे एक है कि काला पानी स्वामी जी काला पानी क्रॉस करके विदेश में गए हैं यानी कि वह नाथ बाहर हो गए हैं यह जो शश दर पंडित शश दर पंडित क्या करता था कलकत्ता में अपने धर्म की विज्ञान के आधार पर व्याख्या करता था अब यह प्रयास कुछ गलत नहीं है प्रॉब्लम यही है कि ऐसा करने से आप ना ही धर्म को समझेंगे ना ही विज्ञान को समझेंगे हम विज्ञान की उपमा दे सकते हैं जैसे कि स्वामी जी उपमा एं कई बार देते हैं कि किंतु ऐसा कहना कि ब्रह्मास्त्र यह एटम बम था फिर यह जो पुष्पक विमान वह आज का वोह एयरक्राफ्ट था ऐसा कहने से प्रॉब्लम क्या होता है ना ही हम ब्रह्मास्त्र क्या है वह समझ पाएंगे ना ही पुष्पक विमान समझ पाएंगे ना ही आज का मॉडर्न एरो फिजिक्स या तो फिर एरो डायनेमिक्स वो समझ पाएंगे ना ही आज का यह न्यूक्लियर फिजिक्स समझ पाएंगे तो ये मैंने दोनों के वर्स्ट एस्पेक्ट को कंबाइन करना जैसे कि हुआ तो यह एक्शन और रिएक्शन बंगाल में उस समय हो रहा था कोई-कोई लोग कहता है कि भारतीय धर्म को तिलांजलि दे दो कोई-कोई कहता है नहीं भारतीय धर्म के जितने भी रिप्रेसिव एस्पेक्ट है जितने की वह कु नीतिया कु रिवाज है सब सही है कुछ भी आपको चेंज करने की जरूरत नहीं तो इस तरह से एक एक्शन रिएक्शन वहां पे हो रहा था स्वामी जी कहते हैं बंगोल में रिवाइवल हो रहा है रिवाइवल का अर्थ क्या है कि वही नीतियां वही जाति धर्म प्रथाएं जिस जिसने कि भारत का पहले मतलब जो जवाबदार थी भारत के पतन के पीछे व्हिच वेर द रूट कॉज जिसने कि भारत को 1000 साल की निद्रा में सुला दिया वही नीति रीति प्रथाओं को पुनः जीवित करें और उसी का पुनः प्रचार करें तो यह हो गया एक्शन रिएक्शन और रिवाइवल एक कहता है कि जो कुछ भी हिंदू धर्म में था यदि सती प्रथा है बाल्य विवाह प्रथा है उसको भी हमको स्वीकारना चाहिए स्वामी जी अपने पत्र में बार-बार ऐसे कुछ लोगों को गाली देते हैं कि इन लोगों का और कुछ काम नहीं है 10 साल की लड़की का गर्भाधान कैसे हो इसकी वैज्ञानिक व्याख्या करते बैठते हैं ऐसा गुस्सा था स्वामी जी का इन लोगों के ऊपर में तो ये दोनों तरह से कोई कहता है कि हिंदू धर्म को ही छोड़ दो कोई कहता है कि हिंदू धर्म की जितनी भी पुरानी प्रथाएं हैं जितनी भी कुरीतियां है जितने भी कु रीवाज है है सबको पुनः जीवित करो तभी हम भारत फिर से वह सुवर्ण युग में जाएगा तो यह एक्शन रिएक्शन रिवाइवल का अर्थ वही हुआ कि पुनः कुप्रथा हों को जागृत करना यह चल रहा था कोलकात्ता में स्वामी जी कहते हैं कि मद्रास में ऐसा नहीं है मद्रास में जैसे कि ग्रोथ है मद्रास में जैसे कि एक नेचुरल ग्रोथ कहीं कहीं पे दिख रहा है अभी नेचुरल ग्रोथ का अर्थ क्या है देखिए कि एक तो अंडरस्टैंडिंग होनी चाहिए कि भारत की कुछ कुरीतियां कुछ कु रिवाज हमारी पतन के लिए कारण भूत थे न द अदर हैंड यह जो अपने प्रस्थान त्रय है श्रुति प्रस्थान स्मृति प्रस्थान न्याय प्रस्थान अब उपनिषद श्रीमद् भगवत गीता और ब्रह्मसूत्र इन तीनों के भीतर में जो रत्न भंडार छुपे हुए हैं उनको यदि पुनः जीवित किया जाए उनको यदि आजकल जैसे कि स्वामी जी कहते हैं कि वन के वेदांत को यह महिला के किचन में स्त्रियों के किचन में यह किसान की कुटिया में यह विद्यार्थी के क्लासरूम में यदि लाया जाए तो फिर भारत का पुनः जन्म होगा पुनः उत्थान होगा रहने सा होगा तो यह इसको कहते हैं ग्रोथ कुछ बेटर एस्पेक्ट को ले लो और कुछ एस्पेक्ट को छोड़ दो स्वामी जी बड़ा ही क्लियर हमको इस प्रवचन में नहीं किंतु बहुत सारे प्रवचन में समझाते हैं कि श्रुति और स्मृति इस तरह से दो विभागों में हम अपने शास्त्रों को बांट सकते हैं स्मृति जैसे कि मनुस्मृति वगैरह क्या उसका क्या तात्पर्य है क्या उसका अर्थ है कि प्रत्येक युग में एक तरह की सोशल स्ट्रक्चर को देख कर के एक सामाजिक धर्म की रचना की जाती है और श्रुति क्या है जो कि अनंत काल से वही जो प्रिंसिपल्स से वही जो सनातन तत्व है अनंत काल से वही चलते आएंगे उसको देश काल पात्र परिस्थिति के अनुसार मॉडिफाई करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी यह जो श्रुति और स्मृति का डिस्टिंक्शन स्वामी जी करते हैं उसी को हम कल डिस्कस किए थे व्यष्टि धर्म और समष्टि धर्म में व्यष्टि धर्म अर्थात कि मेरा ईश्वर या तो फिर आत्म साक्षात्कार के लिए ईश्वर सा साक्षात्कार या आत्म साक्षात्कार के लिए जो उपासना करनी है वह है मेरा व्यष्टि धर्म जो कि श्रुति एस्पेक्ट में दिया गया है वह हमेशा से एक ही तरह से बराबर चलता आएगा क्योंकि ना ही मनुष्य का स्वरूप चेंज बदलने वाला है मनुष्य के यह जो गुण है हम हमारे जो पंच क्लेश है षड रिपु है ना ही वो बदलने वाले हैं ना ही यह ईश्वर का स्वरूप बदलने वाला है ना ही यह साधन की पद्धतियां साधन की पद्धतियां शायद बदले किंतु साधन की पद्धतियों के पीछे के जो प्रिंसिपल्स है वह कभी नहीं बदलने वाले तो वह व्यष्टि धर्म या तो फिर श्रुति आधारित नियम और आदर्श एक ही रहने वाले हैं किंतु जो स्मृति स्मृति के आधार पर यह जो समष्टि धर्म बना है उसमें बहुत सारे परिवर्तन युग युगांतर के अनुसार होते ही रहेंगे एक समय था कि जब कि राजा राज्य करते थे ब्राह्मण विद्याभ्यासम करवाते थे जो शुद्र थे वह या तो खेती में काम करते थे या तो फिर वह परिचर्या का काम करते थे तो यह सब उस समय की प्रथा थी आज की प्रथा के अनुसार आज के सामाजिक नियमों के अनुसार हमको स्मृति धर्म या तो समष्टि धर्म बदलना होगा उसको हमको मॉडिफाई करना होगा अपडेट करना होगा तो यह जो अपडेट है वह स्वामी जी ने हमको दिया है कि शिव ज्ञान से जीव सेवा जो कि आज का समष्टि धर्म है जो कि आज की स्मृति है तो स्वामी जी ने नई स्मृति हमको दी है नई शृति हमको नहीं दी श्रुति के जो तत्व है सनातन चिरंतन तत्व वही उपनिषद में थे वही भगवत गीता में है वही ब्रह्मसूत्र में थे और वही आज कथामृत में हमको मिल जाएंगे कुछ भी फर्क हमको नहीं दिखेगा बस समष्टि धर्म या तो स्मृति धर्म वह आज के युग के अनुसार हमको देखना है कि किस तरह से हम अपडेट कर सकते हैं तो यह आज के धर आज के युग के अनुसार वर्तमान युग की आवश्यकता के अनुसार स्मृति धर्म में जो स्वामी जी अपडेट लाए उसको कहते हैं नेचुरल ग्रोथ एक और हमने अपने इटरनल प्रिंसिपल्स को भी पकड़ के रखा है दूसरी ओर कुप्रथा एं हैं जैसे कि बाल्य विवाह प्रथा या तो फिर यह सती प्रथा या तो फिर यह दहेज प्रथा या तो फिर ये विदेश में नहीं जाना काला पानी क्रॉस नहीं करना वह जो कुप्रथा एं हैं उसको हटा कर के शिव ज्ञाने जीव सेवा रूपी आज का आधुनिक समष्टि धर्म स्वामी जी लेकर आए यह हो गया नेचुरल ग्रोथ ये नेचुरल ग्रोथ एक तरह से मद्रास में चल ही रहा था जिसको कि आकर के स्वामी जी ने संपूर्ण किया तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कोलकात्ता की जो रिफॉर्म सोसाइटीज है उसमें एक तरह से एक्शन रिएक्शन चल रहा है कोई कहता है कि हिंदू धर्म को संपूर्ण छोड़ दो दूसरे कहते हैं कि हिंदू धर्म की जितने भी अच्छा बुरा है सब एज इट इज उठा के ले आओ अच्छा यानी कि आत्म तत्व बुरा यानी की यह सती प्रथा वगैरह जो कु प्रथाएं थी सब कुछ 100% हमको आज आज से 1000 साल पहले था सब लेकर आना है यह एक्शन रिएक्शन और रिवाइवल और रिवाइवल भी वही कि वही आज के 1000 साल पहले वाले जो कुप्रथा से मंडित हिंदू धर्म को पुनः जीवित किया जाए तो स्वामी जी कहते हैं कि मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटी और कोलकाता की रिफॉर्म सोसाइटी में बहुत बड़ा अंतर है और इस बात से मैं एग्री भी होता हूं किंतु बस एक ही प्रॉब्लम है मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटीज में क्या प्रॉब्लम है उन्होंने स्वामी जी को धमकी देने का दुस्साहस किया था देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं बट देर इज वन डिफरेंस व्हिच दे डू नॉट अंडरस्टैंड एक डिफरेंस है जो कि किसी को समझ में नहीं आता सम ऑफ द सोसाइटीज आई एम अफ्रेड ट्राई टू इंटिमिडेट मी टू जॉइन देम यह कुछ-कुछ सोसाइटी थी मद्रास की उन्होंने मुझे धमकी दी मुझे डराया मुझे धमकाया कि तुम हमारी सोसाइटी में जवाइन कर लो दैट इज अ स्ट्रेंज थिंग फॉर देम टू अटेंप्ट यह एक बड़ी आश्चर्यजनक बात है उनके लिए तो क्यों भाई मुझे धमकी देंगे आपको क्या लगता है कि मुझे धमकी देना क्या कार्यरत होगा क्या अ मैन हु हैज मेड स्टार्वेशन फेस टू फेस फॉर 14 इयर्स ऑफ हिज लाइफ हु हैज नॉट नोन वयर ही विल गेट अ मिल द नेक्स्ट डे एंड वयर टू स्लीप कैन नॉट बी इंटिमिडेटेड सो इजली एक ऐसा व्यक्ति जिसने कि 14 साल इस पृथ्वी पर भ्रमण किया है गांव-गांव शहर शहर गया है कभी पेड़ों के नीचे सोया है तो कभी कुटिया में सोया है तो कहीं राजमहल में सोया है जिसको यह नहीं पता कि अभी सुबह को खाया तो शाम का खाना कब मिलेगा शाम खाया तो फिर सुबह का खाना कब मिलेगा जिसके लिए भूख ताप सर्दी ठंड गर्मी सब एक समान है क्या ऐसे व्यक्ति को आप धमका सकते हैं क्या कभी बी अ मैन ऑलमोस्ट विदाउट क्लोथ्स हु डेर टू लीव वेयर द थर्मोमीटर रजिस्टर्ड 30 डिग्री बिलो जीरो विदाउट नोइंग वयर द नेक्स्ट मिल वाज टू कम कैन नॉट बी सो इजली इंटिमिडेटेड इन इंडिया एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास में पहनने को कपड़े भी नहीं थे एक ऐसी जगह पे वह सोता था जहां पर थर्मोमीटर - 30 डिग्री रजिस्टर करता था भयानक ठंड उसमें भी वो सोने का साहस करता है क्या इस तरह के व्यक्ति को आप क्या सही में डरा सकते हैं इस तरह के व्यक्ति को आप धमका करके कह सकते हैं कि हमारी सोसाइटी जवाइन कर लो वरना तुम्हारे साथ में बहुत बुरा होगा ऐसा कभी नहीं होने वाला देखिए स्वामी जी जो प्रव्रज्या किए वो प्रव्रज्या का पूरा यहां पे नट शेल में जैसे कि हमको दे दिया उसका चितार कहां गांव गांव शहर शहर घूमते थे कभी राजा के महल में रहते थे कभी वह मंत्री है कभी यह सेठ है धनी व्यक्ति है वो उनकी सराहना करते थे उनके पैर के सामने बैठ कर के उनके पास में से धर्म के तत्व सुनने का आग्रह प्रदर्शित करते थे कहीं वह रेलगाड़ी में जा रहे हैं भूखे बैठे हैं और सामने एक व्यक्ति आ गया उसने उसको फिर यह सन्यासियों के प्रति बड़ा ही गुस्सा था तो स्वामी जी को दिखा दिखा करके वोह अच्छी-अच्छी चीजें अपने वो वो अपने वो बटुए में से निकाल कर के खा रहा है ब बोल रहा है तुम यह सन्यासी हो बोल कर के ही तुमको कुछ खाने को नहीं मिलता देखो मैं काम करता हूं तो कितना म बढ़िया मजे से खाता हूं तो ऐसे लोगों को एक बार वही स्वामी जी जंगल में सोए हैं शेर आ गया तो स्वामी जी सोचते हैं कि यदि शेर की इच्छा है तो मुझे खा ले यदि इस जगत में मेरा कोई कर्तव्य नहीं है भगवान श्री राम कृष्ण देव का मिशन यदि पृथ्वी पर समाप्त हो गया है तो यह शेर भले ही मुझे खा ले भले ही इस अस्तित्व का अंत आ जाए किंतु शेर उनको खाने की वजह वहां से चला जाता है स्वामी जी मृत्यु के सामने खड़े रह कर के भी शेर के सामने खड़े रह कर के भी वो उनके हृदय में कभी भी डर का संचार भय कभी भी प्रकट नहीं होता अल्मोड़ा में गुफा में ध्यान कर रहे हैं उनकी बहन की आत्महत्या का समाचार आया तो यह सोच कर के स्वामी जी ने क्या यह सोचा कि क्यों मैं अपने परिवार की रक्षा नहीं कर पा रहा हूं स्वामी जी ने यह सोचा कि यह कोटि कोटि बहने हैं मेरी भारत में क्या मैं उनकी रक्षा नहीं कर पाऊंगा स्वामी जी ने अपने परिवार को अपनी मां बहन भाइयों से विस्तृत करके पूरे भारत को और आखिर में तो जैसे पूरे जगत को अपने परिवार में वह आश्वस्त कर लिया था अपने परिवार में समाहित कर लिया था जब वह अमेरिका गए थे तो क्रिस्टिन ग्रीन स्टीड वह एक उसका बहुत बड़ा फैमिली था कई 10 11 भाई बहन थे बड़ी गरीब थी खुद टीचर थी घर का पर भ भरण पोषण करना मुश्किल हो जाता था स्वामी जी अपनी जो लेक्चर देकर के जो उनको डोनेशन वगैरह मिलता था उसमें से कुछ-कुछ रुपया वो क्रिस्टिन ग्रीन स्टेडल को भेजते थे क्योंकि पता था कि वह सही सही एक शादी का है और यदि उसको यदि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी थोड़ी मिलती है तो ठीक तरह से ईश्वर प्राप्ति की उपासना कर सकती है तो देखिए कि स्वामी जी ने अपनी बहन के लिए ऐसा नहीं किया किंतु वो क्रिस्टिन ग्रीन स्टडर के लिए उन्होंने ऐसा किया तो यह अपने परिवार को सिर्फ अपने परिवार में आबद्ध नहीं रख कर के पूरे भारत पूरे विश्व में फैलाना यह स्वामी जी ने किया है कहां स्वामी जी के सामने इतने लोग विरोध करते थे अमेरिका स्वामी जी गए थे तो रास्ते में चलते थे तो लोग उनके ऊपर में पत्थर फेंकते थे बड़े कुछ-कुछ मिशनरीज लोगों ने इस तरह से उनके विरुद्ध में अप्र चार करना शुरू कर दिया था कि यह बिल्कुल निम्न चरित्र का व्यक्ति है उनको उनकी हत्या करने के लिए कॉफी में विष देक के उनको दिया गया था जहर देकर के उनको कॉफी पिलाने का प्रयास किया गया था तो जिनकी हत्या के लिए प्रयास किया गया हो जो मृत्यु के सामने पतित होकर के भी डरते नहीं है इस तरह के स्वामी जी को क्या यह लोग डरा पाएंगे यह मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटीज कि या तो हमारे सदस्य हो जाओ या तो फिर हम तुमको देख लेंगे तो स्वामी जी कहते हैं कि एक डिफरेंस है यह कोलकाता की रिफॉर्म सोसाइटीज और मद्रास में कोलकात्ता वाले वहां पे एक्शन रिएक्शन चल रहा है रिवाइवल चल रहा है कोई कहता है कि यह भारतीय धर्म की हिंदू धर्म की कु प्रथाओं को जागृत करो दूसरे लोग कहते हैं कि भारतीय हिंदू धर्म को ही पूरा खत्म कर दो तो एटलीस्ट वो यदि चेन्नई में मद्रास में नहीं हो रहा तो कलकाता वाले एटलीस्ट स्वामी जी को धमकी भी नहीं देते थे कि हमारा हमारी सोसाइटी जवाइन कर लो वरना तुम्हारा बड़ा ही अहित होगा तो चाहे यह रिफॉर्म सोसाइटी कलकाता की हो ना कि मद्रास की हो सबके भीतर में एक फेटल फ्लो था क् कोई कोई विचार नहीं समझ पा रहे थे तो कोई कोई स्वामी जी को नहीं समझ पा रहे थे कोई ना ही धर्म को समझ पा रहे थे तो कोई ना ही स्वामी जी के मिशन को समझ पा रहे थे तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि इन दोनों के बीच में डिफरेंस है स्वीकार करता हूं किंतु आखिर में एट द एंड ऑफ द डे यदि देखा जाए तो ना ही ये मद्रास की रिफॉर्म सोसाइटी किसी काम की है ना ही कोलकाता की रिफॉर्म सोसाइटीज इनके आधार पे इनकी विचार सरणी पे इनके आइडियो जीी पे आदर्श पे नए भारत का नव निर्माण कभी नहीं होने वाला नए भारत का नव निर्माण यदि होगा तो भगवान श्री राम कृष्ण देव के चिह्नित आदर्श पर ही होगा इसके अलावा और कोई आदर्श नहीं है दिस इज द फर्स्ट थिंग आई टेल देम यह मैं उनको पहली बात बताता हूं आई हैव अ लिटिल विल ऑफ माय ओन मेरा खुद का एक विल पावर है मेरा खुद का एक सामर्थ्य है मेरा खुद का एक विजन है आई हैव माय लिटल एक्सपीरियंस टू मेरा एक छोटा सा अनुभव भी है छोटा अनुभव अर्थात कि पूरे विश्व में प्रवण करके पूरे विश्व की साहित्य उनका संस्कृति उनकी सिविलाइजेशन का अंडरस्टैंडिंग अभ्यास करके उनको योग और वेदांत सिखाना स्वामी जी कहते हैं छोटा सा एक्सपीरियंस है और कुछ मैंने नहीं किया है पूरे विश्व का भ्रमण किया है पूरे विश्व की साहित्य संस्कृति को समझा है धर्म को समझा है और पूरे विश्व में मैंने अपने भारतीय वेदांत को श्री रामकृष्ण देव के आदर्शों का प्रचार किया है इतना ही किया है और कुछ नहीं किया है एंड आई हैव अ मैसेज फॉर द वर्ल्ड व्हिच आई विल डिलीवर विदाउट फियर विदाउट केयर फॉर द फ्यूचर और मेरा इस जगत को देने के लिए एक मैसेज है एक संदेश है एक आदर्श है जिस आदर्श को मैं बिना किसी द्विधा के बिना किसी भय के बिना भविष्य की चिंता किए इसका मैं प्रचार करूंगा तो ये यह है स्वामी विवेकानंद अच्छा तो अभी देखिए कि यह जो पूरा रिएक्शनरी पार्ट था रिएक्शनरी नहीं कहक स्वामी जी का यह जो प्रतिकार का जो पार्ट था कि हां जिन लोगों ने मुझे हानि करने का प्रयास किया है उसके बारे में मुझ मुझे कुछ कहना पड़ेगा मेरे खुद के लिए नहीं किंतु नव निर्माण भारत का हो रहा है उसकी न्यू में उसके फाउंडेशन में कहीं ये गलत आइडियो जिी ना प्रवेश कर दे इसके लिए तो यह पार्ट अभी समाप्त हुआ अभी यहां से एक दूसरा पार्ट स्टार्ट होता है स्वामी जी अभी पूरे भारत के बारे में बात करते हैं कि भारत का भविष्य हमको यदि सुधारना है भारत को फिर से वही देशों की अग्रणी कक्षा में बैठना है भारत को फिर से विश्व गुरु होना है तो भारत को क्या करना होगा यह बात स्वामी जी यहां से स्टार्ट करते हैं तो सबसे पहला पॉइंट है हाउ टू बेटर इंडिया या ग्रोथ नॉट रिफॉर्म देखिए जो बात हमने पिछले वाले पॉइंट में कही उसी बात को स्वामी जी अभी और ज्यादा एक्सपें करके कहेंगे टू द रिफॉर्मर्स आई विल पॉइंट आउट दैट आई एम ए ग्रेटर रिफॉर्मर देन एनी ऑफ देम ये जितने भी रिफॉर्मर है उन सबको मैं कहता हूं सीना तान के अपने सीने पे सीने छाती ठोक करके मैं कहता हूं कि यदि आप रिफॉर्म लाना चाहते हैं तो आपसे कई गुना ज्यादा रिफॉर्म मैं ले आना चाहता हूं आपसे कहीं ज्यादा बड़ा रिफॉर्मर तो मैं हूं दे वांट रिफॉर्म ओनली लिटल बिट्स आई वांट रूट एंड ब्रांच रिफॉर्म वे लोग छोटी-मोटी बातें रिफॉर्म करना चाहते हैं मैं बिल्कुल पाए में से बिल्कुल फाउंडेशन में से रिफॉर्म लाना चाहता हूं वयर वी डिफर इज इन द मेथड किंतु हमारा डिफरेंस कहां पे है वह है हमारी मेथोडोलोग्य क्शन माइन इज थट ऑफ कंस्ट्रक्शन उनकी मेथड है डिस्ट्रक्शन की मेरी मेथड है कंस्ट्रक्शन की आई डू नॉट बिलीव रिफॉर्म आई बिलीव इन ग्रोथ मैं रिफॉर्म में विश्वास नहीं करता मैं ग्रोथ में विश्वास करता हूं आई डू नॉट डेर टू पुट माइसेल्फ इन द पोजीशन ऑफ गॉड एंड डिक्टेट टू अवर सोसाइटी मैं ऐसा कोई दावा नहीं करता ऐसा कोई दुस्साहस नहीं करता अपने को ईश्वर की जगह पर रख कर के भगवान की जगह पर रख कर के और भारतीयों को मैं जैसे कि कहूं आदेश तू दिस वे धा शुड मूव एंड नॉट ट आपको इस तरह से कार्य करना है उस तरह से मत करो इस तरह का उपदेश इस तरह का दुस्साहस भारतीयों को उपदेश देने का मैं नहीं करता हूं आई सिंपली वांट टू बी लाइक द स्क्विरल इन बिल्डिंग ऑफ रामाज ब्रिज हु वाज क्वाइट कंटेंट टू पुट ऑन द ब्रिज इट्स लिटिल कोटा ऑफ सैंड डस्ट बस मैं वही वह गिलहरी की तरह होना चाहता हूं जिसने कि राम सेतु बनाने में अपना छोटा सा अवदान दिया छोटे छोटे पत्थरों को राम सेतु के ऊपर में रख कर के गिलहरी यदि वह छोटे पत्थर नहीं भी रख तो भी राम सेतु बन जाता किंतु गिलहरी का कर्तव्य था कि उसको मदद करनी है उसने अपना कर्तव्य पालन किया दिस इज माय पोजीशन यह मेरी पोजीशन है अभी देखिए कि यहां पर स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं सबसे पहले तो स्वामी जी कहते हैं कि छोटे-मोटे जो रिफॉर्म आप करना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में यह गलत है हिंदू धर्म में वह गलत है यह सब बातों को मैं स्वीकार ही नहीं करता सर्वप्रथम तो समझे कि हिंदू धर्म क्या है यह श्रुति और स्मृति दो पार्ट है व्यष्टि धर्म है समष्टि धर्म है व्यष्टि धर्म या तो श्रुति एस्पेक्ट को पुनः जीवित करना है एज इट इज जो कि वेद में था उपनिषदों में था जो कि अपने सुवर्ण युग में था भारत के उसको एज इट इज ले आना है किंतु यह जो समष्टि धर्म है या तो फिर यह स्मृति है स्मृति या समष्टि धर्म को आज के युग के अनुसार युगो पयोग बना देना है अभी यह ब्राह्मण यह शुद्र यह चंडाल यह दरिद्र यह छूत ये अछूत यह सवर्ण यह निम्न वर्ण यह सब चीजों को अभी आपको तिलांजलि दे देनी है नए भारत में सभी नागरिक एक ही लेवल पे है सभी को एक ही तरह का अधिकार है एक तरह का अधिकार नहीं स्वामी जी तो कहते हैं कि यदि ब्राह्मण के लड़के को एक शिक्षक की आवश्यकता है तो शुद्र के लड़के को 10 शिक्षक की आवश्यकता है यानी कि [हंसी] ये स्वामी जी कहते हैं कि जिसकी जो आवश्यकता है उसके अनुसार उसको रिसोर्स एलोकेट किए जाए नहीं कि फिर यह बड़ा आदमी है यह उच्च वर्ण का आदमी है तो उसको ज्यादा लाभ मिले यह निम्न वर्ण का है तो उसको कम लाभ मिले यह करुणा यह भारत के दरिद्र के प्रति अपना हृदय खोल करके उनको अपने हृदय में समावेश करना उनके प्रति एक अनंत प्रेम यह था स्वामी जी का महामंत्र आज के युग के लिए यदि आप अपने घर में बैठ कर के पैसे कमाते हैं जब ध्यान करने का प्रयास करते हैं और आप सोचते हैं कि आपके घर के बाहर जो दरिद्र लोग जो कि फुटपाथ प रास्तों पर रह रहे हैं रात को भूखे सोते हैं उनके बच्चे रोते-रोते गलियों में घूमते रहते हैं भिक्षा मांगते रहते हैं और इससे यदि आपके हृदय में करुणा का प्रवेश नहीं होगा करुणा का उदय नहीं होगा तो आप मनुष्य किस काम के आप मनुष्य नहीं है राक्षस है दैत्य है तो यह था स्वामी जी का युग मंत्र युग नायक स्वामी जी का युग प्रयोजन कारी मंत्र तो स्वामी जी कहते हैं छोटे-मोटे रिफॉर्म छोड़ दी कि यह विधवा है उसका पुनः विवाह नहीं होगा तो वह अच्छे कपड़े नहीं पहन सकती है गहने नहीं पहन सकती है छोटी-मोटी बातें हैं रूट एंड ब्रांच रिफॉर्म लाओ समष्टि धर्म में स्मृति धर्म में तब कहीं जाकर के भारत का पुनः उत्थान होगा दिस वंडरफुल नेशनल मशीन हैज वर्क थ्रू एजेस यह हमारा वंडरफुल नेशनल मशीन है जिसने की युग युगांतर तक बड़ा ही सुंदर कार्य करता आ रहा है दिस वंडरफुल रिवर ऑफ नेशनल लाइफ इज फ्लोइंग बिफोर अस यह वंडरफुल नदी है जिसकी हमारी नजर के सामने अपनी भारतीयता भारतीय परंपरा को युग युगांतर से वहन करते लेकी आ रही है हु नोज एंड हु डेस टू से वेदर इट इज गुड एंड हाउ इट शल मूव यह वंडरफुल मशीन यह वंडरफुल रिवर यह प्रवाह नदी का जैसे कि गंगा स्वर्ग से नीचे उतर कर के पृथ्वी पर बह रही है भारतीय अपनी धर्म भूमि रूपी यह गंगा कौन साहस करके कह सकता है कि इस गंगा को कौन दिशा में बहना है कौन दिशा में नहीं बहना है हु नोज एंड हु डर्स टू से वेदर इट इज गुड एंड हाउ इट शल मूव कौन कहेगा कौन दुस्साहस करेगा गंगा के प्रवाह को बदल देने का गंगा के प्रवाह को जिस डायरेक्शन में जा रहा है वह अच्छा है या बुरा है ऐसा जजमेंट देने का निर्णय लेने का दुस्साहस किसका है थाउजेंड्स ऑफ सरकमस्टेंसस आर क्राउडिंग अराउंड इट गिविंग स्पेशल इंपल्स मेकिंग इट डल एट वन टाइम एंड क्विकर एट अनदर हजारों हजारों परिस्थितियां है जो कि इस हमारी भारतीय गंगा नदी के चारों ओर इर्दगिर्द मंडरा रही है कभी-कभी इस नदी का प्रवाह थम जाता है कम हो जाता है ठहर जाता है कभी बड़े ही जोर के साथ में इस नदी का प्रवाह फिर से बहता है हु डेस कमांड इट्स मोशन किंतु इस नदी के प्रवाह को कमांड करने का कंट्रोल कर करने का नियंत्रण करने का साहस किसमें है हजारों परिस्थितियां है हजारों भारतीय है हजारों फैक्टर्स से जो कि भारत रूपी गंगा नदी का प्रवाह ठीक करते हैं कोई एक मनुष्य कोई एक रिफॉर्म सोसाइटी या कोई एक रिफॉर्मर ऐसा दावा कभी नहीं कर पाएगा कि मैं ठीक करूंगा कि इस नदी का प्रवाह किस ओर जा रहा है और किस ओर जाना चाहिए अवर्स इज ओनली टू वर्क एज द गीता सेज विदाउट लुकिंग फॉर रिजल्ट हमारा कार्य है जैसे गीता कहती है कर्म करते जाओ कर्म के फल की चिंता मत करो फिड द नेशनल लाइफ विद द फ्यूल इट वांट्स बट द ग्रोथ इज इट्स ओन इस नेशनल लाइफ यह भारतीय प्रवाह को जीवन प्रवाह को जो शक्ति की आवश्यकता है जो इंधन की आवश्यकता है वह पूर्ति करो उसको प्रोवाइड करो अपने हृदय का खून बहा करके इस जमीन को सिंचित करो किंतु इस नदी का प्रवाह किस ओर जाएगा उसकी चिंता आप छोड़ दो नन कैन डिक्टेट इट्स ग्रोथ टू इट कोई भी उसका ग्रोथ या तो प्रवाह का डायरेक्शन ठीक नहीं कर पाएगा नहीं करना चाहेगा या तो फिर करने का साहस नहीं करना चाहिए देखिए स्वामी जी यह बात यहां पर क्यों कहते हैं क्योंकि वो कहते हैं कि भारतीय जो प्रवाह है वो ये दूसरा पॉइंट है जो कि स्वामी जी हमको बड़े अच्छे से समझाते हैं कि प्रत्येक नेशन ल प्रवाह प्रत्येक देश का इतिहास उसको उसकी परिस्थिति के अनुसार विभिन्न रास्तों पर लेकर जाता है यूरोप या तो फिर यह वेस्टर्न सिविलाइजेशन का प्रवाह उनको पॉलिटिकल पावर मिलिटरी पावर साइंटिफिक पावर की ओर लेकर गया भारतीय प्रवाह हमको धार्मिक प्रवाह की ओर धार्मिक पावर की ओर स्पिरिचुअल पावर की ओर लेकर गया आज यदि आप यह कहेंगे कि भारत में से इस धर्म को नेस्त नाब कर दो वही यूरोपियन मिलिटरी पावर यूरोपियन टेक्नोलॉजिकल इंजीनियरिंग पावर इंडस्ट्रियल पावर भारत में लेकर आओ तो यह बात भारत में कभी भी सफल नहीं होगी देखिए स्वामी जी यह नहीं कहते कि भारत में इंडस्ट्रीज डेवलप नहीं होनी चाहिए स्वामी जी यह नहीं कहते कि भारत में न्यूक्लियर फिजिक्स बायोटेक्नोलॉजी मेडिकल साइंस या तो जेनेटिक साइंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह सब डेवलप नहीं होना चाहिए स्वामी जी कहते हैं सब कुछ करो किंतु धर्म की ति के ऊपर में करो जैसे स्वामी जी कहते हैं कि अमेरिका में यदि आपको धर्म भी सिखाना है तो कहना पड़ेगा कि यह वेदांत धर्म सीखने से प्रतिदिन योगाभ्यास करने से आपको पॉलिटिक्स में यह बेनिफिट होगा जबकि भारत में आपको पॉलिटिक्स में इंप्रूव लाना है तो आपको कहना पड़ेगा कि यह नई डेमोक्रेटिक मेथड को आप इंप्लीमेंट कीजिए तो आपके धर्म में आपकी उन्नति होगी आपकी साधना आपकी उपासना और अच्छे से चलेगी भारत में सब कुछ धर्म की उपास ना की आध्यात्मिकता की भित्ति पर बना है यूरोप में सब कुछ जैसे कि भौतिकता की भित्ति पर बना है तो वह भौतिकता का भित्ति या तो मटेरियल िक फाउंडेशन भारत में आप लाना चाहेंगे कहेंगे कि स्पिरिचुअलिटी को डिमोलिश कर दो उसकी जगह यह मटेरियल इसिक फाउंडेशन बिठा दो तो समझ लीजिए कि यह प्रयास कभी भी सफल नहीं होने वाला है यह जो अपनी यह आदि गंगा यह सेले ियर रिवर यह स्वर्ग में से उतर करके हिमालय से यह भारत के यह मैदानों में भारत के जंगलों में भारत की खेतों में भारत की भूमि में जो बह रही है उसका प्रवाह बदलने का दुस्साहस मत करो बस यही देखो कि उसके प्रवाह में कहीं-कहीं पे चट्टाने गिरी है कहीं-कहीं पर बाधा आ गई है कहीं-कहीं पे लैंड स्लाइड हुई है तो अपने हृदय का खून बहा करके अपने पसीना बहा करके उस चट्टान को लैंड स्लाइड को व बाधाएं हैं उसको दूर कर दो यह प्रवाह को अपने आप बहने दो वो जिस डायरेक्शन में जाए उस डायरेक्शन की चिंता आप मत कीजिए बस अपना जो जी जान लगा कर के कर्तव्य पालन करना है गंगा के प्रवाह को बहते देने का वो करते रहिए कभी भी यह मत सोचिए कि यहां पे मैं डैम बना कर के दूसरी डायरेक्शन में गंगा को ले जाऊंगा ऐसा करने का दु साहस कभी मत कीजिए वह प्रवाह स्वर्ग से हिमालय से भारत के नदी जंगल पहाड़ वन वनराज जी शहर गांव जो जिस तरह से चलता जा रहा है चलने ही दीजिए आध्यात्मिक डायरेक्शन जो हमारी हजारों साल पहले पकड़ी हुई है उसको बदलने का प्रयास तनिक भर मत कीजिए वह स्वामी जी हमको यहां पर समझाते हैं इसके बाद का जो पॉइंट है वह भी एक बड़ा इंटरेस्टिंग पॉइंट है किंतु थोड़ा सा लंबा है उसको अभी हम कल देखते हैं आज यहीं तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु
प्रश्न: स्वामीजी भारतीय आध्यात्मिकता की तुलना गंगा से क्यों करते हैं?
स्वामी जी खाने एक उपमा दी वो यहां पर स्वामी जी उपमा दे रहे गंगा के प्रवाह के साथ में कंपेयर करके भारतीय आध्यात्मिकता की उपमा दे रहे हैं कंपेयर कर रहा है अभी जैसा कि गंगा का प्रवाह जितने जोर से हिमालय से वह जमीन पर आता है और जमीन पर भी आकर के भारत के वह गांव शहर में जाकर के सागर में मिलित होता है तो वैसे ही उतने ही जोर से यह भारतीय आध्यात्मिकता का प्रवाह भारत में बह रहा है देखिए कि प्रत्येक युग में नए-नए संत महात्माओं का जन्म होता रहा है श्री रामकृष्ण तक आप देखिए कि पूरी एक अनब्रोकन लाइन है जो संत महात्मा साधक अवतार भारत पर आ ही रहे हैं और जैसे किय गंगा नदी की तरह प्रवाहित होकर के भारत की भूमि को आध्यात्मिकता से सिंचित करते रहे हैं तो जितना वेग से गंगा का प्रवाह बहता है उतना ही वेग या तो उतना ही पावर आप य हमारे ऋषियों में मुनियों में संतों में कवियों में अवतारों में सिद्ध महापुरुषों में आपको मिलेगा इक्वल राइट
प्रश्न: समान अधिकार बनाम समान अवसर
राइट इक्वल राइट वर्सेस इक्वल अपॉर्चुनिटी इक्वल राइट का अर्थ आपने बिल्कुल वैसे एनालिसिस परफेक्ट किया है सबको नौकरी मिलनी चाहिए और गवर्नमेंट में जद इन लोगों को नौकरी नहीं मिलती तो रिजर्वेशन खड़ा करें सो इंस्टेड ऑफ इक्वल राइट आप कहे कि इक्वल अपॉर्चुनिटी दीजिए तो इक्वल अपॉर्चुनिटी से बाहर आकर के ठाकुर खुद कहते हैं ना कि सब में शक्ति का तारतम्य है विद्यासागर को कहते हैं तुम्हारे सर पर क्या दो सिं निकल के आए हैं कि मैं तुमको देखने को आया हूं तुम्हारे भीतर में विद्या है तुम्हारे भीतर में दया है करुणा है इसलिए मैं तुमको देखने के लिए आया हूं ठाकुर वैसे ही हर किसी को देखने को तो नहीं जाते थे कामी लोभी ऐसे लोगों को तो फिर शक्ति का तारतम्य है तो शक्ति के अनुसार कोई प्रोग्रेस करेगा कोई नहीं करेगा किंतु अपॉर्चुनिटी सबको मिलनी चाहिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि ब्राह्मण के लड़के को अपॉर्चुनिटी मिलती है शूद्र के लड़के को नहीं मिलती ऐसा नहीं होना चाहिए
प्रश्न: जिस तरह हम भारत की आध्यात्मिकता को नहीं बदल सकते, उसी तरह माता-पिता को अपने बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए।
यहां पे यहां पे एक बात है देखिए कि व्यक्ति में तमस भी होता है सत्व रजस तमस तीनों होते हैं और पूरा हैंड्स ऑफ अप्रोच ठीक नहीं है मैंने कुछ कुछ बच्चों को देखा है उनके पेरेंट्स ना उनको कभी डिसिप्लिन नहीं करेंगे तो इतना बेडली बिहेव करेंगे ना सोशल फंक्शंस में हमको लगेगा कि अरे इस पेरेंट्स को दिख नहीं रहा है कि उसका बच्चा इतना एकदम आउट ऑफ कंट्रोल हो जा रहा है सो पूरा लेसे फेयर जिसको कहते हैं हैंड्स ऑफ अप्रोच वो 100% भी ठीक नहीं है आपको उनको डिसिप्लिन करना है फिर लेट द फ्यूचर टेक इट्स कोर्स वो ठीक है किंतु बेसिक कुछ डिसिप्लिन चाहिए बिल्कुल ठीक है और मैंने दोनों पॉइंट ठीक है कुछ डिसिप्लिन भी करना चाहिए और जैसे कि बहुत सारे बच्चों के रास्ते में मां-बाप अभी वह उसको क्रिकेटर बनना है म्यूजिशियन बनना है जोर जबरदस्ती करके उसके पास में साइंस ट्रीम दिलवा हैं फिर वहां पर वह जाकर के वह बेचारा पूरा फ्रस्ट्रेट हो जाता है ऐसे यानी कि दोनों तरीके से ठीक है प्रॉपर पेरेंटिंग इज लाइक अरस्य धारा कवियो वदन इसके जैसा है [हंसी]
प्रश्न: स्वामीजी ने कहा था कि हमें इस युग के अनुसार नई स्मृतियाँ बनानी चाहिए।
सरस तुम्हार रीडिंग छ अने स्वामी जी ने अपने जो शिष्य शरद चंद्र चक्रवर्ती को कहा था कि ऐसा समय आएगा कि तुम लोगों के मुंह से कितने वेद वेदांत तंत्र और स्मृतियां निकलेगी तो यह बात बिल्कुल सही है कि स्वामी जी ने अपने गुरु भाइयों को अपने शिष्यों को बिल्कुल एकदम ठीक ठीक कह दिया था कि श्रुति के आदर्श को वैसे ही रखो स्मृति को युग अनुसार बदल दो एक परसेप्शन भी एक ऐसा है हो गया है एग्री अ किंतु देखिए स्वामी जी ने अल्टीमेटली क्या कहा कि बेस्ट एलिमेंट फ्रॉम द वेस्ट बेस्ट एलिमेंट ऑफ द ईस्ट दोनों को लेकर के आपको नया सिविलाइजेशन बनाना है और अमेरिका जाकर के स्वामी जी ने क्या देखा द अमेरिका इज अ हेवन फॉर मासस एंड वीमेन जो दरिद्र और महिलाओं के लिए जैसे कि एक स्वर्ग है फिर स्वामी जी काल्ट आज का जो कालक है उस समय वो नया-नया बना था स्वामी जी वहां जाकर के देख के आए बोले कि इस तरह का इंडस्ट्रियल स्कूल इंडिया में खोलना चाहिए तो बेस्ट एलिमेंट वहां से ले लो और बेस्ट एलिमेंट इंडिया के ले लो दिस इ स्वामी जी फ्यूचर स्वामी जी ने ऐसा नहीं कहा कि आप प्रवाह बदल दे किंतु ऐसा भी नहीं कहा कि आप संगम मत करें वेरी डिस्टिंक्ट बत ब डिफरेंट अर्थ है इसका अ संगम कर सकते हैं यमुना सरस्वती का किंतु सरस्वती यमुना का प्रवाह नहीं बदल पाएंगे अल्टीमेटली दोनों संगम की ओर जा रही है मने नेचरली दोनों एक दूसरे की और संगम को की ओर जा ही रही है स्वामी जी की बात सुन कर के ऐसा ही लगता है क्योंकि स्वामी जी ने ऐसा तो नहीं कहा कि प्रवाह बदलो तो फिर संगम कैसे होगा कि नेचुरली संगम की ओर जा ही रही है यह जो अपने जो फ्रीडम मूवमेंट के जो प्रथम प्रथम जितने भी लीडर थे ना सभी वह मोतीलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू फिर यह गांधी जी यह सुभाष चंद्र बोस लाला लजपतराय यह फिर जितने भी थे वो सभी में देखिए कि और स्वामी जी से प्रभावित थे बाद बाद में ना इंडिपेंडेंस के बाद में यह सेकुलरिज्म का ऐसा एक विश जैसे कि भारत में फैल गया ना सभी लोग स्वामी जी को भूल गए
प्रश्न: हमें बेहतर प्रचार के लिए ठाकुर, मा, स्वामीजी के विचारों को व्यवस्थित करने की आवश्यकता है
यह जो क्रिश्चियनिटी में आप देखेंगे कि जीसस के जाने के बाद में बहुत सारे सेंटर्स बने तो थे किंतु जैसे आपने कहा कि एक इंटेलेक्चुअल चर्निंग सब समय चल रहा है कि व्हाट इज द राइट मॉडल क्योंकि जो भी क्रिश्चियनिटी प्रीच कर रहा है वह अपने तरीके से कर रहा है फिर आखिर में सेंट अगस्ट टा उन्होंने सिटी सिवितास डे द सिटी ऑफ गॉड लिखा जिसमें कि क्रिश्चियन प्रिसेप्ट है क्रिश्चियन प्रिंसिपल है बहुत ही अच्छे से फॉर्मुले किए गए थे ट गेव सचे पावरफुल फिलोसॉफिकल बुस टू क्रिश्चियनिटी की फिर वो बहुत ही रेपिडली फैलना शुरू हुआ सो यह सेंट ऑस्टाइन जिन्होंने यह क्रिश्चियनिटी के लिए किया या तो शंकराचार्य जिन्होंने किया अ द्वैत वेदांत के लिए किया तो यह कार्य रामकृष्ण भावधारानी स्वामी जी ने एक तरह से ठाकुर के विचारों का समष्टि स्वरूप तो तैयार किया है ठाकुर के विचारों को देखेंगे तो जनरली आपको व्यष्टि धर्म ही देखने को मिलता है मनुष्य की ईश्वर प्राप्ति की यात्रा का ही विवरण है तो उसको सामाजिक रूप में कैसे ढाला जाए या तो फिर समष्टि ईश्वर को कैसे आराध किया जाए वह स्वामी जी दिए हैं किंतु इवन नाउ एक मॉडर्न युग के अनुसार एक साइंटिफिक फॉर्म देना क्योंकि आज आपको यह रिलीजियस प्रिसेप्ट कैनन के रूप में नहीं चलेंगे टुडे यू विल हैव टू गिव इट ए प्रॉपर साइंटिफिक फॉर्म दैट दिस इज द रूट प्रिंसिपल और इस रूट प्रिंसिपल में से बाकी सब आइडियाज और प्रैक्टिसेस डिराइवर हुए हैं यह जो मॉडर्न मेथड ऑफ साइंटिफिक रेशनल थिंकिंग है उसको यहां पर अप्लाई करना होगा तो यू आर राइट कि दैट प्रोसेस नीड्स टू बी डन हु विल डू इट य तो अभी ठाकुर ही जाने है [हंसी]