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ओम स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का राजयोग चैप्टर थ्री उसका नाम है प्राण उसके आखिर तक हम पहुंच गए हैं कल का जो टॉपिक था वह थोड़ा डिफिकल्ट था वैसे तो राज्य के जितने भी टॉपिक है सभी थोड़े से डिफिकल्ट है किंतु देखिए कि ठाकुर महा स्वामी जी का आगमन ही तो इस तरह से हुआ है ना कि तीनों लोगों ने तीन एस्पेक्ट को आपस में बांट दिया है ठाकुर है इंडिविजुअल स्पिरिचुअल जर्नी जो है अपनी उसके बारे में उनका टीचिंग है मां का है कि हमारा जो एक सोशल लाइफ है सोशल लाइफ को किस तरह से आप आध्यात्मिक जीवन के अनुसार गड़े और स्वामी जी का कि जो एंटायस फिकल एस्पेक्ट है सिविलाइजेशनल एज वेल एज इंडिविजुअल उसको आप फिलोसॉफिकली इंटेलेक्चुअली कैसे समझे यह स्वामी विवेकानंद का कंट्रीब्यूशन है तो यह तीन कंट्रीब्यूशन जो है यह तीन कंट्रीब्यूशन इन तीनों लोगों ने आपस में बांटे हुए हैं तो हम लोग भी जब स्वामी जी को समझेंगे या स्वामी जी को देखेंगे तो बात वही है कि ठाकुर और और मां जिस बात को एक प्रैक्टिकल रूप में देखते थे या प्रैक्टिकल रूप में समझाते थे उन्होंने अपने खुद के जीवन में जो आचरण करके दिखाया है वही बात हमको स्वामी जी की फिलोसोफी में एक इंटेलेक्चुअली हमको समझाने का प्रयास किया गया है तो यहां पर
Raja Yoga
देखिए कि राजयोग में कल का जो टॉपिक था अभी हमारे पास में आज बिल्कुल हम आखिरी वहां तक पहुंच गए हैं लास्ट पॉइंट है राजयोग में साइंस एंड प्राणायाम 11थ पॉइंट किंतु यह 11वें पॉइंट पर हम जाए उससे पहले कल के जो पॉइंट था कल का जो पॉइंट था उसको हम थोड़ा सा और एक बार समझ लेते हैं क्योंकि उसमें काफी कुछ ऐसा था जो कि रिपीट करने की आवश्यकता है खास करके जो आखिरी जो पैराग्राफ थे दो उसको मैं एक बार रिपीट कर लेता हूं स्वामी जी क्या कहते हैं ऑल दिस ब्रिंगिंग ऑफ द माइंड इनटू अ हायर स्टेट ऑफ वाइब्रेशन इज इंक्लूडेड इन वन वर्ड इन योगा दैट इज समाधि ऑल द स्टेट्स ऑफ हायर वाइब्रेशन सुपरकॉन्शियस वाइब्रेशंस ऑफ द माइंड आर ग्रुप्ड इन दैट वन वर्ल्ड समाधि एंड द लोअर स्टेट्स ऑफ समाधि गिव अस विजंस ऑफ दिस बीइंग्स द हाईएस्ट ग्रेड ऑफ समाधि इज व्हेन वी सी द रियल थिंग व्हेन वी सी द मटेरियल आउट ऑफ व्हिच द होल ऑफ दिस ग्रेड्स ऑफ बीइंग्स आर कंपोज्ड एंड दैट वन लंप ऑफ क्ले बीइंग नोन वी नो ऑल द क्ले इन द यूनिवर्स सबसे पहले तो स्वामी जी ने इस पॉइंट में वाइब्रेशंस या तो फिर फ्रीक्वेंसी और वेवलेंथ के बारे में डिस्कशन किया उनका क्या कहना है जिस तरह से प्रकाश की किरण पूरे पूरी प्रकाश की किरण का टेक्निकल नाम है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव तो ये इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव उसकी डिफरेंट डिफरेंट फ्रीक्वेंसी होती है और हमारी जो आंख है उसमें से एक छोटी सी रेंज ऑफ फ्रीक्वेंसी ही ग्रहण कर पाती है ज्यादातर तो हमारी आंखें नहीं देख पाती तो यह उदाहरण देकर के स्वामी जी कहते हैं कि यह जो पूरा जगत है दो चीजों का बना हुआ है यह बात स्वामी जी ने बिल्कुल स्टार्टिंग में कही थी कि आकाश और प्राण इन दोनों चीजों का यह समस्त कॉस्मो एंटायस बना हुआ है आकाश है वो मैटर जिसमें से सब कुछ बना है और प्राण है वह फोर्स या तो एनर्जी जो कि इस मैटर के ऊपर में कार्य करती है तो यह आकाश और प्राण का सब कुछ बना है और साथ में ही स्वामी जी कहते हैं कि जो कुछ भी हमको दिख रहा है वह भी तो एक छोटा सा परसेंटेज मात्र है प्राण के जो वाइब्रेशंस हमारे साथ साथ में मैच होते हैं मनुष्य देह मनुष्य की पंच ज्ञानेंद्रिय कर्मेंद्रिय हमारा मन बुद्धि चित्त अहंकार इन सबके साथ में जिनके वाइब्रेशन या तो फिर फ्रीक्वेंसी एंड वेवलेंथ यह मैच होता है वही हम देख पाएंगे वही हम उसी के बारे में हम सुन पाएंगे उसी के साथ में हम इंटरेक्शन कर पाएंगे किंतु यह जो पूरा कॉस्मो से है वो विजिबल उसका एक छोटा सा एक पार्ट है ऐसा इतना सारा कुछ है इस कॉस्मो में जो कि डिफरेंट फ्रीक्वेंसी पे वह चलता है तो डिफरेंट फ्रीक्वेंसी प होगा अभी जैसे कि मोबाइल है मोबाइल जैसे मेरा मोबाइल है वह पहले पता है ना वो फ्रीक्वेंसी ऑप्शन होता था तो 2g फ्रीक्वेंसी फिर 3g फ्रीक्वेंसी ऑक्शन फिर 4g अभी यह 5g आ गया है तो आप मेरा मोबाइल यदि 2g का है तो वह 3g फ्रीक्वेंसी नहीं पकड़ पाएगा अभी यह 5जी आजकल चल रहा है तो मेरा मोबाइल अभी पुराना है 3g का है तो मुझे अभी नया मोबाइल खरीदना पड़ेगा जिससे कि 5g फ्रीक्वेंसी पकड़ पाए जिससे कि यह जो डाटा स्ट्रीमिंग है बहुत ही ज्यादा फास्ट हो जाए आप 4k वीडियो लाइव देख सकते हैं 5g में यदि आपके पास में इस तरह का इंस्ट्रूमेंट है तो किंतु देखिए कि आकाश में 5g के वाइब्रेशन तो सब समय फैलते ही रहते हैं किंतु मेरा मोबाइल यदि पुराने ढंग का है 3g 2g वाला तो 5g वाइब्रेशन चारों ओर घूमते रहने के बावजूद मेरा मोबाइल उसको कैच नहीं कर पाएगा तो वैसे ही यह जो दूसरे लोग है वह हमारे चारों ओर रहने के बावजूद भी बिकॉज कि उनकी फ्रीक्वेंसी डिफरेंट है हम उसको नहीं देख पाते अच्छा अभी देखिए कि इंटरेस्टिंग ऐसा
Dark matter, Dark energy
ही एक दूसरा कांसेप्ट आजकल मॉडर्न फिजिक्स में है मॉडर्न कॉस्मोलॉजी में है जब हम लोग अ टेलिस्कोप का आविष्कार किया पहले पहले हम ऐसा सोचते थे कि देखिए कि एक तो पृथ्वी है जो कि पूरे ब्रह्मांड का सेंटर है क्योंकि पृथ्वी पर मनुष्य का जन्म हुआ है पृथ्वी पर सन ऑफ गॉड अर्थात कि जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ है तो फिर पृथ्वी ही पूरे विश्व ब्रह्मांड का सेंटर होना चाहिए ऐसा एक वेस्टर्न यूरोप में एक ऐसी मान्यता चल रही थी उसके बाद में जब टेलिस्कोप है मैथमेटिक्स से एडवांस फिजिक्स से इन सबका आविष्कार होता गया वैसे-वैसे यह लोग समझते गए कि हां अपना जो पृथ्वी है वह तो सिर्फ एक ग्रह है ऐसे पूरे आठ नौ ग्रह पर सूर्य के आसपास में चक्कर लगा रहे हैं ऑर्बिट ंग कर रहे हैं और फिर यह सूर्य भी जो है एक पूरी विराट मिल्की वे गैलेक्सी का एक छोटा
milkyway galaxy
सा तारा है इस मिल्की हुए गैलेक्सी में सूरज के जैसे हजारों करोड़ों सितारे हैं और फिर और ज्यादा एस्ट्रोनॉमी डेवलप हुआ तब कहीं पता चला कि यह जो मिल्की वेग गैलेक्सी जिसको कि हम इतनी विराट समझ रहे थे सूरज जैसे हजार करोड़ तारे ऐसी तो करोड़ों करोड़ों करोड़ों गैलेक्सिया है आजकल जो कांसेप्ट है मॉडर्न कॉस्मोलॉजी में इसको कहते हैं विजिबल यूनिवर्स विजिबल
visible universe
यूनिवर्स की साइज कितनी है तो कहते हैं कि 15 बिलियन लाइट इयर्स अक्रॉस यह है तो खैर यह सब एडवांस है सब बातें इतना डिटेल हम साइंस में नहीं जाएंगे किंतु कहने की बात यह है कि जैसे-जैसे मनुष्य की बुद्धि ओपन होती गई हमको यह साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट हमारे डेवलप होते गए वैसे-वैसे ही हमको यह देखने को मिला कि यह ब्रह्मांड की जो साइज है ब्रह्मांड में जो कुछ भी रह रहा है चाहे स्टार्स हो ना कि गैलेक्सी सब समय कुछ ना कुछ नया इन्वेंशन होता रहता है डिस्कवरी चलती रहती है ये ब्लैक होल जब उसके बारे में थियोरेटिकल कि प्रकाश की किरण भी उसमें से बाहर ना निकल पाए तो अभी आखिर में देखिए कि साइंटिस्ट लोगों ने रिसेंटली ब्लैक होल का
Blackhole
भी पिक्चर ले लिया है तो धीरे-धीरे करके ये डिस्कवरीज बढ़ती गई जैसे-जैसे डिस्कवरीज बढ़ती है वैसे-वैसे ही हमको पता चलता है कि यूनिवर्स का स्केल जो है कितना बड़ा है तो यहां तक अपना 20th सेंचुरी साइंस आके खड़ा था 21 सेंचुरी में और भी एक भयानक नई डिस्कवरी हुई यह लोग क्या कहते हैं कि जो कि विजिबल यूनिवर्स है विजिबल यूनिवर्स अर्थात कि प्रकाश की किरणें है या तो फिर एक्स रे है ना कि ये अल्ट्रावायलेट है जो पूरा जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम है उसके द्वारा जो हमको यह यूनिवर्स दिखता है वो यूनिवर्स एक्चुअली इज बेरली 4 पर ऑफ
Dark Matter, Dark energy
एंटायस ऑफ द कॉस्मो देख लीजिए पहले हम अपनी आंखों से देखते थे तो यह जो हज 2000 तारे जो आकार में दिखते हैं उतने ही दिखते थे फिर टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया शुरू शुरू में गैलीलियो वगैरह ने तो चांद का ठीक से निरीक्षण किया मंगल ग्रह का अच्छे से निरीक्षण किया यह पता चला कि पृथ्वी सूर्य के आसपास में घूम रही है फिर जैसे-जैसे यह टेलिस्कोप की जो
newton telescope
कॉम्प्लेक्शन है कैच करने का अभी चंद्र चंद्रशेखर करके जो अपना इंडियन साइंटिस्ट था उसके नाम से यह चंद्र एक्सरे लेबोरेटरी बोलकर के एक स्पेस टेलिस्कोप बनाया गया है
chandra lab
वह क्या करता है एक्सरे स्पेक्ट्रम में यह यूनिवर्स को देखता है तो यह डिफरेंट डिफरेंट इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम में वह पिक्चर लेता है कोई टेलिस्कोप कोई एक्सरे स्पेक्ट्रम में लेता है कोई अल्ट्रावायलेट में लेता है अभी आजकल तो ग्रेविटी वेव डिटेक्टर्स आ गए हैं कि ग्रेविटी के जो वेव्स है उसके बेस पे आप पिक्चर बना सकते हैं यूनिवर्स का अभी रिसेंटली ग्रेविटी वेव्स का एक यूनिवर्स का पिक्चर लेकर के वो शेयर किया गया था तो मैंने अभी जितना जितना अपनी इंस्ट्रूमेंट की ताकत बढ़ती जाती है उतना उतना ही अपना यह ब्रह्मांड का जो पिक्चर है वह क्लियर होता जाता है किंतु जो लेटेस्ट डिस्कवरी है वह क्या कहती है कि अपने जितने भी इंस्ट्रूमेंट है उस इतने इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से जो ब्रह्मांड हमको दिखता है दैट इज बेरली फोर और 5 पर ऑफ द टोटल मास ऑफ द यूनिवर्स ये यूनिवर्स का जो साइज है यूनिवर्स के भीतर में जो सब पदार्थ है उसमें से सिर्फ 4 पर हमको दिखाई दे रहे हैं जितने भी इंस्ट्रूमेंट हमने आज तक डेवलप किए उसके माध्यम से और जो नहीं दिखाई देता
Dark matter, dark energy
इंटरेस्टिंग साइंटिस्ट लोग उसको क्या कहते हैं डार्क मैटर या तो फिर डार्क एनर्जी अर्थात कि एक ऐसा पदार्थ एक ऐसी एनर्जी जो कि आजकल किसी भी इंस्ट्रूमेंट से ना ही हम उसको देख पाएंगे ना ही हम उसके साथ में इंटरेक्ट कर पाएंगे दि वेरी इंटरेस्टिंग ये यह तो एक कांसेप्ट हो गया कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी इस विश्व ब्रह्मांड का मोर देन 95 पर वो है डार्क मैटर या डार्क एनर्जी जिसके बारे में साइंटिस्ट लोगों को इन स्पाइट ऑफ मोस्ट एडवांस थियस मोस्ट एडवांस इंस्ट्रूमेंट कुछ भी पता नहीं है स्पेक्युलेटिव होकर के हमको मल्टीवर्स का कांसेप्ट देता है मल्टीवर्स का कांसेप्ट क्या है कि यह जो हमारा यूनिवर्स या कॉस्मो है इस तरह के कितने ही कॉस्मो है
multiverse
जो कि एक साथ में पैरेलल जी रहे हैं पैरेलल उनका एजिस्ट सस है और हो सकता है अभी आजकल की साइंस फिक्शन आप देखेंगे तो यह लोग तो यहां तक स्पेक्युलेटिव में से दूसरे यूनिवर्स में जंप लगा सकते हैं अभी यह ह्यूमन लेवल पे शक्य नहीं है पॉसिबल नहीं है किंतु माइक्रोस्कोपिक लेवल पे मैथमेटिकली तो यह प्रूव हो चुका है कि मल्टीवर्स में आप फ्रॉम वन यूनिवर्स टू अनदर यू कैन जंप हालांकि ये फिर भी इसमें स्पेक्युलेटिव ही अभी रिसेंटली उसमें इस तरह का एक एडवांसमेंट आया है कि जो आजकल का जो मोस्ट पावरफुल सुपर कंप्यूटर है उसको एक प्रॉब्लम का सॉल्यूशन लाने में एक पार्टिकुलर डिफिकल्ट प्रॉब्लम को उन्होंने कंप्यूटर क्वांटम कंप्यूटर पर टेस्ट किया वो पा मिनट में उसका सॉल्यूशन आ गया अभी यह लोग कहते हैं कि यही डिफिकल्ट प्रॉब्लम यदि आजकल के सुपर कंप्यूटर में मोस्ट पावरफुल सुपर कंप्यूटर में चलाएंगे इट विल टेक मोर देन वन सेप्टिलिन इयर्स वन बिलियन इयर्स अर्थात कि एक के ऊपर में पता नहीं कितने जीरो मैं भूल गया अभी मैं सुबह कोई फिगर पढ़ रहा था तो यह जो फिगर है कि इतने करोड़ों करोड़ों करोड़ों करोड़ों साल लगेंगे दिस फिगर इज लार्जर देन द लाइफ ऑफ द यूनिवर्स यूनिवर्स का जो पूरा लाइफ स्पान है उससे लंबी यह उसकी उसका समय इससे ज्यादा समय लगेगा यह आज के सुपर कंप्यूटर को यह डिफिकल्ट प्रॉब्लम सॉल्व करने में जो कि क्वांटम कंप्यूटर ने 5 मिनट में कर दिया है तो अब यह प्रश्न होता है कि क्वांटम कंप्यूटर है वह क्वांटम स्टेट्स का इस्तेमाल करता है यानी कि ऐसा हो सकता है कि बहुत सारे कंप्यूटेशंस बहुत सारा कैलकुलेशन क्वांटम कंप्यूटर में पैरेलल यूनिवर्स में चल रहा है पैरेलल रियलिटीज में पैरेलल डाइमेंशंस में चल रहा है दिस इज वन स्पेक्युलेटिंग साइंस इस तरह की कोई पॉसिबिलिटी को डिस्कार्ड नहीं करता कि डिफरेंट डिफरेंट वर्ल्ड्स आर देयर व्हिच आर लिविंग इन पैरेलल बट दे कैन नॉट कम्युनिकेट विद ईच अदर जो कि स्वामी जी यहां पर कहते हैं अभी स्वामी जी प्राण की
Swami Vivekananda
थिरी पर कार्य करते हैं कहते हैं कि डिफरेंट वाइब्रेशंस ऑफ प्राण है डिफरेंट फ्रीक्वेंसी और वेवलेंथ है डिफरेंट डिफरेंट वर्ल्ड का जो कि एक दूसरे के साथ में कम्युनिकेट नहीं कर पाते किंतु जिस क्षण आपने यह अपनी फ्रीक्वेंसी चेंज की अपनी वेवलेंथ चेंज की साथ-साथ में ही आप दूसरे लोक में जंप लगा पाएंगे जिसको कि आजकल की लैंग्वेज में कहते हैं व होल एक वर्म होल एक ओपन करके एक यूनिवर्स में से दूसरे यूनिवर्स में आप जंप लगा पाएंगे अभी
Wormhole
यह थिरी जो है मॉडर्न साइंस की दृष्टि से कंपलीटली एलियन या तो कंप्लीट लाफेबल नहीं है क्योंकि मॉडर्न साइंस इट सेल्फ सेज की जो विजिबल स्पेक्ट्रम जो और विजिबल स्पेक्ट्रम ही नहीं इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म के जितने भी ये है फ्रीक्वेंसी हमारे मोस्ट एडवांस इंस्ट्रूमेंट जो है वह सिर्फ इस यूनिवर्स का 4 पर देख पा रहे हैं 95 पर से भी ज्यादा मैटर एंड मास इज अ डार्क एनर्जी डार्क मैटर जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं स्पेक्युलेटिव आगे जाकर कहता है देयर कैन बी मल्टी वर्सेस मल्टीपल यूनिवर्सेज लिविंग साइड बाय साइड को एसिस्टिंग साइड बाय साइड इन पैरेलल रियलिटीज पैरेलल डायमेंशन अबाउट व्हिच वी डू नॉट नो एनीथिंग हां मैथमे है मैथमेटिकली आप बहुत कुछ जान सकते हैं किंतु इन रियलिटी तो किसी ने एक यूनिवर्स में से दूसरे यूनिवर्स में जंप नहीं लगाया है तो देखिए कि स्वामी जी की यह थिरी है कंपलीटली आउटलैंड नहीं है कंप्लीट अनबिलीवर्स साइंस इट सेल्फ इसमें से बहुत ज्यादा कुछ एक्सेप्ट करता है क्या एक्सेप्ट करता है कि देयर आर डिफरेंट लेवल्स ऑफ रियलिटी अबाउट व्हिच एज यट वी डू नॉट नो एनीथिंग अभी स्वामी जी का जो कांसेप्ट है कि प्राण आका आश और प्राण के वाइब्रेशन और प्राण के डिफरेंट डिफरेंट वाइब्रेशन पर डिफरेंट डिफरेंट लोगों का डिफरेंट डिफरेंट वर्ल्ड्स का एक्जिस्टेंस होना ऑफकोर्स आज का मॉडर्न साइंस उसको एक्सेप्ट नहीं करेगा किंतु क्या है फिर एट द एंड ऑफ द डे पता है कि जैसे कि यह वेस्टर्न मॉडर्न साइंस जो है वह पूरा ग्रीक और रोमन जो ट्रेडिशनल निक सिविलाइजेशन जिसको कहते हैं वो हेलेनिक सिविलाइजेशन का डेवलपमेंट ही आज का मॉडर्न
Hellenic Civilization
यूरोप है और वेस्टर्न सिविलाइजेशन जिसको कहते हैं एक तो थी हेलेनिक सिविलाइजेशन जो कि ग्रीस और रोम में आज से दो 2500 साल पहले 3000 साल पहले डेवलप हुई और आज की मॉडर्न वेस्टर्न सिविलाइजेशन इन दोनों के बीच में एकदम स्ट्रांग लिंक है हेलेनिक सिविलाइजेशन को ही इन लोगों ने बहुत सारे कांसेप्ट उसी में से लेकर के आज का मॉडर्न साइंस डेवलप किया है ऐसा नहीं है कि उन्होंने फिर अपनी जो इंडिक सिविलाइजेशन है नाइल वैली सिविलाइजेशन है उसमें से नहीं लिया बहुत कुछ लिया है किंतु उनका जो मोरल एथिकल स्टैंडर्ड जो है उनकी जो स्ट्रांग बिलीफ जो है वह सब हेलेनिक सिविलाइजेशन में से आती है तो देखिए कि ग्रीस में जो आज से दो ढाई 3 हज साल पहले जो डेवलप हुआ उसको यदि मॉडर्न सिविलाइजेशन में इतना सब कुछ एक्सेप्ट करके डेवलप किया गया तो ये जो अपने जो हिंदू आइडियाज है अपना जो भारतीय संस्कृति इंडियन कल्चर जो है उसके यह जो सब आइडियाज है उसको डेवलप करने का रिस्पांस पॉसिबिलिटी अभी हमारा है यदि हम इसको नहीं डेवलप करेंगे तो और कोई वेस्टर्न यूरोप में आप जाकर के यह मत एक्सपेक्ट कीजिए कि यह लोग हमारे आइडियाज हमारे लिए डेवलप कर देंगे अभी मैं विश्वरूप महाराज सर्व प्रियानंदनसेक्स है ब्रायन ग्रीन और उसने काफी इंटरेस्टिंग किताबें लिखी है फिजिक्स है मॉडर्न कॉस्मोलॉजी है उसके बारे में जिससे कि एक आम आदमी समझ पाए मेरे जैसे लोग हम लोगों को कोई मैथमेटिक्स तो आता नहीं है फिजिक्स या साइंस की लैंग्वेज है मैथमेटिक्स जब तक आपको मैथमेटिक्स नहीं आएगा आप कुछ भी समझ नहीं पाएंगे ये ऐसा कहने जैसा है यदि आपको संस्कृत नहीं आएगा तो भारतीय शास्त्रों में आप बहुत ज्यादा डीप में नहीं जा पाएंगे ऊपर ऊपर से आप रहेंगे ट्रांसलेशन पढ़कर करके तो वैसे ही मैथमेटिक्स में है जब तक आपको वैसे ही फिजिक्स में है जब तक आपको मैथमेटिक्स ठीक से नहीं आएगा तब तक आप फिजिक्स में ज्यादा डीप में नहीं जा पाएंगे किंतु फिर तो हमारे जैसे जो कॉमन मैन है उनको भी तो यह जो एडवांस डिस्कवरीज है कटिंग एज इनोवेशंस है वो एक्सेसिबल होनी चाहिए तो पूरा एक ग्रुप है फॉरेन कंट्रीज में जो कि ये मॉडर्न कांसेप्ट को एक लेमन की लैंग्वेज में पॉपुलर इज करते हैं तो ऐसा एक नाम है यह ब्रायन ग्रीन जिसका कि सर्वप्रिया नंद जी के साथ में मुलाकात हुआ तो ये ब्रायन ग्रीन क्या कहता है पता है इंटरेस्टिंग कहता है कि उसका जो बड़ा भाई है वह इस्कोन में साधु है और इस्कोन का तो है यह सब इंडियन कल्चर को प्रमोट करने का तो ब्रायन ग्रीन है कि मॉडर्न फिजिक्स को मैंने उसको बहुत अच्छे से समझता है और उसका भाई है जो कि इस्कोन का साधु जो कि इंडियन कल्चर और अपनी जो ट्रेडिशनल कर रहा है वह कहता है कि हम दोनों में बड़ा ही इंटरेस्टिंग डिबेट होता है तो सर्वप्रिया नंद जी ने उस को पूछा कि हाउ डू यू अ इंटरप्रेट दिस इंडियन आइडियाज ये जो अपने इंडियन आइडियाज है जो ब्रह्मांड की सृष्टि इस तरह से हुई पंची करण से पहले वो आकाश आकाश में से वायु वगैरह जो भी है वो पंच महाभूत की सृष्टि हुई पंच महाभूत में से फिर आगे जो कॉस्मो बढ़ता गया वगैरह वगैरह जो आइडियाज है अपने हिंदू संस्कृति के इंडियन कल्चर के हाउ डू यू इंटरप्रेट दैट तो वो ब्रायन गन अपनी किताब में ही लिखता है कहता है दिस आर ऑल द पोएटिक इकोज ऑफ मॉडर्न फिजिक्स ये जो मॉडर्न साइंस है उसका एक पोएटिक इको अर्थात कि एक कवित्वम उसका एक क्या कहेंगे परछाई कहेंगे कि ऐसा एक है तो देखिए कि अ सम हाउ दिस आइडियाज हमको पैरेलल जाते हुए दिखेंगे वही है कि आज की जद मॉडर्न साइंस में आपको यदि इसको एक्सप्रेस करना है आपको बड़ा ही सॉलिडली स्ट्रांग मैथमेटिकल फाउंडेशन चाहिए विदाउट मैथ मैथमेटिक्स किसी भी चीज को आप एक्सेप्ट नहीं करेंगे उसको आप सिर्फ स्पेक्युलेटिंग करना एक्सपेरिमेंट करके प्रूव करना वगैरह वगैरह जो फाइव सिग्मा
sigma method
मेथड है थ सिग्मा बहुत सारी मेथड्स है मॉडर्न साइंटिफिक डि उसको नोबेल प्राइज है जैसे कि नोबेल प्राइज किसको मिलता है इसको नहीं मिलता कि जिसने सबसे ज्यादा रेवोल्यूशन आइडियाज उसने डेवलप किए हो नोबेल प्राइज उसको मिलता है कि जिसने इस रेवोल्यूशन आइडियाज को उसने प्रूव किया हो जैसे कि अ अभी ये जैसे कि कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन है कॉस्मिक बैकग्राउंड माइक्रोवेव रेडिएशन कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन सीएमबी तो अभी इसमें क्या है कि अभी यह पूरा जब बिग बैंग हुआ बिग बैंग में तो बहुत बड़ा विस्फोट हुआ उसका अर्थ है कि बहुत बड़ा उसका अभ धमाका जब होता है एक्सप्लोजन जब होता है तो क्या होता है बहुत ज्यादा हीट बहुत ज्यादा एनर्जी प्रकट होती है आपने वह दीपावली में जो फटा के फुट हैं तो फटाके के सामने जद आप खड़े रहेंगे तो आपको पता चलेगा जद आप बम फोड़ें तो एक तो प्रकाश होता है दूसरा की हीट यानी कि गर्मी प्रकट होती है एनर्जी प्रकट होती है अग्नि प्रकट होता है तो बिग बैंग जब हुआ जिसमें से इस यूनिवर्स की प्रारंभ हुई रचना हुई यह तो कितना भयानक विस्फोट होगा उसमें से कितनी एनर्जी कितना हीट प्रकट हुआ होगा तो यदि आज हम यह कल्पना करें कि यूनिवर्स की एज जो है उम्र जो है वो 15 बिलियन साल ना कि इतना कुछ है और इस ज बिग बैंग के समय में इतना हीट प्रकट हुआ होगा तो आज वो हीट धीरे-धीरे कम होते होते कितना रह गया होगा जैसे आप जैसे आप खाना बना रहे हैं ये तवा जो है जिसमें आप रोटी बनाते हैं उसने उसको आपने उसके ऊपर में रखा चूल्हे प रखा अभी रोटी सेकना बंद खत्म हो गया तो फिर आपने ये तवा को नीचे उतार दिया प्लेटफॉर्म पर रख दिया चूल्हे पर से उतार कर करके अभी क्या होगा जिस क्षण आप तवे को उतारेंगे वो गैस जो है कनेक्शन बंद करेंगे उस समय आप यदि तवा को स्पर्श करने का प्रयास करेंगे बहुत ही गर्म होगा इमीडिएट आपकी उंगली जल जाएगी किंतु धीरे-धीरे धीरे करके आप देखिए कि 10 मिनट में 20 मिनट में आधे घंटे में तवा जो है ठंडा होता जाता है अभी यह जो मैथमेटिक्स इतना पावरफुल है कि जदिया जब उतारा गया था या तो फिर तवा जब जिसमें आप रोटी बना रहे थे रोटी बनाने के समय उसका टेंपरेचर था मान लीजिए 50 डिग्री स सेल्सियस मैं एक अनुमान करके कहता हूं और यदि अभी जो तवा का जो टेंपरेचर है वो है मान लीजिए 32 डिग्री सेंटीग्रेड तो अभी ये 52 डिग्री सेंटीग्रेड शुरुआत का टेंपरेचर है और अभी रूम टेंपरेचर पे आ गया है 32 डिग्री पे तो फिर मान लीजिए कि कितने समय पहले ये 50 डिग्री ना कि इतना ना होगा तो आप मैथमेटिक्स से यह प्रूव कर सकते हैं कि यदि अभी का टेंपरेचर 32 डिग्री है तो आधे घंटे पहले इसका टेंपरेचर इतना होना चाहिए 50° ना 60 डिग्री जितना भी हो यह बड़ा ही क्लियर रिलेशन है कि शुरुआत का टेंपरेचर इतना है और अभी का टेंपरेचर इतना है तो इतना समय बीता होगा तो यह साइंटिस्ट लोग कैलकुलेशन कर रहे हैं यदि बिग बैंग हुआ होगा तो यूनिवर्स का टेंपरेचर इतना होगा तो अभी इतना समय यदि जीता है मान लीजिए 15 बिलियन इयर्स तो अभी यूनिवर्स का टेंपरेचर इतना होगा तो कितना है 3 डिग्री अबोव जीरो 3 डिग्री अबोव एब्सलूट जीरो तो अभी ये लोगों ने कैलकुलेट तो कर दिया कि विश्व ब्रह्मांड का जो टेंपरेचर है में 3 डिग्री होना चाहिए समथिंग लाइक दैट 2.7 एग्जैक्ट कैलकुलेशन इतना है आजकल का तो अभी इसको कहते हैं 3 डिग्री अबोव जीरो एब्सलूट जीरो ये विश्व यूनिवर्स का टेंपरेचर है किंतु ये थिरी डेवलप करने से क्या हुआ जब तक आप उसको प्रूव नहीं करेंगे तब तक तो आपको नोबेल प्राइज नहीं मिल वाला है तो अभी जो टीम ने यह सब प्रूव किया उसको छोड़ कर के एक दूसरी टीम थी वे लोग क्या कर रहे थे कि यह जो डिश एंटेना होता है ना यह रडार जो कि ये सेटेलाइट कम्युनिकेशन वगैरह उसको कैच करने के लिए जो बनता है ऐसा एक डिश एंटेना डेवलप कर रहे थे तो कर रहे थे तो देखा कि सब समय उसमें एक बैकग्राउंड डिस्टरबेंस चल रहा है तो ये बैकग्राउंड डिस्टरबेंस किस चीज का है उनको समझ में नहीं आता वे लोग अपने इंस्ट्रूमेंट को ट्यून किए ही जा रहे हैं किए ही जा र हैं ये डिस्टरबेंस जो है 3 डिग्री अबोव एब्सलूट जीरो ये डिस्टरबेंस चल रहा है ये इतनी फ्रीक्वेंसी में इसका
Cosmic Microwave Background
क्या अर्थ है किसी को समझ में नहीं आता फिर यह दो टीम है वो दो टीम का कहीं से मिलन हो गया और एक टीम को दूसरी टीम के बारे में जानने को मिला जिन लोगों के डिश एंटेना में 3 डिग्री का वो जो डिस्टरबेंस आ रहा था उन्होंने यह पेपर पढ़ा कि हां इन लोगों ने प्रिडिक्ट किया है कि कॉस्मो का बैकग्राउंड रेडिएशन 3° अबोव एब्सलूट जीरो होना चाहिए और ये जो टीम था कि जिसने मैथमेटिकल कैलकुलेशन किया था उन को यह पता चला कि इन लोगों ने सही सही में खोज निकाला है वही है कि वो लोग समझ रहे कि उनके इंस्ट्रूमेंट में कुछ गड़बड़ है तो दोनों टीम इकट्ठा हो गई वई कंबाइन पेपर पब्लिश किया कि हां हम लोग मैथमेटिकली यह प्रूव किए हैं कि कॉस्मो का टेंपरेचर होना चाहिए 3 डिग्री अबोव एब्सलूट जीरो और यहां पे ये टीम है उन्होंने एक्चुअली यह खोज के निकाला है और फिर इन लोगों को नोबेल प्राइज मिला तो यह है मॉडर्न साइंस कि आपको सिर्फ होनी चाहिए एक तो है कि सॉलिड मैथमेटिकल फाउंडेशन जो कि आपकी प्रेडिक्शन को एगजैक्टली पिन पॉइंट रिजल्ट बता सके क्योंकि देखिए कि परफेक्ट मैथमेटिक्स नहीं होता और यह नहीं पता चलता कि 3 डिग्री टेंपरेचर है यूनिवर्स का तो वह जो डिस्टरबेंस हो रहा है उनके एंटेना में उनके डिश में रडार में वो उसके साथ में मैच नहीं होता वे लोग हमेशा ऐसा ही सोचते रहते हैं कि इंस्ट्रूमेंट में गड़बड़ है और और यह लोग हमेशा थियोरेटिकल टीम है वैसा ही स्पेक्युलेटिंग तो कॉफी नहीं मिली तो फिर मेरा मूड थोड़ा सा ये हो गया मैंने कहा नहीं 20 डिग्री होना चाहिए ऐसा सब स्पेक्युलेटिंग चेंज होता रहेगा बट बिकॉज कि पावरफुल मैथमेटिक्स है आप एगजैक्टली पिन पॉइंट कर पाए कि इतना टेंपरेचर है और फिर इंस्ट्रूमेंट भी ऐसे होने चाहिए जो कि इसको कैच कर पाए देन यह सर्कल बिकम कंप्लीट कि एक स्पेक्युलेटिंग बैंग से यूनिवर्स की शुरुआत हुई यह दूसरा स्पेक्युलेटिव की एज इतनी है और तीसरा स्पेक्युलेटिंग बैंग से शुरुआत हुई तो टेंपरेचर भी होगा शुरू में और उस समय इतना था तो आज इतना होना चाहिए इसके ऊपर में सॉलिड मैथमेटिकल फाउंडेशन कि बिग बैंग के समय इतना टेंपरेचर था इतना टाइम पास हुआ है और आज इतना टेंपरेचर होना चाहिए फिर यह
Big bang to now
इंस्ट्रूमेंट का सोफिस्टिकेशन यह तीन चीज मिलकर के मॉडर्न साइंस होता है अनफॉर्चूनेटली हमारी हिंदू सभ्यता में आज उस एक समय होगा सतयुग को आप छोड़ दीजिए सतयुग त्रेता युग द्वापर युग भगवान राम थे भगवान कृष्ण थे ऋषि मुनि थे वह युग को आज छोड़ दीजिए आज आफ्टर इंडिपेंडेंस देखिए कि भारत की क्या परिस्थिति है हमारे पास में इतना एडवांस स्पैकुलेट है एज ऑफ टुडे स्वामी जी यह जो सब बातें करते हैं और स्वामी जी यह भी कहते हैं कि देखिए कि यह जो आप लोगों के जैसे डिश एंटेना है या फिर सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन है या फिर ये हबल स्पेस टेलिस्कोप है ये जो आपके इंस्ट्रूमेंट है ना हमारा इंस्ट्रूमेंट है कॉन्शियस विथ अवर कॉन्शियस वी कैन डिटेक्ट वी कैन मेजर वी कैन प्रूव एवरीथिंग बट प्रॉब्लम इज कि जो यह जो इतना एडवांस साइंस है उसको हम साइंटिफिकली ना ही डेवलप कर पाए हैं ना ही हम अपने स्कूल करिकुलम में इसको इंट्रोड्यूस करवा पा रहे हैं अपनी स्कूलों में यूनिवर्सिटी में जाएंगे तो यह लोग मॉडर्न आपको वेस्टर्न साइकोलॉजी है वेस्टर्न मेडिसिन है वेस्टर्न फिलोसोफी है सब कुछ सिखाएंगे किंतु अपना ईस्टर्न मेडिसिन है ईस्टर्न साइकोलॉजी है ईस्टर्न फिलोसोफी है यह लोग क्या कहेंगे दिस इज स्पेक्युलेटिंग एक्चुअली दिस थिंग्स कैन बी एक्सट्रीमली प्रैक्टिकल एक्सट्रीम प्रिसा इज एक्सट्रीमली पावरफुल एक्सट्रीमली साइंटिफिक जदिया दे इसके पीछे में सीरियस रिसर्च करना शुरू करें जो कि भारत में अभी तक नहीं हुआ है यह जो वेस्टर्न सिविलाइजेशन ने यह हेलेनिक सिविलाइजेशन थी यूरोप ग्रीस और रोम ये ग्रीस और रोम के जो मोरल पॉलिटिकल साइंटिफिक फाउंडेशन को अपना करके इतना एडवांस किया आज कहा जाता है ग्रीस एंड रोम हेलेनिक सिविलाइजेशन इज द मदर र ऑफ मॉडर्न सिविलाइजेशन अभी ये लोग कहेंगे हम लोग को स्वीकार करने की जरूरत नहीं है किंतु प्रॉब्लम यह है कि आजकल हम जो कुछ भी करते हैं सब वेस्टर्न साइंस की मदद से करते हैं एक मुझे एग्जांपल दिखा दीजिए जो कि हमारा ईस्टर्न साइंस में हमने डेवलप किया हो और जिसको कि हमने लार्ज स्केल पे इंप्लीमेंट किया हो और अब अब जैसे एक स्वामी जी के साथ मेरी बात हो रही थी यही सब मैंने कहा कि इंडिया का जो साइंस है ना उसमें ज्यादा कुछ दम नहीं है सब बातें बातें हैं हवाहवा में है तो बड़े ही नाराज हो गए मुझे बोला तुमको पता नहीं है मैं एक साइंटिस्ट को पहचानता हूं उसने पुष्पक विमान का वो पूरा आर्किटेक्चर बनाया है और उसका पूरा नक्शा उसने बनाया है तो मैंने कहा कि नक्शा बनाने से क्या होगा उसको क्या उसको कंस्ट्रक्ट करके उड़ाया है क्या हवा में हवा में जद उड़ना है तो आपका ये जो मॉडर्न जो कांसेप्ट है लिफ्ट वगैरह और यह उसी केरो एरो डायनेमिक्स जिसको कहते हैं मॉडर्न साइंस में उसी का तो सहारा लेना पड़ेगा ना हमने पुष्पक विमान का नक्शा बना कर के क्या बड़ा तीर मार दिया उड़ाया तो है नहीं ट तो बनाया नहीं है तो कहा कि अभी उसके पास में पैसा नहीं है ना गरीब साइंटिस्ट है इसलिए ऐसा वो हो रहा है तो देखिए आप कितना ही एक्सक्यूज दे दे है तो फिर तो नहीं ही हुआ ना जद गरीब है ऐसा थोड़ी ना था कि वेस्टर्न साइंटिस्ट बड़े बहुत बड़े अमीर थे उनको सपोर्ट करने वाले इंडस्ट्रियलिस्ट थे उनको सपोर्ट करने वाली गवर्नमेंट थी उनको सपोर्ट करने वाले फिलांथस थे कितना सब कुछ था ये काल टेक यूनिवर्सिटी आज इतनी बड़ी है स्वामी जी जब गए थे वहां कैलिफोर्निया में तो स्वामी जी को पता चला इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी रिसेंट यहां पे बनी है स्वामी जी खुद वहां पर गए काल टेक आज का मॉडर्न कैलिफोर्निया
Swamiji visits caltek
इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी स्वामी जी गए उसका ऑब्जर्वेशन किया फिर वह कहे कि ऐसा भारत में होना चाहिए क्यों देखिए ऐसा नहीं है कि नहीं हुआ है अपने यहां प इंडिपेंडेंस के बाद में ही जवाहरलाल नेहरू ने ये आईआईटी सब एस्टेब्लिश की प्रॉब्लम इज दैट कि आईआईटी में जो एक कटिंग एज डेवलपमेंट होना चाहिए ऐसा नहीं होकर के क्लार्क मेकिंग मशीन बन गया है यह जो जितने भी विदेशी संस्थाएं हैं उसमें उनको चीप लेबर चाहिए पहले फिजिकल लेबर चाहिए था अभी चीप इंटेलेक्चुअल लेबर चाहिए तो आईआईटी में से उठा जा रहा है लोगों को और इन लोगों को भी कि चलो विदेश में जाते हैं थोड़े बहुत मिलियन डॉलर बना देंगे और फिर आराम से जीवन निकालेंगे ऐसा नहीं कि भारत की भूमि में रह कर के भारत की ये जो धरोहर है उसको थोड़ा सा डेवलप किया जाए तो करने का प्रयास भी करेंगे तो ना ही कैपिटल मिलेगा ना ही इनकरेजमेंट मिलेगा और ना ही उसको ऐसा कोई आउटलेट मिलेगा प्रोडक्ट डेवलपमेंट का सो व्हाट एवर यदि भारत को एक महान देश फिर से होना है यूरोप और अमेरिका की तरह तो हमारी यह जो धरोहर है भारत देश को यदि सही सही में एडवांस होना है यदि सही सही में यह जो विश्व के जो सर्वोच्च देश है उनके साथ में फिर से कदम मिलाकर के आगे बढ़ना है तो हमको भी अपनी यह ट्रेडिशनल अपने साइंस को इतना ही एडवांस करना होगा इतना ही डेवलप करना होगा कि जितना कि वेस्टन यूरोप ने और अमेरिका ने किया है तो यह थे मेरे कुछ विचार स्वामी जी कहते हैं बहुत कुछ क्योंकि जैसे वो प्रश्न हुआ था ना मुन मुंदी ने कुछ दिनों पहले किया था कि मैं प्राणायाम तो रेगुलर करती हूं किंतु प्राणायाम के जो बेनिफिट यहां पर कहे गए हैं वह सब बेनिफिट मुझे प्राप्त क्यों नहीं हो रहे हैं तो उसके पीछे का यह सब आंसर है कि ये ये सब साइंस को बहुत ही हाईली डेवलप करना होगा स्वामी जी ने तो हमको सिर्फ एक बेसिक आईडिया देकर के गए हैं कि ऐसा ऐसा है कि डिफरेंट डिफरेंट रियास है डिफरेंट डिफरेंट यूनिवर्स है व्हिच एजिस्ट इन पैरेलल डायमेंशन यदि हम अपनी प्राण की फ्रीक्वेंसी को चेंज करें तो एक डायमेंशन में से दूसरे डायमेंशन में जंप लगा सकते हैं किंतु अब जब मैं यह सब बताता हूं आपको मेरे खुद के मन में प्रश्न होता है कि मैं सही कह रहा हूं कि नहीं ये स्वामी जी ठीक कह रहे हैं कि नहीं क्योंकि ना ही हमने स्वामी जी को ऐसा करते देखा ना ही ठाकुर को देखा हां ऑफकोर्स ठाकुर को ठाकुर के जो दर्शन थे और ठाकुर के दर्शनों के बारे में हमने डिस्कस भी किया है कि दर्शन के पीछे का साइंस क्या है तो स्वामी जी के अनुसार ये एक साइंस है कि डिफरेंट वर्ल्ड एजिस्ट इन पैरेलल डायमेंशन पास्ट प्रेजेंट एंड फ्यूचर दे कैन आल्सो को एसिस्ट अभी अब हम कहते हैं कि यह जो समय का एक जो एरो है यह पास्ट में से प्रेजेंट और प्रेजेंट से फ्यूचर की ओर जा रहा है आज का मॉडर्न कांसेप्ट कहता है कि यह जो पास्ट प्रेजेंट और फ्यूचर का कांसेप्ट है टाइम का वो गलत है गलत है यानी कि अपने अपने लेवल पर ठीक है किंतु यदि आप हाई एनर्जी या तो हायर वेलोसिटी या तो लोअर स्केल पे जाएंगे तो यह टाइम का कांसेप्ट ही चेंज हो जाएगा ऐसा हो सकता है कि टाइम स्लो हो जाए टाइम स्पीड अप हो जाए टाइम स्टॉप हो जाए टाइम रिवर्स में जाना शुरू हो जाए यह सब तो एक्सपेरिमेंट करके प्रूव हो चुका है कि हां जैसे-जैसे स्पीड बढ़ती है वैसे ही टाइम की स्पीड जो है वो लो होती जाती है यह जो आपको पता है ना यह अ जीपीएस अ जिओ पोजिशनिंग सैटेलाइट सिस्टम तो जिओ पोजिशनिंग सिस्टम तो इसमें क्या है कि इतने सारे सेटेलाइट हवा में छोड़ दिए गए पृथ्वी के आसपास ऑर्बिट करते हैं और
GPS
पृथ्वी पे एक यदि मान लीजिए मेरा मोबाइल है जिसमें यह जीपीएस पोजिशनिंग पकड़ता है तो क्या होगा कि यह जो सैटेलाइट तीन चार सेटेलाइट ट्रायंगुलेट करेंगे मेरी एग्जैक्ट पोजीशन मेरे मोबाइल में भेजेंगे किंतु आपको यह पता है कि यह सैटेलाइट बिकॉज कि आकाश में उड़ रहे हैं वहां पर ग्रेविटी कम है और उनकी स्पीड ज्यादा है उड़ने की अर्थात कि उनका जो समय है पृथ्वी से कुछ सेकंड के कुछ थाउज पार्ट ऑफ अ सेकंड स्लो चलेगा और यह सिर्फ स्पेक्युलेटिंग डायलेट है वेरिएशन इन टाइम रेफरेंस टाइम फ्रेम ऑफ रेफरेंस वो आपको टेकन इन टू अकाउंट करना होगा मैथमेटिकली आपको यह उसको यह करना होगा कैलकुलेशंस ठीक करने होंगे पृथ्वी पर समय की स्पीड इतनी है और अवकाश में समय की स्पीड इतनी है और दोनों का जो डिफरेंस है कैलकुलेट करना होगा नहीं करेंगे कैलकुलेट ठीक से तो जीपीएस आपको 10 मीटर इधर उधर पोजीशन दिखा देगा यानी कि इन उन लोगों का साइंस जो है इ इ सो प्रेसा क्योंकि उन्होंने पूरी जनरेशन आफ्टर जनरेशन साइंटिस्ट आफ्टर साइंटिस्ट इसमें वह हार्ड वर्क करके ये सब डेवलप किया है अपने इंडिया में यही प्रॉब्लम है कि हम लोग बैठे रहते हैं ये सोच करके कि हां अपना बहुत बड़ा अच्छा साइंस है ये स्वामी जी का बहुत अच्छा स्पेक्युलेटिव इसको क्या आप इसको एक प्रॉपर एक थिरी के रूप में डेवलप करेंगे इसको एक इंप्लीमेंटेबल मॉड्यूस बनाएंगे उस मॉड्यूस को अपने करिकुलम में इंट्रोड्यूस करेंगे टीचर्स एक के बाद एक ट्रेन करेंगे स्टूडेंट्स को फिर ये एक एंकरेज करेंगे कि यस टेक अवर इंडियन कोर्सेस इंडियन करिकुलम उसको भी आप ऑप्ट इन कीजिए जिससे कि आपका भी करियर बने फ्यूचर भी अच्छा हो ये जो एक प्रैक्टिकल एस्पेक्ट है ना हमारा इस कंप्लीट मिसिंग यह राजयोग के साथ में कोई भी साधु बहुत कम साधु देखेंगे बहुत कम लोगों को देखेंगे जो कि राजयोग के बारे में बात करना चाहता है क्यों क्योंकि कंपेयर टू श्री राम कृष्ण कथामृत कंपेयर टू मां का जीवन है या कंपेयर टू इवन स्वामी जी का लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा है जहां पे वह सेवा के बारे में आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च यह जगत के हित के बारे में इतनी बातें करते हैं तो वो सब हमारे लिए इजी है अंडरस्टैंड करना समझना ये शंकराचार्य का जो वेदांत है या फिर हम रामकृष्ण विवेकानंद वेदांत कहते हैं उसके बारे में भी बात करना आसान है क्यों क्योंकि वेदांत इज कंपलीटली कॉन्शियस लेवल का फिनोमिना है यदि वेदांत कहता है कि ब्रह्मण है और शक्ति है या तो अविद्या है तो आपको मॉडर्न साइंस की दृष्टि से यह सब प्रूव करने की जरूरत नहीं है आपको तो ये एक्सपीरियंस ही करना है क्योंकि ये सब जो प्योर सब्जेक्टिव है व्हाट इज द नेचर ऑफ ब्रह्मण इट इज प्योर सब्जेक्टिव नथिंग टू डू विद ऑब्जेक्टिव यूनिवर्स अराउंड अस किंतु राजयोग एक ऐसा टॉपिक है एक ऐसा विज्ञान है एक ऐसा एक सब्जेक्ट है कि जहां पे स्वामी जी डील्स विद दी ऑब्जेक्टिव वर्ल्ड डायरेक्टली यह जो चारों ओर जो कॉस्मो दिख रहा है चांद है सितारे हैं दूसरे मनुष्य है पेड़-पौधे हैं ये एटम है मैटर है एनर्जी है स्पेस है टाइम है जो कि मॉडर्न कांसेप्ट है कटिंग एज मॉडर्न कांसेप्ट है उन सबके साथ में स्वामी जी डायरेक्टली डीएल कर रहे हैं राजयुग में और इसीलिए बहुत कम लोग इसके बारे में डिस्कशन करना चाहते हैं या इसको स्टडी करना चाहते हैं क्योंकि सबसे पहला क्वेश्चन तो यही होगा कि प्रूव करके दिखाइए कि स्वामी जी जो कह रहे हैं वह सही है कि गलत है तो यह सब प्रूव करना मुश्किल हो जाता है हमको विश्वास भी नहीं होता कभी-कभी कि इस तरह की जो मैजिकल पावर स्वामी जी कहते हैं कि जद इफ यू कैन कंट्रोल प्रा यू कैन कंट्रोल यू कैन चेंज द मोशन ऑफ स्टार्स यू कैन चेंज द स्टार आउट ऑफ इट ऑर्बिट यू कैन चेंज द मोशन ऑफ सनस एंड गैलेक्सी माने ये कितनी बड़ी बात हो गई कि प्राण की शक्ति यदि हमारे हाथ में आ गई तो आकाश में जो सितारे देख रहे हैं उनकी गति को आप परिवर्तित कर पाएंगे लोगों के मन पर आधिपत्य जमा पाएंगे लोगों के मन की जो ये जो यह रिमोट हीलिंग जिसको कहते हैं अमेरिका में मेरा एक परिचित है मित्र वह बीमार है मैं यहां से उसको हीलिंग वाइब्रेशन पहुंचा सकता हूं जो कि अमेरिका में उसका स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा ऑल दिस सीमिंगली मिरेकुलम मैजिकल पावर्स आर पॉसिबल इफ वी स्टडी द साइंस ऑफ प्राणा किंतु ऐसा जैसे ही हम कहेंगे तो वैसा ही सामने प्रश्न होगा कि अपने पुराणों में जो लिखा गया है उसको छोड़ कर के आज के मॉडर्न एज में कौन से प्रूफ है बता दीजिए हमको अभी हम ठाकुर के कुछ-कुछ एक्सपीरियंस के बार में कहेंगे स्वामी जी के एक्सपीरियंस के बारे में कहेंगे किंतु प्रश्न यही है कि क्या हमने अपने जीवन में इसको डेवलप किया हमने अपनी नजरों से किसी की लाइफ में यह सब होते हुए देखा तो प्रश्न का उत्तर है नहीं ना ही मैंने अपनी लाइफ में इसको डेवलप किया है ना ही मैंने और किसी की लाइफ में यह सब होता हुआ अपनी नजरों से देखा है किताबों में पढ़ा है लोगों से सीनियर साधुओं से सुना है ऐसा हो रहा है ऐसा स्पेक्युलेटिंग टू डू विथ डायरेक्ट एक्स एक्सपीरियंस तो यह जो गैप है बिटवीन दिस एक्सपीरियंस ऑफ ह्यूमन लाइफ और यह जो स्पेक्युलेटिव साइंस स्पेक्युलेटिव नहीं कहेंगे यह तो रियल ही है किंतु एज ऑफ टुडे दे स्टैंड बिफोर अस एज मियर स्पेक्युलेटिव करते हैं थोड़ा सा प्राणायाम कर लेते हैं थोड़ा सा योगासन कर लेते हैं थोड़ा सा मेडिटेशन करने का प्रयास करते हैं तो यह आधा घंटा एक घंटा आपने प्रतिदिन करना शुरू किया दो-तीन सप्ताह के बाद में ही उत्साह ठंडा हो गया क्योंकि ना किसी भी तरह का रिजल्ट इससे दिखता नहीं है फिर हम हतो उत्साह हो गए और हमने पूरी चीज को ही छोड़ दिया दैट इज व्हाई के स्वामी जी ठाकुर मां रामकृष्ण विवेकानंद मां शारदा जो लिटरेचर है यह पूरे लिटरेचर में राजयोग एक ऐसी किताब है एक ऐसा टॉपिक है जो कि लिस्ट उसका डिस्कशन होता है सबसे कम इसका डिस्कशन होता है सबसे कम इसके बारे में बात होती है सबसे कम इसको हम प्रैक्टिकल समझते हैं ज्यादातर किसी को आप पूछेंगे कि मुझे राज योग की प्रैक्टिस करनी है आप कुछ सिखा पाएंगे तो प्रश्न का उत्तर मिलेगा भक्ति योग करो कर्म योग करो और बहुत ज्यादा यदि एनर्जी बढ़ गई है बहुत ज्यादा टाइम है तुम्हारे पास में वेस्ट करने के लिए तो वेदांत को पढ़ो शंकराचार्य का यही आपको एक स्टैंडर्ड रिप्लाई मिलेगा कोई भी आपको ऐसा नहीं कहेगा कि राज्यों की प्रैक्टिस इस तरह से करनी है राजयोग का साइंस इस तरह का है क्यों क्योंकि इवन हमको भी ये स्टडी करने से डर लगता है क्योंकि फिर मान लीजिए सही सही में कोई मिरेकल अस पावर आ गया और घमंड बढ़ गया तो फिर ये स्पिरिचुअल लाइफ में प्रोग्रेस उठ जाएगा राइट तो यहां पे बहुत सारे पिट फॉल है बहुत सारी स्पेक्युलेटिव वी कैन नॉट कैलकुलेट एट ऑल तो खैर ये जो मेरे आइडियाज थे इसके ऊपर में क्योंकि यह राजयोग को पढ़कर के सबसे प्रश्न पहला यही आता है कि स्वामी जी का भक्ति योग है या तो रामकृष्ण वि मां का जो जीवन है या तो फिर ठाकुर का जो कथामृत है उसमें जो पढ़ा उसका कुछ तो प्रैक्टिकल हम कर पाएंगे यहां पर जो लिखा है उसका कुछ भी प्रैक्टिकल करना संभव नहीं है यदि प्रैक्टिकल करने का प्रयास भी करेंगे तो पता नहीं कितने साल हमको यह सब प्रैक्टिस करनी होगी कुछ रियल रिजल्ट आएगा कि भी नहीं दैट इट सेल्फ इज डाउटफुल तो यह जो सब कहते हैं ना कि केविट अर्थात एक पहले से ही एक कंडीशन हम ने बता दी है कि यह जो आप पढ़ रहे हैं जो सीख रहे हैं ज्यादातर इंप्रैक्टिकल लगेगा ज्यादातर स्पेक्युलेटिव लगेगा बट बिकॉज कि स्वामी जी ने कहा है इसको हम स्टडी कर रहे हैं अभी एक लास्ट पैराग्राफ है जो दो पैराग्राफ हमने मैंने सोचा था कि आज फिर से डिस्कस करेंगे ये 11थ टॉपिक का लास्ट पैराग्राफ पढ़ लेता हूं द वी सी दैट
Thus we see that Pranayama includes all that is true of spiritualism even. Similarly, you will find that wherever any sect or body of people is trying to search out anything occult and mystical, or hidden, what they are doing is really this Yoga, this attempt to control the Prana.
प्राणायामा इंक्लूड्स ऑल दैट इज ट्रू ऑफ स्पिरिचुअलिज्म इवन सिमिलरली यू विल फाइंड दैट वर एवर एनी सेक्ट और बॉडी ऑफ पीपल इज ट्राइम टू सर्च आउट एनीथिंग ओल्ट एंड मिस्टिकल और हिडन व्हाट दे आर डूइंग रियली इज दिस योगा दिस अटेंप्ट टू कंट्रोल द प्राणा यू विल फाइंड दैट व्हेर एवर देयर
You will find that wherever there is any extraordinary display of power, it is the manifestation of this Prana.
इज एनी एक्स्ट्राऑर्डिनरी डिस्प्ले ऑफ पावर इट इज द मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस प्राण जहां-जहां पे भी देखेंगे जादू चमत्कार कोई विचित्र अद्भुत शक्तियों का प्रकाश तो जानिए कि इन सबके पीछे यह प्राण का ही विज्ञान है यह राजयोग ही है राजयोग के माध्यम से प्राण के विज्ञान के माध्यम आप सब कुछ समझ पाएंगे अच्छा अभी इसके बाद में एक आखिरी पैराग्राफ बचा है इस चैप्टर का जिसको कि अभी हम कल देखें आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्ण जय राम कृष्ण ज ज जय जय राम कृष्णा टेक्नीक तो