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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 7 Dec 2023

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय तेन कल हम इसके बारे में बात कर रहे थे थोड़ा मन की एकाग्रता और मन का विक्षेप ऐसे छोटे मोटे ऐसे कितने ही पॉइंट हमारे जीवन में आ जाते हैं कि अभी लगता है हमको कि मन कब कैसे हां पर विक्षिप्त हो जाएगा किस कारण से हो जाएगा हमको पता नहीं चलेगा तो यह हम सबके साथ में होता है मतलब मुझे यहां पर इतने साल हुए फिर भी कभी-कभी ऐसी छोटी-छोटी चीजों को लेकर के मन ऐसा एक चक्रवात में फंस जाएगा तो हमको लगता है कि यह मेरा नियर 20 इयर्स ऑफ मोनेस्ट्री यही एक यह है अंत है कि मैं हर छोटी-छोटी चीजों को लेकर के विक्षिप्त हो जाऊं हर कोई घटना जो कि मुझे पसंद नहीं है मेरे मन के भीतर में एक इस तरह का एक वा वटोल एक स्टोम एक इस तरह का खड़ा करें कि जैसे मेरा डे टू डे लाइफ है या तो फिर मेरा एक चिंतन मनन है सब डिस्टर्ब हो जाए तो ऐसा होता है क्या करेंगे ह्यूमन नेचर है ह्यूमन माइंड है किंतु साथ-साथ में मैंने यह भी देखा है कल हम बात कर रहे थे मैं सोच रहा था बाद में कि क्या इसका सलूशन है कि नहीं एक्चुअली सोल्यूशन है मेरे लिए एटलीस्ट सोल्यूशन बड़ा ही सरल है मैंने खुद के जीवन में जो देखा है अभी तक का थोड़ा सा शुरू से कहूं तो मैं जब यहां पर जॉइन करने के लिए आया था बेलूरमठ में एज बिल्कुल नया ब्रह्मचारी तो हमारे यहां पर बेलूर मठ में नए आए हुए ब्रह्मचारी उनके लिए सभी तरह के क्लास होते हैं वो गीता का भी क्लास होगा व संस्कृत का भी क्लास होगा एक बंगाली भी थोड़ा बहुत सिखाएंगे बंगाली में ज्यादातर क्लासेस बंगाली में होते थे क्योंकि क्या है वोह बेलूरमठ वो बंगोल में है और ज्यादातर ब्रह्मचारी जवाइन करने के लिए आते हैं वह बंगोली थे तो क्लासेस सब वैसे बंगोली में होते थे किंतु मुझे थोड़ा-थोड़ा समझ में आने लगा था तो उस समय मैंने जिस तरह से देखा कि हां यह ठाकुर महा स्वामी जी का जीवन है उनके उपदेश है यह शास्त्र है यह संस्कृत है यह वेदांत है वगैरा वगैरह हमारे सीनियर साधुओं से जो सुना सीनियर ब्रह्मचार्य से जो सुना इस तरह से देख कर के मुझे लगा कि मेरा एक पढ़ाई लिखाई करने का एक नेचुरल टेंडेंसी है तो ऐसा कौन सा फील्ड है जिसमें कि मुझे जाना चाहिए यदि अभी से मैं यह फील्ड पकड़ लू ब्रह्मचारी होकर के ही तो आज 5 10 साल के बाद बाद में उस फील्ड में मेरा एक अच्छा सा एक यह हो जाएगा एक्सपर्टाइज्ड तो थोड़ा क्या है कि आपको यदि कैरियर बनाना है तो एक्सपर्टाइज्ड कर सके अपने जीवन को हम उस ढांचे के भीतर में डाल सके तो दो ऑप्शन मुझे दिखाई दिए थे एक तो था कि मैं संस्कृत सीख करके वेदांत के जितने भी शास्त्र है वह पढ़ूं और दूसरा था कि मैं बंगोली सीख करके रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर है उसके भीतर में ज्यादा डीप में जाऊं अभी एक प्रश्न होगा कि शास्त्र सीखने के लिए या तो वेदांत सीखने के लिए आपको संस्कृत की जरूरत है कोई प्रश्न ही नहीं है क् क्योंकि ट्रांसलेशन के ऊपर में भरोसा रख कर के आप बहुत ज्यादा डीप में कभी नहीं जा सकते किंतु रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के लिए समझने के लिए क्या ट्रांसलेशन पर्याप्त नहीं है क्या रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य स्वामी जी को यदि छोड़ दे स्वामी जी ने जो इंग्लिश में कहा है लिखा है वो दोनों चीजों को यदि हम छोड़ दे इंग्लिश स्वामी विवेकानंद तो पूरा एक बंगाली साहित्य है स्वामी जी ने खुद ने बंगाली में बहुत कुछ लिखा है स्वामी शिष्य संवाद जो कि एक बड़ा ही इंटीग्रल पार्ट है कंप्लीट वर्क्स का वह पूरा ओरिजिनल बंगोली में कंपोज किया गया था कथामृत तो है ही है मां का जीवन मां की वाणी सब कुछ डायरेक्ट डिसाइल का जीवन स्मृति कथाएं ज्यादातर सब कुछ बंगोली में ही है तो क्या मैं ट्रांसलेशन से उसके थ्रू ट्रांसलेशन के द्वारा उसको नहीं समझ सकता तो अल्टीमेटली मुझे उत्तर कि नहीं ट्रांसलेशन पढ़ कर के मैं रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में बहुत ज्यादा शायद नहीं जा पाऊंगा तो मेरे पास में दो ऑप्शन थे एक तो मैं संस्कृत सीख कर के वेदांत में बहुत ही अच्छे से महारत हासिल करूं मैं कर सकता था जद मैं उस समय ये ऑप्शन सिलेक्ट करता और दूसरा है कि यह मैं बंगोली सीख करके रामकृष्णा विवेकानंद लिटरेचर में जितना हो सके उतना बार-बार पढ़ूं जितना हो सके उतना डीप में जाऊ उस समय मैंने यह ऑप्शन सिलेक्ट किया था सिलेक्ट किया नहीं था यह सब चीजें हम लोग कॉन्शियसली नहीं करते ये सब चीजें हम लोग ऐसा प्लान करके नहीं करते स्कीम करके नहीं करते हां मुझे यह करना है या वो करना है यह सिलेक्शन या तो फिर यह ऑप्शन मेरे से जैसे कि कहो कि मेरे लिए यह सिलेक्ट मेरे द्वारा यह सिलेक्ट हो चुका था मैं वहां पर संस्कृत भी सीखता था बंगोली भी सीखता था तो बंगोली सीखते सीखते कथामृत पढ़ने की शुरुआत की तो कथामृत में मुझे इतना इंटरेस्ट आ गया पढ़ने में इतना इंटरेस्ट आ गया कि जैसे मैं दिन रात कथामृत पढ़ता रहता था तो मुझे ऐसा लगता है कि उसके बाद में फिर यह संस्कृत सीखना या तो फिर वेदांत में डीप में जाना यह प्रश्न ही धीरे-धीरे करके व अदृश्य हो गया मेरे मन से बाद में जब मेरा पोस्टिंग किसी सेंटर में भी हुआ तो भी मैंने फिर बाद में दोबारा इस प्रश्न के सामने देखा नहीं कि हां चलो एटलीस्ट मुझे इस पार्टिकुलर स्ट्रीम में इस पार्टिकुलर क्षेत्र में आगे बढ़ना है बंगोली और रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर मैंने पकड़ लिया तो पकड़ लिया उसके बाद में उसके उसी के भीतर में एक के बाद एक किताबें पढ़ता गया और मुझे मुझे ऐसा लगता है पर्सनली कि मेरे जीवन का मॉनेस्टिक लाइफ का या साधक जीवन का सबसे बड़ा अचीवमेंट या तो अटेनमेंट या तो सबसे बड़ा सक्सेस क्या है तो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर के ऊपर में प्रेम मैं अपनी किताबें पढ़ते पढ़ते कभी थकता नहीं हूं और मुझे ऐसा लगता है कि इस किताबों के भीतर में ही सारा समग्र जीवन मेरा इसके भीतर में है मैंने ऐसा कोई बहुत बड़ा कर्मयोग भी नहीं कर लिया जब ध्यान वगैरह मेरे से कोई बहुत ज्यादा होता नहीं है मैं यह नहीं मानता हूं कि मैं बहुत ज्यादा ज्ञानी या इंटेलेक्ट या तो फिलोसोफी मेरा माइंड है मेरा जो एक अटेनमेंट कहो ना कि एक जो यह कहो कि सक्सेस इन माय लाइफ इज माय लव फॉर राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर और अभी का जो बात है आज का जो प्रश्न है कि जब भी मेरा मन ऐसा कुछ अशांत होता है मन के भीतर में विक्षेप होता है मुझे ज्यादा कुछ नहीं करना यह कथामृत है या तो कोई भी एक स्मृति कथा अभी मैं रिसेंटली लाटू महाराज की स्मृति कथा पढ़ रहा हूं तो लाटू महाराज की स्मृति कथा की कोई भी एक मां की स्मृति कथा व किताब खोल कर के 1015 मिनट पढ़ता हूं तो ऑटोमेटिक मेरा मन बाकी सब चीजों से समेट करके संकुचित होकर के उस उसी वही उस पुराने दिनों की बात है वही दक्षिणेश्वर के दिन वही वराह नगर मठ के दिन वही बेलूर मठ के शुरुआत के दिन जब सब गुरु भाई साथ में रहते थे खाते थे आनंद करते थे हंसी मजाक करते थे झगड़ा भी करते थे बहुत सुंदर एक कहानी है वरा नगर मठ में स्वामी जी को थोड़ा सा एक संदेह एक तो एक टेंशन हो गया था चिंता हो गई थी कि शशि महाराज जिस तरह से ठाकुर की पूजा कर रहे हैं तो यह रामकृष्ण संघ तो एक रेवोल्यूशन आइडियाज के ऊपर में बने हैं तो यह कहीं हम बहुत ज्यादा ट्रेडिशनल जाए ये शशि महाराज का ठाकुर घर स्वामी जी ने लिखा है कि शशि का वो जो ठाकुर घर है उस वो मेरी चिंता का कारण है तो यह शशि महाराज जो इतनी पूजा कर रहे हैं तो कहीं हम उसी पुराने ढंग में पर पुरानी ट्रेडिशनल जाएंगे तो गुरु भाइयों का तो कोई प्रश्न नहीं है किंतु जो नई आई हुई जनरेशन वो इससे क्या सबक लेगी यह शिव ज्ञान जीव सेवा का जो रेवोल्यूशन आईडिया है उसको ग्रहण करेगी कि वह ट्रेडिशनल जो पूजा पाठ वगैरह है विधि विधान होम याग यज्ञ उसमें डूब जाएंगे तो एक स्वामी जी को था तो एक दिन दोनों बातें करते करते स्वामी जी ने शशि महाराज को कहा कि उनका एक फेथ टेस्ट करने के लिए उनकी निष्ठा टेस्ट करने के लिए स्वामी जी कहते हैं कि तुम्हारे ठाकुर को मैं देखता हूं कि वो फेंक देता हूं ऐसा हुआ था कि वो खाने पीने का थोड़ा सा प्रश्न था तो स्वामी जी बोल रहे हैं कि अरे हमको खाना नहीं मिलता है तुम अपने ठाकुर को लची प्रसाद खिलाते हो यह सब क्या है फिर ऐसा वो बात-बात में गुस्सा म इतना झगड़ा बढ़ता गया कि स्वामी जी खड़े होकर के ठाकुर घर की ओर जाने लगे देखता हूं मैं ये ठाकुर मने एक्चुअली स्वामी जी बोले थे ठाकुर को फेंक दूंगा किंतु जो भी है देखिए विभिन्न तरह की स्मृतियां हमारे पास में आती है तो अभी यह देख कर के जैसे स्वामी जी ठाकुर घर की ओर जा रहे हैं शशि महाराज खड़े हो गए और दोनों तो पहलवान थे शशि महाराज भी तो कुश्ती करते थे वो स्वामी जी को टकल करके जमीन पर प टक दिया और मैंने वो बाल पकड़ कर के वो खींच कर के ले जाने वाले थे उस समय लाटू महाराज वहां पर बैठे थे वो एकदम गुस्सा होना गुस्सा हो गए अरे यह क्या है ठाकुर हमारे लिए कुछ नहीं छोड़कर गए ये अस्थि ये वो पिक्चर है उनका फोटोग्राफ यही छोड़ के गए उसी में आप लोग इतना झगड़ा कर रहे हैं जद पैसा वगैरह छोड़ के गए तो तुम लोग क्या करते ये स्मृति कथाएं है हमारी हमारे पुराने दिनों की यह सब बातें तो मैंने खास करके यह देखा है जब भी मन उद्विग्न होता है जब भी थोड़ा सा भी अशांत होता है यह सब मैं जैसा पढ़ना शुरू कर देता हूं वैसे ही यह जगत कहां चला जाता है ऐसा मेंटली ऐसा होता है कि हम कॉन्शसनेस के कोई हायर हिमालय पर जाकर के बैठ गए और ठाकुर मां स्वामी जी से घिर के बैठे हुए या तो फिर वही दक्षिणेश्वर वापस चले गए ठाकुर के कमरे में ठाकुर बैठे हैं सब गुरु भाई उनके सामने नीचे में जमीन पर बैठे हैं ठाकुर वो छोटी खाट के के ऊपर में बैठे भी साथ में है तो यह सब इमेजिनेशन या तो फिर हृदय में से एक श्रद्धा भक्ति और निष्ठा का भाव बहुत ही इजली आ जाता है तो मेरा यह मानना है मैं मेरे पास में यहां पर एक लड़का आता है कभी-कभी बीच-बीच में वो इंजीनियर है जॉब करता है और टेंशन वगैरह इन लोगों को तो रहते ही है जो लोग आजकल जॉब करते हैं तो मुझे पूछ रहा था कि जब ध्यान करने में किस तरह से मैं आगे बढूं थोड़ी देर के बाद में ज्यादा होता नहीं है मैंने कहा देखो कोई बहुत बड़ी टेंशन लेने की बात नहीं है कोई बहुत बड़ी चिंता की बात नहीं है तुम एक हाथ में तुम्हारे पास में जप माला है जपमाला पर तुम जप करते हो वो उसने मुझे बोला तो वेरी गुड एक हाथ में तुम जप माला रखो दूसरे हाथ में तुम कथामृत रखो देखो कि कथामृत पढ़ना शुरू कर दो ऐसा होगा और साथ में जब दोनों करना शुरू कर दो एक हाथ में कथामृत है कथामृत पढ़ो दूसरे हाथ से जप करो थोड़ी देर के बाद में तुमको धीरे धी धीरे करके पहले दिन नहीं शायद दूसरे तीसरे दिन नहीं किंतु यदि तुम इस प्रैक्टिस में जयदिश ऐसा आएगा कि तुमको पता नहीं चलेगा कि तुम एक्चुअली क्या कर रहे हो तुम्हारा जो सबकॉन्शियस या तो सुपरकॉन्शियस माइंड है वही या तो तुम्हारा मन बाकी सब चीजों से सेमत करके बाकी सब चीजों से वापस ले आ कर के या तो फिर कथामृत के ऊपर में केंद्रित कर देगा या तो फिर जप के ऊपर में केंद्रित कर देगा और फिर तुमको यह कॉन्शियसली देखना नहीं पड़ेगा कि मैं किसके ऊपर मैं ध्यान दूं या तो फिर बाहर के जो विचार है वह मेरे मन में आकर के किस तरह का तूफान मचा रहा है धीरे-धीरे करके बाहर के विचार चले ही जाएंगे और एक ठाकुर की ये अमृतम वाणी और यह ठाकुर के नाम का जप यही तुम्हारे मन में रहेगा कभी ऐसा होगा कि जब चल रहा है कथामृत छूट जाता है कभी ऐसा होगा कथामृत चल रहा है जब छूट जाता है कभी ऐसा होगा कि दोनों छूट जाते हैं और तुम कहीं वो एक अनंत एक उसमें विलीन हो गए हो कभी ऐसा होगा कि दोनों साथ-साथ में चल रहा है और दोनों का तुमको आनंद मिल रहा है यह स्थिति प्राप्त करना कोई बहुत कठिन बात नहीं है मैंने खुद के एक्सपीरियंस से मैं कह रहा हूं पांच छ महीने ऐसा प्रैक्टिस करने से आप आराम से अपने मन को बाकी सब देखिए व साधना में सिद्धि प्राप्त करना या तो फिर कोई ईश्वरीय अनुभव होना अनुभूति होना दिव्य दर्शन होना वो सब एक बहुत ही डिफरेंट कैटेगरी की डिफरेंट लेवल की बातें हैं हमारे जन्म जन्मांतर के संस्कारों का धुल जाना हमको एक नया जन्म प्राप्त द्वीज ब्राह्मण को कहते हैं ना द्विज यदि इसका सही सही अर्थ निकाला जाए तो एक दूसरा जन्म कब होता है जबकि हमारे पुराने संस्कार धीरे-धीरे क्षय होकर के नए संस्कारों के आधार पर एक नया सु सांस्कृतिक अहम का गठन होता है तब उसको द्विज कहा जाता है पुनर्जन्म होता है दूसरा जन्म होता है तो यह सब होना एक बहुत ही एक डिफरेंट कैटेगरी की बातें हैं मैं एक बहुत ही यहां पर जो मैं यह कह रहा हूं वो एक बिल्कुल नॉर्मल लेवल की बात कर रहा हूं बिल्कुल ग्रास रूट लेवल की बात कर रहा हूं डे बाय डे हमारे जो टेंशन है डे आफ्टर डे यह जो हमारे मन के भीतर में यह सब छोटी-छोटी समस्याए वोह इको चेंबर जिसको कहते हैं ना अपना माइंड एक इको चेंबर है और खास करके जिनका नेचर इंट्रोवर्ट होता है उनके लिए तो यह और भी ज्यादा को चेंबर डेंजरस हो जाता है वे लोग खुल कर के अपने आईडियाज अपने विचार अपनी समस्याएं या तो फिर अपने कंसर्न एक्सप्रेस नहीं कर पाते उनको ऐसा लगता है कि बाकी लोग उनके बारे में केयर नहीं करते हालांकि यह भी देखना है कि जब हम यह कहेंगे कि दूसरे लोग मेरे बारे में केयर नहीं करते तो हम दूसरों की कितनी केयर करते हैं व भी एक हमेशा देखना है तो जो भी है अ एक इको चेंबर एक इंट्रोवर्ट माइंड बनाता है तो इससे छूटने का क्या एक उपाय है बहुत ही सहज सरल उपाय यह कथामृत पढ़ना और साथ में जप करना देखेंगे कि कुछ ही महीनों में पांच छ महीनों में जदिया प्रतिदिन करते हैं तो धीरे-धीरे करके यह जो ड्यूल प्रैक्टिस है बाकी सब चीजें धीरे-धीरे करके शांत होती जाएगी और आपका मन कथामृत के ऊपर में कभी कथामृत पड़ता होगा तो कभी जप करता है कभी कथामृत पढ़ता है कभी जप करता है कभी दोनों साथ में करता है और कभी दोनों से ही ऊपर उठ कर के ठाकुर के हृदय के भीतर में ठाकुर का ठाकुर का स्थापन हो ठाकुर की स्थापना होती है तो यह कोई बहुत कठिन बात नहीं है मैंने हां आप बोलेंगे कि फिर हायर उच्चतर मुकाम का क्या माने व्हाट आर द हायर स्टेप्स यदि एक के बाद एक हमको साधना में आगे ही आगे बढ़ते जाना है उसके लिए क्या करना है तो उसके लिए डिफरेंट एक कैटेगरी के आंसर होते हैं किंतु एक बहुत ही ग्रासरूट लेवल पर बहुत ही कॉमन यदि एक बात कही जाए तो यह एक बड़ा ही सिंपल सोल्यूशन है और मैंने खुद मेरे जीवन में इसको अनुभव किया है और यह जो दूसरों के बारे में केयर करने की ये जो एक एक टॉपिक है आजकल नॉर्थ साउथ बहुत चल रहा है आप देख रहे होंगे जद न्यूज में तो इसको लेकर के एक छोटा सा इंसिडेंट मैं वही बेलूर मठ में ही था वही मैं जॉइन करने के लिए ही आया था उस समय साउथ से एक साउथ इंडिया से एक लड़का आया तमिल था मोस्ट प्रोबेबली तो वो अभी क्या है कि नेचुरली सभी लोग तो अभी घर छोड़ कर के आए हैं एक नए ही जगत में हम लोग कदम रख रहे हैं हमको पता नहीं है कि भविष्य क्या है किंतु ये ठीक कर लिया है कि जो पास्ट है उससे हमको मुक्ति चाहिए उससे हमको छुटकारा चाहिए भविष्य में जो भी हो हम लोग उसको स्वीकार करने के लिए तैयार है तो इस ऐसी सिचुएशन में जो लड़के लोग लोग आते हैं वो एक नेचरली एक फ्रेंडशिप का बंड इजली हो जाता है तो किस तरह से आए क्यों आए क्या तुम्हारे पेरेंट्स को पता है कि नहीं घर में क्या मने ये सब तो नेचुरल है ना जब साधु होने को आते हैं तो ये सब सब तरह की बातें होती है तो एक दिन हम क्या हुआ कि हम दोनों लोग खाने के लिए जा रहे थे तो डाइनिंग हॉल बेलूरमठ का आपने शायद देखा होगा हमारे ट्रेनिंग सेंटर से नए आए हुए ब्रह्मचार्य का ट्रेनिंग सेंटर से वो डाइनिंग हॉल की ओर जा रहे थे तो मैं रास्ते में उसको कह रहा था कि देखो तुम तो अभी क्या है कि इंग्लिश में बात करनी है वह तमिल है उसको तमिल और इंग्लिश दो ही लैंग्वेज आती है ना ही हिंदी आती है और तो और कुछ आने का तो प्रश्न ही नहीं है तो हम दोनों लोग बातें करते करते जा रहे हैं मैंने उसको बोला देखो कि तुमको अभी तो पूरे इंडिया में तुम्हारा कहीं पर भी पोस्टिंग हो सकता है तुम एक काम करना एटलीस्ट तुम बंगोली सीख लेना जद तुमको हिंदी आती है कि नहीं आती है बांगला सीख लेने से तुमको अपना लिटरेचर भी मेरा जो एक्सपीरियंस है मैं सबको कहता घूमता था उस समय अभी भी कहता तो मैं उसको बोल रहा था कि बांगला सीख लो तुमको दो चीजें है एक तो तुमको ठाकुर महा स्वामी जी का लिटरेचर है उसमें भी तुमको बड़ा इंटरेस्ट आ जाएगा और फिर ये जो कम्युनिकेशन है वो तुम्हारा तुम्हारा इंग्लिश साउथ इंडियन इंग्लिश ऐसा तड़ा मेड़ा है कि मुझे ही समझ में नहीं आ रहा तो फिर बाकी सबको तो कैसे समझ में आएगा बांगला सीख लेना यदि तुमको कोई हेल्प चाहिए तो मैं करूंगा और क्या है कि तभी तो तुम्हारा लोगों के साथ में बात होगा वरना ये ट्रेनिंग अभी जो जो हम 1520 लड़के थे वहां पे उसमें से एक दो लोगों को ही इतना इंग्लिश आता था कि उसके साथ कम्युनिकेट कर पाएंगे तो तुम यदि सबके साथ कम्युनिकेट नहीं कर पाओगे तो तुम किस तरह से रहोगे यहां पे यह तो पता है ना कम्युनिटी लाइफ है वगैरह वगैरह में उसको उपदेश देते देते जा रहा था सडन क्या हुआ कि रास्ते में एक आदमी खड़ा था एक लेबरर एक मजदूर खड़ा था और वह हम दोनों को जाते हुए उसने देखा तो वो हमारे सामने देख कर के कुछ बोल रहा है निश्चय बांगला में ही बोल रहा था किंतु पार्टिकुलर समय मुझे समझ में नहीं आया कि कि वो क्या कह रहा है तो उसने एक दो बार कुछ कहा कि व इशारा भी कर रहा है कुछ बोल भी रहा है मुझे समझ में नहीं आ रहा मैं एक दो बार उसके सामने देख रहा हूं मैंने कहा ये क्या क्या बोल रहा है इ ये जो लड़का था साउथ इंडियन लड़का उसका इंग्लिश ऐसा है उसको इंग्लिश छोड़ कर के तमिल छोड़ के और कुछ तो आता ही नहीं है और इंग्लिश भी ऐसा कि मुझे ही समझने में तकलीफ हो रही थी उसने एक छलांग लगा कर के उसके पास में पहुंच गया यह लेबरर था यह मजदूर था और वहां पे नीचे में एक बड़ा सा बक्सा था जो व उसको हेल्प किया बक्सा उठाने के लिए और उसके सर पर रख दिया और रख कर के फिर मेरे पास में आ गया और फिर बड़ा ही इनोसेंट होक के मुझे पूछ रहा है अच्छा अच्छा व्हाट वेर यू सेइंग अबाउट दिस कम्युनिकेशन थिंग मैंने कहा देखिए वो लेबरर क्या कह रहा था वो बक्से की ओर इशारा करके मुझे कह रहा था हमको कह रहा था कि बक्सा उठाने के लिए हेल्प करो तभी तो सर पे भारी बक्सा है एक बार सर पे उठा लिया तो फिर वो ले जाएगा किंतु जो उठाना है इट सेल्फ वो तो थोड़ा कष्ट का काम है तो हमको व बोल रहा था पूछ रहा था कि थोड़ा सा हेल्प कीजिए बॉक्स उठाने में अभी मुझे बांगला भी आती है और मैं उसको कम्युनिकेशन कैसे करना है वो सिखा रहा हूं किंतु मैं नहीं समझ पाया और वो समझ पाया वो एक ही बार उस लेबरर ने कहा और फट करके यह साउथ इंडियन लड़का उसके पास जाकर के वो बक्सा उसके सर पर रखने में हेल्प कर दिया तो मैंने सोचा अच्छा ठीक है अभी दूसरी बार थोड़ा सा सोच समझ कर के लोगों को उपदेश देना है वैसे ही हवा में नहीं डालना है माने नॉट नेसेसरी कि आपको बांगला आनी चाहिए हृदय की जो भाषा है वह आप य हृदय की भाषा समझ ले तो आप कुछ भी कर सकते हैं किसी के साथ में कम्युनिकेट कर सकते हैं ठाकुर के साथ में भी कम्युनिकेट कर सकते हैं तो ये छोटा सा एक अनुभव अच्छा तो हम लोग कॉस्मो माइक्रो कजम के बारे में पढ़ रहे थे कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि ह्यूमन नेचर या तो ह्यूमन माइंड जैसे जन्म होता है हमारा या तो फिर इस पृथ्वी पर जैसे ही हम आते हैं तो हमारी इंद्रियां बाहर की ओर धावित होती है बाहर का दृश्य देखती है और वह सोचती है और समझने का प्रयास करती है कि हां इस जगत में ऐसा तो क्या है जिसको कि इसका क्या गति है क्योंकि क्या है ना व मनुष्य और पशु यह दोनों में डिफरेंस क्या है हमारे भीतर में क्यूरियोसिटी है पशु के भीतर में क्या है आहार निद्रा भय और मैथुन यह जो कुछ चीजें हैं बड़ी ही बेसिक चीजें उसी को लेकर के उसका मन रहता है जबकि हमारे लिए जैसे बाइबल में जीसस कहते हैं ब्रेड इज नॉट इनफ खाना पीना रोटी कपड़ा मकान यह सब हमारे लिए इनफ नहीं है हमारे भीतर में एक स्पार्क है स्पार्क ऑफ स्पिरिट है जो कि हमको ऑलवेज पुश करता है प्रोपेल करता है टू सर्च फॉर व्हाट इज बियोंड दिस होराइजन ये यूरोपियन एक्सप्लोरर थे 14th सेंचुरी के 15th सेंचुरी के उस समय ऐसा माना जाता था कि पृथ्वी फ्लैट है और यह फ्लैट पृथ्वी के ऊपर में यह सब कॉन्टिनेंट्स रखे गए हां माने पृथ्वी गोल है वो भी एक था और पृथ्वी फ्लैट है दोनों तरह की कल्पनाएं थी तो ऐसा बहुत सारे लोग खास करके यह जो कॉमन मैन जो है यह लोग ऐसे बहुत सारे लोग इस तरह से सोचते थे कि पृथ्वी फ्लैट है और यह जो समुंदर है वो जब पृथ्वी के विश्व के किनारे पर चले जाएंगे तो बहुत बड़े जलप्रपात के साथ में ये पानी जो है कहीं अवकाश में गिरता है तो उस समय ये लोग एक जहाज लेकर के पृथ्वी का सर्कल करने के लिए निकले थे यह जो वास्कोडिगामा कहो ना कि मैजेलांग कहो ये जो ग्रेट एक्सप्लोरर थे यदि सोच लीजिए कि उनके मन अभी खास कर के ये जो कैप्टंस जो होते हैं उन लोगों का तो एक इंटेलेक्चुअल उनका एक रीडिंग होता है स्टडी होता है वो उनको तो क्या है ये एस्ट्रोनॉमिकली रीडिंग लेने होते हैं जिससे कि वो अपने जहाज की एग्जैक्ट पोजीशन क्या है लोंगिट्यूड और लटटू वो उनको पता चले तो उनके लिए तो इतना यह बात नहीं है टेंशन का किंतु यह जो बाकी सब जो खलासी वगैरह थे जो बाकी सब सेलर्स थे उनमें से तो सुपरस्टिशन अंधश्रद्धा इग्नोर पूरा भर कर के पड़ा था ऐसे लोग इस तरह के जहाज में पृथ्वी को सर्कल करने के लिए निकले हैं और जद पृथ्वी फ्लैट होगा तो ऐसा होगा कि कहीं किनारे पर चले गए पृथ्वी पर और एक बहुत ही विराट जलप्रपात में वाटरफॉल में गिर कर के व कहां पता नहीं अनंत अवकाश में वह डूब जाएंगे क्या पता अभी इतना भय होने के बावजूद भी यह लोग क्या है कि चलो मतलब एक स्पिरिट ऑफ एडवेंचर होता है कि व्हाट इज बियोंड दिस होराइजन माने ये स्पिरिट ऑफ एडवेंचर होने से ही कोई भी सिविलाइजेशन डेवलप होती है ये स्वामी जी ने कहा ना कि गो टू जापान ये आला सिंगा पेमल को योकोहामा से से लेटर लिखते हैं सी हाउ द नेशंस आर ऑन मार्च हमने यह जो विदेश में जाना छोड़ दिया काला पानी का एक डर बता दिया अपने देश बांधव को और यह विदेशी सभ्यताओं के साथ में अपना कम्युनिकेशन कट कर दिया इसका परिणाम यह है कि बाकी सब सभ्यताएं खास करके जापान को देख कर के स्वामी जी को लगा था कि अच्छा ठीक है चलो वेस्टर्न कंट्रीज अमेरिका यूरोप वगैरह तो चलो वो लोग डेवलप हो रहे है किंतु जापान जैसा जापान एक एशियन कंट्री भी यदि इतना एडवांस इंडस्ट्रियली हो रहा है तो भारत के लिए तो अवश्य होप है ऐसा आप नहीं कह सकते कि यूरोपियन माइंड इज मोर सूटेड फॉर साइंस एंड इंडस्ट्रियल इजेशन देन एशियन माइंड ये एशियन माइंड जो है वह नेचुरली वह धर्म फिलोसोफी इसको लेकर के रहता है और यह यूरोपियन माइंड है वह नेचरली इंडस्ट्रियल इजेशन को वो डेवलप करेगा ऐसा आप नहीं कह सकते जापान तो एक उदाहरण है जहन बुद्धिज्म भी वहां पर है और उस समय का यह जो नागासाकी ओसाका वगैरह जो सिटीज थे वो उस उस समय के कितने ही यह हाईली एडवांस इंडस्ट्रियल थे हो गए थे तो स्वामी जी कहते हैं कि सी वी ऑलवेज हैव एन ऑप्शन टू गो आउटसाइड एंड कम्युनिकेट विद अदर अदर सिविलाइजेशंस ये हम स्वामी जी का एक बड़ा ही पोइग्नेंट जिसको कहेंगे ना कि अपने मन में एक बड़ा ही एक करुणा का उदय करे पोइग्नेंट यानी कि करुणा का उदय करने वाला मेरे खल से ऐसा ट्रांसलेशन होता है एक ऐसी कहानी है स्वामी जी अमेरिका से वापस आए हैं और शुरू शुरू में तो एक बार उनको वहां पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर में प्रवेश करने का अनुमति मिला था किंतु बाद बाद में यह लोग अलर्ट हो गए बोला कि अरे ये काला पानी क्रॉस करके आए हैं अभी उनको यदि मंदिर में प्रवेश करने देंगे तो मंदिर की सेंटिनी नहीं रहेगी अपना हिंदू धर्म का अपमान हो जाएगा अरे क्या क्या क्या से क्या नहीं होगा ये बोल कर के यह सोच कर के स्वामी जी एक स्वामी जी को मना कर दिया कि अभी काली मंदिर में प्रवेश नहीं करना है तो देख लीजिए कि किसा एक पोइग्नेंट केस होता है किस्सा होता है स्वामी जी निवेदिता को लेकर के नो में दक्षिणेश्वर आए हैं निवेदिता को परमिशन है कि काली मंदिर में जाकर के चारों ओर घूमने की दर्शन करने की ठाकुर जहां पर जिस कमरे में रहते थे वहां पर जाकर के बैठने की काली मां को दर्शन करने की किंतु स्वामी जी को भीतर जाने की परमिशन नहीं वो बाहर में नौका में बैठे-बैठे वो पूरा वो पुरानी स्मृतियों की याद ताजी कर रहे हैं कि हां मैं यहां पर रहता था हां मैं यहां पर ठाकुर को मिलने के लिए आता था हां ये यही पंचवटी है जहां पर हमने कितनी बातें की कितने गप लगाए ठाकुर के साथ में कितने झगड़े किए ठाकुर की कितनी गालियां भी सुनी और ठाकुर का कितना अनंत प्रेम भी हमको प्राप्त हुआ यह सब सोच के देखिए कि स्वामी जी उस नौका में बैठे हैं और उनके मन में यह सब चल रहा है कितना मतलब भयावह एक कैसा एक मतलब एक भारत में हिंदू धर्म की साथ में कैसी अवस्था थी हिंदू धर्म का सबसे बड़ा रक्षक उसी को उन्हीं को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा महा तीर्थ उसमें जाने की परमिशन नहीं तो यह सब तरह की विचित्र घटनाएं भारत में बन रही थी तो इसीलिए यह जो है कि टू गो आउटसाइड टू एक्सप्लोर टू एडवेंचर य स्पिरिट दिस इज ह्यूमन लाइफ हमको पशु से यह हायर बनाता है और यदि आप निष्ठावान है यदि आप सिंसियर है कि मुझे सही सही ये जो भी फिनोमिना है प्राकृतिक फिनोमिना है या तो फिर यह जो भी कुछ है जगत में उसका जो सार है उसका जो मिस्ट्री है उसका रहस्य भेद मुझे करना है तो देखेंगे कि यदि आप निष्ठावान है तो आपका मन यह ऑब्जेक्ट से सब्जेक्ट की ओर आ ही जाएगा जितना ही बाहर में जाएगा प्रकृति की ओर उतना ही आपको पता चलेगा कि प्रकृति के परे कॉन्शसनेस है बियोंड नेचर इज अवर ओन कॉन्शसनेस यानी कि देखिए कि मैं कभी कभी-कभी एक इमेजिन करता हूं कि एक एक एस्ट्रोन एस्ट्रोनोवा अपने वो जैसे वो आपने यह केक टेलिस्कोप या वगैरह का नाम सुना होगा यह हवाई वगैरह में माउंटेंस होते हैं ना जहां पर पोल्यूशन कम होता है तो वहां माउंटेन टॉप के ऊपर में बहुत बड़े-बड़े टेलिस्कोप लगाए गए हैं तो मैं कभी-कभी ऐसा इमेजिन करता हूं कि यदि वेदांत सही में लिटरली सही है तो सोच के देखिए कि एक रात को एक साइंटिस्ट वहां टेलिस्कोप में बैठक करके वो देख रहा है कि सबसे दूर से दूर का ऑब्जेक्ट क्या है तो वह देखेगा कि अरे वह 13 बिलियन लाइट इयर्स दूर एक ऐसा एक हमको क्वासर या को प्रोटो गैलेक्सी जिसको कहते हैं सबसे दूर का जो ऑब्जेक्ट आज हमको दिखाई दिया है वह है प्रोटो गैलेक्सी माने गैलेक्सी का बचपन का स्वरूप बचपन माने बालक आकाश गंगा उसको क्या दूध गंगा कहते हैं मेरे ख्याल से गुजराती में तो प्रोटो गैलेक्सिस तो वो सबसे दूर से दूर की प्रोटो गैलेक्सी आज हमको जो देखने को मिली है व या वो है समथिंग लाइक 14 बिलन 14 या तो 15 बिलियन लाइट यर्स इतना दूर है तो वो साइंटिस्ट उसको देखने का प्रयास कर रहा है वो दूरबीन में और वो बोल रहा है कि अच्छा इससे भी दूर क्या है उससे भी दूर क्या है और सडन उसको अपना खुद का चेहरा दिखाई दिया आकाश के भीतर में वो जैसे कि विराट आकाश के भीतर में उसका चेहरा पूरा छाया हुआ है वो बेचारा ऐसा डर के मारे उछल पड़ेगा कि अरे बाप रे किंतु यदि वेदांत सही है तो आप जितना दूर से दूर जाएंगे ना आप अपनी ही कॉन्शियस को देखेंगे बिकॉज कि अल्टीमेटली कॉन्शसनेस इज द ओनली रियल थिंग एवरीथिंग एल्स इज जस्ट ये हमको देखते हैं स्क्रीन में मूवी देखते हैं तो वो जो परछ ये छाया वगैरह दिखती है वही है इससे आगे और कुछ नहीं है तो इसलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि जितना आप प्रकृति में डीपर से डीपर जाएंगे उतना ही आप अल्टीमेटली गोल घूम कर के अपने ही आत्मन के ऊपर में वह वापस चले आएंगे अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णा