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Swami Vivekananda's Kali the Mother ·

Kali the Mother: Readings from Swami Vivekananda's Poem 30 Oct 2024

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी के हृदय की जो पीड़ा थी उनके पिताजी के देहांत के बाद में जिस तरह से उनको संसार में कष्ट करके रहना पड़ा था और वह पीड़ा और उसके बाद में उसकी परि समाप्ति किस तरह से एक ऐसी आध्यात्मिक अनुभूति उनको हुई कि जिसकी वजह से जैसे कि शिव के संसार में अशवंथ प्रश्न है बहुत हजारों सालों से मनुष्य इसका उत्तर खोजने का प्रयास कर रहा है जब से हमने यह सोचना शुरू किया हमको जब से यह पता चला कि ईश्वर है तभी से हमारे मन में यह प्रश्न भी जागृत हुआ कि जद ईश्वर है तो फिर यहां पर इतने लोग इतनी भयानक अवस्था में किस तरह से रहते हैं तो यह प्रश्न का उत्तर स्वामी जी के मन में प्रकट हुआ और कल हम जैसे कि एक टॉपिक डिस्कस कर रहे थे कि स्वामी जी के जो प्रवचन है वह पढ़ कर के स्वामी जी के पत्र पढ़ कर के स्वामी जी के प्रवचनों को सुन कर के और स्वामी जी के जो कंप्लीट वर्क्स है उसका अध्ययन करके स्वामी जी की एक छवि प्रकट होती है और यदि स्वामी जी की अनुभूतियां है जो कि उनके जीवन में वर्णित की गई है वह यदि पढ़ेंगे तो एक दूसरी छवि प्रकट होती है हमारे सामने स्वामी जी की किंतु देखिए कि कल जैसे हमने डिस्कस किया था कि अनुभूतियों के आधार पर ही स्वामी जी ने अपनी वाणी की रचना की है यह जो वाणी और रचना स्वामी जी का जो कंप्लीट वर्क से उसमें जो पोयम से जो प्रवचन है जो पत्र है जो वार्तालाप है जो नोट से न्यूजपेपर रिपोर्ट से सब कुछ देखिए कि उनकी अनुभूतियों के आधार पर ही यह सबका सृजन हुआ है स्वामी जी सिर्फ किताब पढ़ कर के या तो फिर बुद्धि के जोर पर या तो फिर अपनी मेधा के प्रभाव से यह सब चीजें नहीं बोलते हां बुद्धि मेधा यह सबका एक है अनुभूति को शब्द में कैसे ट्रांसलेट किया जाए अनुभूति को कम्युनिकेट कैसे किया जाए इस चीज को आपको डेवलप करने के लिए आपको मेधा आवश्यक है बुद्धि की जरूरत है जैसे कि काकड़ी घाट जाते-जाते स्वामी जी को जो अनुभूति हुई आध्यात्मिक अनुभूति कि विश्व ब्रह्मांड और मनुष्य की आत्मा इन दोनों के बीच में एक ही सार तत्व विद्यमान है इस अनुभूति को फिर अमेरिकन ऑडियंस के सामने अमेरिकन लोगों की भाषा में अमेरिकन लोगों की बुद्धि शक्ति के अनुसार वह किस तरह से इस बात को डाइजेस्ट कर पाए इस तरह से इस अनुभूति को ट्रांसलेट करना यह आपके इसके लिए आपकी मेधा आवश्यक है किंतु जब हम मैक्रो कजम या तो फिर माइक्रो कजम या तो फिर राजयोग या तो कर्मयोग या तो भक्ति योग यह सब प्रवचन माला जब भी पढ़ेंगे तब हमको यह बात ख्याल में रखने की आवश्यकता है कि जो कुछ भी स्वामी जी कहते हैं इनके पीछे उनके जीवन की नक्कर ना सॉलिड अनुभूतियां इन सब चीजों के पीछे में विद्यमान है तो अभी देखिए कि ये जो कल हमने पढ़ा कि किस तरह से स्वामी जी के अपनी बेंच के सामने में बेंच के ऊपर में लेटे हुए थे भूखे प्यासे थे बेहोश भी हो गए थे कष्ट के मारे और फिर एकाएक उनको जो अनुभूति हुई स्वामीनी जी ने अपने ण शब्दों से जो वर्णित की उसके बारे में अभी गंभीरानंद जी महाराज क्या कहते हैं देखिए जब मैं कल यह बता रहा था कि अनुभूतियों के आधार पर ही प्रवचन सब रचित हुए हैं उस समय मुझे पता नहीं था मैंने पढ़ा है किंतु मुझे याद नहीं था कि बाद में ही गंभीरानंद जी महाराज एगजैक्टली इसी बात को अपने शब्दों में दोहराते हैं एगजैक्टली कल जो हमारा डिस्कशन हुआ वही बात आज गंभीरानंद जी महाराज कहते हैं देखते हैं कि वह क्या कहते हैं युग नायक विवेकानंद में से यह पैसेज है महाराज जी लिखते हैं उद्र सुदीर घ अर्थात कि यह जो पूरा नरेंद के जीवन का अनुभव था नर के ही वाणी में स्वामी जी की ही वाणी में हमने यहां पर लिपिबद्ध किया है और यह जो उद्धृत यानी कि जो कोट हमने लिया स्वामी जी का बड़ा ही दीर्घ है बड़ा ही लंबा है किंतु वह आवश्यक है क्यों कारण प्रत्यक्ष अनुभूति स्वमत विवरण धर्मे इतिहास बड़ो बिरोल प्रत्यक्ष अनुभूति का अपने मुंह से जो विवरण किया जाता है वह धर्म के इतिहास में बड़ा ही विरल है जनरली देखने को नहीं मिलता ज्यादातर महापुरुष अपने खुद के मुंह से अपने खुद की वाणी से अपने खुद के अनुभवों की अनुभूतियों की दर्शन की बातें ज्यादा नहीं करते ठाकुर ने बहुत बातें की है मां भी कहती है किंतु जनरली देखेंगे तो यह सब बातें विरल है क्योंकि मान लीजिए किसी महापुरुष ने कहा भी होगा तो उसको लिपिबद्ध करने वाले लोग वहां पर उपस्थित नहीं होंगे तो इसलिए यह विरल है विशेषत मरमन तद दारिद्र्य निपी नेर सहित ईश्वरीय भावे खास करके प्रच चं दरिद्रता से पीड़ित होकर के इसके साथ-साथ में ईश्वरीय भाव का अश बेर शहीद शिबे जे द्वंद यह जगते चिरकाल चलिया आशीते छ अ शिव के साथ में शिव का यह ध्वंस में चीर काल से अनादि समय से चला आ रहा है एक और है आध्यात्मिक भाव दूसरी ओर है कठोर दारिद्र्य की चिक्की में पीसना ये दोनों विरोधी भाव का जो द्वंद शिव के संसार में अशवर्थ से प्रश्न चीर काल से इस चक्की में पिसते पिसते हम लोग जो आ रहे हैं उ हार सामंजस्य पूर्ण अर्थ बोध निज मुखे निज भाषा ई भावे व्यक्त ना होई ले खद्राला यह जो ध्वन है शिव के संसार में क्यों प्रचंड दारिद्र्य एक और दूसरी ओ है अति उच्च आध्यात्मिक अनुभूति इन दोनों का सामंजस्य कहां पे है यह सामंजस्य अपने खुद के जीवन की घटनाओं के वर्णन से यदि यह अनुभूति प्राप्त महापुरुष यदि नहीं करेंगे तो हम जैसे जो क्षुद्र मनुष्य है हम जैसे जो आम आदमी है हमको कैसे पता चलेगा कि यह सामंजस्य स्वाभाविक है यह सामंजस्य पॉसिबल है और यह सामंजस्य कैसे होता है और यह हमारे हृदय को स्पर्श भी नहीं करता जद स्वामी जी अपने खुद के जीवन को लक्ष्य करके अपने खुद के जीवन की उपमा देक के हमको यह न समझाते लोका कीत पुरुष स्वामी विवेकानंद जवने की भावे जगते अनावृत प्रकृति साक्षात परिचय पाया लेन यह लोका दित पुरुष लोकनायक स्वामी विवेकानंद अपनी युवानी में किस तरह से जगत की ये जो अनावृत प्रकृति है प्रकृति का जो कराल मुख है प्रकृति का यह जो मृत्यु रूपी चेहरा है इसके सन्मुख हुए थे इसका सामना किया था यह साक्षात परिचय उन्होंने पाया था मने तखन कीरू भाव राश क्रीड़ा करते छलो उनके मन में यह मृत्यु मुख के सामने आकर के उनके मन में किस तरह की भाव राशि खेल रही थी क्रीड़ा करते चलो अर्थात की खेल रही थी एवं जगते प्रलोभन के पद दलितो कोरिया और साथ में ही जगत के प्रलोभन को पैर के नीचे कुच करके पद दलित करके की रूपे अनामिल शांतिर पथे अग्र होया छिले किस तरह से अनंत शांति के रास्ते पर आगे बढ़े थे आगे कदम किए थे सकल विवरण शरणा खरे लिखि थाक जोग यह सब विवरण सोने के अक्षर से इतिहास के पन्नों पर लिखा दि लिखने लिखा देने चाहिए लिखने चाहिए तो देखिए कि कितना सुंदर रूप से गंभीरानंद जी महाराज कहते हैं कि यह जो स्वामी विवेकानंद जैसे स्वामी जी को भी जो कि सप्तऋषि के एक ऋषि थे शिव के अंश थे ठाकुर ने अपनी लीला में सहाय करने के लिए उनको आवाहन किया था ईश्वर अवतार के साथ में युग युगांतर से ईश्वर के साथ में ही वह जन्म ग्रहण करते हैं पृथ्वी पर वह आवृत होते हैं पृथ्वी पर की वह पदार्पण करते हैं इस स्वामी विवेकानंद को भी अपनी युवानी में किस तरह से भयानक यह मृत्यु रूपी कराल रूपी काल के सामने पतित होना पड़ा था और फिर इस भयानक घटना वली से गुजर करके उन्होंने किसत तरह से अनंत शांति प्राप्त की थी यह जो पूरी घटना राजी है इसको जगत के इतिहास में सुवर्णा अक्षर से लिख देना चाहिए तभी तो कहीं जाकर के वह आगे आने वाली जो पीढ़ियां है जो हम जैसे लोग हैं हमारे सामने छोटी-मोटी आपत्ति क्या आ जाती है जैसे कि पूरा हम लोग थक करके पूरे यह होकर के डिप्रेसो केर बैठ जाते हैं तो हमको भी शिक्षा मिले देखिए कि यह जो सब कष्ट आते हैं नजर के के सामने वो हमारे चरित्र को एक स्ट्रांग बनाने के लिए ही आते थे अ एन फ्रेंक बोलकर के एक जू लड़की थी अभी पता है हमको कि यह हिटलर जब उस उसके पास में सत्ता आई जर्मनी में तो उसने किस तरह से जू लोगों का संहार य यहूदी लोगों का संहार उसने प्रारंभ किया था बड़े-बड़े कंसंट्रेशन कैंप बनाए थे कंसंट्रेशन कैंप में जितने भी स्त्री पुरुष बच्चे थे सबको फेंक देता था उनके ऊपर में क्या-क्या मेडिकल एक्सपेरिमेंट हुए थे उनके पास में किस तरह से फोर्सड लेबर यानी कि जोर जबरदस्ती फैक्ट्रियों में काम करवाया गया था किस तरह से उनको गेस चेंबर में फेंक करके उनको मार दिया गया था यह जो घटना जिसने पढ़ी है सेकंड वर्ल्ड वॉर की उन सबको पता है कि यहूदियों के साथ में कितना अत्याचार हुआ अभी इतने इसी तरह से यह जो एन फ्रैंक बोलकर के लड़की थी 121 साल की होगी वह शायद वो वो अपनी डायरी मेंटेन करती थी तो वह डायरी में जैसे ही वह हिटलर और नाज पार्टी पावर में आई और जू लोगों को खोजना शुरू किया यहूदी लोगों को जहां पे भी है जहां पे जिस मोहल्ले में रहते हैं जिस गली में रहते हैं वहां वहां से उनको पकड़ करके केद करके कंसंट्रेशन कैंप में डाल दो यह पूरा कैंपेन जब चल रहा था तब यह लोग एक छोटे से घर में छुपे हुए थे उनको यह डर था कि यह नाजी यह जो गुंडे हैं उनको पता चल जाएगा कि यह लोग यहां पर रहते हैं तो उनको भी यह लोग पकड़ करके ले जाएंगे तो यह जब छुपे हुए थे एक छोटे से कमरे में उस समय यह लड़की अपनी डायरी मेंटेन करती है अपनी डायरी लिखती है वो जो डायरी पढ़ेंगे तो हमको लगेगा कि अरे यह छोटी सी लड़की है और उसके सामने जो भयानक काल प्रकट हुआ है यह जो यहूदी लोगों को ही पता है कि किस तरह से उन्होंने सेकंड वर्ल्ड वॉर में क्या अत्याचार सहन किए जैसे ही पता चला वैसे ही उनको पकड़ कर के कंसंट्रेशन कैंप में डाल देंगे क्या-क्या भयानक अमानुष य टॉर्चर करेंगे उन लोगों को और जैसे ही ये जो गेस चेंबर है उसमें जैसे डालेंगे तब भयानक मृत्यु तो यह सब इस लड़की की नजर के सामने है उसको पता है कि यह जिन लोगों को पता है कि यह लोग यहां पर छुपे हुए हैं कोई भी पैसों के मोह में उनको ये कर देगा बिट्रेट देगा उनका पता लोगों को यह नाजी पार्टी को बता देगा वे लोग आकर के गेटा पो वो जो जर्मन सीक्रेट सर्विस का नाम था तो ये गेटा पो वाले आकर के कब उनको उठा कर के ले जाएंगे कंसंट्रेशन कैंप में डाल देंगे तो प्रतिदिन प्रति क्ण मृत्यु उनकी नजर के सामने है महा भय उसकी नजर के सामने है किंतु फिर भी उसकी डायरी पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि उसके भीतर में कैसी एक के बाद एक दिव्य अनुभूतियां हो रही है माने वो दिव्य अनुभूति ऐसा शब्द तो नहीं व्यवहार करती ना ही इसको कोई स्पिरिचुअल कॉन्टेक्स्ट में एन डायरी ऑफ एन फ्रैंक बाद में सेकंड वर्ल्ड वॉर जब समाप्त हो गई और उसके पिता ने यह डायरी को पब्लिश किया था इस डायरी को कोई भी आध्यात्मिक लिटरेचर के रूप में नहीं गिनता किंतु हम लोग जो कि मनुष्य सभ्यता को मनुष्य स्वभाव को स्टडी कर रहे हैं हमको पता है कि यदि इस भयानक मृत्यु भई के सामने भी जयदिश लोगों के प्रति सहानुभूति की धारा सतत कहती रहे तो वह आध्यात्मिकता के वह जो वेल स्प्रिंग ऑफ स्पिरिचुअलिटी जिसको कहते हैं अध्यात्म रूपी अनंत क्षीर सागर उसी में से यह सहानुभूति प्रकट हो सकती है वरना तो जैसे ही मृत्यु भय सामने आया मनुष्य या तो पागल हो जाएगा या तो 10 लोगों को गाली देना शुरू करेगा या तो फिर पता नहीं किस तरह का विचित्र आचरण करेगा इस मृत्यु भई के सामने भी उसने यह जो एक मेंटल बैलेंस बना कर के रखा नाजी के यह जर्मन जू लोगों जर्मन और हिटलर के प्रति भी हमने देखा डायरी पढ़ेंगे उसके मन के भीतर में कोई यह नहीं है द्वेष नहीं है उनको श्राप नहीं देती उनको गाली नहीं देती तो यह जो एक उसके भीतर में था सहानुभूति और सबके प्रति यह ममता और करुणा यह डायरी मैंने बहुत सालों पहले पढ़ी थी मैं स्कूल में था उस समय आई थिंक 11थ या 12थ स्टैंडर्ड में था मैं बहुत लंबा समय अपनी लाइब्रेरी में बिताया करता था और जो भी व किताबें मिलती थी वह ले लेकर के पढ़ता रहता था उस समय यह किताब मैंने पढ़ी थी उस समय ये सेकंड वर्ल्ड वॉर का इतिहास भी पड़ा था हिटलर की जीवनी भी पड़ी थी और किस तरह से यहूदी लोगों प अत्याचार हुए थे सब पढ़ा था तो उस समय जब मेरा यह फ्रेश रीडिंग चल रहा था तब मैंने यह किताब को पढ़ा और मैंने सोचा देखिए कि हिटलर जैसा एक भयानक राक्षस व जद पृथ्वी पर प्रकट होता है लाखों करोड़ों का संहार करता है तो साथ में ही यह एन फ्रैंक जैसी लड़की का भी जन्म होता है और वह उसके हृदय में अपने दुश्मनों के प्रति भी किसी भी तरह का द्वेष नहीं रहता तो यह दोनों तरह के लोग पृथ्वी पर आते हैं आप मृत्यु भाई का किस तरह से सामना करेंगे किस तरह से अपने चरित्र को गठित करेंगे यही हिटलर वो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में सोल्जर था सैनिक था और उसने देखा कि जर्मनी जब हार गया तब यह जो ब्रिटेन और फ्रांस है उन्होंने जर्मनी का हारने के बाद में पराजय के बाद में किस तरह से अपमान किया तो उस बात उसको बहुत लग गई उसने सोचा कि मैं फिर से युद्ध करूंगा और उनको दिखा दूंगा कि हमको हमारा अपमान करने का हमको ह्यूमिड करने का क्या परिणाम आता है तो देखिए कि युद्ध युद्ध में से इसने हिटलर ने यह सीखा कि मैं इससे भी ज्यादा बड़ा युद्ध करूंगा और अपने दुश्मनों को और भी बड़ा अपमानित करूंगा जिसने वो हिटलर की बुद्धि के से काम करती थी जब प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार हुई तो फ्रांस और ब्रिटेन ने क्या किया कि जर्मनी के पास में वह जो जो यह होता है ना साइन करवाते हैं कि हम लोग हार गए हैं और हम लोग अपना पराजय स्वीकार करते हैं और अभी आपको जो कष्ट हुआ हमारे साथ युद्ध करके हम आपको इतना रुपया देंगे ऐसा करके जर्मनी के पास में सिग्नेचर करवाया तो किसमें करवाया एक रेल के डिब्बे में और फिर वह रेल का डिब्बा उसमें सिग्नेचर करवा करके जर्मन जनरल के पास में वो फ्रांस ने क्या किया था रेल का डिब्बा एक म्यूजियम में रख दिया था अभी देखिए कि हिटलर जब सेकंड वर्ल्ड वॉर में उसने फ्रांस के ऊपर में विजय प्राप्त की फिर वही रेल का डिब्बा उसने म्यूजियम में से निकाला उसी रेल के डिब्बे में बिठा कर के यह जो फ्रांस के जनरल थे उनके पास में यह साइन करवाया कि हम लोग हार गए हैं आपके साथ में युद्ध करके हमारी पराजय हुई है और हम आपको रिपरेशन के रूप में इतना रुपया देंगे यह थी हिटलर की बुद्धि किस तरह से देखिए कि अपमान है कष्ट है युद्ध है मृत्यु है उसमें से मनुष्य क्या सीखता है एक है हिटलर जिसने सोचा कि मैं इससे भी बड़ा मृत्यु इन लोगों के सामने मृत्यु भाई खड़ा करूंगा इससे भी बड़ा युद्ध करूंगा पूरे विश्व को मैं अपनी वेर की अग्नि में फेंक दूंगा अपनी यह जो वेर जो रिवेंज मुझे चाहिए और रिवेंज लेने के लिए मैं य कैसा भी लोगों के साथ में क्रू रता है यह करूंगा तो यह है एक हिटलर यह सेकंड वर्ल्ड वॉर और फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में से यह एक राक्षस प्रकट हुआ और यही पे ये एन फ्रैंक बोलकर के एक लड़की प्रकट हुई कि जिसने अभी ये एन फ्रेंक के कुछ-कुछ कोटेशन में खोज के रखूंगा मैं अभी स्पर ऑफ द मोमेंट इसके बारे में बता रहा हूं किंतु इसकी जो डायरी है इसकी किताब है सही में पढ़ने लायक है खास कर के यदि हमको यह कांटेक्ट पता है कि यहूदियों ने उस सेकंड वर्ल्ड वॉर में क्या-क्या सफर किया है ये कॉन्टेक्स्ट यदि पता है तो इस कॉन्टेक्स्ट में इस डायरी को पढ़ना बहुत ही हमको सीख मिलेगी तो देखिए कि किस कॉन्टेक्स्ट में क्या रचना होती है किस तरह से चरित्र का निर्माण होता है किस तरह से लाइफ गठित होती है यहां पे स्वामी जी यह भी सोच सकते थे हम लोग नहीं वो मूवीज में देखते हैं नवल कथाओं में पढ़ते हैं कि हीरो बड़ा गरीब था उसके घर में पैसा नहीं था उसकी मां ने कैसे भी कष्ट करके इसको बड़ा किया और फिर बड़ा होने के बाद में इसने देखा कि पैसा ही जीवन में सर्वस्व है मैं पैसों के लिए ही अपना जीवन डालूंगा और यदि पैसा कमाने के लिए मुझे भ्रष्टाचार करना पड़े मुझे अपराध करना पड़े मुझे लोगों को कष्ट भी देना पड़े तो वह सब कुछ चलेगा क्योंकि पैसा ही जीवन का सर्वस्व है यह उसने यह सीखा ऐसा हम बहुत जगह पर पढ़ते हैं बहुत सारी बायोग्राफी में देखते भी है किंतु देखिए कि हम इसमें से इस तरह की शिक्षा भी ले सकते हैं यदि मैंने कष्ट पाया है मृत्यु के सन्मुख न जदिया हूं यदि ऐसी परिस्थिति मेरे घर में से गई है कि मां और मेरे भाइयों को खाने को भी नहीं मिल रहा तो इससे मैं यह भी ग्रहण करूंगा कि यह वैराग्य ही जगत का सार है त्याग त्याग त्याग त्यागे नहीं के अमृत मानस हो त्याग के माध्यम से ही मनुष्य अमृत की प्राप्ति करता है मनुष्य के जीवन में सबसे ज्यादा कीमती क्या है सबसे बड़ी वेल्थ क्या है वह जो एडम स्मिथ बोलकर के एक था इकोनॉमिस्ट उसने एक किताब लिखी थी वेल्थ ऑफ द नेशंस यानी कि एक राष्ट्र है उसकी संपत्ति क्या है तो राष्ट्र की संपत्ति है मैन्युफैक्चरिंग वो जितना मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा करेगा एक राष्ट्र इंडस्ट्रियल इजेशन वो जितना करेगा उतना ही यह राष्ट्र सुदृढ़ होगा सक्षम होगा बलवान होगा हम लोग क्या कहते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं स्पिरिचुअलिटी इज द ट्रू वेल्थ ऑफ द नेशन आप सिर्फ इंडस्ट्रियल इजेशन करके अपने देश को बड़ा बनाएंगे तो इंडस्ट्रियल इजेशन का अंत कहां पे आता है तो न्यूक्लियर बॉम्ब में यह जो एटॉमिक वेपंस में और एटॉमिक वेपंस का अंत कहां पे आता है न्यूक्लियर वॉर में और एक बार न्यूक्लियर वॉर हुआ पृथ्वी संपूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगी फिर हम लोग वही 500 साल पहले हमारे पूर्वज जो जंगल में में से निकल कर के सभ्यता पहली पहली बार बना रहे थे उस समय वापस फिर जाएंगे और वहां पे भी शायद वापस ना फिर पाए क्योंकि हमने देखा है कि चेर्नोबिल बोल कर के जहां पे यह न्यूक्लियर अ न्यूक्लियर रिएक्टर था सोवियत यूनियन का उसमें मेल्ट डाउन हो गया बड़ा ही एक दुर एक्सीडेंट हुआ था बोलकर के वो न्यूक्लियर ये जो वेस्ट होता है ना चारों ओर फैल गया था वहां पे अभी साइंटिस्ट लोग देखते हैं कि पेड़-पौधे हैं पशु पक्षी है उन सब में पता नहीं किस तरह का विचित्र म्यूटेशन हो रहा है तो देखिए कि एकदम अल्प मात्रा में न्यूक्लियर एक्सीडेंट हुआ दुर्घटना हुई उसी में यह भयानक म्यूटेशन वगैरह हमको देखने को मिल रहा है तो न्यूक्लियर वर होगी तो उसके बाद में मनुष्य सभ्यता में मनुष्य के शरीर में पता नहीं किस-किस तरह के म्यूटेशन होंगे यह जो हिरोशिमा नागासाकी में देखिए नई जनरेशन जो कि न्यूक्लियर बॉम फेंकने के बाद में एटम बॉम के बाद में यह जो नई जनरेशन आज आ रही है कहा जाता है कि कैंसर का प्रमाण इन लोगों में बहुत ज्यादा है पता नहीं इनके जीन किस तरह से अफेक्ट हुए हैं किस तरह का म्यूटेशन हुआ है बड़ा ही आसानी से यह लोग कैंसर का भोग बन जाते हैं तो यदि बात सिर्फ यह नहीं है न्यूक्लियर वॉर के बाद में कि मनुष्य सभ्यता का तहस नहस हो जाएगी किंतु उसके बाद में जो म्यूटेशन होगा मुझे नहीं लगता कि हम आज से 500 साल पहले की जगह पर जाएंगे मुझे लगता है कि जो तीन 300 करोड़ 400 करोड़ साल पहले पृथ्वी जो प्रारंभ हुई थी उस समय फिर से वापस चले जाएंगे म मनुष्य जीवन को आते-आते 400 करोड़ साल लगे हैं इस तो 400 करोड़ साल पीछे चले जाएगी हमारी सभ्यता ऐसा लग रहा है जद न्यूक्लियर वर होगी तो इसीलिए आज सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि चैलेंज जितनी भी आती है जीवन में ट्रीट इट एज अ कॉल फॉर रिनाउंस एशन त्याग के शंख के रूप में इसको ग्रहण करें और जीवन में धीरे-धीरे करके त्याग और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़े और त्याग और वैराग्य का यह अर्थ नहीं कि हम सबको साधु हो जाना है किंतु मन से ही यह जो चीजें राग और द्वेष कोई कोई चीजें हैं जिसके प्रति मेरा प्रचंड आकर्षण है कोई कोई चीजें हैं जिसके प्रति मेरा प्रचंड क्रोध है या प्रचंड विराग है यह जो राग और द्वेष रूपी द्वंद है उससे धीरे-धीरे करके मुक्त होना है जो चीजें मुझे बड़ी प्रिय है अति प्रिय है उस चीजों से मेरे मन को धीरे-धीरे करके बटोर है अपने मन को ईश्वर में स्थित करना है यदि आज से ही हम यह प्रारंभ नहीं करेंगे यह स्वामी जी की ठाकुर की मां की कहानियों को सुन कर के तब तक जिस दिन हम यह प्रारंभ नहीं करेंगे तब तक हमने अपने जीवन में आध्यात्मिक जीवन में प्रथम पैर भी नहीं रखे हैं त्याग ही है सर्वप्रथम कदम यह आध्यात्मिक जीवन की और और जाने का तो इसीलिए यहां पर महाराज जी कहते हैं कि स्वामी जी जैसे स्वामी जी को अपने यवन में मृत्यु मुख के सामने यह जो काल का कराल वदन देखना पड़ा और यह देखने के बाद में उन्होंने अपने चरित्र को किस तरह से गठित किया यह यदि हम नहीं पढ़ेंगे तो हमको कुछ भी सीखने को नहीं मिलता कारण परे जखन सुनीत पाई जब हम बाद में जब हम यह पढ़ते हैं स्वामी जी बनेर वेदांत के लोका लोय आनिया छन घात प्रतिघात पूर्ण जीवन रही मध्य अटल सिंहासन प्रतिष्ठित कोरिया छन जब बाद में हमने देखा कि स्वामी जी वन के वेदांत को शहर में लाए हैं घात प्रतिघात पूर्ण जीवन यानी कि एक के बाद एक जंजावत से पसार होते हुए जीवन के बीच में ही अटल सिंहासन प्रतिष्ठित करया कि करिया छन अटल सिंहासन जिन्होंने प्रतिष्ठित किया है प्रचंड झंझावात के बीच में भी तखन उ हार प्रकृत अर्थ की एवं उहा पश्चात की कठोर साधना रहिया छ ताहा उपलब्धि करते होले सुधु ताहर बागमत मुक्त होले चली बना फिर यह झंझावात के भीतर में उन्होंने सिंहासन को प्रतिष्ठित किया है यह जब हम जानेंगे तो इसका अर्थ क्या क्या है सही सही अर्थ क्या है और यह सिंहासन जो प्रतिष्ठित किया है आध्यात्मिक साधना के रूप में इसके पीछे में कितनी कठोर साधना उनकी रही है जब तक हमको यह समझ में नहीं आएगा जब तक हम सिर्फ उनकी वाग छटा से मुक्त होकर के वागम अर्थात की प्रवचन देने की छटा से उनकी स्टाइल से मुक्त होकर के हम सिर्फ रहेंगे तो चलेगा नहीं जीवने अभिज्ञता परिपेक्ष श बाणी अर्था धावन करते होई बे जीवन की अभिज्ञता जीवन की अनु जीवन के अनुभव जीवन के एक्सपीरियंस के कांटेक्ट में ही स्वामी जी की वाणी को हमको लेना होगा समझना होगा अर्था अनु धावन अर्थ अनुवनऊवू दारिद्रय पेण स्वयं की भावे सज कोरिया लेन ताहा ओ स विशेष जानते होई बे जो दरिद्र लोगों के पूजक है जिन्होंने अपना जीवन दरिद्र की सेवा के लिए दरिद्र के उत्थान के लिए समर्पित किया है वैसे स्वामी जी के जीवन में दारिद्र्य की यह जो चक्की उसमें वह खुद कैसे पीसे थे वह हमको समझना होगा विशेष रूप से समझना होगा स्वामी जीर बाणी और रचना तो सुधु अलंकारिक शब्द राशि समावेश न है कितना सुंदर स्वामी जी की वाणी और रचना सिर्फ शब्दालंकार सिर्फ ये शब्दों का अलंकार शब्दों की य रमत या शब्दों की ये जादूगरी मात्र नहीं है इहा जीवाना भूति रसे परिपूर्ण यह जीवन रूपी अनुभूति के रस से परिपूर्ण है प्रेरणा प्रद जीवंत प्राण प्रवा हो प्रेरणा प्रद जीवंत प्राण प्रवाह है यह जो लास्ट सेंटेंस कितना सुंदर स्वामी जी वाणी और रचना तो सुधु अलंकारिक शब्द राशिर समावेश न है स्वामी जी की वाणी और रचना सिर्फ शब्दों की जादूगरी नहीं है शब्दालंकार सिर्फ नहीं है उहा जीवना भूति रश परिपूर्ण प्रेरणा प्रद जीवंत प्राण प्रवाह वो जीवन की अनुभूति के रस से परिपूर्ण प्रेरणा प्रद जीवंत प्राण प्रवाह है देखिए इस कॉन्टेक्स्ट में अभी हम जो कविता है स्वामी जी की काली द मधर इसका फिर से एक बार पाठ करते हैं पहले तो हम देखते हैं फिर से एक बार कि कल स्वामी जी ने अपने मुंह से अपनी खुद की वाणी से अपने अनुभव का कैसे वर्णन किया था और फिर स्वामी जी की यही रचना इस अनु अभी हमको पता नहीं है कि काली द मधर यह जो काव्य की रचना स्वामी जी ने अपनी कौन सी अनुभूति के आधार पर की है किंतु गंभीरानंद जी ने हमको इतना तो बता दिया कि स्वामी जी की वाणी और रचना जो है स्वामी जी का कंप्लीट वर्क से प्रवचन पोएम्स पत्र जो कुछ भी है सब कुछ उनके जीवन की अनुभूति के आधार पर है गंभीरानंद जी ने इतना तो हमारे लिए बड़ा ही सुस्पष्ट कर दिया अभी हम एक अपना जो लीप ऑफ फेथ इंग्लिश में एक शब्द है लीप ऑफ फेथ अपनी अनुमान करके अभी हम लोग यह दोनों को जोड़ देते हैं कि ये स्वामी जी की ये जो अनुभूति थी कल हमने जिसको देखा था एक बार फिर से पाठ कर लेंगे और फिर यह स्वामी जी की कविता इन दोनों के बीच में सामंजस्य कहां पे है कैसे यह सर्कल जो है यह वर्तुल जो है कैसे पूर्ण होता है कहां से प्रारंभ किया कहां पे आके अटके तो कंप्लीट ऑफ द सर्कल फिर से वो जो स्वामी जी की कल की अनुभूति पढ़ते हैं स्वा हमको पता है स्वामी जी भूखे प्यासे सुबह से निकले थे नौकरी खोजने के लिए सब जगह से अपमानित हुए सब जगह से भगा दिए गए मन में कष्ट डिप्रेशन घर में पता है कि घर जाएंगे तो भूखे भाई बहन मां बैठी है इंतजार करती हुई उनका और फिर इसी परिस्थिति में स्वामी जी इतने थक गए बारिश हुई भीक गए पता नहीं बुखार भी हुआ होगा कि नहीं शरीर से क्लांत मन से डिप्रेसेंट जैसा है एक मकान के सामने रोक शब्द स्वामी जी ने यूज किया है तो यह बेंच के ऊपर में वो लेट गए और लेटने के बाद में ही हो सकता है कुछ क्षणों के लिए बेहोश भी हो गए हो किंतु इमीडिएट उनको जो अनुभूति हुई स्वामी जी क्या कहते हैं कल हमने पढ़ा था सोहसा उपलब्धि कोरि लाम एकाएक मैंने अनुभूत किया अनुभूति हुई अनुभव किया कोनो एक देव शक्ति प्रभाव एक पर अन्न ए रूपे भीतरे अनेक गुली पर्दा जेनो उत्ते तो होलो जैसे कि किसी एक देव शक्ति की प्रभाव से देवी शक्ति के प्रभाव से एक के बाद एक रंग मंच के ऊपर में पर्दे जो उठते हैं और फिर हमको रंग मंच दिखता है स्टेज दिखता है तो वैसे ही उनके मन के अंतः स्थल में एक के बाद एक पर्दे उठना शुरू हुआ एवं शिमर संसारे अशब केनो और शिव के संसार में अीव क्यों ईश्वर कठोर न्याय परता और अपार करुण सामंजस्य ईश्वर की एक और है अपार करुणा दूसरी और है कठोरता कठोर न्याय परता इन दोनों का सामंजस्य कहां पे है वगैरे प्रवृति ज शकल विषय निर्णय करते ना पारिया मन ए तो दन नाना संदेह आकुल होया छीलो वगैरे विषयों का कोई भी मैं ठीक नहीं कर पाता था मेरा मन एकदम संदेह से उत्ते त हो गया था आकुल तो हो गया था शे शकोल विषय स्थिर मीमांसा अंतरेर निब तोम प्रदेशे देखीते पायला यह सब विषयों की स्थिर मीमांसा ठीक ठीक निश्चय में अपने अंतर के गहन स्तर में गहन भीतर में मुझे देखने को मिला आनंदे उत् फुलो होया उठला आनंद से उत् फुल्ल हो गया देखिए यह जो अनुभूति बाद में क्या कहते हैं स्वामी जी अन बाटी फिरी बार काले देखिला शरीरे बिंदु मात्र क्लां ना मन अमित बल ओ शांति ते पूर्ण एवं रजनी अशान होई बार स्वल्प बिलबो आछे और फिर जब घर वापस जाने के समय देखा शरीर में बिंदु मात्र थकावट नहीं है मन अमित बल प्रचंड साहस से और शांति से पूर्ण हो गया है और बस दिन रात्रि अभी समाप्त होने ही वाली है यह वर्णन स्वामी जी की अनुभूति का और अभी इस वर्णन के परि प्रेक्षा में स्वामी जी की जो कविता है काली धम मधर वो फिर से एक बार देखते हैं देखिए कि स्वामी जी क्या कहते हैं द स्टर्स आर ब्लोटेड आउट ये जितने भी सितारे हैं आकाश के सब जैसे कि एक के बाद एक अदृश्य हो गए हैं छिप गए हैं द क्लाउड्स आर कवरिंग क्लाउड्स एक के बाद एक घने बादल मंडरा रहे हैं एक के ऊपर में एक धसे चले आ रहे हैं इट इज डार्कनेस वाइब्रेंट सोनेंट जैसे कि जीवंत अंधेरा पूरी पृथ्वी को ग्रस कर रहा हो पूरे जगत को जैसे कि खा जा रहा हो इन द रोरिग वर्लिंग विंड इनमें जो भयानक झंझावात रूपी जो पवन है आर द सोल्स ऑफ अ मिलियन लुनेटिक्स ये जो भयानक झंझावात उसके भीतर में लाखों लाखों पागल आत्माएं प्रेता आत्माएं मंडरा रही है जस्ट लूज फ्रॉम द प्रिजन हाउस जेल में से अभी-अभी जैसे कि छुटी हो रेंच ट्रीज बाय द रूट्स जैसे कि जड़ों से पूरे पूरे यह वृक्षों को उखाड़ जाती हो स्वीपिंग ऑल फ्रॉम द पाथ रास्ते में जो कुछ भी आया सब कुछ जैसे कि तहस नहस करती जाती है द सी हैज जॉइन द फ्रे और इस भयानक तूफान में समुंदर भी आके मिला है स्वस माउंटेन वेव्स आकाश रूपी तरंगे उत्तल हो रही है टू रीच द पिची स्काई ये तरंगे उछल उछल करके भयानक घने अंधकार आकाश को जैसे कि स्पर्श करने को उत्तेजित हो रही हो अ फ्लैश ऑफ लरिंग लाइट रेवल्स ऑन एवरी साइड यह जो बिजली चमक रही है इस बिजली की चमका में चारों ओर हमको क्या दिख रहा है अ थाउज थाउज शेड्स ऑफ डेथ बि ग्राइम एंड ब्लैक ये भयानक मृत्यु के भयावह चेहरे लाखों लाखों चेहरे हमको भयावह मृत्यु के बिजली के प्रत्येक चमक के साथ में दिख रहे हैं स्कैटरिंग प्लेगस एंड सोरस डांसिंग मेड विद जॉय और ये मृत्यु रूपी भयानक चेहरे क्या कर रहे हैं ये चारों ओर फैला रहे हैं प्लेग और अत्याचार और फैलाते फैलाते आनंद के मारे कर रहे हैं मृत्य कम मधर कम आओ मां काली आओ फॉर टेरर इज ई नेम तुम्हारा नाम ही है कराल वदनी काली तुम्हारा नाम ही है जैसे कि मृत्यु का भय मृत्यु रूपी काली डेथ इज इन दय ब्रेथ तुम्हारे सांसों में ही मृत्यु है सांसों में प्रत्येक सांस में मृत्यु बुनी हुई है एंड एवरी शेकिंग स्टेप डिस्ट्रॉयज वर्ल्ड फॉर एवर और प्रत्येक कदम तुम जो रखती हो प्रत्येक कदम से एक एक जगत का संहार होता जाता है धाव टाइम द ओल डिस्ट्रॉयर व काल रूपिणी सर्व संहार मई काली कम मधर कम हु डर्स मिजी लव इस मृत्यु को प्रेम करता है एंड हक द फॉर्म ऑफ डेथ और मृत्यु को आलिंगन करता है डांस एंड डिस्ट्रक्शन डांस यह संहार रूपी नृत्य कौन करता है टू हिम द मदर कम्स जो करता है उसके पास में यह मां काली आती है देखिए यह जो स्वामी जी ने कहा हु डर्स मजरी लव कौन इस संहार को प्रेम करता है एंड हक द फॉर्म ऑफ डेथ मृत्यु को आलिंगन कौन करता है डांस एंड डिस्ट्रक्शन डांस य सृष्टि स्थिति संहार रूपी ये जो तांडव नृत्य है वो तांडव नृत्य के साथ में ताल मिला कर के ताल से ताल मिलाकर के नृत्य कौन करता है उसके पास में मां काली आती है उनके ऊपर में मां काली का आशीर्वाद हमेशा प्रकट होता है देखिए यह जो कुछ स्वामी जी ने पूरी कविता लिखी कि यह जो मृत्यु रूपी कराल रूपनी काली जो कि चारों ओर प्लेग फैला रही है महामारी फैला रही है और काली के आगमन से ही जैसे भगवान शिव के आगमन से भूत पिशाच पलित प्रेत वो जब भगवान शिव की बारात में आकर के खड़े हुए थे तो महाकाली के साथ में भी यह भूत प्रीत प्रेत पलित पिशाच यह जो जैसे कि जेल खाने में से छूटे हो पागल की तरह पागल की तरह नृत्य करते-करते मां काली के साथ में वो भी चारों ओर संहार नृत्य कर रहे हैं कहां पर प्लेग फैला रहे हैं कहां पर महामारी फैला रहे हैं पा गलों की तरह आनंद से अट्टहास करते नृत्य कर रहे हैं यह पागलों की सेना के साथ में भूत पिशाच की सेना के साथ में मां काली आगमन करती है और धन्य कौन होगा जो डर जाएगा भाग जाएगा हताश हो जाएगा मृत्यु के सामने बिल्कुल वो ये हो जाएगा कावड़ की तरह वो अपने घुटने झोक देगा क्या वो वो संहार उसका भी संहार हो जाएगा वो मृत्यु के सामने कुछ नहीं कर पाएगा किंतु मृत्यु के सामने विजय किसका होगा जो इस संहार को प्रेम करता है जो मृत्यु को आलिंगन करता है जो इस संहार रूपी तांडव वृत्य में ताल के ताल ताल के साथ ताल मिला कर के नृत्य करता है उसी के ऊपर में महाकाली का आशीर्वाद वर्षित होगा और इसका अर्थ क्या है यही जो कि स्वामी जी के जीवन में हमने देखा कि भयानक कष्ट के मारे बेहोश हो गए हैं खाने को नहीं है उपवास करके पू सुबह से जा रहे हैं बग गए हैं हो सकता है बुखार भी आ गया हो यह जो व्यक्तिगत उनकी अनुभूति है उस अनुभूति में से स्वामी जी यदि कोई आम आदमी होता तो उसका जो मन है ऐसा सिकुड़ जाता कि मृत्यु के सामने जैसे कि स्वामी जी ने खुद ने कहा था कि यह जो अच्छे-अच्छे मेरे मित्र थे जो कि मेरी बड़ी प्रशंसा करते थे उन लोगों को एक बार यह पता चला कि पिताजी का मृत्यु हो गया है घर में खाने को भी नहीं है तो उनमें से किसी ने भी स्वामी जी को थोड़ी सी भी सहाय नहीं की किंतु बद चरित्र मित्र थे कुछ-कुछ स्वामी जी के स्वामी जी की सहानुभूति पर्बो ना वो जो एक स्त्री जिसका चरित्र अच्छा नहीं था उसने मां को कहा मां लाओ यह खाने की थाली में ठाकुर को देती हूं ठाकुर के सामने रख के चली गई फिर ठाकुर ने मां को बुला कर के कहा अरे ये सब तुम क्या करते हो तुमको पता नहीं है कि उसका चरित्र कैसा है उसके हाथ से मुझे खाना भेजा तब मां ने कहा था मां बोल कर के आकर के जो पुकारेगा उसकी बात उस मैं माने बिना नहीं रह पाऊंगी तो स्वामी जी का भी ऐसा था कुछ-कुछ मित्र थे उनके जिसका चरित्र अच्छा नहीं था जो कि बुरी संगत में फंसे हुए थे किंतु स्वामी जी के ऊपर में श्रद्धा थी बोलक के स्वामी जी का भी उनके ऊपर में आशीर्वाद था तो स्वामी जी कहते हैं कि ऐसे मेरे कुछ मित्र मेरे पास में आए उन्होंने मुझे सही सही अनुभूति पूर्वक कहा कि नरेंद्र तुम्हारी ऐसी दुरावस्था है हम समझते हैं क्योंकि हम भी इस तरह की अवस्था में से पसार हुए और हमको पता चला कि देखो जिन लोग यह लोग नैतिकता कहते हैं धर्म कहते हैं यह सामाजिकता कहते हैं यह सब चीजों में कोई अर्थ नहीं है यदि पैसा चाहिए तो आपको दुष्कर्म भी करना पड़ेगा हम भी इसी तरह का दुष्कर्म करके पैसा अर्जित करते हैं तुम हमारे साथ में चले आओ देखो कि स्वामी जी के कुछ-कुछ मित्रों के साथ में ऐसा हुआ था स्वामी जी को पता था और यह रास्ता उनके सामने खुला भी था प्रचंड जब प्रेशर आ गया है तो कैसे भी करके पैसा अर्जित करना ही है तो चलो दुष्कर्म करके कर लेते हैं क्या फर्क पड़ता है समाज ने तो मुझे कुछ दिया नहीं है समाज की ओर से तो सिर्फ धुत का ही प्राप्त हुआ है और कल हमने जैसे देखा स्वामी जी कहते हैं कि मेरे मन में कुछ समय के लिए ऐसी आशंका हो गई थी कि मेरे चरित्र के प्रति प्रश्न उठाने वाले लोग यदि ठाकुर के पास जाकर के ऐसा कहेंगे कि नरेंद्र दुश्चिंता हाथ में घूम रहा है नास्तिक हो गया है और ठाकुर भी यदि हो सकता है कि यह सब बातें करके स्वीकार कर लेते तो फिर क्या होता यह कुछ संदेह नरेंद्र के मन में खड़ा हो गया था तो मान लीजिए नरेंद्र के मन की जो अवस्था थी घर में खाना नहीं मित्रों ने छोड़ दिया है ठाकुर ने भी हो सकता है कि उनके ऊपर में अविश्वास आ गया हो ठाकुर का नरन के ऊपर में ऐसी परिस्थिति में नरन का चरित्र यदि कमजोर होता तो वो भी इस मृत्यु के सामने घुटने टेक देता और यह जो राक्षस भूत पिशाच है उनके साथ में हो सकता है जाकर के मिल जाता किंतु नहीं स्वामी जी का जो चरित्र है वो इतना स्ट्रांग था कि उन्होंने खड़े होकर के कहा नहीं इस मृत्यु को मैं आलिंगन करूंगा संसार में जो कुछ भी त्याग करने योग्य है अपने खुद का धन मान जो भी है सब कुछ मैं त्याग करूंगा और आध्यात्मिकता के रास्ते पर चलूंगा इसीलिए तो स्वामी जी ने बाद में क्या सोचा कि यदि ईश्वर प्राप्ति ही जीवन का सर्वस्व है तो चलो मैं त्याग करके घर छोड़ के चला जाता हूं ऐसा बोल कर के उन्होंने ठीक किया आखिरी दिन एकाएक पता चला कि ठाकुर वहां पर आ रहे हैं पास में ही किसी के घर तो वहां पर मैं जाता हूं ठाकुर की ठाकुर के आशीर्वाद ले लेता हूं बोलक के ठाकुर के आशीर्वाद लेने के लिए गए ठाकुर ने क्या कहा चलो चलो तुमको मेरे साथ में आना ही होगा मेरे साथ में तुम आओ मेरे साथ में दक्षिणेश्वर चलो बोल कर के जोर करके ठाकुर नरेण को दक्षिणेश्वर ले गए और फिर वहां पर ठाकुर क्या गीत गाते हैं कथा कहीते डरा ई ना कहीते हो डराए बात कहने में भी मुझे डर लग रहा है नहीं कहने में भी मुझे डर लग रहा है अमार मने सं होए बुझी तुमाई हराई हराई मेरे मन में संदेह है हो सकता है कि मैं तुमको खो दूंगा मैं तुमको खो दूंगा ऐसा बोलक के ठाकुर भी रो रहे हैं और स्वामी जी भी रो रहे हैं यह जो परीक्षा की घड़ी थी उसमें कुछ भी हो सकता था स्वामी जी यदि चरित्र कमजोर होता तो फिर वह दुष्ट चरित्र वाले लोगों के साथ में मिल जाते किंतु चरित्र स्ट्रांग था तो ठाकुर के पास में आए ठाकुर के ऊपर में उनकी श्रद्धा भक्ति करोड़ों गुना बढ़ गई और इसके बाद में जो घटना होती है वो जो फेमस घटना कि स्वामी जी ठाकुर को कहते हैं कि आपको मेरे परिवार के लिए कुछ कर देना पड़ेगा और फिर ठाकुर स्वामी जी को जो उपदेश देते हैं और फिर स्वामी जी की जो सब अनुभूतियां होती है वो गंभीरानंद जी महाराज ने जितना सुंदर विश्लेषण किया है वो अभी हम हमारा नेक्स्ट क्लास जो होगा उसमें देखेंगे नरेन काली मैने ठाकुर कहते हैं इतने खुश खुश होकर के दूसरे दिन सभी को कहते हैं नरेण काली मैने छ नरन काली मेने छ नर ने महाकाली को स्वीकृत किया है नर ने महाकाली को स्वीकृत किया है वो जो घटना फेमस घटना घटना हम सबको पता है किंतु घटना के पीछे जो महाराज जी का जो विश्लेषण है वह सब अभी हम कल यानी कि फिर नेक्स्ट क्लास में मंडे से देखेंगे आज यहीं तक ओम शांति शांति शांति हरि ओमस श्री राम कृष्ण मस्तु मस्तु यह जो आखिरी जो चार लाइन है ना कि हु डर्स मिजी लव एंड हग द फॉर्म ऑफ डेथ डांस इन डिस्ट्रक्शन डांस टू हिम द मदर कम्स अर्थात की जो यह जो कष्ट है उसको प्रेम करता है डेस मिजर लव एंड हग द फॉर्म ऑफ डेथ मृत्यु को जो वर्ण करता है मृत्यु को आलिंगन करता है और इसके बाद में है डांस इंड डिस्ट्रक्शन डांस यह जो महा तांडव नृत्य महाविनाश नृत्य जो मां काली कर रही है उसके साथ-साथ में जो कोई साथ-साथ में मिलकर नृत्य करता है तो हिम द मदर कम्स यानी कि यहां पर क्या है कि यह जो पहले तो पूरा एक वर्णन किया गया कि किस तरह से जगत का संहार होता है किस तरह से हमारी आशाओं का संहार होता है जगत के संहार से भी ज्यादा हम लोग तो आशा पो ण करके जो बैठे हुए हैं तो एक के बाद एक जो आघात हमारे जीवन में आते हैं तो प्रत्येक आघात के साथ-साथ में अपनी आशाओं को ठोकर लगती है तो ये आशाओं को ठोकर लगती है उसका विवरण सबसे पहले तीन-चार स्टंस में हो गया है किंतु फिर आखिरी जो स्टंस है उसमें अपना रिएक्शन है कि किस तरह से हम रिएक्ट करेंगे यदि हम बेडली रिएक्ट करते हैं हम लोग सोच लेंगे नीतिमत्ता धर्म सब बातों की बातें हैं अनीति पूर्ण जो जीवन में में जिस तरह से भी प्राप्त कर सके प्राप्त कर लो तो वोह इस मृत्यु के सामने हार गया और मृत्यु के सामने जी कर के मने वह विजय प्राप्त करके अमर कौन हो गया जिसने इस मृत्यु को वर्णन किया है जिसने इस मृत्यु को आलिंगन किया है मृत्यु के संहार के साथ में मृत्यु के संहार रूपी नृत्य के साथ में ताल से ताल मिलाकर के नृत्य कर रहा है अर्थात कि आशाओं को ही उसने तेज दिया कर्म करना बंद नहीं किया आशाओं को तज दिया यह जो फेमस लाइन है ना कर्मण्य वा हीका मा फलेश कदाच नम कर्म के ऊपर में अपना अधिकार है नहीं के फलों के ऊपर में आशाओं को छोड़ दो कर्म करना बंद मत करो तो यह जो ओरिएंटेशन होता है लाइफ में ट इ व लास्ट लाइन में कहा गया है वह कहते हैं कि आशा ही परमम दुखम नैराश्य ही परमम सुखम तो पहले तो वर्णन हो गया कि आशाओं का संहार और फिर है कि आशाओं को तग करके कर्म करते रहो यह जो स्वामी जी के जीवन में देखिए ऐसी कैसी घट कितनी घटनाएं हैं वो अल्मोड़ा जाकर के उन्होंने सोचा गुफा में जाकर के निर्विकल्प समाधि में मग्न हो जाता हूं फिर पता चला कि उनकी बहन ने आत्महत्या की है यदि किसी के पास में भी यह समाचार आएगा कि मेरी प्यारी बहना के ऊपर में अत्याचार हुआ उसको आत्महत्या करनी पड़ी तो हृदय के ऊपर में क्या बीतेगा और कोई होता तो साला जाकर के उसके जो पति है या जिन लोगों ने उसके ऊपर अत्याचार किए उसका गला काट के आता ऐसा कितना ही बार होता है जगत में किंतु स्वामी जी ने पूरे ही ट्रांसडूसिन की जो यह हालत है तो भारत की यह करोड़ों करोड़ों बहना है मेरी उनकी क्या हालत होगी उनके कल्याण के लिए कुछ करना चाहिए टू ट्रांस द सिचुएशन ट इज द रियल एसेंस ऑफ स्पिरिचुअल लाइफ व्ट मेक्स बुद्धा बुद्धा वो एक लड़का आया स्वामी जी के पास में साधु होना है तो स्वामी जी ने क्या कहा बुद्ध के पास में तो राज्य था त्याग करने के लिए तुम्हारे पास में क्या है पहले कुछ तो होना चाहिए त्याग करने के लिए बाद में त्याग करो व जो पेट वैरागी व जो ठाकुर कहते हैं कि एक लड़का उसके पास में पैसा नहीं था तो साधु होकर के काशी चला गया फिर कुछ दिनों के बाद में पतरा आया कि मुझे यहां पर नौकरी मिल गई है अभी तुम लोग चिंता मत करो फिर नौकरी में से पैसा मिला तो एक सोने की अंगूठी बना कर के पहन [हंसी] ली स्वामी जी के पास में त्याग करने के लिए राज्य था व चाहे तो पूरा राज्य खड़ा कर सकते थे दैट इज द डिफरेंस व जो अल्मोड़ा से जो उनकी यात्रा चालू हुई थी ना अ लिटरली जो ही डिसेंडेड टू द प्लेंस मने पहाड़ से जो नीचे आए और फिर सोचा कि मैं पूरे भारत में भ्रमण करूंगा भारत की परिस्थिति देखूंगा फिर उन्होंने ठीक किया कि अमेरिका जाएंगे फिर यह जो आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च राम कृष्ण संघ की स्थापना यह जो पुराण का जीवन चक्र था ट उसका जो मुझे लगता है ना कंक्लूजन वहां पर क्षेर भवानी में आया था उनके मन में था कि मैं मां के मंदिर की रक्षा करूंगा तब मां ने कहा कि मेरी रक्षा करने वाले तुम कौन हो यह संहार जो यह जो मंदिर टूटा वह भी मेरी इच्छा से मंदिर बना था वह भी मेरी इच्छा से फिर से बनेगा तो वह मेरी इच्छा से ही बनेगा तो वह जो कर्तृत्व जो था स्वामी जी का कि नहीं मुझे यह करना पड़ेगा यह मेरा करना कर्तव्य है मुझे लगता है वहां पर समाप्त हो गया उसके बाद में जैसे वह जो मोमेंटम के साथ में गाड़ी चलती है ना जैसे आप गाड़ी चलाते हैं वह तो इंजन बंद कर दे थोड़ा समय तो गाड़ी चलेगी जब तक वोह उसका मोमेंटम खत्म नहीं हो जाता तो मुझे लगता है कि वह फिर कर्म का मोमेंटम ही चला था कर्म का जो मोटिव था मुझे लगता है वहा खिर भवानी में समाप्त हो गया था स्वामी जी का वो जो अल्मोड़ा से जो यात्रा चालू हुई स्वामी जी की ट उसकी समाप्ति वहां पर खीर भवानी में आई यह पूरा सर कल कंप्लीट हो गया और अल्मोड़ा से क्यों पहले क्यों नहीं क्योंकि देखिए कि पहली जितनी भी यात्राएं थी या अल्मोड़ा तक जाने तक स्वामी जी के मन में था कि मैं हिमालय जाऊंगा बस जब ध्यान साधना में डूब जाऊंगा व फिर और कुछ नहीं किंतु वहां पर अल्मोड़ा वाज द फर्स्ट टाइम कि उनका जो लार्जर मिशन है विश्व में उनको जो कार्य करना है उसका जो प्रथम आभास वह उनको लगता है कि अल्मोड़ा में हुआ होगा मैंने दोनों तरीके से प्रारंभ भी उत्तर भारत में हुआ अंत भी वही दोनों हिमालय दोनों भी हिमालय के साथ में संलग्न स्थान अलमाड़ा की गुफा में व तपस्या कर रहे थे वहां पर यह उनको समाचार मिला था अपनी बहन का मुझे पता नहीं मुझे देख मैं कभी गया नहीं हूं वहां पर इसलिए मुझे पता नहीं देखना पड़ेगा अल्मोड़ा मायावती कहीं नहीं गया व वोह जगह हमको पता है क्या कि उन्होंने कहां तपस्या की है आप जो बता रहे हैं ना द आप जो बता रहे हैं वहां पर स्वामी जी को वह अनुभूति हुई कि मैक्रो कजम और माइक्रो कजम एक है वह एक दूसरी घटना है और जिस गुफा में बैठ करर के स्वामी जी ध्यान कर रहे थे वो दैट इज वो दूसरी घटना है दोनों अल्मोड़ा के ही आसपास की घटनाएं है किंतु दोनों एक है ऐसा जरूरी नहीं है मुझे नहीं लगता कि दोनों एक होगी दो अलग-अलग जगह है घटना भी अलग है लोकेशन भी अलग है इतना मुझे पता है अभी मुझे लोकेशन पता नहीं हां किंतु किंतु एगजैक्टली वो गुफा जहां पर स्वामी जी ध्यान कर रहे थे जहां पर स्वामी जी को यह समाचार मिला अपनी बहन का वो गुफा एगजैक्टली कहां पे है वह शायद हमको पता भी होगा नहीं होगा मुझे पता नहीं वो किसी को मुझे पूछना पड़ेगा जनरली हम बता सकते हैं कि इस एरिया में किंतु एग्जैक्ट लोकेशन जैसे मैक्रो कजम माइक्रो कजम वाला एग्जैक्ट लोकेशन हमको पता है किंतु यह ध्यान कर रहे थे कहां पे मुझे नहीं लगता कि हमको एग्जैक्ट लोकेशन पता हो क्योंकि मैंने कभी पढ़ा नहीं है इसके बारे में और स्वामी जी की मेधा उसमें भी तो है ना कि इस पूरे वर्णन को उन्होंने फॉरेनर्स के सामने उनकी भाषा में उनके कल्चरल कांटेक्ट में प्रस्तुत किया य इवोल्यूशन फिर यह कॉस्मोलॉजी एस्ट्रोनॉमी मॉडर्न फिजिक्स ये इस लैंग्वेज में उन्होंने प्रस्तुत किया जो कि आजकल इवन हमारे जैसे लोग मैं यहां पर क्यों आया मैं स्वामी जी को पढ़ के आया हूं मुझे पता भी नहीं था टीसी में जाने से पहले वेदांत बोलकर कोई चीज है सुना था नाम स्वामी जी को पढ़ा है तो सुना ही होगा किंतु ना ही इंटरेस्ट था ना ही आईडिया था कुछ टीसी में जाकर पता चला भाई इसमें इतना डेप्थ है तो हम जैसे आज की जनरेशन को यदि कैप्चर करना है तो आप ट्रेडिशनल वेदांत की भाषा में बात करेंगे तो वह इतना इफेक्टिव नहीं होगा जितना इफेक्टिव आज को आज की भाषा में आज के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने से होगा अभी भगवान बुद्ध ने पाली में उपदेश दिया संस्कृत में नहीं दिया तो बहुत सारे लोग कहते हैं बुद्ध को हिंदू धर्म से अलग निक था वो बात नहीं थी जन साधारण तक पहुंचना था बाकी उपनिषद में सब कुछ है अहम ब्रह्मास्मि बोल देने से ही धार्मिक जीवन का आपको सर्वोच्च सार मिल गया उसके बाद में है क्या फिर अभी जैसे ठाकुर कहते हैं अर्जुन को कृष्ण पर इतना विश्वास है मतलब ठाकुर कहते हैं कि गुरु पर विश्वास कैसा होना चाहिए अर्जुन को इतना विश्वास है अपने सखा कृष्णा के ऊपर में कृष्णा कहते हैं देखो आकाश में से पंखी उड़े जा रहे हैं नहीं है फिर भी अर्जुन कहता है हां वो पंखी उड़ के जा रहे हैं ष्ण उ ने बोला तो उसको सही सही पंखी दिखने भी लगा अभी जो शरत महाराज कहते हैं कि क्या अर्जुन कृष्ण की चमचागिरी करता था वह दुर्बल था और कृष्णा को बहुत ज्यादा भक्ति करता था ऐसा नहीं श्रद्धा थी तो श्रद्धा के माध्यम से कृष्ण ने कहा पंखी है तो पंखी दिखने लगा नहीं है फिर भी सो अभी क्या है आज की जनरेशन को गुरु हजार बोल देगा कि तत्व मसी श्वेत के तो कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला क्यों क्योंकि हमको ना ऐसा कोई है नहीं हमारे सामने जिनके ऊपर में अपनी इतनी श्रद्धा हो अंधश्रद्धा नहीं दुर्बलता जनित अंधविश्वास नहीं किंतु सही सही श्रद्धा वह आज के जमाने में अपनी नहीं है और नहीं है बोलकर के ही क्या होता है कि हमको ये अपने से साधना करके पूरा रास्ता व फॉलो करना पड़ता है अपने पास में वह गुरु पर श्रद्धा करके इमीडिएट गुरु ने कहा कि ब्रह्मज्ञान के बारे में जैसे ही महावाक्य गुरु ने सुनाया हमको वो हो गया ज दैट ऑप्शन इज नॉट देर बिफोर अस